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एमएलसी टिकट विवाद के बाद बिहार की सियासत में बढ़ी हलचल, दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर सवाल

पटना बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर मची सियासी हलचल के बीच राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) और इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा इस समय जबरदस्त चर्चाओं में हैं। दरअसल, चर्चाओं की सबसे बड़ी वजह यह है कि उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश वर्तमान में सरकार में मंत्री हैं, लेकिन इस बार एमएलसी चुनाव में एनडीए (NDA) गठबंधन ने उन्हें अपना उम्मीदवार नहीं बनाया है। टिकट न मिलने के बाद अब राजनीतिक गलियारों में यह बात तेजी से फैल रही है कि दीपक प्रकाश को जल्द ही अपने मंत्री पद से इस्तीफा देना होगा या उन्हें पद से हटना पड़ेगा। इन तमाम विपरीत चर्चाओं और झटकों के बावजूद उपेंद्र कुशवाहा ने रविवार को पटना में एक बड़ा राजनीतिक दावा ठोक दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि रालोमो बिहार में सत्ता की मजबूत हिस्सेदार है और आगे भी सरकार में उनकी यह हिस्सेदारी पूरी मजबूती के साथ बनी रहेगी। हालांकि, बिहार सरकार के मंत्री दीपक प्रकाश अभी बिहार विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं हैं। नियम के मुताबिक, मंत्री पद पर बने रहने के लिए उन्हें शपथ लेने के छह महीने के अंदर किसी भी सदन का सदस्य बनना जरुरी है। लेकिन अब एमएलसी चुनाव में एनडीए ने उन्हें सीट ही नहीं दी है। इसके बाद निकट भविष्य में चुनाव भी नहीं है। जाहिर है ऐसे में दीपक प्रकाश का मंत्री पद पर बने रहना मुश्किल है। पटना महाधिवेशन में विधायक आलोक कुमार सिंह बने नए प्रदेश चीफ उपेंद्र कुशवाहा रविवार को पटना के रवींद्र भवन में आयोजित पार्टी के राज्य महाधिवेशन को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने गठबंधन और सत्ता में बने रहने के दावे के साथ-साथ संगठन को लेकर भी एक बहुत बड़ी घोषणा की। उपेंद्र कुशवाहा ने सार्वजनिक मंच से पार्टी के नए बिहार प्रदेश अध्यक्ष के रूप में विधायक आलोक कुमार सिंह के नाम का औपचारिक ऐलान किया। आलोक कुमार सिंह को बिहार संगठन की कमान सौंपते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी अब नए तेवर और कलेवर के साथ सूबे के कोने-कोने में अपनी पकड़ मजबूत करेगी। स्वास्थ्य मंत्री निशांत को मिले डिप्टी सीएम की कमान:उपेंद्र कुशवाहा इसी महाधिवेशन के दौरान उपेंद्र कुशवाहा ने बिहार सरकार के आंतरिक समीकरणों को लेकर भी एक बड़ा और दिलचस्प बयान देकर राजनीतिक सरगर्मी को और बढ़ा दिया है। उपेंद्र कुशवाहा ने जेडीयू नेतृत्व को एक बड़ी सलाह देते हुए कहा कि वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री निशांत को बिहार का उपमुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए था। उन्होंने पुरजोर तरीके से पैरवी करते हुए कहा कि अगर निशांत को डिप्टी सीएम की कमान सौंपी जाती, तो यह पूरी तरह से खुद जेडीयू के राजनीतिक हित की बात होती। गौरतलब है कि स्वास्थ्य मंत्री निशांत को डिप्टी सीएम बनाए जाने की मांग बिहार की सियासत में पहली बार नहीं उठी है, बल्कि इससे पहले भी जेडीयू के ही कई जमीनी कार्यकर्ता और वरिष्ठ नेता लगातार उन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी देने की वकालत करते रहे हैं।

काशी में बदलाव की तैयारी: मीट-मांस बाजार अब शहर की सीमा से बाहर ले जाने की योजना

 वाराणसी यूपी की धार्मिक नगर वाराणसी में अब शहर के भीतर हर गली-मोहल्ले में मीट-मांस और मछली की बिक्री जल्द ही पुरानी बात हो जाएगी। दरअसल, वाराणसी नगर निगम ने शहर को व्यवस्थित और स्वच्छ रखने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। जिसके तहत अब मीट-मांस व मछली की सभी दुकानें शहर की सीमा से बाहर स्थानांतरित की जाएंगी। महापौर अशोक कुमार तिवारी की अध्यक्षता में शनिवार को मैदागिन स्थित टाउन हॉल भवन में आयोजित सदन की बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगाते हुए रूपरेखा स्पष्ट कर दी गई। बैठक में शहर के चतुर्दिक विकास, अतिक्रमण और जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। जिसमें मीट-मछली के बाजारों को शहर के बाहरी छोर पर व्यवस्थित करने का निर्णय सबसे प्रमुख रहा। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने सदन को बताया कि इस योजना के प्रथम चरण में पांच स्थानों का चयन किया जा चुका है। ये सभी स्थान शहर की बाहरी सीमाओं के करीब स्थित हैं, जिससे आम जनता को कोई असुविधा न हो। नगर आयुक्त के मुताबिक आगामी दिनों में शहर के भीतर संचालित मीट-मछली की दुकानों को रामनगर, सूजाबाद, गणेशपुर, अवलेशपुर और शिवपुर क्षेत्रों में स्थानांतरित किया जाएगा। सदन में पार्षद गुलशन अली ने यह मामला उठाते हुए कहा कि करीब एक वर्ष पूर्व मीट-मांस और मछली की दुकानों को शहर से बाहर स्थानांतरित करने का प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन उस पर अब तक प्रभावी अमल नहीं हो सका है। उन्होंने व्यवसायियों की पीड़ा को साझा करते हुए कहा कि सावन महीने में शहर की सभी दुकानें बंद करने के आदेश से मीट व्यवसायियों का रोजगार बुरी तरह प्रभावित होता है। इस पर नगर आयुक्त ने आश्वस्त किया कि शहर की बाहरी सीमा में जगह चिह्नित कर ली गई है और जल्द ही इस प्रस्ताव को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

खुफिया विवाद से हड़कंप: अमेरिकी वार्ताकारों पर निगरानी के आरोप, इज़रायल पर सवाल

नई दिल्ली  मिडल ईस्ट में चल रहे युद्ध के बीच नई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इजरायली खुफिया एजेंसियां ईरान के साथ शांति समझौते के लिए प्रयासरत अमेरिकी वार्ताकारों पर जासूसी कर रही हैं। इस घटना ने अमेरिकी खुफिया अधिकारियों में इजरायल की जासूसी गतिविधियों को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। मीडिया रिपोर्ट र्ट के अनुसार, हालिया अमेरिकी खुफिया आकलनों में इस बात पर चिंता जताई गई है कि जब तेहरान के साथ बातचीत रुकी हुई है, तब इजरायल ने वाशिंगटन की बातचीत की स्थिति के बारे में जानकारी जुटाने के प्रयास तेज कर दिए हैं। इजरायली खुफिया सेवाओं ने वार्ता में शामिल वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों की निगरानी बढ़ा दी है। इनमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुख्य वार्ताकार स्टीव विटकॉफ, पेंटागन के नीति प्रमुख एलब्रिज कोल्बी और वरिष्ठ रक्षा अधिकारी माइकल डिमिनो शामिल हैं। खुफिया इकाइयों ने यह चिंता जताई है कि इजरायली एजेंसियां वाशिंगटन और तेहरान के बीच शांति समझौते को हासिल करने के उद्देश्य से विटकॉफ और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की बातचीत को मॉनिटर करने का प्रयास कर रही थीं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और इजरायल ईरान के खिलाफ घनिष्ठ सैन्य सहयोग जारी रखे हुए हैं, लेकिन साथ ही अमेरिका तेहरान के साथ दीर्घकालिक समझौता करने के कूटनीतिक प्रयास भी कर रहा है। क्रिटिकल स्तर पर पहुंचा खतरे का स्तर अमेरिका और इजरायल ऐतिहासिक रूप से यह स्वीकार करते रहे हैं कि दोनों देश एक-दूसरे के खिलाफ खुफिया अभियान चलाते हैं, लेकिन कुछ अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इजरायल की हालिया गतिविधियों ने एक स्वीकार्य सीमा को पार कर लिया है। डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी और अन्य सैन्य खुफिया एजेंसियों द्वारा तैयार किए गए एक अलग खुफिया आकलन में हाल के हफ्तों में इजरायल द्वारा उत्पन्न काउंटर-इंटेलिजेंस खतरे को हाई से बढ़ाकर क्रिटिकल कर दिया गया है। इस रिपोर्ट में अमेरिकी सैन्य कर्मियों और सरकारी अधिकारियों पर खुफिया जानकारी इकट्ठा करने के इजरायली प्रयासों को रेखांकित किया गया है। जासूसी के लिए फोन टैपिंग रिपोर्ट के अनुसार, 2024 के अंत से इजरायली खुफिया गतिविधियों के संदिग्ध मामलों में वृद्धि हुई है, जब गाजा में सैन्य अभियानों के संचालन को लेकर वाशिंगटन और तेल अवीव के बीच तनाव पैदा हुआ था। 2025 में भी यह चिंताएं जारी रहीं, जब ट्रंप प्रशासन ने ईरान के संबंध में सैन्य और कूटनीतिक विकल्पों पर विचार किया। इन घटनाओं में यह आरोप भी शामिल है कि इजरायल में तैनात अमेरिकी रक्षा कर्मियों ने पाया कि उनके मोबाइल फोन में संचार को इंटरसेप्ट करने में सक्षम सॉफ्टवेयर गुप्त रूप से इंस्टॉल किया गया था। रिपोर्ट में 2021 की पिछले मामलों का भी जिक्र किया गया है, जिसमें कथित तौर पर इजरायली सैन्य खुफिया अधिकारियों को DIA मुख्यालय में लिसनिंग डिवाइस लगाने का प्रयास करते हुए पकड़ा गया था। एक अन्य मामले में इजरायल की शिन बेट सुरक्षा एजेंसी के सदस्यों द्वारा अमेरिकी सीक्रेट सर्विस के वाहन के अंदर लिसनिंग डिवाइस लगाने के कथित प्रयास का जिक्र है। ईरान को लेकर अमेरिका और इजरायल के अलग-अलग लक्ष्य ये चिंताएं ऐसे समय में सामने आई हैं जब ईरान को लेकर वाशिंगटन और तेल अवीव के सामरिक उद्देश्यों में स्पष्ट मतभेद दिखाई दे रहे हैं। हालांकि दोनों देश शुरुआत में इस संघर्ष के दौरान एकजुट नजर आ रहे थे, लेकिन जैसे-जैसे युद्ध आगे बढ़ा, उनकी रणनीतिक प्राथमिकताएं अलग होने लगीं रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन का ध्यान मुख्य रूप से ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने पर था ताकि बातचीत के जरिए रियायतें हासिल की जा सकें। इसके विपरीत, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार के उद्देश्य कहीं अधिक व्यापक थे, जिनमें तेहरान की क्षमताओं को और अधिक नष्ट करना और ईरानी नेतृत्व को पूरी तरह कमजोर करना शामिल था। इन खुलासों से दोनों सहयोगियों के बीच भविष्य के सैन्य समन्वय में गंभीर जटिलताएं आ सकती हैं। जानकारों का मानना है कि यदि पेंटागन इजरायली समकक्षों के साथ खुफिया जानकारी साझा करने पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने का फैसला करता है, तो इसका सीधा असर दोनों देशों के सैन्य संबंधों पर पड़ेगा।

लोकतंत्र में अधिकार या अजीब नाम? अनिल विज ने CJP पर किया तीखा वार

चंडीगढ़ हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को लेकर तीखा बयान दिया है. उन्होंने इस पार्टी के पदाधिकारियों को नसीहत दी है कि लोकतंत्र में सबको संघर्ष करने का पूरा अधिकार है, लेकिन उन्हें अपना यह नाम बदल लेना चाहिए. विज के मुताबिक, 'कॉकरोच एक बेहद गंदा कीड़ा होता है, जिसे देखते ही छोटा बच्चा भी चप्पल से कुचल देता है'. इसके साथ ही उन्होंने विधानसभा सत्र के मुद्दे पर कांग्रेस को भी घेरा है. दरअसल, अनिल विज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट लिखा. जब मीडिया ने उनसे इस पोस्ट के बारे में पूछा, तो उन्होंने अपने शब्दों को दोबारा दोहराया. विज ने साफ कहा कि प्रजातंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने की आजादी मिली हुई है. इस हक का इस्तेमाल जरूर होना चाहिए, मगर 'कॉकरोच' जैसे अजीब नाम के साथ राजनीति करना बिल्कुल ठीक नहीं है. 'बहस से भागती है कांग्रेस पार्टी' इसके बाद अनिल विज ने हरियाणा के नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा के उन आरोपों का भी करारा जवाब दिया, जिसमें उन्होंने विधानसभा का सत्र न बुलाने की बात कही थी. विज ने पलटवार करते हुए कहा कि जब भी सदन की कार्यवाही शुरू होती है, कांग्रेस के नेता उसमें गंभीरता से हिस्सा नहीं लेते. जैसे ही सरकार के मंत्री या मुख्यमंत्री उनके सवालों का जवाब देना शुरू करते हैं, कांग्रेस वाले बीच में ही सदन छोड़कर बाहर चले जाते हैं. इतना ही नहीं उन्होंने कांग्रेस की राजनीति पर तंज कसते हुए कहा कि विपक्षी दल लोकतंत्र का मजाक उड़ा रहा है. उनके पास जनता के जरूरी मुद्दों पर चर्चा करने के लिए कोई ठोस बात नहीं होती. कांग्रेस के नेताओं को सिर्फ अखबारों की हेडलाइंस में बने रहने का शौक है. वे बस यही चाहते हैं कि उनका नाम मीडिया में चमकता रहे, भले ही खबर उनके पक्ष में हो या विरोध में. वहीं, दीपेंद्र सिंह हुड्डा की गिरफ्तारी से जुड़े सवाल पर भी मंत्री ने खुलकर बात रखी. उन्होंने साफ किया कि सरकार किसी को भी जानबूझकर निशाना नहीं बना रही है. राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखना जांच एजेंसियों की जिम्मेदारी होती है. अंत में उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि विपक्ष के इसी खराब बर्ताव की वजह से हरियाणा की जनता बार-बार हमारी पार्टी को ही चुनकर सत्ता में लाती है.

डेब्यूटेंट मानव सुथार का कमाल, अफगानिस्तान के 3 बड़े विकेट झटके

  मुल्‍लांपुर मुल्‍लांपुर के महाराजा यादवेंद्र सिंह स्टेडियम में भारत और अफगानिस्‍तान के बीच खेले जा रहे इकलौते टेस्‍ट के दूसरे दिन का खेल समाप्‍त हो गया है। यह दिन भी पूरी तरह भारत के नाम रहा। पहले भारतीय बल्‍लेबाजों ने गदर काटा, फिर डेब्यूटेंट मानव सुथार ने गेंद से अफगान टीम के होश उड़ा दिए। दिन का खेल समाप्‍त होने तक अफगानिस्‍तान ने पहली पारी में 5 विकेट खोकर 113 रन बनाए। अफगानिस्‍तान टीम अभी भी 451 रन पीछे है। शतक से चूके पंत पहले दिन का खेल खत्‍म होने तक भारतीय टीम का स्‍कोर 368/3 था। शुभमन गिल (103) शतक और ऋषभ पंत (50) फिफ्टी लगाकर नाबाद थे। दूसरे दिन गिल के रूप में पहला विकेट गिरा। भारतीय कप्‍तान ने 117 गेंदों पर 126 रन की पारी खेली। ध्रुव जुरेल (19) सस्‍ते में आउट हुए। पंत शतक से चूक गए और 81 रन बना पाए। सिराज की तूफानी बल्‍लेबाजी डेब्‍यू मैच खेल रहे मानव सुथार ने 41 गेंदों पर 28 और मोहम्‍मद सिराज ने 12 गेंदों पर 22 रन की पारी खेली। वॉशिंगटन सुंदर (52) अर्धशतक लगाकर नाबाद रहे। अफगानिस्‍तान की ओर से मोहम्मद सलीम सफी ने 6 विकेट चटकाए। भारतीय टीम ने पारी 564/8 पर घोषित कर दी। सुथार ने चटकाए 3 विकेट पहली पारी में बल्‍लेबाजी करने उतरी अफगानिस्‍तान की कमर मानव सुथार ने तोड़ दी और 3 विकेट चटकाए। वहीं प्रसिद्ध कृष्‍णा को भी 2 सफलताएं मिलीं। अपने कोटे के पहले और पारी के 5वें ओवर में सुथार ने अब्‍दुल मलिक (16) को सिराज के हाथों कैच आउट कराया। इसके अलावा सुथार ने रहमानुल्लाह गुरबाज (12) और अफसर जजई (3) को अपने जाल में फंसाया। कृष्‍णा ने सेदिकुल्लाह अटल (17) को बोल्‍ड और कप्‍तान हशमतुल्लाह शाहिदी (20) को LBW आउट किया। दूसरे दिन स्‍टंप तक रहमत शाह 81 गेंदों पर 43 रन बनाकर नाबाद हैं।  

सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस विस्तार पर संकट, कैबिनेट मंजूरी के इंतजार में रुकी योजना

रांची  झारखंड में शिक्षा व्यवस्था को नई ऊंचाई देने की सरकार की महत्वाकांक्षी योजना फिलहाल वित्तीय संकट में फंस गई है। राज्य में 100 नए सीएम स्कूल आफ एक्सीलेंस (एसओई) खोलने की तैयारी पूरी होने के बावजूद करीब 400 करोड़ रुपये की जरूरत के कारण योजना आगे नहीं बढ़ पा रही है मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जनवरी 2026 में ही इस प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी थी, लेकिन अब तक इसे कैबिनेट की स्वीकृति नहीं मिल सकी है। ऐसे में इन स्कूलों में शैक्षणिक सत्र 2027-28 से पढ़ाई शुरू होने की संभावना नहीं है। शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी 24 जिलों में 100 नए सीएम स्कूल आफ एक्सीलेंस के लिए विद्यालयों का चयन कर लिया है। इन स्कूलों को सीबीएसइ पैटर्न पर विकसित किया जाना है। हालांकि योजना को धरातल पर उतारने के लिए अभी कैबिनेट की मंजूरी, वित्तीय स्वीकृति, सीबीएसई संबद्धता, भवन और अन्य आधारभूत संरचनाओं का विकास तथा शिक्षकों की व्यवस्था जैसे कई महत्वपूर्ण चरण बाकी हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार प्रस्ताव को कैबिनेट तक पहुंचने में अभी दो से तीन माह का समय लग सकता है। इसके बाद वित्तीय स्वीकृति मिलने और निर्माण व अन्य प्रक्रियाओं को पूरा करने में कम से कम एक वर्ष का समय लगेगा। यही वजह है कि अगले शैक्षणिक सत्र से इन विद्यालयों का संचालन संभव नहीं दिख रहा है। रांची में खुलेंगे सबसे ज्यादा 10 नए एसओई 100 नए सीएम स्कूल आफ एक्सीलेंस में रांची जिले को सबसे अधिक 10 विद्यालय मिले हैं। वर्तमान में जिले में पांच एसओई संचालित हैं। इसके अलावा धनबाद, गिरिडीह और पलामू में आठ-आठ, गढ़वा और पूर्वी सिंहभूम में सात-सात, बोकारो, हजारीबाग और पश्चिमी सिंहभूम में छह-छह तथा देवघर में पांच नए विद्यालय प्रस्तावित हैं। एक स्कूल पर तीन से पांच करोड़ रुपये खर्च का अनुमान शिक्षा विभाग के अनुमान के अनुसार एक सीएम स्कूल आफ एक्सीलेंस को विकसित करने में औसतन तीन से पांच करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें भवन उन्नयन, स्मार्ट क्लासरूम, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, खेल सुविधाएं और अन्य बुनियादी ढांचे का विकास शामिल है। 100 नए विद्यालयों पर कुल खर्च करीब 400 करोड़ रुपये आंका गया है। 80 से बढ़कर 180 होगी एसओई की संख्या राज्य में वर्तमान में 80 एसओई संचालित हैं, जिन्हें सीबीएसइ बोर्ड से संबद्धता प्राप्त है। इनके बेहतर शैक्षणिक परिणामों को देखते हुए सरकार इनकी संख्या बढ़ाकर 180 करने की योजना पर काम कर रही है। हालांकि वित्तीय स्वीकृति मिलने तक 100 नए विद्यालयों का सपना कागजों से जमीन पर उतरने का इंतजार करता रहेगा।  

पुलिस से बचने के लिए कपड़े की दुकान में छिपा नेता, तलाशी के बाद गिरफ्तारी

पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक नेता की गिरफ्तारी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. पुलिस से बचने के लिए टीएमसी नेता एक कपड़े की दुकान के स्टोररूम में साड़ियों के ढेर के नीचे छिप गया था, लेकिन वह पुलिस की नजरों से नहीं बच सका. पुलिस ने साड़ियों के बंडल हटाकर नेता को खोज निकाला और गिरफ्तार कर लिया. यह घटना हावड़ा के उदयनारायणपुर थाना क्षेत्र के बिलासपुर इलाके की बताई जा रही है. गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान ब्रह्मानंद चक्रवर्ती के रूप में हुई है, जो तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय नेता बताए जाते हैं. स्थानीय लोगों ने उन पर सरकारी आवास योजना के फंड में कथित तौर पर 'कट मनी' लेने और जबरन वसूली जैसे आरोप लगाए थे. शिकायत मिलने के बाद पुलिस ब्रह्मानंद की तलाश में पहुंची थी. ब्रह्मानंद चक्रवर्ती गिरफ्तारी से बचने के लिए एक कपड़े की दुकान के भीतर साड़ियों के बड़े ढेर के नीचे छिप गए. पुलिस ने जब तलाशी अभियान चलाया तो उन्हें संदेह हुआ और साड़ियों का ढेर हटाया गया. ब्रह्मानंद चक्रवर्ती साड़ियों के ढेर के नीचे छिपे मिले. पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया. इस पूरी कार्रवाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. सूत्रों के मुताबिक, ब्रह्मानंद चक्रवर्ती पर 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद हुई राजनीतिक हिंसा से जुड़े आरोप भी हैं. पुलिस को इस मामले में भी ब्रह्मानंद चक्रवर्ती की तलाश कर रही थी. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि स्थानीय लोगों की शिकायतों के आधार पर ब्रह्मानंद चक्रवर्ती के खिलाफ कट मनी लेने के आरोपों की जांच जारी है. उनके खिलाफ 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद हुई राजनीतिक हिंसा के मामले से जुड़े सभी आरोपों की पड़ताल भी की जा रही है.  

“माफ करना ही सबसे बड़ी जीत है”ऑस्कर वाइल्ड का गहरा संदेश

अक्सर हम सोचते हैं कि माफ करना एक कमजोरी है, लेकिन ऑस्कर वाइल्ड इसे एक चालाकी भरी जीत की तरह देखते हैं. जब कोई आपका बुरा करता है, तो वह उम्मीद करता है कि आप भी गुस्सा करेंगे, बदला लेंगे या दुखी होंगे. जब आप ऐसा नहीं करते और उसे माफ कर देते हैं, तो आप उसका पूरा गेम खराब कर देते हैं. यह उन्हें परेशान क्यों करता है? उन्हें कोई भाव नहीं मिलता: दुश्मन चाहता है कि आप उसे गंभीरता से लें. जब आप उसे माफ कर देते हैं, तो आप बिना कुछ कहे यह जता देते हैं कि वह आपके लिए इतना महत्वपूर्ण ही नहीं है कि आप उस पर अपना समय बर्बाद करें. आप शांत रहते हैं, वे नहीं: जब आप माफी की राह चुनते हैं, तो आप अपनी मानसिक शांति बनाए रखते हैं. दूसरी ओर, आपका दुश्मन इस बात से अंदर ही अंदर जलता रहता है कि उसे आपकी तरफ से वह प्रतिक्रिया नहीं मिली जो वह चाहता था. आपकी जीत: दुश्मन को हराने का मतलब सिर्फ उसे लड़कर पछाड़ना नहीं होता.  अपनी गरिमा (Dignity) बनाए रखना और नकारात्मकता को खुद से दूर कर देना ही आपकी सबसे बड़ी जीत है. निष्कर्ष: संक्षेप में, वाइल्ड कहना चाहते हैं कि अपनी ऊर्जा को नफरत में खर्च करने के बजाय उसे माफ कर आगे बढ़ जाना, दुश्मन को सबसे ज्यादा चुभता है. यह उन्हें यह अहसास कराता है कि आप उनसे कहीं अधिक बेहतर और मजबूत इंसान हैं. ऑस्कर वाइल्ड (Oscar Wilde) कौन थे? ऑस्कर वाइल्ड (1854–1900) आयरलैंड के एक महान कवि, नाटककार और कहानीकार थे. वे 19वीं सदी के सबसे चर्चित लेखकों में से एक माने जाते हैं.  वे अपनी हाजिरजवाबी (Wit) और व्यंग्यपूर्ण (Sarcastic) शैली के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं.  वे अपनी बातों को बहुत कम शब्दों में लेकिन गहरा अर्थ छिपाकर कहने में माहिर थे, जिससे वे आज भी साहित्य की दुनिया में बहुत पसंद किए जाते हैं.

खेल नर्सरियों पर गहन पड़ताल, हिसार में कोचों की भूमिका भी जांच में शामिल

हिसार खिलाड़ियों को निखारने और उन्हें खेल की बारीकियों से परिचित कराने के उद्देश्य से स्थापित खेल नर्सरियों की अब गहन पड़ताल शुरू हो गई है। खेल विभाग ने यह सुनिश्चित करने के लिए कदम बढ़ाया है कि कहीं इन नर्सरियों की आड़ में केवल औपचारिकताएं ही तो पूरी नहीं की जा रहीं। इसी क्रम में हिसार जिले की 169 खेल नर्सरियों की जांच शुरू कर दी गई है। जिला खेल अधिकारी नरेश सैनी के नेतृत्व में गठित टीम ने जांच का जिम्मा संभाल लिया है। जांच को निष्पक्ष और प्रभावी बनाने के लिए इसमें विभिन्न खेलों के अनुभवी कोचों को शामिल किया गया है, ताकि हर नर्सरी का मूल्यांकन उसके खेल विशेष के मानकों पर किया जा सके। जांच शुरू होते ही मचा हलचल गत सप्ताह जैसे ही जांच प्रक्रिया शुरू हुई, नर्सरियों में कार्यरत कोचों के बीच हलचल तेज हो गई। एक-दूसरे से संपर्क साधकर वे जांच के मानकों और पूछे गए बिंदुओं की जानकारी जुटाने में लगे हैं। जिन नर्सरियों की जांच पूरी हो चुकी है, वहां के कोचों से अन्य लोग विस्तार से जानकारी ले रहे हैं। यह पहला अवसर नहीं है जब खेल नर्सरियों की जांच की जा रही है। पूर्व वर्षों में हुई जांच में भी कई अनियमितताएं सामने आई थीं, जिनकी रिपोर्ट निदेशालय को सौंपी गई थी और कई खेल नर्सरियों पर निदेशायल ने संज्ञान भी लिया था। पुराने इसी अनुभव के आधार पर इस बार जांच को और अधिक गहराई से अंजाम दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य, प्रतिभा को मिले सही मंच सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि उभरती खेल प्रतिभाओं को वे सभी सुविधाएं मिलें, जिनके लिए ये नर्सरियां स्थापित की गई हैं। यदि खिलाड़ियों को सही प्रशिक्षण और संसाधन मिलते हैं, तो वे प्रदेश और देश के लिए पदक जीतकर गौरव बढ़ा सकते हैं। हिसार के जिला खेल अधिकारी नरेश सैनी ने कहा कि निदेशालय के दिशा-निर्देश पर खेल नर्सरियों की जांच की जा रही है। पिछले करीब एक सप्ताह से टीमें लगातार निरीक्षण कर रही हैं। जांच दल में विभिन्न खेलों के कोचों को शामिल किया गया है।  

झाड़ू से जुड़े वास्तु नियम: घर में सुख-समृद्धि के आसान उपाय

वास्तु शास्त्र के अनुसार, झाड़ू न केवल सफाई का एक उपकरण है, बल्कि इसे माता लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है. इसलिए, घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए झाड़ू का उपयोग करते समय कुछ महत्वपूर्ण वास्तु नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है.   झाड़ू लगाने की सही दिशा और तरीका वास्तु के अनुसार, घर में झाड़ू लगाने की प्रक्रिया का विशेष महत्व है. सफाई हमेशा घर के मुख्य द्वार से शुरू करके घर के भीतरी हिस्सों (जैसे रसोई, बेडरूम, और अन्य कमरों) की ओर होनी चाहिए.  माना जाता है कि प्रवेश द्वार सकारात्मक ऊर्जा का प्रमुख स्रोत होता है, इसलिए वहां से सफाई शुरू करने से घर में खुशहाली और सकारात्मकता का प्रवेश होता है. इसके विपरीत, घर के अंदर से बाहर की ओर झाड़ू लगाना वर्जित माना गया है, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि इससे घर की लक्ष्मी बाहर चली जाती है और नकारात्मकता का प्रभाव बढ़ सकता है. झाड़ू लगाने का उचित समय वास्तु शास्त्र में झाड़ू लगाने के लिए सुबह का समय, विशेषकर ब्रह्म मुहूर्त, सबसे शुभ और उत्तम माना गया है. शाम के समय या सूर्यास्त के बाद झाड़ू लगाना शुभ नहीं माना जाता. यदि किसी वजह से शाम को झाड़ू लगानी भी पड़े, तो यह ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि घर का कचरा उस समय बाहर न फेंका जाए, क्योंकि शाम के समय कचरा बाहर फेंकने से आर्थिक हानि की संभावना बढ़ जाती है. ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें और सावधानियां सफाई करने के बाद कचरे को घर में लंबे समय तक जमा करके नहीं रखना चाहिए, इसे तुरंत बाहर फेंक देना चाहिए, क्योंकि जमा कचरा दरिद्रता को आमंत्रित करता है. झाड़ू का अपमान कभी नहीं करना चाहिए; इसे कभी भी पैर न लगाएं. न ही इसे घर में कहीं भी खुले में खड़ा रखें. वास्तु नियमों के अनुसार, झाड़ू को हमेशा छिपाकर या किसी ऐसी जगह पर रखना चाहिए जहां बाहर से आने वाले लोगों की नजर उस पर न पड़े. जब भी आपको नई झाड़ू का उपयोग शुरू करना हो, तो शनिवार का दिन इसके लिए बहुत शुभ माना जाता है.