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झारखंड राज्यसभा चुनाव में नथवानी फैक्टर! जीत का रिकॉर्ड बरकरार रहेगा या हेमंत सोरेन की रणनीति पड़ेगी भारी?

 नई दिल्ली झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों पर चुनाव हो रहे हैं. इन राज्यसभा दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवार चुनावी मैदान में किस्मत आजमा रहे हैं, जिसके चलते गुरुवार को वोटिंग होगी. बीजेपी के समर्थित प्रत्याशी परिमल नाथवानी के उतरने से मुकाबला रोचक बन गया है. इसके साथ ही क्रॉस वोटिंग का खतरा भी बन गया है।  कारोबारी और सांसद के रूप में पहचान रखने वाले नथवानी की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत उनके चुनावी जीत का रिकॉर्ड है. नथवानी अब तक तीन चुनाव जीत चुके हैं और कोई चुनाव नहीं हारे हैं. चौथी बार राज्यसभा चुनाव के लिए मैदान में उतरे हैं, लेकिन जीत के लिए बीजेपी का समर्थन ही काफी नहीं है।  झारखंड की सियासत में सीएम हेमंत सोरेन के अगुवाई में जेएमएम और कांग्रेस ने दोनों राज्यसभा सीटें जीतने की रणनीति बनाई है. जेएमएम-कांग्रेस के चक्रव्यूह को तोड़कर क्या परिमल नथवानी एक बार फिर इतिहास रच पाएंगे?  झारखंड की दो सीट पर 3 प्रत्याशी झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए तीन प्रत्याशी मैदान में है. जेएमएम से बैजनाथ राम और कांग्रेस से प्रणव झा चुनाव लड़ रहे हैं तो निर्दलीय तौर पर परिमल नथवानी किस्मत आजमा रहे हैं. नथवानी को बीजेपी का समर्थन है, जिसके चलते मुकाबला रोचक हो गया है. राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कम से कम 28 विधायकों का प्रथम वरीयता के आधार पर वोट चाहिए।  झारखंड विधानसभा में महागठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं, जिनमें जेएमएम के 34, कांग्रेस के 16, आरजेडी के 4 और लेफ्ट के दो विधायक हैं. वहीं, एनडीए के पास 24 विधायक है, जिसमें बीजेपी से 21, आजसू 1, जेडीयू 1, एलजेपी के 1 विधायक हैं. इस तरह से परिमल नथवानी को जीत दर्ज करने के लिए 4 अतरिक्त वोटों की जरूरत है।  क्रॉस वोटिंग का खतरा मंडरा रहा विधानसभा में नंबर गेम के लिहाज से जेएमएम की जीत तय है, लेकिन कांग्रेस के लिए महागठबंधन को एकजुट रखना होगा. विधानसभा में महागठबंधन के पास 56 विधायकों का समर्थन है, जिसके लिहाज से दोनों ही सीटें जीत सकती है, लेकिन निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में परिमल नथवानी के उतरने व बीजेपी के समर्थन से मुकाबला रोचक हो गया है. इसके साथ ही क्रॉस वोटिंग का खतरा बनता दिख रहा है।  राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए महागठबंधन के पास नंबर पूरे हैं, लेकिन परिमल नथवानी को बीजेपी के समर्थन करने के बाद भी 4 अतरिक्त वोटों की जरूरत है. ऐसे में क्रॉस वोटिंग का खतरा साफ नजर आ रहा है. नथवानी अपनी जीत के लिए पूरी ताकत लगा दी है तो कांग्रेस और जेएमएम अपने खेमे को बचाए रखने के लिए पूरी ताकत झोंक रखी है।  परिमल नथवानी कभी चुनाव नहीं हारे  परिमल नथवानी का झारखंड के साथ पुराना और गहरा नाता है और मंझे हुए सियासी खिलाड़ी हैं. नथवानी मुख्य तर पर कारोबारी हैं और रिलाइंस से जुड़े हुए हैं, लेकिन सियासी पिच पर उतरे तो अपना पहला राज्यसभा चुनाव 2008 में झारखंड से लड़ा. परिमल नथवानी ने निर्दलीय उम्मीदवार को रूप में किस्मत आजमाया था,  लेकिन उन्हें विभिन्न दलों के विधायकों का समर्थन मिला. उस समय क्रॉस वोटिंग ने उनकी राह आसान की और वे राज्यसभा पहुंचने में सफल रहे. आरजेडी के विधायकों का समर्थन उन्हें मिला था, जिसके दम पर जीतने में सफल रहे।  जेएमएम-कांग्रेस गठबंधन अपने विधायकों को एकजुट रखने की चुनौती से जूझ रहा है. नथवानी की उम्मीदवारी को लेकर एक और दिलचस्प तथ्य यह है कि वे झारखंड की राजनीति में दलगत सीमाओं से ऊपर स्वीकार्यता रखने वाले नेताओं में गिने जाते हैं. ऐसे में सवाल यही है कि क्या परिमल नथवानी अपने अजेय चुनावी रिकॉर्ड को बरकरार रखते हुए चौथी बार राज्यसभा पहुंचेंगे, या फिर झारखंड की बदलती राजनीतिक गणित उनके विजय अभियान पर विराम लगाएगी।  2014 में नथवानी ने दूसरी बार झारखंड से राज्यसभा का चुनाव लड़ा. भाजपा और आजसू के समर्थन से उन्होंने नामांकन दाखिल किया और निर्विरोध निर्वाचित हो गए. इस जीत ने उन्हें झारखंड से लगातार दूसरी बार राज्यसभा पहुंचाने का रिकॉर्ड दिया. वे झारखंड से दूसरी बार राज्यसभा पहुंचने वाले एकलौते निर्दलीय सांसद बने।  परमिल नथवानी का तीसरा बड़ा चुनाव 2020 में हुआ, लेकिन इस बार मैदान झारखंड नहीं बल्कि आंध्र प्रदेश को चुनाव. वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के समर्थन से वे राज्यसभा के लिए चुने गए और संसद के उच्च सदन में अपना तीसरा कार्यकाल शुरू किया. इस तरह लगातार तीसरी बार राज्यसभा सांसद बने।    नथवानी क्या चौथी बार जीत दर्ज करेंगे अब 2026 के राज्यसभा चुनाव में परिमल नथवानी ने झारखंड से लड़ने का फैसला किया. एक बार फिर निर्दलीय प्रत्याशी उतरे, लेकिन बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए का समर्थन हासिल है. राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि भाजपा की रणनीति केवल सीट जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि सत्ता पक्ष में संभावित क्रॉस वोटिंग की संभावना को भी भुनाने की है। 

Horoscope Today 18 June: आज किन राशियों पर बरसेगी किस्मत, पढ़ें मेष से मीन तक का दैनिक राशिफल

मेष 18 जून के दिन भावनाओं और एनर्जी के साथ तालमेल बिठाने का समय है। बातचीत के माध्यम से प्यार गहरा होता है। आज रचनात्मकता से करियर को लाभ मिलेगा, धन के लिए जागरूकता की आवश्यकता होगी, और स्वास्थ्य को इमोशनल सपोर्ट की आवश्यकता हो सकती है। वृषभ 18 जून के दिन वृषभ राशि के लिए इनोवेशन भरा दिन है। जिज्ञासा और खुले विचारों वाले दृष्टिकोण का मिश्रण जीवन के विभिन्न पहलुओं में प्रगति को मोटिवेट करता है। सोच और क्लियर स्ट्रैटजी बनाने से बातचीत और परियोजनाओं को लाभ मिलता है। मिथुन 18 जून के दिन सही दृष्टिकोण और मानसिकता बाधाओं पर काबू पाने में मदद करती है। क्रिएटिव स्ट्रैटजी और सावधानी के साथ की गई प्लानिंग सुरक्षा बनाने में मदद करती है। हर डिसीजन जिम्मेदारी के साथ लें। कर्क 18 जून के दिन खुद की देखभाल आपके स्वास्थ्य को सपोर्ट करती है। ध्यान रखें कि प्रगति जरूरी है और अच्छी तरह से लक्ष्यों के साथ संरेखित है। सफलता और विकास पर फोकस करें। सिंह 18 जून के दिन रोमांच की इच्छा क्रिएटिव सॉल्यूशन और खुले दिमाग वाली बातचीत को बढ़ावा देती है। आपकी पॉजिटिव एनर्जी पर्सनल और प्रोफेशनल सफलताओं का मार्ग प्रशस्त करती है। स्ट्रैटजी के साथ सिंह राशि वाले आज चुनौतियों को रोमांचक अवसरों में बदल सकते हैं। कन्या 18 जून के दिन स्वास्थ्य और धन से जुड़ी छोटी-मोटी समस्याएं भी आ सकती हैं। अपने साथी से बिना शर्त प्यार करें और रिश्ते को बरकरार रखें। सर्वश्रेष्ठ व्यावसायिक लाभ प्राप्त करने के लिए प्रयास करें। स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा। तुला 18 जून के दिन आज आप दूसरों की भावनाओं के प्रति अधिक सेंसीटिव रहेंगे। पर्सनल व प्रोफेशनल दोनों तरह की बातचीत में इसका उपयोग करें। वित्तीय जागरूकता महत्वपूर्ण है। भावनाओं में बहकर ज्यादा खर्च करने से बचें। वृश्चिक 18 जून का दिन वृश्चिक राशि वालों के लिए बिजी रहने वाला है। इससे पहले कि चीजें कंट्रोल से बाहर हो जाएं, रिश्ते में मुद्दों को सुलझाने पर विचार करें। ऑफिस में चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहें। धनु 18 जून के दिन आज आपकी एनर्जी हाई रहेगी। आप फालतू बातचीत में रुचि नहीं रखते हैं। सच्चाई और उद्देश्य आपको प्रेरित करते हैं, जिसका उपयोग रिसर्च करने, या योजना बनाने के माध्यम से काम करने के लिए करें। मकर 18 जून के दिन बातचीत में उम्मीद से ज्यादा कुछ पता चल सकता है, इसलिए ध्यान से सुनें। जब तक आप टास्क करने के लिए तैयार न हों, तब तक अपनी योजनाओं को गुप्त रखें। शक्तिशाली परिवर्तन शांति से होता है, प्रदर्शन से नहीं। परिणामों को अपने लिए बोलने दें। कुंभ 18 जून का दिन संतुलित दृष्टिकोण और क्रिएटिविटी से समृद्ध दिन होगा। रिश्तों और करियर परियोजनाओं के बीच निष्पक्ष फैसले और क्रिएटिव प्रॉब्लम सॉल्विंग के माध्यम से प्रगति को बढ़ावा मिलेगा। चुनौतियों के लिए पॉजिटिव दृष्टिकोण रचनात्मक परिणामों का मार्ग प्रशस्त करता है। मीन 18 जून के दिन बातचीत कॉन्फिडेंस को मोटिवेट करती है। उत्साह और सही समय पर की गई पहल चुनौतीपूर्ण परियोजनाओं में सफलता दिला सकती है। आत्मविश्वास से भरे निर्णय लेने से विकास का मार्ग प्रशस्त होता है।

खिलाड़ियों को उत्कृष्ट सुविधाएं देने में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, कार्यों में तेजी लाकर 15 दिनों में दें प्रगति रिपोर्ट – अरुण साव

रायपुर  उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  अरुण साव ने आज बिलासपुर में स्वर्गीय बी.आर. यादव राज्य खेल प्रशिक्षण केन्द्र बहतराई का औचक निरीक्षण कर निर्माण एवं मरम्मत कार्यों की धीमी प्रगति पर अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों के प्रति कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है, इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निरीक्षण के दौरान कार्यों को जल्दी पूरा करने, सुविधाएं बढ़ाने तथा प्रशिक्षण केंद्र की अधोसरंचना को मजबूत करने जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग तथा खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री  साव ने निरीक्षण के दौरान मैपलवुड फ्लोरिंग, तीरंदाजी मैदान, हॉकी गैलरी एवं फ्लड लाइट, कबड्डी इण्डोर व आउटडोर मैदान, एच.व्ही.ए.सी. कार्य तथा आउटडोर स्टेडियम के कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों से हॉस्टल के रखरखाव की जानकारी लेते हुए नाराजगी व्यक्त की कि जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) मद से राशि उपलब्ध होने के बावजूद आवश्यक मेंटेनेंस कार्य समय पर नहीं किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि संसाधनों की उपलब्धता के बाद भी काम में देरी स्वीकार्य नहीं है। उप मुख्यमंत्री ने कार्यों की धीमी गति पर नाखुशी जाहिर करते हुए अधिकारियों से कहा कि बिलासपुर प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा मुख्यालय है। यहां खिलाड़ियों की सुविधा बढ़ाने किए जा रहे कार्यों की गति बहुत धीमी है। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के उप अभियंता, एसडीओ, कार्यपालन अभियंता एवं अन्य अधिकारियों को बेहतर समन्वय के साथ सभी कार्यों में तेजी लाते हुए इन्हें योजनाबद्ध तरीके से शीघ्र पूर्ण करने को कहा। उन्होंने संयुक्त बैठक कर लंबित कार्यों को जल्दी पूरा करने की कार्ययोजना बनाने तथा 15 दिनों के भीतर सभी निर्माण एवं मरम्मत कार्यों की वस्तुस्थिति के बारे में उप मुख्यमंत्री कार्यालय आकर प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश कार्यपालन अभियंता  बी.बी.एस. गौतम को दिए।  साव ने इण्डोर स्टेडियम में मैपलवुड फ्लोरिंग के लिए वर्ष 2017 में कार्यादेश जारी होने के बावजूद इसके अब तक अधूरे रहने पर लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता, अनुविभागीय अधिकारी तथा उप अभियंता पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए शीघ्र कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय तक कार्यों का लंबित रहना गंभीर विषय है। सभी निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं और उनकी नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। उप मुख्यमंत्री  साव ने इण्डोर स्टेडियम में एच.व्ही.ए.सी. कार्य के लिए अतिरिक्त राशि की जरूरत पर लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को प्राक्कलन तैयार करने के पहले स्थल का निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने एच.व्ही.ए.सी. कार्य तेजी से पूर्ण करने तथा डक्टिंग की पूर्ण रूप से सफाई करने को कहा। उन्होंने एस.ई.सी.एल. द्वारा दो करोड़ की लागत से बनाए जा रहे तीरंदाजी मैदान के निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा के दौरान इसका निर्माण आगामी जुलाई तक पूर्ण कराने के निर्देश खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सहायक संचालक  ए. एक्का को दिए। उन्होंने आउटडोर स्टेडियम में स्थापित हाई मास्ट लाइट के तत्काल मरम्मत के भी निर्देश दिए।   साव ने निर्माणाधीन कबड्डी इण्डोर एवं आउटडोर मैदान की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति के लिए लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता को प्रमुख अभियंता कार्यालय में स्वयं उपस्थित होकर जानकारी प्रस्तुत करने तथा मंत्रालय से समन्वय कर पुनरीक्षित स्वीकृति प्राप्त करने को कहा। उन्होंने लोक निर्माण विभाग तथा खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अधिकारियों को संयुक्त रूप से स्टेडियम परिसर का निरीक्षण कर अन्य आवश्यक कार्यों के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने हॉकी मैदान में बन रहे पैवेलियन में अधिकारियों के लिए टॉयलेट बनाने के साथ ही दर्शकों के लिए टॉयलेट की संख्या में बढ़ोतरी के भी निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री  साव ने निरीक्षण के दौरान कहा कि बहतराई खेल प्रशिक्षण केन्द्र को उत्कृष्ट खेल प्रशिक्षण केन्द्र के रूप में विकसित करने खेल एवं युवा कल्याण विभाग खेल अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण, आधुनिक सुविधाओं के विस्तार और खिलाड़ियों के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों को सभी कार्यों में तेजी लाते हुए समयबद्ध ढंग से पूरा करने को कहा, ताकि खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और खेल सुविधाओं का लाभ यथाशीघ्र मिल सके। विधायक  सुशांत शुक्ला, कलेक्टर  संजय अग्रवाल, नगर निगम के आयुक्त  प्रकाश कुमार सर्वे और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  संदीप अग्रवाल भी  साव के निरीक्षण के दौरान मौजूद थे।

22 लाख 60 हजार रुपए नगद, लूट की रकम से खरीदी गई कार एवं अन्य सामग्री जप्त

भोपाल मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेश में संगठित अपराधों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी कार्रवाई के अंतर्गत इंदौर पुलिस ने स्क्रैप व्यापारी के कर्मचारी से हुई 29 लाख 65 हजार रुपए की लूट की वारदात का त्वरित खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लूटी गई राशि में से 22 लाख 60 हजार रुपए नगद, लूट की रकम से खरीदी गई एक आई-20 कार तथा घटना में प्रयुक्त अन्य सामग्री जब्त की है। फरियादी मुकुल अग्रवाल, निवासी रामचंद्र नगर एक्सटेंशन, इंदौर द्वारा थाना पंढरीनाथ में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी कि 11 जून को वह अपने स्क्रैप व्यवसाय से संबंधित विभिन्न प्रतिष्ठानों से भुगतान राशि एकत्रित कर लगभग 29 लाख 65 हजार रुपए नगद लेकर दोपहिया वाहन से जा रहा था। इसी दौरान रात्रि में जायसवाल धर्मशाला के समीप दो अज्ञात व्यक्तियों ने उसे रोककर मारपीट की तथा नकदी से भरा बैग छीनकर फरार हो गए। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस आयुक्त इंदौर  संतोष कुमार सिंह के निर्देशन में आठ विशेष पुलिस टीमों का गठन कर आरोपियों की तलाश प्रारंभ की गई। जांच के दौरान पुलिस टीमों ने घटना स्थल एवं संभावित मार्गों के 800 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के फुटेज का सूक्ष्म विश्लेषण किया। तकनीकी साक्ष्यों, मुखबिर तंत्र एवं सतत पुलिसिंग के आधार पर एक संदिग्ध एक्टिवा वाहन की पहचान की गई, जिस पर फर्जी नंबर प्लेट लगी हुई थी। इसके बाद इंदौर सहित आसपास के जिलों एवं अन्य राज्यों में संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी गई। अनुसंधान में यह तथ्य सामने आया कि आरोपियों ने वारदात को पूरी योजना के साथ अंजाम दिया था। आरोपियों द्वारा फरियादी की पूर्व से रेकी की जा रही थी तथा भुगतान संग्रहण के प्रथम स्थान से ही उसका पीछा किया जा रहा था। उपयुक्त अवसर मिलते ही उन्होंने लूट की घटना को अंजाम दिया। पूछताछ में मुख्य आरोपी ने बताया कि क्रिप्टोकरेंसी में हुए आर्थिक नुकसान एवं बढ़ते कर्ज के कारण उसने लूट की योजना बनाई थी। उसने अपने दो साथियों को फरियादी की गतिविधियों पर नजर रखने तथा रेकी करने का जिम्मा सौंपा था। पुलिस टीमों द्वारा लगातार दबिश एवं तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया गया। उसकी निशानदेही पर सह-आरोपी को भी अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस द्वारा शेष लूटी गई राशि की बरामदगी तथा प्रकरण से जुड़े अन्य तथ्यों के संबंध में आरोपियों का पुलिस रिमांड प्राप्त किया गया है। मामले में विस्तृत विवेचना जारी है। मध्यप्रदेशपुलिस संगठित अपराधों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है तथा अपराधियों के विरुद्ध इस प्रकार की प्रभावी कार्यवाही निरंतर जारी रहेगा।  

झारखंड राज्यसभा चुनाव: विधायकों की गतिविधियों पर स्पेशल ब्रांच की नजर

रांची झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए गुरुवार, 18 जून 2026 को मतदान होना है. चुनाव को लेकर राज्य की सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गई हैं. इसी को देखते हुए पुलिस मुख्यालय की ओर से हाई अलर्ट जारी किया गया है. चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए विशेष निगरानी व्यवस्था की गई है. बताया जा रहा है कि शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए राजधानी रांची में चप्पे-चप्पे पर सादी वर्दी में स्पेशल ब्रांच के कर्मचारी और पदाधिकारी, सीआईडी के कर्मचारी और इनकम टैक्स के कर्मचारियों को तैनात किया गया है. स्पेशल ब्रांच के 20 अधिकारी और कर्मचारी रांची में तैनात सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, राज्यसभा चुनाव से जुड़े घटनाक्रम पर नजर रखने के लिए स्पेशल ब्रांच के करीब 20 पदाधिकारियों और कर्मचारियों को रांची में तैनात किया गया है. इन अधिकारियों और कर्मचारियों को महत्वपूर्ण और संवेदनशील स्थानों पर जिम्मेदारी सौंपी गई है. बताया जा रहा है कि ये सभी कर्मी सादे लिबास में रहकर अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं और हर गतिविधि पर पैनी नजर बनाए हुए हैं. उनकी ओर से समय-समय पर मुख्यालय को रिपोर्ट भी भेजी जा रही है. होटल रेडिशन से लेकर विधानसभा तक निगरानी सूत्रों के मुताबिक, स्पेशल ब्रांच के अधिकारियों और कर्मचारियों को होटल रेडिशन, झारखंड विधानसभा, मुख्यमंत्री आवास, प्रमुख राजनीतिक दलों के कार्यालयों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर तैनात किया गया है. इन स्थानों पर चुनाव से संबंधित गतिविधियों के अलावा सुरक्षा व्यवस्था पर भी विशेष नजर रखी जा रही है. राजनीतिक दलों के नेताओं की आवाजाही और चुनावी गतिविधियों से जुड़े हर घटनाक्रम की जानकारी लगातार एकत्र की जा रही है. इसके साथ ही किसी भी असामान्य स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक सूचनाएं तत्काल मुख्यालय तक पहुंचाई जा रही हैं. विधायकों की गतिविधियों और राजनीतिक हलचलों पर नजर सूत्र बताते हैं कि राज्यसभा चुनाव की निगरानी की पूरी जिम्मेदारी स्पेशल ब्रांच को सौंपी गई है. इसी कारण चुनाव से जुड़े सभी पहलुओं पर नजर रखी जा रही है. इसमें विधायकों की गतिविधियां, राजनीतिक दलों की रणनीति और चुनावी माहौल से जुड़े अन्य घटनाक्रम भी शामिल हैं. खुफिया इकाई के अधिकारी लगातार सूचनाएं जुटा रहे हैं, ताकि किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें. चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक जारी रहेगी निगरानी जानकारी के अनुसार, मतदान और उससे जुड़ी पूरी प्रक्रिया संपन्न होने तक स्पेशल ब्रांच के अधिकारी और कर्मचारी सादे लिबास में अपनी ड्यूटी करते रहेंगे. उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि या असामान्य घटनाक्रम की सूचना तुरंत मुख्यालय को दी जाए, ताकि आवश्यक कार्रवाई की जा सके. राज्यसभा चुनाव को लेकर बढ़ी यह चौकसी बताती है कि लोकतंत्र का यह पर्व अब सिर्फ मतदान तक सीमित नहीं रह गया है. इसके साथ सुरक्षा और निगरानी का ऐसा तंत्र भी सक्रिय हो जाता है, जिसकी मौजूदगी आम लोगों को दिखाई कम देती है, लेकिन उसकी गतिविधियां लगातार चलती रहती हैं.

अमित शाह की बैठक में दिल्ली स्लम नीति 2026 और यमुना सफाई पर बड़ा फैसला

नई दिल्ली केंद्रीय मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में दिल्ली में मंगलवार को दो अहम मीटिंग हुईं। पहली मीटिंग दिल्ली की झुग्गी बस्तियों के पुनर्वास और पुनर्स्थापना को लेकर जबकि दूसरी सालों से पेंडिंग चल रही 'किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना' पर हुई। जिससे दिल्ली में नाला बन चुकी यमुना को भी साफ पानी मिल सकेगा। गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली में झुग्गी-बस्तियों के पुनर्वास और पुनर्स्थापन पर हुई बैठक में केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर, दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता समेत केंद्र व दिल्ली सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए। इसमें दिल्ली की झुग्गी-झोपड़ी को लेकर अहम दिशा-निर्देश जारी किए गए। यमुना सफाई की दिशा में बड़ा कदम गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में सालों से पेंडिंग चल रही 'किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना' पर हुई दूसरी मीटिंग में संबंधित राज्य हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली में सहमति बनती दिखाई दी। इसका सबसे बड़ा एक फायदा दिल्ली में नाला बन चुकी यमुना को साफ करने के रूप में भी मिलेगा। जिसके तहत हिमाचल प्रदेश के लिए आवंटित पानी दिल्ली और राजस्थान को देने पर भी सहमति बनी। इससे यमुना में साफ पानी का फ्लो काफी बढ़ जाएगा। लंबे समय बाद इस मीटिंग में सभी राज्य इस प्रोजेक्ट के लिए एमओयू पर साइन करने के लिए सहमत हुए हैं। मंत्रालय के मुताबिक एमओयू साइन होने के बाद इस किशाऊ परियोजना को कैबिनेट के सामने पेश किया जाएगा। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद इस पर काम शुरू होगा। इस बांध परियोजना के तहत केंद्र सरकार 90 फीसदी और शेष 10 फीसदी का बजट इन छह राज्यों द्वारा खर्च किया जाएगा।     बैठक में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल, केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और अन्य तमाम अधिकारी शामिल हुए। रिव्यू मीटिंग में शाह ने दिल्ली सरकार को दिए आदेश केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में मंगलवार को दिल्ली में झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों (JJ Clusters) के पुनर्वास मुद्दे पर हुई रिव्यू मीटिंग में बड़े फैसले लिए गए। इसमें दिल्ली में पीपीपी मॉडल पर झुग्गी-झोपड़ियों का विकास होगा। इसमें दिल्ली स्लम एवं झुग्गी झोपड़ी पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति, 2026 आज निर्धारित हो गई। शाह ने निर्देश दिए कि दिल्ली सरकार जल्द ही इसकी अधिसूचना जारी करे। इससे झुग्गी बस्तियों में रहने वाले करीब चार लाख परिवारों को लाभ होगा। इसमें आने वाले समय में दिल्ली में झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों को बेहतर सुविधाएं देने के साथ ही रंगरूप बदलने पर निर्देश जारी किए गए। मीटिंग में केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर, दिल्ली के एलजी तरनजीत सिंह संधू, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली के शहरी विकास मंत्री, केन्द्रीय गृह सचिव, दिल्ली के मुख्य सचिव समेत केंद्र और दिल्ली सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। झुग्गी बस्तियों का पुनर्वास बैठक में गृह मंत्री शाह ने कहा कि दिल्ली सरकार जल्द ही दिल्ली स्लम एवं झुग्गी झोपड़ी पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति, 2026 को अधिसूचित करने की कार्रवाई सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक निजी भागीदारी (PPP) मोड पर झुग्गी-झोपड़ी पुनर्वास के लिए पांच क्लस्टर के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB) 45 दिन में टेंडर जारी करें। इसके साथ ही अतिरिक्त 50 झुग्गी-झोपड़ी संकुलों के लिए भी परियोजना दस्तावेज तथा निविदा प्रपत्र जल्द बनाए जाएं। गृह मंत्री ने कहा कि झुग्गियों की पात्रता की तिथि एक जनवरी, 2025 के अनुसार तय की जाए। DDA और DUSIB से 45 दिन में टेंडर जारी करने को कहा शाह ने कहा कि दिल्ली सरकार प्रति माह पुनर्वास की कम से कम पांच PPP आधारित परियोजनाओं की निविदा जारी करना सुनिश्चित करे। गृह मंत्री ने कहा कि पुनर्वास कॉलोनियों के निर्माण में आंगनवाड़ी केंद्र, शैक्षणिक सुविधाएं, स्वास्थ्य केंद्र, खेल मैदान जैसी सामूहिक सुविधाओं का समुचित एवं पर्याप्त प्रावधान किया जाए। उन्होंने कहा कि आज के निर्णय से झुग्गी बस्तियों में रहने वाले 4 लाख परिवारों को लाभ होगा।  

यूपी के कुकरैल में घड़ियाल संरक्षण की सफलता, 1970 से अब तक बड़ी उपलब्धि

लखनऊ यूपी में कभी विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुके घड़ियाल आज सफल संरक्षण का घंटा बजा रहे हैं। लखनऊ स्थित कुकरैल घड़ियाल पुनर्वास केंद्र ने ऐसा मॉडल विकसित किया है, जिसकी गूंज अब देश ही नहीं, विदेश के कई चिड़ियाघरों तक सुनाई दे रही है। कुकरैल के वैज्ञानिक कैप्टिव ब्रीडिंग (बंदी प्रजनन) मॉडल को नेशनल जियोग्राफिक सोसाइटी ने भारत के सबसे सफल संरक्षण प्रोजेक्ट्स में शामिल किया है। यही वजह है कि यहां जन्मे घड़ियाल आज भूटान, पाकिस्तान के साथ-साथ अमेरिका (न्यूयॉर्क) और जापान के चिड़ियाघरों में आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। ये देश भी इस मॉडल को अपनाने की पहल कर रहे हैं। 1970 के दशक में स्थिति बेहद गंभीर थी, जब पूरे देश में केवल 250 से 300 घड़ियाल ही बचे थे। इस संकट को देखते हुए 1975 में कुकरैल पुनर्वास केंद्र की स्थापना की गई। शुरुआत में चंबल नदी (इटावा) से अंडे लाकर वैज्ञानिक तरीके से हैचिंग की गई और घड़ियाल संरक्षण की नींव रखी गई। 1988 से यहां नियमित प्रजनन शुरू हुआ और आज स्थिति यह है कि केंद्र में 466 घड़ियाल मौजूद हैं। हर वर्ष लगभग 140 से 160 नए घड़ियाल यहां जन्म ले रहे हैं। इस वर्ष नमामि गंगे परियोजना के तहत 500 अंडों को हैच करने का लक्ष्य तय किया गया है। नदियों को मिल रहा नया जीवन कुकरैल में जन्म लेने वाले घड़ियालों को ढाई वर्ष तक विशेष देखरेख में रखा जाता है, जिसके बाद उन्हें गंगा, घाघरा, चंबल, गेरुआ और गंडक जैसी नदियों में छोड़ा जाता है। इससे नदियों का पारिस्थितिक संतुलन मजबूत हो रहा है और जैव विविधता को नई ऊर्जा मिल रही है। इसके अलावा दुधवा, कतर्नियाघाट, हस्तिनापुर और महाराजगंज की नदियों में भी घड़ियाल फल-फूल रहे हैं। राज्य ईको-पर्यटन का बड़ा केंद्र बनकर उभरा उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, राज्य ईको-पर्यटन का बड़ा केंद्र बनकर उभरा है और दुर्लभ घड़ियालों को देखने देश-विदेश से पर्यटक आ रहे हैं। कुकरैल केंद्र में म्यूजियम और इंटरप्रिटेशन सेंटर जैसी आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं, जहां हर साल लगभग दो लाख घरेलू और सैकड़ों विदेशी पर्यटक पहुंच रहे हैं। सनातन परंपरा में देवी गंगा के वाहन मकर के रूप में पूजनीय यह जीव आज उत्तर प्रदेश के प्रयासों से वैश्विक पटल पर नई जिंदगी पा चुका है।  

गोरखपुर पंचायत की पहल, सरपंच ने दान की जमीन पर बनाई आधुनिक चौपाल

 फतेहाबाद  बदलते दौर के साथ हरियाणा के ग्रामीण आंचल की तस्वीर तेजी से बदल रही है। विकास की इस बयार में अब गांवों की पारंपरिक चौपालें भी आधुनिक और हाईटेक रूप अख्तियार करने लगी हैं। कभी केवल पेड़ की छांव या साधारण कमरों तक सीमित रहने वाली ये चौपालें अब वातानुकूलित और इंटरनेट जैसी शहरी सुविधाओं से जगमगा रही हैं। जिले के कई गांवों में पंचायतों ने इन सामाजिक सरोकार के केंद्रों को शानदार तरीके से विकसित किया है, जो न केवल ग्रामीणों के बैठने का स्थान हैं, बल्कि उनके मनोरंजन और आपसी भाईचारे का मुख्य आधार बन चुकी हैं। इसी कड़ी में जिले के ऐतिहासिक गांव गोरखपुर की पंचायत ने एक अनूठी मिसाल पेश की है। गांव के सरपंच मंदीप योगी ने बताया कि उनके गांव में कई चौपालें हैं, जिनमें से मुख्य चौपाल को पूरी तरह से आधुनिक रंग-रूप में ढाल दिया गया है। इस चौपाल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके निर्माण के लिए सरपंच ने अपनी निजी जमीन पंचायत को दान में दी है। इस नवनिर्मित चौपाल में ग्रामीणों के लिए इंटरनेट से लेकर एसी तक की वीआईपी व्यवस्था की गई है। यहां गांव के बुजुर्ग नियमित रूप से बैठते हैं। सरपंच का मानना है कि इस चौपाल में आकर आपसी चर्चा करने और ताश खेलने से बुजुर्गों का मानसिक तनाव दूर होता है और वे अकेलापन महसूस नहीं करते। सरपंच ने दान की जमीन, गोरखपुर में तैयार की हाईटेक चौपाल गांव गोरखपुर के सरपंच मंदीप योगी ने ग्रामीण विकास में व्यक्तिगत योगदान देते हुए खुद की जमीन पंचायत को दान कर दी, जिस पर अब सर्वसुविधायुक्त चौपाल खड़ी है। पंचायत अब गांव की अन्य चौपालों का कायाकल्प करने की योजना पर भी तेजी से काम कर रही है ताकि हर वर्ग को इसका लाभ मिले। ग्रामीण परिवेश में चौपाल केवल एक भवन नहीं, बल्कि गांव का वह सार्वजनिक और लोकतांत्रिक मंच है जहां ग्रामीण संस्कृति धड़कती है। गांव पीलीमंदोरी में भी पंचायत ने इस दिशा में सराहनीय कार्य किया है। पीलीमंदोरी में चौपाल के साथ बना शानदार विश्राम गृह गांव पीलीमंदोरी के सरपंच धर्मवीर गोरछिया ने बताया कि पंचायत ने न सिर्फ चौपाल को आधुनिक बनाया है, बल्कि इसके साथ एक सर्वसुविधायुक्त विश्राम गृह का भी निर्माण करवाया है। चौपाल में जहां हवादार पंखे और बैठने की उत्तम व्यवस्था है, वहीं विश्राम गृह में तमाम आधुनिक सुविधाएं दी गई हैं, जिससे गांव में आने वाले आगंतुकों को ठहराने में आसानी होती है। सरपंच धर्मवीर गोरछिया का कहना है कि चौपाल गांव का ऐसा मुख्य केंद्र है जहां राजनीति की बिसात बिछती है, सामाजिक नुक्कड़ सभाएं होती हैं और पंचायती फैसले लिए जाते हैं। अब इन चौपालों के हाईटेक होने से ग्रामीण बेहद खुश हैं।  

हिसार में मुफ्त साइकिल योजना पर सवाल, 8 साल में 54% बढ़ी कीमत

हिसार  आठ साल पहले हरियाणा के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले कक्षा 6 के अनुसूचित वर्ग के बच्चों के लिए निशुल्क साइकिल योजना शुरू की। ताकि जिन बच्चों का घर से स्कूल की दूरी 2 या इससे अधिक किलोमीटर दूर है तो साइकिल चलाकर वह बच्चा स्कूल पहुंच सकें, जिससे वह पढ़ाई से वंचित न रह जाए। लेकिन उपरोक्त निशुल्क योजना अभिभावकों की जेबें खाली कर रही है। कारण है कि शिक्षा निदेशालय ने 8 साल से प्रदेश के बाजारों का कोई रिव्यू नहीं किया। जिस कारण 2018 से लेकर 2026 तक 20 व 22 इंची साइकिलों की कीमत 54 प्रतिशत बढ़कर 6 हजार रुपये तक पहुंच चुकी है। जोकि अभिभावकों को भरना पड़ता है। जबकि सरकार अभी तक पुराने नियमानुसार केवल 46 प्रतिशत पैसा ही अभिभावकों को दे रही है। जिस कारण अभिभावकों की जेब पर बोझ बढ़ता है। बता दें कि निशुल्क साइकिल योजना के तहत सरकार 20 इंच की साइकिल के 2800 रुपये व 22 इंच की साइकिल के तीन हजार रुपये ही दे रही है। बच्चों को पसंद आती है 4500 रुपये की साइकिलें हर साल सरकारी स्कूलों में लगने वाले निशुल्क साइकिल मेले में बच्चों को 4500 रुपये व इससे अधिक कीमत की साइकिलें पसंद आती है। जोकि लंबे समय तक चलने वाली भी होती है और गुणवत्तायुक्त भी होती है। लेकिन सरकार की ओर तय कीमत की साइकिलें न तो गुणवक्तायुक्त होती है और न ही लंबे समय तक चलने वाली होती है। जिस कारण न बच्चे और न ही अभिभावक तय कीमत की साइकिलों में रूचि दिखाते हैं। शिक्षा निदेशालय ने निशुल्क साइकिल योजना के तहत प्रदेश के समस्त डीईओ को कुल एक करोड़ रुपये अलाट कर दिए है। कुछ दिन में समस्त डीईओ को 5-5 लाख रुपये मिल जाएंगे। ताकि मेले के सफल आयोजना में तय राशि को खर्चा जा सकें। इसके लिए डीईओ को आदेश दिए है कि वे विज्ञापन सहित अन्य प्रक्रियाएं शुरू कर दें। ताकि समय रहते मेला लगाया जा सकें। मेले में खाने-पीने का खर्चा कौन उठाएगा निशुल्क साइकिल योजना के तहत लगने वाले मेले में दूर-दराज से आए बच्चों व शिक्षकों के लिए रिफ्रेशमेंट उपलब्ध करवाया जाता है।जिसका पैसा सरकार बाद में जारी करती है। जिस कारण बड़ा सवाल रहेगा कि बीते साल की तरह इस साल भी रिफ्रेशमेंट का खर्चा कौन उठाएगा। हिसार के जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी नरेंद्र शर्मा ने कहा कि मैंने अभी डीईईओ पद पर ज्वाइन किया है। मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है।  

रांची में चावल महंगा, थोक-खुदरा में 4–6 रुपये तक अंतर

रांची  झारखंड की राजधानी रांची के खुदरा और थोक बाजार में चावल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. कृषि उत्पादन बाजार समिति (एपीएमसी) पंडरा की ओर से 17 जून 2026 को रिपोर्ट जारी की गई है. एपीएमसी की रिपोर्ट के अनुसार, रोजमर्रा की अधिकांश वस्तुओं के दाम स्थिर बने हुए हैं. हालांकि, खुदरा और थोक बाजार में कई उत्पादों की कीमतों में बड़ा अंतर देखने को मिला. खुदरा बाजार में लखीभोग चावल सबसे महंगा पीएमसी पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों के मुताबिक खुदरा बाजार में लखीभोग चावल की कीमत 55 रुपये प्रति किलो रही. वहीं परिमल चावल 38 रुपये और मंसूरी चावल 35 रुपये प्रति किलो के भाव से बिक रहा है. तीनों किस्मों का औसत खुदरा मूल्य 42.67 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया. इसके मुकाबले थोक बाजार में लखीभोग चावल 49.50 रुपये प्रति किलो, परिमल 34 रुपये और मंसूरी 31 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया. थोक बाजार में चावल का औसत मूल्य 38.17 रुपये प्रति किलो रहा. दालों के दाम में ज्यादा बदलाव नहीं दैनिक आवश्यक वस्तुओं की रिपोर्ट के अनुसार चना दाल, अरहर दाल, उड़द दाल, मूंग दाल और मसूर दाल के दाम सामान्य स्तर पर बने हुए हैं. बाजार में इन वस्तुओं की उपलब्धता पर्याप्त होने के कारण कीमतों में कोई उल्लेखनीय उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया. विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल आपूर्ति की स्थिति बेहतर रहने से दालों के दाम नियंत्रित हैं. हालांकि मानसून की स्थिति और परिवहन लागत आने वाले दिनों में कीमतों को प्रभावित कर सकती है. खाद्य तेलों की कीमतें भी स्थिर रिपोर्ट में मूंगफली तेल, सरसों तेल, वनस्पति तेल, सोया तेल, सूरजमुखी तेल और पाम तेल के मूल्य भी शामिल किए गए हैं. इन उत्पादों के दाम में फिलहाल कोई बड़ा बदलाव दर्ज नहीं किया गया है. खुदरा और थोक बाजार में तेलों की कीमतों में कुछ अंतर जरूर है, लेकिन कुल मिलाकर बाजार में स्थिरता बनी हुई है. यह उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात मानी जा रही है. सब्जियों और अन्य खाद्य पदार्थों की उपलब्धता बरकरार एपीएमसी के आंकड़ों के अनुसार आलू, प्याज और अन्य आवश्यक खाद्य पदार्थों की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है. मंडी में सब्जियों की आवक नियमित रूप से हो रही है, जिससे कीमतों पर दबाव नहीं बढ़ा है. व्यापारियों के अनुसार, मौसम अनुकूल रहने और आपूर्ति श्रृंखला सुचारु होने के कारण बाजार में फिलहाल किसी तरह की कमी नहीं है. इसी वजह से उपभोक्ताओं को आवश्यक वस्तुएं सामान्य कीमतों पर उपलब्ध हो रही हैं. खुदरा और थोक बाजार में कीमतों का अंतर स्वाभाविक रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से देखा गया कि थोक बाजार की तुलना में खुदरा बाजार में कीमतें अधिक हैं. इसका कारण परिवहन खर्च, भंडारण, पैकेजिंग और खुदरा विक्रेताओं का मार्जिन माना जाता है. विशेष रूप से चावल की तीन प्रमुख किस्मों में खुदरा और थोक बाजार के बीच चार से छह रुपये प्रति किलो तक का अंतर दर्ज किया गया. इससे साफ है कि बड़ी मात्रा में खरीद करने वाले व्यापारियों को कम कीमत का लाभ मिलता है, जबकि अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचते-पहुंचते वही उत्पाद महंगा हो जाता है. नियंत्रण में हैं कीमतें रिपोर्ट के अनुसार, रांची और आसपास के इलाकों में आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतें फिलहाल नियंत्रण में हैं. चावल, दाल, खाद्य तेल और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं के दाम स्थिर बने हुए हैं. यदि आने वाले दिनों में मौसम और आपूर्ति व्यवस्था सामान्य रहती है, तो बाजार में कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी की संभावना कम दिखाई देती है. फिलहाल रसोई का बजट किसी आपदा प्रबंधन योजना जैसा नहीं लग रहा, जो अपने आप में एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा सकती है.