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पंजाब किंग्स की कप्तानी का मुश्किल ‘कांटों भरा ताज’, 17 धुरंधर हुए असफल

चंडीगढ़  इंडियन प्रीमियर लीग यानी आईपीएल के पहले सीजन से अब तक टूर्नामेंट खेलते हुई आ रहीं दो टीमें ऐसी हैं, जो चैंपियन नहीं बन पाई हैं। इनमें एक टीम तो ऐसी है, जिसने 17 कप्तान बदल दिए हैं, लेकिन खिताबी सूखा समाप्त नहीं हुआ है। दो बार टीम फाइनल तक जरूर पहुंची है, लेकिन फिर भी खिताब से दूर रह गई है। 2014 के बाद 2025 में टीम आईपीएल के फाइनल में पहुंची, लेकिन फिर भी खिताब दूर है। दूसरी टीम दिल्ली कैपिटल्स है, जो 2008 से खेल रही है, लेकिन खिताब नहीं जीता है। दोनों का नाम भी बदल गया है। पहले नाम पंजाब किंग्स का किंग्स इलेवन पंजाब था, जबकि दिल्ली कैपिटल्स का दिल्ली डेयरडेविल्स। हालांकि, दिल्ली ने कम कप्तान बदले हैं। पंजाब किंग्स की बात करें तो इस फ्रेंचाइजी ने अब तक 18 सीजन में 9 भारतीय और 8 विदेशी खिलाड़ियों समेत कुल 17 खिलाड़ियों को कप्तानी सौंप दी है, लेकिन टीम ट्रॉफी नहीं जीत पाई है। हालांकि, 3 खिलाड़ियों को तो सिर्फ नाम मात्र के लिए कप्तानी मिली है, क्योंकि उन्होंने एक-एक मैच में ही कप्तानी की है। इसके अलावा दो कप्तान ऐसे हैं, जिन्होंने 6 और 8 मैचों में कप्तानी है, लेकिन बाकी के कप्तानों ने 10 से ज्यादा मैचों में पंजाब की टीम की कप्तानी की हुई है। महेला जयवर्धने, वीरेंद्र सहवाग और जितेश शर्मा ने एक-एक मैच में कप्तानी की है, जबकि डेविड मिलर ने 6 और मुरली विजय ने 8 मैचों में टीम का नेतृत्व किया है। पंजाब किंग्स के अब तक के 17 कप्तानों में सरपंच श्रेयस अय्यर एकमात्र कप्तान हैं, जिनका विनिंग पर्सेंटेज 60 से ज्यादा का है। युवराज सिंह इस फ्रेंचाइजी के पहले कप्तान थे, लेकिन 2008 से 2009 तक कप्तानी उन्होंने की, लेकिन टीम खिताब से कोसों दूर रही। पंजाब किंग्स के कप्तानों की लिस्ट 1. युवराज सिंह (29 मैच 17 जीत) 2. कुमार संगकारा (13 मैच 3 जीत) 3. महेला जयवर्धने (1 मैच) 4. कुमार संगकारा (34 मैच 17 जीत) 5. डेविड हसी (12 मैच 6 जीत) 6. जॉर्ज बेली (35 मैच 18 जीत) 7. वीरेंद्र सहवाग (1 मैच) 8. डेविड मिलर (6 मैच 1 जीत) 9. मुरली विजय (8 मैच 3 जीत) 10. ग्लेन मैक्सवेल (14 मैच 7 जीत) 11. आर अश्विन (28 मैच 12 जीत) 12. केएल राहुल (27 मैच 11 जीत) 13. मयंक अग्रवाल (14 मैच 7 जीत) 14. शिखर धवन (17 मैच 6 जीत) 15. सैम करन (11 मैच 5 जीत) 16. जितेश शर्मा (1 मैच) 17. श्रेयस अय्यर (17 मैच 10 जीत)

पंजाब निवेशक सम्मेलन: पंजाब पोर्ट से दूर, प्लाईवुड उद्योग ने चीन को चुनौती देने के लिए सब्सिडी की अपील की

चंडीगढ़  पोर्ट से दूर होने के कारण पंजाब के उद्योगपति निर्यात में चीन का मुकाबला नहीं कर पा रहे हैं। इस कारण उद्योगपतियों ने सरकार से सब्सिडी मांगी है ताकि प्लाईवुड उद्योग के आगे विस्तार में मदद मिल सके।पंजाब निवेशक सम्मेलन के दौरान फर्नीचर और प्लाईवुड उद्योग पर सत्र के दौरान उद्योगपतियों ने स्पष्ट किया कि देश में प्लाईवुड की मांग को पूरा करने में उद्योग समक्ष है। अब उद्योग के आगे विस्तार के लिए सिर्फ निर्यात ही मात्रा  क्षेत्रीय समिति ने भी नई नीति में सिफारिश की है कि निर्यात इकाई को माल ढुलाई सब्सिडी के रूप में वित्तीय सहायता प्रदान की जानी चाहिए जो कि परिवहन लागत का 1 प्रतिशत और प्रति वर्ष अधिकतम 30 लाख रुपये तक होनी चाहिए। उद्योगपति अमरजीत सिंह सोहल ने कहा कि चीन में सभी प्लाईवुड उद्योग पोर्ट के पास हैं। इस कारण निर्यात में उन्हें काफी फायदा होता है जबकि पंजाब में स्थिति उलट है। यही कारण है कि परिवहन लागत को वहन करने में उद्योगपति समक्ष नहीं हैं। गुजरात के कच्छ जिले के कांडला बंदरगाह तक प्लाईवुड ले जाने के लिए उद्योगपतियों को सब्सिडी चाहिए ताकि निर्यात को बढ़ावा दिया जा सके। भविष्य में प्लाईवुड उद्योग के पास निर्यात ही एकमात्र विकल्प है। धान के चक्कर से निकालने के लिए कृषि वानिकी को बढ़ावा देने की जरूरत उद्योगपतियों ने कहा कि पंजाब के किसानों को धान और गेहूं के चक्कर से निकालने के लिए कृषि वानिकी को बढ़ावा देने की जरूरत है। पॉपुलर और सफेदा लगाने से ही किसान और उद्योग दोनों खुशहाल हो सकते हैं। उद्योग नीति को लेकर बनाई गई क्षेत्रीय समिति के चेयरमैन नरेश तिवारी ने कहा कि पहले कृषि वानिकी में किसानों की आय में समय लगता था लेकिन अब कई विकल्प मौजूद हैं। वह साथ में हल्दी समेत अन्य फसलों की खेती कर सकते हैं जिससे उनकी आय में बढ़ोतरी होती जाएगी। प्लाईवुड उद्योग के सामने ये बड़ी चुनौतियां सत्र में सामने आया कि हरियाणा, उत्तर प्रदेश व गुजरात समेत सभी राज्यों में प्लाईवुड उद्योग का बड़े सतर पर विस्तार हो रहा है जिसका मुकाबला करना उद्योगपतियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। हरियाणा में 400 से ज्यादा फैक्टरी एक जगह लग चुकी हैं। नरेश तिवारी ने कहा कि हालांकि वह तरह की चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं लेकिन उन्होंने मार्केट फीस वसूली का विरोध किया। इस पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए क्योंकि मार्केट फीस लगाने से प्लाईवुड उद्योग सबसे अधिक प्रभावित है। आपूर्ति में भारत में नंबर 1 बन सकता पंजाब पर्यावरण सचिव प्रियांक भारती ने कहा कि प्लाईवुड की आपूर्ति में पंजाब देश में नंबर सकता है जिसके लिए सरकार को उद्योगपतियों के सहयोग की जरूरत है। सरकार कई कदम उठा रही है। नए ट्री एक्ट को ग्रामीण क्षेत्रों में फिलहाल नहीं लगाया जाएगा क्योंकि यह कृषि वानिकी में बड़ा वादा सकता था। इससे किसानों को कटाई से पहले अनुमति के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता। यही कारण है कि ग्रामीण क्षेत्र को इस एक्ट से बाहर रखा गया है।    

पंजाब में मौसम का खतरा! 13 जिलों के लिए SDMA का 3 घंटे का अलर्ट जारी

अमृतसर पंजाब में आज अचानक अचानक लोगों के फोन में अलर्ट मैसेज आने लगे हैं। बता दें कि पंजाब स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी ने अगले 3 घंटों के लिए मौसम को लेकर चेतावनी जारी की है। इस संबंध में लोगों को मैसेज भेजकर अलर्ट किया गया है। अथॉरिटी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार बरनाला, बठिंडा, फरीदकोट, फिरोजपुर, होशियारपुर, जालंधर, कपूरथला, लुधियाना, मलेरकोटला, मानसा, मोगा, संगरूर, शहीद भगत सिंह नगर में मौसम खराब रहने की संभावना है।   इन जिलों में बिजली चमकने, गरज और तेज हवाएं चल सकती हैं। प्रशासन ने लोगों को अलर्ट रहने की सलाह दी है। अथॉरिटी ने साफ किया है कि किसी भी तरह की इमरजेंसी होने पर लोग तुरंत 112 पर कॉल कर सकते हैं। इसके साथ ही पंजाब SDMA ने अगले 24 घंटों में अमृतसर, बरनाला, गुरदासपुर, होशियारपुर, जालंधर, कपूरथला, लुधियाना, संगरूर में बिजली, बारिश, ओले, तेज हवाएं और गरज के साथ बारिश होने की संभावना जताई है। 

पंजाब में महाशिवरात्रि पर मंदिरों में सुबह से उमड़ा आस्था का सैलाब

फाजिल्का. महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर रविवार सुबह से ही फाजिल्का शहर के प्रमुख मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सिद्ध श्री हनुमान मंदिर, शिव भवन, श्री राम संकीर्तन मंदिर और श्री बालाजी धाम समेत दर्जनों मंदिरों में श्रद्धालु पहली पूजा के लिए तड़के ही पहुंचने लगे। चारों पहर की विशेष पूजा को लेकर शहर में धार्मिक माहौल चरम पर है, वहीं हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रही कांवड़ यात्रा का भी दोपहर बाद शहर में पहुंचने का कार्यक्रम है। महाशिवरात्रि पर फाजिल्का शहर पूरी तरह शिवभक्ति के रंग में रंगा नजर आया। तड़के चार बजे से ही विभिन्न मंदिरों में भक्तों का आना शुरू हो गया और सूर्योदय तक मंदिरों के बाहर लंबी कतारें लग गईं। सिद्ध श्री हनुमान मंदिर, शिव भवन, श्री राम संकीर्तन मंदिर और श्री बालाजी धाम में सुबह की विशेष आरती के दौरान ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। श्री राम संकीर्तन मंदिर के पंडित चिमनलाल शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि पहला पहर सुबह 4 बजे से 7 बजे तक, दूसरा पहर सुबह 7 बजे से 10 बजे तक, तीसरा पहर दोपहर 1 बजे से 4 बजे तक व चौथा पहर शाम 7 बजे से रात 10 बजे तक होगा। उन्होंने बताया कि शिवलिंग का अभिषेक, पंचामृत स्नान, रुद्राभिषेक और बिल्वपत्र अर्पित करने का क्रम पूरे दिन जारी रहेगा। शहर में जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा सेवा स्टॉल लगाए गए हैं, जहां पानी, जूस, फलाहार और प्रसाद की व्यवस्था की गई है। महिलाओं की संख्या भी उल्लेखनीय रही, जो व्रत रखकर पहले पहर की पूजा के लिए सुबह ही मंदिरों में पहुंच गईं। दोपहर बाद हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे कांवड़ संघ के विभिन्न दलों के फाजिल्का पहुंचने की उम्मीद है। कांवड़िए गंगा से लाया गया पवित्र जल शहर के प्रमुख शिवालयों में स्थापित शिवलिंगों पर अभिषेक करेंगे। मंदिर समितियों ने सुरक्षा, सफाई और भीड़ प्रबंधन के लिए स्वयंसेवकों की विशेष तैनाती की है, जबकि प्रशासन ने भी शहर में आवश्यक मार्ग व्यवस्थाओं और वाहनों के नियंत्रण के लिए टीमों को सक्रिय रखा है।

फरवरी-मार्च में शुरू होगा SIR, पंजाब सहित 12 राज्यों में 6.59 करोड़ वोटर नामों की जांच

लुधियाना/चंडीगढ़   पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूचियों को पूरी तरह पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने के लिए निर्वाचन आयोग ने कमर कस ली है। राज्य में फरवरी और मार्च के महीने में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) अभियान चलाया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य मतदाता सूचियों से फर्जी नाम हटाना और योग्य मतदाताओं के विवरण को अपडेट करना है। CEO पंजाब के सख्त निर्देश : सुधारें 'इलेक्टोरल मैपिंग परसेंट' पंजाब के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर (CEO) ने राज्य के सभी जिला चुनाव अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिन पोलिंग बूथों पर 'इलेक्टोरल मैपिंग परसेंट' 50 फीसदी से कम है, वहां तत्काल सुधार किया जाए। क्या है इलेक्टोरल मैपिंग परसेंट? इसका अर्थ है कि मतदाता सूची में दर्ज लोगों का विवरण (नाम, पता, उम्र, फोटो) डिजिटल सिस्टम से कितना सही तरह से जुड़ा और सत्यापित है। यह प्रतिशत जितना अधिक होगा, मतदाता सूची उतनी ही सटीक मानी जाएगी। SIR के लिए पंजाब CEO ने 2 बड़ी हिदायतें दीं..     इलेक्टोरल मैपिंग परसेंट सुधारें: CEO पंजाब ने जिला चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जिन पोलिंग बूथों पर इलेक्टोरल मैपिंग परसेंट 50 फीसदी से कम है उनकी मतदाता सूचियों की गलियों तो ठीक करवाएं और उनका मैपिंग परसेंट सुधारें। SIR से शुरू होने से पहले मतदाता सूचियों को ज्यादा से ज्यादा करेक्ट करवा दें।     BLO को 5 दिन का टाइम: BLO आज यानी 30 जनवरी से 3 फरवरी तक मतदाता सूचियों की गलतियों को ठीक करेंगे। इसके लिए उन्हें पांच दिन के लिए उनके डिपार्टमेंट से रिलीव कर दिया गया है। इन पांच दिनों में बीएलओ उन गलतियों को ठीक करेंगे जो उन्होंने रंगीन मतदाता सूची बनाते समय की थी। BLO ने कुछ मतदाताओं की ब्लैक एंड वाइट फोटो लगाई तो कुछ की फोटो सूचियों में ब्लर हैं। इसके अलावा कुछ फोटो तिरछी लगी हैं। नाम व अन्य जानकारियां भरते समय टाइपिकल गलतियां हैं। बीएलओ को इन पांच दिनों में ये सभी गलतियां दूर करनी हैं। इस बारे में राष्ट्रीय चुनाव आयोग (ECI) ने एक दिन पहले सभी राज्यों से वर्चुअल मीटिंग में पंजाब में SIR फरवरी मार्च में शुरू करने की बात कही। केंद्रीय चुनाव आयोग की हिदायत के बाद सीईओ पंजाब ने मतदाता सूचियों की गड़बड़ी को ठीक करने के आदेश दे दिए हैं। इससे पहले 12 राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों में SIR का पहला फेज कंप्लीट हो चुका है। जिसमें 6.59 करोड़ वोटरों के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हट गए हैं। इलेक्टोरल मैपिंग परसेंट क्या होता है, जानिए इलेक्टोरल मैपिंग परसेंट से पता चलता है कि किसी क्षेत्र की मतदाता सूची में से कितने मतदाताओं का विवरण सही तरीके से वैरिफाइड और डिजिटल सिस्टम से जोड़ा जा चुका है। इसमें मतदाता का नाम, पता, उम्र, फोटो और संबंधित मतदान केंद्र की सही मैपिंग शामिल होती है। यह प्रतिशत जितना अधिक होता है, मतदाता सूची उतनी ही ठीक और भरोसेमंद मानी जाती है। कम इलेक्टोरल मैपिंग प्रतिशत का अर्थ है कि सूची में गलतियां मौजूद हैं। इसी कारण चुनाव आयोग समय-समय पर SIR करवाकर मतदाता सूचियों को सुधारता है। मैपिंग परसेंट बढ़ाने पर फोकस लुधियाना के अतिरिक्त जिला चुनाव अफसर व ADC राकेश कुमार ने कहा कि SIR का उद्देश्य नए योग्य मतदाताओं के नाम जोड़ना, मृत या ट्रांसफर हो चुके मतदाताओं के नाम हटाना और डुप्लीकेट एंट्री को साफ करना है। अभी मैपिंग परसेंट बढ़ाने पर फोकस किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूचियों में जो टाइपिंग की गलतियां हैं या फिर फोटो सही नहीं लगे हैं उनको ठीक किया जा रहा है। 12 राज्यों में SIR हुआ, वोटर्स की ड्राफ्ट लिस्ट में 13% वोटर घटे 2 राज्यों में SIR का पहला फेज खत्म हो गया। वोटर लिस्ट को दुरुस्त करने के लिए 28 अक्टूबर, 2025 से शुरू हुई मुहिम 2 महीने 11 दिन चली। SIR से पहले इन राज्यों में 50.97 करोड़ मतदाता थे। वैरिफिकेशन के बाद 44.38 करोड़ रह गए। करीब 6.59 करोड़ मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हट गए हैं। यह 12 राज्यों के कुल मतदाताओं का 12.93% है, यानी हर 100 वोटर्स पर करीब 13 नाम कट गए। हालांकि ये फाइनल लिस्ट नहीं है, जिन लोगों के नाम कटे हैं, वे दावे-आपत्तियां कर सकते हैं। फॉर्म 6 या 7 भरकर नाम जुड़वा सकते हैं। BLO को मिला 5 दिन का विशेष जिम्मा मतदाता सूचियों में सुधार के लिए बीएलओ (BLO) को उनके मूल विभागों से 5 दिनों के लिए रिलीव किया गया है। 3 फरवरी तक चलने वाले इस अभियान में बीएलओ गलतियों को ठीक करेंगे। फोटो सुधार : ब्लैक एंड व्हाइट, धुंधली (Blur) या तिरछी लगी फोटो को बदला जाएगा। टाइपिंग त्रुटियां : नाम, पिता का नाम या पते में हुई स्पेलिंग की गलतियों को दुरुस्त किया जाएगा। रंगीन सूचियां : नई रंगीन मतदाता सूचियों में आ रही तकनीकी दिक्कतों को दूर करना। फर्जी वोटों पर चलेगी कैंची SIR प्रक्रिया के दौरान मृत व्यक्तियों, शहर छोड़कर जा चुके लोगों और एक ही व्यक्ति के दो जगह बने (डुप्लीकेट) वोटों को हटाया जाएगा। इससे चुनाव के दौरान होने वाली धांधली की गुंजाइश खत्म होगी। मतदाता खुद भी कर सकते हैं जांच निर्वाचन आयोग ने आम जनता से भी अपील की है कि वे आयोग की आधिकारिक वेबसाइट electoralsearch.eci.gov.in पर जाकर अपना नाम चेक करें। यदि नाम नहीं है, तो फॉर्म-6 भरकर आवेदन करें। यदि विवरण में गलती है, तो फॉर्म-8 के जरिए सुधार करवाएं। अतिरिक्त जिला निर्वाचन अधिकारी राकेश कुमार के अनुसार, वर्तमान में पूरा फोकस टाइपिंग और फोटो संबंधी त्रुटियों को सुधारकर मैपिंग प्रतिशत बढ़ाने पर है, ताकि आगामी चुनावों के लिए एक विश्वसनीय डेटाबेस तैयार किया जा सके। 1. राजस्थान: 41.85 लाख वोटर्स के नाम कटे राजस्थान में SIR की ड्राफ्ट लिस्ट में 41.85 लाख वोटर्स के नाम काटे गए हैं। ड्राफ्ट लिस्ट से पहले राज्य में 5.48 करोड़ थे, ड्राफ्ट लिस्ट में 5.06 करोड़ वोटर्स का नाम शामिल किया गया। काटे गए वोटर्स का प्रतिशत 7.6 है, यानी हर 100 से में लगभग 8 वोटर्स का नाम हटाया गया है। हालांकि, 41.85 लाख वोटर्स में से 8.75 लाख मृत पाए गए, 3.44 लाख डुप्लीकेट या फर्जी थे, तो वहीं 29.6 लाख वोटर्स शिफ्ट, लापता और अन्य थे। 2. … Read more

पंजाब सीएम का ऐलान, नांदेड़ साहिब को पवित्र शहर का दर्जा देने की मांग महाराष्ट्र सरकार से

चंडीगढ़ महाराष्ट्र के नांदेड़ में तख़्त सचखंड श्री हज़ूर साहिब में श्रद्धा के साथ माथा टेकते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि उनकी सरकार नांदेड़ साहिब को पवित्र शहर का दर्जा देने की मांग महाराष्ट्र सरकार के समक्ष उठाएगी। उन्होंने कहा कि यह पवित्र नगर सिखों और विशेष रूप से समूची मानवता के लिए अत्यधिक आध्यात्मिक महत्व रखता है। यह स्मरण कराते हुए कि पंजाब सरकार पहले ही श्री अमृतसर साहिब, श्री आनंदपुर साहिब और तलवंडी साबो को पवित्र शहर घोषित कर चुकी है, मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार गुरु साहिबानों के दर्शन के व्यापक प्रसार के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कलगीधर पातशाह जी के पवित्र स्थान पर भी माथा टेका और इस धार्मिक स्थल के प्रबंधकों से मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने इस पवित्र स्थल पर नतमस्तक होने पहुँचे श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों की भारी भीड़ भी देखी, जो पंथ, उसकी ऐतिहासिक संस्थाओं और उनसे प्रेरणा लेने वाले लोगों के बीच गहरे संबंधों को दर्शाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नांदेड़ साहिब न केवल सिखों के लिए बल्कि समूची मानवता के लिए पवित्र स्थल है, क्योंकि दसवें सिख गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा इस पवित्र नगरी में व्यतीत किया था। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि पंजाब सरकार नांदेड़ साहिब को पवित्र शहर का दर्जा देने की मांग को महाराष्ट्र सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाएगी, जो श्री गुरु गोबिंद सिंह जी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने आगे कहा कि हाल ही में राज्य सरकार द्वारा नौवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी—जिन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर किए—का 350वां शहीदी दिवस गहरी श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। पिछले वर्ष लिए गए एक महत्वपूर्ण निर्णय को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नवंबर में श्री गुरु तेग बहादुर जी के शहीदी दिवस के अवसर पर पंजाब सरकार ने तीन शहरों, जहाँ सिखों के तख़्त साहिब स्थित हैं, को पवित्र शहर घोषित किया था। उन्होंने कहा कि वाल्ड सिटी अमृतसर, तलवंडी साबो और श्री आनंदपुर साहिब को पवित्र शहर का दर्जा देने संबंधी आधिकारिक अधिसूचना पहले ही जारी की जा चुकी है, जिससे विश्व भर की संगतों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी हुई है। उन्होंने कहा कि इसी तर्ज़ पर महाराष्ट्र सरकार को भी नांदेड़ साहिब को पवित्र शहर का दर्जा देने की घोषणा करनी चाहिए, जिसके लिए पंजाब सरकार हर संभव प्रयास करेगी। मुख्यमंत्री ने नांदेड़ साहिब में स्थित पंजाब भवन के पूर्ण कायाकल्प की भी घोषणा की। भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा निर्मित पंजाब भवन को श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं से अपग्रेड किया जाएगा। इसके साथ ही नांदेड़ में श्रद्धालुओं के लिए वेरका दुग्ध उत्पादों की आपूर्ति को और अधिक सुचारु बनाया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस पवित्र स्थल के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की हर संभव सुविधा सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। देश के लिए पंजाबियों के योगदान पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाबियों ने स्वतंत्रता संग्राम, देश को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने तथा भारत की एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा में शानदार भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि सीमाओं की रक्षा की बात हो या बलिदान देने की, पंजाबी हमेशा सबसे आगे रहते हैं। यह गर्व की बात है कि किसी भी आपदा के समय पंजाबी अक्सर रेड क्रॉस जैसी संस्थाओं से भी पहले जरूरतमंदों की सेवा के लिए मौके पर पहुँच जाते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पंजाब सरकार का कर्तव्य है कि वह युवा पीढ़ियों के लिए महान गुरु साहिबानों की गौरवशाली विरासत को संजोकर रखे। उन्होंने कहा कि हम महान गुरु साहिबानों के पदचिह्नों पर चल रहे हैं, जिन्होंने मानवता को अत्याचार, दमन और अन्याय के विरुद्ध खड़े होना सिखाया और ‘सरबत दा भला’ का संदेश दिया। उन्होंने आगे कहा कि इसी प्रतिबद्धता के तहत पंजाब सरकार ने हाल ही में श्री आनंदपुर साहिब में श्री गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहीदी दिवस मनाया। उन्होंने कहा कि हमारा एकमात्र उद्देश्य युवा पीढ़ियों को गुरु साहिबानों के जीवन, दर्शन और मानवता की रक्षा के लिए दी गई उनकी महान कुर्बानियों से जोड़ना है। इस दौरान तख़्त श्री हज़ूर साहिब में मुख्यमंत्री ने प्रदेश की प्रगति, विकास और लोगों की खुशहाली के लिए अरदास की। उन्होंने कहा कि तख़्त श्री हज़ूर साहिब सिख धर्म के पाँच सर्वोच्च स्थलों में से एक है, जो समुदाय के लिए आध्यात्मिक, दिव्य और नैतिक मूल्यों का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि सिखों के अन्य चार तख़्त—अमृतसर में श्री अकाल तख़्त साहिब, श्री आनंदपुर साहिब में तख़्त श्री केशगढ़ साहिब, तलवंडी साबो में तख़्त श्री दमदमा साहिब तथा बिहार में तख़्त श्री पटना साहिब—स्थित हैं। श्री गुरु गोबिंद सिंह जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दसवें पातशाह श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की स्थापना, मानवाधिकारों की रक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता के लिए अतुलनीय योगदान दिया तथा इन आदर्शों के लिए अपना पूरा परिवार बलिदान कर दिया। उन्होंने कहा कि गुरु साहिब ने अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण भाग नांदेड़ साहिब की पवित्र धरती पर व्यतीत किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पवित्र स्थल पर श्रद्धा और सम्मान अर्पित करने का अवसर मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि वे परमात्मा से प्रार्थना करते हैं कि उन्हें पंजाब के लोगों की और अधिक विनम्रता व समर्पण भाव से सेवा करने की शक्ति प्रदान करें। गुरुद्वारा साहिब में अरदास के उपरांत उन्होंने जाति, रंग, नस्ल और धर्म के किसी भी भेदभाव के बिना लोगों की सेवा करने तथा एक सौहार्दपूर्ण समाज के निर्माण के लिए अपनी सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दोहराया।  

मान सरकार ने दी राहत, गन्ने के लिए किसानों को मिलेगा 68.50 रुपए प्रति क्विंटल सब्सिडी

  चंडीगढ़  मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में हुई कैबिनेट बैठक विशेष रूप से किसान-कल्याण के लिए फैसले लेने पर केंद्रित रही, जिसमें कैबिनेट द्वारा निर्धारित स्टेट एग्रीड प्राइस में से 68.50 रुपए प्रति क्विंटल की सीधी सब्सिडी की मंजूरी दी गई। इससे पंजाब राज्य गन्ना किसानों को देश में गन्ने का सबसे अधिक भाव देने में लगातार अग्रणी बना हुआ है। यह फैसला मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया, जिसमें स्वास्थ्य क्षेत्र में विभिन्न सुधारों के साथ लोगों की तंदुरुस्त स्वास्थ्य संबंधी पहलकदमियों और शहरी प्रशासन में विभिन्न सुधारात्मक कदम उठाने संबंधी मंजूरियां शामिल हैं, जो पंजाब सरकार की निर्णायक और परिणाम-आधारित पहुंच को दर्शाती हैं। मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए फैसलों के बारे में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने कहा कि निजी चीनी मिलों की ओर से गन्ना किसानों को 2025-26 पिराई सीजन के लिए निर्धारित स्टेट एग्रीड प्राइस में से 68.50 रुपए प्रति क्विंटल सब्सिडी सीधे तौर पर अदा की जाएगी। उन्होंने बताया कि पंजाब पहले ही देश में गन्ने के लिए सबसे अधिक 416 रुपए प्रति क्विंटल स्टेट एग्रीड प्राइस दे रहा है, जो पिछले साल से 15 रुपए की वृद्धि दर्शाता है। यह पंजाब के गन्ना काश्तकारों को देश भर में सबसे अधिक भाव मिलना सुनिश्चित करने के साथ-साथ किसानों के लिए आय सुरक्षा को और मजबूत करेगा। जन स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती पर निरंतर ध्यान केंद्रित करते हुए मंत्रिमंडल ने ‘सीएम दी योगशाला’ प्रोजेक्ट के अधीन योग ट्रेनरों के 1,000 अतिरिक्त पदों के सृजन को भी मंजूरी दे दी है। बैठक के दौरान यह भी बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान इस पहल के लिए 35 करोड़ रुपए का बजट प्रबंध किया जाएगा, जिसका उद्देश्य एक स्वस्थ और तंदुरुस्त पंजाब का सृजन सुनिश्चित करना है। स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं को मजबूती देने के एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले में मंत्रिमंडल ने मुक्तसर जिले के गांव बादल, तरन तारन जिले के खडूर साहिब, कम्युनिटी हेल्थ सेंटर जलालाबाद और फाजिल्का जिले के टर्शियरी केयर सेंटर को बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (बीएफयूएचएस), फरीदकोट में पूरी तरह हस्तांतरित करने की मंजूरी भी दे दी है। इस हस्तांतरण से इन क्षेत्रों के निवासी यूनिवर्सिटी के उन्नत मेडिकल बुनियादी ढांचे और विशेषज्ञता का लाभ उठाकर बेहतर इलाज और जांच सेवाओं तक पहुंच सकेंगे। मंत्रिमंडल ने पंजाब मैनेजमेंट एंड ट्रांसफर म्यूनिसिपल एक्ट, 2020 की धारा 4 के अधीन निर्देशों के गठन और नोटिफिकेशन को भी मंजूरी दे दी है, जिसका उद्देश्य पंजाब सरकार के विभागों, बोर्डों, निगमों और जन क्षेत्र के अन्य संस्थानों से संबंधित म्यूनिसिपल संपत्तियों को जन उद्देश्यों के लिए हस्तांतरित करने की सुविधा प्रदान करना है। ये फैसले राज्य भर में विकास परियोजनाओं को नई गति देने के साथ-साथ जमीन के वितरण में एकरूपता सुनिश्चित करने और सरकारी जमीन के दुरुपयोग को रोकने में विशेष रूप से सहायक होंगे। संबंधित जिले के डिप्टी कमिश्नर के नेतृत्व वाली एक कमेटी आवंटन प्रक्रिया की सिफारिश करेगी, जो राज्य सरकार की मंजूरी के अधीन होगी। जमीन संसाधनों के सर्वोत्तम उपयोग के माध्यम से विकास में तेजी लाने के उद्देश्य से मंत्रिमंडल ने म्यूनिसिपल सीमाओं के अंदर सभी सरकारी-लाइसेंसशुदा परियोजनाओं के अधीन स्थित खाली छोड़े गए या उपयोग में आने वाले रास्तों या जल मार्गों (खालों) की बिक्री या एक्सचेंज के जरिए हस्तांतरण के लिए भी नीति को मंजूरी दे दी। इस नीति का उद्देश्य विकास की संभावनाओं को तलाशना और शहरी योजना के परिणामों को बेहतर बनाना है। मंत्रिमंडल ने पीएपीआरए (पंजाब किफायती संपत्ति पंजीकरण अधिनियम) लाइसेंसशुदा परियोजनाओं के लिए समय अवधि 1 जनवरी, 2026 से 31 दिसंबर, 2026 तक एक साल बढ़ाने को भी मंजूरी दे दी। यह वृद्धि प्रति एकड़ 25,000 रुपए की एक्सटेंशन फीस पर अधिकतम तीन साल की अवधि के लिए दी जाएगी और संबंधित सक्षम अधिकारियों द्वारा पहले लागू नियमों और शर्तों के अनुसार इसकी अनुमति दी जाएगी। शहरी विकास संबंधी एक अन्य फैसले में मंत्रिमंडल ने जनवरी 2026 के बाद नीलामी के लिए रखी जाने वाली प्रस्तावित संपत्तियों के लिए अतिरिक्त सतही क्षेत्र अनुपात के खर्च को निर्धारित करने के लिए उपयोग किए जाने वाले फॉर्मूले को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही 20 फरवरी, 2025 को अधिसूचित ई-ऑक्शन नीति 2025 के पैरा 10.2 में संशोधनों को भी मंजूरी दी गई, जिससे भविष्य में विकास प्राधिकरणों द्वारा नीलाम की जाने वाली सभी श्रेणियों की संपत्तियों पर लागू संशोधित उपबंध बनाए गए। मंत्रिमंडल ने नियम 6ए शामिल कर पंजाब सिविल सर्विसेज (सेवा की सामान्य शर्तें) नियम, 1994 में संशोधनों को भी मंजूरी दे दी। संशोधन के अनुसार, न्यूनतम शैक्षिक और अन्य योग्यताओं सहित योग्यता मापदंड निर्धारित करने की अंतिम तिथि आवेदन फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि होगी, जब तक कि संबंधित सेवा नियमों में विशेष रूप से कोई अन्य तिथि निर्धारित न की गई हो। फसली विविधता को प्रोत्साहित करने के लिए एक अग्रगामी कदम के तहत मंत्रिमंडल ने पंजाब के बागवानी क्षेत्र को और मजबूत करने के लिए जापानी तकनीक पेश करने हेतु जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी के साथ भागीदारी को भी मंजूरी दी। यह भागीदारी बागवानी विकास, कोल्ड चेन बुनियादी ढांचे, जल प्रबंधन और हुनर विकास पर केंद्रित होगी, जिसका उद्देश्य राज्य की अर्थव्यवस्था में बागवानी क्षेत्र के योगदान को दोगुना करना है।

पंजाब में कोहरे की आड़ में सक्रिय पाक ड्रोन बने BSF की चुनौती

गुरदासपुर. पाकिस्तानी तस्करों द्वारा घने कोहरे का फायदा उठाकर भारतीय सीमा में भेजे जा रहे ड्रोन एक बार फिर बीएसएफ, पंजाब पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती बन गए हैं। बीते वर्ष दिसंबर तक पंजाब की 553 किलोमीटर अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बीएसएफ ने लगभग 300 ड्रोन पकड़े थे, जिनमें गुरदासपुर सेक्टर की 134 किलोमीटर सीमा से सबसे अधिक गतिविधि देखी गई। इसके साथ बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ और हथियार भी बरामद किए गए थे। वीरवार रात कड़ाके की ठंड और कोहरे के बीच ड्रोन गतिविधि दो स्थानों पर दर्ज हुई, एक बीएसएफ की 27 बटालियन की बीओपी चंदू वडाला और दूसरी 113 बटालियन की बीओपी आबाद पोस्ट पर। आसमान में ड्रोन की आवाज सुनाई दी, लेकिन कोहरा इतना घना था कि कोई ड्रोन दिखाई नहीं दिया। सूचना मिलते ही थाना कलानौर और डेरा बाबा नानक के एसएचओ तथा बीएसएफ जवानों ने खेतों में व्यापक सर्च अभियान चलाया, परंतु कोई बरामदगी नहीं हुई। कोहरे के कारण दिक्कतें आ रही सीमा पर एंटी-ड्रोन डिवाइस तैनात होने के बावजूद कोहरे में आने वाले ड्रोन सुरक्षा तंत्र को चकमा दे रहे हैं। सूत्रों के अनुसार पाकिस्तानी तस्कर चाइना मेड ड्रोन सहित 5 से 15 किलो भार वहन करने वाले हाई-रेंज ड्रोनों का प्रयोग करते हैं। बीएसएफ ने कई बार इन मंसूबों को नाकाम किया है और जवान लगातार सतर्क हैं। ड्रोन गतिविधि के दौरान बीएसएफ आकाश में आईएलएलयू बम (इल्युमिनेशन बम) का इस्तेमाल करती है, जो 300, 700 और 900 मीटर की ऊंचाई पर 35–45 सेकंड तक तेज रोशनी फैलाते हैं, ताकि संदिग्ध गतिविधि स्पष्ट दिखाई दे सके। गांवों में विलेज डिफेंस कमेटियां एक्टिव एसएसपी आदित्य ने बताया कि सीमा से सटे गांवों में पंजाब पुलिस ने विलेज डिफेंस कमेटियां गठित की हैं, जिनके सहयोग से कई बार तस्करों को पकड़ा गया है। उन्होंने कहा कि रात के समय नाकाबंदी और गश्त और अधिक कड़ी कर दी गई है, ताकि किसी भी नापाक हरकत को रोका जा सके।

पंजाब हुआ महंगाई वाले टॉप पांच राज्यों की सूची से बाहर

चंडीगढ़. कर्ज के बोझ में डूबे और महंगाई की मार झेल रहे पंजाब के लिए नया साल अच्छी खबर लाया है। सूबा उन टॉप पांच राज्यों की सूची से बाहर हो गया है जो महंगाई की सबसे अधिक मार झेल रहे हैं। राज्य की महंगाई दर कम होकर 1.82 प्रतिशत तक पहुंच गई है। केंद्र सरकार का जीएसटी दरों में कटौती करना प्रदेश के लिए राहत लेकर आया है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में महंगाई दर में और गिरावट देखने को मिल सकती है क्योंकि जरूरी सामान की कीमतें में कमी आई है। लोगों की जेब पर बोझ भी कम हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर 2025 में सूबे की महंगाई दर 1.82 प्रतिशत तक दर्ज की गई है जबकि पिछले काफी महीनों से नवंबर 2025 तक पंजाब उन पांच राज्यों में शामिल था जहां महंगाई दर सबसे अधिक थी। राष्ट्रीय स्तर पर भी महंगाई दर 1.33 प्रतिशत तक पहुंच गई है। वहीं 9.49% महंगाई दर के साथ केरल टॉप पर है। दूसरे नंबर पर कर्नाटक की महंगाई दर 2.99%, आंध्र प्रदेश 2.71%, तमिलनाडु 2.67% और जम्मू एंड कश्मीर की 2.26% है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में वित्तीय वर्ष 2026 में जीएसटी दरों में कटौती से पंजाब के जीएसटी राजस्व में 6.7 प्रतिशत बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है जिससे सरकार को 1786 करोड़ रुपये अतिरिक्त मिलेंगे। रिपोर्ट के अनुसार जीएसटी का कुल राजस्व वर्ष में बढ़कर 28,507 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। प्रदेश पर कर्ज के बोझ के बीच यह अच्छे संकेत हैं। वर्ष 2024-25 के दौरान राज्य पर अनुमानित कर्ज 3.82 लाख करोड़ था जो 2025-26 के बजट के अनुसार आगामी वित्तीय वर्ष के अंत तक 4.17 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में भी आई कमी इसी तरह उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) में भी कमी आई है। पंजाब में नवंबर 2025 के दौरान सीपीआई 190.8 दर्ज किया गया था, जो दिसंबर 2025 में कम होकर 190.4 हो गया है। अनुमान है और आगे सीपीआई में और कमी हो सकती है। सबसे अधिक सीपीआई केरल में 221.6 दर्ज किया गया है। राष्ट्रीय स्तर पर भी सीपीआई में मामूली बढ़ोतरी देखने को मिली है। नवंबर में यह 197.9 था, जो दिसंबर में बढ़कर 198 हो गया है। सीपीआई एक तरह का पैमाना है, जिससे यह पता लगाया जाता है कि समय के साथ आम लोगों की तरफ से खरीदी जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में कितनी बढ़ोतरी हुई है। इसमें खाने-पीने का सामान, किराया, कपड़े, शिक्षा, इलाज, परिवहन, बिजली व पानी समेत अन्य सेवाएं शामिल होती हैं।

सुप्रीम कोर्ट कमेटी के समक्ष सतनाम बेहरू की भावुक अपील

चंडीगढ़. सुप्रीम कोर्ट की ओर से रिटायर्ड जस्टिस नवाब सिंह की अगुवाई में गठित कमेटी से मिलने पहुंचे किसान नेताओं ने फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर अपनी विस्तृत राय रखी। इस दौरान स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने वाले सतनाम सिंह बेहरू ने समिति के सदस्यों के सामने भावुक अपील की। सतनाम बेहरू ने कहा कि वह न्यायालय के समय का महत्व समझते हैं, इसलिए अपनी बात संक्षेप में ही रखेंगे। उन्होंने कहा कि यदि किसानों की बातों पर संदेह हो, तो कम से कम खेती के क्षेत्र के विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों की राय अवश्य सुनी जानी चाहिए। उन्होंने उल्लेख किया कि वह स्वयं पढ़े-लिखे नहीं हैं, लेकिन समिति के सदस्य तथ्य और तर्क के आधार पर निर्णय लेने में सक्षम हैं। बेहरू ने बताया कि वह वर्ष 2000 से इस मुद्दे के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनका कहना था कि किसानों को अपनी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल रहा, इसलिए सरकार को इस दिशा में नीति बनानी चाहिए। 2004 में केंद्र सरकार ने एम.एस. स्वामीनाथन की अगुवाई में एक राष्ट्रीय कृषि आयोग गठित किया, जिसने दो वर्ष की विस्तृत मेहनत के बाद पांच जिल्दों में अपनी रिपोर्ट तैयार की। रिपोर्ट में सिफारिश की गई कि किसानों को उनकी फसल की लागत पर 50 प्रतिशत लाभ लेना चाहिए। लेकिन सरकारों ने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में भी लगी बाधाएं सतनाम ने कहा कि रिपोर्ट का सार तैयार करने के लिए वह प्रो. रंजीत सिंह घुम्मण के पास पहुंचे, लेकिन पहले उन्हें मना कर दिया गया। उनकी अनेक विनतियों के बाद सार तैयार हुआ और इसी आधार पर 2011 में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट में मामला कई महीनों तक चला। इस बीच 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी भाषणों में स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करने की बात कही। बेहरू ने इस वादे को भी अपनी याचिका में शामिल किया, परंतु अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनावी वादों पर फैसला नहीं दिया जा सकता। सतनाम ने समिति को बताया कि यदि खेती नहीं बची तो देश की खाद्य सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है। उनकी बातों को सुनकर समिति में मौजूद कई विशेषज्ञ गंभीर होकर उन्हें सुनते दिखाई दिए।