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ईशान किशन ने खोला राज, क्यों टीम के लिए छोड़ी अपनी जगह? बोले- श्रेयस का फॉर्म था शानदार

लखनऊ  एकाना क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए पहले टी20 मुकाबले में भारतीय टीम ने वेस्टइंडीज को 8 विकेट से करारी शिकस्त देकर 5 मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली है। कप्तान श्रेयस अय्यर के नाबाद 102 रनों की शतकीय पारी और डेब्यू कर रहे युवा ऑलराउंडर नमन धीर (3/31) के शानदार स्पेल की बदौलत भारत ने 172 रनों के लक्ष्य को महज 14.4 ओवरों में आसानी से हासिल कर लिया। इस मुकाबले में श्रेयस अय्यर के साथ तीसरे विकेट के लिए नाबाद 137 रनों की मैच जिताऊ साझेदारी निभाने वाले विकेटकीपर-बल्लेबाज ईशान किशन (37 नाबाद) ने अपनी भूमिका और टीम की रणनीति को लेकर बड़ा बयान दिया है। ईशान किशन ने कही बड़ी बात भारतीय टीम ने पावरप्ले में ही दोनों सलामी बल्लेबाजों के विकेट गंवा दिए थे। इसके बाद ईशान किशन ने श्रेयस अय्यर का बखूबी साथ निभाया और सपोर्टिंग रोल अदा किया। जियोस्टार से बात करते हुए ईशान किशन ने अपनी रणनीति का खुलासा करते हुए कहा, 'एक बल्लेबाज के तौर पर जब मैं बहुत अच्छी लय में नहीं दिख रहा होता हूं और दूसरे छोर पर मौजूद बल्लेबाज (श्रेयस अय्यर) गेंद को बहुत अच्छी तरह से टाइम कर रहा होता है, तो मुझे सेकंड फिडल (धीमी पारी खेलकर साथ देना) रोल निभाने में कोई झिझक नहीं होती। श्रेयस लगातार बड़े शॉट्स खेल रहा था, इसलिए मेरा काम यही था कि मैं उसे विपक्षी गेंदबाजों पर दबाव बनाने दूं।' श्रेयस अय्यर का पहला टी20 अंतरराष्ट्रीय शतक किशन ने आगे कहा कि उनका प्लान बेहद सरल था। उन्होंने लक्ष्य को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा। जब भी कोई गेंद उनके जोन में आई, उन्होंने रन बनाए और बाकी समय स्ट्राइक रोटेट करके श्रेयस को आक्रामक बल्लेबाजी करने का पूरा मौका दिया। कप्तान श्रेयस अय्यर ने इस मुकाबले में महज 42 गेंदों में 10 चौके और 6 गगनचुंबी छक्कों की मदद से अपना पहला टी20 अंतरराष्ट्रीय शतक जड़ा। उनकी इस तूफानी पारी के बदौलत भारत ने 172 रनों के लक्ष्य को 32 गेंद शेष रहते ही हासिल कर लिया। नमन धीर की गेंदबाजी के कायल हुए किशन अपने टी20 अंतरराष्ट्रीय डेब्यू पर 31 रन देकर 3 विकेट (शाही होप, रोमारियो शेफर्ड और शामार स्प्रिंगर) लेने वाले नमन धीर की तारीफ करते हुए किशन ने कहा कि मुंबई इंडियंस के दिनों से वे नमन को देखते आ रहे हैं, जहां वे एक पार्ट-टाइम बॉलर थे। किशन ने नमन के माइंडसेट की सराहना करते हुए कहा, 'अपने डेब्यू मैच में जब किसी युवा गेंदबाज को छक्का पड़ता है, तो वह अक्सर रक्षात्मक (Defensive) होकर गेंदबाजी करने लगता है। लेकिन नमन ने ऐसा बिल्कुल नहीं किया। उन्होंने बल्लेबाजों को फ्लाइट देना जारी रखा, जिसका फायदा उन्हें विकेट के रूप में मिला। इससे पता चलता है कि उन्होंने अपनी गेंदबाजी पर कितनी मेहनत की है। उनके पास विकेट लेने की मानसिकता है, सिर्फ रन रोकने की नहीं। अगर वे इसी तरह गेंदबाजी करते रहे, तो बहुत आगे जाएंगे।' भारत और वेस्टइंडीज के बीच सीरीज का दूसरा टी20 मुकाबला शुक्रवार को रांची के जेएससीए (JSCA) इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जाएगा।

Dhananjaya de Silva ने छोड़ी श्रीलंका की टेस्ट कप्तानी, 18 मैचों में 7 जीत के बाद लिया बड़ा फैसला

नई दिल्ली ऑलराउंडर धनंजय डिसिल्वा ने श्रीलंका की टेस्ट टीम की कप्तानी छोड़ने का फैसला किया है। तत्काल प्रभाव से उन्होंने टेस्ट कैप्टेंसी से हटने का फैसला किया है। हालांकि, उन्होंने वादा किया है कि वह आगे भी श्रीलंका की टेस्ट टीम के लिए खेलते रहेंगे और चयन के लिए उपलब्ध रहेंगे। टेस्ट कप्तानी से इस्तीफा देने के बाद धनंजय डिसिल्वा ने कहा है कि अब यह जिम्मेदारी अगली पीढ़ी को देने का समय आ गया है। वे करीब 3 साल तक श्रीलंका की टेस्ट टीम के कप्तान रहे हैं। धनंजय डिसिल्वा को जनवरी 2024 में टेस्ट कप्तान नियुक्त किया गया था। तीन महीने बाद उन्हें कप्तानी करते हुए 3 साल हो जाते, लेकिन 33 महीने बाद उन्होंने कप्तानी छोड़ दी। श्रीलंका की सिलेक्शन कमिटी को लिखे एक लेटर में डिसिल्वा ने कहा, "मेरी सच्ची राय है कि यह जिम्मेदारी अगली पीढ़ी को मिलनी चाहिए।" उन्होंने इस्तीफा सौंपने के बाद इस बात की पुष्टि की है कि वह एक प्लेयर के तौर पर श्रीलंका का प्रतिनिधित्व करने के लिए उपलब्ध रहेंगे। श्रीलंका क्रिकेट के CEO एश्ले डिसिल्वा ने अपने हमनाम को सबसे लंबे फॉर्मेट में उनके योगदान के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, “श्रीलंका क्रिकेट उनके बाकी करियर के लिए उन्हें शुभकामनाएं देता है और हमारी टेस्ट टीम को दी गई लीडरशिप के लिए उन्हें धन्यवाद देता है।” दिमुथ करुणारत्ने से कमान संभालने के बाद धनंजय डिसिल्वा ने 18 टेस्ट मैचों में श्रीलंका की कप्तानी की, जिसमें यह देश सात मैच जीतने में सफल रहा। कप्तान के तौर पर उनका औसत 36.45 का रहा, जबकि रन 1130 ही बनाए। गेंदबाज के तौर पर 9 विकेट उनको मिले। भारत के खिलाफ खेली थी आखिरी टेस्ट सीरीज धनंजय डिसिल्वा ने आखिरी बार टेस्ट कप्तानी भारत के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज के दौरान की। इस सीरीज के पहले मैच में टीम इंडिया को बड़ी जीत मिली थी, लेकिन दूसरा टेस्ट मेजबान श्रीलंका ने सोनल दिनुशा के दो शतकों के दम पर बचा लिया था। दिनुशा ने दोनों पारियों में शतक जड़ा था और भारत को इस मैच में जीतने नहीं दिया था। श्रीलंका पर एक समय पारी से हारने का खतरा था, क्योंकि टीम फॉलोऑन खेल रही थी। बावजूद इसके भारत को इस मैच में जीत नहीं मिल पाई थी, क्योंकि सभी विकेट श्रीलंका के दूसरी पारी में नहीं गिरे थे। वहीं, अगर बात श्रीलंका के आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 के चक्र की करें तो टीम मौजूदा समय में पॉइंट्स टेबल में सातवें स्थान पर है। 6 मैच अब तक श्रीलंकाई टीम ने खेले हैं, जिनमें से 1 ही मैच में जीत मिली है, जबकि दो मैच गंवाए हैं। अच्छी बात यह है कि 3 टेस्ट ड्रॉ भी श्रीलंका ने कराए हैं। श्रीलंका की जीत प्रतिशत 33.33 का है, जो जीतने पर अच्छा खासा आगे बढ़ सकता है।

नाना पाटेकर ने 75 की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा, कारगिल युद्ध में भी निभाई थी अहम भूमिका

75 की उम्र में नाना पाटेकर ने दुनिया को अलविदा कह दिया है. उनका अचानक जाना हर किसी को खल रहा है. वो सिर्फ बेहतरीन एक्टर नहीं थे, बल्कि वो सच्चे नागरिक भी थे. उन्होंने हमेशा देशहित की बात की और उसके लिए काम किया. पर्दे पर उन्होंने कई यादगार और दमदार किरदार निभाए. पर क्या आप जानते हैं कि नाना पाटेकर एक भारतीय प्रादेशिक सेना (Territorial Army) में भी रह चुके हैं? बहुत कम लोग जानते हैं कि वो कारगिल युद्ध का भी हिस्सा रहे हैं. इस बात का खुलासा खुद नाना पाटेकर ने किया था. कारगिल का हिस्सा थे नाना नाना पाटेकर ने कारगिल के युद्ध के दौरान कुछ समय के लिए एक्टिंग से ब्रेक ले लिया था. इसके बाद वो लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट में भर्ती हो गए थे. 'द लल्लनटॉप' को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने कारगिल युद्ध की एक छोटी सी स्टोरी शेयर थी. उन्होंने कहा- उस वक्त फर्नाडिस साहब थे रक्षा मंत्री. हम युद्ध में जाना चाहते थे. हमने कंमाडो कोर्स पूरा किया था. अच्छे शूटर हैं. नेशनल खेले हुए हैं. हमको मेडल भी मिला हुआ है. 'युद्ध के दौरान हमने वहां फोन किया. हमने कहा कि हमें वॉर में जाना है. वहां से कहा गया कि आप सिविलियन हैं. इसलिए नहीं जा सकते. पर फर्नाडिस साहब हमें जानते थे. फिर उन्होंने हमसे पूछा कि कब जाना है. मैंने कहा कि अभी जाना है. मैं चला गया कारगिल युद्ध में. मैं क्विक रिएक्शन टीम का सदस्य बन गया. इतना सा तो कुछ हम कर सकते हैं देश के लिए. हमारा सबसे बड़ा हथियार बोफोर्स या एके 47 नहीं बल्कि हमारे जवान हैं.' घटाया था 20 किलो वजन नाना पाटेकर ने आगे कहा कि 'जब मैं युद्ध में गया था, तब 76 किलो था. जब आया तब 56 किलो का हो गया था. दो महीने में हड्डी पसली कम हो गए थे. पर सच कहें, तो हमको देश के लिए इतना करके बहुत खुशी मिली.' उन्होंने ने ये भी कहा कि अजीत डोभाल उनके लिए भाई सामान हैं. उन्हें दोस्त कहना गलत है. अजीत डोभाल संग उनका रिश्ता बेहद खास और अनोखा है. नाना पाटेकर ने अपनी जान की परवाह किए बिना देश के लिए कुछ कर दिखाने का मन बनाया. उन्होंने जो ठाना वो कर दिखाया. आज भले ही नाना हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनसे जुड़े किस्से, कहानियां कभी उन्हें भूलने नहीं देंगे.

बिहार में छात्रों की अटेंडेंस पर सख्ती, 75% हाजिरी पर ही मिलेगा सरकारी योजनाओं का लाभ

पटना राज्य के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त सभी विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की उपस्थिति के आधार पर लाभुक योजनाओं का लाभ मिलेगा। इस संबंध में शिक्षा विभाग ने आवश्यक प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग ने एक अप्रैल से 30 सितंबर तक की उपस्थिति के आधार पर विद्यार्थियों की पहचान करने और उसकी रिपोर्ट देने का निर्देश सभी जिलों को दिया है। निर्देश में कहा गया है कि 75 प्रतिशत या उससे अधिक उपस्थिति वाले विद्यार्थियों के सामने ‘यस’ और इससे कम उपस्थिति वाले विद्यार्थियों के सामने ‘नो’ दर्ज किया जाएगा। उपस्थिति के आधार पर यस या नो विभागीय निर्देश के मुताबिक यह प्रक्रिया ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर पूरी की जाएगी। प्रधानाध्यापकों को अपने लागिन से नामांकित विद्यार्थियों के सामने उनकी उपस्थिति के आधार पर यस या नो अंकित करना होगा। इसके आधार पर ही लाभुक योजनाओं की राशि के भुगतान की आगे की प्रक्रिया पूरी होगी। विद्यार्थियों की उपस्थिति के साथ परिवार की वार्षिक आय 1.50 लाख रुपये तक होने के आधार पर भी पोर्टल पर यस या नो दर्ज करना होगा। विद्यालयों को सभी नामांकित विद्यार्थियों का डाटा को भी ई-शिक्षाकोष पर अपडेट करने का निर्देश दिया गया है। योजनाओं की राशि का भुगतान पीएफएमएस के माध्यम से डाटा प्रविष्टि पूरी होने के बाद प्रधानाध्यापक पोर्टल पर सबमिट करेंगे। इसके बाद संबंधित प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी के लागिन में आंकड़े सत्यापन के लिये जाएंगे। प्रखंड स्तर से सत्यापन के बाद डाटा को अप्रूव अथवा रिजेक्ट किया जाएगा। किसी प्रकार की त्रुटि मिलने पर उसे सुधार के लिए विद्यालय के लॉगिन पर वापस भेजा जाएगा। सत्यापन के बाद आंकड़े जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (योजना एवं लेखा) के लॉगिन में अंतिम स्वीकृति के लिए भेजे जाएंगे। जिला स्तर पर अनुमोदन के बाद संबंधित विद्यार्थियों की लाभुक योजनाओं की राशि का भुगतान पीएफएमएस के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में किया जाएगा।

‘द लास्ट टैंगो’ में मेसी का जलवा, गोल के साथ अर्जेंटीना को जीत दिलाई; विदाई पर छलके आंसू

नई दिल्‍ली  लियोनेल मेसी ने अर्जेंटीना से उसी तरह की विदाई ली, जैसी दर्शकों को उम्‍मीद थी। 39 साल के सुपरस्‍टार ने अपना 126वां अंतरराष्‍ट्रीय गोल दागा और अर्जेंटीना को बेनिन पर दोस्‍ताना मैच में 3-0 से जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। इसी के साथ ब्‍यूनस एयर्स के मोन्‍यूमेंटल स्‍टेडियम में करीब 85,000 फैंस के बीच मेसी के 21 साल के अंतरराष्‍ट्रीय करियर का भावुक अंत हुआ। मेसी ने अर्जेंटीना के लिए अपना रिकॉर्ड 208वां मैच खेला। उन्‍होंने निकोलस ओटामेंडी और निको पाज को गोल करने में सहायक की अहम भूमिका निभाई। फिर 71वें मिनट में पेनल्‍टी के जरिये मेसी ने अपना गोल दागा। मेसी के लिए आंसू रोकना हुआ मुश्किल से, अर्जेंटीनी फैंस के लिए इस मैच का नतीजा कोई मायने नहीं रखता था। उनके लिए यह मौका बड़ी चीज थी। कारण बहुत साधारण था- मेसी की विदाई। इस मैच का प्रमोशन 'द लास्‍ट टैंगो' करके किया गया, जिससे अर्जेंटीनी प्रशंसकों को एक आखिरी मौका मिला कि महानतम फुटबॉलर्स में से एक को खेलते देखने का जश्‍न मना सके। मैच शुरू होने से पहले ही भावुकता अपने चरम पर थी। जब अर्जेंटीना की टीम बस लोगों से भरी सड़कों के बीच से स्‍टेडिम की तरफ जा रही थी, तो यह देखकर मेसी का अपने आंसूओं पर काबू पाना मुश्किल हो रहा था। बाद में मेसी मैदान पर अपनी पत्‍नी एंटोनेला रोकूजो, मां सेलिया कूकीटिनी और तीन बच्‍चों के साथ आए। सभी ने दर्शकों का अभिवादन स्‍वीकार किया। दर्शकों का भरपूरा प्‍यार मिला मैच से पहले एक विशाल अर्जेंटीना की जर्सी मैदान पर रखी गई, जिसमें लिखा था ग्रासियस (धन्‍यवाद) और मेसी का मशहूर नंबर-10। दर्शकों ने भी अपने चहेते सुपरस्‍टार को खूब प्‍यार दिया। ब्‍यूनस एयर्स में आसमान में एक ड्रोन ने लियोनेल मेसी की तस्‍वीर दिखाई, जिससे आठ बार के बैलन डी ओर विजेता के करियर को सेलिब्रेट किया गया।

नल कनेक्शन पर हाईकोर्ट की रोक, ₹8,100 वाली व्यवस्था खत्म; विभाग के अगले कदम पर नजर

जयपुर राजस्थान हाईकोर्ट ने ठेकेदार के माध्यम से 8,100 रुपए में नल कनेक्शन देने की व्यवस्था को समाप्त कर दिया है। कोर्ट ने जलदाय विभाग की ओर से 12 फरवरी 2025 को परिपत्र के जरिए राजस्थान वाटर सप्लायर नियम, 1967 में किए गए संशोधन को रद्द कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियमों में संशोधन के लिए अधिसूचना जारी करना जरूरी है। इसे केवल कार्यालय आदेश या परिपत्र के जरिए बदला नहीं जा सकता। वहीं, विभाग ने अभी यह तय नहीं किया है कि आगे नई व्यवस्था क्या होगी या कोर्ट के आदेश को चुनौती दी जाएगी। पहले की तरह एल फॉर्म के जरिए कनेक्शन देने के संबंध में भी अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है। अधिसूचना से ही हो सकता है नियमों में बदलाव न्यायाधीश शुभा मेहता ने पीएचईडी कॉन्ट्रेक्टर कल्याण समिति की याचिका पर यह आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि अधिसूचना के जरिए नियम जारी करना एक विधिक प्रक्रिया है। ऐसे नियमों में प्रशासनिक आदेश या परिपत्र के माध्यम से बदलाव नहीं किया जा सकता। कोर्ट के अनुसार, 12 फरवरी 2025 के परिपत्र के जरिए किए गए संशोधन से नल कनेक्शन की पूरी प्रक्रिया प्रभावित हुई। इसमें प्लंबिंग, जल मीटर, रोड कट और नल कनेक्शन सहित विभिन्न कार्यों की प्रक्रिया में बदलाव किया गया था। कोर्ट ने कहा कि प्रक्रिया को सरल बनाने और लोगों को सुविधा देने के नाम पर नियमों में प्रशासनिक आदेश के जरिए बदलाव नहीं किया जा सकता। याचिकाकर्ता पक्ष के अधिवक्ता बाबूलाल गुप्ता और अंकुल गुप्ता ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने 12 फरवरी 2025 को नियमों में संशोधन कर नल कनेक्शन से जुड़े कार्य के लिए 8100 रुपए शुल्क तय किया था। इसके तहत ठेकेदार लाइसेंसी प्लंबरों के माध्यम से यह कार्य करवाते। याचिकाकर्ता पक्ष ने तर्क दिया कि इस व्यवस्था से सरकार को राजस्व का नुकसान होगा। मामले में सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने परिपत्र के जरिए किए गए नियम संशोधन को रद्द कर दिया। अब विभाग के अगले कदम पर नजर हाईकोर्ट के आदेश के बाद 8100 रुपए में ठेकेदार के माध्यम से नल कनेक्शन देने की व्यवस्था फिलहाल समाप्त हो गई है। हालांकि, जलदाय विभाग ने अभी नई व्यवस्था लागू करने अथवा हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया है। वहीं, पहले की तरह एल फॉर्म के जरिए नल कनेक्शन देने की व्यवस्था को लेकर भी विभाग की ओर से अभी कोई फैसला नहीं हुआ है।

नाना पाटेकर के निधन से सदमे में फिल्म इंडस्ट्री, मौत से पहले कही बातें सुनकर भावुक हुए फैंस

'फिर मुलाकात होगी कभी…' नाना पाटेकर के निधन के बाद उनका हर चाहने वाला यही कहना चाह रहा है. नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में गुरुवार, 8 अक्टूबर को गोवा में निधन हो गया. नाना की अचानक मौत से फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर है. अपनी मौत से कुछ महीने पहले, नाना पाटेकर ने मृत्यु और एक अभिनेता होने के मकसद के बारे में बहुत गहराई से बात की थी. आइए जानते हैं कि उन्होंने क्या कहा था. मृत्यु का हो गया था आभास? CNN-News18 को दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि वो कहानियों का हिस्सा बनना चाहते हैं, जो गहराई तक प्रभावित करें. नाना ने कहा था कि अभिनेता को अपने आस-पास हो रही घटनाओं से प्रभावित होना चाहिए. कैमरे के जरिए उन जज्बातों को सामने लाना चाहिए. उन्होंने कहा- मुझे तकलीफ होनी चाहिए, मेरे आस-पास जो घट रहा है, उससे तकलीफ तो होनी चाहिए. और उजागर करने का एक ही तरीका है, ये कैमरा है. उसके सामने हम उजागर करते हैं. ऐसी कहानी अगर उसका हिस्सा न बनूं तो क्या फायदा? नाना ने सिनेमा के कमर्शियल पहलू और जिंदगी की अनिश्चितता के बारे में भी बात की. उन्होंने कहा- तो वैसे ऊटपटांग फिल्में हम करते रहेंगे, पैसे कमाते रहेंगे. और मैं कल मरने वाला हूं, इस पर अगर मैं भरोसा करूंगा तो आज अच्छा जी सकता हूं. नाना ने अपनी खुद की मौत पर भी गौर किया था. उन्होंने कहा था- हमें ऐसा लगता है कि हम मरने वाले नहीं हैं और बटोरते रहते हैं. और अचानक से आता है  इनका अकालिक निधन हो गया. कल रात को तो बैठे थे, खाना-वाना खाए, सुबह उठे ही नहीं. नाना ने कहा कि एक्टिंग अपने अंदर की घुटन को बाहर निकालने का जरिया भी है. नाना पाटेकर के निधन के बाद उनकी कहीं बातें सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई हैं. उनकी बातें सुनकर ऐसा लग रहा है कि जैसे उन्हें अपनी मौत का आभास हो चुका था. वरना जीवन और मृत्यु पर इतनी गहरी बात कहना क्या सिर्फ इत्तेफाक हो सकता है?

Navratri Vastu Tips: माता रानी को प्रसन्न करने के लिए नवरात्र से पहले घर से बाहर करें ये 5 अशुभ चीजें

नवरात्र का पावन त्योहार आने वाला है. ऐसे में हर कोई अपने घर की साफ-सफाई में जुट जाता है.  लेकिन क्या आप जानते हैं कि केवल घर की धूल-मिट्टी साफ करना ही काफी नहीं है? वास्तु शास्त्र के मुताबिक, घर में रखी कुछ टूटी-फूटी और बेकार चीजें नकारात्मक ऊर्जा (बुरी ऊर्जा) को बढ़ावा देती हैं.  इससे मां दुर्गा और मां लक्ष्मी नाराज हो सकती हैं.  अगर आप चाहते हैं कि नवरात्र में माता आपके घर में आएं और खूब तरक्की हो, तो इन 5 चीजों को तुरंत घर से बाहर कर दें. घर से तुरंत हटाएं ये 5 चीजें: 1. सूखी तुलसी और कांटेदार पौधे तुलसी को बहुत पवित्र माना जाता है. अगर आपके घर में तुलसी का पौधा सूख गया है, तो उसे तुरंत हटा दें, क्योंकि सूखा पौधा घर में गरीबी और उदासी लाता है.  इसके अलावा, घर के अंदर कांटेदार पौधे (जैसे कैक्टस) भी नहीं रखने चाहिए. क्या करें: सूखे पौधे को मिट्टी में दबा दें या किसी नदी में प्रवाहित कर दें. इसकी जगह नया और हरा-भरा तुलसी या मनी प्लांट का पौधा लगाएं. 2. टूटी हुई मूर्तियां और तस्वीरें पूजा घर में कभी भी देवी-देवताओं की टूटी हुई मूर्तियां या फटी हुई तस्वीरें नहीं रखनी चाहिए.  इससे घर में वास्तु दोष लगता है. क्या करें: अगर मूर्ति मिट्टी की है, तो उसे पानी में बहा दें. अगर किसी और धातु की है, तो उसे किसी पीपल के पेड़ के नीचे रख आएं. 3. टूटी या पुरानी झाड़ू झाड़ू का संबंध माता लक्ष्मी से होता है. घर में टूटी हुई या बहुत पुरानी झाड़ू रखने से तंगी आ सकती है. क्या करें: नवरात्र शुरू होने से पहले पुरानी झाड़ू फेंक दें और नई झाड़ू खरीद लें. 4. एक्सपायर्ड दवाइयां और टूटे बर्तन घर में एक्सपायर्ड दवाइयां, पुराने कागज, चटके हुए बर्तन या टूटा हुआ कांच बिल्कुल न रखें.  इन चीजों से घर में बीमारी और मानसिक तनाव बढ़ता है. क्या करें: इन सारी बेकार और टूटी-फूटी चीजों को तुरंत घर से बाहर निकाल कर फेंक दें. 5. बंद घड़ियां और खराब सामान घर में बंद पड़ी घड़ी इस बात का संकेत है कि आपका अच्छा समय रुक गया है. इससे घर के लोगों में आलस बढ़ता है. साथ ही, खराब पड़े इलेक्ट्रॉनिक सामान भी घर की तरक्की रोकते हैं. क्या करें: बंद घड़ी को तुरंत ठीक करवाएं या बैटरी बदलें. खराब पड़े कबाड़ और इलेक्ट्रॉनिक सामान को भी घर से हटा दें. नवरात्र के पहले दिन जरूर करें ये काम: मुख्य द्वार को सजाएं: नवरात्र के पहले दिन घर के मुख्य द्वार को अच्छे से साफ करें. स्वास्तिक बनाएं: मुख्य द्वार पर हल्दी और पानी से स्वास्तिक का चिह्न बनाएं. तोरण लगाएं: माता के स्वागत के लिए आम या अशोक के पत्तों की माला (तोरण) मुख्य दरवाजे पर जरूर बांधें.  इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है.

17 अक्टूबर को बनेगा त्रिग्रही योग, इन 3 राशियों की चमकेगी किस्मत; धन-करियर में होगा बड़ा लाभ

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अक्टूबर के मध्य में ग्रहों की स्थिति में बड़ा परिवर्तन होने जा रहा है. दरअसल, वैदिक पंचांग के अनुसार, 17 अक्टूबर 2026 को ग्रहों के राजा सूर्य देव तुला राशि में प्रवेश करेंगे और 16 नवंबर तक इसी राशि में रहेंगे. इस राशि में पहले से बुध और शुक्र की मौजूदगी के कारण सूर्य के प्रवेश के साथ तीन ग्रह एक ही राशि में आ जाएंगे, जिससे त्रिग्रही योग का निर्माण होगा. ऐसे में तुला राशि में बुध और शुक्र की युति से पहले से ही लक्ष्मी राजयोग बना हुआ है. अब सूर्य के यहां पहुंचने से बुध के साथ बुधादित्य योग और शुक्र के साथ शुक्रादित्य योग भी बनने की स्थिति बनेगी. ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक, ग्रहों का यह संयोग कुछ राशियों के लिए विशेष रूप से शुभ साबित हो सकता है. इन जातकों को आर्थिक मामलों में फायदा मिलने के साथ-साथ नौकरी और कारोबार में भी नए अवसर मिल सकते हैं. तो आइए जानते हैं किन तीन राशियों के लिए त्रिग्रही योग खास रहने वाला है. कब होगा सूर्य का तुला राशि में गोचर? वैदिक पंचांग के अनुसार, 17 अक्टूबर 2026 को शाम 7 बजकर 50 मिनट पर सूर्य देव कन्या राशि से निकलकर तुला राशि में प्रवेश करेंगे. इसके बाद सूर्य करीब एक महीने तक तुला राशि में रहेंगे. 16 नवंबर 2026 को शाम 7 बजकर 42 मिनट के बाद सूर्य वृश्चिक राशि में प्रवेश कर जाएंगे. ज्योतिष में सूर्य को आत्मविश्वास, पद, प्रतिष्ठा और नेतृत्व क्षमता का कारक ग्रह माना जाता है. सूर्य लगभग 30 दिनों के अंतराल पर एक राशि से दूसरी राशि में गोचर करते हैं. इस तरह लगभग एक वर्ष में सूर्य सभी 12 राशियों का चक्र पूरा करते हैं. सिंह राशि सिंह राशि के जातकों के लिए अक्टूबर में बनने वाला त्रिग्रही योग कई मामलों में सकारात्मक परिणाम लेकर आ सकता है. कारोबार से जुड़े लोगों को अच्छा मुनाफा मिलने की संभावना है. इस दौरान कोई बड़ी व्यावसायिक डील भी आपके पक्ष में तय हो सकती है. नौकरी करने वाले लोगों के लिए भी समय अनुकूल रह सकता है. कार्यक्षेत्र में आपकी जिम्मेदारियां बढ़ने के साथ पद और प्रतिष्ठा में वृद्धि के योग बन सकते हैं. आमदनी के नए स्रोत बन सकते हैं. लंबे समय से अटका हुआ पैसा भी वापस मिलने की संभावना है.   तुला राशि तुला राशि में ही सूर्य का गोचर होने के कारण इस राशि के जातकों पर इसका विशेष प्रभाव देखने को मिल सकता है. त्रिग्रही योग के प्रभाव से आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ जीवन में कई सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं. व्यापार करने वालों को कोई बड़ी सफलता मिल सकती है. महत्वपूर्ण डील फाइनल होने या कारोबार में विस्तार के अवसर प्राप्त हो सकते हैं. समाज में आपकी प्रतिष्ठा और मान-सम्मान बढ़ सकता है. पारिवारिक जीवन में भी सुख-शांति और समृद्धि का वातावरण बना रहेगा. पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए भी यह समय अच्छा रह सकता है. मकर राशि मकर राशि के जातकों के लिए भी ग्रहों का यह संयोग आर्थिक और करियर के लिहाज से लाभकारी साबित हो सकता है. कारोबार से जुड़े लोगों को अच्छा मुनाफा मिलने के साथ व्यापार को आगे बढ़ाने के नए अवसर मिल सकते हैं. पैतृक संपत्ति से लाभ होने की संभावना है. वहीं नौकरीपेशा लोगों को वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग प्राप्त होगा और करियर में आगे बढ़ने के नए रास्ते खुल सकते हैं. लंबे समय से अटका हुआ धन वापस मिलने से आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकता है. अगर आप कोई नया कारोबार शुरू करने या किसी नए प्रोजेक्ट पर काम शुरू करने की योजना बना रहे हैं, तो यह समय आपके लिए अनुकूल रह सकता है.

धार अस्पताल का 200 मीटर जर्जर मार्ग छह घंटे में हुआ दुरुस्त, समाजसेवियों ने बिना शोर-शराबे के कराया काम

धामनोद  शासकीय अस्पताल परिसर का अंदरूनी मार्ग जो वर्षों से गड्ढों के कारण मरीजों के लिए परेशानी बना हुआ था, वह अब दुरुस्त हो गया है। नगर के कुछ समाजसेवियों ने मंगलवार रात करीब छह घंटे में 200 मीटर लंबे मार्ग का अपने स्तर पर डामरीकरण करा दिया। इस दौरान न कोई भूमिपूजन हुआ, न प्रचार और न ही काम कराने वालों ने अपना नाम सार्वजनिक किया। स्ट्रेचर ले जाने में होती थी दिक्कत अस्पताल परिसर का यह मार्ग लंबे समय से जर्जर था। जगह-जगह गड्ढे होने से मरीजों को स्ट्रेचर से एक वार्ड से दूसरे वार्ड तक ले जाने में दिक्कत होती थी। बरसात में गड्ढों में पानी भर जाने से स्थिति और खराब हो जाती थी। दोपहिया वाहन चालकों के साथ ही गंभीर मरीजों के स्वजन को भी आवागमन में परेशानी होती थी। मार्ग सुधार को लेकर कई बार मांग भी उठी, लेकिन लंबे समय तक कोई पहल नहीं हुई। रात 10 से सुबह चार बजे तक चला काम समाजसेवियों ने मरीजों की परेशानी को देखते हुए स्वयं पहल की। मंगलवार रात करीब 10 बजे डामरीकरण का काम शुरू हुआ, जो रातभर चला और सुबह चार बजे तक पूरा कर लिया गया। बुधवार सुबह जब मरीज और स्वजन अस्पताल पहुंचे तो गड्ढों की जगह डामरीकृत सड़क देखकर वे हैरान रह गए। अस्पताल सूत्रों के अनुसार इस मार्ग से रोजाना सैकड़ों मरीज और उनके स्वजन गुजरते हैं। नए रास्ते से अब एंबुलेंस और स्ट्रेचर की आवाजाही आसान हो गई है। प्रशासन ने सराहा, रखरखाव की कही बात इस संबंध में संबंधित अधिकारियों ने कहा कि `अस्पताल परिसर के अंदरूनी मार्ग के लिए हमने कई बार पत्राचार किया था, लेकिन बजट अभाव के कारण काम नहीं हो पा रहा था। समाजसेवियों द्वारा कराए गए इस कार्य से मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। अब अस्पताल प्रशासन द्वारा इस मार्ग के रखरखाव की जिम्मेदारी ली जाएगी।` समाजसेवियों ने बताया कि `अस्पताल आने वाले मरीजों को हो रही परेशानी देखी नहीं गई। इसलिए बिना किसी प्रचार के यह काम कराया गया है।` उन्होंने आगे भी अस्पताल में साफ-सफाई और अन्य जरूरी सुविधाओं में सहयोग करने की बात कही। सेवा का उदाहरण बना धामनोद आमतौर पर सार्वजनिक कार्यों में भूमिपूजन और प्रचार की होड़ रहती है। ऐसे में बिना नाम और प्रचार के कराया गया यह डामरीकरण क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। समाजसेवी ने रातों-रात सुधार सामग्री लाकर सड़क सुधरवा दी     समाजसेवी अस्पताल में आते-जाते रहते थे। वह देखते थे कि अस्पताल परिसर पहुंचने में सड़क का हिस्सा गड्ढों में तब्दील था, जिसे समाजसेवी ने रातों-रात सुधार सामग्री लाकर सड़क सुधरवा दी। उन्होंने इसे गुप्तदान कहकर नाम उजागर नहीं करने का निवेदन किया है। -कीर्ति बोरासी, सीबीएमओ, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धामनोद