samacharsecretary.com

आत्मसमर्पित माओवादियों की वापसी: छत्तीसगढ़ की नीति ने लौटाई उम्मीदें

रायपुर   छत्तीसगढ़ शासन की संवेदनशील और दूरदर्शी नक्सल पुनर्वास नीति ज़मीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव का सशक्त उदाहरण बन रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के स्पष्ट निर्देशों एवं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में सुकमा जिले के नक्सल पुनर्वास केंद्र में आत्मसमर्पित माओवादियों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। आत्मसमर्पण करने वाल 25 युवाओं को रोजगारोन्मुख मेसन (राजमिस्त्री) किट इस क्रम में 75 आत्मसमर्पित नक्सलियों को अत्याधुनिक 5G स्मार्टफोन तथा 25 युवाओं को रोजगारोन्मुख मेसन (राजमिस्त्री) किट वितरित की गई। यह कार्यक्रम कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव एवं पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। 75 आत्मसमर्पित नक्सलियों को अत्याधुनिक 5G स्मार्टफोन कार्यक्रम के दौरान 75 पुनर्वासित युवाओं को सैमसंग गैलेक्सी M06 5G स्मार्टफोन प्रदान किए गए, जिनमें 50 मेगापिक्सल डुअल कैमरा तथा 5000 mAh फास्ट-चार्जिंग बैटरी जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इन स्मार्टफोनों के माध्यम से युवा अब डिजिटल शिक्षा, कौशल विकास कार्यक्रमों, सरकारी योजनाओं तथा देश-दुनिया की जानकारी से सहजता से जुड़ सकेंगे। इसके साथ ही 25 पुनर्वासित युवाओं को मेसन किट प्रदान कर निर्माण क्षेत्र में रोजगार एवं स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित किया गया। यह पहल प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण सहित अन्य विकास कार्यों के लिए कुशल श्रमशक्ति तैयार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आत्मसमर्पण करने वाले लोगों स्वरोजगार के नए अवसरों उपलब्ध कराने संकल्पित जिला प्रशासन ने बताया कि नक्सल पुनर्वास को केवल आर्थिक सहायता तक सीमित न रखते हुए इसे आत्मनिर्भरता, सम्मान और सामाजिक समावेशन से जोड़ा जा रहा है। 5G स्मार्टफोन के माध्यम से पुनर्वासित युवा अब ऑनलाइन प्रशिक्षण, आधुनिक कृषि तकनीकों, छोटे व्यवसायों और स्वरोजगार के नए अवसरों को समझने और अपनाने में सक्षम होंगे। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी लोगों स्वरोजगार के नए अवसरों उपलब्ध कराने सरकार संकल्पित है। पुनर्वासित युवाओं ने साझा किए अनुभव पोलमपल्ली निवासी पुनर्वासित पोड़ियम भीमा ने बताया कि वे लगभग 30 वर्षों तक डीवीसी सदस्य के रूप में संगठन से जुड़े रहे। पुनर्वास के बाद उन्हें बेहतर आवास, भोजन और प्रशिक्षण की सुविधा मिल रही है। उन्होंने बताया कि वे राजमिस्त्री के साथ-साथ इलेक्ट्रीशियन और मैकेनिक का प्रशिक्षण भी प्राप्त कर चुके हैं। पुवर्ती निवासी मुचाकी रनवती ने बताया कि वे 24 वर्षों तक एसीएम सदस्य के रूप में नक्सल संगठन से जुड़ी रहीं। पुनर्वास के बाद उन्होंने सिलाई प्रशिक्षण प्राप्त किया और वर्तमान में राजमिस्त्री प्रशिक्षण ले रही हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें अपने परिजनों से मिलने का अवसर मिला तथा बस्तर ओलंपिक की संभागस्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेकर प्रथम पुरस्कार भी प्राप्त किया। डब्बमरका, सुकमा निवासी गंगा वेट्टी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि जिला प्रशासन द्वारा मोबाइल और मेसन किट मिलने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। उन्होंने कहा कि जंगल के जीवन की तुलना में वर्तमान जीवन सुरक्षित और सम्मानजनक है। शिविर लगाकर उनका आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड एवं जॉब कार्ड बनाया गया तथा शासन की सभी योजनाओं का लाभ उन्हें मिल रहा है। सुकमा में की गई यह पहल इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ शासन की नीति केवल नक्सलवाद से मुकाबले तक सीमित नहीं है, बल्कि भटके हुए युवाओं को विश्वास, अवसर और सम्मान के साथ नया जीवन देने की ठोस कोशिश भी है। यह मॉडल नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति, विकास और सामाजिक समरसता की मजबूत नींव रख रहा है। इस अवसर पर जिले के प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।

यूपी रोडवेज: यात्रियों को अब मिलेगा 7.5 लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा

लखनऊ  यूपी परिवहन निगम द्वारा यात्रियों को सुरक्षित, सुविधाजनक और किफायती यात्रा उपलब्ध कराने के लिए लगातार कई महत्वपूर्ण सुविधाएं दी जा रही हैं। इसके बावजूद जानकारी के अभाव में बड़ी संख्या में लोग रोडवेज बसों के बजाय प्राइवेट वाहनों से यात्रा कर रहे हैं, जिससे वे अनावश्यक रूप से अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। टिकट लेते ही बीमा कवर स्वतः प्राप्त हो जाता है परिवहन निगम के अनुसार, रोडवेज बस का टिकट लेते ही यात्री को साढ़े सात लाख रुपये तक का बीमा कवर स्वतः प्राप्त हो जाता है। किसी भी प्रकार की दुर्घटना की स्थिति में इस बीमा योजना का लाभ यात्रियों या उनके परिजनों को दिया जाता है। वर्तमान में रायबरेली स्थित डिपो में कुल 174 बसें उपलब्ध हैं, जो दिल्ली, लखनऊ, हरिद्वार, अयोध्या, सुलतानपुर, प्रयागराज सहित अन्य प्रमुख रूटों पर प्रतिदिन संचालित की जा रही हैं। इन बसों के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 25 से 28 हजार यात्री यात्रा करते हैं। इसके बावजूद भी हजारों यात्रियों की प्राथमिक पसंद आज भी प्राइवेट वाहन, ई-रिक्शा और अन्य साधन बने हुए हैं, जबकि इन वाहनों में यात्रियों की सुरक्षा की कोई ठोस जिम्मेदारी तय नहीं होती। शिकायत निवारण प्रणाली भी उपलब्ध कराई जाती है रोडवेज बसों में यात्रा करने पर न केवल सुरक्षित सफर मिलता है, बल्कि टिकट के साथ ही बीमा सुविधा भी स्वतः लागू हो जाती है। यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करना परिवहन निगम की पूर्ण जिम्मेदारी होती है। इसके साथ ही आपात स्थिति के लिए हेल्पलाइन, दुर्घटना के समय तत्काल राहत तथा प्रभावी शिकायत निवारण प्रणाली भी उपलब्ध कराई जाती है। क्या कहना है चालकों का? डिपो पर मौजूद चालक-परिचालकों का कहना है कि जागरूकता की कमी के कारण यात्री प्राइवेट वाहनों का चयन कर लेते हैं, जबकि इनमें न तो सुरक्षा की गारंटी होती है और न ही किसी प्रकार का बीमा कवर। कई प्राइवेट वाहन ओवरलोडिंग और अवैध संचालन के कारण दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ा देते हैं। घायल यात्रियों को 25 से 50 हजार तक की सहायता क्षेत्रीय प्रबंधक आर.के. त्रिपाठी ने बताया कि दुर्घटना में घायल यात्रियों को 25 से 50 हजार रुपये तक की सहायता राशि दी जाती है। वहीं, दुर्घटना के बाद 100 प्रतिशत दिव्यांगता होने पर यात्री को साढ़े सात लाख रुपये और मृत्यु की स्थिति में मृतक के परिजनों को भी साढ़े सात लाख रुपये का मुआवजा प्रदान किया जाता है। उन्होंने बताया कि पहले यह राशि पांच लाख रुपये थी, जिसे अब बढ़ाकर साढ़े सात लाख रुपये कर दिया गया है।  

भोपाल-इंदौर-ग्वालियर में ठंड की मार, ट्रेनें और सड़क यातायात कोहरे से लेट

भोपाल   मध्य प्रदेश में कड़ाके की ठंड का कहर जारी है। उत्तर से आ रही बर्फीली हवाओं के कारण प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से काफी नीचे दर्ज किया जा रहा है। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों तक शीतलहर से राहत नहीं मिलने की चेतावनी दी है। साथ ही कई जिलों में घने कोहरे का अलर्ट जारी किया गया है, जिससे विजिबिलिटी मात्र 200 मीटर तक रहने की संभावना है। दिल्ली से मध्यप्रदेश आने वाली ट्रेनें कोहरे की वजह से 30 मिनट से 8 घंटे तक लेट चल रही हैं। गुरुवार को पंजाब मेल, शताब्दी, झेलम, सचखंड, मालवा, छत्तीसगढ़, कोल्हापुर एसएफ, मंगला लक्षद्वीप समेत कई ट्रेनें अपने तय समय से देरी से चल रही हैं। दूसरी ओर आज सुबह भोपाल, ग्वालियर-उज्जैन समेत 12 जिलों में कोहरा छाया रहा। रीवा और सागर में विजिबिलिटी 1 से 2 किलोमीटर दर्ज की गई। भोपाल, गुना, ग्वालियर, इंदौर, राजगढ़, रतलाम, उज्जैन खजुराहो, मंडला में विजिबिलिटी 2 से 4 किमी तक रही। उत्तरी हिस्से के अन्य जिलों में भी कोहरे का असर देखा गया। मौसम विभाग के अनुसार, बुधवार-गुरुवार की रात में कई शहरों में पारे में गिरावट का दौर जारी रहा। इंदौर प्रदेश में सबसे ठंडा रहा। 5 बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में 5.4 डिग्री, इंदौर में 4.5 डिग्री, ग्वालियर में 9.3 डिग्री, उज्जैन में 7.3 डिग्री और जबलपुर में पारा 9.2 डिग्री रहा। अन्य प्रमुख शहरों का तापमान इस प्रकार रहा      ग्वालियर: 9.8 डिग्री     उज्जैन: 8.0 डिग्री     दमोह: 8.5 डिग्री     जबलपुर: 8.6 डिग्री     खजुराहो: 8.2 डिग्री     मंडला: 8.5 डिग्री     नरसिंहपुर: 8.6 डिग्री     रीवा: 7.3 डिग्री     सतना: 8.4 डिग्री मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर भारत की पहाड़ियों पर बर्फबारी से ठंडी हवाएं एमपी पहुंच रही हैं, जिससे शीतलहर का प्रभाव बढ़ गया है। घने कोहरे के कारण सड़क, रेल और हवाई यातायात पर असर पड़ सकता है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले 48 घंटों में तापमान में और गिरावट आ सकती है।  शाजापुर में 50 मीटर बाद कुछ नहीं दिखा, भोपाल-ग्वालियर में भी कोहरा इससे पहले बुधवार सुबह भोपाल, ग्वालियर समेत 22 जिलों में कोहरा छाया रहा। कोहरे की वजह से ट्रेनें-फ्लाइट भी डिले हुई। भोपाल, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, मैहर, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, उमरिया, कटनी, जबलपुर, दमोह, सागर और विदिशा में घना कोहरा छाया रहा। ग्वालियर, नर्मदापुरम, उज्जैन, मंडला, रीवा, सतना में 1 से 2 किलोमीटर तक विजिबिलिटी रही। वहीं, भोपाल, जबलपुर, खजुराहो, नौगांव, मलाजखंड, दतिया, गुना, इंदौर, रतलाम में 2 किमी के बाद कुछ भी नहीं दिखाई दे रहा था। कोहरा छाने के दौरान वाहनों को सावधानी से चलाने की समझाइश भी दी गई। शाजापुर में इतना कोहरा था कि 50 मीटर के बाद कुछ भी नहीं दिख रहा था।   मंदसौर-शाजापुर सबसे ठंडे, पारा 4 डिग्री से नीचे मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार-बुधवार की रात प्रदेश के कई शहरों में पारे में खासी गिरावट देखी गई। 5 बड़े शहरों की माने तो इंदौर में सबसे कम 4.9 डिग्री रहा। भोपाल में 5.1 डिग्री, ग्वालियर में 9.8 डिग्री, उज्जैन में 8 डिग्री और जबलपुर में 8.6 डिग्री रहा। मंदसौर प्रदेश का सबसे ठंडा शहर रहा। यहां न्यूनतम तापमान 3.7 डिग्री पहुंच गया। शाजापुर में पारा 3.8 डिग्री रहा। वहीं, राजगढ़ में 4.4 डिग्री, पचमढ़ी-नौगांव में 5.4 डिग्री, उमरिया-मलाजखंड में 5.6 डिग्री, रायसेन में 6.6 डिग्री, छिंदवाड़ा में 6.8 डिग्री, रीवा में 7 डिग्री, मंडला में 8.1 डिग्री, खंडवा-सतना में 8.4 डिग्री, दमोह-बैतूल में 8.5 डिग्री, नरसिंहपुर में 8.6 डिग्री, खजुराहो, रतलाम-गुना में 9.6 डिग्री और दतिया में 9.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सुबह कोहरा…इसलिए गाड़ी संभलकर चलाने की सलाह प्रदेश में कोहरा छा रहा है। ऐसे में एक्सपर्ट ने लोगों को सुरक्षित ड्राइविंग करने की सलाह दी है। मौसम विभाग ने हेल्थ और फसलों को लेकर एडवाइजरी भी जारी की है।     ट्रैफिक – कोहरा होने पर गाड़ी चलाते समय या किसी ट्रांसपोर्ट के जरिए ट्रैवल करते समय सावधान रखें। ड्राइविंग धीरे करें और फॉग लाइट का इस्तेमाल करें।     हेल्थ– तेज ठंड होने पर शरीर की गर्माहट बनाए रखने के लिए सिर, गर्दन, हाथ-पैर की उंगलियों को अच्छे से ढंके। फ्लू, सर्दी, खांसी-जुकाम होने पर डॉक्टर को दिखाए। विटामिन सी से भरपूर फल और सब्जियां खाएं।     कृषि- जहां मिट्‌टी में पर्याप्त नमी हो, वहां गेहूं, चना, सरसों-मटर की बुआई करें। जहां बुआई हो चुकी है, वहां जरूरत पड़ने पर कृषि वैज्ञानिकों से सलाह लें। पिछली फसलों के अवशेष यानी, ठूंठ को कभी न जलाएं। 19 दिसंबर से फिर नया सिस्टम, ठंड बढ़ेगी मौसम विभाग के अनुसार, नए नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) 19 दिसंबर से पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित करने की संभावना है। जिसका असर एमपी में अगले दो-तीन दिन में दिखाई देने लगेगा। इसके पीछे ही एक और वेस्टर्न डिस्टरबेंस आ रहा है। इससे ठंड का असर और भी बढ़ेगा। जेट स्ट्रीम की रफ्तार 185 किमी प्रतिघंटा वर्तमान में जेट स्ट्रीम भी चल रही है। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में जेट स्ट्रीम का असर है। बुधवार को यह जमीन से 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर 185 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से बह रही है। बीते दिनों रफ्तार 222 किमी प्रतिघंटा तक पहुंच चुकी है। क्या होती है जेट स्ट्रीम? मौसम एक्सपर्ट की माने तो प्रदेश में ठंड बढ़ने की वजह खास वजह जेट स्ट्रीम भी है। यह जमीन से लगभग 12 किमी ऊंचाई पर चलने वाली तेज हवा है। इस बार रफ्तार 222 किमी प्रति घंटा तक पहुंच गई है। यह देश के उत्तरी हिस्से में सक्रिय है। पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवा के अलावा ये ऊंची हवा सर्दी बढ़ा रही है। उत्तर के मैदानी इलाकों से जब ठंडी हवा और पहाड़ी इलाकों से बर्फीली हवा हमारे यहां आती है, तब तेज ठंड पड़ती है। यह सब उत्तर भारत में पहुंचने वाले मौसमी सिस्टम वेस्टर्न डिस्टरबेंस के कारण होता है। ऐसे में यदि जेट स्ट्रीम भी बन जाए तो सर्दी दोगुनी हो जाती है। इस बार यही हो रहा है।

निजी ऐप्स के हाइपर लोकल AQI मानकों पर भरोसा न करें, जनता से अपील

लखनऊ का AQI (वायु गुणवत्ता इंडेक्स) 174 निजी ऐप्स का हाइपर लोकल मानक अपनाने से फैल रहा भ्रम जनता से अपील: भ्रामक खबरों से रहें सावधान लखनऊ  लखनऊ का AQI (वायु गुणवत्ता इंडेक्स) 174 है जो हवा की मॉडरेट क्वालिटी को प्रमाणित करता है। सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफार्म पर  AQI से संबंधित भ्रामक आंकड़े प्रचारित और प्रसारित किए जा रहे हैं जो वायु गुणवत्ता बताने वाले निजी एप से लिए गए हैं।  अधिकतर विदेशी प्लेटफॉर्म US-EPA मानकों का उपयोग करते हैं, जबकि भारत में National Air Quality Index (NAQI) का पालन किया जाता है। दोनों के मापदंड अलग-अलग हैं। साथ ही सरकारी स्टेशन (जैसे लालबाग, तालकटोरा, अलीगंज) प्रमाणित और कैलिब्रेटेड उपकरणों का उपयोग करते हैं। निजी संस्थाएं अक्सर सैटेलाइट डेटा या अनकैलिब्रेटेड सेंसर का प्रयोग करती हैं, जिनमें त्रुटि की संभावना अधिक होती है। सीपीसीबी का डेटा 24 घंटे के औसत पर आधारित सीपीसीबी द्वारा जारी AQI आंकड़े पिछले 24 घंटों के औसत वैज्ञानिक मूल्यांकन पर आधारित होते हैं, जिससे शहर की वास्तविक और समग्र वायु गुणवत्ता की स्थिति सामने आती है। इसके विपरीत, कई निजी ऐप्स क्षणिक और स्थानीय धूल और कणों को दिखाते हैं, जो किसी एक चौराहे, ट्रैफिक जाम या सीमित गतिविधि के कारण हो सकते हैं और पूरे शहर की स्थिति को प्रतिबिंबित नहीं करते। तकनीकी अंतर से पैदा होता है भ्रम वायु गुणवत्ता मापने की तकनीक और मानकों में अंतर के कारण निजी ऐप्स पर दिखाई देने वाले आंकड़े अक्सर भ्रामक हो जाते हैं। सीपीसीबी का मॉडल भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप विकसित किया गया है, जबकि अधिकतर निजी ऐप विदेशी परिस्थितियों पर आधारित होते हैं, जो भारत की भौगोलिक, मौसमी और पर्यावरणीय स्थितियों को सही तरीके से आंकने में सक्षम नहीं हैं। धूल और धुएं में अंतर नहीं कर पाते निजी ऐप्स विशेषज्ञों के अनुसार कई निजी ऐप धूल कण और धुएं के बीच अंतर नहीं कर पाते। भारतीय शहरों में धूल की मात्रा स्वाभाविक रूप से अधिक होती है, लेकिन विदेशी मॉडल इसे सीधे प्रदूषण मान लेते हैं। इसी कारण AQI को वास्तविकता से अधिक दिखाया जाता है और अनावश्यक डर का माहौल बनता है। एक ही शहर के लिए अलग-अलग आंकड़े, भरोसेमंद नहीं निजी डेटा यह भी सामने आया है कि निजी ऐप्स एक ही शहर के अलग अलग इलाकों के लिए अलग अलग AQI दिखाते हैं, जो समग्र शहरी स्थिति नहीं बताते। ऐसे आंकड़े न तो प्रमाणिक होते हैं और न ही किसी आधिकारिक एजेंसी द्वारा सत्यापित, जिससे आमजन में भ्रम और चिंता फैलती है। भ्रामक आंकड़ों से फैलाई जा रही चिंता निराधार निजी ऐप के आधार पर फैलाया जा रहा डर तथ्यहीन और निराधार है। लखनऊ की वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है, स्थिति नियंत्रण में है और घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। नागरिकों से अनुरोध है कि केवल सीपीसीबी और सरकारी स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर ही भरोसा करें।

इंटरनेशनल मैच पहली बार रद्द? लखनऊ में घना कोहरा और BCCI पर भड़के फैन्स

लखनऊ  भारत-साउथ अफ्रीका के बीच 5 मैचौं की टी20 सीरीज का चौथा मुकाबला बुधवार को लखनऊ के इकाना स्टेडियम में होना था. लेकिन घने कोहरे के चलते टॉस नहीं हो सका और आखिरकार मैच को रद्द करना पड़ा. अब सीरीज का आखिरी मैच 19 दिसंबर को अहमदाबाद में खेला जाएगा. टॉस का समय 6.30 बजे था. लेकिन भयानक कोहरे के चलते टॉस में देरी हुई. इसके बाद 9.30 तक मैच को कराने की कोशिश की गई. लेकिन कोहरा बढ़ता ही गया. 6 बार अंपायर मैदान में पहुंचे और उन्होंने मैच शुरू कराने की संभावना तलाशी. राजीव शुक्ला भी मैदान पर पहुंचे. लेकिन 3.30 घंटे की कोशिश के बाद भी मैच नहीं शुरू हो सका. टीम इंडिया सीरीज में 2-1 से आगे है. अब अहमदाबाद में होने वाला मैच सीरीज के लिहाज से अहम होगा. वर्ल्ड कप से पहले अब केवल 6 मैच टी20 विश्व कप में अब दो महीने से भी कम समय बचा है. 7 फरवरी से विश्वकप का अभियान शुरू हो जाएगा. इससे पहले टीम इंडिया को अब केवल 6 टी20 मैच खेलने हैं. एक मैच साउथ अफ्रीका के खिलाफ और बाकी 5 मैच न्यूजीलैंड के खिलाफ. ऐसे में ये मैच रद्द होना, टी20 विश्वकप की तैयारियों के लिहाज से भी एक बड़ा झटका है. कोहरे की वजह से पहली बार रद्द हुआ इंटरनेशनल मैच  घने कोहरे के कारण भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच खेला जाने वाला चौथा टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला रद्द कर दिया गया. भारतीय टीम की जीत के साथ सीरीज अपने नाम करने की उम्मीद में बड़ी संख्या में दर्शक इकाना स्टेडियम पहुंचे थे और दोनों टीमों के बीच रोमांचक मुकाबले की आस लगाए बैठे थे. हालांकि, कोहरा इतना घना था कि अंपायरों ने छह बार मैदान का निरीक्षण करने के बाद यह फैसला किया कि मैच के लिए हालात अनुकूल नहीं हैं. मुकाबला रद्द किए जाने तक दोनों टीमें अपने-अपने ड्रेसिंग रूम में ही मौजूद थीं, क्योंकि तब तक तापमान भी काफी गिर चुका था. ऐसे में ये जानना जरूरी है कि क्या यह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पहली बार हुआ जब कोहरे की वजह से कोई मैच रद्द किया गया? जानें कब-कब कोहरे के चलते रद्द हुआ मैच इससे पहले भी ऐसा एक वाकया 1998 में फैसलाबाद में देखने को मिला था, जब पाकिस्तान और जिम्बाब्वे के बीच खेले जा रहे टेस्ट मैच को कोहरे के कारण रद्द करना पड़ा था. सीरीज के तीसरे टेस्ट के दौरान फैसलाबाद में दोनों टीमों का स्वागत घने कोहरे ने किया था. दृश्यता इतनी कम हो गई थी कि दूसरे दिन के बाद अगली सुबह अधिकांश खिलाड़ी मैदान तक नहीं पहुंचे.  कोहरे के चलते टॉस में हुई देरी तो BCCI पर भड़के फैन्स भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच खेले जाने वाले चौथे टी20 मैच रद्द होने के बाद नाराज प्रशंसकों की कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा. लखनऊ के इकाना स्टेडियम में यह मुकाबला घने कोहरे की चादर से स्टेडियम परिसर ढक जाने के कारण प्रभावित हुआ, जिसके चलते अधिकारियों को टॉस को अनिश्चितकाल के लिए टालना पड़ा. खिलाड़ियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अंपायरों ने किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेने का फैसला किया, क्योंकि दृश्यता बेहद खराब हो चुकी थी. वहीं, स्टेडियम में मौजूद दर्शक निराश नजर आए और उन्होंने सर्दियों के चरम मौसम के दौरान उत्तर भारत के किसी शहर में अंतरराष्ट्रीय मैच आयोजित करने के बीसीसीआई के फैसले पर सवाल उठाए. कई प्रशंसकों का मानना था कि बोर्ड को इस समय उत्तर भारत में नियमित रूप से पड़ने वाले मौसम संबंधी हालात का अंदाजा पहले ही लगाना चाहिए था. फैन्स ने उठाए बीसीसीआई पर सवाल सर्दियों के मौसम में उत्तर भारत के कई राज्य भीषण ठंड और घने कोहरे की चपेट में रहते हैं, क्योंकि पूरे उत्तरी गोलार्ध में तापमान तेजी से गिरता है. उत्तर भारत के प्रमुख शहरों में शामिल लखनऊ में दिसंबर के पहले सप्ताह से ही तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिसके कारण रात और सुबह के समय दृश्यता बेहद कम हो जाती है.  डेल स्टेन ने जताई चिंता दक्षिण अफ्रीका के पूर्व तेज गेंदबाज और मौजूदा कमेंटेटर डेल स्टेन ने लखनऊ की परिस्थितियों पर खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि मैच से एक दिन पहले ही दृश्यता बेहद खराब थी. स्टेन ने कहा कि मंगलवार रात करीब 8 बजे जब वह बाहर निकले, तो उन्हें 20 मीटर आगे तक भी ठीक से दिखाई नहीं दे रहा था. उनकी टिप्पणी ने एक बार फिर यह रेखांकित कर दिया कि सर्दियों में लखनऊ जैसे शहर में टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच आयोजित करना कितना चुनौतीपूर्ण है. 19 दिसंबर को अहमदाबाद में मैच भारत-साउथ अफ्रीका के बीच सीरीज का आखिरी मैच 19 दिसंबर यानी शुक्रवार को अहमदाबाद में खेला जाएगा. सीरीज में टीम इंडिया 2-1 से आगे है. ऐसे में अहमदाबाद में होने वाला मैच सीरीज जीत के लिहाज से जहां टीम इंडिया के लिए अहम होगा. वहीं मेहमान टीम इस मैच को जीतकर सीरीज को 2-2 की बराबरी पर खत्म करना चाहेगी. गिल भी हुए इंजर्ड इस मैच के रद्द होने के साथ ही भारत के लिए एक और बुरी खबर लखनऊ से आई. टीम के उपकप्तान और खराब फॉर्म से जूझ रहे शुभमन गिल फिर से इंजर्ड हुए हैं. उन्हें पैर में चोट लगी है. एक महीने में ये दूसरी बार है जब गिल इंजर्ड हुए हैं. इससे पहले साउथ अफ्रीका के खिलाफ कोलकाता टेस्ट में उन्हें गले में चोट लगी थी. जिसके चलते वह टेस्ट और वनडे सीरीज से बाहर हो गए थे. टी20 सीरीज में उनकी वापसी हुई थी. लेकिन बल्ला खामोश ही रहा.   

सूर्या अपार्टमेंट में स्थापित 15 किलोवाट सोलर संयंत्र से हर माह 20 हजार रुपये तक की हो रही बचत

पीएम सूर्यघर योजना में लखनऊ की एक रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन में पहली बार सामुदायिक सोलर रूफटॉप संयंत्र की स्थापना सूर्या अपार्टमेंट में स्थापित 15 किलोवाट सोलर संयंत्र से हर माह 20 हजार रुपये तक की हो रही बचत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ऊर्जा नीति को मिल रही मजबूती लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई है। केंद्र सरकार की पीएम सूर्यघर योजना के तहत लखनऊ की किसी रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) में पहली बार सामुदायिक सोलर रूफटॉप संयंत्र की सफल स्थापना की गई है। गोखले मार्ग स्थित सूर्या अपार्टमेंट आरडब्ल्यूए में लगाए गए 15 किलोवाट क्षमता के सोलर संयंत्र से न केवल बिजली बिल में हर माह ₹20 हजार तक की बचत हो रही है, बल्कि यह पहल योगी सरकार की हरित ऊर्जा नीति को भी मजबूती प्रदान कर रही है। यह लखनऊ की किसी भी आरडब्ल्यूए में पीएम सूर्यघर योजना के अंतर्गत सामुदायिक क्षेत्र के लिए स्थापित पहला सोलर रूफटॉप संयंत्र है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा नवीकरणीय ऊर्जा को प्रोत्साहन देने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के तहत केंद्र सरकार की पीएम सूर्यघर योजना को प्रदेश में प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। इसी क्रम में ग्रुप हाउसिंग सोसायटी (GHS) एवं रेजीडेण्ट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के कामन एरिया की विद्युत आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु सोलर रूफटॉप संयंत्रों की स्थापना को बढ़ावा दिया जा रहा है। योजना के अंतर्गत सामुदायिक लाइटिंग, पंखे, वाटर पंप, लिफ्ट आदि के लिए अधिकतम 500 किलोवाट क्षमता तक सोलर रूफटॉप संयंत्र लगाए जाने का प्रावधान है, जिस पर भारत सरकार द्वारा ₹18,000 प्रति किलोवाट की दर से केंद्रानुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के ऊर्जा विभाग एवं डिस्कॉम के सहयोग से आरडब्ल्यूए को इस योजना का लाभ लेने में सुविधा प्रदान की जा रही है।   इस परियोजना पर कुल ₹8.10 लाख की लागत आई, जिसके सापेक्ष आरडब्ल्यूए को ₹2.70 लाख का केंद्रानुदान प्राप्त हुआ। संयंत्र के चालू होने से वर्तमान में विद्युत बिल में ₹15,000 से ₹20,000 प्रति माह तक की बचत हो रही है। इससे सामुदायिक सुविधाओं पर होने वाला खर्च कम होने के साथ-साथ निवासियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना भी संभव हो सका है। यह पहल योगी सरकार की हरित ऊर्जा, आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश और स्वच्छ पर्यावरण की नीति को धरातल पर साकार करती है। यह लखनऊ सहित प्रदेश की अन्य आरडब्ल्यूए एवं ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों के लिए एक प्रेरणास्रोत है। सभी आरडब्ल्यूए से अपील की गई है कि वे योगी सरकार के सहयोग से पीएम सूर्यघर योजना का लाभ उठाते हुए अपने कामन एरिया में सोलर रूफटॉप संयंत्र स्थापित करें और हरित ऊर्जा की दिशा में भागीदार बनें।

सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! 2026 में 124 दिन दफ्तर बंद, 11 लॉन्ग वीकेंड का मौका

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने साल 2026 के लिए छुट्टियों का आधिकारिक कैलेंडर जारी कर दिया है, जिसमें सरकारी दफ्तरों के बंद रहने और खुलने के दिनों की पूरी जानकारी है. साल 2026 में 365 दिनों में से 241 दिन ही सरकारी दफ्तर खुलेंगे, जबकि 124 दिन छुट्टी रहेगी. इसमें से 104 दिन शनिवार-रविवार का रहेगा है. साथ ही 20 गजेटेड हॉलिडे हैं. 12 महीने में 11 बार तीन दिन की सरकारी छुट्टी एक साथ है, जिसमें आराम से टूर प्लान किया जा सकता है. साल 2026 में हरियाणा के सरकारी दफ्तर 52 दिन शनिवार और 52 दिन रविवार मिलाकर कुल 124 दिन बंद रहेंगे. इनमें 20 पब्लिक हॉलिडे शामिल हैं.13 वालंटियर लीव तय की गई है, जिसमें तीन छुट्टी कर्मचारी ले सकते हैं. इसके अलावा एवरेज सीएल 30, ईएल और मेडिकल मिलाकर कर्मचारी 157 दिन घर पर रह सकते हैं, जबकि वह 208 दिन दफ्तर आएंगे. सरकार ने साल 2026 में 21 विशेष दिवस घोषित किए हैं. 11 बार मिलेगी 3-3 दिन की छुट्टी इन दिनों छुट्टी नहीं होगी, बल्कि सरकारी आयोजन होगा. साल में 8 सार्वजनिक अवकाश शनिवार-रविवार को आएंगे. ऐसे में कर्मचारियों की आठ छुट्टियों को नुकसान हो गया है. साल 2026 में दिवाली 8 नवंबर रविवार, जबकि 15 अगस्त को शनिवार पड़ रहा है. 2026 में 11 बार एक साथ तीन-तीन दिन की छुट्टी मिलेगी. जिससे कर्मचारी आराम से तीन का कोई भी प्लान तैयार कर सकते हैं. 26 जनवरी सोमवार को है. ऐसे में इससे पहले शनिवार-रविवार को भी छुट्टी रहेगी. साल 2026 में 124 दिन बंद रहेंगे दफ्तर शहीदी दिवस 23 मार्च यानी सोमवार को है. इससे पहले शनिवार-रविवार को दफ्तर बंद रहेंगे. 31 जुलाई शहीद उधम सिंह जयंती शुक्रवार को है. इसके बाद शनिवार और रविवार की छुट्टी रहेगी. 28 अगस्त शुक्रवार को रक्षाबंधन है. इसके बाद शनिवार रविवार छुट्टी रहेगी. सरकारी कैलेंडर जारी होने से कर्चमारियों के चेहरे पर काफी खुशी है. उन्हें साल में 124 दिन की छुट्टी मिल रही है. इसके अलावा भी वह सीएल, ईएल और मेडिकल मिलाकर कई छुट्टियां ले सकते हैं. बता दें कि सरकार हर साल इन्हीं दिनों सरकारी कैलेंडर जारी करती है, जिसके अनुसार पूरे साल का प्लान तैयार किया जाता है.  

इतिहास रचने को तैयार कैप्टन जोया: नॉर्थ पोल के ऊपर उड़ान से पहले साझा किया उत्साह

नईदिल्ली  एअर इंडिया की महिला पायलटों की टीम नॉर्थ पोल के ऊपर से उड़ान भरकर जल्द ही इतिहास रचने जा रही है. इस टीम की अगुआई करेंगी कैप्टन जोया अग्रवाल जो अपनी इस नई यात्रा को लेकर बेहद रोमांचित हैं. कैप्टन जोया अग्रवाल ने कहा, "मैं इतिहास रचने का इंतजार कर रही हूं. मैं बेहद उत्साहित हूं!" इन शब्दों के साथ जोया उस विशेष क्लब का हिस्सा बनने के लिए तैयार हैं जो एक नया मकाम हासिल करने जा रही है. आसमान में अपने सपनों की उड़ान भरने वाली कैप्टन जोया अग्रवाल जल्द ही एक और उपलब्धि हासिल कर लेंगी, क्योंकि वे एक महिला पायलटों की टीम का नेतृत्व करेंगी. ये उड़ान अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को शहर से चलेगी और उत्तरी ध्रुव से होते हुए नॉनस्टॉप बेंगलुरु पहुंचेगी. स्थानीय समय के मुताबिक ये यात्रा 9 जनवरी 2021 को रात 8.30 बजे शुरू होगी. "हम वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने जा रहे"  उड़ान भरने से कुछ घंटे पहले कैप्टन जोया ने कहा, "कल हम कई तरह के वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने जा रहे हैं. इसके बारे में सोचकर मेरे रोंगटे खड़े हो रहे हैं." कॉकपिट में कैप्टन जोया के साथ कैप्टन थनमई पपागड़ी, कैप्टन आकांशा सोनावड़े और कैप्टन शिवानी मन्हास द्वारा शामिल होंगी. साथ ही एयर इंडिया में एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर (Flight Safety) कैप्टन निवेदिता भसीन भी इस फ्लाइट से यात्रा करेंगी. नॉर्थ पोल क्षेत्र के ऊपर से उड़ान भरने के बारे में जोया कहती हैं, "हम पिछले साल ही ऐसा करने वाले थे, लेकिन दुर्भाग्य से खराब मौसम के चलते ऐसा नहीं हो सका. लंबे समय से ये बहुत से लोगों के लिए एक सपना है. हम उम्मीद कर रहे हैं कि कल हम इस सपने को एक हकीकत में बदल देंगे." जोया ने बताया, "ध्रुवीय उड़ान पहले भी भरी गई है, लेकिन यह पहली बार है जब हमारे पास चालक दल में सभी महिलाएं हैं. 'भारत की बेटियां' अमेरिका की सिलिकॉन वैली से भारत की सिलिकॉन वैली तक उड़ान भरेंगी!" जोया ने आगे कहा, "अब तक हम लंबी उड़ानों का संचालन करते रहे हैं, लेकिन वे उड़ानें अटलांटिक महासागर या प्रशांत महासागर के ऊपर से गुजरती हैं और वापस आ जाती हैं. ये उड़ान खासतौर से अलग है क्योंकि आप उत्तरी ध्रुव पर उड़ान भरेंगे. उत्तरी ध्रुव कितने लोगों ने देखा है? मैं खुद को भाग्यशाही मानती हूं कि मैं हवाई जहाज की कमान संभालूंगी और ऊपर से उत्तरी ध्रुव को देखते हुए दूसरी तरफ आऊंगी. यह उड़ान विमानन के इतिहास में एक नया अध्याय बनने जा रही है." ऐतिहासिक उड़ान की सभी सीटें बुक लगभग 17 घंटे की उड़ान के बारे में कैप्टन जोया कहती हैं कि यह उतनी ही तेज उड़ान है जितना की संभव है. उन्होंने कहा, "ये दुनिया के दो विपरीत बिंदुओं को जोड़ने के लिए संभव सबसे तेज रूट है. यह निश्चित रूप से दुनिया की सबसे लंबी उड़ानों में से एक है और तब भी इसमें अटलांटिक महासागर या प्रशांत क्षेत्र से होकर समान दूरी की उड़ान की तुलना में कम ईंधन का इस्तेमाल होने वाला है." इस ऐतिहासिक उड़ान के लिए एयर इंडिया का बोइंग 777-200LR विमान का इस्तेमाल किया जाना है जिसमें सीट क्षमता 238 की है. एयर इंडिया ने इंडिया टुडे को बताया कि ये सभी सीटें बुक हो चुकी हैं. कैप्टन जोया ने कहा, "बोइंग 777-200LR एक अहम हवाई जहाज है. अगर आप पृथ्वी ग्रह को देखते हैं और ग्लोब पर कोई दो बिंदु दिखाई देता है तो ये हवाई जहाज उन्हें जोड़ने में सक्षम है." कैप्टन जोया एक कुशल पायलट हैं जिन्हें 8,000 घंटे से ज्यादा उड़ान भरने का अनुभव है. इसके अलावा उन्हें बोइंग B777 विमान में 10 साल से ज्यादा कमांड का अनुभव है जिसमें 2,500 से ज्यादा फ्लाइंग आवर शामिल हैं. अपनी अब तक की यात्रा के बारे में जोया कहती हैं, "जब मैं एयर इंडिया में शामिल हुई, महिला पायलटों की संख्या मुट्ठी भर थी जिनमें से मैं भी एक थी. हर कोई मुझे एक बच्चे की तरह देखता था, लेकिन सब लोग बहुत मददगार थे. बहरहाल, यह एक पुरुष-प्रधान क्षेत्र है. खुद को एक महिला पायलट के रूप में नहीं, बल्कि एक पायलट के रूप में कड़ी मेहनत करनी होती है, क्योंकि यह एक बहुत ही जिम्मेदारी का काम है." "तब मां रो पड़ी थीं" जोया अपने माता-पिता की एकमात्र संतान हैं. वे याद करती हैं कि कैसे उनकी मां डर के मारे रो पड़ी थीं जब उन्होंने घर पर पहली बार ये बताया था कि वे पायलट बनना चाहती हैं. लेकिन जल्दी ही ये सब बदल गया. चेहरे पर मुस्कान लाते हुए जोया याद करती हैं, "मैं पिछले 8 वर्षों से उड़ान भर रही हूं और ये एक शानदार यात्रा है. 2013 में जब मैं कैप्टन बनी, तब मेरी मां फिर से रो पड़ीं लेकिन इस बार वे खुशी से रोई थीं." तो क्या युवा लड़कियों के लिए जोया का संदेश है कि वे अपनी इच्छाओं को आसमान में उड़ने दें? कैप्टन जोया कहती हैं, "एक महिला को सपने देखने और जो कुछ भी वह चाहती है उसे हासिल करने में सक्षम होना चाहिए. कोई भी सपना ऐसा नहीं है जो नामुमकिन हो."

व्यावसायिक शिक्षा को बनाया गया छात्रों के व्यावहारिक कौशल के हिसाब से

स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह का वक्तव्य भोपाल  स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विज़न-2047 की ओर बढ़ते हुए देश के अनुरूप मध्यप्रदेश को भी विकास की गति दी जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में विकसित मध्यप्रदेश के सपने को साकार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में कक्षा-5वीं तक मातृभाषा पर जोर दिया गया है और व्यावसायिक शिक्षा को छात्रों के व्यावहारिक कौशल के हिसाब से बनाया गया है। प्रदेश में तकनीकी आधारित शिक्षा में प्रौद्योगिक डिजिटल शिक्षा को महत्व दिया गया है। मंत्री श्री सिंह बुधवार को विधानसभा में विशेष सत्र को संबोधित कर रहे थे। अतीत की चर्चा करते हुए मंत्री श्री सिंह ने बताया कि राज्य की स्थापना के समय साक्षरता दर 21.41 प्रतिशत हुआ करती थी, जो आज लगभग 75 प्रतिशत तक पहुँच गई है। यह किसी एक योजना के कारण नहीं, बल्कि पूर्ववर्ती सरकारों के लगातार शिक्षा गुणवत्ता में सुधार, निवेश और प्रतिबद्धता का स्पष्ट उदाहरण है। स्कूल शिक्षा विभाग स्कूल शिक्षा मंत्री ने सदन में जानकारी दी कि प्रदेश में वर्ष 2003-04 में 4495 हाई स्कूल और 4211 हायर सेकेण्डरी स्कूल थे, जिनमें कक्षा-9 से 12 तक 18 लाख 79 हजार विद्यार्थी अध्ययनरत थे। आज वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 22.56 लाख हो चुकी है। पिछले दो दशकों में 4670 माध्यमिक शालाओं को हाई स्कूल में तथा 1991 हाई स्कूलों को हायर सेकेण्डरी में उन्नयन किया गया है। नि:शुल्क साइकिल योजना में वर्ष 2004-05 में लाभार्थियों की संख्या 34 हजार से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 4 लाख 90 हो गई है। लैपटॉप योजना में वर्ष 2009-10 में लाभार्थी 473 से बढ़कर आज 94 हजार 300 हो गये हैं। नि:शुल्क पाठ्य-पुस्तकों के वितरण में लाभार्थी एक लाख 20 हजार हुआ करते थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 21 लाख 70 हजार हो गयी है। मुख्यमंत्री स्कूटी योजना में वर्ष 2022-23 में 7832 विद्यार्थियों को लाभ दिया गया है। उन्होंने बताया कि प्राथमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर शून्य हो गई है। समग्र आईडी के माध्यम से 90 प्रतिशत बच्चों की ट्रेकिंग पूर्ण की जा चुकी है। बच्चों को दी जाने वाली सुविधाएँ स्कूल के सत्र शुरू होने के साथ ही दिये जाने के प्रयास किये गये हैं। प्रदेश में 30 हजार 281 शिक्षक पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रगति पर है। स्कूलों में 76,325 अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। विभाग ने पहली बार 20 हजार से अधिक अतिशेष शिक्षकों का तर्कसंगत स्थानांतरण किया है। प्रदेश में बोर्ड परीक्षा परिणामों में भी सुधार हुआ है। कक्षा-10 का उत्तीर्ण प्रतिशत 56 प्रतिशत से बढ़कर 74.56 प्रतिशत तथा कक्षा-12 का 63 प्रतिशत से बढ़कर 76.22 प्रतिशत हो गया है। उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम में 42 लाख के लक्ष्य के विरुद्ध 62 लाख 80 हजार को साक्षर करने की उपलब्धि प्राप्त की गयी है। कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री श्री सिंह ने बताया कि प्रदेश में इस बार आईटीआई में 94.5 प्रतिशत एडमिशन हुआ है, जिसमें पिछले वर्ष से 8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इन संस्थानों में प्रशिक्षण पाने वाली महिलाओं की संख्या 12179 हो गयी है। प्रदेश के आईटीआई में 8 राज्यों के विद्यार्थियों ने भी प्रवेश लिया है। उन्होंने बताया कि 20 वर्षों में प्रदेश में सरकारी आईटीआई की संख्या 133 से बढ़कर 290 हो गयी है। सीटों की संख्या भी बढ़कर 52 हजार 248 हो गयी है। आईटीआई में एक लाख बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री सिंह ने बताया कि डिप्लोमा पाठ्यक्रम को कक्षा-12वीं के समतुल्य घोषित किये जाने से शैक्षणिक सत्र वर्ष 2025-26 में पॉलीटेक्निक महाविद्यालय के प्रवेश में 21.38 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गयी है। मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना में वर्ष 2024-25 में 78 हजार 218 मेधावी विद्यार्थियों को 750 करोड़ रुपये की राशि वितरित की गयी है। उच्च शिक्षा मंत्री श्री सिंह ने बताया कि शिक्षा किसी भी समाज की रीढ़ होती है। उच्च शिक्षा वह शक्ति है, जो युवाओं को केवल रोजगार नहीं, बल्कि दृष्टि, दिशा और नेतृत्व प्रदान करती है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में गुना, खरगौन और सागर जैसे क्षेत्रों में नए विश्वविद्यालयों की स्थापना की गई है। इन विश्वविद्यालयों ने जनजातीय ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के युवाओं के लिये उच्च शिक्षा के नये द्वार खोले हैं। पिछले 2 वर्षों में उच्च शिक्षा के लिये 1150 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस की परिकल्पना ने प्रत्येक जिले में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा को सुलभ बनाया है। नवाचार और अनुसंधान से हमारे महाविद्यालय केवल नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले संस्थान बनते जा रहे हैं। प्रदेश के कॉलेजों में डिजिटल शिक्षा और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा दिया जा रहा है। छात्राओं के लिये गाँव की बेटी और प्रतिभा किरण जैसी योजनाएँ हमारी सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाती हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री श्री सिंह ने बताया कि आने वाले 3 वर्षों में उच्च शिक्षा में डिजिटल शिक्षा का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन किया जायेगा। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आईआईटी नई दिल्ली से टायअप कर प्लेसमेंट किया जा रहा है। आईआईटी बॉम्बे से उच्च शिक्षा विभाग द्वारा एमओयू किया जा रहा है। उच्च शिक्षा विभाग नई शिक्षा नीति के द्वितीय चरण में काम कर रहा है, जो ऐतिहासिक उपलब्धि है।  

राष्ट्र नायकों को समर्पित ‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल’ का 25 दिसंबर को उद्घाटन, सीएम योगी ने किया स्थलीय निरीक्षण

लखनऊ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 दिसंबर को राष्ट्रीय प्रेरणा के प्रतीक राष्ट्र नायकों डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी को समर्पित राष्ट्र प्रेरणा स्थल का उद्घाटन करेंगे। इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को राष्ट्र प्रेरणा स्थल का दौरा कर उद्घाटन समारोह की तैयारियों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने उद्घाटन समारोह के लिए हो रही तैयारियों, पार्किंग और सुरक्षा व्यवस्था के बारे में संज्ञान लिया तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए।  मुख्यमंत्री के निरीक्षण के दौरान एलडीए वीसी प्रथमेश‌ कुमार, लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत और सुरक्षा व्यवस्था देख रहे पुलिस कमिश्नर अमरेंद्र कुमार सेंगर उपस्थित रहे। राष्ट्र प्रेरणा स्थल के निरीक्षण के दौरान सीएम योगी ने संबंधित अधिकारियों को सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम करने और दीवारों पर फेंसिंग को और ऊंचा करने के निर्देश दिए। उन्होंने उद्घाटन समारोह में किसी तरह की आवाजाही और ट्रैफिक की समस्या पैदा न हो इसके लिए चाक-चौबंद पार्किंग व्यवस्था को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने पार्किंग की संख्या और लोगों के आने-जाने के मार्गों पर डायवर्जन और साइनेज की व्यवस्था को जल्द ही पूरा करने को कहा। म्यूजियम परिसर के निरीक्षण के दौरान उन्होंने क्यूरेशन और फिनिशिंग के कार्यों को जल्द पूरा कराने के निर्देश दिए और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने को कहा। निरीक्षण के दौरान सीएम योगी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा पर हो रहे पेंटिंग के कार्य के बारे में भी संज्ञान लिया। एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार ने बताया कि पेंटिंग का कार्य दो दिन में पूरा हो जाएगा, और क्यूरेशन का कार्य उद्घाटन समारोह के दो दिन पूर्व पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि लखनऊ नगर निगम उद्घाटन समारोह के दिन साफ-सफाई, अस्थायी टायलेट और पेयजल की व्यवस्था कर रहा है। मुख्यमंत्री के निरीक्षण के दौरान एलडीए वीसी ने उद्घाटन समारोह की सभी गतिविधियों से भी अवगत करवाया।  उन्होंने बताया कि उद्घाटन समारोह के दिन प्रधानमंत्री मोदी सबसे पहले राष्ट्र नायकों की प्रतिमाओं का अनावरण कर श्रद्धा सुमन अर्पित करेंगे। इस अवसर पर राष्ट्रीयता की भावना के संचार के लिए तिरंगे गुब्बारे छोड़े जाएंगे। प्रतिमा अनावरण के बाद प्रधानमंत्री प्रेरणा स्थल में राष्ट्र नायकों को समर्पित म्युजियम का उद्घाटन करेंगे। यहां वो डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी, दीन दयाल उपाध्याय और श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी को समर्पित गैलरियों और कोर्टयार्ड का अवलोकन करेंगे। पहली गैलरी के ओरियेंटेशन रूम में वीडियो और एवी के माध्यम से राष्ट्र नायकों के संक्षिप्त जीवन परिचय को दिखाया जाएगा। इसके बाद प्रधानमंत्री म्यूजियम परिसर में ही बने भारत माता कोर्टयार्ड, जन संघ के प्रतीक चिह्न दीपक कोर्टयार्ड, और सुदर्शन चक्र कोर्टयार्ड जाएंगे और राष्ट्र नायकों से जुड़ी हुई वस्तुओं का अवलोकन करने के लिए फर्स्ट फ्लोर पर बने कोर्टयार्ड जाएंगे। म्यूजियम से बाहर निकल कर प्रधानमंत्री प्रेरणा स्थल पर बने मंच से गणमान्य अतिथियों और उद्घाटन समारोह के साक्षी बनने वाले लाखों की संख्या में प्रत्यक्षदर्शियों को संबोधित करेंगे।