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ब्रिज विवाद में सस्पेंड इंजीनियर्स की बहाली, मंत्री के नोटशीट निर्देश से हुआ फैसला

भोपाल  राजधानी भोपाल के चर्चित 90 डिग्री मोड़ वाले रेलवे ओवरब्रिज मामले में निलंबित किए गए सभी सात इंजीनियरों को लोक निर्माण विभाग ने बहाल करने की तैयारी कर ली है। इनमें दो चीफ इंजीनियर स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं। इस ओवरब्रिज के डिजाइन और निर्माण को लेकर देशभर में मध्य प्रदेश सरकार और पीडब्ल्यूडी की काफी आलोचना हुई थी। जानकारी के अनुसार, पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने बहाली संबंधी नोटशीट पर टिप्पणी करते हुए लिखा कि संबंधित अधिकारी जून 2025 से निलंबित हैं, इसलिए उन्हें पुनः सेवा में लिया जाए। इसके बाद विभाग ने बहाली आदेश जारी करने की तैयारी कर रहा है।  सस्पेंशन के दौरान दोनों तत्कालीन प्रभारी चीफ इंजीनियरों को ईएनसी कार्यालय से संबद्ध किया गया था, जबकि अन्य इंजीनियर भोपाल के फील्ड कार्यालयों में अटैच थे। अब बहाली के बाद सभी अधिकारियों की पदस्थापना ईएनसी कार्यालय में किए जाने की तैयारी है।   पहले जारी हो चुके थे आरोप पत्र जानकारी के अनुसार, सभी सात इंजीनियरों को पूर्व में आरोप पत्र जारी किए गए थे और उनसे जवाब मांगा गया था। डिजाइन से जुड़े अधिकारियों ने अपने जवाब में किसी प्रकार की गलती से इनकार किया। विभाग द्वारा जवाबों का परीक्षण करने के बाद अधिकांश अधिकारियों को बिना अतिरिक्त कार्रवाई के बहाल कर दिया गया।  इन अधिकारियों पर हुई थी कार्रवाई मामले में  चीफ इंजीनियर संजय खांडे, चीफ इंजीनियर जीपी वर्मा,  प्रभारी ईई शबाना रज्जाक, सहायक यंत्री शानुल सक्सेना, उप यंत्री उमाशंकर मिश्रा, प्रभारी एसडीओ रवि शुक्ला, प्रभारी ईई जावेद शकील और सेवानिवृत्त अधीक्षण यंत्री एमपी सिंह के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। आरोप था कि रेलवे की मंजूरी के बिना ड्राइंग अनुमोदन और डिजाइन से जुड़ी प्रक्रियाओं में गंभीर त्रुटियां हुईं। विभागीय जांच अभी जारी रहेगी पीडब्ल्यूडी ने स्पष्ट किया है कि कुछ अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच आगे भी जारी रहेगी। इसके लिए अलग से जांच अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जो दस्तावेज, बयान और साक्ष्यों का परीक्षण करेगा। यह प्रक्रिया अगले चार से पांच महीने तक चल सकती है। बताया गया है कि तत्कालीन चीफ इंजीनियर जीपी वर्मा, एसडीओ रवि शुक्ला और उप यंत्री उमाशंकर मिश्रा के मामलों में बहाली के साथ विभागीय जांच भी जारी रहेगी, जबकि अन्य अधिकारियों को फिलहाल राहत दे दी गई है।  ब्रिज का दोबारा हो रहा री-डिजाइन भोपाल के ऐशबाग क्षेत्र में बने इस रेलवे ओवरब्रिज का तीखा मोड़ शुरुआत से विवादों में रहा है। विशेषज्ञों ने इसे यातायात के लिहाज से जोखिमभरा बताया था। अब पीडब्ल्यूडी और रेलवे मिलकर ब्रिज के टर्निंग हिस्से का दोबारा डिजाइन तैयार कर रहे हैं, हालांकि निर्माण कार्य अभी शुरू नहीं हो पाया है। इससे क्षेत्र के हजारों लोगों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गौरतलब है कि मामला सामने आने के बाद पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया से तकनीकी जांच कराई थी। जांच रिपोर्ट में ब्रिज पर 35 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक गति से वाहन चलाने को खतरनाक बताया गया था।  

LG ने लॉन्च की 2026 होम अप्लायंसेस रेंज, जानें नए फीचर्स और कीमतें

LG ने 2026 के लिए अपनी नई होम अप्लायंसेस रेंज लॉन्च कर दी है. कंपनी ने इस बार फोकस सिर्फ प्रीमियम सेगमेंट पर नहीं रखा, बल्कि अफोर्डेबल-प्रीमियम सेगमेंट को भी काफी मजबूत किया है. इस लॉन्च में कंपनी ने Essential Series में कुछ नए प्रोडक्ट्स ऐड किए हैं, जिसे अक्टूबर 2025 में शुरू किया गया था. अब इसमें ज्यादा डिजाइन, अलग-अलग कैपेसिटी और अलग प्राइस रेंज जोड़ी गई है ताकि ज्यादा लोग इसे खरीद सकें. इसके साथ ही प्रीमियम कैटेगरी में भी कई नए प्रोडक्ट्स लाए गए हैं, जो बड़े घरों और एडवांस फीचर्स चाहने वाले यूजर्स को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं. LG का कहना है कि यह पूरा पोर्टफोलियो भारतीय जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. यानी ऐसे फीचर्स जो रोजमर्रा की जिंदगी में काम आएं और लंबे समय तक भरोसेमंद रहें. भारत में से एक्सपोर्ट करेगी कंपनी कंपनी अब भारत से बाहर भी इन प्रोडक्ट्स को भेजने की तैयारी में है. 2026 में Essential Series को एशिया, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका के 22 देशों में एक्सपोर्ट करने का लक्ष्य रखा गया है. रेफ्रिजरेटर की बात करें तो Essential Series में 225 लीटर, 251 लीटर और 276 लीटर के नए ऑप्शन जोड़े गए हैं. इनमें स्मार्ट इनवर्टर कंप्रेसर दिया गया है, जिससे बिजली की खपत कम होती है और आवाज भी कम आती है. स्मार्ट मोड खुद ही यूजर के इस्तेमाल के हिसाब से कूलिंग को एडजस्ट करता है. इसके अलावा कनवर्टिबल फीचर के साथ डेयरी मोड भी दिया गया है, जिससे फ्रीजर को जरूरत के हिसाब से फ्रिज में बदला जा सकता है. टर्बो फ्रेश जोन खाने को ज्यादा समय तक ताजा रखने में मदद करता है. इनकी शुरुआती कीमत करीब ₹25,500 रखी गई है. नए फीचर्स के साथ वॉशिंग मशीन वॉशिंग मशीन में भी कंपनी ने काफी बदलाव किए हैं. Essential Series में 8 किलो से 10 किलो तक की नई टॉप लोड मशीनें आई हैं. लो प्रेशर फिल फीचर कम पानी में भी कपड़े धोने में मदद करता है, जबकि इंटेलिजेंट ऑटो स्टार्ट बिजली जाने के बाद भी मशीन को वहीं से चालू कर देता है. इको वॉश और साड़ी मोड जैसे ऑप्शन भारतीय जरूरतों को ध्यान में रखकर दिए गए हैं. इस रेंज की कीमत ₹20,900 से शुरू होती है. इसके अलावा AX सीरीज की सेमी ऑटोमेटिक मशीनें भी लाई गई हैं, जिनकी कैपेसिटी 8 किलो से 12 किलो तक है. इसमें डुअल स्पिन शावर और रोलर जेट प्लसेटर जैसे फीचर्स दिए गए हैं, जो कपड़ों की गहरी सफाई में मदद करते हैं. इनकी शुरुआती कीमत ₹17,300 है. कुकिंग अप्लायंसेस में LG ने 28 लीटर के कनवर्टिबल कन्वेक्शन ओवन पेश किए हैं. इसमें एयर फ्राइ फीचर दिया गया है, जिससे कम तेल में खाना बनाया जा सकता है. चारकोल लाइटिंग हीटर टेक्नोलॉजी खाने का स्वाद बेहतर बनाती है. इसमें 330 से ज्यादा ऑटो कुक मेन्यू दिए गए हैं, जिनमें 28 भारतीय ब्रेड मेन्यू भी शामिल हैं. इसकी कीमत करीब ₹28,700 से शुरू होती है. 1.18 लाख रुपये का फ्रिज प्रीमियम सेगमेंट में कंपनी ने फ्रेंच डोर रेफ्रिज्रेटर लॉन्च किया है, जिसकी सबसे खास बात ऑटो आइस मेकर है, जो बिना पाइप कनेक्शन के बर्फ बना सकता है. इसकी कैपेसिटी 574 लीटर से 610 लीटर तक है और इसमें InstaView Door-in-Door, Hygiene Fresh+ और AI ThinQ जैसे स्मार्ट फीचर्स दिए गए हैं. इसकी शुरुआती कीमत ₹1.18 लाख है. इसके साथ साइड बाइ साइड फ्रिज भी आए हैं, जिनकी कैपेसिटी 790 लीटर तक जाती है. इनकी कीमत ₹1.09 लाख से शुरू होती है. प्रीमियम वॉशिंग मशीन में AI DD 2.0 टेक्नोलॉजी दी गई है, जो कपड़े के फैब्रिक और गंदगी को पहचानकर खुद ही सही वॉश सेटिंग चुनती है. इसमें Steam+ और माइक्रोप्लास्टि केयर जैसे फीचर्स भी हैं. इस रेंज की कीमत ₹62,900 से शुरू होती है. मिड सेगमेंट में TX सीरीज की टॉप लोड मशीनें आई हैं, जिनमें हार्ड वॉटर वॉश और स्टेन क्लीन जैसे फीचर्स दिए गए हैं. इनकी शुरुआती कीमत ₹32,400 है. डिशवॉशर सेगमेंट में LG ने 15 प्लेस सेटिंग वाला ट्रू स्टीम डिशवॉशर लॉन्च किया है, जो भारतीय बर्तनों को ध्यान में रखकर बनाया गया है. इसमें QuadWash टेक्नोलॉजी दी गई है, जिससे हर एंगल से सफाई होती है. इसकी कीमत ₹73,500 है. इसके अलावा कंपनी ने नए वॉटर प्यूरीफायर भी पेश किए हैं, जिनमें UV स्टेरिलाइजेशन और 7+ pH बैलेंस्ड पानी जैसे फीचर्स दिए गए हैं. इसकी शुरुआती कीमत ₹16,600 है.

पंजाब की शाही पेड़े वाली लस्सी, गर्मी में देती है ठंडक और ऊर्जा

पंजाब अपनी मेहमाननवाजी और खानपान के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है. यहां की पेड़े वाली लस्सी साधारण लस्सी से थोड़ी अलग और शाही होती है. यह लस्सी न केवल गाढ़ी और मलाईदार होती है बल्कि इसमें घुले हुए दूध के पेड़े इसका स्वाद कई गुना बढ़ा देते हैं. चिलचिलाती गर्मी में एक गिलास पेड़े वाली लस्सी पीते ही शरीर को गजब की ठंडक और ऊर्जा मिलती है. पंजाब में लस्सी को सिर्फ एक ड्रिंक नहीं बल्कि खुराक माना जाता है. पेड़े वाली लस्सी की शुरुआत अमृतसर और पटियाला जैसे शहरों से हुई. इसमें ताजे दही के साथ दूध को जलाकर बनाए गए खोया के पेड़े को मसलकर डाला जाता है. यह लस्सी आम लस्सी के मुकाबले काफी भारी और पौष्टिक होती है. इसमें ऊपर से डाली गई गाढ़ी मलाई की परत और सूखे मेवे इसे एक डेजर्ट जैसा अहसास देते हैं. पेड़े वाली लस्सी के लिए तैयार कर लें ये चीजें ताजा दही: 2 कप (गाढ़ा) दूध के पेड़े: 3-4 (मैश किए हुए) चीनी: 2 बड़े चम्मच (स्वादानुसार, क्योंकि पेड़ों में भी मिठास होती है) इलायची पाउडर: आधा छोटा चम्मच ठंडा दूध: आधा कप मलाई: ऊपर से डालने के लिए (ताजी) गार्निशिंग के लिए: बारीक कटे बादाम, पिस्ता और केसर के धागे बनाने का तरीका एक बड़े बर्तन या मिक्सी जार में गाढ़ा दही और मैश किए हुए पेड़े डालें. पारंपरिक स्वाद के लिए इसे मथनी से मथें. अगर मिक्सी का उपयोग कर रहे हैं, तो बहुत कम चलाएं ताकि दही से मक्खन अलग न हो. अब इसमें चीनी, इलायची पाउडर और थोड़ा ठंडा दूध मिलाएं. इसे तब तक मथें जब तक कि पेड़े दही के साथ अच्छी तरह मिल न जाएं और झाग न बन जाए. लस्सी को मिट्टी के कुल्हड़ या लंबे स्टील के गिलास में निकालें. ऊपर से एक बड़ी चम्मच ताजी मलाई डालें, फिर कटे हुए सूखे मेवे और केसर से इसे सजाएं.

गुलाब जल आइस क्यूब से स्किन को मिलता है नेचुरल ग्लो और ठंडक

गुलाब जल सदियों से भारतीय स्किन केयर का अहम हिस्सा रहा है. लोग इसे फेस पैक में मिलाकर, टोनर के रूप में या क्लींजर की तरह इस्तेमाल करते हैं.  यह स्किन से जुड़ी समस्याओं को कम करने, उसे हाइड्रेट रखने और चेहरे पर नेचुरल ग्लो लाने में मदद करता है. आज हम आपको घर पर गुलाब जल आइस क्यूब्स बनाने का आसान तरीका बताएंगे. ये क्यूब्स स्किन को ठंडक देने के साथ-साथ उसे फ्रेश और ग्लोइंग बनाने में भी मदद करते हैं. आइए जानते हैं घर पर गुलाब जल आइस क्यूब्स कैसे बना सकते हैं और इसे चेहरे पर लगाने का सही तरीका क्या है. इंग्रेडिएंट्स (ingredients) 2-3 चम्मच गुलाब जल 4-5 गुलाब के पत्तियां आइस ट्रे गुलाब जल आइस क्यूब्स बनाएं कैसे?     गुलाब जल आइस क्यूब बनाने के लिए गुलाब की पंखुड़ियों को तोड़कर अच्छे से धो लें.     इसके बाद एक बाउल लें और इसमें गुलाब जल डालें.     अब इसमें गुलाब की पंखुड़ियों को डालिए और अच्छे से मिलाएं. जरूरत हो तो थोड़ा पानी भी मिला लें.     अब इस मिश्रण को आइस ट्रे में डालें और जमाने के लिए फ्रिज में रख दें.     जब क्यूब्स अच्छी तरह जम जाएं तो आपका गुलाब जल आइस क्यूब तैयार है.     इस आइस क्यूब्स को साफ चेहरे पर लगाकर मसाज करें. गुलाब जल आइस क्यूब्स  चेहरे पर कैसे लगाएं ? गुलाब जल आइस क्यूब्स चेहरे पर लगाने से पहले फेस को अच्छे से साफ कर सुखा लें. अब एक आइस क्यूब लेकर उसे हल्के-हल्के गोल घुमाते हुए पूरे चेहरे पर मसाज करें. मसाज के बाद चेहरे को वैसे ही छोड़ दें. थोड़ी देर बाद चेहरे पर मॉइश्चराइजर लगा लें. बेहतर रिजल्ट के लिए इसे हफ्ते में दो से तीन बार इस्तेमाल कर सकते हैं. इन बातों का रखें ध्यान इन आइस क्यूब्स को आप 10-15 दिन तक फ्रिज में रखकर इस्तेमाल कर सकते हैं. वैसे तो घर पर बने गुलाब जल आइस क्यूब्स बिल्कुल सेफ होते हैं. लेकिन बहुत ज्यादा सेंसिटिव स्किन वाले लोगों को इसका इस्तेमाल करने से बचना चाहिए. इसके अलावा, जिन लोगों को चेहरे पर पहले से पिंपल्स, एक्ने या स्किन इंफेक्शन की समस्या है, उन्हें भी इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

ड्राइवरलेस ट्रेनों के साथ यूपी मेट्रो में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मेंटेनेंस और ऑटोमैटिक कंट्रोल सिस्टम

लखनऊ यूपी में मेट्रो का नया ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिहाजा और उन्नत तकनीक से युक्त होगा। सफर के दौरान समस्या आने पर यात्री कोच में लगे इंटरकॉम से जब ऑपरेशन कंट्रोल और सिक्योरिटी कंट्रोल रूम से संपर्क करेगा तो कोच की लाइव फुटेज इन दोनों ही स्थानों पर तैनात कर्मचारी देख सकेंगे। ऐसे में उस तक तुरंत मदद पहुंचाने में आसानी होगी। लखनऊ मेट्रो के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर (फेज-1 बी) के लिए 15 अत्याधुनिक ट्रेन सेट और सिग्नलिंग सिस्टम के डिजाइन और निर्माण के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है। यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता हुए सभी कोचों में पैसेंजर इमरजेंसी इंटरकॉम (पीईआई बटन) की सुविधा हलगी। इस बटन को दबाते ही यात्री सीधे ट्रेन ऑपरेटर से संपर्क कर सकेंगे और अपनी समस्या बता सकेंगे। जिस कोच से कॉल किया जाएगा उसकी लाइव फुटेज ड्राइवर केबिन, ऑपरेशन कंट्रोल रूम और सिक्योरिटी कंट्रोल रूम में दिखाई देगी। ट्रेन के अगले स्टेशन पर पहुंचते ही सुरक्षा टीम तुरंत मदद के लिए मौजूद रहेगी। एआई आधारित प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस … मेट्रो ट्रेन के ट्रेन कंट्रोल एंड मैनेजमेंट सिस्टम (टीसीएमएस टीजीसी) को कम्प्यूटरीकृत मेंटेनेंस मैनेजमेंट सिस्टम (सीएमएमएस) से जोड़ा जाएगा। इस व्यवस्था में सर्वर सीधे ट्रेनों से जुड़ा रहेगा, जिससे ट्रेनों के डेटा की ऑनलाइन मॉनिटरिंग और डाउनलोडिंग होगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से प्रिवेंटिव और प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस किया जाएगा। इसमें किसी भी फाल्ट का पता चलते ही स्वतः जॉब कार्ड तैयार होने की सुविधा भी होगी। यूपीएमआरसी के एमडी, सुशील कुमार ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर पर चलने वाली ट्रेनें सुरक्षा और ऊर्जा बचत में विश्वसनीय और बेहतर होंगी। ड्राइवर लेस ट्रेन का संचालन होगा संभव ट्रेनें अनअटेंडेड ट्रेन ऑपरेशन (यूटीओ) ) मोड पर संचालित होंगी, जिससे उनका संचालन पूरी तरह "ड्राइवर लेस" होगा। इस प्रणाली के तहत ट्रेनें कम्युनिकेशन-बेस्ड ट्रेन कंट्रोल (सीबीटीसी) जैसी उन्नत तकनीक की मदद से स्वतः संचालित होंगी। गति भी नियंत्रित करेंगी। साथ ही ऑपरेशंस कंट्रोल सेंटर (ओसीसी) प्रणाली से सुरक्षित दूरी बनाते हुए चलेंगी। किसी भी तकनीकि या अन्य समस्या की स्थिति में स्वतः ब्रेक लग जाएगा। ट्रेनों में सीओटू सेंसर आधारित एचवीएसी सिस्टम लगाया जाएगा। यह सिस्टम से एसी की कूलिंग अपने आप एडजस्ट करेगा। इससे यात्रियों को बेहतर आराम मिलेगा और ऊर्जा की बचत भी होगी। लखनऊ मेट्रो के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर (चारबाग से बसंतकुंज) पर बिना ड्राइवरों वाली ट्रेनें दौड़ेंगी। कंट्रोल सिस्टम से इनका संचालन होगा, जिससे इससे सुरक्षा और पुख्ता होगी। मेट्रो प्रशासन ने शुक्रवार को 15 ड्राइवरलेस ट्रेन सेट और सिग्ननलिंग सिस्टम के डिजाइन और निर्माण के लिए टेंडर जारी किया।

घर की अलमारियों का सही उपयोग और दिशा से जुड़ा वास्तु प्रभाव

अक्सर हम अपने घर में जरूरत के हिसाब से अलग-अलग तरह की अलमारियां रखते हैं. लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार इन अलमारियों का असर हमारी जिंदगी पर भी पड़ता है. अलमारियां सिर्फ सामान रखने की जगह नहीं होती हैं, बल्कि ये बचत, सुरक्षा और सुख-समृद्धि का प्रतीक भी मानी जाती हैं. माना जाता है कि घर की अलग-अलग अलमारियों का संबंध अलग-अलग ग्रहों से होता है. अगर इन्हें सही तरीके से रखा जाए और व्यवस्थित रखा जाए, तो जीवन में सुख, समृद्धि और स्थिरता बनी रहती है. 1. कपड़ों की अलमारी कपड़ों की अलमारी का संबंध शुक्र ग्रह से माना जाता है. अगर यह अलमारी साफ और व्यवस्थित रहती है, तो घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता बनी रहती है. – कपड़ों की अलमारी में कपड़े ही रखें. – इसमें रुपया-पैसा या गहने रखने से बचें, क्योंकि मान्यता है कि इससे धन टिकता नहीं है. – जरूरी दस्तावेज या महत्वपूर्ण कागज इसमें रखे जा सकते हैं. – अलमारी हमेशा साफ और व्यवस्थित रखें. 2. रसोई की अलमारी रसोई की अलमारी का संबंध सूर्य ग्रह से माना जाता है. इसमें बर्तन, मसाले और रसोई का सामान रखा जाता है. – रसोई की अलमारी को हमेशा साफ रखें. – मसाले और अनाज अलग-अलग रखें. – कांच और धातु के बर्तन अलग रखने चाहिए. – कोशिश करें कि रसोई की अलमारी पूरी तरह बंद न हो, हल्के पारदर्शी दरवाजे वाली अलमारी बेहतर मानी जाती है. – महीने में कम से कम एक बार इसकी अच्छी तरह सफाई जरूर करें. मान्यता है कि अगर रसोई की अलमारी अस्त-व्यस्त रहती है, तो घर में तनाव और छोटी-छोटी परेशानियां बढ़ सकती हैं. 3. पैसे की अलमारी जिस अलमारी में पैसा, गहने और कीमती सामान रखा जाता है, उसका संबंध बृहस्पति ग्रह से माना जाता है. – धन की अलमारी घर के दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखना शुभ माना जाता है. – अलमारी का दरवाजा उत्तर या पूर्व दिशा की ओर खुलना अच्छा माना जाता है. – धन की अलमारी का रंग काला नहीं होना चाहिए. – अलमारी पर लाल रंग का स्वस्तिक बनाना शुभ माना जाता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, अगर घर की अलमारियां सही दिशा में और व्यवस्थित रखी जाएं, तो इससे घर में सुख, शांति और आर्थिक स्थिरता बनी रहती है.

घर में सुख-शांति और धन वृद्धि के लिए 9 शुभ पौधों का सही दिशा में चयन जरूरी

 भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर शांति की तलाश करते हैं.  इसी शांति की तलाश लिए कई लोग अपने घरों में कई सारे पौधे भी लगाते हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में वे यह भूल जाते हैं कि हर पौधा शुभ नहीं होता. वास्तु शास्त्र के अनुसार, प्रकृति में हर समस्या का समाधान है, बशर्ते आपका चुनाव सही हो. अक्सर हम बिना सोचे-समझे कोई भी पौधा घर के किसी भी कोने में रख देते हैं, जबकि वास्तु में दिशाओं का चयन ही सबसे महत्वपूर्ण है. गलत दिशा में रखा गया एक कीमती पौधा भी आपके जीवन में तनाव पैदा कर सकता है, वहीं सही दिशा में लगा एक छोटा सा पौधा आपकी बंद किस्मत के ताले खोल सकता है. अगर आप भी घर में सुख, शांति और धन की आवक बढ़ाना चाहते हैं, तो इन 9 पौधों को उनकी सही दिशा में जरूर लगाए. 1. तुलसी: हिंदू धर्म और वास्तु में तुलसी को हरिप्रिया कहा गया है. यह पौधा जिस घर के आंगन में हरा-भरा रहता है, वहां वास्तु दोष टिक नहीं पाता. इसे हमेशा उत्तर या उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में रखें.  यह न केवल ऑक्सीजन का भंडार है, बल्कि मानसिक शांति के लिए भी अनिवार्य है. 2. मनी प्लांट जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यह शुक्र ग्रह से संबंधित है. वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, इसे घर के दक्षिण-पूर्व कोण (आग्नेय कोण) में लगाने से धन का ठहराव बढ़ता है.  ध्यान रहे, इसकी बेलें जमीन को नहीं छूनी चाहिए, उन्हें हमेशा ऊपर की ओर चढ़ाएं. 3. शमी: शनि देव और महादेव को प्रिय शमी का पौधा न्याय और विजय का प्रतीक है. इसे घर के मुख्य द्वार पर इस तरह लगाएं कि बाहर निकलते समय यह आपके दाहिने हाथ की ओर हो. यह व्यापार में आने वाली बाधाओं को दूर करने में सहायक माना जाता है. 4. लकी बैंबू: फेंगशुई और वास्तु दोनों में बांस के पौधे को बेहद भाग्यशाली माना गया है. यह सकारात्मक ऊर्जा (Chi) को अपनी ओर खींचता है. इसे घर के लिविंग रूम के पूर्व या उत्तर-पूर्व कोने में रखने से सुख-समृद्धि और लंबी आयु का आशीर्वाद मिलता है. 5. अपराजिता: नीले फूलों वाली अपराजिता की बेल को साक्षात लक्ष्मी का रूप माना जाता है.  इसे उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में लगाने से घर में बरकत बनी रहती है. इसके फूलों को शनिवार या शुक्रवार को विष्णु जी पर चढ़ाना भी अत्यंत शुभ है. 6. स्नेक प्लांट: आज के प्रदूषण भरे दौर में स्नेक प्लांट एक वरदान है. यह रात में भी ऑक्सीजन छोड़ता है. वास्तु के अनुसार, इसे घर के दक्षिण या पूर्व कोने में रखने से यह मानसिक तनाव और इलेक्ट्रॉनिक रेडिएशन को खत्म कर शांति का माहौल बनाता है. 8. जेड प्लांट: इसे फ्रेंडशिप ट्री भी कहा जाता है. छोटे गोल पत्तों वाला यह पौधा ऑफिस डेस्क (उत्तर दिशा) या घर के मुख्य प्रवेश द्वार के दाईं ओर रखना चाहिए. यह धन लाभ के नए अवसरों को आकर्षित करता है . 9. पीस लिली: अगर घर में तनाव रहता है, तो पीस लिली को लगाएं. यह पौधा आपसी कलह को खत्म कर प्रेम को बढ़ावा देता है. इसे पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा में रखना सबसे उत्तम है, खासकर बेडरूम में. पौधों को सिर्फ लगाना काफी नहीं है, उनकी देखभाल भी जरूरी है.  अगर कोई पौधा सूख जाए, तो उसे तुरंत हटा दें, क्योंकि मुरझाए पौधे तरक्की में बाधा बन सकते हैं.

सभी जिलों में पर्यटन और रोजगार की संभावनाएं तलाशकर युवाओं को अवसर देने पर जोर

पटना बिहार पर्यटन विभाग हर साल चार लाख लोगों को रोजगार देगा। इस संबंध में विभाग ने विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत अगले पांच वर्षों का ब्लूप्रिंट तैयार किया गया है। शुक्रवार को विभाग के मंत्री केदार गुप्ता ने अपना कार्यभार संभाल लिया। उन्होंने विभाग की ओर से पिछली सरकार द्वारा तय की गई योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने को कहा। इसके अलावा लंबित पड़ी योजनाओं पर फिर से जल्द काम शुरू करने के निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से उनके कार्यालय कक्ष में मुलाकात कर आगे की रणनीति पर चर्चा की। विभाग अपनी नयी योजना में पांच वर्षों में 20 लाख लोगों को रोजगार देगा। वर्ष 2030 तक विभाग पूरे प्रदेश में इतने युवाओं को रोजगार से जोड़ेगा। इससे बड़ी संख्या में अप्रत्यक्ष रोजगार का भी सृजन होगा। राज्य सरकार ने सात निश्चय तीन के तहत एक करोड़ नौकरी और रोजगार देने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। इसमें सभी विभागों की हिस्सेदारी तय की जा रही है। सबसे बड़ी हिस्सेदारी उद्योग विभाग के साथ पर्यटन विभाग को ही मिला है। सरकार के लक्ष्य का 20 फीसदी केवल पर्यटन विभाग ही पूरा करेगा। ऐसे में रोजगार देने के लिए पर्यटन विभाग आगे आया है। उसने आगामी पांच वर्षों में 20 लाख रोजगार देने के लक्ष्य को हर वर्ष के लिए अलग-अलग निर्धारित किया है। पर्यटन विभाग अगले पांच वर्षों में सभी जिलों में रोजगार की संभावनाओं की तलाश करेगा और फिर युवाओं को उनकी पात्रता के अनुसार रोजगार उपलब्ध कराएगा। युवा जिस कौशल के होंगे, उन्हें उसी में रोजगार मिलेगा। इसके लिए सभी जिलों के अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किये गये हैं। उन्हें अपने-अपने जिलों में रोजगार की संभावनाओं के सेक्टर की पहचान करने और फिर उनमें युवाओं के लिए अवसर की उपलब्धता की पूरी जानकारी देने को कहा गया है। सरकार हर संभावनाओं को युवाओं के लिए सुलभ बनाएगी विशेषज्ञों के अनुसार सूबे में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं और इसका अबतक ढंग से विकास नहीं हो पाया है। इस समय पर्यटन के क्षेत्र में काफी कम रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं। यही नहीं बहुत कम संख्या में लोगों को रोजगार मिला हुआ है। अधिसंख्य रोजगार असंगठित क्षेत्र में है और वे भी अनिश्चितता वाले हैं। इसलिए राज्य सरकार ने पर्यटन के क्षेत्र में रोजगार के हर संभव संभावनाओं की तलाश कर उन्हें युवाओं के लिए सुलभ बनाएगी। धार्मिक पयर्टन का होगा विकास सूबे के पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने शुक्रवार को विस पहुंच अपने विभाग का कार्यभार संभाला। उन्होंने विभाग के प्रधान सचिव व अन्य अधिकारियों से मुलाकात कर विभाग के कामकाज की जानकारी ली। मंत्री ने बताया कि उनका लक्ष्य अगले पांच सालों में प्रदेश के उन पर्यटन क्षेत्रों का विकास करना होगा, जिनकी चर्चा बहुत कम होती है। खासकर धार्मिक पर्यटन को लेकर प्रदेश में अपार संभावनाएं हैं। ऐसे में उनकी प्राथमिकता पर्यटकीय महत्व वाले धार्मिक स्थलों की पहचान करना है, ताकि विभागीय अधिकारियों से विमर्श कर उनके विकास के लिए किए जाने वाले कामों की सूची तैयार की जा सके। इसके लिए वे जल्द ही एक बैठक अधिकारियों संग बुलाकर इस योजना पर काम शुरू करेंगे। इसके अलावा प्रदेश में प्राकृतिक दृश्यों वाले स्थानों की भरमार है। उनको भी विकसित कर पर्यटन के मानचित्र पर स्थान दिलाना उनकी प्राथमिकता सूची में शामिल है।

बिहार सरकार में 26 मंत्रियों ने कार्यभार संभाला, विकास कार्यों को जनता तक पहुंचाने पर जोर

 पटना मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सभी मंत्रियों को निर्देश दिया है कि अपने-अपने विभाग को ठीक से समझें और योजनाओं की समीक्षा करें। साथ ही अपने-अपने विभाग में नयी योजनाओं की संभावनाओं को तलाशें और उसका प्रस्ताव तैयार करें। राज्य मंत्रिमंडल के विस्तार के अगले ही दिन मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को लोक सेवा आवास, 1अणे मार्ग के लोक संवाद में सभी नवनियुक्ति मंत्रियों के साथ औपचारिक बैठक की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कई दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को यह भी कहा कि अपने विभाग की पूरी जानकारी रखें। किसी भी योजना की पूरी जानकारी लेने के बाद ही मीडिया में इससे संबंधित बायन दें। 26 मंत्रियों ने कामकाज संभाला नवगठित एनडीए सरकार में शपथ लेने के अगले ही दिन ज्यादातर मंत्रियों ने अपने-अपने महकमे का दायित्व संभाल लिया है। शुक्रवार को सुबह दस बजे से ही मंत्रियों के कामकाज संभालने का सिलसिला शुरू हो गया और यह शाम साढ़े छह बजे तक चला। इस दौरान 26 मंत्रियों ने विभागों में जाकर विधिवत कामकाज शुरू कर दिया। दायित्व संभालने वाले मंत्रियों ने विकास कार्यों में तेजी लाने तथा विभागीय योजनाओं को लाभुक तक पहुंचाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। मुख्यमंत्री समेत दोनों उप मुख्यमंत्रियों ने 15 अप्रैल को ही अपना दायित्व संभाल लिया था। गुरुवार को हुए शपथ ग्रहण समारोह में 32 और मंत्री मंत्रिपरिषद का हिस्सा बने। 26 मंत्रियों के दायित्व संभालने के बाद शेष छह मंत्री शनिवार से लेकर मंगलवार तक अपने-अपने विभागों में योगदान करेंगे। इनमें कृषि मंत्री विजय सिन्हा, भवन निर्माण मंत्री लेशी सिंह, योजना एवं विकास मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा, लघु जल संसाधन मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन, पिछड़ा-अतिपिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री रमा निषाद और पथ निर्माण मंत्री कुमार शैलेन्द्र शामिल हैं। अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगी इलाज की सुविधा : निशांत जदयू नेता निशांत ने कहा कि अंतिम व्यक्ति तक इलाज पहुंचाना उनकी प्राथमिकता होगी। मुख्यमंत्री ने उनको जो जिम्मेदारी सौंपी है, उसको पूरी ईमानदारी के साथ निभाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि उनके पिता नीतीश कुमार ने पिछले 20 वर्षों में राज्य में जो भी ईमानदारीपूर्वक विकास कार्य किए, उसे भविष्य में भी जारी रखा जाएगा। वे शुक्रवार को विकास भवन स्थित स्वास्थ्य विभाग में मंत्री का कार्यभार संभालने के बाद मीडिया से बातचीत कर रहे थे। निशांत ने कहा कि शहर से लेकर गांव तक बिना किसी भेदभाव के हर जरूरतमंद को उच्च कोटि की स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराई जायेगी। गांवों और शहरों के बीच स्वास्थ्य सुविधाओं के अंतर को खत्म किया जायेगा। साथ ही स्वास्थ्य क्षेत्र में कराये जाने वाले विकास कार्यों में पूरी ईमानदारी और संवेदना बरती जाएगी। राज्य की अच्छी छवि बनाने को प्रभावी कदम उठाएं : श्रवण सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री श्रवण कुमार ने कहा है कि राज्य के बाहर भी बिहार की सकारात्मक छवि को मजबूत बनाना है। वे शुक्रवार को विभाग का पदभार ग्रहण करने के बाद पत्रकारों से बात की। उन्होंने कहा कि बिहार के बाहर भी राज्य की अच्छी छवि बनाए रखने के लिए विस्तृत कदम उठाए जाएंगे। इसके लिए प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, रेडियो और सोशल मीडियाका समन्वित उपयोग किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी सरकार की प्रमुख योजनाओं अंतिम छोर तक पहुंचाई जाए। कहा कि विभाग में मानव संसाधन की कमी को तत्काल पूरा किया जाए, जिससे बिना किसी बाधा और देरी के सभी काम पूरा हो सके। सूचना प्रसार को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए नवीन तकनीकों और रचनात्मक तरीकों का इस्तेमाल किया जाए।

बाजार में मिलने वाले घी की शुद्धता पर बढ़ी चिंता, मिलावट से सेहत को खतरा

 भारत में घी सिर्फ एक खाद्य पदार्थ नहीं बल्कि रोजमर्रा की डाइट का अहम हिस्सा है. लेकिन हाल में आई कुछ रिपोर्ट्स में कुछ देसी घी ब्रांड्स में मिलावट सामने आने के बाद लोगों की चिंता बढ़ गई है. ऐसे में अक्सर मन में सवाल आता है कि बाजार में मिलने वाला घी कितना शुद्ध है और इसे पहचानने का सही तरीका क्या है? एक्सपर्ट्स के अनुसार, कुछ ऐसे घरेलू तरीके भी हैं जिससे आप असली और नकली घी में फर्क कर सकते हैं. तो आइए उन तरीकों के बारे में जान लीजिए. शुद्ध घी की पहचान क्यों जरूरी? हेल्थलाइन के मुताबिक, मिलावटी या नकली घी में अक्सर वेजिटेबल ऑयल या सस्ते फैट मिलाए जाते हैं जो शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं. लंबे समय तक ऐसे घी का सेवन दिल और पाचन से जुड़ी समस्याएं बढ़ा सकता है. इसके अलावा शुद्ध घी में हेल्दी फैट के साथ-साथ जरूरी विटामिन भी होते हैं लेकिन मिलावट कर देने पर इनके फायदे कम हो जाते हैं और नुकसान बढ़ जाते हैं. स्मेल और स्वाद (Smell and Taste) असली घी की खुशबू हल्की और प्राकृतिक होती है जबकि मिलावटी घी में तेज या अजीब सी गंध आ सकती है. स्वाद भी शुद्ध घी का हल्का मीठा और स्मूद होता है. अगर घी का स्वाद कड़वा या अटपटा लगे तो उसमें मिलावट की संभावना हो सकती है. हाथ पर पिघल जाता है (It melts on the hand) एक्सपर्ट्स के मुताबिक, असली घी की कुछ बूंदें हथेली पर रखकर रगड़ें. शुद्ध घी शरीर की गर्मी से तुरंत पिघल जाता है जबकि मिलावटी घी को पिघलने में समय लगता है या फिर वह चिपचिपा महसूस होता है. आयोडीन टेस्ट (Iodine Test) अगर घी में स्टाच या अन्य मिलावट का शक हो तो आयोडीन टेस्ट किया जा सकता है. घी में थोड़ा आयोडीन डालने पर अगर रंग नीला पड़ता है तो उसमें मिलावट मौजूद हो सकती है. यह तरीका घर पर भी आसानी से किया जा सकता है. जमने के तरीके से भी पहचान (Freezing method) घी को फ्रिज में रखकर देखें. शुद्ध घी समान रूप से जमता है, जबकि मिलावटी घी अलग-अलग लेयर में या दानेदार तरीके से जम सकता है. यह संकेत देता है कि उसमें अन्य तेल या फैट मिलाए गए हैं.