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किसानों की शिकायतों, सुझाव व अन्य मदद के लिए एक समर्पित पोर्टल रहेगा : शिवराज सिंह चौहान

किसानों के हित में सभी अधिकारी पूरी पारदर्शिता, विश्वसनीयता व संवेदनशीलता से करें काम: शिवराज सिंह चौहान नकली या घटिया खाद-बीज, कीटनाशक संबंधी शिकायतों का प्राथमिकता से हो समाधान: शिवराज सिंह चौहान किसानों को नुकसान से बचाने के लिए सिर्फ प्रमाणित बायोस्टियुमिलेंट ही बिकें –  शिवराज सिंह चौहान   नई दिल्ली  केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठक कर, किसानों से कॉल सेंटर एवं अन्य पोर्टल्स के माध्यम से मिलने वाली शिकायतों के समाधान के संबंध में समीक्षा की। बैठक में श्री शिवराज सिंह ने अलग-अलग पोर्टल की जगह किसानों की सुविधा के लिए उनकी शिकायतों, सुझाव तथा अन्य सहायता के लिए एक ही समर्पित पोर्टल बनाने और समस्याओं का जल्द से जल्द समुचित निराकरण करने का निर्देश अधिकारियों को दिया। केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि वे स्वयं नियमित रूप से किसानों से मिली शिकायतों की समीक्षा करेंगे, ताकि उन्हें त्वरित राहत प्रदान की जा सकें।   किसानों से प्राप्त शिकायतों व हेल्पलाइन नंबर पर आ रही कॉल्स को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री श्री चौहान ने गंभीरता दिखाते हुए कहा कि किसानों की समस्याओं के समाधान में कोई देरी नहीं होनी चाहिए। श्री शिवराज सिंह ने कहा कि किसानों के हित में सभी अधिकारी पूरी पारदर्शिता, विश्वसनीयता एवं संवेदनशीलता से काम करते हुए व्यवस्था को और सुदृढ करें। व्यवस्था ऐसी होना चाहिए, जिससे कि किसानों की शिकायतों का रीयल टाइम में उचित समाधान हो सकें। हम सभी की कोशिश यहीं होनी चाहिए कि किसान हर हाल में खुशहाल रहें और खेती समृद्ध हो। बैठक में केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने अधिकारियों से, किसानों से मिलने वाली शिकायतों की जानकारी ली, जिसमें अनेक शिकायतें नकली या घटिया खाद-बीज एवं कीटनाशक के संबंध में हैं। श्री  शिवराज सिंह ने इन शिकायतों का समाधान प्राथमिकता से करने का निर्देश देते हुए कहा कि उन्हें राज्यों में प्रवास के दौरान भी ऐसी शिकायतें मिलती हैं, किसानों को हमें लुटने से बचाना चाहिए और इसके लिए अमानक खाद-बीज, कीटनाशक की बिक्री पर सख्ती से रोक लगानी होगी। केंद्र के अधिकारी अपने स्तर पर कार्रवाई के साथ ही राज्य सरकारों के साथ मिलकर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करें ताकि हमारे किसान भाई-बहनों को राहत मिल सकें। शिवराज सिंह ने कहा कि किसानों की इन समस्याओं को हल करने में राज्यों की सहभागिता आवश्यक हो। वे स्वयं इस संबंध में मुख्यमंत्रियों को पत्र लिख चुके हैं, आगे वर्चुअल माध्यम से भी राज्यों से चर्चा करेंगे, ताकि किसानों को पूरी तरह से राहत मिल सकें। अवैध बायोस्टियुमिलेंट (जैव उत्तेजक) की पूर्व में हुई बिक्री को लेकर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने एक बार फिर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि बायोस्टियुमिलेंट की बिक्री केवल नोटिफाइड प्रोडक्ट्स की ही हो, ये सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने इसके लिए हरसंभव प्रयास किए जाने हेतु अधिकारियों को निर्देशित किया और अब तक नोटिफाइड 146 बायोस्टियुमिलेंट के अलावा अन्य बिना अनुमति प्राप्त बायोस्टियुमिलेंट की बिक्री नहीं हो, सुनिश्चित करने पर बल दिया। साथ ही, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने अधिसूचित बायोस्टियुमिलेंट के बारे में किसानों को जागरूक करने व प्रमाणित बायोस्टियुमिलेंट की सूची सोशल मीडिया द्वारा किसानों तक पहुंचाने के निर्देश भी दिए। केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की राशि मिलने और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के क्लेम आदि के संबंध में मिली शिकायतों की जानकारी भी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ये दोनों महत्वपूर्ण योजनाएं हैं, जिनके संबंध में किसानों की हर शिकायत का निराकरण कर किसानों से संपर्क करके अधिकारी उनका फीडबैक भी लें। हर हाल में हमारे किसान पूर्णतः संतुष्ट होने चाहिए, यही हमारा उद्देश्य है। बैठक में केंद्रीय कृषि सचिव डा. देवेश चतुर्वेदी भी मौजूद थे, जिन्होंने केंद्रीय मंत्री श्री चौहान को अपने सुझाव दिए। स्वदेशी अपनाने का संकल्प- बैठक में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारियों ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के "स्वदेशी अपनाओ" के आह्वान व इस संबंध में केंद्रीय कृषि मंत्री श्री  शिवराज सिंह की अपील पर यथासंभव स्वदेशी वस्तुएं अपनाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया। केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह के साथ ही कृषि सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी सहित सभी अधिकारियों ने संकल्प लिया कि वे जीवन में यथासंभव स्वदेशी वस्तुओं का ही उपयोग करेंगे।  

अपनी मां संग सीएम के पास पहुंची कानपुर की बच्ची

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को एडमिशन कराने का दिया निर्देश  इसके पहले सीएम के जनता दर्शन में पहुंचीं मुरादाबाद की वाची का भी हुआ प्रवेश, प्रतिष्ठित विद्यालय में ग्रहण कर रहीं शिक्षा आर्थिक कारणों से गोरखपुर की पंखुड़ी को शिक्षा में आ रही थी दिक्कत, सीएम से मिलकर बताई समस्या तो निर्बाध गति से चलने लगी पढ़ाई  लखनऊ कानपुर की मायरा सोमवार को अपनी मां नेहा के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'जनता दर्शन' में पहुंचीं। उन्होंने मुख्यमंत्री से बच्चे के एडमिशन की गुहार लगाई। मासूम मायरा को देख मुस्कुराते हुए सीएम ने पहले हालचाल जाना, फिर पूछा कि क्या बनना चाहती हो। इस पर मायरा ने जवाब दिया- डॉक्टर। यह सुन सीएम ने पहले उसे चॉकलेट दी, फिर अधिकारियों को एडमिशन कराने का निर्देश। गौरतलब है कि मुरादाबाद की वाची ने एडमिशन और गोरखपुर की पंखुड़ी ने फीसमाफी को लेकर मुख्यमंत्री से गुहार लगाई थी। जिसके तत्काल बाद दोनों की समस्याओं का हल हो गया। अब दोनों बच्चियां अपने शहर के प्रतिष्ठित विद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर रही हैं।  सीएम ने मायरा से पूछा- स्कूल जाओगी, क्या बनोगी- दिया जवाब- डॉक्टर 'जनता दर्शन' में आते ही सीएम ने मायरा की मां से पूछा कि कहां से आए हैं, कहां एडमिशन कराना है। जिसका उन्होंने उत्तर दिया। इसके बाद मायरा से मुखातिब सीएम ने पूछा कि स्कूल जाओगी, किस क्लास में पढ़ोगी। अभी तक तो स्कूल गई नहीं है। क्या बनेगी- जिस पर उसने तपाक से जवाब दिया-डॉक्टर। बच्ची की मासूमियत पर सीएम मुस्कुरा उठे। सीएम ने अफसरों को एडमिशन के लिए निर्देश दिया।  मुख्यमंत्री के व्यवहार से प्रसन्नचित्त हुआ मायरा का परिवार कानपुर की नेहा सोमवार को बेटी मायरा को लेकर 'जनता दर्शन' में पहुंचीं। उन्होंने बताया कि वह बच्ची के एडमिशन के लिए 'जनता दर्शन' में पहुंचीं थीं। उन्होंने कानपुर के एक विद्यालय में एडमिशन का अनुरोध किया। मायरा का परिवार मुख्यमंत्री की सहृदयता का कायल हो गया। मीडिया से बातचीत में मायरा की मां ने कहा कि सीएम ने काफी अच्छे तरीके से हमारे परिवार की बात भी सुनीं और एडमिशन का आश्वासन दिया।  सीएम से एक मुलाकात में ही पूरे हुए थे वाची और पंखुड़ी के सपने  यह पहली बार नहीं है, जब कोई बच्ची अपने एडमिशन को लेकर मुख्यमंत्री से मिली। इसके पहले मुरादाबाद की वाची ने अपने माता-पिता के साथ जून में मुख्यमंत्री से 'जनता दर्शन' में मुलाकात की और अपने प्रवेश की गुहार लगाई। बेटी के प्रवेश को लेकर महीनों से परेशान वाची के माता-पिता जब मुख्यमंत्री के पास पहुंचे तो तीन घंटे के अंदर ही आरटीई के तहत वाची का मुरादाबाद के प्रतिष्ठित विद्यालय में प्रवेश हो गया। अब वाची वहां शिक्षारत हैं।  यही नहीं, जुलाई में गोरखपुर के पुर्दिलपुर निवासी पंखुड़ी त्रिपाठी ने भी परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए फीस माफी को लेकर मुख्यमंत्री से गुहार लगाई थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भरोसा दिया था कि उनकी पढ़ाई नहीं रुकेगी। मुख्यमंत्री के आदेश के बाद विद्यालय ने उनकी फीस माफ कर दी। पंखुड़ी अब गोरखपुर के प्रतिष्ठित स्कूल में फिर से शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। 

हिमाचल में आपदा का एलान, राज्य के लिए क्या बदलेंगे नियम और सुविधाएं

शिमला हिमाचल प्रदेश को मौजूदा बरसात और आपदा की गंभीर स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने आपदा प्रभावित प्रदेश घोषित कर दिया है। मुख्यमंत्री ने सोमवार को विधानसभा में आपदा से नुकसान पर एक विशेष वक्तव्य में इसकी घोषणा करते हुए कहा कि जब तक बरसात का दौर चलता रहेगा, तब तक हिमाचल आपदा प्रभावित राज्य रहेगा और मौसम सामान्य होने पर इस आदेश को वापस लिया जाएगा। आपदा प्रभावित राज्य घोषित होने से अब आपदा से जुड़े नियम लागू हो जाएंगे। साथ ही आपदा राहत पैकेज पूरे प्रदेश को मिलेगा। अब तक 3,056 करोड़ का नुकसान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सदन में जानकारी दी कि प्रदेश में भारी बारिश, भूस्खलन, बादल फटने और बाढ़ से अब तक 3,056 करोड़ रुपये का प्रारंभिक नुकसान आंका गया है। इसमें सबसे अधिक क्षति सड़कों, पुलों, पेयजल और बिजली की संरचनाओं को हुई है। सबसे प्रभावित जिलों में चंबा, कुल्लू, लाहौल-स्पीति, मंडी, शिमला, कांगड़ा और हमीरपुर शामिल हैं। हेलीकॉप्टर से निकाले जाएंगे श्रद्धालु चंबा जिले में मणिमहेश यात्रा के दौरान हजारों श्रद्धालु फंस गए थे। मुख्यमंत्री ने बताया कि 15 हजार यात्रियों में से अब तक 10 हजार को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचा दिया गया है। शेष यात्रियों के लिए भी लगातार निकासी अभियान चलाया जा रहा है। सरकार ने हेलीकॉप्टर, बसों और अन्य माध्यमों से राहत व बचाव कार्य तेज किए हैं। उन्होंने कहा कि 500 श्रद्धालु जो चलने-फिरने में असमर्थ हैं, उन्हें विशेष व्यवस्था के तहत हेलीकॉप्टर से निकाला जाएगा। एनडीआरएफ और SDRF तैनात मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने यह भी बताया कि राहत व बचाव कार्यों को तेजी देने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, राज्य आपदा मोचन बल, पर्वतारोहण संस्थान मनाली की टीम, पुलिस बल और स्वयंसेवी संगठन तैनात किए गए हैं। चंबा-पठानकोट मार्ग खोला सीएम ने बताया कि चंबा के भरमौर और अन्य क्षेत्रों में आवश्यक राशन, दवाइयां और सामग्री भी पहुंचाई गई है। चंबा-पठानकोट मार्ग को खोल दिया गया है और भरमौर की तरफ 25 किलोमीटर तक सड़क बहाल कर दी गई है। मंडी-कुल्लू एनएच की बहाली बयान के मुताबिक, कुल्लू जिले में मंडी-कुल्लू राष्ट्रीय राजमार्ग की बहाली युद्ध स्तर पर जारी है। वैकल्पिक तौर पर कमांद-कटौला मार्ग पर छोटे वाहनों को चलाया जा रहा है। अधिकांश स्थानों पर बिजली और संचार सेवाएं बहाल कर दी गई हैं। पुराना मनाली पुल भी छोटे वाहनों के लिए खोल दिया गया है। पांच मरीज एयरलिफ्ट लाहौल-स्पीति में भी स्थिति सामान्य करने के प्रयास जारी हैं। यहां मोबाइल नेटवर्क बहाल किया गया है, बिजली उत्पादन शुरू हो गया है और भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टरों से राशन व दवाइयां पहुंचाई गई हैं। पांच मरीजों को हेलीकॉप्टर से सुरक्षित कुल्लू लाया गया, जिनमें एक गर्भवती महिला और एक बच्चा भी शामिल है। प्रभावित लोगों को होटल, होमस्टे, महिला मंडलों और विश्राम गृहों में ठहराया गया है। राहत, बचाव के लिए दिए निर्देश मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार ने आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत जिलों, राज्य और केंद्र सरकार के विभागों को युद्ध स्तर पर राहत, बचाव और पुनर्निर्माण कार्य करने के निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि हर प्रभावित परिवार को पुनः बसाने और उन्हें आर्थिक तंगी से उबारने के लिए सरकार पूरी गंभीरता से काम कर रही है। इस ऐलान से क्या बदलेगा? आपदा प्रभावित राज्य घोषित होने से अब आपदा से जुड़े नियम लागू होंगे। इसके तहत आपदा राहत पैकेज पूरे प्रदेश को मिलेगा। राज्य सरकार ने आपदा पीड़ितों के लिए पैकेज दिया है जो साल 2023 में भी दिया गया था। इस बार पैकेज के तहत राहत की राशि को 70 हजार रुपये बढ़ाया गया है। पहले जिस प्रभावित का घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाता था, उसे सात लाख दिया जाता था, अब प्रभावित को सात लाख 70 हजार रुपये की राहत राशि रखी गई है। अब प्रदेश में कहीं भी आपदा से नुकसान होता है, उसे ये राशि दी जाएगी।  

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने की बड़ी घोषणा: कालेश्वरम परियोजना पर होगी CBI जांच

हैदराबाद तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) की पूर्ववर्ती राज्य सरकार के दौरान निर्मित कालेश्वरम परियोजना में कथित अनियमितताओं की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराए जाने की घोषणा की है। कलेश्वरम परियोजना पर न्यायिक आयोग की रिपोर्ट पर रविवार देर रात लगभग दो बजे समाप्त हुई चर्चा के अंत में रेड्डी ने विधानसभा में कहा कि इस परियोजना की जांच सीबीआई को सौंपना उचित है, क्योंकि यह अंतरराज्यीय मामला है, केंद्रीय एवं राज्य सरकार के विभिन्न विभाग और एजेंसियां इस परियोजना में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि परियोजना के डिजाइन, निर्माण और वित्तपोषण में केंद्र सरकार के संगठन और वित्तीय संस्थान भी शामिल हैं, ‘‘इसलिए अध्यक्ष की अनुमति से सदन इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का निर्णय ले रहा है। इसमें कई मुद्दे शामिल हैं जिनकी जांच कराए जाने की आवश्यकता है इसलिए हमारी सरकार सीबीआई जांच के आदेश जारी कर रही है।’’ उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (एनडीएसए) और न्यायिक आयोग की रिपोर्ट ने परियोजना से संबंधित विभिन्न मुद्दों की गहन और अधिक व्यापक जांच की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि न्यायिक आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कई खामियों और अनियमितताओं को चिह्नित किया है जिन पर आपराधिक कार्रवाई की जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि एनडीएसए की रिपोर्ट के अनुसार योजना, डिजाइन और गुणवत्ता नियंत्रण में खामियां कालेश्वरम परियोजना के मेदिगड्डा बैराज की विफलता का कारण पाई गई हैं। उन्होंने कहा कि बीआरएस सरकार ने परियोजना के लिए अत्यधिक ब्याज दरों पर ऋण लिया था। न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) पिनाकी घोष आयोग ने सुझाव दिया है कि तेलंगाना सरकार को पूर्व मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए। आयोग ने तेलंगाना में कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना के निर्माण में अनियमितताओं को लेकर अपनी रिपोर्ट रविवार को प्रस्तुत की। इससे पहले, बीआरएस ने विधानसभा से बहिर्गमन किया और आरोप लगाया कि पार्टी को न्यायिक आयोग की रिपोर्ट पर अपना पक्ष रखने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘तत्कालीन सिंचाई मंत्री ने मनमाने ढंग से निर्देश दिए और वित्त एवं योजना मंत्री ने राज्य के वित्त और आर्थिक स्वास्थ्य के प्रति उदासीनता बरती। यह तत्कालीन मुख्यमंत्री ही हैं, जिन्हें तीनों बैराज की योजना, निर्माण, पूर्णता, संचालन और रखरखाव में अनियमितताओं के लिए सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से जवाबदेह बनाया जा सकता है। हालांकि, यह सरकार का काम है कि वह जांच करे और कानून के अनुसार उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करे।’’ उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश पी.सी. घोष की अध्यक्षता वाले आयोग ने 31 जुलाई को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी। विधानसभा में आयोग की रिपोर्ट पर रविवार को चर्चा हुई।  

राहुल गांधी केस अपडेट: सुनवाई की नई तारीख 3 सितंबर तय

प्रयागराज इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई के लिए तीन सितंबर की तिथि सोमवार को तय की। राहुल गांधी ने वाराणसी के विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए) के आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय का रुख किया है। विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए) ने राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग वाली एक याचिका नए सिरे से सुनवाई करने के लिए एसीजेएम की अदालत के पास भेज दिया जिसके खिलाफ राहुल गांधी ने इस उच्च न्यायालय का रुख किया है। यह मामला अमेरिका में सिखों के संबंध में 2024 में दिए गए एक बयान से जुड़ा है। शिकायतकर्ता नागेश्वर मिश्रा के वकील के अनुरोध पर न्यायमूर्ति समीर जैन ने सोमवार को सुनवाई टाल दी और अगली तिथि तीन सितंबर तय की। वाराणसी के नागेश्वर मिश्रा नाम के एक व्यक्ति ने वाराणसी के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एमपी-एमएलए) के समक्ष एक आवेदन किया था जिसने 28 नवंबर, 2024 को इस मामले में सुनवाई के बाद राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग वाले आवेदन को खारिज कर दिया था। अदालत ने कहा था कि उक्त भाषण अमेरिका में दिया गया, इसलिए यह मामला उनके न्यायिक क्षेत्र से बाहर का है। अदालत द्वारा मामला खारिज किए जाने को राव ने पुनरीक्षण अदालत के समक्ष चुनौती दी जिसने उनकी पुनरीक्षण याचिका स्वीकार कर ली और एसीजेएम को इस मामले में नए सिरे से सुनवाई करने का निर्देश दिया। यह मामला सितंबर, 2024 का है। अमेरिका में एक कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने कथित तौर पर कहा था कि भारत में सिखों के लिए माहौल अच्छा नहीं है। उनके इस बयान को लेकर विरोध हुआ था और इसे भड़काऊ और विभाजनकारी बताया गया था। वाराणसी के निवासी नागेश्वर मिश्रा ने इस बयान के खिलाफ वाराणसी के सारनाथ थाना में प्राथमिकी दर्ज कराने का प्रयास किया, लेकिन जब वह सफल नहीं हुए तो उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए अदालत में एक आवेदन दाखिल किया। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 28 नवंबर, 2024 को यह कहते हुए उनका आवेदन खारिज कर दिया था कि यह मामला अमेरिका में दिए गए भाषण से जुड़ा है और यह उनके न्यायिक क्षेत्र से बाहर का है। इसके बाद, नागेश्वर मिश्रा ने सत्र न्यायालय में एक पुनरीक्षण याचिका दायर की जिसे अदालत द्वारा 21 जुलाई, 2025 को स्वीकार कर लिया गया। अब राहुल गांधी ने इस निर्णय के खिलाफ इलाहाबाद उच्च न्यायालय में एक पुनरीक्षण याचिका दायर की है जिसमें दलील दी गई है कि वाराणसी की अदालत का आदेश गलत, अवैध और न्यायिक क्षेत्र से बाहर का है।  

रूसी तेल पर भारत का स्टैंड साफ, अमेरिका को दो टूक जवाब

नई दिल्ली  भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद पर स्थिति स्पष्ट किए जाने के बावजूद अमेरिका इसे लेकर भारत को लगातार निशाना बना रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सहयोगी बेतुके तर्क देकर भारत पर मुनाफाखोरी तक के आरोप लगा चुके हैं। अब केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अमेरिका को सख्त संदेश दे दिया है। हरदीप पुरी ने कहा है कि भारत ने रूसी तेल खरीदने में किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया है, बल्कि यूक्रेन युद्ध के बाद से भारत के ऊर्जा व्यापार ने वैश्विक बाजारों को स्थिर करने और कीमतों को काबू में रखने में मदद की है। पुरी ने वाइट हाउस के ट्रेड एडवाइजर पीटर नवारो की हालिया टिप्पणी पर जवाब देते हुए यह बातें कहीं हैं। नवारो ने हाल ही में यह बयान दिए हैं कि भारत रूस की आर्थिक मदद कर पुतिन की ‘युद्ध मशीन’ को वित्तपोषित कर रहा है। नवारो ने बीते दिनों दूसरे कुछ बयानों में भी इस तरह की बातें कही हैं। पिछले सप्ताह उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध को ‘मोदी का युद्ध’ तक बता दिया था। वहीं सोमवार को उन्होंने कहा है कि रूस से तेल खरीदने का फायदा भारत के ब्राह्मणों को हो रहा है। भारत का जवाब इस पर जवाब देते हुए ‘द हिंदू’ के लिए लेख में केंद्रीय मंत्री पुरी ने कहा कि भारत लंबे समय से और फरवरी 2022 में रूस के यूक्रेन पर आक्रमण से बहुत पहले से पेट्रोलियम उत्पादों का दुनिया का चौथा सबसे बड़ा निर्यातक रहा है। इसके निर्यात की मात्रा और मुनाफे मोटे तौर पर समान रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने नवारो का नाम लिए बिना लिखा कि कुछ आलोचकों का आरोप है कि भारत रूसी तेल को खरीद कर ‘युद्ध मशीन’ को वित्तपोषित कर रहा है। यह पूरी तरह से गलत और असत्य है।" भारत ने नहीं तोड़े कोई नियम पुरी ने अमेरिका को संदेश देते हुए कहा कि ईरान या वेनेजुएला के कच्चे तेल की तरह रूसी तेल खरीद पर कभी प्रतिबंध नहीं लगाया गया। उन्होंने कहा, ‘‘ रूसी तेल G-7 और यूरोपीय संघ की मूल्य सीमा प्रणाली के अंतर्गत आता है जिसे तेल की आपूर्ति जारी रखने और राजस्व की सीमा निर्धारित करते हुए तैयार किया गया है।’’ केंद्रीयमंत्री ने कहा, ‘‘ऐसे ‘पैकेज’ के 18 दौर हो चुके हैं और भारत ने हर एक का पालन किया है। भारत द्वारा किया गया हर लेन-देन कानूनी है। हर लेन-देन में वैध निर्यात एवं बीमा, अनुपालन करने वाले व्यापारी और ‘ऑडिट’ माध्यमों का इस्तेमाल किया गया है। भारत ने कोई नियम नहीं तोड़े हैं। भारत ने बाजारों को स्थिर किया है और वैश्विक कीमतों को बढ़ने से रोका है।’’  

कितनी मुश्किल होती है एस्ट्रोनॉट्स की ट्रेनिंग? नासा से सामने आई एक्सक्लूसिव तस्वीरें

न्यूयॉर्क भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने एस्ट्रोनॉट्स की कड़ी ट्रेनिंग की एक झलक दिखाई है। उन्होंने नासा के मल्टी-एक्सिस ट्रेनर (मैट) स्पेस सेंटर से एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में शुभांशु शुक्ला कुछ खास मशीनों के साथ दिखाई देते हैं। ऐसी ही एक मशीन है, जिस पर एस्ट्रोनॉट्स को लगातार घुमाया जाता है। असल में स्पेस में अगल-अलग तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में उन्हें काफी कड़ी ट्रेनिंग दी जाती है। शुभांशु शुक्ला ने इसका वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर करते हुए इसके कैप्शन में लिखा है, ‘लेट्स गेट स्पिनिंग।’ दिखाई वॉमिट कॉमेट चेयर शुभांशु शुक्ला ने जिस मशीन का वीडियो दिखाया है, उसे ‘वॉमिट कॉमेट चेयर’ कहा जाता है। यह एक तरह का सिम्यूलेटर है। इसमें ट्रेनिंग लेकर अंतरिक्ष यात्री स्पेस में होने वाली चीजों को महसूस कर सकता है। इसमें तीन रिंग्स लगी होती हैं, जो घूमती रहती हैं। जब एक एस्ट्रोनॉट अपनी सीट से बंधा होता है, तो रिंग कई दिशाओं में घूमती है। ऐसा इसलिए किया जाता है कि अगर कभी अंतरिक्ष यान अस्थिर हो जाए तो उस दौरान होने वाला अनुभव अंतरिक्ष यात्री महसूस कर सके। साथ ही वह ऐसे हालात में अपने ऊपर नियंत्रण बनाए रखने में भी सफल रहे और ध्यान केंद्रित कर सके। नील आर्मस्ट्रांग का बताया अनुभव अंदर की जानकारी देते हुए शुभांशु शुक्ला बताते हैं कि मैं मार्शल स्पेस फ्लाइट सेंटर के मैट में हूं। इस ट्रेनर का उपयोग मर्करी एस्ट्रोनॉट्स को ऑर्बिट के अनुभवों को देने के लिए किया गया है। इसके बाद उन्होंने बताया कि नील आर्मस्ट्र्रांग को जेमिनी 8 मिशन के दौरान समस्याएं आई थीं। तब थ्रस्टर में समस्या होने के चलते काफी ज्यादा घुमाव हो रहे थे। उन्होंने बाद में मैनुअल तरीके से स्पेसक्राफ्ट पर नियंत्रण पाया था।  

IPL चैंपियन से भी दोगुना इनाम, महिला वर्ल्ड कप जीत पर होगी धनवर्षा

नई दिल्ली इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने सोमवार को भारत और श्रीलंका में होने वाले महिला विश्व कप के लिए इनामी राशि की घोषणा की. खास बात यह है कि यह राशि ICC मेंस क्रिकेट वर्ल्ड कप 2023 की कुल इनामी राशि से $10 मिलियन से ज्यादा है. आधिकारिक बयान में ICC ने पुष्टि की कि इस प्रमुख टूर्नामेंट में कुल पुरस्कार राशि $13.88 मिलियन (अमेरिकी डॉलर) होगी. यह इस साल की शुरुआत में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु द्वारा जीते गए उनके पहले IPL खिताब की पुरस्कार राशि से दोगुनी है. महिला विश्व कप 2025 इनामी राशि की डिटेल: महिला क्रिकेट विश्व कप के 13वें एडिशन के विजेताओं को $4.48 मिलियन (INR 39,54,00,294) की पुरस्कार राशि मिलेगी; जो 2022 में ऑस्ट्रेलिया को दी गई $1.32 मिलियन की राशि से 239 प्रतिशत अधिक है. उप-विजेताओं को $2.24 मिलियन (INR 19,77,11,314) की राशि मिलेगी, जो तीन साल पहले इंग्लैंड को मिले $600,000 की तुलना में 273 प्रतिशत की वृद्धि है. * दो सेमीफाइनल हारने वाली टीमों को प्रत्येक $1.12 मिलियन (INR 9,88,57,926) मिलेंगे. * प्रत्येक ग्रुप स्टेज प्रतिभागी को $250,000 (INR 2,20,66,501) की गारंटी दी जाएगी. * प्रत्येक ग्रुप स्टेज जीत पर $34,314 (INR 30,28,794) मिलेंगे. * पांचवें और छठे स्थान पर रहने वाली टीमों को प्रत्येक $700,000 (INR 6,17,86,900) मिलेंगे. * सातवें और आठवें स्थान पर रहने वाली टीमों को प्रत्येक $280,000 (INR 2,47,14,765) मिलेंगे. महिला क्रिकेट में बड़ी पहल ICC के अध्यक्ष जय शाह ने कहा कि इनामी राशि में बढोतरी ‘महिला क्रिकेट की यात्रा में एक माइलस्टोन है. शाह ने कहा, “पुरस्कार राशि में यह चार गुना वृद्धि महिला क्रिकेट के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है और इसके लांग टर्म ग्रोथ के प्रति हमारी स्पष्ट प्रतिबद्धता को दिखाता है. हमारा मैसेज बहुत ही साफ है, महिला क्रिकेटरों को यह जानना चाहिए कि यदि वे इस खेल को प्रोफेशनल तौर से चुनती हैं तो उन्हें पुरुषों के समान पैसे मिलेंगे”

बीमार कैदियों की रिहाई पर बड़ा फैसला, योगी सरकार बनाएगी नियम आसान

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गंभीर बीमारियों से ग्रसित बंदियों की समयपूर्व रिहाई से संबंधित नियमों को अधिक सरल, स्पष्ट तथा मानवीय दृष्टिकोण से परिभाषित किए जाने की आवश्यकता जताई। सोमवार को कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाओं की समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का अनुपालन करते हुए प्रदेश की नीति को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पात्र बंदियों की रिहाई स्वतः विचाराधीन होनी चाहिए और इसके लिए उन्हें अलग से आवेदन न करना पड़े। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्राणघातक रोग से पीड़ित होने की आशंका वाले सिद्धदोष बंदी, जिसे मुक्त करने पर उसके स्वस्थ होने की उपयुक्त संभावना है तथा वृद्धावस्था, अशक्तता या बीमारी के कारण भविष्य में ऐसा अपराध करने में स्थायी रूप से असमर्थ बंदी, जिसके लिए वह दोषी ठहराया गया हो, के साथ-साथ घातक बीमारी या किसी प्रकार की अशक्तता से पीड़ित सिद्धदोष बंदी जिसकी मृत्यु निकट भविष्य में होने की संभावना हो, के संबंध में प्रदेश के सभी कारागारों में सर्वेक्षण कर वास्तविक संख्या का आकलन किया जाए। इनमें महिलाओं, बुजुर्गों को प्राथमिकता के आधार पर रिहा करने की व्यवस्था हो।   मुख्यमंत्री ने कैदियों को कृषि, गोसेवा आदि कार्यों से जोड़कर उनकी जेल अवधि के सदुपयोग करने के लिए व्यवस्था बनाने की भी आवश्यकता बताई। सीएम योगी ने कहा कि जेल मैनुअल में यह भी स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाना आवश्यक है कि किन बीमारियों को असाध्य रोग की श्रेणी में रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज की सुरक्षा सर्वोपरि है। इसलिए समयपूर्व रिहाई उन्हीं मामलों में की जानी चाहिए, जहां से सामाजिक जोखिम न हो। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि हत्या, आतंकवाद, देशद्रोह, महिला और बच्चों के विरुद्ध जघन्य अपराध जैसे मामलों में रिहाई कतई नहीं की जानी चाहिए। नियमों में बदलाव पर जोर देते हुए सीएम योगी ने कहा कि प्रत्येक वर्ष तीन बार जनवरी, मई और सितंबर में पात्र बंदियों के मामलों की स्वतः समीक्षा की व्यवस्था हो। यदि किसी बंदी को रिहाई न दी जाए तो उसके कारण स्पष्ट रूप से दर्ज किए जाएं और उसे यह अधिकार मिले कि वह उस निर्णय को चुनौती दे सके। बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा सुझाई गई प्रणाली को उत्तर प्रदेश में अपनाने पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि बंदियों को न्यायिक अधिकारों का लाभ सुचारू रूप से मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष, त्वरित और मानवीय संवेदनाओं पर आधारित होनी चाहिए तथा जल्द ही नई नीति का प्रारूप तैयार कर अनुमोदन हेतु प्रस्तुत किया जाए।

सीपी राधाकृष्णन पर सुदर्शन रेड्डी का वार, बोले- विपक्षी कैंडिडेट तो बोलते ही नहीं

नई दिल्ली  विपक्षी INDIA गठबंधन के उपराष्ट्रपति कैंडिडेट सुदर्शन रेड्डी ने सत्ता पक्ष के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन पर तंज कसा है। उन्होंने सोमवार को कहा कि मेरे प्रतिद्वंद्वी तो बोलते ही नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि दोनों कैंडिडेट बोलें तो एक डिबेट हो सकती है। इस तरह हैदराबाद पहुंचे रेड्डी ने राधाकृष्णन को अपने साथ डिबेट करने का चैलेंज दे दिया। रेड्डी ने कहा कि मैं भले ही विपक्षी दलों का कैंडिडेट हूं, लेकिन मुझे INDIA ब्लॉक के बाहर के दलों जैसे आम आदमी पार्टी का भी समर्थन हासिल है। रेड्डी ने कहा कि मेरी लड़ाई संविधान को बचाने के लिए है और मैं शुरुआती दिनों से ही इसके लिए संघर्ष करता रहा हूं। यही दलील देते हुए सुदर्शन रेड्डी ने सभी दलों के सांसदों पत्र लिखा है और उपराष्ट्रपति चुनाव में खुद को समर्थन देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई भारत के बीते कुछ सालों के इतिहास में सबसे साफ-सुथरी और शानदार चुनावी लड़ाई होगी। रेड्डी ने पहले ही कहा था कि वह सभी दलों के सांसदों को चिट्ठी लिखेंगे और मांग करेंगे उन्हें ही वोट दें। रेड्डी ने मुंबई में एक आयोजन में कहा था कि यदि मुझे आप लोगों ने जिताया तो यह संविधान को बचाने के लिए दिया गया वोट होगा। यदि मुझे उपराष्ट्रपति के तौर पर काम करने का मौका मिला तो मैं संविधान की रक्षा करूंगा। रेड्डी ने कहा कि उनका संविधान के साथ सफर 1971 में शुरू हुआ था, जब वे आंध्र प्रदेश बार काउंसिल के मेंबर बने और वकालत की शुरुआत की थी। इसके बाद वे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश बने। उन्होंने स्पष्ट किया कि मैं किसी भी राजनीतिक पार्टी का सदस्य नहीं हूं। मैं कभी किसी राजनीतिक पार्टी या संगठन का सदस्य नहीं रहा हूं और भविष्य में भी बनने का इरादा नहीं है। इसी वजह से मैं ही एकमात्र उम्मीदवार हूं जो सभी राजनीतिक दलों के सांसदों से अपने योग्यता के आधार पर समर्थन की अपील कर सकता हूं। विपक्षी उम्मीदवार ने कहा कि वे संसद के दोनों सदनों के प्रत्येक सदस्य को व्यक्तिगत पत्र लिखेंगे और उनकी अंतरात्मा को संबोधित करते हुए अपने पक्ष में मतदान करने की अपील करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि मौका मिला तो वे भाजपा नेतृत्व से मिलने को तैयार हैं। यह उपराष्ट्रपति चुनाव हाल ही में जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे की वजह से हो रहा है। विपक्ष ने इसे वैचारिक लड़ाई बताया है, लेकिन आंकड़े सत्तारूढ़ भाजपा और उसकी लीडरशिप वाले NDA गठबंधन के पक्ष में हैं, जिसने महाराष्ट्र राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन को 9 सितंबर को होने वाले चुनाव हेतु अपना उम्मीदवार बनाया है।