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बलूचिस्तान फिर दहला! ग्वादर में BLA के फिदायीन हमले से 30+ पाक सैनिकों की मौत का दावा

बलूचिस्तान पाकिस्तान में बीएलए यानी बलूच लिबरेशन आर्मी ने कोहराम मचा दिया है. बलूचिस्तान के ग्वादर में बीएलए ने पाकिस्तानी सैनिकों की लाशें बिछाकर गदर काट दी है. जी हां, बलूचिस्तान के ग्वादर में फिदायीन हमला कर बीएलए ने पाकिस्तान के 30 से अधिक सैनिकों को मार डाला. ग्वादर के जिवानी इलाके के पनवान में पाकिस्तान कोस्ट गार्ड कैंप पर हुए फिदायीन हमले की जिम्मेदारी बलूच लिबरेशन आर्मी ने ली है. गौरतलब है कि बलूच लिबरेशन आर्मी को पाकिस्तान ने बैन कर रखा है. समय-समय पर बलूच लिबरेशन आर्मी पाकिस्तान को घाव देता रहता है. बलूच लिबरेशन आर्मी पाकिस्तान से बलूचिस्तान की आजादी की लड़ाई लड़ रहा है।  बीएलए ने अटैक कर पाकिस्तान को दिया गहरा जख्म ‘द बलूचिस्तान पोस्ट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, बलूच लिबरेशन आर्मी ने दावा किया कि इस हमले में 30 से अधिक पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे गए और कई अन्य घायल हो गए. बलूच लिबरेशन आर्मी पाकिस्तान का अलगाववादी समूह है. हालांकि, पाकिस्तान सरकार इसे एक आतंकी संगठन मानती है. इसे बैन कर रखा है. जबकि बलूच लिबरेशन आर्मी का दावा है कि वह बलूचिस्तान को आजाद कराने की लड़ाई लड़ रहा है. उसका कहना है कि बलूचिस्तान का हक मारा जा रहा है. पाकिस्तानी हुकूमत बलूचिस्तान के साथ सौतेला व्यवहार करती है. पाकिस्तानी सरकार यहां के खजाने को लूटती है, मगर उस लिहाज से इस इलाके का विकास नहीं करती।  ग्वादर में कब और कैसे हुआ अटैक बहरहाल, ग्वादर में यह हमला शुक्रवार शाम को हुआ. इस अटैक को बलूच लिबरेशन आर्मी की खास ‘मजीद ब्रिगेड’ ने अंजाम दिया.  बलूच लिबरेशन आर्मी ने दावा किया कि अताउल्लाह बलूच उर्फ अजमल नाम के एक आत्मघाती हमलावर ने शाम करीब 6:32 बजे (स्थानीय समय) विस्फोटकों से लदे ट्रक को कोस्ट गार्ड के कड़ी सुरक्षा वाले कैंप में घुसा दिया, जिससे जबरदस्त धमाका हुआ. इस अटैक में कैंप पूरी तरह मलबे के ढेर में बदल गया।  बीएलए ने वीडियो में दिखाया सबूत बलूच लिबरेशन आर्मी के मीडिया विंग ‘हक्कल’ ने 43 सेकंड का एक वीडियो भी जारी किया. इस वीडियो में साफ दिख रहा था कि धमाके से ठीक पहले विस्फोटकों से भरा ट्रक कैंप में घुस रहा था. बलूच लिबरेशन आर्मीने कहा कि बाद के फुटेज में मिलिट्री कैंप का एक बड़ा हिस्सा तबाह हुआ दिखाई दिया. इतना ही नहीं, ट्रक बम धमाके के बाद बलूच लिबरेशन आर्मी के ‘फतेह स्क्वाड’ ने ज़मीन से एक साथ हमला किया. बलूच लिबरेशन आर्मी के मुताबिक, इसके बाद उसके लड़ाकों ने बचे हुए कोस्ट गार्ड कर्मियों से आमने-सामने की लड़ाई लड़ी और ऑपरेशन के दौरान 30 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को मार गिराया। 

महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे अस्पताल में भर्ती, तबीयत बिगड़ने के बाद रद्द हुए सभी सार्वजनिक कार्यक्रम

ठाणे अचानक तबीयत बिगड़ने के कारण महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को इलाज के लिए ठाणे के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि उनकी हालत पूरी तरह से स्थिर है और विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज चल रहा है। पिछले कुछ दिनों से काम के भारी दबाव और लगातार भागदौड़ का सीधा असर एकनाथ शिंदे की सेहत पर पड़ा है। उन्हें कमजोरी महसूस हो रही थी। विधानमंडल की कार्यवाही के दौरान ही उन्हें बुखार की शिकायत हुई थी। इसके बावजूद वह कुछ तय कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए ठाणे पहुंचे, लेकिन तबीयत ज्यादा नासाज होने के चलते उन्हें अपने सभी कार्यक्रम रद्द करने पड़े। डॉक्टरों ने दी अस्पताल में भर्ती होने की सलाह रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों के राजनीतिक घटनाक्रमों और फिर विधानमंडल का अधिवेशन शुरू होने के कारण एकनाथ शिंदे लगातार व्यस्त चल रहे थे। माना जा रहा है कि थकान, वायरल बुखार और कमजोरी की वजह से ही उनका स्वास्थ्य बिगड़ा। डॉक्टरों ने उन्हें घर पर रहकर आराम करने के बजाय अस्पताल में भर्ती होकर समुचित इलाज कराने की सलाह दी। इसके बाद शुक्रवार रात उन्हें फौरन ठाणे के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, चिंता की कोई बात नहीं है और उनकी स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है। रात 2 बजे हुआ शुभांगी पाटिल का पार्टी प्रवेश डिप्टी सीएम के अस्पताल में भर्ती होने की वजह से ठाणे में होने वाले एक अहम सियासी कार्यक्रम में भी बदलाव करना पड़ा। दरअसल, ठाणे के गंगूबाई शिंदे हॉल में शुक्रवार दोपहर धुले से ठाकरे गुट की शिवसेना उपनेत्री शुभांगी पाटिल का पार्टी प्रवेश समारोह आयोजित होने वाला था। लेकिन एकनाथ शिंदे के अचानक बीमार पड़ने के कारण इसे टालना पड़ा। आखिरकार देर रात 2 बजे कल्याण के सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे की मौजूदगी में शुभांगी पाटिल ने ठाणे में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। वायरल बुखार और लगातार व्यस्तता के बीच अस्पताल पहुंचे शिंदे     प्रारंभिक जानकारी के अनुसार शुक्रवार दोपहर विधानसभा सत्र के दौरान ही एकनाथ शिंदे को तेज बुखार और कमजोरी महसूस होने लगी थी. शुरुआत में इसे सामान्य थकान माना गया, लेकिन शाम तक तबीयत में सुधार नहीं होने पर डॉक्टरों ने जांच की सलाह दी. देर रात उन्हें ठाणे के जुपिटर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है।      लगातार राजनीतिक बैठकों, विधानसभा सत्र और प्रशासनिक गतिविधियों के कारण पिछले कुछ दिनों से उन्हें पर्याप्त आराम नहीं मिल पा रहा था. डॉक्टरों का मानना है कि वायरल संक्रमण के साथ लगातार काम का दबाव भी उनकी तबीयत बिगड़ने की एक वजह हो सकता है. फिलहाल उनकी मेडिकल जांच जारी है और स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जा रही है।      शिवसेना (शिंदे गुट) के नेताओं ने बताया कि उपमुख्यमंत्री की स्थिति स्थिर है और उन्हें केवल निगरानी तथा आराम के लिए अस्पताल में रखा गया है. पार्टी की ओर से समर्थकों से अफवाहों पर ध्यान न देने और आधिकारिक जानकारी का इंतजार करने की अपील भी की गई है।  महत्वपूर्ण कार्यक्रम फिलहाल स्थगित स्वास्थ्य संबंधी समस्या के चलते एकनाथ शिंदे के कई राजनीतिक कार्यक्रम फिलहाल रद्द या स्थगित कर दिए गए हैं. शनिवार को प्रस्तावित एक महत्वपूर्ण पार्टी दीक्षांत समारोह में भी अब वह शामिल नहीं हो पाएंगे. इसके अलावा आगामी राजनीतिक दौरों की नई तारीख बाद में तय की जाएगी।  डॉक्टरों की निगरानी में चल रहा इलाज अस्पताल सूत्रों के अनुसार विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम लगातार उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है. वायरल बुखार और कमजोरी को देखते हुए उन्हें आराम करने की सलाह दी गई है. शुरुआती इलाज के बाद उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है और फिलहाल किसी गंभीर जटिलता की जानकारी सामने नहीं आई है।  राजनीतिक हलकों में बढ़ी चिंता महाराष्ट्र की राजनीति में एकनाथ शिंदे की अहम भूमिका को देखते हुए उनकी तबीयत बिगड़ने की खबर तेजी से फैल गई. सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई नेताओं ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है. फिलहाल पार्टी का कहना है कि डॉक्टरों की सलाह के बाद ही उनकी सार्वजनिक गतिविधियां दोबारा शुरू होंगी।  एकनाथ संभाजी शिंदे महाराष्ट्र के एक प्रमुख राजनेता हैं, जो वर्तमान में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री के रूप में कार्यरत हैं। शिंदे इससे पहले 30 जून 2022 से 5 दिसंबर 2024 तक महाराष्ट्र के 20वें मुख्यमंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं। राजनीति में उनकी शुरुआत 1980 के दशक में शिवसेना के दिग्गज नेता आनंद दीघे के मार्गदर्शन में हुई, जिसके बाद वे 1997 में ठाणे नगर निगम में पहली बार पार्षद चुने गए। ठाणे के कोपरी-पांचपाखाड़ी विधानसभा क्षेत्र से 2004 से लगातार विधायक रहे शिंदे ने 2022 के महाराष्ट्र राजनीतिक संकट के दौरान शिवसेना में बगावत का नेतृत्व किया, जिसके परिणामस्वरूप तत्कालीन महा विकास अघाड़ी (MVA) सरकार गिर गई थी और उन्होंने बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाई। फरवरी 2023 से वे शिवसेना के अध्यक्ष की भूमिका भी निभा रहे हैं, जब चुनाव आयोग ने उनके गुट को असली शिवसेना के रूप में मान्यता दी थी। 2024 के विधानसभा चुनावों के बाद हुए नेतृत्व परिवर्तन में, उन्होंने देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री बनने पर उपमुख्यमंत्री का पद संभाला।

चन्नी बन सकते थे पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष! पर्यवेक्षक समिति की सिफारिश के बावजूद हाईकमान ने बदला फैसला

चंडीगढ़  पंजाब कांग्रेस के भीतर एक बार फिर नेतृत्व को लेकर खींचतान तेज हो गई है. जानकारी के मुताबिक, पंजाब के राजनीतिक हालात का आकलन करने के लिए गठित कांग्रेस के तीन सदस्यीय ऑब्जर्वर पैनल ने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की पुरजोर सिफारिश की थी।  हालांकि, कांग्रेस हाईकमान ने इस आंतरिक फीडबैक को दरकिनार करते हुए अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को ही पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद पर बरकरार रखा. इस फैसले के बाद पार्टी के एक धड़े में भारी नाराजगी देखी जा रही है।  अजय माकन, मीनाक्षी नटराजन और भजन लाल जाटव की सदस्यता वाली इस हाई-प्रोफाइल कमेटी ने अपनी रिपोर्ट हाईकमान को सौंपी थी. कमेटी ने नेताओं को अलग-अलग समूहों में बांटा और उनसे अलग-अलग मुलाक़ात की. हर नेता से खास तौर पर पूछा गया कि क्या पंजाब में पार्टी के नेतृत्व में बदलाव होना चाहिए।  तमाम बड़े से छोटे नेताओ तक से ली थी राय कमेटी ने पंजाब के करीब 67 वरिष्ठ नेताओं से गहन विचार-विमर्श किया, जिसमें सीडब्ल्यूसी सदस्य, पूर्व मंत्री, विधायक, सांसद और जिला अध्यक्ष शामिल थे. जिनमें कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य, पूर्व मंत्री, विधायक, सांसद और DCC अध्यक्ष शामिल थे. उन्होंने अंबिका सोनी जैसे वरिष्ठ नेताओं से भी उनके आवास पर जाकर उनकी राय जानी।  सूत्रों के मुताबिक, इस गुप्त मंथन के दौरान एक अधिकांश नेताओं ने पिछले साढ़े चार साल से पद पर काबिज राजा वड़िंग के कामकाज पर असंतोष जाहिर किया और चन्नी को कमान सौंपने की वकालत की. कमेटी ने नेताओं के बयानों को ज्यों का त्यों शामिल किया और अपनी रिपोर्ट में चन्नी को सबसे लोकप्रिय चेहरा बताया था. इस प्रक्रिया की जानकारी रखने वाले एक वरिष्ठ सूत्र ने कहा कि चन्नी काफ़ी लोकप्रिय हैं और राज्य के अन्य कांग्रेस नेताओं की तुलना में पार्टी के भीतर सबसे ज़्यादा लोकप्रिय नेता हैं।  हाईकमान के फैसले पर उठे सवाल पैनल की रिपोर्ट के बाद चन्नी कैंप को पूरा भरोसा था कि पंजाब में लीडरशिप में बदलाव तय है, लेकिन हाईकमान ने यथास्थिति बनाए रखते हुए राजा वड़िंग को अध्यक्ष बनाए रखा और चन्नी को केवल चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया।  इस फैसले से हैरान कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने अपना गुस्सा जाहिर करते हुए कहा, "यह पूरी तरह से एक विफलता  है. जब नेतृत्व बदलने का कोई इरादा ही नहीं था, तो नेताओं से रायशुमारी करने का यह पूरा नाटक क्यों रचा गया? इसका मतलब है कि यह पूरी कवायद सिर्फ एक दिखावा थी।  चन्नी की ताकत पर दूसरे धड़े का पलटवार दूसरी तरफ, पंजाब कांग्रेस के भीतर एक दूसरा धड़ा इस राय से इत्तेफाक नहीं रखता. पार्टी के एक अन्य वरिष्ठ नेता ने चन्नी की वास्तविक पकड़ पर सवाल उठाते हुए कहा, "इसमें कोई शक नहीं कि चन्नी कांग्रेस के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से हैं और वे सभी निर्वाचन क्षेत्रों के नेताओं से संपर्क साध रहे हैं. लेकिन सवाल यह है कि वास्तव में उनके बुलाने पर कितने लोग आ रहे हैं? जब वे बैठकें बुलाते हैं, तो बमुश्किल चार-पांच विधायक पहुंचते हैं. हमारा मुकाबला भगवंत मान से है, ऐसे में अगले कुछ दिनों में तस्वीर साफ हो जाएगी कि चन्नी के साथ कितने लोग टिकते हैं।  पंजाब कांग्रेस में हाईकमान के इस फैसले ने संगठन के भीतर नए सवाल खड़े कर दिए हैं. अब देखने वाली बात होगी कि यह असंतोष आगे चलकर शांत होता है या चुनावी तैयारियों के बीच पार्टी के लिए नई चुनौती बनता है। 

राम मंदिर ट्रस्ट का बड़ा फैसला: दान काउंटिंग में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए लागू हुआ ‘नो-पॉकेट’ ड्रेस कोड

 लखनऊ,    राम मंदिर के दान काउंटिंग सिस्टम में सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए बड़ा बदलाव किया गया है. काउंटिंग हॉल में अब कर्मचारियों को सख्त सुरक्षा व्यवस्था और दोहरी जांच (डबल चेकिंग) के बाद ही प्रवेश दिया जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक, काउंटिंग कर्मचारियों के लिए अब नया ड्रेस कोड लागू किया गया है।  कर्मचारियों को बिना किसी जेब (पॉकेट) वाली डार्क ब्लू रंग की ड्रेस पहनना अनिवार्य होगा. इसके साथ ही काउंटिंग हॉल में प्रवेश से पहले प्रत्येक कर्मचारी को दो चरणों की सुरक्षा जांच से गुजरना होगा।  वहीं, काउंटिंग का कार्य अब कुर्सी-मेज पर नहीं, बल्कि जमीन पर बैठकर कराया जाएगा. मोबाइल फोन, कैमरा, बैग और अन्य निजी सामान काउंटिंग हॉल के अंदर ले जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है. कर्मचारियों को काउंटिंग हॉल में प्रवेश से पहले जूते-चप्पल भी बाहर ही उतारने होंगे।  इस बीच, राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला लगातार नए खुलासों के साथ सुर्खियों में बना हुआ है. इस मामले में आरोपी अनुकल्प मिश्रा को लेकर अहम जानकारी सामने आई है. जानकारी के मुताबिक, अनुकल्प मिश्रा के नाम पर मंदिर में 'व्यवस्था कार्यकर्ता' के तौर पर एंट्री पास जारी किया जाता था।  आरोप है कि मंदिर में होने वाले हर विशेष कार्यक्रम के दौरान अनुकल्प मिश्रा के नाम से एंट्री पास बनाया जाता था. दावा किया जा रहा है कि इसी व्यवस्था कार्यकर्ता वाले पास के जरिए उसे मंदिर परिसर में प्रवेश मिलता था. आरोप यह भी हैं कि इसी पास के आधार पर वह चढ़ावे की राशि की गिनती की प्रक्रिया में शामिल होता था। 

Heatwave in America: रिकॉर्ड गर्मी ने बिगाड़ा Independence Day Celebration, वॉशिंगटन DC में कई कार्यक्रम प्रभावित

 वॉशिंगटन  अमेरिका के पूर्वी तट पर भीषण गर्मी की वजह से कई राज्यों में स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम रद्द करने पड़े हैं. वॉशिंगटन डीसी में नेशनल मॉल पर लगा ग्रेट अमेरिकन स्टेट फेयर शुक्रवार को कुछ घंटों के लिए बंद कर दिया गया. गर्मी और नमी के कारण वहां तापमान 113 डिग्री फारेनहाइट (करीब 45 डिग्री सेल्सियस) तक महसूस हो रहा था. वर्जीनिया और मैरीलैंड के कई शहरों में परेड कैंसिल कर दी गई हैं. हालांकि कैपिटल फोर्थ कॉन्सर्ट को तय समय पर ही रखा गया है, बस सुरक्षा के लिए कुछ बदलाव किए गए हैं।  फेयर आयोजित करने वाली संस्था फ्रीडम 250 ने एक्स पर बयान जारी कर कहा कि उनके लिए मेहमानों, कर्मचारियों और कलाकारों की सुरक्षा सबसे जरूरी है, इसलिए फेयर को शाम पांच बजे तक बंद रखा गया. इसी गर्मी के चलते वर्जीनिया के लीसबर्ग और मैरीलैंड के लॉरेल तथा टकोमा पार्क में स्वतंत्रता दिवस की परेड रद्द कर दी गई हैं।  दूसरी तरफ, अमेरिकी कैपिटल पुलिस ने बताया कि शाम को होने वाला वार्षिक कैपिटल फोर्थ कॉन्सर्ट तय समय रात आठ बजे ही शुरू होगा, लेकिन गर्मी को देखते हुए दर्शकों के लिए गेट शाम सात बजे  खोले जाएंगे।  पुलिस ने लोगों से पानी की बोतलें साथ लाने की अपील की है. इस कॉन्सर्ट में पैटी लाबेल, एलन जैक्सन, शिकागो और कूल एंड द गैंग जैसे कलाकार परफॉर्म करेंगे. गुरुवार शाम हुई रिहर्सल में गर्मी की वजह से आम लोगों को जाने की इजाजत नहीं दी गई थी।  राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शाम को साउथ डकोटा जाकर माउंट रशमोर पर भाषण देंगे और आतिशबाजी देखेंगे. वे कल शाम वॉशिंगटन में भी भाषण देंगे, जिसके बाद बड़ा आतिशबाजी शो होगा।  भीषण गर्मी के कारण एमट्रेक ने भी उत्तर पूर्वी इलाके में कुछ ट्रेनें रद्द कर दी हैं, क्योंकि गर्मी से पटरियां प्रभावित हो सकती हैं. न्यूयॉर्क में मेयर जोहरान मामदानी ने बिजली बचाने की अपील की, जिस पर रिपब्लिकन नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। 

PM मोदीआज करेंगे जोधपुर के नए टर्मिनल ‘खास महल’ का उद्घाटन, यात्रियों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

जोधपुर राजस्‍थान के जोधपुर शहर में एक ‘खास महल’ तैयार हुआ है. इस खास महल की भव्‍यता किसी राजमहल से कम नहीं है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 जुलाई को इसका उद्घाटन करने वाले हैं. जी हां, यहां पर हम बात जोधपुर के नए एयरपोर्ट की कर रहे हैं. करीब 480 करोड़ रुपये की लागत से बने इस नए एयरपोर्ट की क्षमता हर साल 20 लाख यात्रियों को संभालने की है. इसका डिजाइन राजस्थान की शाही विरासत से प्रेरित है, जिसमें मेहराब और झरोखों का खूबसूरत इस्तेमाल किया गया है. वर्ल्‍ड क्‍लास सुविधाओं से लैस यह टर्मिनल जोधपुर के पर्यटन, व्यापार और रोजगार को नई रफ्तार देने वाला है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज  इसी एयरपोर्ट से मॉडिफाइड उड़ान स्‍कीम की शुरूआत करने जा रहे है।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 जुलाई 2026 की सुबह करीब 10:45 बजे वह जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन करेंगे। इसी कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री देश में क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने वाली मॉडिफाइड उड़ान स्‍कीम भी लॉन्च करेंगे। जोधपुर एयरपोर्ट का नया टर्मिनल भवन करीब 480 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है। वर्ल्‍ड क्‍लाइस सुविधाओं से लैस यह एयरपोर्ट पैसेंजर्स के ट्रैवल एक्‍सपीरियंस को बेहतर बनाने के मकसद से डिजाइन किया गया है।  23 हजार वर्गमीटर से अधिक क्षेत्र में फैला यह नया टर्मिनल हर साल करीब 20 लाख यात्रियों को संभालने में सक्षम होगा। इसमें आधुनिक चेक-इन सिस्टम, बेहतर वेटिंग एरिया, सुरक्षा व्यवस्था और यात्रियों की सुविधा के लिए कई नई सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। एयरपोर्ट में दिखेगी शहर की एतिहासिक झलक: जोधपुर के नए एयरपोर्ट टर्मिनल का डिजाइन शहर की ऐतिहासिक पहचान को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।  इसकी प्रेरणा 1931 में महाराजा उम्मेद सिंह द्वारा स्थापित 'जोधपुर फ्लाइंग क्लब' और राजपूताना स्थापत्य कला से ली गई है। टर्मिनल के इंट्री गेट पर विशाल नक्काशीदार गुंबद, कमल कलश, मेहराब और ग्लास फाइबर रीइन्फोर्स्ड कंक्रीट का इस्तेमाल किया गया है। टर्मिनल के अंदर स्थानीय कलाकारों की बनाई गई कलाकृतियां लगाई गई हैं. इनमें मरुधरा के पारंपरिक मोर, राजसी दरबार और मारवाड़ी संस्कृति को आधुनिक अंदाज में दर्शाया गया है। जोधपुर एयरपोर्ट को ऊर्जा बचत, जल संरक्षण और ग्रीन बिल्डिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, ताकि इसे 5-स्टार GRIHA रेटिंग मिल सके। जोधपुर एयरपोर्ट का नया टर्मिनल और मॉडिफाइड उड़ान स्‍कीम मिलकर राजस्थान सहित पूरे देश में पर्यटन, व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा करेंगे। 

मोनोकनी में मलाइका अरोड़ा का सिज़लिंग अंदाज, समंदर किनारे Photos देख फैन्स बोले- Wow!

मुंबई  बॉलीवुड डीवा मलाइका अरोड़ा ने एक बार फिर अपने ग्लैमरस अवतार से बिजलियां गिराई हैं. 52 साल की एक्ट्रेस ने लेटेस्ट वीडियो में कहर बरपाया है मलाइका ने बीच वेकेशन की वीडियो पोस्ट कर अपने मूड का खुलासा किया है. इसमें वो रेड कलर की प्रिंटेड मोनोकनी में बोल्डनेस दिखा रही हैं।मलाइका समंदर किनारे काउच पर लेटी हैं. सनबाथ लेते हुए वो मजे ले रही हैं. मलाइका सनग्लासेज पहने, नो मेकअप लुक में नजर आईं। मलाइका लेटी हुई हैं. वो झूम रही हैं. खुशी में डूबी हुई हैं. मलाइका ने अपनी टोन्ड फिगर फ्लॉन्ट की है। मलाइका कैमरे पर पोज देते हुए चहक रही हैं. उनकी बोल्ड अदाएं देखकर फैंस का कहना है कि वो स्टनिंग लग रही हैं. किसी ने मलाइका को फायर कहा। एक्ट्रेस का पहले भी बोल्ड अवतार देखने को मिला है. शख्स ने पूछा कि मलाइका के साथ इस वेकेशन पर कौन है. यूजर्स को लगता है वो अपने मिस्ट्री बॉयफ्रेंड संग हैं।  मलाइका ने इससे पहले भी इंटरनेट पर अपने बोल्ड अवतार को दिखाया है. बिकिनी और मोनोकनी में वो अक्सर पोस्ट शेयर करती हैं। एक्ट्रेस की फिटनेस को देखकर लोग दंग हैं. उन्होंने 52 साल की मलाइका को लेकर कहा कि वो बढ़ती उम्र के साथ और जवां दिख रही हैं. यूजर ने लिखा- कोई नहीं कहेगा वो 1 बेटे की मां हैं। 

Regular, Premium या Racing Fuel? ₹82 से ₹170 तक बिक रहे 5 तरह के पेट्रोल का फर्क समझिए

नई दिल्ली इंडियन ऑटो मार्केट एक बड़े फ्यूल ट्रांजिशन के दौर से गुजर रहा है, जहां ट्रेडिशनल फॉसिल फ्यूल की जगह तेजी से इथेनॉल-ब्लेंडेड फ्यूल को चलन में लाया गया है. प्रदूषण कम करने और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने के लिए सरकार ने देश में कई तरह के पेट्रोल ऑप्शन को बेचने शुरू कराया है. आज भारतीय मार्केट में नॉर्मल ऑक्टेन रेटिंग से लेकर हाई-परफॉर्मेंस और फ्लेक्स-फ्यूल कैटेगरी के कुल 5 पेट्रोल ऑप्शन बिक रहे हैं।  आपकी गाड़ी के इंजन, उसकी क्षमता और पर्यावरण के प्रति आपकी जिम्मेदारी के आधार पर इन फ्यूल्स को अलग-अलग कैटेगरी में रखा गया है और इनकी कीमतों में भी काफी ज्यादा अंदर है. आइए, भारत में उपलब्ध E20 से लेकर E85 तक के सभी प्रकार के पेट्रोल के बारे में जानते हैं. ये किस तरह की गाड़ियों के लिए हैं और इनकी फिलहाल कीमत क्या है? ये भी जानेंगे।  1. रेगुलर पेट्रोल (E20 – 91 Octane) ये भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाला सामान्य पेट्रोल है, जिसका इस्तेमाल हर आम बाइक, स्कूटर और कार में होता है. देश के सभी पेट्रोल पंपों पर अब ये फ्यूल 20% इथेनॉल मिश्रण यानी E20 स्टैंडर्ड के साथ ही मिल रहा है. 91 ऑक्टेन रेटिंग वाला ये पेट्रोल रोजमर्रा की शहर में ड्राइविंग और ईको-फ्रेंडली सफर के लिए सबसे सस्ता और व्यावहारिक विकल्प है. दिल्ली में इसकी कीमत फिलहाल ₹102.12/लीटर है।  2. प्रीमियम पेट्रोल (E20 – 95 Octane) इंडियन ऑयल का XP95 और हिंदुस्तान पेट्रोलियम का Power Petrol इस कैटेगरी में आते है. ये भी E20 स्टैंडर्ड (20% इथेनॉल) पर ही बेस्ड है, लेकिन इसकी ऑक्टेन रेटिंग 95 होती है. इसमें स्पेशल डिटर्जेंट एडिटिव्स मिले होते हैं जो इंजन के वाल्व को साफ रखते हैं. ये मॉडर्न टर्बो-पेट्रोल कारों और प्रीमियम स्कूटर्स के लिए बेहतरीन माइलेज और स्मूथ परफॉर्मेंस देता है. दिल्ली में इसकी कीमत फिलहाल ₹109.24/लीटर है।  3. सुपर-प्रीमियम पेट्रोल (0% Ethanol – 100 Octane) इंडियन ऑयल का XP100 इस कैटेगरी का सबसे बड़ा उदाहरण है. ये भारत का इकलौता पेट्रोल है, जो पूरी तरह से इथेनॉल-मुक्त (0% Ethanol) होता है और इसकी ऑक्टेन रेटिंग 100 होती है. ये फ्यूल बेहद महंगा है और इसे खासतौर पर सुपरकार्स, रेसिंग बाइक्स और विंटेज कारों के लिए तैयार किया गया है, ताकि उनके इंजनों को अधिकतम पावर मिल सके. दिल्ली में इसकी कीमत फिलहाल ₹170/लीटर है।  4. E85 पेट्रोल (Flex-Fuel) इसे फिलहाल फ्यूचर फ्यूल के हिसाब से देखा जा रहा है. E85 पेट्रोल केवल फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल्स (FFVs) के लिए पेश किया गया है. इसमें 85% तक इथेनॉल और सिर्फ 15% पेट्रोल होता है. टोयोटा, मारुति और हीरो मोटोकॉर्प ने मार्केट में E85 पर चलने वाले कुछ मॉडल्स उतारे हैं. ये पर्यावरण के लिए बेहद सुरक्षित और रेगुलर पेट्रोल से काफी सस्ता है, लेकिन इसे सिर्फ फ्लेक्स-फ्यूल इंजन वाली गाड़ियों में ही डाला जा सकता है. दिल्ली में इसकी कीमत फिलहाल ₹82.12/लीटर है।  5. E100 (प्योर इथेनॉल फ्यूल) केंद्रीय परिवहन मंत्रालय के सहयोग से भारत में E100 यानी 100% शुद्ध इथेनॉल ईंधन को भी हरी झंडी मिल चुकी है. ये पूरी तरह से गन्ने, मक्के और कृषि अपशिष्ट से बनने वाला बायोफ्यूल है, जिसमें पेट्रोल की एक बूंद भी नहीं होती. वर्तमान में चुनिंदा पायलट प्रोजेक्ट्स और विशेष रूप से डिजाइन की गई फ्लेक्स-फ्यूल बाइक्स और कारों में इसे इस्तेमाल किया जा रहा है. इसकी कीमत अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। 

Oil Import पर घटेगी निर्भरता? SBI रिपोर्ट में 2030 तक भारत की बड़ी तैयारी का खुलासा

नई दिल्‍ली ईरान-अमेरिका जंग के दौरान भारत को कच्‍चे तेल के आयात में दिक्‍कतों का सामना करना पड़ा था. स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के कारण कई देश से ज्‍यादा कीमत पर कच्‍चे तेल का आयात करना पड़ा, जिस कारण देश का आयात बिल काफी बढ़ गया।  अब देश अपने आयात बिल को कम करने पर फोकस कर रहा है. साथ ही एनर्जी को लेकर दूसरे देशों से निर्भरता को कम कर रहा है. जिसे लेकर सरकार ने इलेक्‍ट्रिक वाहनों को अपनाने की रफ्तार बढ़ा दी है और इसे प्रमोट भी कर रही है. नियामकी चीजों में ढील भी दी गई है. हर तरफ से सरकार का फोकस कच्‍चे तेल को लेकर दूसरे देशों पर निर्भरता कम करना है. इस बीच, SBI की रिपोर्ट में एक बड़ा खुलासा किया गया है।  SBI की रिपोर्ट कहती है कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो 2030 तक भारत एक बड़ा मुकाम हासिल कर लेगा, जिससे उसका आयात बिल 1 लाख करोड़ रुपये कम हो सकता है, जिससे भारत को एक बड़ी मदद मिलेगी. हालांकि, इसके लिए भारत को कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ सकता है. आइए जानते हैं… 2030 तक हो सकता है ये बड़ा बदलाव दरअसल, रिपोर्ट का कहना है कि मौजूदा रफ्तार को देखते हुए ऐसा लगता है कि 2027 से 2030 के बीच 35 लाख इलेक्ट्रिक वाहन, पेट्रोल वाहनों की जगह ले सकते हैं. अगर 2030 तक घरेलू ऑटो मार्केट में 20 फीसदी ईवी का हिस्‍सा होता है तो भारत का इम्‍पोर्ट बिल 1 लाख करोड़ रुपये तक कम हो जाएगा।  रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल मार्च से जून महीने के दौरान, हर महीने एवरेज 2.30 लाख ईवी वाहनों का रजिस्‍ट्रेशन हुआ है. यह 2025 तक हर महीने 1.3 लाख था. इसका मतलब है कि हर महीने ईवी रजिस्‍ट्रेशन की संख्‍या में करीब 1 लाख की बढ़ोतरी हुई है।  चार्जिंग इंफ्रा बढ़ाने पर जोर  SBI की रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि अलग-अलग राज्‍यों में चार्जिंग स्‍टेशनों को लेकर लोड अलग-अलग है. कुछ राज्‍यों में हर चार्जिंग स्‍टेशन 200 से ज्‍यादा ईवी की सेवा देते हैं और दूसरे राज्‍यों में यह संख्‍या 50 वाहनों तक ही सीमित है. भारत में ईवी चार्जिंग की सफलता, चार्जिंग स्‍टेशनों और ईवी इंफ्रा पर निर्भर करेगी. भारत में कुल 29,151 चार्जिंग स्‍टेशन हैं. इसमें भी कर्नाटक और महाराष्‍ट्र में कुल देश का 35 फीसदी ईवी इंफ्रा डेवलप है. रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि सबसे पहले हर राज्‍यों में चार्जिंग इंफ्रा को बढ़ाने पर जोर देना होगा।  दूसरे देशों पर निर्भरता होगी कम  अगर सरकार और राज्‍य पूरी क्षमता के साथ ईवी को प्रमोट करते हैं और उसके सफलता के लिए सही प्रयास किए जाते हैं तो यह कच्‍चे तेल के आयात में बड़ी कटौती कर सकती है. देश में पेट्रोल-डीजल पंपो की संख्‍या कम हो सकती है, क्‍योंकि ईवी के आने से ईंधन भरवाने की समस्‍या कम हो जाएगी. इस वजह से दूसरे देशों-खासकर मिडिल ईस्‍ट और अमेरिका जैसे दशों से कच्‍चे तेल की निर्भरता कम हो जाएगी। 

उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड हाईवे परियोजना पर हाईकोर्ट का स्टे, 27 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

 उज्जैन  मध्य प्रदेश की धर्मनगरी उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ-2028 के मद्देनजर निर्मित होने वाला उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड हाईवे विवादों से बाहर आने का नाम नहीं ले रहा है। पहले जावरा से लेकर उज्जैन तक किसानों ने इस सड़क का विरोध किया। मजबूरन सरकार ने इसे सामान्य हाईवे बनाने के साथ किसानों को चार गुना मुआवजा देने का ऐलान कर दिया। हालांकि किसानों को चार गुना मुआवजा मिला नहीं है। वहीं अब मप्र हाईकोर्ट (MP High Court) की इंदौर खंडपीठ ने उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड हाईवे परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण पर स्टे दे दिया है। न्यायालय ने गांव मंगरोला, सोडंग और झिरनिया उन्हेल के किसानों की याचिका पर सुनवाई कर विवादित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। इस स्टे पर आगामी सुनवाई 27 जुलाई को होगी। भूमि अधिग्रहण के नियमों का नहीं हो रहा पालन- याचिकाकर्ता याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता विशाल चौहान और आशुतोष जगताप ने तर्क दिया कि भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही उचित मुआवजा और पारदर्शिता अधिनियम 2013 के अनिवार्य प्रावधानों का पालन किए बिना की गई है। याचिका में बताया गया कि किसानों ने वैकल्पिक मार्ग, शासकीय भूमि के उपयोग और इंटरचेंज डिजाइन में बदलाव को लेकर आपत्तियां और सुझाव दिए थे। जिन पर प्रशासन द्वारा विधिसम्मत विचार नहीं किया गया। अधिवक्ताओं ने न्यायालय को यह भी अवगत कराया कि आपत्तियों की सुनवाई सक्षम प्राधिकारी के बजाय अन्य अधिकारी द्वारा की गई, जो सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है। प्रारंभिक सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि किसानों को अब तक मुआवजा राशि प्राप्त नहीं हुई है और इस मामले में कई महत्वपूर्ण वैधानिक प्रश्न विचारणीय हैं। तर्कों और तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने भूमि के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने का अंतरिम आदेश पारित किया। अधिवक्ता विशाल चौहान ने बताया कि उच्च न्यायालय के इस फैसले से मंगरोला, सोडंग और झिरनिया के प्रभावित किसानों को एक बड़ी और महत्वपूर्ण अंतरिम राहत मिली है। अन्य किसानों के लिए हो सकता है फायदा तीन गांवों के किसानों द्वारा हाईकोर्ट में याचिका लगाने और स्टे मिलने के बाद अन्य किसानों के लिए भी हाईकोर्ट जाने का रास्ता खुल गया है। क्योंकि अब भी क्षेत्र के कई किसानों को भूमि अधिग्रहण का मुआवजा नहीं मिला है। वहीं सरकार ने चार गुना मुआवजे की घोषणा की थी, परंतु नागदा-खाचरौद विधानसभा के ही कई किसानों को दोगुना मुआवजा ही दिया गया है। यहीं नहीं किसानों द्वारा जमीन अधिग्रहण का विरोध करने पर प्रशासनिक और पुलिस अमला उन्हें डरा भी रहा है। जिसके कई वीडियों भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए है। ऐसे में वह किसान जिन्हें मुआवजा नहीं मिला है और जमीन अधिग्रहण हो रही है, वह भी हाईकोर्ट की शरण ले सकते है।