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किसान आईडी में राजस्थान की बड़ी उपलब्धि, उत्तर भारत में 100% लक्ष्य पाने वाला पहला राज्य

जयपुर  राजस्थान ने कृषि क्षेत्र में डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश ने केंद्र सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से निर्धारित 90.19 लाख किसान आईडी के लक्ष्य को शत-प्रतिशत पूरा कर लिया है। इसके साथ राजस्थान उत्तर भारत में 100 प्रतिशत किसान आईडी लक्ष्य हासिल करने वाला पहला और देश का छठा राज्य बन गया है। वर्ष 2015-16 की कृषि गणना में प्रदेश में 76.54 लाख परिचालित जोत दर्ज थीं। इनके मुकाबले किसान आईडी की उपलब्धि करीब 118 प्रतिशत पहुंच गई है। इस आधार पर राजस्थान देश में तीसरे स्थान पर है। किसान आईडी को आधार और भूमि अभिलेखों से जोड़ने के साथ जन आधार से भी जोड़ा गया है। करीब 83 लाख किसान जन आधार में किसान आईडी के साथ जुड़े हैं। राज्य में लगभग 99 प्रतिशत गांवों का भू-संदर्भीकरण पूरा हो चुका है। वहीं रबी 2025-26 के दौरान 2.72 करोड़ से अधिक भू-खण्डों पर डिजिटल फसल सर्वे किया गया। प्रदेश के कुल बोए गए क्षेत्र का करीब 62 प्रतिशत हिस्सा किसान आईडी के दायरे में आ चुका है। प्रधानमंत्री किसान योजना के लगभग 50 लाख लाभार्थियों को भी किसान आईडी से जोड़ा गया है। किसान आईडी के जरिए किसान की डिजिटल पहचान को उसकी कृषि भूमि और फसल संबंधी जानकारी से जोड़ा जा रहा है। इससे कृषि योजनाओं में पात्र लाभार्थियों की पहचान, उर्वरक और बीज वितरण, सूक्ष्म सिंचाई, कृषि उपकरण, फसल बीमा तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद जैसी व्यवस्थाओं को अधिक लक्षित बनाने में मदद मिलेगी। राज्य में एग्रीस्टैक आयुक्तालय की स्थापना की जा रही है। एग्रीस्टैक के आंकड़ों को विभिन्न विभागीय योजनाओं से जोड़ा जा रहा है। इससे किसानों को बार-बार समान दस्तावेज देने की जरूरत कम होने और सरकारी सेवाओं की पहुंच आसान होने की संभावना है। क्रम    उपलब्धि                                                    स्थिति 1    किसान आईडी का लक्ष्य                                90.19 लाख का शत-प्रतिशत लक्ष्य पूरा 2    राष्ट्रीय स्थिति                                                उत्तर भारत में पहला, देश में छठा राज्य 3    परिचालित जोत के मुकाबले उपलब्धि             करीब 118 प्रतिशत 4    किसान आईडी से पीएम-किसान लाभार्थी         करीब 50 लाख 5    बोया गया क्षेत्र                                               करीब 62 प्रतिशत क्षेत्र कवर 6    गांवों का भू-संदर्भीकरण                                   करीब 99 प्रतिशत पूरा 7    डिजिटल फसल सर्वे                                        2.72 करोड़ से अधिक भू-खण्ड 8    जन आधार से जुड़ाव                                        करीब 83 लाख किसान 9    डिजिटल एकीकरण                                          आधार, भूमि रिकॉर्ड, पीएम-किसान व अन्य कृषि योजनाओं से जुड़ाव 10    विशेष अभियान    1 से 30 सितंबर 2026 तक छूटे किसानों को जोड़ने का अभियान कृषि विभाग के अनुसार, छूटे हुए पात्र किसानों को किसान आईडी से जोड़ने के लिए 1 से 30 सितंबर तक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अभियान में कृषि पर्यवेक्षकों की भागीदारी, पीएम-किसान लाभार्थियों को सूचना और अन्य स्तरों पर सत्यापन की व्यवस्था की गई है।

पटना में आवासीय इलाकों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर कार्रवाई की तैयारी, 24 कॉलोनियां चिन्हित

पटना  आवासीय क्षेत्र में गैर आवासीय गतिविधियों के मामले में राजधानी की 24 आवासीय कॉलोनियां नगर निगम के रडार पर है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में यहां सबसे पहले कार्रवाई हो सकती है। मास्टर प्लान 2031 में इन कॉलोनियों के नाम दर्ज हैं। इनमें बिहार सरकार की 11, केंद्र सरकार की तीन और निजी 10 कॉलोनियां शामिल हैं। बिहार सरकार की कालोनियों राजवंशी नगर, शास्त्री नगर, गर्दनीबाग, श्रीकृष्ण पुरी, पाटलिपुत्र कॉलोनी , कंकड़बाग कॉलोनी , बहादुरपुर कॉलोनी, राजेंद्र नगर कॉलोनी, हनुमान नगर, छज्जूबाग तथा सीडीए कॉलोनी शामिल हैं। इसी प्रकार केंद्र सरकार की कालोनियों में पीएनटी कॉलोनी , राजस्व कॉलोनी तथा आरबीआइ कॉलोनी शामिल हैं। वहीं निजी कालोनियों में आशियाना नगर, कृषि नगर, पुलिस कॉलोनी, बीएम कॉलोनी, एजी कॉलोनी, राजीव नगर, बुद्धा कॉलोनी, श्रीकृष्ण नगर (आइएएस) कॉलोनी, आनंदपुरी तथा एमएमए फ्लैट कॉलोनी शामिल हैं। कार्रवाई की तैयारी बता दें कि आवासीय क्षेत्रों में मकानों और परिसरों के व्यावसायिक इस्तेमाल के मामले में नगर निगम ने 27,395 संपत्तिधारकों को नोटिस जारी किया है। संबंधित अंचल कार्यालयों की ओर से नोटिस का तामिला भी कराया जा चुका है। इस मामले में पटना की महापौर सीता साहू को भी नगर निगम की ओर से नोटिस दिया जा चुका है। नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार ऐसे मामलों और स्थलों को चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके लिए सभी अंचलों को निर्देशित किया गया है। जिन मामलों में स्थिति स्पष्ट है, वहां नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, जिन मामलों या क्षेत्रों में अभी तक निर्धारण नहीं हुआ है, उन सभी बिंदुओं और आदेश के प्रविधानों की विस्तृत समीक्षा (रिव्यू) की जा रही है। समीक्षा के बाद नियमों के तहत आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। शहर में 47.55 प्रतिशत क्षेत्र आवासीय मास्टर प्लान के अनुसार, नगर निगम क्षेत्र की कुल 104.22 वर्ग किलोमीटर जमीन में सबसे अधिक हिस्सा आवासीय उपयोग में है। शहर की 49.56 वर्ग किलोमीटर जमीन आवासीय है, जो कुल क्षेत्रफल का 47.55 प्रतिशत है। इसके बाद 18.40 वर्ग किलोमीटर (17.66 प्रतिशत) जमीन खाली या कृषि उपयोग में है। 10.61 वर्ग किलोमीटर (10.18 प्रतिशत) जमीन सार्वजनिक एवं अर्द्ध-सार्वजनिक उपयोग में है। परिवहन और सड़क के लिए 6.15 वर्ग किलोमीटर (5.90 प्रतिशत), व्यावसायिक गतिविधियों के लिए 4.65 वर्ग किलोमीटर (4.46 प्रतिशत) और मिश्रित उपयोग के लिए 3.52 वर्ग किलोमीटर (3.37 प्रतिशत) जमीन है। वहीं, औद्योगिक उपयोग में 1.09 वर्ग किलोमीटर, हवाई अड्डे के लिए 1.10 वर्ग किलोमीटर और रेलवे के लिए 0.73 वर्ग किलोमीटर जमीन है। नदी/बांध स्थल के हिस्से में 3.49 वर्ग किलोमीटर और जलाशय के लिए 1.06 वर्ग किलोमीटर जमीन दर्ज है। वन क्षेत्र 0.67 वर्ग किलोमीटर है। नक्शे में सभी क्षेत्रों को दर्शाया गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश की मुख्य बातें – जिन इलाकों को स्पष्ट रूप से आवासीय घोषित किया गया है और जहां सरकार ने केवल आवासीय उपयोग की अनुमति दी है, वहां व्यावसायिक गतिविधि नहीं हो सकती। – आवासीय क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधि पाए जाने पर संबंधित परिसर को पहले चरण में सील किया जाएगा। – जिन इलाकों में यह स्पष्ट नहीं है कि जमीन/भवन का उपयोग आवासीय है या व्यावसायिक, वहां फिलहाल मौजूदा स्थिति में बदलाव नहीं किया जाएगा। हालांकि कागजी कार्रवाई जारी रह सकती है। – जमीन या भवन के स्वामित्व अथवा किसी अन्य विवाद का मामला अदालत में लंबित होने के बावजूद, यदि उसका इस्तेमाल स्वीकृत उद्देश्य के खिलाफ हो रहा है, तो प्राधिकरण परिसर को सील कर सकते हैं। – यदि कोई निर्माण बिना किसी अनुमति के पूरी तरह अनधिकृत पाया जाता है, तो कानून के अनुसार उसके खिलाफ सीलिंग या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई जारी रहेगी। पांच सदस्यीय समिति पर टिकीं निगाहें 25 अगस्त को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आवासीय क्षेत्र में गैर-आवासीय इस्तेमाल के मामलों के समाधान के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की है। उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी समिति के अध्यक्ष हैं। नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश कुमार मिश्र सदस्य सचिव, जबकि ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव और विधान पार्षद संजय कुमार सिंह सदस्य हैं। समिति मामले का अध्ययन कर व्यावहारिक और जनहितकारी समाधान सुझाएगी। लोगों की निगाहें समिति पर टिकी हैं।  

गल्ले में 500 के नोट, लेकिन 5-10-20 के सिक्कों और नोटों के लाले; बाजार में बढ़ी परेशानी

निम्बाहेड़ा  पितृपक्ष के बाद अब नवरात्र और दीपावली का त्योहारी सीजन सिर पर है। आम तौर पर इन दिनों बाजारों में चहल-पहल बढ़ जाती है, लेकिन निम्बाहेड़ा के छोटे बाजारों से लेकर मुख्य किराना और फल-सब्जी मंडियों तक इस समय एक अजीब सी माथापच्ची चल रही है। ग्राहक की जेब में 200 या 500 का नोट है, उसे 20 या 30 रुपए का सामान चाहिए, लेकिन दुकान पर पहुंचते ही सबसे पहला और बड़ा सवाल यही गूंज रहा है भाई साहब, 10 का छुट्टे देना; छुट्टे हैं क्या? त्योहारी सीजन के मुहाने पर खड़े इस दौर में छोटे नोटों और सिक्कों की किल्लत ने रोजमर्रा के लेन-देन को बड़ा सिरदर्द बना दिया है। डिजिटल दौर की अपनी मजबूरियां और यूपीआई का भ्रम आज के समय में डिजिटल भुगतान (यूपीआई) को नकदी का सबसे बड़ा विकल्प माना जाता है, लेकिन निम्बाहेड़ा के स्थानीय बाजारों की जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी कहती है। हर ग्राहक डिजिटल नहीं: बुजुर्ग, छोटे बच्चे, ग्रामीण इलाकों से आने वाले खरीदार और ठेले-पटरियों से रोजमर्रा की जरूरत का सामान खरीदने वाले लोग आज भी पूरी तरह कैश पर निर्भर हैं।     यूपीआई चार्ज का डर: हाल ही में यूपीआई ट्रांजैक्शन पर संभावित शुल्क लगने की चर्चाओं और भ्रम ने आम जनता के मन में एक मनोवैज्ञानिक डर पैदा कर दिया है। इसके चलते लोग अपने पास मौजूद छोटे नोटों को खर्च करने के बजाय होल्ड (संचित) करने लगे हैं।     तकनीकी अड़चनें: त्योहारों के सीजन में लोड बढ़ने पर सर्वर डाउन होना या नेटवर्क फेल होना आम बात है। ऐसे में इंटरनेट या स्कैनर धोखा दे जाते हैं और मौके पर केवल छुल्ले पैसे ही काम आते हैं। आपसी जुगाड़ से चल रहा काम, आगे और बिगड़ेगी स्थिति जब आधिकारिक बैंकिंग व्यवस्था से कोई ठोस समाधान नहीं मिल रहा, तो निम्बाहेड़ा के छोटे व्यापारियों ने खुद ही इसका तोड़ निकाल लिया है। व्यापारी आपस में ही एक-दूसरे को बड़े नोट देकर चिल्लर और छोटे नोटों का जुगाड़ कर रहे हैं। लेकिन यह कोई स्थायी समाधान नहीं है। अब सबसे बड़ा सवाल आने वाले नवरात्र और दीपावली के पीक सीजन को लेकर है। जब त्योहारी खरीदारी का दौर परवान चढ़ेगा, तब छोटे मूल्यवर्ग की जरूरत सामान्य दिनों के मुकाबले कई गुना बढ़ जाएगी। यदि समय रहते बैंकों और स्थानीय स्तर पर छोटे नोटों की यह किल्लत दूर नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में छुट्टा है क्या? सिर्फ एक दुकानदार का सवाल नहीं, बल्कि पूरे बाजार की सबसे बड़ी रुकावट बन जाएगा। गल्ले में 500 के नोट, पर चिल्लर के लाले दुकानदारों की परेशानी यह है कि दिनभर की बिक्री में बड़े नोट तो धड़ल्ले से आ रहे हैं और गल्ले में जमा होते जा रहे हैं, लेकिन ग्राहकों को खुले पैसे या खुल्ले लौटाने के लिए 5, 10, 20 और 50 रुपए के नोट या सिक्के ढूंढे नहीं मिल रहे। बाजार की तस्वीर यह है कि एक दुकानदार के पास यदि गलती से सिक्के आ गए, तो आस-पास के दूसरे दुकानदार उससे चिल्लर मांगने पहुंच जाते हैं। यानी बाजार में कुल नकदी तो घूम रही है, लेकिन वह उस छोटे मूल्यवर्ग में नहीं है जिसकी रोजमर्रा के खुदरा कारोबार को सबसे ज्यादा जरूरत होती है।

CM की अध्यक्षता में बनेगी ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद, 15 गैर सरकारी सदस्य होंगे शामिल

रांची  राज्य में वीबी-जी राम जी योजना के बेहतर क्रियान्वयन और प्रभावी निगरानी के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद का गठन किया जाएगा. ग्रामीण विकास विभाग ने इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया है. जल्द ही इसकी अधिसूचना जारी होने की संभावना है. परिषद में अधिकारियों के साथ 15 गैर सरकारी सदस्यों को भी शामिल किया जाएगा. इसका उद्देश्य योजना के संचालन, निगरानी, मूल्यांकन और शिकायत निवारण व्यवस्था को और प्रभावी बनाना है. वीबी-जी राम जी अधिनियम 1 जुलाई 2026 से देश के ग्रामीण क्षेत्रों में लागू है और इसके तहत ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी का प्रावधान है. मुख्यमंत्री होंगे परिषद के अध्यक्ष राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद के अध्यक्ष मुख्यमंत्री होंगे, जबकि ग्रामीण विकास मंत्री इसके उपाध्यक्ष होंगे. राज्य स्तरीय सामान्य सभा में पंचायती राज, वित्त, वन एवं पर्यावरण, जल संसाधन, राजस्व एवं भूमि सुधार, भवन निर्माण, कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता, कल्याण तथा श्रम एवं कौशल विकास सहित संबंधित विभागों के मंत्री सदस्य होंगे. परिषद में मुख्य सचिव और संबंधित विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव या सचिव भी शामिल होंगे. योजना आयुक्त को सदस्य सचिव बनाया जायेगा. इसके अलावा राज्य सरकार कम से कम 15 गैर सरकारी सदस्यों को नामित करेगी. योजनाओं की निगरानी और मूल्यांकन करेगी परिषद परिषद का मुख्य काम योजनाओं के प्रभावी संचालन और निगरानी को सुनिश्चित करना होगा. इसके अलावा योजनाओं की निगरानी और मूल्यांकन किया जाएगा तथा राज्य सरकार को योजना से जुड़े विभिन्न मामलों में सुझाव भी दिए जाएगे. परिषद वार्षिक रिपोर्ट तैयार करने के साथ निगरानी और शिकायत निवारण व्यवस्था की भी समीक्षा करेगी. जरूरत के अनुसार इसमें सुधार के लिए सिफारिश की जाएगी. मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होगी संचालन समिति योजना के परिचालन संबंधी मार्गदर्शन, समन्वय और निगरानी के लिए राज्य स्तरीय संचालन समिति का भी गठन किया जाएगा. इसकी अध्यक्षता मुख्य सचिव करेंगे या राज्य सरकार द्वारा नामित अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी करेंगे. संचालन समिति का खाका भी तैयार किया गया है. समिति राज्य में योजना की तकनीकी और परिचालन जरूरतों के साथ डिजिटल प्रणालियों, निगरानी व्यवस्था और प्रक्रियाओं में सुधार को लेकर मार्गदर्शन देगी.

हरियाणा में पुलिस भर्ती को लेकर बड़ा ऐलान, अगले साल 20 हजार जवानों की होगी भर्ती

 गुरुग्राम  हरियाणा पुलिस अगले दो साल में अपने आधुनिकीकरण और इंफ्रास्ट्रक्चर पर करीब 1300 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इसके लिए प्रदेश सरकार से स्वीकृति मिल चुकी है। इस साल अब तक 5500 भर्तियां हो चुकी हैं और नवंबर में 4000 जवानों की और भर्ती होगी। अगले साल 20 हजार पुलिस भर्ती करने का लक्ष्य है। यह बात हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अजय सिंघल ने सोमवार को गुरुग्राम में कही। वे सेक्टर 17-सी में नवनिर्मित सेक्टर 17-18 थाने की नई बिल्डिंग के उद्घाटन के मौके पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। साढ़े चार करोड़ में बना नया थाना डीजीपी ने बताया कि साढ़े चार करोड़ रुपये की लागत से बने इस नए थाने का निर्माण पुलिस हाउसिंग बोर्ड ने किया है। अब तक थाना पुरानी बिल्डिंग से संचालित हो रहा था। इस साल पूरे प्रदेश में 8 नए पुलिस थाने, 3 पुलिस चौकियां, 9 पुलिस बिल्डिंग और 313 पुलिस आवासों का निर्माण किया गया है। इस साल पुलिस मॉडर्नाइजेशन पर साढ़े छह सौ करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। ANTF, महिला सुरक्षा के लिए 33 थाने नशे पर उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्य पंजाब से सबसे अधिक तस्करी हो रही है, रोकने के लिए (एएनटीएफ) एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का गठन किया गया है। गृह मंत्रालय भी इस पर गंभीर है। कहा कि महिला सुरक्षा के लिए प्रदेश में 33 महिला थाने, सीसीटीवी नेटवर्क, 112 ऐप और स्कूल-कॉलेज के पास दुर्गा शक्ति वाहन तैनात किए गए हैं। इसके साथ ही महिलाओं के लिए एक ऐप भी शुरू किया जा रहा है, जो कामकाजी महिलाओं को ट्रिपिंग सुविधा देगा। साइबर क्राइम पर उन्होंने कहा कि यह नया चैलेंज है, लेकिन पिछले दो सालों में इसमें कमी लाई गई है। आतंक फैलाने वालों से आतंकी जैसा सलूक बढ़ते एक्सटॉर्शन के मामलों पर डीजीपी ने सख्त लहजे में कहा कि जो व्यक्ति जनता में भय फैलाएगा, पुलिस उसके साथ वैसा ही सलूक करेगी। जो आतंक फैलाएगा, उसके साथ आतंकी जैसा ही व्यवहार होगा। विदेश में बैठे गैंगस्टरों पर भी लगाम लगाई जा रही है, पिछले दो सालों में 25 गैंगस्टरों को विदेश से डिपोर्ट कर भारत लाया गया है और आगे भी प्रक्रिया जारी है। गुरुग्राम में रोडरेज पर उन्होंने कहा कि महिला बाइकर के साथ हुई घटना में आरोपी को राजस्थान से पकड़कर लाया गया है। रोडरेज की घटनाओं पर भी पुलिस गंभीर है युवराज मनचंदा मामले में पुलिस चूक की जांच दिल्ली के युवक युवराज मनचंदा की गुरुग्राम में मौत के मामले में पूछे गए सवाल पर डीजीपी ने माना कि गुरुग्राम पुलिस से चूक हुई है। उन्होंने कहा कि एसओपी के अनुसार किसी भी शव का अंतिम संस्कार तीन दिन बाद कर दिया जाता है। इस मामले में कोर्ट ने संज्ञान लिया है। कहां-कहां लैप्स हुए हैं, इसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

सारण शिक्षक MLC चुनाव में 23 अक्टूबर को वोटिंग, शिक्षकों को मिलेगा एक दिन का अवकाश

छपरा बिहार विधान परिषद के 03-सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए 23 अक्टूबर, शुक्रवार को मतदान होगा। मतदान में शामिल होने वाले 10,731 शिक्षक मतदाताओं को एक दिन का विशेष अवकाश मिलेगा, जबकि निर्वाचन कार्य में प्रतिनियुक्त शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मियों को मतदान के अगले दिन का भी अवकाश अनुमन्य होगा। कार्यदिवस में मतदान होने और बड़ी संख्या में शिक्षकों के मतदाता होने के कारण विद्यालयों में पठन-पाठन की व्यवस्था बनाए रखना शिक्षा विभाग के लिए चुनौती होगी। शिक्षक निर्वाचन में मतदाता स्वयं शिक्षक हैं। ऐसे में मतदान के दिन जिले के विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता पर इसका असर पड़ना स्वाभाविक है। हालांकि, जिन शिक्षकों की चुनावी ड्यूटी नहीं लगी है और जो निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता भी नहीं हैं, उन्हें निर्धारित समय पर विद्यालय पहुंचना होगा। इन शिक्षकों के माध्यम से विद्यालयों में कक्षाओं का संचालन सामान्य रखने का प्रयास किया जाएगा। चुनावी ड्यूटी वाले कर्मियों को दो दिन अवकाश निर्वाचन प्रक्रिया को संपन्न कराने के लिए लगाए गए शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मियों को मतदान के दिन के साथ अगले दिन भी अवकाश मिलेगा। मतदान समाप्त होने के बाद निर्वाचन से संबंधित कार्यों के कारण अगले दिन भी इन कर्मियों की विद्यालयों में उपस्थिति नहीं होगी। वहीं, शिक्षक मतदाताओं को मतदान के लिए केवल मतदान दिवस का विशेष अवकाश दिया जाएगा। इससे विद्यालयों में उपलब्ध शिक्षकों की संख्या पर अलग-अलग स्तर पर असर पड़ेगा। 10,731 शिक्षक करेंगे मताधिकार का प्रयोग सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में कुल 10,731 शिक्षक मतदाता पंजीकृत हैं। ये शिक्षक 23 अक्टूबर को अपने प्रतिनिधि के चुनाव के लिए मतदान करेंगे। इस बार शिक्षक ही मतदाता हैं, इसलिए मतदान में शिक्षकों की भागीदारी के साथ विद्यालयों में पठन-पाठन को सुचारू बनाए रखना शिक्षा प्रशासन के सामने अहम चुनौती होगी।  

शिकायतों के समाधान में नहीं चलेगी खानापूर्ति, राजस्थान संपर्क पर ACS ने दिए सख्त निर्देश

जयपुर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता व प्रशासनिक सुधार एवं समन्वय विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव दिनेश कुमार ने सोमवार को शासन सचिवालय स्थित 181 हैल्पलाइन कॉल सेंटर का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कॉल सेंटर की कार्यप्रणाली, सम्पर्क एआई, विभागवार प्राप्त परिवादों, उनके निस्तारण, परिवादियों की संतुष्टि एवं शिकायत समाधान की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने 15 से अधिक परिवादियों से स्वयं विडियो कॉल पर  संवाद कर उनकी समस्याएं जानीं तथा संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही आवश्यक कार्यवाही करते हुए परिवादों का त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने अधिकारियों के साथ बैठक में विभागवार शिकायतों की स्थिति की समीक्षा करते हुए कहा कि राजस्थान सम्पर्क पर प्राप्त परिवादों के निस्तारण में केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि परिवादी की संतुष्टि को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अतिरिक्त निदेशक (प्रशासन) पंकज कुमार ओझा, को निर्देश दिए कि प्रत्येक सोमवार को संबंधित विभागों से 15 असंतुष्ट प्रकरण चयनित कर परिवादियों से स्वयं संवाद किया जाए। परिवादी के असंतुष्ट रहने के कारण की जानकारी लेकर संबंधित विभाग से समन्वय करते हुए समस्या का समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने इन प्रकरणों की मासिक प्रगति रिपोर्ट तैयार कर नियमित रूप से समीक्षा करने के भी निर्देश दिए। परिवादियों से संवाद कर जानी समस्याएं निरीक्षण के दौरान एसीएस दिनेश कुमार ने विभिन्न जिलों के परिवादियों से बातचीत की। सवाई माधोपुर के रिंकू कुमार ने वर्ष 2025-26 की उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति के आवेदन का बिल जनरेट नहीं होने की समस्या बताई। चित्तौड़गढ़ के सुरेंद्र ने छात्रवृत्ति आवेदन में बार-बार आ रहे आपत्ति संबंधी प्रकरण एवं जन आधार में जाति प्रमाण-पत्र व मूल निवास अपडेट होने के बावजूद पुनः आपत्ति आने की समस्या बताई। जोधपुर के कान सिंह ने पालनहार योजना की राशि पिछले दो वर्षों से खाते में लंबित होने की शिकायत रखी। बारां के महेश ने मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के आवेदन पर बार-बार आपत्ति लगाए जाने के कारण स्वीकार नहीं किए जाने की समस्या बताई। वहीं सीकर के प्रभाकर ने अनुप्रति कोचिंग योजना के लिए आवेदन करते समय जन आधार से संबंधित तकनीकी समस्या के कारण आवेदन सबमिट नहीं होने की जानकारी दी। भरतपुर के लक्समी कुमार ने मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में बच्चे की माता का जाति प्रमाण-पत्र उपलब्ध नहीं होने से उत्पन्न समस्या से अवगत कराया। इसी प्रकारगंगानगर के कमल सोनी ने रीना रानी के नाम से पेंशन बंद करवाने के लिए दिए गए आवेदन पर अभी तक कार्यवाही नहीं होने की शिकायत की। जयपुर के विकास मेवाड़ा ने विद्या संबल योजना के तहत देवनारायण राजकीय आवासीय विद्यालय, देवडूंगरी, पाली में अंग्रेजी व्याख्याता पद पर नियुक्ति संबंधी उच्च न्यायालय के आदेश की पालना नहीं होने का प्रकरण रखा। बूंदी के एजाज अहमद ने मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के ऑनलाइन आवेदन में आ रही समस्या तथा पोर्टल के सुचारू संचालन की मांग रखी। बीकानेर की मंजू देवी ने मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के आवेदन में ई-मित्र स्तर पर दर्ज गलत विवरण को सही करवाने एवं आवेदन पर लगी आपत्तियों का निस्तारण कर योजना का लाभ दिलाने का अनुरोध किया। वहीं जालोर के रवेंद्र ने छात्रावास वरीयता फॉर्म में संशोधन का विकल्प नहीं खुलने से संबंधित तकनीकी समस्या से अवगत कराया। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने परिवादियों की समस्याएं सुनने के बाद संबंधित अधिकारियों को प्रत्येक प्रकरण की नियमानुसार जांच कर समयबद्ध एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि 181 सम्पर्क कॉल सेंटर शासन और आमजन के बीच महत्वपूर्ण सेतु है। इसके माध्यम से प्राप्त शिकायतों का संवेदनशीलता के साथ समाधान करते हुए परिवादी को वास्तविक राहत मिलना सुनिश्चित किया जाए।  

वन्य प्राणी सुरक्षा सप्ताह में बड़ी सौगात, हरियाणा के चिड़ियाघरों में 7 दिन निशुल्क प्रवेश

 भिवानी वन्य प्राणी सुरक्षा सप्ताह के दौरान प्रदेश के चिड़ियाघरों में वन्यजीव प्रेमियों को बड़ी सुविधा मिलेगी। दो से आठ अक्टूबर तक प्रदेश के चिड़ियाघरों में पर्यटकों से कोई प्रवेश शुल्क नहीं लिया जाएगा। यानी इस दौरान बच्चे और बड़े बिना टिकट चिड़ियाघरों में वन्यजीवों को करीब से देख सकेंगे। प्रदेश में भिवानी, रोहतक और कुरुक्षेत्र में चिड़ियाघर हैं, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग वन्यजीवों को देखने पहुंचते हैं। वन एवं वन्यजीव विभाग की ओर से हर वर्ष दो से आठ अक्टूबर तक वन्य प्राणी सुरक्षा सप्ताह मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों में वन्यजीवों और उनके संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। इसी कड़ी में इस बार चिड़ियाघरों में आने वाले पर्यटकों को प्रवेश शुल्क से छूट देने का निर्णय लिया गया है। सामान्य दिनों में चिड़ियाघरों में बच्चों के लिए 20 रुपये और बड़ों के लिए 30 रुपये प्रवेश शुल्क निर्धारित है। रोजाना दो से तीन हजार पर्यटक पहुंचते हैं: प्रदेश के इन चिड़ियाघरों में प्रतिदिन करीब दो से तीन हजार लोग वन्यजीव देखने पहुंचते हैं। सुरक्षा सप्ताह के दौरान प्रवेश निशुल्क होने से पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। खासकर स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों और परिवारों के लिए यह वन्यजीवों को करीब से देखने और उनके बारे में जानकारी हासिल करने का अच्छा अवसर होगा। चिड़ियाघरों में पर्यटकों के लिए सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे तक प्रवेश का समय निर्धारित है।  

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में चयनित अभ्यर्थियों को सौंपे नियुक्ति पत्र

मेहनत को मिला सम्मान, ग्राम पंचायत अधिकारी पद के चयनित अभ्यर्थी बोले- चयन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में चयनित अभ्यर्थियों को सौंपे नियुक्ति पत्र अभ्यर्थियों ने कहा- बिना सोर्स-सिफारिश और हेरफेर के योग्यता व मेहनत के आधार पर मिली सरकारी नौकरी आशुतोष त्रिपाठी बोले- निष्पक्षता और पारदर्शिता सिर्फ जुमला नहीं, भर्ती प्रक्रिया में दिखी इसकी बानगी ओम बघेल बोले- चार साल की मेहनत रंग लाई, मुख्यमंत्री योगी के हाथों नियुक्ति पत्र मिलना जीवन का यादगार पल रूपाली, नेहा और मिथिलेश ने जताई खुशी, कहा- पारदर्शी प्रक्रिया से युवाओं का मेहनत पर भरोसा हुआ मजबूत लखनऊ उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा निष्पक्ष एवं पारदर्शी प्रक्रिया से चयनित 1375 ग्राम पंचायत अधिकारियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए। लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के हाथों नियुक्ति पत्र पाकर चयनित अभ्यर्थियों और उनके परिजनों के चेहरे खुशी से खिल उठे। अभ्यर्थियों ने कहा कि बिना किसी सिफारिश और हेरफेर के, सिर्फ मेहनत के आधार पर उन्हें सरकारी सेवा में नियुक्ति का अवसर मिला है। एक भी चयन पर कोई सवाल नहीं उठा सकता है। योगी जी की ईमानदारी पर सवाल उठाना सूरज को दीया दिखाने जैसा प्रयागराज निवासी आशुतोष त्रिपाठी का चयन ग्राम पंचायत अधिकारी के पद पर हुआ है। उन्होंने बताया कि भर्ती परीक्षा 2025 में हुई थी और साल के भीतर परिणाम आ गया है। प्रदेश में उन्हें प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है और मुख्यमंत्री योगी के हाथों नियुक्ति पत्र प्राप्त करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। आशुतोष ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता केवल जुमला नहीं है। बिना किसी हेरफेर के नियुक्ति मिली है। योगी जी की ईमानदारी पर सवाल उठाना सूरज को दीया दिखाने जैसा है। हमारा नेतृत्व ईमानदार है और इसकी बानगी भर्ती प्रक्रिया में भी देखने को मिली है।  नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष रही ग्राम पंचायत अधिकारी के पद पर चयनित प्रतापगढ़ निवासी अमित कुमार सिंह को बरेली में तैनाती मिली है। उन्होंने कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष रही है। कहीं भी सोर्स या सिफारिश नहीं चली है। जिसने मेहनत की, उसका चयन हुआ। अमित सिंह ने बताया कि वर्तमान समय में बिहार में सरकारी नौकरी के साथ ही परीक्षा की भी तैयारी कर रहे थे। अब अपने ही प्रदेश में नौकरी मिलने से खुशी है। मुख्यमंत्री के हाथों नियुक्ति पत्र पाना गर्व का विषय ग्राम पंचायत अधिकारी के पद पर चयनित रूपाली गुप्ता को फतेहपुर में तैनाती मिली है। उन्होंने कहा कि पूरी नियुक्ति प्रक्रिया बेहद निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न हुई है। मुख्यमंत्री के हाथों नियुक्ति पत्र मिलेगा, ऐसा कभी नहीं सोचा था। यह उनके और उनके परिवार के लिए गर्व का विषय है। इसी पद पर चयनित नेहा देवी ने कहा कि इस नियुक्ति के लिए उन्हें केवल फॉर्म भरने का खर्च आया और योग्यता व मेहनत के आधार पर नौकरी मिली है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके हाथों नियुक्ति पत्र मिलना बेहद खुशी का क्षण है।  मेहनत करने वाले युवाओं को नियुक्ति पत्र मिल रहे हैं  ग्राम पंचायत अधिकारी के पद पर चयनित ओम बघेल ने प्रदेश में दूसरी रैंक हासिल की है। उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया में किसी ने उनसे एक रुपया भी नहीं मांगा और नियुक्ति पूरी तरह निष्पक्ष रही। मुख्यमंत्री के हाथों नियुक्ति पत्र मिलना उनके जीवन का यादगार पल है। ओम ने बताया कि वह पिछले चार वर्षों से तैयारी कर रहे थे और अब उनकी मेहनत रंग लाई है। योगी सरकार बहुत अच्छा काम कर रही है और मेहनत करने वाले युवाओं को नियुक्ति पत्र मिल रहे हैं। आजमगढ़ निवासी मिथिलेश पाल ने भी सफलता का श्रेय अपनी मेहनत और योगी सरकार को दिया। उन्होंने बताया कि चार वर्षों से परीक्षा की तैयारी कर रहे थे और पारदर्शी नीति के कारण आखिरकार मेहनत रंग लाई।

समग्र शिक्षा कर्मियों के मानदेय में 40% बढ़ोतरी का प्रस्ताव, कमेटी देगी रिपोर्ट

 रांची  समग्र शिक्षा अभियान के तहत प्रखंड से लेकर राज्य स्तर के कर्मियों के मानदेय में वृद्धि के लिए कमेटी गठित की जाएगी। मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद की राज्य कार्यकारिणी समिति की हाल ही में संपन्न बैठक में यह निर्णय लिया गया। यह कमेटी राजस्व पर्षद के सदस्य या स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा मनोनीत किसी पदाधिकारी की अध्यक्षता में गठित की जाएगी। निर्णय के अनुसार, यह कमेटी में राज्य के अन्य विभागों जैसे ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग एवं अन्य विभागों में समतुल्य पदों पर दिए जा रहे मानदेय का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट देगी। समिति जरूरत पड़ने पर अन्य राज्यों में लागू व्यवस्था का भी अध्ययन करेगी। इससे पहले बैठक में राज्य कर्मियों के मानदेय में वृद्धि का प्रस्ताव रखा गया था। इसमें कहा गया कि इन परियोजना कर्मियों के मानदेय का निर्धारण पूर्व में चतुर्थ वेतनमान के आधार पर ही किया गया है तथा अबतक इसमें संशोधन नहीं किया जा सका है। इस कारण से इनके मासिक मानदेय तथा राज्य कार्यकारिणी समिति द्वारा समय-समय अंतरिम राहत के रूप में मानदेय वृद्धि के बाद भी लगभग 55 प्रतिशत का अंतर है। इस अंतर काे पाटने के लिए 40 प्रतिशत मानदेय वृद्धि का प्रस्ताव दिया गया था, जो एक जनवरी 2026 के प्रभाव से लागू होता। बताते चलें कि समग्र शिक्षा अभियान के तहत प्रखंड से लेकर जिला स्तर तक लगभग एक हजार कर्मी, पदाधिकारी कार्यरत हैं।