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अदाणी पावर को मिली सिंगरौली कोल ब्लॉक की मंजूरी, उत्पादन होगा जल्द शुरू

भोपाल सिंगरौली जिले के धिरौली में अदाणी पावर लिमिटेड कंपनी कोयला खदान का संचालन करेगी। कंपनी को खदान संचालन की स्वीकृति मिल गई है। धिरौली खदान की पीक उत्पादन क्षमता 6.5 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) है। इसमें से पांच एमटीपीए उत्पादन ओपन कास्ट माइनिंग से और शेष भूमिगत खनन से होगा। भू-विज्ञानिक रिपोर्ट के अनुसार इस ब्लाक में 620 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) ग्रास जियोलाजिकल रिजर्व और 558 एमएमटी शुद्ध भंडार मौजूद है, जो आने वाले कई दशकों तक स्थिर आपूर्ति, ईंधन सुरक्षा और परिचालन स्थिरता सुनिश्चित करेगा।   जिम्मेदार खनन पहल के तहत, अदाणी पावर खदान क्षेत्र में ही कोयले को धोकर और प्रोसेस करके उसकी अशुद्धियों को यहीं सीमित रखेगी, ताकि बाहरी क्षेत्र में अनावश्यक उत्सर्जन न हो और पर्यावरण पर न्यूनतम प्रभाव पड़े। यह अदाणी पावर की पहली कैप्टिव खदान है। खदान की ओपन कास्ट पीक रेट क्षमता वित्त वर्ष 2027 तक हासिल करने का लक्ष्य है, जबकि भूमिगत खनन का आरंभ नौ वर्षों बाद किया जाएगा। अदाणी पावर के पास इस ब्लाक की 30 वर्ष की लीज़ है। धिरौली ब्लाक से अदाणी पावर की मर्चेंट पावर आवश्यकताओं को पूरा करेगा और साथ ही 1,200 मेगावाट क्षमता वाले पावर प्लांट को आपूर्ति की जाएगी, जिसे वर्तमान में 3,200 मेगावाट तक विस्तारित करने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम हो रहा है।  

ग्रामीण बिहार में बड़ी पहल: 704 नए पुलों का निर्माण कार्य जल्द शुरू, सख्त निर्देश जारी

पटना  बिहार के सभी गांवों को शहरों से जोड़ने और ग्रामीण स्तर पर बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए बिहार सरकार ने एक बड़ी पहल की है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री ग्रामीण सेतु योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्यभर में कुल 704 नए पुलों का निर्माण कार्य 10 सितंबर से शुरू कर दिया जाएगा. इस योजना पर सरकार कुल 3,688 करोड़ रूपये की धनराशि खर्च कर रही है. जिससे राज्य के हजारों गांवों को स्थायी और सुरक्षित सड़क संपर्क मिल सकेगा. ग्रामीण कार्य विभाग ने ग्रामीण इलाकों में सड़क और पुल बनाने वाले संवेदकों को स्पष्ट रूप से निर्देश जारी कर दिया है कि यदि 10 सितंबर से उन्होंने ग्रामीण सड़कों और पुलों का नरमन कार्य शुरू नहीं किया तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. उनकी जमानत राशि जब्त करने के साथ-साथ उन्हें कालीसूची (ब्लैक लिस्टेड) कर दिया जाएगा. ग्रामीण क्षेत्रों में निर्बाध सड़क संपर्क अभियान मुख्यमंत्री ग्रामीण सेतु योजना योजना का उद्देश्य राज्य के उन ग्रामीण क्षेत्रों में निर्बाध सड़क संपर्कता स्थापित करना है, जहां आज भी बरसात, बाढ़ या पुराने जर्जर पुलों के कारण आवागमन बाधित हो जाता है. मुख्यमंत्री ग्रामीण सेतु योजना के तहत न सिर्फ पुराने और जर्जर पुलों की जगह नए और मजबूत पुल बनाए जाएंगे, बल्कि उन मार्गों को पुलों से जोड़ा जाएगा, जहां आज भी मिसिंग ब्रिज की वजह से रास्ते अधूरे पड़े हैं. साथ ही, बाढ़ या अन्य प्राकृतिक आपदाओं से क्षतिग्रस्त पुलों को फिर से खड़ा किया जा रहा है. राज्य के कई ग्रामीण इलाकों में पुल तो पहले से बने हुए हैं लेकिन पहुंच पथ (एप्रोच रोड) का निर्माण नहीं हो सका है. अब वहां भी पुलों के अधूरे निर्माण कार्य को पूरा कराया जाएगा, ताकि लोगों को आवागमन में किसी तरह की परेशानी न हो. राज्य के जिन जिलों में इन पुलों के निर्माण की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है, उसमें उत्तर बिहार के साथ-साथ दक्षिण बिहार के जिले भी शामिल हैं. सबसे अधिक पुलों का निर्माण पूर्वी चंपारण में किया जा रहा है. पूर्वी चंपारण में कुल 56 पुलों के निर्माण की मंजूरी दी गई है. इसी तरह, दरभंगा में 38, गया, सिवान और सीतामढ़ी में 30-30, सारण और वैशाली में 28-28, भागलपुर और गोपालगंज में 27-27, रोहतास और शेखपुरा में 26-26, नालंदा में 24, बेगूसराय में 20 और राजधानी पटना में 18 पुलों का निर्माण कराया जाएगा. जनता की मांग को मिली प्राथमिकता यह योजना खास इसलिए भी है, क्योंकि इसमें आम जनता की मांग को सरकार ने प्राथमिकता दी है. जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम में आए प्रस्ताव और मुख्यमंत्री द्वारा की गई सार्वजनिक घोषणाएं, दोनों को इस योजना में शामिल किया गया है. यानी यह योजना सिर्फ विभागीय पहल नहीं बल्कि जनभागीदारी से बनी योजना है. बदलेंगे गांवों के हालात सरकार का मानना है कि यह योजना सिर्फ पुलों का निर्माण नहीं, बल्कि गांवों के सामाजिक और आर्थिक विकास की आधारशिला है. किसानों को अपने उत्पाद मंडी तक पहुंचाने में आसानी होगी. बच्चों को स्कूल आने-जाने के लिए सुरक्षित और सुगम मार्ग उपलब्ध होगा और आपात स्थिति में लोगों को इलाज के लिए शहरों के बड़े अस्पतालों तक पहुंचने में आसानी होगी.  

AAP का बड़ा ऐलान: बाढ़ में मारे गए व्यक्ति के परिवार को नौकरी का भरोसा

पंजाब  पंजाब में आई बाढ़ ने कई परिवारों की ज़िंदगी छीन ली. किसी ने अपना बेटा खोया, किसी ने पिता, तो किसी ने घर का अकेला सहारा. लेकिन इस संकट की घड़ी में एक पहल ऐसी हुई है जिसने लोगों को सिर्फ राहत नहीं, बल्कि भविष्य की उम्मीद दी है. आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल ने एलान किया है कि बाढ़ में जान गंवाने वाले हर परिवार से एक सदस्य को LPU यूनिवर्सिटी में स्थायी नौकरी दी जाएगी. यह कोई औपचारिक घोषणा नहीं, बल्कि उन परिवारों के लिए एक जीवन की नई शुरुआत का भरोसा है. CM मान की सरकार के कार्यों की सराहना आम आदमी पार्टी सांसद अशोक मित्तल ने मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार द्वारा चलाए जा रहे राहत और बचाव कार्यों की खुले दिल से सराहना की. खासतौर पर 196 राहत कैंपों की स्थापना और 20,000 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकालने जैसे कदम की भरपूर प्रशंसा की. मित्तल ने यह साफ किया कि LPU की टीम हर परिवार से खुद संपर्क करेगी, लेकिन जिनसे संपर्क नहीं हो पाया है, वो खुद सामने आएं ताकि मदद तुरंत मिल सके. संकट के समय स्थायी समाधान की जरूरत यह कहानी सिर्फ एक नेता के एलान की नहीं, बल्कि उस सोच की है जो संकट के समय स्थायी समाधान, स्थानीय रोजगार और सामाजिक जिम्मेदारी की बात करती है. जब देश के कई हिस्सों में लोग सिर्फ बयानबाज़ी में लगे हैं, पंजाब में एक सांसद अपने संसाधन और संस्थान को आम लोगों के लिए खोल रहे हैं. इस पहल से न सिर्फ 43 परिवारों को सहारा मिलेगा, बल्कि पूरे पंजाब को एक संदेश जाएगा कि आम आदमी पार्टी सिर्फ चुनावी वादे नहीं, ज़मीन से जुड़ी राहत और रोज़गार की सच्ची राजनीति करती है.  

पीडीएस में हितग्राहियों की समीक्षा, मोहन सरकार ने बड़ी जमीन वालों को चेताया

भोपाल मध्य प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत 5.32 करोड़ हितग्राही हैं। इसमें 71 लाख किसान भी शामिल हैं। किस किसान के पास कितनी भूमि है, इसका पता लगाने के लिए राजस्व विभाग के डेटा से मिलान कराया जा रहा है। इसके आधार पर राज्य सरकार निर्णय लेगी कि किसे पीडीएस प्रणाली में रखना है और किसे नहीं। बड़े क्षेत्र वाले किसान पीडीएस की सूची से बाहर किए जा सकते हैं। भारत सरकार ने प्रदेश को 75 लाख पीडीएस के हितग्राहियों की सूची भेजी है। इसमें वे हितग्राही भी हैं, जिनकी वार्षिक आय छह लाख से अधिक है, कंपनी में संचालक हैं या फिर जीएसटी के दायरे में आते हैं। इसके साथ ही प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि वाले किसानों को भी शामिल किया है। यद्यपि, इनके बारे में कोई दिशा निर्देश नहीं दिए गए हैं, लेकिन राज्यों से कहा गया है कि वे अपने स्तर से नीति निर्धारित कर सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि राजस्व विभाग के डेटा से यह जानकारी निकाली जा रही है कि किस किसान के पास कितनी भूमि है। ऐसे किसान, जिनके पास पांच एकड़ से अधिक भूमि है, उनके संबंध में आगे चलकर निर्णय लिया जा सकता है। 16 हजार नाम सरकार ने पहले ही हटा दिए उधर, जिलों में कराई जांच के बाद अपात्र हितग्राहियों के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं। छह लाख से अधिक वार्षिक आय वाले 1.57 हितग्राही चिन्हित किए गए थे। इनमें से 16 हजार के नाम सरकार पहले ही हटा चुकी है और भारत सरकार के निर्देश के बाद अब तक 1,909 नाम हटाए गए हैं। इसी तरह कंपनी में संचालक होने के बाद निश्शुल्क मिलने वाला राशन लेने वाले 18 हजार हितग्राहियों में 1,100 के नाम पहले हटाए गए हैं और अब 106 को सूची से बाहर किया है। जीएसटी देने वाले 1,381 हितग्राहियों में से 139 और 1.51 डुप्लीकेट श्रेणी के हितग्राहियों में से 20 हजार के नाम हटा दिए हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सभी जिलों में अपात्रों के सत्यापन की प्रक्रिया चल रही है और जैसे-जैसे यह काम पूरा होता जा रहा है, वैसे-वैसे नाम काटे जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि इसके पहले ई-केवाईसी कराकर लगभग 20 लाख अपात्रों के नाम सूची से हटाए जा चुके हैं।

मध्य प्रदेश: कांग्रेस 12 सितंबर को उज्जैन में बड़े प्रदर्शन के लिए तैयार, सीएम के गृह क्षेत्र से भिड़ेगी

 उज्जैन   वर्ष 2023 में विधानसभा और वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश में करारी हार के बाद फिर से खड़ा होने की कोशिश कर रही कांग्रेस राज्य की भाजपा सरकार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गृह क्षेत्र उज्जैन से ललकारेगी। सरकार को घेरने कांग्रेस 12 सितंबर को उज्जैन में बड़ा प्रदर्शन करेगी। बड़ी रैली के बाद सभा भी होगी। इसमें सिंहस्थ क्षेत्र के भूमि अधिग्रहण, कानून-व्यवस्था, वोट चोरी, अवैध शराब के कारोबार सहित तमाम मुद्दों को उठाया जाएगा। पार्टी के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल, सचिन पायलट, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी सहित कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहेंगे। बता दें, सिंहस्थ-2028 के लिए किसानों की जमीन लैंड पुलिंग के जरिये लिए जाने का किसान संगठन विरोध कर रहे हैं। संगठन के प्रतिनिधि भाजपा के बड़े नेताओं से भी मिल चुके हैं। प्रदेश में वर्ष 2027 से नगरीय निकायों के साथ चुनाव की शुरुआत होनी है। इसके बाद वर्ष 2028 में विधानसभा और वर्ष 2029 में लोकसभा चुनाव होंगे। कांग्रेस इसके लिए खुद को तैयार कर रही है। दरअसल, विधानसभा और लोकसभा चुनाव से पहले वरिष्ठ नेताओं से नाराजगी के चलते कांग्रेस से बड़ी संख्या में नेता और कार्यकर्ता भाजपा में चले गए थे। इसका असर यह हुआ कि कई मतदान केंद्रों पर बैठाने के लिए कार्यकर्ता तक नहीं मिले। यह स्थिति आगे न बने और कार्यकर्ता हतोत्साहित न रहें, इसके लिए पीढ़ी परिवर्तन पर काम प्रारंभ किया गया। वोट चोर-गद्दी छोड़ अभियान के जरिये पूरे प्रदेश में माहौल बनाया जा रहा है। इसी क्रम में उज्जैन में बड़े विरोध प्रदर्शन की तैयारी है। प्रदर्शन को प्रभावी बनाने का जिम्मा उज्जैन से लगे जिलों की टीम को दिया है। इसकी सफलता के आधार पर नए अध्यक्षों की क्षमता का आकलन भी होगा। नेतृत्व नए नेताओं के हाथ दे रही कांग्रेस मध्य प्रदेश में भाजपा से मुकाबला करने कांग्रेस नया नेतृत्व तैयार कर रही है। ओबीसी वर्ग से आने वाले जीतू पटवारी को जहां प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया तो आदिवासी वर्ग के उमंग सिंघार को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाकर मौका दिया। संगठन सृजन अभियान चलाकर जिला अध्यक्ष बनाए गए। जयवर्धन सिंह, प्रियव्रत सिंह, ओमकार सिंह मरकाम जैसे वरिष्ठ नेताओं को जिला अध्यक्ष बनाकर संदेश दिया कि जिला इकाई सबसे महत्वपूर्ण है। जिले के बाद अब ब्लाक इकाइयों में परिवर्तन की तैयारी है। कार्यकर्ताओं को मिशन 2028 में जुटने का संदेश दिया जाएगा     अधिकतर जिलों में 'वोट चोर-गद्दी छोड़' अभियान के अंतर्गत प्रदर्शन हो चुके हैं इसलिए अब राज्य स्तरीय प्रदर्शन उज्जैन में होना है। मुख्यमंत्री का गृह क्षेत्र होने के साथ-साथ उज्जैन मालवा अंचल का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां बड़ा प्रदर्शन करके पूरे प्रदेश के कार्यकर्ताओं को मिशन-2028 (विधानसभा चुनाव) में जुटने का संदेश दिया जाएगा। – संजय कामले, प्रदेश संगठन महामंत्री, कांग्रेस  

आई-बैंक की जानकारी अब हाथ में: एम्स का नया मोबाइल ऐप कार्निया ट्रांसप्लांट मरीजों के लिए

नई दिल्ली नेत्रदान को लेकर जागरूकता का स्तर बढ़ा है। दान में मिले कार्निया नेत्र बैंकों में जमा हो रहे हैं। यहीं से प्रत्यारोपण के लिए उपलब्ध होते हैं। मरीजों को इसकी जानकारी नहीं हो पाती और वे दूसरे राज्यों का चक्कर लगाते रहते हैं। इसमें समय, श्रम और धन तीनों अनावश्यक बर्बाद होते हैं। देश में 100 से अधिक नेत्र बैंक हैं। सभी जगह कार्निया के उपयोग की दर भी अलग है। कहीं कार्निया का उपयोग नहीं हो पाता तो कहीं उसकी कमी से प्रत्यारोपण नहीं हो पाते। इन समस्याओं के समाधान के लिए एम्स के डाॅ. राजेंद्र प्रसाद नेत्र विज्ञान केंद्र स्थित राष्ट्रीय नेत्र बैंक (एनईबी) आगे आया है। आई बैंक एसोसिएशन ऑफ इंडिया के सहयोग से एप विकसित कर रहा है। इसकी मदद से न केवल अपने राज्य के नेत्र बैंकों में कार्निया की उपलब्धता का पता चलेगा, बल्कि वाॅट्सएप के जरिए लोकेशन भी प्राप्त होगी। वहीं, सभी नेत्र बैंक एक साझा प्रणाली से भी जुड़ेंगे। कम उपयोग होने पर कार्निया ज्यादा उपयोग वाले नेत्र बैंकों को भेजे जा सकेंगे। राष्ट्रीय नेत्र बैंक 40वां नेत्रदान पखवाड़ा मना रहा है, जो आठ सितंबर तक चलेगा। आरपी सेंटर की प्रमुख प्रो. राधिका टंडन के मुताबिक एप पर तेजी से काम चल रहा है। अगले दो से तीन महीने में इसे लांच कर दिया जाएगा। नेत्र बैंकों का सारा डाटा इस पर उपलब्ध होगा। हर शहर में वाॅट्सएप के जरिए लोकेशन भी आ जाएगी। एआई चैटबाट भी लाॅन्च किया जाएगा, जिस पर मरीज या तीमारदार टाइप करके या वाइस नोट के माध्यम से अपनी जिज्ञासाओं के जवाब पा सकेंगे। इसके अलावा देश के अन्य नेत्र बैंकों के कामकाज में भी लगातार मदद की जा रही है। इसके लिए कार्नियल संरक्षण भंडारण माध्यमों (एमके मीडिया और एक्सस्टोरसोल मीडिया) का निर्माण और वितरण किया जा रहा है, जो भारत सरकार के एनपीसीबी से वित्तपोषित है। यह एम्स के नेत्र औषध विज्ञान विभाग में ही निर्मित किया जाता है। वर्ष 2024 में 24 राज्यों के 114 नेत्र बैंकों में एक्सस्टोरसोल मीडिया की 2824 से अधिक वायल वितरित की गईं। डोनर कार्निया के विकल्प के तौर पर बायो इंजीनियर्ड कार्निया आईआईटी-दिल्ली के सहयोग से तैयार किया है। खरगोश में इसका प्रत्यारोपण सफल रहा। अब क्लीनिकल ट्रायल की तैयारी है। राष्ट्रीय नेत्र बैंक एक नजर में     36,000 कार्निया एकत्र की पिछले 60 वर्षों में।     26,000 से अधिक कार्निया प्रत्यारोपण पिछले छह दशक में।     500 से अधिक विशेषज्ञ चिकित्सकों को एंडोथेलियल केराटोप्लास्टी तकनीक की ट्रेनिंग।     1,931 कार्निया मिले देशभर से वर्ष 2024 में।     1,611 कार्निया अस्पताल कार्निया प्राप्ति कार्यक्रम (एचसीआरपी) से मिले।     1,636 कार्निया प्रत्यारोपण वर्ष 2024 में     50 प्रतिशत है कार्निया उपयोग की राष्ट्रीय दर।     85 प्रतिशत है आरपी सेंटर के एनईबी में कार्निया उपयोगी की दर। संक्रमण और चोट बन रही कार्निया डैमेज की वजह प्रो. टंडन के मुताबिक संक्रमण और चोट के चलते कार्निया डैमेज के सबसे ज्यादा मामले आते हैं। आंख में कुछ चले जाने पर आमतौर पर लोग रगड़ने लगते हैं। इसका कार्निया पर असर पड़ता है। वहीं, चोट लगने की स्थिति में भी लोग खुद से स्टेरायड डाल लेते हैं। ये आंख में संक्रमण की वजह बनता है। कई बच्चों को जन्मजात भी कार्निया की बीमारी होती है। ऐसी स्थिति में भी कार्निया ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है। देश में हर वर्ष लगभग एक लाख लोगों को कार्निया प्रत्यारोपण की जरूरत होती है। जबकि केवल 25 से 30 हजार को ही इसके लिए कार्निया उपलब्ध हो पाता है।  

शनिवार से शुरू होगी बदरीनाथ यात्रा, हाईवे पर यातायात रहेगा सामान्य

गोपेश्वर पांच दिनों से हेमकुंड व बदरीनाथ धाम की यात्रा पर मानसून के चलते लगाई गई रोक हटा दी गई है। कल,आज से विधिवत्त हेमकुंड व श्री बदरीनाथ धाम की यात्रा शुरु हो जाएगी। हालांकि प्रशासन ने चमोली के पडावों में मौजूद यात्रियों को शुक्रवार को बदरीनाथ धाम भेजा है। सुबह से चमोली जिले में मौसम साफ होने के साथ धूप खिली हुई थी। बदरीनाथ हाईवे भी सुचारु था। यात्रा पडाव ज्योतिर्मठ,चमोली ,पीपलकोटी सहित आस पास के क्षेत्र में लगभग 500 से अधिक यात्रियों को बदरीनाथ भेजा गया,हालांकि उनको वर्षा के दौरान सुरक्षित स्थानों पर ठहरने की हिदायदी दी गई लेकिन दिनभर मौसम साफ होने के चलते यात्रियों ने राहत की सांस ली है। हेमकुंड साहिब में स्थानीय लोगों को छोड यात्री नहीं गए हैं। बताया गया कि क्षेत्र के स्थानीय लोग हेमकुंड यात्रा पर गए जिन्होंने हेमकुंड ,लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के दर्शन किए। गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब ट्रस्ट के सीईओ सरदार सेवा सिंह ने कहा कि हेमकुंड यात्रा पर यात्रियों को नहीं भेजा गया है। कहा कि स्थानीय लोग हेमकुंड यात्रा पर गए हैं। पांच दिनाें से बंद यात्रा कल,आज से सुचारु कर दी गई है।  

राज कुंद्रा और शिल्पा शेट्टी के खिलाफ धोखाधड़ी मामले में लुकआउट नोटिस

मुंबई बॉलीवुड एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी और उनके पति राज कुंद्रा एक बड़े विवाद में घिर गए हैं। मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने दोनों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है। आरोप है कि उन्होंने व्यापारी दीपक कोठारी से लगभग 60 करोड़ रुपये की ठगी की है। इस मामले में अब EOW ने उनकी मूवमेंट पर नज़र रखने के लिए लुकआउट नोटिस जारी कर दिया है, जिससे दोनों देश से बाहर नहीं जा सकेंगे।   व्यापारी का आरोप शिकायतकर्ता दीपक कोठारी का कहना है कि उन्होंने 2015 से 2023 के बीच शिल्पा-राज की कंपनी Best Deal TV Pvt. Ltd. में निवेश किया था। यह कंपनी ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म चलाती थी। कोठारी ने आरोप लगाया कि कंपनी में निवेश किए गए 60 करोड़ 48 लाख रुपये का इस्तेमाल बिज़नेस के बजाय निजी खर्चों में कर लिया गया। कोठारी के मुताबिक, 2016 में खुद शिल्पा शेट्टी ने पैसों की वापसी की पर्सनल गारंटी भी दी थी, लेकिन बाद में उन्होंने कंपनी के डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया और कंपनी दिवालिया घोषित हो गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्हें न तो इसकी जानकारी दी गई और न ही उनका पैसा लौटाया गया। पुलिस की जांच EOW ने अब इस मामले में IPC की धारा 403, 406 और 34 के तहत FIR दर्ज की है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि निवेश की रकम का इस्तेमाल किन-किन कामों में हुआ और पैसों का फ्लो कहां गया। पुलिस ने दंपति के ट्रैवल रिकॉर्ड की भी जांच शुरू कर दी है। लुकआउट नोटिस जारी होने के बाद शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। अब दोनों बिना अनुमति देश से बाहर यात्रा नहीं कर पाएंगे।

युद्ध में सफलता की कुंजी: CDS अनिल चौहान ने बताया ‘सरप्राइज’ फैक्टर

गोरखपुर ‘भारत के समक्ष राष्ट्रीय सुरक्षा की चुनौतियां’ विषयक संगोष्ठी के मुख्य अतिथि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) अनिल चौहान ने कहा कि युद्ध में सफलता हासिल करने के लिए सरप्राइज एक महत्वपूर्ण फैक्टर होता है। उरी सर्जिकल स्ट्राइक में भारत ने जमीन के रास्ते जाकर आतंकी ठिकानों को बर्बाद किया, बालाकोट में एयर स्ट्राइक का सहारा लिया गया। जबकि पहलगाम हमले के बाद लो एयर स्पेस, ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। भारतीय सेनाओं ने हर बार दुश्मन को सरप्राइज कर अपना टारगेट पूरा किया।   उन्होंने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा के लिए भारतीय सेनाएं 365 दिन, 24×7 के फार्मूले पर हमेशा तैयार हैं। आतंकवादी कहीं भी हो, उसे ढूढ़कर मारा जाएगा। सीडीएस जनरल चौहान ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा एक व्यापक और महत्वपूर्ण विषय है। हर वर्ग और व्यक्ति इसे अपने नजरिए से देखता है। किसी देश के राजदूत इसे द्विपक्षीय या बहुपक्षीय दृष्टि से देखतेहैं, तो अर्थशास्त्री इसे आर्थिक सुरक्षा की दृष्टि से। सैनिक का दृष्टिकोण भिन्न होता है। उन्होंने बताया कि आचार्य चाणक्य ने राष्ट्र की सुरक्षा के लिए चार तथ्य बताएहैं:, राष्ट्र के आंतरिक खतरे, बाह्य खतरे, बाहरी सहयोग से आंतरिक खतरे और आंतरिक सहयोग से बाहरी खतरे। सीडीएस ने कहा कि समग्र रूप से राष्ट्र की सुरक्षा के लिए तीन घटक महत्वपूर्ण होते हैं। भूमि की सुरक्षा, विचारधारा की सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा। राष्ट्र की सुरक्षा के लिए इन तीनों की सुरक्षा अनिवार्य है। इस संदर्भ में उन्होंने तीन घेरों सैन्य सुरक्षा, राष्ट्र की रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा की विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि सैन्य तत्परता के लिए रक्षा संसाधनों, अनुसंधान एवं विकास के साथ रणनीतिक संस्कृति अहम होती है। इस परिप्रेक्ष्य में उन्होंने कहा कि आने वाले समय में नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी भी जरूरी है। सीडीएस जनरल चौहान ने एक जर्मन विद्वान के उद्धरण के हवाले से कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में युद्ध, राजनीति का ही विस्तार है। युद्ध और अंतरराष्ट्रीय राजनीति को अल-अलग नहीं देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि जब किसी राष्ट्र की सरकार यह सोचती है कि दूसरे राष्ट्र के खिलाफ बल प्रयोग करने की जरूरत है तो वह सैन्य अफसरों को कार्य करने के लिए निर्देशित करती है। इसमें सैन्य क्षमता पर भरोसा और सैन्य विकल्पों की विविधता महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि सैन्य क्षमता की मजबूती इस बात पर भी निर्भर होती है कि किसी राष्ट्र ने शांति काल में रक्षा क्षेत्र में कितना खर्च किया। सीडीएस ने बताया कि भारत की तीनों सेनाओं ने गलवान, बालाकोट में मजबूत सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि बालाकोट हमले के बाद भारत और पाकिस्तान दोनों ने अलग-अलग सीख ली। पाकिस्तान ने एयर डिफेंस पर ध्यान दिया तो भारत ने लंबी दूरी तक हमला करने वाले हथियारों पर। सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा कि राजनीतिक नेतृत्व से सैन्य बलों को दिशा मिलती है। ऑपरेशन सिंदूर में नेतृत्व से क्लियर कट दिशा निर्देश था कि आतंकी ठिकानों को ही निशाना बनाना है, नागरिक ठिकानों को नहीं। दुश्मन के किसी भी उकसावे पर सेना को जवाबी कार्रवाई की खुली छूट दी गई थी। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर का मकसद सिर्फ बदला लेना नहीं था, धैर्य का स्तर भी बढ़ाना था। ऑपरेशन सिंदूर ऐसा पहला युद्ध था जिसमें दुश्मन से आमने सामने की लड़ाई काफी कम थी। इसमें न फ्रंट था और न रियर। ऑपरेशन सिंदूर अभी ऑफिशियली टर्मिनेट नहीं किया गया है। सीडीएस ने कहा कि भारत में राष्ट्र की सुरक्षा की पहली चुनौती सीमा विवाद की है। पाकिस्तान और चीन से हुई लड़ाइयां सीमा विवाद का ही परिणाम हैं। पाकिस्तान की तरफ से प्रॉक्सी वार, पड़ोसी देशों में अस्थिरता और युद्ध के बदलते स्वरूप अन्य चुनौतियां हैं। उन्होंने कहा कि युद्ध का स्वरूप अब विकेंद्रित होता जा रहा है। भविष्य में नई तकनीकी आधारित, रोबोटिक्स और मानवरहित युद्ध हो सकते हैं। सीडीएस ने कहा कि ‘न्यू नॉर्मल’ नीति ऐसी स्थिति होती है जो संकट खत्म होने के बाद बनती है। जैसे कोविड के बाद वर्क फ्रॉम होम और नोटबंदी के बाद डिजिटल लेनदेन की अभ्यस्तता। पर, न्यू नॉर्मल में यह स्पष्ट है कि आतंकवाद और बातचीत, व्यापार साथ-साथ नहीं चल सकते। सीडीएस ने अपने संबोधन में पीएम मोदी द्वारा घोषित ‘सुदर्शन चक्र’ वायु रक्षा प्रणाली की चर्चा करते हुए कहा कि इसे 2035 तक पूरा करने का लक्ष्य है। सुदर्शन चक्र स्वार्ड (तलवार) और शील्ड (ढाल) दोनों का काम करेगा। उन्होंने कहा कि सुरक्षित और सशक्त भारत वसुधैव कुटुम्बकम की भूमिका निभाना चाहता है।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा- मध्यप्रदेश मातृ-शिशु स्वास्थ्य सूचकांकों में सतत सुधार की राह पर

एमएमआर में 17, यू5 एमआर में 5, आईएमआर और एनएमआर में 2-2 अंकों का सुधार भोपाल  उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि स्वास्थ्य विभाग के केन्द्रित एवं समन्वित प्रयास अब ठोस परिणाम दे रहे हैं। मध्यप्रदेश मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने की दिशा में सही मार्ग पर है। हम स्वास्थ्य अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण, मैनपावर की वृद्धि, बेहतर लक्ष्यीकरण, सतत् मॉनिटरिंग और ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान के माध्यम से आगामी वर्षों में देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में आने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सैम्पल रजिस्ट्रेशन सिस्टम-2023 की रिपोर्ट में प्रदेश ने उल्लेखनीय सुधार दर्ज किए हैं—मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) 159 से घटकर 142, नवजात मृत्यु दर (एनएमआर) 29 से घटकर 27, शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) 40 से घटकर 37 और 5 वर्ष से कम आयु बाल मृत्यु दर (यू5 एमआर) 49 से घटकर 44 हो गई है। ये आँकड़े सकारात्मक संकेत हैं कि हमारे प्रयास सही दिशा में हैं। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने यह उपलब्धि प्रदेश की स्वास्थ्य टीम की अथक मेहनत का परिणाम है। आशा कार्यकर्ता, एएनएम, सीएचओ, नर्स, डॉक्टर, विशेषज्ञ, प्रशासक और नीति निर्धारक सभी ने मिलकर निरंतर कार्य किया है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि यह सफलता आगे बढ़ने की प्रेरणा है। सतत प्रयास, वैज्ञानिक योजना और जनभागीदारी के माध्यम से मध्यप्रदेश वर्ष 2030 तक लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए प्रतिबद्ध है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 7 अप्रैल 2025 को मातृ शिशु संजीवन मिशन और अनमोल 2.0 पोर्टल का शुभारंभ इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मातृ-शिशु संजीवन मिशन के तहत वर्ष 2030 तक मातृ मृत्यु दर को 80 प्रति लाख, नवजात मृत्यु दर को 10 प्रति हजार से कम और शिशु मृत्यु दर को 20 प्रति हजार से कम करने का लक्ष्य रखा गया है। अनमोल 2.0 और ई-पीएमएसएमए जैसे डिजिटल टूल्स के माध्यम से हाई रिस्क गर्भावस्थाओं की समय पर पहचान और प्रबंधन किया जा रहा है। गर्भवती महिलाओं की नियमित जाँच हर माह की 9 और 25 तारीख को की जा रही है तथा पोषण किट, आयरन सप्लीमेंट और आवश्यक इंजेक्शन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। चिन्हित अस्पतालों को एफआरयू के रूप में सक्रिय कर एचडीयू/आईसीयू, एसएनसीयू/एनबीएसयू को अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित किया गया है। मातृ-शिशु संजीवन मिशन के साथ-साथ सीएचसी और पीएचसी को सुदृढ़ बनाने, टेलीमेडिसिन के माध्यम से विशेषज्ञ सेवाएँ उपलब्ध कराने, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (एचआरपी) की पहचान और समय पर देखभाल पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मुस्कान और लक्ष्य कार्यक्रमों से गुणवत्ता सुनिश्चित की जा रही है तथा ई-रूपी और “यू कोट वी पे” योजनाओं के तहत सोनोग्राफी और एनेस्थीसिया सेवाएँ सुलभ हुई हैं। उन्होंने कहा कि मातृ और शिशु स्वास्थ्य सुधारों के साथ-साथ किशोर स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि आने वाले समय में स्वस्थ गर्भधारण सुनिश्चित हो सके। शत-प्रतिशत ट्रैकिंग, मातृ एवं शिशु प्रकरणों की रिपोर्टिंग और समीक्षा, टीबी व सिकल सेल स्क्रीनिंग, कैंसर नियंत्रण, एनसीडी स्क्रीनिंग और एचपीवी टीकाकरण जैसे उपायों से व्यापक स्वास्थ्य सुधार का रोडमैप तैयार किया गया है।