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नए UGC नियमों पर मायावती का बचाव, बोलीं विरोध सवर्णों तक सीमित नहीं होना चाहिए

लखनऊ नए यूजीसी नियमों को लेकर बसपा प्रमुख की प्रतिक्रिया सामने आई है. मायावती ने उच्च शिक्षण संस्थानों में इक्विटी कमेटियों के गठन को अनिवार्य बनाने वाले UGC के नए नियमों का बचाव किया है. उन्होंने कहा कि सामान्य वर्ग के कुछ लोगों द्वारा इस कदम का विरोध बिल्कुल भी जायज नहीं है. हालांकि, मायावती ने चेतावनी दी कि सामाजिक तनाव से बचने के लिए इन नियमों को व्यापक विचार-विमर्श के बाद लागू किया जाना चाहिए था. X पर कई पोस्ट में, मायावती ने कहा कि कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति-आधारित भेदभाव को खत्म करने के उद्देश्य से UGC के उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाले नियम, 2026 को 'जातिवादी मानसिकता' वाले लोगों द्वारा गलत तरीके से भेदभावपूर्ण बताया जा रहा है. उन्होंने कहा- सरकारी कॉलेजों और निजी विश्वविद्यालयों में जाति-आधारित भेदभाव को हल करने के लिए 'इक्विटी कमेटियों' के गठन के नए UGC नियमों के कुछ प्रावधानों का विरोध केवल सामान्य वर्ग के वे लोग कर रहे हैं जिनकी जातिवादी मानसिकता है, और वे इन्हें साजिश और भेदभावपूर्ण बता रहे हैं. यह बिल्कुल भी उचित नहीं है.  बसपा प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी का मानना ​​है कि ऐसे नियमों को लागू करने से पहले सभी को विश्वास में लिया जाता तो बेहतर होता है. सरकारों और संस्थानों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसे कदम देश में सामाजिक तनाव का कारण न बनें. उन्होंने दलितों और पिछड़े वर्गों से भी अपील की कि वे स्वार्थी और अवसरवादी नेताओं के भड़काऊ बयानों के शिकार न बनें.  मायावती ने कहा, "ऐसे मामलों में, दलितों और OBC को भी अपने ही स्वार्थी और बिके हुए नेताओं के भड़काऊ बयानों के प्रभाव में नहीं आना चाहिए, जो उनकी आड़ में गंदी राजनीति करते रहते हैं. इन वर्गों को सतर्क रहना चाहिए." आपको बता दें कि UGC ने 13 जनवरी को नए नियमों को अधिसूचित किया, जिसमें सभी उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए भेदभाव की शिकायतों को देखने और समावेश को बढ़ावा देने के लिए इक्विटी कमेटियों का गठन करना अनिवार्य कर दिया गया है. नियमों के अनुसार, इन कमेटियों में अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, दिव्यांग व्यक्तियों और महिलाओं के सदस्य शामिल होने चाहिए. 2026 के नियम UGC के 2012 के इक्विटी नियमों की जगह लेते हैं, जो काफी हद तक सलाहकारी प्रकृति के थे. इस कदम से उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया है, जिसमें आलोचकों का आरोप है कि नियमों का दुरुपयोग किया जा सकता है. इन चिंताओं को दूर करते हुए, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को आश्वासन दिया कि नए ढांचे के तहत कोई उत्पीड़न या भेदभाव नहीं होगा. प्रधान ने कहा, "मैं सभी को विनम्रतापूर्वक भरोसा दिलाना चाहता हूं कि किसी को भी किसी तरह की परेशानी नहीं होगी, कोई भेदभाव नहीं होगा और किसी को भी भेदभाव के नाम पर नियम का गलत इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं होगा."

शेयर बाजार का जलवा: India-EU समझौते से सेंसेक्स उड़ा 650 अंक, टॉप 10 स्टॉक्स में मची हलचल

मुंबई  भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता हो गया है. मंगलवार को इसका ऐलान कर दिया गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और एंटोनियो कॉस्टा ने इसे ऐतिहासिक करार बताया. इसे 'मदर ऑफ ऑल डील्स' (Mother Of All Deals) कहा जा रहा है. इसके तहत यूरोपीय देशों से भारत में आने वाले 90 फीसदी सामान अब Tariff Free होंगे या फिर इनपर लागू टैक्स में बड़ी कटौती की जाएगी. इस डील का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिला है और बुधवार को खुलते ही सेंसेक्स-निफ्टी ने लंबी छलांग लगा दी है. BSE Sensex ओपनिंग के साथ 650 अंक के आसपास उछल गया.  सेंसेक्स-निफ्टी पर EU Deal का असर  भारत और ईयू के बीच हुई डील के बाद सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को जब शेयर मार्केट में कारोबार की शुरुआत हुई, तो बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स अपने पिछले बंद 81,857 की तुलना में बढ़कर 81,892 पर खुला और फिर तूफानी रफ्तार पकड़ते हुए उछलकर 82,503 के स्तर पर जा पहुंचा यानी 646 अंक की छलांग लगा गया.  Sensex की तरह ही एनएसई का निफ्टी इंडेक्स भी भागता हुआ नजर आया. ये 50 शेयरों वाला इंडेक्स बीते कारोबारी दिन मंगलवार को 25,175 पर क्लोज हुआ था और बुधवार की इसकी ओपनिंग 25,258 के लेवल पर हुई. इसके बाद इसने सेंसेक्स की तरह ही रफ्तार पकड़ी और एक झटके में 197 अंक की तेज बढ़त लेकर 25,372 के स्तर पर कारोबार करने लगा. ये 10 शेयर बने बाजार की 'हीरो' बाजार में धुआंधार तेजी के बीच सबसे तेज रफ्तार के साथ भागने वाले स्टॉक्स के बारे में करें, तो BSE Sensex के टॉप-10 हीरो स्टॉक्स की लिस्ट में लार्जकैप कैटेगरी में शामिल Axis Bank Share (3.10%), Reliance Share (1.70%), ITC Share (1.50%) सबसे आगे रहे. इसके अलावा मिडकैप कैटेगरी में शामिल Phoenix Share (3.10%), Suzlon Share (2.80%), Supreme India Share (2.60%) और HP Share (2.10%) की छलांग लगाकर ट्रेड कर रहे थे. स्मॉलकैप कैटेगरी में शामिल शेयरों में MCX Share (5.50%), Reliance Power Share (4.80%), Zeel Share (4.30%) की बढ़त में था.  India-EU एफटीए के क्या लाभ?  India-EU मुक्त व्यापार समझौता भारत के लिए खास है और यही कारण है कि इस डील के डन होने के बाद शेयर बाजार ने भी इसे सलाम किया है. एग्रीमेंट के तहत जहां भारत यूरोपीय कारों पर टैरिफ को धीरे-धीरे घटाकर 10% कर देगा, तो वहीं भारत में आने वाले करीब 90% से अधिक यूरोपीय देशों के सामानों पर लगने वाले टैरिफ या तो खत्म या फिर कम किया जाएगा. मशीनरी (44%), केमिकल (22%), मेडिसिन (11%) पर ज्यादातर टैरिफ खत्म हो सकते हैं. बीयर पर टैरिफ 50%, शराब-वाइन पर 40% हो सकता है. जूस, प्रोसेस्ड फूड, एयरक्राफ्ट, स्पेसक्राफ्ट पर टैरिफ जीरो हो सकता है.   

भारत में T20 विश्व कप 2026: बांग्लादेशी मीडिया के लिए ICC ने सीमित कवरेज की घोषणा

नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने बताया है कि उसने टी20 विश्व कप 2026 के भारत में होने वाले मैचों को कवर करने के लिए बांग्लादेशी पत्रकारों के आवेदन को अस्वीकार कर दिया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, आईसीसी अधिकारियों ने कहा है कि बांग्लादेश की सरकार और बीसीबी ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए बांग्लादेश क्रिकेट टीम को भारत नहीं भेजने का फैसला किया था और भारत को असुरक्षित बताया था। उसी आधार पर बांग्लादेशी पत्रकारों के वीजा और एक्रिडिएशन आवेदन खारिज कर दिए गए हैं। विश्व कप का आयोजन भारत और श्रीलंका में 7 फरवरी से 6 मार्च तक होना है। आईसीसी द्वारा यह निर्णय बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड द्वारा सुरक्षा कारणों की वजह से अपनी टीम को भारत न भेजने और विश्व कप का बहिष्कार करने के फैसले के बाद लिया गया। डेली स्टार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कई पत्रकारों ने दावा किया कि कई बांग्लादेशी फोटो जर्नलिस्ट को शुरू में 20 और 21 जनवरी को मंजूरी वाले ईमेल मिले थे, लेकिन बाद में उनके एक्रेडिटेशन रद्द कर दिए गए। रिपोर्ट में बीसीबी मीडिया कमेटी के चेयरमैन अमजद हुसैन के हवाले से दावा किया गया है कि बांग्लादेश के 130 से 150 पत्रकारों ने एक्रेडिटेशन के लिए अप्लाई किया था। अमजद ने कहा, "जहां तक ​​मुझे पता है, सभी बांग्लादेशी पत्रकारों को रिजेक्ट कर दिया गया था। इस साल करीब 130 से 150 पत्रकारों ने आवेदन किया था, लेकिन किसी को भी एक्रेडिटेशन नहीं मिला।" सीनियर पत्रकार, आरिफुर रहमान बाबू, उन चार बांग्लादेशी रिपोर्टरों में से थे जिन्होंने 1996 के आईसीसी विश्व कप को कवर किया था, जिसे भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका ने मिलकर होस्ट किया था। उन्होंने कहा, "भले ही कोई टीम नहीं खेल रही हो, आईसीसी एसोसिएट मेंबर देश के पत्रकारों को अभी भी एक्रेडिटेशन मिल सकता है। मुझे कोई कारण नहीं दिखता कि सभी को रिजेक्ट क्यों किया गया। मैं हैरान हूं, और मैं इस फैसले की कड़ी निंदा और विरोध करता हूं।" बांग्लादेश ने तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को इंडियन प्रीमियर लीग 2026 से रिलीज किए जाने के बाद सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए अपने ग्रुप-स्टेज के मैच भारत से श्रीलंका में शिफ्ट करने की मांग की थी। बांग्लादेश ने इसके अलावा आयरलैंड के साथ ग्रुप बदलने का भी सुझाव आईसीसी को दिया था। आईसीसी ने बांग्लादेश की मांग नहीं मानी और उसे अपने फैसले पर विचार करने और भारत में ही जाकर खेलने का सुझाव दिया और इस पर फैसला करने के लिए पर्याप्त समय भी दिया। बीसीबी ने आईसीसी की बात नहीं मानी और अपनी सरकार की सलाह पर सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अपनी क्रिकेट टीम को भारत भेजने से इनकार कर दिया। इसके बाद आईसीसी ने बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड को विश्व कप में शामिल किया।

अयोध्या जाना हुआ आसान: 13 फरवरी से चलेगी स्पेशल ट्रेन, जानें किन-किन स्टेशनों पर रुकेगी

भोपाल आने वाले फरवरी और मार्च के महीने में अगर आप अयोध्या जाने का प्लान कर रहे है तो ये खबर आपके काम की है। जानकारी के लिए बता दें कि भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने अयोध्या जाने वाले यात्रियों के लिए स्पेशल ट्रेन (Special Train) चलाने का फैसला लिया है। ये स्पेशल ट्रेन तीन राज्यों को कवर करके चलेगी। इसकी शुरुआत गुजरात के उधना जंक्शन से होगी। यह संचालन दोनों दिशाओं में सात-सात फेरे के लिए किया जाएगा। ट्रेन में एसी, स्लीपर और जनरल श्रेणी की बोगियां होंगी। जानें क्या रहेगी ट्रेन की टाइमिंग रेलवे गुजरात के उधना जंक्शन से लखनऊ होकर अयोध्या कैंट के लिए 13 फरवरी से स्पेशल ट्रेन का संचालन शुरू होगा। ट्रेन नंबर 09093 उधना से 13 फरवरी से 27 मार्च तक प्रत्येक शुक्रवार की सुबह 7:25 बजे चलेगी। यह ट्रेन वडोदरा, गोधरा, रतलाम, उज्जैन, बीना, झांसी, कानपुर के रास्ते शनिवार 7:45 बजे लखनऊ पहुंचेगी।   यहां से छूटने के बाद ट्रेन बाराबंकी होकर सुबह 08:30 बजे अयोध्या कैंट पहुंचेगी। इसी तरह वापसी यात्रा में 09094 स्पेशल अयोध्या कैंट से 14 फरवरी से 28 मार्च तक प्रत्येक शनिवार को शाम 5:17 बजे छूटेगी। यह ट्रेन शाम 6:40 बजे लखनऊ होते हुए रविवार शाम 5:15 बजे उधना पहुंचेगी। एमपी के इन स्टेशनों में होगा स्टॉपेज ये ट्रेन मध्यप्रदेश के रतलाम, नागदा, उज्जैन, मक्सी, सीहोर, संत हिरदाराम, बीना में रुकेगी। आगे ये ट्रेन कानपुर, लखनऊ के रास्ते अयोध्या जाएगी। ये ट्रेन कुल 15 स्टेशनों में रुकेगी।   इस ट्रेन में टिकट बुक करने के लिए आप IRCTC की आधिकारिक वेबसाइट (irctc.co.in) या IRCTC Rail Connect ऐप का उपयोग कर सकते हैं। ऐप में लॉगिन करें, यात्रा का विवरण (स्थान, तारीख) दर्ज करें, ट्रेन चुनें, यात्री विवरण भरें और UPI/डेबिट कार्ड के माध्यम से भुगतान करें। इसके अलावा, आप रेलवे स्टेशन काउंटर पर भी टिकट ले सकते हैं।

सड़कों पर उतरी करणी सेना, UGC नीति के विरोध में 1 फरवरी को देशव्यापी बंद

इंदौर विश्विद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के द्वारा नई नीति के विरोध में करणी सेना आ गई है। मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के स्थित देवी अहिल्या बाई विश्विद्यालय परिसर में विरोध प्रदर्शन किया और साथ कुलपति को ज्ञापन भी सौंपा। परिसर में हनुमान चालीसा का पाठ किया देवी आहिल्या बाई विश्वविद्यालय के आरएनटी मार्ग स्थित परिसर में करणी सेना के कार्याकर्ताओं द्वारा हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। इस दौरान करणी सेना अध्यक्ष अनुराग प्रताप सिंह ने कहा कि सरकार को हनुमान जी सरकार सद्बुद्धि दें। हम लोग शिक्षा में समानता के अधिकार के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। 1 फरवरी को भारत बंद का ऐलान अनुराग सिंह ने बताया कि यूजीसी के प्रस्ताव के खिलाफ हम एक फरवरी को भारत बंद करेंगे। इसके बाद दो फरवरी को मध्यप्रदेश के सभी सांसदों को ज्ञापन सौंपकर, उनसे पूछेंगे कि वह यूजीसी के इस प्रस्ताव का विरोध करते हैं या समर्थन करते हैं। अगर वह विरोध करते हैं तो उनके लिखित में आश्वासन लेंगे कि वह केंद्र सरकार के सामने हमारी बात को रखें। वहीं, यूजीसी के प्रस्ताव का समर्थन करने वाले सांसदों को चूड़ियां भेंट की जाएंगी और उनकी अर्थी भी निकालेंगे। सभी जगह समर्थन करने वाले सांसदों का विरोध किया जाएगा। दरअसल, यूजीसी यानी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के द्वारा 13 जनवरी को ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस’ नाम से एक नोटिफिकेशन जारी किया गया था। जिसमें 15 जनवरी से देशभर की यूनिवर्सिटीज-कॉलेज में लागू कर दिया गया है। इसको लेकर सरकार ने दावा किया है कि इससे कॉलेजों में जाति, धर्म, लिंग, नस्ल, जन्मस्थान, विकलांगता के आधार पर होने वाला भेदभाव पूरी तरह खत्म हो जाएगा। साथ ही नए नियम के अनुसार, हर यूनिवर्सिटी-कॉलेज को ईओसी बनाना जरूरी होगा।

सिलेंडर की बची गैस चेक करना हुआ सुपर आसान, ये ट्रिक आजमाएं

नई दिल्ली आज के समय में लगभग हर घर की रसोई गैस सिलेंडर पर निर्भर है। सुबह की चाय से लेकर रात के खाने तक, गैस के बिना रसोई का काम रुक जाता है। ऐसे में अगर अचानक खाना बनाते वक्त गैस खत्म हो जाए, तो परेशानी बढ़ जाती है, खासकर सुबह की जल्दी या मेहमानों के आने पर। अक्सर लोगों को यह पता नहीं होता कि सिलेंडर में कितनी गैस बची है। हालांकि, कुछ आसान घरेलू तरीकों से बिना किसी मशीन या तकनीकी जानकारी के घर बैठे ही गैस का अंदाजा लगाया जा सकता है। गीले कपड़े से करें गैस की पहचान यह सबसे आसान और कारगर तरीका माना जाता है। एक साफ कपड़ा पानी में भिगोकर निचोड़ लें और उसे सिलेंडर के ऊपर से नीचे तक फेर दें। कुछ देर बाद सिलेंडर का जो हिस्सा जल्दी सूख जाए, वह खाली होता है, जबकि नीचे का ठंडा और गीला हिस्सा गैस की मौजूदगी दिखाता है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सिलेंडर आधा है या लगभग खत्म होने वाला है। वजन से भी जान सकते हैं गैस हर LPG सिलेंडर पर उसका खाली वजन यानी टेयर वेट लिखा होता है। अगर घर में वेट मशीन हो, तो सिलेंडर का कुल वजन नापें और उसमें से टेयर वेट घटा दें। जो वजन बचेगा, वही अंदर मौजूद गैस का होगा। घरेलू सिलेंडर में आमतौर पर 14.2 किलो गैस भरी जाती है। चूल्हे की लौ भी देती है संकेत अगर चूल्हे की लौ पहले जैसी तेज नहीं जल रही, बार-बार धीमी हो रही है या खाना पकने में ज्यादा समय लग रहा है, तो यह संकेत हो सकता है कि गैस कम हो रही है। हालांकि, यह तरीका पूरी तरह सटीक नहीं होता, लेकिन सतर्क रहने में मदद करता है।   गैस लेवल इंडिकेटर डिवाइस आजकल बाजार में गैस लेवल बताने वाले छोटे गैजेट्स भी उपलब्ध हैं। ये सिलेंडर के बाहर लगते हैं और रंग या डिजिटल संकेत के जरिए बताते हैं कि गैस ज्यादा है या खत्म होने वाली है। कुछ डिवाइस मोबाइल ऐप से भी जुड़ते हैं और समय रहते रीफिल बुक करने में मदद करते हैं।  

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

मेष: आज के दिन तनाव दूर करने के लिए वॉक पर जा सकते हैं। भले ही आपकी शादी को काफी समय हो गया हो लेकिन साथ में समय व्यतीत करना जरूरी है। ऑफिस का काम घर लेकर न आएं। सेहत पर ध्यान देने की जरूरत है। वृषभ: आज के दिन अपने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के लिए समय निकालें। स्ट्रेस से दूर रहें। धन संबंधी मामलों में आप सफलता देखेंगे। डाइट को हेल्दी रखें। इन्वेस्टमेंट करना आज ठीक नहीं रहेगा। मिथुन: आज के दिन जीवन में थोड़ी-बहुत हलचल रहेगी। अपने साथी से जुड़ने और प्यार बांटने के लिए अपने अट्रैक्शन और कम्यूनिकेशन का इस्तेमाल करें। आज खर्च करते वक्त आपको सावधानी बरतनी जरूरी है। कर्क: आज का दिन आपके लिए मिले-जुले परिणाम लेकर आया है। आपकी सेहत ही आपका धन है। फाइनेंशियल सिचूऐशन थोड़ी गड़बड़ा सकती है। आपकी कड़ी मेहनत और समर्पण बड़े पैमाने पर फल देंगे। सिंह: आज के दिन आप अपने धन संबंधी मामलों में सफलता देखेंगे। अपनी मां की सेहत पर ध्यान दें। हाइड्रेटेड रहें। फिटनेस को मेंटेन करने के लिए रेगुलर एक्सरसाइज करें। कुछ लोगों को राजनीतिक लाभ मिल सकता है। कन्या: आर्थिक दृष्टि से अच्छा अवसर आज दरवाजे पर दस्तक दे सकता है। आज आपको अपने स्वास्थ्य की देख-रेख करनी चाहिए। बॉस की सलाह पर ध्यान दें। हेल्दी डाइट लें। तुला: जीवन की चुनौतियों को हंस कर पार करें। अपनी फाइनेंशियल बॉउन्डरी को मेन्टेन करने पर ध्यान दें। आज की एनर्जी आपको अपने सपनों की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। वृश्चिक: आज के दिन फाइनेंशियली आप अच्छे रहेंगे। प्रोफेशनल लाइफ में खुद पर फीलिंग्स को हावी न होने दें। जल्दबाजी में आकर आज कोई जरूरी डिसीजन न ही लें तो बेहतर है। शाम रोमांटिक रहने वाली है। धनु: आज के दिन आपका शरीर और दिमाग दोनों तालमेल में रहने वाले हैं। अपनी फीलिंग्स को पार्टनर के साथ शेयर करना अच्छा साबित होगा। स्ट्रेस दूर करने के लिए मेडिटेशन या योग का सहारा लें। मकर: सीनियर्स के साथ किसी नए प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर सकते हैं। वित्तीय स्थिति आज पॉजिटिव रहने वाली है। वर्क और लाइफ के बीच बैलेंस मेन्टेन करके रखना बेहद जरूरी है। कुंभ: आज के दिन ब्रेक लेते रहें, जो आपको पूरी लगन से अपना प्रदर्शन दिखाने में मदद करेगा। ऑफिस का काम आपके दिन को व्यस्त बना सकता है। हाइड्रेटेड रहना न भूलें। लाइफ में बैलेंस बनाए रखें। मीन: आज के दिन ब्रह्मांड आपके जुनून को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। थोड़ा स्ट्रेस फील कर सकते हैं। आज का राशिफल नए विचारों को लाइफ में लाने की अड्वाइस दे रहा है। करियर तौर पर प्रोडक्टिव रहेंगे।

धार्मिक विवाद: गंगोत्री में गैर हिंदुओं पर प्रतिबंध, इमाम ने दी ठोस वजह

देहरादून उत्तराखंड के प्रमुख तीर्थस्थलों बद्रीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री में अब गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित करने की तैयारी है। बद्रीनाथ, केदारनाथ मंदिर समिति ने सभी हितधारकों के साथ इस पर सहमति बना ली है। जल्द ही बोर्ड की बैठक में इसे औपचारिक रूप दिया जाएगा। गंगोत्री मंदिर समिति ने निर्णय कर लिया है। हालांकि सनातन धर्म में आस्था रखने वालों का स्वागत जारी रहेगा। इस घटनाक्रम पर मुस्लिम उलेमा की अलग-अलग राय सामने आई है। मुस्लिमों का वहां कोई काम नहीं ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के चीफ इमाम डॉ. इमाम उमर अहमद इलियासी ने कहा कि यह धर्म और आस्था का विषय है। यदि मंदिर कमेटी यह तय करती है कि गैर-हिंदू अंदर नहीं आ सकते हैं तो इस फैसले पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। हर जगह के अपने नियम होते हैं। वैसे भी मुस्लिमों का गंगोत्री में कोई काम नहीं है। ऐसे में यदि कोई मुस्लिम वहां जाता है तो इससे टकराव होगा। मक्का और मदीना में भी तो ऐसे ही नियम डॉ. इमाम उमर अहमद इलियासी ने आगे कहा कि मुसलमानों को दूसरे धर्मों की पवित्र जगहों पर जाने से परहेज करना चाहिए। खासकर जिन जगहों पर हिन्दुओं की आस्था और सनातन का विषय है तो वहां से मुसलमानों को बचना बेहतर है। हमारे यहां मक्का और मदीना में भी गैर-मुसलमानों के प्रवेश की इजाजत नहीं है। यह वहां का नियम है। इस पर भी तो किसी को आपत्ति नहीं है। पवित्र जगहों के अपने नियम कायदे डॉ. इमाम उमर अहमद इलियासी ने तिरुपति बाला जी मंदिर में भी यही नियम हैं। इसी तरह अन्य धर्म स्थल हैं जहां गैर समुदाय के लोगों के जाने की मनाही है। सभी पवित्र जगहों के अपने नियम कायदे हैं। यह आस्था का विषय है। इसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। इस पर कोई राजनीति भी नहीं की जानी चाहिए। सभी को दूसरे धर्मों के पवित्र स्थलों के नियम कायदों का पालन करना चाहिए। गैर हिंदुओं का प्रवेश रोकने का फैसला बता दें कि बद्रीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री में गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित हो जाएगा। इस मुद्दे पर बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिर समिति ने आम सहमति बना ली है। प्रस्ताव अब बोर्ड की बैठक में रखा जाएगा। वहीं गंगोत्री मंदिर समिति ने पूरी तरह निर्णय कर लिया है। यमुनोत्री मंदिर समिति का फैसला अभी नहीं आया है। वहीं हरिद्वार में हर की पौड़ी का प्रबंधन करने वाली संस्था गंगा सभा ने भी गैर हिंदुओं के प्रवेश को वर्जित किए जाने की मांग की है। सियासत गर्म, कांग्रेस ने किया विरोध, भड़के इमरान मसूद इस प्रकरण पर सियासत गर्म है। उत्तराखंड सरकार ने कहा है कि मंदिर समितियों की बात सुनने के बाद उक्त मुद्दे पर फैसला लेगी। वहीं फैसले का कांग्रेस नेता विरोध कर रहे हैं। उत्तराखंड कांग्रेस ने कहा है कि प्रदेश की भाजपा सरकार जनसमस्याओं से ध्यान हटाने के लिए इस प्रकार के काम कर रही है। वहीं कांग्रेस के स्थानीय सांसद इमरान मसूद ने कहा कि गंगोत्री धाम हिंदुओं का पवित्र स्थल है वहां पहले से कोई मुसलमान नहीं जाता है लेकिन पहचान साबित करने जैसी शर्तें लगाकर समाज में जहर धोला जा रहा है।

ममता बनर्जी दे रही BJP को जवाब, अखिलेश का डबल स्ट्राइक; कांग्रेस की चिंता बढ़ी

कोलकाता उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार (27 जनवरी) को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात के बाद बड़ा राजनीतिक बयान देते हुए कहा कि इस देश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के हमलों का मुकाबला सिर्फ ‘दीदी’ ही कर सकती हैं। अपनी पत्नी और लोकसभा सांसद डिंपल यादव के साथ अखिलेश यादव कोलकाता स्थित राज्य सचिवालय ‘नबन्ना’ पहुंचे, जहां उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी से लगभग 40 मिनट तक बंद कमरे में बातचीत की।   बैठक के बाद ममता बनर्जी के साथ मीडिया से बात करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि ममता बनर्जी ने जिस साहस और दृढ़ता के साथ भाजपा की नीतियों और राजनीतिक दबावों का सामना किया है, वह पूरे देश के लिए मिसाल है। उन्होंने कहा, “सिर्फ दीदी ही हैं जो भाजपा के हर राजनीतिक हमले का मजबूती से जवाब दे सकती हैं।” उन्होंने कहा, “भाजपा वाले हमारे देश के सेकुलरिज्म से खिलवाड़ कर रहे हैं और वह भी इलेक्शन कमीशन से मिलकर। यहां तो हो ही रहा है लेकिन उत्तर प्रदेश में इससे ज्यादा वोट काटने का काम कर रहे हैं।” NRC और वोटर लिस्ट संशोधन पर आरोप अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के नाम पर राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लागू करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में हुए मतदाता सूची संशोधन के दौरान करीब 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से हटा दिए गए, जिससे आम लोगों को परेशान किया गया।अखिलेश ने कहा, “मतदाता सूची के बहाने लोगों को डराने और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश हो रही है।” लोकतंत्र बचाने की लड़ाई में समर्थन समाजवादी पार्टी प्रमुख ने साफ कहा कि उनकी पार्टी लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई में ममता बनर्जी को पूरा समर्थन देगी। उन्होंने कहा, “हम ममता बनर्जी के साथ हैं और लोकतंत्र की रक्षा के लिए हर स्तर पर सहयोग करेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, अखिलेश यादव और ममता बनर्जी की यह मुलाकात विपक्षी दलों के बीच बढ़ती नजदीकियों और आगामी चुनावों से पहले संभावित रणनीतिक तालमेल का संकेत मानी जा रही है। हालांकि, बैठक में किसी औपचारिक राजनीतिक गठबंधन की घोषणा नहीं की गई, लेकिन दोनों नेताओं के बयानों से यह स्पष्ट है कि भाजपा के खिलाफ साझा मोर्चे की जमीन तैयार की जा रही है। कांग्रेस पर भी निशाना और संदेश अखिलेश का यह बयान तब आया है, जब राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं और कांग्रेस TMC के खिलाफ ताल ठोक रही है। राजनीतिक जानकारों का यह भी मानना है कि अखिलेश ने कोलकाता से कांग्रेस को भी बड़ा संदेश दिया है। यानी उन्होंने एक बयान से दो दलों को साधने की कोशिश की है। पहले तो ममता और टीएमसी का साथ देने और उसे अपना समर्थन दिया है, वहीं दूसरी ओर अखिलेश ने कांग्रेस को यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह क्षेत्रीय दलों को साथ लेकर और उन्हें तवज्जो देकर ही चुनावी राजनीति में आगे कदम बढ़ाए। चूंकि अगले साल यूपी में भी विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए ऐसे बयान से अखिलेश ने कांग्रेस को संदेश कम टेंशन ज्यादा देने की कोशिश की है।  

UGC Equity नियमों की सिफारिश किस समिति ने की? दिग्विजय सिंह की कमेटी और उसके 29 सांसद सदस्य

नई दिल्ली विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने हाल ही में एक अधिसूचना जारी की है, जिसके मुताबिक सभी यूनिवर्सिटीज, कॉलेजों और उच्च शिक्षण संस्थानों को अपने संस्थानों के अंदर एक इक्विटी कमेटी बनानी होगी। ये कमेटी उस संस्थान के अंदर SC/ST या OBC कैटगरी के छात्रों, शिक्षकों या गैर शिक्षण कर्मियों के साथ होने वाले भेदभाव से जुड़ी शिकायतें सुनेंगी और तय समय-सीमा में उसका निपटारा करेगी। देश भर का सवर्ण समाज UGC के इस नियम का विरोध कर रहा है। बड़ी बात यह है कि जिस संसदीय समिति की सिफारिश पर UGC ने यह कानून बनाया है, उसके अध्यक्ष कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह है। उनके साथ इस समिति में कुल 30 सदस्य हैं जो संसद के दोनों सदनों के सदस्य हैं। इनमें कई भाजपा के सांसद हैं और सवर्ण समाज से आते हैं।   दरअसल, यह सिफारिश शिक्षा, महि्ला, बच्चों, युवा और खेल पर संसद की स्थाई समिति ने की है। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह इस समिति के अध्यक्ष हैं। इस समिति में 21 लोकसभा और 9 राज्यसभा के सांसद हैं। कुछ नाम तो चौंकाने वाले हैं। दलगत संख्या और प्रतिनिधित्व की बात करें तो इस समिति में भाजपा के 16, कांग्रेस के 4, समाजवादी पार्टी के 3, तृणमूल के 2, सीपीएम के 1, डीएमके के 1, एनसीपी (अजीत गुट) के 1, एनसीपी (शरद गुट) के 1 और आम आदमी पार्टी की 1 पूर्व सदस्य हैं। इसे यूं कहें तो इस समिति में सत्ताधारी भाजपा के सदस्यों की संख्या 50 फीसदी से अधिक है। समिति के सदस्यों में कौन-कौन? संसद की वेबसाइट पर उपलब्ध नामों के मुताबिक इस समिति में राज्यसभा से दिग्विजय सिंह के अलावा भीम सिंह (भाजपा नेता, बिहार से राज्यसभा के सांसद) बिकास रंजन भट्टाचार्य (CPM नेता और पश्चिम बंगाल से राज्यसभा सांसद), घनश्याम तिवाड़ी(भाजपा नेता, राजस्थान कोटे से राज्यसभा सांसद), रेखा शर्मा (भाजपा नेता और हरियाणा से राज्यसभा सांसद और महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष), सी. सदानंदन मास्टर (केरल भाजपा के उपाध्यक्ष और केरल से राज्यसभा सांसद), सिकंदर कुमार (भाजपा नेता, हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा सांसद), सुनेत्रा पवार (एनसीपी नेता और अजीत पवार की पत्नी, महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद) और स्वाती मालीवाल (AAP की पूर्व नेता और दिल्ली से राज्यसभा सांसद) हैं। लोकसभा से 21 चेहरे कौन-कौन? इस समिति में लोकसभा सांसदों में कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व जज अभिजित गंगोपाध्याय (भाजपा नेता और पश्चिम बंगाल से सांसद), पूर्व केंद्रीय मंत्री और पटना साहिब से सांसद और भाजपा के कद्दावर नेता रविशंकर प्रसाद, भाजपा नेता, प्रवक्ता और ओडिशा की पुरी सीट से सांसद संबित पात्रा भी हैं। इनके अलावा बांसुरी स्वराज (भाजपा नेता और नई दिल्ली सीट से सांसदष, अमर शरदराव काले (एनसीपी (शरद पवार गुट) नेता), अंगोमचा बिमोल अकोईजाम (कांग्रेस पार्टी के नेता और मणिपुर से सांसद), बृजमोहन अग्रवाल (छत्तीसगढ़ से भाजपा के नेता और रायपुर लोकसभा सीट से सांसद), दग्गुबाती पूरनदेश्वरी(आंध्र प्रदेश में भाजपा की कद्दावर नेता और राजमुंद्र सीट से सांसद) दर्शन सिंह चौधरी (भाजपा नेता और मध्य प्रदेश की होशंगाबाद सीट से सांसद) के नाम भी शामिल हैं।   अन्य चेहरों का हाल इनके अलावा अन्य सांसदों में डीएन कुरियाकोसे(कांग्रेस नेता और केरल की इडुक्की सीट से सांसद) वर्षा एकनाथ गायकवाड़ (कांग्रेस नेता और मुंबई की उत्तर-मध्य सीट से सांसद), हेमांग जोशी (भाजपा नेता और गुजरात की वडोदरा सीट से सांसद), जितेंद्र कुमार दोहरे (समाजवादी पार्टी के नेता और उत्तर प्रदेश की इटावा सीट से सांसद), जियाउर्रहमान बर्क (समाजवादी पार्टी के नेता और उत्तर प्रदेश की संभल सीट से सांसद), राजीव राय( समाजवादी पार्टी के नेता, यूपी की घोसी सीट से सांसद), कालिपाड़ा सरेन खेरवाल (तृणमूल कांग्रेस नेता और पश्चिम बंगाल की झारग्राम सीट से सांसद), कामाख्या प्रसाद तासा (भाजपा नेता और असम की काजीरंगा सीट से सांसद), करण भूषण सिंह (भाजपा नेता और उत्तर प्रदेश की कैसरगंज सीट से सांसद), रचना बनर्जी (TMC नेता और पूर्व अभिनेत्री, पश्चिम बंगाल की हुगली सीट से सांसद), शोभनाबेन महेंद्रसिंह बरैया (भाजपा नेता, गुजरात की साबरकांठा सीट से सांसद) और थमिझाची थंगापांडियन उर्फ टी. सुमथि. (तमिलनाडु में डीएमके नेता और चेन्नई दक्षिण सीट से सांसद) के नाम शामिल हैं।