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यौन शोषण के आरोप में क्रिकेटर यश दयाल को मिली राहत, गिरफ्तारी पर रोक लगाई

प्रयागराज इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक महिला से यौन शोषण के आरोप में क्रिकेटर यश दयाल के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के मामले में उनकी गिरफ्तारी पर मंगलवार को रोक लगा दी। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति अनिल कुमार की पीठ ने 'रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु' (आरसीबी) के लिए खेलने वाले 27 वर्षीय दयाल द्वारा दायर उस याचिका पर यह आदेश पारित किया जिसमें उन्होंने मामले में अपनी गिरफ्तारी पर रोक लगाने और प्राथमिकी रद्द करने का अनुरोध किया था। याचिकाकर्ता के वकील गौरव त्रिपाठी ने बताया कि अदालत ने यश दयाल की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है और अगली सुनवाई तक कोई उत्पीड़नात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया है। दयाल के खिलाफ प्राथमिकी छह जुलाई को भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 (झांसा देकर यौन संबंध बनाने) के तहत गाजियाबाद जिले के इंदिरापुरम थाना में दर्ज की गई थी जिसमें एक महिला ने दयाल पर यौन शोषण का आरोप लगाया था। शिकायतकर्ता के मुताबिक, दोनों करीब पांच साल पहले मिले थे और दयाल ने उससे शादी करने का वादा किया था। कथित पीड़िता ने यह भी दावा किया है कि दयाल शादी करने का उसका प्रस्ताव टालता रहा और अंततः उसे पता चला कि दयाल का अन्य महिलाओं के साथ भी संबंध है। यह शिकायत शुरुआत में मुख्यमंत्री के ऑनलाइन शिकायत निपटान पोर्टल (आईजीआरएस) पर 21 जून को की गई थी।  

मैनचेस्टर टेस्ट से पहले बड़ा झटका, इंग्लैंड टीम से बाहर हुआ अहम गेंदबाज

लंदन  मैनचेस्टर टेस्ट मैच के लिए इंग्लैंड की टीम का ऐलान हो गया है। लॉर्ड्स में सोमवार 14 जुलाई को भारत के खिलाफ इंग्लैंड की टीम को मैच विनिंग मोमेंट दिलाने वाला गेंदबाज बाहर हो गया है। ये गेंदबाज कोई और नहीं, बल्कि स्पिनर शोएब बशीर हैं, जिनकी अंगुली में फ्रैक्चर हो गया है। ऐसे में वह सीरीज में आगे नहीं खेल पाएंगे। इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड यानी ईसीबी ने शोएब बशीर की जगह एक अनुभवी स्पिनर को टीम में शामिल किया है, जो लियाम डॉसन हैं और वे पहले भी टेस्ट और इंटरनेशनल क्रिकेट इंग्लैंड के लिए खेल चुके हैं। शोएब बशीर के लिए वैसे तो ये टेस्ट सीरीज अच्छी नहीं रही, लेकिन लॉर्ड्स में अपनी टीम को विनिंग मोमेंट उन्हीं ने दिलाया, क्योंकि उन्होंने मोहम्मद सिराज का विकेट लिया। हालांकि, इसमें किस्मत का भी योगदान था, क्योंकि गेंद को सिराज ने डिफेंस किया था और वह किसी तरह पीछे चली गई थी और स्टंप्स में लग गई थी। हालांकि, अब शोएब बशीर आगे इस सीरीज में नहीं खेलेंगे, क्योंकि इसी मैच के दौरान ऋषभ पंत का एक शॉट उनके बाएं हाथ की कनिष्ठा यानी सबसे छोटी उंगली में लगा था और उसमें फ्रैक्चर हो गया था। वहीं, लियाम डॉसन की बात करें तो वे 2016-17 में कुल 3 टेस्ट इंग्लैंड के लिए खेल चुके हैं, जिनमें एक मुकाबला उन्होंने भारत के खिलाफ खेला था। हालांकि, उनको घरेलू क्रिकेट का अच्छा खासा अनुभव है। यही कारण है कि एक अनुभवी स्पिनर को इंग्लैंड ने अपनी टीम में शामिल किया है। 371 विकेट उन्होंने अपने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में चटकाए हैं। इसके अलावा टीम में कोई भी बदलाव इंग्लैंड की ओर से नहीं हुआ है। इंग्लैंड की टीम इस प्रकार है बेन स्टोक्स (कप्तान), जोफ्रा आर्चर, गस एटकिंसन, जैकब बेथेल, हैरी ब्रुक, ब्राइडन कार्स (डरहम), जैक क्रॉली, लियाम डॉसन, बेन डकेट, ओली पोप, जो रूट, जेमी स्मिथ (विकेटकीपर), जोश टंग और क्रिस वोक्स  

पीएम-मंत्रियों को विशेष छूट क्यों? कांग्रेस का लोकसभा स्पीकर से जवाब तलब

नई दिल्ली  लोकसभा में अटेंडेंस दर्ज कराने के सिस्टम को लेकर कांग्रेस सांसद ने आपत्ति दर्ज कराई है। कांग्रेस सांसद माणिकम टैगोर ने यह सवाल उठाया है। उन्होंने कहाकि लोकसभा में उपस्थिति दर्ज कराने की नई प्रणाली से प्रधानमंत्री और मंत्रियों को छूट क्यों दी गई है? गौरतलब है कि लोकसभा में आगामी मानसून सत्र से सदस्यों के लिए उपस्थिति दर्ज कराने की नई व्यवस्था शुरू होने जा रही है। इसके तहत वे लॉबी में जाकर नहीं, बल्कि अपनी आवंटित सीट पर ही उपस्थिति दर्ज करा सकेंगे। गौरतलब है कि मंत्रियों और नेता प्रतिपक्ष को अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए हस्ताक्षर करने की जरूरत नहीं है। क्यों मिली है छूट लोकसभा में कांग्रेस के सचेतक टैगोर ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि लोकसभा में सीट पर ही उपस्थिति दर्ज करने के लिए नया मल्टीमीडिया सिस्टम इस मॉनसून सत्र में प्रभावी हो जाएगा। लेकिन हमने पहले ही वक्फ विधेयक पर मत विभाजन के दौरान इसे विफल होते देखा है जब प्रणाली प्रामाणिक तरीके से काम नहीं कर रही थी। एक दोषपूर्ण प्रणाली को क्यों दोहराया जाए? उन्होंने सवाल किया कि अगर उपस्थिति दर्ज कराने की यह प्रक्रिया, पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए है, तो प्रधानमंत्री और मंत्रियों को इससे छूट क्यों? पीएम को पेश करना चाहिए उदाहरण टैगोर ने कहाकि क्या प्रधानमंत्री को प्रक्रिया से ऊपर होने के बजाय उदाहरण पेश करने के लिए नेतृत्व नहीं करना चाहिए? इससे पता चलेगा कि प्रधानमंत्री वास्तव में कितने दिन तक लोकसभा में मौजूद रहते हैं। उन्होंने कहाकि केवल उपस्थिति को डिजिटल बनाने के बजाए, हमें प्रणालीगत सुधारों की जरूरत है। सभी के लिए अनिवार्य उपस्थिति, पारदर्शी भागीदारी, बोलने के रिकॉर्ड और मतदान के स्वत: प्रकाशन की व्यवस्था हो। कांग्रेस सांसद ने इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल उपकरण उतने ही अच्छे होते हैं, जितनी उनके पीछे की मंशा।  

तस्वीरों में गाजा का संकट: एक वक्त के खाने के लिए जद्दोजहद

गाजा  गाजा के कम्यूनिटी किचन का यह नजारा है। यहां पर खाना बंटने से पहले फिलिस्तीनी लोग खाने के लिए कुछ इस तरह से संघर्ष करते हैं। गाजा पट्टी में खाने के लिए जबर्दस्त मारा-मारी मची हुई है। इस तस्वीर को देखिए, कैसे खाना बनने से पहले ही यहां पर लोग बर्तन लेकर खाने के लिए कतार में खड़े हो जाते हैं। खाना न मिलने की बेबसी इन मासूमों के चेहरे पर साफ नजर आती है। हाथों में बर्तन थामे यह सब इंतजार कर रहे हैं कि कब खाना मिलेगा। गाजा में इजरायल के हमलों के बीच बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हैं। इनके बीच खाने को मारा-मारी की नौबत आ जाती है। गाजा में खाना नहीं मिलने से लोग बेहद परेशान हैं। कई बार तो खाना नहीं मिलने की हालत में लोग पानी से ही काम चला रहे हैं। यह नजारा गाजा में बांटे जाने वाले फूड सेंटर का है। यहां पर लोग खाने के लिए अपना रजिस्ट्रेनशन कराने पहुंच हुए हैं। यह बच्चियां भी खाने के इंतजार में बैठी हुई हैं। इनके चेहरे देखकर लग रहा है कि इन्हें कई दिनों से खाना नहीं मिला है। जब कई दिनों से इंसान भूखा हो और उसकी प्लेट में खाना जाए तो चेहरे पर संतुष्टि का कुछ ऐसा ही भाव आता है। यह व्यक्ति अपने परिवार के साथ खाना खा रहा है। लंबे समय से चल रहे युद्ध के चलते यहां पर बड़ी संख्या में लोग भूख और तबाही से बेजार हैं। खाना मिलने का इंतजार बड़ा भारी होता है। ऐसे में गाजापट्टी के रहने वाले इन मासूमों ने सोचा कि चलो तब तक खेल-कूद कर अपना समय गुजारते हैं।

श्यामशाह मेडिकल कॉलेज में बड़ा खुलासा: छात्राओं के यौन उत्पीड़न पर सीनियर डॉक्टर पर गिरी गाज

रीवा  रीवा के श्यामशाह मेडिकल कालेज की 80 नर्सिंग छात्राओं के साथ यौन उत्पीड़न और अभद्रता करने के मामले में ईएनटी विभाग के सीनियर डॉक्टर मो अशरफ को सस्पेंड कर दिया गया। उन्हें सस्पेंड करने की मांग को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने मेडिकल कालेज में जमकर हंगामा किया गया था और उन पर कार्रवाई की मांग की थी। हाल ही में रीवा के श्यामशाह मेडिकल कालेज की 80 छात्राओं ने मेडिकल कालेज से संबद्ध गांधी स्मृति चिकित्सालय के ईएनटी विभाग के सीनियर डॉक्टर मो अशरफ पर यौन उत्पीड़न और अभद्रता सहित कई आरोप लगाए थे। बीएससी नर्सिंग की 80 छात्राओं ने यौन दुर्व्यवहार और असहज व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए थे। छात्राओं ने नर्सिंग कॉलेज की प्राचार्य को लिखित शिकायत दी थी। उन्होंने कहा था कि डॉक्टर के व्यवहार से वे खुद को असुरक्षित और मानसिक रूप से प्रताड़ित महसूस कर रही हैं। इसके बाद इस मामले ने काफी तूल पकड़ लिया। नर्सिंग काॉलेज के प्राचार्य ने छात्राओं के विभाग में जाने पर रोक लगा दी थी। इस मामले की जांच के लिए नेत्र रोग विभागाध्यक्ष शशि जैन के नेतृत्व में जांच कमेटी बनाई गई थी। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद भी छात्राओं के समर्थन में उतर आया था और डाक्टर पर कार्रवाई की मांग को लेकर मेडिकल कालेज में हंगामा किया था। अस्पताल प्रशासन द्वारा उन्हें 10 दिनों का आश्वासन दिया गया था। अब डॉक्टर अशरफ पर कार्रवाई करते हुए उन्हें सस्पेंड कर दिया गया है। निलंबन पत्र में बताया गया है कि डॉक्टर अशरफ द्वारा प्रस्तुत जवाब संतुष्ट नहीं पाए जाने पर उन पर निलंबन की कार्रवाई की जा रही है।

चार साल बाद पटरी पर लौटेंगी 13 यात्री गाड़ियां, आज 15 जुलाई से होगा संचालन शुरू

बिलासपुर छत्तीसगढ़ में रेल यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी सौगात है। कोरोना काल के दौरान छत्तीसगढ़ में बंद की गई 13 लोकल ट्रेनों को फिर से शुरू करने का फैसला रेलवे ने किया है। इन ट्रेनों के शुरू होने से लोकल यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। SECR इन सभी ट्रेनों का संचालन मंगलवार से शुरू हो जाएगा। रेलवे बोर्ड से अनुमति मिलने के बाद रेलवे अधिकारियों ने इस बात की जानकारी दी है। क्या होगा टाइम टेबल यह सभी लोकल ट्रेन अपने पुराने तय समय पर ही चलेंगे। इन ट्रेनों की शुरू होने से रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, डोंगरगढ़, गोंदिया, कटंगी और इतवारी जैसे छोटे-बड़े स्टेशनों के यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। इस ट्रेनों के संचालन से उन यात्रियों को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा जो रोजना अप डाउन करते हैं। रेलवे के इस फैसले से छात्रों, कर्मचारी और छोटे व्यापारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। 15 जुलाई से चलेंगी ये ट्रेनें     08741 रायपुर–डोंगरगढ़: रायपुर से शाम 6:15 बजे, डोंगरगढ़ आगमन रात 9:10 बजे     08265 रायपुर–रायगढ़: रायपुर से सुबह 07:00 बजे, रायगढ़ आगमन दोपहर 01:45 बजे     08745 रायपुर–कांकेर: रायपुर से सुबह 05:30 बजे, कांकेर आगमन 10:30 बजे     08742 डोंगरगढ़–रायपुर: डोंगरगढ़ से सुबह 06:10 बजे, रायपुर आगमन 09:00 बजे     08266 रायगढ़–रायपुर: रायगढ़ से दोपहर 02:15 बजे, रायपुर आगमन रात 09:15 बजे     08746 कांकेर–रायपुर: कांकेर से दोपहर 01:00 बजे, रायपुर आगमन शाम 06:00 बजे     07889 गोंदिया–कटंगी: गोंदिया से सुबह 05:30 बजे, कटंगी आगमन सुबह 06:30 बजे     07890 कटंगी–गोंदिया: कटंगी से सुबह 07:00 बजे, गोंदिया आगमन सुबह 08:00 बजे     07867 गोंदिया–इटवारी: गोंदिया से शाम 04:00 बजे, इतवारी आगमन शाम 06:50 बजे 16 जुलाई से इनका होगा संचालन     08743 रायपुर–डोंगरगढ़: रायपुर से सुबह 09:45 बजे, डोंगरगढ़ आगमन दोपहर 12:40 बजे     08744 डोंगरगढ़–रायपुर: डोंगरगढ़ से दोपहर 01:10 बजे, रायपुर आगमन शाम 04:05 बजे     07891 डोंगरगढ़–कटंगी: डोंगरगढ़ से सुबह 10:00 बजे, कटंगी आगमन दोपहर 01:30 बजे     07892 कटंगी–डोंगरगढ़: कटंगी से दोपहर 03:00 बजे, डोंगरगढ़ आगमन शाम 06:30 बजे ये सभी ट्रेनें अपने पुराने निर्धारित समय पर चलेंगी। इन ट्रेनों के शुरू होने से रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, डोंगरगढ़, गोंदिया, कटंगी और इतवारी जैसे छोटे-बड़े स्टेशनों के यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। खासकर छात्रों, कर्मचारियों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को, जो रोजाना यात्रा करते हैं, इसका सीधा लाभ मिलेगा। रेलवे एडमिनिस्ट्रेशन के साथ बैठक में सांसदों ने रायपुर से गोवा तक सीधी ट्रेन चलाने की मांग की थी। इसके साथ ही बिलासपुर एक्सप्रेस को दुर्ग तक चलाने की मांग, ताकि रीवा के यात्री जो रायपुर-दुर्ग में रहते हैं, उनको राहत मिल पाए।इसके अलावा जगदलपुर से चलने वाली 10 ट्रेनें शॉर्ट टर्मिनेट की गई हैं। ये ट्रेनें आज 15 जुलाई को भी जगदलपुर और किरंदुल नहीं आएगी। ट्रेनें ओडिशा के कोरापुट तक आएगी और वहीं से लौट जाएंगी। सांसदों ने बैठक में बंद ट्रेनों के परिचालन की मांग रखी थी रेलवे एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक, कोरोना के बाद अब हालात सामान्य है। लोकल ट्रेनों का संचालन बहाल किया जा रहा है। हाल में ही हुई सांसदों की बैठक में इस मुद्दे को हर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने गंभीरता के साथ उठाया था। बंद ट्रेनों के परिचालन की मांग की गई थी। सांसदों की ओर से शिकायत की गई कि लोकल लेवल रेलवे के अधिकारी और कर्मचारी उनकी बातें नहीं सुनते। इस पर रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा था कि, हमारी ओर से शिकायत हुई तो रेलवे के अफसरों को समस्या आ सकती है। अग्रवाल ने आगे कहा था कि, रेल मंत्री के निर्देश के बाद भी नई रेल लाइन में हो रहे अलाइनमेंट के मामले पर सांसदों से चर्चा नहीं हो रही है। ये गलत प्रक्रिया है। आपस में बात करके अलाइनमेंट का मामला सुलझाना चाहिए, ताकि आम लोगों को समस्या न हो। इसके अलावा ग्रीन एनर्जी बढ़ाने, स्पोर्ट कोटा से रेलवे में भर्ती जैसे मुद्दे भी टेबल पर रखे गए थे। सांसदों की ओर से रखी गई थी ये मुख्य मांगें     कोरबा से दुर्ग तक जोड़ने के लिए केवल एक ट्रेन है। तीन मेमू ट्रेन चलाने की मांग।     धमतरी, कुरूद और बालोद इन जगहों पर रेल लाइन का विस्तार की सिफारिश।     अभनपुर में रेल आरक्षण केन्द्र जल्द खोलने की मांग।     बिलासपुर एक्सप्रेस को दुर्ग तक चलाने की मांग, ताकि रीवा के यात्री जो रायपुर-दुर्ग में रहते हैं, उनको राहत मिल पाए।     रायपुर से गोवा तक सीधी ट्रेन चलाने की मांग रखी गई।  

खेत के पोखर में डूबने से तीन सगे भाई-बहनों की मौत, स्कूल से लौटने के बाद आम तोड़ने गए थे बच्चे

छतरपुर  जिले के लवकुश नगर थाना अंतर्गत हटवां गांव में तीन मासूम भाई-बहनों की पानी में डूबने से मौत हो गई। स्कूल से लौटने के बाद आम तोड़ने खेत गए तीनों बच्चे खेत में बनी बंधी (तालाब) में डूब गए। जब परिजनों ने बच्चों को देर शाम तक नहीं देखा तो उनकी खोजबीन शुरू हुई। बाद में बंधी में तीनों के शव नजर आए। इस घटना से गांव में मातम पसर गया है। स्कूल से लौटकर आम तोड़ने खेत गए थे बच्चे मृतक बच्चों की पहचान लक्ष्मी (10), तनु (8) और लोकेंद्र (4) के रूप में हुई है। तीनों सगे भाई-बहन थे। पिता प्रतिपाल सिंह ने बताया कि बच्चे स्कूल से सोमवार दोपहर को लौटे थे और आम का पेड़ देखने के बहाने खेत की ओर चले गए। देर शाम तक घर नहीं लौटने पर परिजन चिंतित हो उठे और गांव वालों के साथ उन्हें ढूंढने निकल पड़े। बंधी के पास फिसलने की आशंका परिजनों ने बताया कि खेत में आम का पेड़ तालाब के पास है। संभवतः बच्चे पेड़ के नीचे खेलते हुए बंधी के किनारे पहुंचे होंगे और फिसलकर पानी में गिर गए। जब तक परिजन पहुंचे, तब तक तीनों की जान जा चुकी थी। रात 9:30 बजे पुलिस को घटना की सूचना दी गई। तीनों बच्चों को तत्काल बारीगढ़ अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम के बाद शव सौंपे बीएमओ एसएस चौहान ने बताया कि तीनों शवों का पोस्टमार्टम लवकुश नगर अस्पताल में किया गया और फिर परिजनों को सौंप दिया गया है। वहीं, एसडीओपी नवीन दुबे ने बताया कि हादसे की सभी कोणों से जांच की जा रही है। परिजनों के बयान लिए जा रहे हैं और आगे की कार्रवाई उसी आधार पर की जाएगी। तीन मासूमों की एक साथ मौत ने पूरे हटवां गांव को शोक में डुबो दिया है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।  

भारत की कूटनीतिक कोशिशें रंग लाईं? मुस्लिम नेता के दखल से निमिषा प्रिया को मिल सकती है राहत

नई दिल्ली  यमन में निमिषा प्रिया को बचाने के लिए एक बार फिर से कोशिशें तेज हैं। उन्हें 16 जुलाई को यमन में सजा-ए-मौत देने का फैसला सुनाया गया है और उससे कुछ घंटे पहले ही एक बार फिर से उम्मीद की आखिरी किरण जगी है। भारत के एक मुफ्ती और सुन्नी मुस्लिम समाज के नेता एपी अबू बकर मुसलियार ने इस मामले में दखल दिया है। उन्होंने यमन सरकार से निमिषा प्रिया को माफ करने की अपील की है तो वहीं मृतक तलाल अबदो मेहदी के परिवार से भी संपर्क साधा गया है। यमन में इसे लेकर आज एक मीटिंग होने वाली है। इस मीटिंग में निमिषा के वकील सुभाष चंद्रन रहेंगे। तलाल अबदो मेहदी के परिवार और हुडैदा स्टेट कोर्ट के चीफ़ जस्टिस, यमन शूरा काउंसिल के सदस्य शेख़ हबीब उमर मौजूद रहेंगे। मुसलियार ने दरअसल अपने यमनी दोस्त और वहां के मशहूर स्कॉलर शेख हबीब उमर के माध्यम से दखल देने की कोशिश की है। हबीब उमर के आग्रह पर मारे गए तलाल अबदो मेहदी के परिवार के कुछ लोग और हुदैदा स्टेट कोर्ट के चीफ जस्टिस यमन के दमार पहुंचे हैं। यहीं पर इस मामले को लेकर चर्चा होनी है। यमन की शूरा काउंसिल में शेख हबीब उमर सदस्य के तौर पर जुड़े हुए हैं। उनका यमन की राजनीति में भी थोड़ा प्रभाव माना जाता है। कहा जा रहा है कि हबीब उमर के दखल के बाद पीड़ित तलाल का परिवार अब अपनी मांगों पर दोबारा विचार के लिए तैयार है। दरअसल निमिषा प्रिया को बचाने के वास्ते ब्लड मनी का ऑफर तलाल के परिवार को दिया था, जिसे उसने खारिज कर दिया था। इससे निमिषा प्रिया के बचने की सारी उम्मीदें टूट गई थीं। अब जबकि तलाल का परिवार फिर से बात करने पर राजी हुआ है तो उम्मीद जगी है। लेकिन अभी कुछ साफ कहना मुश्किल है। पूरा माजरा इससे तय होगा कि आखिर तलाल अबदो मेहदी का परिवार ब्लड मनी के लिए राजी होता है या नहीं। यदि वह राजी हुआ तो निमिषा की जिंदगी बच जाएगी और यदि वे राजी नहीं हुए तो सजा-ए-मौत तय होगी। क्या ब्लड मनी पर मान जाएगा मृतक का परिवार, यही सबसे बड़ी उम्मीद? निमिषा के वकील सुभाष चंद्रन ने बताया कि मृतक के परिवार के साथ बातचीत की जा रही है और अटॉर्नी जनरल से मिलकर फांसी से संबंधित आदेश को टालने की कोशिश की जा रही है। ब्लड मनी (क्षतिपूर्ति) को स्वीकार करने संबंधी ऑफर पर भी बात चल रही है। इन प्रयासों के अंतर्गत अब तक तीन दौर की बातचीत हो चुकी है। लेकिन अब सजा-ए-मौत में कुछ घंटों का वक्त बचा है तो उससे पहले प्रयास किए जा रहे हैं। बता दें कि सरकार ने भी सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि हमने इस मामले में प्रयास कर लिए, लेकिन यमन के कानून थोड़े अलग हैं। इसके अलावा सरकार ने कहा कि हम एक हद से ज्यादा आगे इस मामले में नहीं बढ़ सकते।  

योगी सरकार की ग्राम-ऊर्जा मॉडल के तहत एक नई योजना की हो रही शुरुआत, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों को ऊर्जा-संपन्न बनाया जाएगा

लखनऊ  यूपी के गांवों की तस्वीर अब बदलने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में ग्राम-ऊर्जा मॉडल के तहत एक नई योजना की शुरुआत हो रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों को आत्मनिर्भर और ऊर्जा-संपन्न बनाया जाएगा। इस योजना से न केवल घरेलू रसोई गैस की खपत में भारी कमी आएगी, बल्कि जैविक/ प्राकृतिक खाद के उत्पादन से कृषि को भी नई दिशा मिलेगी। यूपी गोसेवा आयोग के ओएसडी डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि गांवों में घरेलू बायोगैस यूनिटों की स्थापना से रसोई में इस्तेमाल होने वाली एलपीजी की खपत में करीब 70% तक की कमी आएगी। इससे न केवल ग्रामीण परिवारों की बचत होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। किसानों के दरवाजे पर स्थापित होंगी बायोगैस यूनिट योगी सरकार की योजना है कि केवल गोशालाओं तक सीमित न रहते हुए यह मॉडल किसानों के दरवाजे तक पहुंचे। बायोगैस यूनिटों की स्थापना सीधे किसानों के घरों या खेतों के पास की जाएगी, जिससे वे स्वयं के उपयोग के लिए गैस और खाद दोनों का उत्पादन कर सकें। इससे खेती की लागत में भारी कमी आएगी और उत्पादकता में वृद्धि होगी। किसानों को मिलेगा पशुशाला निर्माण का लाभ इस योजना को मनरेगा से भी जोड़ा गया है, जिसके तहत ग्रामीण किसानों को व्यक्तिगत पशुशाला (इंडिविजुअल कैटल शेड) निर्माण का लाभ मिलेगा। इन पशुशालाओं से उत्पादित गोबर का उपयोग बायोगैस यूनिट में कर किसान खुद की रसोई के लिए गैस बना सकेंगे। साथ ही, इससे निकलने वाली स्लरी को वे आसपास के जैविक खेती करने वाले किसानों को बेचकर अतिरिक्त आय भी प्राप्त कर सकेंगे। इससे वे गैस व खाद दोनों में आत्मनिर्भर बनेंगे। 43 गोशालाओं में शुरू होंगे बायोगैस और जैविक खाद संयंत्र योगी सरकार 43 चयनित गोशालाओं में बायोगैस और जैविक खाद संयंत्रों को चालू करने जा रही है। इन संयंत्रों से न सिर्फ गैस का उत्पादन होगा, बल्कि गोबर से तैयार स्लरी से जैविक/प्राकृतिक खाद भी बनेगी। हर गोशाला से प्रतिमाह 50 क्विंटल स्लरी तैयार होने की संभावना है, जिसे आसपास के किसान उपयोग में ला सकेंगे। ग्राम-ऊर्जा मॉडल से मिलेगा युवाओं को रोजगार इस योजना से एक ओर जहां पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, वहीं दूसरी ओर युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। संयंत्रों के संचालन, रखरखाव, खाद वितरण, तकनीकी सहायता जैसे कार्यों में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों को जोड़ा जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुसार यह मॉडल ‘आत्मनिर्भर ग्राम, सशक्त किसान’ के सपने को साकार करेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ग्राम-ऊर्जा मॉडल उत्तर प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला साबित होगा। जैविक खेती, स्वच्छ ऊर्जा और स्थानीय रोजगार सृजन की त्रिस्तरीय रणनीति के तहत यह योजना ग्रामीण विकास के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हो सकती है।  

निमिषा प्रिया की जिंदगी बचाने मुस्लिम धर्मगुरुओं ने उठाया कदम, साढ़े 8 करोड़ रुपए भी लेने को क्यों राजी नहीं पीड़ित परिवार!

 कोझिकोड  यमन में फांसी की सजा का सामना कर रही भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को बचाने के लिए अब सुन्नी मुस्लिम धर्मगुरु कंथापुरम ए. पी. अबूबकर मुसलियार आगे आए हैं। सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी और कहा कि मुस्लिम धर्मगुरु उसे बचाने के लिए ‘हर संभव प्रयास’ कर रहे हैं। नर्स को दो दिन बाद यानी 16 जुलाई की फांसी देने की तारीख तय की गई है। सूत्रों ने बताया कि 94 वर्षीय मुसलियार ने यमन में इस्लामिक धार्मिक नेतृत्व के साथ बातचीत की है। इसके अलावा वह मृतक तलाल अब्दो मेहदी के परिजनों के संपर्क में भी हैं। तलाल अब्दो मेहदी यमनी नागरिक था, जिसकी भारतीय नर्स ने 2017 में कथित तौर पर हत्या कर दी थी। मुसलियार को भारत के मुफ्ती ए आजम की उपाधि प्राप्त है और उन्हें आधिकारिक तौर पर शेख अबूबक्र अहमद के नाम से भी जाना जाता है। फांसी में अब बचे हैं सिर्फ दो दिन केरल निवासी नर्स निमिषा प्रिया को अपने यमनी व्यापारिक साझेदार मेहदी की हत्या करने के मामले में 16 जुलाई को फांसी की सजा दी जानी है। सूत्रों ने बताया कि दियात (ब्लड मनी) दिए जाने को लेकर बातचीत हो चुकी है और केरल में संबंधित पक्षों को इसकी जानकारी दे दी गई है। हालांकि, बातचीत की स्थिति के बारे में कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई है। यमन में लागू शरिया कानून के अनुसार, दियात कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त क्षमादान वित्तीय मुआवजा है जो दोषी की तरफ से मारे गए व्यक्ति के परिजन को दिया जाता है। इस बीच, सूत्रों ने बताया कि बातचीत को सुगम बनाने के लिए मुसलियार के मुख्यालय में एक कार्यालय खोला गया है। निमिषा प्रिया पर अपने बिजनेस पार्टनर अब्दो महदी की हत्या का आरोप है. इसी मामले में निमिषा को फांसी की सजा सुनाई गई है. यमन के शरिया कानून के मुताबिक अगर महदी का परिवार ब्लड मनी को लेकर राजी हो जाता है तो निमिषा को जेल से रिहा कर दिया जाएगा. परिवार 8.5 करोड़ रुपए देने को राजी निमिषा के परिवार ने बतौर ब्लड मनी 8.5 करोड़ रुपए (1 मिलियन डॉलर) देने की पेशकश की है. पैसे जुटा भी लिए गए हैं, लेकिन अब्दो का परिवार इसको लेकर अब तक राजी नहीं है. सवाल उठ रहा है कि आखिर अब्दो का परिवार इसे क्यों नहीं मान रहा है? क्या अब्दो महदी के परिवार को यह रकम कम लग रही है या उस पर कोई और ही दबाव है? पूरे केस में हूती विद्रोही एक्टिव निमिषा प्रिया केस में हूती विद्रोहियों का एक्टिव होना मुश्किलों का कारण बन गया है. सोमवार (14 जुलाई) को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल ने इसके संकेत भी दिए. अटॉर्नी ने कहा कि हूती विद्रोहियों ने इसे सम्मान से जोड़ लिया है. अब्दो महदी परिवार और हूती के विद्रोही ब्लड मनी पर बात नहीं कर रहे हैं. इसलिए यह मामला आगे नहीं बढ़ पा रहा है. सरकार की कोशिश जारी है. परिवार भी वहीं पर है और बात चल रही है. हूती विद्रोहियो को मनाने के लिए सुन्नी समुदाय के ग्रांड मुफ्ती ने केरल में डेरा डाल दिया है. ग्रांड मुफ्ती अबूबकर मुसलियार ने यमन के धर्मगुरु के साथ बंद कमरे में मुलाकात की है. इसलिए भी हूती केस में बड़ा अड़ंगा निमिषा प्रिया को भारत इसलिए भी नहीं बचा पा रहा है. क्योंकि हूती यमन में एक्टिव है और उसकी वजह से यमन की राजधानी में भारत का कोई दूतावास नहीं है. हूती के विद्रोही पिछले 6 साल से यमन और उसके आसपास तांडव मचा रहे हैं. भारतीय दूतावास सऊदी के रियाद से इस पूरे प्रकरण को मॉनिटर करने की कवायद कर रहा है, लेकिन हूती के रिश्ते सऊदी से भी ठीक नहीं है. हूती सऊदी को अमेरिका का पिट्ठू मानता है और उसके खिलाफ हर वक्त मोर्चा खोले रखता है. निमिषा प्रिया को 2020 में मौत की सजा सुनाई गई थी पलक्कड़ जिले की रहने वाली निमिषा प्रिया को 2020 में मौत की सजा सुनाई गई थी और 2023 में उसकी अंतिम अपील खारिज कर दी गई थी। वह वर्तमान में यमन की राजधानी सना की जेल में कैद है। इससे पहले दिन में केंद्र ने उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि 16 जुलाई को फांसी की सजा का सामना कर रही नर्स के मामले में सरकार कुछ खास नहीं कर सकती। अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ को बताया कि सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है।