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चाणक्य नीति: जीवन को सफल बनाने वाले व्यवहारिक सूत्र और कालजयी सीख

आचार्य चाणक्य द्वारा रचित चाणक्य नीति एक ऐसा ग्रंथ है जिसमें जीवन को सफल, सुरक्षित और संतुलित बनाने के लिए व्यवहारिक नियम और सिद्धांत बताए गए हैं. इसे नीतिशास्त्र भी कहा जाता है, यानी जीवन को सही दिशा देने वाली नीतियां. चाणक्य नीति में व्यक्ति के व्यवहार, रिश्ते, धन, शिक्षा, राजनीति और जीवन के निर्णयों से जुड़े ऐसे सूत्र दिए गए हैं, जो आज भी उतने ही प्रासंगिक माने जाते हैं जितने प्राचीन समय में थे. यह ग्रंथ केवल राजा या शासकों के लिए नहीं, बल्कि आम इंसान के जीवन को बेहतर बनाने के लिए भी लिखा गया है. चाणक्य नीति यह भी सिखाती है कि जीवन में कोई भी व्यक्ति छोटा या बड़ा नहीं होता, बल्कि उसकी सोच और कर्म ही उसे महान बनाते हैं. धूल का उदाहरण और जीवन का संदेश चाणक्य नीति के मुताबिक, राह में पड़ी धूल का कोई महत्व नहीं होता है, लेकिन वही धूल हमें जीवन का गहरा संदेश देती है. जब उस पर पैर रखा जाता है, तो वह उड़कर जवाब देती है, और यदि आंख में चली जाए तो पीड़ा का कारण बनती है. इसका मतलब है कि असल जिंदगी में हमें भी कभी को उसकी स्थिति देखकर कमजोर नहीं समझना चाहिए. क्योंकि परिस्थितियां बदलते देर नहीं लगती है. जो आज साधारण दिख रहा है, वही कल शक्तिशाली बन सकता है. अन्याय और आत्मसम्मान की सीख चाणक्य नीति के अनुसार, इसी तरह यदि कोई व्यक्ति खुद को कमजोर मानकर अन्याय सहता रहता है, तो वह अपनी ही शक्ति को कम आंकता है. अन्याय के खिलाफ खड़ा होना ही सच्ची शक्ति है. चाणक्य नीति की सीख बलवान के लिए सीख- अहंकार से दूर रहें और किसी को छोटा न समझें, क्योंकि हर व्यक्ति में प्रतिक्रिया देने और परिस्थितियों को बदलने की क्षमता होती है. निर्बल के लिए सीख- अपनी कमजोरी को भाग्य न मानें. जब आप अन्याय का विरोध करना सीख लेते हैं, तभी आप वास्तव में शक्तिशाली बनते हैं.

बाइपोलर डिसऑर्डर से जूझते रहे हनी सिंह, बोले- 7 साल घर में खुद को बंद रखा

बॉलीवुड के मशहूर सिंगर और रैपर यो यो हनी सिंह ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है. उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी अपनी लड़ाई के दौरान सालों तक भारी दवाइयां लेने की वजह से उनके बाल बहुत ज्यादा झड़ गए थे, जिससे वे पूरी तरह से गंजे हो गए. सिंगर ने बताया कि कई सालों तक बाइपोलर डिसऑर्डर और नशे की लत से जूझने के बाद अब वे विग पहनते हैं. रैपर ने यह खुलासा हाल ही में ABtalks पॉडकास्ट में किया, जहां उन्होंने अपनी जिंदगी के सबसे मुश्किल दौर के बारे में खुलकर बात की. उन्होंने यह भी बताया कि सालों तक लोगों की नजरों से दूर रहने के दौरान उनके इलाज का उनके शरीर पर क्या असर पड़ा. हनी सिंह के बाल कैसे झड़ गए? चकाचौंध से दूर होने से पहले, हनी सिंह इंडियन पॉप म्यूजिक के सबसे बड़े नामों में से एक थे. लेकिन शोहरत के पीछे, सिंगर ने बताया कि वे मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे थे.  पॉडकास्ट के दौरान, हनी सिंह ने बताया कि बाइपोलर डिसऑर्डर के इलाज के दौरान सालों तक दवाइयां लेने का उनके शरीर पर क्या असर पड़ा. सिंगर ने कहा, 'मैं सात सालों तक भारी दवाइयां ले रहा था. इसकी वजह से मेरा वजन 105 किलो हो गया था, और मेरे सारे बाल झड़ गए थे. ये नकली बाल हैं, मैं पूरी तरह से गंजा हूं. ये केवल एक विग है.' ठीक होने में सालों लग गए हनी सिंह ने यह भी बताया कि ठीक होना लोगों की सोच से कहीं ज्यादा मुश्किल था. सिंगर के मुताबिक, 2014 में नशा छोड़ देने के बाद भी, उन्हें मानसिक रूप से फिर से स्थिर महसूस करने में कई साल लग गए. उन्होंने कहा, 'आपको यकीन नहीं होगा, लेकिन 2014 में नशा छोड़ देने के बाद भी, मुझे ठीक होने में सात से आठ साल लग गए.' सिंगर ने बताया कि उनकी हालत इतनी गंभीर हो गई थी कि उन्होंने सालों तक खुद को बाहरी दुनिया से पूरी तरह से काट लिया था. रैपर ने कहा, 'फिर मैंने अपनी बहन को बुलाया और उसे बताया कि मेरे साथ कुछ अजीब हो रहा है. उसने कहा कि मुझे फिर भी शो करना होगा. दो गाने गाने के बाद मैं बीच में ही शो छोड़कर चला गया. उसके बाद, मैं सात सालों तक अपने घर के अंदर ही रहा. मैं नहीं चाहता था कि मेरे फैंस मुझे उस हालत में देखें. मैंने खुद को अंदर बंद कर लिया और अपने बचपन के दोस्तों से भी नहीं मिला. कोई बातचीत नहीं, कोई फोन कॉल नहीं, कोई टीवी नहीं, कोई इंटरनेट नहीं. लोग सोचते थे कि कोई शैतान मुझसे बात कर रहा है.' सिंगर ने यह भी बताया कि डॉक्टरों और दवाइयों को बदलने से आखिरकार उन्हें ठीक होने में मदद मिली. उन्होंने कहा, 'मैं सात सालों से एक ही दवा ले रहा था, फिर भी ठीक नहीं हो पा रहा था. लेकिन जब आखिरकार मैंने अपने घर से बाहर निकलने का फैसला किया, तो मैंने अपना डॉक्टर भी बदल लिया. उन्होंने कुछ दवाएं बदलीं, कुछ नई दवाएं शुरू कीं, और मुख्य दवा की डोज को एडजस्ट किया. चार हफ्तों के अंदर ही मैं ठीक होने लगा. सिर्फ चार हफ्तों में मैंने लोगों से मिलना-जुलना और जिंदगी का सामना करना फिर से शुरू कर दिया.'

हरियाणा गेस्ट टीचर्स को बड़ी राहत, हाई कोर्ट ने नियमितीकरण का दिया आदेश

चंडीगढ़  हरियाणा के सरकारी स्कूलों में करीब दो दशक से गेस्ट फैकल्टी शिक्षक और व्याख्याता के तौर पर सेवाएं दे रहे शिक्षकों को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। जस्टिस संदीप मोदगिल की पीठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वर्ष 2014 की नियमितीकरण नीति के तहत याचिकाकर्ताओं की सेवाओं को नियमित किया जाए और उन्हें सभी परिणामी सेवा एवं सेवानिवृत्ति लाभ दिए जाएं। मामला सुखविंदर सिंह एवं अन्य द्वारा दायर याचिका से जुड़ा था, जिसमें उन्होंने हरियाणा सरकार की 18 जून 2014 की नियमितीकरण नीति के आधार पर अपनी सेवाएं नियमित करने की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं ने क्या कहा? याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्हें वर्ष 2005-06 में सरकारी स्कूलों में रिक्त पदों के विरुद्ध गेस्ट फैकल्टी शिक्षक और व्याख्याता के रूप में नियुक्त किया गया था। नियुक्ति प्रक्रिया विज्ञापन जारी करने, चयन समितियों के गठन, आवेदनों की जांच और मेरिट सूची तैयार करने के बाद पूरी की गई थी। राज्य सरकार ने अदालत में दलील दी कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति केवल अस्थायी व्यवस्था के तौर पर की गई थी और वे नियमित भर्ती प्रक्रिया के तहत नियुक्त नहीं हुए थे, इसलिए वे नियमितीकरण के पात्र नहीं हैं। हालांकि हाई कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि यदि सरकार की दलील स्वीकार कर ली जाए तो नियमितीकरण नीति का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा, क्योंकि संविदा कर्मचारी स्वाभाविक रूप से नियमित भर्ती प्रक्रिया से बाहर ही नियुक्त होते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्तियां “बैकडोर एंट्री” या गुप्त तरीके से नहीं हुई थीं, बल्कि सार्वजनिक प्रक्रिया के तहत योग्य उम्मीदवारों का चयन किया गया था। हाई कोर्ट ने क्या कहा? हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार स्वयं मान चुकी है कि स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी के कारण इन शिक्षकों को नियुक्त किया गया था और लगभग 20 वर्षों तक उनकी सेवाएं लगातार ली जाती रहीं। अदालत ने टिप्पणी की कि यदि इतने लंबे समय तक शिक्षकों की सेवाएं ली गईं तो उन्हें केवल “स्टॉप गैप अरेंजमेंट” बताना पूरी तरह आत्मविरोधी और अनुचित है। कोर्ट ने अपने फैसले में शिक्षकों की भूमिका पर भी विस्तृत टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि शिक्षक समाज और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला होते हैं तथा उन्हें मनमाने ढंग से “स्पेयर” की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने कहा कि लगातार 20 वर्षों तक संविदा पर कार्य लेने के बाद राज्य अब यह नहीं कह सकता कि ये केवल अस्थायी कर्मचारी थे। फैसले में सुप्रीम कोर्ट के “मदन सिंह बनाम हरियाणा राज्य” मामले का भी उल्लेख किया गया, जिसमें सर्वोच्च अदालत ने 2014 की नियमितीकरण नीतियों की वैधता को बरकरार रखा था। हाई कोर्ट ने कहा कि अब नीति की वैधता पर विवाद समाप्त हो चुका है और याचिकाकर्ता नीति की शर्तों को पर्याप्त रूप से पूरा करते हैं। अंततः हाई कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए हरियाणा सरकार को निर्देश दिया कि दो महीने के भीतर याचिकाकर्ताओं की सेवाओं को नियमित किया जाए और उन्हें सभी सेवा एवं रिटायरल लाभ प्रदान किए जाएं। गेस्ट टीचर एसोसिएशन के नेता रघु वत्स ने बताया कि राज्य में इस समय 12,700 के करीब गेस्ट टीचर लगभग 20 साल से सेवा दे रहे है। कोर्ट के इस फैसले से उनकी वर्षों की लड़ाई सफल रही है और उनको एक टीचर के तौर पर सम्मान मिला है।  

भारत का भविष्य है वैभव’, लेकिन टेस्ट से पहले फर्स्ट क्लास क्रिकेट जरूरी: गांगुली

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट में इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा जिस युवा खिलाड़ी की हो रही है, वह हैं 15 साल के वैभव सूर्यवंशी. अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से क्रिकेट जगत को हैरान करने वाले इस युवा बल्लेबाज को लेकर अब पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने बड़ा बयान दिया है.  मीडिया से  इंटरव्यू में गांगुली ने साफ कहा कि वैभव अभी टेस्ट क्रिकेट के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं. उन्होंने BCCI और चयनकर्ताओं को संकेत देते हुए कहा कि इतनी कम उम्र में प्रतिभा जरूर दिख रही है, लेकिन लाल गेंद के क्रिकेट में जगह बनाने के लिए फर्स्ट क्लास क्रिकेट में लगातार प्रदर्शन जरूरी है. गांगुली ने कहा- T20 क्रिकेट में उसे तुरंत शामिल किया जा सकता है, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में नहीं. उसे पहले फर्स्ट क्लास क्रिकेट में ज्यादा रन बनाने होंगे. हालांकि इस समय वह बेहद प्रतिभाशाली खिलाड़ी है. 15 साल का लड़का जिस तरह दुनिया के गेंदबाजों के खिलाफ बल्लेबाजी कर रहा है, वह अविश्वसनीय है. वह भारत का भविष्य है. दादा ने वैभव की बल्लेबाजी की जमकर तारीफ भी की. उनका मानना है कि इतनी कम उम्र में जिस आत्मविश्वास और निडर अंदाज के साथ वह खेल रहे हैं, वह भारतीय क्रिकेट के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है. क्या आक‍िब को मिलनी चाहिए जगह, गांगुली की दो टूक इंटरव्यू में गांगुली ने घरेलू क्रिकेट और चयन प्रक्रिया पर भी अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि रणजी ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन करने वाले आकिब नबी को अफगानिस्तान सीरीज के लिए भारतीय टीम में जगह मिलनी चाहिए थी. गांगुली ने कहा कि नबी ने रणजी सीजन में बेहतरीन गेंदबाजी की थी. हालांकि उन्होंने युवा तेज गेंदबाज प्रिंस यादव के चयन का भी समर्थन किया. गांगुली के मुताबिक- प्रिंस यादव बेहद तेज गेंदबाज हैं और जब आपके पास रफ्तार होती है तो आपको ज्यादा समय तक फर्स्ट क्लास क्रिकेट में इंतजार नहीं करवाना चाहिए. मुझे लगता है कि दोनों खिलाड़ियों को मौका मिलना चाहिए था.” गांगुली ने आधुनिक क्रिकेट के बदलते स्वरूप पर भी खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि उनकी पीढ़ी ने क्रिकेट को अलग तरीके से सीखा था और उस दौर में किसी ने नहीं सोचा था कि T20 क्रिकेट इतना बड़ा फॉर्मेट बन जाएगा. उन्होंने र‍िकी पोंट‍िंग, कुमार संगकारा,  जो रूट, एल‍िस्टेयर कुक  जैसे खिलाड़ियों का उदाहरण देते हुए कहा कि समय के साथ क्रिकेट और खिलाड़ियों की सोच दोनों बदलती रहती है. पूर्व कप्तान ने कहा कि T20 क्रिकेट अब हमेशा रहने वाला है और यह लगातार ऐसे खिलाड़ियों को पैदा करेगा जो आक्रामक क्रिकेट खेलेंगे और गेंद को सीधे स्टैंड्स में पहुंचाएंगे.

फिश मंडी से लेकर एक्वा पार्क तक: यूपी सरकार की नई योजना से बढ़ेगा मत्स्य उत्पादन और कारोबार

 लखनऊ प्रदेश में मत्स्य उत्पादन और उससे जुड़े कारोबार को नई गति देने के लिए सरकार ने स्टेट आफ आर्ट होल सेल फिश मंडी, एकीकृत एक्वा पार्क और मत्स्य प्रसंस्करण सेंटर स्थापना की योजना को धरातल पर उतारने की कोशिश शुरू कर दी है। इसके तहत पहले चरण में गोरखपुर और मुरादाबाद में होल सेल मत्स्य मंडी स्थापित की जाएंगी। वहीं गोरखपुर में एकीकृत एक्वा पार्क और मत्स्य प्रसंस्करण सेंटर भी बनाया जाएगा। मत्स्य विभाग ने योजना के संचालन के दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। योजना के तहत मुरादाबाद में 4.84 एकड़ भूमि होलसेल फिश मंडी का निर्माण किया जाएगा। वहीं गोरखपुर में मंडी के साथ एक्वा पार्क व प्रसंस्करण इकाई के लिए 27 एकड़ भूमि चिह्नित की गई है। इनमें मत्स्य उत्पादन, कोल्ड स्टोरेज, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, विपणन और परिवहन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके साथ ही जल पर्यटन, मनोरंजन और जलीय कृषि आधारित गतिविधियों को भी बढ़ावा देने की तैयारी है। अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 के तहत फिश मंडी निर्माण को 24-24 करोड़ रुपये, एक्वा पार्क के लिए 40 करोड़ और मत्स्य प्रसंस्करण इकाई के लिए 12 करोड़ रुपये का प्रविधान किया गया है। इनका संचालन निजी सार्वजनिक सहभागिता (पीपीपी) मोड पर किया जाएग। इसके लिए इच्छुक व्यक्तियों-संस्थाओं से अभिरुचि की अभिव्यक्ति (ईओआइ) आमंत्रित किए जाएंगे। योजना के संचालन के लिए अपर मुख्य सचिव-प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में एक राज्य स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा। विभाग के अनुसार, योजना मत्स्य पालन की पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करेगी। मत्स्य पालकों को आधुनिक बाजार, बेहतर भंडारण और प्रसंस्करण सुविधाएं मिलेंगी। अभी किसानों और कारोबारियों को संगठित बाजार और आधुनिक सुविधाओं के अभाव में नुकसान उठाना पड़ता है। नई व्यवस्था से उन्हें बेहतर कीमत मिल सकेगी और बिचौलियाें पर भी अंकुश लगेगा। मत्स्य पालन से जुड़े युवाओं, व्यापारियों और उद्यमियों को आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का लाभ मिलेगा। प्रदेश में मत्स्य उत्पादन और निर्यात क्षमता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।  

NHM कर्मचारियों के नियमितीकरण पर हाई कोर्ट के फैसले के बाद आशा वर्कर यूनियन सक्रिय

 चंडीगढ़ सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए हरियाणा की हजारों आशा वर्करों ने अपनी नौकरी पक्की करने का दबाव बढ़ा दिया है। राज्य में 21 साल से आशा वर्कर कार्यरत हैं। इस समय करीब 20 हजार आशा वर्कर सेवाएं दे रही हैं, जिनमें से करीब 17 हजार की सेवाएं 10 साल से अधिक अवधि की हो चुकी हैं। आशा वर्कर्स यूनियन हरियाणा की प्रधान सुनीता, उप प्रधान रानी, सह सचिव सुदेश व अनीता और राज्य कमेटी की सदस्य वंदना ने मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव से मुलाकात कर अनुबंध आधार पर बरसों से काम कर रही आशा वर्करों को पक्का करने और तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। हरियाणा में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत वर्षों से संविदा आधार पर कार्यरत हजारों कर्मचारियों को दो दिन पहले ही हाई कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। जस्टिस संदीप मौदगिल की बेंच ने 104 याचिकाओं पर एक साथ फैसला सुनाते हुए कहा था कि राज्य सरकार संविदा व्यवस्था की आड़ में कर्मचारियों का अनिश्चितकाल तक शोषण नहीं कर सकती। लंबे समय से लगातार सेवाएं दे रहे कर्मचारियों का कार्य अस्थायी नहीं बल्कि स्थायी प्रकृति का होता है। इसलिए उन्हें प्रारंभिक नियुक्ति की तारीख से नियमित किया जाना चाहिए और सभी सेवा लाभ दिए जाएं। एनएचएम केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसमें 60:40 के अनुपात में केंद्र और राज्य वित्तीय भार वहन करते हैं। हरियाणा सरकार ने हालांकि कोर्ट में दलील दी थी कि नियमित पद स्वीकृत नहीं हैं और अदालत नियमितीकरण का आदेश देकर नए पद सृजित नहीं कर सकती, मगर हाई कोर्ट ने इन दलीलों को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि वर्षों तक लगातार सेवा लेना यह साबित करता है कि कार्य स्थायी प्रकृति का है। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि यदि नियुक्ति पारदर्शी प्रक्रिया से हुई हो, कर्मचारी योग्य हों और वर्षों तक बिना किसी अदालत के संरक्षण के सेवा दे रहे हों, तो राज्य उन्हें अनिश्चितकाल तक अस्थायी नहीं रख सकता। स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने आशा वर्करों की इस मांग के प्रति सहमति जताई और मिशन महानिदेशक आरएस ढिल्लो को विभागीय कार्यवाही शुरू करने की संभावनाएं तलाशने को कहा। आशा वर्कर यूनियन की पदाधिकारी निदेशक से भी मिलीं। उन्हें अवगत कराया गया कि 31 दिसंबर 2025 के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार 10 वर्ष की सेवाएं पूरी करने वाले सभी तरह के कर्मचारी-मजदूरों को पक्का किया जाना चाहिए। स्वास्थ्य मंत्री के भरोसे से संतुष्ट होकर आशा वर्कर यूनियन ने 28 मई को रेवाड़ी में होने वाले प्रदर्शन को स्थगित कर दिया। आशा वर्कर यूनियन की प्रमुख मांगें 1 .वर्ष 2023 की 73 दिवसीय हड़ताल के दौरान काटे गए मानदेय (Honorarium) का भुगतान किया जाए। 2 .जननी सुरक्षा योजना और आयुष्मान आरोग्य मंदिर के काटे हुए मानदेय को तुरंत बहाल/लागू किया जाए। 3 .वर्ष 2025 में केंद्र सरकार द्वारा घोषित 1,500 रुपये की मानदेय बढ़ोतरी को एरियर (Arrears) सहित दिया जाए। 4 .आशा वर्कर्स को मानदेय सहित मेडिकल लीव (Medical Leave) और मैटरनिटी लीव (Maternity Leave) की सुविधा मिले। 5 .सभी आशा वर्कर्स और उनके परिवारों को सरकार के पैनल में शामिल अस्पतालों में मुफ्त/कैशलेस इलाज की सुविधा दी जाए। 6 .पारदर्शिता के लिए हर महीने सभी आशा वर्कर्स को उनके मानदेय भुगतान की स्लिप (Salary/Honorarium Slip) दी जाए। 7 .त्योहारों के अवसर पर सभी आशा वर्कर्स को त्योहार भत्ता (बोनस) प्रदान किया जाए।

पर्यावरण संरक्षण की बड़ी योजना: DMRC स्टेशनों पर जमा होंगे पुराने कपड़े, होगा रिसाइक्लिंग और अपसाइक्लिंग

नई दिल्ली  घरों में बेकार पड़े पुराने कपड़े अब कचरे में नहीं जाएंगे, बल्कि उनसे नए और उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाएंगे। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की पहल पर दिल्ली में पर्यावरण संरक्षण और विकास को बढ़ावा देने के लिए नई योजना शुरू की जा रही है। इसके तहत DMRC राजधानी के 10 प्रमुख मेट्रो स्टेशनों पर पुराने कपड़ों के लिए विशेष कलेक्शन बॉक्स लगाएगा, जहां लोग अपने पुराने कपड़े जमा कर सकेंगे। सरकार का कहना है कि तेजी से बढ़ता कपड़ा अपशिष्ट (Waste) पर्यावरण के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में इस पहल के जरिए पुराने कपड़ों की वैज्ञानिक तरीके से रिसाइक्लिंग और उनका दोबारा उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। इससे कचरे में कमी आने के साथ-साथ लोगों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी मजबूत होगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रभावशीलता सुनिश्चित की जाएगी, ताकि लोगों का भरोसा बना रहे और ज्यादा से ज्यादा लोग इस अभियान से जुड़ें। इन 10 स्टेशनों पर कलेक्शन बॉक्स जिन स्टेशनों को इस योजना के लिए चुना गया है, उनमें शाहदरा, मोहन एस्टेट, रोहिणी वेस्ट, लाजपत नगर, मालवीय नगर, मयूर विहार फेज-I, हौज खास, पंजाबी बाग वेस्ट, द्वारका और शालीमार बाग मेट्रो स्टेशन शामिल हैं। मेट्रो स्टेशन पर बिकेंगे ये प्रोडक्ट्स इस पहल के तहत जमा किए गए कपड़ों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाएगा। इसके बाद प्रतिष्ठित गैर सरकारी संगठनों और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से इसे दोबारा उपयोग लायक बनाया जाएगा। साथ ही इनकी अपसाइक्लिंग (उपयोगी उत्पादों में बदलना) भी की जाएगी। पुराने कपड़ों से बैग, दरी और अन्य प्रोडक्ट तैयार किए जाएंगे। खास बात यह है कि इन प्रोडक्ट के प्रदर्शन और बिक्री के लिए चयनित मेट्रो स्टेशनों पर विशेष स्थान भी उपलब्ध कराया जाएगा। रिसाइक्लिंग यूनिट में भेजे जाएंगे कपड़े जो कपड़े दोबारा उपयोग के योग्य नहीं होंगे, उन्हें रिसाइक्लिंग यूनिट में भेजा जाएगा, जहां उनसे रिसाइक्ल्ड यार्न, फाइबर और नॉन-वोवन फेल्ट जैसे उत्पाद तैयार किए जाएंगे। सरकार का दावा है कि इससे न्यूनतम अपशिष्ट सुनिश्चित किया जा सकेगा। इस तरह होगी ब्रैंडिंग डीएमआरसी के अनुसार, इस परियोजना की ब्रैंडिंग 'दिल्ली मेट्रो लेडीज वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन' के नाम से की जाएगी। फिलहाल कलेक्शन बॉक्स लगाने, ब्रैंडिंग और एमओयू से जुड़ी औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं। प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस योजना का शुभारंभ किया जाएगा।

आयुष्मान भारत योजना में फर्जीवाड़ा: पटना IGIMS में बड़ा खुलासा

पटना पटना स्थित आईजीआईएमएस (IGIMS) में आयुष्मान घोटाले की जांच के लिए पुलिस और संस्थान की ओर से मंगलवार को दो अलग-अलग कमेटियां गठित की गईं। आईजीआईएमएस ने छह सदस्यीय कमेटी का गठन किया है, जो घोटाले के हर बिंदु पर जांच करेगी। इधर पुलिस ने इस मामले के आरोपित चार संविदा कर्मियों की गिरफ्तारी के लिए एसआईटी गठित की है। आईजीआईएमएस में अब तक 45 लाख का आयुष्मान भारत योजना (Ayushman Bharat Yojna) में घोटाले की बात सामने आई है, लेकिन संस्थान के अधिकारियों की मानें तो यह राशि और बढ़ सकती है। आईजीआईएमएस में एक प्रशासनिक अधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है। कमेटी में संस्थान के पदाधिकारियों के अलावा एक स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी को भी शामिल किया गया है। कमेटी की बुधवार को इस विषय पर बैठक होनी है। संस्थान के पदाधिकारियों की मानें तो आयुष्मान कार्ड का सॉफ्टवेयर तैयार करने वाली कंपनी और आउटसोसिंग एजेंसी के कर्मियों की मिलीभगत से आयुष्मान कार्ड धारकों के साथ छलावा किया है। इसकी विस्तृत जांच कराई जाएगी। आईजीआईएमएस में आयुष्मान भारत योजना का लाभ मरीजों को 2018 से मिल रहा है। इधर, इस मामले में आरोपित आउटसोर्सिंग कंपनी के कर्मी अमरजीत राय, चंदन कुमार, साकेत कुमार और अभिषेक की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी चल रही है। एक कर्मी को हिरासत में लेकर पूछताछ चल रही है। टाउन डीएसपी-2 साकेत कुमार ने बताया कि आईजीआईएमएस ने शास्त्रीनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। सभी बिंदुओं पर जांच चल रही है। कैसे खुला राज अक्तूबर 2025 में मुजफ्फरपुर के गायघाट प्रखंड के बाघाखाल गांव निवासी 46 वर्षीय मनोज झा को दलालों ने उनके आयुष्मान कार्ड के इस्तेमाल करने के बदले में 40 हजार देने का आश्वासन दिया था। उन्होंने अपना कार्ड तो दे दिया, पर दलालों ने उन्हें 40 हजार नहीं दिये। इसकी उन्होंने आईजीआईएमएस में लिखित शिकायत की। मामले की छानबीन की गई तो पाया गया कि मनोज झा का अस्पताल में उपचार ही नहीं हुआ है, जबकि आयुष्मान भारत योजना के तहत बने कार्ड से 40 हजार की निकासी कर ली गई है। यह कैसे हुआ? संस्थान के पदाधिकारी भी नहीं समझ पाए। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने योजना के अंतर्गत बने कार्ड से अन्य मरीजों की जांच शुरू की तो पता चला कि बड़े पैमाने पर इस प्रकार का फर्जीवाड़ा किया गया है। इसमें एक बड़ा गिरोह सक्रिय है। इन बिंदुओं पर होगी जांच – किस स्तर तक गड़बड़ी की गई है, किन कारणों से ऐसी गड़बड़ी हुई – आयुष्मान के लिए जो सॉफ्टवेयर बनाया गया है उसमें क्या खामी थी – जिस एजेंसी ने सॉफ्टवेयर बनाया था वह कैसे निगरानी रख रही थी – आरोपित का कहां-कहां नेटवर्क है, इसमें कौन-कौन लोग हैं शामिल

बेतला नेशनल पार्क में जानवर पानी को तरसे, जंगलों में लू और प्यास का कहर

 लातेहार बेतला नेशनल पार्क सहित पूरा पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) इस समय भीषण और जानलेवा गरमी की चपेट में है. कभी ठंडी बयार के लिए मशहूर रहने वाले पलामू टाइगर रिजर्व का पारा 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है. जंगलों में भी गर्म हवाएं चल रही है. जंगल सफारी के दौरान हीटवेव (लू ) का कहर का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए पर्यटकों का आगमन बैकफुट पर चला गया है. आसमान से बरसती आग ने इंसानों के साथ-साथ बेजुबान जानवरों का जीना भी दूभर कर दिया है. भीषण तपिश और लू के थपेड़ों से जंगलों में हाहाकार मचा है, जिससे जंगली जानवर अत्यधिक बेचैन हैं. नवजात और नन्हें जंगली जानवरों की मौत की अपुष्ट खबरें मिल रही है. सदियों पुराने कई प्राकृतिक जलस्रोतों को सुख गए है. पानी की एक-एक बूंद के लिए जंगलों में त्राहि-त्राहि मची है. बेकाबू प्यास और भीषण बेचैनी से तड़पते जानवर अब रिजर्व की सुरक्षित सीमा को छोड़कर बाहरी रिहायशी इलाकों का रुख कर रहे हैं, जहां मौत के सौदागर (शिकारी) हाथ में फंदे और जहर लिए उनके इंतजार में बैठे शिकार कर रहे हैं. सूख गए प्राकृतिक जलस्रोत, कृत्रिम व्यवस्थाएं नाकाफी हिरण बंदर, लंगूर,गौर और जंगली सुअर पानी की तलाश में पागलों की तरह भटक रहे हैं. हालांकि वन विभाग ने कुछ जगहों पर टैंकरों के जरिए कृत्रिम वॉटर होल (जलपात्र) भरने का दावा किया है, लेकिन यह व्यवस्था ऊंट के मुंह में जीरे के समान साबित हो रही है. कड़कड़ाती धूप में इन कृत्रिम गड्ढों का पानी भी कुछ ही घंटों में खौलने लगता है, जो जानवरों के पीने लायक नहीं बचता. जंगल में पानी न मिलने के कारण मजबूरन वन्यजीवों के झुंड रिजर्व से सटे ग्रामीण इलाकों, खेतों और रिहायशी बस्तियों की तरफ आ रहे हैं. जानकारी के अनुसार बाहरी इलाकों और बचे-खुचे पानी के गड्ढों के पास शिकारियों ने गुप्त फंदे (फांस) लगा दिये हैं. प्यास से बेहाल जानवर जैसे ही पानी पीने नीचे झुकते हैं, वे इन फंदों का शिकार हो जा रहे हैं. इसके अलावा, कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा पानी में जहरीले पदार्थ मिलाने की भी आशंका बनी हुई है, जिससे सामूहिक शिकार का खतरा मंडरा रहा है. रात भर गांवों के आसपास मंडराते हैं जानवर: ग्रामीण पीटीआर की सीमा से सटे गांवों के ग्रामीणों ने बताया कि ऐसी गर्मी पहले कभी नहीं देखी थी. पानी की तलाश में हिरण, बाइसन और जंगली सुअर रोज हमारे खेतों की तरफ आ रहे हैं. हाल ही में बाइसन ने एक को मार डाला है. रात को डर के मारे कोई घर से बाहर नहीं निकलता. जंगल के अंदर पानी बिल्कुल नहीं है. कुछ बाहरी लोग रात के समय पानी के गड्ढों के पास संदिग्ध हालत में घूमते देखे गए हैं, जो पक्के तौर पर शिकार के इरादे से आते हैं. हम अलर्ट पर हैं, टैंकरों से की जा रही पानी की सप्लाई: रेंजर रेंजर उमेश कुमार दुबे ने कहा कि तापमान अप्रत्याशित रूप से बढ़ा है,स्थिति पर पूरी नजर रखे हुए हैं. कृत्रिम वॉटर होल्स में टैंकरों के जरिए लगातार पानी भरा जा रहा है. इसके साथ ही कुछ चुनिंदा बोरवेल को सोलर पंप से जोड़ा गया है जिससे पानी की निरंतर आपूर्ति हो सके. वहीं शिकार की आशंका को देखते हुए हमारी एंटी-पोचिंग (शिकार विरोधी) टीम और वनकर्मियों की गश्त चौबीसों घंटे बढ़ा दी गई है. ग्रामीणों के साथ मिलकर इको-विकास समिति को सक्रिय किया गया है जिससे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना मिल सके.

मेदवेदेव का क्ले पर संघर्ष जारी, फ्रेंच ओपन के पहले राउंड में फिर बाहर हुए रूसी स्टार

 पेरिस  रूस के स्टार टेनिस खिलाड़ी और पूर्व विश्व नंबर एक दानिल मेदवेदेव का फ्रेंच ओपन में निराशाजनक प्रदर्शन एक बार फिर जारी रहा। मंगलवार को छठी वरीयता प्राप्त मेदवेदेव को ऑस्ट्रेलिया के वाइल्ड कार्ड खिलाड़ी एडम वाल्टन ने पांच सेटों तक चले रोमांचक मुकाबले में 6-2, 1-6, 6-1, 1-6, 6-4 से हराकर टूर्नामेंट से बाहर कर दिया। रोलां गैरों की धीमी क्ले कोर्ट सतह पर मेदवेदेव का संघर्ष एक बार फिर साफ दिखाई दिया। यह नौ में से छठी बार है जब वह फ्रेंच ओपन के पहले दौर में ही हारकर बाहर हुए हैं। मुकाबले में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिले और दोनों खिलाड़ियों ने बारी-बारी से दबदबा बनाया। वॉल्टन ने की शानदार शुरुआत ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी वॉल्टन ने शानदार शुरुआत करते हुए पहला सेट आसानी से अपने नाम किया, लेकिन मेदवेदेव ने दूसरे सेट में जोरदार वापसी करते हुए केवल एक गेम गंवाया। हालांकि वह लय बरकरार नहीं रख सके और तीसरा सेट गंवा बैठे। चौथे सेट में फिर वापसी करने वाले मेडवेडेव निर्णायक सेट में दबाव नहीं झेल सके। विश्व रैंकिंग में 97वें स्थान पर मौजूद वॉल्टन ने पांचवें सेट में 4-4 की बराबरी पर मेदवेदेव की सर्विस तोड़ी और फिर शानदार होल्ड के साथ करियर की सबसे बड़ी जीत दर्ज की। यह किसी शीर्ष-10 में शामिल खिलाड़ी के विरुद्ध उनकी पहली जीत भी है। जीत के बाद वॉल्टन ने कहा कि पिछले साल सिनसिनाटी में मेदवेदेव के खिलाफ मिली जीत ने उन्हें आत्मविश्वास दिया था। उन्होंने कहा, "मुझे विश्वास था कि मैं यह कर सकता हूं। मैच में काफी उतार-चढ़ाव रहे, लेकिन निर्णायक सेट में जिस तरह वापसी की, उस पर मुझे गर्व है। मोनफिल्स की भावुक विदाई वहीं स्थानीय खिलाड़ी गेल मोनफिल्स को भी पहले दौर में हमवतन खिलाड़ी ह्यूगो गैस्टन के विरुद्ध हार का सामना करना पड़ा। 2008 में सेमीफाइनल तक का सफर तय करने वाले मोनफिल्स का यह फ्रेंच ओपन में आखिरी मुकाबला रहा। 39 साल के मोनफिल्स अपने पसंदीदा कोर्ट फिलिप-चैटियर पर गैस्टन के विरुद्ध मैच जीतने के बहुत करीब थे। उन्होंने पहला और दूसरा सेट आसानी से 6-2, 6-3 से जीत लिया था। हालांकि, इसके बाद गैस्टन ने शानदार वापसी की और अगले दो सेट 3-6, 2-6 से अपने नाम कर लिए। आखिरी सेट में गैस्टन पूरी तरह हावी रहे और 6-0 से जीत हासिल कर ली। मैच के बाद एक खास ट्रिब्यूट वीडियो दिखाया गया, जिसमें राफेल नडाल, रोजर फेडरर, नोवाक जोकोविक, यानिक सिनर, कार्लोस अलकराज और स्टानिस्लास वावरिंका जैसे बड़े खिलाड़ियों के संदेश शामिल थे। इसके अलावा उनके फ्रेंच साथी गैस्केट, नोआ, गाइल्स साइमन, जो-विल्फ्रेड सोंगा और आर्थर फिल्स ने भी उन्हें सम्मान दिया। शीर्ष वरीय सबालेंका की शानदार शुरुआत महिला सिंगल्स में विश्व की नंबर एक खिलाड़ी आर्यना सबालेंका ने स्पेन की जेसिका बूजास मानेरो को 6-4, 6-2 से शिकस्त देकर अपने अभियान की शुरुआत जोरदार तरीके से की। यह मुकाबला एक घंटे 15 मिनट तक चला। शीर्ष वरीयता प्राप्त सबालेंका ने कोर्ट फिलिप-चैट्रियर पर अपने कौशल का प्रदर्शन करते हुए ग्रैंड स्लैम में पहले दौर में लगातार 22वीं जीत दर्ज की। सबालेंका क्ले-कोर्ट सीजन में कुछ उतार-चढ़ाव भरे प्रदर्शन के बाद पेरिस पहुंची थीं। सबालेंका ने ओपन एरा में 'सनशाइन डबल' हासिल करने वाली सिर्फ पांचवीं महिला बनकर इतिहास रचा था। सबालेंका ने पूरे मैच में दबदबा बनाए रखा। पहले सेट में 4-0 की बढ़त बनाने के बाद सबालेंका ने दूसरे सेट में भी तेजी से आगे बढ़ते हुए 5-0 की बढ़त हासिल कर ली थी। उनका बैकहैंड कोर्ट पर बार-बार जोरदार तरीके से चला, और नेट पर बढ़ते आत्मविश्वास ने उनके खेल में एक नया आयाम जोड़ दिया। दूसरे सेट में भी इस स्पेनिश खिलाड़ी ने कुछ शानदार पल दिखाए, जिसमें एक बेहतरीन एंगल्ड बैकहैंड वाली और एक साहसी 'बैकहैंड डाउन द लाइन' शाट शामिल था, जिसने कुछ देर के लिए मैच के नतीजे को टाल दिया।