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2023 में शुरू उत्तर प्रदेश अंतरराषट्रीय व्यापार मेले ने यूपी को दिलाई नई पहचान: शशि भूषण लाल सुशील

ग्रेटर नोएडा  वर्ष 2023 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में शुरू हुए उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) ने आर्थिक प्रगति, तकनीकी विकास, सांस्कृतिक विरासत, निवेश, विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश को नई पहचान दिलाई है। यूपीआईटीएस-2026 के समापन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रमुख सचिव, एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन शशि भूषण लाल सुशील ने कहा कि “यूपी डिड इट”, यानी उत्तर प्रदेश ने कर दिखाया। उन्होंने कहा कि यूपीआईटीएस में प्रदेश के कारीगरों को केवल उत्पादों की बिक्री का अवसर नहीं मिला, बल्कि देश-विदेश से आए खरीदारों से ग्राहक प्रतिक्रिया और बाजार का अनुभव भी मिला। इससे उन्हें डिजाइन और उत्पाद विकास को ग्राहक-केंद्रित बनाने तथा भविष्य में स्थानीय बाजार से आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात करने में मदद मिलेगी। आयोजन में युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया गया। उन्हें स्वरोजगार योजनाओं के साथ मशीनों के उपयोग और व्यवसाय संचालन की जानकारी दी गई। तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने उद्यमियों को उद्योग विस्तार तथा निर्यातकों को नए देशों और नए उत्पादों के निर्यात की संभावनाओं से अवगत कराया। संबंधित विभागों के मंत्रियों ने भी इन सत्रों में समय देकर प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। ओडीओसी से सामने आई यूपी की समृद्ध पाक विरासत प्रमुख सचिव ने कहा कि यूपीआईटीएस ने उत्तर प्रदेश को स्वयं को जानने और देश-दुनिया को उत्तर प्रदेश को जानने का अवसर दिया। एक जनपद-एक व्यंजन (ओडीओसी) के माध्यम से ऐसे पारंपरिक व्यंजन सामने आए, जिनके बारे में अनेक लोग पहली बार जान पाए। इससे प्रदेश की सदियों पुरानी पाक एवं सांस्कृतिक विरासत को देश-विदेश के खरीदारों और प्रतिनिधिमंडलों तक पहुंचाने का अवसर मिला। एआई पर व्यावहारिक प्रयोग एआई पर अपने विचार रखते हुए प्रमुख सचिव ने कहा कि मानव ने पहले शारीरिक श्रम और फिर कई अन्य कार्य मशीनों को सौंपे और अब सोचने की प्रक्रिया भी एआई को सौंपने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। उन्होंने इसके संतुलित उपयोग की आवश्यकता बताते हुए जानकारी दी कि उन्होंने सीएम युवा योजना के तहत मुजफ्फरनगर और बदायूं के तीन युवा उद्यमियों को एआई आधारित बिक्री सेवा से जोड़कर इसका व्यावहारिक परीक्षण शुरू कराया है। इससे पता चलेगा कि एआई उनकी बिक्री और कारोबार को बढ़ाने में कितनी मदद करता है। यूपीआईटीएस ने उद्यमियों को वैश्विक बाजार से जोड़ा कमिश्नर उद्योग के. विजयेंद्र पांडियन ने कहा कि यूपीआईटीएस के चार संस्करणों ने उत्तर प्रदेश की औद्योगिक, कारोबारी और निर्यात क्षमता को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करने के साथ प्रदेश के उद्यमियों और कारीगरों को नए बाजारों से जोड़ने का काम किया है। इस आयोजन के माध्यम से उत्पादों की बिक्री के साथ उद्यमियों को ग्राहकों की पसंद, बाजार की मांग और उत्पादों में आवश्यक बदलाव की जानकारी भी मिली, जिससे वे अपने उत्पादों की गुणवत्ता, डिजाइन और पैकेजिंग में सुधार कर सकेंगे। यूपीआईटीएस में युवाओं और नए उद्यमियों को स्वरोजगार, उद्योग संचालन और तकनीक के माध्यम से कारोबार विस्तार की जानकारी मिली। तकनीकी सत्रों और विशेषज्ञों के संवाद से निर्यात एवं कारोबार बढ़ाने के नए अवसरों पर भी चर्चा हुई। उन्होंने ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से प्रदेश के पारंपरिक खान-पान और स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार से जोड़ने का प्रयास किया गया। यूपीआईटीएस केवल व्यापारिक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि प्रदेश के उत्पादों, उद्यमिता, कौशल और नवाचार को वैश्विक बाजार से जोड़ने वाला मंच बन चुका है। सीएम योगी ने लगातार की समीक्षा बैठकें: राकेश कुमार इंडिया एक्सपो मार्ट लिमिटेड (आईईएमएल) के चेयरमैन राकेश कुमार ने कहा कि उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो अब प्रदेश के उद्यमियों, निर्यातकों, कारीगरों और बुनकरों को देश-दुनिया के खरीदारों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। यूपीआईटीएस के चौथे संस्करण की सफलता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निरंतर दिशा-निर्देशन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मुख्यमंत्री ने आयोजन की तैयारियों को लेकर लगातार समीक्षा बैठकें कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति तथा प्रदेश के मंत्रियों भूपेंद्र चौधरी, नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ और राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधियों के सहयोग की भी सराहना की। राकेश कुमार ने कहा कि उत्तर प्रदेश की वस्त्र एवं हस्तशिल्प परंपरा प्रदेश की पहचान और लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ी है। एक जनपद-एक उत्पाद योजना ने स्थानीय उत्पादों को नई पहचान और बाजार उपलब्ध कराया है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के नेतृत्व में वस्त्र क्षेत्र में हो रहे प्रयासों तथा ‘भारत टेक्स’ जैसे आयोजनों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के ‘फार्म टू फाइबर, फाइबर टू फैक्ट्री, फैक्ट्री टू फैशन और फैशन टू फॉरेन’ के विजन के अनुरूप भारत का वस्त्र उद्योग उत्पादन से निर्यात तक पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यूपीआईटीएस उत्तर प्रदेश की औद्योगिक, हस्तशिल्प और उद्यमिता क्षमता को वैश्विक बाजार से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन रहा है।

9 साल की देरी के बाद बारापुला फेज-3 तैयार, अमित शाह ने किया उद्घाटन

नई दिल्ली केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज बारापुला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर का उद्घाटन कर दिया है. ये कॉरिडोर पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार फेज-1 को सराय काले खां से जोड़ेगा, जिससे AIIMS और दक्षिणी दिल्ली की तरफ जाना आसान होगा. इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा फायदा नोएडा और पूर्वी दिल्ली से दक्षिणी दिल्ली की तरफ जाने वाले लोगों को होगा. मंगलवार को अमित शाह ने इस कॉरिडोर को हरी झंडी दिखाई, इस दौरान उनके साथ दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी मौजूद रहीं. उद्घाटन पर बात करते हुए रेखा गुप्ता ने बताया कि इस प्रोजेक्ट को 2014 में मंजूरी मिली थी और योजना मयूर विहार से सराय काले खां तक करीब 11 किलोमीटर का एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की थी. रेखा गुप्ता ने कहा कि 2025 तक दिल्ली में सत्ता में रही सरकार इस काम को इतने सालों में पूरा नहीं कर सकी. रेखा गुप्ता के मुताबिक जब उन्होंने PWD मंत्री प्रवेश वर्मा के साथ मौके का निरीक्षण किया तो स्थिति ऐसी थी कि पुल एक जगह से शुरू होता था, फिर दूसरी जगह से दोबारा शुरू हो जाता था और बीच का बड़ा हिस्सा अधूरा पड़ा था. 9 साल की देरी, लागत भी बढ़ी 2014 में मंजूरी मिलने के बाद 2015 में बारापुला फेज-3 कॉरिडोर का निर्माण शुरू हो गया था. इसे 2017 तक पूरा किया जाना था, लेकिन कई अड़चनों के चलते काम लंबा खिंचता गया. अब करीब 1,635 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट का काम पूरा हो चुका है. साइकिल और पैदल चलने वालों के लिए भी राहत कॉरिडोर में साइकिल चलाने वालों के लिए अलग ट्रैक बनाया गया है. पैदल चलने वालों के लिए भी एक लेन बनाई गई है जहां लोग मॉर्निंग वॉक कर सकेंगे. यमुना के ऊपर बने हिस्से में लंबे स्पैन वाली संरचना का इस्तेमाल किया गया है और शीशे की रेलिंग लगाई गई है, ताकि लोग यमुना की खूबसूरती का लुत्फ उठा सके.

UP में कांग्रेस के सीट दावे पर सपा नेता IP सिंह का हमला, बोले- जनाधार आजमाएं

नई दिल्ली समाजवादी पार्टी के नेता आईपी सिंह ने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के 150 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने के दावे पर तंज कसा है. उन्होंने कहा कि लुटियंस कांग्रेसियों यूपी की 403 सीटों पर चुनाव लड़ो, अगली 5 पुश्तों से अब कभी कोई तथाकथित गांधी PM नहीं बनेगा. 1989 से गांधी परिवार को PM की कुर्सी नसीब नहीं हुई न आगे कई दशकों तक होगी. सिंह यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा कि सभी कांग्रेसी दिल्ली में बैठकर दिन में मुंगेरी लाल के हसीन सपने देखते हैं. राहुल गांधी को राजनीति में आए ढाई दशक बीत गए हैं: सिंह सिंह ने कहा कि लुटियंस कांग्रेस के स्वयंभू रणनीतिकारों से सीधा सवाल है…अगर यूपी में कांग्रेस का इतना ही जनाधार है, तो 403/403 सीटों पर अकेले चुनाव लड़कर अपनी ताकत क्यों नहीं आजमाते? कब तक गठबंधन की बैसाखियों और राजनीतिक इवेंटबाजी के सहारे जनता को भ्रमित करने की कोशिश होती रहेगी? राहुल गांधी को राजनीति में आए ढाई दशक बीत गए. पीढ़ियां बदल गईं, लेकिन कांग्रेस आज भी वही सवालों के घेरे में खड़ी है. आखिर हासिल क्या हुआ? जनता के बीच संगठन कितना मजबूत हुआ? कार्यकर्ताओं को जमीन पर कितनी ताकत मिली? सिर्फ कैमरे, मंच और बड़े-बड़े बयान राजनीति में जनाधार नहीं बनाते. जनाधार सड़क पर संघर्ष, बूथ पर संगठन और जनता के बीच लगातार मौजूदगी से बनता है. और रही कांग्रेस-भाजपा के कथित ‘पैक्ट’ की बात—तो यह आरोप नहीं, जनता के सामने उठ रहा एक राजनीतिक सवाल है. कांग्रेस स्पष्ट  करे अपनी राजनीति: सिंह कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि उसकी राजनीति वास्तव में किसके लिए और किस दिशा में है. सपा मध्य प्रदेश में 120 सीटों पर अगला विधानसभा चुनाव लड़ेगी, जिसके लिए कैंडिडेट का चयन शुरू हो चुका है. अंततः फैसला मंच नहीं, जनता की अदालत करती है. विनाश काले विपरीत बुद्धि. आपको बता दें कि 2024 का लोकसभा चुनाव कांग्रेस और सपा ने मिलकर लड़ा था. ऐसे में यह  गठबंधन उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी जारी रहने की उम्मीद है. हालांकि, दोनों ही पार्टियों में कुछ सीटों को लेकर खींचतान देखने को मिल रही है. वहीं आईपी सिंह के बयान से सपा-कांग्रेस के साथ चुनाव लड़ने पर घमासान मच सकता है. जबकि अखिलेश यादव पहले ही अपनी पार्टी के नेताओं को कांग्रेस के खिलाफ इस तरह की बयान बाजी न करने की हिदायत दे चुके हैं. 

मेगन शुट्ट का 8 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा, श्री चरणी ने रचा इतिहास

नई दिल्ली इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने मंगलवार को महिला खिलाड़ियों की ताजा रैंकिंग जारी की है। भारत की श्री चरणी ने महिला T20I बॉलिंग रैंकिंग में 817 रेटिंग तक पहुंचकर इतिहास पलट दिया है। वह इस फॉर्मेट में सबसे ज्यादा रेटिंग हासिल करने वाली गेंदबाज बन गई हैं। 22 वर्षीय स्पिनर चरणी ने ऑस्ट्रेलिया की मेगन शुट्ट का 8 आठ साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा है। मेगन ने 2018 में 806 रेटिंग पॉइंट्स हासिल किए थे। चरणी ने हाल ही में टीम को आठवीं बार महिला एशिया कप का खिताब जिताने और एशियन गेम्स 2026 में गोल्ड मेडल दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने एशिया कप में 12 विकेट चटकाए। उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ फाइनल में 20 रन देकर चार शिकार किए थे। उन्होंने एशियन गेम्स में जापान के खिलाफ अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 10 रन खर्च करने के बाद चार विकेट झटके थे और भारत को सेमीफाइनल में पहुंचाया। चरणी ने 22 सितंबर को गोल्ड मेडल मैच में श्रीलंका के खिलाफ दो विकेट लिए। स्मृति मंधाना की टॉप 5 में एंट्री दीप्ति शर्मा ने श्रीलंका के खिलाफ फानल में तीन विकेट चटकाए थे। वह T20I बॉलिंग रैंकिंग में दूसरे पायदान पर कायम हैं। हालांकि, उनके 754 पॉइंट्स हो गए हैं। इंग्लैंड की सोफी एक्लेस्टोन (723) तीसरे स्थान पर हैं। वहीं, T20I बल्लेबाजों की सूची में स्मृति मंधाना टॉप 5 में वापस आ गई हैं। वह 754 अकों के साथ पांचवें नंबर पर हैं। बाएं हाथ की ओपनर ने गोल्ड मेडल मैच में 45 गेंदों में 79 रन बनाए थे, जिसमें पांच चौके और सात छक्के हैं। मंधाना की सलामी जोड़ीदार शेफाली वर्मा (शेफाली वर्मा) चौथे नंबर पर बरकरार हैं। उन्होंने फाइनल में 29 गेंदों में 48 रनों का योगदान दिया था। ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज बेथ मूनी (785) शीर्ष पर काबिज हैं। उनके बाद ऑस्ट्रेलिया की जॉर्जिया वोल (779) और साउथ अफ्रीका की लॉरा वोल्वार्ड्ट (766) हैं। महिला T20I गेंदबाजों की रैंकिंग में सबसे ज्यादा रेटिंग प्लेयर                    देश                     रेटिंग श्री चरणी                 भारत                  817 मेगन शुट्ट              ऑस्ट्रेलिया           806 सोफी एक्लेस्टोन      इंग्लैंड                  802 शबनीम इस्माइल    साउथ अफ्रीका        781 शेली नित्शके            ऑस्ट्रेलिया           780 महिला वनडे रैंकिंग में भी हुए बदलाव तीन मैचों की सीरीज अभी 1-1 से बराबरी पर है। वेस्टइंडीज की कप्तान हेली मैथ्यूज 711 पॉइंट्स के साथ वनडे बल्लेबाजों की रैंकिंग में तीन पायदान चढ़कर चौथे स्थान पर पहुंच गईं। उन्होंने पहले वनडे में 182 रनों की रिकॉर्ड पारी खेली थी। उनकी टीम की साथी रियालेना ग्रिमंड (270 पॉइंट्स) 34 स्थान ऊपर संयुक्त रूप से 102वें स्थान पर आ गईं। सीरीज के दूसरे मैच में वेस्टइंडीज के खिलाफ़ शानदार जीत दिलाने में जिम्बाब्वे की न्याशा ग्वांजुरा वनडे महिला बॉलिंग रैंकिंग में 52 स्थान चढ़कर 156वें ​​स्थान पर पहुंच गईं। उन्होंने नाबाद 18 रन बनाए और करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 33 रन देकर 4 विकेट लिए। जिम्बाब्वे की मोडेस्टर मुपाचिकवा ने बैटिंग रैंकिंग में बड़ी छलांग लगाई। वह 86 और 38 रन की पारी के बाद बनाने के बाद 16 स्थान ऊपर करियर के सर्वश्रेष्ठ 40वें स्थान पर पहुंच गईं। फ्रांसिस्का चिपारे 26 स्थान ऊपर चढ़कर संयुक्त रूप से 123वें स्थान पर आईं। वेस्ट इंडीज की अश्विनी मुनिसार (23 स्थान ऊपर संयुक्त रूप से 84वें पर) और आलिया एलेन (8 स्थान ऊपर चढ़कर 58वें पर) ने भी सुधार किया।

निवेशकों ने मत्स्य पालन, फीड मिल, कोल्ड चेन, हैचरी, बीज उत्पादन तथा वैल्यू एडिशन व निर्यात के क्षेत्र में दिखाई रुचि

नोएडा उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (आईटीएस-2026) में मत्स्य विभाग को 600.20 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। इन प्रस्तावों में कोल्ड चेन क्षेत्र में सर्वाधिक 509.20 करोड़, फीड मिल क्षेत्र में 51 करोड़, मत्स्य पालन क्षेत्र में 13.80 करोड़, हैचरी एवं बीज उत्पादन क्षेत्र में 6.20 करोड़ तथा वैल्यू एडिशन एवं निर्यात के क्षेत्र में 20 करोड़ के निवेश प्रस्ताव शामिल हैं। फिश व्हाइट, बीवीजी इंडिया समेत कई निवेशकों ने दिखाई रुचि इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 में फिश व्हाइट, बीवीजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, बेंगलुरु तथा पीवीआर एक्वा, व्हाइट फिश वाराणसी सहित विभिन्न प्रमुख निवेशकों एवं उद्यमियों द्वारा निवेश प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए। निवेशकों ने उत्तर प्रदेश में मत्स्य उत्पादन, गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज की उपलब्धता, आधुनिक हैचरी, फीड उत्पादन, शीत श्रृंखला तथा मूल्य संवर्धित मत्स्य उत्पादों के क्षेत्र में कार्य करने में रुचि व्यक्त की। मत्स्य क्षेत्र में निवेश के लिए उपलब्ध हैं अनेक अवसर मत्स्य विभाग की महानिदेशक धनलक्ष्मी के. ने बताया कि विभाग द्वारा निवेशकों को प्रदेश में मत्स्य क्षेत्र के विकास के लिए उपलब्ध निवेश अवसरों, विभागीय योजनाओं तथा परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं के संबंध में जानकारी उपलब्ध कराई गई। विभाग का उद्देश्य निजी निवेश के माध्यम से मत्स्य उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि, गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करना, आधुनिक मत्स्य अवसंरचना का विकास करना तथा मत्स्य उत्पादों के मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण एवं विपणन को प्रोत्साहित करना है। उद्यमियों के लिए सशक्त मंच बना यूपीआईटीएस उन्होंने बताया कि ट्रेड शो में मत्स्य विभाग की ओर से लगाई गई प्रदर्शनी/ स्टॉल निवेशकों, उद्यमियों, विद्यार्थियों एवं मत्स्य पालकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। प्रदर्शनी के माध्यम से प्रदेश में मत्स्य पालन तथा इससे जुड़े सहायक क्षेत्रों में उपलब्ध निवेश संभावनाओं, आधुनिक तकनीकों, उत्पादन, प्रसंस्करण, शीत श्रृंखला, हैचरी एवं गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज उत्पादन तथा मूल्य संवर्धन के अवसरों की जानकारी प्रदान की गई। निवेश की संभावनाओं पर हुई विस्तृत चर्चा ट्रेड शो के दौरान विभिन्न निवेशकों एवं उद्यमियों ने मत्स्य विभाग के अधिकारियों से संवाद कर प्रदेश में मत्स्य क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की। इस दौरान निवेशकों द्वारा प्रस्तावित परियोजनाओं, संभावित निवेश, तकनीकी आवश्यकताओं तथा परियोजनाओं के संभावित क्षेत्रों के संबंध में जानकारी साझा की गई। इन चर्चाओं के परिणामस्वरूप मत्स्य क्षेत्र के विभिन्न उप-क्षेत्रों में कुल 600.20 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।

धालभूमगढ़ एयरपोर्ट का बढ़ा दायरा, 540 एकड़ में बनेगा नया एयरपोर्ट

 रांची कोल्हान की बहुप्रतीक्षित धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना को फिर से रफ्तार मिली है। झारखंड नागर विमानन विभाग ने परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई), वन विभाग और केंद्र सरकार के साथ समन्वय तेज कर दिया है। राज्य स्तर पर भूमि, वन एवं पर्यावरण से जुड़े मामलों के निपटारे के साथ केंद्र से मिलने वाली स्वीकृतियों की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी क्रम में धालभूमगढ़ में करीब 540 एकड़ भूमि पर एयरपोर्ट विकसित करने का प्रस्ताव तैयार कर केंद्र को भेजा गया है। पहले करीब 240 एकड़ क्षेत्र में एयरपोर्ट विकसित करने की योजना थी। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए अब प्रस्तावित क्षेत्र को बढ़ाकर 540 एकड़ किया गया है। नागर विमानन विभाग की ओर से एएआई के साथ लगातार समन्वय कर परियोजना की तकनीकी और प्रशासनिक जरूरतों को पूरा करने की दिशा में काम किया जा रहा है। एएआई की टीम और रांची एटीसी के अधिकारियों ने प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण भी किया है। 19 बिंदुओं के जवाब भेजे, केंद्र की मंजूरी का इंतजार परियोजना में वन भूमि और हाथी गलियारे से जुड़े मुद्दे सबसे महत्वपूर्ण हैं। राज्य सरकार की ओर से केंद्र सरकार के 19 बिंदुओं पर मांगी गई जानकारी का जवाब भेजा गया है। वन और गैर-वन भूमि का सीमांकन पूरा करने के साथ संबंधित एनओसी भी भेजी गई है। अब केंद्र स्तर से मिलने वाली आवश्यक स्वीकृतियों पर परियोजना की अगली गति निर्भर करेगी। नागर विमानन विभाग इस पूरी प्रक्रिया में राज्य का नोडल विभाग है। विभाग एएआई के साथ एयरपोर्ट की तकनीकी आवश्यकताओं, भूमि उपलब्धता, आधारभूत संरचना और विभिन्न विभागों से मिलने वाली मंजूरियों के बीच समन्वय कर रहा है। विभाग की कोशिश है कि अलग-अलग स्तर पर लंबित प्रक्रियाओं को एक साथ आगे बढ़ाया जाए। एलीफेंट कॉरिडोर का फिर होगा सर्वे धालभूमगढ़ क्षेत्र में एलीफेंट कॉरिडोर होने के कारण पर्यावरणीय पहलू भी महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार ने हाथियों के प्राकृतिक आवागमन को ध्यान में रखते हुए कॉरिडोर का नए सिरे से सर्वे कराने की दिशा में पहल की है। एयरपोर्ट निर्माण की योजना में वन एवं वन्यजीव संबंधी केंद्रीय मानकों का पालन करना होगा। साहिबगंज में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की तैयारी धालभूमगढ़ के साथ राज्य सरकार साहिबगंज में भी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। नागर विमानन विभाग इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर रहा है। साहिबगंज में एयरपोर्ट बनने से संथाल परगना को हवाई संपर्क मिलने की संभावना बढ़ेगी। उड़ान योजना में कई शहर केंद्र की संशोधित उड़ान योजना में झारखंड के कई शहरों को हवाई नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। धालभूमगढ़, दुमका, हजारीबाग, डालटनगंज और चाईबासा को लेकर विकास और कनेक्टिविटी की योजनाओं पर काम चल रहा है। इसके अलावा बोकारो, देवघर और जमशेदपुर को भी क्षेत्रीय हवाई संपर्क से जोड़ने की दिशा में अलग-अलग स्तर पर काम हुआ है। इनमें कुछ स्थानों पर एयरपोर्ट/हवाई पट्टी का विकास पूरा हो चुका है, जबकि कुछ जगहों पर भूमि, साइट और परिचालन से जुड़ी प्रक्रियाएं चल रही हैं। संशोधित उड़ान योजना के तहत केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक 28,840 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान किया है। इसके तहत देशभर में 100 नए एयरपोर्ट विकसित करने की योजना है। धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना को लेकर राज्य सरकार की ओर से सभी संबंधित विभागों के साथ समन्वय किया जा रहा है। एएआई के साथ भी लगातार बातचीत हो रही है। भूमि, वन एवं पर्यावरण से जुड़े विषयों पर प्रक्रिया आगे बढ़ी है। केंद्र से आवश्यक स्वीकृति मिलने के बाद परियोजना के अगले चरण पर काम किया जाएगा। कैप्टन एसपी सिन्हा, निदेशक (परिचालन), नागर विमानन विभाग, झारखंड

बिहार की 4 और यूपी की 6 MLC सीटों पर BJP ने उतारे प्रत्याशी

नई दिल्ली बीजेपी ने 2026 में होने वाले विधान परिषद चुनाव के लिए बिहार और उत्तर प्रदेश की ग्रेजुएट और शिक्षक सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है. पार्टी ने बिहार की 4 और उत्तर प्रदेश की 6 सीटों के लिए प्रत्याशियों की लिस्ट जारी की है. इस लिस्ट में वाराणसी स्नातक सीट से केदार नाथ सिंह और पटना शिक्षक सीट से नवल किशोर यादव को टिकट दिया गया है. दरअसल, बिहार की चार और उत्तर प्रदेश की छह सीटों पर विधान परिषद यानी एमएलसी चुनाव होने हैं. बिहार की चार सीटों में पटना शिक्षक सीट से नवल किशोर यादव को उम्मीदवार बनाया गया है. वहीं कोसी स्नातक सीट से डॉ. एनके यादव, दरभंगा स्नातक सीट से सर्वेश कुमार और तिरहुत शिक्षक सीट से नरेंद्र प्रसाद सिंह को टिकट दिया गया है. बिहार की चार सीटों पर उम्मीदवार पटना शिक्षक सीट से नवल किशोर यादव, कोसी स्नातक से डॉ. एनके यादव, दरभंगा स्नातक से सर्वेश कुमार और तिरहुत शिक्षक सीट से नरेंद्र प्रसाद सिंह बीजेपी के उम्मीदवार होंगे. उत्तर प्रदेश की छह सीटों पर प्रत्याशी उत्तर प्रदेश की छह सीटों में वाराणसी स्नातक से केदार नाथ सिंह, मेरठ स्नातक से दिनेश गोयल, इलाहाबाद-झांसी स्नातक से अशोक कुमार राठौर को उम्मीदवार बनाया गया है. वहीं वाराणसी शिक्षक सीट से डॉ. प्रमोद मिश्रा, आगरा शिक्षक सीट से इंजीनियर हरि किशोर तिवारी और गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट से ध्रुव त्रिपाठी को टिकट दिया गया है. बिहार विधान परिषद चुनाव 2026 पटना शिक्षक – नवल किशोर यादव कोसी स्नातक – डॉ. एन.के. यादव दरभंगा स्नातक – सर्वेश कुमार तिरहुत शिक्षक – नरेंद्र प्रसाद सिंह उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव 2026 वाराणसी स्नातक – केदार नाथ सिंह मेरठ स्नातक – दिनेश गोयल इलाहाबाद-झांसी स्नातक – अशोक कुमार राठौर वाराणसी शिक्षक – डॉ. प्रमोद मिश्रा आगरा शिक्षक – इंजीनियर हरि किशोर तिवारी गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक – ध्रुव त्रिपाठी

अब WhatsApp पर आएगा ई-चालान, QR कोड से घर बैठे भर सकेंगे जुर्माना

शामली ई-चालान एप्लीकेशन के नए वर्जन नेक्स्ट जेन 2.0 में हेलमेट नहीं लगाने पर पीछे बैठी सवारी का चालान काटने के साथ ही कई विकल्प जोड़े गए हैं। अब वाहन स्वामी को चालान भरने के लिए किसी कार्यालय नहीं जाना होगा। वाहन स्वामी के वाट्सएप नंबर पर चालान के साथ ही क्यूआर कोड भी भेजा जाएगा। इस पर जुर्माना राशि का भुगतान किया जा सकेगा। ई-चालान एप्लीकेशन अपडेशन के चलते प्रदेश में तीन दिन तक एक भी वाहन का ई-चालान नहीं काटा जा सका। सोमवार शाम से एप्लीकेशन का नया वर्जन चार दिन के ट्रायल के साथ शुरू हो गया है। शुक्रवार सुबह से ही ई-चालान एप्लीकेशन बंद हो गई थी। आमतौर पर मेरठ और आसपास के जिलों में यातायात पुलिस और थानों की पुलिस रोजाना औसतन करीब 500 वाहनों के चालान काटकर कार्रवाई करती थी, लेकिन पिछले तीन दिनों से एप्लीकेशन न चलने के कारण चालान प्रक्रिया पूरी तरह शून्य पर आ टिकी है। बिजनौर के एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई ने बताया कि नेक्स्ट जेन 2.0 एप का नया वर्जन अपलोड किया गया है। अभी तक आनलाइन माध्यम से होने वाले चालान पुराने साफ्टवेयर पर आधारित थे। अब सरकार ने उसे अपडेट करके नेक्स्ट जेन 2.0 के नाम से लांच किया है। मेरठ के एसपी ट्रैफिक राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि नए अपडेट वर्जन का सोमवार शाम से चार दिन का ट्रायल शुरू हो गया है। इसके बाद इसे लागू कर दिया जाएगा। इसमें चालान के साथ ही वाहन स्वामी के वाट्सएप नंबर पर क्यूआर कोड भी आएगा। क्यूआर कोड के माध्यम से चालान राशि जमा की जा सकेगी। वाहन स्वामी को किसी भी कार्यालय के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं होगी। पहली एप्लीकेशन में पीछे बैठी बिना हेलमेट की सवारी का चालान काटने का विकल्प नहीं था। नए वर्जन में यह विकल्प जोड़ दिया गया है। इसके साथ ही शराब पीकर गाड़ी चलाने और माडिफाई साइलेंसर का चालान काटने का भी नया विकल्प शामिल किया गया है। मेरठ में सोमवार को 80 चालान काटे गए, जिनमें आठ हेलमेट न लगाने पर पीछे बैठी सवारियों के शामिल हैं।  

पंचायत चुनाव से पहले राजस्थान में बड़ा स्वास्थ्य प्लान, 600 नए सब-सेन्टर खुलेंगे

जयपुर राजस्थान के राजनीतिक गलियारों में जहां एक तरफ आगामी पंचायती राज चुनावों को लेकर सियासी पारा चढ़ने लगा है, वहीं दूसरी तरफ भजनलाल सरकार ने ग्रामीण अंचलों की सूरत बदलने के लिए एक बड़ी प्रशासनिक कवायद शुरू कर दी है। राज्य के गांवों और दूरदराज की ढाणियों में रहने वाले आम नागरिकों को अब छोटी-मोटी बीमारी या प्राथमिक जांच के लिए मीलों दूर कस्बों या जिला अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। भारत सरकार के सहयोग से राजस्थान सरकार प्रदेश के हर 10 किलोमीटर के दायरे में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं सुलभ कराने जा रही है जिसके तहत अब ग्रामीण इलाकों में 600 नए सब-सेन्टर (छोटे स्वास्थ्य केंद्र) स्थापित किए जा रहे हैं। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने सोमवार को जयपुर स्थित स्वास्थ्य भवन में प्रदेश के सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (CMHO) की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक ली। इस बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, मानव संसाधन के प्रभावी प्रबंधन, दवा व जांच सुविधाओं के साथ-साथ मौसमी बीमारियों की रोकथाम पर विस्तार से चर्चा की गई। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस कदम को रणनीतिक रूप से देखा जा रहा है। ग्रामीण मतदाताओं और जमीनी स्तर के आम आदमी को सीधे तौर पर प्रभावित करने वाले स्वास्थ्य सेक्टर में यह कवायद ऐसे समय पर तेज हुई है जब राज्य में पंचायत चुनावों की सुगबुगाहट जोरों पर है। सरकार यह संदेश देने की पूरी कोशिश में है कि ग्रामीण विकास के साथ-साथ बुनियादी चिकित्सा ढांचे को मजबूत करना उसकी प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर है, ताकि चुनाव से ठीक पहले हर गांव तक गवर्नेंस और राहत का सीधा असर पहुंच सके। 50 हजार नई नियुक्तियों के बाद अब ग्राउंड पर एक्शन सरकार का यह फैसला केवल कागजी घोषणा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक मजबूत प्रशासनिक तैयारी नजर आ रही है। हाल ही में स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न संवर्गों में लगभग 50 हजार पदों पर नई नियुक्तियां दी जा चुकी हैं। अब सरकार का पूरा फोकस इस बात पर है कि इन तमाम डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और मेडिकल प्रोफेशनल्स को सही जगह पर तैनात किया जाए। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने हाल ही में बुलाई गई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में साफ निर्देश दिए हैं कि मानव संसाधन का उपयोग केवल कागजी पदों के आधार पर नहीं, बल्कि उस इलाके की वास्तविक जरूरत, भौगोलिक स्थिति और मरीजों के भार को देखकर किया जाना चाहिए। इस नई व्यवस्था के तहत सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले हर नागरिक को बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए ज्यादा दूर न भटकना पड़े। 600 नए सब-सेन्टर: भारत सरकार के सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में नए सब-सेन्टर खोले जाएंगे, जिन्हें एक तरह से स्थानीय स्तर पर छोटे अस्पतालों के रूप में विकसित किया जाएगा। विशेष जरूरत वाले केंद्र: ट्रोमा सेंटर, प्रसव की सुविधा वाले स्वास्थ्य केंद्र और दूरदराज के ग्रामीण अस्पतालों में विशेष तौर पर प्रशिक्षित स्टाफ की तैनाती अनिवार्य की जाएगी। सुरक्षा और पारदर्शिता: चिकित्सा संस्थानों के भवनों की सुरक्षा और जवाबदेही तय करने के साथ-साथ आगामी तीन महीनों में सभी अस्पतालों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जमीनी स्तर पर कामकाज की नियमित मॉनिटरिंग हो सके। क्या होते हैं सब-सेंटर्स सामान्य बोलचाल की भाषा में 'सब-सेन्टर' को ग्रामीण स्तर का छोटा अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र ही माना जाता है। सब-सेन्टर स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की सबसे शुरुआती और जमीनी इकाई होती है, जो अमूमन ग्रामीण इलाकों में बस्तियों या गांवों के पास बनाई जाती है। यहाँ डॉक्टर नहीं बल्कि प्रशिक्षित एएनएम (ANM) या स्वास्थ्य कार्यकर्ता बैठते हैं। यहाँ गर्भवती महिलाओं की जांच, टीकाकरण, बच्चों के टीके, सामान्य बीमार जैसी बुनियादी और प्राथमिक चिकित्सा सुविधाएं मुफ्त मिलती हैं। इसलिए, जब हर 10 किलोमीटर पर नए सब-सेन्टर खोलने की बात कही जा रही है, तो इसका सीधा मतलब यही है कि सरकार गांवों के पास छोटे स्वास्थ्य केंद्र (अस्पताल) स्थापित कर रही है ताकि ग्रामीणों को छोटी-मोटी बीमारी या जांच के लिए दूर शहर न जाना पड़े। प्रशासनिक कसावट और भविष्य की तैयारी स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने भी स्पष्ट किया है कि आरयूएचएस के माध्यम से हजारों चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है और दिसंबर में होने वाली नई परीक्षाओं के जरिए महकमे को और मजबूती मिलेगी। इसके अलावा, जिन स्वास्थ्य केंद्रों के नए भवन बनकर तैयार हो चुके हैं, वहां तत्काल प्रभाव से सेवाएं शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि आम जनता को तुरंत फायदा मिल सके। गांवों की चौखट तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने का यह कदम निश्चित रूप से राजस्थान के चिकित्सा ढांचे की तस्वीर बदलने वाला साबित हो रहा है।  

मुख्यमंत्री योगी ने कहा- 140 करोड़ लोग एक स्वर में हुंकार भरेंगे तो दुनिया की कोई ताकत सामने नहीं ठहर सकती

गोरखपुर  मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कहा कि सनातन धर्म की एकता में ही हमारी सुरक्षा और मजबूती है। पंथ और संप्रदाय की उपासना पद्धति अलग हो सकती है, लेकिन सभी का कल्याण वृहद सनातन धर्म की मजबूती में है। 140 करोड़ लोग एक स्वर में हुंकार भरेंगे तो दुनिया की कोई ताकत सामने नहीं ठहर सकती। अलग-अलग गति प्रगति नहीं, दुर्गति और अलग-अलग स्वर ताकत नहीं, पराजय का कारण बनेंगे।   मुख्यमंत्री योगी गोरखनाथ मंदिर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि पर आयोजित सप्त दिवसीय समारोह के तहत व्याख्यान को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दोनों आचार्यों को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके योगदान को याद किया।   रामभक्तों को पहचानना होगा कालनेमि मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अयोध्या में भगवान राम और सनातन का वैभव जिन्हें बर्दाश्त नहीं है, वे दुष्प्रचार और भ्रम पैदा करेंगे। जिस तरह संजीवनी बूटी लेने जाते समय हनुमान जी ने कालनेमि को पहचान लिया था, उसी तरह रामभक्तों को भी भ्रम फैलाने वालों को पहचानना होगा।   उन्होंने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ भारत की आजादी को केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं मानते थे। संपूर्ण स्वाधीनता के लिए सांस्कृतिक स्वतंत्रता भी जरूरी थी। उनका मानना था कि सोमनाथ मंदिर की पुनर्प्राण प्रतिष्ठा हो सकती है तो अयोध्या में भी यह कार्य होना चाहिए   मुख्यमंत्री ने कहा कि 1949 में रामलला के प्रकटीकरण के समय महंत दिग्विजयनाथ, बाबा अभिराम दास और महंत रामचंद्र दास परमहंस सक्रिय थे। इसकी रणनीति देवीपाटन में महंत दिग्विजयनाथ, महाराजा बलरामपुर और तत्कालीन गोंडा जिलाधिकारी केके नायर के बीच बनी थी। आज 500 वर्षों बाद अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर सनातन धर्मावलंबियों को गौरव की अनुभूति करा रहा है।   मोदी के नेतृत्व में दिख रहा सनातन का वैभव मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि और विंध्यवासिनी धाम का भव्य स्वरूप सामने है। प्रयागराज महाकुंभ ने दुनिया के सामने सनातन परंपरा का सामर्थ्य रखा है। उन्होंने वृंदावन के वैष्णव कुंभ का भी उल्लेख किया।   उन्होंने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ ने बिखरे नाथ संप्रदाय को अखिल भारतीय भेष बारह पंथ योगी महासभा के रूप में एकजुट किया। अपनी परंपरा का पालन करते हुए वृहद सनातन धर्म की एकता को मजबूत करना होगा।   दोनों आचार्यों ने रखी भविष्य की मजबूत नींव मुख्यमंत्री योगी ने युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और अपने पूज्य गुरुदेव राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ को नमन करते हुए कहा कि दोनों आचार्यों ने जिन विषयों के लिए जीवन समर्पित किया, उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। महापुरुषों के दूरदर्शी कार्य भविष्य की मजबूत नींव तैयार करते हैं। गोरक्षपीठ और महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद दोनों आचार्यों के आदर्शों को आगे बढ़ा रहे हैं।   गुलामी के दौर में रखी शिक्षा की नींव मुख्यमंत्री ने कहा कि देश गुलाम था और संसाधनों का अभाव था, तब महंत दिग्विजयनाथ ने 1932 में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की। महाराणा प्रताप को आदर्श बनाने के पीछे स्वदेश, स्वाभिमान और स्वधर्म का भाव था।   उन्होंने कहा कि गोरखपुर विश्वविद्यालय की स्थापना में भी महंत दिग्विजयनाथ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विश्वविद्यालय के लिए मठ की संपत्ति और दो संस्थाएं सरकार को देने में उन्होंने श्रेय की चिंता नहीं की। आज महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के अंतर्गत 50 से 55 संस्थाएं संचालित हैं। इनमें विश्वविद्यालय, मेडिकल कॉलेज, आयुर्वेद कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, पॉलिटेक्निक, विद्यालय, अस्पताल और कृषि विज्ञान केंद्र शामिल हैं   मुख्यमंत्री ने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ ने उस दौर में बालिका शिक्षा के लिए विद्यालय और महाविद्यालय स्थापित किए। गोरखपुर में फर्टिलाइजर कारखाने और बीआरडी मेडिकल कॉलेज की स्थापना के प्रयासों को आगे बढ़ाने में भी उनकी भूमिका रही।   गोरक्षपीठ में जाति-पंथ का भेदभाव नहीं मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि गोरक्षपीठ नाथ परंपरा की पीठ होते हुए भी पूरे सनातन धर्म के लिए समर्पित है। यहां जाति, पंथ या संप्रदाय के आधार पर भेदभाव नहीं होता। सभी जातियों के लोग एक पंक्ति में अन्न ग्रहण करते हैं और सभी आचार्यों व संतों को समान सम्मान मिलता है।   वक्ताओं ने भी याद किया योगदान अयोध्या से आए जगद्गुरु स्वामी रामदिनेशाचार्य ने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ ने शिक्षा, स्वास्थ्य और भारतीय परंपरा को आगे बढ़ाया। गोरखनाथ मंदिर आज सामाजिक समरसता का भी केंद्र है। काशी से आए जगद्गुरु रामानंदाचार्य डॉ. रामकमल दास वेदांती ने कहा कि संत की साधना तभी सार्थक है, जब उससे लोककल्याण का मार्ग खुले। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. भूपेश कुमार गोयल ने कहा कि 1932 में बोया गया शिक्षा का बीज आज विशाल स्वरूप ले चुका है।   कार्यक्रम में डॉ. रामनरेश पांडे की पुस्तक श्री हनुमत् कथा पूजनम् का मुख्यमंत्री योगी और संतों ने विमोचन किया।   कार्यक्रम में ये रहे मौजूद कार्यक्रम में जगद्गुरु द्वाराचार्य स्वामी राजेंद्र दास देवाचार्य, महंत बालकनाथ योगी, महंत योगी चेताईनाथ, जगद्गुरु संतोषाचार्य सतुआ बाबा और महंत मिथिलेशनाथ उपस्थित रहे।