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शैक्षणिक सत्र के द्वितीय दिवस भी शासकीय विद्यालयों में ‘प्रवेश उत्सव’ का हुआ आयोजन

अनूपपुर नवीन शैक्षणिक सत्र के शुभारंभ के साथ जिले के शासकीय विद्यालयों में ‘प्रवेश उत्सव’ का आयोजन उत्साहपूर्वक किया जा रहा है। प्रदेश शासन की मंशा अनुरूप अधिक से अधिक बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने हेतु आयोजित इन कार्यक्रमों में स्थानीय जनप्रतिनिधि तथा शाला प्रबंधन समिति भी सक्रिय रूप से सहभागिता निभा रहे हैं। विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत आवश्यक सामग्रियों का वितरण किया जा रहा है।  इसी अनुक्रम में शैक्षणिक सत्र के द्वितीय दिवस भी शासकीय विद्या निकेतन उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भदरा कालरी (अनूपपुर) में ‘प्रवेश उत्सव’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले पात्र छात्र-छात्राओं को सुगम आवागमन हेतु विधायक अनूपपुर श्री बिसाहूलाल सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधियों एवं शासकीय अधिकारियों द्वारा निःशुल्क साइकिलों का वितरण किया गया।  इसी प्रकार शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला कल्याणपुर एवं शासकीय प्राथमिक विद्यालय सड़कटोला, पैरीचुआ में अध्ययन कार्य सुचारू रूप से प्रारंभ हो सके, इसके लिए कक्षावार निःशुल्क पाठ्य पुस्तकों के सेट उपलब्ध कराए गए। आयोजित कार्यक्रमों में वक्ताओं द्वारा शासन के ‘‘हर बच्चे को शिक्षित करने’’ के लक्ष्य पर प्रकाश डाला गया।  कलेक्टर श्री हर्षल पंचोली के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग द्वारा जिले के सभी विद्यालयों में आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए शिक्षण कार्य को प्रभावी रूप से संचालित किया जा रहा है।

प्रवेश उत्सव की शुरुआत: आज से स्कूलों में तिलक और मुफ्त किताबें वितरण

भोपाल  जिले के सभी शासकीय और अशासकीय विद्यालयों में आज 1 अप्रैल से नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत प्रवेश उत्सव के साथ होगी। कलेक्टर संदीप जीआर ने निर्देश दिए हैं कि सभी स्कूलों में जनप्रतिनिधियों, अभिभावकों और अधिकारियों की उपस्थिति में कार्यक्रम आयोजित किया जाए तथा आने वाले विद्यार्थियों और पालकों का तिलक लगाकर सम्मानपूर्वक स्वागत किया जाए।उन्होंने कहा कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अभिभावकों को विशेष आमंत्रण देकर विद्यालयों से जोड़ा जाए। सत्र शुरू होते ही विद्यार्थियों को निशुल्क पाठ्य पुस्तकों का वितरण भी किया जाएगा। राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल के निर्देशानुसार 31 मार्च तक कक्षा 1 से 8 तक सभी शासकीय और अशासकीय विद्यालयों में शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित किया जाना है।स्कूल चलें हम अभियान के प्रथम चरण के तहत प्रवेश उत्सव आयोजित होगा। शिक्षा पोर्टल 3.0 पर कक्षा उन्नयन की प्रक्रिया पूरी कर कक्षा 2 से 8 और 9 से 11 तक विद्यार्थियों का नामांकन दर्ज किया जाएगा। जिला शिक्षा अधिकारी और जिला परियोजना समन्वयक ने ब्लॉक स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए हैं। इस अवसर पर प्राथमिक, माध्यमिक, हाई और हायर सेकेंडरी विद्यालयों में कार्यक्रम और विशेष भोज का आयोजन भी किया जाएगा। बालसभा में अभिभावकों को नामांकन, उपस्थिति, छात्रवृत्ति, गणवेश, साइकिल और निशुल्क पाठ्य पुस्तक वितरण होगा । राज्य स्तरीय आयोजन "स्कूल चलें हम" अभियान का राज्य स्तरीय कार्यक्रम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में होगा। कार्यक्रम के आयोजन को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा तैयारी भी शुरू कर दी गई है। जिला-शाला स्तरीय प्रवेशोत्सव कार्यक्रम प्रदेश में जिले के प्रभारी मंत्री जिला स्तरीय प्रवेशोत्सव कार्यक्रम में शामिल होंगे। यह कार्यक्रम चयनित स्कूलों में होगा। कार्यक्रम में सांसद, विधायक एवं अन्य जन-प्रतिनिधि शामिल होंगे। उपस्थित छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क पाठ्य-पुस्तकें वितरित की जायेंगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने ऐसी व्यवस्था की है कि नये शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में विद्यार्थियों को पाठ्य-पुस्तकें मिल जायें। इस संबंध में विभाग द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी और मैदानी अमले को निर्देश भी जारी कर दिये गये हैं। ग्राम और बसाहट के शाला से बाहर रहे चिन्हित बच्चों का शाला में नामांकन कराया जायेगा। बच्चों के अभिभावकों का शाला स्तर पर स्वागत किया जायेगा। कक्षा 1 से 8 तक सभी शालाओं में एक अप्रैल को बालसभा का आयोजन किया जायेगा। इस दिन शालाओं में विशेष भोजन की व्यवस्था भी की गई है। भविष्य से भेंट कार्यक्रम "स्कूल चलें हम" अभियान के दूसरे दिन शालाओं में “भविष्य से भेंट’’ कार्यक्रम होगा। इस कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों के प्रसिद्ध, प्रबुद्ध और सम्मानित व्यक्तियों को एक प्रेरक की भूमिका में विद्यार्थियों से भेंट के लिये आमंत्रित किया जायेगा। इसी दिन स्थानीय स्तर पर विशिष्ट उपलब्धियां हासिल करने वाले खिलाड़ी, साहित्यकार, कलाकार, मीडिया, संचार मित्रों, पुलिस अधिकारी, राज्य शासन के अधिकारी को विशेष रूप से आमंत्रित किया जायेगा। आमंत्रित अतिथि उपस्थित बच्चों को पढ़ाई के महत्व और प्रेरणादायी कहानियां सुनाएंगे। इस दौरान सामाजिक संस्था एवं आमंत्रित व्यक्ति स्वेच्छा से विद्यार्थियों को शाला उपयोगी वस्तुएं भेंट कर सकेंगे। जिला कलेक्टर को जिले के प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों को किसी एक शाला में जाकर एक कालखण्ड में बच्चों के साथ संवाद करने के लिये संवाद करने के भी निर्देश दिये गये हैं। सांस्कृतिक एवं खेल-कूद गतिविधियाँ "स्कूल चलें हम" अभियान के अंतर्गत 3 अप्रैल को शाला स्तर पर पालकों के साथ सांस्कृतिक एवं खेल-कूद की गतिविधियां आयोजित की जायेंगी। इसका उद्देश्य पालकों का विद्यालय से जोड़ना है। इसी दिन शाला में उपस्थित पालकों को शैक्षणिक स्टॉफ द्वारा राज्य सरकार की स्कूल शिक्षा से जुड़ी सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जायेगी। पिछले शैक्षणिक सत्र में जिन विद्यार्थियों की 85 प्रतिशत से अधिक उपस्थिति रही है, उनके पालकों को सभा में सम्मानित किया जायेगा। हार के आगे जीत "स्कूल चलें हम" अभियान के अंतर्गत 4 अप्रैल को ऐसे छात्रों को चिन्हित किया जायेगा, जो किन्हीं वजहों से कक्षोन्नति प्राप्त करने में असफल हो गये हैं। पालकों को इन बच्चों की आगे की पढ़ाई के लिये समझाइश दी जायेगी। उन्हें बताया जायेगा कि असफल होने के बाद भी लगातार प्रयास से अच्छा भविष्य तैयार किया जा सकता है। इसी दिन शाला प्रबंधन और विकास समिति की बैठक भी होगी। बैठक में नये शैक्षणिक सत्र में ऐसे बच्चों पर विशेष रूप से चर्चा की जायेगी, जिनका शालाओं में नामांकन नहीं हो पाया है। समिति के सदस्य अपने विद्यालयों में शत-प्रतिशत बच्चों के नामांकन की कोशिश करेंगे और वार्षिक कार्य-योजना बनाकर उसके क्रियान्वयन पर चर्चा करेंगे।  

नए शैक्षणिक सत्र में सरकारी स्कूलों में पढ़ाएंगे कलेक्टर और 162 अधिकारी, क्या होगा खास?

इंदौर  इंदौर जिले में 1 अप्रैल से नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत होने जा रही है। शिक्षा विभाग ने इस बार सत्र के पहले दिन को उत्सव के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। स्कूल पहुंचने वाले विद्यार्थियों का स्वागत तिलक लगाकर और वंदन के साथ किया जाएगा। इस दौरान स्कूलों में विशेष बाल सभाओं का आयोजन होगा, जिससे बच्चों में शिक्षा के प्रति उत्साह जगाया जा सके। सत्र के प्रारंभ में ही विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकों का वितरण भी सुनिश्चित किया गया है ताकि उनकी पढ़ाई में कोई बाधा न आए।  प्रशासनिक अधिकारियों की अनूठी पहल और कलेक्टर की क्लास स्कूल चले हम अभियान के अंतर्गत इंदौर जिले में एक विशेष कार्यक्रम 4 अप्रैल को आयोजित किया जाएगा। इस दिन जिले के 162 प्रशासनिक अधिकारी विभिन्न सरकारी स्कूलों में पहुंचेंगे और वहां विद्यार्थियों की क्लास लेंगे। इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा स्वयं प्रताप नगर स्थित आश्रम क्रमांक 2 में जाकर बच्चों को पढ़ाएंगे और उनके साथ संवाद करेंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाना और छात्रों का मनोबल बढ़ाना है। विशेष भोज और शैक्षणिक गतिविधियों पर जोर सत्र के पहले दिन विद्यार्थियों के लिए स्कूलों में विशेष मध्यान्ह भोज की व्यवस्था की गई है। जिला शिक्षा अधिकारी और डीपीसी (DPC) द्वारा इस संबंध में लगातार समीक्षा बैठकें की जा रही हैं। विभाग का लक्ष्य नर्सरी से लेकर 12वीं तक के सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों की तर्ज पर आकर्षक बनाना है। इसके साथ ही साल की शुरुआत से ही शैक्षणिक गतिविधियों को पटरी पर लाने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की गई है। नामांकन वृद्धि के लिए शिक्षकों का घर-घर संपर्क अभियान सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या बढ़ाने के लिए शिक्षकों को विशेष दिशा-निर्देश दिए गए हैं। 'ज्यादा नामांकन' अभियान के तहत प्रत्येक विद्यालय से एक शिक्षक को घर-घर जाकर अभिभावकों से संपर्क करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। शिक्षक बच्चों के शैक्षिक स्तर का आकलन करेंगे और उन्हें स्कूल में प्रवेश लेने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। इस रणनीति से विभाग को उम्मीद है कि इस वर्ष सरकारी स्कूलों में छात्रों का ग्राफ बढ़ेगा। प्रतिभाशाली विद्यार्थियों और अभिभावकों का सम्मान होगा शिक्षा विभाग ने इस बार केवल छात्रों ही नहीं बल्कि उनके अभिभावकों को भी प्रोत्साहित करने की योजना बनाई है। जिन विद्यार्थियों ने पिछली कक्षाओं में 85 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है, उनके माता-पिता को स्कूल स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि अभिभावकों के सम्मान से बच्चों का मनोबल बढ़ेगा और वे भविष्य में और भी बेहतर परिणाम लाने के लिए प्रेरित होंगे। 

जालंधर-मोगा के स्कूलों में धमकी का मामला, पेपर से पहले ईमेल आई, परीक्षा रद्द कर बच्चों को घर भेजा

जालंधर  जालंधर में तीन प्रमुख स्कूलों, दिल्ली जाने वाली ट्रेन, विधानसभा और डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमाओं को बम से उड़ाने की धमकी भरा ईमेल मिलने का मामला सामने आया। यह धमकी कथित तौर पर खालिस्तानी समर्थकों की ओर से भेजी गई बताई जा रही है। सूचना मिलते ही पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गईं और जांच शुरू कर दी गई है।  बम की धमकी के बाद स्कूलों की छुट्टी कर दी गई है। एडीसीपी आकर्षि जैन ने कहा कि हम जांच कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक जालंधर के एपीजे स्कूल, दिल्ली पब्लिक स्कूल सहित एक अन्य निजी स्कूल को धमकी भरी ईमेल भेजी गई है। ईमेल में चेतावनी दी गई है कि जालंधर में स्थित इन संस्थानों के साथ-साथ दिल्ली जाने वाली एक ट्रेन और विधानसभा को भी निशाना बनाया जा सकता है। ईमेल मिलने के बाद स्कूल प्रशासन ने तुरंत पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए। धमकी भरे ईमेल में एक और गंभीर चेतावनी दी गई है। मेल भेजने वाले ने जालंधर जिले में स्थापित डॉ. भीमराव अंबेडकर की सभी प्रतिमाओं को हटाने की मांग की है। इसके लिए 14 अप्रैल तक का समय दिया गया है। ईमेल में कहा गया है कि यदि तय समय तक प्रतिमाएं नहीं हटाई गईं तो उन्हें बम से उड़ाने की कार्रवाई की जाएगी। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस प्रशासन हरकत में आ गया है। स्कूलों के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। पुलिस साइबर सेल भी ईमेल की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि धमकी किसने और कहां से भेजी है। पुलिस अधिकारियों ने स्कूल प्रबंधन को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध वस्तु या व्यक्ति की तुरंत सूचना देने के निर्देश दिए हैं। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच में जुटी हैं और लोगों से अफवाहों से बचने की अपील की गई है।  मोगा के तीन सरकारी स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी मोगा के तीन सरकारी स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी मिलने का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार सरकारी स्कूल गोथेयाला, सरकारी स्कूल उगोके और सरकारी स्कूल झंडियाना को एक धमकी भरी ईमेल प्राप्त हुई, जिसमें स्कूलों को बम से उड़ाने की बात कही गई थी। गोथेयाला सरकारी स्कूल के अध्यापक जतिन गोयल ने बताया कि आज नाैवीं क्लास के पेपर थे। पेपर शुरू होने से पहले जब स्कूल के स्टाफ ने ईमेल चेक किया तो उसमें खालिस्तान समर्थक की और से ईमेल भेजा गया। ईमेल में लिखा गया कि 14 अप्रैल से पहले स्कूल से डॉ. भीम राव आंबेडकर की फोटो हटा दी जाए नहीं तो स्कूल को बम से उड़ा दिया जाएगा। तुरंत इस मामले की सूचना उच्च अधिकारियों और पुलिस प्रशासन को दी गई।  उन्होंने बताया कि उस समय स्कूल में छात्रों के पेपर चल रहे थे, लेकिन बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए परीक्षाएं तुरंत रद्द कर दी गईं और छात्रों को सुरक्षित तरीके से घर भेज दिया गया। धमकी की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बम निरोधक टीमों को मौके पर भेज कर स्कूल परिसर और आसपास के इलाकों की बारीकी से जांच की और स्कूल को सेफ घोषित किया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि धमकी भरी ईमेल के स्रोत का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है और साइबर टीम की भी मदद ली जा रही है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों से दूर रहने और शांति बनाए रखने की अपील की है। 

एमपी में रिजल्ट 23 मार्च तक, 1 अप्रैल से स्कूल होंगे खुलेंगे, ड्रॉप-आउट रोकने के लिए शिक्षक घर-घर जाएंगे

भोपाल मध्य प्रदेश में नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की तैयारियां तेज हो गई हैं. लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) से मिली जानकारी के अनुसार 8वीं, 9वीं और 11वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम 23 मार्च तक घोषित कर दिए जाएंगे. इसके बाद 24 से 31 मार्च तक विद्यार्थियों को अगली कक्षा में प्रवेश दिया जाएगा. वहीं एक अप्रैल से प्रदेश भर के सरकारी स्कूलों में नई कक्षाएं शुरू होंगी और प्रवेशोत्सव के साथ विशेष नामांकन अभियान भी चलाया जाएगा। हर कक्षा में बनाया जाएगा एक वार्डन स्कूल शिक्षा विभाग ने इस बार सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने और ड्रॉप-आउट कम करने के लिए विशेष रणनीति बनाई है. डीपीआई द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के तहत प्रत्येक कक्षा में एक शिक्षक को ‘वार्डन’ की जिम्मेदारी दी जाएगी. यह शिक्षक विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति पर नजर रखेगा. जो बच्चे लगातार अनुपस्थित रहेंगे, उनके अभिभावकों से सीधे संपर्क करेगा। लोक शिक्षण संचालनालय की आयुक्त शिल्पा गुप्ता ने बताया कि नामांकन बढ़ाने के लिए शिक्षकों को घर-घर जाकर संपर्क अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं. इस दौरान शिक्षक अभिभावकों को सरकारी स्कूलों में मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी देंगे. इनमें निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें, यूनिफॉर्म, स्कॉलरशिप सहित अन्य शासकीय योजनाएं शामिल हैं. विभाग का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक बच्चों का नामांकन सुनिश्चित कर स्कूलों में शत-प्रतिशत उपस्थिति दर्ज कराई जाए। सरकारी स्कूलों में रंगाई-पुताई के निर्देश नए सत्र की तैयारियों को लेकर स्कूलों को भी कई निर्देश दिए गए हैं. एक अप्रैल से पहले सभी स्कूलों में पाठ्यपुस्तकों का वितरण पूरा कर लिया जाएगा, ताकि सत्र की शुरुआत से ही पढ़ाई सुचारू रूप से शुरू हो सके. इसके अलावा स्कूल भवनों की रंगाई-पुताई और साफ-सफाई का काम 30 मार्च तक पूरा करने को कहा गया है। बीते साल 3.43 लाख बच्चों ने रोकी पढ़ाई दरअसल प्रदेश में बढ़ते ड्रॉप-आउट को देखते हुए सरकार और शिक्षा विभाग चिंतित है. पिछले वर्ष प्रदेश में करीब 3.43 लाख बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया था. इनमें सबसे अधिक 2.66 लाख बच्चे सरकारी स्कूलों के हैं. 52 जिलों में सबसे ज्यादा खरगोन जिले से 20 हजार से अधिक बच्चे ड्रॉप-आउट हुए, जिन्होंने कहीं भी दोबारा प्रवेश नहीं लिया। बजट बढ़ा, लेकिन कम हुई विद्यार्थियों की संख्या जानकारी के अनुसार आठ साल पहले प्रदेश में पहली से 12वीं तक के स्कूलों में करीब 1.60 करोड़ बच्चों का पंजीयन हुआ था. आठ साल बाद इनमें से केवल 1 करोड़ 4 लाख बच्चे ही पढ़ाई में बने रहे. खास बात यह है कि इस दौरान स्कूल शिक्षा का बजट लगभग चार गुना बढ़कर 9 हजार करोड़ से 37 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया. इसके बावजूद विद्यार्थियों की संख्या में कमी दर्ज की गई है।

पंजाब में नए सत्र के अप्रैल से ही खुलेंगे स्कूल

लुधियाना. शिक्षा विभाग को निजी स्कूलों की मनमानियों के खिलाफ लिखित आदेश जारी करने पड़ गए। मामला कुछ निजी स्कूलों द्वारा अप्रैल की बजाय मार्च में ही नया सैशन शुरू करने को लेकर जुड़ा है। सी.बी.एस.ई. ने भी जहां स्कूलों को पत्र जारी करने की तैयारी कर ली थी, वहीं जिला शिक्षा विभाग ने सरकार की हिदायतों का हवाला देते हुए सभी निजी स्कूलों चाहे किसी भी बोर्ड से संबंधित हो, को आदेश जारी कर दिया है कि विद्यार्थियों के लिए कक्षाएं 1 अप्रैल से ही शुरू की जाएं. कोई भी स्कूल मार्च में किसी भी क्लास के विद्यार्थियों को नए सैशन की क्लासों के लिए नहीं बुलाएगा। बता दें कि कई स्कूलों ने 1 अप्रैल से पहले ही सैशन ख़त्म करते हुए नए सैशन की क्लासेज अभी से शुरू कर दी थीं। इस बारे डी.ई.ओ. डिम्पल मदान ने बाकायदा पत्र भी जारी कर दिया है। अब देखना है कि निजी स्कूल डी.ई.ओ. की बात को कितनी गंभीरता से लेते हैं और डी.ई.ओ. अपने आदेश लागू करवाने के लिए क्या कदम उठाएंगी? यही नहीं डी.ई.ओ. की ओर से जारी पत्र में शिक्षा के क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों और अभिभावकों के आर्थिक शोषण को रोकने के लिए शिक्षा विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। आदेश में निजी स्कूल प्रबंधकों द्वारा किताबों और वर्दी के नाम पर की जा रही मनमानी पर नकेल कसने की तैयारी की है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा की आड़ में पब्लिशर्स के साथ मिलकर किए जा रहे 'कमीशन के खेल' को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभाग ने जिले के सभी निजी स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि वे शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा-वार किताबों और वर्दी की पूरी सूची अपनी आधिकारिक वैबसाइट के होम पेज पर अनिवार्य रूप से अपलोड करें। स्कूलों को इस आदेश के पालन के लिए केवल 3 दिन का समय दिया गया है। इस सूची में किताबों का शीर्षक (टाइटल), लेखक और प्रकाशक का नाम स्पष्ट रूप से दर्ज होना चाहिए, ताकि अभिभावक अपनी पसंद और बजट के अनुसार खुले बाजार से सामग्री खरीदने के लिए स्वतंत्र रहें। विभाग ने चेतावनी दी है कि इन आदेशों का अक्षरश: पालन सुनिश्चित कर दफ्तर को सूचित किया जाए। गैर-जरूरी किताबों का बोझ और अभिभावकों का शोषण विभिन्न स्कूलों में पढ़ रहे विद्यार्थियों के अध्यापकों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि निजी स्कूलों द्वारा विद्यार्थियों पर ऐसी अनेक किताबों का बोझ डाल दिया जाता है, जिनका मुख्य पाठ्यक्रम (सिलेबस) से कोई सीधा संबंध नहीं होता। उदाहरण के तौर पर कई स्कूलों में छठी कक्षा के विद्यार्थियों के लिए आर्टिफिशियल इंटैलीजैंस, फाइनैंशियल लिटरेसी, मार्कीटिंग, जनरल नॉलेज और मोरल साइंस जैसी महंगी किताबें अनिवार्य कर दी गई हैं। ये किताबें न केवल विद्यार्थियों के बैग का बोझ बढ़ा रही हैं, बल्कि अभिभावकों की जेब पर भी भारी पड़ रही हैं। अभिभावकों का आरोप है कि जब तक सभी बच्चे किताबें नहीं खरीद लेते, तब तक स्कूलों में इन्हें लाने का दबाव बनाया जाता है लेकिन एक बार बिक्री पूरी होने के बाद पूरे साल इन किताबों से कोई ठोस पढ़ाई नहीं करवाई जाती। वर्दी की मोनोपॉली होगी ख़त्म किताबों के साथ-साथ वर्दी बेचने के मामले में भी स्कूलों और चुनिंदा वैंडर्स की मिलीभगत सामने आती रही है। कई स्कूल हर साल वर्दी के रंग, डिजाइन या लोगो में मामूली बदलाव कर देते हैं जिससे अभिभावक पुरानी वर्दी का उपयोग नहीं कर पाते और उन्हें नए सैट खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इसके अलावा स्कूलों द्वारा कुछ खास दुकानों को ही अधिकृत किया जाता है जहां वर्दी और अन्य सहायक सामग्री बाजार दर से कहीं अधिक कीमतों पर बेची जाती है। विभाग के नए आदेशों का उद्देश्य इस प्रकार की व्यापारिक एकाधिकार (मोनोपॉली) को समाप्त करना है। स्कूलों के अंदर काऊंटर लगाकर किताबें बेचने पर विशेष नजर विभागीय आदेशों के बावजूद कई स्कूल परिसरों के अंदर ही निजी काऊंटर लगाकर ऊंचे दामों पर किताबें और वर्दी बेची जा रही हैं। पिछले वर्ष भी इस संबंध में शिकायतें प्राप्त हुई थीं, परंतु समय की कमी के कारण ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी थी। इस बार शिक्षा विभाग ने ऐसे स्कूलों पर अपनी पैनी नजर रखी हुई है जो नियमों का उल्लंघन कर स्कूल के भीतर व्यावसायिक गतिविधियां चला रहे हैं। “अभिभावकों की ओर से किताबों और वर्दी को लेकर लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही थीं जिसका संज्ञान लेते हुए यह आदेश जारी किए गए हैं। स्कूलों को तीन दिनों के भीतर अपनी वैबसाइट पर किताबों का पूरा विवरण सार्वजनिक करना होगा। किसी भी स्कूल को अभिभावकों पर किसी खास दुकान से सामग्री खरीदने के लिए दबाव बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यदि कोई स्कूल इन आदेशों का उल्लंघन करता पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।”

MP: प्राइवेट स्कूलों को मान्यता का अंतिम अवसर, 10 मार्च तक 20 हजार लेट फीस के साथ आवेदन संभव

 ग्वालियर  लोक शिक्षण विभाग यानि डीपीआई हाईस्कूल व हायरसेकेण्डरी स्कूलों की नवीन मान्यता व नवीनीकरण की प्रक्रिया शुरू कर चुका है। बिना विलंब शुल्क के ऑनलाइन आवेदन के करने की तिथि निकल चुकी है। लेकिन विभाग ने 20 हजार विलंब शुल्क के साथ मान्यता के लिए आवेदन करने की अंतिम तारीक्ष 10 मार्च रखी है। आवेदन के बाद 25 मार्च तक संयुक्त संचालक शिक्षा के नेतृत्व में गठित टीम आवेदन वाले स्कूलों की छानबीन करेगा। इसके बाद जिन स्कूलों के आवेदन को समिति निरस्त करेगी, उसके लिए 25 अप्रैल तक अपील की जा सकती है। इन अपीलों का निराकरण डीपीआई 25 मई को करेगा। इसके बाद स्कूलों की मान्यता जारी कर दी जाएगी। ऑनलाइन आवेदन और पोर्टल की जानकारी डीपीआई ने मान्यता की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन पोर्टल https://manyta.dpimp.in/ शुरू किया है। सीबीएसई, आईसीएसई और अन्य बोर्डों से संबद्ध स्कूलों को भी इसी पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य है। सामान्य शुल्क के साथ आवेदन की समय-सीमा 15 फरवरी को समाप्त हो चुकी है, लेकिन स्कूलों को डीपीआई ने विलंब शुल्क के साथ 10 मार्च तक का आवेदन करने का समय दिया है। आवेदन करने के बाद इस तरह चलेगी प्रक्रिया     ग्वालियर चंबल क्षेत्र से स्कूलों की जांच संभागीय संयुक्त संचालक द्वारा गठित दल ऑनलाइन आवेदनों की छानबीन की जाएगी। नवीन मान्यता, नवीनीकरण और अपग्रेडेशन के प्रकरणों पर निर्णय लेने की अंतिम तिथि 25 मार्च 2026 तय की गई है।     यदि किसी स्कूल का आवेदन संयुक्त संचालक स्तर पर निरस्त कर दिया जाता है, तो संबंधित संस्था 25 अप्रैल तक आयुक्त, लोक शिक्षण के समक्ष ऑनलाइन अपील प्रस्तुत कर सकती है।     प्राप्त अपीलों का अंतिम निराकरण 25 मई तक कर दिया जाएगा। इसके बाद ही स्कूलों की मान्यता की अंतिम सूची और प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे। स्कूलों को यह रखना होगा ध्यान डीपीआई के संचालक केके द्विवेदी द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि स्कूल प्रबंधन समय-सीमा का विशेष ध्यान रखें। ग्वालियर संभाग के संयुक्त संचालक ने भी जिले के सभी अशासकीय स्कूलों को निर्देशित किया है कि वे तकनीकी त्रुटियों से बचने के लिए अंतिम तारीख का इंतजार न करें और पोर्टल पर सभी प्रविष्टियों को सावधानीपूर्वक अपलोड करें।  

प्राथमिक वा माध्यमिक विद्यालय के शिक्षकों को नही है बात करने की तजुर्बा मुंह से निकालते आग

प्राथमिक वा माध्यमिक विद्यालय के शिक्षकों को नही है बात करने की तजुर्बा मुंह से निकालते आग  राजेंद्रग्राम  कार्यालय विकासखंड पुष्पराजगढ़ अंतर्गत आने वाली एकीकृत माध्यमिक विद्यालय नगमला वा शासकीय प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों के द्वारा किसी संस्था से आए हुए अधिकारी कर्मचारी वा पत्रकारो के आने से सिक्षको में खलबली मच जाती है।और सभी शिक्षक एक जगह आए हुए अधिकारी कर्मचारी वा पत्रकार बंधुओ को घेर कर उसका इंटरव्यू लेने के कगार में होते है।कहा जाता है की आप लोगों से हमारा कोई लगाओ नही है क्यू आए और किस लिए आए हो शिक्षकों का इंटरव्यू पत्रकारों को लेने की बजाय पत्रकारों का इंटरव्यू शिक्षकों के द्वारा लिया जाता है।और कहा तो जितना प्रधाना ध्यापक का अधिकार नही होता है उससे कई ज्यादा अधिकार दो दिनों का मेहमान अतिथि शिक्षको को बोलने का अधिकार दिया जाता है।और अतिथि शिक्षको के पास इतना भी तजुर्बा नही होता की को कोई परिचय पूछते है तो उनका नाम पूछने से नाम वा परिचय नही बताया जाता है क्या शिक्षा विभाग के द्वारा यही संस्कार विद्यार्थियों को दिलाए जाने की सलाह अपने शिक्षा कर्मियों  को सिखाया जाता है और अगर ऐसे शिक्षको को आने वाले टाइम में भर्ती करेगी सरकार तो विद्यार्थियों का उज्वल भविष्य क्या कभी साकार हो सकेगी। अतिथि शिक्षक के द्वारा बनाया गया वीडियो रिकॉर्डिंग एकीकृत माध्यमिक विद्यालय नगमला के अतिथि शिक्षक को नाम पूछने पर नाम नही बताया गया और अपने मोबाइल का कैमरा चालू कर वीडियो बनाने में लग जाते है अगर बच्चो से कोई उनके ही किताब से कोई प्रश्न पूंछ लिया जाता है तो बच्चे उस प्रश्न का जवाब नही दे पाते है अगर वीडियो बनाने की जगह विद्यार्थियों को पढ़ाया लिखाया जाता तो सही तरीके से विद्यार्थियों अपना शिक्षा ग्रहण कर पाते और कभी कोई भी प्रश्न पूछने पर सही सही जवाब जरूर दे पाते ना की सिर नीचे कर लिया करते और सभी विभागों से अच्छा शिक्षा विभाग को माना गया है,जहां शिक्षा मिलती है ,लेकिन ऐसे शिक्षको के द्वारा शिक्षा विभाग वा अच्छा शिक्षा  कर्मचारियों को बदनाम करने के लिए तुले बैठे हैं।और सासन प्रशासन को भी बदनाम किया जाता है। समय से नही खुलता है, विद्यालय नही आते शिक्षक जानकारी के अनुसार बताया गया की शिक्षक अपने मनमानी से विद्यालय खोलते है और मनमानी से बंद किया जाता है और समय से विद्यालय में उपस्थित ही नही होते है और सौचालय मेंशिक्षको के द्वारा ताला लगाकर विद्यार्थियों को सौच के लिए नदी तालाब में भेजने के लिए मजबूर किया जाता है ,और बच्चों को डांट फटकार व प्रताड़ित भी किया जाता है।ग्रामीणों का कहना है की उचित व्यवस्था कराकर विद्यार्थियों की उज्ज्वल भविष्य की कामना करते है।

एक अप्रैल से जबलपुर में स्कूली वाहनों में एलपीजी किट का उपयोग होगा बंद

जबलपुर  शहर की सड़कों पर स्कूली बच्चों को एलपीजी (LPG) किट लगे असुरक्षित वाहनों में ढोना अब स्कूल प्रबंधकों और वाहन स्वामियों को भारी पड़ेगा। जिला प्रशासन ने छात्र सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए एक बड़ा निर्णय लिया है। कलेक्टर कार्यालय सभागार में आयोजित इस बैठक में जिला पंचायत सीईओ अभिषेक गेहलोत, आरटीओ संतोष पॉल और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (यातायात) अंजना तिवारी सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी व स्कूलों के प्राचार्य मौजूद रहे। एलपीजी वाहनों से छात्रों का परिवहन पूर्णतः प्रतिबंधित कलेक्टर राघवेंद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई महत्वपूर्ण बैठक में यह तय किया गया है कि एक अप्रैल से जिले के किसी भी शासकीय या अशासकीय विद्यालय में एलपीजी संचालित वाहनों से विद्यार्थियों का परिवहन पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। गैस किट वाले वाहन बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बैठक में स्कूली परिवहन की सुरक्षा समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि गैस किट वाले वाहन बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हैं। सड़कों पर होगा औचक निरीक्षण: आदेश के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पुलिस अधीक्षक और यातायात पुलिस को स्कूल समय के दौरान औचक निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, जिला शिक्षा अधिकारी घनश्याम सोनी को जिले के समस्त सीबीएसई, आइसीएसई और माध्यमिक शिक्षा मंडल से संबद्ध स्कूलों को इस आदेश से अवगत कराने और उनसे अनुपालन प्रतिवेदन लेने को कहा गया है। डेडलाइन तय एक अप्रैल के बाद यदि कोई स्कूल एलपीजी वाहन का उपयोग करता पाया गया, तो उसे नियमों का उल्लंघन माना जाएगा और संबंधित संस्था व वाहन स्वामी पर दंडात्मक कार्रवाई होगी। वैकल्पिक व्यवस्था स्कूल प्रबंधकों को निर्देशित किया गया है कि वे समय रहते इन वाहनों के स्थान पर वैधानिक रूप से अनुमन्य और फिटनेस प्रमाणित (पेट्रोल/डीजल/सीएनजी) वाहनों की व्यवस्था सुनिश्चित करें। सत्यापन अभियान आरटीओ को जिम्मेदारी दी गई है कि वे स्कूली वाहनों का भौतिक सत्यापन कर गैस किट वाले वाहनों की पहचान करें।     विद्यार्थियों का सुरक्षित परिवहन हमारी प्राथमिकता है। एक अप्रैल के बाद अवैध गैस किट वाले वाहन सड़कों पर नहीं दिखने चाहिए। उल्लंघन करने वाले स्कूलों और वाहन मालिकों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।     – राघवेंद्र सिंह, कलेक्टर  

भोपाल में प्राइवेट स्कूलों पर शिकंजा, कलेक्टर ने 8 जांच टीमें बनाई, शिकायत मिलने पर तुरंत कार्रवाई

भोपाल   मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में नए शैक्षणिक सत्र से पहले ही प्रशासन ने प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर बड़ा एक्शन ले लिया है। भोपाल कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने स्पष्ट आदेश जारी करते हुए कहा है कि कोई भी निजी स्कूल अब अभिभावकों पर किसी एक तय दुकान से यूनिफॉर्म, किताबें, कॉपियां या जूते खरीदने का दबाव नहीं बना सकेगा। कलेक्टर के निर्देश के बाद जिलेभर में निगरानी के लिए 8 विशेष टीमों का गठन किया गया है, जो शिकायत मिलते ही संबंधित स्कूल प्रबंधन पर तुरंत कार्रवाई करेंगी। एक दुकान से खरीदने की बाध्यता खत्म कलेक्टर द्वारा जारी आदेश में साफ कहा गया है कि प्राइवेट स्कूल किसी भी छात्र या पैरेंट्स को किसी विशेष दुकान से यूनिफॉर्म या किताबें खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। अगर किसी स्कूल द्वारा नियमों का उल्लंघन किया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले स्कूलों द्वारा अभिभावकों पर आर्थिक दबाव बनाने की शिकायतें सामने आ रही थीं, जिस पर प्रशासन ने यह कड़ा फैसला लिया है। शिकायत मिलते ही होगी कार्रवाई प्रत्येक अनुभाग में एसडीएम के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम बनाई गई है। इन टीमों में तहसीलदार और सरकारी स्कूलों के प्राचार्य शामिल हैं। कलेक्टर ने निर्देश दिए हैं कि जैसे ही किसी अभिभावक की शिकायत मिले, तुरंत जांच कर दोषी स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की जाए। भोपाल में गठित 8 विशेष टीमें कोलार – एसडीएम पी.सी. पांडेय शहर वृत्त – एसडीएम दीपक पांडेय एमपी नगर – एसडीएम एल.के. खरे गोविंदपुरा – एसडीएम भुवन गुप्ता टीटी नगर – एसडीएम अर्चना शर्मा बैरागढ़ – एसडीएम रविशंकर राय बैरसिया – एसडीएम आशुतोष शर्मा हुजूर – एसडीएम विनोद सोनकिया (हर टीम में तहसीलदार और शिक्षा विभाग के अधिकारी शामिल हैं) पैरेंट्स के लिए बड़ी राहत इस फैसले से भोपाल के हजारों अभिभावकों को राहत मिलेगी। अब स्कूल मनमाने तरीके से महंगी किताबें या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर पाएंगे। अगर कहीं भी दबाव बनाया जाता है तो पैरेंट्स सीधे प्रशासन से शिकायत कर सकते हैं।