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चार लेन का मेगा पुल बनेगा गेमचेंजर, एमपी के दो नेशनल हाईवे होंगे सीधे कनेक्ट

बेतुल एमपी के दो नेशनल हाईवे जल्द ही सीधे कनेक्ट हो जाएंगे। बैतूल-खेड़ी मार्ग पर 18 मीटर चौड़ा नया पुल बनाया जा रहा है जिससे दो राज्य भी जुड़ेंगे। मुख्य रूप से बैतूल शहर के लिए यह चार लेन पुल बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा। करबला घाट पर माचना नदी पर बननेवाले इस नए पुल के लिए बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष और स्थानीय विधायक हेमंत खंडेलवाल ने भूमिपूजन किया। इस मौके पर आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गादास उइके, जिले के अन्य विधायक महेंद्र सिंह चौहान, चंद्रशेखर देशमुख, गंगाबाई उईके व डॉ. योगेश पंडाग्रे भी उपस्थित थे। नया पु​ल, पुराने जर्जर पुल के स्थान पर बनाया जा रहा है जो बैतूल को नेशनल हाईवे से जोड़ेगा। इससे यातायात सुगम होने के साथ ही सुरक्षित भी होगा। इस पुल के बन जाने से बैतूल की हरदा-इंदौर हाईवे और भोपाल-नागपुर हाईवे से सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी। इतना ही नहीं, बारिश में माचना नदी में पानी भरने से उत्पन्न यातायात की समस्या भी खत्म हो जाएगी। चार-लेन पुल को 18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य करबला घाट पर पुराना पुल करीब 80 साल पहले का है और यह खतरनाक हो चुका है। बैतूल-खेड़ी मार्ग पर नया पुल 100 मीटर लंबा और 18.50 मीटर चौड़ा होगा। इस चार-लेन पुल को 18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। बैतूल क्षेत्र के लिए यह एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट है जिससे यात्रा और आसान व सुरक्षित होगी। माचना के नए पुल के निर्माण से बैतूल शहर को हरदा-इंदौर नेशनल हाईवे और भोपाल-नागपुर हाईवे से सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी। इसी के साथ एमपी की राजधानी भोपाल का महाराष्ट्र से सड़क संपर्क और सुगम हो जाएगा। पुल की प्रशासकीय लागत 18.43 करोड़ रुपए अधिकारियों ने बताया कि पुल की प्रशासकीय लागत 18.43 करोड़ रुपए और तकनीकी लागत 10.80 करोड़ रुपए निर्धारित की गई है। यह पुल चार लेन का होगी।

स्पोर्ट्स की दुनिया की बड़ी रात: मैड्रिड में 20 अप्रैल को लॉरियस अवार्ड्स

मैड्रिड मैड्रिड लगातार तीसरे वर्ष ‘लॉरियस वर्ल्ड स्पोर्ट्स अवार्ड्स’ की मेजबानी करेगा। आयोजकों ने सोमवार को यह घोषणा की। पिछले साल की तरह यह पुरस्कार समारोह 20 अप्रैल को सिबेल्स पैलेस में आयोजित किया जाएगा। आयोजकों ने बयान में कहा, ‘‘मैड्रिड ने 2024 में पहली बार लॉरियस पुरस्कारों की मेजबानी की थी और उसके बाद शहर को ‘लॉरियस स्पोर्ट फॉर गुड’ से बहुत फायदा हुआ।’’ बयान में कहा गया है, ‘‘2026 में होने वाले पुरस्कार समारोह में एक बार फिर खेलों से जुड़े दिग्गजों के साथ मनोरंजन, संस्कृति और फैशन जगत की कुछ बड़ी हस्तियां भी इसमें शामिल होंगी। सात प्रमुख श्रेणियों में से प्रत्येक में विजेता रहने वाले को प्रतिष्ठित लॉरियस प्रतिमा प्रदान की जाएगी।’’ मैड्रिड समुदाय की प्रमुख इसाबेल डियाज़ आयुसो ने कहा कि वह अपने शहर में खेलों से परिपूर्ण वर्ष की प्रतीक्षा कर रही हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मैड्रिड खेलों का हमेशा स्वागत करता रहा है क्योंकि यह उन साझा मूल्यों का प्रतिनिधित्व करता है जिससे हम सभी को लाभ होता है।’’ मैड्रिड के मेयर जोस लुइस मार्टिनेज अल्मेडा ने कहा, ‘‘मैड्रिड को गर्व है कि ‘लॉरियस वर्ल्ड स्पोर्ट्स अवार्ड्स’ एक बार फिर यहां आयोजित किए जा रहे हैं। हम एक ऐसा शहर हैं जो खेल और खिलाड़ियों से प्यार करता है।’’  

रॉयल राजस्थान: घूमने की 10 शानदार जगहें, जो आपकी ट्रैवल लिस्ट में जरूर हों

जयपुर राजस्थान को यूं ही राजाओं की धरती नहीं कहा जाता। किले, महल, झीलें, रेगिस्तान और वन्यजीवन—यहां का हर रंग यात्रियों को अलग अनुभव देता है। इतिहास की गूंज, परंपराओं की खुशबू और प्रकृति की भव्यता राजस्थान को भारत के सबसे खास पर्यटन राज्यों में शामिल करती है। अगर आप भारत में घूमने की योजना बना रहे हैं, तो राजस्थान की ये 10 जगहें आपकी लिस्ट में जरूर होनी चाहिए। आमेर किला, जयपुर जयपुर की पहाड़ियों पर स्थित आमेर किला राजपूत शौर्य और स्थापत्य कला का शानदार उदाहरण है। ऊंचे दरवाजे, नक्काशीदार दीवारें और शीश महल इसकी पहचान हैं। दिन के समय इसकी भव्यता और शाम को रोशनी में नहाया किला इतिहास को जीवंत कर देता है। सर्दियों का मौसम यहां घूमने के लिए सबसे बेहतर माना जाता है। उदयपुर सिटी पैलेस झीलों के शहर उदयपुर का सिटी पैलेस राजस्थानी और मुगल स्थापत्य का खूबसूरत संगम है। महल के आंगन, बालकनियां और संग्रहालय मेवाड़ राजघराने की शाही जिंदगी की झलक दिखाते हैं। पिछोला झील के किनारे बना यह महल सितंबर से मार्च के बीच सबसे ज्यादा आकर्षक लगता है। जैसलमेर किला थार रेगिस्तान के बीच खड़ा जैसलमेर किला आज भी आबाद है। सुनहरे पत्थरों से बना यह किला सूरज की रोशनी में अलग ही रंग बिखेरता है। इसकी गलियों में घूमते हुए सदियों पुरानी जीवनशैली को करीब से महसूस किया जा सकता है। सर्दियों में यहां का मौसम घूमने के लिए आदर्श रहता है। रणथंभौर नेशनल पार्क वन्यजीवन प्रेमियों के लिए रणथंभौर किसी सपने से कम नहीं। यहां खुले जंगल में बाघ को देखने का रोमांच अलग ही स्तर का होता है। इसके साथ ही पक्षी, हिरण और ऐतिहासिक खंडहर इस पार्क को खास बनाते हैं। अक्टूबर से जून तक का समय सफारी के लिए उपयुक्त माना जाता है। पुष्कर झील और ब्रह्मा मंदिर अरावली की गोद में बसा पुष्कर आध्यात्मिक शांति का केंद्र है। पवित्र झील के चारों ओर बने घाट और ब्रह्मा मंदिर इस शहर की पहचान हैं। यहां की गलियों में घूमते हुए संस्कृति और भक्ति का अनोखा संगम देखने को मिलता है। अक्टूबर से मार्च के बीच पुष्कर सबसे ज्यादा जीवंत रहता है। मेहरानगढ़ किला, जोधपुर नीले शहर जोधपुर के ऊपर स्थित मेहरानगढ़ किला राजस्थान के सबसे प्रभावशाली किलों में से एक है। इसकी ऊंचाई से पूरा शहर एक अलग ही रंग में नजर आता है। किले के भीतर मौजूद संग्रहालय और शाम का लाइट एंड साउंड शो पर्यटकों को खास अनुभव देता है। हवा महल, जयपुर जयपुर का हवा महल अपनी अनोखी बनावट के लिए दुनियाभर में मशहूर है। सैकड़ों झरोखों वाली यह इमारत राजघराने की महिलाओं के लिए बनाई गई थी। सुबह की रोशनी में इसका गुलाबी रंग बेहद आकर्षक दिखाई देता है। चित्तौड़गढ़ किला राजपूती वीरता और बलिदान की गाथाओं का प्रतीक चित्तौड़गढ़ किला भारत का सबसे बड़ा किला माना जाता है। विजय स्तंभ और मंदिरों से सजा यह किला इतिहास प्रेमियों को गहराई से प्रभावित करता है। सर्दियों में यहां घूमना सबसे आरामदायक रहता है। थार रेगिस्तान और कैमल सफारी रेत के टीलों के बीच ऊंट सफारी राजस्थान के सबसे यादगार अनुभवों में से एक है। सूर्यास्त के समय बदलते रंग और रात में तारों से भरा आसमान रेगिस्तान को जादुई बना देता है। अक्टूबर से मार्च तक का समय इसके लिए सबसे अच्छा माना जाता है। केवलादेव घना नेशनल पार्क, भरतपुर भरतपुर स्थित यह पक्षी अभयारण्य प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग जैसा है। सर्दियों में यहां प्रवासी पक्षियों का जमावड़ा देखने को मिलता है। शांत वातावरण और हरियाली इसे खास बनाती है। राजस्थान क्यों है खास राजस्थान सिर्फ किलों और महलों तक सीमित नहीं है। यहां के मेले, लोक संगीत, रंगीन बाजार और पारंपरिक खानपान हर यात्रा को यादगार बना देते हैं। चाहे इतिहास में रुचि हो या प्रकृति से लगाव, राजस्थान हर यात्री को कुछ न कुछ खास जरूर देता है।

Live-in रिलेशनशिप पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी, कहा- ‘रिश्ते टूटने पर पुरुष दुष्कर्म के आरोपों में फंस रहे’

इलाहाबाद  इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationship) और दुष्कर्म कानूनों को लेकर गंभीर टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि पश्चिमी विचारधारा के प्रभाव में युवाओं के बीच बिना विवाह किए साथ रहने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। जब ऐसे संबंध समाप्त होते हैं, तो कई मामलों में दुष्कर्म की एफआईआर दर्ज करा दी जाती है। पुराने कानूनों में फंस रहे पुरुष: कोर्ट न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति प्रशांत मिश्रा (प्रथम) की बेंच ने कहा कि चूंकि कानून महिलाओं के पक्ष में बनाए गए हैं, इसलिए पुरुषों को उन प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया जा रहा है, जो उस समय बने थे जब लिव-इन रिलेशनशिप की अवधारणा अस्तित्व में ही नहीं थी। आजीवन कारावास की सजा रद्द कोर्ट ने विशेष न्यायाधीश (POSCO Act), महाराजगंज की ओर से मार्च 2024 में अपीलकर्ता चंद्रेश को दी गई आजीवन कारावास की सजा और दोषसिद्धि आदेश को रद्द कर दिया। अपीलकर्ता को IPC की विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराया गया था। पीड़िता बालिग पाई गई अभियोजन पक्ष का आरोप था कि आरोपी ने शिकायतकर्ता की नाबालिग बेटी को शादी का झांसा देकर बहला-फुसलाकर बेंगलुरु ले जाकर शारीरिक संबंध बनाए। हालांकि, हाई कोर्ट ने पाया कि पीड़िता बालिग थी। अस्थि परीक्षण रिपोर्ट में उसकी उम्र लगभग 20 वर्ष पाई गई, जिस पर ट्रायल कोर्ट ने उचित विचार नहीं किया था। सबूतों में पाई गईं गंभीर खामियां कोर्ट ने यह भी कहा कि अभियोजन द्वारा प्रस्तुत विद्यालय रिकॉर्ड किशोर न्याय नियमों के अनुसार वैध दस्तावेज नहीं थे। पीड़िता की मां (गवाह-1) की ओर से बताई गई उम्र में भी विरोधाभास पाया गया। एफआईआर में उम्र 18½ वर्ष बताई गई थी। पीड़िता ने अपने बयान में स्वीकार किया कि वह स्वेच्छा से घर छोड़कर पहले गोरखपुर और फिर बेंगलुरु गई थी।

मुंबई मेयर चुनाव में फडणवीस सरकार का बड़ा कदम, बदला चुनावी परिदृश्य

मुंबई  मुंबई मेयर पद के चुनाव को लेकर सियासी घमासान के बीच एक बड़ा मोड़ सामने आया है. बीएमसी चुनाव में मामूली बहुमत वाली महायुति सरकार ने ऐसा कदम उठाया है, जिसे ठाकरे गुट की रणनीति पर सीधा वार माना जा रहा है. दरअसल शिवसेना (यूबीटी) गुट के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पिछले दिनों कहा कहा था कि ‘अगर भगवान की इच्छा होगी तो महापौर भी अपना होगा.’ हालांकि, उनके इस बयान के बाद बीजेपी और शिंदे गुट अलर्ट मोड में आ गया और इस ताजा कदम को उसी से जोड़कर देखा जा रहा है. मुंबई महानगरपालिका की सत्ता की लड़ाई में राज्य सरकार ने एक अहम राजनीतिक चाल चली है. आगामी मेयर चुनाव की प्रक्रिया में ‘पीठासीन अधिकारी’ (Presiding Officer) की नियुक्ति से जुड़े पुराने नियम में बदलाव कर दिया गया है. नई अधिसूचना के मुताबिक अब महापौर चुनाव से जुड़ी पूरी प्रक्रिया का संचालन नगर आयुक्त या सचिव स्तर के अधिकारी करेंगे. सरकार के इस फैसले के बाद सत्ताधारी और विपक्ष के बीच पहले ही दिन टकराव के संकेत मिल रहे हैं. अब तक की परंपरा के अनुसार, नई नगर परिषद की पहली बैठक में मेयर के चयन तक कार्यवाही देखने के लिए पीठासीन अधिकारी की नियुक्ति होती थी. यह जिम्मेदारी या तो निवर्तमान महापौर को या फिर सदन के सबसे वरिष्ठ नगरसेवक को सौंपी जाती थी. मुंबई महापालिका का कार्यकाल समाप्त हुए करीब तीन साल हो चुके हैं, ऐसे में निवर्तमान महापौर का विकल्प पहले ही खत्म हो गया था. पुराने नियमों के तहत, उद्धव ठाकरे गुट की वरिष्ठ नगरसेविका श्रद्धा जाधव को पीठासीन अधिकारी बनने का मौका मिल सकता था. राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि अगर पीठासीन अधिकारी विपक्ष का होता, तो सत्ताधारियों को तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता था. इसी संभावित स्थिति से बचने के लिए सरकार ने नियमों में बदलाव किया है. राज्य सरकार की तरफ से जारी नई नियमावली के अनुसार, अब महापौर या उपमहापौर के चुनाव के लिए बुलाई जाने वाली विशेष बैठक की अध्यक्षता राज्य सरकार के सचिव स्तर या उससे ऊचे अधिकारी करेंगे. वर्तमान नगर आयुक्त भूषण गगराणी प्रधान सचिव स्तर के अधिकारी हैं, ऐसे में वही इस प्रक्रिया के पीठासीन अधिकारी होंगे. इसके साथ ही महापौर के अधिकार भी सीमित कर दिए गए हैं. नए चुने गए महापौर भी उपमहापौर के चुनाव के दौरान पीठासीन अधिकारी के रूप में कार्य नहीं कर सकेंगे. गौरतलब है कि वर्ष 1997 से मुंबई महापालिका में शिवसेना-भाजपा की सत्ता रही है और इस दौरान पीठासीन अधिकारी को लेकर कभी विवाद नहीं हुआ. लेकिन मौजूदा बदले हुए राजनीतिक समीकरणों में यह मुद्दा विवाद की जड़ बनता नजर आ रहा है. ठाकरे गुट की ओर से पीठासीन अधिकारी अपने पक्ष का हो, इसके लिए रणनीति बनाई जा रही थी, लेकिन सरकार की अधिसूचना ने इस योजना को झटका दे दिया है. ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि महापौर चुनाव के पहले ही दिन नए नियमों को लेकर सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिल सकता है.

ओडिशा के कोरापुट में विवाद के बाद फैसला पलटा, 26 जनवरी पर मांसाहार बिक्री पर अब नहीं रहेगी पाबंदी

भुवनेश्वर ओडिशा के कोरापुट जिले में 26 जनवरी को 77वें गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर मांसाहारी खाद्य पदार्थों की बिक्री पर एक दिन के प्रतिबंध से जुड़ा आदेश वापस ले लिया गया है। जिले के कलेक्टर मनोज सत्यवान महाजन ने रविवार को अपने पहले के आदेश को निरस्त करते हुए सभी तहसीलदारों, ब्लॉक विकास अधिकारियों (बीडीओ) और अन्य कार्यकारी अधिकारियों को इस संबंध में नया पत्र जारी किया। कलेक्टर मनोज महाजन ने पत्र में स्पष्ट किया कि मांस, चिकन, मछली, अंडे और अन्य मांसाहारी खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने का निर्णय जिला स्तरीय गणतंत्र दिवस तैयारी समिति के सुझाव के आधार पर लिया गया था। हालांकि, इस फैसले को लेकर विभिन्न स्तरों पर आई प्रतिक्रियाओं और गहन विचार-विमर्श के बाद 23 जनवरी को जारी आदेश को वापस लेने का निर्णय किया गया है। रविवार को जारी आदेश में कहा गया है कि कोरापुट जिले में 77वें गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर मांसाहारी खाद्य पदार्थों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने संबंधी 23 जनवरी का आदेश तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाता है। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि यह निर्देश समिति के सुझाव पर जारी किया गया था, इसलिए व्यापक विचार के बाद इसे वापस लिया जा रहा है। इससे पहले 23 जनवरी को कलेक्टर ने सभी तहसीलदारों, बीडीओ और अन्य कार्यकारी अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर 26 जनवरी को मांस, चिकन, मछली, अंडे और अन्य मांसाहारी वस्तुओं की बिक्री पर रोक सुनिश्चित करें। उस आदेश में अधिकारियों से त्वरित कार्रवाई करने को भी कहा गया था। कलेक्टर के इस आदेश के सामने आने के बाद जिले ही नहीं, बल्कि राज्य स्तर पर भी व्यापक और मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं। कई लोगों ने फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा था कि गणतंत्र दिवस एक राष्ट्रीय पर्व है, न कि कोई धार्मिक अवसर, ऐसे में खाद्य पदार्थों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध उचित नहीं है। सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर भी इस निर्णय को लेकर बहस छिड़ गई थी। अब आदेश वापस लिए जाने के बाद प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। माना जा रहा है कि प्रशासन ने जनभावनाओं और व्यावहारिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया है। फिलहाल कोरापुट जिले में 26 जनवरी को मांसाहारी खाद्य पदार्थों की बिक्री पर कोई प्रतिबंध लागू नहीं रहेगा।

एयरपोर्ट बना तस्करी का अड्डा! अहमदाबाद में 12.50 करोड़ की ड्रग्स पकड़ी, चार लोग दबोचे गए

अहमदाबाद अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर रविवार को सीमा शुल्क और पुलिस अधिकारियों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 12.50 करोड़ रुपए मूल्य की हाइब्रिड मारिजुआना जब्त की है। इस दौरान चार यात्रियों को गिरफ्तार किया गया है, जिससे एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ होने का दावा किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, यह गिरोह हवाई मार्ग का इस्तेमाल कर प्रतिबंधित नशीले पदार्थों को भारत में ला रहा था। अधिकारियों को दक्षिण-पूर्व एशिया से भारत में नशीले पदार्थों की संभावित तस्करी को लेकर विशेष खुफिया जानकारी मिली थी। इसी इनपुट के आधार पर बैंकॉक से अहमदाबाद आने वाली एक उड़ान के यात्रियों की गहन जांच की गई। जांच के दौरान चार यात्रियों के सामान में संदिग्ध वस्तुएं पाई गईं, जिसके बाद विस्तृत तलाशी ली गई। वरिष्ठ सीमा शुल्क अधिकारी ने बताया कि तलाशी के दौरान उच्च गुणवत्ता वाली प्रतिबंधित हाइब्रिड मारिजुआना की बड़ी खेप बरामद की गई। यह मादक पदार्थ प्लास्टिक के पैकेटों में छिपाकर रखा गया था और इसका अनुमानित अंतरराष्ट्रीय बाजार मूल्य लगभग 12.50 करोड़ रुपए आंका गया है। अधिकारियों ने बताया कि हाइब्रिड मारिजुआना सामान्य गांजे की तुलना में कहीं अधिक प्रभावशाली और महंगा होता है तथा भारतीय कानून के तहत इस पर पूरी तरह प्रतिबंध है। चारों आरोपियों को मौके पर ही हिरासत में लेकर बाद में औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपियों में से एक वडोदरा का निवासी है, जबकि अन्य तीन पंजाब से ताल्लुक रखते हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह खेप गुजरात किस उद्देश्य से लाई गई थी और इसके पीछे सक्रिय आपूर्ति श्रृंखला में कौन-कौन लोग शामिल हैं। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि शुरुआती जांच से संकेत मिले हैं कि इन नशीले पदार्थों को देश के प्रमुख शहरों में सप्लाई करने की योजना थी, जहां इनकी मांग लगातार बढ़ रही है। अधिकारी आरोपियों के यात्रा रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन और संभावित अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की भी जांच कर रहे हैं, ताकि इस तस्करी से जुड़े बड़े नेटवर्क तक पहुंचा जा सके। मामले में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। जब्त किए गए मादक पदार्थों को फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है और आगे की जांच जारी है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि आरोपियों के अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट से संभावित संबंधों की जांच के लिए केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय शुरू किया गया है। यह बरामदगी अहमदाबाद हवाई अड्डे पर हाल के दिनों में हुई नशीली दवाओं की कई बड़ी जब्तियों की कड़ी में एक और मामला है। इसी महीने की शुरुआत में सीमा शुल्क अधिकारियों ने बैंकॉक से आए एक यात्री के सामान से करीब 8 करोड़ रुपए मूल्य की हाइड्रोपोनिक भांग बरामद की थी। इसके अलावा एक अन्य मामले में बैंकॉक से लाई गई 3.9 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक मारिजुआना की जब्ती के बाद एक आरोपी को एनडीपीएस अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था। अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के जरिए नशीले पदार्थों की तस्करी के लगातार प्रयासों को देखते हुए हवाई अड्डे पर निगरानी और खुफिया जानकारी के आधार पर अभियान और सख्त किए जा रहे हैं, ताकि इस तरह की गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

राजनीति में ज़हरीली भाषा! भाजपा नेता का ममता बनर्जी पर आपत्तिजनक बयान, TMC ने पुलिस में की शिकायत

कोलकाता पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक पारा चरम पर पहुंच गया है। हाल ही में इंटरनेट मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दक्षिण 24 परगना जिले के भाजपा उपाध्यक्ष संजय दास मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करते नजर आ रहे हैं। विवादित बयान और वायरल वीडियो वायरल वीडियो भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष की उपस्थिति में आयोजित एक कार्यक्रम का बताया जा रहा है। वीडियो में संजय दास मुख्यमंत्री को 'चुड़ैल' कहकर संबोधित कर रहे हैं और सार्वजनिक रूप से उनका 'सिर कलम' करने की मांग कर रहे हैं। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इस वीडियो की सत्यता की पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन इसने राज्य में एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है।   TMC ने दर्ज कराई शिकायत तृणमूल कांग्रेस का कड़ा रुख तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इस टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे एक लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई महिला मुख्यमंत्री का घोर अपमान और उनकी हत्या का खुला आह्वान बताया है। पार्टी ने भाजपा नेता के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। टीएमसी सांसद बापी हलदर ने कहा कि भाजपा राज्य में अशांति फैलाना चाहती है और महिलाओं के प्रति उनकी मानसिकता इस बयान से उजागर हो गई है। मामले पर भाजपा ने दी सफाई भाजपा की सफाई इस विवाद पर भाजपा की ओर से शतरूपा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह तृणमूल नेताओं द्वारा पूर्व में भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ की गई हिंसक टिप्पणियों की एक प्रतिक्रिया मात्र है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी संजय दास के इस तरह के अमर्यादित बयान का समर्थन नहीं करती है।

घुसपैठ पर सख्ती: असम से 15 बांग्लादेशी नागरिकों की वापसी, CM सरमा का बड़ा बयान

असम मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि बांग्लादेश से आए 15 अवैध प्रवासियों को असम से वापस भेज दिया गया है। शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार घुसपैठियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रखेगी। शनिवार रात ‘एक्स' पर एक पोस्ट में शर्मा ने कहा, “हमारे सतर्क सुरक्षाबलों ने 15 अवैध बांग्लादेशियों को उनके देश वापस भेज दिया।” उन्होंने कहा, “याद रखें, आप अपनी शर्तों पर आते हैं और हमारी शर्तों पर जाते हैं।   सीमाओं पर सब सतर्क हैं। कानून अपना काम कर रहा है। बहुत बढ़िया काम।” हालांकि, मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट नहीं किया कि इन घुसपैठियों को राज्य के किस जिले से वापस भेजा गया। राज्य सरकार बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासियों के खिलाफ लगातार सख्ती बरत रही है और पड़ोसी देश से लगी सीमाओं के जरिए घुसपैठियों को वापस भेजा जा रहा है। 

राष्ट्रपति भवन के अमृत उद्यान का उद्घाटन: प्रवेश, टिकट रियायत और समय से जुड़ी सब बातें

नई दिल्ली राष्ट्रपति भवन का प्रसिद्ध अमृत उद्यान इस बार 3 फरवरी से आम जनता के लिए खुलने जा रहा है, जो 31 मार्च 2026 तक खुला रहेगा। अमृत उद्यान को पहले मुगल गार्डन के नाम से जाना जाता था, जो राष्ट्रपति भवन परिसर में 15 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है। मूल रूप से इसमें ईस्ट लॉन, सेंट्रल लॉन, लॉन्ग गार्डन और सर्कुलर गार्डन शामिल थे।   क्या टाइमिंग, किस दिन बंद पिकनिक और सैर-सपाटे के शौकीन लोग हफ्ते में 6 दिन सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक अमृत उद्यान घूमने जा सकते हैं। विजिटर्स के लिए यहां लास्ट एंट्री 5.15 बजे तक ही होगी। उद्यान सोमवार को बंद रहेगा, जो रखरखाव का दिन है और 4 मार्च को होली के दिन भी यह बंद रहेगा। यहां कर सकेंगे बुकिंग राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, सभी विजिटर्स के लिए गार्डन में एंट्री और इसकी बुकिंग पूरी तरह से फ्री है। बुकिंग राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक वेबसाइट https://visit.rashtrapatibhavan.gov.in/ पर की जा सकती है। वहीं, बिना प्री-बुकिंग के आने वाले वॉक-इन विजिटर्स के लिए एंट्री पॉइंट के पास सेल्फ-सर्विस विजिटर्स रजिस्ट्रेशन कियोस्क उपलब्ध होंगे। कौन सा होगा नजदीकी मेट्रो स्टेशन सभी विजिटर्स के लिए एंट्री और एग्जिट राष्ट्रपति एस्टेट के गेट नंबर 35 से होगा, जो नॉर्थ एवेन्यू और राष्ट्रपति भवन के पास है। विजिटर्स की सुविधा के लिए, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट मेट्रो स्टेशन से गेट नंबर 35 तक हर 30 मिनट में सुबह 9.30 बजे से शाम 6.00 बजे तक शटल बस सेवा उपलब्ध होगी। शटल बसों को 'अमृत उद्यान के लिए शटल सेवा' बैनर से पहचाना जा सकता है। विजिटर्स के लिए कई तरह की सेवाएं उपलब्ध यहां विजिटर्स के लिए कई तरह की सर्विसेज उपबब्ध हैं, जिनमें यादगार चीजों की दुकानें, एक फूड कोर्ट, सुविधा के लिए व्हीलचेयर, पार्किंग और भी बहुत कुछ शामिल है, जिससे की यात्रा को और भी रोमांचक और यादगार बनाया जा सके। इस बार अमृत उद्यान में आने वाले लोग बैबलिंग ब्रूक देख सकेंगे, जिसमें एक घुमावदार धारा, मूर्तियों वाले फव्वारे, पत्थर के रास्ते और एक रिफ्लेक्टिंग पूल शामिल है। विजिटर यहां कई आकर्षणों में समय बिता सकते हैं, जैसे बच्चों के लिए खास तौर पर बनाया गया बाल वाटिका गार्डन जिसमें 225 साल पुराने शीशम के पेड़ की कहानी है, एक ट्रीहाउस, नेचर क्लासरूम वगैरह शामिल हैं। इसके साथ ही बोनसाई, सर्कुलर गार्डन हैं जिनमें तरह-तरह के पेड़-पौधे और जीव-जंतु हैं।