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चैत्र नवरात्र अष्टमी 2026: तिथि, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त की पूरी जानकारी

इंदौर नवरात्र में पूरे 9 दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है. खासतौर से चैत्र नवरात्रि को बहुत अहम माना जाता है. चैत्र नवरात्र से ही हिंदू नववर्ष की शुरुआत  मानी जाती है. साल 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाई जाएंगी. इन नौ दिनों में देवी के नौ रूपों की आराधना की जाती है. नवरात्रि के दौरान अष्टमी और नवमी तिथि बेहद खास होती है. जानते हैं कि चैत्र नवरात्र 2026 में महाअष्टमी की तारीख और इस दिन पूजा के शुभ मुहूर्त क्या रहेंगे।  अष्टमी का महत्व नवरात्रि के आठवें दिन को अष्टमी कहा जाता है और यह दिन देवी पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. धार्मिक ग्रंथों जैसे देवी भागवत पुराण और मार्कंडेय पुराण में अष्टमी और नवमी तिथि को विशेष फलदायी बताया गया है. मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से मां दुर्गा की आराधना करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. कई लोग इस दिन कन्या पूजन भी करते हैं, जिसमें छोटी बालिकाओं को देवी का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है।  कब शुरू होंगे चैत्र नवरात्रि 2026 ज्योतिषियों के अनुसार, चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 06 बजकर 52 मिनट पर प्रारंभ होगी और 20 मार्च को सुबह 04 बजकर 52 मिनट पर यह तिथि समाप्त हो रही है। ऐसे में 19 मार्च 2026 को चैत्र नवरात्रि का त्योहार प्रारंभ होगा। क्या है कलश स्थापना का शुभ समय  नवरात्रि के पहले दिन देवी की पूजा के साथ-साथ कलश स्थापित भी किया जाता है। यह बेहद शुभ और सुख-सौभाग्य लेकर आता है। इस दिन पहला शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 52 मिनट से सुबह 07 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। दूसरा मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। नौ दिनों की होगी नवरात्रि 19 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 1-  अमावस्या, प्रतिपदा मां शैलपुत्री पूजा और घटस्थापना 20 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 2- मां ब्रह्मचारिणी पूजा 21 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 3- मां चंद्रघंटा पूजा 22 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 4- मां कुष्मांडा पूजा 23 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 5-  मां स्कंदमाता पूजा 24 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 6- मां कात्यायनी पूजा 25 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 7- मां कालरात्रि पूजा 26 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 8- मां महागौरी पूजा ( इस दिन अष्टमी होगी। आप कन्या पूजन कर सकते हैं। ) 27  मार्च 2026- नवरात्रि दिन 9- मां सिद्धिदात्री पूजा ( इस दिन नवमी मनाई जाएगी। कन्या पूजन किया जाएगा )  पूजा विधि     नवरात्रि के पहले दिन आप एक साफ चौकी पर माता रानी की मूर्ति स्थापित करें।     देवी को लाल रंग की नई चुनरी पहनाएं।     इस दौरान देवी को अन्य श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें और उन्हें इत्र लगाएं।     एक साफ थाली में रोली और अक्षत का टीका बनाकर माता रानी को लगाएं।     इसके बाद साफ लोटे में जल भरकर उसपर नारियर चुनरी में बांधकर रखें और कलश स्थापित करें।     इस दौरान कलश को भी टिका लगाएं।     देवी को फूलों की माला पहनाएं और सूखे मेवे पूजा में भोग के रूप में शामिल कर लें।     अब आप धूप उठाकर देवी के नामों का जाप करें और फिर दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।     देवी की परिवार संग आरती कर लें और कुछ फल मिठाई भोग लगाकर प्रसाद के रूप में बांट दें।  

ऊर्जा क्षेत्र को बड़ी मजबूती, देश में कोयला उत्पादन 200 मिलियन टन के पार: केंद्र

मुंबई कोयला मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 11 मार्च तक कैप्टिव, वाणिज्यिक और अन्य कोयला खदानों ने 200 मिलियन टन (एमटी) कोयला उत्पादन का मील पत्थर पार कर लिया। कुल उत्पादन में से, कैप्टिव और वाणिज्यिक कोयला खदानों का योगदान 194.17 एमटी रहा, जबकि अन्य खदानों का योगदान 6.06 एमटी रहा, जिससे कुल उत्पादन ऐतिहासिक 200 एमटी के आंकड़े को पार कर गया। विशेष रूप से, वित्त वर्ष 2025-26 में कोयले का उत्पादन वित्त वर्ष 2024-25 (197.32 एमटी) के कुल उत्पादन को 7 मार्च, 2026 को ही पार कर गया, और यह उपलब्धि पिछले वर्ष की तुलना में 24 दिन पहले ही हासिल कर ली गई। इस क्षेत्र ने अपनी मजबूत गति को बरकरार रखते हुए इसी अवधि में वार्षिक आधार पर 10.56 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। मंत्रालय ने कहा, “यह उपलब्धि विभिन्न केंद्रीय और राज्य सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (सीपीएसयू/एसपीएसयू) के साथ-साथ निजी क्षेत्र के प्रतिभागियों के सामूहिक प्रयासों और अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिनके अथक परिश्रम और दृढ़ता ने देश के कोयला उत्पादन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।” कोयले की आपूर्ति में भी लगातार वृद्धि दर्ज की गई है, जो वार्षिक आधार पर 7.71 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 182.98 एमटी से बढ़कर 197.09 एमटी हो गया है। सरकार के अनुसार, कोयले के वितरण में यह निरंतर वृद्धि देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने और प्रमुख उपभोक्ता क्षेत्रों को विश्वसनीय कोयला आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए इस क्षेत्र की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है। मंत्रालय ने कहा कि वह भारत के ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र के प्रमुख चालक के रूप में कैप्टिव और वाणिज्यिक कोयला खनन को और आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।दूरदर्शी नीतियों, तकनीकी नवाचार और खनन कार्यबल के समर्पण के बल पर, यह क्षेत्र राष्ट्रीय विकास में अपना योगदान लगातार बढ़ा रहा है। मंत्रालय ने आगे कहा कि ये उपलब्धियां विश्वसनीय ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने, औद्योगिक प्रगति को बढ़ावा देने और आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को सुदृढ़ करने में कोयले की महत्वपूर्ण भूमिका की पुष्टि करती हैं, क्योंकि भारत 2047 तक विकसित भारत बनने की दिशा में अग्रसर है। इस वर्ष घरेलू कोयला उत्पादन और आपूर्ति खपत से अधिक रही है, जिसके परिणामस्वरूप खानों और ताप विद्युत संयंत्रों में कोयले का भंडार रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया है।

IDFC First Bank घोटाले में जांच तेज: 19 लोकेशन पर रेड, 90+ बैंक खाते सीज

नई दिल्ली आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में 597 करोड़ रुपये के फ्रॉड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। दरअसल, ईडी ने चंडीगढ़, मोहाली, पंचकुला, गुरुग्राम और बेंगलुरु में 19 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। वहीं, एजेंसी ने फ्रॉड से जुड़े 90 से अधिक बैंक खाते फ्रीज कर दिए हैं। आइए डिटेल जान लेते हैं कि ईडी की जांच कहां तक पहुंची है। कहां-कहां पर छापेमारी ईडी के चंडीगढ़ क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा 12 मार्च को चलाए गए इन तलाशी अभियानों में बैंक के पूर्व कर्मचारियों रिभव ऋषि और अभय कुमार, उनके परिवार के सदस्यों से जुडे परिसर शामिल हैं। इसके अलावा, फ्रॉड से जुड़े कई लाभार्थी फर्जी कंपनी से जुड़े परिसरों में भी छापेमारी की गई। इन कंपनियों में स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स, कैपको फिनटेक सर्विसेज, मां वैभव लक्ष्मी इंटीरियर्स और एसआरआर प्लानिंग गुरुस प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। सावन ज्वैलर्स जैसे ज्वैलर्स और रियल एस्टेट डेवलपर विक्रम वधवा और उनकी व्यावसायिक संस्थाओं के परिसरों की भी तलाशी ली गई। क्या कहा जांच एजेंसी ने? जांच एजेंसी के अनुसार, इस घोटाले में हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ नगर निगम और अन्य सरकारी खातों से संबंधित लगभग 597 करोड़ रुपये की सरकारी धनराशि का गबन शामिल था। यह धनराशि बैंक में सावधि जमा के रूप में रखी जानी थी लेकिन आरोपियों ने कथित तौर पर बिना अनुमति के इसे हड़प लिया। ईडी के मुताबिक उसने इस साल फरवरी में पंचकुला में राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो द्वारा आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में हरियाणा के विकास और पंचायत विभाग के बैंक खातों में शेष राशि के मिलान में विसंगति के संबंध में दर्ज एफआईआर के आधार पर धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत अपनी जांच शुरू की। जांच में पता चला कि गबन की गई रकम को कई फर्जी कंपनियों के माध्यम से इधर-उधर भेजा गया था। जांचकर्ताओं ने बताया कि कथित तौर पर इस प्रक्रिया में स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड नामक एक फर्जी कंपनी का गठन शामिल था, जिसके जरिए सरकारी धन की बड़ी रकम को शुरू में गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया था। इस कंपनी के साझेदार स्वाति सिंगला और अभिषेक सिंगला हैं। एक साल से चल रहा था खेल ईडी ने बताया कि बाद में अधिकांश रकम ज्वैलर्स के बैंक खातों के माध्यम से फर्जी बिलों द्वारा सोने की खरीद का दिखावा करने के लिए भेजी गई। जांचकर्ताओं के अनुसार यह धोखाधड़ी पिछले लगभग एक वर्ष से बैंक के पूर्व कर्मचारियों की मदद से की जा रही थी। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के पूर्व कर्मचारी रिभव ऋषि पर आरोप है कि उन्होंने कई फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल करके धनराशि को गबन किया। एजेंसी के मुताबिक अपराध की कुछ धनराशि ऋषि और उनकी पत्नी दिव्या अरोरा के बैंक खातों में स्थानांतरित की गई थी। बता दें कि रिभव ने जून 2025 में इस्तीफा दे दिया था। ईडी का दावा है कि मोहाली में परियोजनाओं के मालिक होटल व्यवसायी और रियल एस्टेट डेवलपर विक्रम वधवा ने भी बड़ी मात्रा में धनराशि का गबन किया। वधवा ने कथित तौर पर अपराध की धनराशि सीधे अपने बैंक खातों में प्राप्त की और फिर उसे प्रिस्मा रेजिडेंसी एलएलपी, किंसपायर रियल्टी एलएलपी और मार्टेल बिल्डवेल एलएलपी सहित रियल एस्टेट फर्मों में स्थानांतरित कर दिया।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर घिरा विवाद, 193 विपक्षी सांसदों ने हटाने का प्रस्ताव लाया

नई दिल्ली विपक्षी सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए संसद में नोटिस दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, 193 विपक्षी सांसदों ने लोकसभा और राज्यसभा में अलग-अलग नोटिस जमा किए हैं, जिसमें लोकसभा से 130 और राज्यसभा से 63 सांसद शामिल हैं। यह भारतीय संसदीय इतिहास में पहली बार है जब किसी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ हटाने की ऐसी कार्रवाई की गई है। यह कदम मुख्य रूप से तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व में उठाया गया है, जिसमें इंडिया गठबंधन की सभी पार्टियां, आप और कुछ निर्दलीय सांसदों ने समर्थन दिया है। विपक्ष ने नोटिस में सीईसी के खिलाफ 7 प्रमुख आरोप लगाए हैं। इनमें पक्षपातपूर्ण आचरण, चुनावी धांधली की जांच में जानबूझकर बाधा डालना, बड़े पैमाने पर मतदाता वंचित करना (मास डिसेनफ्रैंचाइजमेंट) और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को प्रभावित करना शामिल है। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान लाखों वैध मतदाताओं के नाम हटाए जाने का दावा किया गया है, जिसे विपक्ष भाजपा को फायदा पहुंचाने की साजिश बता रहा है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस अभ्यास की कड़ी आलोचना की थी और कहा था कि यह विपक्षी मतदाताओं को निशाना बनाने का प्रयास है। इसी तरह बिहार और अन्य राज्यों में भी एसआईआर को लेकर विवाद हुआ था, जहां विपक्ष ने इसे चुनावी धांधली का हिस्सा बताया। ये आरोप पिछले कुछ महीनों से बढ़ते जा रहे हैं, खासकर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले। चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल यह विवाद संसद में तनाव का कारण बन गया है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली अब निष्पक्ष नहीं रही और यह सत्ताधारी दल के पक्ष में काम कर रहा है। नोटिस में संविधान के अनुच्छेद 324(5) का हवाला दिया गया है, जो मुख्य चुनाव आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की तरह हटाने की प्रक्रिया बताता है। महाभियोग के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत जरूरी है, जो वर्तमान में विपक्ष के पास नहीं है, लेकिन यह कदम राजनीतिक दबाव बनाने और मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उछालने का प्रयास है। सरकार या चुनाव आयोग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, हालांकि पहले ज्ञानेश कुमार ने एसआईआर को योग्य मतदाताओं को शामिल करने और अयोग्य को हटाने का माध्यम बताया था। यह घटना लोकतंत्र की संस्थाओं पर सवाल उठाती है और आगामी चुनावों में चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती है। विपक्ष इसे चुनावी प्रक्रिया की स्वतंत्रता बचाने की लड़ाई बता रहा है, जबकि सत्ताधारी दल इसे राजनीतिक स्टंट करार दे सकता है। संसद में इस नोटिस पर चर्चा और आगे की कार्रवाई से राजनीतिक माहौल गरमाने की संभावना है। कुल मिलाकर, यह विवाद चुनाव सुधारों और संस्थागत निष्पक्षता पर बहस को जन्म देगा।  

मिड-एयर रिफ्यूलिंग के दौरान अमेरिकी विमान हादसे का शिकार, 4 लोगों की जान गई

वाशिंगटन ईरान पर मिलकर हमला करने वाले अमेरिका और इजरायल को भी युद्ध में भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। इस युद्ध में अभी तक आधिकारिक रूप से अमेरिका के चार विमान गिर चुके हैं और एक महंगा एयर डिफेंस सिस्टम थाड़ (THAAD) का रडार भी नष्ट हो चुका है। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड ने शुक्रवार को चौथे विमान के गिरने के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि ईंधन भरने वाले एक विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से उसमें सवार 6 क्रू सदस्यों में से चार की मौत हो गई है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक इस विमान के गिरने में अभी तक न तो दुश्मन की गोलीबारी और न ही अपने पक्ष की तरफ से की गई फायरिंग ही शामिल थी। सेंटकॉम के मुताबिक इस पर अभी जांच की जा रही है। सेंटकॉम की तरफ से इस घटना पर ज्यादा जानकारी देते हुए बताया गया कि इस घटना में दो विमान शामिल थे। क्रैश होने वाला विमान (बोइंग KC-135) ईरान में जारी अभियानों का हिस्सा था। यह एक टैंकर विमान है, जो कि दूसरे जेट्स को हवा में ही फ्यूल उपलब्ध कराता था। घटना के बाद अभी बचाव कार्य जारी है। इस विमान के क्रैश होने के बाद दूसरा विमान सुरक्षित रूप से लैंड कर गया है। आपस में टक्कर की आशंका सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो और तस्वीरों में अमेरिका के एक दूसरे ईंधन टैंकर विमान को तेल अवीव एयरपोर्ट पर उतरते हुए देखा गया है। इस जहाज के पिछले हिस्से को नुकसान पहुंचा हुआ दिख रहा है। ऐसे में कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि यह दोनों ईंधन वाहक जहाज हवा में ही एक-दूसरे से टकरा गए थे, जिसकी वजह से एक जहाज क्रैश हो गया, जबकि दूसरा जहाज सुरक्षित रूप से लैंड कर पाया। हालांकि, इसकी अभी तक कोई पुष्टि नहीं हुई है। इस युद्ध में आधिकारिक रूप से अमेरिका के चार विमान गिर चुके हैं। केसी-135 के गिरने से पहले अमेरिका के तीन एफ-15 जहाज भी कतरी वायुसेना की गलती की वजह से मार गिराए गए थे। अमेरिकी वायुसेना अभियानों के लिए खास KC-135 अमेरिका की वायुसेना के लिए इस विमान की भूमिका बहुत ही खास है। बोइंग का KC-135 स्ट्रैटोटैंकर विमान हवा में उड़ते हुए अन्य लड़ाकू विमानों में ईंधन भरने की क्षमता रखता है। इस विमान में चार टर्बोफैन इंजन लगे होते हैं और यह अपने साथ करीब 146 टन वजन लेकर उड़ान भर सकता है। पिछले 60 सालों से यह लंबी दूरी के अमेरिकी सैन्य अभियानों में बेहद ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ईरान युद्ध के दौरान भी इन विमानों का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है, ताकि अमेरिकी विमानों की उड़ने की क्षमता को बढ़ाया जा सके।

गो तस्करों पर योगी सरकार का बड़ा एक्शन, 35 हजार से अधिक आरोपी सलाखों के पीछे

लखनऊ योगी सरकार ने सूबे की सत्ता संभालने के बाद प्रदेश में गोकशी, गोतस्करों और अवैध पशु वध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत ताबड़तोड़ कार्रवाई की, जो आज भी लगातार जारी है। इसके साथ गोकशी को पूरी तरह से रोकने के लिए वर्ष 2020 में गोवध निवारण कानून में संशोधन किया गया और जून-2020 में उत्तर प्रदेश गोवध निवारण (संशोधन) अध्यादेश जारी किया गया। इसके तहत अब तक प्रदेश भर में गोकशी के 14,182 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 35,924 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। यूपी सरकार का मानना है कि गोकशी पर नियंत्रण केवल कानून व्यवस्था का विषय नहीं बल्कि यह सामाजिक आस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है। इसी को ध्यान में रखते हुए योगी सरकार द्वारा पुलिस, प्रशासन और विशेष कानूनों के माध्यम से लगातार कार्रवाई की जा रही है। गोकशी से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किए गए आरोपियों के खिलाफ केवल सामान्य मुकदमे ही नहीं दर्ज किए गए, बल्कि उनके विरुद्ध कड़े कानूनों के तहत भी कार्रवाई की गई। गोकशी के मामले में 35,924 आरोपियों में से 13,793 के खिलाफ गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई की गई, जबकि 178 आरोपियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) की कार्रवाई की गई। इसके अलावा 14,305 मामलों में गैंगस्टर एक्ट के तहत कठोर कार्रवाई की गई है। योगी सरकार की सख्त कार्रवाई से गोकशी व गोतस्करी से जुड़े संगठित गिरोहों पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिली। इस दौरान प्रदेश में सक्रिय गोकशी से जुड़े नेटवर्क को ध्वस्त किया गया और आरोपियों की संपत्तियों की भी जांच की गई। गोकशी के मामलों में केवल गिरफ्तारी तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रही, बल्कि आर्थिक स्तर पर भी अपराधियों पर प्रहार किया गया। गैंगस्टर एक्ट की धारा 14(1) के तहत कार्रवाई करते हुए लगभग 83 करोड़ 32 लाख रुपए की संपत्ति जब्त की गई। इसका उद्देश्य अपराध से अर्जित संपत्ति को जब्त करने से संगठित अपराधियों की आर्थिक ताकत कमजोर करना है ताकि भविष्य में ऐसे अपराधों को पूरी तरह रोका जा सके। इतना ही नहीं, कई मामलों में अवैध कमाई से खरीदी गई जमीन, वाहन और अन्य संपत्तियों को भी कुर्क किया गया है। योगी सरकार ने गोकशी पर नियंत्रण के लिए पुलिस की विशेष टीमों का गठन किया। विशेष टीमों द्वारा खुफिया निगरानी, जिलास्तरीय टास्क फोर्स और सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष सतर्कता के जरिये गोकशी-गोतस्करी के नेटवर्क को ध्वस्त किया गया। साथ ही प्रदेश के कई संवेदनशील जिलों में रात के समय पुलिस गश्त बढ़ाई गई, वहीं पशु परिवहन से जुड़े मामलों की भी विशेष निगरानी की गई। इसके अलावा अवैध बूचड़खानों के खिलाफ लगातार अभियान चलाए गए। योगी सरकार की सख्त कार्रवाई से प्रदेश में अवैध पशु वध से जुड़े मामलों में काफी कमी आई है और संगठित गिरोहों की गतिविधियों पर अंकुश लगा है। उत्तर प्रदेश गोवध निवारण (संशोधन) अध्यादेश 2020 में नियमों को सख्त किया गया। अध्यादेश के तहत प्रदेश में गोहत्या पर 10 साल कठोर कारावास की सजा, 3 से 5 लाख तक जुर्माने का प्रावधान और गोवंश के अंगभंग करने पर 7 साल की जेल व 3 लाख जुर्माना है।

उप निरीक्षक नागरिक पुलिस और समकक्ष पदों की लिखित परीक्षा 14-15 मार्च को

उप निरीक्षक नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों के लिए लिखित परीक्षा 14 और 15 मार्च को दोनों दिन दो – दो पालियों में आयोजित होगी परीक्षा उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने समस्त प्रतिभागियों को परीक्षा के लिए शुभकामनाएं दीं लखनऊ  उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड उप निरीक्षक नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों पर भर्ती के लिए लिखित परीक्षा प्रदेश के 75 जनपदों के 1090 परीक्षा केन्द्रों में 14 मार्च  एवं 15 मार्च को दो-दो पालियों में आयोजित कर रहा है। पूर्वान्ह में 10.00 बजे से मध्यान्ह 12.00 बजे तक एवं अपरान्ह 03.00 बजे से सायं 05.00 बजे तक परीक्षा होगी।  उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने सीधी भर्ती-2025 के अन्तर्गत 4543 पदों पर अभ्यर्थियो से आवेदन आमंत्रित किए थे। इसमें कुल 15,75,760 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। इनमें पुरूष-11,66,386 हैं जबकि 4,09,374 अभ्यर्थी महिला हैं।   लिखित परीक्षा के आयोजन हेतु गुणवत्तापूर्ण परीक्षा केन्द्रों के चयन निर्धारण के अन्तर्गत राजकीय माध्यमिक विद्यालय, राजकीय डिग्री कॉलेज, राज्य/ केन्द्र के विद्यालय/ विश्वविद्यालय, पालीटेक्निक, राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज आदि ही सम्मिलित किए गये हैं। महिला अभ्यर्थियों की सुविधा हेतु उनके मण्डल का ही जनपद आवंटित किया गया है। लिखित प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी, नकलविहीन एवं शुचितापूर्ण ढंग से कराये जाने के संबंध में इम्पर्सीनेशन कंट्रोल (प्रतिरूपण नियंत्रण) हेतु उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने कई इंतजाम किए हैं। परीक्षा केन्द्रों की सीसीटीवी से मानीटरिंग हेतु त्रिस्तरीय कन्ट्रोल एवं कमांड सेंटर (परीक्षा केन्द्र, जनपद एवं बोर्ड) व्यवस्था की गई है। परीक्षा के निष्पक्ष, नकलविहीन एवं शुचितापूर्ण परीक्षा सम्पन्न कराए जाने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड एवं एस०टी०एफ० द्वारा सघनता एवं सूक्ष्मता से सतर्क दृष्टि रखी जाएगी। यदि कोई अवांछनीय गतिविधियों मे संलिप्त पाया जाता है तो उसके विरूद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने अभ्यर्थियों को सलाह दी है कि अनुचित साधनों के प्रयोग, प्रतिरूपण, अवांछनीय कृत्यों, दलालों और नौकरी रैकेट चलाने वालों से सावधान रहें । असुविधा से बचने के लिए परीक्षा केन्द्र पर समय से पहुंचें। प्रवेश पत्र के साथ परीक्षा प्रारंभ होने से 02 घंटा पूर्व प्रवेश पत्र, आधार कार्ड / पहचान पत्र (डी०एल०, पासपोर्ट), काला/नीला बाल प्वाइंट पेन के साथ उपस्थित हों।  परीक्षा प्रारंभ होने से 30 मिनट पूर्व प्रवेश द्वार बंद कर दिया जाएगा तथा इसके बाद किसी अभ्यर्थी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। जिन अभ्यर्थियों द्वारा अपने आवेदन पत्र कों आधार नंबर के द्वारा पंजीकृत नहीं किया गया है, अथवा आवेदन के चरण में आधार नम्बर मिसमैच पाए गये हैं, उनसे अपेक्षा है कि वह अनिवार्यतः परीक्षा प्रारंभ होने से 02.30 घंटा पूर्व परीक्षा केन्द्र पर रिपोर्ट करें। इससे निर्धारित समयावधि में उनका सत्यापन किया जा सके। अभ्यर्थी अपना अपडेटेड एवं अनलॉक्ड आधार कार्ड के साथ लिखित परीक्षा हेतु उपस्थित होगें। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने समस्त प्रतिभागियों को लिखित परीक्षा के लिए शुभकामनाएं दीं हैं।    यह सामान नहीं लाएं साथ परीक्षा केन्द्रों पर पाठ्य सामग्री (मुद्रित या लिखित), कागज के ज्यामितीय-पेंसिल बाक्स, प्लास्टिक पाउच, किसी भी प्रकार का कैल्कुलेटर, क्रेडिट/डेबिट कार्ड, स्केल, कॉपी, पेन ड्राइव, इरेजर, लॉग टेबुल/ इलेक्ट्रानिक पेन/स्कैनर, डिजिटल पेन, इलेक्ट्रानिक गैजेट जैसे मोबाइल फोन, चाभी, किसी प्रकार की घड़ी, ज्वैलरी, स्मार्ट वाच, ब्लूटूथ डिवाइस, इयरफोन, पेजर, हेल्थ बैण्ड, बटुआ/ पर्स, काला चश्मा, हैण्डबैग, टोपी, खाने का सामान, सिगरेट, लाइटर, माचिस, गुटखा लाना पूर्ण रूप से वर्जित है। परीक्षा अवधि में अभ्यर्थी के पास उपरोक्त सामग्री पाए जाने पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

BNP Paribas ओपन में सबालेंका-सिनर की धाक, शानदार जीत के साथ पहुंचे सेमीफाइनल

इंडियन वेल्स एरिना सबालेंका ने बीएनपी परीबस ओपन क्वार्टर फाइनल में विक्टोरिया एमबोको को 7 . 6, 6 . 4 से हराकर इंडियन वेल्स टेनिस खिताब की ओर अगला कदम बढा दिया । यानिक सिनर , अलेक्जेंडर ज्वेरेव और दानिल मेदवेदेव भी पुरूष वर्ग के सेमीफाइनल में पहुंच गए । मेदवेदेव ने विवादास्पद अंपायर कॉल का फायदा उठाकर गत चैम्पियन जैक ड्रेपर को 6 . 1, 7 . 5 से हराया । मेदवेदेव का सामना अब कार्लोस अल्काराज या कैमरन नॉरी से होगा जबकि दूसरे सेमीफाइनल में सिनर की टक्कर ज्वेरेव से होगी । सबालेंका सेमीफाइनल में चेक गणराज्य की 14वीं वरीयता प्राप्त लिंडा नोस्कोवा से खेलेंगी जिन्होंने आस्ट्रेलिया की गैर वरीय तालिया गिब्सन को 6 . 2, 4 . 6, 6 . 2 से मात दी । नौवीं वरीयता प्राप्त यूक्रेन की एलिना स्वितोलिना भी पोलैंड की दूसरी वरीयता प्राप्त इगा स्वियातेक को 6 . 2, 4 . 6, 6 . 4 से हराकर सेमीफाइनल में पहुंच गई । अब उनका सामना एलेना रिबाकिना से होगा जिसने अमेरिका की जेसिका पेगुला को 6 . 1, 7 . 6 से मात दी ।  

रायपुर में जर्जर पुल के निर्माण की शुरुआत, मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय की पहल से काम शुरू

रायपुर : मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय की पहल से जर्जर पुल के निर्माण की शुरुआत वर्षों से जोखिम उठाकर गुजर रहे राहगीरों को मिलेगी सुरक्षित आवागमन की सुविधा रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के निर्देश पर जशपुर जिले में सिंगीबहार से कछुआकानी मुख्य मार्ग पर स्थित जर्जर पुल के निर्माण कार्य की शुरुआत कर दी गई है। लंबे समय से पुल की जर्जर स्थिति के कारण क्षेत्र के लोग जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को मजबूर थे। मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय के संज्ञान में मामला आने के बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित विभाग को निर्माण कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए। बताया गया है कि सिंगीबहार–कछुआकानी मार्ग क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है, जो छत्तीसगढ़ को पड़ोसी राज्यों झारखंड और ओडिशा से जोड़ने में अहम भूमिका निभाता है। पुल के खराब होने के कारण इस मार्ग से गुजरने वाले ग्रामीणों, किसानों और मजदूरों को लंबे समय से कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया को जानकारी मिलने के बाद अधिकारियों को तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। निर्देश मिलते ही संबंधित विभाग ने स्थल पर पहुंचकर पुल निर्माण का कार्य प्रारंभ कर दिया है। निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद क्षेत्रवासियों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सकेगी। पुल निर्माण कार्य शुरू होने से क्षेत्र में खुशी का माहौल है। स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्षों पुरानी समस्या का अब समाधान होने जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि पुल बनने से आवागमन सुरक्षित होने के साथ ही आसपास के गांवों के विकास और व्यापारिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

भोपाल जल संकट: भू-जल घटने के कारण निजी नलकूपों पर रोक, जिला घोषित जल अभावग्रस्त

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में लगातार गिरते भू-जल स्तर को देखते हुए जिला प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 के तहत आदेश जारी करते हुए पूरे भोपाल जिले को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित कर दिया है। इसके साथ ही जिले में नए निजी और अशासकीय नलकूपों के खनन पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है। भू-जल के अत्यधिक दोहन से संकट गहराया लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री ने प्रशासन को जानकारी दी कि जिले में कृषि और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए भू-जल स्रोतों का अत्यधिक उपयोग हो रहा है। इसके कारण नलकूपों और पेयजल स्रोतों का जल स्तर तेजी से गिरता जा रहा है। यदि यह स्थिति जारी रही तो आगामी गर्मियों में भोपाल जिले में गंभीर पेयजल संकट उत्पन्न होने की आशंका जताई गई है। बिना अनुमति नहीं हो सकेगा बोरिंग मशीन का प्रवेश जारी आदेश के अनुसार जिले की राजस्व सीमाओं में बिना अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) की अनुमति के कोई भी बोरिंग मशीन प्रवेश नहीं कर सकेगी और नए निजी नलकूपों का खनन नहीं किया जा सकेगा। हालांकि सार्वजनिक सड़कों से गुजरने वाली मशीनों को इस प्रावधान से छूट दी गई है। अवैध बोरिंग पर जब्ती और एफआईआर प्रशासन ने राजस्व और पुलिस अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि यदि कोई बोरिंग मशीन अवैध रूप से जिले में प्रवेश करती है या प्रतिबंधित स्थानों पर नलकूप खनन का प्रयास करती है तो उसे तुरंत जप्त किया जाए और संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज की जाए। विशेष परिस्थितियों में मिल सकेगी अनुमति कलेक्टर ने सभी अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को निर्देश दिया है कि यदि किसी क्षेत्र में अपरिहार्य परिस्थिति हो तो उचित जांच के बाद नलकूप खनन की अनुमति दी जा सकती है। आदेश उल्लंघन पर सख्त सजा आदेश का उल्लंघन करने पर मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 के तहत दो हजार रुपये तक का जुर्माना, दो वर्ष तक का कारावास या दोनों का प्रावधान है। सरकारी योजनाओं पर नहीं लागू होगा प्रतिबंध यह आदेश सरकारी योजनाओं के तहत किए जाने वाले नलकूप खनन पर लागू नहीं होगा। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग आवश्यकतानुसार योजनाओं के अंतर्गत नलकूप खनन का कार्य जारी रख सकेगा। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि आवश्यकता पड़ने पर निजी जल स्रोतों को सार्वजनिक पेयजल व्यवस्था के लिए अधिग्रहित किया जा सकता है।