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ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर CM विष्णुदेव साय ने वीर सैनिकों को किया नमन

ऑपरेशन सिंदूर की प्रथम वर्षगांठ पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने वीर सैनिकों को किया नमन नया भारत अब आतंकवाद को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त करने वाला नहीं है – मुख्यमंत्री साय रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने “ऑपरेशन सिंदूर” की प्रथम वर्षगांठ पर भारतीय सेना के शौर्य, पराक्रम और अदम्य साहस को नमन करते हुए कहा कि यह अभियान केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि नए भारत की अटूट इच्छाशक्ति, निर्भीक संकल्प और निर्णायक शक्ति का प्रतीक है। उन्होंने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट कर कहा कि आज से एक वर्ष पूर्व पहलगाम में सीमा पार से आतंकियों द्वारा किए गए घिनौने हमले ने पूरे राष्ट्र को झकझोर दिया था, लेकिन भारत ने उस चुनौती का ऐसा जवाब दिया, जिसने इतिहास में शौर्य और संकल्प का स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि “ऑपरेशन सिंदूर” ने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया कि नया भारत अब आतंकवाद को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त करने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि अब भारत चुपचाप सहने वाला राष्ट्र नहीं रहा, बल्कि मातृभूमि की ओर उठने वाली हर बुरी नजर का निर्णायक और प्रभावशाली जवाब देने में सक्षम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान ने भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस, बेजोड़ रणनीति और राष्ट्र के प्रति असीम समर्पण को अमर कर दिया। जिस सटीकता, दृढ़ता और प्रभावशाली क्षमता के साथ आतंक के सरपरस्तों और उनके आकाओं को जवाब दिया गया, उसने वैश्विक मंच पर भारत की सैन्य शक्ति और मजबूत नेतृत्व की नई पहचान स्थापित की। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने आतंकवाद के प्रति “शून्य सहिष्णुता” की नीति को केवल शब्दों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे धरातल पर सिद्ध भी किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेनाओं की संयुक्त शक्ति, अत्याधुनिक युद्ध तकनीक और आत्मनिर्भर रक्षा व्यवस्था ने यह साबित कर दिया है कि भारत अब केवल प्रतिक्रिया नहीं देता, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर निर्णायक और प्रभावी प्रतिकार भी करता है। मुख्यमंत्री साय ने “ऑपरेशन सिंदूर” की प्रथम वर्षगांठ पर राष्ट्र के उन सभी वीर सपूतों को कोटिशः नमन किया, जिनके शौर्य और पराक्रम ने हर भारतीय का मस्तक गर्व से ऊँचा किया है। उन्होंने पहलगाम हमले में जान गंवाने वाले पर्यटकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारतीय सेना का पराक्रम, राष्ट्रभक्ति और बलिदान देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा।

विदेश में फंसे युवाओं के लिए राहत योजना, विशेष सहायता कोष बनाने की तैयारी

चंडीगढ़ विदेशों में बेहतर भविष्य की तलाश में गए हरियाणा के युवाओं की मौतों और उनके परिवारों की बेबसी के बीच राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए प्रभावित परिवारों के लिए विशेष सहायता कोष बनाने का फैसला किया है। हाल के महीनों में सामने आए दर्दनाक मामलों खासकर यूक्रेन-रूस युद्ध में फंसे युवाओं ने इस जरूरत को और अधिक गंभीर बना दिया है, जहां परिवारों को शव वापस लाने के लिए महीनों इंतजार और भारी खर्च उठाना पड़ रहा है। हरियाणा विदेश सहयोग विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सरकार ऐसी नीति तैयार कर रही है, जिसमें सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया और शर्तें स्पष्ट होंगी। प्रस्तावित नीति के तहत केवल वैध वीजा पर विदेश गए लोगों को ही कवर किया जाएगा। सरकार न सिर्फ आर्थिक मदद देगी, बल्कि विदेशों में फंसे लोगों और उनके परिजनों को तकनीकी सहायता भी प्रदान करेगी। इसके लिए विदेश मंत्रालय और संबंधित दूतावासों के साथ समन्वय कर शवों को भारत लाने की प्रक्रिया को आसान बनाने की योजना है। अधिकारियों का कहना है कि विदेश में दुर्घटना या बीमारी की स्थिति में परिवारों को भारी आर्थिक और प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। रूस से शव लाने में ही 20 लाख रुपये तक का खर्च आता है, जो कई परिवारों के लिए काफी मुश्किल होता है। हालात की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले महीने ही रूस से हरियाणा के चार युवाओं के शव लाए गए हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी इसे लेकर काफी चिंता जता चुके हैं। कुछ समय पहले उन्होंने अधिकारियों से बातचीत कर इस मामले में कोई नीति बनाने को कहा था। इस पर अधिकारियों ने अपना प्रस्ताव तैयार कर लिया है। अब जल्द ही उच्च अधिकारी इसमें निर्णय लेंगे। इस संबंध में जल्द ही बैठक होने वाली है।  

बिजली उपभोक्ताओं को राहत: अब नहीं होगी बार-बार रिचार्ज की झंझट

लखनऊ यूपी के बिजली ग्राहकों को बड़ी सौगात देते हुए स्मार्ट प्रीपेड मीटर को पोस्ट पेड में बदलने का ऐलान हुआ है। प्रीपेड से पोस्टपेड में करने की तारीख भी आ गई है। प्रीपेड मीटरों को पोस्टपेड में बदलने की पूरी प्रक्रिया एक रात में पूरी हो जाएगी। 9 मई की रात से प्रक्रिया शुरू होगी और 10 मई तक सभी मीटर पोस्टपेड हो जाएंगे। अधिकारियों के अनुसार पोस्टपेड होने पर बिजली ग्राहकों की कई समस्याओं का हल हो जाएगा। उपभोक्ताओं को मीटर तेज चलने, अधिक बिल आने और बिना बिजली उपयोग के बैलेंस कटने जैसी शिकायतों से मुक्ति मिल जाएगी। बचा बैलेंस बिजली बिल में जुड़ेगा लोगों को यह शंका है कि प्रीपेड में कराए गए रिचार्ज का क्या होगा? अधिकारियों के अनुसार प्रीपेड मीटर का बैलेंस पूरी तरह से सुरक्षित रहेगा। जैसे ही प्रीपेड मीटर कन्वर्ट होंगे, वैसे ही उनका बचा बैलेंस महीने के अंतिम में बनने वाले बिल में स्वत: जुड़ जाएगा। इसका पूरा डिटेल बिजली बिल में अंकित होगा। पूर्वांचल में एमडी कर रहे निगरानी पूर्वांचल के जिलों में स्मार्ट मीटरों के मोड परिवर्तन की निगरानी पूर्वांचल डिस्कॉम के एमडी शंभु कुमार खुद करेंगे। पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में 30 लाख 17 हजार 147 स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगे हैं। वाराणसी जोन प्रथम के 11 डिविजनों में 2.20 लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटरों उपभोक्ता हैं। एमडी मीटर लगाने वाली कंपनी जीएमआर और जीनस के अफसरों के साथ मोड परिवर्तन की तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं। चार लाख उपभोक्ता नहीं कर रहे थे मीटर रिचार्ज पूर्वांचल के 4.11 लाख उपभोक्ता प्रीपेड मीटर रिजार्च नहीं कर रहे थे। बनारस में इनकी संख्या लगभग 12 हजार थी। जांच में सामने आया कि मीटर चार्ज न कराने वाले अनेक उपभोक्ता बिजली चोरी कर रहे हैं तो कुछ खाली परिसर पर मीटर लगे थे। विभाग ने बिजली चोरी करने वालों पर केस कराया था। उपभोक्ताओं से वापस लेंगे सिक्योरिटी मनी मीटर पोस्टपेड होने के बाद उपभोक्ताओं को सिक्योरिटी मनी ली जाएगी। यह राशि बिजली बिल में जोड़कर भेजी जाएगी। बड़े उपभोक्ताओं से सिक्योरिटी मनी किस्त में ली जाएगी। स्मार्ट मीटर की खामियां जस की तस : उपभोक्ता परिषद  वर्ष 2019 से 2022 के बीच लगे 12 लाख स्मार्ट मीटरों में जो खामियां केंद्र सरकार की टीम ने पाई थीं, वही कमियां मौजूदा समय में लग रहे स्मार्ट मीटरों में भी हैं। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने स्मार्ट मीटर की पुरानी खामियों को नजरअंदाज कर के प्रदेश भर में नए सिरे से स्मार्ट मीटर लगाने पर सवाल उठाए हैं। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा है कि ऊर्जा दक्षता सेवा लिमिटेड (ईईएसएल) द्वारा प्रदेश में लगाए गए 12 लाख स्मार्ट मीटरों की जांच केंद्र सरकार की उच्च स्तरीय समिति ने की थी। सितंबर 2023 में टीम ने रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट में जो कमियां गिनाई गई थीं, वे अब लग रहे स्मार्ट मीटरों में भी हैं। अवधेश ने कहा कि अगर आरडीएसएस के तहत लग रहे इन स्मार्ट मीटरों में उपभोक्ता हितों के मानकों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ाया गया होता तो पूरी परियोजना सवालों के घेरे में नहीं आती। तब रिपोर्ट में बताया गया था कि उपभोक्ताओं को तीन से छह महीने के विलंब से एसएमएस अलर्ट नहीं मिल रहे। चेक मीटर की स्थापना में अनियमितता बरती गई थी। उपभोक्ताओं पर नियमविरुद्ध अतिरिक्त भार डाला जा रहा था। मीटर नेटवर्क में बाधा थी, जिससे डिस्कनेक्शन और रीकनेक्शन प्रभावित हो रहा था।

रोबोट बना बौद्ध भिक्षु, साउथ कोरिया में अनोखा प्रयोग

रोबोट्स इन दिनों दुनिया में टेक्नोलॉजी हर दिन नई सीमाएं तोड़ रहे हैं. लेकिन साउथ कोरिया में जो हुआ, उसने लोगों को हैरान भी किया और सोचने पर मजबूर भी. यहां पहली बार एक ह्यूमनॉयड रोबोट को बौद्ध भिक्षु (मोंक) बना दिया गया. सियोल के मशहूर जोग्ये मंदिर में एक खास समारोह के दौरान इस रोबोट को आधिकारिक रूप से बौद्ध दीक्षा दी गई. इस रोबोट का नाम गाबी रखा गया है और इसकी ऊंचाई करीब 130 सेंटीमीटर है. असली बौद्ध भिक्षु की तरह मिली ट्रेनिंग यह कोई टेक शो नहीं था, बल्कि बिल्कुल वैसा ही धार्मिक कार्यक्रम था जैसा इंसानों के लिए होता है. इस रोबोट ने पारंपरिक बौद्ध पोशाक पहनी, हाथ जोड़कर प्रार्थना की और बौद्ध धर्म के नियमों को स्वीकार किया. समारोह में मौजूद लोगों के सामने इसने वही सारे सवालों के जवाब दिए, जो एक नए भिक्षु से पूछे जाते हैं. दीक्षा से पहले इस रोबोट ने ट्रेनिंग भी ली. इंसानों की तरह इसे भी नवदीक्षित यानी शुरुआती साधु की तरह तैयार किया गया. इसके बाद इसे आधिकारिक रूप से बौद्ध समुदाय का हिस्सा बनाया गया. ऐसा करने की जरूरत क्यों पड़ी? दरअसल, एशिया के कई देशों में बौद्ध मठों में साधुओं की संख्या धीरे-धीरे कम हो रही है. ऐसे में रोबोट को एक असिस्टेंट के तौर पर देखा जा रहा है. यह रोबोट मंदिर में आने वाले लोगों को जानकारी दे सकता है. लोगों को तौर तरीके भी सिखा सकता है. नई पीढ़ी धार्मिक जीवन में कम दिलचस्पी ले रही है और बुजुर्ग भिक्षुओं की संख्या बढ़ रही है. ऐसे में मंदिरों को चलाना मुश्किल होता जा रहा है. इससे पहले भी जापान और दक्षिण कोरिया में ऐसे एक्सपेरिमेंट्स हो चुके हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड रोबोट बौद्ध ग्रंथों पर ट्रेन किए जाते हैं ताकि वे लोगों को आध्यात्मिक सलाह दे सकें. दक्षिण कोरिया में तैयार किए गए इस रोबोट में ऐसी तकनीक डाली गई है जो इंसानों की तरह बात कर सके, सवाल समझ सके और धार्मिक कॉन्टेक्स्ट में जवाब दे सके. बौद्ध ग्रंथों और उपदेशों पर किया गया ट्रेन यह रोबोट बौद्ध ग्रंथों और उपदेशों पर ट्रेन किया गया है. यानी अगर कोई शख्स इससे धर्म या जीवन से जुड़े सवाल पूछता है, तो यह जवाब दे सकता है. यह मंदिर में आने वाले लोगों को प्रार्थना के तरीके समझाता है, बौद्ध परंपराओं के बारे में जानकारी देता है और कुछ मामलों में लोगों को मानसिक शांति या सलाह भी दे सकता है. इतना ही नहीं, इसे सिर्फ बात करने वाला रोबोट नहीं रखा गया है. इसे मंदिर के कामों में मदद के लिए भी तैयार किया गया है. जैसे मंदिर में सफाई, बेसिक काम, सिक्योरिटी मॉनिटरिंग और विजिटर्स को गाइड करना. यानी यह एक तरह से डिजिटल सहायक है, जो असली भिक्षुओं का काम हल्का कर सकता है. गौरतलब है कि जापान में भी बुद्धारॉइड जैसे रोबोट बनाए गए हैं, जो धार्मिक सलाह देते हैं और लोगों से बातचीत करते हैं. वहां यह जरूरत इसलिए पैदा हुई क्योंकि कई मंदिर बंद होने की कगार पर हैं. हालांकि इस रोबोट के डेवलपर्स कहते हैं कि यह रोबोट इंसानों की जगह लेने के लिए नहीं बनाया गया. इसका मकसद सिर्फ मदद करना है, न कि असली भिक्षु बनना.

Vivo X300 Ultra और X300 FE लॉन्च कैमरा और प्रीमियम फीचर्स के साथ नई फ्लैगशिप सीरीज़

Vivo ने भारत में अपनी नई फ्लैगशिप सीरीज़ X300 को लॉन्च कर दिया है. इस सीरीज़ में दो फोन आए हैं, Vivo X300 Ultra और Vivo X300 FE. कंपनी इस बार कैमरा और प्रीमियम एक्सपीरियंस पर फोकस कर रही है. Vivo X300 Ultra को कंपनी ने अपने सबसे पावरफुल और कैमरा-फोकस्ड फोन के तौर पर पेश किया है. इस फोन में बड़ी 6.82 इंच की AMOLED डिस्प्ले दी गई है, जिसमें 2K रेजोल्यूशन और 120Hz रिफ्रेश रेट मिलता है. स्क्रीन काफी ब्राइट है और HDR कंटेंट देखने का एक्सपीरियंस बेहतर बनाती है. परफॉर्मेंस की बात करें तो इसमें लेटेस्ट Snapdragon 8 Elite प्रोसेसर दिया गया है. इसे अभी के सबसे पावरफुल चिपसेट्स में से एक माना जाता है. इसके साथ 12GB और 16GB RAM के ऑप्शन मिलते हैं और स्टोरेज 256GB से लेकर 1TB तक जाती है. यानी यह फोन गेमिंग, वीडियो एडिटिंग और हैवी यूज के लिए तैयार है. Vivo का कैमरा पर बड़ा दांव Vivo X300 Ultra में क्वाड कैमरा सेटअप मिलता है, जिसमें 50MP का प्राइमरी सेंसर, 200MP का पेरिस्कोप टेलीफोटो कैमरा, एक और टेलीफोटो लेंस और अल्ट्रा-वाइड कैमरा शामिल है. ZEISS के साथ मिलकर इसे ट्यून किया गया है, जिससे फोटो का कलर और डिटेल बेहतर मिलती है. इसमें 8K वीडियो रिकॉर्डिंग और प्रो मोड जैसे फीचर्स भी दिए गए हैं, जिससे यह फोन लगभग कैमरा जैसा एक्सपीरियंस देने की कोशिश करता है. बैटरी भी बड़ी दी गई है, करीब 6600mAh से ज्यादा की, और इसमें 100W फास्ट चार्जिंग और वायरलेस चार्जिंग दोनों का सपोर्ट मिलता है. फोन Android 15 पर बेस्ड Funtouch OS पर चलता है. 40W वायरलेस चार्जिंग का भी सपोर्ट दिया गया है. Vivo X300 FE स्पेसिफिकेशन्स और फीचर्स अब बात करें Vivo X300 FE की, तो यह फोन उन लोगों के लिए है जो फ्लैगशिप फीचर्स चाहते हैं लेकिन Ultra जितना भारी और महंगा फोन नहीं लेना चाहते. इसमें 6.3 इंच की AMOLED डिस्प्ले दी गई है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट के साथ आती है. इसमें Snapdragon 8 Gen 3 प्रोसेसर दिया गया है, जो अभी भी काफी पावरफुल माना जाता है. इसके साथ 12GB RAM और 256GB तक स्टोरेज मिलता है. कैमरा सेटअप यहां भी अच्छा है. इसमें 50MP का प्राइमरी कैमरा, टेलीफोटो लेंस और अल्ट्रा-वाइड कैमरा दिया गया है. ZEISS की ब्रांडिंग यहां भी मिलती है, जिससे फोटो क्वालिटी बेहतर रहती है. बैटरी 5000mAh की है और इसमें फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट मिलता है. डिजाइन के मामले में यह फोन Ultra के मुकाबले हल्का और कॉम्पैक्ट है, जो रोजमर्रा के इस्तेमाल में ज्यादा आरामदायक लगता है. Vivo X300 Ultra और Vivo X300 FE की कीमत कीमत की बात करें तो Vivo X300 Ultra प्रीमियम सेगमेंट में आता है और इसकी कीमत करीब 1 लाख 60 हजार रुपये से शुरू होती है, जबकि टॉप वेरिएंट फोटॉग्रफी किट के साथ 2 लाख रुपये तक का मिलेगा. वहीं Vivo X300 FE की कीमत लगभग ₹70,000 से ₹90,000 के बीच रखी गई है. Vivo अब सीधे iPhone और Samsung के प्रीमियम फोन्स को टक्कर देना चाहता है. खासकर कैमरा के मामले में कंपनी ने इस बार बड़ा दांव खेला है. अब असली टेस्ट मार्केट में होगा. अगर कैमरा और परफॉर्मेंस लोगों को पसंद आती है, तो यह सीरीज़ प्रीमियम सेगमेंट में बड़ा गेम चेंजर बन सकती है.

चाणक्य नीति हंस के उदाहरण से रिश्तों की सच्चाई और स्वार्थ का ज्ञान

 चाणक्य नीति, आचार्य चाणक्य (कौटिल्य) द्वारा रचित एक प्राचीन भारतीय ग्रंथ है. यह ग्रंथ व्यक्ति को जीवन जीने की कला, राजनीति, अर्थशास्त्र और नैतिकता के सिद्धांतों के बारे में बताता है. यह मुख्य रूप से सफल, अनुशासित और सुखी जीवन जीने के लिए सूत्र प्रदान करती है. जो आज भी बिजनेस, रिश्तों और व्यक्तिगत विकास में पूरी तरह लागू होती है. अगर आप जीवन में सुख व शांति की कामना करते हैं तो चाणक्य की नीतियां आपके लिए काफी मददगार साबित हो सकती हैं.   वहीं, आचार्य चाणक्य ने सूत्र चाणक्य नीति में कई पक्षियों और जानवरों के गुणों का जिक्र भी किया है. उन्हीं में से एक पक्षी है हंस. वैसे तो हंस देखने में बहुत ही सुंदर लगता है. लेकिन, हंस में कुछ ऐसे गुण हैं, जो व्यक्ति अपने जीवन में कभी नहीं अपनाने चाहिए. श्लोक- यत्रोदकं तत्र वसन्ति हंसाः तथैव शुष्कं परिवर्जयन्ति। न हंसतुल्येन नरेण भाव्यं पुनस्त्यजन्तः पुनराश्रयन्ते ॥ अर्थ: इस श्लोक के माध्यम से चाणक्य नीति रिश्तों व इंसान के स्वभाव को लेकर गहरी सीख देता है. इसमें आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जैसे हंस केवल वहीं रहते हैं जहां पानी होता है और पानी सूखने पर उस जगह को छोड़ देते हैं. वैसे ही कुछ लोग भी सिर्फ स्वार्थ और लाभ के लिए रिश्ते निभाते हैं. जीवन में ऐसे लोगों से सावधान रहना चाहिए, जो केवल अच्छे समय में साथ रहते हैं. जब तक व्यक्ति के पास पैसा, सफलता या शक्ति होती है, तब तक लोग उसके पास होते हैं. परंतु यह सब समाप्त होने के बाद मुश्किल समय आने पर वही लोग दूरी बना लेते हैं. यह श्लोक ये भी सिखाता है कि इंसान को खुद कभी स्वार्थी स्वभाव नहीं अपनाना चाहिए और ना घमंड करना चाहिए. रिश्तों की असली पहचान कठिन समय में होती है. जो लोग सुख-दुख दोनों में साथ निभाते हैं, वही सच्चे रिश्ते कहलाते हैं. इसके अलावा, यह श्लोक रिश्तों में स्थिरता और निष्ठा का महत्व भी बताता है. अगर कोई व्यक्ति बार-बार अपने लाभ के अनुसार रिश्ते बनाता और छोड़ता है, तो वह कभी सच्चा मित्र नहीं होता है. ना वह व्यक्ति कभी विश्वास जीत पाता है. इसलिए, जीवन में ऐसे संबंध बनाने चाहिए, जिनमें भरोसा, अपनापन और निस्वार्थ भावना हो.

हस्तरेखा शास्त्र से कैसे जानें लव मैरिज या अरेंज मैरिज होगी

आज कल सोशल मीडिया लव मैरिज और अरेंज मैरिज टॉपिक काफी ज्यादा चर्चा में है. जिसको लेकर हर पंडित इस टॉपिक पर अपनी राय रख रहा है. लेकिन, क्या आपको मालूम है कि हाथों की रेखाओं को देखकर भी लव मैरिज और अरेंज मैरिज का पता किया जा सकता है. चौंकिए मत! दरअसल, हस्तरेखा शास्त्र एक ऐसी विद्या है जिसमें हाथ की रेखाओं और हथेली को देखकर इंसान के स्वभाव और भविष्य के बारे में पता लगाया जाता है. इसमें हाथ की मुख्य रेखाएं जैसे जीवन रेखा, मस्तिष्क रेखा और हृदय रेखा को देखा जाता है. इन रेखाओं के आधार पर व्यक्ति के जीवन, करियर, हेल्थ और रिश्तों के बारे में जानकारी जानने की कोशिश की जाती है. वहीं, हाथ की रेखाएं देखकर व्यक्ति की वैवाहिक स्थिति, आने वाले शादी-शुदा जीवन कैसे रहेगा और लव मैरिज होगी या अरेंज मैरिज ये भी पता किया जा सकता है. कैसे पता करें कि लव मैरिज होगी या अरेंज मैरिज? हस्तरेखा शास्त्र के मुताबिक, हथेली की रेखाओं से शादी और रिश्तों से जुड़े कई संकेत मिलते हैं. खासकर छोटी उंगली के नीचे मौजूद विवाह रेखा को देखकर यह पता किया जा सकता है कि व्यक्ति की शादी लव होगी या अरेंज. अगर विवाह रेखा ऊपर की ओर मुड़कर हृदय रेखा की तरफ जाती दिखाई दे, तो इसे लव मैरिज का संकेत माना जाता है. ऐसे लोग अपने मन से जीवनसाथी चुनते हैं और प्रेम संबंध को शादी तक ले जाने की संभावना अधिक होती है. वहीं, यदि विवाह रेखा सीधी, साफ और हृदय रेखा से अलग हो, तो इसे अरेंज मैरिज का संकेत माना जाता है. ऐसे मामलों में परिवार की भूमिका ज्यादा होती है और वैवाहिक जीवन सामान्यतः स्थिर माना जाता है. हथेली में विवाह रेखा कहां होती है? हस्तरेखा शास्त्र में छोटी उंगली के नीचे, हथेली के किनारे पर जो रेखा होती है, उसे विवाह रेखा कहा जाता है. कुछ लोगों के हाथ में इस जगह एक से ज्यादा रेखाएं भी दिखाई देती हैं, लेकिन हर रेखा का अलग मतलब माना जाता है. अगर विवाह रेखा साफ, गहरी और बिना कटाव के हो, तो इसे अच्छा संकेत माना जाता है. ऐसे लोगों का वैवाहिक जीवन आमतौर पर सुखी और स्थिर रहता है. वहीं, अगर यह रेखा टूटी हुई हो, कटी-फटी हो या बीच-बीच में मिलती-जुलती दिखे, तो शादीशुदा जीवन में परेशानियां आ सकती हैं. अगर विवाह रेखा हृदय रेखा के पास हो, तो जल्दी शादी के संकेत माने जाते हैं. वहीं, छोटी और बीच में स्थित रेखा थोड़ी देर से विवाह होने का इशारा देती है. अगर इस स्थान पर कई छोटी-छोटी रेखाएं हों, तो इसे एक से ज्यादा प्रेम संबंधों का संकेत माना जाता है. अगर विवाह रेखा की शुरुआत में कोई निशान हो या यह हृदय रेखा को पार करती हुई दिखे, तो इसे अच्छा नहीं माना जाता. ऐसे लोगों को रिश्तों में धोखा, जीवनसाथी से जुड़ी समस्याएं या वैवाहिक जीवन में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है.

राहु-सूर्य की युति से बनेगा ग्रहण योग, 10 मई को कई राशियों पर संकट के संकेत

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, आने वाली 10 मई 2026 को ग्रहों की स्थिति एक अशुभ योग का निर्माण कर रही है. इस दिन क्रूर ग्रह राहु और ग्रहों के राजा सूर्य एक ही राशि में गोचर करेंगे, जिससे ग्रहण योग की स्थिति बनेगी. ज्योतिषियों का मानना है कि इस युति का नकारात्मक प्रभाव कई राशि के जातकों के जीवन पर देखने को मिल सकता है. मेष राशि: करियर में चुनौतियां ग्रहण योग के कारण मेष राशि वालों को कार्यक्षेत्र में संभलकर रहने की जरूरत है. इस दौरान आपके बनते काम बिगड़ सकते हैं, अधिकारियों के साथ वैचारिक मतभेद होने की आशंका है. निवेश के मामलों में सावधानी बरतें, वरना आर्थिक नुकसान हो सकता है. सिंह राशि: मान-प्रतिष्ठा पर संकट सिंह राशि के स्वामी सूर्य हैं, इसलिए राहु के साथ उनकी युति इस राशि के लिए तनावपूर्ण रहेगी. समाज में आपकी छवि प्रभावित हो सकती है. इस अवधि में क्रोध पर नियंत्रण रखें. किसी भी बड़े निर्णय को फिलहाल टाल देना ही बेहतर होगा. कन्या राशि: स्वास्थ्य और धन हानि कन्या राशि के जातकों के लिए 10 मई के बाद का समय उतार-चढ़ाव भरा रह सकता है. अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने या पुराने रोगों के उभरने की संभावना है. फिजूलखर्ची बढ़ने से बजट बिगड़ सकता है, इसलिए पैसों के लेन-देन में सतर्कता बरतें. वृश्चिक राशि: पारिवारिक कलह के संकेत इस अशुभ योग का असर आपके पारिवारिक जीवन पर पड़ सकता है. घर के सदस्यों के बीच तालमेल की कमी और छोटी-छोटी बातों पर विवाद होने के योग हैं. वाणी पर संयम रखें, वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतें. उपाय और सावधानी ग्रहण योग के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए जातकों को भगवान शिव की उपासना करनी चाहिए. 10 मई को 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करें, आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना शुभ फलदायी रहेगा. इसके अलावा, दान-पुण्य करने से भी ग्रहों की शांति होती है.

मनातू की नई कहानी: नक्सल प्रभावित क्षेत्र अब बन रहा शिक्षा का केंद्र

तरहसी (पलामू)  कभी नक्सलवाद, बारूद और दहशत के लिए कुख्यात रहा पलामू जिले का मनातू इलाका आज शिक्षा और उम्मीद की नई कहानी लिख रहा है। यहां मनातू थाना परिसर में शुरू हुई सामुदायिक कोचिंग ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सही दिशा और मार्गदर्शन मिले तो कठिन से कठिन हालात भी बदले जा सकते हैं। इस पहल से जुड़े सभी 25 छात्र-छात्राओं ने इंटरमीडिएट परीक्षा में शत-प्रतिशत सफलता हासिल कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। वर्षों तक जिस क्षेत्र में शाम ढलते ही सन्नाटा डर में बदल जाता था, वहीं आज बच्चों के हाथों में किताबें और आंखों में उज्ज्वल भविष्य के सपने दिखाई दे रहे हैं। मनातू थाना परिसर, जो कभी सुरक्षा और अपराध की चर्चाओं तक सीमित था, अब शिक्षा के केंद्र के रूप में पहचान बना रहा है। पुलिस नहीं गुरुजी, थाना बना पाठशाला तत्कालीन थाना प्रभारी निर्मल उरांव ने अपनी जिम्मेदारियों के साथ-साथ बच्चों की शिक्षा को मिशन बना लिया। उनके प्रयासों से थाना परिसर में सामुदायिक कोचिंग की शुरुआत की गई, जहां पुलिसकर्मी न केवल सुरक्षा व्यवस्था संभालते हैं, बल्कि छात्रों को पढ़ाई में मार्गदर्शन भी देते हैं। यह कोचिंग मुख्य रूप से मजदूर और किसान परिवारों के बच्चों के लिए शुरू की गई थी, जो आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई बीच में छोड़ने को मजबूर हो जाते थे। यहां उन्हें निःशुल्क शिक्षा, मार्गदर्शन और आत्मविश्वास मिला, जिसका परिणाम आज शत-प्रतिशत सफलता के रूप में सामने आया है। रेशमी कुमारी ने हासिल किया 70 प्रतिशत अंक इस कोचिंग की छात्रा रेशमी कुमारी ने साइंस संकाय में 70 प्रतिशत अंक हासिल किए। उन्होंने बताया कि उनके पिता मजदूरी करते हैं और यदि पुलिस की यह पहल नहीं होती तो उनका आगे पढ़ना मुश्किल था। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि निर्मल उरांव बच्चों को सिर्फ पढ़ाई ही नहीं कराते थे, बल्कि जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देते थे। उनका संदेश था.जिस हाथ में कलम मजबूत हो, वहां अंधेरा ज्यादा देर टिक नहीं सकता। ”मनातू की यह कहानी आज इस बात का प्रमाण बन गई है कि जब खाकी सिर्फ कानून नहीं, बल्कि बदलाव की जिम्मेदारी भी उठाती है, तो सबसे कठिन हालात में भी सफलता की नई इबारत लिखी जा सकती है। नक्सल से शिक्षा की ओर बदलता मनातू मनातू, जो कभी अफीम की खेती और नक्सली गतिविधियों के लिए जाना जाता था, अब शिक्षा और विश्वास की नई पहचान बन रहा है। ग्रामीणों ने पहली बार पुलिस और जनता के बीच इतना आत्मीय और सकारात्मक रिश्ता महसूस किया है। पलामू एसपी कपिल चौधरी ने सभी सफल छात्रों को बधाई दी और कहा कि शिक्षा ही समाज परिवर्तन का सबसे मजबूत माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों को आगे भी मेहनत करने और बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित किया।

जैक इंटरमीडिएट परीक्षा में पलामू का सुधार, कॉमर्स में सबसे बेहतर रिजल्ट

 पलामू झारखंड अधिविद्य परिषद (जैक) द्वारा आयोजित इंटरमीडिएट वार्षिक परीक्षा-2026 का परिणाम बुधवार को जारी कर दिया गया। इस बार पलामू जिले के छात्र-छात्राओं ने विज्ञान, कला और वाणिज्य तीनों संकायों में बेहतर प्रदर्शन करते हुए पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय सुधार दर्ज कराया है। जिले में विज्ञान संकाय का रिजल्ट 90.16 प्रतिशत, कला संकाय का 94.54 प्रतिशत और वाणिज्य संकाय का 95.99 प्रतिशत रहा। सर्वाधिक सफलता कॉमर्स संकाय में मिली है। राज्य स्तरीय रैंकिंग में भी पलामू ने सुधार किया है। आर्ट्स में पिछले वर्ष जहां पलामू का स्थान 24वां था, वहीं इस वर्ष 18वां स्थान प्राप्त हुआ है। कॉमर्स में जिला 13वें से 10वें स्थान पर पहुंच गया है। हालांकि साइंस में पलामू एक पायदान नीचे खिसककर तीसरे से चौथे स्थान पर आ गया है। जैक इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 के परिणाम ने यह साबित किया है कि जिले की शिक्षा व्यवस्था में लगातार सुधार हो रहा है। तीनों संकायों में विद्यार्थियों के प्रदर्शन ने पलामू की शैक्षणिक स्थिति को मजबूती दी है। साइंस में 4.37 प्रतिशत बढ़ा रिजल्ट इस वर्ष विज्ञान संकाय में जिले के 17,926 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए थे। इनमें 16,163 विद्यार्थी सफल घोषित किए गए। कुल 13,476 परीक्षार्थी प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हुए, जिनमें 7,569 छात्र और 5,907 छात्राएं शामिल हैं। वहीं 2,683 विद्यार्थियों ने द्वितीय श्रेणी प्राप्त की, जिनमें 1,654 छात्र और 1,029 छात्राएं हैं। चार छात्राएं तृतीय श्रेणी से पास हुई हैं। विज्ञान संकाय में 1,756 विद्यार्थी असफल घोषित किए गए। पिछले वर्ष जिले का साइंस रिजल्ट 85.79 प्रतिशत था, जबकि इस वर्ष यह बढ़कर 90.16 प्रतिशत पहुंच गया। यानी पिछले साल की तुलना में 4.37 प्रतिशत अधिक विद्यार्थी सफल हुए हैं।बाक्स : आर्ट्स में 5.98 प्रतिशत अधिक सफलता आर्ट्स संकाय में इस वर्ष 10,646 परीक्षार्थी शामिल हुए थे, जिनमें 10,065 विद्यार्थी सफल रहे। जिले का रिजल्ट 94.54 प्रतिशत रहा, जो पिछले वर्ष के 88.56 प्रतिशत से 5.98 प्रतिशत अधिक है। आर्ट्स में 4,141 विद्यार्थियों ने प्रथम श्रेणी प्राप्त की, जिनमें 1,341 छात्र और 2,800 छात्राएं शामिल हैं। वहीं 5,589 विद्यार्थी द्वितीय श्रेणी से पास हुए, जिनमें 2,118 छात्र और 3,471 छात्राएं हैं। तृतीय श्रेणी में 335 विद्यार्थी सफल हुए, जिनमें 187 छात्र और 148 छात्राएं शामिल हैं। 571 विद्यार्थी असफल घोषित किए गए। कॉमर्स में सबसे बेहतर प्रदर्शन कॉमर्स संकाय में इस वर्ष 549 छात्र-छात्राएं परीक्षा में शामिल हुए थे। इनमें 527 विद्यार्थी सफल हुए, जबकि 22 परीक्षार्थी असफल रहे। जिले का रिजल्ट 95.99 प्रतिशत रहा, जो तीनों संकायों में सबसे बेहतर है। कॉमर्स में 411 विद्यार्थियों ने प्रथम श्रेणी हासिल की। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार कॉमर्स में 3.32 प्रतिशत अधिक विद्यार्थी सफल हुए हैं। राज्य स्तरीय रैंकिंग में भी पलामू ने सुधार करते हुए 13वें स्थान से 10वें स्थान पर जगह बनाई है।