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RSS की बड़ी बैठक हरियाणा में, एजेंडे में चुनावी तैयारी और UGC विवाद

पनीपत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था 'अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा' की तीन दिवसीय बैठक हरियाणा के पनीपत में शुक्रवार से शुरू हो रही है. संघ के टॉप लीडरशिप की इस बैठक में आरएसएस के 100 साल के कार्य विस्तार की समीक्षा के साथ-साथ आगामी 100 सालों के कार्यक्रमों-अभियानों की रूपरेखा तैयार की जाएगी. इतना ही नहीं संघ के एजेंडे में 2026 और 2027 की चुनाव से लेकर यूजीसी विवाद पर मंथन किए जाने की संभावना है। आरएसएस की कार्य पद्धति में निर्णय करने वाली सर्वोच्च ईकाई अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा है. इसकी साल में महज एक बार बैठक होती है. संघ के शताब्दी वर्ष पूरे होने के बाद एबीपीएस की बैठक इस बार हरियाणा के पनीपत जिले की समालखा स्थित माधव सृष्टि परिसर में हो रही है। संघ की तीन दिनों तक चलने वाली महत्वपूर्ण बैठक के लिए सरसंघचालक मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले पहुंच चुके हैं. क्षेत्र-प्रांत संघचालक, कार्यवाह, प्रचारक और संघ प्रेरित 32 संगठनों के पदाधिकारी शामिल होंगे. देशभर से संघ और संघ प्रेरित संगठनों के 1487 प्रतिनिधि शिरकत करेंगे।  RSS की हरियाणा में तीन दिन की बैठक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने बताया कि बैठक का औपचारिक आगाज शुक्रवार सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले की उपस्थिति में होगा, जो रविवार तक चलेगी. बैठक में आरएसएस से जुड़े भारतीय मजदूर संघ, विश्व हिंदू परिषद, एबीवीपी, सेवा भारती और भारतीय किसान संघ जैसे संगठन शामिल होंगे. इस दौरान संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों,सामाजिक चुनौतियों और संगठन विस्तार की आगामी रूपरेखा पर गहन मंथन किया जाएगा। सुनील आंबेकर ने कहा कि संघ की चर्चाओं में सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संत शिरोमणि रविदास की 650वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों को भी शामिल किया जाएगा. माना जा रहा कि बैठक में शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में चल रहे कार्यक्रमों की समीक्षा होगी. इसके साथ ही अगले वर्ष की योजनाओं पर चर्चा होगी और  जिन्हें पिछली बेंगलुरू बैठक में जिम्मेदारियों सौंपी गई थी, उन्होंने उसे कितना पूरा किया, इस पर भी चर्चा होगी. पदाधिकारियों को नई जिम्मेदारियां भी दी जाएंगी। संघ अगले एक साल का बनाएगा प्लान RSS के शताब्दी वर्ष के जनसंपर्क अभियान के तहत, 'गृह संपर्क अभियान' ने कई राज्यों में 10 करोड़ से अधिक परिवारों से पहले ही संपर्क स्थापित कर लिया है. पिछले एक वर्ष में 5,500 से अधिक नई RSS शाखाएं शुरू की गई हैं. शताब्दी वर्ष की गतिविधियों के हिस्से के रूप में पूरे देश में लगभग 97 प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे. बैठक के अंतिम दिन संडे को दत्तात्रेय होसबाले मीडिया को संबोधित करेंगे और बैठक लाए गए प्रस्तावों और निर्णयों का विवरण साझा करेंगे। संघ के 'पंच परिवर्तन' प्रोजेक्ट पर फिर से ज़ोर दिए जाने की संभावना है. इस प्रोजेक्ट का मुख्य मकसद सामाजिक सद्भाव, पारिवारिक मूल्यों, पर्यावरण संरक्षण, अपनी पहचान, आत्मनिर्भरता और नागरिक कर्तव्यों को बढ़ावा देना है। RSS के एजेंडे में UGC से चुनाव तक संघ सूत्रों के मुताबिक एबीपीएस की बैठक में यूजीसी के मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हो सकती है. देश के शिक्षण संस्थानों में दलित और पिछड़ी जाति के छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव को खत्म करने के लिए यूजीसी ने नए नियम बनाए थे, जिसे लेकर विरोध शुरू हो गया था. संघ की कोशिश है कि यूजीसी के नियमों लागू करने का स्वरूप इस कदर बनाया जाए, जिससे सामाजिक विरोध न हो सके।  यूजीसी के नियम को लेकर विवाद खड़ा हो गया था. एक तरफ उच्च जाति के समुदायों को लगता है कि इन नियमों से उनके साथ ज्यादती होगी और कानून का गलत इस्तेमाल हो सकता है. वहीं, सुप्रीम कोर्ट के द्वारा अदालतों द्वारा इन पर रोक लगाए जाने से दलितों के बीच जवाबी लामबंदी शुरू हो गई है। ओबीसी और दलित समूह कथित तौर पर नाराज माने जा रहे हैं जबकि ये समुदाय महत्वपूर्ण वोट बैंक बनाते हैं, जिन्हें बीजेपी लुभाने की कोशिश कर रही है. 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव को देखते हुए, इस मुद्दे ने पार्टी को एक मुश्किल स्थिति में डाल दिया है. ऐसे में सूत्रों की माने तो संघ की इस अहम बैठक में यूजीसी के नए नियमों पर चर्चा हो सकती है. संघ इस मुद्दे पर कोई दिशा दे सकता है।  2026 में देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव है, जिसमें असम, बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी शामिल हैं. ऐसे में संघ की बैठक में इन राज्यों के चुनाव को लेकर भी चर्चा हो सकती है. वैचारिक रूप से बीजेपी से बंगाल, केरल व तमिलनाडु को अहम माना जाता है और सियासी तौर पर पार्टी अभी तक इन राज्यों में सत्ता में नहीं आ सकी है. इस तरह संघ की बैठक में चुनावी राज्यों के लिए मंथन कर रणनीति बनाई जा सकती है। घुसपैठ के मुद्दे पर भी क्या होगी चर्चा पड़ोसी मुल्कों से गैरकानूनी माइग्रेशन के चलते देश के कुछ राज्यों में हो रहे जनसंख्या असंतुलन को लेकर आरएसएस चिंतित है.घुसपैठ के कारण देश के कई राज्यों की जनसंख्या की स्थिति बदल रही है. असम और पश्चिम बंगाल में पहले से ही अवैध घुसपैठ का मुद्दा शुरू से ही रहा है. इन दोनों राज्यों में अगले महीने विधानसभा चुनाव होने हैं. बीजेपी इन राज्यों में घुसपैठ को मुद्दा बनाने में जुटी है. ऐसे में एबीपीएस की चर्चाओं में अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की पहचान और उन्हें वापस भेजने के मुद्दे पर भी बात हो सकती है।  एबीपीएस मीटिंग के दौरान कई 'राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों' पर एक प्रस्ताव पारित करने की भी उम्मीद है. हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि यूजीसी और एनआरसी पर कोई प्रस्ताव आएगा या नहीं, लेकिन संघ की यह सबसे महत्वपूर्ण बैठक है. इसमें सरसंघचालक मोहन भागवत और दूसरे नंबर के नेता दत्तात्रेय होसबले सहित सभी सह सरकार्यवाह सहित अहम पदाधिकारियों की उपस्थित होगी।  संघ के एबीपीएस बैठक में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता भी बैठक में शामिल हो सकते हैं. इस दौरान अहम मुद्दों पर चर्चा करने साथ लिए गए फैसले न केवल अगले वर्ष के लिए संघ को दिशा देते हैं बल्कि बीजेपी की केंद्र और राज्य सरकारों को यह भी संकेत देते हैं कि वह … Read more

CM योगी आदित्यनाथ और RSS के 3 दर्जन से ज्यादा पदाधिकारियों के बीच बंद कमरे में हुई गहरी बातचीत

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। बताया जा रहा है कि ढाई घंटे तक चली इस बैठक में सरकार और संघ के बीच समंवय व आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर चर्चा हुई। सीएम ने संघ के अधिकारियों से सरकार का फीडबैक लिया। साथ ही संघ पदाधिकारियों के सुझाव भी जाने। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्टेट प्लेन गुरुवार सुबह करीब सवा 11 बजे हिंडन एयरबेस पर उतारा। सीएम का काफिला सड़क मार्ग से दोपहर पौने 12 बजे नेहरू नगर स्थित सरस्वती विद्या मंदिर पहुंचा। जहां मुख्यमंत्री ने आरएसएस की दृष्टि से मेरठ प्रांत (मेरठ, मुरादाबाद व सहारनपुर मंडल) के तीन दर्जन से अधिक अधिकारियों के साथ बंद कमरे में करीब ढाई घंटे तक चर्चा की। मुख्यमंत्री ने बैठक के बाद संघ पदाधिकारियों के साथ भोजन भी किया। क्या-क्या सुझाव दिए गए बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने इस दौरान संघ के पदाधिकारियों से सरकार का फीडबैक लिया। संघ के अधिकारियों ने अपने फीडबैक के अलावा सरकार के कामकाज को लेकर कुछ सुझाव भी दिए। प्रमुख सुझावों में सरकारी अस्पतालों व स्कूलों में आधारभूत ढांचे को और मजबूत करना व मानव संसाधन बढ़ाना रहा। कुछ पदाधिकारियों ने थानों में भष्ट्राचार को रोकने के लिए और प्रभावी अंकुश लगाने का सुझाव भी दिया। लोनी को लेकर भी चर्चा हुई। कहा गया कि लोनी में सड़कों की हालात सुधारने की आवश्यकता है। सड़कों का भी उठा मुद्दा संघ अधिकारियों ने कहा हर घर जल योजना के तहत खुदाई से गांवों की सड़कें खराब हो गई हैं। इन सड़कों को तुरंत ठीक किया जाए। मेरठ में सेंट्रल मार्केट का मुद्दा भी बैठक में उठा। मुख्यमंत्री दोपहर करीब ढाई बजे वायु मार्ग से नोएडा के लिए रवाना हुए। मुख्यमंत्री ने पिछले साल अप्रैल में सरस्वती विद्या मंदिर में भी संघ पदाधिकारियों के साथ बैठक की थी। 40 पदाधिकारी रहे मौजूद सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री सरकार का फीडबैक व सुझाव लेने के लिए भविष्य में भी संघ के अधिकारियों के साथ समंवय बैठक करते रहेंगे। मुख्यमंत्री के साथ समंवय बैठक में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, प्रदेश संगठन मंत्री धर्मपाल सिंह, क्षेत्र संघचालक सूर्यप्रकाश टोंक, क्षेत्र प्रचारक महेंद्र और प्रांत प्रचारक अनिल समेत करीब 40 पदाधिकारी मौजूद रहे।

RSS का बड़ा बयान: ‘हम 5 साल नहीं, शताब्दियों तक की सोच रखते हैं’

नई दिल्ली  राइजिंग भारत समिट 2026 में ‘स्ट्रेंथ विदइन’ थीम के साथ देश की बदलती तस्वीर पर चर्चा हुई. इस दौरान आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेडकर ने युवाओं और संघ के तालमेल पर खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि आज का युवा एस्पिरेशनल है और संघ उसके लिए सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर की तरह काम करता है. रुबिका लियाकत के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने साफ किया कि ‘भारत माता की जय’ किसी पर थोपी नहीं जाती, बल्कि ये आज के युवाओं के दिल से आती है. इस समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई दिग्गज हस्तियां शामिल होंगी. पूरा मंच भारत की आंतरिक शक्ति और आत्मविश्वास को दुनिया के सामने रखने के लिए तैयार है. यह आयोजन भारत के भविष्य के निर्माण में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो रहा है, जहां देश की प्रगति का सटीक खाका तैयार किया जा रहा है. क्या आरएसएस युवाओं की पसंद बन गया है? सुनील आंबेडकर का मानना है कि संघ आज के एस्पिरेशनल भारत की असली आवाज है. उन्होंने कहा कि देश के हर कोने में मौजूद लोग आज संघ से इसलिए जुड़ रहे हैं, क्योंकि उनकी आकांक्षाएं राष्ट्र निर्माण से गहराई से जुड़ी हैं. आज का युवा खुद को और अपने देश को तेजी से आगे देखना चाहता है. उनके लिए वंदे मातरम का नारा गर्व का विषय है, न कि किसी विवाद का मुद्दा. क्या भारत माता का जयकारा जबरदस्ती है? जब रुबिका लियाकत ने सवाल किया कि क्या ये नारे थोपे जा रहे हैं, तो आंबेडकर ने इसे सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता तो संघ को 100 साल का लंबा सफर तय करने में बड़ी दिक्कत आती. संघ सालों और सदियों के हिसाब से काम करता है. यह निरंतर संवाद की एक ऑर्गेनिक प्रक्रिया है, जो जमीन पर लोगों के बीच से निकलकर सामने आती है.

यूपी की सियासत गरम: मोहन भागवत से मिले दोनों डिप्टी CM, 2027 चुनाव की रणनीति पर चर्चा?

लखनऊ . उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत की हैट्रिक के लिए खुद आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत मैदान में उतर चुके हैं. गोरखपुर प्रवास के बाद वे लखनऊ पहुंचे।  जहां पहले वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ 40 मिनट तक मुलाक़ात की. गुरुवार को मेरठ रवानगी से पहले उनकी मुलाक़ात दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पटाहक से हुई. इन मुलाकातों को राजनीतिक और संगठनात्मक दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक, आरएसएस प्रमुख ने हिंदुत्व के अजेंडे को धार देने और जाति की राजनीति को ख़त्म करने को लेकर चर्चा की है. इसकी वजह यह है कि हाल के दिनों में जिस तरह से यूजीसीबिल और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का मुद्दा उठा उससे, हिन्दू वोट बंटने का खतरा है. इसका सीधा नुकसान बीजेपी को इसलिए भी है, क्योंकि बीजेपी 80 बनाम 20 की राजनीति करती है. यानी सपा का पीडीए और बीजेपी का दलित वोट भी सिका हिस्सा है. सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में मोहन भागवत से करीब 30-40 मिनट तक बातचीत की. यह मुलाकात आरएसएस के शताब्दी वर्ष के संदर्भ में बताई जा रही है, लेकिन सियासी गलियारों में इसे 2027 के चुनावी रोडमैप, हिंदुत्व एजेंडा, संगठन-सरकार समन्वय और सामाजिक समीकरणों पर रणनीति बनाने के रूप में देखा जा रहा है. मुलाकात के दौरान प्रदेश की राजनीतिक स्थिति, संगठन की भूमिका और आगामी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है. किस मुद्दे पर हुई होगी चर्चा? मुख्यमंत्री के साथ मुलाकात के बाद, गुरुवार सुबह मोहन भागवत ने उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक से भी अलग-अलग मुलाकात की. सरस्वती कुंज में हुई इन बैठकों में हिंदुत्व से जुड़े मुद्दों, जातिगत राजनीति, सामाजिक समरसता और चुनावी रणनीति पर विचार-विमर्श होने की बात कही जा रही है. हालांकि, इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह से मोहन भागवत ने जाति को भूलने और खुद को हिंदू बताने का आह्वान किया है उससे साफ़ है कि 2027 के लिए सियासी बिसात तैयार की जा रही है. इन मुलाकातों से स्पष्ट है कि आरएसएस 2027 के चुनाव को लेकर प्रदेश स्तर पर मजबूत समन्वय और तैयारी में जुटा हुआ है. आरएसएस और बीजेपी के बीच समन्वय मजबूत होगा यह मुलाकातें ऐसे समय हो रही हैं जब उत्तर प्रदेश में सामाजिक-राजनीतिक माहौल गर्म है और विभिन्न दल अपनी-अपनी रणनीतियां तैयार कर रहे हैं. आरएसएस की ओर से हिंदू समाज में एकता, सतर्कता और सामाजिक सद्भाव पर जोर दिया जा रहा है, जबकि सरकार-संगठन के बीच बेहतर तालमेल को चुनावी सफलता की कुंजी माना जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये मुलाकातें न केवल भाजपा की चुनावी तैयारियों को मजबूती देंगी, बल्कि संगठन और सरकार के बीच संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाएंगी.

RSS प्रमुख बनने के लिए हिंदू होने की शर्त जरूरी, मोहन भागवत ने बताया चुनाव की प्रक्रिया मोहन भागवत का बड़ा खुलासा: RSS प्रमुख बनने के लिए जरूरी है हिंदू होना, जानिए चुनाव की प्रक्रिया

मुंबई  राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ या RSS प्रमुख मोहन भागवत ने अपने रिटायरमेंट को लेकर जारी अटकलों पर विराम लगा दिया है। उन्होंने कहा है कि 75 वर्ष का होने के बाद भी संघ ने उनसे काम जारी रखने के लिए कहा था। उन्होंने कहा कि संघ के कहने पर वह काम छोड़ सकते हैं पर काम से रिटायर नहीं होंगे। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने संघ प्रमुख के चुनाव की प्रक्रिया और उम्मीदवारी पर भी बात की। कैसे होता है चुनाव भागवत ने यह भी कहा कि संघ का नेतृत्व करने वाला व्यक्ति हमेशा एक हिंदू ही होगा, चाहे उसकी जाति कुछ भी हो और शीर्ष पद सबसे योग्य उम्मीदवार को ही दिया जाएगा। उन्होंने कहा, 'RSS प्रमुख के पद के लिए कोई चुनाव नहीं होता। क्षेत्रीय और मंडल प्रमुख ही संघ प्रमुख की नियुक्ति करते हैं। आम तौर पर कहा जाता है कि 75 वर्ष की आयु के बाद किसी को कोई पद धारण किए बिना काम करना चाहिए।' RSS में कैसे होता है प्रमोशन भागवत ने कहा कि RSS में समुदाय आधारित प्रतिनिधित्व नहीं है और स्वयंसेवक अपने काम के आधार पर प्रमोशन पाते हैं। उन्होंने बताया कि जब RSS की स्थापना हुई थी, तब इसका काम ब्राह्मण-बहुल समुदाय में शुरू हुआ था और इसलिए इसके अधिकांश संस्थापक ब्राह्मण थे, जिसके कारण उस समय संगठन को ब्राह्मण संगठन के रूप में जाना जाता था। उन्होंने कहा कि लोग हमेशा ऐसे संगठन की तलाश करते हैं जिसमें उनके समुदाय के प्रतिनिधि हों। SC-ST से होगा प्रमुख? भागवत ने कहा कि वह इस बारे में कोई निश्चित जवाब नहीं दे सकते कि संघ प्रमुख अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति पृष्ठभूमि से होगा या नहीं क्योंकि यह निर्णय संघ प्रमुख की नियुक्ति करने वालों पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति समुदाय से होना अयोग्यता नहीं है, और न ही ब्राह्मण होना संघ प्रमुख बनने की योग्यता है। मोहन भागवत ने बताई अपनी नियुक्ति की कहानी उन्होंने कहा, 'अगर मुझे किसी प्रमुख का चयन करना होता, तो मैं 'सबसे योग्य उम्मीदवार' के मानदंड को अपनाता। जब मुझे RSS प्रमुख नियुक्त किया गया था, तब कई योग्य उम्मीदवार थे लेकिन वे उपलब्ध नहीं थे। मैं ही वह व्यक्ति था जिसे कार्यभार से मुक्त किया जा सकता था और नियुक्त किया जा सकता था।' भागवत ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि संगठन 'अपने स्वयंसेवकों से खून के आखिरी कतरे तक काम निकलवाता है'। उन्होंने दावा किया कि RSS के इतिहास में अब तक ऐसी कोई स्थिति नहीं आई है जब किसी को सेवानिवृत्त करना पड़ा हो।

टिमरनी में RSS कार्यक्रम में भाग लेने पर कांग्रेस विधायक पर उठे सवाल, आला कमान ने लिया संज्ञान

टिमरनी  मध्य प्रदेश के हरदा जिले की टिमरनी सीट से कांग्रेस विधायक अभिजीत शाह का आरएसएस के हिंदू कार्यक्रम में शामिल होना उनके लिए अब बड़ी राजनीतिक मुसीबत बन गया है। बताया जा रहा है कि, मामले पर अब सीधे तौर पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी यानी एआईसीसी तक ने संज्ञान ले लिया है, जिसके चलते पार्टी ने विधायक शाह से इस पूरे घटनाक्रम पर जवाब मांगा है। मध्य प्रदेश कांग्रेस ने प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी को मामले की पूरी रिपोर्ट सौंप दी है। साथ ही विधायक से इस संबंध में जवाब मांगा है। बता दें कि, अभिजीत शाह हरदा जिले के टिमरनी से विधायक हैं। बढ़ता जा रहा विवाद बीते दिनों टिमरनी विधानसभा के रहटगांव तहसील मुख्यालय पर आरएसएस का कार्यक्रम हुआ था। उस कार्यक्रम में कांग्रेस विधायक अभिजीत शाह शामिल हुए थे। कार्यक्रम में शामिल होने के बाद उनके ऐसा करने पर सबसे पहले हरदा जिले के कांग्रेस नेताओं ने आपत्ति जताई थी, तभी से ये मामला प्रदेश कांग्रेस की गंभीर चर्चा में जुड़ गया है। अब इस मामले में आलाकमान भी जुड़ गई है। देखना दिलचस्प होगा कि, इसपर टिमरनी विधायक की ओर से क्या प्रतिक्रिया दी जाती है।

RSS चीफ मोहन भागवत की नसीहत- ‘घर से ही लव जिहाद रोकना शुरू करें’

नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख ने शनिवार को कहा कि ‘लव जिहाद’ को रोकने के प्रयास परिवार से ही शुरू होने चाहिए। उन्होंने इसके लिए परिवारों में संवाद, महिलाओं में जागरूकता और सामूहिक सामाजिक प्रतिक्रिया की आवश्यकता पर बल दिया। आरएसएस की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया कि संगठन की ओर से यहां आयोजित ‘स्त्री शक्ति संवाद’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भागवत ने महिलाओं की सामाजिक भूमिका पर चर्चा के दौरान ‘लव जिहाद’ के मुद्दे का उल्लेख किया। ‘लव जिहाद’ शब्द का इस्तेमाल दक्षिणपंथी संगठन मुस्लिम पुरुषों द्वारा हिंदू महिलाओं का कथित तौर पर प्रेम संबंध या शादी के जाल में फंसाकर इस्लाम धर्म में धर्मांतरण कराने के संदर्भ में करते हैं। भागवत ने कहा कि परिवारों को यह आत्ममंथन करना चाहिए कि किसी परिवार की लड़की किसी अजनबी के प्रभाव में कैसे आ जाती है। उन्होंने इसे परिवारों में संवाद की कमी का परिणाम बताया। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि इस दिशा में तीन स्तरों पर प्रयास जरूरी हैं, जिनमें परिवारों के भीतर निरंतर संवाद, लड़कियों में जागरूकता पैदा करना और स्वयं की रक्षा के लिए उन्हें सक्षम बनाना तथा ऐसे अपराध करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई शामिल है। उन्होंने कहा कि सामाजिक संगठनों को भी सतर्क रहना चाहिए और समाज को सामूहिक रूप से प्रतिक्रिया देनी चाहिए, ताकि इस समस्या का समाधान निकाला जा सके। भागवत ने कहा कि धर्म, संस्कृति और सामाजिक व्यवस्था महिलाओं के कारण सुरक्षित है। उन्होंने महिलाओं के सशक्तीकरण, वैचारिक दिशा और पारिवारिक व सामाजिक जीवन में उनकी सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया। आरएसएस प्रमुख ने कहा, ‘वह समय बीत चुका है जब सुरक्षा के नाम पर महिलाओं को घरों तक सीमित रखा जाता था।’ उन्होंने कहा कि परिवार और समाज पुरुषों और महिलाओं के संयुक्त प्रयासों से आगे बढ़ते हैं, इसलिए दोनों का ‘प्रबोधन’ आवश्यक है। कार्यक्रम में आरएसएस के मध्य भारत प्रांत के प्रांत संघचालक अशोक पांडे और विभाग संघचालक सोमकांत उमलाकर भी मंच पर मौजूद थे। भागवत ने कहा कि महिलाएं परिवार में देखभाल करने वाली की केंद्रीय भूमिका निभाती हैं और संतुलन, संवेदनशीलता एवं व्यवस्था बनाए रखने में उनकी अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि देश की आबादी में महिलाओं की संख्या लगभग आधी है और सामाजिक तथा राष्ट्रीय कार्यों में अधिक से अधिक महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की जरूरत है। मानसिक स्वास्थ्य का उल्लेख करते हुए भागवत ने कहा कि यह जरूरी है कि परिवार में कोई भी स्वयं को अकेला महसूस न करे। उन्होंने बच्चों पर वास्तविकता से परे अपेक्षाएं थोपने से बचने की सलाह दी और कहा कि सफलता से अधिक महत्वपूर्ण जीवन का अर्थ है। भागवत ने कहा कि भारत ‘मानसिक गुलामी’ से बाहर निकल रहा है और दुनिया उम्मीदों के साथ देश की ओर देख रही है।

RSS प्रमुख मोहन भागवत बोले: संघ और भाजपा को जोड़कर देखना गलत, हिंदुत्व को मनोवृत्ति बताया

भोपाल  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने  भोपाल में आयोजित संघ के शताब्दी वर्ष के तहत ‘प्रबुद्ध जन सम्मेलन’ को संबोधित किया. इस दौरान भागवत ने संघ की विचारधारा,और भविष्य के लक्ष्यों को स्पष्ट रूप से सामने रखा. रवींद्र भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने हिंदुत्व, भाषा, संगठन विस्तार और संघ-भाजपा संबंधों को लेकर कई बड़ी बातें कहीं. उन्होंने कहा कि संघ को केवल भाजपा या विश्व हिंदू परिषद के  नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए भागवत ने कहा कि संघ किसी राजनीतिक दल का रिमोट कंट्रोल नहीं है, बल्कि समाज निर्माण का संगठन है. संघ की स्थापना हिंदुओं को शांतिपूर्ण तरीके से संगठित करने के लिए हुई थी. उन्होंने कहा कि हिंदू कोई जाति नहीं, बल्कि एक मनोवृत्ति है, जो सभी पंथों और संप्रदायों का सम्मान करती है. अभी भी कई इलाकों तक नहीं पहुंच पाया संघ- भागवत संघ के संगठनात्मक विस्तार पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान में संघ से करीब 60 लाख स्वयंसेवक जुड़े हैं, जबकि देश में अपने आप को हिंदू मानने वालों की संख्या लगभग 100 करोड़ है. उन्होंने चिंता जताई कि शहरी क्षेत्रों की करीब 10 हजार बस्तियों और कई अन्य इलाकों तक संघ अभी पूरी तरह नहीं पहुंच पाया है. भागवत ने कहा, 'ऐसी बस्तियों तक पहुंचना बहुत जरूरी हैं. संघ की शाखाओं में जो संस्कार मिलते हैं, वही समाज को दिशा देने का कार्य करते हैं। पहले यह व्यवस्था मजबूत थी, अब उसे फिर से सशक्त करने की जरूरी है.' उन्होंने कहा कि साधु-संतों से लेकर देश-विदेश के कई संगठन संघ के साथ जुड़े हुए हैं. अमेरिका और अफ्रीका जैसे देशों से लोग संघ की कार्यपद्धति को समझने आते हैं और पूछते हैं कि संघ अपने युवाओं को इस तरह कैसे तैयार करता है. और उन्हे भी इसकी ट्रेनिंग देने के लिए कहते है. भाषा के मुद्दे पर मोहन भागवत ने तीन भाषाएं सीखने पर जोर दिया- राज्य की भाषा, देश की भाषा और दुनिया की भाषा. उन्होंने कहा कि चीन से यह सीखना चाहिए कि एक बड़ा राष्ट्र कैसे संगठित किया जाता है. समाज को जोड़ना है संघ का काम मोहन भागवत ने हिंदुत्व को 'जाति' नहीं बल्कि एक 'मनोवृत्ति' बताया. उन्होंने कहा कि हिंदू, हिंदवी और भारत, तीनों एक ही हैं और  जो सनातन काल से चला आ रहा है और आज भी उतना ही प्रासंगिक है. संघ और उसके अनुषांगिक संगठनों को लेकर फैली भ्रांतियों पर उन्होंने कहा, 'अगर कोई भाजपा, विहिप या विद्या भारती को देखकर संघ को समझने की कोशिश करेगा, तो वह संघ के मूल विचार को कभी नहीं समझ पाएगा.' उन्होंने साफ कहा कि संघ का काम समाज को जोड़ना, संस्कार देना और उत्तम जीवन मूल्यों का निर्माण करना है, न कि किसी एक संगठन या दल तक सीमित रहना.

RSS प्रमुख मोहन भागवत बोले—अरावली में विकास हो, लेकिन संतुलन के साथ, युवाओं को नशे से दूर रहने की सलाह

रायपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने युवा संवाद कार्यक्रम में विकास, पर्यावरण और युवाओं के भविष्य पर अपनी बात कही. उन्होंने अरावली पर्वतमाला का उदाहरण देते हुए कहा कि दुनिया अब तक ऐसा विकास मॉडल नहीं बना पाई है, जिसमें पर्यावरण और इन्फ्रास्ट्रक्चर साथ‑साथ बिना नुकसान के चल सकें, इसलिए अब संतुलित विकल्प तलाशना ही होगा. बता दें कि सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ प्रवास पर हैं. इस दौरान आज रायपुर एम्स में वे युवा संवाद कार्यक्रम के जरिए युवाओं से रू-ब-रू हो रहे हैं. भागवत ने अरावली पर्वत श्रृंखला के संदर्भ से चेताया कि अंधाधुंध विकास की दौड़ अगर इसी तरह चलती रही तो आने वाली पीढ़ियां पर्यावरणीय संतुलन की भारी कीमत चुकाएंगी. उन्होंने कहा कि इन्फ्रास्ट्रक्चर और प्रकृति दोनों का समानांतर विकास जरूरी है, इसके लिए नीतियों और जीवनशैली दोनों में बदलाव लाना होगा. इसके साथ उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे रोजगार और करियर के साथ‑साथ पर्यावरण की जिम्मेदारी भी समझें और अपने छोटे‑छोटे फैसलों से बड़ी सकारात्मक शुरुआत करें. डॉ. भागवत ने युवाओं में बढ़ते नशे को गंभीर चिंता बताते हुए कहा कि आज का यूथ अंदर से लोनली फील कर रहा है. परिवारों में संवाद घटने और रिश्तों के न्यूट्रल होते जाने की वजह से युवाओं के सामने मोबाइल और नशा आसान विकल्प की तरह खड़े हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि अगर फैमिली के भीतर बात‑चीत और इमोशनल कनेक्शन मजबूत होगा तो बाहर की बुरी आदतों की खींच कम हो जाएगी. समाज और परिवार, दोनों को मिलकर ऐसा माहौल बनाना होगा जिसमें युवा अकेलेपन से भागकर नशे में नहीं, बल्कि सार्थक कामों में अपना समय लगाएं.

मणिकम टैगोर का बयान: RSS और अल कायदा—दोनों नफरत पर आधारित संगठन, उनसे क्या सीख सकते हैं?

नागपुर  कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने RSS यानी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की तुलना अल कायदा से की है। अब संघ ने इस मुद्दे पर कांग्रेस पर निशाना साधा है और कहा है कि लगातार हो रही हार की निराशा साफ नजर आ रही है। साथ ही दावा किया है कि 'कुछ नेताओं' की तरफ से संघ की तारीफ के कारण कांग्रेस बंटी हुई नजर आ रही है। हाल ही में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने संघ की तारीफ की थी। संघ के वरिष्ठ प्रचारक और अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य इंद्रेश कुमार ने कहा, 'कांग्रेस के एक प्रमुख सांसद ने आरएसएस की तुलना अल कायदा से कर अपनी मानसिकता दिखाई है…। यह कांग्रेस नेतृत्व और उसके सदस्यों के बौद्धिक और मानसिक दिवालियापन को दिखाता है।' उन्होंने कहा, 'जब व्यक्तियों, संस्थानों और उनके नेताओं को बार-बार हार का सामना करना पड़ रहा है, तो उनकी निराशा साफ नजर आती है। कुछ नेता अनुशासन, देशप्रेम और राष्ट्र निर्माण के कामों के लिए आरएसएस की तारीफ कर रहे हैं। इससे कांग्रेस के अंदर उथल पुथल मच गई है और यह पार्टी विभाजित नजर आ रही है।' कुमार ने कहा कि आरएसएस अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है। संघ के कार्यकर्ता विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से देश को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं। संघ छुआछूत, प्रदूषण, धार्मिक कट्टरता और जबरन धर्मांतरण से मुक्त समाज के लिए प्रयास कर रहा है। हम चाहते हैं कि लोग कानून का पालन करें और नियमों का पालन करें। क्या बोले थे कांग्रेस नेता रविवार को टैगोर ने कहा था, 'आरएसएस एक संगठन है, जो नफरत के आधार पर बना है और नफरत फैलाता है। नफरत से सीखने जैसा कुछ नहीं है। क्या आप अल कायदा से कुछ भी सीख सकते हैं। अल कायदा नफरत भरा संगठन है। वो दूसरों से नफरत करता है। उस संगठन से सीखने के लिए क्या है।' दिग्विजय सिंह ने शेयर कर दी थी फोटो सिंह ने शनिवार को भारतीय जनता पार्टी और संघ की तारीफ की थी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक पुरानी तस्वीर साझा करते हुए बताया कि कैसे एक जमीनी कार्यकर्ता अपने नेताओं के चरणों में बैठकर मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री पद तक पहुंचा। हालांकि, सिंह ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि वह आरएसएस तथा प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों के धुर विरोधी हैं और उन्होंने सिर्फ संगठन की तारीफ की है। CWC यानी कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक शुरू होने से पहले दिग्विजय सिंह ने एक्' पर एक पुरानी तस्वीर साझा की, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी आगे की तरफ नीचे बैठे हुए हैं और उनके पीछे भाजपा के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी कुर्सी पर बैठे नजर आ रहे हैं। सिंह ने पोस्ट किया, कोरा वेबसाइट पर मुझे यह चित्र मिला। बहुत ही प्रभावशाली है। किस प्रकार आरएसएस का जमीनी स्वयंसेवक व जनसंघ भाजपा का कार्यकर्ता नेताओं के चरणों में फर्श पर बैठकर प्रदेश का मुख्यमंत्री व देश का प्रधानमंत्री बना। यह संगठन की शक्ति है। जय सियाराम।