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कांग्रेस के सीनियर नेता सुरेश कलमाड़ी का निधन, लंबी बीमारी के बाद चले गए

 नई दिल्ली कांग्रेस के पूर्व केंद्रीय मंत्री और सीनियर नेता सुरेश कलमाड़ी का मंगलवार सुबह 81 साल की उम्र में निधन हो गया. वे कई दिनों से बीमार चल रहे थे. पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक, उनका अंतिम संस्कार पुणे के वैकुंठ धाम श्मशान घाट में दोपहर 3 बजे किया जाएगा. बता दें कि कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाले में नाम आने के बाद कलमाड़ी ने अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. इस विवाद ने उस वक्त पूरे देश में बहस और राजनीतिक उथल-पुथल मचा दी थी. सुरेश कलमाड़ी के परिवार में उनकी पत्नी, उनका बेटा और बहू, दो शादीशुदा बेटियां और दामाद, और उनके पोते-पोतियां हैं. सुरेश कलमाड़ी कौन थे? सीनियर कांग्रेस नेता सुरेश कलमाड़ी कांग्रेस के उन बड़े नेताओं में शामिल थे, जिनका आलाकमान के साथ अच्छा संबंध माना जाता था. वे रेल राज्य मंत्री रह चुके हैं और इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) के अध्यक्ष भी थे. पुणे के एक लोकप्रिय राजनीतिक नेता, कलमाडी कई बार शहर से लोकसभा के लिए चुने गए थे. कई साल तक, उन्होंने सार्वजनिक जीवन में कई भूमिकाएं निभाईं और लंबे समय तक राष्ट्रीय स्तर पर खेल प्रशासन से जुड़े रहे. हालांकि, 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स भ्रष्टाचार मामले को लेकर IOA में उनके कार्यकाल पर सवाल उठे और उन पर फंड के कथित दुरुपयोग के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए. उन्हें अप्रैल 2011 में गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद कांग्रेस ने उन्हें पार्टी से सस्पेंड कर दिया था. कॉमनवेल्थ घोटाले से छवि को लगा झटका  कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश कलमाड़ी का मंगलवार को महाराष्ट्र के पुणे के दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल में 81 साल की आयु में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया. सुबह 3:30 बजे उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा. सूत्रों के अनुसार, वैकुंठ श्मशान भूमि में उनका अंतिम संस्कार दोपहर दो बजे के क़रीब किया जाएगा. सुरेश कलमाड़ी का जन्म 1 मई 1944 को पुणे में हुआ था. उन्होंने 1960 के दशक की शुरुआत में नेशनल डिफेंस अकादमी (NDA) में एंट्री ली और भारतीय वायु सेना में पायलट के रूप में सेवा दी.  1964 से 1972 तक उन्होंने भारत की सेवा की, जिसमें 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध भी उनकी भागीदारी रही. 1974 में वायु सेना से समय से पहले सेवानिवृत्त होकर उन्होंने राजनैतिक सफर शुरू किया. स्क्वाड्रन लीडर के रैंक के पद पर रहते हुए उन्होंने सेवानिवृत्त ली थी.   

नए बजट को लेकर आज से मंत्री स्तरीय बैठकों में कई प्रस्तावों पर होगी चर्चा

रायपुर. छत्तीसगढ़ में वर्ष 2026-27 का बजट बनाने की प्रक्रिया निर्णायक दौर में आ पहुंची चुकी है. आज से महानदी भवन, मंत्रालय में मंत्री स्तरीय बजट चर्चा होने जा रही है, जो 6 जनवरी से शुरू होकर 9 तक चलेगी. फिलाहल मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के विभागों की चर्चा का समय तय नहीं हुआ है. मुख्य बजट और नवीन मद के प्रस्तावों पर होगी बात मंत्री स्तरीय बजट चर्चा में 6 जनवरी से 9 जनवरी तक मुख्य बजट प्रस्तावों और नवीन मद प्रस्तावों पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी के साथ चर्चा होगी. बताया गया है कि मंत्री अपने विभागों से संबंधित नई योजनाओं के प्रस्ताव पेश करेंगे. वित्त मंत्री से चर्चा के बाद प्रस्तावों को अंतिम रूप देकर बजट में शामिल किया जाएगा. जिन नवीन मद के प्रस्तावों पर सहमति नहीं होगी उन्हें दरकिनार किया जाएगा. इसी चर्चा के एक हिस्से में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के विभागों के प्रस्तावों पर वित्त मंत्री के साथ चर्चा होगी. आज से मंत्री स्तरीय बैठकें 6 जनवरी को सुबह 11 बजे उद्योग, आबकारी एवं श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन, दोपहर 12 बजे स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं ओबीसी कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, दोपहर 2 बजे पर्यटन, संस्कृति एवं धार्मिक न्यास मंत्री राजेश अग्रवाल और दोपहर 3 बजे कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं एससी कल्याण मंत्री गुरु खुशवंत के नए प्रस्तावों पर चर्चा कर मंजूरी दी जाएगी. 7 जनवरी को सुबह 11 बजे वन, परिवहन, सहकारिता एवं संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप, दोपहर 12 बजे राजस्व, स्कूल शिक्षा एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा, दोपहर 2.30 बजे अजाक कल्याण, कृषि एवं मछली-पशुधन पालन मंत्री रामविचार नेताम और अपराह्न 4 बजे वित्त मंत्री ओपी चौधरी अपने विभागों के प्रस्तावों पर निर्णय लेंगे. 8 जनवरी को सुबह 11 बजे उप मुख्यमंत्री अरुण साव के लोक निर्माण विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, खेल एवं युवा कल्याण और नगरीय प्रशासन विभागों के प्रस्तावों पर चर्चा होगी. दोपहर 2.30 बजे स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग एवं विधि-विधायी विभागों के प्रस्ताव रखे जाएंगे. 9 जनवरी को दोपहर 12 बजे महिला एवं बाल विकास और समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े और दोपहर 2 बजे उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के गृह, पंचायत एवं ग्रामीण विकास और आईटी विभाग के नए प्रस्तावों को मंजूरी दी जाएगी. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के विभागों से संबंधित प्रस्तावों पर चर्चा अलग से तय की जाएगी.

RKMP में हाईटेक मेंटेनेंस की शुरुआत, भोपाल की ट्रेनों में 15 दिन का काम अब सिर्फ 3 घंटे में होगा

भोपाल भोपाल रेल मंडल की ट्रेनों के संचालन को और अधिक तेज, सुचारू और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। रानी कमलापति (आरकेएमपी) रेलवे स्टेशन पर अत्याधुनिक व्हील टर्निंग मशीन की स्थापना का कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है। करीब 10.90 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस शेड का 90 प्रतिशत से अधिक कार्य पूर्ण किया जा चुका है। शेष कनेक्टिविटी कार्य पूरा होते ही मशीन को चालू कर दिया जाएगा। इसके शुरू होने से भोपाल से संचालित एवं होकर गुजरने वाली ट्रेनों के व्हील मेंटेनेंस में लगने वाला समय और संसाधन दोनों में उल्लेखनीय कमी आएगी। परिणामस्वरूप ट्रेनों की उपलब्धता और समयपालन में सुधार होगा, जिससे यात्रियों को भी सीधा लाभ मिलेगा। इस शेड के सिविल निर्माण कार्य का दायित्व एम/एस एल.एन. पांठी को सौंपा गया है, जबकि इलेक्ट्रिकल (जी) से संबंधित निर्माण कार्य एम/एस मारर सैनफील्ड इंडिया लिमिटेड, भोपाल द्वारा किया जा रहा है। तीन घंटे में एक व्हील की होगी रिपेयरिंग अब तक ट्रेनों के पहियों के मेंटेनेंस के लिए कोचों को निशातपुरा वर्कशॉप भेजना पड़ता था, जहां इस प्रक्रिया में करीब 10-15 दिन का समय लग जाता था। कई बार समय पर मेंटेनेंस न होने से ट्रेनों के संचालन पर भी असर पड़ता था। नई व्हील टर्निंग मशीन के शुरू होने के बाद यह पूरा काम आरकेएमपी स्टेशन पर ही हो सकेगा। खास बात यह है कि यह पूरी तरह ऑटोमेटिक मशीन है, जिससे जहां पहले एक हफ्ता लगता था, वहीं अब महज 3 घंटे में व्हील मेंटेनेंस संभव होगा। इससे ट्रेन टर्नअराउंड टाइम घटेगा और संचालन कहीं अधिक सुचारू बन सकेगा।  

पुलिसकर्मियों को मिलेगी थाने में स्वास्थ्य सुविधा, भोपाल के जूनियर डॉक्टरों की नई सोच

भोपाल काम के भारी दबाव और अनियमित दिनचर्या के चलते बीमारियों का शिकार हो रहे पुलिसकर्मियों के उपचार के लिए गांधी मेडिकल कालेज (जीएमसी) के जूनियर डाक्टरों ने नई पहल की है। अब खाकी वर्दी वालों को उपचार के लिए अस्पताल की लंबी कतारों में नहीं लगना होगा, बल्कि डॉक्टर खुद थाने पहुंचकर उनके स्वास्थ्य का परीक्षण करने के साथ ही उन्हें चिकित्सा उपलब्ध कराएंगे। इसके लिए प्रत्येक पुलिस थाने में नियमित स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे। लाइफस्टाइल बीमारियों की समय रहते पहचान इस अभियान का मुख्य उद्देश्य पुलिस बल में तेजी से बढ़ रही लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों की समय रहते पहचान करना और उनका उपचार शुरू करना है। मालूम हो कि पुलिस की नौकरी में ड्यूटी के घंटे तय नहीं होते। त्योहार हो या वीआइपी मूवमेंट, पुलिसकर्मी घंटों खड़े रहकर ड्यूटी करते हैं। इस भागदौड़ और मानसिक दबाव के कारण उनमें हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियां घर कर रही हैं।  

राजधानी में खिलेगा गुलाबों का संसार, 9–11 जनवरी तक महकेंगे फूलों के राजा

प्रदर्शनी के लिये ऑनलाइन और ऑफलाइन 6 जनवरी 2026 तक आवेदन आमंत्रित भोपाल फूलों के राजा गुलाब की महक 9 से 11 जनवरी तक राजधानी के गुलाब उद्यान में महकेगी। उद्यानिकी विभाग और मध्यप्रदेश रोज सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में गुलाब प्रदर्शनी का आयोजन किया जायेगा। प्रदर्शनी में भाग लेने के लिये आवेदन ऑनलाइन और ऑफलाइन 6 जनवरी 2026 तक आमंत्रित किये गये हैं। आयुक्त उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण श्री अरविन्द दुबे ने बताया कि मध्यप्रदेश फूलों के उत्पादन में देश में द्वितीय स्थान पर है। राज्य सरकार द्वारा फूलों के उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिये लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। इसी कड़ी में प्रतिवर्ष भोपाल स्थित गुलाब उद्यान परिसर में गुलाब प्रदर्शनी का आयोजन किया जाता है। गुलाब के प्रति आम लोगों के रूझान को देखते हुए गुलाब उत्पादकों के बीच स्वस्थ प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है। इसमें गमले से लेकर बगिया तक और टैरेस पर तैयार किये गये गुलाब के फूलों को पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया जाता है। तीन श्रेणियों में होगी प्रतियोगिता आयुक्त श्री दुबे ने बताया कि भोपाल शहर और उसके आसपास लगभग 40 किलोमीटर क्षेत्र में विकसित किये गये गुलाब उद्यानों की इंट्री इस प्रतियोगिता में शामिल की जाती हैं। जो गुलाब उत्पादक बड़ी संख्या में गुलाब का उत्पादन करते हैं, वह प्रतियोगिता में शामिल होने के लिये 6 जनवरी तक ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके उपरान्त 7 और 8 जनवरी को रोज सोसायटी और उद्यानिकी विभाग के प्रतिनिधि उन गुलाब उद्यानों का निरीक्षण करेंगे, 9 जनवरी को घरों में गमलों में लगाये गये गुलाबों का प्रदर्शन गुलाब उद्यान में किया जायेगा। इसके लिये गुलाब उत्पादक सुबह 8 से 12 बजे तक गुलाब उद्यान में प्रविष्ठि कर सकते हैं। 10 जनवरी को कट-फ्लावरों का प्रदर्शन गुलाब उद्यान परिसर में किया जायेगा। गुलाब प्रदर्शनी का 10 जनवरी को समारोहपूर्वक शुभारंभ किया जायेगा तथा 11 जनवरी को विजेताओं को पुरस्कार वितरित होंगे।  

रूफ-टॉप सोलर लक्ष्य से दूर बांसवाड़ा, PM सूर्यघर योजना में 11.47% ही उपलब्धि

बांसवाड़ा प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के तहत रूफ-टॉप सोलर स्थापना में राजस्थान का बांसवाड़ा जिला लगातार पिछड़ता नजर आ रहा है। अजमेर डिस्कॉम के बांसवाड़ा वृत्त को इस वर्ष 6,365 रूफ-टॉप सोलर संयंत्र लगाने का लक्ष्य मिला था, लेकिन अब तक केवल 730 संयंत्र ही स्थापित हो पाए हैं। यह कुल लक्ष्य का महज 11.47 प्रतिशत है, जो डिस्कॉम के औसत 23 प्रतिशत से भी काफी कम है।डिस्कॉम रिकॉर्ड के अनुसार जिले में अब तक 3,230 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जो लक्ष्य का करीब 50 प्रतिशत हैं, लेकिन इनमें से 1,036 आवेदन स्थापना के लिए लंबित हैं। इसके अलावा 35 मामले लोड वेरिफिकेशन के स्तर पर अटके हुए हैं।   ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे बड़ी समस्या ऑनलाइन प्रक्रिया और भुगतान को लेकर सामने आ रही है। उपभोक्ता डिजिटल औपचारिकताएं पूरी नहीं कर पा रहे, वहीं उपखंड स्तर पर जागरूकता शिविरों की कमी भी बड़ी वजह है। अधिकारी स्तर पर अपेक्षित सक्रियता नहीं होने से योजना की गति धीमी बनी हुई है। शहरी क्षेत्र में स्थिति और जटिल है। बांसवाड़ा शहर में मीटरिंग, बिलिंग और रिकवरी का जिम्मा सिक्योर मीटर्स कंपनी के पास है, जिसका सॉफ्टवेयर डिस्कॉम के सिस्टम से अब तक लिंक नहीं हो पाया है। इस तकनीकी अड़चन के कारण राज्य सरकार की सब्सिडी का लाभ नहीं मिल पा रहा, जिससे लोग रूफ-टॉप सोलर लगवाने से पीछे हट रहे हैं। फिलहाल जिले में पांच सोलर वेंडर रजिस्टर्ड हैं, जबकि अन्य जिलों के वेंडर एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं। औसतन हर महीने 100-125 संयंत्र ही लग पा रहे हैं। अधीक्षण अभियंता भगवान दास ने बताया कि जल्द ही ब्लॉक-स्तरीय कैंप लगाकर प्रक्रिया तेज की जाएगी। वहीं सिक्योर मीटर्स के प्रभारी विराग शर्मा ने कहा कि सॉफ्टवेयर लिंक के लिए जरूरी अपडेट पर काम चल रहा है और कुछ ही दिनों में समस्या दूर कर ली जाएगी।  

साउथ कोरिया का नया मास्टरपिस—KF-21 ‘बोरामे’ फाइटर जेट: तेजस से बेहतर और F-35 से सस्ता, 2300 KM/घंटा की स्पीड

सियोल  साउथ कोरिया ने अपना पहला स्वदेशी फाइटर जेट KF-21 ‘बोरामे’ तैयार कर लिया है. इसकी पहली डिलीवरी कोरियन एयरफोर्स को इसी साल शुरू होने जा रही है. यह सिर्फ एक विमान नहीं है. यह साउथ कोरिया की आत्मनिर्भरता का प्रतीक है. अब उसे अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका पर निर्भर नहीं रहना होगा. यह 4.5 जनरेशन का फाइटर जेट है. यह किसी भी दुश्मन को पल भर में राख कर सकता है. कोरिया एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज ने इसे बहुत आधुनिक बनाया है. इसमें रडार और मिसाइल सिस्टम बहुत एडवांस हैं. यह खबर सुनते ही चीन और नॉर्थ कोरिया में खलबली मच गई है. आइए समझते हैं कि यह विमान इतना खास क्यों है. यह भारत के तेजस से कितना अलग और ताकतवर है. क्या साउथ कोरिया का KF-21 आसमान में चीन और नॉर्थ कोरिया की दादागिरी खत्म कर देगा? साउथ कोरिया ने साल 2010 में एक सपना देखा था. वह अपना खुद का फाइटर जेट बनाना चाहता था. अब साल 2026 में यह सपना पूरा हो गया है. KF-21 बोरामे अब अपनी पहली उड़ान भरने को तैयार है. यह विमान पुराने F-4 और F-5 विमानों की जगह लेगा. यह दो इंजन वाला मल्टीरोल फाइटर जेट है. इसे बनाना साउथ कोरिया का सबसे कठिन प्रोजेक्ट था. इसमें सालों का निवेश और मेहनत लगी है. अब साउथ कोरिया को किसी दूसरे देश से विमान नहीं खरीदने होंगे. इससे उसकी सैन्य शक्ति कई गुना बढ़ जाएगी. चीन के बढ़ते खतरे को देखते हुए यह बहुत जरूरी था.     KF-21 की अधिकतम रफ्तार लगभग 2,300 किलोमीटर प्रति घंटा है. यह इसे दुनिया के सबसे तेज विमानों की लिस्ट में शामिल करती है. आखिर KF-21 बोरामे में ऐसी कौन सी गुप्त तकनीक है?     KF-21 को 4.5 जनरेशन का फाइटर माना जा रहा है. इसमें स्टील्थ यानी रडार से बचने की क्षमता है.     इसका डिजाइन बहुत ही आधुनिक और शार्प है. इसमें AESA रडार लगाया गया है. यह रडार बहुत दूर से दुश्मन को पकड़ लेता है.     इसमें फ्लाई-बाय-वायर कंट्रोल सिस्टम भी मौजूद है.     हालांकि इसमें अभी इंटरनल वेपन बे नहीं है. यानी मिसाइलें बाहर की ओर ही लगी होंगी. लेकिन भविष्य में इसे और अपडेट किया जाएगा.     यह विमान F-16 से ज्यादा ताकतवर है. वहीं यह F-35 से काफी सस्ता और किफायती है. 4.5 Gen का मतलब क्या है? 4.5 जनरेशन का मतलब है कि यह विमान चौथी पीढ़ी से बेहतर है. लेकिन यह पांचवीं पीढ़ी के पूरी तरह स्टील्थ विमानों से थोड़ा पीछे है. यह उन देशों के लिए बेस्ट है जो कम बजट में हाई टेक्नोलॉजी चाहते हैं. भारत का ‘तेजस’ और तुर्की का ‘कान’ इसके सामने टिक पाएंगे? दुनिया भर में कई देश अपने विमान बना रहे हैं. भारत का तेजस मार्क 1A अभी शुरुआती चरण में है. तेजस मार्क 2 और AMCA पर अभी काम चल रहा है. वहीं तुर्की का KAAN भी अभी टेस्टिंग मोड में है. लेकिन साउथ कोरिया इन सब से आगे निकल गया है. KF-21 ने 2000 घंटे से ज्यादा की उड़ान भर ली है. इसकी टेस्टिंग बहुत ही पारदर्शी और सफल रही है. चीन का J-20 भी एक बड़ा खिलाड़ी है मगर चीन अपनी तकनीक को हमेशा गुप्त रखता है. क्या KF-21 दुनिया के फाइटर जेट मार्केट में अमेरिका के दबदबे को सीधी चुनौती देने वाला है? अब कई देश KF-21 को खरीदना चाहते हैं. अमेरिका के F-35 को खरीदना बहुत महंगा पड़ता है. साथ ही उसकी मेंटेनेंस भी बहुत मुश्किल है. KF-21 एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरा है. इंडोनेशिया इस प्रोजेक्ट में साउथ कोरिया का पार्टनर है. फिलीपींस और मलेशिया भी इसमें दिलचस्पी दिखा रहे हैं. मिडिल ईस्ट के कई देश भी इसे खरीदना चाहते हैं. साउथ कोरिया का डिफेंस मार्केट तेजी से बढ़ रहा है. उसके K2 टैंक और K9 तोपें पहले ही हिट हैं. अब KF-21 भी दुनिया भर में एक्सपोर्ट होने को तैयार है.

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: विदेश में हुए अपराध पर भी भारत में दर्ज होगी FIR

जबलपुर   विदेश में अपराध होने के बाद भारत में दर्ज की गई एफआईआर को निरस्त करने की मांग मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने खारिज कर दी. हाई कोर्ट जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए अपने आदेश में कहा "पुलिस एफआईआर दर्ज कर प्रारंभिक जांच कर रही है. प्रकरण में चार्जशीट दायर नहीं की गयी है. ट्रायल कोर्ट ने उस पर कोई संज्ञान नहीं लिया है तो ऐसी स्थिति में एफआईआर को निरस्त नहीं किया जा सकता." महिला के पति व सास-ससुर की याचिका खारिज जापान निवासी वैभव जैन तथा राजस्थान निवासी उनके पिता पुनीत व माता निकिता जैन की तरफ याचिका दायर की गयी थी. याचिका में कहा गया "वैभव का विवाह भोपाल निवासी महिला से जनवरी 2023 में जयपुर राजस्थान में हुआ था. वैभव तथा उसकी पत्नी जापान में नौकरी करते थे. विवाह के बाद वैभव अपने माता-पिता को जापान ले गया." आरोप है कि जापान में पत्नी अपने पति के माता-पिता के साथ विवाद करती थी. वह जापान छोड़कर भोपाल स्थित अपने मायके आकर रहने लगी. जापान से लौटकर महिला ने रिपोर्ट दर्ज कराई पत्नी ने पति व उसके माता-पिता के खिलाफ दहेज के लिए प्रताड़ित करने, मारपीट करने सहित अन्य आरोप लगाते हुए महिला थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई. याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया "अपराध विदेश में घटित हुआ है. इसलिए धारा 188 के तहत केन्द्र सरकार की अनुमति के बिना कोई जांच नहीं की जा सकती." महिला की तरफ से तर्क दिया गया "शुरुआती जांच में केन्द्र सरकार की मंजूरी आवश्यक नहीं है." केस प्रारंभिक स्टेज पर होने का तथ्य एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा "रिकॉर्ड के अनुसार पीड़ित का आरोप है कि अपराध जापान के साथ भारत में भी किया गया है. आरोपों के अनुसार भारत लौटने के बाद भी पति द्वारा उसे प्रताड़ित किया गया. पीड़िता की शिकायत पर अपराध सिर्फ दर्ज किया गया है. धारा 188 की मंजूरी संज्ञेय अपराध तथा ट्रायर स्टेज में लागू होती है. पुलिस जांच कर रही है और चार्जशीट दायर नहीं की गयी है." हाई कोर्ट ने इस आदेश के साथ याचिका खारिज कर दी. 

हरिद्वार को सनातन नगरी घोषित करने के बाद, गैर हिंदुओं के प्रवेश पर क्या हो सकता है प्रतिबंध?

हरिद्वार अगले साल जनवरी में हरिद्वार में प्रस्तावित कुंभ मेला 2027 से पहले उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार हरिद्वार-ऋषिकेश नगर निगम क्षेत्र को सनातन पवित्र नगरी घोषित करने पर गंभीरता से विचार कर रही है. सरकार के इस संभावित कदम ने धार्मिक, सियासी और सामाजिक बहस को तेज कर दिया है. सवाल उठ रहा है कि क्या गैर हिंदुओं का हरिद्वार आना पूरी तरह बैन हो जाएगा या फिर यह सिर्फ कुंभ और चुनिंदा धार्मिक क्षेत्रों तक सीमित रहेगा? आइये इसे थोड़ा विस्‍तार से समझते हैं.. आखिर ये प्रस्ताव क्या है और क्यों आया? सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा बॉयलॉज में हर की पैड़ी और कुछ चुनिंदा घाटों पर गैर हिंदुओं के प्रवेश पर जो प्रतिबंध है, उसे बढ़ाकर हरिद्वार के सभी 105 गंगा घाटों और पूरे कुंभ क्षेत्र तक किया जा सकता है. इस दायरे में हरिद्वार के साथ-साथ ऋषिकेश को भी शामिल किए जाने पर विचार चल रहा है. सरकार का तर्क है कि कुंभ जैसे विशाल धार्मिक आयोजन के दौरान क्षेत्र की पवित्रता, धार्मिक मर्यादा और सुरक्षा बनाए रखना प्राथमिकता है. साधु-संत और अखाड़ा परिषद लंबे समय से यह मांग करते रहे हैं कि हरिद्वार को विधिवत पवित्र धर्म नगरी का दर्जा मिले. सूत्र बताते हैं कि यह प्रस्ताव अभी विचाराधीन है और इस पर संतों, अखाड़ा परिषद तथा हरिद्वार में धार्मिक अनुष्ठानों का संचालन करने वाली प्रमुख संस्था श्री गंगा सभा से चर्चा की जा रही है. संतों की मांग सिर्फ घाटों तक सीमित नहीं है, बल्कि गैर हिंदुओं के रात में ठहरने पर भी प्रतिबंध की बात उठाई जा रही है, ताकि धार्मिक आयोजनों के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था या कथित धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस कवायद के पीछे की मंशा साफ करते हुए कहा कि हरिद्वार मां गंगा, ऋषि-मुनियों और संत परंपरा की पवित्र भूमि है. वहां से लगातार मांग उठ रही है कि उसकी पवित्रता और धार्मिक पहचान बनी रहे. सरकार सभी पहलुओं, पुराने कानूनों, धार्मिक मान्यताओं और व्यावहारिक चुनौतियों का अध्ययन कर रही है और उसी के आधार पर आगे कदम उठाएगी. क्या गैर हिंदुओं पर हमेशा के लिए रोक लगेगी? इसके बाद अब जो सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है, वह है कि क्‍या गैर हिंदुओं पर हमेशा के लिए यहां रोक लग जाएगी? अभी तक जो जानकारी सामने आई है, उसके मुताबिक पूरे शहर में स्थायी और पूर्ण प्रतिबंध का कोई आखिरी फैसला नहीं हुआ है. चर्चा मुख्य रूप से कुंभ क्षेत्र और गंगा घाटों तक प्रतिबंध बढ़ाने को लेकर है. चूंकि प्रस्ताव विचाराधीन है, यानी इसमें बदलाव, सीमाएं और शर्तें तय हो सकती हैं. अगर दूसरे शब्दों में बात की जाए तो यह जरूरी नहीं कि गैर हिंदुओं का हरिद्वार आना पूरी तरह बैन हो जाए, बल्कि धार्मिक आयोजनों और पवित्र स्थलों की सीमा में नियम सख्त किए जा सकते हैं. हालांकि अभी कुछ भी साफ नहीं है. विपक्ष का विरोध और गंगा-जमुनी तहजीब की दलील कांग्रेस ने इस प्रस्ताव का तीखा विरोध किया है. कांग्रेस की नेशनल मीडिया पैनलिस्ट सुजाता पॉल का कहना है कि यह कदम गंगा-जमुनी तहजीब को नुकसान पहुंचाने वाला और चुनावी ध्रुवीकरण की राजनीति का हिस्सा है. उनके मुताबिक, कुंभ मेले में वैसे भी हिंदू श्रद्धालुओं की भीड़ होती है, लेकिन भारतीय परंपरा में विभिन्न समुदायों का सहयोग और सहभागिता हमेशा रही है जैसा कि अयोध्या जैसे धार्मिक स्थलों पर भी देखा जाता है. वहीं, महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी और हिंदूवादी नेता नितिन गौतम जैसे नेताओं का कहना है कि कुंभ क्षेत्र को गैर हिंदू प्रतिबंधित घोषित करना सुरक्षा और धार्मिक गरिमा के लिहाज से जरूरी है. उनका तर्क है कि कुंभ जैसे महाआयोजन में किसी भी प्रकार की साजिश या अव्यवस्था की आशंका को खत्म करने के लिए यह कदम उठाया जाना चाहिए.

प्रदेश के विशेषज्ञ ट्रांसको इंजीनियर्स ने रिकॉर्ड समय में 50 एमवीए पॉवर ट्रांसफार्मर को किया ऊर्जीकृत

प्रदेश के विशेषज्ञ ट्रांसको इंजीनियर्स ने रिकॉर्ड समय में 50 एमवीए पॉवर ट्रांसफार्मर को किया ऊर्जीकृत भोपाल  मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) ने मालनपुर  (भिंड) में तकनीकी दक्षता, सटीक योजना और उत्कृष्ट समन्वय का  उदाहरण प्रस्तुत करते हुए लगभग 15 दिन में 50 एमवीए क्षमता के नये पावर ट्रांसफार्मर का ट्रांसपोर्ट, स्थापना, संपूर्ण तकनीकी परीक्षण एवं ऊर्जीकरण कर एक बेहद अनुकरणीय कार्य किया है। सामान्य परिस्थितियों में किसी भी पावर ट्रांसफार्मर के साइट पर पहुँचने के बाद उसके इरेक्शन, टेस्टिंग, आयल फिल्टेरेशन एवं ऊर्जीकरण में एक माह या उससे अधिक समय लग जाता है, किंतु  मालनपुर के ओद्योगिक क्षेत्र मे विद्युत की सामान्य बहाली की प्राथमिकता के कारण एम पी ट्रांसको ने तकनीकी रूप से जटिल , जोखिमपूर्ण और चुनौतीपूर्ण  कार्य को मुख्य अभियंता (परीक्षण एवं संचार) अमर कीर्ति सक्सेना के कुशल निर्देशन में दिन रात एक कर न्यूनतम संभव समय में सफलतापूर्वक पूरा किया। एम.पी. ट्रांसको के इतिहास में यह विरला अवसर है जब  पुराने फेल ट्रांसफार्मर को हटाकर, नए उच्च क्षमता के  पावर ट्रांसफार्मर का सुरक्षित ट्रांसपोर्टेशन , स्थापना, आवश्यक सभी तकनीकी परीक्षण एवं ऊर्जीकरण  का बेहद संवेदनशील कार्य लगभग 15 दिनों में संभव हो सका हो। न्यूनतम समय में पूर्ण हुआ अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य – एमडी तिवारी एम.पी. ट्रांसको के प्रबंध संचालक सुनील तिवारी ने बताया कि एम.पी. ट्रांसको के 220 केवी सबस्टेशन मालनपुर में तकनीकी कारणों से  19 दिसंबर  को फेल हुए 40 एमवीए क्षमता के पावर ट्रांसफार्मर के स्थान पर नए 50 एमवीए क्षमता के पावर ट्रांसफार्मर को न्यूनतम संभव समय में ट्रांसपोर्ट कर सबस्टेशन में स्थापित एवं ऊर्जीकृत किया गया। उन्होंने बताया कि  पावर ट्रांसफार्मर की डिस्मेंटलिंग, ट्रांसपोर्टेशन, साइट प्रिपरेशन, इरेक्शन, ऑयल फिल्ट्रेशन, कमिशनिंग एवं टेस्टिंग की संपूर्ण प्रक्रिया अत्यंत तकनीकी, समय-साध्य एवं सुरक्षा-संवेदनशील होती है। मालनपुर औद्योगिक क्षेत्र के उपभोक्ताओं को हो रही असुविधा को ध्यान में रखते हुए, एम.पी. ट्रांसको के प्रदेश के विभिन्न भागों से नियुक्त किये गए अनुभवी अधीक्षण अभियंताओं ने  स्थानीय तकनीकी टीमों के साथ निरंतर   15 दिनों तक 24×7 कार्य करते हुए उच्च तकनीकी दक्षता, सतर्कता एवं समन्वय के साथ इस चुनौती को सफलतापूर्वक पूरा किया। ऊर्जा मंत्री ने दी बधाई  मालनपुर सबस्टेशन में रिकॉर्ड समय में नये पावर ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने पर बधाई देते हुए मध्य प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर ने कहा कि एम.पी. ट्रांसको की यह सफलता उसके तकनीकी क्षमता, सुनियोजित रणनीति और टीमवर्क का सशक्त प्रमाण है, जो यह दर्शाती है कि प्रतिबद्धता और विशेषज्ञता से असंभव प्रतीत होने वाले कार्य भी संभव बनाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि के परिणामस्वरूप अब मालनपुर में लक्ष्मणपुरा औद्योगिक क्षेत्र के इंडस्ट्रियल फीडरों को पुनः सामान्य, निर्बाध एवं विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति संभव हो सकेगी।