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रतलाम में तापमान ने तोड़ा रिकॉर्ड, 46.5 डिग्री के साथ देश में चौथे स्थान पर

भोपाल प्रदेश में गर्मी के तेवर अधिक तीखे हो रहे हैं। झंझावाती मौसम में प्रदेश के पश्चिमी जिलों का तापमान रिकॉर्ड तोड़ रहा है। मंगलवार को रतलाम का अधिकतम तापमान 46.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जो सामान्य से 7.2 डिग्री अधिक है। यह प्रदेश का सबसे गर्म स्थान रहा। मौसम विभाग ने इसे देश के चौथे सबसे गर्म शहर के तौर पर चिह्नित किया है। मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक देश में सबसे अधिक तापमान राजस्थान के बाड़मेर में 47.3 डिग्री दर्ज हुआ। वहीं फलोदी में इसे 46.8 डिग्री दर्ज किया गया। राजस्थान के जैसलमेर और महाराष्ट्र के अकोला में तापमान रतलाम जैसा ही 46.5 डिग्री सेल्सियस रहा। बढ़ा रात का पारा और लू का प्रकोप दिन के तापमान में कई दिनों से वृद्धि के ट्रेंड की वजह से रात का तापमान भी बढ़ा है। प्रदेश के अधिकांश जिलों में न्यूनतम तापमान 24 से 29 डिग्री के बीच बना हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार मंगलवार को रतलाम और धार भीषण लू की चपेट में रहे। तो दूसरी तरफ चक्रवातीय परिसंचरण के चलते कुछ हिस्सों में मौसम बदल गया है। दक्षिण–पश्चिम बालाघाट में 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं और कहीं–कहीं ओले गिरे। इंदौर, धार जिले के मांडू, देवास, सीहोर, सागर, छिंदवाड़ा और रायसेन में धूल भरी आंधी चली। द्रोणी सक्रिय होने से आंधी और गरज–चमक की स्थिति राजधानी भोपाल में दोपहर तीन बजे के बाद धूप–छांव देखने को मिली, जिससे उमस भरी गर्मी महसूस की गई। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि दक्षिण–पश्चिम मध्य प्रदेश से लेकर मणिपुर तक एक द्रोणी सक्रिय है। इसके प्रभाव से नमी आ रही है, जो तेज गर्मी के साथ मिलकर आंधी और गरज–चमक की स्थिति पैदा कर रही है। हालांकि अगले कुछ दिनों तक रतलाम सहित पूरे प्रदेश में गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद कम है। प्रदेश में अगले 24 घंटों के दौरान दिन के तापमान में दो से चार डिग्री बढ़ने की संभावना जताई गई है। प्रदेश के चार बड़े शहरों का तापमान शहर अधिकतम तापमान न्यूनतम तापमान भोपाल 42.6 25.6 इंदौर 43.6 25.6 ग्वालियर 41.5 26.8 जबलपुर 42.0 25.2  

साइबर ठगी करने वाले दो अंतर्राज्यीय आरोपी झारखंड से गिरफ्तार

भोपाल प्रदेश में बढ़ते साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा लगातार कार्यवाही की जा रही है। इसी क्रम में नर्मदापुरम जिले की थाना बनखेड़ी पुलिस एवं साइबर सेल की संयुक्त टीम ने साइबर ठगी की वारदात में शामिल दो अंतर्राज्यीय आरोपियों को झारखंड राज्य के देवघर जिले से गिरफ्तार किया है। आरोपियों द्वारा फरियादी के बैंक खाते से 03 लाख 09 हजार 917 रुपये की ऑनलाइन ठगी की गई थी। प्राप्त जानकारी अनुसार फरियादी छोटेलाल कुशवाह पिता हरिसिंह कुशवाह, उम्र 45 वर्ष, निवासी ग्राम डूमर थाना बनखेड़ी जिला नर्मदापुरम ने 17 मार्च को शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके बैंक खाते से अज्ञात साइबर अपराधियों द्वारा ऑनलाइन माध्यम से कुल 03 लाख 09 हजार 917 रुपये की धोखाधड़ी की गई है। शिकायत पर थाना बनखेड़ी में प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई। पुलिस अधीक्षक नर्मदापुरम  साई कृष्णा एस. थोटा (IPS) के मार्गदर्शन में विशेष टीम का गठन किया गया। तकनीकी साक्ष्यों एवं साइबर विश्लेषण के आधार पर पुलिस टीम 02 मई को झारखंड रवाना हुई। पुलिस टीम ने अत्यंत सूझबूझ एवं गोपनीय तरीके से आरोपियों के निवास क्षेत्र में लगातार चार दिनों तक भेष बदलकर निगरानी की। इसके पश्चात 07 मई को देर रात्रि दबिश देकर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों में उमेश दास पिता शंकर दास उम्र 30 वर्ष निवासी ग्राम बिल्ली, मधुपुर जिला देवघर (झारखंड) तथा उत्तम कुमार दास पिता मनोज कुमार दास उम्र 23 वर्ष निवासी ग्राम गुनियासोल, मधुपुर जिला देवघर (झारखंड) शामिल हैं। आरोपियों के कब्जे से अपराध में प्रयुक्त मोबाइल फोन, बैंक पासबुक एवं एटीएम कार्ड जप्त किए गए हैं। ऐसे देते थे साइबर ठगी को अंजाम प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी नागरिकों के मोबाइल पर APK फाइल भेजते थे। जैसे ही पीड़ित उस फाइल को डाउनलोड एवं इंस्टॉल करता था, आरोपी उसके मोबाइल की जानकारी प्राप्त कर लेते थे। इसके बाद आरोपी पीड़ित के मोबाइल नंबर की eSIM तैयार कर लेते थे, जिससे बैंक खाते से जुड़े OTP एवं बैंकिंग अलर्ट सीधे आरोपियों तक पहुंचने लगते थे। इसी तकनीक का उपयोग कर फरियादी के बैंक खाते से अलग-अलग खातों में 03 लाख 09 हजार 917 रुपये ट्रांसफर किए गए। क्या होती है APK फाइल? APK (Android Package Kit) एंड्रॉयड मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम में उपयोग होने वाली एप्लीकेशन फाइल होती है। जिस प्रकार कम्प्यूटर में सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करने के लिए “.EXE” फाइल का उपयोग किया जाता है, उसी प्रकार एंड्रॉयड मोबाइल में एप्लीकेशन इंस्टॉल करने के लिए “.APK” फाइल का उपयोग किया जाता है। सामान्यतः APK फाइल वैध मोबाइल एप्लीकेशन इंस्टॉल करने के लिए उपयोग होती है, लेकिन साइबर अपराधी इन्हीं APK फाइलों का दुरुपयोग कर फर्जी एवं हानिकारक एप्लीकेशन तैयार कर लोगों के मोबाइल में इंस्टॉल कराते हैं। साइबर अपराधियों द्वारा व्हाट्सएप, सोशल मीडिया लिंक, टेलीग्राम चैनल एवं अन्य ऑनलाइन माध्यमों से APK फाइल भेजी जाती है। जैसे ही कोई व्यक्ति उस फाइल को डाउनलोड एवं इंस्टॉल करता है तथा मांगी गई परमिशन को अनुमति देता है, वैसे ही मोबाइल में मौजूद संवेदनशील जानकारी अपराधियों की पहुंच में आ जाती है। इसके माध्यम से आरोपी मोबाइल के SMS, OTP, बैंकिंग मैसेज, कॉन्टैक्ट, गैलरी एवं अन्य निजी जानकारी तक पहुंच प्राप्त कर लेते हैं और बाद में बैंक खातों से ऑनलाइन ट्रांजेक्शन एवं साइबर ठगी की वारदातों को अंजाम देते हैं। नागरिकों के लिए सावधानी एवं सुरक्षा संबंधी सुझाव मध्यप्रदेश पुलिस नागरिकों से अपील करती है कि किसी भी अज्ञात लिंक, APK फाइल या मोबाइल एप्लिकेशन को डाउनलोड एवं इंस्टॉल न करें। केवल अधिकृत एप स्टोर से ही एप डाउनलोड करें। किसी भी व्यक्ति के कहने पर मोबाइल स्क्रीन शेयर न करें और न ही बैंकिंग संबंधी ओटीपी, पिन या पासवर्ड साझा करें। यदि मोबाइल अचानक बंद हो जाए, नेटवर्क गायब हो जाए अथवा बिना जानकारी के eSIM एक्टिवेट होने का संदेश प्राप्त हो तो तुरंत अपने मोबाइल सेवा प्रदाता एवं बैंक से संपर्क करें। साइबर ठगी होने पर तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 अथवा वेबसाइट National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत दर्ज कराएं।  

विशिष्ट एवं अतिविशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने हेतु आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्यक्रम

भोपाल  पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने “VVIP/VIP Security & Protection Course” का आज विशेष शाखा प्रशिक्षण संस्थान, श्यामला हिल्स भोपाल में शुभारंभ किया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 12 मई से 15 मई 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण का उद्देश्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों को विशिष्ट एवं अतिविशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित मानक प्रक्रियाओं, समन्वय तंत्र, आकस्मिक परिस्थितियों में त्वरित कार्यवाही तथा आधुनिक सुरक्षा उपायों के संबंध में सैद्धांतिक एवं व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना है। उद्घाटन सत्र में महत्वपूर्ण विषयों पर पुलिस मुख्यालय, इंटेलिजेंस विंग, मुख्यमंत्री सुरक्षा शाखा, बी.डी.डी.एस. टीम, डॉग स्क्वॉड तथा अन्य विशेषज्ञ इकाइयों के वरिष्ठ अधिकारियों एवं विशेषज्ञ प्रशिक्षकों द्वारा सहभागिता करते हुए विषय विशेषज्ञ के रूप में मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम राज्य में विशिष्ट एवं अतिविशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा व्यवस्था को अधिक सुदृढ़, समन्वित, प्रभावी एवं तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा। इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (इंटेलिजेंस)  ए. साई मनोहर, पुलिस महानिरीक्षक (इंटेलिजेंस) डॉ. आशीष, उप पुलिस महानिरीक्षक (कानून व्यवस्था एवं सुरक्षा)  तरुण नायक, उप पुलिस महानिरीक्षक (इंटेलिजेंस)  डी. कल्याण चक्रवर्ती, सहायक पुलिस महानिरीक्षक (प्रशिक्षण) मती आभा तिर्की सहित विशेष शाखा के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

1.25 करोड़ बहनों को मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की मिलेगी 36वीं किश्त

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार 13 मई को नरसिंहपुर जिले के मुंगवानी में ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना’ की 36वीं किश्त जारी करेंगे। प्रदेश की 1 करोड़ 25 लाख 22 हजार 542 लाड़ली बहनों के बैंक खातों में 1,835 करोड़ 67 लाख 29 हजार 250 रूपये की राशि सिंगल क्लिक से अंतरित की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कार्यक्रम में विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन भी करेंगे। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना महिलाओं के जीवन में आर्थिक सुरक्षा, आत्मविश्वास और सम्मान का आधार बन चुकी है। नियमित आर्थिक सहायता से महिलाओं की परिवार के निर्णयों में भागीदारी बढ़ी है, पोषण एवं स्वास्थ्य स्तर में सुधार हुआ है और ग्रामीण तथा शहरी दोनों क्षेत्रों में महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। करोड़ों महिलाओं के जीवन में आया सकारात्मक परिवर्तन मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना ने मध्यप्रदेश में महिला कल्याण के क्षेत्र में एक नई मिसाल स्थापित की है। यह केवल आर्थिक सहायता योजना नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बन गई है। योजना से प्रदेश की महिलाओं के जीवन में व्यापक और सकरात्मक परिवर्तन आए है। नियमित आर्थिक सहायता ने महिलाओं को घरेलू खर्चों के प्रबंधन ने अधिक आत्मनिर्भर बनाया है, जिससे वे अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ बच्चों के पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य पर अधिक प्रभावी ढंग से खर्च कर पा रही है। योजना से प्राप्त राशि ने अनेक महिलाओं को स्व-सहायता समूहों, लघु उद्योगों और स्व-रोजगार गतिविधियों से जुड़ने के लिये प्रेरित किया है। इससे उनकी आय के अतिरिक्त स्त्रोत विकसित हुए है। आर्थिक रूप से सशक्त होने के साथ महिलाओं के परिवार के महत्वपूर्ण निर्णयों में भागीदारी बढ़ी है और उनकी राय को अधिक महत्व मिलने लगा है। बैंक खातों में सीधे राशि अंतरण की व्यवस्था ने महिलाओं को औपचारिक बैंकिग और वित्तीय सेवाओं से जोड़ा है। इससे बहनों में वित्तीय साक्षरता और आर्थिक आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है।  

Resolve applications received under the Good Governance Festival with seriousness and sensitivity: Principal Secretary Bora

रायपुर प्रमुख सचिव एवं दुर्ग जिले के प्रभारी सचिव  सोनमणि बोरा ने आज दुर्ग जिले के अधिकारियों की बैठक लेकर शासन की योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने बैठक में शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, विभागीय समन्वय और जनसमस्याओं के त्वरित समाधान पर विशेष जोर दिया। लोक निर्माण विभाग कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित बैठक में उन्होंने कहा कि दुर्ग जिला सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और प्रशासनिक दृष्टि से प्रदेश का महत्वपूर्ण जिला रहा है, इसलिए इसकी पहचान को बनाए रखते हुए अधिकारी बेहतर तालमेल के साथ कार्य करें। उन्होंने विभागीय समन्वय से दुर्ग जिले के मॉडल जिले के रूप में विकसत करने पर बल दिया।  प्रमुख सचिव  बोरा ने समीक्षा बैठक में कहा कि आमजनों को विभागीय सेवाओं का त्वरित लाभ मिले, यह अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि शासन की महत्वाकांक्षी सुशासन तिहार के अंतर्गत शिविरों में प्राप्त आवेदनों का गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित किया जाए। बैठक में कलेक्टर अभिजीत सिंह एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे। शुद्ध पेयजल, नाला सफाई और पीएम आवास पर जोर प्रभारी    सचिव  बोरा ने कहा कि ग्रीष्म ऋतु को देखते हुए आमजनों के लिए शुद्ध पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित हो। साथ ही आवश्यकतानुसार टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति भी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने बरसात पूर्व बड़े नालों सफाई कराने, अतिक्रमण हटाने तथा सैप्टिक टैंक सफाई में एसओपी का पालन करने के निर्देश भी दिए। इसके साथ ही नगरीय क्षेत्रों में स्वीकृत पीएम आवास निर्माण कार्यों को शीघ्र पूर्ण कराने तथा हितग्राही सम्मेलन आयोजित कर लोगों को निर्माण के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया। मनरेगा मजदूरी भुगतान शुरू, श्रमिकों तक जानकारी पहुंचाने के निर्देश बैठक में मनरेगा की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि दुर्ग जिले में 14 जनवरी 2026 से लंबित लगभग 30 करोड़ 83 लाख रुपये की मजदूरी राशि शासन द्वारा स्वीकृत कर दी गई है और श्रमिकों के खातों में भुगतान शुरू हो गया है। प्रभारी सचिव ने सभी जनपद पंचायत सीईओ और रोजगार सहायकों को निर्देशित किया कि वे श्रमिकों से सीधे संपर्क कर मजदूरी भुगतान संबंधी जानकारी साझा करें तथा भुगतान से जुड़ी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करें। लखपति दीदी, स्वास्थ्य और शिक्षा पर भी फोकस बैठक में बताया गया कि एनआरएलएम के तहत जिले में 78 हजार 411 लक्ष्य के विरुद्ध अब तक 37 हजार महिलाओं को “लखपति दीदी” बनाया जा चुका है। स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के दौरान प्रभारी सचिव ने संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने, शिशु मृत्यु दर को शून्य करने तथा सभी आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने स्कूलों और छात्रावासों के आसपास नशीले पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने तथा 16 जून तक सभी छात्रावासों में आवश्यक मरम्मत एवं सुधार कार्य पूर्ण कराने को कहा। किसानों को पारदर्शिता के साथ खाद और बीज कृषि विभाग को आगामी खरीफ सीजन के लिए उर्वरक वितरण की कार्ययोजना तैयार करने तथा पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंनेे कहा कि किसानों को पारदर्शिता के साथ खाद और बीज का वितरण किया जाए। रासायनिक खाद के कालाबाजारी करने वाले पर कड़ी कार्यवाही करने के निर्देश दिए। वन विभाग की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि किसान वृक्ष मित्र योजना के तहत जिले में एक लाख 46 हजार पौधरोपण का लक्ष्य निर्धारित है। साथ ही चीचा और बेलौदी क्षेत्र को वेटलैंड घोषित किया गया है। बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक  विजय अग्रवाल ने पुलिस विभाग की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी पावर पॉइंट प्रस्तुतीकरण के माध्यम से दी। बैठक में वनमंडलाधिकारी दीपेश कपिल, एडीएम वीरेन्द्र सिंह, अपर कलेक्टर योगिता देवांगन सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

पटना ब्लैकआउट ड्रिल 14 मई को, आपदा तैयारी का होगा अभ्यास

 पटना  राजधानी पटना में 14 मई की शाम 7 बजे सिविल डिफेंस ब्लैकआउट और मॉकड्रिल आयोजित किया जाएगा। हवाई हमले जैसी आपात स्थिति से निपटने की तैयारी और तंत्र की प्रभावशीलता जांचने के लिए यह अभ्यास किया जा रहा है। जिलाध‍िकारी डॉ. त्‍यागराजन एसएम ने लोगों से अपील की है कि निर्धारित समय पर अपने घर, दुकान और प्रतिष्ठानों की सभी लाइटें बंद रखें तथा किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह केवल पूर्व निर्धारित मॉकड्रिल है, वास्तविक खतरे जैसी कोई स्थिति नहीं है। दो मिनट बजेगा सायरन, फिर होगा ब्लैकआउट 14 मई को निर्धारित समय पर हवाई हमले की चेतावनी के रूप में दो मिनट तक सिविल डिफेंस का सायरन बजाया जाएगा। सायरन बजते ही ब्लैकआउट शुरू होगा। इस दौरान फायर ब्रिगेड, एम्बुलेंस, एनसीसी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, नगर निकाय, सिविल डिफेंस और पुलिस समेत आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी विभागों की तत्परता और समन्वय का परीक्षण किया जाएगा। इन इलाकों में होगा मॉक अभ्यास जिलाधिकारी ने बताया कि नागरिक सुरक्षा निदेशालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पटना नगर निगम क्षेत्र के अलावा दानापुर निजामत, खगौल और फुलवारीशरीफ में भी मॉकड्रिल और ब्लैकआउट कराया जाएगा। मॉक अभ्यास के लिए पटना समाहरणालय, बिस्कोमान भवन, बांकीपुर बस स्टैंड और इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) को सिमुलेशन साइट के रूप में चिन्हित किया गया है। छह तरह के आपदा परिदृश्यों का होगा अभ्यास प्रशासन के अनुसार मॉकड्रिल के दौरान छह प्रमुख परिदृश्यों पर अभ्यास किया जाएगा। इनमें एयर रेड अर्ली वार्निंग सिस्टम, ब्लैकआउट व्यवस्था, लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना, सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन, मेडिकल रिस्पॉन्स और फायर फाइटिंग शामिल हैं। प्रत्येक सिमुलेशन स्थल पर अलग-अलग आपदा परिस्थितियां तैयार कर राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास कराया जाएगा। आवश्यक सेवाओं पर नहीं पड़ेगा असर जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि मॉकड्रिल के दौरान आवश्यक सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी। अस्पतालों में ब्लैकआउट के लिए खिड़कियों पर क्यूबिकल पर्दे या प्राइवेसी कर्टेन का इस्तेमाल किया जाएगा ताकि मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो। प्रचार-प्रसार और नागरिक सहभागिता पर जोर जिला प्रशासन ने स्कूलों, व्यवसायिक संस्थानों और सिविल सोसाइटी संगठनों के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार करने का निर्देश दिया है ताकि अधिकतम नागरिक इस अभ्यास में भागीदारी कर सकें। 13 मई को पटना समाहरणालय में हवाई हमले पर आधारित टेबल-टॉप एक्सरसाइज भी आयोजित की जाएगी। कंट्रोल रूम रहेगा सक्रिय मॉकड्रिल के दौरान जिला आपातकालीन संचालन केंद्र और जिला नियंत्रण कक्ष 24 घंटे सक्रिय रहेंगे। किसी भी सूचना या सहायता के लिए लोग इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं:     जिला आपातकालीन संचालन केंद्र: 0612-2210118     जिला नियंत्रण कक्ष: 0612-2219810 / 2219234     आपातकालीन सेवा: 112 प्रशासन ने लोगों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि नागरिक सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए इस तरह के अभ्यास साल में कम-से-कम दो बार आयोजित किए जाते हैं।  

गाय संरक्षण पर सख्ती से बढ़ी अर्थव्यवस्था, यूपी में 36 हजार गिरफ्तारियां

लखनऊ भारतीय संस्कृति में गाय को जो स्थान प्राप्त है, वह न केवल आस्था का प्रश्न है, बल्कि यह समाज, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के अंतर्सबंधों की वह सुदृढ़ डोर है जिसने हजारों वर्षों से इस देश को जोड़े रखा है। भारतीय शास्त्र साहित्य में गाय की महिमा का गान अनगिनत स्थानों पर हुआ है और उन्हें विश्वस्य मातरः की संज्ञा दी गई है। अर्थात गाय पूरे विश्व की माता हैं। यही कारण है कि प्रत्येक सनातनी के हृदय में गोमाता के प्रति श्रद्धा का जो भाव है, वह पीढ़ी दर पीढ़ी, अनवरत प्रवाहित होता रहा। जब इस पवित्र परंपरा पर कोई आघात होता है तो वह केवल धार्मिक भावनाओं को आहत नहीं करता, बल्कि उस सभ्यतागत सूत्र को भी तोड़ने का प्रयास करता है जिस पर भारतीय समाज की नींव टिकी है। आज के समय में जब विकास की अंधी दौड़ में परंपराएं पीछे छूट रही हैं तो उत्तर प्रदेश में योगी सरकार गोसंरक्षण को सनातनी दृष्टि से स्थापित करती हुई दिखाई देती है। गोवंश की रक्षा का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संकल्प सिर्फ धार्मिक भावना तक ही नहीं है, बल्कि कानून व्यवस्था, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक चेतना से भी जुड़ा हुआ है। यह गोसंरक्षण से ग्रामोदय की राह है, जो व्यापक सामाजिक-आर्थिक अभियान के रूप में उभर आया है। गो संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल उत्तर प्रदेश में 2017 में जब योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी तो लोगों में विकास की उम्मीद के साथ यह आकांक्षा भी थी कि अब गोकशी के बढ़ते अपराधों, माफियाओं के आतंक और कानून के दुरुपयोग से मुक्ति मिलेगी। योगी सरकार ने सत्ता संभालते ही जनआकांक्षाओं को समझा और गोसंरक्षण को अपनी प्राथमिकताओं में सर्वोच्च स्थान दिया। अब जबकि सरकार के नौ साल पूरे हो चुके हैं, परिणाम सामने है। 2017 से 2025 के मध्य योगी सरकार ने गो हिंसा से जुड़े मामलों में लगभग 36 हजार आरोपितों को गिरफ्तार किया। यह आंकड़े मात्र प्रशासनिक उपलब्धियां नहीं, इस बात का प्रमाण भी है कि राज्य अब अपराधियों के समक्ष निरुपाय नहीं खड़ा, बल्कि राज्य शक्ति सनातन मूल्यों के रक्षार्थ सुदृढ़ता से खड़ी है। इन गिरफ्तारियों के साथ-साथ 13,793 आरोपियों के विरुद्ध गुण्डा अधिनियम के अन्तर्गत कार्रवाई की गई। 178 अभियुक्तों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाया गया और 14,305 मामलों में गैंगस्टर एक्ट का प्रयोग किया गया। इसके अतिरिक्त 83 करोड़ 32 लाख रुपये की सम्पत्ति जब्त की गई। इन कदमों से यह स्पष्ट संदेश गया कि गोमाता के प्रति हिंसा न केवल कानूनी दृष्टि से दंडनीय है, बल्कि सामाजिक व्यवस्था के विरुद्ध संगठित होकर साजिशें रचने वालों के खिलाफ राज्य पूरी कठोरता से कार्रवाई करेगा। अर्थव्यवस्था की रीढ़ गोमाता योगी सरकार की दृष्टि यह है कि जब गाय सुरक्षित रहेगी, जब वह स्वस्थ रहेगी, तो वह उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन सकती है। वर्तमान में इसे सुनिश्चित वास्तविकता के रूप में देखा जा सकता है। योगी सरकार ने गोशालाओं को केवल आश्रय स्थल नहीं, बल्कि उत्पादन केंद्रों के रूप में विकसित किया है। आज उत्तर प्रदेश में गाय के दूध से निर्मित पनीर, मक्खन, घी और अन्य दुग्ध उत्पाद न केवल स्थानीय बाजारों में बल्कि पूरे देश में अपनी पहचान बना रहे हैं। गोबर से बनाई जा रही जैविक खाद किसानों के लिए वरदान सिद्ध हो रही है। रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाकर किसान न केवल अपनी लागत कम कर रहे हैं बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ा रहे हैं। गोबर गैस संयंत्रों से ग्रामीण ऊर्जा आपूर्ति को नई दिशा मिल रही है। पर्यावरण के अनुकूल इस ऊर्जा का स्रोत न केवल ग्रामीण परिवारों की ईंधन समस्या हल कर रहा है, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में कमी में भी योगदान दे रहा है। पंचगव्य आधारित उत्पादों ने तो जैसे एक नई क्रान्ति ही ला दी है। आयुर्वेदिक औषधियों में गोघृत और पंचगव्य की मांग दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। गाय के गोबर से निर्मित दीये, अगरबत्ती, धूप और मूर्तियां धार्मिक बाजारों में बड़ी तेजी से स्थान बना रहे हैं। यह उद्योग न केवल राजस्व उत्पन्न कर रहा है, बल्कि लाखों ग्रामीण युवाओं को रोजगार भी दे रहा है। गोवंश आधारित उत्पादों के निर्माण में महिलाओं की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण बन रही है। कई स्वयं सहायता समूह गोबर से दीये, अगरबत्ती और अन्य उत्पाद बनाकर बाजार में बेच रहे हैं। इससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ रही है और वे आत्मनिर्भर बन रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह मॉडल सामाजिक परिवर्तन का बड़ा माध्यम है गोकशी किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं यह समझना जरूरी है कि गोकशी पर रोक केवल एक धार्मिक या भावनात्मक प्रश्न नहीं है। यह एक संगठित अपराध जगत की अर्थव्यवस्था से जुड़ा मुद्दा है। पूर्ववर्ती सरकारों के कालखंड में जो माफिया तंत्र पनपा था, उसने गोकशी को एक सुनियोजित उद्योग का रूप दे दिया था। योगी सरकार ने सत्ता संभालते ही स्पष्ट संदेश दिया कि प्रदेश में गोकशी और अवैध पशु वध को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी नीति के तहत गोकशी, पशु तस्करी और अवैध बूचड़खानों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया गया। सरकार ने कानून को और कठोर बनाते हुए उत्तर प्रदेश गोवध निवारण (संशोधन) अध्यादेश 2020 भी लागू किया जिसमें 10 वर्ष तक कठोर कारावास और 3 से 5 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया। समृद्धि व धर्म का आधार उत्तर प्रदेश ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक विकास के साथ जोड़ा है। गोसंरक्षण की नीति यह संदेश देती है कि विकास का मार्ग केवल आधुनिक तकनीक से नहीं, बल्कि परंपराओं के सम्मान से भी प्रशस्त होता है। जब सांस्कृतिक मूल्यों को आर्थिक विकास से जोड़ा जाता है, तब समाज में व्यापक सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देते हैं। शास्त्रों में गाय को समृद्धि और धर्म का आधार माना गया है। उत्तर प्रदेश में गोसंरक्षण भविष्य की समृद्धि का आधार बना है जिसमें संस्कृति और करुणा निहित है।

प्रमाण पत्र जारी करने में लापरवाही पड़ी भारी, गोंडा के पंचायत सचिवों पर कार्रवाई तय

गोंडा उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में ग्राम पंचायत सचिवालयों से आमजन को मिलने वाली सेवाओं में लापरवाही बरतने वाले ग्राम पंचायत सचिवों पर अब कार्रवाई तय मानी जा रही है। डीपीआरओ लालजी दूबे ने इस संबंध में सख्त निर्देश जारी करते हुए सभी सहायक विकास अधिकारियों (पंचायत) और ग्राम पंचायत सचिवों को पंचायत भवनों से नियमित रूप से प्रमाण पत्र जारी कराने के निर्देश दिए हैं। डीपीआरओ ने चेतावनी दी है कि लापरवारी पर मई माह का वेतन रोकने की कार्रवाई की जाएगी। डीपीआरओ कार्यालय से जारी पत्र में कहा गया है कि शासन के निर्देशों के बावजूद जिले की कई ग्राम पंचायतों में सीएससी के माध्यम से प्रमाण पत्र जारी करने का कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है। विभागीय समीक्षा में सामने आया कि जिले की कुल 1192 ग्राम पंचायतों में से वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक केवल 431 ग्राम पंचायतों द्वारा ही प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं। हैरानी की बात यह है कि 761 ग्राम पंचायतों में अभी तक यह कार्य शुरू भी नहीं हो पाया है। पत्र में पंचायत सहायकों और वीएलई के माध्यम से प्रत्येक ग्राम पंचायत में हर माह कम से कम 100 प्रमाण पत्र जारी कराने के निर्देश दिए गए हैं। इनमें जन्म प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र और ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र शामिल हैं। विकासखंडवार समीक्षा में इटियाथोक, करनैलगंज और पंडरी कृपाल ब्लॉक की स्थिति बेहतर पाई गई, जबकि कई विकासखंडों में कार्य संतोषजनक नहीं मिला। डीपीआरओ लालजी दूबे ने चेतावनी देते हुए कहा कि मई माह तक जिन ग्राम पंचायतों में प्रमाण पत्र जारी नहीं होंगे, वहां कार्यरत संबंधित ग्राम पंचायत सचिवों का वेतन रोक दिया जाएगा। काम न करने वाली कार्यकत्रियों की संविदा होगी समाप्त मनकापुर ब्लाक सभागार में बाल विकास परियोजनाधिकारी रमा सिंह की अध्यक्षता में सोमवार को बैठक का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि जिस कार्यकत्री के काम में लापरवाही मिली उसे नोटिस देने के बाद संविदा समाप्त करने की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी जाएगी। बैठक में ब्लॉक की समस्त आंगनबाडी कार्यकत्रियों के कार्यों की समीक्षा की गई। जिन आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के कार्यों में शिथिलता पाई गई। उन्हें कडी फटकार लगाते हुए शासन की मंशानुसार काम पूरा करके पोर्टल पर अपलोड करने की हिदायत दी गई। सीडीपीओ ने प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना की समीक्षा के दौरान सभी गांवों से लाभार्थियों का आवेदन लेकर योजना का लाभ दिलवाने का निर्देश दिया। कहा कि इस योजना में कोताही कतई बर्दास्त नहीं किया जायेगा। अपार आईडी बनवाने पर विशेष जोर देने के साथ समुदाय आधारित गतिविधियों को सम्पन्न कराने का निर्देश दिया।

अब टैंकर नहीं, सीधे गंगाजल से बुझेगी फरीदाबाद की प्यास

फरीदाबाद औद्योगिक नगरी से गंगाजल केवल 35 किलोमीटर दूर है। जिले को गंगाजल हापुड़ जिले के डेहरा गांव के पास से गुजर रही अपर गंगा कैनाल से मिलेगा। वहां से पाइप लाइन यमुना नदी को पार करते हुए जिले के अमीपुर गांव तक बिछाई जाएगी। यहीं पर इस पानी को साफ करने का प्लांट भी लगाया जाएगा। इसके बाद यह पानी शहर में भेजा जाएगा। सिंचाई विभाग ने इसका पूरा रूट तैयार कर मुख्यमंत्री कार्यालय भेज दिया है। अब प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी जल्द जलशक्ति मंत्री और उत्तर प्रदेश के मंत्री से मुलाकात करेंगे पता चला है कि इसी सप्ताह में दिल्ली में यह मुलाकात हो सकती है। इसके बाद योजना को सिरे चढ़ाया जाएगा। याद रहे गंगाजल को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी काफी गंभीर हैं। इसलिए अधिकारियाें को जल्द योजना का खाका तैयार करने के आदेश दिए गए थे। 3500 एमएम मोटाई की होगी पाइप लाइन दिनभर में अधिक गंगाजल आ सके, इसलिए 3500 एमएम मोटाई वाली पाइप लाइन बिछाई जाएगी। इसमें एक दिन में 500 एमएलडी पानी शहर में आ सकेगा। इतना पानी आने वाले 25 साल के लिए काफी होगा। इस लाइन को डालने में कहीं कोई अड़चन भी नहीं होगी, क्योंकि जहां से लाइन आएगी, वह पूरी जमीन उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की है। इसके बाद यमुना नदी और फिर अमीपुर गांव, यहां हरियाणा सिंचाई विभाग की जमीन है। बाकी प्लांट लगाने के लिए जमीन भी आसानी से मिल जाएगी। शहर तक लाइनें पहले से ही बिछी हुई हैं और योजना स्वीकृत होने के बाद नए सिरे से लाइन बिछा दी जाएंगी। मांग-आपूर्ति में बड़ा अंतर शहर की आबादी 30 लाख से अधिक है। शहर में पेयजल आपूर्ति की मांग 450 एमएलडी और आपूर्ति 330 एमएलडी हो रही है। यमुना नदी किनारे 22 रेनीवेल लगे हुए हैं। 12 और लगाने शुरू कर दिए हैं। फिलहाल शहर में पेजयल किल्लत है। मांग व आपूर्ति में अधिक अंतर होने की वजह से शहर की काफी आबादी टैंकरों के पानी पर निर्भर है। नगर निगम द्वारा टैंकर मुहैया नहीं कराए जाते। लोगों को अपने स्तर पर इंतजाम करना होता है। सबसे अधिक दिक्कत अरावली पहाड़ी के आसपास व एनआइटी क्षेत्र में है। पेयजल मुद्दे को लेकर जनप्रतिनिधि भी आमने-सामने हो जाते हैं। पेयजल सप्लाई को लेकर भेदभाव के आरोप लगते हैं। हांफने लगे हैं रेनीवेल मानसून में ही यमुना नदी में पानी होता है, बाकी महीनों में यह नाले के रूप में बहती है। इसलिए नदी किनारे लगे हुए रेनीवेल का भूजल लगातार खिसक रहा है। इसलिए चिंता बढ़ गई है। अब एफएमडीए और रेनीवेल लगा तो रहा है लेकिन अगले 20 से 30 साल के लिए अभी से पूरा इंतजाम करना जरूरी हो गया है। यमुना नदी किनारे लगे हुए रेनीवेल का भूजल स्तर हर साल खिसक रहा है। इसलिए आने वाले कुछ साल में और दिक्कत हो सकती है। इसलिए गंगा जल लाने की योजना पर काम किया जा रहा है। यह योजना स्वीकृत हो जाती है तो कई दशक तक पानी की दिक्कत नहीं होगी।     – विशाल बंसल, मुख्य अभियंता, एफएमडीए     हमारी ओर से पूरी तैयारी है। योजना का पूरा खाका तैयार कर मुख्यमंत्री कार्यालय भिजवा दिया है। स्वीकृति मिलते ही आगे की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।     – गौरव लांबा, कार्यकारी अभियंता, सिंचाई विभाग  

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अंतर्राष्ट्रीय नर्सेस दिवस पर नर्सों के सम्मान में नर्सिंग संवर्ग के पदनाम परिवर्तन की घोषणा की

रायपुर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अंतर्राष्ट्रीय नर्सेस दिवस पर राज्य की नर्सों के सम्मान में नर्सिंग संवर्ग के पदनाम परिवर्तन की बड़ी घोषणा की है। इस घोषणा के अनुसार "नर्सिंग सिस्टर" अब "सीनियर नर्सिंग ऑफिसर" कहलाएंगी जबकि स्टाफ नर्स का नाम नर्सिंग ऑफिसर होगा।     डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय रायपुर में अंतर्राष्ट्रीय नर्सेस दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम के अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने ये घोषणा की है। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नर्सिंग अधिकारी व नर्सिंग छात्र-छात्राओं के साथ अस्पताल के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मरीजों की सेवा में नर्सों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। नर्सें स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं, जो दिन-रात समर्पण भाव से मरीजों की देखभाल कर उन्हें नया जीवन देने का कार्य करती हैं। उन्होंने कहा कि चिकित्सा सेवा में मानवीय संवेदनाओं और सेवा भाव का सबसे बड़ा उदाहरण नर्सिंग स्टाफ प्रस्तुत करता है।  उन्होंने कोविड काल में नर्सिंग स्टाफ की सेवाओं को याद करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी नर्सों ने समर्पण और सेवा भाव के साथ कार्य किया। चिकित्सा सेवा में नर्स माँ के समान होती है। उनका दर्जा माँ के समान उच्च है क्योंकि वे मरीजों की देखभाल परिवार की तरह करती हैं।  स्वास्थ्य मंत्री ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। वर्षों से लंबित कई सुविधाओं और व्यवस्थाओं को पूरा किया जा रहा है। इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्री ने सीनियर नर्सिंग ऑफिसर डॉ. रीना राजपूत, नीलिमा शर्मा, रंजना सिंह ठाकुर, सुमन देवांगन, कोमेश्वरी नवरंगे, प्रगति सतपुते, शीतल सोनी और नमिता डेनियल सहित पूरे नर्सिंग ऑफिसर को बधाई देते हुए उनके कार्यों की सराहना की।