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LG मनोज सिन्हा ने वैष्णो देवी मार्ग पर भूस्खलन जांच के लिए गठित की कमेटी, 2 हफ्ते में रिपोर्ट

नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने श्री माता वैष्णो देवी मार्ग पर हुई भूस्खलन की घटना को लेकर बड़ा आदेश दिया है। उन्होंने हादसे के कारणों की जाँच के लिए हाई-लेवल कमेटी गठित करने के निर्देष दिए हैं। एलजी मनोज सिन्हा ने जल शक्ति विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव शालीन काबरा की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय तीन सदस्यीय समिति के गठन का आदेश दिया है। जम्मू के संभागीय आयुक्त और जम्मू के पुलिस महानिरीक्षक इस समिति के दो अन्य सदस्य हैं। समिति को घटना के कारणों की विस्तार से जांच करने की जिम्मेदारी दी गई है। कमेटी भूस्खलन की वजहों की विस्तार से जाँच करने के साथ-साथ और अन्य चूक को इंगित करेगी। कमेटी को भूस्खलन के दौरान किए गए बचाव और राहत उपायों के रूप में प्रतिक्रियाओं का आकलन भी करना होगा। इसके अलावा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए उपयुक्त मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और उपाय भी सुझाने होंगे। समिति दो हफ्ते के अंदर अपनी रिपोर्ट उपराज्यपाल को सौंपेगी। दरअसल, 27 अगस्त 2025 को श्री माता वैष्णो देवी मार्ग के पास अर्द्धकुंवारी मार्ग पर स्थित इंद्रप्रस्थ भोजनालय के पास श्रद्धालुओं का बड़ा दल चल रहा था। उसी समय भूस्खलन हुआ और पहाड़ों से बड़े-बड़े पत्थर टिन के शेड को चीरते हुए गिरे। इस दौरान वहां से गुजर रहे श्रद्धालु इसकी की चपेट में आ गए और मलबे में दब गए। इसमें 35 लोगों ने अपनी जान गंवा दी थी. 15 के शव उनके घरों में भेज दिए गए हैं। वहीं सात शवों की अभी तक पहचान नहीं हो पाई है।

बाढ़ पीड़ितों को राहत, मान सरकार ने की विशेष घोषणा

चंडीगढ़  पंजाब के कई जिले इस समय भारी बारिश और बाढ़ की चपेट में हैं। हालात को देखते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने राहत कार्यों को तेज़ करते हुए बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं के लिए कई अहम फैसले लिए हैं। बुजुर्गों को वृद्धाश्रम में मिलेगा सुरक्षित आश्रय सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने जानकारी दी कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे बुजुर्गों को तत्काल बचाकर पास के वृद्धाश्रमों में पहुँचाया जाएगा। उन्होंने बताया कि राज्य में फिलहाल 41 वृद्धाश्रम हैं, जिनमें 572 बुजुर्गों के रहने की व्यवस्था है और इस क्षमता को 700 तक बढ़ाया जा सकता है। मानसा में तैयार हुआ नया वृद्धाश्रम पहले से ही चालू कर दिया गया है, जिससे राहत कार्यों में तेजी आ सके। बच्चों के लिए अनाथालय और आंगनवाड़ी केंद्र तैयार सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों के बच्चों को अस्थायी रूप से अनाथालयों और आंगनवाड़ी केंद्रों में रखा जाएगा। यदि कोई बच्चा अपनी माँ के साथ रहना चाहे तो उसके लिए भी विशेष इंतजाम किए जाएंगे। बाढ़ प्रभावित इलाकों में खिचड़ी और दलिया जैसी आसान पचने वाली खाद्य सामग्री पहुंचाई जा रही है। गर्भवती महिलाओं के लिए 'सखी' सेंटर खुलेंगे डॉ. कौर ने बताया कि सभी सरकारी अस्पतालों में चल रहे 'सखी – वन स्टॉप सेंटर' को गर्भवती महिलाओं के लिए खोला जा रहा है, ताकि आपात स्थिति में उन्हें सुरक्षित स्थान मिल सके। साथ ही, महिलाओं को सैनिटरी पैड जैसी बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। सरकार की अपील राज्य सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे राहत कार्यों में सहयोग करें और जरूरत पड़ने पर प्रशासन से संपर्क करें। राहत टीमों को 24 घंटे के लिए सक्रिय रखा गया है।

हरियाणा में महंगी स्कूली पढ़ाई पर सुरजेवाला का तंज– ‘ये है सैनी का शिक्षा मॉडल’

चंडीगढ़ कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि केंद्र सरकार की एजेंसी 'राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण' (NSS) की रिपोर्ट- 2025 के मुताबिक ही हरियाणा में स्कूली शिक्षा, देशभर के मुकाबले दोगुनी से भी ज्यादा महंगी है। इस संबध में सुरजेवाला ने अपने x पर पोस्ट शेयर करते हुए सरकार पर कटाक्ष किया ।  राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (एनएसएस) के 80वें दौर के व्यापक मॉड्यूलर सर्वेक्षण: शिक्षा, 2025 के अनुसार, हरियाणा में एक शैक्षणिक वर्ष के दौरान स्कूली शिक्षा पर प्रति छात्र औसत खर्च 25,720 रुपये है, जो चंडीगढ़ के बाद दूसरे स्थान पर है और राष्ट्रीय औसत से दोगुना से भी ज़्यादा है। चंडीगढ़ में स्कूली शिक्षा पर प्रति शैक्षणिक वर्ष 49,711 रुपये खर्च होते हैं। पंजाब (22,692 रुपये) और हिमाचल प्रदेश (18,305 रुपये) के मामलों में, यह राशि काफी कम है। राष्ट्रीय औसत 12,616 रुपये प्रति शैक्षणिक वर्ष है।  हरियाणा में स्कूली शिक्षा पर लड़कों पर होने वाला खर्च लड़कियों की तुलना में अधिक है। लड़कों के लिए वार्षिक खर्च 27,697 रुपये और लड़कियों के लिए 23,465 रुपये है।राज्य के सरकारी स्कूलों में, बच्चों की स्कूली शिक्षा पर होने वाला खर्च काफी कम यानी 4,479 रुपये प्रति शैक्षणिक वर्ष है। हालाँकि, निजी सहायता प्राप्त स्कूलों में यह खर्च बढ़कर 48,636 रुपये हो जाता है, और निजी-गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों के लिए यह 39,015 रुपये है।   हरियाणा में निजी संस्थानों में पढ़ने वाले स्कूली छात्रों की संख्या ज़्यादा है। यहाँ 41.2 प्रतिशत छात्र सरकारी स्कूलों में, 11.9 प्रतिशत निजी सहायता प्राप्त स्कूलों में और 45.7 प्रतिशत निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों (मान्यता प्राप्त) में नामांकित हैं। हरियाणा में प्रति छात्र औसत व्यय की मदवार जाँच करने पर पता चला कि पाठ्यक्रम शुल्क पर 16,405 रुपये (63.8 प्रतिशत) खर्च किए गए। इसकी तुलना में, परिवहन पर 3,633 रुपये (14.2 प्रतिशत) खर्च किए गए; यूनिफ़ॉर्म पर 1,966 रुपये (7.6 प्रतिशत), पाठ्यपुस्तकों और स्टेशनरी पर 2,852 रुपये (11.1 प्रतिशत) और अन्य खर्चों पर 865 रुपये (3.4 प्रतिशत) खर्च किए गए। हरियाणा में निजी कोचिंग का चलन राष्ट्रीय औसत से कम है। हरियाणा में विभिन्न स्तरों पर, चालू शैक्षणिक वर्ष के दौरान केवल 11 प्रतिशत छात्र निजी कोचिंग ले रहे थे या ले चुके थे। पूरे भारत में यह आँकड़ा 27 प्रतिशत था, जबकि चंडीगढ़ में यह 32.9 प्रतिशत और पंजाब में 26.8 प्रतिशत था। हिमाचल प्रदेश में यह दर हरियाणा से कम यानी 7.7 प्रतिशत दर्ज की गई। इस सर्वेक्षण में कौशल विकास, कला, नृत्य, संगीत कक्षाओं जैसी पाठ्येतर गतिविधियों और खेलों के लिए कोचिंग को शामिल नहीं किया गया। हरियाणा में एक शैक्षणिक वर्ष के दौरान प्रति छात्र निजी कोचिंग पर औसत खर्च 1,366 रुपये है, जबकि हिमाचल प्रदेश में यह और भी कम यानी 437 रुपये है। चंडीगढ़ में यह 5,650 रुपये और पंजाब में 1,732 रुपये है। अखिल भारतीय औसत 2,409 रुपये है। उच्चतर माध्यमिक स्तर पर, हरियाणा के शहरी क्षेत्रों में निजी कोचिंग पर औसत खर्च 7,857 रुपये था, जबकि अखिल भारतीय स्तर पर यह आँकड़ा 9,950 रुपये था। चंडीगढ़ में कोचिंग के लिए यहश में एक शैक्षणिक वर्ष के लिए मात्र 1,135 रुपये थी।  20,688 रुपये, पंजाब में 2,307 रुपये और हिमाचल प्रदे

यूपी के 8 जिलों में पटाखा बिक्री और निर्माण पर रोक, नियम तोड़ा तो जेल और लाखों का जुर्माना

लखनऊ  सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण को कम करने के लिए पटाखों पर बैन लगाया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के 8 जिलों में पटाखों के निर्माण, भंडारण, बिक्री और इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। कौन-कौन से जिले शामिल हैं? – मेरठ – गाजियाबाद – गौतमबुद्धनगर – बुलंदशहर – हापुड़ – बागपत – शामली – मुजफ्फरनगर इन जिलों में पटाखों का उत्पादन, स्टोर करना, बेचना (ऑनलाइन बिक्री भी शामिल है) और जलाना पूरी तरह से मना है। किस कारण लगाया गया यह प्रतिबंध? दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण का स्तर काफी खतरनाक हो गया है। हवा में जहरीली गैसें बढ़ने से लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। इसी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों पर प्रतिबंध लगाया है ताकि प्रदूषण को कम किया जा सके। जुर्माना और जेल की सजा यदि कोई व्यक्ति या दुकान पटाखों के इस प्रतिबंध का उल्लंघन करता है, तो उस पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। जुर्माने की राशि 1 लाख रुपए तक हो सकती है। 5 साल तक की जेल भी हो सकती है। अगर कोई दोबारा नियम तोड़ता है, तो उसे अतिरिक्त 5,000 रुपए जुर्माना देना होगा। इस तरह की सख्ती से लोग पटाखों के इस्तेमाल और बिक्री से बचेंगे, जिससे वायु प्रदूषण कम होगा।   शिकायत कैसे करें? अगर आप किसी को पटाखे बेचते या जलाते देखेंगे, तो तुरंत इसकी शिकायत कर सकते हैं। शिकायत करने के कई आसान तरीके हैं। आप यूपी पुलिस की हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें। एसएमएस या व्हाट्सएप पर नंबर 7570000100 या 7233000100 पर शिकायत भेजें। उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वेबसाइट uppcb.up.gov.in पर जाकर भी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। सरकार और सुप्रीम कोर्ट का संदेश सरकार और सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि हम सबको मिलकर पर्यावरण की रक्षा करनी होगी। पटाखों का धुआं और धूल हमारे और हमारे बच्चों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इसलिए पटाखों का इस्तेमाल ना करें और दूसरों को भी समझाएं।  

प्रधानमंत्री का इस्तीफा या हटना? अदालत ने सुनाया अहम फैसला

थाईलैंड  थाईलैंड की प्रधानमंत्री पैतोंगटार्न शिनावात्रा को आज अदालत ने एक बड़ा झटका दिया है। संवैधानिक अदालत ने उन्हें नैतिक दुर्व्यवहार के आरोप में स्थायी रूप से प्रधानमंत्री के पद से हटा दिया है। शिनावात्रा को पिछले महीने ही इस मामले की जांच के लिए निलंबित किया गया था।   क्या था पूरा मामला? शिनावात्रा पर थाईलैंड और कंबोडिया के बीच चल रहे सीमा विवाद में नैतिक दुर्व्यवहार का आरोप लगाया गया था। इस मामले की जांच के लिए पिछले महीने अदालत ने उन्हें अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया था। उस दौरान डिप्टी पीएम फुमथम वेचायाचाई को अंतरिम रूप से प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।   बता दें कि आज यानि शुक्रवार 29 अगस्त को अदालत ने इस मामले पर अंतिम फैसला सुनाते हुए शिनावात्रा को पद से हटाने का आदेश दिया है जिससे थाईलैंड की राजनीति में एक बड़ा बदलाव आया है।  

पति-पत्नी के झगड़े में हुआ बवाल, पत्नी की पिटाई के बाद पति ने घर से निकाला

मुरादाबाद  यूपी के मुरादाबाद में लव मैरिज के 15 दिन बाद ही दहेज के लिए पति ने विवाहिता को मारपीट कर तीन तलाक देकर घर से निकाल दिया। मुगलपुरा थाना क्षेत्र के इस मामले में पीड़िता की तहरीर पर पुलिस ने पति समेत सात ससुरालियों के खिलाफ केस दर्ज किया है। जानकारी के अनुसार मुगलपुरा थाना क्षेत्र के वारसीनगर गली नंबर-1 निवासी अलीशा खान पुत्री नईम खान ने पुलिस को तहरीर देकर बताया कि मोहल्ले के ही रहने वाले मोहम्मद जुनैद के साथ उसका प्रेम प्रसंग चल रहा था। बताया जा रहा है कि बीते 9 जुलाई 2025 को उसका मोहम्मद जुनैद के साथ निकाह हो गया। पीड़िता अलीशा खान के अनुसार निकाह के 15 दिन बीतने के बाद ही 24 जुलाई को पति मोहम्मद जुनैद ने गाली गलौज करते हुए उसकी लातघूंसों से पिटाई करनी शुरू कर दी। अलीशा ने आरोप लगाया कि निकाह के बाद से पति मोहम्मद जुनैद, सास राना, ननद उजमा, ममेरी ननद रेहाना, रिश्तेदार नौशी, ममिया ससुर गौहर और गुड्डू ने दहेज के लिए उसे प्रताड़ित करना शुरू कर दिया था। आरोपी किसी न किसी बहाने उसे ताना मारता था। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि पति ने मारपीट करने के बाद तीन तलाक देकर यह कहते हुए घर से निकाल दिया कि अब तुझसे मेरा कोई संबंध नहीं है। इस संबंध में सीओ कोतवाली सुनीता दहिया ने बताया कि पीड़िता की तहरीर के आधार पर मुगलपुरा थाने में आरोपी पति समेत सात ससुरालियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। मामले में जांच शुरू कर दी गई है। आरोपी पति और ससुरालियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।  

प्रदेश के विश्वविद्यालयों से देश भर में गुंजायमान होगा भाषाई एकात्मता का संदेश

भोपाल   उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इंदर सिंह परमार ने कहा है कि भारतीय ज्ञान परम्परा में पुस्तकालय सदैव ही समृद्ध रहे हैं। नालंदा विश्वविद्यालय में विश्व का सबसे विशाल पुस्तकालय था और तब भारत विश्व गुरु की संज्ञा से सुशोभित था। विश्व भर के लोग हमारे यहां शिक्षा ग्रहण करने आते थे। भारत का ज्ञान सार्वभौमिक था। हमारी संस्कृति में ज्ञान का दस्तावेजीकरण नहीं था। हमारे पूर्वजों ने शोध एवं अध्ययन कर ज्ञान को परंपरा के रूप में समाजव्यापी बनाया। अतीत के विभिन्न कालखंडों में योजनाबद् तरीके से हमारे ज्ञान को दूषित करने का कुत्सित प्रयास किया गया। भारतीय समाज में विद्यमान परंपरागत ज्ञान को पुनः शोध एवं अनुसंधान के साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण के सापेक्ष युगानुकुल परिप्रेक्ष्य में दस्तावेजीकरण से समृद्ध करने की आवश्यकता है। पुस्तकालय मानवता, नवाचार और राष्ट्रीय चरित्र निर्माण के मूल आधार हैं। भारतीय दृष्टिकोण से समृद्ध साहित्य से समस्त पुस्तकालयों को समृद्ध करने की आवश्यकता है। यह बात मंत्री श्री परमार ने शुक्रवार को भोपाल स्थित राष्ट्रीय विधि संस्थान विश्वविद्यालय (एनएलआईयू) में संस्थान के केंद्रीय पुस्तकालय ज्ञान मंदिर के तत्वावधान में "विकसित भारत के पुस्तकालयों की पुनर्कल्पना" विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन "ज्ञानोत्सव-2025" में कही। मंत्री श्री परमार ने कहा कि भारत में हर क्षेत्र हर विषय में व्यापक ज्ञान था और भारत हर क्षेत्र में विश्वमंच पर अग्रणी एवं समृद्ध था। भारत की धरोहर इस परंपरागत ज्ञान को भारत के सापेक्ष भारतीय दृष्टि से संजोने एवं सहेजने की आवश्यकता है। पुस्तकालयों को भारतीय दृष्टि से समृद्ध साहित्य से समृद्ध बनाना होगा, समृद्ध पुस्तकालयों से विकसित एवं समृद्ध राष्ट्र का बौद्धिक सृजन होगा। मंत्री श्री परमार ने कहा कि भारत की गृहणियों की रसोई में कोई तराजू नहीं होता है, गृहणियों को भोजन निर्माण के लिए किसी संस्थान में अध्ययन करने की आवश्यकता नहीं होती है। भारतीय गृहणियों में रसोई प्रबंधन का उत्कृष्ट कौशल, नैसर्गिक एवं पारम्परिक रूप से विद्यमान है। भारत की रसोई विश्वमंच पर प्रबंधन का उत्कृष्ट आदर्श एवं श्रेष्ठ उदाहरण है। भारतीय समाज में ऐसे असंख्य संदर्भ, परम्परा के रूप में प्रचलन में हैं, उनमें वर्तमान परिदृश्य अनुरूप शोध एवं अनुसंधान के साथ समृद्ध करने की आवश्यकता है। मंत्री श्री परमार ने भारतीय ज्ञान परम्परा के आलोक में अभियांत्रिकी, तकनीकी, चिकित्सा सहित हर क्षेत्र, हर विषय में सदियों से विद्यमान वैज्ञानिक दृष्टिकोण आधारित भारतीय परम्परागत ज्ञान के अनेकों उदाहरण प्रस्तुत किए। मंत्री श्री परमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने भारतीय ज्ञान परम्परा पर पुनर्चिंतन का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया है। श्री परमार ने भारतीय पुरातन न्याय प्रणाली के संदर्भ में कहा कि हमारा समाज उन कालखंडों में स्वयं अनुशासित रहने वाला समाज था। उस समय किसी के घर में ताले नहीं लगाए जाते थे, समाज स्वयं नैतिक मूल्यों की अवधारणा को आत्मसात करता था। मंत्री श्री परमार ने न्यायिक प्रणाली के परिप्रेक्ष्य में भारतीय ज्ञान परम्परा की आवश्यकता एवं महत्ता पर भी बल दिया। मंत्री श्री परमार ने कहा कि देश के हृदय प्रदेश की संज्ञा से सुशोभित हिंदी भाषी मध्यप्रदेश ने भारत की अनेकता में एकता की संस्कृति को चरितार्थ करते हुए एक नई पहल की है। प्रदेश के विश्वविद्यालयों में देश की सभी प्रमुख भाषा जैसे कन्नड़, तमिल, तेलगु, बांग्ला, असमिया आदि भारतीय भाषाएं सिखाई जाएंगी। इससे प्रदेश के विश्वविद्यालयों से पूरे देश में भाषाई सौहार्दता का संदेश जाएगा। मंत्री श्री परमार ने कहा कि भाषाएं जोड़ने का काम करती हैं, तोड़ने का नहीं, यह व्यापक संदेश प्रदेश के उच्च शैक्षणिक संस्थानों से देश भर में गुंजायमान होगा। हमारा यह नवाचार देश भर में "भाषाई एकात्मता" का संदेश देगा। मंत्री श्री परमार ने कहा कि कृतज्ञता का भाव भारतीय संस्कृति एवं विरासत है। हमारे पूर्वज सूर्य सहित समस्त प्राकृतिक ऊर्जा स्रोतों के प्रति कृतज्ञता का भाव रखते थे। पूर्वजों के ज्ञान के आधार पर स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष-2047 तक भारत सौर ऊर्जा के माध्यम से ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होकर अन्य देशों की पूर्ति करने में समर्थ देश बनेगा। साथ ही वर्ष-2047 तक खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होकर अन्य देशों का भरण-पोषण करने में भी सामर्थ्यवान देश बनेगा। हम सभी की सहभागिता से अपने पूर्वजों के ज्ञान के आधार पर पुनः विश्वमंच पर सिरमौर राष्ट्र का पुनर्निर्माण होगा। मंत्री श्री परमार ने संस्थान के कुलगुरु एवं पुस्तकालयाध्यक्ष के साझे प्रयासों से संपादित "लाइब्रेरीज इन विकसित भारत : ब्रिजिंग ट्रेडिशन, टेक्नोलॉजी एंड ट्रांसफॉर्मेशन" पुस्तक का विमोचन भी किया। मंत्री श्री परमार ने संस्थान के कुलगुरु एवं विधि विभाग के प्राध्यापक द्वारा रचित पुस्तक "प्रोटेक्शन ऑफ इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स इन साइबर स्पेस" का भी अनावरण किया। संस्थान की समाचार पत्रिका के नवीन संस्करण का भी विमोचन किया, यह संस्करण "ऑपरेशन सिंदूर" में भारतीय सेना के शौर्य पर आधारित है।  

संयुक्त अंतरिक्ष मिशन से स्टार्टअप्स के लिए बढ़ेंगे सहयोग के अवसर, पीएम मोदी का बयान

टोक्यो भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (जैक्सा) के संयुक्त अंतरिक्ष मिशन दोनों देशों के उद्योगों और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग को नई गति देंगे। यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को टोक्यो में कही।  जापान के अखबार द योमिउरी शिम्बुन को दिए साक्षात्कार में पीएम मोदी ने कहा कि ये संयुक्त मिशन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के छायायुक्त क्षेत्रों की गहन समझ विकसित करने में भी मदद करेंगे। उन्होंने कहा, “अंतरिक्ष क्षेत्र में हमारी सरकार-से-सरकार साझेदारी इसरो और जैक्सा के बीच सहयोग की ऐसी संस्कृति बना रही है, जिससे दोनों देशों के उद्योग और स्टार्टअप्स भी जुड़ रहे हैं। इससे एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार हो रहा है, जहां प्रयोगशालाओं से लॉन्चपैड तक और शोध से वास्तविक जीवन अनुप्रयोगों तक नवाचार का प्रवाह दोनों ओर से हो रहा है।” प्रधानमंत्री ने कहा, “मुझे खुशी है कि भारत और जापान चंद्रयान श्रृंखला के अगले मिशन यानी लूपेक्स (लूनर पोलर एक्सप्लोरेशन) के लिए हाथ मिला रहे हैं। यह मिशन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर स्थायी छाया वाले क्षेत्रों की हमारी समझ को और गहरा करेगा।” चंद्रयान-5 चंद्रयान श्रृंखला का पांचवां मिशन है, जिसे लूपेक्स भी कहा जाता है। इसरो और जैक्सा का यह संयुक्त मिशन वर्ष 2027-28 में जापान के एच3 रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा। इस मिशन में जैक्सा का रोवर और इसरो का लैंडर शामिल होगा, जो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में जल-बर्फ की खोज और विश्लेषण करेगा। पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि दोनों देशों की वैज्ञानिक टीमें मिलकर अंतरिक्ष विज्ञान की नई सीमाओं को छुएंगी। उन्होंने कहा, “हमारी साझेदारी न केवल अंतरिक्ष में क्षितिज का विस्तार करेगी, बल्कि धरती पर जीवन को भी बेहतर बनाएगी।” भारत की अंतरिक्ष यात्रा को प्रधानमंत्री ने “हमारे वैज्ञानिकों के संकल्प, मेहनत और नवाचार की कहानी” बताया और कहा कि अंतरिक्ष भारत के लिए अगला आयाम है। उन्होंने कहा, “चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता से लेकर हमारी अंतरग्रहीय मिशनों में प्रगति तक, भारत ने लगातार साबित किया है कि अंतरिक्ष अंतिम सीमा नहीं, बल्कि अगली सीमा है।” पीएम मोदी ने यह भी बताया कि कैसे अंतरिक्ष विज्ञान का प्रभाव हमारे दैनिक जीवन में कृषि से लेकर आपदा प्रबंधन, संचार और अन्य क्षेत्रों में दिखता है। प्रधानमंत्री मोदी 29-30 अगस्त तक जापान की दो दिवसीय यात्रा पर हैं। यह यात्रा जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के आमंत्रण पर हो रही है। यह उनका जापान का आठवां दौरा है। इससे पहले वे मई 2023 में जापान आए थे।

CBI कोर्ट का फैसला: झारखंड के पूर्व मंत्री एनोस एक्का सहित 10 लोग दोषी

रांची झारखंड में लागू जमीन संबंधी विशेष कानून 'छोटानागपुर टेनेंसी एक्ट (सीएनटी एक्ट)' के उल्लंघन से जुड़े 15 साल पुराने मामले में रांची स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने राज्य के पूर्व मंत्री एनोस एक्का, उनकी पत्नी मेनन एक्का, रांची के तत्कालीन भूमि सुधार उप समाहर्ता कार्तिक कुमार प्रभात सहित 10 लोगों को दोषी करार दिया। इसके तुरंत बाद सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अदालत ने सजा पर सुनवाई के लिए 30 अगस्त की तारीख तय की है। सिमडेगा निवासी एनोस एक्का वर्ष 2005 से 2008 के बीच अर्जुन मुंडा और बाद में मधु कोड़ा सरकार में मंत्री रहे। आरोप है कि मंत्री रहते उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए फर्जी पते का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर आदिवासी जमीन की खरीद-फरोख्त की। रांची के तत्कालीन एलआरडीसी कार्तिक कुमार प्रभात ने उनकी मदद की। प्रशासनिक अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से यह सौदे किए गए। सीबीआई की जांच में सामने आया कि मार्च 2006 से मई 2008 के बीच एनोस एक्का की पत्नी मेनन एक्का के नाम पर विभिन्न इलाकों में जमीन खरीदी गई। इसमें हिनू में 22 कट्ठा, ओरमांझी में 12 एकड़, नेवरी में 4 एकड़ और चुटिया के सिरम टोली मौजा में 9 डिसमिल भूमि शामिल है। कोर्ट ने सीबीआई के सभी आरोप सही पाए। इस मामले की सुनवाई सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक प्रियांशु सिंह ने की। अदालत में दलीलों और गवाहों के आधार पर यह साबित हुआ कि जमीन खरीदने-बेचने में सीएनटी एक्ट का खुला उल्लंघन हुआ है। गौरतलब है कि छोटानागपुर टेनेंसी एक्ट,1908 ब्रिटिश शासनकाल में लागू हुआ था। इसका उद्देश्य आदिवासी समुदाय की जमीन की सुरक्षा करना है। इस कानून के तहत आदिवासी भूमि को गैर-आदिवासियों को बेचना, गिरवी रखना या स्थानांतरित करना प्रतिबंधित है। यहां तक कि कोई आदिवासी भी अपने थाना क्षेत्र से बाहर के किसी अन्य आदिवासी को भूमि नहीं बेच सकता है।

टैरिफ विवाद पर शिवराज सिंह चौहान का बड़ा बयान– पूरे देश में देशभक्ति का जज्बा जरूरी

मैसूर  भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सबके निशाने पर आ गए हैं। भारत में स्वदेशी प्रोडक्ट्स के ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल की अपील की जा रही है। इस बीच, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी ऐसी ही अपील करते हुए ट्रंप का बिना नाम लिए उन्हें अधिनायकवादी कह दिया है। उन्होंने कहा है कि आज टैरिफ लगाया जा रहा है, ऐसे में पूरे देश में देशभक्ति की भावना प्रज्वलित होनी चाहिए और स्वदेशी उत्पाद का इस्तेमाल करना चाहिए। शिवराज सिंह चौहान ने कहा, ''मैं एक निवेदन करना चाहता हूं, विचारधारा के राजनीतिक मतभेद तो हैं, लेकिन राष्ट्रहित के मुद्दों पर पूरे देश को एक साथ खड़ा होना चाहिए। कुछ देशों के नेता अधिनायकवादी जैसा व्यवहार कर रहे हैं, जो पूरी दुनिया के लिए संकट बन गया है। ऐसे में, मैं खड़े होकर यह कहने का साहस करता हूं कि, भौतिकवाद की आग में जलती हुई मानवता को, अगर कोई शाश्वत शांति का मार्ग दिखाएगा, तो वह हमारा भारत, हमारा देश ही होगा। इसके अलावा और कोई रास्ता नहीं है, इसलिए जरूरी है कि हमारा देश मजबूत बने।'' केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा, ''हमारे देश को दुनिया के लिए एक दिशा निर्धारित करने का प्रयास करना चाहिए। इसलिए, मैं आज भारत के सामने मौजूद चुनौतियों के विस्तार में नहीं जाना चाहता, लेकिन हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक अपील की है। आज का ताजा संकट, टैरिफ लगाए जा रहे हैं, ऐसे माहौल में, पूरे देश में देशभक्ति की भावना प्रज्वलित होनी चाहिए। प्रत्येक भारतीय को यह संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने दैनिक जीवन में केवल उन्हीं उत्पादों का उपयोग करेंगे जो हमारे देश में बने हैं। यह जरूरी है कि हमारे देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो। मुझे पूरा विश्वास है कि देशवासी इस दिशा में एक नया इतिहास रचेंगे।''