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आज शेयर बाजार में धमाकेदार तेजी, सेंसेक्स ने 1000 अंक बढ़ाए, निफ्टी 22850 तक पहुंचा!

मुंबई  शेयर बाजार में तेजी के साथ शुरुआत हुई है. गिफ्ट निफ्टी सुबह तेजी के साथ भारतीय बाजार खुलने के संकेत मिल रहे थे. सेंसेक्स 1065 अंक की बढ़त के साथ 73761 पर खुला है और निफ्टी 336 अंक की तेजी के साथ 22849 पर ओपन हुआ है. ईरान और इजराइल वॉर के चलते सभी सेक्टोरल इंडेक्स में बिकवाली हावी रही लेकिन आज ऑटो, मेटल, कैपिटल मार्केट, पीएसयू बैंक. डिफेंस में खरीदारी देखी जा रही है. डिफेंस सेक्टर में 2 फीसदी से ज्यादा की बढ़त आई है. इसके अलावा निफ्टी ऑटो और मेटल में भी 2 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी है।  निफ्टी गेनर्स में एशियन पेंट्स, श्रीराम फाइनेंस, टाइटन, जियो फाइनेंशियल, एल एंड टी और Interglobe Aviation के शेयर्स शामिल हैं. वहीं, पावर ग्रिड के शेयर्स 1 फीसदी की गिरावट देखी जी रही है. लेकिन क्या आज जानते हैं कि इस ताबड़तोड़ तेजी के पीछे की वजह क्या है? इन वजहों से आई शेयर बाजार में तेजी इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह ये है कि पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान सामने आया है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि 5 दिन के लिए पावर प्लांट पर हमले के प्लान को टाल दिया गया है. ट्रंप के इस बयान के बाद कच्चे तेल की कीमतों में 10 प्रतिशत की गिरावट देखी गई. अमेरिका में डाउ 600 पॉइंट से ज्यादा चढ़ा और तेल की कीमतें भी काफी गिर गईं, हालांकि बाद में दोनों में थोड़ी गिरावट भी देखी गई. फिलहाल तेल की कीमतें अभी भी ऊंचे स्तर पर हैं और करेंसी में बदलाव पर भी नजर रखना जरूरी है. सीएनबीसी के एनालिस्ट के अनुसार, निफ्टी के लिए 23,000 एक अहम सपोर्ट लेवल है, जबकि 23,200–23,300 का लेवल आगे रेजिस्टेंस की तरह काम कर सकता है। बैंकिंग शेयर्स में खरीदारी रिकवरी में बैंकिंग शेयरों ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई है. HDFC Bank, ICICI Bank और State Bank of India जैसे शेयरों में तेजी आई, जिससे पूरा बाजार को मजबूती मिली है. साथ ही ऑटो, कैपिटल गुड्स और टेलीकॉम सेक्टर में भी खरीदारी देखने को मिली, जो दिखाता है कि तेजी सिर्फ एक सेक्टर तक सीमित नहीं है।  गिफ्ट निफ्टी ने दिए तेजी के संकेत GIFT Nifty जोकि भारतीय बाजार की शुरुआत का शुरुआती संकेत देता है, शुरुआती कारोबार में करीब 520 अंक तक उछल गया. इससे भी संकेत मिल रहा था कि बाजार 12 महीने के निचले स्तर के आसपास से रिकवरी दिखा सकता है. इसके अलावा एशियन मार्केट में भी तेजी के साथ कारोबार होते हुए नजर आया।  मंगलवार को रुपये में थोड़ी मजबूती देखने को मिली है, क्योंकि तेल की कीमतों में गिरावट आई थी और ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत के संकेत दिए थे. रुपया डॉलर के मुकाबले 93.64 पर खुला, जो पिछले सेशन के 93.9750 से बेहतर था, जब यह अपने रिकॉर्ड निचले स्तर 93.98 तक पहुंच गया था. हालांकि, ईरान द्वारा बातचीत से इनकार करने से बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है और आगे की दिशा अभी साफ नहीं है. वोलैटिलिटी इंडेक्स (VIX), जोकि बाजार में आने वाले उतार-चढ़ाव का संकेत देता है, 4% से ज्यादा गिरकर 25.60 पर आ गया है. निवेशकों के बीच अनिश्चितता कम हुई है और बाजार में डर थोड़ा कम हो गया है. जिससे तेजी का मूड देखा जा रहा है। 

निवेशकों में हड़कंप: ट्रंप बयान से शेयर बाजार धड़ाम, निफ्टी 550 अंक टूटा

मुंबई आज शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण एशियाई बाजारों में गिरावट आई है। इसका असर घरेलू शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। सेंसेक्स लगभग 1,800 अंकों की गिरावट के साथ 72,700 पर कारोबार कर रहा है। वहीं, निफ्टी भी लगभग 550 अंक गिरकर 22,650 के स्तर पर आ गया है। आज बैंकिंग, ऑटो, FMCG और IT सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिल रही है। सेंसेक्स में शामिल सभी 30 शेयर आज लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं। इस गिरावट के चलते BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन 7.74 लाख करोड़ कम होकर 421 लाख करोड़ रह गया है। इस बीच, शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुँच गया। शुरुआती कारोबारी घंटों के दौरान, रुपया अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 0.1 प्रतिशत कमजोर होकर 93.83 पर आ गया। पिछले सत्र में, इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 93.53 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था, जो 64 पैसे की बड़ी गिरावट थी। वैश्विक तनाव बढ़ने के बीच, विदेशी पूंजी के लगातार बाहर जाने और कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल के कारण रुपया इस समय दबाव में है। किन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट आई? सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 28 में गिरावट आई है, जबकि निफ्टी के 50 शेयरों में से 48 नीचे कारोबार कर रहे हैं। टाटा स्टील, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज और JSW स्टील में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली है। इसके विपरीत, ONGC और HCL Tech में बढ़त दर्ज की गई है। वहीं, NSE निफ्टी इंडिया वोलैटिलिटी इंडेक्स 10 प्रतिशत बढ़कर 25.09 पर पहुँच गया। यह निवेशकों के बीच फैले डर का एक संकेत है। व्यापक बाजार में, निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 1.90 प्रतिशत गिरा है, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 2.18 प्रतिशत नीचे आया है। सेक्टर के हिसाब से, निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली है, जो लगभग 3 प्रतिशत नीचे आया है। Nifty Bank और Nifty Metal इंडेक्स में भी गिरावट देखने को मिली है। इस बीच, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। Brent crude $113 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है, जो 77 सेंट ज्यादा है। US का बेंचमार्क, WTI crude, 1.05 प्रतिशत बढ़कर $99.26 प्रति बैरल पर पहुँच गया। शेयर बाजार क्यों गिरा? US के राष्ट्रपति Donald Trump ने चेतावनी दी है कि अगर Iran 48 घंटों के भीतर Strait of Hormuz को फिर से नहीं खोलता है, तो उसके पावर प्लांट तबाह कर दिए जाएँगे। इस वजह से आज एशियाई बाजारों में भारी गिरावट देखने को मिली। South Korea का शेयर बाजार खुलते ही लगभग छह प्रतिशत तक गिर गया। Japan के शेयर बाजार में भी चार प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली।

ट्रंप के शांति संदेश से शेयर बाजार हरा, सेंसेक्स 77,945.95 तक पहुँचा, निफ्टी में 106 अंक की उछाल

मुंबई बेंचमार्क शेयर बाजार के सूचकांक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान युद्ध में तनाव कम करने वाली टिप्पणियों के बाद हरे रंग में खुले। एसएंडपी BSE सेंसेक्स 379.79 अंक बढ़कर 77,945.95 पर पहुंचा, जबकि NSE निफ्टी50 106.40 अंक की तेजी के साथ 24,134.45 पर पहुंच गया (सुबह 9:28 बजे तक)। चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट ने कहा कि क्रूड की कीमतों में अत्यधिक अस्थिरता ने दुनियाभर के शेयर बाजारों में भी उथल-पुथल मचा दी है। उन्होंने कहा, "कल क्रूड की कीमतों में पैनिक रिएक्शन ने ब्रेंट क्रूड को लगभग $120 तक पहुंचा दिया था, जो आज सुबह $89 तक गिर गया। एक ही दिन में लगभग $30 की यह चरम उतार-चढ़ाव पश्चिम एशियाई संघर्ष के वैश्विक क्रूड आपूर्ति पर पड़ने वाले असमंजस को दर्शाती है।" 

West Asia संकट का असर: शेयर बाजार धड़ाम, सेंसेक्स 1353 अंक गिरा

मुंबई पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचने से वैश्विक बाजारों में गिरावट का माहौल देखने को मिल रहा है। इसके चलते सोमवार को घरेलू शेयर बाजार के बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में करीब दो प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा, विदेशी निधियों की निरंतर निकासी और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने निवेशकों की भावना पर भारी असर डाला। रुपया 53 पैसे गिरकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर 92.35 पर बंद हुआ। 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1,352.74 अंक या 1.71 प्रतिशत गिरकर 77,566.16 पर बंद हुआ, लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई। दिन भर में, यह सूचकांक 2,494.35 अंक या 3.16 प्रतिशत गिरकर 76,424.55 पर पहुंच गया। इसी क्रम में, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 422.40 अंक या 1.73 प्रतिशत गिरकर 24,028.05 पर बंद हुआ। दिन के दौरान इसमें 752.65 अंक या 3.07 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 23,697.80 पर पहुंच गया। सेंसेक्स की कंपनियों का हाल सेंसेक्स पैक में अल्ट्राटेक सीमेंट को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ, इसके शेयरों में 5.23 प्रतिशत की गिरावट आई, इसके बाद मारुति, महिंद्रा एंड महिंद्रा, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, इंटरग्लोब एविएशन और अदानी पोर्ट्स प्रमुख रूप से पिछड़ने वाले शेयरों में शामिल थे। इसके विपरीत, रिलायंस इंडस्ट्रीज, सन फार्मा, इंफोसिस, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक को लाभ हुआ। क्यों गिरा बाजार? ऑनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थ टेक फर्म एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि कमजोर वैश्विक संकेतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण निवेशकों की भावना पर भारी नकारात्मक प्रभाव पड़ा, जिसके चलते भारतीय शेयर बाजार लगभग 3 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ खुले और सत्र के अंत में तेजी से नीचे बंद हुए। उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक जोखिमों में वृद्धि ने कच्चे तेल की कीमतों को 100 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के निशान से ऊपर धकेल दिया और भारतीय रुपये को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा दिया, जिससे मुद्रास्फीति और बाहरी संतुलन को लेकर चिंताएं बढ़ गईं। यूरोपीय बाजारों में दिखी गिरावट एशियाई बाजारों में, दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक 5.96 प्रतिशत और जापान का निक्केई 225 सूचकांक 5.20 प्रतिशत गिर गया। शंघाई का एसएसई कंपोजिट सूचकांक और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक भी नकारात्मक दायरे में बंद हुए। यूरोप के बाजारों में सत्र के मध्य में काफी गिरावट देखी गई। अमेरिकी बाजार शुक्रवार को भारी गिरावट के साथ बंद हुआ। ब्रेंट क्रूड का भाव उछलकर 104.1 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड में 12.34 प्रतिशत की उछाल आई और यह 104.1 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। बाजार विनिमय आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने शुक्रवार को 6,030.38 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने पिछले कारोबार में 6,971.51 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। शुक्रवार को सेंसेक्स 1,097 अंक या 1.37 प्रतिशत गिरकर 78,918.90 पर बंद हुआ। निफ्टी 315.45 अंक या 1.27 प्रतिशत गिरकर 24,450.45 पर समाप्त हुआ। पिछले सप्ताह, बीएसई बेंचमार्क 2,368.29 अंक या 2.91 प्रतिशत गिर गया, और निफ्टी 728.2 अंक या 2.89 प्रतिशत गिर गया।

सेंसेक्स 2400 और निफ्टी 700 अंक लुढ़का

नई दिल्ली. अमेरिका-ईरान युद्ध ने भारतीय शेयर बाजार को गहरी चोट दी है. पिछले छह सत्रों में से पांच में बाजार में गिरावट देखने को मिली है. खास बात यह है कि पिछले चार दिनों में ही निवेशकों को 13.46 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है. कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल ने दलाल स्ट्रीट का मूड बुरी तरह बिगाड़ दिया और निवेशकों ने ताबड़तोड़ बिकवाली की. आखिरी कारोबारी सत्र यानी शुक्रवार को भारतीय बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी 50 ताश के पत्तों की तरह ढह गए. कारोबार के आखिरी घंटों में बिकवाली का ऐसा भूचाल आया कि सेंसेक्स 1,097 अंक लुढ़ककर 78,918.90 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी ने भी 315.45 अंक का गोता लगाई और 24,450.45 के स्तर पर सिमट गया. बीएएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप, जो 27 फरवरी को 463.25 लाख करोड़ रुपये था वह 6 मार्च तक घटकर 449.79 लाख करोड़ रुपये रह गया. बाजार विश्‍लेषक मान रहे हैं कि युद्ध लंबा चला तो यह नुकसान और भी गहरा हो सकता है. 52 हफ्ते के निचले स्तर पर कई नामी कंपनियां बाजार में बिकवाली का आलम यह था कि बीएसई 500 की कई दिग्गज कंपनियां अपने 52 हफ्ते के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गईं. इनमें एसीसी लिमिटेड, अंबुजा सीमेंट्स, बर्जर पेंट्स इंडिया, इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड और सोनाटा सॉफ्टवेयर जैसी कंपनियां शामिल हैं. 4,374 शेयरों में से 2,304 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि 258 शेयर अपने साल के सबसे निचले स्तर को छू गए. बैंकिंग सेक्टर में ‘रक्तपात’ बाजार की इस गिरावट में सबसे बड़ी भूमिका बैंकिंग सेक्टर ने निभाई. सेंसेक्स के शेयरों में आईसीआईसीआई बैंक सबसे बड़ा लूजर रहा, जिसके शेयर 3.39% तक गिर गए. इसके अलावा एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक और भारतीय स्टेट बैंक में भी 2% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई. बीएसई बैंकेक्स और बीएसई ऑटो इंडेक्स में भारी बिकवाली रही. अल्ट्राटेक सीमेंट और लार्सन एंड टुब्रो जैसे भारी वजन वाले शेयरों ने भी बाजार को नीचे खींचने में कोई कसर नहीं छोड़ी. हालांकि, इस सुनामी के बीच भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल), रिलायंस इंडस्ट्रीज और सन फार्मास्युटिकल जैसे शेयरों ने थोड़ी मजबूती दिखाई और हरे निशान में बंद हुए. संभलेगा या और गिरेगा बाजार शेयर बाजार विश्‍लेषकों का मानना है कि निफ्टी के लिए अब 24,600 और 24,700 के स्तर बड़ी रेजिस्टेंस बन गए हैं. यदि निफ्टी 24,300 के स्तर से नीचे फिसलता है तो यह तेजी से 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर तक गिर सकता है. युद्ध की अनिश्चितता के बीच निवेशकों को फिलहाल आक्रामक खरीदारी से बचना चाहिए.

मध्य पूर्व संकट का असर: शेयर बाजार धड़ाम, सेंसेक्स 1,097 अंक लुढ़का; बैंकिंग स्टॉक्स दबाव में

मुंबई मध्य पूर्व में संघर्ष के चलते भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार के कारोबारी सत्र में बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 1,097 अंक या 1.37 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 78,918.90 और निफ्टी 315.45 अंक या 1.27 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 24,450.45 पर था। बाजार में गिरावट बैंकिंग शेयरों की तरफ से आई। निफ्टी बैंक 2.15 प्रतिशत की गिरावट के साथ 57,783.25 पर बंद हुआ। इसके अलावा, निफ्टी रियल्टी 2.09 प्रतिशत, निफ्टी पीएसयू बैंक 2.01 प्रतिशत, निफ्टी सर्विसेज 1.81 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो 1.06 प्रतिशत, निफ्टी कंजप्शन 1.02 प्रतिशत, निफ्टी इन्फ्रा 0.89 प्रतिशत और निफ्टी मीडिया 0.58 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। दूसरी तरफ निफ्टी इंडिया डिफेंस 2.77 प्रतिशत, निफ्टी एनर्जी 0.13 प्रतिशत, निफ्टी पीएसई 0.12 प्रतिशत और निफ्टी आईटी 0.04 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुआ। लार्जकैप की अपेक्षा मिडकैप और स्मॉलकैप में कम बिकवाली देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 0.69 प्रतिशत या 399.20 अंक की कमजोरी के साथ 57,393.35 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 39.90 अंक की गिरावट के साथ 16,498.90 पर था। सेंसेक्स पैक में बीईएल, सनफार्मा, एनटीपीसी, इन्फोसिस और एचसीएल टेक गेनर्स थे। आईसीआईसीआई बैंक, इटरनल, एक्सिस बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट,एचडीएफसी बैंक, एसबीआई, बजाज फिनसर्व, एलएंडटी, इंडिगो, मारुति सुजुकी, भारती एयरटेल, ट्रेंट, कोटक महिंद्रा बैंक, बजाज फाइनेंस और एचयूएल लूजर्स थे। बाजार में बड़ी गिरावट के पीछे बड़ा कारण अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध का जारी रहना है। युद्ध के लंबा चलने से अब एनर्जी की आपूर्ति को भी जोखिम पैदा हो गया है, जिससे निवेशकों के सेंटीमेंट पर नकारात्मक प्रभाव हुआ है। इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली भी भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बनाने का काम कर रही है। एफआईआई ने गुरुवार को 3,752.52 करोड़ रुपए के इक्विटी की बिकवाली की थी। युद्ध के चलते कच्चे तेल में भी तेजी जारी है। डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब 80 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड का दाम 84 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है।

सेंसेक्स 500 अंक टूटा, निफ्टी 24,600 के पास, बाजार गिरने की वजह क्या है?

मुंबई शेयर बाजार में आज 6 मार्च को जोरदार गिरावट के साथ बाजार खुले हैं. सुबह 9:22 बजे पर सेंसेक्स 542 अंक गिरकर 79,472 के करीब ट्रेड कर रहा और निफ्टी 169 अंक फिसलकर 24,607 पर कारोबार कर रहा है. बैंक निफ्टी में 14 में से 10 शेयर्स में गिरावट देखने को मिल रही है. बाजार में आज 1021 शेयरों में बढ़त देखने को मिली, 1011 शेयरों में गिरावट रही, जबकि 195 शेयर बिना बदलाव के नजर आ रहे है. भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, इंफोसिस, एचसीएल टेक, टीसीएस और विप्रो निफ्टी टॉप गेनर्स हैं. वहीं, इंटरग्लोब एविएशन, आईसीआईसीआई बैंक, टाटा स्टील, अल्ट्राटेक सीमेंट और एलएंडटी निफ्टी टॉप लूजर्स में शामिल रहे हैं।  बाजार में वोलैटिलिटी थोड़ी बढ़ी है, इंडिया VIX करीब 3.5% बढ़कर 18.48 पर पहुंच गया, जो बाजार में अनिश्चितता को दिखाता है. यह गिरावट पिछले सेशन की तेज रैली के बाद आई है, जब सेंसेक्स करीब 900 अंक उछला था और निफ्टी 285 अंक से ज्यादा चढ़ा था. कल 5 मार्च को मेटल, इंफ्रास्ट्रक्चर, एनर्जी और ऑटो शेयरों में व्यापक खरीदारी देखने को मिली थी।  किन वजहों से शेयर बाजार लुढ़का? ग्लोबल बाजारों में रातोंरात माहौल सतर्क होता हुआ नजर आया है. अमेरिकी शेयर बाजार गुरुवार को गिरावट के साथ बंद हुए, जहां डॉव जोन्स 780 से ज्यादा अंक टूट गया. मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण तेल की कीमतें बढ़ीं, जिससे महंगाई और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को लेकर चिंता बढ़ गई. वहीं एशियाई बाजार भी शुक्रवार सुबह कमजोर कारोबार करते दिखे, और लंबे समय से जारी जियो-पॉलिटिकल टेंशन के बीच क्षेत्रीय बाजार छह साल की सबसे बड़ी वीकली गिरावट की ओर बढ़ते नजर आए. आज गिफ्ट निफ्टी 169.50 अंक यानी 0.68% गिरकर 24,626.50 पर कारोबार करता दिखा था, जिससे संकेत मिल रहे हैं थे कि शुक्रवार को दलाल स्ट्रीट की शुरुआत कमजोर हो सकती है।  एनालिस्ट की राय जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर के अनुसार, अमेरिकी अमेरिकी ड‍िप्‍टी सेक्रेटरी के कमेंट के बाद निवेशकों का भरोसा बढ़ा है, जिसमें संकेत मिला कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील जल्द पूरी हो सकती है. हालिया करेक्शन के बाद मेटल, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, रियल्टी और ऑटो सेक्टर में वैल्यू बाइंग भी देखने को मिली. वहीं, गुरुवार को भारतीय रुपये की मजबूती के कारण आईटी शेयरों में गिरावट का सिलसिला जारी रहा. मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच हाल के दिनों में तेज बढ़त के बाद शुक्रवार को एशियाई कारोबार की शुरुआत में तेल की कीमतों में 2% से ज्यादा गिरावट देखने को मिली है।   

शेयर बाजार में भारी गिरावट: सेंसेक्स 1000 अंक टूटा, 5 लाख करोड़ का नुकसान

मुंबई  सप्‍ताह का आखिरी कारोबारी दिन शेयर बाजार निवेशकों के लिए काफी दर्दनाक रहा. इंट्राडे के दौरान सेंसेक्‍स 1000 अंक और निफ्टी 320 अंक से ज्यादा टूट गए थे. हालांकि कारोबार बंद होने पर शेयर बाजार में थोड़ी रिकवरी रही, फिर भी सेंसेक्‍स 961 अंक या 1.17 फीसदी टूटकर 81287 लेवल पर बंद हुआ और निफ्टी 317 अंक या 1.25 फीसदी गिरकर 25178 पर आ गया.  बीएसई टॉप 30 शेयरों में से 25  शेयर लाल निशान पर बंद हुए. सबसे ज्‍यादा गिरावट सनफार्मा, महिंद्रा एंड महिंद्रा, भारती एयरटेल, बजाज फिनसर्व और इंडिगो के शेयरों में रही. एफएमसीजी के साथ ही कुछ आईटी शेयरों में भी दबाव दिखाई दिया. बैंकिंग स्‍टॉक भी दबाव में कारोबार करते हुए दिखाई दिए.  क्‍यों आई ये बड़ी गिरावट?     एक्‍सपर्ट्स इस गिरावट को जियो-पॉलिटिकल टेंशन से जोड़ रहे हैं. अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को लेकर अपडेट सामने आया है, जिसमें दोनों पक्षों के बीच अभी कोई समझौता होता हुआ नहीं दिख रहा है. उधर, अमेरिकी सेना  अपनी तैयारियों में जुटी हुई है.      इसके अलावा, अफगानिस्तान और पाकिस्‍तान के बीच जंग छिड़ गई है, जिस कारण एशियाई बजारों में भी दबाव दिखा है, जिस कारण भारतीय शेयर बाजार भी प्रभावित हुआ है.     अमेरिकी S&P 500 और यूरोपीय बाजारों में कमजोरी देखने को मिली है.  टेक-हेवी एशियाई बाजारों ने भी NASDAQ की कमजोरी को फॉलो किया, जिससे भारतीय बाजार दबाव दिखाई दिया.     विदेशी निवेशकों की ओर से लगातार बिकवाली हो रही है.गुरुवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने करीब 3,465.99 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जिससे शेयर बाजार में गिरावट हावी हुई.  5 लाख करोड़ स्‍वाहा भारतीय शेयर बाजार में गिरावट के कारण बीएसई कैपिटलाइजेशन 468.49 लाख करोड़ से घटकर 463.51 लाख करोड़ हो चुका है. इस हिसाब से देखा जाए तो निवेशकों की वैल्‍यूवेशन में 5 लाख करोड़ रुपये की कटौती हुई है. 2,528  शेयरों में गिरावट  बीएसई पर 4,369 एक्टिव शेयरों में से आज 1,660 शेयरों में तेजी रही, जबकि 2,528  शेयर गिरावट पर बंद हुए और 181 शेयर अनचेंज रहे. 340  शेयर 52 सप्‍ताह के निचले स्‍तर पर थे और 100 शेयर 52 वीक के हाई पर पहु्ंच गए. 9 शेयरों में लोअर सर्किट रहा और 10 शेयर 52 वीक के हाई पर पहु्ंच गए. 

बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स 1236 अंक टूटा, निफ्टी ने खोया 25500 का स्तर

मुंबई अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच गुरुवार को भारतीय बाजार लाल निशान पर बंद हुआ। बेंचमार्क इक्विटी सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। लगातार तीन दिनों से जारी तेजी का सिलसिला रुकते हुए, 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1236.11 अंक या 1.48 प्रतिशत गिरकर 82,498.14 पर बंद हुआ। 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 365.00 अंक या 1.41 प्रतिशत गिरकर 25,454.35 पर बंद हुआ। सेंसेक्स की कंपनियों का हाल सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में इंडिगो, महिंद्रा एंड महिंद्रा, अल्ट्राटेक सीमेंट, ट्रेंट, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, अदानी पोर्ट्स, कोटक महिंद्रा बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, टेक महिंद्रा, आईटीसी, इटरनल और पावरग्रिड प्रमुख रूप से पिछड़ने वाली कंपनियां रहीं। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के अनुसंधान प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक बाजार की भावना को अस्थिर कर दिया, जिससे व्यापक स्तर पर बिकवाली हुई और भारतीय बाजार में मंदी का माहौल छा गया।" उन्होंने आगे कहा कि ब्रेंट क्रूड की कीमत साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है, जिससे मुद्रास्फीति संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य में यातायात अवरुद्ध होने के डर से बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। नायर ने कहा कि इसी बीच, अमेरिकी फेड द्वारा ब्याज दरों में कटौती की दिशा को लेकर अनिश्चितता और रुपये की निरंतर कमजोरी ने घरेलू बाजार को प्रभावित किया। प्रमुख एशियाई बाजारों में चंद्र नव वर्ष की छुट्टी के कारण विदेशी निवेशकों की कम भागीदारी और भारत में क्षेत्रीय बैंकिंग अवकाश के कारण कारोबार बंद रहने से बिकवाली तेज हो गई। यूरोपीय बाजारों में दिखी गिरावट एशियाई बाजारों में, दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक 3 प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ, जबकि जापान का निक्केई 225 सूचकांक 1 प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ। हांगकांग और मुख्य भूमि चीन के बाजार चंद्र नव वर्ष की छुट्टियों के कारण बंद रहे। यूरोपीय बाजारों में सत्र के मध्य में गिरावट देखी जा रही है। अमेरिकी शेयर बाजार बुधवार को बढ़त के साथ बंद हुआ। ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर 71.07 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा इसी बीच, वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 1.02 प्रतिशत बढ़कर 71.07 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गया।एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बुधवार को 1,154.34 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भी 440.34 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। बुधवार को 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 283.29 अंक बढ़कर 83,734.25 पर बंद हुआ, जबकि व्यापक एनएसई निफ्टी 93.95 अंक बढ़कर 25,819.35 पर बंद हुआ।

बाजार में जोरदार रैली, सेंसेक्स 950 अंक चढ़ा, HDFC बैंक और ट्रेड डील ने बढ़ाया उत्साह

मुंबई  शेयर बाजार में आज का दिन ‘डर से जीत’ की कहानी जैसा रहा. सुबह के सत्र में भारी बिकवाली के दबाव के बाद दोपहर में बाजार ने जोरदार यू-टर्न लिया. सेंसेक्स जो करीब 81,700 के स्तर तक फिसल गया था, वह तेजी से रिकवर होकर 82,689 के पास पहुंच गया. इसी तरह निफ्टी ने भी 25,159 के अपने निचले स्तर से शानदार बाउंस बैक किया और दिन के कारोबार में 25,458 के हाई तक पहुंचा. बाजार के इस टर्नअराउंड ने ट्रेडर्स के चेहरे पर मुस्कान लौटा दी है. इस रिकवरी के पीछे HDFC बैंक की मजबूत खरीदारी और भारत-यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुई ट्रेड डील का बड़ा हाथ माना जा रहा है. इसके साथ ही बाजार में तकनीकी स्तर पर आई शॉर्ट कवरिंग ने भी सूचकांकों को ऊपर धकेलने में ईंधन का काम किया, जिससे शॉर्ट-टर्म सेंटिमेंट में बड़ा सुधार आया है. बाजार के इस यू-टर्न के पीछे 3 बड़े और ठोस कारण रहे हैं 1. HDFC बैंक: इंडेक्स का ‘संकटमोचक’ बाजार की इस रिकवरी का सबसे बड़ा क्रेडिट HDFC बैंक को जाता है. इंडेक्स के इस सबसे बड़े दिग्गज शेयर में दूसरे हाफ में जबरदस्त खरीदारी देखी गई. HDFC बैंक अकेले दम पर निफ्टी और सेंसेक्स को ऊपर खींचने वाला सबसे बड़ा योगदानकर्ता (Single Biggest Contributor) बनकर उभरा. जबरदस्त ‘शॉर्ट कवरिंग’ तकनीकी मोर्चे पर देखें तो बाजार में ‘शॉर्ट कवरिंग’ का सहारा मिला. जो ट्रेडर्स सुबह मंदी की पोजीशन बनाकर बैठे थे, वे बाजार की मजबूती देखकर फंस गए और उन्हें अपनी पोजीशन कवर करने के लिए मजबूर होना पड़ा. यह शॉर्ट कवरिंग बैंकिंग सेक्टर और बड़े मार्केट कैप वाले शेयरों में सबसे ज्यादा आक्रामक रही, जिससे इंडेक्स को रफ्तार मिली. भारत-ईयू ट्रेड डील और FIIs की वापसी बाजार के सेंटिमेंट को सबसे ज्यादा मजबूती भारत-ईयू एफटीए (FTA) के बाद मिले विदेशी निवेश से मिली. 28 जनवरी को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने कई हफ्तों की लगातार बिकवाली के बाद ₹480 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की. इस ट्रेड डील को भारत के लिए एक बड़े ‘स्ट्रक्चरल पॉजिटिव’ के रूप में देखा जा रहा है, जिससे ग्लोबल इन्वेस्टर्स का भरोसा एक बार फिर भारतीय बाजार पर लौटता दिख रहा है.