samacharsecretary.com

गाय संरक्षण पर सख्ती से बढ़ी अर्थव्यवस्था, यूपी में 36 हजार गिरफ्तारियां

लखनऊ भारतीय संस्कृति में गाय को जो स्थान प्राप्त है, वह न केवल आस्था का प्रश्न है, बल्कि यह समाज, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के अंतर्सबंधों की वह सुदृढ़ डोर है जिसने हजारों वर्षों से इस देश को जोड़े रखा है। भारतीय शास्त्र साहित्य में गाय की महिमा का गान अनगिनत स्थानों पर हुआ है और उन्हें विश्वस्य मातरः की संज्ञा दी गई है। अर्थात गाय पूरे विश्व की माता हैं। यही कारण है कि प्रत्येक सनातनी के हृदय में गोमाता के प्रति श्रद्धा का जो भाव है, वह पीढ़ी दर पीढ़ी, अनवरत प्रवाहित होता रहा। जब इस पवित्र परंपरा पर कोई आघात होता है तो वह केवल धार्मिक भावनाओं को आहत नहीं करता, बल्कि उस सभ्यतागत सूत्र को भी तोड़ने का प्रयास करता है जिस पर भारतीय समाज की नींव टिकी है। आज के समय में जब विकास की अंधी दौड़ में परंपराएं पीछे छूट रही हैं तो उत्तर प्रदेश में योगी सरकार गोसंरक्षण को सनातनी दृष्टि से स्थापित करती हुई दिखाई देती है। गोवंश की रक्षा का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संकल्प सिर्फ धार्मिक भावना तक ही नहीं है, बल्कि कानून व्यवस्था, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक चेतना से भी जुड़ा हुआ है। यह गोसंरक्षण से ग्रामोदय की राह है, जो व्यापक सामाजिक-आर्थिक अभियान के रूप में उभर आया है। गो संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल उत्तर प्रदेश में 2017 में जब योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी तो लोगों में विकास की उम्मीद के साथ यह आकांक्षा भी थी कि अब गोकशी के बढ़ते अपराधों, माफियाओं के आतंक और कानून के दुरुपयोग से मुक्ति मिलेगी। योगी सरकार ने सत्ता संभालते ही जनआकांक्षाओं को समझा और गोसंरक्षण को अपनी प्राथमिकताओं में सर्वोच्च स्थान दिया। अब जबकि सरकार के नौ साल पूरे हो चुके हैं, परिणाम सामने है। 2017 से 2025 के मध्य योगी सरकार ने गो हिंसा से जुड़े मामलों में लगभग 36 हजार आरोपितों को गिरफ्तार किया। यह आंकड़े मात्र प्रशासनिक उपलब्धियां नहीं, इस बात का प्रमाण भी है कि राज्य अब अपराधियों के समक्ष निरुपाय नहीं खड़ा, बल्कि राज्य शक्ति सनातन मूल्यों के रक्षार्थ सुदृढ़ता से खड़ी है। इन गिरफ्तारियों के साथ-साथ 13,793 आरोपियों के विरुद्ध गुण्डा अधिनियम के अन्तर्गत कार्रवाई की गई। 178 अभियुक्तों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाया गया और 14,305 मामलों में गैंगस्टर एक्ट का प्रयोग किया गया। इसके अतिरिक्त 83 करोड़ 32 लाख रुपये की सम्पत्ति जब्त की गई। इन कदमों से यह स्पष्ट संदेश गया कि गोमाता के प्रति हिंसा न केवल कानूनी दृष्टि से दंडनीय है, बल्कि सामाजिक व्यवस्था के विरुद्ध संगठित होकर साजिशें रचने वालों के खिलाफ राज्य पूरी कठोरता से कार्रवाई करेगा। अर्थव्यवस्था की रीढ़ गोमाता योगी सरकार की दृष्टि यह है कि जब गाय सुरक्षित रहेगी, जब वह स्वस्थ रहेगी, तो वह उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन सकती है। वर्तमान में इसे सुनिश्चित वास्तविकता के रूप में देखा जा सकता है। योगी सरकार ने गोशालाओं को केवल आश्रय स्थल नहीं, बल्कि उत्पादन केंद्रों के रूप में विकसित किया है। आज उत्तर प्रदेश में गाय के दूध से निर्मित पनीर, मक्खन, घी और अन्य दुग्ध उत्पाद न केवल स्थानीय बाजारों में बल्कि पूरे देश में अपनी पहचान बना रहे हैं। गोबर से बनाई जा रही जैविक खाद किसानों के लिए वरदान सिद्ध हो रही है। रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाकर किसान न केवल अपनी लागत कम कर रहे हैं बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ा रहे हैं। गोबर गैस संयंत्रों से ग्रामीण ऊर्जा आपूर्ति को नई दिशा मिल रही है। पर्यावरण के अनुकूल इस ऊर्जा का स्रोत न केवल ग्रामीण परिवारों की ईंधन समस्या हल कर रहा है, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में कमी में भी योगदान दे रहा है। पंचगव्य आधारित उत्पादों ने तो जैसे एक नई क्रान्ति ही ला दी है। आयुर्वेदिक औषधियों में गोघृत और पंचगव्य की मांग दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। गाय के गोबर से निर्मित दीये, अगरबत्ती, धूप और मूर्तियां धार्मिक बाजारों में बड़ी तेजी से स्थान बना रहे हैं। यह उद्योग न केवल राजस्व उत्पन्न कर रहा है, बल्कि लाखों ग्रामीण युवाओं को रोजगार भी दे रहा है। गोवंश आधारित उत्पादों के निर्माण में महिलाओं की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण बन रही है। कई स्वयं सहायता समूह गोबर से दीये, अगरबत्ती और अन्य उत्पाद बनाकर बाजार में बेच रहे हैं। इससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ रही है और वे आत्मनिर्भर बन रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह मॉडल सामाजिक परिवर्तन का बड़ा माध्यम है गोकशी किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं यह समझना जरूरी है कि गोकशी पर रोक केवल एक धार्मिक या भावनात्मक प्रश्न नहीं है। यह एक संगठित अपराध जगत की अर्थव्यवस्था से जुड़ा मुद्दा है। पूर्ववर्ती सरकारों के कालखंड में जो माफिया तंत्र पनपा था, उसने गोकशी को एक सुनियोजित उद्योग का रूप दे दिया था। योगी सरकार ने सत्ता संभालते ही स्पष्ट संदेश दिया कि प्रदेश में गोकशी और अवैध पशु वध को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी नीति के तहत गोकशी, पशु तस्करी और अवैध बूचड़खानों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया गया। सरकार ने कानून को और कठोर बनाते हुए उत्तर प्रदेश गोवध निवारण (संशोधन) अध्यादेश 2020 भी लागू किया जिसमें 10 वर्ष तक कठोर कारावास और 3 से 5 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया। समृद्धि व धर्म का आधार उत्तर प्रदेश ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक विकास के साथ जोड़ा है। गोसंरक्षण की नीति यह संदेश देती है कि विकास का मार्ग केवल आधुनिक तकनीक से नहीं, बल्कि परंपराओं के सम्मान से भी प्रशस्त होता है। जब सांस्कृतिक मूल्यों को आर्थिक विकास से जोड़ा जाता है, तब समाज में व्यापक सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देते हैं। शास्त्रों में गाय को समृद्धि और धर्म का आधार माना गया है। उत्तर प्रदेश में गोसंरक्षण भविष्य की समृद्धि का आधार बना है जिसमें संस्कृति और करुणा निहित है।

प्रमाण पत्र जारी करने में लापरवाही पड़ी भारी, गोंडा के पंचायत सचिवों पर कार्रवाई तय

गोंडा उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में ग्राम पंचायत सचिवालयों से आमजन को मिलने वाली सेवाओं में लापरवाही बरतने वाले ग्राम पंचायत सचिवों पर अब कार्रवाई तय मानी जा रही है। डीपीआरओ लालजी दूबे ने इस संबंध में सख्त निर्देश जारी करते हुए सभी सहायक विकास अधिकारियों (पंचायत) और ग्राम पंचायत सचिवों को पंचायत भवनों से नियमित रूप से प्रमाण पत्र जारी कराने के निर्देश दिए हैं। डीपीआरओ ने चेतावनी दी है कि लापरवारी पर मई माह का वेतन रोकने की कार्रवाई की जाएगी। डीपीआरओ कार्यालय से जारी पत्र में कहा गया है कि शासन के निर्देशों के बावजूद जिले की कई ग्राम पंचायतों में सीएससी के माध्यम से प्रमाण पत्र जारी करने का कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है। विभागीय समीक्षा में सामने आया कि जिले की कुल 1192 ग्राम पंचायतों में से वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक केवल 431 ग्राम पंचायतों द्वारा ही प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं। हैरानी की बात यह है कि 761 ग्राम पंचायतों में अभी तक यह कार्य शुरू भी नहीं हो पाया है। पत्र में पंचायत सहायकों और वीएलई के माध्यम से प्रत्येक ग्राम पंचायत में हर माह कम से कम 100 प्रमाण पत्र जारी कराने के निर्देश दिए गए हैं। इनमें जन्म प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र और ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र शामिल हैं। विकासखंडवार समीक्षा में इटियाथोक, करनैलगंज और पंडरी कृपाल ब्लॉक की स्थिति बेहतर पाई गई, जबकि कई विकासखंडों में कार्य संतोषजनक नहीं मिला। डीपीआरओ लालजी दूबे ने चेतावनी देते हुए कहा कि मई माह तक जिन ग्राम पंचायतों में प्रमाण पत्र जारी नहीं होंगे, वहां कार्यरत संबंधित ग्राम पंचायत सचिवों का वेतन रोक दिया जाएगा। काम न करने वाली कार्यकत्रियों की संविदा होगी समाप्त मनकापुर ब्लाक सभागार में बाल विकास परियोजनाधिकारी रमा सिंह की अध्यक्षता में सोमवार को बैठक का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि जिस कार्यकत्री के काम में लापरवाही मिली उसे नोटिस देने के बाद संविदा समाप्त करने की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी जाएगी। बैठक में ब्लॉक की समस्त आंगनबाडी कार्यकत्रियों के कार्यों की समीक्षा की गई। जिन आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के कार्यों में शिथिलता पाई गई। उन्हें कडी फटकार लगाते हुए शासन की मंशानुसार काम पूरा करके पोर्टल पर अपलोड करने की हिदायत दी गई। सीडीपीओ ने प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना की समीक्षा के दौरान सभी गांवों से लाभार्थियों का आवेदन लेकर योजना का लाभ दिलवाने का निर्देश दिया। कहा कि इस योजना में कोताही कतई बर्दास्त नहीं किया जायेगा। अपार आईडी बनवाने पर विशेष जोर देने के साथ समुदाय आधारित गतिविधियों को सम्पन्न कराने का निर्देश दिया।

अब टैंकर नहीं, सीधे गंगाजल से बुझेगी फरीदाबाद की प्यास

फरीदाबाद औद्योगिक नगरी से गंगाजल केवल 35 किलोमीटर दूर है। जिले को गंगाजल हापुड़ जिले के डेहरा गांव के पास से गुजर रही अपर गंगा कैनाल से मिलेगा। वहां से पाइप लाइन यमुना नदी को पार करते हुए जिले के अमीपुर गांव तक बिछाई जाएगी। यहीं पर इस पानी को साफ करने का प्लांट भी लगाया जाएगा। इसके बाद यह पानी शहर में भेजा जाएगा। सिंचाई विभाग ने इसका पूरा रूट तैयार कर मुख्यमंत्री कार्यालय भेज दिया है। अब प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी जल्द जलशक्ति मंत्री और उत्तर प्रदेश के मंत्री से मुलाकात करेंगे पता चला है कि इसी सप्ताह में दिल्ली में यह मुलाकात हो सकती है। इसके बाद योजना को सिरे चढ़ाया जाएगा। याद रहे गंगाजल को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी काफी गंभीर हैं। इसलिए अधिकारियाें को जल्द योजना का खाका तैयार करने के आदेश दिए गए थे। 3500 एमएम मोटाई की होगी पाइप लाइन दिनभर में अधिक गंगाजल आ सके, इसलिए 3500 एमएम मोटाई वाली पाइप लाइन बिछाई जाएगी। इसमें एक दिन में 500 एमएलडी पानी शहर में आ सकेगा। इतना पानी आने वाले 25 साल के लिए काफी होगा। इस लाइन को डालने में कहीं कोई अड़चन भी नहीं होगी, क्योंकि जहां से लाइन आएगी, वह पूरी जमीन उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की है। इसके बाद यमुना नदी और फिर अमीपुर गांव, यहां हरियाणा सिंचाई विभाग की जमीन है। बाकी प्लांट लगाने के लिए जमीन भी आसानी से मिल जाएगी। शहर तक लाइनें पहले से ही बिछी हुई हैं और योजना स्वीकृत होने के बाद नए सिरे से लाइन बिछा दी जाएंगी। मांग-आपूर्ति में बड़ा अंतर शहर की आबादी 30 लाख से अधिक है। शहर में पेयजल आपूर्ति की मांग 450 एमएलडी और आपूर्ति 330 एमएलडी हो रही है। यमुना नदी किनारे 22 रेनीवेल लगे हुए हैं। 12 और लगाने शुरू कर दिए हैं। फिलहाल शहर में पेजयल किल्लत है। मांग व आपूर्ति में अधिक अंतर होने की वजह से शहर की काफी आबादी टैंकरों के पानी पर निर्भर है। नगर निगम द्वारा टैंकर मुहैया नहीं कराए जाते। लोगों को अपने स्तर पर इंतजाम करना होता है। सबसे अधिक दिक्कत अरावली पहाड़ी के आसपास व एनआइटी क्षेत्र में है। पेयजल मुद्दे को लेकर जनप्रतिनिधि भी आमने-सामने हो जाते हैं। पेयजल सप्लाई को लेकर भेदभाव के आरोप लगते हैं। हांफने लगे हैं रेनीवेल मानसून में ही यमुना नदी में पानी होता है, बाकी महीनों में यह नाले के रूप में बहती है। इसलिए नदी किनारे लगे हुए रेनीवेल का भूजल लगातार खिसक रहा है। इसलिए चिंता बढ़ गई है। अब एफएमडीए और रेनीवेल लगा तो रहा है लेकिन अगले 20 से 30 साल के लिए अभी से पूरा इंतजाम करना जरूरी हो गया है। यमुना नदी किनारे लगे हुए रेनीवेल का भूजल स्तर हर साल खिसक रहा है। इसलिए आने वाले कुछ साल में और दिक्कत हो सकती है। इसलिए गंगा जल लाने की योजना पर काम किया जा रहा है। यह योजना स्वीकृत हो जाती है तो कई दशक तक पानी की दिक्कत नहीं होगी।     – विशाल बंसल, मुख्य अभियंता, एफएमडीए     हमारी ओर से पूरी तैयारी है। योजना का पूरा खाका तैयार कर मुख्यमंत्री कार्यालय भिजवा दिया है। स्वीकृति मिलते ही आगे की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।     – गौरव लांबा, कार्यकारी अभियंता, सिंचाई विभाग  

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अंतर्राष्ट्रीय नर्सेस दिवस पर नर्सों के सम्मान में नर्सिंग संवर्ग के पदनाम परिवर्तन की घोषणा की

रायपुर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अंतर्राष्ट्रीय नर्सेस दिवस पर राज्य की नर्सों के सम्मान में नर्सिंग संवर्ग के पदनाम परिवर्तन की बड़ी घोषणा की है। इस घोषणा के अनुसार "नर्सिंग सिस्टर" अब "सीनियर नर्सिंग ऑफिसर" कहलाएंगी जबकि स्टाफ नर्स का नाम नर्सिंग ऑफिसर होगा।     डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय रायपुर में अंतर्राष्ट्रीय नर्सेस दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम के अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने ये घोषणा की है। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नर्सिंग अधिकारी व नर्सिंग छात्र-छात्राओं के साथ अस्पताल के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मरीजों की सेवा में नर्सों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। नर्सें स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं, जो दिन-रात समर्पण भाव से मरीजों की देखभाल कर उन्हें नया जीवन देने का कार्य करती हैं। उन्होंने कहा कि चिकित्सा सेवा में मानवीय संवेदनाओं और सेवा भाव का सबसे बड़ा उदाहरण नर्सिंग स्टाफ प्रस्तुत करता है।  उन्होंने कोविड काल में नर्सिंग स्टाफ की सेवाओं को याद करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी नर्सों ने समर्पण और सेवा भाव के साथ कार्य किया। चिकित्सा सेवा में नर्स माँ के समान होती है। उनका दर्जा माँ के समान उच्च है क्योंकि वे मरीजों की देखभाल परिवार की तरह करती हैं।  स्वास्थ्य मंत्री ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। वर्षों से लंबित कई सुविधाओं और व्यवस्थाओं को पूरा किया जा रहा है। इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्री ने सीनियर नर्सिंग ऑफिसर डॉ. रीना राजपूत, नीलिमा शर्मा, रंजना सिंह ठाकुर, सुमन देवांगन, कोमेश्वरी नवरंगे, प्रगति सतपुते, शीतल सोनी और नमिता डेनियल सहित पूरे नर्सिंग ऑफिसर को बधाई देते हुए उनके कार्यों की सराहना की।

अंबाला बना मिसाल: फसल अवशेष प्रबंधन से बढ़ रही मिट्टी की उर्वरता और खेती का लाभ

फरीदाबाद  हरियाणा में गेहूं कटाई के बाद फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर किसानों में काफी जागरूकता देखने को मिल रही है. दरअसल पहले जहां खेतों में बचे डंठलों (फाने) और पराली को जला दिया जाता था. वहीं अब किसान वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर न केवल पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे रहे हैं, बल्कि अपनी भूमि की उर्वरता भी बढ़ा रहे हैं. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि फसल अवशेष जलाना खेती के लिए हानिकारक कदम है, क्योंकि इससे मिट्टी के लाभकारी सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं. जैविक कार्बन की मात्रा घटती है और खेत की उत्पादक क्षमता प्रभावित होती है. साथ ही इससे निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण और तापमान वृद्धि का कारण बनता है, यही वजह है कि कृषि विभाग लगातार किसानों को जागरूक कर रहा है और इसके साथ ही फसल अवशेष जलाने वाले किसानों पर कई जगह कानूनी कार्रवाई भी की जा रही हैं. पराली को जलाया नहीं बल्कि मिट्टी में मिला दिया बता दे कि इस दिशा में अंबाला जिला पूरे प्रदेश के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया है. क्योंकि इस वर्ष जिले में गेहूं की कटाई पूरी होने के बाद किसानों ने फसल अवशेषों का प्रबंधन अत्यंत जिम्मेदारी के साथ किया है. फसलों के फाने (डंठलों) को जलाने के बजाय किसानों ने रोटावेटर, हैप्पी सीडर और मल्चर जैसी आधुनिक मशीनों का उपयोग करके उन्हें मिट्टी में मिला दिया. इससे अवशेष धीरे-धीरे सड़कर प्राकृतिक खाद में परिवर्तित हो जाते हैं, जिससे मिट्टी में उर्वरक शक्ति बढ़ती है और जल धारण क्षमता मजबूत होती है. खासतौर पर इस वैज्ञानिक पद्धति से खेत की सेहत सुधरती है और आने वाली फसलों को बेहतर पोषण मिलने के साथ साथ पशुओं के लिए भूसे की व्यवस्था भी होती हैं. ढैंचा की खेती के लिए किया जा रहा जागरूक कृषि विभाग की निरंतर जागरूकता का परिणाम है. कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि गेहूं कटाई के बाद खाली पड़े खेतों का बेहतर उपयोग करने के लिए किसानों को ढैंचा की खेती के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है. क्योंकि ढैंचा एक महत्वपूर्ण दलहनी हरी खाद फसल है, जो मिट्टी में नाइट्रोजन स्थिर करती है और भूमि की प्राकृतिक उर्वरता को बढ़ाती है. इसकी खेती के लिए प्रति हेक्टेयर लगभग 25 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है ओर बुवाई के 30 से 40 दिन बाद इस फसल को खेत में पलटकर मिट्टी में मिला दिया जाता है, जिससे जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ती है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है. रासायनिक खाद से कम होती है उर्वरता लगातार यूरिया और डीएपी जैसे रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी के लाभकारी जीवों की संख्या घट रही है, जिससे भूमि की शक्ति कमजोर हो रही है और खेती की लागत बढ़ रही है.उन्होंने कहा कि ऐसे में ढैंचा जैसी हरी खाद फसलें किसानों के लिए कम खर्च में अधिक लाभ देने वाला विकल्प साबित हो रही हैं. सरकार भी इस पहल को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रति एकड़ ढैंचा की खेती पर 1,000 रुपये का अनुदान दे रही है तथा बीज सब्सिडी पर उपलब्ध करा रही है. वहीं अंबाला जिले के किसानों ने यह साबित कर दिया है कि यदि आधुनिक तकनीक, सरकारी योजनाओं और वैज्ञानिक सोच को अपनाया जाए तो खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सकता है. फसल अवशेष न जलाने और हरी खाद को अपनाने की यह पहल हरियाणा के अन्य जिलों के किसानों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बन रही है.

6000 एकड़ भूमि अधिग्रहण लक्ष्य के साथ नया गोरखपुर प्रोजेक्ट पर तेजी से काम शुरू

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृहजनपद गोरखपुर में विकास की तमाम योजनाएं परवान चढ़ रही हैं। इसी बीच नया गोरखपुर और वैदिक सिटी बसाने की योजनाएं भी अब जोर पकड़ने लगी हैं। इन योजनाओं के मूर्त रूप लेने पर बड़ी संख्या में लोगों के शानदार लाइफ स्टाइल के साथ स्वस्थ, साफ-सुथरा और सुखी जीवन जीने के सपने पूरे हो सकेंगे। गुरुकुल सिटी, वैदिक सिटी और ताल रिंग रोड जैसी प्रमुख परियोजनाओं को लेकर सोमवार को भूमि अर्जन विभाग की गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल ने समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसानों और भू-स्वामियों से संवाद स्थापित कर अधिकतम भूमि आपसी सहमति से खरीदने पर जोर दें। बैठक में विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति और भूमि अधिग्रहण की स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई। बताया गया कि नया गोरखपुर में 6000 एकड़ भूमि के अधिग्रहण का लक्ष्य है। 25 गांव में इसके लिए जमीन अधिग्रहित होनी है। प्राधिकरण उपाध्यक्ष को बैठक में बताया गया कि नया गोरखपुर के तहत गुरुकुल सिटी परियोजना मानीराम, रहमतनगर, बलापार और बैजनाथपुर गांव में विकसित हो रही। यहां मानीराम में 66.92 हेक्टेयर में से 40.80 हेक्टेयर, बलापार में 68.70 हेक्टेयर में से 40.56 हेक्टेयर और रहमतनगर में 17.44 हेक्टेयर में से 9.59 हेक्टेयर भूमि खरीदी जा चुकी है। वहीं बैजनाथपुर में 176.75 हेक्टेयर में से अभी केवल 2.15 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण हो सका है। बैठक में इन योजनाओं को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। दूसरी ओर करीब 251.89 हेक्टेयर में कोनी, माड़ापार और तकिया-मेदिनीपुर गांव में वैदिक अवधारणा पर वैदिक सिटी विकसित की जाएगी। यहां नक्षत्र वाटिका, वैदिक ज्ञान केंद्र, स्थानीय हस्तशिल्प जोन और पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था विकसित की जाएगी। कुसम्ही, रुद्रपुर, भैंसहा, अराजी मतौनी और अराजी बसदीला गांवों में भी भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। बैठक में इन सब योजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। जीडीए उपाध्यक्ष ने एक-एक योजना के बारे में जानकारी ली और आवश्यक दिशा निर्देश दिए। ताल रिंग रोड परियोजना की भी हुई समीक्षा इसके अलावा बैठक में ताल रिंग रोड परियोजना की भी समीक्षा की गई। प्राधिकरण उपाध्यक्ष को बताया गया कि महादेव झारखंडी टुकड़ा नंबर-1 में 2.66 हेक्टेयर भूमि की जरूरत है, जिसमें अब तक 0.20 हेक्टेयर भूमि ही खरीदी जा सकी है। बैठक में भूमि अधिग्रहण विभाग की कार्यप्रणाली, राजस्व निरीक्षकों और लेखपालों की जिम्मेदारियों, आपसी सहमति से भूमि खरीद की प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई। इस संबंध में गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) के उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल ने कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए।

कुचायकोट में छापेमारी के दौरान 16 संचालक गिरफ्तार, कई सबूत बरामद

गोपालगंज गोपालगंज जिले के कुचायकोट थाना क्षेत्र में पुलिस ने ऑर्केस्ट्रा नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए कई अड्डों पर छापेमारी की. इस दौरान 45 नाबालिग लड़कियों को छुड़ाया गया है. वहीं पांच युवतियों और 16 ऑर्केस्ट्रा संचालकों को गिरफ्तार किया गया. पुलिस को मौके से किशोरियों के उत्पीड़न से जुड़े कई अहम सबूत भी मिले हैं. यह कार्रवाई एसपी विनय तिवारी के निर्देश पर की गई. कुचायकोट थानाध्यक्ष दर्पण सुमन के नेतृत्व में पुलिस टीम ने कुचायकोट, बलिवन सागर और विंदवलिया भठवां इलाके में एक साथ छापेमारी अभियान चलाया. राजस्थान से लापता किशोरी भी मिली पुलिस जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. बरामद किशोरियों में एक लड़की ऐसी भी मिली, जो पिछले पांच वर्षों से राजस्थान से लापता थी. वहां के थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज है. पुलिस ने पूछताछ के बाद उसके परिजनों को सूचना दे दी है ताकि वे आकर अपनी बेटी को घर ले जा सकें. शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि बरामद लड़कियों में सबसे अधिक संख्या पश्चिम बंगाल की है. जबरन ऑर्केस्ट्रा में काम कराने का आरोप किशोरियों ने पूछताछ में आरोप लगाया कि उन्हें जबरन ऑर्केस्ट्रा में काम कराया जाता था. पुलिस अब पूरे नेटवर्क की जांच में जुट गई है. गिरफ्तार युवतियों और संचालकों से लगातार पूछताछ की जा रही है. पुलिस का कहना है कि सभी आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जेल भेजने की तैयारी की जा रही है. NGO ने भी किया सहयोग इस अभियान में पटना पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों के साथ ‘एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन’ और ‘नारायणी सेवा संस्थान’ की टीम ने भी सहयोग किया. दोनों संस्थाएं ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन’ नेटवर्क से जुड़ी हैं, जो देशभर में बाल संरक्षण पर काम करता है. यौन शोषण की आशंका एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन के वरिष्ठ निदेशक मनीष शर्मा ने कहा कि इस कार्रवाई ने नाबालिग लड़कियों की तस्करी और शोषण के बड़े नेटवर्क को उजागर किया है. उन्होंने कहा कि कई बच्चियों को झांसा देकर इस धंधे में धकेला जाता है और उनके यौन शोषण तक की आशंका सामने आई है.

पेपर लीक के बाद RPSC का बड़ा फैसला, SI परीक्षा दोबारा होगी

 अजमेर राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने मंगलवार को एक बड़ा फैसला लेते हुए साल 2021 की उप निरीक्षक (SI) और प्लाटून कमांडर भर्ती परीक्षा को आधिकारिक तौर पर रद्द कर दिया है. 12 मई 2026 को जारी प्रेस नोट के अनुसार, यह निर्णय परीक्षा में हुई धांधली और पेपर लीक के आरोपों की जांच के बाद लिया गया है. आयोग ने अब इस परीक्षा के पुन: आयोजन के लिए 20 सितंबर 2026 (रविवार) की तिथि निर्धारित की है. केवल पात्र अभ्यर्थियों को ही मिलेगा प्रवेश इस पुन: परीक्षा में सभी पुराने आवेदक शामिल नहीं हो सकेंगे. आयोग ने स्पष्ट किया है कि केवल वे 3,83,097 अभ्यर्थी ही इस परीक्षा में बैठने के पात्र होंगे, जिन्होंने सितंबर 2021 में आयोजित हुई मूल लिखित परीक्षा के दोनों प्रश्नपत्रों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी. जिन्होंने पूर्व में परीक्षा छोड़ दी थी, वे इस प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बन पाएंगे. आवेदन फॉर्म में 30 मई तक सुधार कर सकेंगे अभ्यर्थियों को अपने पुराने आवेदन पत्र में आवश्यक सुधार के लिए 16 मई से 30 मई 2026 तक का समय दिया गया है. इस दौरान उम्मीदवार अपने मोबाइल नंबर, ईमेल और पते जैसी जानकारियों को अपडेट कर सकेंगे. हालांकि, आयु सीमा और शैक्षणिक योग्यता का आधार साल 2021 के मूल नोटिफिकेशन के अनुसार ही रहेगा. आयोग ने कड़े निर्देश दिए हैं कि जिन अभ्यर्थियों को अपने फॉर्म में कोई बदलाव नहीं करना है, उन्हें भी पोर्टल पर जाकर 'संशोधन की आवश्यकता नहीं' की घोषणा करनी होगी और बायोमेट्रिक सहमति देनी होगी. इस प्रक्रिया को पूरा न करने पर अभ्यर्थी का आवेदन निरस्त माना जाएगा. विवादों के बाद सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख बताते चलें कि 859 पदों के लिए शुरू हुई यह भर्ती प्रक्रिया लंबे समय तक कानूनी विवादों और एसओजी (SOG) की जांच के घेरे में रही. डमी कैंडिडेट्स और नकल गिरोह की संलिप्तता के कारण कई ट्रेनी सब-इंस्पेक्टरों की गिरफ्तारियां भी हुई थीं. हाल ही में 4 मई को सुप्रीम कोर्ट ने भी इस भर्ती को रद्द करने के फैसले को बरकरार रखा, जिसके बाद आयोग ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पूरी परीक्षा को नए सिरे से कराने का निर्णय लिया है. कैसे मिलेगा एडमिट कार्ड? परीक्षार्थी नवीनतम अपडेट और सुधार प्रक्रिया के लिए RPSC की आधिकारिक वेबसाइट पर लॉग-इन कर सकते हैं. अभ्यर्थियों को अपनी एसएसओ (SSO) आईडी के माध्यम से OTR (One Time Registration) की केवाईसी प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य होगा, ताकि वे आगामी परीक्षा के लिए अपना एडमिट कार्ड प्राप्त कर सकें.

रामगढ़ के पतरातू प्लांट से अब 1600 मेगावाट बिजली उत्पादन, गर्मी में मिलेगी राहत

रामगढ़ झारखंड के रामगढ़ जिले के पतरातू स्थित पीवीयूएनएल प्लांट में 11 मई 2026 को शाम 7:15 बजे 800 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट-2 का सफलतापूर्वक ट्रायल ऑपरेशन किया गया. इस सफलता के साथ यूनिट-2 के नियमित संचालन और कमर्शियल ऑपरेशन का मार्ग प्रशस्त हो गया है. इस यूनिट के शुरू होने से झारखंड सहित अन्य राज्यों में गर्मी के मौसम के दौरान बढ़ी हुई बिजली मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी. इससे बिजली संकट को कम करने में अहम भूमिका निभाई जाएगी. झारखंड को मिलेगा 85 प्रतिशत बिजली रामगढ़ जिले के पतरातू प्रखंड स्थित पीभीयूएनएल का दूसरा यूनिट का सफलता पूर्वक ट्रायल हुआ इस यूनिट से 800 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा. इससे पहले यूनिट 1 से 800 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है. अब रामगढ़ जिले के पतरातू पीवीयूएनएल से 1600 मेगावाट बिजली उत्पादन होगा इसमें झारखंड राज्य को 1360 मेगावाट बिजली मिलेगा. गर्मी के मौसम में बिजली की मांग बढ़ी हुई है अब पतरातू से बिजली झारखंड को मिलने के बाद पूरे राज्य को फायदा होगा. पतरातू प्लांट से उत्पादित कुल बिजली का 85 प्रतिशत हिस्सा झारखंड राज्य को उपलब्ध होगी, जिससे औद्योगिकीकरण और विकास को गति मिलेगी. अधिकारियों ने मनाया सफलता का जश्न इस अवसर पर पीवीयूएनएल के सीईओ ए के सहगल, सीजीएम प्रोजेक्ट अनुपम मुखर्जी, जीएम ऑपरेशन एंड मैनेजमेंट मनीष खेतरपाल, जीएम जोगेश चंद्र पत्रा, जीएम विष्णु दत्ता दास और जीएम ओपी सोलंकी सहित पीवीयूएनएल, एनटीपीसी और बीएचईएल के अधिकारियों और कर्मचारियों खुशी जाहिर किया है. सीईओ ए के सहगल ने टीम को दी बधाई. सीईओ ए के सहगल ने सभी कर्मचारियों, अभियंताओं और सहयोगियों को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता पूरी टीम की मेहनत, समर्पण और सामूहिक कोशिश का परिणाम है. यूनिट-1 के बाद यूनिट-2 भी संचालन के लिए तैयार सीईओ ए के सहगल ने बताया कि 5 नवंबर 2025 को यूनिट-1 के वाणिज्यिक संचालन की घोषणा की गई थी और अब यूनिट-2 भी कमर्शियल ऑपरेशन के लिए पूरी तरह तैयार है. सहयोगी संस्थाओं का जताया आभार सीईओ ए के सहगल ने एनटीपीसी, झारखंड सरकार, जेबीवीएनएल और अन्य हितधारकों का उनके सहयोग और मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया.

आरसीबी को केकेआर के खिलाफ जीत जरूरी, प्लेऑफ की जंग तेज

रायपुर प्लेऑफ की दहलीज पर खड़ी रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) की टीम को अगर अंतिम चार में अपनी जगह लगभग सुनिश्चित करनी है तो उसके बल्लेबाजों को बुधवार को रायपुर में कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) के गेंदबाजों के सामने आक्रामक प्रदर्शन करना होगा। आरसीबी फिलहाल 14 अंकों के साथ अंक तालिका में शीर्ष पर है, लेकिन मंगलवार को होने वाले मैच के बाद इस स्थान पर सनराइजर्स हैदराबाद या गुजरात टाइटन्स काबिज हो जाएंगे जिनके पास भी 14 अंक हैं। कुछ मैचों में आरसीबी के बल्लेबाजों ने किया है निराश आरसीबी ने अब तक अच्छा प्रदर्शन किया है लेकिन पिछले कुछ मैच में उसके बल्लेबाज अपेक्षित खेल नहीं दिखा पाए। मुंबई इंडियंस के खिलाफ पिछले मैच में 167 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए उसकी बल्लेबाजी लड़खड़ा गई थी और उसने बमुश्किल जीत हासिल की थी। उसकी टीम आगे फिर से इस तरह की परिस्थिति से नहीं गुजरना चाहेगी। पिछले मैच में वह क्रुणाल पंड्या के अर्धशतक और अंतिम ओवर में भुवनेश्वर कुमार के छक्के से ही लक्ष्य तक पहुंच पाई थी। कप्तान रजत पाटीदार के प्रदर्शन में निरंतरता नहीं आरसीबी के कप्तान रजत पाटीदार ने टूर्नामेंट के शुरू में अच्छा प्रदर्शन किया था लेकिन पिछले कुछ मैच में वह रन बनाने के लिए जूझते हुए नजर आए। अगर आरसीबी को वापसी करनी है तो पाटीदार को आगे बढ़कर नेतृत्व करना होगा। पिछली छह पारियों में वह केवल एक बार पचास से अधिक और एक बार बीस से अधिक का स्कोर ही बना पाए हैं। इससे आरसीबी की मध्यक्रम की बल्लेबाजी कुछ कमजोर पड़ गई है, लेकिन देवदत्त पडिक्कल और टिम डेविड जैसे अन्य बल्लेबाजों के योगदान ने उसे मुश्किलों से बाहर निकलने में मदद मिली। अब उसके बल्लेबाजों का सामना केकेआर के मजबूत गेंदबाजी आक्रमण से होगा जिसमें सुनील नारायण और वरुण चक्रवर्ती जैसे रहस्यमयी स्पिनर शामिल हैं। उन्हें कार्तिक त्यागी, वैभव अरोड़ा और अनुकूल रॉय जैसे घरेलू गेंदबाजों का अच्छा सहयोग मिल रहा है। गेंदबाजों के अच्छे प्रदर्शन से केकेआर ने शुरू में लड़खड़ाने के बाद लगातार चार जीत दर्ज की हैं। अगर रायपुर की पिच पिछले मैच की तरह ही चिपचिपी रहती है और गेंद रुककर बल्ले पर आ रही हो तो आरसीबी के बल्लेबाजों को केकेआर के गेंदबाजों के सामने काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। पॉइंट्स टेबल में 8वें नंबर पर है तीन बार की चैंपियन KKR तीन बार की चैंपियन केकेआर की टीम अभी भी 10 मैचों में नौ अंकों के साथ तालिका में आठवें स्थान पर है और यहां थोड़ी सी चूक भी उसे प्ले-ऑफ की दौड़ से बाहर होने के करीब पहुंचा देगा। ऐसी किसी स्थिति से बचने के लिए केकेआर के बल्लेबाजों को अच्छा प्रदर्शन करना होगा। उन्हें आरसीबी के प्रमुख गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार और जोश हेज़लवुड का डटकर सामना करना होगा। केकेआर के कप्तान अजिंक्य रहाणे अपने प्रदर्शन में निरंतरता नहीं रख पाए हैं लेकिन उप-कप्तान रिंकू सिंह, न्यूजीलैंड के फिन एलन, अनुकूल रॉय और अंगकृष रघुवंशी ने पिछले कुछ मैचों में अच्छी बल्लेबाजी की है। इनके अलावा कैमरन ग्रीन में भी अपनी बल्लेबाजी में काफी सुधार किया है। टीम इस प्रकार हैं: रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु: रजत पाटीदार (कप्तान), विराट कोहली, टिम डेविड, जैकब बेथेल, रोमारियो शेफर्ड, जोश हेज़लवुड, नुवान तुषारा, देवदत्त पडिक्कल, जितेश शर्मा, क्रुणाल पंड्या, रसिख डार, भुवनेश्वर कुमार, जॉर्डन कॉक्स, सुयश शर्मा, वेंकटेश अय्यर, स्वप्निल सिंह, जैकब डफी, कनिष्क चौहान, अभिनंदन सिंह, मंगेश यादव, फिल साल्ट, सात्विक देसवाल, विक्की ओस्तवाल, विहान मल्होत्रा। कोलकाता नाइट राइडर्स: अजिंक्य रहाणे (कप्तान), रिंकू सिंह, अंगकृष रघुवंशी, मनीष पांडे, रोवमैन पॉवेल, राहुल त्रिपाठी, फिन एलन, तेजस्वी सिंह, टिम सीफर्ट, सुनील नारायण, अनुकूल रॉय, रमनदीप सिंह, कैमरन ग्रीन, सार्थक रंजन, दक्ष कामरा, रचिन रवींद्र, नवदीप सैनी, वैभव अरोड़ा, उमरान मलिक, मथीशा पथिराना, कार्तिक त्यागी, आकाश दीप, वरुण चक्रवर्ती, प्रशांत सोलंकी। समय: मैच शाम 7.30 बजे शुरू होगा।