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तोगड़िया का बड़ा बयान: शंकराचार्य–योगी विवाद पर बोले ‘परिवार में तकरार सामान्य’

अयोध्या अंतर्राष्ट्रीय हिंदू परिषद के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. प्रवीण भाई तोगड़िया अयोध्या पहुंचे। उन्हें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र महासचिव चंपतराय ने रामलला का दर्शन कराया। इसके पहले तीर्थ क्षेत्र भवन रामकोट में पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर कहा कि शंकराचार्य और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूजनीय हैें। भाइयों में तकरार हो जाती है लेकिन फिर सब ठीक हो जाएगा।   प्रवीण तोगड़िया ने मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए कहा कि 500 सालों की प्रतीक्षा के बाद राम मंदिर निर्माण का होना देशवासियों के लिए प्रसन्नता और गर्व की बात है। उन्होंने अयोध्या वासियों को इसका श्रेय देते हुए कहा कि विभिन्न संगठनों व पूरा देश इस लड़ाई में अंतिम 40 साल में साथ खड़ा हुआ और गिलहरी की तरह अपनी भूमिका निभाई। साढ़े चार सौ साल तक यह लड़ाई अवध के लोगों ने लड़ी। यहां के पूर्वजों ने इस लड़ाई के लिए संकल्प लेकर नंगे पाव रहे और उपानह (पदवेश) का त्याग कर दिया। शंकराचार्य और योगी दोनों पूजनीय उन्होंने एक सवाल पर कोई टिप्पणी किए बिना कहा कि शंकराचार्य और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दोनों हमारे लिए पूजनीय है। भाईयों में आपस में तकरार हो जाती है लेकिन फिर सब ठीक हो जाएगा। वहीं, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को धन्यवाद देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ने चारों धाम यात्रा में गैर हिन्दूओं का प्रवेश वर्जित कर बहुत पुण्य का काम किया है। उन्होंने मांग की कि हिंदू मंदिरों के बाहर फूल व पूजा सामग्री भी बेचने से भी गैर हिन्दूओं को वंचित किया जाना चाहिए। इसी तरह से एसआईआर मामले पर उनका कहना था कि हिन्दुस्थान में किसी घुसपैठिए व बांग्लादेशी को रहने का अधिकार नहीं है। उन्हें बाहर किया जाना चाहिए। इसके अलावा यूजीसी के संशोधित प्रावधानों पर कहा कि बंटेंगे तो कटेंगे इसलिए हिन्दू समाज में जाति के आधार पर किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए।  

चोट और थकान से टूटा करियर, ‘अब नहीं खेल पाऊंगा’ कहकर ऑस्ट्रेलियाई पेसर ने क्रिकेट को कहा अलविदा

नई दिल्ली ऑस्ट्रेलिया की टीम के तेज गेंदबाज केन रिचर्डसन ने महज 34 साल की उम्र में प्रोफेशनल क्रिकेट से रिटायरमेंट का ऐलान कर दिया है। केन रिचर्डसन टी20 विश्व कप विजेता टीम का भी हिस्सा रहे हैं। 2021 में ऑस्ट्रेलिया ने टी20 विश्व कप जीता था और टीम में केन रिचर्डसन भी शामिल थे। केन रिचर्डसन ने 61 इंटरनेशनल मैच ऑस्ट्रेलिया के लिए खेले हैं, जिनमें 25 वनडे इंटरनेशनल और 36 T20 इंटरनेशनल मैच शामिल हैं।   केन रिचर्डसन ने 2008-09 के सीजन में लिस्ट ए क्रिकेट में डेब्यू किया था और 2013 में उनको ऑस्ट्रेलिया के लिए पहली बार वनडे इंटरनेशनल मैच खेलने का मौका मिला। रिचर्डसन का बिग बैश लीग यानी बीबीएल करियर भी शानदार रहा है। वह उन कुछ चुनिंदा खिलाड़ियों में से शामिल हैं जो टूर्नामेंट का हर एक एडिशन खेले हैं। उन्होंने 2017-18 में मेलबर्न रेनेगेड्स में जाने से पहले एडिलेड स्ट्राइकर्स के साथ छह सीजन खेले। 2025-26 एडिशन वह सिडनी सिक्सर्स के लिए खेले, लेकिन इससे पहले आठ सीजन तक उन्होंने मेलबर्न रेनेगेड्स के लिए बीबीएल खेला। रिचर्डसन के नाम 142 विकेट बीबीएल में हैं और वह इस कॉम्पिटिशन के पांचवें सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं। रिचर्डसन ने रिटायरमेंट को लेकर दिए बयान में कहा, “2009 में डेब्यू करने से लेकर अब तक, मुझे लगता है कि मैंने अपना सब कुछ झोंक दिया है और अब अपनी जिंदगी के इतने मज़ेदार हिस्से को खत्म करने का यह सही समय है।” एक तरह से उन्होंने कहा है कि उम्र उनकी भले ही 34 है, लेकिन उनका शरीर साथ नहीं दे रहा है। एक तेज गेंदबाज के लिए इस उम्र में गेंदबाजी करना कठिन है। उन्होंने आगे अपने पोस्ट में लिखा, "मैं खुशकिस्मत रहा हूं कि मुझे अपने देश के साथ-साथ दुनिया भर की कई फ्रेंचाइजी टीमों और ऑस्ट्रेलिया में भी खेलने का मौका मिला। मैंने इस मौके को कभी हल्के में नहीं लिया और मुझे उम्मीद है कि देखने वाले लोग जानते होंगे कि जब मैं डार्विन में बच्चा था, तब से ही मैंने क्रिकेटर बनने का सपना देखा था।" उन्होंने अपने फैंस, वाइफ और बच्चे समेत स्पॉन्सर्स को धन्यवाद कहा, जो उनके करियर में बड़ा सपोर्ट थे।  

गुजरात के अनोखे NRI गांव की हैरान कर देने वाली कहानी, जहां 10 हजार लोग और अरबों का कारोबार, फिर भी पुलिस नहीं

 आणंद देश के गांवों की जो तस्वीर आमतौर पर हमारे जहन में होती है, यह रिपोर्ट उसे पूरी तरह बदल देने वाली है. कच्ची सड़कें, सीमित सुविधाएं और सरकारी मदद पर निर्भर गांव… लेकिन गुजरात के आनंद जिले का धर्मज गांव इन सब धारणाओं को तोड़ता है. यह एक ऐसा गांव है, जहां खेतों से ज्यादा बैंकों की चर्चा होती है, जहां गलियों में धूल नहीं, बल्कि तरक्की की चमक दिखाई देती है.  सबसे हैरान करने वाली बात… करीब 10 हजार की आबादी वाले इस गांव में एक भी पुलिस थाना नहीं है. इसके बावजूद यहां अपराध नहीं, बल्कि अनुशासन और भाईचारा कायम है. यही वजह है कि धर्मज को आज देश ही नहीं, दुनिया भर में NRI गांव के नाम से जाना जाता है. आनंद जिले के चरोतर क्षेत्र में स्थित धर्मज गांव में कदम रखते ही ऐसा महसूस होता है मानो आप किसी विकसित यूरोपीय कस्बे में आ गए हों. चौड़ी और साफ सड़कें, शानदार ड्रेनेज सिस्टम, दूधिया स्ट्रीट लाइट्स और हर कोने में आधुनिक सुविधाएं. इस गांव की आर्थिक ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां मौजूद बैंकों में 8,000 करोड़ रुपये से अधिक की फिक्स्ड डिपॉजिट जमा है. यही कारण है कि धर्मज जैसे गांव में 13 से अधिक नेशनल और प्राइवेट बैंकों की शाखाएं हैं. यहां का किसान भी करोड़पति है और गांव की अर्थव्यवस्था किसी शहर से कम नहीं. 19वीं सदी में पड़ी तरक्की की नींव धर्मज की इस बेमिसाल तरक्की की नींव 19वीं सदी में ही पड़ गई थी. समय के साथ यहां के लोग रोजगार और व्यापार के लिए विदेश गए, लेकिन अपनी मिट्टी से नाता कभी नहीं तोड़ा. आज इस गांव का शायद ही कोई ऐसा घर होगा, जिसका कोई सदस्य विदेश में न रहता हो. ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा और अफ्रीका जैसे देशों में करीब 3,000 परिवार बसे हुए हैं. लेकिन ये प्रवासी भारतीय सिर्फ पैसा कमाने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि अपने गांव के विकास को ही अपना असली मिशन बना लिया. हर साल धर्मज डे मनाया जाता है, जहां दुनियाभर से NRI अपने गांव लौटते हैं और गांव के विकास के लिए खुलकर योगदान देते हैं. स्कूल, अस्पताल, सड़क, पानी, शिक्षा… हर क्षेत्र में यह सहयोग साफ दिखाई देता है. बिना पुलिस, फिर भी पूरी शांति धर्मज की सबसे बड़ी और अनोखी पहचान है यहां की शांति. 10 हजार से ज्यादा की आबादी, लेकिन गांव में न तो कोई पुलिस थाना है और न ही अपराध का डर. यहां न एफआईआर होती है, न मुकदमेबाजी. अगर कभी कोई विवाद उत्पन्न भी हो जाए, तो गांव के बुजुर्ग, पंचायत और युवा आपसी सहमति से उसे सुलझा लेते हैं. यहां पुलिस की लाठी से ज्यादा असर आपसी विश्वास और भाईचारे का है. स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके पूर्वजों ने उन्हें सिखाया कि चाहे आप दुनिया के किसी भी कोने में क्यों न चले जाएं, अपनी जड़ों को कभी मत भूलिए. यही संस्कार आज धर्मज की पहचान बन चुके हैं. सुविधाएं जो शहरों को भी मात दें धर्मज में मौजूद सुविधाएं कई मेट्रो शहरों को भी शर्मिंदा कर दें. गांव में हाई-स्पीड वाई-फाई, आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम, और 24 घंटे साफ पानी की व्यवस्था है. स्वास्थ्य सेवाओं की बात करें तो यहां आई हॉस्पिटल, गायनेक सेंटर, फिजियोथेरेपी क्लिनिक और अन्य चिकित्सा सुविधाएं बेहद कम खर्च में उपलब्ध हैं. आस्था और सेवा का केंद्र है जलाराम मंदिर, जहां की रसोई से कोई भी भूखा नहीं लौटता. यहां सेवा को धर्म माना जाता है और यह भावना गांव के हर व्यक्ति में दिखाई देती है. 100 साल पुरानी विरासत आज भी जीवित धर्मज सिर्फ आधुनिकता के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी 100 साल पुरानी हेरिटेज के लिए भी जाना जाता है. गांव में आज भी ऐसे पुराने घर मौजूद हैं, जिन्हें देखकर लगता है मानो वे अभी-अभी बनाए गए हों. इन घरों की दीवारों पर मोर, कृष्ण, हाथी और पौराणिक कथाओं की अद्भुत कलाकृतियां उकेरी गई हैं. यह गांव इस बात का प्रमाण है कि आधुनिकता और परंपरा साथ-साथ चल सकती हैं. यही वजह है कि यहां काम करने वाले बैंक कर्मचारी, शिक्षक और डॉक्टर भी धर्मज में रहना पसंद करते हैं. साफ वातावरण, सुरक्षित माहौल और बेहतर सुविधाएं इसे रहने के लिए आदर्श बनाती हैं. गांव के लोगों ने क्या कहा? गांव में रहने वाले घनश्याम पटेल ने कहा कि मैं अमेरिका के वॉशिंगटन डीसी से आया हूं. मुझे तीन दिन हुए हैं. आज धर्मज डे सेलिब्रेशन है. उसके लिए हमारे मन में स्पेशल प्लेस है. हम चाहते हैं कि हमारी जेनरेशन यहां आए और देखे कि हमारी धरोहर क्या है, हमारी संस्कृति क्या है. आज करीब 650 एनआरआई यहां आने वाले हैं. मुंबई, बेंगलुरु आदि शहरों से भी लोग आ रहे हैं. हमारा उद्देश्य है कि हम सब एक जगह मिलें. धर्मज में दस हजार की आबादी के बीच मेट्रो सिटी जैसी सुविधाएं हैं. वहीं मीना पटेल ने कहा कि हमारा गांव पहले से ही काफी एडवांस है. हर साल जनवरी में हम धर्मज डे सेलिब्रेट करते हैं. इस मौके पर एनआरआई इकट्ठे हो जाते हैं. यहां सभी एजुकेशन, मेडिकल जैसी सभी सुविधाएं हैं. घर-घर में फिल्टर वॉटर सप्लाई होता है. धर्मज का मैसेज… एक गांव, एक सोच धर्मज ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि अगर प्रवासी भारतीय और स्थानीय समुदाय एकजुट हो जाएं, तो बिना सरकारी इमदाद के भी विकास का स्वर्ग रचा जा सकता है. धर्मज सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि एक सोच है- ऐसी सोच जो बताती है कि पैसा कमाना बड़ी बात नहीं, लेकिन उस पैसे से अपनी जड़ों को सींचना ही असली कामयाबी है. आज धर्मज की चकाचौंध के पीछे सिर्फ डॉलर नहीं, बल्कि हर धर्मजवासी का समर्पण, एकता और अपने गांव के प्रति अटूट प्रेम है. यही वजह है कि बिना पुलिस थाने के भी यह गांव शांति, समृद्धि और विकास की मिसाल बना हुआ है.

मध्यप्रदेश में पेंशन का बड़ा फैसला: अब अविवाहित-तलाकशुदा बेटियों के लिए खत्म हुई एज लिमिट

भोपाल प्रदेश में 50 साल बाद पेंशन नियम बदलेंगे। आश्रित विधवा, परित्याक्ता, तलाकशुदा और अविवाहित पुत्रियां आजीवन परिवार पेंशन की पात्र होंगी। इसके लिए अधिकतम 25 वर्ष की आयु सीमा समाप्त होगी। आश्रितों के लिए आय सीमा भी बढ़ाई जाएगी। यह न्यूनतम पेंशन और महंगाई राहत मिलाकर होगी। आश्रित बड़ी संतान चाहे वह बेटा हो या बेटी, जो बड़ा होगा, वह परिवार पेंशन का पात्र होगा। साथ ही कई प्रक्रियात्मक परिवर्तन भी प्रस्तावित किए गए हैं। राज्य में चार लाख से ज्यादा पेंशनधारक प्रदेश में चार लाख से अधिक पेंशनधारक हैं। इनके लिए 1976 में पेंशन नियम बनाए गए थे। तब से भारत सरकार कई संशोधन कर चुकी है, जिन्हें प्रदेश के पेंशनरों के लिए लागू करने की मांग पेंशनर्स एसोसिएशन उठाती रही है। मुख्य सचिव अनुराग जैन जब अपर मुख्य सचिव वित्त थे, तब नियमों में परिवर्तन को लेकर सहमति बनी थी, लेकिन प्रक्रिया लंबी खिंचती चली गई। अपर मुख्य सचिव वित्त मनीष रस्तोगी ने समिति बनाई और नियमों में संशोधन के प्रारूप को अंतिम रूप दे दिया। सूत्रों के अनुसार पेंशन नियम में अब यह प्रविधान किया जा रहा है कि आश्रित के लिए आय सीमा में वृद्धि की जाएगी। यह न्यूनतम पेंशन, जो 7,750 रुपये प्रतिमाह होती है, और महंगाई राहत जोड़कर निर्धारित होगी यानी न्यूनतम पेंशन में 55 प्रतिशत महंगाई राहत जोड़ी जाएगी। इसका लाभ यह होगा कि इस सीमा के भीतर यदि आश्रित की आय है तो उन्हें भी परिवार पेंशन की पात्रता होगी। इसके साथ ही एक बड़ा परिवर्तन यह भी किया जा रहा है कि आश्रित में अविवाहित बेटी के लिए आयु सीमा का बंधन समाप्त किया जाएगा। अभी 25 वर्ष से अधिक अविवाहित पुत्री को पात्र नहीं माना जाता है। इसके साथ ही आश्रित विधवा, परित्याक्ता, तलाकशुदा बेटियां भी परिवार पेंशन के दायरे में आएंगी। विभागों के बढ़ेंगे अधिकार पेंशनर किसी भी श्रेणी का हो, अभी पेंशन रोकने के लिए प्रकरण कैबिनेट की स्वीकृति के लिए भेजना पड़ता है। लगभग हर कैबिनेट की बैठक में ऐसे प्रकरण आते हैं। अब यह प्रविधान किया जा रहा है कि तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की पेंशन रोकने के मामले में निर्णय प्रशासकीय विभाग ही लेगा। प्रथम और द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों के मामले वर्तमान व्यवस्था के अंतर्गत ही कैबिनेट के समक्ष निर्णय के लिए रखे जाएंगे।   केंद्रीय सेवा की अवधि भी जुड़ेगी सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय सेवा से प्रदेश में सेवा देने के लिए आने वाले कर्मचारियों की पेंशन की गणना की प्रक्रिया में भी सुधार होगा। इसमें केंद्रीय सेवा की अवधि को भी जोड़ा जाएगा। इसका स्पष्ट प्रविधान नियम में रहेगा। पेंशनर्स एसोसिएशन के संरक्षक गणेश दत्त जोशी का कहना है कि हम 18 वर्ष से नियम में संशोधन की मांग कर रहे हैं। जो संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं, वे वर्तमान समय के अनुकूल हैं।

खेलों से बदलेगा आदिवासी क्षेत्र का भविष्य, 100 करोड़ के मेगा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स को हरी झंडी

खंडवा  खंडवा के आदिवासी बहुल क्षेत्र हरसूद में प्रदेश स्तरीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का निर्माण होगा। इसमें एथलेटिक्स, इंडोर गेम्स और आउटडोर खेलों की सुविधाएं होंगी। ग्रामीण आदिवासी बच्चों को उच्च स्तर पर प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं में भाग लेने का मौका मिलेगा। 100 करोड़ की लागत से हरसूद में स्पोर्ट कॉम्प्लेक्स के निर्माण से निमाड़ क्षेत्र की पहचान खेल के क्षेत्र में बढ़ेगी।   सरकार ने दी सहमति सरकार की सैद्धांतिक सहमति के बाद अफसर योजना को अमली जामा पहनाने में जुटे है। मध्य प्रदेश बिल्डिंग कारपोरेशन के इंजीनियरों ने जिले के हरसूद क्षेत्र में स्थित सेल्दामाल में भूमि का स्थली निरीक्षण के बाद डीपीआर तैयार कर रहे है। सबकुछ योजना के तहत हुआ तो जल्द निर्माण के लिए कागजी प्रक्रिया शुरु होगी। इंजीनियर मयंक राय ने बताया कि हरसूद के सेल्दामाल में स्पोर्ट कॉम्प्लेक्स के लिए 30 एकड़ भूमि अलाट हो गई है। शेष 9 एकड़ भूमि अलाट की कागजी प्रक्रिया चल रही है।   खिलाड़ियों को मिलेंगी ये आधुनिक सुविधाएं प्रदेश स्तरीय स्पोर्ट कॉम्प्लेक्स में खिलाडियों को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। इसमें मुख्य रुप से प्रशिक्षण और खेल इंफ्रास्ट्रक्चर, इनडोर, आउटडोर कोर्ट में बैडमिंटन, टेबल-टेनिस, बास्केटबॉल, वॉलीबॉल, स्क्वैश के लिए कोर्ट। एथलेटिक्स ट्रैक में सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक (400 मीटर)। कुश्ती, ताइक्वांडो, एरोबिक्स और वेटलिफ्टिंग के लिए हॉल। स्विमिंग पूल में इनडोर और आउटडोर स्विमिंग पूल। अन्य : क्रिकेट पिच, लॉन टेनिस कोर्ट, शूटिंग रेंज, हॉकी टर्फ। खिलाड़ियों के लिए सहायता चयनित प्रशिक्षु के लिए हॉस्टल और पौष्टिक भोजन। वित्तीय सहायता, किट और उपकरण में आधुनिक प्रशिक्षण उपकरण समेत अन्य सुविधाएं जैसे शैक्षिक सहायता शिक्षा संबंधी खर्च, प्रतियोगिता का अवसर मिलेगा। राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेने का मौका। मनोरंजक की सुविधाएं प्रस्तावित है।

खेजड़ी संरक्षण की लड़ाई तेज हुई, बीकानेर में 2 फरवरी को होगा महापड़ाव

जोधपुर राजस्थान में खेजड़ी सहित अन्य हरे वृक्षों के संरक्षण को लेकर चल रहा ‘खेजड़ी बचाओ अभियान’ अब तेज़ी से जनआंदोलन का रूप लेता जा रहा है। जोधपुर संभाग समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों में जनसंपर्क अभियान तेज कर दिया गया है। मुकाम में आयोजित महापंचायत के निर्णय के अनुसार आगामी 2 फरवरी 2026 को बीकानेर जिला मुख्यालय पर विशाल महापड़ाव एवं आंदोलन आयोजित किया जाएगा।  अभियान के तहत साधु-संतों के सानिध्य में बाड़मेर, सांचौर, जालौर और जोधपुर सहित कई क्षेत्रों में व्यापक जनसंपर्क किया गया। पर्यावरण प्रेमियों, ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों से संवाद कर उन्हें आंदोलन से जोड़ा गया। इस दौरान खेजड़ी वृक्ष के पर्यावरणीय, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व को लेकर लोगों में गहरी चिंता और जागरूकता देखने को मिली। बिश्नोई समाज के साथ-साथ अन्य पर्यावरण प्रेमी भी इस बार आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आए। मीडिया से बातचीत में आंदोलन संयोजक परसराम बिश्नोई ने सरकार को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि बिश्नोई समाज और पर्यावरण प्रेमियों की ताकत को कमतर नहीं आंका जाए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि खेजड़ी और अन्य हरे वृक्षों की कटाई रोकने के लिए सख्त और प्रभावी कानून नहीं बनाए गए, तो आंदोलन और अधिक उग्र होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। परसराम बिश्नोई ने दो टूक कहा कि हरे पेड़ों की कटाई किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने खेजड़ी की रक्षा के लिए मां अमृता देवी के नेतृत्व में दिए गए 363 बलिदानों का स्मरण करते हुए कहा कि यह परंपरा आज भी समाज को संघर्ष और बलिदान की प्रेरणा देती है। अभियान के तहत बाड़मेर, सांचौर, भीनमाल और जोधपुर के कई गांवों में जनसंपर्क किया गया है। साथ ही राजस्थान हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं से चर्चा कर आंदोलन को कानूनी मजबूती देने की रणनीति भी तैयार की गई है। आने वाले दिनों में यह अभियान फलोदी, नागौर, बीकानेर के साथ-साथ हरियाणा और पंजाब तक विस्तारित किया जाएगा। खेजड़ी बचाओ अभियान अब केवल एक मांग नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की लड़ाई बनता जा रहा है।  

टी20 वर्ल्ड कप 2026 का काउंटडाउन शुरू, 16 टीमें तैयार… 4 देशों ने अब तक नहीं खोले पत्ते

नई दिल्ली T20 World Cup 2026 की शुरुआत में अब करीब दो सप्ताह का समय बाकी है। 7 फरवरी से भारत और श्रीलंका में शुरू हो रहे आईसीसी टी20 विश्व कप में 20 टीमें खेलने वाली हैं। बांग्लादेश के बाहर होने के बाद स्कॉटलैंड को मौका मिला है। हालांकि, अभी तक 16 ही टीमों का ऐलान टूर्नामेंट के लिए हुआ है। इनमें इंडिया और पाकिस्तान समेत सभी टीमों का नाम शामिल है, लेकिन अभी भी 4 देश ऐसे हैं, जिनके स्क्वॉड का ऐलान होना बाकी है। इनमें नया नवेला देश स्कॉटलैंड भी है, जो बांग्लादेश की जगह खेलने वाला है।   ग्रुप ए में टीम इंडिया और पाकिस्तान के अलावा नामीबिया, यूएसए और नीदरलैंड की टीम हैं। इन 5 टीमों में से 4 टीमों का ऐलान हो चुका है, जबकि यूएसए ने अभी तक अपनी टीम घोषित नहीं की है। ग्रुप बी की बात करें तो इस ग्रुप में ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका, आयरलैंड, ओमान और जिम्बाब्वे की टीम शामिल है। इस ग्रुप की सभी टीमों की घोषणा हो चुकी है, जिसमें श्रीलंका ने प्रिलिमिनरी और ऑस्ट्रेलिया ने प्रोविजनल स्क्वॉड का ऐलान किया है। ग्रुप सी की बात करें तो इसमें पहले बांग्लादेश की टीम थी, लेकिन उसने भारत में खेलने से इनकार कर दिया है तो आईसीसी को स्कॉटलैंड को बांग्लादेश से रिप्लेस करना पड़ा है। स्कॉटलैंड के अलावा इस ग्रुप में इंग्लैंड, इटली, नेपाल और वेस्टइंडीज की टीम शामिल है। इनमें से इंग्लैंड, इटली और नेपाल ने ही टीम घोषित की है, जबकि स्कॉटलैंड और वेस्टइंडीज की टीम का ऐलान होना बाकी है। ग्रुप डी में साउथ अफ्रीका, न्यूजीलैंड, अफगानिस्तान, कनाडा और यूएई की टीम शामिल है। इनमें से सिर्फ यूएई ऐसा देश है, जिसकी टीम अभी तक घोषित नहीं हुई है। बाकी के चार देशों ने अपनी-अपनी टीमें घोषित कर दी हैं। जिन देशों ने अभी तक टीम की घोषणा नहीं की है, उन्हें जल्द से जल्द टीम घोषित करनी होगी, क्योंकि आईसीसी की डेडलाइन इसी महीने के आखिर में खत्म हो रही है। सबसे लेटेस्ट पाकिस्तान की स्क्वॉड का ऐलान हुआ है। आपकी जानकारी के लिए बता दें, बांग्लादेश ने भी अपनी टीम का ऐलान टी20 विश्व कप के लिए कर दिया था, लेकिन अब टीम नहीं खेलेगी तो उस स्क्वॉड का कोई मतलब नहीं है।  

युवाओं को मिलेगा एआई, जनरेटिव टूल्स और उद्यमिता कौशल पर व्यावहारिक प्रशिक्षण

भोपाल मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा एआई आधारित प्रौद्योगिकी उद्यमिता विकास कार्यक्रम का आयोजन 28 जनवरी 2026 से 11 मार्च 2026 तक विज्ञान भवन, नेहरू नगर, भोपाल में किया जाएगा।इस छह सप्ताह के कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में नवाचार, तकनीकी दक्षता और उद्यमशील सोच को सशक्त करना है।कार्यक्रम भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रौद्योगिकी अनुवाद एवं नवाचार प्रभाग द्वारा प्रायोजित है।इसके माध्यम से प्रतिभागियों को एआई की मौलिक एवं उन्नत अवधारणाओं, आधुनिक टूल्स और उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों का गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे वे सामाजिक एवं औद्योगिक समस्याओं के समाधान के लिए नवाचारी, स्केलेबल और सतत स्टार्टअप विकसित कर सकें। कार्यक्रम में उद्यमिता की समझ, एमएसएमई सहायता योजनाएं, वित्तीय संस्थान, परियोजना चयन एवं पूर्व-व्यवहार्यता अध्ययन, बाजार सर्वेक्षण, प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट निर्माण, संचार एवं सॉफ्ट स्किल्स विकास, प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग, जनरेटिव एआई, उत्पादन योजना, कार्यशील पूंजी प्रबंधन, विपणन, वित्त, मानव संसाधन, कानूनी औपचारिकताएं, कराधान और नेतृत्व कौशल जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। साथ ही प्रतिभागियों को इंटरएक्टिव टूल्स, ग्राफिक्स और ऑगमेंटेड रियलिटी के माध्यम से तकनीकी प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा।कार्यक्रम में देश के विभिन्न संगठनों और संस्थानों से जुड़े अनुभवी विशेषज्ञ, शासकीय विभागों के अधिकारी, सफल उद्यमी, बैंकर्स, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, विपणन एवं प्रेरणात्मक विशेषज्ञ और उद्यमिता विकास संस्थानों के प्रतिनिधि अपने अनुभव साझा करेंगे। प्रशिक्षण की कार्यप्रणाली में व्याख्यान, केस स्टडी, समूह अभ्यास, प्रस्तुतिकरण, हैंड्स-ऑन सत्र और उद्यमियों के साथ संवाद शामिल रहेगा। कार्यक्रम के लिए पात्रता अंतर्गत विज्ञान, इंजीनियरिंग अथवा प्रौद्योगिकी में स्नातक, पॉलिटेक्निक डिप्लोमा या पीजीडीसीए धारक अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं। आयु सीमा 18 से 35 वर्ष निर्धारित की गई है, जबकि महिला एवं एससी,एसटी,ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों को शासन के नियमानुसार आयु में छूट प्रदान की जाएगी। कुल 30 प्रतिभागियों का चयन ऑनलाइन पंजीकरण एवं आवश्यक होने पर साक्षात्कार के माध्यम से किया जाएगा। प्रवेश ‘पहले आओ–पहले पाओ’ के आधार पर होगा।कार्यक्रम पूर्णतः निःशुल्क है।इच्छुक अभ्यर्थी टीईडीपी के लिए https://tinyurl.com/mpcstAl पर ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। पंजीकरण की अंतिम तिथि 24 जनवरी 2026 निर्धारित की गई है। कार्यक्रम के संरक्षक एमपीसीएसटी के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी हैं।समन्वय टीम में डॉ. प्रवीण दिघर्रा, श्री अवनीश के. शर्मा, नव्या चतुर्वेदी एवं श्री रविंद्र कौरव शामिल हैं।कार्यक्रम प्रदेश में एआई आधारित स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने, स्वरोजगार के नए अवसर सृजित करने और डिजिटल नवाचार और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।  

इंदौरवासियों को जाम से बड़ी राहत, 5 महीने में पूरे होंगे 4 फ्लाईओवर, कई इलाकों में सिग्नल फ्री सफर

इंदौर शहर के निर्माणाधीन चार प्रमुख फ्लाईओवर का निर्माण कार्य पांच माह में पूरा हो जाएगा। निर्माण पूरा होने के साथ ही इन चौराहों से वाहनों का आवागमन सुगम होगा और सिग्नल पर रूकने की आवश्यकता नहीं होगी। कलेक्टर शिवम वर्मा और निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने निर्माणाधीन फ्लाईओवर का दौरा कर निरीक्षण किया। फ्लाईओवर को जून माह तक पूरा करने के निर्देश दिए गए। 267 करोड़ की लागत से तैयार हो रहे हैं प्रोजेक्ट शहर में सत्य सांई चौराहा, देवास नाका, मूसाखेडी और आइटी पार्क चौराहा पर निर्माणाधीन फ्लाईओवर का निर्माण किया जा रहा है। मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) द्वारा चारों चौराहों पर फ्लाईओवर का निर्माण कार्य किया जा रहा है। यह फ्लाईओवर 267 करोड़ की लागत से बनाए जा रहे है। सोमवार को कलेक्टर शिवम वर्मा ने निर्माण कार्यो का अवलोकन किया। उन्होंने जून माह तक चारों का काम पूरा करने के निर्देश दिए। कलेक्टर वर्मा ने बताया कि यह सभी फ्लाईओवर्स शहर की यातायात व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और इनके पूर्ण होने से नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी।   अतिक्रमण हटाकर बाधाएं दूर करने के निर्देश चारों चौराहों पर निर्माण के दौरान कुछ बाधाए है, इन बाधाओं को रिमूवल कर हटाया जाएगा। वहीं चौराहों पर वैकल्पिक व्यवस्थाओं और समय-सीमा में काम पूरा करने को लेकर भी अधिकारियों ने चर्चा की। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि व्यवस्थित संचालन के लिए गार्ड तैनात किए जाएं, ताकि यातायात सुचारु रहे। धूल उड़ने से रोकने के लिए नेटिंग और अन्य उपाय किए जाएंगे। सर्विस रोड और पैदल यात्रियों की सुविधा पर जोर सर्विस लेन पर पैच रिपेयरिंग और डामरीकरण कर ट्रैफिक को सुचारू बनाया जाए। निर्माण कार्यो की आने वाले दिनों में नियमित समीक्षा की जाएगी। कलेक्टर वर्मा ने मूसाखेड़ी चौराहा पार करने के लिए पैदल नागरिकों के लिए व्यवस्था करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्देशित किया कि निर्माणाधीन फ्लाईओवर के सर्विस रोड़ पर पर्याप्त लाईटिंग भी की जाए।   निर्माण में देरी, बढ़ाई समय सीमा फ्लाईओवर का निर्माण कार्य धीमी गति से किया जा रहा है।पहले निर्माण मार्च तक पूरा किया जाना था, लेकिन देरी को देखते हुए समय सीमा तीन माह बढ़ाई है। निर्माण कार्य जून तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। चारों फ्लाईओवर को अब पांच माह में पूरा करना होगा। इसके लिए लगातार मानिटरिंग कर काम की गति को बढ़ाया जाएगा। धीमे निर्माण के कारण आमजन को परेशानी हो रही है।

अब आंखों की बीमारी पकड़ेगा एआई कैमरा, जेपी अस्पताल में शुरू हुई डायबिटिक रेटिनोपैथी की निशुल्क जांच

भोपाल राजधानी के जयप्रकाश (जेपी) जिला चिकित्सालय में शुगर (डायबिटीज) के मरीजों की ''डायबिटिक रेटिनोपैथी'' (शुगर के कारण आंखों के पर्दे का खराब होना) की जांच निश्शुल्क की जाएगी। इसके लिए अस्पताल में अत्याधुनिक एआई फंडस कैमरा लगाया गया है। खास बात यह है कि यदि जांच में कोई गंभीर समस्या पाई जाती है, तो मरीज को तत्काल बेहतर उपचार के लिए हमीदिया अस्पताल रेफर किया जाएगा। नेत्र विशेषज्ञों के अनुसार, निजी क्षेत्र में फंडस स्क्रीनिंग और रेटिनोपैथी की जांच पर दो से ढाई हजार रुपए तक का खर्चा आता है। जेपी अस्पताल में ''अमृता दृष्टि नेत्र स्वास्थ्य कार्यक्रम'' के सहयोग से शुरू हुए इस केंद्र पर यह पूरी तरह निश्शुल्क होगी। केंद्र के शुभारंभ अवसर पर एनएचएम के वरिष्ठ संयुक्त संचालक डा. प्रभाकर तिवारी, सीएमएचओ मनीष शर्मा और सिविल सर्जन संजय जैन विशेष रूप से मौजूद रहे। असंचारी रोग क्लीनिक से किया लिंक इस नई जांच सुविधा को अस्पताल में पहले से संचालित ''असंचारी रोग क्लीनिक'' से जोड़ा गया है। 40 साल से अधिक उम्र के ऐसे लोग जिन्हें डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर है, उनकी शुगर जांच के बाद विशेषज्ञों की सलाह पर आंखों का परीक्षण किया जाएगा। डाॅक्टरों का कहना है कि शुगर के कारण आंखों के पर्दे पर खून के छींटे आ जाते हैं, जिससे दृष्टि स्थायी रूप से जा सकती है। विजन जाने के बाद वापसी मुश्किल सीएमएचओ डा. मनीष शर्मा ने बताया कि डायबिटिक रेटिनोपैथी में शुरुआत में कोई दर्द या स्पष्ट लक्षण नहीं होते। एक बार नजर चली जाए तो उसे वापस लाना मुश्किल होता है। इसलिए समय पर जांच ही एकमात्र बचाव है। इसका उपचार दवा या लेजर तकनीक से संभव है। इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज     अक्षर कटे हुए या तिरछे दिखाई देना।     बारीक अक्षर पढ़ने में परेशानी होना।     अचानक रोशनी की कमी महसूस होना या धुंधला दिखना।     आंखों के सामने काले धब्बे या काली रेखाएं तैरती नजर आना।