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तलाक में पत्नी ने छोड़ी हर मांग, सुप्रीम कोर्ट बोला— अनोखा समझौता, जीवन में खुशियां मिलें

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक आपसी सहमति से तलाक के मामले में महिला की जमकर तारीफ की। दअसल महिला ने तलाक लेते समय किसी तरह का गुजारा भत्ता यानी एलिमनी नहीं मांगी। इतना ही नहीं, विवाह के समय पति की मां द्वारा उपहार में दिए गए सोने के कंगन भी वापस कर दिए। अदालत ने इसे अत्यंत दुर्लभ समझौता बताते हुए अपने संवैधानिक अधिकारों के तहत विवाह को भंग कर दिया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई हेतु सूचीबद्ध था। सुनवाई की शुरुआत में ही महिला की ओर से पेश वकील ने अदालत को सूचित किया कि उनकी मुवक्किल किसी प्रकार का भरण-पोषण या अन्य आर्थिक प्रतिपूर्ति की मांग नहीं कर रही हैं। अदालत को बताया गया कि केवल सोने के कंगन लौटाना शेष है। पीठ ने पहले गलतफहमी में यह समझा कि पत्नी अपना स्त्री-धन वापस मांग रही है, लेकिन जैसे ही वकील ने स्पष्ट किया कि ये कंगन तो महिला खुद लौटा रही है, जो शादी के समय पति की मां ने उन्हें भेंट किए थे, तो न्यायमूर्ति पारदीवाला मुस्कुरा उठे। उन्होंने कहा- यह बहुत ही दुर्लभ समझौता है जो हमने देखा है। आजकल ऐसे उदाहरण कम ही देखने को मिलते हैं। अदालत ने अपने आदेश में लिखा- यह उन विरले मामलों में से एक है, जहां किसी भी प्रकार की मांग नहीं की गई। उलटे पत्नी ने विवाह के समय मिले सोने के कंगन लौटा दिए। हमें बताया गया कि ये कंगन पति की मां के हैं। हम इस कदम की सराहना करते हैं, क्योंकि ऐसा आजकल कम ही देखने को मिलता है। सुनवाई के दौरान जैसे ही पत्नी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जुड़ीं, तो न्यायमूर्ति पारदीवाला ने उनसे कहा- हमने इस बात का उल्लेख किया है कि यह उन दुर्लभ मामलों में से है जहां किसी प्रकार का लेन-देन नहीं हुआ। हम आपकी सराहना करते हैं। अतीत को भूलकर खुशहाल जीवन बिताइए। इसके बाद अदालत ने अंतिम आदेश पारित करते हुए कहा- उपरोक्त परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, हम अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेषाधिकार का उपयोग करते हुए दोनों पक्षों के बीच विवाह संबंध को समाप्त करते हैं। यदि पक्षकारों के बीच कोई अन्य कार्यवाही लंबित है, तो वह भी यहीं समाप्त की जाती है। यह निर्णय ऐसे समय आया है जब अक्सर तलाक मामलों में संपत्ति, भरण-पोषण और अन्य आर्थिक दावों को लेकर लंबी कानूनी प्रक्रिया देखने को मिलती है। इस मामले में महिला द्वारा किसी भी दावे से परहेज करना और उपहार वापस करना अदालत के अनुसार असाधारण और सराहनीय कदम है।

शीतकालीन व बजट सत्र दिल्ली से बाहर करने की मांग तेज, सांसद ने दिए नए विकल्प

नई दिल्ली  बीजू जनता दल के सांसद मानस रंजन मंगराज ने मांग की है कि संसद का सत्र दिल्ली से बाहर लगना चाहिए। उन्होंने कहा कि दिल्ली में पलूशन हर साल बहुत अधिक रहता है। ऐसी स्थिति में संसद का शीतकालीन सत्र और बजट सत्र दिल्ली से बाहर लगना चाहिए। उन्होंने कहा कि दिल्ली में हर साल ही हवा खराब हो जाती है और यह आपदा मानव जनित है। शून्य काल के दौरान ओडिशा के सांसद ने कहा कि दिल्ली में पलूशन हर साल ही बढ़ रहा है। इससे निपटने के लिए ओडिशा जैसा फॉर्मूला अपनाना चाहिए। मानस मंगराज ने कहा कि ओडिशा में प्राकृतिक आपदाओं से हर साल ही सरकार निपटती है और कभी कोई बड़ा संकट सामने नहीं आता। उन्होंने कहा, 'हम ओडिशा से आते हैं। एक ऐसा राज्य जहां अकसर चक्रवात आते हैं और बाढ़ आती है। इसके अलावा अन्य आपदाएं भी आती हैं। इनसे हम नियमित तौर पर निपटते हैं। इसलिए हम समझते हैं कि दिल्ली में यह कैसा संकट है। लेकिन दिल्ली का संकट हमें परेशान करता है।' उन्होंने कहा कि दिल्ली में सांसदों को पलूशन का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा संसद सदस्यों के साथ लगे कर्मचारियों को भी इसका सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि हम इन लोगों की परेशानी को नजरअंदाज नहीं कर सकते। यह सामान्य नहीं है, जिसे नजरअंदाज कर दिया जाए। मानस मंगराज ने कहा कि ऐसे कई शहर हैं, जहां की हवा साफ है। ऐसी स्थिति में वहां पर संसद का सेशन चलाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर, हैदराबाद, गांधीनगर, बेंगलुरु, गोवा और देहरादून में सत्र चला सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि चक्रवात की स्थिति में ओडिशा से कुछ घंटों के अंदर ही लाखों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सकता है तो फिर भारत सरकार भी लोगों की सेहत का ध्यान रखने के लिए सांसदों और अन्य स्टाफ को दूसरी लोकेशन पर ले जा सकती है। उन्होंने कहा कि मेरे प्रस्ताव में किसी तरह की राजनीति नहीं है। यह हमारे जीवन और गरिमा का प्रश्न है। उन्होंने कहा कि संसद से ही यह राह निकलनी चाहिए, जिससे संदेश जाए कि जीवन का अधिकार सबसे अहम है। उन्होंने कहा कि हर साल ही दिल्ली में सर्दियां ऐसी रहती हैं। इसके लिए कुछ ऐक्शन प्लान बनाना ही होगा।

तेज बुखार में भी अमित शाह का जवाब तीखा, ‘वोट चोरी’ विवाद के बीच राहुल गांधी सदन छोड़ गए

नई दिल्ली लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के “वोट चोरी” आरोपों पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जोरदार पलटवार किया। सूत्रों के अनुसार जब गृह मंत्री लोकसभा में बोल रहे थे उस समय वह बुखार से ग्रस्त थे। उनके शरीर का तापमान 102 डिग्री था। सदन की कार्यवाही से ठीक पहले डॉक्टरों ने उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया और बुखार कम करने की दवाइयां दीं। बुखार के बावजूद अमित शाह ने करीब डेढ़ घंटे का भाषण दिया और विपक्ष के हर आरोप वोट चोरी, स्पेशल रिविजन इंस्पेक्शन (SIR) और चुनाव आयोग में नियुक्तियों पर विस्तृत और आक्रामक तरीके से जवाब दिया।   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अमित शाह की सराहना करते हुए कहा कि उनका भाषण उत्कृष्ट, तथ्यपूर्ण और विपक्ष के झूठों को उजागर करने वाला था। आपको बता दें कि राहुल गांधी हाल के दिनों में कई मंचों पर “वोट चोरी” का मुद्दा उठा चुके हैं और इसे “हाइड्रोजन बम” तक कह चुके हैं। बिहार चुनाव से पहले उन्होंने इस मुद्दे पर रैली भी की थी और सोमवार को संसद के शीतकालीन सत्र में फिर से इसे उठाया। सदन में चर्चा के दौरान गृह मंत्री शाह ने राहुल गांधी को चुनौती देते हुए कहा कि कोई उन्हें यह नहीं बता सकता कि उन्हें किस क्रम में क्या बोलना चाहिए। उन्होंने विपक्ष पर दोहरी नीति अपनाने का भी आरोप लगाया। अमित शाह ने कहा, “जब आप जीतते हैं, नई पोशाक पहनकर शपथ लेते हैं और सूची बिल्कुल ठीक लगती है। लेकिन जब बिहार की तरह जमीन खिसक जाती है तब अचानक मतदाता सूची में गड़बड़ी दिखने लगती है। यह दोहरा चरित्र अब नहीं चलेगा।” आपको बता दें कि अमित शाह जब जवाब देने लगे तो कुछ ही देर में राहुल गांधी संसद की अगुवाई में विपक्ष संसद छोड़कर बाहर चला गया। SIR पर भी दिया विस्तार से जवाब अमित शाह ने कहा कि SIR पर संसद में चर्चा होना आवश्यक नहीं था, लेकिन उन्होंने विपक्ष की मांग मानकर बहस में हिस्सा लिया ताकि यह दिखाया जा सके कि सरकार किसी भी मुद्दे से भाग नहीं रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोप चुनाव आयोग को आधिकारिक रूप से सौंपे ही नहीं गए थे।  

रायपुर: धान खरीदी केंद्रों में पारदर्शी व्यवस्था, किसान आसानी से बेच रहे हैं अपना धान

रायपुर : धान खरीदी केंद्र में सुगम और पारदर्शी व्यवस्था से किसान आसानी से बेच रहे धान टोकन तुंहर हाथ ऐप से श्री भोलाराम को घर बैठे टोकन की मिली सुविधा रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार की किसान हितैषी नीतियों का सीधा लाभ इस वर्ष कबीरधाम जिले में धान खरीदी व्यवस्था में स्पष्ट दिखाई दे रहा है। टोकन तुंहर हाथ ऐप ने किसानों को घर बैठे ही सरलता से टोकन प्राप्त करने की सुविधा दी है, जिससे खरीदी केंद्रों में अनावश्यक भीड़, भागदौड़ और प्रतीक्षा जैसी समस्याएँ लगभग समाप्त हो गई हैं। केंद्रों में बारदाना उपलब्धता, तौल, भंडारण और भुगतान की सभी व्यवस्थाएँ इस बार पहले से कहीं अधिक पारदर्शी, सुव्यवस्थित और समयबद्ध हैं।       इन्हीं सुविधाओं का लाभ ग्राम छांटा के किसान श्री भोलाराम चंद्रवंशी को मिला है। 5.57 एकड़ भूमि वाले श्री भोलाराम चार एकड़ में धान और शेष में गन्ने की खेती करते हैं। इस सीजन उन्होंने 84.40 क्विंटल धान बेचा और बताते हैं कि पूरे खरीदी प्रक्रिया के दौरान उन्हें एक भी बार किसी प्रकार की समस्या या असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा। तौल से लेकर भुगतान तक उनका संपूर्ण कार्य निर्धारित समय में और बिना किसी भागदौड़ के पूरा हो गया।      समर्थन मूल्य 3100 रुपये प्रति क्विंटल मिलने से उनकी आमदनी में वृद्धि हुई है। वे बताते हैं कि उचित मूल्य से मिली यह आय उनके परिवार के सपनों को नई दिशा दे रही है। वर्तमान में वे अपने परिवार के लिए पक्का मकान बना रहे हैं और कहते हैं कि पहले जो सपने दूर लगते थे, वे अब सरकार की पारदर्शी और धान खरीदी व्यवस्था की बदौलत साकार हो रहे हैं। इस वर्ष धान खरीदी की सुचारू व्यवस्था सरकार की प्राथमिकता है। किसान की समृद्धि ही प्रदेश की प्रगति का मार्ग है।

रायपुर: प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 35 श्रमिकों को राज मिस्त्री बनने की ट्रेनिंग, कुशल श्रमिक तैयार

रायपुर : प्रधानमंत्री आवास हेतु कुशल श्रमिक हो रहे तैयार, 35 श्रमिक बनेंगे राज मिस्त्री महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम प्रोजेक्ट उन्नति के तहत दी जा रही रूरल मेशन ट्रेंनिंग रायपुर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम का प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को स्थायी आजीविका उपलब्ध कराना है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए मुंगेली जिले में प्रधानमंत्री आवास (ग्रामीण) की बड़ी संख्या में स्वीकृत आवासों के निर्माण के लिए मिस्त्रियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु प्रोजेक्ट उन्नति के तहत जिले में 35 पात्र श्रमिकों को रूरल मेशन ट्रेनिंग प्रदान की जा रही है। यह 30 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण भारतीय स्टेट बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान, कोनी-सेंदरी, बिलासपुर द्वारा आयोजित किया जा रहा है।       प्रशिक्षण में वही श्रमिक शामिल किए गए हैं, जिन्होंने विगत वर्षों में कम से कम 60 मानव दिवस मनरेगा में कार्य पूरा किया है और जिनकी आयु 18 से 45 वर्ष के मध्य है। प्रशिक्षणार्थियों को प्रधानमंत्री आवास निर्माण स्थलों पर व्यावहारिक कार्य के माध्यम से राज मिस्त्री का कौशल सिखाया जा रहा है। संस्था द्वारा सभी प्रशिक्षणार्थियों को निःशुल्क सेफ्टी किट हेलमेट, बेल्ट तथा मिस्त्री उपकरण करनी, शाहुल, टेप, धागा आदि भी उपलब्ध कराए गए हैं। प्रशिक्षण के संचालन में सहायक परियोजना अधिकारी  विनायक गुप्ता तथा कार्यक्रम अधिकारी  अशोक साहू विशेष सहयोग प्रदान कर रहे हैं।            मनरेगा श्रमिकों को आत्मनिर्भर बनाने हेतु कौशल विकास प्रशिक्षण को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से श्रमिकों को पूर्ण रोजगार, आत्मविश्वास और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। अधिकारियों ने इस योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार के भी निर्देश दिए हैं। गत वर्ष जनपद पंचायत पथरिया के ग्राम कपुवा में भी 35 लाभार्थियों को रूरल मेशन ट्रेनिंग दी गई थी, जिनमें से अधिकांश लाभार्थी वर्तमान में प्रधानमंत्री आवास सहित अन्य निर्माण कार्यों में प्रतिदिन 600-700 रुपये की आय अर्जित कर आत्मनिर्भर बन चुके हैं। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है बल्कि जिले में आवास निर्माण के लिए कुशल मिस्त्रियों की उपलब्धता भी सुदृढ़ हुई है।

कड़ाके की ठंड ने बढ़ाई सिहरन: कई जिलों में पारा सामान्य से नीचे, फरीदकोट रिकॉर्ड न्यूनतम पर

चंडीगढ़  पंजाब और हरियाणा में बृहस्पतिवार को भी शीत लहर का प्रकोप जारी रहा। दोनों ही पड़ोसी राज्यों में कई स्थानों पर न्यूनतम तापमान सामान्य से कुछ डिग्री नीचे बना हुआ है। मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार फरीदकोट पंजाब का सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां न्यूनतम तापमान 4.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अमृतसर में न्यूनतम तापमान 6.7 डिग्री सेल्सियस जबकि लुधियाना में 6.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से थोड़ा कम है। पटियाला में न्यूनतम तापमान 7.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से दो डिग्री कम है। वहीं, पठानकोट में न्यूनतम तापमान 6.9 डिग्री सेल्सियस, बठिंडा में 6.2 डिग्री सेल्सियस और गुरदासपुर में सात डिग्री सेल्सियस रहा। दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी चंडीगढ़ में पारा 6.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से तीन डिग्री कम है। हरियाणा के अंबाला में न्यूनतम तापमान 8.7 डिग्री सेल्सियस, हिसार में 6.4 डिग्री सेल्सियस, करनाल में 6.5 डिग्री सेल्सियस, नारनौल में छह डिग्री सेल्सियस, रोहतक में 7.8 डिग्री सेल्सियस, भिवानी में 7.5 डिग्री सेल्सियस और सिरसा में 7.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कश्मीर के अधिकांश क्षेत्रों में तापमान में गिरावट कश्मीर के अधिकांश क्षेत्रों में तापमान में गिरावट के कारण लोगों को रात के समय कड़ाके की ठंड का सामना करना पड़ रहा है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वहीं कई हिस्सों में हल्की धुंध छाई रही। अधिकारियों ने बताया कि श्रीनगर में बुधवार रात को तापमान मंगलवार रात के मुकाबले एक डिग्री गिरकर शून्य से 2.9 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया। उन्होंने बताया कि रात का तापमान इस मौसम के सामान्य तापमान से 2.3 डिग्री कम था। दक्षिण कश्मीर के काजीगुंड में न्यूनतम तापमान शून्य से 3.2 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया, जो पिछली रात की तुलना में 1.6 डिग्री कम था।   उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा में पारा शून्य से 4.2 डिग्री सेल्सियस नीचे रहा। अधिकारियों ने बताया कि दक्षिण कश्मीर के कोकरनाग में तापमान शून्य से 1.2 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया। उन्होंने बताया कि पहलगाम में न्यूनतम तापमान शून्य से 4.6 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया, जबकि गुलमर्ग में तापमान में 1.5 डिग्री की वृद्धि हुई और यह शून्य डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। अधिकारियों ने बताया कि दक्षिण कश्मीर के पुलवामा और शोपियां शहर जम्मू-कश्मीर में सबसे ठंडे स्थान रहे, जहां दोनों जगहों पर तापमान शून्य से 5.2 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने कहा कि 12 दिसंबर तक मौसम आमतौर पर शुष्क रहने की संभावना है, हालांकि 13 से 15 दिसंबर के बीच उत्तरी और मध्य कश्मीर के ऊंचाई वाले कुछ इलाकों में हल्की बर्फबारी होने का अनुमान है। मौसम विभाग ने कहा कि आने वाले दिनों में घाटी के कई स्थानों पर हल्की से मध्यम स्तर की धुंध छाई रहने का अनुमान है।

सहमति की उम्र नहीं, फिर भी किया शोषण: नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आरोपी को आजीवन कारावास

कोलकाता  कलकत्ता हाईकोर्ट ने POCSO एक्ट के तहत एक 23 वर्षीय युवक को 12 साल की बच्ची के साथ यौन संबंध बनाने के आरोप में आजीवन कारावास और 2 लाख रुपये जुर्माने की सजा को बरकरार रखा है। जस्टिस राजशेखर मंथा और जस्टिस अजय कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि नाबालिग बच्ची यौन संबंधों के परिणामों को नहीं समझ सकती और वह वैध सहमति देने में असमर्थ होती है, भले ही वह प्यार या शादी के झूठे वादे में विश्वास कर ले। मामला 2015-2017 का है। पीड़िता उस समय सिर्फ 12 साल की थी जब आरोपी ने उसके साथ कथित प्रेम-संबंध शुरू किया। आरोपी की उम्र उस समय 23 साल थी। बाद में उसने शादी का झूठा वादा देकर नाबालिग क साथ बार-बार शारीरिक संबंध बनाए। पीड़िता ने अदालत में स्वीकार किया कि वह आरोपी से प्यार करती थी और शादी की उम्मीद में संबंध बनाती रही, लेकिन जैसे ही उसे गर्भ ठहरा तो आरोपी ने जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया। तब 15 साल की उम्र में यानी 2017 में लड़की के परिवार ने POCSO के तहत शिकायत दर्ज कराई। बार एंड बंच की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी ने बचाव में तीन मुख्य तर्क दिए। पहला- यौन संबंध कथित तौर पर दो साल पहले हुआ था, फिर शिकायत में इतनी देरी क्यों? दूसरा- डीएनए रिपोर्ट में सिर्फ यह लिखा है कि 'उसके जैविक पिता होने से इनकार नहीं किया जा सकता', यानी रिपोर्ट निष्कर्षात्मक नहीं है। तीसरा- पीड़िता की उम्र भी साबित नहीं हुई है।' हाईकोर्ट ने सभी दलीलें खारिज कर दीं: 1. देरी पर: अदालत ने कहा कि बच्ची आरोपी से प्यार करती थी और शादी की उम्मीद में चुप रही। गर्भ ठहरने के बाद जब आरोपी ने मुंह फेर लिया तब शिकायत हुई। अदालत ने कहा- बच्ची को यौन संबंधों के परिणामों की जानकारी नहीं होती। देरी प्राकृतिक और स्वाभाविक है। 2. सहमति पर: पीठ ने दोहराया- पीड़िता नाबालिग थी और वैध एवं कानूनी रूप से सहमति देने में असमर्थ थी। वह आरोपी के शादी के वादे पर भरोसा करती रही। 3. डीएनए रिपोर्ट पर: अदालत ने कहा- 'नहीं इनकार किया जा सकता’ का मतलब यह नहीं कि आरोपी निर्दोष है। यह रिपोर्ट पीड़िता के बयान की पुष्टि करती है और साक्ष्यों की श्रृंखला को पूरा करती है। 4. उम्र पर: जन्म प्रमाण-पत्र रिकॉर्ड पर था और बचाव पक्ष ने उचित समय पर आपत्ति नहीं की थी, इसलिए पीड़िता की नाबालिग होने में कोई संदेह नहीं। अदालत ने पाया कि आरोपी के कृत्य POCSO की धारा 5(j)(ii) एवं 5(l) के तहत अग्रेवेटेड पेनेट्रेटिव सेक्शुअल असॉल्ट की श्रेणी में आते हैं, जिसकी सजा धारा 6 के तहत न्यूनतम 20 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक है। सियालदह ट्रायल कोर्ट ने दी गई आजीवन कारावास एवं 2 लाख रुपये जुर्माने की सजा को हाईकोर्ट ने पूरी तरह बरकरार रखा। पीड़िता को तुरंत मुआवजा दिलाने के लिए खंडपीठ ने अतिरिक्त निर्देश दिए:     राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (SLSA) 15 दिनों के अंदर जुर्माने की 90% राशि यानी 1.80 लाख रुपये पीड़िता को देगा।     इसके अलावा SLSA अपने कोष से अलग से 2 लाख रुपये और देगा।     यदि भविष्य में आरोपी जुर्माना भरता है तो SLSA को राशि वापस मिल जाएगी। अदालत ने इस मामले में बच्चियों के साथ रोमांटिक रिलेशनशिप के नाम पर होने वाले यौन शोषण पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि नाबालिग की हां कानूनी रूप से कभी सहमति नहीं मानी जा सकती, चाहे वह कितना भी प्यार क्यों न जताए।

खैबर पख्तूनख्वा में आसिम मुनीर को लेकर घमासान, विपक्ष की तीखी चेतावनी सेना को

पेशावर  पाकिस्तान में आसिम मुनीर को भारत के ऑपरेशन सिंदूर में मात खाने के बाद फील्ड मार्शल बनाया गया है। इसके अलावा चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का दर्जा भी संविधान संशोधन करके मिला है। जानकार मानते हैं कि पाकिस्तान ने ऐसा इसलिए किया है ताकि भारत से मिली हार को छिपाया जा सके और जनता में गलत जानकारी देकर ही सही, सेना और सरकार का भरोसा कायम रहे। फिर भी इमरान खान के नेतृत्व वाली विपक्षी पार्टी पीटीआई से सेना की अदावत जारी है। यहां तक कि गुरुवार को तो खैबर पख्तूनख्वा की विधानसभा में आसिम मुनीर के पोस्टर लहराए जाने पर विवाद छिड़ गया।   इसके अलावा पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता की ओर से इमरान खान और खैबर के सीएम सोहैल आफरीदी के खिलाफ बयान देने पर भी विवाद मचा है। सदन में पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज की महिला विधायक सोबिया शाहिद ने फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के पोस्टर लहराए। इस पर स्पीकर सुरैया बीबी ने मार्शलों को आदेश दिया कि वे आसिम मुनीर के पोस्टरों को हटाएं। इसके अलावा उन्होंने पीएमएल-एन की विधायक से भी कहा कि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ सेना का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनका आपकी पार्टी से कोई ताल्लुक नहीं है। उन्होंने कहा कि आप अपनी परफॉर्मेंस के बारे में बात करें। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की तस्वीरें लहराने का क्या मतलब है। वहीं पीटीआई के विधायकों ने कहा कि इस देश में गंभीर समस्याएं हैं। गरीबी, आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता है। इसके बाद भी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी पीटीआई नेतृत्व के खिलाफ बयान देते हैं। विशेष तौर पर इमरान खान और सीएम सोहैल आफरीदी के खिलाफ उन्होंने जो बोला है, उससे खैबर पख्तूनख्वा के लोगों में गुस्सा है। पीटीआई के विधायक हुमायूं खान ने कहा कि आखिर सेना के लोगों को राजनीतिक मसले में बोलने की क्या जरूरत है। खान ने कहा कि कुछ लोग यहां राष्ट्रपति शासन लगवाने की बात भी कर रहे हैं, लेकिन खैबर पख्तूनख्वा में इससे संकट ही पैदा होगा और लोग ऐसी स्थिति को स्वीकार नहीं करेंगे।  

मोहाली होगी ग्लोबल इन्वेस्टर्स की पहली पसंद, भगवंत मान ने किया ऐलान

चंडीगढ़  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपनी जापान और दक्षिण कोरिया यात्रा से लौटने के बाद कहा कि जापान स्थित कई बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ आईटी क्षेत्र, चिकित्सा और कृषि अनुसंधान, बागवानी और अन्य क्षेत्रों में पंजाब में निवेश करने की इच्छुक हैं, और मोहाली को इस मुहिम में निवेश के लिये पसंदीदा जगह के तौर पर पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘कंपनियां 14 से 16 मार्च तक यहां आयोजित होने वाले निवेश शिखर सम्मेलन में भाग लेंगी।’ उन्होंने कहा कि होंडा मोटर्स, टोपन, कोरियाई कंपनी नोगशिम ने पंजाब में निवेश पर सकारात्मक रुख दिखाया है। कांग्रेस पर कसा तंज इस मौके पर कांग्रेस पर तंज कसते हुए मान ने दावा किया कि कांग्रेस पार्टी राज्य में एक नए आर्थिक विकास मॉडल के प्रणेता हैं। उन्होंने कहा कि जहां वह पंजाब के कल्याण के लिए लगातार काम कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस अपनी पार्टी में मुख्यमंत्री, मंत्री या विधायक पद की कीमत पूरी दुनिया को बता रही है। जापान और कोरिया की 10 दिवसीय यात्रा से लौटे मान ने कहा कि कांग्रेस में चल रही अंदरूनी कलह उनके नेताओं की ‘नीयत’ और पंजाब के कल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की कमी को उजागर करती है।

लोकायुक्त ने महिला एवं बाल विकास अधिकारी को दबोचा, नौकरी बचाने के लिए मांगी रिश्वत

देवास  कम्प्यूटर ऑपरेटर को नौकरी पर बरकरार रखने के एवज में रिश्वत मांगना महिला व बाल विकास परियोजना अधिकारी को महंगा पड़ गया. बागली में लोकायुक्त की टीम ने कार्रवाई करते हुए परियोजना अधिकारी को कार में 5 हजार रु की रिश्वत लेते पकड़ा है. हालांकि, अधिकारी ने मीडिया से बातचीत में आरोपों को निराधार बताया और कहा कि उसे षड्यंत्र रचाकर फंसाया गया है. कंप्यूटर ऑपरेटर ने लगाए थे रिश्वत मांगने के आरोप देवास के बागली क्षेत्र के महिला व बाल विकास विभाग में आउटसोर्सिंग कम्प्यूटर ऑपरेटर प्रीतेश तंवर का आरोप है कि उसे नौकरी पर कन्टिन्यू रखने के एवज में 18 हजार रू की रिश्वत मांगी गई थी. उसने उज्जैन लोकायुक्त की टीम को इस मामले की लिखित शिकायत की थी. पहले लोकायुक्त उज्जैन ने शिकायत कंफर्म करने के लिए शिकायतकर्ता को कुछ पैसे लेकर अधिकारी के पास भेजा और कंफर्मेशन के बाद ट्रैप की प्लानिंग की. इसके बाद बुधवार को अगली किश्त के रूप में शिकायतकर्ता से 5 हजार रु रिश्वत के रूप में दिलवाए, तभी लोकायुक्त की टीम ने महिला व बाल विकास परियोजना अधिकारी को रंगे हाथों पकड़ लिया. उज्जैन लोकयुक्त की टीम ने आगे की कार्रवाई देवास सर्किट हाउस में की और लोकल जमानत पर अधिकारी को छोड़ दिया है. डीएसपी लोकायुक्त ने बताई पूरी कहानी वहीं, मामले को लेकर लोकायुक्त डीएसपी उज्जैन दिनेशचंद्र पटेल ने कहा, '' 4 दिसंबर को शिकायतकर्ता प्रीतेश तंवर, निवासी बागली, जिला देवास ने पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त उज्जैन आनंद यादव को शिकायत की थी कि वह कार्यालय परियोजना अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग में कम्प्यूटर ऑपरेटर के रूप में कार्यरत है. उसे ऑनलाइन सेंटर वफोटोकॉपी सेंटर से प्रपत्र टाइपिंग कार्य और ईमेल आदि कार्यों के संपादन के लिए 9000 रु प्रतिमाह मिलता है. लेकिन आरोपी रामप्रवेश तिवारी, परियोजना अधिकारी ने उसी कार्यालय में लगातार उसे कार्य करने देने के लिए दो महीने के हिसाब से 18 हजार रु की मांग की थी. इसके बाद शिकायतकर्ता की शिकायत के बाद ट्रैप की कार्वाई की गई.'' लोकायुक्त डीएसपी ने आगे कहा, '' 10 दिसंबर को आवेदक द्वारा आरोपी रामप्रवेश तिवारी को रेलवे स्टेशन रोड देवास पर रिश्वत की अगली किस्त दी गई, तभी टीम ने रिश्वत राशि लेते हुए आरोपी को रंगे हाथ पकड़ा है.''