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पानी पर बढ़ा तनाव: भारत की योजना से घबराया पाकिस्तान, समाधान नहीं सूझ रहा

इस्लामाबाद पलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ऐसे रणनीतिक कदम उठाए हैं जो कि उसकी टेंशन बढ़ाते ही चले जा रहे हैं। झेलम और चिनाब के बहाव कम करने को लेकर शहबाज सरकार एकदम से बिलबिला गई है। हाल ही में पाकिस्तान में प्रांतीय स्तर की एक बड़ी बैठक हुई और इसमें वॉटर ऐंड पावर डिवेलपमेंट अथॉरिटी के चेयरमैन मोहम्मद सईद ने कहा कि भारत झेलम और चिनाब प्रोजेक्ट पर 60 अरब डॉलर खर्च कर रहा है और इससे पाकिस्तान में हाहाकार मचने वाला है। उन्होंने कहा कि भारत के प्रोजेक्ट पूरे होने के बाद इन निदियों के जल रोकने की कैपिसीटी 15 दिन से बढ़कर सीधे 60 दिन हो जाएगी। घबरा गया पाकिस्तान पाकिस्तान भारत के इस प्रोजेक्ट से बुरी तरह घबराया हुआ है। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान को सूखे का डर सताने लगा है। पाकिस्तान के अधिकारियों का कहना है कि जब फसलों की पानी की जरूरत होगी तो नदियों का बहाव बेहद कम हो जाएगा। वहीं मॉनसून में भारत ज्यादा पानी छोड़ सकता है इससे पाकिस्तान का बड़ा हिस्सा डूब जाएगा। भारत के इस कदम से परेशान पाकिस्तान के अधिकारियों ने सरकार को सलाह दी है कि वहां भी बड़े बांध बनाने की जरूरत है जिससे पानी को नियंत्रित किया जा सके। हालांकि समस्या यही है कि ये नदियां भारत से ही होकर पाकिस्तान में जाती हैं। ऐसे में बांध बनाने के बाद भी उसकी मुसीबत कम होने वाली नहीं है। पाकिस्तान का जल मंत्रालय नदियों के पानी को लेकर बेहद परेशान है। महीने भर पहले पाकिस्तान ने इसको लेकर भारत से जवाब मांगने शुरू कर दिया है। पाकिस्तान का कहना है कि भारत ने बगलिहार डैम पर पानी रोक लिया है दिसंबर महीने में देखा गया था कि बगलिहार में पानी की कमी हो गई है। झेलम और चिनाब में कम हआ पानी पाकिस्तान का कहना है कि भारत झेलम और चिनाब का पानी कभी रोकता है और कभी छोड़ता है। इससे पाकिस्तान में पानी की कमी देखी जा रही है। सिंधु जल पर पाकिस्तान के एक अधइकारी ने कहा कि पाकिस्तान में मंगला बांध तक पानी का बहाव काफी कम हो गया है। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक शहबाज सरकार झेलम के बहाव पर नजर रख रही है। परेशान पाकिस्तान बार-बार पत्र भेजकर भारत के आगे गिड़गिड़ा रहा है। बता दें कि पहलगाम महले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौता निलंबित करदिया था। यह पाकिस्तान के लिए बहुत बड़ा घाव साबित हो रहा है। जानकारी के मुताबिक भारत अब रावी का पानी भी रोकने का प्लान बना रहा है। जानकारी के मुताबिक शहपुर कंडी डैम का काम भी जल्द पूरा होने वाला है। इससे रावी का पानी रोककर इसे कठुआ और सांबा भेजा जाएगाय़ पाकिस्तान को जाने वाला ज्यादातर पानी रोक लिया जाएगा। पाकिस्तान की लगभग 90 फीसदी खेदी सिंदु नदी सिस्म पर ही निर्भर है। पाकिस्तान के पास पानी रोकने की क्षमता ना के बराबर है।

पढ़ाई का तरीका हुआ आधुनिक, NEP 2020 पर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बयान

नई दिल्ली केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का कहना है कि वर्ष 2047 तक, जब देश आजादी के 100 साल पूरे करेगा, तब तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना है। इसके लिए शिक्षा सबसे बड़ा हथियार है। उनका कहना था कि भारत की ताकत उसकी युवा आबादी है। बड़ी संख्या में युवा पढ़ रहे हैं, नए विचार ला रहे हैं और नई तकनीक पर काम कर रहे हैं। धर्मेंद्र प्रधान नई दिल्ली में आयोजित स्टडी इन इंडिया एजु-डिप्लोमैटिक कॉन्क्लेव 2026 में बोल रहे थे। यहां उन्होंने 50 से अधिक देशों के राजनयिकों को संबोधित किया। यहां बताया गया कि सरकार चाहती है कि दुनिया के बड़े विश्वविद्यालय भारत में अपने परिसर खोलें। इसके लिए नियम बनाए गए हैं ताकि प्रक्रिया साफ और समय पर पूरी हो। गौरतलब है कि अगर विदेशी संस्थान भारत आएंगे तो भारतीय छात्रों को बाहर जाए बिना ही अंतरराष्ट्रीय स्तर की पढ़ाई करने के अवसर मिल सकेंगे। नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में यह बड़ा शिक्षा सम्मेलन हुआ। इसमें 50 से ज्यादा देशों के राजदूत, उच्चायुक्त और अलग-अलग देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस मौके पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने खुलकर भारत की शिक्षा व्यवस्था और उसके भविष्य के बारे में बात की। शिक्षा मंत्री ने विदेशी उच्च शिक्षा संस्थानों से भारत की तेजी से विकसित हो रही, नवाचार-आधारित शिक्षा प्रणाली के साथ सहयोग करने का आह्वान किया। इस कार्यक्रम का मकसद दुनिया को यह बताना था कि भारत अब सिर्फ पढ़ाई करने की जगह नहीं, बल्कि एक बड़ा शैक्षणिक केंद्र बन रहा है। भारत चाहता है कि न केवल विदेशी संस्थान बल्कि दूसरे देशों के छात्र भी यहां आएं, पढ़ें, शोध करें और मिलकर आगे बढ़ें। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 आने के बाद देश की पढ़ाई का ढंग बदल गया है। अब छात्रों को केवल किसी एक विषय तक सीमित रहने की जरूरत नहीं है। छात्र एक साथ अलग-अलग विषय पढ़ सकते हैं। वहीं युवाओं के कौशल पर भी जोर दिया जा रहा है, यानी पढ़ाई ऐसी हो जो सीधे तौर पर भविष्य में काम आए। शिक्षा से सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि काम करने की क्षमता भी मिले। शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक, यूजीसी ने एक पारदर्शी और समयबद्ध नियामक ढांचा तैयार किया है, जिससे विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में परिसर स्थापित करने में मदद मिलेगी। ऑस्ट्रेलिया, इटली, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रमुख संस्थानों के आवेदनों को एक महीने के भीतर मंजूरी दे दी गई है। सम्मेलन में कई अहम मुद्दों पर बातचीत हुई, जिसमें भारतीय ज्ञान परंपरा को दुनिया तक पहुंचाना और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीक का शिक्षा के क्षेत्र में उपयोग करना शामिल है। इसके अलावा, विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए नियम, कौशल शिक्षा को अंतरराष्ट्रीय स्तर से जोड़ना, और भारत नवाचार 2026 पहल पर भी यहां चर्चा की गई। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि दुनिया में चाहे जितनी अनिश्चितता हो, शिक्षा हमेशा देशों को जोड़ने का काम करती है। पढ़ाई, शोध और ज्ञान का आदान-प्रदान ही असली साझेदारी बनाता है। उन्होंने सभी देशों के प्रतिनिधियों से कहा कि वे अपने छात्रों और संस्थानों को भारत से जोड़ें। शिक्षाविदों के मुताबिक इस आयोजन का संदेश यह रहा कि भारत अब वैश्विक शिक्षा मंच पर मजबूत दावेदार बनना चाहता है। भारत दुनिया से कह रहा है कि आइए, यहां पढ़िए, शोध कीजिए, नए विचार लाइए और मिलकर आगे बढ़िए।

संजू सैमसन की पारी फीकी पड़ी? गंभीर बोले- मैच जिताने वाले थे ये दो चौके

कोलकाता गौतम गंभीर का मानना है की टीम गेम में प्रत्येक खिलाड़ी का छोटा या बड़ा योगदान महत्वपूर्ण होता है लेकिन भारतीय क्रिकेट में लंबे समय से इसका अभाव रहा है। भारत के हेड कोच ने कहा कि अगर शिवम दुबे ने रविवार को वेस्टइंडीज के खिलाफ टी20 वर्ल्ड कप 2026 के मैच में 19वें ओवर दो चौके नहीं लगाए होते तो संजू सैमसन की 97 रन की मैच विजेता पारी की कोई बात नहीं कर रहा होता। गंभीर ने कहा कि जब तक वह कोच हैं, प्रत्येक खिलाड़ी के योगदान का पूरे सम्मान के साथ उल्लेख किया जाएगा। 'सैमसन के 97 रन जितने अहम दो चौके' गंभीर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस से कहा, ''मुझे खुशी है कि आप सभी के योगदान के बारे में बात कर रहे हैं क्योंकि कई वर्षों से हम केवल कुछ विशेष योगदानों के बारे में ही बात करते रहे हैं। यह एक टीम गेम है और यह हमेशा टीम गेम ही रहेगा।'' उन्होंने कहा, ''मेरे लिए शिवम के दो चौके भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने संजू के 97 रन, क्योंकि अगर उसने वे दो चौके नहीं लगाए होते तो आप उस (97 रन की पारी) के बारे में बात भी नहीं करते।'' गंभीर ने कहा, ''बड़ा योगदान सुर्खियां बटोरता है, लेकिन छोटा योगदान भी महत्वपूर्ण होता है क्योंकि वह टीम को जीत दिलाने में मदद कर सकता है, उसे लक्ष्य तक पहुंचा सकता है। इसीलिए मैं कहता हूं कि जब तक मैं इस पद पर हूं, हमारी आगे भी यही नीति रहेगी।'' 'सच कहूं तो मुझे आंकड़ों पर भरोसा नहीं' दुनिया भर के कोच आंकडों (डेटा) को महत्वपूर्ण मानते हैं लेकिन इनमें गंभीर शामिल नहीं हैं। उन्होंने कहा, ''सच कहूं तो मुझे आंकड़ों पर भरोसा नहीं है। मैंने कभी आंकड़े देखे ही नहीं। मुझे तो यह भी नहीं पता कि आंकड़े होते क्या हैं। मैं उन पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं करता, क्योंकि मुझे लगता है कि वे अधिकतर सहज ज्ञान पर आधारित होते हैं।'' गंभीर की यह टिप्पणी आश्चर्यजनक थी क्योंकि टीम डेटा विश्लेषक हरि प्रसाद पर काफी हद तक निर्भर रहती है। भारतीय कोच ने कहा, ''टी20 क्रिकेट में सहज ज्ञान और उस सहज ज्ञान पर भरोसा करना ही सब कुछ है। खेल और टी20 प्रारूप के बारे में मुझे जो भी जानकारी है, मैं उसे कप्तान को देने और जितना हो सके उनकी मदद करने की कोशिश करता हूं।'' इंग्लैंड सेमीफाइनल को लेकर क्या बोले? उन्होंने कहा, ''लेकिन आखिर में फैसला कप्तान को करना होता है लेकिन ईमानदारी से कहूं तो मुझे आंकड़ों पर कोई विश्वास नहीं है क्योंकि इन्हें बहुत बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है। मेरे लिए यह बहुत सौभाग्य की बात है कि हमारे पास विश्वस्तरीय खिलाड़ी हैं।'' इंग्लैंड के खिलाफ मुंबई में होने वाले सेमीफाइनल के बारे में गंभीर ने कहा, ''उनकी (इंग्लैंड) टीम एक विश्वस्तरीय टीम हैं। उनके पास कई बेहतरीन खिलाड़ी भी हैं और हम सभी जानते हैं कि वानखेड़े में खेलना आसान नहीं होता है। उम्मीद है कि हम अच्छा प्रदर्शन करेंगे।''

टीम इंडिया का भविष्य संवारने की तैयारी, BCCI ने दिग्गजों को सौंपी जिम्मेदारी

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) ने पूर्व भारतीय दिग्गज जहीर खान और हरभजन सिंह से बेंगलुरु स्थित 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' (सीओई) में विशेष शिविरों में अपनी सेवाएं देने के लिए संपर्क किया है। बीसीसीआई ने इन शिविरों के कुछ खिलाड़ियों की सूची तैयार की है। इस सूची में ऐसे खिलाड़ी शामिल किए गए हैं जो भविष्य में भारत की तरफ से खेल सकते हैं। इन खिलाड़ियों में आयु वर्ग और प्रथम श्रेणी क्रिकेट के अलावा भारत ए और भारत की सीनियर टीम की तरफ से कुछ मैच खेलने वाले खिलाड़ी शामिल हैं। बाएं हाथ के तेज गेंदबाज जहीर खान युवा तेज गेंदबाजों के साथ पांच दिवसीय शिविर के लिए पहले ही बेंगलुरु पहुंच चुके हैं। ये युवा गेंदबाज सीनियर टीम में जगह बनाने के करीब हैं या उसके लिए कुछ मैच खेल चुके हैं। पता चला है कि सीओई के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण ने भारतीय क्रिकेट की अगली पीढ़ी को तैयार करने में मदद करने के लिए अपने पूर्व साथियों से चार से पांच दिन के विशेष शिविरों के लिए संपर्क किया था। इस घटनाक्रम से अवगत बीसीसीआई के एक सूत्र ने गोपनीयता की शर्त पर पीटीआई से कहा, ‘लक्ष्मण ने विशेष शिविरों के लिए जहीर, हरभजन और अनिल कुंबले से संपर्क किया है। हरभजन ऑफ स्पिनरों के लिए चार या पांच दिवसीय शिविर के लिए अपना कार्यक्रम तैयार कर रहे हैं। वह उन उभरते हुए खिलाड़ियों की मदद करने के लिए उत्सुक हैं जिन्होंने आयु वर्ग और भारत ए स्तर पर अच्छा प्रदर्शन किया है।’ उन्होंने कहा, ‘यह एक स्वागत योग्य पहल है जहां भारत के लिए 100 से अधिक टेस्ट मैच खेल चुके खिलाड़ी अगली पीढ़ी के साथ अपने अनुभव साझा करेंगे।’ माना जा रहा है कि टेस्ट और वनडे में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले भारतीय गेंदबाज अनिल कुंबले से कलाई के स्पिनरों के लिए एक शिविर आयोजित करने का अनुरोध किया गया है। ऐसा माना जा रहा है कि इंडियन प्रीमियर लीग शुरू होने से पहले विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे क्योंकि इनमें से कई खिलाड़ियों को अपनी-अपनी आईपीएल टीमों से जुड़ना होगा। इस बीच भारत के पूर्व तेज गेंदबाज वीआरवी सिंह और श्रीनाथ अरविंद उन प्रमुख नामों में शामिल हैं जिन्होंने 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' में तेज गेंदबाजी कोच के स्थायी पद के लिए आवेदन किया है। वीआरवी और अरविंद दोनों ने सीओई में विभिन्न आयु वर्ग के शिविरों में काम किया है। बीसीसीआई इंग्लैंड के ट्रॉय कूली की जगह पर तेज गेंदबाजी विभाग के प्रमुख की तलाश में है। स्पिन गेंदबाजी विभाग की कमान फिलहाल पूर्व भारतीय गेंदबाज सुनील जोशी के हाथ में है।

निर्यात पर मंडराया खतरा: पंजाब के बासमती कारोबारियों को भारी नुकसान की आशंका

चंडीगढ़ भारत से बासमती यूरोपीय संघ, तुर्की और यूके को भी भेजा जाता है। ईरान की बंदरगाह का अफगानिस्तान भी इस्तेमाल करता है जिस कारण वहां के लिए भी बासमती के निर्यात पर असर पड़ेगा। ईरान संकट के बीच पंजाब में बासमती निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है क्योंकि युद्ध के हालात के बीच बासमती के निर्यात पर संकट के बादल छा गए हैं। ईरान व बाकी देशों से 10 लाख टन बासमती के आर्डर हैं जिसमें से अकेले पंजाब से ही तीन लाख टन बासमती का निर्यात लटक गया है। बासमती निर्यातकों का कहना है कि अगर स्थिति सामान्य जल्द न हुई तो घरेलू बाजार में बासमती के दाम गिर जाएंगे जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है। अमेरिका-इस्राइल के हमले के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है जहां से बासमती का निर्यात होता है। यह सिर्फ ईरान ही नहीं बल्कि सऊदी अरब, इराक और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी देशों को भी निर्यात के लिए जोड़ता है लेकिन अब इसके बंद होने से गुजरात और ईरान बंदरगाह पर ही माल अटका हुआ है। इससे बासमती के खराब होने का भी डर है। देश से हर साल 20 लाख टन का निर्यात होता है जिसमें से 25 प्रतिशत कुल बासमती का निर्यात ईरान को होता है जबकि 20 प्रतिशत निर्यात इराक को होता है। अकेले पंजाब की निर्यात में 25 से 30 प्रतिशत हिस्सेदारी है और इसमें से भी सबसे ज्यादा निर्यात ईरान को होता है। बाकी मध्य पूर्वी देशों को भी निर्यात किया जाता है। दोनों बंदरगाह और मिलों में पड़ा बासमती पंजाब बासमती मिलर्स एंड एक्सपोर्ट एसोसिएशन के वित्त सचिव नरेश गोयल ने बताया कि मौजूदा हालात के कारण दोनों बंदरगाह पर पंजाब का बासमती अटक गया है। इसके अलावा मिलों में भी भारी मात्रा में बासमती पड़ा है। अगर जल्द निर्यात शुरू न हुआ तो इसके खराब होने का भी डर है। अदायगी भी रुकने से निर्यातकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिस तरह के हालात बने हैं उससे यह जल्द सामान्य होते दिखाई नहीं दे रहे हैं जिससे आगे संकट और गहरा सकता है। आगे ऑर्डर देने से डर रहे व्यापारी एसोसिएशन के प्रधान बाल कृष्ण बाली ने बताया कि रोज औसत 10 हजार टन बासमती का निर्यात अकेले पंजाब से ही होता है लेकिन मौजूदा हालात में अब ईरान में व्यापारी आगे ऑर्डर देने से डर रहे हैं। वह लगातार उनके संपर्क में हैं लेकिन पोर्ट बंद होने से फिलहाल वह पहले से फंसे माल की अनलोडिंग नहीं कर पा रहे हैं। पिछले साल भी उनके 2 हजार करोड़ रुपये फंस गए थे और अब दोबारा हालात पहले से भी अधिक खराब हो गए हैं। आगे गेहूं की खरीद भी शुरू होनी है लेकिन पहले ही मिलों में चावल का भंडारण किया हुआ है। इससे आगे स्टोरेज संकट का भी सामना करना पड़ सकता है क्योंकि गेहूं के लिए सरकार जगह बनाने की तैयारी कर रही थी।  

रोटी की तलाश में गए, अब जिंदगी बचाने की जंग: विदेश में फंसे भारतीयों की पुकार

नई दिल्ली इजरायल और अमेरिका के ईरान पर हमले के बाद से पूरा मध्य-पूर्व क्षेत्र धधक रहा है। इस आग में हजारों भारतीय भी झुलस रहे हैं। इनमें कुछ विद्यार्थी तो कुछ टूरिस्ट हैं। सबसे ज्यादा वो लोग हैं, जो रोजी-रोटी की तलाश में खाड़ी देशों में गए थे लेकिन हवाई हमलों की वजह से एयरस्पेस बंद हो चुके हैं। ऐसे में ये लोग वहां फंस गए हैं। लिहाजा, बढ़ते तनाव ने हजारों भारतीयों को अनिश्चितता और भय के बीच ला खड़ा किया है। दुबई, अबू धाबी जैसे विश्व-प्रसिद्ध शहरों में भी अब सायरन बजने और मिसाइल हमले की खबरें आम हो गई हैं। बहरीन, इराक, जॉर्डन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में रहने वाले भारतीयों के बीच भय का माहौल है। ऐसे हालात में इन देशों में फंसे भारतीय नागरिक सोशल मीडिया पर भारत सरकार से फौरन निकालने की गुहार लगा रहे हैं। सोशल मीडिया पर उनकी अपीलों की बाढ़ आ गई है, जिनमें से कई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्रालय (MEA) से निकालने की अपील की है। हालांकि, MEA ने प्रभावित देशों में भारतीयों के लिए इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं, जो मेडिकल इमरजेंसी, सुरक्षा और निकासी से जुड़े सवालों के लिए मदद देते हैं। मिडिल-ईस्ट में फंसे भारतीय क्या लिख रहे? दुबई में एक वर्कर ने इंस्टाग्राम रील पर पोस्ट किया, "मैं यहां रोजी-रोटी के लिए आया था, लेकिन अब मैं बम से बचने की जगह तलाश कर रहा हूं। मैं मोदी जी और भारत सरकार से अनुरोध करता हूं कि हमें यहां से निकालें।" सैकड़ों टूरिस्ट भी दुबई और अबू धाबी में फंसे हुए हैं। मिडिल ईस्ट के कई संस्थानों में पढ़ने वाले MBA और मेडिकल के स्टूडेंट भी सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर रहे हैं, जिसमें भारत सरकार से मदद मांगी जा रही है। छात्र और पर्यटक भी संकट में स्थिति केवल खाड़ी देशों में कमाने गए कामगारों तक सीमित नहीं है। बड़ी संख्या में पर्यटक और छात्र भी इस संकट में फंसे हुए हैं। खासकर तेहरान में पढ़ रहे भारतीय मेडिकल छात्रों ने भावुक अपीलें की हैं। एक छात्रा ने कहा, “यहां हालात बहुत खराब और अनिश्चित हैं। हमें नहीं पता अगला पल क्या होगा। कृपया जल्द से जल्द हमें सुरक्षित निकाला जाए।” एक अन्य छात्र ने बताया कि लगातार हो रहे हमलों के कारण सभी छात्र भयभीत हैं और सरकार से तत्काल मदद की उम्मीद कर रहे हैं। बड़ी संख्या में भारतीय प्रभावित बता दें कि मध्य पूर्व में लगभग 90 लाख भारतीय रहते हैं, जिनमें अधिकांश मजदूर वर्ग से हैं। इनके अलावा विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर के लगभग 2000 छात्र हैं, जो ईरान में पढ़ाई कर रहे हैं और गंभीर जोखिम में हैं। उनके लिए जम्मू और कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने भी प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है। सरकार की पहल इस संकट के बीच विदेश मंत्रालय भारत ने प्रभावित देशों में फंसे भारतीयों के लिए आपातकालीन हेल्पलाइन जारी की है। ये हेल्पलाइन चिकित्सा सहायता, सुरक्षा और संभावित निकासी से जुड़ी जानकारी प्रदान कर रही हैं। साथ ही, मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि भारत इस स्थिति को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करता है और सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव कम करने तथा नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील करता है। भारत ने स्पष्ट किया है कि इस संकट का समाधान केवल संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है। एक बयान में, MEA ने ईरान और खाड़ी में हो रहे डेवलपमेंट पर गहरी चिंता जताई है। मंत्रालय ने कहा, "ईरान और खाड़ी क्षेत्र में हाल के घटनाक्रम से भारत बहुत चिंतित है। हम सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव बढ़ने से बचने और आम लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आग्रह करते हैं।" मंत्रालय ने तनाव कम करने के लिए बातचीत और डिप्लोमेसी और संप्रभुता का सम्मान करने पर ज़ोर दिया। MEA ने जारी की हेल्पलाइन MEA ने इस इलाके में भारतीयों के लिए इमरजेंसी कॉन्टैक्ट्स की एक लिस्ट जारी की है: – रामल्लाह (फ़िलिस्तीन): फ़ोन: +970592916418; ईमेल: repoffice@mea.gov.in / cons.ramallah@mea.gov.in – दोहा (क़तर): फ़ोन: 00974-55647502; ईमेल: cons.doha@mea.gov.in – रियाद (सऊदी अरब): फ़ोन: 00-966-11-4884697; WhatsApp: 00-966-542126748; टोल फ़्री: 800 247 1234; ईमेल: cw.riyadh@mea.gov.in – तेल अवीव (इज़राइल): फ़ोन: +972-54-7520711 / +972-54-2428378; ईमेल: cons1.telaviv@mea.gov.in – तेहरान (ईरान): फ़ोन: +989128109115 / +989128109109 / +989128109102 / +989932179359 – अबू धाबी (UAE): टोल फ़्री: 800-46342; WhatsApp: +971543090571; ईमेल: pbsk.dubai@mea.gov.in / ca.abudhabi@mea.gov.in – कुवैत: फ़ोन: +96565501946; ईमेल: community.kuwait@mea.gov.in – बहरीन: फ़ोन: 00973-39418071 – मस्कट (ओमान): टोल फ़्री: 80071234; WhatsApp: +96898282270; ईमेल: cw.muscat@mea.gov.in / cons.muscat@mea.gov.in – जॉर्डन: फ़ोन: 00962-770 422 276 – बगदाद (इराक): फ़ोन: +964 771 651 1185 / +964 770444 4899  

ईरानी हमले से सऊदी ऑयल प्लांट बंद, पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने के संकेत

सऊदी अरब दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी के रूप में जाने जाने वाली सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको को ईरान ने कथित तौर पर हमला कर दिया है। जानकारी के मुताबिक ईरानी ड्रोन हमले के बाद अपनी रास तनूरा रिफाइनरी को एहतियातन बंद कर दिया है। उद्योग से जुड़े एक सूत्र ने सोमवार को यह जानकारी दी है। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमलों के जवाब में तेहरान पूरे क्षेत्र में लगातार जवाबी कार्रवाई कर रहा है। इन हमलों में खाड़ी देशों में कई लोगों की मौत भी हो गई है। सऊदी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने अल अरबिया टीवी को बताया कि इस क्षेत्र में दो ड्रोन को इंटरसेप्ट किया गया है। ड्रोन के मलबे से सीमित स्तर पर आग भी लगी थी जिसे तुरंत काबू कर लिया गया। इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। 5.5 लाख बैरल प्रतिदिन की क्षमता बता दें कि रास तनूरा कॉम्प्लेक्स सऊदी अरब के खाड़ी तट पर स्थित है और यह मिडिल ईस्ट की सबसे बड़ी रिफाइनरियों में से एक है, जिसकी क्षमता लगभग 5.5 लाख बैरल प्रतिदिन (bpd) है। यह सऊदी कच्चे तेल के निर्यात का एक अहम टर्मिनल भी है। सूत्र के अनुसार रिफाइनरी को सावधानी के तौर पर बंद किया गया है और हालात नियंत्रण में हैं। मच सकता है हाहाकार रिफाइनरी बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। इससे पहले होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाला समुद्री व्यापार भी लगभग ठप हो गया है। दुनिया की करीब पांचवां हिस्सा तेल खपत इसी मार्ग से गुजरती है। रविवार को इस क्षेत्र के आसपास जहाजों पर हमलों के बाद तेल परिवहन प्रभावित हुआ है। इसी वजह से सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 10 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। अरामको ने इस मामले पर तुरंत कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। क्या कह रहे विशेषज्ञ? रिस्क इंटेलिजेंस फर्म वेरिस्क मेपलक्रॉफ्ट के मिडिल ईस्ट विश्लेषक टॉरब्योर्न सोल्टवेड्ट ने कहा ताजा हमलों कर चिंता जताते हुए कहा कि रास तनूरा पर हमला क्षेत्रीय तनाव में बड़ी बढ़ोतरी का संकेत है और अब खाड़ी देशों की ऊर्जा संरचना सीधे निशाने पर आ गई है। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद सऊदी अरब और पड़ोसी खाड़ी देश अमेरिका और इजराइल के सैन्य अभियानों के और करीब आ सकते हैं। कई खाड़ी देशों में हमले यह ड्रोन हमला क्षेत्र में हाल के हमलों की श्रृंखला का हिस्सा है, जिनमें अबू धाबी, दुबई, दोहा, मनामा और ओमान के दुक़्म वाणिज्यिक बंदरगाह को भी निशाना बनाया गया है। इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में भी तेल उत्पादन का बड़ा हिस्सा एहतियातन बंद कर दिया गया है, जहां से फरवरी में करीब 2 लाख बैरल प्रतिदिन तेल तुर्की को निर्यात किया गया था।  

कोच्चि में सुपरहिट फिल्म के निर्देशक चिदंबरम एस पोडुवल के खिलाफ यौन उत्पीड़न का केस

  कोच्चि केरल के कोच्चि (Kochi) शहर से एक बड़ी खबर सामने आई है. सुपरहिट फिल्म मंजुम्मेल बॉयज़ (Manjummel Boys) के निर्देशक चिदंबरम एस पोडुवल (Chidambaram S Poduval) के खिलाफ यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने सोमवार को इसकी पुष्टि की. शिकायत के आधार पर एर्नाकुलम साउथ पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया है. बताया जा रहा है कि यह मामला साल 2022 की एक कथित घटना से जुड़ा है. पुलिस अब पूरे मामले की जांच में जुट गई है. ये है आरोप की कहानी पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, महिला ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि 2022 में निर्देशक ने उसके फ्लैट में जबरन प्रवेश किया था. यह घटना कोच्चि के एलामकुलम इलाके में स्थित एक अपार्टमेंट की बताई जा रही है. महिला का आरोप है कि आरोपी ने उसके साथ अशोभनीय हरकत की और उसका यौन उत्पीड़न किया. शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने पहले पीड़िता का बयान दर्ज किया. इसके बाद तथ्यों के आधार पर मामला दर्ज किया गया. इन धाराओं में दर्ज हुआ केस पुलिस ने बताया कि मामला भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की धाराओं के तहत दर्ज किया गया है. केस धारा 74 और 75 के तहत दर्ज हुआ है. धारा 74 महिलाओं की लज्जा भंग करने की नीयत से हमला या आपराधिक बल प्रयोग से जुड़ी है. वहीं धारा 75 यौन उत्पीड़न से संबंधित है. पुलिस के मुताबिक, कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए आगे की कार्रवाई की जा रही है. पूछताछ की तैयारी अधिकारियों ने बताया कि शिकायत दर्ज करने से पहले महिला का विस्तृत बयान लिया गया था. अब फिल्म निर्माता निर्देशक को नोटिस जारी किया जाएगा. उन्हें पूछताछ के लिए पेश होने को कहा जाएगा. पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी. अभी तक आरोपी निर्देशक की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. दो हिट फिल्मों के निर्देशक हैं चिदंबरम चिदंबरम एस पोडुवल मलयालम सिनेमा के चर्चित निर्देशक हैं. उन्होंने 2021 में फिल्म जान-ए-मन (Jan.E.Man) का निर्देशन किया था, जिसे दर्शकों ने काफी पसंद किया था. इसके बाद 2024 में आई फिल्म मंजुम्मेल बॉयज़ ने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफलता हासिल की. इस फिल्म ने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई. ऐसे में उनके खिलाफ दर्ज हुए इस केस ने फिल्म इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है. आगे क्या होगा? फिलहाल पुलिस जांच की प्रक्रिया में जुटी है और आरोपी को नोटिस भेजने की तैयारी की जा रही है. पूछताछ के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस हर पहलू की जांच कर रही है. निर्देशक की ओर से सफाई या प्रतिक्रिया आने का इंतजार है. आने वाले दिनों में इस केस में और खुलासे हो सकते हैं.  

NH-30 चौड़ीकरण की दिशा में बड़ा कदम: 122 किमी सेक्शन को 4-लेन बनाने का प्रस्ताव

रायपुर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने नागपुर प्रवास के दौरान केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर राष्ट्रीय राजमार्ग-30 के धवईपानी (चिल्फी) से कवर्धा होते हुए सिमगा तक करीब 122 किलोमीटर लंबे सेक्शन को 4-लेन में उन्नत करने का आग्रह किया। केंद्रीय मंत्री ने प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए शीघ्र आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। उपमुख्यमंत्री ने बताया कि एनएच-30 के जबलपुर से मंडला और चिल्फी तक लगभग 160 किलोमीटर हिस्से को पहले ही 4-लेन में विकसित करने की स्वीकृति मिल चुकी है। वर्तमान में चिल्फी (धवईपानी) से कवर्धा और कवर्धा गुरूनाला से सिमगा तक का मार्ग 10 मीटर चौड़ाई की 2-लेन सड़क है। उन्होंने कहा कि जब जबलपुर-मंडला-चिल्फी सेक्शन 4-लेन में परिवर्तित होगा, तब आगे के 2-लेन हिस्से पर यातायात का दबाव और बढ़ जाएगा। भारी और व्यावसायिक वाहनों की आवाजाही को देखते हुए धवईपानी से सिमगा तक पूरे मार्ग को 4-लेन में अपग्रेड करना आवश्यक है, ताकि सड़क सुरक्षा और यातायात सुगमता सुनिश्चित की जा सके। उपमुख्यमंत्री ने जिला कबीरधाम मुख्यालय कवर्धा में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए 4-लेन मय पेव्ड शोल्डर कवर्धा बायपास के निर्माण का प्रस्ताव भी रखा। उनका कहना है कि बायपास बनने से शहर के भीतर दुर्घटनाओं की संभावना घटेगी और यातायात सुचारू रहेगा। नागपुर से लौटने के बाद रायपुर एयरपोर्ट पर पत्रकारों से चर्चा करते हुए विजय शर्मा ने बताया कि सिमगा से रायपुर और धवईपानी से जबलपुर तक 4-लेन निर्माण के आदेश पहले ही जारी हो चुके हैं, लेकिन बीच का महत्वपूर्ण सेक्शन शेष था। इस कड़ी को भी 4-लेन में बदलने का आग्रह किया गया है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री का आभार जताते हुए कहा कि इस परियोजना के पूर्ण होने पर जबलपुर से रायपुर तक आमजन को निर्बाध 4-लेन मार्ग की सुविधा मिल सकेगी, जिससे क्षेत्रीय व्यापार, आवागमन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

हरजीगढ़ी में 50 लाख रुपये के निवेश से शुरू किया आधुनिक डेयरी प्रोजेक्ट

हौसले और मेहनत से पूजा ने रचा सफलता का नया अध्याय, 80 लाख का वार्षिक कारोबार हरजीगढ़ी में 50 लाख रुपये के निवेश से शुरू किया आधुनिक डेयरी प्रोजेक्ट ‘शिव मिल्क प्रोडक्ट’ के जरिए पनीर, घी, फुलक्रीम दूध व छाछ का बड़े पैमाने पर उत्पादन लखनऊ अलीगढ़ जनपद के इगलास क्षेत्र स्थित कलवारी गांव की पूजा चौधरी ने अपने दृढ़ निश्चय और लगातार मेहनत के दम पर यह कर दिखाया है कि कम संसाधनों के बावजूद बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। विवाह के बाद जब उन्होंने ससुराल में कदम रखा, तब परिवार दूध के छोटे व्यवसाय से जुड़ा हुआ था। पूजा ने इस कार्य को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाने और बड़े स्तर पर विकसित करने का निर्णय लिया। इसके चलते पूजा ने साल 2023 में खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग से 50 लाख रुपये का ऋण प्राप्त कर 'शिव मिल्क प्रोडक्ट' नाम से एक डेयरी प्लांट की स्थापना की। उनके इस दूरदर्शी कदम से आज उनका वार्षिक कारोबार 80 लाख रुपये तक पहुंच चुका है।  इस डेयरी प्लांट में पनीर, घी, मावा, पाउच पैक फुलक्रीम दूध, छाछ सहित कई अन्य उत्पादों को तैयार किया जाता है। इन उत्पादों की आपूर्ति न केवल जिले में की जाती है, बल्कि मथुरा-वृंदावन तक नियमित रूप से की जा रही है। हरजीगढ़ी में 50 लाख के निवेश से शुरू की आधुनिक डेयरी टप्पल क्षेत्र के छोटे से गांव हरजीगढ़ी में आधुनिक तकनीक से लैस ऑटोमेटिक डेयरी प्लांट की स्थापना करना पूजा के लिए आसान नहीं था। लेकिन जब इच्छा शक्ति हो तो कुछ भी करना संभव है। इसमें पूजा के पति रोहिताश और परिवार ने उनका पूरा सहयोग किया और अपने छोटे से दुग्ध व्यवसाय को नए मुकाम तक पहुंचा दिया। दरअसल वर्ष 2008 में उनके परिवार ने कामधेनु डेयरी योजना का लाभ लेकर दूध का बूथ शुरू किया था। विवाह के बाद पूजा ने कारोबार में अकाउंट संबंधी जिम्मेदारी संभाली और विस्तार की दिशा में कदम आगे बढ़ाया। विभाग में आवेदन, जमीन की उपलब्धता और ऋण स्वीकृति के बाद प्लांट शुरू करने में थोड़ा विलम्ब जरूर हुआ पूजा ने हार नहीं मानी। डेयरी शुरू होने के बाद पूजा ने 35 लोगों को रोजगार दिया और 70 किसानों से दूध आपूर्ति का अनुबंध भी किया। पनीर, घी, फुलक्रीम दूध व छाछ का उत्पादन ‘शिव मिल्क प्रोडक्ट’ के नाम से संचालित इस डेयरी प्लांट में पनीर, घी, मावा, पाउच पैक फुलक्रीम दूध और छाछ सहित अन्य उत्पाद मशीन के जरिये तैयार किए जाते हैं। इन उत्पादों की आपूर्ति जिले के अलावा मथुरा-वृंदावन, हाथरस और अन्य कस्बों तक की जा रही है। पूजा के ससुर इस व्यवसाय को और भी बढ़ाना चाहते हैं। आज लगभग 20 डीलर विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादों की बिक्री कर रहे हैं। पूजा ने सभी उत्पादों की गुणवत्ता को प्राथमिकता देते हुए उत्पादन और वितरण की एक व्यवस्थित व्यवस्था बनाई है जिससे उनका यह व्यवसाय तेजी से बढ़ा है और अच्छा मुनाफा भी हुआ है।  महिला उद्यमिता की प्रेरक पहचान बनीं पूजा अक्सर यह धारणा रही है कि विवाह के बाद बहुओं की भूमिका घर की चारदीवारी तक सीमित हो जाती है। आज भी कई स्थानों पर यह सोच कायम है। लेकिन पूजा के साथ ऐसा नहीं हुआ। शादी के बाद उन्हें परिवार का पूरा सहयोग और प्रोत्साहन मिला, जिसने उनके आत्मविश्वास को मजबूत किया और आगे बढ़ने का हौसला दिया।  पूजा ने राजकीय कन्या महाविद्यालय से स्नातक किया। शुरू से उनकी इच्छा व्यवसाय करने की थी। ससुर और पति के प्रोत्साहन से उन्होंने डेयरी प्लांट में निवेश का निर्णय लिया। इतना ही नहीं, उन्होंने गांव-गांव जाकर महिलाओं को उन्नत पशुपालन के लिए प्रेरित भी किया और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। आज 35 से अधिक लोग दूध संग्रह कर डेयरी तक पहुंचा रहे हैं। पूजा चौधरी की यह यात्रा ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाली हर महिला के लिए प्रेरणास्रोत है, जिन्होंने आत्मनिर्भर बनकर उद्यमिता के क्षेत्र में सशक्त पहचान स्थापित की है।