samacharsecretary.com

सहरसा, पूर्णिया, कैमूर में उद्योगों को बढ़ावा, खिलाड़ियों को मिलेगी बेहतर नौकरी

पटना सम्राट चौधरी कैबिनेट ने बिहार के विकास के लिए कई एजेंडों पर अपनी मुहर लगाई है। बिहार की तीन जिलों सहरसा, पूर्णिया और कैमूर में अब औद्योगिक क्षेत्र बनाए जाएंगे। सहरसा औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार के लिए वनगांव और देवनागोपाल मौजा में करीब 420.63 एकड़ भूमि अधिग्रहण के लिए 88.01 करोड़ रुपये खर्च की स्वीकृति दी है। इस भूमि पर औद्योगिक क्षेत्र का विस्तार किया जाएगा। इसी प्रकार पूर्णिया 1.25 अरब की लागत पर औद्योगिक क्षेत्र के लिए जमीन का अधिग्रहण करने का प्रस्ताव स्वीकृत। राज्य कैबिनेट ने बुधवार को इसकी मंजूरी दी। केन्द्र सरकार की ओर से प्रस्तावित वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे के समीप कैमूर जिला में अंचल चांद और चैनपुर में 781.18 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। इस पर दो अरब तीस करोड़ 64 लाख 95 हजार नौ रुपये खर्च होंगे। बैठक के बाद कैबिनेट विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद चौधरी ने बताया कि एक अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर सहमति प्रदान की गई है। इसके तहत राज्य के सभी कार्य विभागों के लिपिकों का अब एक संवर्ग होगा। इसमें पथ निर्माण विभाग, पीएचईडी, भवन निर्माण विभाग, ग्रामीण कार्य विभाग, योजना एवं विकास विभाग और नगर विकास एवं आवास विभाग शामिल हैं। पथ निर्माण विभाग के अंतर्गत मूल कोटि के पद (शोध सहायक) पर चयन परीक्षा बीपीएससी के स्थान पर बिहार तकनीकी सेवा आयोग के स्तर से ली जाएगी। वहीं, जल संसाधन विभाग के 217 विभागीय निरीक्षण भवन आधुनिक गेस्ट हाउस और ईको-टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित होंगे। मंत्रिमंडल ने प्रस्ताव स्वीकृत कर दिया है। इसके तहत बांधों, बराजों और जलाशयों के पास स्थित भवनों को पर्यटकों के लिए आधुनिक आवासीय सुविधाओं से लैस किया जाएगा। विधानसभा निदेशक राजीव कुमार की संविदा अवधि बढ़ी विधानसभा के निदेशक राजीव कुमार की संविदा अवधि बढ़ा दी गयी है। उनकी संविदा अवधि 30 जून 2026 को समाप्त होने वाली थी। इसका विस्तार एक जुलाई 2026 से 30 जून 2027 तक किया गया है। वित्त विभाग में भविष्य निधि निदेशालय के सहायक आयुक्त राजीव कुमार के खिलाफ सेवाच्युति (जो सरकार के अधीन भविष्य में नियोजन के लिए निरर्हता नहीं होगी) का दंड लगाया गया है। संविदा अभियंताओं को बोनस अंक का फायदा अब सिर्फ एक बार मिलेगा मंत्रिमंडल ने अभियंत्रण सेवा भर्ती नियमावली में संशोधन किया है। अभी संविदा पर कार्यरत सहायक अभियंताओं को नियमित भर्ती परीक्षा में बोनस अंक दिये जाते हैं। इसके कारण कई अभियंता एक से अधिक विभागों में चयनित हो जाते थे, जबकि वे अंततः केवल एक विभाग में ही नियुक्ति लेते थे। इससे अन्य विभागों की सीटें खाली रह जाती थीं और दूसरे अभ्यर्थियों के अवसर कम हो जाते थे। नई व्यवस्था के तहत यदि कोई संविदा सहायक अभियंता अधिमानता अंक का लाभ लेकर किसी एक विभाग में चयनित हो जाता है, तो भविष्य में उसे दोबारा इस लाभ का अधिकार नहीं होगा। हालांकि वह सामान्य अभ्यर्थी के रूप में अन्य भर्ती प्रक्रियाओं में भाग ले सकेगा। यह नियम उन भर्ती प्रक्रियाओं पर भी लागू होगा जो वर्तमान में चल रही हैं। आशुलिपिक की उम्रसीमा अब 18 वर्ष मंत्रिमंडल ने बिहार नागरिक सुरक्षा क्षेत्रीय आशुलिपिक संवर्ग नियमावली में संशोधन को मंजूरी दे दी। अब इंटरमीडिएट उत्तीर्ण 18 वर्ष के युवा भी आशुलिपिक पद पर सीधी भर्ती के लिए पात्र होंगे। आपदा प्रबंधन विभाग के नागरिक सुरक्षा निदेशालय के प्रस्ताव को राज्यमंत्रिपरिषद ने सहमति दे दी। इसके तहत आशुलिपिक पद पर सीधी नियुक्ति के लिए न्यूनतम आयु सीमा 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी गई है। शोध सहायक भर्ती में इंटरव्यू खत्म मंत्रिमंडल ने पथ निर्माण विभाग में शोध सहायक पद की भर्ती प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए नियमों में संशोधन को मंजूरी दी है। अब इस पद पर चयन के लिए 100 अंकों का इंटरव्यू नहीं होगा। साथ ही न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता और प्रतियोगिता परीक्षा के विषयों का पुनर्निर्धारण किया जाएगा, ताकि जल संसाधन की नियमावली के अनुरूप एकरूपता स्थापित हो सके। खिलाड़ियों को उच्च वेतनमान की नौकरी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेलों में पदक जीतने और भाग लेने वाले राज्य के खिलाड़ियों को उच्च वेतनमान स्तर की नौकरी दी जाएगी। इसको लेकर बिहार उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सीधी नियुक्ति (संशोधन) नियमावली, 2026 की मंजूरी राज्य कैबिनेट ने दे दी है। नई नियमावली के तहत ओलंपिक खेलों में पदक जीतने वाले, ओलंपिक में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करने वाले, क्रिकेट के किसी भी प्रारूप में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करने वाले तथा एशियाई खेल और राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ियों को वेतन स्तर-09 (ग्रेड पे 5400 रुपये) में नियुक्ति की जाएगी। इसी प्रकार, एशियाई खेल एवं राष्ट्रमंडल खेलों में शामिल खेल विधाओं के किसी भी प्रारूप में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों तथा रजत एवं कांस्य पदक विजेता खिलाड़ियों को वेतन स्तर-07 (ग्रेड पे 4600 रुपये) में नियुक्ति दी जाएगी। खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य सरकार खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य और उनके सामाजिक-आर्थिक सशक्तीकरण के लिए प्रतिबद्ध है। पत्थर भूखंडों की ई-नीलामी होगी राज्य में चिह्नत पत्थर भूखंडों की ई-नीलामी प्रक्रिया को तेज करने के लिए राज्य खनन निगम लिमिटेड को खनन योजना तैयार कराने और पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त करने के लिए नामित किया गया है। खनन निगम नीलामी से पहले आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त करेगा। नीलामी के बाद खनन योजना और पर्यावरणीय स्वीकृति सफल बोलीदाता को हस्तांतरित की जाएगी। पांच प्रमुख नदियों के गाद का अध्ययन अपर मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य की प्रमुख पांच नदियों सोन, किऊल, फल्गू, मोरहर और चानन का पुनर्भरण अध्ययन किया जाएगा। इन नदियों में बालू के जमा होने के स्थिति का अध्ययन किया जाएगा। यह कार्य सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड (सीएमपीडीआई) से कराया जाएगा, जिस पर दो करोड़ 32 लाख रुपये खर्च होंगे।

भीषण गर्मी से बेहाल उत्तर प्रदेश, 20-25 जून के बीच मानसून की दस्तक के आसार

लखनऊ यूपी में भीषण गर्मी और बार-बार आंधी के कारण मौसम में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि अभी मौसम में बदलाव नहीं हुआ है। उमस भरी गर्मी और धूल भरी आंधी तो कई इलाकों में चल रही है लेकिन फिर भी मॉनसून आने में अभी समय बताया जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार अभी गर्मी से राहत मिलने में और कुछ दिन लगेंगे। कई इलाकों में तापमान 45 के पार होने को है। वहीं, अभी तापमान 42 से 44 डिग्री सेल्सियस तक जा रहा है। मौसम विशेषज्ञों को मानसून में रुकावट का डर मानसून तो लगातार प्रगति कर रहा है लेकिन बारिश कम हो रही है। बिहार तक पहुंचे मानसून के 20-25 जून के बीच यूपी में दाखिल होने की संभावना है। पहले स्पेल में अच्छी बारिश की भी संभावना जताई जा रही है लेकिन विशेषज्ञ मानसून पॉज से डर रहे हैं। यदि मानसून की गति लगातार नहीं बनी रहती है और बीच-बीच लंबा गैप आता है तो स्थितियां प्रतिकूल हो सकती हैं। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की अब तक प्रगति ठीक है, लेकिन सेटेलाइट थ्री डी एस से जो तस्वीरें मिली हैं उसके अध्ययन से मानसून के भविष्य को लेकर चिंता जताई जा रही है। पश्चिमी जेट स्ट्रीम अपने सामान्य रास्ते पर नहीं है बल्कि नीचे दक्षिणी क्षेत्र की ओर है। जो बादल अब तक के मानसून से दिखने चाहिए थे वह नजर नहीं आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जेट स्ट्रीम के नीचे खिसकने से पूर्वी हवाएं आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। इससे जो बादलों के बनने की प्रक्रिया है वह उतनी गति वाली नहीं है जितनी अपेक्षित है। मौसम विशेषज्ञ अल नीनो का खतरा लंबे समय से बता रहे हैं। यदि ऐसा होता है तो बारिश प्रभावित होगी और मानसून पाज की स्थिति स्वतः बन जाएगी। सीएसए मौसम कृषि तकनीकी अधिकारी अजय मिश्रा का कहना है कि अभी से कुछ कहना जल्दबाजी होगी। मानसून की रफ्तार बनी हुई है। उम्मीद है कि यूपी और कानपुर तक यह समय से पहुंचेगा। इसके बाद का लंबा समय मानसून का है जिसके दौरान स्थितियां स्पष्ट होंगी। मानसून के पहले फिर तपी संगमनगरी, प्रदेश में रही सबसे गर्म एक तरफ जहां लोग बेसब्री से मानसून का इंतजार कर रहे हैं वहीं बुधवार को प्रयागराज प्रदेश में फिर सबसे गर्म जिला रहा। बुधवार को सुबह से ही तेज धूप व लू के थपेड़ों ने लोगों को झुलसाना शुरू कर दिया। लोग सिर से पांव तक खुद को ढंककर बाहर निकले। हालांकि दोपहर साढ़े तीन बजे के बाद बादल छाने लगे। लगभग चार बजे धूल भरी आंधी चली जबकि यमुनापार के कई इलाकों में तेज बारिश हुई। इससे शाम को तपिश से थोड़ी राहत मिली। बुधवार को अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो प्रदेश में सर्वाधिक अधिकतम तापमान रहा। इससे पहले जिले का 46.4 डिग्री सेल्सियस तापमान 28 मई को रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि जून का यह सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान है। मंगलवार की रात का न्यूनतम तापमान 29.5 सेल्सियस रहा, जबकि सोमवार की रात का न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था। यानी 24 घंटे में रात के न्यूनतम तापमान में 0.5 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गयी। रात के तापमान में वृद्धि होने से पंखा, कूलर भी बेअसर रहे। मौसम विभाग के अनुसार 18 से 21 जून तक हीट वेव चलने के आसार हैं।

महिला एफआईएच नेशंस कप: उरुग्वे पर रोमांचक जीत, ग्रुप टॉपर बनकर सेमीफाइनल में पहुंचा भारत

नई दिल्ली भारतीय महिला हॉकी टीम ने महिला एफआईएच नेशंस कप 2026 में शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए अपने अंतिम पूल मुकाबले में उरुग्वे को 3-2 से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया। इस जीत के साथ भारतीय टीम ने अपने ग्रुप में शीर्ष स्थान हासिल किया और खिताब की ओर एक मजबूत कदम बढ़ाया। मैच की सबसे बड़ी स्टार रहीं दीपिका जिन्होंने 2 गोल दागकर भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई। चुनौतीपूर्ण रही भारत की शुरुआत पहले क्वार्टर में टीम इंडिया को दिक्कत का सामना करना पड़ा था। उरुग्वे ने आक्रामक खेल दिखाते हुए 13वें मिनट में गोल दागा और 1-0 की बढ़त हासिल कर ली। शुरुआती गोल के बाद भारतीय टीम पर दबाव बढ़ गया। लेकिन खिलाड़ियों ने संयम बनाए रखा और लगातार आक्रमण जारी रखा। दूसरे क्वार्टर में भारत को बराबरी करने का मौका मिला। टीम की प्रमुख फॉरवर्ड दीपिका ने शानदार फिनिश के साथ 24वें मिनट में गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचाया और स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। इस गोल ने भारतीय खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ाया और टीम ने मैच पर अपनी पकड़ मजबूत करनी शुरू कर दी। तीसरे क्वार्टर में भारत का दबदबा तीसरे क्वार्टर में भारत ने बढ़त हासिल कर ली। दीपिका सोरेंग ने 43वें मिनट में बेहतरीन मूव को गोल में बदलते हुए टीम को 2-1 से आगे कर दिया। भारतीय टीम इसके बाद लगातार दबाव बनाती रही और उरुग्वे को ज्यादा मौके नहीं दिए। हालांकि चौथे और अंतिम क्वार्टर में मुकाबला फिर रोमांचक हो गया। उरुग्वे की ओर से विलार मैनुएला ने 55वें मिनट में गेद को गोल पोस्ट में डालकर स्कोर 2-2 से बराबर कर दिया। ऐसा लग रहा था कि मैच ड्रॉ की ओर बढ़ सकता है। 1 मिनट में दीपिका ने बदला खेल भारत की स्टार खिलाड़ी दीपिका ने एक बार फिर कमाल दिखाया। उरुग्वे के बराबरी के गोल के महज एक मिनट बाद दीपिका ने शानदार गोल दागकर भारत को 3-2 की बढ़त दिला दी। अंतिम मिनटों में भारतीय टीम ने मजबूत रक्षात्मक खेल दिखाया और उरुग्वे को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। निर्धारित समय समाप्त होने तक भारत ने अपनी बढ़त बरकरार रखी और महत्वपूर्ण जीत दर्ज की। इस जीत के साथ भारतीय महिला हॉकी टीम ने ग्रुप चरण का समापन शीर्ष स्थान पर किया। टीम का आत्मविश्वास काफी ऊंचा है और अब उसकी नजरें सेमीफाइनल जीतकर फाइनल में जगह बनाने पर होंगी।  

चंबा में मौत बनकर आई खाई, बोलेरो दुर्घटना में एक ही परिवार के 3 भाइयों सहित 7 लोगों की जान गई

चंबा  हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर से बड़ा हादसा हुआ है. चंबा जिले में हुए इस हादसे में सात लोगों की मौत हुई है. इसमें तीन सगे भाई भी शामिल हैं। जानकारी के अनुसार, चंबा जिले के चुराह के पुखरी-मसरूंड मार्ग पर रात को यह घटना पेश आई है. जिले के माणी जीरो के पास एक बोलेरो वाहन अनियंत्रित होकर करीब 500 मीटर गहरी खाई में जा गिरा और सात लोगों की जान चली गई. हादसा इतना भयावह था कि वाहन के परखच्चे उड़ गए और सभी सवार सात लोगों की मौके पर ही प्राण त्याग दिए. बताया जा रहा है कि रात 2 बजे यह हादसा पेश आया है, जिसमें चार पुरुष और तीन महिलाओं की मौत हुई है. कुठेड़ गांव से ये सभी लोग थे और गांव में अब मातम परसा हुआ है।  बताया जा रहा है कि हादसे का शिकार हुई बोलेरो पंचायत कुठेड़ के महल गांव की थी और महल गांव के लोग काकड़ोथा गांव में मुंडन संस्कार की धाम में शामिल होने के बाद घर लौट रहे थे. घटना की सूचना मिलने के बाद लोगों ने शवों को खाई से निकाला और फिर मामले में पुलिस भी मौके पर पहुंची. बताया जा रहा है कि सड़क किनारे क्रैश बैरियर भी नहीं थे, वर्ना हादसा बच सकता था.  एसपी चंबा विजय सकलानी ने बताया कि सभी शवों को खाई से निकाल लिया गया है और मृतकों की पहचान की जा रही है।  विधायक ने जताया दुख चंबा के चुराह के विधायक हंस राज ने कहा कि उन्हें सुबह मामले की जानकारी मिली थी. फौजी परिवार था और उनकी मित्रता थी. उन्होंने कहा कि क्रैश बैरियर इस इलाके में नहीं है और इस वजह से हादसे हो रहे हैं और यह बड़ी समस्या है. एक ही परिवार के छह लोगों की मौत हुई है. विधायक ने कहा कि हादसे की वजह का तो पता नहीं चला है, लेकिन उन्होंने पुलिस और अस्पताल को अलर्ट किया है।  गौर रहे कि चंबा में हाल ही में बड़े हादसे हुए हैं. इससे पहले, चंबा के बैरागढ़-सच पास-किलाड़ मार्ग पर भी 31 मई को एक इनोवा गाड़ी हादसे का शिकार हो गई थी और इसमें आठ लोगों की मौत हो गई थी. 17 जून को भी चंबा में कार हादसे में दो लोगों की मौत हो गई थी। 

स्मृति-शेफाली का धमाका, भारत का विश्व कप में सबसे बड़ा स्कोर; नीदरलैंड पर 95 रन की जीत

लीड्स भारत ने महिला टी20 विश्व कप 2026 के अपने दूसरे मुकाबले में एकतरफा जीत हासिल की है। टीम इंडिया के सामने नीदरलैंड की चुनौती थी। लीड्स के हेडिंग्ले मैदान पर ग्रुप ए के इस मुकाबले पहले बैटिंग करते हुए भारत ने 5 विकेट पर 209 रन बनाए। यह टूर्नामेंट के इतिहास में भारत का सबसे बड़ा स्कोर भी है। नीदरलैंड की टीम सिर्फ 114 रनों पर ऑलआउट हो गई और भारत ने मैच को 95 रनों से जीत लिया। इस जीत से भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया को पछाड़कर ग्रुप ए में टॉप पर पहुंच गई है। महिला टी20 में भारत की रनों से सबसे बड़ी जीत 142 रन vs मलेशिया, कुआलालंपुर (2018) 104 रन vs यूएई, सिलहट (2022) 100 रन vs बारबाडोस, एजबेस्टन (2022) 97 रन vs इंग्लैंड, ट्रेंट ब्रिज (2025) 95 रन vs नीदरलैंड, हेडिंग्ले (2026) स्मृति और शेफाली के बीच शतकीय साझेदारी नीदरलैंड की कप्तान बेबेट डी लीडे ने टॉस जीतकर भारत को पहले बल्लेबाजी के लिए बुलाया। शेफाली वर्मा और स्मृति मंधाना की जोड़ी ने 70 गेंदों में 115 रन की साझेदारी की। शेफाली 38 गेंदों में 55 रन बनाकर आउट हुईं। उनकी इस पारी में 10 चौके शामिल रहे। इसके बाद मंधाना ने जेमिमा रोड्रिगेज के साथ मोर्चा संभाला। दोनों खिलाड़ियों ने दूसरे विकेट के लिए 26 गेंदों में 47 रन जुटाए। भारत को 16वें ओवर की अंतिम गेंद पर स्मृति मंधाना के रूप में दूसरा झटका लगा। मंधाना 47 गेंदों में 1 छक्के और 11 चौकों के साथ 74 रन बनाकर आउट हुईं। जेमिमा 13 गेंदों में 2 चौकों की मदद से 19 रन बनाकर आउट हुईं। यास्तिका भाटिया सिर्फ तीन रन बना सकीं। भारतीय टीम 168 के स्कोर तक 4 विकेट गंवा चुकी थी। ऋचा घोष (नाबाद 20) ने कप्तान हरमनप्रीत कौर (12) के साथ पांचवें विकेट के लिए 15 गेंदों में 31 रन की साझेदारी करते हुए भारत को विशाल स्कोर तक पहुंचाया। दीप्ति शर्मा पारी की अंतिम दो गेंदें खेलने मैदान पर उतरीं, जिसमें एक छक्का और एक चौका लगाया। नीदरलैंड की तरफ से कैरोलिन डी लैंग ने 2 विकेट हासिल किए। एक रन बनाने में आखिरी 5 विकेट गिरे लक्ष्य का पीछा करने उतरी नीदरलैंड की टीम 17.3 ओवरों में 114 रन पर सिमट गई। हीथर सीगर्स ने फीबे मोल्केनबोअर के साथ पहले विकेट के लिए 34 रन जोड़े। हीथर 16 गेंदों में 21 रन बनाकर आउट हुईं, जिसके बाद कप्तान बैबेट डी लीडे ने छोटी-छोटी साझेदारियां करते हुए टीम को संभालने की कोशिश की। इस टीम को 96 के स्कोर पर कप्तान के रूप में चौथा झटका लगा। बैबेट 27 गेंदों में 28 रन बनाकर लौटीं, जिसके बाद विकेटों का पतझड़ लग गया और टीम 114 के स्कोर पर ऑलआउट हो गई। 16वें ओवर के बाद टीम का स्कोर 5 विकेट पर 113 रन था। अगले 9 गेंदों में एक रन बनाकर नीदरलैंड के आखिरी 5 विकेट गिर गए। भारत के लिए श्री चरणी ने 19 रन देकर 4 विकेट हासिल किए, जबकि शेफाली वर्मा ने 20 रन देकर 3 विकेट निकाले। नंदिनी शर्मा ने 2 विकेट अपने नाम किए।

दूसरी पत्नी के हक में हाईकोर्ट, ब्याज सहित बकाया फैमिली पेंशन देने के आदेश

चंडीगढ़ पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पारिवारिक पेंशन को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मृत सरकारी कर्मचारी की दूसरी पत्नी को पूरी पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता। यह तब लागू होगा जब वह एकमात्र जीवित और पात्र दावेदार हो। हाईकोर्ट ने कहा कि केवल दूसरी पत्नी होने के आधार पर विधवा को 50 फीसदी पेंशन तक सीमित करना नियमों की गलत व्याख्या है। जस्टिस नमित कुमार ने गुरदासपुर निवासी एक महिला की याचिका स्वीकार की। उन्होंने 25 मई 2022 के उस आदेश को रद्द किया जिसमें महिला को 50 फीसदी पेंशन का हकदार माना गया था। अदालत ने संबंधित विभाग को महिला को पूर्ण पारिवारिक पेंशन जारी करने का निर्देश दिया। साथ ही बकाया राशि ब्याज सहित देने का भी आदेश दिया गया। याचिकाकर्ता के पति पंजाब सरकार में जिला कोषागार अधिकारी थे। उनका निधन 14 नवंबर 2011 को हुआ था। पहली पत्नी का निधन 6 नवंबर 1980 को हो चुका था। याचिकाकर्ता से विवाह 30 मई 1992 को हुआ था। पेंशन स्वीकृति में त्रुटि  पति की मृत्यु के बाद महालेखाकार कार्यालय ने 3 अगस्त 2015 को पेंशन भुगतान आदेश जारी किया। इस आदेश में याचिकाकर्ता को केवल 50 फीसदी पारिवारिक पेंशन स्वीकृत की गई थी। इसके पीछे तर्क दिया गया कि वह मृत कर्मचारी की दूसरी पत्नी हैं। हाईकोर्ट ने पाया कि कर्मचारी की मृत्यु के समय याचिकाकर्ता ही एकमात्र जीवित पत्नी थीं। हाईकोर्ट का तर्क अदालत ने कहा कि एक से अधिक जीवित विधवाओं के बीच पेंशन बंटवारे का नियम यहां लागू नहीं होता। विभाग की गलत व्याख्या से पेंशन का एक हिस्सा बिना लाभार्थी के अटका रह जाता। यह पारिवारिक पेंशन योजना की मूल भावना के विपरीत है। हाईकोर्ट ने दोहराया कि एकमात्र पात्र दावेदार होने पर दूसरी पत्नी को पूर्ण पेंशन मिलेगी। 

Bata Carry Bag Case: 6 रुपये के बैग पर उपभोक्ता आयोग सख्त, कंपनी पर लगा 10 हजार रुपये का जुर्माना

 नई दिल्ली आप मॉल या शोरूम में सामान खरीदने के लिए जाते हैं, तो कैश काउंटर पर बिल बनाते समय एम्प्लाई आपसे कैरी बैग के लिए पूछता है. कुछ जगह ये फ्री में, तो कुछ जगह 5-6 रुपये के आसपास का पड़ता है और आपके ऊपर निर्भर करता है कि इसे लेना है या फिर नहीं. लेकिन इस पेपर कैरी बैग के चक्कर में मशहूर शू-कंपनी बाटा (Bata) को 10,000 रुपये देने पड़े. ये पूरा मामला 2023 का है, जिस लेकर कोर्ट ने बिना किसी नोटिस के ही अपना फैसला सुना दिया।  दरअसल, एक 6 रुपये के पेपर कैरी बैग को लेकर हुए उपभोक्ता विवाद के चलते फुटवियर कंपनी बाटा इंडिया को एक ग्राहक को मुआवजे और मुकदमेबाजी की लागत के रूप में 10,000 रुपये का भुगतान करना पड़ रहा है।  2023 का ये है पूरा मामला साउथ दिल्ली जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (DCDRC) ने दिल्ली की रहने वालीं प्रीति अग्रवाल के पक्ष में अपना फैसला सुनाया है. उन्होंने बाटा इंडिया पर आरोप लगाया था कि मई 2023 में Bata Store से 1,499 रुपये कीमत के जूते खरीदते समय उनसे कैरी बैग के लिए अतिरिक्त शुल्क लिया गया था, जबकि उन्हें पहले से इसकी सूचना नहीं दी गई थी।  शिकायत के अनुसार, प्रीति अग्रवाल को 6 रुपये के अतिरिक्त शुल्क के बारे में बिलिंग काउंटर पर पहुंचने पर ही जानकारी मिली. उन्होंने तर्क दिया कि स्टोर के अंदर कहीं भी कोई नोटिस नहीं लगा था, जिसमें ग्राहकों को यह बताया गया हो कि उन्हें कैरी बैग के लिए अलग से भुगतान करना होगा. उन्होंने आगे दावा किया कि खरीदारी करने के बाद ग्राहकों से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वे जूतों के डिब्बे अपने हाथों में लेकर चलें।  नोटिस न चिपकाना पड़ा बाटा को भारी इस पूरे मामले में चेयरमैन मोनिका ए. श्रीवास्तव और सदस्य किरण कौशा की अध्यक्षता वाली आयोग ने पाया कि खुदरा विक्रेताओं को सादा, बिना ब्रांड वाले कैरी बैग के लिए ग्राहकों से शुल्क लेने की कानूनी अनुमति है. हालांकि, उपभोक्ताओं को दुकान के अंदर प्रमुख नोटिस लगाकर पहले से सूचित किया जाना चाहिए. शिकायतकर्ता द्वारा पेश की गई तस्वीरों की जांच करने पर आयोग को संबंधित दुकान पर ऐसा कोई नोटिस नजर नहीं आया।  आयोग ने कहा कि नोटिस न होने के कारण ग्राहक को खरीदारी पूरी करने से पहले सोच-समझकर निर्णय लेने का अवसर ही नहीं मिला. आदेश सुनाते हुए कहा गया कि बाटा मुफ्त में कैरी बैग उपलब्ध कराने के लिए बाध्य नहीं था, फिर भी वह कैरी बैग रेट के को प्रदर्शित करने के संबंध में NCDRC के निर्देशों का अनुपालन करने में विफल रही।  चंडीगढ़, जयपुर में भी आए थे मामले रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये पहला मामला नहीं है, बल्कि इससे पहले भी कई मामलों में चंडीगढ़ और जयपुर के उपभोक्ता मंचों ने कंपनी के ब्रांडिंग वाले बैग के लिए ग्राहकों से पेमेंट लेने के लिए बाटा को फटकार लगाई थी. यह कहते हुए कि ग्राहक को उस चीज के लिए पेमेंट करने को मजबूर नहीं किया जाना चाहिए, जो प्रभावी रूप से ब्रांड के लिए एक विज्ञापन के रूप में काम करती है।     Bata ने शिकायत को बताया गलत हालांकि, Bata India की ओर से इस शिकायत को खारिज करते हुए तर्क दिया गया कि पेपर कैरी बैग एक अलग उत्पाद था, जिस पर एमआरपी अंकित थी. कंपनी ने दावा किया कि ये कैरी बैग ग्राहक की सहमति प्राप्त करने के बाद ही दिया गया था और इसका शुल्क अंतिम बिल में दर्शाया गया था। 

क्राइम कंट्रोल के लिए बड़ा प्लान, शिमला में होगी रणनीति; चंडीगढ़ ने पड़ोसी राज्यों से मांगा साथ

चंडीगढ़  चंडीगढ़ में हाल के दिनों में बढ़ी आपराधिक घटनाओं के मद्देनजर प्रशासन 19 जून को शिमला में होने वाली उत्तरी क्षेत्रीय परिषद (एनजेडसी) की स्थायी समिति की 22वीं बैठक में कानून-व्यवस्था का मुद्दा प्रमुखता से उठाएगा। इसके अलावा बुनियादी ढांचा विकास, ट्रैफिक प्रबंधन और सुखना वन्यजीव अभयारण्य के आसपास इको-सेंसिटिव जोन (ईएसजेड) घोषित करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा की जाएगी। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, शहर में अपराध करने के बाद कई आरोपित गिरफ्तारी से बचने के लिए पड़ोसी राज्यों में फरार हो जाते हैं। ऐसे मामलों में अपराधियों की तलाश और सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए समिति के सदस्य राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की मांग की जाएगी। शहर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन रिंग रोड परियोजना को शीघ्र पूरा करने का मुद्दा भी बैठक में उठाएगा। इससे अन्य राज्यों से आने वाले वाहनों को शहर में प्रवेश किए बिना बाहरी मार्ग से ही आगे भेजा जा सकेगा। मोहाली स्थित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक कम दूरी वाले मार्ग का मुद्दा भी चर्चा का हिस्सा बन सकता है। बैठक में सुखना वन्यजीव सेंचरी के आसपास ईको-सेंसिटिव जोन घोषित करने का मामला भी उठाया जाएगा। चंडीगढ़ प्रशासन लंबे समय से पंजाब सरकार से इस दिशा में कार्रवाई की मांग करता रहा है। पंजाब ने अभयारण्य की सीमा से 2 से 2.75 किलोमीटर तक के क्षेत्र को संवेदनशील क्षेत्र घोषित करने का प्रस्ताव रखा था, जबकि पहले केवल 100 मीटर क्षेत्र को ईएसजेड घोषित करने का प्रस्ताव प्रशासन ने अस्वीकार कर दिया था। दूसरी ओर, हरियाणा सरकार ने अपने क्षेत्र में 1 से 1.5 किलोमीटर तक के क्षेत्र को ईएसजेड घोषित करने की मंशा जताई है। बैठक में चार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे। उत्तरी क्षेत्रीय परिषद में हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली तथा चंडीगढ़ शामिल हैं। स्थायी समिति की बैठक का उद्देश्य मुख्य परिषद बैठक के लिए एजेंडा तैयार करना है। गौरतलब है कि वर्ष 2017 में केंद्र सरकार ने केवल चंडीगढ़ क्षेत्र के लिए ईको-सेंसिटिव जोन अधिसूचित किया था। चंडीगढ़ प्रशासन लगातार यह मांग करता रहा है कि सुखना वन्यजीव अभयारण्य के संरक्षण के लिए पंजाब और हरियाणा के हिस्सों को भी ईएसजेड के दायरे में लाया जाए। प्रशासन का मानना है कि इससे झील और अभयारण्य के आसपास अनियंत्रित व्यावसायिक निर्माण पर रोक लगेगी और पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी।  

बार चुनाव लड़ना हुआ महंगा! भोपाल में नामांकन शुल्क में रिकॉर्ड बढ़ोतरी से वकीलों में नाराजगी

भोपाल  राजधानी भोपाल बार संघ चुनाव इस बार प्रत्याशियों के लिए बेहद खर्चीला साबित हो रहा है, क्योंकि विभिन्न पदों की नामांकन फीस में 42% से लेकर रिकार्ड 75% तक की भारी वृद्धि की गई है। इस बार के चुनाव में सबसे ज्यादा प्रतिशत वृद्धि (75%) सह-सचिव, कोषाध्यक्ष और पुस्तकालयाध्यक्ष के पदों पर देखी गई है, जिनकी फीस सीधे 20 हजार से बढ़ाकर 35 हजार रुपये कर दी गई है। वहीं सबसे बड़े यानी अध्यक्ष पद के लिए भी दो वर्ष पहले की तुलना में सीधे 42.85% (15,000 रुपये) का इजाफा किया गया है। फीस में की गई यह बेतहाशा बढ़ोतरी इस समय कोर्ट परिसर में उम्मीदवारों और वकीलों के बीच चर्चा और आक्रोश का सबसे बड़ा विषय बनी हुई है। आर्थिक रूप से कमजोर अधिवक्ताओं के लिए बड़ी चुनौती इस बढ़ोतरी पर वरिष्ठ अधिवक्ता प्रियनाथ पाठक ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि जिस प्रकार चुनाव लड़ने के लिए नामांकन शुल्क में 50 से 75 फीसदी तक की वृद्धि की गई है, उससे सबसे बड़ी दिक्कत यह आ रही है कि जो अधिवक्ता आर्थिक रूप से कमजोर हैं, उनके लिए अब चुनाव लड़ना बेहद मुश्किल काम हो गया है। इसके कारण कई योग्य उम्मीदवार चुनाव मैदान से दूर रहने को मजबूर हो रहे हैं। वहीं, सचिव पद (जिसमें 60% की वृद्धि हुई है) का चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी अनुराग दुबे ने भी इस बढ़ी हुई फीस पर कड़ी आपत्ति जताई है और इसे उम्मीदवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताया है। नियमों को ताक पर रख उड़ाई जा रही आचार संहिता की धज्जियां चुनाव का प्रचार और जनसंपर्क कोर्ट परिसर में बहुत तेजी से चल रहा है, लेकिन इसके साथ ही चुनावी आचार संहिता के नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। नियमों के मुताबिक कोर्ट परिसर के भीतर किसी भी तरह के झंडे, बैनर या पोस्टर लगाने पर पूरी तरह प्रतिबंध है। इसके बावजूद, सख्त हिदायतों और पाबंदियों को ताक पर रखकर पूरे परिसर को प्रचार सामग्री से पाट दिया गया है। कोर्ट परिसर की दीवारों, खंभों और दरवाजों पर प्रत्याशियों के पोस्टर और झंडे साफ नजर आ रहे हैं, जिससे आचार संहिता का खुला उल्लंघन दिखाई दे रहा है। क्यों बढ़ानी पड़ी फीस? इस बार बारिश के मौसम को देखते हुए वाटरप्रूफ टेंट की व्यवस्था करनी होगी, जिसके कारण टेंट का खर्च काफी महंगा होने वाला है। इसके अलावा, समय के साथ स्टेशनरी की लागत भी बढ़ गई है। कुल मिलाकर विगत दो वर्षों में महंगाई में काफी ज्यादा इजाफा हुआ है, इसी व्यावहारिक कारण से इस बार नामांकन फीस में बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया गया है।" वासु वासवानी, मुख्य चुनाव अधिकारी, भोपाल बार काउंसिल। विभिन्न पदों के लिए निर्धारित नामांकन फीस की तुलनात्मक तालिका पद का नाम -वर्तमान निर्धारित फीस -दो वर्ष पहले की फीस- सीधे हुई बढ़ोतरी -कुल प्रतिशत वृद्धि (%) अध्यक्ष- 50,000 रुपये -35,000 रुपये- 15,000 रुपये- 42.85% की वृद्धि उपाध्यक्ष- 45,000 रुपये -30,000 रुपये- 15,000 रुपये- 50.00% की वृद्धि सचिव- 40,000 रुपय -25,000 रुपये- 15,000 रुपये- 60.00% की वृद्धि सह-सचिव- 35,000 रुपये -20,000 रुपये- 15,000 रुपये- 75.00% की वृद्धि कोषाध्यक्ष- 35,000 रुपये -20,000 रुपये- 15,000 रुपये- 75.00% की वृद्धि पुस्तकालयाध्यक्ष-35,000 रुपये -20,000 रुपये- 15,000 रुपये- 75.00% की वृद्धि वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य-15,000 रुपये- 10,000 रुपये- 5,000 रुपये- 50.00% की वृद्धि कनिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य-7,500 रुपये- 5,000 रुपये- 2,500 रुपये- 50.00% की वृद्धि। 

मध्य प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं का डरावना सच, 1.3 लाख घायल; 61% हादसों में युवा शामिल

भोपाल  राजधानी भोपाल सहित मध्य प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से रोजाना सड़क हादसों की खबरें सामने आती हैं. तेज रफ्तार, यातायात नियमों की अनदेखी और लापरवाही लोगों की जान पर भारी पड़ रही है. अब सड़क दुर्घटनाओं को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है. 108 आपातकालीन एंबुलेंस सेवा के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक साल में प्रदेश में 1 लाख 3 हजार से ज्यादा लोग सड़क हादसों का शिकार हुए हैं।  प्रदेश भर में हर दिन औसतन 283 लोग सड़क दुर्घटनाओं में घायल हुए. सबसे चिंता की बात यह है कि इन हादसों का सबसे बड़ा शिकार युवा वर्ग बन रहा है. करीब 61 प्रतिशत युवा सड़क दुर्घटनाओं के शिकार बन रहे हैं।  सड़क दुर्घटना की भेंट चढ़ रहे एमपी के युवा मध्य प्रदेश में सड़कों पर बढ़ती रफ्तार अब लोगों की जिंदगी के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है. यातायात नियमों की अनदेखी और लापरवाही सड़क दुर्घटनाओं की सबसे बड़ी वजह बनकर सामने आई है. 108 आपातकालीन एंबुलेंस सेवा द्वारा जारी रिपोर्ट से पता चला है कि मई 2025 से 2026 तक में 1 लाख 3 हजार 294 सड़क दुर्घटना हुई हैं, जिनमें चिकित्सा सहायता प्रदान की गई और इनमें शामिल युवाओं की तादाद सबसे ज्यादा है।  हादसों में किस उम्र वर्ग के कितने प्रतिशत लोग     16 से 30 वर्ष आयु – 61 प्रतिशत     31 से 45 वर्ष आयु – 24 प्रतिशत     46 से 60 वर्ष आयु – 9 प्रतिशत     अन्य आयु वर्ग – 6 प्रतिशत 108 एंबुलेंस सेवा के सीनियर मैनेजर तरुण सिंह परिहार ने कहा, "मेरी टीम हर आपात स्थिति में गोल्डन ऑवर के भीतर पहुंचकर लोगों की जान बचाने का प्रयास करती है. हर कॉल मेरे लिए किसी की जिंदगी बचाने का अवसर होती है. टीम का प्रयास रहता है कि कम से कम समय में घटनास्थल पर पहुंचकर मरीज को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।  108 सेवा उपयोग करने की अपील उन्होंने आगे लोगों से अपील करते हुए कहा, "किसी भी दुर्घटना या स्वास्थ्य आपात स्थिति में निजी वाहन के बजाय 108 एंबुलेंस सेवा का उपयोग करें, क्योंकि एंबुलेंस में जीवन रक्षक उपकरण और प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ उपलब्ध रहता है, जो अस्पताल पहुंचने से पहले ही मरीज को आवश्यक उपचार देना शुरू कर देता है।  108 एंबुलेंस सेवा के आंकड़ों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि रफ्तार की सनक लोगों पर कितनी भारी पड़ रही है. हालांकि, राहत की बात यह है कि पिछले एक साल में एक लाख तीन हजार से अधिक घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाकर उनकी जान बचाने का प्रयास किया गया, लेकिन सड़क पर कुछ सेकंड की लापरवाही किसी परिवार की पूरी जिंदगी बदल सकती है. ऐसे में जरूरी है कि रफ्तार नहीं, जिम्मेदारी को प्राथमिकता दी जाए. क्योंकि मंजिल तक पहुंचना जरूरी है, लेकिन सुरक्षित पहुंचना उससे भी ज्यादा जरूरी है।