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अंडे में खून की बूंद क्यों दिखती है? जानिए इसका वैज्ञानिक कारण

अंडे को प्रोटीन और न्यूट्रिएंट्स का सबसे अच्छा सोर्स माना जाता है इसलिए कई लोग रोजाना अंडे का सेवन करते हैं. लेकिन कई बार जब अंडे को पैन में तोड़ने के लिए फोड़ते हैं तो योक (पीला भाग) या एल्ब्यूमेन (सफेद भाग) पर लाल रंग की खून की बूंद या धब्बा दिखाई देता है. इसे देखकर अक्सर लोग डर जाते हैं और पूरा अंडा फेंक देते हैं. लोग सोचने लगते हैं कि क्या यह अंडा खराब है या फिर फर्टिलाइज्ड (जिससे चूजा बनता है) हो चुका है? अब ऐसे में हर किसी के मन में सवाल उठता है कि ये ब्लड स्पॉट कैसे आता है और क्या उससे कुछ नुकसान हो सकता है? तो आइए इस बारे में जानते हैं. क्यों आ जाती है अंडे के अंदर खून की बूंद? हेल्थलाइन का कहना है, अंडे में दिखने वाले ये ब्लड स्पॉट्स पूरी तरह से नेचुरल होते हैं और इन्हें देखकर घबराने की जरूरत नहीं है. दरअसल, अंडे में खून का धब्बा दिखाई देने के पीछे एक सिंपल बायोलॉजिकल प्रोसेस है. जब मुर्गी के शरीर के अंदर अंडा बन रहा होता है तो योक उसके ओवरी (अंडाशय) से रिलीज होता है. ओवरी में कई छोटी-छोटी ब्लड वेसल्स होती हैं और अंडा रिलीज होने के दौरान अगर इनमें से कोई भी बारीक ब्लड वेसल फट जाती है तो खून की एक छोटी सी बूंद योक पर लग जाती है. यूएसयू डिजिटल कॉमन्स पर पब्लिश्ड यूटा स्टेट यूनिवर्सिटी एक्सटेंशन गाइड के अनुसार, यदि ब्लड वेसल ओवरी में फटती है तो धब्बा योक पर दिखता है और यदि अंडा आगे बढ़ने के बाद ओविडक्ट (अंडवाहिनी) में ब्लीडिंग होती है तो यह धब्बा अंडे के सफेद भाग में आ जाता है. यह मुर्गी की उम्र, जेनेटिक्स, विटामिन A की कमी या अचानक बढ़े स्ट्रेस के कारण हो सकता है. क्या ब्लड स्पॉट वाले अंडे को खाना सुरक्षित है? आम जनता के बीच यह सबसे बड़ा कन्फ्यूजन है कि क्या इस अंडे को खाने से कोई बीमारी हो सकती है. यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर (USDA) का कहना है, ब्लड स्पॉट वाले अंडे खाने के लिए पूरी तरह से सेफ हैं. USDA अंडा ग्रेडिंग मैनुअल के नियमों के अनुसार, ऐसे अंडों को ग्रेड-बी कैटेगरी में रखा जाता है लेकिन ये अनसेफ नहीं होते. यदि आपको यह धब्बा देखने में अच्छा नहीं लग रहा है तो आप चाकू की नोक या चम्मच से उस लाल हिस्से को निकालकर अलग कर सकते हैं और बाकी बचे अंडे को आराम से पकाकर खा सकते हैं. बस ध्यान रखें कि अंडे को अच्छी तरह से कुक किया गया हो.

मृत व्यक्ति की वस्तुओं को लेकर गरुड़ पुराण की मान्यता: मोह और संतुलन पर जोर

मृत्यु जीवन का एक अटल सत्य है. जब कोई अपना इस दुनिया को छोड़कर जाता है, तो पीछे सिर्फ यादें ही नहीं छोड़ता बल्कि कई सवाल भी छोड़ जाता है. उन्हीं सवालों में से एक है कि क्या मृत व्यक्ति के कपड़े, गहने, बिस्तर और अन्य सामान घर में संभालकर रखना चाहिए या उन्हें विदा कर देना चाहिए? यह सवाल केवल परंपरा या आस्था का नहीं, बल्कि मनोविज्ञान और भावनाओं से भी जुड़ा है. कुछ लोग इसे अंधविश्वास मानते हैं, तो कुछ इसे शांति और संतुलन से जोड़कर देखते हैं. ऐसे में गरुड़ पुराण क्या कहता है, इसे समझना जरूरी हो जाता है. गरुड़ पुराण क्या कहता है? गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु केवल शरीर का अंत नहीं, बल्कि आत्मा की एक नई यात्रा की शुरुआत है. शास्त्र कहते हैं कि मृत्यु के बाद व्यक्ति का मोह पूरी तरह समाप्त नहीं होता है. वह जिन वस्तुओं से जुड़ा होता है, वो हैं कपड़े, घड़ी, गहने, उनसे भावनात्मक संबंध बना रहता है. इसलिए शास्त्र यह सलाह देते हैं कि मृत व्यक्ति की चीजों को संभालने में संतुलन जरूरी है. उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि आत्मा और परिवार दोनों को मानसिक शांति देना है. कपड़ों को लेकर क्या करें? मृत व्यक्ति के कपड़े सबसे ज्यादा दुविधा पैदा करते हैं. क्योंकि वे शरीर के सबसे करीब रहते हैं और उनसे गहरा भावनात्मक जुड़ाव होता है. गरुड़ पुराण के अनुसार, कपड़ों को लंबे समय तक संभालकर रखना उचित नहीं माना गया है. इन्हें सम्मानपूर्वक दान कर देना चाहिए. यह न केवल एक परंपरा है, बल्कि एक मानसिक प्रक्रिया भी है. जिससे व्यक्ति अपने दुख से धीरे-धीरे बाहर निकल पाता है. गहने और घड़ी का महत्व कपड़ों के विपरीत, गहनों को अलग दृष्टि से देखा गया है. क्योंकि वे केवल उपयोग की वस्तु नहीं, बल्कि परिवार की विरासत भी होते हैं. गहनों को रखा जा सकता है, लेकिन शुद्धि के बाद उन्हें नई शुरुआत के प्रतीक के रूप में अपनाना चाहिए. वहीं घड़ी को लेकर विशेष सावधानी बताई गई है. अगर घड़ी बंद या खराब हो, तो उसे घर में रखना रुके हुए समय का प्रतीक माना जाता है. तस्वीरों को कहां रखें? तस्वीरें भावनात्मक रूप से सबसे ज्यादा असर डालती हैं. लेकिन, पितरों की तस्वीरें मंदिर में नहीं रखनी चाहिए. घर के हर कोने में तस्वीरें लगाना भी उचित नहीं होता है. शास्त्र कहते हैं कि तस्वीरें ऐसी जगह रखें जहां वे प्रेरणा दें, न कि हर दिन दुख की याद दिलाएं. बिस्तर और रोजमर्रा की वस्तुएं बिस्तर, गद्दा, तकिया जैसी चीजें व्यक्ति के जीवन के आखिरी दिनों से जुड़ी होती हैं. इन्हें बदल देना या हटाना बेहतर माना गया है. वैज्ञानिक रूप से भी इनमें बैक्टीरिया हो सकते हैं. हालांकि, पलंग जैसी वस्तुओं को अच्छी तरह साफ करके इस्तेमाल किया जा सकता है. असली संदेश क्या है? गरुड़ पुराण का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि संतुलन सिखाना है. हर चीज को न तो पूरी तरह पकड़कर रखें और न ही बिना सोचे समझे त्याग दें. जरूरी है यह समझना कि क्या वह वस्तु आपके लिए प्रेरणा है या मानसिक बोझ?

मुख्य द्वार पर जल छिड़काव: वास्तु अनुसार घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने का उपाय

 घर का मुख्य द्वार ही वह स्थान है जहां से सकारात्मक ऊर्जा और धन का आगमन होता है. अगर आप भी अपने घर में बरकत और शांति चाहते हैं, तो सुबह के समय मुख्य द्वार पर जल छिड़कने का छोटा सा उपाय आपके लिए बेहद प्रभावी साबित हो सकता है. मुख्य द्वार पर जल छिड़काव के चमत्कारी लाभ लक्ष्मी का आगमन: ताजा जल पवित्रता का प्रतीक है, जो धन और सौभाग्य को घर की ओर आकर्षित करता है. नकारात्मक ऊर्जा का नाश: यह द्वार की दहलीज को शुद्ध करता है और रात भर में जमा हुई नकारात्मक शक्तियों व बुरी नजर को खत्म करता है. राहु दोष का निवारण: मुख्य द्वार राहु से संबंधित माना गया है.  सुबह जल छिड़कने से राहु का नकारात्मक प्रभाव कम होता है, जिससे अचानक आने वाली मुसीबतें और पारिवारिक कलह दूर होती है. पितृ देवों का आशीर्वाद: पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ सुबह के समय प्रवेश द्वार पर आते हैं.  जल की स्वच्छता उन्हें तृप्त करती है और उनका आशीर्वाद मिलता है. कैसे छिड़के जल सही समय: यह उपाय सुबह सोकर उठने के बाद, सूर्योदय से पहले या ठीक बाद करें. पहले द्वार के सामने झाड़ू लगाएं, फिर जल छिड़कें. तांबे का पात्र: जल को रात भर तांबे के लोटे में रखे,  सुबह उसका इस्तेमाल करें. तांबे के औषधीय गुण और शुद्धिकरण की शक्ति  के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देती है. इन चीजों को मिलाकर बनाएं उपाय को और शक्तिशाली हल्दी का पानी: एक चुटकी हल्दी मिलाने से गंभीर आर्थिक रुकावटें दूर होती हैं. सेंधा नमक: सप्ताह में एक बार (विशेषकर शुक्रवार को) पानी में सेंधा नमक मिलाकर छिड़काव करें. यह जिद्दी नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर सेहत को बेहतर करता है. गंगाजल या गुलाब जल: इसकी कुछ बूंदें घर में शांति और सद्भाव बनाए रखती हैं. दिशा संबंधी सावधानियां (Directional Precautions) वास्तु के अनुसार दिशा के अनुसार जल का इस्तेमाल करें: शुभ दिशाएं: यदि मुख्य द्वार उत्तर (North), उत्तर-पूर्व (North-East) या पूर्व (East) में है, तो जल के उपाय सबसे ज्यादा फायदेमंद हैं. सावधानी: दक्षिण (South), दक्षिण-पूर्व (SE) या दक्षिण-पश्चिम (SW) दिशा वाले द्वार पर जल का छिड़काव कम करें. इन अग्नि वाली दिशाओं में पानी का ज्यादा जमाव अस्थिरता या आर्थिक नुकसान की वजह बन सकता है. यहा केवल हल्की सफाई पर ध्यान दें.

सूर्य का नक्षत्र परिवर्तन: 22 जून 2026 से बदल सकती है कई राशियों की किस्मत

 ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों का चाल बदलना बहुत बड़ी बात मानी जाती है. सभी ग्रहों के राजा सूर्य देव जब अपना नक्षत्र बदलते हैं, तो इसका असर हम सभी के जीवन पर पड़ता है. आने वाली 22 जून 2026 से सूर्य देव एक नया नक्षत्र शुरू करने जा रहे हैं.  ज्योतिष के जानकारों के अनुसार, इस बदलाव से कुछ लोगों की किस्मत के दरवाजे खुलने वाले हैं. खासकर 3 राशियों के लिए यह समय धन-दौलत और सफलता की नई शुरुआत लेकर आएगा. किन राशियों को मिलेगा फायदा? सूर्य का यह बदलाव इन 3 राशियों के लिए बेहद खास रहने वाला है: मेष राशि: आपके लिए यह समय बहुत अच्छा रहेगा. ऑफिस में आपको प्रमोशन मिल सकता है, जो काम लंबे समय से अटके थे, वे पूरे हो जाएंगे. आपको अचानक पैसों का लाभ भी हो सकता है, जिससे आपकी आर्थिक स्थिति सुधरेगी. सिंह राशि: सूर्य देव इस राशि के स्वामी हैं, इसलिए इसका सबसे ज्यादा और अच्छा असर आप पर पड़ेगा.  आपका कॉन्फिडेंस बढ़ेगा, समाज में मान-सम्मान मिलेगा.  अगर कोई सरकारी काम अटका है, तो उसमें सफलता मिल सकती है.  लोग आपकी बातों को गंभीरता से लेंगे. कन्या राशि: आपके पास पैसा आने के नए रास्ते खुलेंगे. ऑफिस में आपकी मेहनत की तारीफ होगी. अच्छे परिणाम मिलेंगे. अगर आप कहीं पैसा निवेश करने की सोच रहे हैं, तो यह सही समय है. परिवार में भी खुशहाली का माहौल रहेगा. जीवन में आएंगे ये अच्छे बदलाव सूर्य के इस बदलाव से आपकी सुख-सुविधाएं बढ़ेंगी. आपमें एक नया जोश देखने को मिलेगा. आप पहले से ज्यादा बेहतर फैसले ले पाएंगे , मुश्किल समय में भी मजबूती से खड़े रहेंगे.  आपकी सेहत में भी सुधार होगा. सूर्य देव की कृपा पाने के आसान उपाय     इस दौरान सूर्य देव को खुश करने के लिए आप ये छोटे-छोटे उपाय कर सकते हैं:     रोज सुबह उठकर तांबे के लोटे से सूर्य देव को जल चढ़ाएं.     'ॐ घृणि सूर्याय नमः' मंत्र का 108 बार जाप करें.     रविवार के दिन आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना बहुत शुभ माना गया है.  

रांची समेत कई जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी, 60 किमी रफ्तार से चलेंगी हवाएं

रांची झारखंड में मौसम का मिजाज बदलने वाला है. प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति बनने और झारखंड में मॉनसून की बेरुखी के बाद गुरुवार से एक बार फिर मॉनसून के सक्रिय होने की संभावना बढ़ गई है. मौसम विभाग के अनुसार, गुरुवार और शुक्रवार को राज्य के कई हिस्सों में मौसम बदलने की संभावना है.   18-19 जून का मौसम गुरुवार और शुक्रवार यानी 18 और 19 जून को रांची सहित 17 जिलों में दोपहर के बाद मौसम बदलने की संभावना है. इनमें खूंटी, रामगढ़, हजारीबाग, कोडरमा, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, बोकारो, गिरिडीह, धनबाद, देवघर, जामताड़ा, दुमका, गोड्डा, साहिबगंज और पाकुड़ शामिल हैं. इस दौरान 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से आंधी चलने तथा मेघ गर्जन के साथ वज्रपात होने की आशंका है. मौसम विभाग ने इन जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. बाकी सात जिलों में भी तेज हवा के साथ मेघ गर्जन, वज्रपात और कहीं-कहीं बारिश होने की संभावना है. मौसम विभाग ने इन जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है. मौसम विभाग के मुताबिक रांची में 18 जून और 19 जून को रांची का अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है. 20 जून का मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, 20 जून को राज्य में आंशिक बादल छाए रहेंगे. कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है. राज्य के कुछ हिस्सों में वज्रपात होने और 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की संभावना है. जून में हुई कम बारिश मौसम विभाग के अनुसार, इस साल एक जून से 17 जून के बीच झारखंड में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है. एक जून से 17 जून तक झारखंड में सामान्य से 56 प्रतिशत कम बारिश हुई है. इस अवधि में सामान्य बारिश 67 मिमी होनी चाहिए थी.

शहरीकरण की मार, दिल्ली में तेजी से बढ़े खराब पर्यावरण वाले इलाके

नई दिल्ली  दिल्ली में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और निर्माण गतिविधियों का असर पर्यावरण पर साफ दिखाई देने लगा है। एक नए वैज्ञानिक अध्ययन के मुताबिक, पिछले 32 वर्षों में सेंट्रल दिल्ली ने अपने सबसे बेहतर इकोसिस्टम का करीब 73.8 प्रतिशत हिस्सा खो दिया है। कभी राजधानी के सबसे समृद्ध पर्यावरणीय क्षेत्रों में शामिल सेंट्रल दिल्ली का बड़ा हिस्सा अब खराब पर्यावरण की श्रेणी में पहुंच गया है। जामिया मिलिया इस्लामिया के भूगोल और पर्यावरण विज्ञान विभाग के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन 'क्रॉसिंग द इकोलॉजिकल थ्रेशोल्ड' में 1991 से 2023 तक के सैटेलाइट आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। अध्ययन के अनुसार, सेंट्रल दिल्ली में बेहतरीन प्राकृतिक स्वास्थ्य वाली जमीन 1991 में 13.88 वर्ग किलोमीटर थी, जो 2023 में घटकर सिर्फ 3.63 वर्ग किलोमीटर रह गई। खराब पर्यावरण वाले इलाके बढ़े     अध्ययन में यह भी सामने आया कि पूरी दिल्ली में खराब पर्यावरण वाले क्षेत्रों में 50.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।     सबसे ज्यादा गिरावट उत्तरी दिल्ली में दर्ज की गई, जहां खराब पर्यावरण वाला क्षेत्र बढ़कर 131.18 वर्ग किलोमीटर हो गया।     दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में ऐसे क्षेत्रों में 132 प्रतिशत और पश्चिमी दिल्ली में करीब 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।     पूर्वी दिल्ली, शाहदरा और उत्तर-पूर्वी दिल्ली में अच्छी पर्यावरणीय स्थिति वाले क्षेत्र अब बहुत कम बचे हैं।     इसके लिए अंधाधुंध शहरीकरण, औद्योगिक गतिविधियां और यमुना के फ्लडप्लेन में लगातार कमी को प्रमुख कारण बताया गया है।     हालांकि दक्षिणी दिल्ली और नई दिल्ली जिले से कुछ राहत की तस्वीर भी सामने आई है।  

तरबूज की खट्टी-मीठी शिकंजी: गर्मी में ताजगी और एनर्जी का फ्रूटी ड्रिंक

जून की इस रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और तपती धूप में घर से बाहर निकलते ही शरीर की पूरी एनर्जी खत्म हो जाती है. ऐसे में बॉडी को तुरंत हाइड्रेट करने के लिए हम अक्सर नींबू पानी या सोडा शिकंजी का सहारा लेते हैं. लेकिन रोज-रोज वही पुराना स्वाद पीकर अगर आपका मन भर गया है तो इस बार अपने समर ड्रिंक को एक फ्रूटी और मजेदार ट्विस्ट दें. आज हम आपके लिए लेकर आए हैं तरबूज की खट्टी-मीठी शिकंजी. तरबूज के नैचुरल मीठे स्वाद के साथ नींबू की खटास, पुदीने की ताजगी और खास मसालों का यह मेल मुंह में जाते ही स्वाद का ऐसा बम फोड़ेगा कि आप बाजार के सारे मॉकटेल भूल जाएंगे. यह न सिर्फ आपके शरीर को अंदर से बर्फ जैसा ठंडा रखेगी, बल्कि आपको लू से भी बचाएगी. आइए जानते हैं इसे बनाने की सबसे आसान विधि. सामग्री (Ingredients) तरबूज के टुकड़े: 2 कप (बीज निकाले हुए) नींबू का रस: 2 बड़े चम्मच ताजा पुदीना पत्ती: 10-12 काला नमक: 1/2 छोटी चम्मच भुना जीरा पाउडर: 1/2 छोटी चम्मच चाट मसाला: 1/4 छोटी चम्मच सादा नमक: एक चुटकी बर्फ के टुकड़े: आवश्यकतानुसार ठंडा पानी या सोडा वॉटर: 1 गिलास चीनी या शहद: 1 चम्मच अगर तरबूज कम मीठा हो तो शहद न मिलाएं बनाने का तरीका सबसे पहले तरबूज के टुकड़ों को मिक्सर जार या ब्लेंडर में डालें. साथ में पुदीने की पत्तियां और नींबू का रस डालकर बिना पानी मिलाए इसे अच्छी तरह ब्लेंड कर लें ताकि एक स्मूथ जूस तैयार हो जाए. तैयार हुए तरबूज के जूस को एक बड़ी छलनी की मदद से छान लें, ताकि अगर कोई छोटा बीज या रेशा रह गया हो तो वह निकल जाए. अगर आपको पल्प पसंद है तो आप बिना छाने भी इस्तेमाल कर सकते हैं. अब इस छाने हुए जूस में काला नमक, सादा नमक, भुना जीरा पाउडर और चाट मसाला डालकर अच्छी तरह चम्मच से मिक्स करें. अगर तरबूज थोड़ा फीका है, तो आप इस स्टेज पर थोड़ा सा शहद या पिसी चीनी मिला सकते हैं. सर्विंग ग्लास में 2-3 पुदीने की पत्तियां हाथ से तोड़कर डालें, साथ में एक नींबू की पतली स्लाइस और ढेर सारे बर्फ के टुकड़े डालें. अब गिलास में आधा तैयार किया हुआ मसालेदार तरबूज का जूस डालें और ऊपर से चिल्ड पानी या सोडा वॉटर डालकर मिक्स करें. ऊपर से थोड़ा सा भुना जीरा पाउडर स्प्रिंकल करें और पुदीने की पत्ती से गार्निश करके गरमा-गरम धूप से आए मेहमानों को तुरंत परोसें.

गुरु का पुष्य नक्षत्र में प्रवेश: ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण संयोग

 आज देवगुरु बृहस्पति का पुष्य नक्षत्र में प्रवेश होने जा रहा है. ज्योतिष शास्त्र में गुरु और पुष्य नक्षत्र का संयोग बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. पुष्य को नक्षत्रों का राजा कहा जाता है और शनि इसके स्वामी ग्रह, लेकिन गुरु इस नक्षत्र में उच्च के होते हैं और विशेष फल देते हैं. हालांकि, यह गोचर सभी राशियों के लिए शुभ नहीं रहेगा. गुरु के इस नक्षत्र परिवर्तन से कुछ राशियों को विशेष रूप से सावधान रहने की आवश्यकता है, क्योंकि उन्हें आर्थिक, मानसिक या स्वास्थ्य संबंधी मोर्चे पर नुकसान उठाना पड़ सकता है. आइए जानते हैं उन राशियों के बारे में जिन्हें इस दौरान संभलकर रहने की जरूरत है: मेष राशि (Aries) मेष राशि के जातकों के लिए गुरु का यह गोचर मिलाजुला लेकिन कुछ मामलों में नुकसानदेह हो सकता है. इस अवधि में आपके खर्चों में अचानक बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे बजट बिगड़ सकता है. कार्यक्षेत्र में सहकर्मियों के साथ वैचारिक मतभेद होने की आशंका है. निवेश करने से बचें और किसी को उधार देने से पहले अच्छी तरह सोच लें. मिथुन राशि (Gemini) मिथुन राशि वालों के लिए गुरु का पुष्य नक्षत्र में जाना मानसिक तनाव बढ़ा सकता है. साझेदारी के बिजनेस में घाटा होने की संभावना है. वाणी पर नियंत्रण न रखने के कारण परिवार या कार्यस्थल पर संबंध खराब हो सकते हैं. सेहत को लेकर लापरवाही न बरतें, खासकर पेट से जुड़ी समस्याएं परेशान कर सकती हैं. सिंह राशि (Leo) सिंह राशि के जातकों को इस अवधि में भाग्य का साथ थोड़ा कम मिलेगा, जिससे बनते काम अटक सकते हैं. नौकरीपेशा लोगों पर काम का दबाव बढ़ेगा, जिससे मानसिक थकान हो सकती है. आर्थिक रूप से कोई बड़ा फैसला लेना इस समय भारी पड़ सकता है. कार्यक्षेत्र में किसी भी तरह की राजनीति या गपशप से दूर रहें. वृश्चिक राशि (Scorpio) वृश्चिक राशि वालों के लिए गुरु का यह नक्षत्र परिवर्तन थोड़ा चुनौतीपूर्ण रहने वाला है. गुप्त शत्रुओं के कारण आपको करियर में रुकावटों का सामना करना पड़ सकता है. धन हानि के योग बन रहे हैं, इसलिए लेन-देन में सावधानी रखें. यात्रा करते समय अपने सामान और सेहत का विशेष ध्यान रखें.

सिवानी से आत्मनिर्भरता का नया अध्याय, मुख्यमंत्री ने की विकास योजनाओं की घोषणा

हिसार  मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सिवानी से आत्मनिर्भरता, स्वाभिमान, रोजगार और समृद्धि का नया अध्याय जुड़ गया है। आज ‘खादी रोजगार उत्सव’ के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का वोकल फार लोकल और विकसित भारत-2047 का संकल्प धरातल पर उतरता दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी बुधवार को सिवानी में आयोजित खादी रोजगार उत्सव कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। इस दौरान पूर्व मंत्री जेपी दलाल की बहल को उपमंडल बनाने और सिवानी को हिसार में शामिल करने की मांग पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पर आगामी समय में उचित कार्रवाई की जाएगी। खादी ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष मनोज गोयल ने मुख्यमंत्री को चरखे का स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में आनलाइन बटन दबाकर मधुमक्खी पालन के लिए 2350 बी बाक्स भी वितरित किए। मुख्यमंत्री ने क्या कहा? मुख्यमंत्री ने कहा कि खादी आजादी के आंदोलन से ही करोड़ों भारतीयों के श्रम, सम्मान और स्वाभिमान का परिचायक है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भी खादी स्वदेशी का प्रतीक था। इसने बिना किसी हथियार के ब्रिटिश हुकूमत की आर्थिक बुनियाद को हिलाकर रख दिया था। वर्तमान में प्रधानमंत्री ने हमें ‘खादी फार नेशन, खादी फार फैशन और खादी फार ट्रांसफार्मेशन’ का मंत्र दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामोद्योग विकास योजना के तहत हरियाणा के 972 कारीगरों को तीन हजार 645 मशीनें एवं टूल किट्स प्रदान की गई है। इनमें विद्युत चालित चाक, बी-बाक्स एवं बी-कालोनी, सिलाई मशीनें, टर्नवुड टूलकिट, फुटवियर निर्माण मशीनें, चरखे और दोना-पत्तल निर्माण मशीनें शामिल हैं। ये मशीनें गांवों में नई आर्थिक क्रांति का आधार बनेंगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने वाले युवाओं और पारंपरिक कारीगरों को 504 करोड़ 68 लाख रुपये की मार्जिन मनी सब्सिडी भी दी गई है। बढ़ गया खादी का कारोबार मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि वर्ष 2013-14 में खादी एवं ग्रामोद्योग का कुल कारोबार लगभग 31 हजार करोड़ रुपये था, जो आज बढ़कर एक लाख 87 हजार करोड़ रुपये हो गया है। पिछले 12 सालों में देशभर में खादी और ग्रामोद्योग के माध्यम से लगभग दो करोड़ रोजगार पैदा हुए हैं। केवीआइसी अध्यक्ष मनोज गोयल ने कहा कि पीएमईजीपी के तहत 22,259 नई इकाइयों के लिए 504.68 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सब्सिडी का आनलाइन संवितरण किया गया है। पूर्व मंत्री जेपी दलाल ने कहा कि भिवानी जिले की जनता ने सदैव आपका साथ दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने उनके अनुरोध पर लोहारू की दशकों से खाली पड़ी नहरों में टेल तक पूरा पानी पहुंचाया। किसान गरीब सहित हर वर्ग के हित में नीतियां लागू की। इस मौके पर बवानी खेड़ा के विधायक कपूर सिंह बाल्मीकि, विधायक बाढ़डा उमेद पातुवास, नलवा के विधायक रणधीर पनिहार, महेंद्रगढ़ के विधायक कंवर सिंह यादव, भाजपा जिला अध्यक्ष वीरेंद्र कौशिक, डीसी साहिल गुप्ता, सिवानी नगरपालिका की चेयरपर्सन वंदना केडिया, खादी ग्रामोद्योग के वित्तीय सलाहकार जे सरवनन, रवि महमिया और टोनी बराला सहित अन्य मौजूद रहे। मशीनें व टूल्स किए वितरित मुख्यमंत्री ने सोनीपत जिला से आई नेहा, अंजली, ऋतु और रोहतक निवासी सुदेश व पिंकी को फुटवियर मैन्युफैक्चरिंग मशीनें वितरित की। इसी प्रकार रोहतक निवासी साधना, गुंजन शर्मा, मोनिका, ज्योति व नीलम को सिलाई मशीन और भिवानी जिला से झुम्पा निवासी राजेश देवी, ऊषा रानी, छाकली देवी व प्रमिला को चरखा वितरित किया। शहद उत्पादन के लिए फतेहाबाद निवासी कुलदीप सिंह, भीम सिंह, राजेंद्र कुमार, पवन कुमार, कुलवंत और कुरुक्षेत्र निवासी मुनीष को उपकरण वितरित किए। मुख्यमंत्री ने की ये घोषणाएं     – गांव गुरेरा, किकराल, नलोई, देवसर, ढाणी रामजस, ढाणी किशनलाल, ढाणी मिठ्ठी में जगमग योजना लागू करने की घोषणा। तीन करोड़ 28 लाख रुपए का खर्च आएगा     – लोहारू शहर में छह करोड़ 85 लाख की लागत से एक कम्युनिटी सेंटर बनाया जाएगा।     – सिवानी के राजकीय महाविद्यालय में एक करोड़ 50 लाख रुपए की लागत से मल्टीपर्पस हाल का निर्माण होगा।     – सिवानी सिंचाई मंडल की मंढोली डिस्ट्रीब्यूटरी शहरयारपुर व खरकड़ी माइनर की चार करोड़ की लागत से री-माडलिंग।     – लोहारू सिंचाई मंडल में कासनी, झांझड़ा, बहल, पातवान, सौरा , बड़दु चैना माइनर की री-माडलिंग के लिए आठ करोड़ छह लाख रुपए की राशि खर्च।     – सिवानी में ड्राइविंग लाइसेंस के लिए मेडिकल सुविधा शुरू करने की घोषणा।     – किकराल रोड हाईवे बाईपास, सिवानी में ओवरब्रिज का निर्माण करने की घोषणा।     – सिवानी के नागरिक अस्पताल में चार करोड़ रुपए की लागत से पोस्टमार्टम की सुविधा     – 12 करोड़ 22 लाख रुपए की लागत से बहल बस स्टैंड का निर्माण।     – सिवानी नगरपालिका के लिए नए भवन का निर्माण।     – लोहारू विधानसभा क्षेत्र के सड़क तंत्र को मजबूत करने के लिए लोक निर्माण एवं सड़क निर्माण विभाग की 391.25 किलोमीटर की 120 सड़कों की मरम्मत व मार्केटिंग बोर्ड की 141.68 किलोमीटर की सड़कों की मरम्मत।     – लोहारू विधानसभा के खेतों के 25 किलोमीटर के रास्तों को पक्का किया जाएगा।  

ब्लैक फिल्म, हूटर और मॉडिफाइड वाहनों पर राजस्थान पुलिस का बड़ा शिकंजा

जयपुर राजस्थान की सड़कों पर सुगम, सुरक्षित और नियमबद्ध यातायात व्यवस्था कायम करने के लिए पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर शुरू हुआ महा-अभियान हर दिन नए रिकॉर्ड बना रहा है। महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा के कड़े निर्देशों के बाद प्रदेश के चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल मुस्तैद है। इस पूरे अभियान की कमान महानिदेशक पुलिस यातायात श्री अनिल पालीवाल और अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस यातायात डॉ. बी.एल. मीणा संभाल रहे हैं, जिनके सुपरविजन में जिला पुलिस और ट्रैफिक टीमें सुबह से देर रात तक काली फिल्म, अवैध हूटर और मॉडिफाइड चेसिस वाले वाहनों को खंगाल रही हैं। समेकित आंकड़ों पर नजर डालें तो 4 जून से 16 जून 2026 तक के 13 दिनों के भीतर राजस्थान पुलिस ने कुल 1,10,206 वाहनों के खिलाफ सख्त दंडात्मक और विधिक कार्रवाई की है। इनमें ब्लैक फिल्म, नियम विरुद्ध नंबर प्लेट, वाहन की अवैध संरचना परिवर्तन, अनाधिकृत लाल-नीली बत्ती, फ्लैशर, स्ट्रोब लाइट, हूटर, प्रेशर हॉर्न तथा वाहनों पर अनाधिकृत शब्द एवं चिन्ह लगाने वालों के खिलाफ सख्त प्रवर्तन किया गया। अभियान के तहत 16 जून को अकेले 7,328 वाहनों के विरुद्ध कार्रवाई की गई। ब्लैक फिल्म और नियम विरुद्ध नंबर प्लेट पर सबसे अधिक कार्रवाई 4 जून से 16 जून तक अभियान के दौरान वाहनों के शीशों पर लगी ब्लैक फिल्म के विरुद्ध सर्वाधिक 41,982 कार्रवाई की गई। इसके अलावा नियम विरुद्ध नंबर प्लेट एवं पंजीयन चिन्ह के 28,462, वाहनों पर अनाधिकृत शब्द, चिन्ह एवं लेखन के 15,156, वाहन की संरचना (बॉडी/चेसिस) में अवैध परिवर्तन के 10,606, अनाधिकृत लाल-नीली बत्ती, फ्लैशर, स्ट्रोब लाइट एवं हूटर के 8,066 तथा प्रेशर हॉर्न/एयर हॉर्न के 5,934 मामलों में कार्रवाई की गई। 16 जून को 7,328 वाहनों पर कार्रवाई अभियान के तहत 16 जून को प्रदेशभर में कुल 7,328 वाहनों के विरुद्ध कार्रवाई की गई। इनमें वाहन की संरचना में अवैध परिवर्तन के 736, अनाधिकृत लाल-नीली बत्ती, फ्लैशर, स्ट्रोब लाइट एवं हूटर के 638, प्रेशर हॉर्न/एयर हॉर्न के 435, ब्लैक फिल्म के 2,565, वाहनों पर अनाधिकृत शब्द, चिन्ह एवं लेखन के 1,037 तथा नियम विरुद्ध नंबर प्लेट एवं पंजीयन चिन्ह के 1,917 मामलों में चालान बनाए गए। जयपुर पश्चिम में सर्वाधिक कार्रवाई 16 जून को जिला स्तर पर जयपुर पश्चिम में सर्वाधिक 487 कार्रवाई दर्ज की गई। इसके बाद जयपुर ग्रामीण में 337, जयपुर यातायात में 294, चित्तौड़गढ़ में 289, धौलपुर में 276, बांसवाड़ा में 261, भीलवाड़ा में 250 तथा निवाड़ी में 249 कार्रवाई की गई। वहीं ब्लैक फिल्म के विरुद्ध सर्वाधिक 186 कार्रवाई जयपुर यातायात में तथा नियम विरुद्ध नंबर प्लेट के सर्वाधिक 132-132 प्रकरण जयपुर पश्चिम और बारां में दर्ज किए गए। नियमों की पालना ही सुरक्षित यात्रा की कुंजी डीजी ट्रैफिक श्री पालीवाल ने आमजन से अपील की है कि वे यातायात नियमों का पूर्णतः पालन करें तथा वाहनों में किसी भी प्रकार की अवैध मॉडिफिकेशन, ब्लैक फिल्म, अनाधिकृत लाल-नीली बत्ती, फ्लैशर, प्रेशर हॉर्न एवं नियम विरुद्ध नंबर प्लेट का उपयोग नहीं करें। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने, अनुशासित यातायात व्यवस्था स्थापित करने तथा आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह विशेष अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।