samacharsecretary.com

स्कूलों की छुट्टी के लिए शिक्षा विभाग का प्रस्ताव, एमपी में गर्मी से बीमार हो रहे बच्चों को मिली राहत की उम्मीद

भोपाल  मध्यप्रदेश में भीषण गर्मी पड़ रही है। इससे बच्चों का स्वास्थ्य खराब हो रहा है। जबर्दस्त गर्मी के कारण बच्चों की सेहत पर पड़ते बुरे असर की शिकायतें बढ़ गई हैं। राजधानी भोपाल में ही स्कूलों में अनेक विद्यार्थी बीमार हुए हैं। ऐसे में अभिभावकों ने स्कूलों की छुट्टी घोषित करने की मांग की है। मामले में कलेक्टर से शिकायत करते हुए उन्हें पत्र सौंपा गया है। इस बीच कई प्राइवेट स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है। इधर तेज गर्मी को देखते हुए जिला शिक्षा विभाग ने स्कूलों में अवकाश घोषित करने का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। कलेक्टर की मंजूरी मिलते ही आदेश लागू कर दिया जाएगा। दोपहर में वैन और बस से वापसी ज्यादा भारी पड़ रही अभिभावकों ने बताया कि दोपहर में वैन और बस से वापसी ज्यादा भारी पड़ रही है। गर्मी में ये गर्म चैंबर की तरह प्रतीत हो रही है। इनमें दो से तीन घंटे का सफर तय कर बच्चे घर पहुंचते हैं। पैरेंट्स वॉइस एसोसिएशन के अध्यक्ष विवेक सिंह बताते हैं कि बढ़ते तापमान के बीच स्कूलों में बच्चों की दोपहर में आवाजाही सबसे ज्यादा पैरेंट्स वॉइस एसोसिएशन के अध्यक्ष विवेक सिंह बताते हैं कि बढ़ते तापमान के बीच स्कूलों में बच्चों की दोपहर में आवाजाही सबसे ज्यादा है। शहर में अधिकांश स्कूल बाहरी क्षेत्रों में हैं। यहां तक आने-जाने में लगने वाला समय ही तीन से चार घंंटे है। 12 बजे छुट्टी के बाद डेढ़ से दो बजे बच्चे घर पहुंचते हैं। यही हाल सुबह है। आधा दर्जन स्कूलों ने नर्सरी व प्राइमरी कक्षाओं का समय बदला, अभिभावकों को मैसेज से जानकारी दी: राजधानी के आधा दर्जन स्कूलों ने नर्सरी व प्राइमरी कक्षाओं का समय बदला है। अपने स्तर पर निर्णय लेते हुए कक्षा का समय 10.30 बजे किया गया। अभिभावकों को मैसेज से यह जानकारी दी गई। बाकी का समय पहले की ही तरह है। जिला शिक्षा अधिकारी नरेन्द्र अहिरवार ने बताया कि अभिभावकों की शिकायत के आधार पर मामले में प्रस्ताव तैयार किया भोपाल के जिला शिक्षा अधिकारी नरेन्द्र अहिरवार ने बताया कि अभिभावकों की शिकायत के आधार पर मामले में प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। यह प्रस्ताव कलेक्टर को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। उनकी अनुमति मिलते ही स्कूलों में अवकाश की घोषणा कर दी जाएगी। 2000 स्कूलों के बच्चे गर्मी के कारण आने जाने में परेशान राजधानी के 2000 स्कूलों के बच्चे गर्मी के कारण आने जाने में परेशान हैं। अब नजरें कलेक्टर के अगले आदेश पर टिकी हैं।

पंजाब में प्राइवेट स्कूलों के लिए किताबों की सीधी सप्लाई, बिचौलियों का खेल खत्म, अभिभावकों को मिली बड़ी राहत

 चंडीगढ़ पंजाब सरकार ने निजी स्कूलों के लिए पाठ्य-पुस्तकों के वितरण में एक बड़ा सुधार किया है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 से पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (पीएसईबी) से संबंधित निजी स्कूलों में पढ़ रहे पहली से बारहवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को किताबों की सप्लाई सीधे तौर पर बोर्ड द्वारा की जाएगी। इस पहल से न केवल अधिकृत एजेंसियों और किताबें बेचने वाली दुकानों की एकाधिकार व्यवस्था खत्म होगी, बल्कि विद्यार्थियों के अभिभावकों को भी राहत मिलेगी। नए सुधार की घोषणा करते हुए शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि यह निर्णय पारदर्शिता को बेहतर बनाने, परिवारों का खर्च कम करने और बिचौलियों पर निर्भरता घटाने के साथ-साथ पाठ्य-पुस्तकों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करेगा। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि स्कूल सख्ती से यह सुनिश्चित करेंगे कि पुस्तकों के लिए छपी हुई कीमत से अधिक पैसा न लिया जाए। यह केवल पुस्तकों के वितरण की सुविधा होगी, न कि राजस्व जुटाने का माध्यम। इससे निजी स्कूलों के दस लाख से अधिक विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा। शिक्षा मंत्री ने कहा कि 15 प्रतिशत छूट, जो पहले पुस्तक बेचने वालों को मिलती थी, अब सीधे तौर पर विद्यार्थियों को मिलेगी। 10 लाख से ज़्यादा छात्रों को होगा फायदा एक आधिकारिक बयान में कहा गया, "स्कूल इस बात का सख्ती से ध्यान रखेंगे कि बिल पर छपी रियायती कीमत से ज़्यादा कोई भी रकम न ली जाए. वे बिना कोई मुनाफा कमाए, सिर्फ किताबों के वितरण में मदद करेंगे. इससे निजी स्कूलों के 10 लाख से ज़्यादा छात्रों को फायदा होगा।  शिक्षा मंत्री ने बताया कि 15 प्रतिशत की जो छूट पहले किताब बेचने वालों को दी जाती थी, अब उसका सीधा फायदा स्कूलों के जरिए छात्रों को मिलेगा. उम्मीद है कि इस कदम से परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ काफी हद तक कम होगा और साथ ही व्यवस्था में ज़्यादा जवाबदेही आएगी।  शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस का बयान शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने इस सुधार की घोषणा करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना, परिवारों पर वित्तीय दबाव घटाना और किताबों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि यह कदम पूरी तरह जनहित में है और इससे निजी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों छात्रों को सीधा लाभ मिलेगा। पारदर्शिता और सख्त नियम लागू मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी स्थिति में पुस्तकों पर अंकित मूल्य से अधिक शुल्क नहीं लिया जाए। यह व्यवस्था केवल वितरण को सरल बनाने के लिए है, न कि अतिरिक्त आय का साधन बनने के लिए। सरकार के अनुसार, इस नई प्रणाली से राज्य के लगभग 10 लाख से अधिक निजी स्कूल छात्रों को फायदा होगा। इसकी कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से बताते हुए, मंत्री बैंस ने जानकारी दी कि PSEB ने इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए एक खास ई-कॉमर्स पोर्टल बनाया है. छात्र मोबाइल ऐप या ऑनलाइन पोर्टल के ज़रिए पाठ्यपुस्तकों की मांग कर सकेंगे, जबकि स्कूल कक्षा और विषय के हिसाब से अपनी ज़रूरतें डिजिटल रूप से अपलोड करेंगे. उन्होंने आगे कहा, "हर छात्र को अलग से लॉगिन क्रेडेंशियल (पहचान पत्र) दिए जाएंगे, ताकि ज़रूरत पड़ने पर माता-पिता सीधे ऑर्डर दे सकें।  पंजाब सरकार द्वारा सुलभ और किफायती शिक्षा पर दिए जा रहे प्रयासों को दोहराते हुए शिक्षा मंत्री ने बताया कि 15% की छूट, जो पहले केवल पुस्तक विक्रेताओं को दी जाती थी, अब स्कूलों के माध्यम से सीधे छात्रों को लाभ पहुंचाएगी। इस कदम से परिवारों पर वित्तीय बोझ काफी कम होने की उम्मीद है और साथ ही व्यवस्था में जवाबदेही भी बढ़ेगी। परिचालन ढांचे के बारे में विस्तार से बताते हुए मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने जानकारी दी कि पीएसईबी ने प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए एक समर्पित ई-कॉमर्स पोर्टल विकसित किया है। छात्र मोबाइल एप्लिकेशन या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से पाठ्यपुस्तकों की मांग कर सकेंगे, जबकि स्कूल कक्षावार और विषयवार आवश्यकताओं को डिजिटल रूप से अपलोड करेंगे। उन्होंने आगे कहा, “प्रत्येक छात्र को व्यक्तिगत लॉगिन क्रेडेंशियल प्रदान किए जाएंगे, जिससे आवश्यकता पड़ने पर अभिभावक सीधे ऑर्डर दे सकेंगे।” पीएसईबी के अध्यक्ष डॉ. अमरपाल सिंह ने बताया कि पोर्टल को सुरक्षित ऑनलाइन भुगतान गेटवे से एकीकृत किया गया है ताकि निर्बाध, पारदर्शी और कुशल लेनदेन सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली विशेष रूप से अधिक शुल्क लेने की किसी भी संभावना को खत्म करने और पूरी प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखने के लिए डिज़ाइन की गई है।  

लुधियाना के स्कूलों में फिर बम की धमकी, पुलिस ने ईमेल के बाद अलर्ट जारी किया

लुधियाना लुधियाना के स्कूलों को एक बार फिर से बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल जारी हुआ है। फिलहाल चार स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। इनमें स्प्रिंग डेल पब्लिक स्कूल, पौदार इंटरनेशनल स्कूल, मानव रचना इंटरनेशनल स्कूल, बीआरएस नगर का डीएवी पब्लिक स्कूल शामिल है। धमकी भरा ई-मेल जारी होने के बाद स्कूलों ने अभिभावकों के ग्रुपस में जानकारी शेयर की और पुलिस प्रशासन को भी सूचित कर दिया। स्प्रिंग डेल स्कूल ने तो बच्चों की छुट्टी कर दी। फिलहाल स्कूल में पुलिस की ओर से चैकिंग चल रही है। इससे पहले 10 मार्च को भी लुधियाना के कुछ स्कूलों को ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी मिली थी, जिससे हड़कंप मच गया था। सुबह करीब 7 बजे ई-मेल के जरिए सीबीएसई से संबंधित 3 स्कूलों को धमकी भरा संदेश मिला था, जिसमें स्कूल परिसर में बम होने की बात कही गई थी। धमकी भरा मेल मिलते ही स्कूल प्रबंधन ने तुरंत पुलिस और प्रशासन को सूचना दी थी। इसके बाद पुलिस, बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वॉड की टीमें मौके पर पहुंच गईं थी और स्कूल परिसरों की गहन तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया था। सुबह 9.15 पर मिली धमकी भरी ईमेल स्कूल के प्रिंसिपल अनिल शर्मा ने बताया कि सुबह करीब 9:15 बजे स्कूल को एक ईमेल के जरिए धमकी मिली। ईमेल में स्कूल को बम से उड़ाने की बात कही गई थी। धमकी मिलते ही स्कूल प्रशासन ने बिना देरी किए सभी विद्यार्थियों के अभिभावकों को सूचित किया और करीब 2500 छात्रों को सुरक्षित घर भेज दिया। स्कूल की चेयरपर्सन अविनाश कौर वालिया ने बताया कि जब ई-मेल मिला, उस समय स्कूल में बच्चे मौजूद थे। तुरंत पुलिस को सूचना दी गई और एहतियात के तौर पर सभी बच्चों को सुरक्षित घर भेज दिया गया। मिली जानकारी के अनुसार, सुबह करीब 9:30 बजे स्कूल प्रबंधन को एक ई-मेल प्राप्त हुआ, जिसमें दावा किया गया कि शहर के कई स्कूलों और रेलवे ट्रैक को निशाना बनाया जा सकता है। ई-मेल में यह भी कहा गया कि ‘ब्लैकआउट’ के कारण 23 और 24 अप्रैल को बड़े धमाके हो सकते हैं। धमकी के बाद रेलवे पुलिस और स्थानीय पुलिस ने रेलवे लाइनों की भी बारीकी से जांच शुरू कर दी है। मौके पर पहुंचे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। साइबर सेल की मदद से ई-मेल आईडी को ट्रेस किया जा रहा है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और किसी भी अफवाह पर विश्वास न करें। पूरे शहर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और हर जगह निगरानी बढ़ा दी गई है। फिलहाल पुलिस यह जांच कर रही है कि यह शरारत है या किसी बड़ी साजिश का हिस्सा। स्टाफ और अभिभावकों में चिंता का माहौल प्रिंसिपल अनिल शर्मा ने बताया कि स्कूल में इस तरह की धमकी पहली बार मिली है, जिससे स्टाफ और अभिभावकों में चिंता का माहौल है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। स्कूल प्रबंधन ने धमकी भरे ईमेल की आईडी पुलिस को सौंप दी है, जिसके आधार पर आरोपी की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। मामले की हर एंगल से जांच-पुलिस पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले को गंभीरता से लिया गया है और हर एंगल से जांच की जा रही है। जल्द ही सच्चाई सामने लाने का दावा किया गया है।

एमपी के मैहर जिले में कक्षा 5 तक स्कूलों की छुट्टियां, प्रशासन ने जारी किया आदेश

 मैहर  एमपी के मैहर जिले में कक्षा 5 तक छुट्टियां घोषित की गई है। इसके लिए आदेश जारी किया गया है। मैहर कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी द्वारा जारी आदेश के मुताबिक 21 अप्रैल से 30 अप्रैल तक छोटे बच्चों के स्कूल बंद रहेगे। शहर में भीषण गर्मी के कारण छात्रों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यह अहम निर्णय लिया गया है। जानकारी के मुताबिक, मैहर जिले में कक्षा नर्सरी से 5वीं तक के सभी स्कूलों में छुट्टी का ऐलान किया गया है। जिसमें सभी सरकारी, प्राइवेट और सीबीएसई और केंद्रीय स्कूल बंद रहेंगे। जबकि कक्षा 6 से 12 तक की कक्षाएं सुबह 7:30 से 12:30 बजे तक लगेगी। वहीं, शिक्षक दोपहर 1:30 बजे तक स्कूल में उपस्थित रहेंगे। मैहर कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी ने बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए ये आदेश जारी किया है। 21 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक अवकाश जारी आदेश के अनुसार, प्री-प्रायमरी से लेकर कक्षा 5वीं तक के सभी शासकीय, अशासकीय, केन्द्रीय, सीबीएसई और अन्य मान्यता प्राप्त विद्यालयों में 21 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक अवकाश रहेगा। Maihar Collector Order Heatwave हालांकि, कक्षा 6वीं से 12वीं तक के छात्रों के लिए स्कूल बंद नहीं किए गए हैं; उनकी कक्षाएं पूर्व निर्धारित समय यानी सुबह 7:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक यथावत संचालित रहेंगी। स्टाफ को दोपहर 1:30 बजे तक उपस्थित रहकर करना होगा काम विद्यालय के शैक्षणिक स्टाफ को दोपहर 1:30 बजे तक उपस्थित रहकर अपने प्रशासनिक कार्य पूर्ण करने होंगे। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि पहले से निर्धारित परीक्षाएं और अन्य आवश्यक कार्यक्रम अपने तय समय पर ही होंगे।मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, जिले में अधिकतम तापमान 42 डिग्री और न्यूनतम 28 डिग्री के आसपास रहने की संभावना है।  

योगी सरकार के तहत बेसिक शिक्षा में ऐतिहासिक सुधार, नामांकन से लेकर गुणवत्ता तक बदलाव

योगी सरकार में बदली बेसिक शिक्षा की तस्वीर, नामांकन से लेकर गुणवत्ता तक ऐतिहासिक सुधार  स्कूल चलो अभियान से लाखों बच्चों की वापसी, सरकारी स्कूलों पर बढ़ा भरोसा  ऑपरेशन कायाकल्प, स्मार्ट क्लास और DBT योजनाओं से शिक्षा व्यवस्था हुई मजबूत  लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में पिछले नौ वर्षों में बेसिक शिक्षा विभाग ने व्यापक और ठोस बदलाव दर्ज किया है। यह परिवर्तन केवल योजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जमीनी स्तर पर परिणाम के रूप में सामने आया है। परिषदीय विद्यालयों में स्कूल चलो अभियान के अंतर्गत नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2024-25 में 13.22 लाख और 2025-26 में 15.84 लाख बच्चों का नामांकन इसका प्रमाण है। इस वर्ष अप्रैल माह से गतिशील इस अभियान के अंतर्गत 20 अप्रैल तक, यानी मात्र 20 दिनों में ही 8 लाख 79 हजार से अधिक नए बच्चों का नामांकन दर्ज किया जा चुका है, जो परिषदीय शिक्षा को सार्वभौमिक बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। योगी सरकार ने आउट ऑफ स्कूल बच्चों की पहचान कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ा है। अवस्थापना के स्तर पर 1.32 लाख से अधिक विद्यालयों को ऑपरेशन कायाकल्प से जोड़ा गया। 2017-18 में मात्र 36 प्रतिशत स्कूल ही आधुनिक सुविधाओं से युक्त थे, जो अब बढ़कर 96.30 प्रतिशत हो गए हैं। 75 जनपदों में 150 मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं। तकनीक, प्रशिक्षण और पोषण योजनाओं के साथ शिक्षा को समग्र रूप से मजबूत किया गया है। स्पष्ट है कि योगी सरकार ने शिक्षा को प्राथमिकता दी और परिणाम अब व्यवस्थित रूप में दिख रहे हैं। नामांकन और मुख्यधारा से जुड़ाव प्रदेश में स्कूल चलो अभियान और सर्वे आधारित रणनीति ने शिक्षा से दूर बच्चों को जोड़ने में निर्णायक भूमिका निभाई है। वर्ष 2024-25 में 7.73 लाख आउट ऑफ स्कूल बच्चों की पहचान की गई। इनमें से 2.69 लाख बच्चों को कक्षा-1 में सीधे प्रवेश दिया गया, जबकि 5.04 लाख बच्चों को विशेष प्रशिक्षण के माध्यम से मुख्यधारा में जोड़ा गया। यह प्रयास केवल आंकड़ों की वृद्धि नहीं, बल्कि शिक्षा के अधिकार को धरातल पर लागू करने का उदाहरण है। लगातार बढ़ते नामांकन से यह स्पष्ट होता है कि सरकारी विद्यालयों के प्रति विश्वास भी मजबूत हुआ है। निःशुल्क सुविधाएं और छात्र हित सरकार ने आर्थिक बाधाओं को कम करने पर विशेष ध्यान दिया है। प्रतिवर्ष 1.30 करोड़ से अधिक विद्यार्थियों को DBT के माध्यम से यूनिफॉर्म, जूता-मोजा, स्वेटर, बैग और स्टेशनरी के लिए ₹1200 प्रति छात्र की सहायता दी जाती है। कक्षा 1 से 8 तक सभी विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें और कार्यपुस्तिकाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इन उपायों से अभिभावकों का आर्थिक बोझ कम हुआ है और स्कूलों में बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित हुई। अवस्थापना विकास में बड़ा सुधार ऑपरेशन कायाकल्प के तहत विद्यालयों की मूलभूत सुविधाओं में व्यापक सुधार हुआ है। 1.32 लाख से अधिक विद्यालय इस अभियान से आच्छादित हुए हैं। हर विद्यालय में डेस्क-बेंच, शौचालय, पेयजल, बिजली और कक्षाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। जिन विकास खंडों में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय नहीं थे, वहां नए आवासीय विद्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। साथ ही सभी प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल बनाने की दिशा में काम हो रहा है। मॉडल विद्यालयों से नई दिशा प्रदेश में शिक्षा के नए मानक स्थापित करने के लिए मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालय विकसित किए जा रहे हैं। 75 जनपदों में 150 विद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं। इन विद्यालयों में प्री-प्राइमरी से कक्षा 12 तक शिक्षा दी जाएगी। प्रत्येक विद्यालय पर लगभग 30 करोड़ रुपये की लागत आ रही है और कुल बजट 4500 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। हर विद्यालय में 1500 से अधिक छात्रों के अध्ययन की व्यवस्था होगी, जिससे कुल 2.25 लाख विद्यार्थी सीधे लाभान्वित होंगे। साथ ही 75 मुख्यमंत्री अभ्युदय कम्पोजिट विद्यालय भी विकसित किए जा रहे हैं, जहां आधुनिक सुविधाओं के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध होगी। यह पहल शिक्षा के मानकों को नई ऊंचाई देने वाली साबित हो रही है। तकनीक आधारित शिक्षा का विस्तार शिक्षा को आधुनिक बनाने के लिए डिजिटल संसाधनों का व्यापक उपयोग किया गया है। हजारों विद्यालयों में स्मार्ट क्लास और ICT (इन्फॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी) लैब स्थापित की गई हैं। 2.61 लाख शिक्षकों को टैबलेट वितरित किए गए हैं, जिससे शिक्षण प्रक्रिया अधिक प्रभावी और तकनीक आधारित बनी है। वर्ष 2024-25 में 4.53 लाख शिक्षकों और शिक्षामित्रों को फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरसी आधारित चार दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया, जबकि 2025-26 में 4.33 लाख शिक्षकों को पांच दिवसीय प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इसी क्रम में 1,32,828 परिषदीय विद्यालयों में पुस्तकालय स्थापित कर उन्हें क्रियाशील बनाया गया है। समग्र शिक्षा और पीएम योजना के तहत 2022-23 से 2024-25 तक कुल 25,954 विद्यालयों को स्मार्ट क्लास से आच्छादित किया गया है। 2025-26 में 5,924 अन्य विद्यालयों में स्मार्ट क्लास स्थापित किए गए। इसके साथ ही 880 ब्लॉक संसाधन केंद्रों में आईसीटी लैब स्थापित की जा चुकी हैं तथा 2023-24 और 2024-25 में 5,817 विद्यालयों को आईसीटी लैब से जोड़ा गया है, जबकि 2025-26 में 8,291 विद्यालयों में आईसीटी लैब स्थापना की गई।  बालिका शिक्षा को मजबूती कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय योजना के तहत 746 विद्यालय संचालित हैं, जिन्हें कक्षा 6 से 12 तक उच्चीकृत किया गया है। इनमें 87,647 बालिकाएं नामांकित हैं। स्मार्ट क्लास, ICT लैब, आत्मरक्षा प्रशिक्षण और खेल गतिविधियों से बालिकाओं का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा रहा है। यह पहल न केवल शिक्षा, बल्कि सामाजिक सशक्तीकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण है। समावेशी शिक्षा और सामाजिक न्याय दिव्यांग बच्चों के लिए समावेशी शिक्षा की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। वर्ष 2024-25 में 29, 241 बच्चों को और 2025-26 में 25,397 बच्चों के दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाए गए। इसके साथ ही सहायक उपकरण, एस्कॉर्ट अलाउंस और छात्रवृत्ति DBT के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है। इससे हर बच्चे को शिक्षा के दायरे में लाने का प्रयास सफल होता दिख रहा है। पीएम योजना और आरटीई के तहत अवसर पीएम योजना के अंतर्गत प्रदेश के 1,722 विद्यालयों को आच्छादित किया गया है, जहां स्मार्ट क्लास, ICT लैब और खेल सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। वहीं आरटीई के तहत 2024-25 में 1.65 लाख और 2025-26 … Read more

बच्चों की कलम से:सोशल मीडिया और हम

बच्चों की कलम से:सोशल मीडिया और हम रायपुर  आज के दौर में सोशल मीडिया हमारे जीवन का एक अहम हिस्सा बन चुका है। यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि इसका हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है—क्या यह लाभदायक है या केवल हानिकारक? और क्या यह वास्तव में आवश्यक है? आइए, इन सभी प्रश्नों पर विचार करें।सोशल मीडिया का प्रचलन दिन-प्रतिदिन तेजी से बढ़ रहा है। बच्चे, युवा और बुजुर्ग—हर वर्ग के लोग घंटों इसका उपयोग करते हैं। स्थिति यह है कि एक समय ऐसा भी आ सकता है जब युवा पीढ़ी इसे ही अपना सच्चा मित्र मानने लगे। इंस्टाग्राम या यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर कोई भी इन्फ्लुएंसर कुछ नया करता है, तो वह तुरंत वायरल हो जाता है। विशेषकर बच्चों को ऐसी चीजें बहुत आकर्षित करती हैं। धीरे-धीरे सोशल मीडिया उनके मनोरंजन का मुख्य साधन बनता जा रहा है। लेकिन यह स्थिति चिंताजनक भी हो सकती है, क्योंकि यदि युवा केवल मनोरंजन में ही उलझ जाएं, तो यह उनके भविष्य के लिए घातक सिद्ध हो सकता है। सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग पढ़ाई में बाधा उत्पन्न करता है। इसके साथ ही, कई लोगों में घबराहट, अवसाद और अनिद्रा जैसी समस्याएं भी देखी गई हैं। इसलिए इसका संतुलित उपयोग अत्यंत आवश्यक है। हालांकि, सोशल मीडिया के सकारात्मक पहलू भी हैं। इसके माध्यम से लोगों में जागरूकता बढ़ी है और विश्वभर की घटनाओं की जानकारी आसानी से मिल जाती है। यह शिक्षा, शोध कार्यों और नई जानकारी प्राप्त करने का एक सशक्त माध्यम बन चुका है। इसके अलावा, कई लोग सोशल मीडिया का उपयोग आत्मविकास और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के लिए भी कर रहे हैं। यह आत्मविश्वास बढ़ाने और सही-गलत की समझ विकसित करने में भी सहायक साबित हो सकता है। अंततः, सोशल मीडिया का प्रभाव पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि हम इसका उपयोग कैसे करते हैं। गलत उपयोग इसे बोझ और नुकसानदायक बना सकता है, जबकि सही उपयोग से यह सफलता की राह भी खोल सकता है। आज के समय में सोशल मीडिया आवश्यक तो है, लेकिन इसके प्रति सजग रहना और संतुलन बनाए रखना अत्यंत जरूरी है। यदि युवा इसका सही दिशा में उपयोग करें, तो वे जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। जान्हवी सिंह ब्राइटन इंटरनेशनल स्कूल

स्वर्णिम उपलब्धि: बाल भारती पब्लिक स्कूल, सीपत ने रचा सफलता का नया इतिहास

स्वर्णिम उपलब्धि: बाल भारती पब्लिक स्कूल, सीपत ने रचा सफलता का नया इतिहास CBSE कक्षा 10वीं में शत-प्रतिशत परिणाम, अनुष्का मंडल बनी टॉपर (98.8%) सीपत, बिलासपुर एनटीपीसी सीपत स्थित बाल भारती पब्लिक स्कूल ने सीबीएसई कक्षा दसवीं परीक्षा सत्र (2025–26) में शत-प्रतिशत परिणाम प्राप्त कर उत्कृष्टता की नई मिसाल पेश की है। विद्यालय के विद्यार्थियों ने न केवल बेहतरीन अंक हासिल किए, बल्कि समग्र प्रदर्शन से संस्था की शैक्षणिक गुणवत्ता को भी सिद्ध किया। विद्यालय की प्रतिभाशाली छात्रा अनुष्का मंडल ने 98.8% अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान हासिल किया। वहीं शौर्य साहू एवं सस्मित राज ने 98.6% अंकों के साथ द्वितीय स्थान प्राप्त किया, जबकि अयमान तनवीर ने 98% अंक अर्जित कर तृतीय स्थान हासिल किया। परिणाम में उत्कृष्टता का प्रमाण कुल 66 विद्यार्थियों में से— 23 विद्यार्थियों ने 90% से अधिक अंक प्राप्त किए 47 विद्यार्थियों ने 80% से अधिक अंक अर्जित किए 61 विद्यार्थियों ने 70% से अधिक अंक हासिल किए यह आँकड़े विद्यालय की उच्चस्तरीय शिक्षा प्रणाली और अनुशासित वातावरण को दर्शाते हैं। विषयवार शत-प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले छात्र विभिन्न विषयों में विद्यार्थियों ने उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की— शौर्य साहू – गणित, संस्कृत एवं एआई सस्मित राज – गणित, सोशल साइंस एवं संस्कृत अनुष्का मंडल – संस्कृत एवं एआई अयमान तनवीर – सोशल साइंस एवं एआई गौरव बनर्जी – संस्कृत एवं एआई साईप्रदा साहू – सोशल साइंस एवं संस्कृत इसके अतिरिक्त— दर्शिल सुब्रत (गणित) पान्या सना कुजूर, साग्निक डे सरकार (संस्कृत) यामिनी भार्गव, अवनी जैन, सोहम शर्मा (एआई) ने 100 में से 100 अंक प्राप्त कर अपनी असाधारण प्रतिभा का परिचय दिया।   विद्यालय के प्राचार्य शलभ निगम ने इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि— “यह सफलता विद्यार्थियों के कठिन परिश्रम, शिक्षकों की समर्पित मेहनत एवं अभिभावकों के सहयोग का परिणाम है। हमारा उद्देश्य केवल परीक्षा परिणाम नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास—चरित्र, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता—को विकसित करना है।” इस शानदार सफलता के साथ बाल भारती पब्लिक स्कूल, सीपत ने जिले में अपनी विशिष्ट पहचान को और अधिक मजबूत किया है तथा आने वाले वर्षों के लिए नई प्रेरणा स्थापित की है।

CBSE Class 10th: चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों ने टॉप किया, अभय सिंह बने टॉपर

चंडीगढ़ चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों ने सीबीएसई 10वीं बोर्ड परीक्षा 2025-26 के नतीजों में अपनी सफलता का परचम लहराया है. इस साल सरकारी स्कूलों के शैक्षणिक स्तर में जबरदस्त सुधार देखने को मिला है, जिसने शहर के शिक्षा मॉडल की मजबूती को एक बार फिर साबित कर दिया है।  आंकड़ों में बड़ी छलांग इस साल चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों का कुल पास प्रतिशत बढ़कर 88.25% पहुंच गया है, जो पिछले साल (81.18%) के मुकाबले 7.07% ज्यादा है. दिलचस्प बात यह है कि इस बार परीक्षा में बैठने वाले छात्रों की संख्या (9,356) पिछले साल की तुलना में थोड़ी कम थी, लेकिन पास होने वाले छात्रों की संख्या (8,257) बढ़ गई है. यह आंकड़ा दर्शाता है कि पढ़ाई की गुणवत्ता पर दिया गया जोर रंग ला रहा है।  होनहारों ने गाड़े झंडे इस बार न केवल पास होने वालों की संख्या बढ़ी है, बल्कि 'हाई स्कोरर्स' की लिस्ट भी लंबी हुई है. 95% से अधिक अंक लाने वाले छात्रों की संख्या पिछले साल 11 थी, जो इस बार लगभग दोगुनी होकर 21 हो गई है. वहीं, 120 से ज्यादा छात्रों ने 90% से अधिक अंक हासिल किए हैं।  शहर के चमकते सितारे: अभय सिंह (GMSSS सेक्टर 33-D): 98.8% सान्वी बिंजोला (GGMSSS सेक्टर 20-B): 98.4% विष्णु देव (GMSSS सेक्टर 35-D): 98.2% इसके अलावा अनुज शर्मा (97.4%), रिधिमा (96.8%) और जयकृत सिंह (96.8%) ने भी शानदार प्रदर्शन किया है।  17 स्कूलों का 'परफेक्ट' स्कोर स्कूल स्तर पर भी नतीजे बेहद उत्साहजनक रहे हैं. शहर के 17 सरकारी स्कूलों ने 100% पास प्रतिशत हासिल किया है. वहीं, 23 स्कूल ऐसे रहे जहाँ 95% से ज्यादा छात्र सफल हुए. 10 अन्य स्कूलों ने भी 90 से 95 फीसदी के बीच शानदार प्रदर्शन किया है।  शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, इस सफलता के पीछे साल भर चली कड़ी मेहनत और सटीक रणनीति है. कमजोर छात्रों के लिए एक्स्ट्रा क्लासेज, स्ट्रक्चर्ड रिवीजन प्लान और मेंटरिंग प्रोग्राम जैसे कदमों ने नतीजों को बेहतर बनाने में बड़ी भूमिका निभाई।  शिक्षा निदेशक, चंडीगढ़ ने इस उपलब्धि पर छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों को बधाई दी है. उन्होंने कहा कि विभाग का लक्ष्य अब 'मिशन 100%' को पूरी तरह हासिल करना है ताकि आने वाले समय में शहर का हर सरकारी स्कूल शत-प्रतिशत रिजल्ट दे सके। 

अबेर की बेटी कृति सिंह ने 92.6% अंक प्राप्त कर गार्डियन गाइड पब्लिक हायर सेकंडरी स्कूल सतना का नाम किया रोशन

सतना जिले में संचालित गार्डियन गाइड पब्लिक हायर सेकेण्डरी स्कूल में अध्ययन कर रही 10वीं की मेधावी छात्रा कृति सिंह पिता श्री कमलेंद्र सिंह(लाला) एवं माता विद्या सिंह निवासी ग्राम पंचायत अबेर हायर एमपी बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते 92.6 प्रतिशत अंक हासिल कर एक बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। उनकी इस सफलता से न केवल परिवार बल्कि पूरे विद्यालय एवं क्षेत्र में हर्ष का माहौल है। सतना जिले की गार्डियन गाइड पब्लिक विद्यालय की इस मेधावी छात्रा ने कठिन परिश्रम, निरंतर अभ्यास और अनुशासित अध्ययन के बल पर सभी विषयो में विशेष योग्यता अर्जित कर शानदार परिणाम प्राप्त किया। परीक्षा परिणाम घोषित होते ही विद्यालय परिसर में खुशी की लहर दौड़ गई और सहपाठियों ने उन्हें बधाई दी।ग्राम पंचायत अबेर निवासी युवा समाजसेवी कमलेंद्र सिंह ने इस सफलता पर गर्व व्यक्त करते हुए ने कहा कि कृति सिंह ने लगन और मेहनत से यह उपलब्धि हासिल की है। माता विद्या सिंह ने बताया कि मुझे गर्व महसूस हो रहा है कि मेरी बेटी ने स्कूल के साथ मेरा भी मान बढ़ाया है क्योंकि "पढ़ेंगी बेटियां तभी तो आंगें बढ़ेगीं बेटियां"  छात्रा ने इस उपलब्धि का श्रेय गुरुजनों और माता पिता को दिया है।

आत्मानंद स्कूल में एडमिशन की शुरुआत: सीमित सीटों पर लॉटरी से मिलेगा मौका

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, मनेंद्रगढ़ में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित इस विद्यालय में इच्छुक छात्र-छात्राएं अब निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवेदन कर सकते हैं। जारी सूचना के अनुसार प्रवेश हेतु आवेदन प्रक्रिया 10 अप्रैल 2026 से प्रारंभ हो चुकी है, जो 5 मई 2026 को शाम 5:00 बजे तक जारी रहेगी। अभ्यर्थी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन के लिए अभिभावक CGSchool Portal के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। विद्यालय द्वारा जारी सीटों के विवरण के अनुसार कक्षा 1वीं में 50 सीटें उपलब्ध हैं। वहीं कक्षा 3वीं, 4वीं और 5वीं में 1-1 सीट, कक्षा 7वीं में 2 सीटें तथा कक्षा 8वीं में 6 सीटें रिक्त हैं। इसके अलावा कक्षा 11वीं में कॉमर्स, जीव विज्ञान और गणित संकायों में 5-5 सीटें निर्धारित की गई हैं। सभी कक्षाओं में बालक एवं बालिकाओं के लिए समान रूप से प्रवेश की सुविधा उपलब्ध रहेगी। विद्यालय प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी कक्षा में उपलब्ध सीटों से अधिक आवेदन प्राप्त होते हैं, तो पात्र अभ्यर्थियों का चयन पारदर्शी लॉटरी प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। इसकी सूचना अभ्यर्थियों को पूर्व में ही दे दी जाएगी। अभिभावकों और विद्यार्थियों से अपील की गई है कि वे अंतिम तिथि से पहले आवेदन प्रक्रिया पूर्ण कर लें, ताकि किसी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके। गुणवत्तापूर्ण अंग्रेजी माध्यम शिक्षा को बढ़ावा देने और क्षेत्र के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक अवसर प्रदान करने की दिशा में यह पहल अहम मानी जा रही है।