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छत्तीसगढ़ में रेलवे बूस्ट: 7,470 करोड़ का बड़ा निवेश, सीएम साय ने सरकार का धन्यवाद किया

रायपुर  छत्तीसगढ़ में रेलवे अधोसंरचना विकास के लिए 7,470 करोड़ के ऐतिहासिक बजट प्रावधान किए जाने पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि डबल इंजन सरकार के सतत प्रयासों से छत्तीसगढ़ में आज रेलवे क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन परिलक्षित हो रहा है। वर्ष 2009–14 के दौरान वार्षिक औसत 311 करोड़ की तुलना में 2026–27 में 7,470 करोड़ का बजट प्रावधान लगभग 24 गुना वृद्धि का रिकॉर्ड है। वर्तमान में राज्य में 51,080 करोड़ के रेल कार्य प्रगति पर हैं, जिनमें नए ट्रैक निर्माण, स्टेशनों का पुनर्विकास तथा सुरक्षा उन्नयन जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुदूर वनांचल बस्तर में जगदलपुर को जोड़ने वाले रावघाट–जगदलपुर रेल प्रोजेक्ट का प्रारंभ होना बस्तर के जनजातीय समाज के लिए केंद्र सरकार की ओर से एक अमूल्य उपहार है, जो क्षेत्रीय विकास की नई राह प्रशस्त करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि परमलकसा–खरसिया कॉरिडोर के साथ-साथ नए फ्रेट कॉरिडोर को भी स्वीकृति प्रदान की गई है। इन परियोजनाओं से आने वाले समय में छत्तीसगढ़ में यात्री गाड़ियों की संख्या आने वाले समय में लगभग  दोगुनी हो जाएगी। उन्होंने कहा कि अमृत स्टेशन योजना के अंतर्गत राज्य के 32 रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है, जिनमें डोंगरगढ़ (फेज-I), अंबिकापुर, भानुप्रतापपुर, भिलाई और उरकुरा जैसे स्टेशन पूर्ण हो चुके हैं। इसके साथ ही राज्य में वंदे भारत एक्सप्रेस की 2 जोड़ी तथा अमृत भारत एक्सप्रेस की 1 जोड़ी सेवाएँ यात्रियों को तेज, सुरक्षित और आधुनिक रेल सुविधा प्रदान कर रही हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वर्ष 2014 से अब तक लगभग 1,200 किलोमीटर नए रेल ट्रैक का निर्माण, 100 प्रतिशत विद्युतीकरण, 170 फ्लाईओवर/अंडरपास तथा ‘कवच’ जैसी आधुनिक सुरक्षा प्रणालियों की स्थापना से रेल सुविधा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ की जनता की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को इन युगांतकारी पहलों के लिए हृदय से धन्यवाद दिया है। उन्होंने कहा कि यह विकास केवल रेल पटरियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे प्रदेश के व्यापार, पर्यटन, उद्योग, रोजगार और आमजन के जीवन में नई ऊर्जा का संचार हो रहा है।

कुसमुंडा-जटगा रेल लाइन पर चोरी, प्लेट और हैवी मशीनरी समेत 2 करोड़ का माल ले गए चोर

कोरबा   छत्तीसगढ़ में कबाड़ के अवैध कारोबार से जुड़े गिरोह लगातार सक्रिय होते जा रहे हैं। कोरबा जिले में पहले ब्रिज से भारी मात्रा में लोहा चोरी होने के बाद अब चोरों ने कुसमुंडा–जटगा के बीच निर्माणाधीन रेल लाइन को निशाना बनाया है। चोर रेलवे पटरी काटकर ले गए हैं और भारी मशीनरी को नुकसान पहुंचाते हुए करीब दो करोड़ रुपये के लोहे पर हाथ साफ कर दिया है। जानकारी के अनुसार गेवरा–पेंड्रा नई रेल लाइन परियोजना के तहत उरगा से पेंड्रा तक करीब 140 किलोमीटर में पटरी बिछाने का कार्य चल रहा है। इसी दौरान कुसमुंडा से कुचेना जटगा के बीच लगभग 60 से 65 किलोमीटर के क्षेत्र में रेल पटरी, लोहे की प्लेटें और अन्य सामग्री गायब पाई गई। बताया जा रहा है कि चोरी की घटनाओं को अलग-अलग दिनों में अंजाम दिया गया। इससे पहले भी कोरबा जिले में ब्रिज से करीब 30 टन लोहे की चोरी की जा चुकी है, जिससे कबाड़ माफिया के संगठित नेटवर्क की आशंका और गहराती जा रही है। ताजा मामले में चोरों ने निर्माण स्थल पर खड़ी एक हाइड्रा मशीन के शीशे भी तोड़ दिए, जिससे मशीनरी को नुकसान हुआ है। रेल लाइन बिछाने का कार्य कर रही शिवाकृति प्राइवेट कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर एस. कुमार जांगिड़ ने बताया कि बांकी मोंगरा और कटघोरा थाना क्षेत्र में चोरी गए सामान की अनुमानित कीमत करीब दो करोड़ रुपये है। लगातार हो रही चोरी के बाद पूरे क्षेत्र में सर्वे कराया जा रहा है और संबंधित थानों में शिकायत दर्ज कराई गई है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटले ने बताया कि शिवाकृति प्राइवेट कंपनी द्वारा उरगा से पेंड्रा तक रेल लाइन निर्माण का कार्य किया जा रहा है। इससे पहले उरगा इलाके में भी चोरी की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। हाल ही में कुसमुंडा से लगभग 65 किलोमीटर दूर रेल लाइन निर्माण सामग्री चोरी होने की शिकायत मिली है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और घटनास्थलों का निरीक्षण किया जा रहा है। लगातार हो रही इस तरह की वारदातों से न केवल करोड़ों की सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान हो रहा है, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस अब संगठित कबाड़ गिरोह की तलाश में जुटी हुई है।

285 किमी का जबलपुर-गोंदिया रेल प्रोजेक्ट: नागपुर, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई से कनेक्टिविटी में इजाफा

जबलपुर  मध्यप्रदेश के लिए एक अहम रेल प्रोजेक्ट की घोषणा हुई। केंद्र सरकार ने छोटी लाइन को ब्रॉड गेज में बदलने का ऐलान किया तो प्रदेशवासी खुश हो उठे। बड़ी लाइन से उनका आवागमन और आसान होनेवाला था। हालांकि उनकी खुशी तब निराशा में बदल गई जब ब्रॉड गेज के लिए करीब 13 साल में नाममात्र का काम हुआ। संयोगवश उसी समय प्रगति पोर्टल चालू हो गया जिससे रेलवे प्रोजेक्ट में आती सभी दिक्कतें दूर होती चली गईं। 2021 में ब्रॉड गेज प्रोजेक्ट पूरा हो गया और इसे राष्ट्र को सम​र्पित कर दिया गया। 285 किमी लंबी यह रेल लाइन मानो वरदान बन गई। इससे प्रदेशवासियों की नागपुर, मुम्बई, कोलकाता, चेन्नई से कनेक्टिविटी बढ़ गई।  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मीडिया को प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप की उपलब्धियां बताईं। प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने प्रोएक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इंप्लीमेंटेशन (प्रगति) पर प्रेजेंटेशन दिया। इस मौके पर उन्होंने प्रगति पोर्टल की अहमियत भी प्रतिपादित की। पोर्टल की वजह से अटके प्रोजेक्ट को रफ्तार मुख्य सचिव अनुराग जैन ने इसके लिए रेलवे के जबलपुर गोंदिया ब्रॉड गेज प्रोजेक्ट का जिक्र किया। उन्होंने इस प्रोजेक्ट को पूरा कराने का श्रेय प्रगति पो​र्टल को ही दिया। सीएस अनुराग जैन ने स्पष्ट कहा कि पोर्टल की वजह से ही अटके पड़े प्रोजेक्ट को रफ्तार मिल सकी थी। अन्यथा जबलपुर गोंदिया ब्रॉड गेज प्रोजेक्ट 2028 या 2030 तक पूरा हो पाता। सीएस अनुराग जैन ने बताया कि जबलपुर गोंदिया ब्रॉड गेज प्रोजेक्ट पर सन 2003 में काम शुरु हुआ। इसमें कई व्यवधान आए और 2016 तक नाममात्र का ही काम हुआ। प्रगति पोर्टल आया तो जबलपुर गोंदिया ब्रॉड गेज से संबंधित सभी समस्याएं तुरंत हल की जाने लगीं। इसके परिणामस्वरूप रेल लाइन के काम में तेजी आई और 2021 में इसका शुभारंभ कर दिया गया। सीएस ने कहा कि प्रगति पोर्टल के माध्यम से देश में इन्फ्रास्ट्रक्चर के कामों को किस तरह गति मिली, इस उदाहरण से समझा जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी जबलपुर-गोंदिया गेज परिवर्तन परियोजना का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि रेलवे की 285 किमी लंबी इस रेल लाइन से मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के बीच सीधा और अधिक क्षमता वाला रेल संपर्क स्थापित हो गया है। इतना ही नहीं, इस प्रोजेक्ट से प्रदेश के जबलपुर, बालाघाट, मंडला, सिवनी जिलों की नागपुर, मुम्बई, कोलकाता, चेन्नई जैसे प्रमुख शहरों से कनेक्टिविटी भी बढ़ गई है। अब जबलपुर से गोंदिया, कोलकाता और चेन्नई के लिए सीधी ट्रेन उपलब्ध हैं।

नई रेललाइन तैयार, रामगंज मंडी-भोपाल ट्रैक पर ट्रायल रन की तारीख तय, जल्द शुरू होंगी ट्रेनें

भोपाल  मध्यप्रदेश की बहुप्रतीक्षित रामगंज मंडी- भोपाल रेल लाइन (bhopal ramganj mandi railway line) का काम अब अपने निर्णायक चरण में पहुंचता नजर आ रहा है। करीब 3035 करोड़ की लागत वाले प्रोजेक्ट में अब काम की रफ्तार काफी तेज है। रेलवे ने मार्च-2026 तक अलग-अलग सेक्शन में ट्रैक बिछाने और ट्रायल रन शुरू करने की डेडलाइन तय कर दी है। जिसके तहत जिले में खिलचीपुर से आगे राजगढ़ और ब्यावरा के साथ ही सोनकच्छ तक मार्च तक ट्रायल रन के लिए ट्रैक तैयार होगा। केवल सोनकच्छ से नरसिंहगढ़ और कुरावर वाला हिस्सा ही इसके बाद शेष रह जाएगा। जिसे भी सितंबर-अक्टूबर तक पूरा करने की योजना है। राजस्थान के हिस्से का काम पूरा बता दें कि राजस्थान में काफी पहले काम पूरा हो चुका है, लेकिन मप्र की सीमा में प्रशासकीय और रेलवे के ढीले रवैये के चलते काम पिछड़ा है। राजगढ़ जिले की बात करे यहां जमीन अधिग्रहण के कारण भी काम में देरी हुई है। यहीं कारण है कि वर्ष-2022 में पूरा होने वाला प्रोजेक्ट अभी तक अधूरा है। हालांकि अब काम निर्णायक मोड में पहुंचता नजर आ रहा है। अर्थवर्क नरसिंहगढ़ के एक सेक्शन को छोड़कर लगभग सभी जगह पूरा हो चुका है। अब केवल ट्रैक बिछाने के साथ ही विद्युतीकरण का काम शेष है। खिलचीपुर और ब्यावरा में बिछीं पटरियां कोटा मंडल में आने वाले रामगंज मंडी से ब्यावरा का काम मार्च तक पूरा करने का लक्ष्य है। 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है। खिलचीपुर से करीब 12 किमी आगे तक पटरियां बिछाई जा चुकी है। इसके साथ ही ब्यावरा राजगढ़ सेक्शन में भी ट्रैक बिछाने का काम शुरू कर दिया गया है। वहीं भोपाल मंडल में ब्यावरा से आगे सोनकच्छ सेक्शन के लिए भी मार्च की डेडलाइन तय की है। जिसके तहत ब्यावरा से करीब चार किमी आगे तक पटरियां बिछाई जा चुकी है। उधर श्यामपुर से आगे अब कुरावर तक भी ट्रैक तैयार होने वाला है। ब्यावरा से सोनकच्छ तक ट्रैक तैयार होने के बाद करीब 80 फीसदी काम भोपाल मंडल का भी पूरा हो जाएगा। केवल नरसिंहगढ़ के बीच का करीब 22-25 किमी सेक्शन में ही काम अधिक बाकी है। राजगढ़ जिले में रहेंगे ये स्टेशन रेल लाइन पर जिले में ब्यावरा जंक्शन सहित छह स्टेशन रहेंगे। राजस्थान तरफ से खिलचीपुर के भोजपुर से एंट्री करने वाले ट्रैक पर पहला स्टेशन भोजपुर ही है। इसके बाद खिलचीपुर, राजगढ़, ब्यावरा जंक्शन, नरसिंहगढ़ और कुरावर शामिल है। इसके आगे श्यामपुर होते हुए हिरदाराम और भोपाल लाइन जुड़ेगी। ट्रैक की बात करे तो खिलचीपुर से राजगढ़ और एनएच-52 के सामानांतर और राजगढ़-ब्यावरा के बीच हाईवे को क्रॉस कर ब्यावरा पहुंचेगी। जहां से ब्यावरा से पांच किमी आगे मक्सी-रुठियाई ट्रैक के सामांतर और फिर ट्रैक पूर्व में अलग होकर करीब सात सौ मीटर आगे देवास हाईवे को क्रॉस करेगी, इसके बाद एनएच-46 के साइड में होते हुए कुरावर के पास फिर फोरलेन क्रॉस करेगी भोपाल रेल मंडल के डीआरएम पंकज त्यागी ने बताया कि मार्च तक ब्यावरा से सोनकच्छ तक ट्रायल ट्रैक तैयार कर लिया जाएगा। इस सेक्शन में अर्थवर्क लगभग पूरा हो चुका है। पटरियां बिछाने के साथ ही विद्युतीकरण किया जा रहा है। मार्च तक 80 प्रतिशत हमारा काम पूरा हो जाएगा। इसके बाद केवल एक ही सेक्शन का काम रह जाएगा। जिसे भी अक्टूबर तक पूरा करा लिया जाएगा। कोटा मंडल के ट्रैक इंजीनियर गौरव मिश्रा का कहना है लगभग 90 फीसदी काम हमारा पूरा हो चुका है। अब केवल राजगढ़ ब्यावरा के बीच ट्रैक और कुछ हिस्सा खिलचीपुर से राजगढ़ के बीच बाकी है। जिसे भी मार्च तक पूरा कराने की डेडलाइन तय है।

2500 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली तीसरी रेल लाइन निर्माण में तेजी, 361 पुल और 4 टनल होंगे शामिल

 इटारसी भोपाल-इटारसी के बाद अब इटारसी-आमला के बीच तीसरी रेल लाइन का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। आमला से इटारसी के बीच 130 किमी क्षेत्र में तीसरी रेल लाइन बिछाने के लिए मिट्टी का बेस तैयार किया जा रहा है। जिसके बाद आगे काम होगा। 40 गांवों से ली गई 16 हेक्टेयर जमीन नर्मदापुरम और बैतूल जिले में जमीन अधिग्रहण में हुई देरी की वजह से इटारसी-आमला (Itarsi-Amla third railway line) सेक्शन में निर्माण कार्य देरी से शुरू हुआ। तीसरी रेल लाइन प्रोजेक्ट के लिए बैतूल जिले के 3 तहसीलों के 40 गांवों में रहने वाले 290 किसानों की 16.036 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की गई है। तीसरी रेलवे लाइन का काम पूरा होने के बाद रेल यातायात ओर बेहतर होने की उम्मीद है। खास बात यह भी है कि इस रेल रूट पर घाट सेक्शन होने की वजह से भी यातायात में परेशानी आती है। तीसरी लाइन बनने के बाद राहत मिलने की उम्मीद है। चार स्थानों पर बनेंगे टनल तीसरी लाइन के लिए मरामझिरी-धाराखौह घाट सेक्शन में चार स्थानों पर कुल 1.40 किमी लंबी सुरंग बनाई जाएगी। इटारसी से नागपुर के बीच 267 किलोमीटर की लंबाई में तीसरी लाइन बिछाई जाना है। जिसके बीच 27 रेलवे स्टेशन आएंगे। साथ ही 361 पुल-पुलियाओं का निर्माण भी किया जाएगा। प्रोजेक्ट पर खर्च होंगे 2525 करोड़ से अधिक भोपाल से इटारसी तक तीसरी लाइन बिछाने का काम लगभग पूरा हो चुका है। रेलवे द्वारा इटारसी से नागपुर के बीच तीसरी लाइन बिछाने का कार्य किया जा रहा है। प्रोजेक्ट पर 2525.73 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। वर्तमान में जो रेलवे लाइन मौजूद है, उसके समानांतर ही तीसरी लाइन बिछाने के लिए मिट्टी का बेस बनाया जा रहा है। इसलिए जरूरी तीसरी लाइन वर्तमान में रेलवे के पास नागपुर-इटारसी सेक्शन में केवल दो लाइन हैं। इन लाइनों से यात्री और और गुड्स ट्रेनों का संचालन किया जाता है। यात्री गाड़ियों को निकालने के लिए अक्सर गुड्स ट्रेनों को घंटों तक कहीं भी रोक दिया जाता है। इन्हीं समस्याओं के चलतेतीसरी लाइन बिछाई जा रही है. ताकि यात्री ट्रेनों के लिए गुड्स ट्रेनों को न रोकना पड़े और वे भी सही समय पर पहुंच सके। (MP News) बेहतर होगा रेल यातायात… रेल यातायात को बेहतर बनाने के लिए निर्माण कार्य हो रहे हैं। भोपाल-इटारसी के में तीसरी लाइन के बाद इटारसी से नागपुर के बीच भी तीसरी रेल लाइन का काम कराया जा रहा है। – नवल अग्रवाल, पीआरओ रेल मंडल भोपाल

रोज़गार की कमी ने किया हैरान कर देने वाला मामला: जबलपुर में नकली किन्नर बनाकर वसूली, RPF ने पकड़ाई

जबलपुर  रेलवे पुलिस फोर्स (RPF) ने कटनी–जबलपुर रूट पर चल रही ट्रेनों में अवैध वसूली करने वाले दो फर्जी किन्नरों को पकड़कर बड़ा खुलासा किया है। ओंकार चौधरी और धर्मेंद्र कोल नाम के ये दोनों आरोपी किन्नरों की वेशभूषा में ट्रेन में चढ़कर यात्रियों से जबरन पैसे वसूलते थे। पैसे न देने पर वे अभद्रता, गाली-गलौज और डराने-धमकाने जैसी हरकतें करते थे, जिससे यात्रियों में दहशत का माहौल बना रहता था। सूत्रों के मुताबिक, दोनों में आरोपी साड़ी, मेकअप और किन्नरों जैसी बोलचाल का इस्तेमाल कर वसूली करते थे। स्टेशन पहुंचते ही ये अपनी वेशभूषा बदलकर आम यात्री बन जाते थे, जिससे पहचान मुश्किल हो जाती थी। सिहोरा स्टेशन से लगातार मिल रही शिकायतों के बाद RPF की विशेष टीम ने निगरानी शुरू की और छापेमारी के दौरान दोनों को ट्रेन में ही रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। RPF की कार्रवाई ने उन गिरोहों पर भी सख्त संदेश भेजा है जो किन्नरों की पहचान का गलत इस्तेमाल कर यात्रियों को परेशान करते हैं। आरोपियों पर रेलवे अधिनियम की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। 

कैंसिलेशन चार्ज हटाया, रेल टिकट रद्द करने पर अब नहीं लगेगी कोई फीस

नई दिल्ली  अब अगर आपकी यात्रा की तारीख बदल जाए तो टिकट रद्द करने और कैंसिलेशन चार्ज देने की टेंशन नहीं रहेगी. भारतीय रेलवे ने एक नया नियम लागू करने की घोषणा की है जिसके तहत यात्री अपनी कन्फर्म ट्रेन टिकट की तारीख बिना किसी रद्दीकरण शुल्क (cancellation fee) के बदल सकेंगे. यह सुविधा जनवरी 2026 से लागू होगी. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने बताया कि इस नई पॉलिसी का मकसद यात्रियों को ज्यादा लचीलापन और सुविधा देना है. फिलहाल अगर किसी को अपनी यात्रा स्थगित करनी होती है, तो टिकट रद्द करनी पड़ती है और उसका शुल्क भी देना पड़ता है. नई व्यवस्था से यह झंझट खत्म हो जाएगा और यात्री आसानी से अपनी यात्रा की तारीख बदल पाएंगे. कैसे काम करेगी नई सुविधा नई व्यवस्था के तहत यात्री अपनी टिकट की तारीख केवल तब बदल सकेंगे जब नई तारीख पर सीट उपलब्ध होगी. अगर नई टिकट का किराया पुरानी से ज्यादा होगा तो यात्री को किराये का अंतर देना होगा. लेकिन अगर किराया समान है या कम है, तो किसी तरह का अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा. रेलवे ने बताया कि इस सुविधा का लाभ सिर्फ उन्हीं टिकटों पर मिलेगा जो कन्फर्म होंगी. यानी वेटिंग या आरएसी टिकटों पर फिलहाल यह सुविधा लागू नहीं होगी. यात्रियों को क्या फायदा होगा यह कदम रेलवे के यात्रियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है. पहले टिकट रद्द करने पर बेस फेयर का 25 से 50 प्रतिशत तक कैंसिलेशन चार्ज कट जाता था, लेकिन अब यात्री सिर्फ तारीख बदलवाकर बिना नुकसान के यात्रा कर सकेंगे. इस फैसले से उन यात्रियों को सबसे ज्यादा फायदा होगा जिनकी योजनाएं अचानक बदल जाती हैं. चाहे ऑफिस मीटिंग आगे बढ़े या पारिवारिक वजह से यात्रा टल जाए, अब टिकट दोबारा खरीदने की जरूरत नहीं होगी. क्या है रेलवे का मकसद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने कहा कि रेलवे यात्रियों को “ट्रैवल फ्रेंडली” अनुभव देने की दिशा में लगातार सुधार कर रहा है. डिजिटल टिकटिंग सिस्टम के विस्तार के साथ अब यात्रियों को ज्यादा नियंत्रण और सुविधा देने की कोशिश की जा रही है. रेलवे सूत्रों के मुताबिक, इस फैसले के बाद बुकिंग सिस्टम और आईआरसीटीसी (IRCTC) प्लेटफॉर्म में तकनीकी बदलाव किए जाएंगे ताकि यात्री आसानी से ऑनलाइन ही अपनी यात्रा की तारीख बदल सकें.  

पटना का रेल कनेक्शन मजबूत: अमृत भारत ट्रेनें जोड़ेंगी राजस्थान और तेलंगाना, 3 नई पैसेंजर ट्रेनें

पटना रेल मंत्रालय ने दो नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों की घोषणा की है। एक ट्रेन बिहार के दरभंगा से राजस्थान के अजमेर तक का सफर कराएगी। दूसरी ट्रेन बिहार के मुजफ्फरपुर से तेलंगाना के हैदराबाद तक का सफर कराएगी। इन दोनों ट्रेनों का फायदा मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के रेल यात्रियों को भी मिलेगा। इसके अलावा, रेलवे ने बिहार की राजधानी पटना में लोकल ट्रेनों के नए रेलवे स्टेशन की शुरुआत से पहले पैसेंजर ट्रेनों की संख्या बढ़ा दी है। दरभंगा से अजमेर के लिए नई अमृत भारत एक्सप्रेस के परिचालन की घोषणा की गई है।  उद्घाटन ट्रेन दरभंगा से 29 सितंबर को खुलेगी। दरभंगा के बाद कमतौल, जनकपुर रोड, सीतामढ़ी, बैरगनिया, रक्सौल, सिकटा, नरकटियागंज, बगहा, पनियहवा, सिसवा बाजार, कप्तानगंज, गोरखपुर, बस्ती, मनकापुर, गोंडा, बाराबंकी, गोमती नगर लखनऊ, बादशाह नगर, ऐशबाग, कानपुर सेंट्रल, फफूंद, इटावा, टूंडला, ईदगाह आगरा, बिठूर, जयपुर के रास्ते अजमेर तक जाएगी। यह ट्रेन कब से रेगुलर चलेगी, इसकी जानकारी अभी नहीं आई है। मुजफ्फरपुर से हैदराबाद के लिए भी नई अमृत भारत ट्रेन दी गई है। उद्घाटन वाली ट्रेन मुजफ्फरपुर से 29 सितंबर को चलेगी। इसके बाद यह ट्रेन 14 अक्टूबर से मुजफ्फरपुर से शुरू होगी। हैदराबाद के चारलापल्ली स्टेशन से यह ट्रेन 16 अक्टूबर को पहली बार चलेगी। ट्रेन नंबर 15293 मुजफ्फरपुर सुबह 10:40 में यह ट्रेन खुलेगी। यहां से हाजीपुर, सोनपुर, पाटलिपुत्र, दानापुर, आरा, बक्सर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय, न्यू वेस्ट केबिन, प्रयागराज छिवकी, मनिकपुर, सतना, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, पिपरिया, इटारसी, जुझारपुर केबिन, नागपुर, बलहरशाह, सिरपुर कागजनगर, बेलमपल्ली, रामगुंडम, पेडापल्ली, काजीपेट होते हुए चरलापल्ली तक जाएगी। 14 अक्टूबर को यह मुजफ्फरपुर से चलेगी। उसके साथ ही हर मंगलवार को यह मुजफ्फरपुर से खुलेगी। लौटते समय 16 अक्टूबर से हर गुरुवार को ट्रेन नंबर 15294 चारलापल्ली से खुलेगी। इस ट्रेन की शुरुआत के साथ ही ट्रेन नंबर 05293 का 14 अक्टूबर से मुजफ्फरपुर चरलापल्ली स्पेशल ट्रेन का परिचालन बंद हो जाएगा। 16 अक्टूबर से चरलापल्ली मुजफ्फरपुर स्पेशल का भी परिचालन बंद हो जाएगा।  

रेल लॉन्चर से अग्नि-प्राइम का पहला परीक्षण सफल, भारत की मारक क्षमता को नई उड़ान

नईदिल्ली  भारत ने एक बड़ा कदम उठाया है. डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) ने इंटरमीडिएट रेंज अग्नि-प्राइम मिसाइल का सफल परीक्षण किया. यह नई पीढ़ी की मिसाइल रेल आधारित मोबाइल लॉन्चर से छोड़ी गई. परीक्षण पूरी तरह सफल रहा. यह पहली बार है जब खास डिजाइन वाली रेल लॉन्चर से मिसाइल दागी गई. इससे भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया, जिनके पास 'कैनिस्टराइज्ड' लॉन्च सिस्टम है, जो रेल नेटवर्क पर चलते हुए मिसाइल छोड़ सकता है.      मिसाइल के सफल टेस्ट की डिटेल्स पर नजर डालें तो यह लॉन्च विशेष रूप से डिजाइन किए गए रेल-बेस्ड मोबाइल लॉन्चर सिस्टम से किया गया. इस सिस्टम की खासियत है कि यह बिना किसी पूर्व शर्त के देश के रेल नेटवर्क पर कहीं भी मूवमेंट कर सकता है. इससे लॉन्च में कम समय लगता है और दुश्मन की नजर से बचाव आसान होता है. डीआरडीओ यानी डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन, स्ट्रैटेजिक फोर्सेस कमांड (एसएफसी) और सशस्त्र बलों की टीम ने इस परीक्षण को अंजाम दिया है. हालांकि, परीक्षण का सटीक स्थान सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन यह रेल नेटवर्क की मोबिलिटी पर फोकस करता है, जो युद्धकाल में मिसाइल की सरवाइवेबिलिटी बढ़ाता है. क्या है अग्नि प्राइम मिसाइल की खासियत अग्नि प्राइम मिसाइल की विशेषताएं इसे और भी खास बनाती हैं. यह इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल है. यह 2000 किलोमीटर तक के टारगेट को हिट कर सकती है. इसमें एडवांस्ड टेक्नोलॉजी शामिल हैं. मसलन बेहतर एक्यूरेसी, कैनिस्टराइज्ड कॉन्फिगरेशन और फास्ट ऑपरेशनल रेडीनेस. यह अग्नि सीरीज की नई पीढ़ी की मिसाइल है, जो पुरानी अग्नि-1 और अग्नि-2 को रिप्लेस करने के लिए डिजाइन की गई है. कैनिस्टराइज्ड सिस्टम से मिसाइल को लंबे समय तक स्टोर किया जा सकता है और लॉन्च के लिए तैयार रखा जा सकता है, जो इसे रोड-मोबाइल, सबमरीन-लॉन्च और साइलो-बेस्ड सिस्टम्स के साथ कंप्लीमेंट करता है. इसकी हाई मोबिलिटी और लो विजिबिलिटी दुश्मन के लिए चुनौतीपूर्ण साबित होगी. अब सवाल है कि आखिर यह टेस्ट क्यों खास है? सबसे बड़ा कमाल यह है कि भारत ने पहली बार रेल से मिसाइल लॉन्च की क्षमता हासिल की है. यह दुनियाभर में अपने आप में दुर्लभ कारनामा है. रेल नेटवर्क की विशालता का फायदा उठाते हुए यह सिस्टम मिसाइल को तेजी से डिप्लॉय करने की अनुमति देता है. इससे स्ट्रैटेजिक सरप्राइज एलिमेंट बढ़ता है. यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ विजन से जुड़ा है, क्योंकि पूरा सिस्टम स्वदेशी रूप से विकसित है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसी देशों के लिए सिग्नल है, जहां बॉर्डर टेंशन के बीच भारत अपनी मिसाइल क्षमताओं को मजबूत कर रहा है. रेल-बेस्ड लॉन्च से न्यूक्लियर डिटरेंस गेम चेंजर साबित होगा, क्योंकि यह दुश्मन की सैटेलाइट मॉनिटरिंग से बचाव प्रदान करता है. यह टेस्ट इसलिए भी खास है क्योंकि ट्रेन से मिसाइल दागी जाएगी और फिर आगे बढ़ जाएगी. इससे दुश्मन ट्रैक नहीं कर पाएगा. राजनाथ सिंह ने क्या कहा? रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, ‘भारत ने इंटरमीडिएट रेंज अग्नि प्राइम मिसाइल का सफल लॉन्च रेल-बेस्ड मोबाइल लॉन्चर सिस्टम से किया है. यह नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल 2000 किमी तक की रेंज कवर करती है और विभिन्न एडवांस्ड फीचर्स से लैस है. उन्होंने डीआरडीओ, एसएफसी और सशस्त्र बलों को बधाई दी, साथ ही कहा कि यह भारत को रेल नेटवर्क से कैनिस्टराइज्ड लॉन्च सिस्टम विकसित करने वाले चुनिंदा देशों में शामिल करता है. यह उपलब्धि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. इस तरह से देखा जाए तो यह परीक्षण भारत की मिसाइल टेक्नोलॉजी में मील का पत्थर है. अग्नि-प्राइम क्या है? नई पीढ़ी की सुपर मिसाइल अग्नि-प्राइम अग्नि सीरीज की सबसे आधुनिक मिसाइल है. यह इंटरमीडिएट रेंज (मध्यम दूरी) वाली है, जो 2000 किलोमीटर तक निशाना साध सकती है. इसमें कई एडवांस्ड फीचर्स हैं…     सटीक निशाना: उन्नत नेविगेशन सिस्टम से दुश्मन के ठिकाने को सटीक मार सकती है.     तेज रिएक्शन: छोटे समय में लॉन्च हो सकती है, भले ही कम दिखाई दे.     मजबूत डिजाइन: कैनिस्टर (बंद बॉक्स) में रखी जाती है, जो इसे बारिश, धूल या गर्मी से बचाता है. यह मिसाइल भारत की स्ट्रेटेजिक फोर्सेस कमांड (एसएफसी) के लिए बनी है. परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से किया गया. रेल लॉन्चर की खासियत: कहीं भी, कभी भी हमला इस परीक्षण की सबसे बड़ी बात रेल आधारित मोबाइल लॉन्चर है. यह खास डिजाइन वाला सिस्टम है, जो…     रेल नेटवर्क पर बिना किसी तैयारी के चल सकता है.     क्रॉस कंट्री मोबिलिटी देता है, यानी जंगल, पहाड़ या मैदान में आसानी से ले जाया जा सकता है.     कम समय में लॉन्च: रुकते ही मिसाइल दाग सकता है.     कम विजिबिलिटी में काम: धुंध या रात में भी सुरक्षित. पहले मिसाइलें फिक्स्ड साइट्स से दागी जाती थीं, लेकिन यह लॉन्चर दुश्मन को चकमा दे सकता है. रेल पर चलते हुए लॉन्च करने की क्षमता से भारत की मिसाइल ताकत कई गुना बढ़ गई. परीक्षण की सफलता: भारत का गौरव डीआरडीओ, एसएफसी और भारतीय सेनाओं ने मिलकर यह परीक्षण किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर बधाई दी. उन्होंने कहा कि अग्नि-प्राइम के सफल टेस्ट से भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया, जिनके पास रेल नेटवर्क पर चलते हुए कैनिस्टर लॉन्च सिस्टम है. यह परीक्षण भारत की 'आत्मनिर्भर भारत' योजना का हिस्सा है. अग्नि सीरीज की यह छठी मिसाइल है, जो पहले से ही सेना में तैनात हैं. क्यों महत्वपूर्ण है यह परीक्षण?     रणनीतिक ताकत: दुश्मन को कहीं भी, कभी भी जवाब देने की क्षमता.     सुरक्षा बढ़ेगी: सीमाओं पर तेज रिएक्शन, घुसपैठ रोकेगी.     वैश्विक स्तर: अमेरिका, रूस जैसे देशों के साथ भारत की बराबरी.     भविष्य: अग्नि-प्राइम को जल्द सेना में शामिल किया जाएगा.  

कुड़मी समाज का आंदोलन उग्र, तीर-धनुष के साथ पारसनाथ स्टेशन पर रेल रोककर जताया विरोध

गिरिडीह  कुड़मी समाज के लोगों ने रेल टेका डहर छेका कार्यक्रम के तहत शनिवार को पारसनाथ रेलवे स्टेशन में रेल रोक दिया है। समाज से जुड़े लोग कुड़मी को एसटी और कुड़माली भाषा को आठवीं सूची में शामिल करने की मांग करते हुए पारंपरिक हथियार तीर धनुष व वेशभूषा एवं ढोल मांदर के साथ रेलवे स्टेशन पर प्रदर्शन कर रहे हैं। आदिवासी का दर्जा देने की अपनी पुरानी मांग को लेकर रेल रोको आंदोलन सुबह 5:50 से शुरू कर दिया है। आदिवासी कुड़मी समाज मंच के आह्वान पर सुबह से ही राज्य के कई जिलों में कुड़मी समाज के लोग रेलवे ट्रैक पर उतर आए और रेल परिचालन को पूरी तरह ठप कर दिया। बता दें कि धनबाद-गया रेलखंड के अप डाउन दोनों लाइन जाम कर दिया गया है। सभी माल गाड़ियों को विभिन्न स्टेशनों में खड़ा कर दिया गया है। रेलवे स्टेशन प्रबंधक अविनाश कुमार ने बताया कि सुबह दो राजधानी पास करने के बाद से तीसरी राजधानी दिल्ली हावड़ा 22812 जो कोलकाता जाएगी, उसे चौधरीबांध में खड़ा कर दिया गया है। एक मालगाड़ी को पारसनाथ स्टेशन पर खड़ा कर दिया गया है। रेलवे अधिकारी व पुलिस प्रशासन समाज से जुड़े लोगों को समझाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन आंदोलनकारी सक्षम अधिकारी के लिखित आश्वासन के साथ ट्रैक से हटने की बात पर अड़े हुए हैं। मौके पर रेलवे से सहायक कमांडेंट सुरेश कुमार मिश्रा, मो. शाकिब कुमार, आईपीएस निरंजन कुमार, इंस्पेक्टर दीपा राम, नीलम कुजूर, दीपक कुमार, डुमरी एसडीपीओ सुमित कुमार डीएसपी नीरज कुमार, थाना प्रभारी सुमन कुमार आदि उपस्थित थे।