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जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने बदला खेल: AI के 4 ऐतिहासिक बदलाव

नई दिल्ली 2025 का साल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के लिए बहुत बड़ा बदलाव लेकर आया। साल की शुरुआत में AI को लोग एक स्मार्ट टूल की तरह देखते थे। लेकिन दिसंबर आते-आते यह एक बड़ी ताकत बन गया, जो इंटरनेट के ट्रैफिक, जॉब मार्केट, नियम-कानून और देशों की ताकत को प्रभावित करने लगा। अब दुनियाभर में इस पर चर्चा हो रही है कि AI को कैसे कंट्रोल किया जाए, ताकि यह तबाही न मचा सके। साथ ही इस पर बहस हो रही है कि गलती होने पर जिम्मेदारी किसकी होगी। बहरहाल, इस साल ऐ बदलावों ने एआई को घर-घर में पहुंचा दिया। चलिए, जान लेते हैं कि इस साल AI की दुनिया में कौनसे बड़े बदलाव आए जिन्होंने चौंकाया। ताकतवर AI मॉडल लॉन्च हुए इसी साल OpenAI ने अगस्त में GPT-5 लॉन्च किया, जो सबसे ताकतवर मॉडल था। इसमें 'बिल्ट-इन थिंकिंग' फीचर था। इसके अलावा, एंथ्रोपिक ने मई में Claude 4 जारी किया, जिसमें बेहतर सोचने, कोडिंग करने और निर्देशों को फॉलो करने की क्षमता है। अब AI सिर्फ जवाब देने वाला नहीं, बल्कि सॉफ्टवेयर में असिस्टेंट की तरह काम करने लगा। AI इमेज-वीडियो ट्रेंड आए इस साल गूगल का नैनो बनाना टूल भी आया। इसमें प्रॉम्प्ट डालकर लोगों ने मन मुताबिक तस्वीरें बनाईं। विशेषकर, साड़ी वाला ट्रेंड खूब पॉपुलर हुआ। इसका इस्तेमाल कर लोगों ने विंटेज लुक अपनाया। इसी तरह से गिबली ट्रेंड भी लोगों ने इस्तेमाल किया। ताजा ट्रेंड सेलिब्रिटीज के साथ सेल्फी वीडियो बनाने का है। ये ट्रेंड लोगों में खूब मशहूर हुए। AI रोबोट बनाने लगी दुनिया इस साल एआई रोबोट्स सबसे ज्यादा चलन में देखने को मिले। जो कार कंपनियां गाड़ी बनाती थीं, वे अब एआई रोबोट भी बनाने लगी है। इसके अलावा, एलन मस्क की कंपनी भी ऑप्टिमस रोबोट बना रही है, इन्हें दुनिया के सामने रखा भी। इसी तरह चीन में भी UBTECH और Unitree जैसी दिग्गज कंपनियां एआई रोबोट बना रही हैं। चीन ने वियतनाम बॉर्डर पर एआई रोबोट तैनात करने का फैसला भी किया है। CES 2026 में दुनिया भर के ताकतवर एआई रोबोट्स की नुमाइश भी होने वाली है। मल्टीमॉडल और जेनरेटिव एआई की प्रगति एआई मॉडल्स अब टेक्स्ट, इमेज, वीडियो और ऑडियो को एक साथ हैंडल कर रहे हैं, जिससे नेचुरल इंटरैक्शन और कंटेंट क्रिएशन आसान हुआ। जेनरेटिव एआई क्रिएटिव कामों, बिजनेस ऑटोमेशन और एज एआई में प्रमुख ट्रेंड रहा।

थार रेगिस्तान में खुला सोने का खजाना, बाड़मेर करेगा चीन का खेल खत्म; देश की टेक्नोलॉजी और डिफेंस को बड़ा बल

बाड़मेर  पश्चिम राजस्थान का बाड़मेर अब सिर्फ थार नहीं बल्कि दुनिया की नई ‘ऊर्जा राजधानी’ बनकर उभर रहा है. सिवाना की धरती में नियोबियम जैसे रेयर अर्थ खनिजों का ऐसा खजाना मिला है, जिसका घनत्व दुनिया के औसत से 100 गुना ज्यादा बताया जा रहा है. इलेक्ट्रिक कार, रॉकेट साइंस, हाई-टेक डिफेंस सिस्टम और परमाणु ऊर्जा में इस्तेमाल होने वाले रेयर अर्थ की खोज की जा रही है. चीन जिस रेयर अर्थ मेटल पर दुनिया को सालों से बांधे बैठा है, अब वही धागा बाड़मेर के हाथ में है. सिवाना की चट्टानों में नियोबियम का ऐसा विशाल भंडार मिला है, जिसे भू वैज्ञानिक ‘भविष्य की तकनीक की रीढ़’ मानते हैं. इलेक्ट्रिक कारों से लेकर मिसाइल, रॉकेट और परमाणु ऊर्जा तक हाई-टेक उद्योग में इस्तेमाल होने वाली यह धातु अब चीन के बजाय भारत की धरती से निकलेगी. 100 गुना अधिक घनत्व वाले रेयर अर्थ का खुलासा भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) की शुरुआती रिपोर्टों ने सिवाना की चट्टानों में नियोबियम और अन्य रेयर अर्थ तत्वों के उच्च घनत्व का खुलासा हुआ है. सिवाना की पहाड़ियों में मिले रेयर अर्थ दुनिया के औसत घनत्व से 100 गुना तक अधिक पाया गया है. अब बाड़मेर न सिर्फ चीन की बढ़त तोड़ देगा बल्कि वैश्विक तकनीकी बाज़ार में भारत को नई ताकत भी देगा. इसके लिए सिवाना के भाटीखेड़ा में एक ब्लॉक का ऑक्शन भी किया जा रहा है. सिवाना में यहां है रेयर अर्थ का भंडार सिवाना के कमठाई, दांता, लंगेरा, राखी, थापन, भाटीखेड़ा, फूलन व डण्डाली में रेयर अर्थ के बड़े भण्डार मिले है. सिवाना के चारों तरफ एक गड्ढेनुमा रचना है, जिसमें ग्रेनाइट और रॉयलाइट व एल्केलाइन आग्नेय चट्टानें हैं. इसे सिवाना रिंग्स कॉम्पलेक्स और मालानी रॉक्स के नाम से भी जाना जाता है. रेगिस्तान में मिले हैं यह रेयर अर्थ बाड़मेर के सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स में गैलेनियम, रूबीडियम, इप्रीयम, थोरियम, यूरेनियम, सीरियम, टिलूरियम, यूरेनियम सहित करीब 15 प्रकार के खनिज हैं जो भू-वैज्ञानिकों के मुताबिक लेंथोनोइट ग्रुप के हैं. इसका उपयोग सुपर कंडक्टर, हाई प्लग्स, मैग्नेट, इलेक्ट्रॉनिक पॉलिसिंग, ऑयल रिफाइनरी में केटिलिस्ट, हाईब्रिड कार कंपोनेंट एवं बैटरी के लिए किया जाता है.  कैंसर दवा, बैटरी, लेजर, एरोस्पेस के लिए भी यह उपयोगी है. चीन को मात देंने के लिए मौजूद है रेयर अर्थ के भंडार सिवाना की पहाड़ियों में करीब 900 अरब से अधिक का खजाना छुपा हुआ है. इससे करीब 6 हजार मेट्रिक टन उत्पादन का अनुमान लगाया जा रहा है. बाड़मेर के वरिष्ठ भू वैज्ञानिक सी.पी. दाधीच के मुताबिक सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स में भाटीखेड़ा ब्लॉक को ऑक्शन किया जाएगा. यहां चीन को मात देने के लिए विशाल रेयर अर्थ के भंडार मौजूद है.

मुख्यमंत्री ने किया ‘मेक इन सिलिकॉन’ संगोष्ठी का शुभारंभ

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी अंतरराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) नवा रायपुर के 10वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय ‘मेक इन सिलिकॉन’ संगोष्ठी का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि यह आयोजन भारत को सेमीकंडक्टर निर्माण और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर करने वाला एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ अपना रजत जयंती वर्ष मना रहा है और आज राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ का भी ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने इस अवसर पर प्रदेशवासियों और ट्रिपल आईटी परिवार को बधाई दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह संस्थान महान शिक्षाविद् डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर स्थापित है, जिन्होंने शिक्षा, एकता और औद्योगिक विकास को राष्ट्र की प्रगति से जोड़ा। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत आज तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने सेमीकंडक्टर मिशन, इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप निर्माण के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल की हैं। यह मिशन न केवल बुनियादी ढांचा विकसित कर रहा है, बल्कि युवाओं को सशक्त बनाने और नवाचार को प्रोत्साहन देने का भी कार्य कर रहा है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सेमीकंडक्टर आज आधुनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है— मोबाइल, सैटेलाइट, रक्षा प्रणाली और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सभी इससे जुड़े हैं। ऐसे में ‘मेक इन सिलिकॉन’ जैसी पहल भारत की चिप क्रांति को नई दिशा देने में सहायक सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ इस मिशन में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की नई औद्योगिक नीति में सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में कुशल मानव संसाधन, सुदृढ़ औद्योगिक ढांचा, निर्बाध बिजली आपूर्ति और तकनीकी विकास के लिए अनुकूल माहौल उपलब्ध है।  नवा रायपुर में सेमीकंडक्टर यूनिट की स्थापना का भूमिपूजन हो चुका है, जिससे युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने कहा कि नवा रायपुर को आईटी और इनोवेशन हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य का ‘छत्तीसगढ़ अंजोर विजन डॉक्यूमेंट’ सतत विकास पर केंद्रित है, जिसमें सेमीकंडक्टर को प्रमुख क्षेत्र के रूप में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार  इज ऑफ डूइंग बिज़नेस के साथ अब स्पीड आफ डूइंग बिज़नेस पर भी बल दे रही है। मुख्यमंत्री ने देशभर से आए विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस संगोष्ठी से न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश को लाभ मिलेगा। उन्होंने आह्वान किया कि “हम सब मिलकर छत्तीसगढ़ को मध्य भारत का ज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार का केंद्र बनाएं तथा भारत के सेमीकंडक्टर मिशन में सक्रिय योगदान दें।” वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि जब मैं पढ़ाई कर रहा था, तब छत्तीसगढ़ में एक भी राष्ट्रीय स्तर का संस्थान नहीं था। किंतु पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की दूरदर्शी नेतृत्व क्षमता के कारण आज प्रदेश में आईआईटी, आईआईएम, एचएनएलयू, एम्स, एनआईटी और ट्रिपल आईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान स्थापित हुए हैं। इन संस्थानों ने राज्य को उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में नई पहचान दी है। चौधरी ने कहा कि वर्तमान समय में छत्तीसगढ़ में शिक्षा और तकनीकी विकास की अपार संभावनाएँ हैं। आज का युग टेक्नोलॉजी-ड्रिवन इकोनॉमी का है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हाल ही में माइक्रोसॉफ्ट के सर्वर डाउन होने से विश्वभर में जिस प्रकार कार्य प्रभावित हुए, उससे स्पष्ट है कि पावर टेक्नोलॉजी आज जीवन, अर्थव्यवस्था और वैश्विक प्रणाली को किस हद तक प्रभावित करती है। इसलिए हमें इन चुनौतियों का सामना करने के लिए अभी से तैयार रहना होगा। उन्होंने कहा कि नवाचार, कौशल और काबिलियत ही भविष्य में आपकी वास्तविक उपयोगिता सिद्ध करेंगे। बड़ी उपलब्धियाँ वही व्यक्ति प्राप्त करता है, जो अपनी क्षमता को निरंतर तराशता है। युवाओं को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि परिवर्तन हमेशा दृष्टिकोण, संकल्प और निरंतर प्रयास से आता है। साउथ कोरिया के तकनीकी परिवर्तन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि “हमें भी उसी प्रकार शिक्षा, तकनीक और शोध में निवेश बढ़ाकर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ना होगा।” वित्त मंत्री ने युवाओं से आह्वान किया कि वे तकनीकी दक्षता, शोध और रचनात्मक सोच को अपने जीवन का आधार बनाएं, क्योंकि आने वाला समय उन्हीं का होगा जो ज्ञान और नवाचार को अपनी शक्ति बनाएंगे। उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि सेमीकंडक्टर और औद्योगिक क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ‘मेक इन सिलिकॉन’ संगोष्ठी एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप शैक्षणिक संस्थान सेमीकंडक्टर क्षेत्र में शोध और नवाचार को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार उच्च शिक्षा और तकनीकी क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने युवाओं से कहा कि “आपका नवाचार और आपका संकल्प भारत की तकनीकी पहचान को नई ऊँचाई देगा।” डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी अंतरराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) नवा रायपुर के निदेशक प्रो. ओम प्रकाश व्यास ने अतिथियों को संस्थान की 10 वर्षों की उपलब्धियों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि संस्थान में विकसित भारत की अवधारणा के अनुरूप शिक्षण, अनुसंधान और नवाचार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। छात्रों के कौशल विकास और क्षमता निर्माण के लिए उन्नत तकनीकी प्रशिक्षण एवं उद्योग आधारित परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। इस अवसर पर ट्रिपल आईटी इलाहाबाद के निदेशक प्रो. मुकुल सुतावणे, आईआईटी इंदौर के प्रो. संतोष विश्वकर्मा, मनोज कुमार मजूमदार सहित शिक्षाविद् एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहीं। उल्लखेनीय है कि ‘मेक इन सिलिकॉन’ – स्वदेशी सेमीकंडक्टर इंफ्रास्ट्रक्चर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी – ट्रिपल आईटी नया रायपुर के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार अभियांत्रिकी (ECE) विभाग के माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स और वीएलएसआई डिजाइन समूह द्वारा आयोजित की जा रही है। इस संगोष्ठी का उद्देश्य भारत की सेमीकंडक्टर क्षमताओं को सशक्त बनाना और आत्मनिर्भर सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण को प्रोत्साहित करना है। यह आयोजन शिक्षा जगत, उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के बीच नवाचार, ज्ञान-विनिमय और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक सशक्त मंच है, जिससे भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा सके। संगोष्ठी में वीएलएसआई डिजाइन और माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स … Read more

तकनीक और परंपरा के संगम से सिंहस्थ-2028 को मिलेगा स्मार्ट स्वरूप

11 राज्यों की 36 टीम ने प्रस्तुत किए डिजिटल नवाचार हैकाथॉन-2025 का ग्रैंड फिनाले आईआईएसईआर भोपाल में प्रारंभ भोपाल उज्जैन महाकुंभ हैकाथॉन-2025 का ग्रैंड फिनाले बुधवार को भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर) भोपाल में प्रारंभ हुआ। दो दिवसीय आयोजन में भारत के 11 राज्यों की प्रतिभाएं एक मंच पर आईं और सिंहस्थ-2028 को तकनीक के जरिए और बेहतर बनाने के लिए डिजिटल समाधान प्रस्तुत किए। हैकाथॉन में 26 राज्यों से 1,726 पंजीकरण हुए और 932 नवीन विचार प्रस्तुत किए गए। कड़े मूल्यांकन के बाद मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, उड़ीसा, केरल, गुजरात, दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु की 36 टीम फिनाले में पहुंचीं।इस हैकाथॉन ने “एक भारत-एक साथ नवाचार” की भावना को जीवंत किया है। मध्यप्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आयोजित इस हैकाथॉन-2025 का लक्ष्य शासन, जन सुरक्षा और नागरिक कल्याण के लिए तकनीक का उपयोग करना है। समारोह में आईआईएसईआर भोपाल के निदेशक प्रो. गोवर्धन दास ने कहा कि “कुंभ मेला सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक एकता का प्रतीक है। यह हैकाथॉन परंपरा और तकनीक के खूबसूरत मेल को दर्शाता है।” एमपीएसईडीसी के परियोजना निदेशक श्री अंशुमन राज ने इसे सरकारी चुनौतियों को समाधान में बदलने का शानदार अवसर बताया। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ-2028 नागरिकों के लिए स्मार्ट सुरक्षा प्रणालियाँ विकसित करने का अवसर है। कार्यकारी निदेशक डॉ. संदीप गोयल ने इसे विचारों और विविधता का संगम कहा जो सिंहस्थ जैसे विशाल आयोजन को और बेहतर बनाएगा। समारोह में एनईजीडी के निदेशक श्री अभिषेक अनंत भी उपस्थित थे। 36 फाइनलिस्ट टीम ने स्मार्ट मोबिलिटी, सुरक्षा और निगरानी, स्वास्थ्य और स्वच्छता एवं डिजिटल अनुभव और सांस्कृतिक विसर्जन जैसे चार प्रमुख क्षेत्रों में अपने प्रोटोटाइप प्रस्तुत किए। उल्लेखनीय परियोजनाओं में क्राउडगार्ड एआई:वास्तविक समय में सुरक्षा सुनिश्चित करने वाली प्रणाली, एआई-मूव सिंहस्थ: तीर्थयात्रियों के प्रवाह को प्रबंधित करने का समाधान, एकीकृत पार्किंग प्रबंधन प्लेटफॉर्म (केरल): पार्किंग की समस्या का तकनीकी हल शामिल हैं, दर्शिनी एआई: सांस्कृतिक अनुभव को डिजिटल रूप से जीवंत करने वाला प्रोजेक्ट शामिल हैं। गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, ओरेकल और आईआईएसईआर के विशेषज्ञों वाले निर्णायक मंडल ने इन नवाचारों की रचनात्मकता की जमकर प्रशंसा की और रचनात्मक सुझाव भी दिए। हैकाथॉन का दूसरा दिन 9 अक्टूबर को अंतिम प्रदर्शन, मूल्यांकन के साथ समाप्त होगा।अपर मुख्य सचिव श्री संजय दुबे मुख्य अतिथि होंगे। शीर्ष तीन विजेता टीम को 18 लाख, 5 लाख और 3 लाख रुपये के नकद पुरस्कार के साथ इनक्यूबेशन और मेंटरशिप के अवसर मिलेंगे। उज्जैन महाकुंभ हैकाथॉन-2025 मध्यप्रदेश के तकनीकी नवाचार में अग्रणी भूमिका को रेखांकित करता है। यह आयोजन भारत की सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल भविष्य से जोड़ते हुए समावेशी और नागरिक-केंद्रित शासन को बढ़ावा देता है। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच हैकाथॉन परंपरा और नवाचार के मेल का प्रतीक बनकर उभरा है, जो राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा प्रभाव छोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।