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समग्र शिक्षा कर्मियों के मानदेय में 40% बढ़ोतरी का प्रस्ताव, कमेटी देगी रिपोर्ट

 रांची  समग्र शिक्षा अभियान के तहत प्रखंड से लेकर राज्य स्तर के कर्मियों के मानदेय में वृद्धि के लिए कमेटी गठित की जाएगी। मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद की राज्य कार्यकारिणी समिति की हाल ही में संपन्न बैठक में यह निर्णय लिया गया। यह कमेटी राजस्व पर्षद के सदस्य या स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा मनोनीत किसी पदाधिकारी की अध्यक्षता में गठित की जाएगी। निर्णय के अनुसार, यह कमेटी में राज्य के अन्य विभागों जैसे ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग एवं अन्य विभागों में समतुल्य पदों पर दिए जा रहे मानदेय का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट देगी। समिति जरूरत पड़ने पर अन्य राज्यों में लागू व्यवस्था का भी अध्ययन करेगी। इससे पहले बैठक में राज्य कर्मियों के मानदेय में वृद्धि का प्रस्ताव रखा गया था। इसमें कहा गया कि इन परियोजना कर्मियों के मानदेय का निर्धारण पूर्व में चतुर्थ वेतनमान के आधार पर ही किया गया है तथा अबतक इसमें संशोधन नहीं किया जा सका है। इस कारण से इनके मासिक मानदेय तथा राज्य कार्यकारिणी समिति द्वारा समय-समय अंतरिम राहत के रूप में मानदेय वृद्धि के बाद भी लगभग 55 प्रतिशत का अंतर है। इस अंतर काे पाटने के लिए 40 प्रतिशत मानदेय वृद्धि का प्रस्ताव दिया गया था, जो एक जनवरी 2026 के प्रभाव से लागू होता। बताते चलें कि समग्र शिक्षा अभियान के तहत प्रखंड से लेकर जिला स्तर तक लगभग एक हजार कर्मी, पदाधिकारी कार्यरत हैं।

48 घंटे में 48 KM भी नहीं चल सका 308 पहियों वाला ट्रक, अब दलदल बना बड़ी बाधा

लखनऊ 308 पहियों वाला ट्रक बेल्जियम से ओडिशा और वहां से झारखंड, बिहार होते हुए यूपी तो पहुंच गया लेकिन कई दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। यूपी के ही लखीपुरखीर की बलरामपुर चीनी मिल तक इसे जाना है। चीनी मिल के लिए बॉयलर लेकर जा रहे इस ट्रक के लिए अलग रास्ते भी बनाए जा रहे हैं। इसके बाद भी दिक्कतें कम नहीं हो रही है। शुक्रवार को बिहार से चंदौली के रास्ते यूपी में आया यह ट्रक तीन दिनों बाद भी चंदौली में ही फंसा है। अब उसका रास्ता दलदल ने रोक दिया है। चंदौली में रेवसा के पास रिंग रोड पर पुल के कारण इसे पूर्वी सर्विस लेन से निकालने की कोशिश हुई लेकिन दलदल के कारण आगे नहीं जा सका। इसके बाद इसे पश्चिमी लेन पर लाया गया है। अगर किलोमीटर में बात करें तो 48 घंटे में 48 किलोमीटर भी ट्रक नहीं बढ़ सका है। चंदौली से इसे वाराणसी आना है। यहां भी इसे गुजारने के लिए तमामा तैयारियां की गई हैं। तीन फुट ओवरब्रिज को तोड़ा भी जाना है। चंदौली में रिंग रोड के पश्चिमी लेन पर आगे की राह आसान रही तो सोमवार की दोपहर तक इसके आगे रवाना होने की संभावना है। तीन से चार मंजिला ऊंचाई बन रही बाधा बेल्जियम से समुद्र के रास्ते करीब दो सौ टन वजनी बॉयलर ओडिशा लाने के बाद 308 पहियों वाले ट्रक के जरिए सड़क मार्ग से ही लखीमपुरखीरी पहुंचाने की कवायद हो रही है। तीन से चार मंजिला मकान के बराबर वाली ऊंचाई के कारण इसे सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उमड़ रही भीड़ भी बन रही चनौती नौबतपुर चेस्क पोस्ट से यूपी के चंदौली पहुंचा ट्रक रविवार को जिले के ही रेवसा में पूर्वी सर्विस लेन पर खड़ा रहा। रास्ते की मरम्मत के लिए टीम पूरे दिन मशक्कत करती रही। इस दौरान मशीन को देखने के लिए लोगों की लग रही भीड़ को भी नियंत्रित करने के लिए पुलिस को मशक्कत करनी पड़ रही है। अलीनगर थाने के अपराध निरीक्षक रमेश कुमार यादव पुलिस टीम के साथ मौजूद रहे। नेशनल हाईवे पर दोबारा आज आने की संभावना शुक्रवार को नौबतपुर से आगे बढ़ने पर पहले कटसिला के पास हाइवे पर शाम होने की वजह से इसे रोक दिया गया था। शनिवार को पचफेड़वा के पास हाइवे पर रिंग रोड का पुल होने के कारण वैकल्पिक मार्ग के रूप में उसे पहले रिंग रोड पर ले जाया जाना था। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। रविवार को मशीन रेवसा के पास रिंग रोड की पूर्वी सर्विस लेन पर पहुंची। लेकिन आगे जमीन दलदली होने से मशीन को सर्विस लेन पर ही रोक दिया गया। देर शाम इसे रिंग रोड पार करके पश्चिमी लेन पर पहुंचाया गया। इसके बाद फिर एनएच 19 पर लाया जाना है।

राजस्थान और डेनमार्क के बीच नए एक्शन प्लान पर काम, ग्रीन एनर्जी से जल प्रबंधन तक सहयोग

जयपुर  मुख्य सचिव वी.निवास की अध्यक्षता में सोमवार को शासन सचिवालय में राजस्थान तथा डेनमार्क के द्विपक्षीय सहयोग को लेकर बैठक आयोजित हुई, जिसमें भारत में डेनमार्क के राजदूत रासमस अबील्डगार्ड क्रिस्टेंसन ने भाग लिया। बैठक में दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय संबंधों तथा 'इंडिया-डेनमार्क ग्रीन स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप' के अंतर्गत विभिन्न सहयोगात्मक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। नई कार्ययोजना पर होगा आगे काम मुख्य सचिव ने कहा कि वर्ष 2020 में स्थापित 'ग्रीन स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप' का प्रथम पाँच-वर्षीय कार्यकाल सफलतापूर्वक पूर्ण होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि से उत्साहित होकर अब अगले पाँच वर्षों के लिए एक नए एवं उन्नत एक्शन प्लान पर कार्य किया जा रहा है, जिससे राजस्थान व डेनमार्क के बीच सहयोग के नए आयाम खुलेंगे। ऊर्जा व जल प्रबंधन के क्षेत्र में सहयोग पर जोर बैठक के दौरान बताया गया कि ऊर्जा संरक्षण व नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में पंपिंग स्टेशनों पर ऊर्जा बचत, तकनीकी नवाचार तथा ग्रिड फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया गया। जल प्रबंधन व नदी पुनर्जीवन के संदर्भ में जल संरक्षण, वेस्ट वाटर प्रबंधन, जल आपूर्ति की मॉनिटरिंग तथा नदियों के पुनर्जीवन के क्षेत्र में डेनमार्क के अनुभवों का लाभ उठाए जाने पर सहमति बनी। खाद्य प्रसंस्करण व आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर चर्चा इसके साथ ही कृषि व खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों में साझेदारी को और मजबूत करने की संभावनाओं पर विचार किया गया। वाटर सप्लाई मॉनिटरिंग एवं शहरी विकास के विभिन्न आयामों में भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) तथा इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) आधारित आधुनिक डिजिटल तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा दिए जाने पर भी सहमति बनी। बैठक में संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे, जिन्होंने डेनमार्क प्रतिनिधिमंडल के साथ अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर विचार साझा किए।

Bihar MLC Election: BJP ने तय किए 4 नाम, केंद्रीय मुहर के बाद होगा ऐलान

पटना भारतीय जनता पार्टी इन दिनों विशेष चर्चा का केंद्र बन चुकी है। वजह है एमएलसी चुनाव। वो भी इसलिए कि उनके साथी दल ने बहुत पहले ही अपने उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर एक कदम इस लिहाजन बढ़ गई कि जदयू के भीतर उम्मीदवारों को लेकर कुछ भी अंतर्द्वंद नहीं है। मगर, भाजपा के भीतर नामो की घोषणा की प्रक्रिया काफी जटिल है। कई स्तरों पर स्क्रूटनी के बार पहला मुहर तो प्रदेश भाजपा कमिटी और फिर केंद्रीय कमिटी लगाती है। बांकीपुर से सबक लेते हुए बीजेपी फूंक-फूंक कर कदम बढ़ाना चाहती है। तो क्या है देरी की वजह समझिये। उम्मीदवार तो तय है पर? भाजपा शीर्ष नेतृत्व के सूत्रों की माने तो बीजेपी के रणनीतिकारों ने सब कुछ तय कर लिया है। सिर्फ औपचारिक घोषणा बाकी है। सूत्रों की माने तो पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से नवल किशोर यादव, कोसी स्नातक से एनके यादव, दरभंगा स्नातक से सर्वेश कुमार और मुजफ्फरपुर शिक्षक क्षेत्र से नरेंद्र सिंह के नाम बस घोषणा हेतु इंतजाररत है। हालांकि, बिहार विधान परिषद के तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से गत चुनाव में भाकपा (CPI) समर्थित उम्मीदवार डॉ संजय सिंह ने जीत हासिल की थी। भाजपा के उम्मीदवार डॉ नरेंद्र प्रसाद सिंह तीसरे स्थान पर रहे थे। एक चर्चा तो ये है कि बीजेपी ने डॉ नरेंद्र कुमार सिंह पर ही भरोसा किया है। लेकिन, इस क्षेत्र को लेकर बदलाव की भी उम्मीद जताई जा रही है। बीजेपी बदलाव के रथ पर सवार बीजेपी ने इस बार एक बदलाव किए हैं। भारतीय जनता पार्टी ने दरभंगा स्नातक से जिसे उम्मीदवार बनाने जा रही है। वो गत चुनाव में निर्दलीय लड़े थे और जदयू के दिलीप चौधरी को परास्त किए थे। बीजेपी ने निर्दलीय उम्मीदवार सर्वेश कुमार को अपने दल में मिला लिया और सिटिंग सीट के नाम पर आपने खाते में डाल लिया। ये है दरभंगा स्नातक से एमएलसी रहे सर्वेश कुमार। आखिर देरी की वजह क्या है? भाजपा के भीतर चुनाव प्रक्रिया और उम्मीदवार की घोषणा कई स्टेज से गुजरती है। पहला जिला स्तर की कमिटी मुहर लगाती है। फिर प्रमण्डल स्तर पर चयन होता है। प्रदेश चुनाव समिति अपनी सहमति देती है। राज्य कोर कमेटी मुहर लगाती है। इसके बाद केंद्र की कमिटी उम्मीदवार के नाम पर मुहर लगाती है। लेकिन ऑफ द रिकॉर्ड संभावित उम्मीदवार को चुनाव प्रचार के लिए बहुत पहले ही कह देती है। जदयू ने तो घोषणा कर दी जदयू ने एमएलसी उम्मीदवार के नाम पर अंतिम मुहर लगा दी है।     पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से नीरज कुमार     तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से अभिषेक कुमार झा     सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से आनंद पुष्कर     दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से घनश्याम राय

8:21.67 का सीजन बेस्ट भी नहीं दिला सका मेडल, अविनाश साबले चौथे स्थान पर

नई दिल्ली  एशियन गेम्स में भारत के स्टार एथलीट अविनाश साबले के फैंस को इस बार निराशा का सामना करना पड़ा है। पुरुषों की 3000 मीटर स्टीपलचेज के फाइनल मुकाबले में अविनाश साबले पदक हासिल करने से चूक गए और चौथे स्थान पर रहे। साबले ने इस रेस में 8:21.67 का अपना इस सीजन का सर्वश्रेष्ठ समय निकाला लेकिन यह उन्हें पोडियम तक पहुंचाने के लिए काफी नहीं था। जापान के खिलाड़ियों का कमाल इस स्पर्धा में जापानी एथलीटों का पूरी तरह से दबदबा देखने को मिला। जापान के रयुजी मियुरा ने 8:17.36 का नया गेम्स रिकॉर्ड बनाते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। वहीं उनके ही देश के रयोमा आओकी ने 8:17.60 का अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय निकालकर सिल्वर मेडल जीता। कतर के जकारिया एलाहलामी ने 8:18.13 के समय के साथ ब्रॉन्ज मेडल पर कब्जा जमाया। पिछली बार जीता था गोल्ड पिछली बार एशियन गेम्स में भारत को गोल्ड मेडल दिलाने वाले अविनाश साबले इस बार अपने खिताब का बचाव नहीं कर सके। अविनाश भारतीय एथलेटिक्स के सबसे बड़े नामों में से एक हैं और पुरुषों की 3000 मीटर स्टीपलचेज स्पर्धा में नेशनल रिकॉर्ड उनके ही नाम दर्ज है। उन्होंने 2022 के बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में ऐतिहासिक सिल्वर मेडल जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई थी जहां उन्होंने केन्याई एथलीटों के वर्चस्व को तोड़ा था। भारतीय सेना में शामिल महाराष्ट्र के बीड़ जिले के एक छोटे से गांव मांडवा से ताल्लुक रखने वाले अविनाश साबले का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। एक साधारण किसान परिवार में जन्मे साबले बचपन में स्कूल जाने के लिए रोजाना कई किलोमीटर पैदल या दौड़कर जाया करते थे, जिसने अनजाने में ही उनकी रनिंग की नींव रखी। 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह भारतीय सेना में शामिल हो गए और महार रेजीमेंट का हिस्सा बने। सेना में रहते हुए ही उनकी प्रतिभा को पहचाना गया और उन्होंने प्रोफेशनल रनिंग की शुरुआत की, जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में स्टार्टअप मिशन का जलवा, युवाओं के इनोवेशन ने खींचा ध्यान

यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-26 में छाया योगी सरकार का यूपी स्टार्टअप मिशन – स्टार्टअप मिशन के बैनर तले 60 स्टार्टअप्स ने पेश किए अपने इनोवेशन, तीन दिनों में 2000 से अधिक विजिटर्स ने किया स्टार्टअप पवेलियन का दौरा – आईटी-आईटीईएस, हेल्थटेक, एडटेक, कृषि, डीपटेक और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र के स्टार्टअप्स ने लिया हिस्सा – भारत इनोवेट्स के लिए चयनित छह और यूपी स्टार्टअप फंड से वित्त पोषित छह स्टार्टअप्स ने भी प्रदर्शित किए अपने नवाचार लखनऊ/ग्रेटर नोएडा उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो-26 (यूपीआईटीएस-26) में उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन के पवेलियन में प्रदेश के उभरते स्टार्टअप्स के नवाचार आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। स्टार्टअप मिशन के बैनर तले विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े 60 स्टार्टअप्स ने अपने उत्पाद, तकनीक और नवाचार प्रदर्शित किए हैं। पिछले तीन दिनों में 5000 से अधिक विजिटर्स स्टार्टअप पवेलियन का दौरा कर चुके हैं। पवेलियन में आईटी-आईटीईएस, हेल्थटेक, एडटेक, कृषि, डीपटेक और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहे स्टार्टअप्स की भागीदारी देखने को मिल रही है। अलग-अलग सेक्टर के 60 स्टार्टअप्स की भागीदारी यूपी स्टार्टअप मिशन सीईओ सुमित महाजन ने बताया कि यूपीआईटीएस-26 के पवेलियन में 60 स्टार्टअप्स ने प्रतिभाग किया है। इनमें आईटी और आईटीईएस, हेल्थटेक, एडटेक, कृषि, डीपटेक और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र प्रमुख हैं। अलग-अलग सेक्टर से आए स्टार्टअप्स ने अपने उत्पादों और तकनीकी समाधानों को प्रदर्शित किया है। वहीं स्टार्टअप पवेलियन को देखने के लिए विजिटर्स की भी अच्छी संख्या पहुंच रही है। पिछले तीन दिनों में 5000 से अधिक लोग पवेलियन का दौरा कर चुके हैं। विजिटर्स ने स्टार्टअप्स के उत्पादों, तकनीकी समाधानों और नवाचारों को देखा तथा उनके बारे में जानकारी हासिल की। उन्होंने बताया कि यूपी स्टार्टअप मिशन के पवेलियन में भारत इनोवेट्स के लिए चयनित छह स्टार्टअप्स ने भी भागीदारी की है। इन स्टार्टअप्स ने ट्रेड शो में अपने नवाचारों को प्रदर्शित किया। इसके अलावा यूपी स्टार्टअप फंड से वित्त पोषित छह स्टार्टअप्स ने भी पवेलियन में अपने उत्पाद और नवाचार पेश किए हैं। स्टार्टअप पवेलियन में एलएंडटी सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी के सीईओ संदीप कुमार ने भी स्टार्टअप्स के फाउंडर्स से संवाद किया। उन्होंने स्टार्टअप्स के काम और उनके नवाचारों के बारे में जानकारी ली। संवाद सत्र के दौरान उन्होंने स्टार्टअप फाउंडर्स को प्रोत्साहित किया और उनके प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। सौर ऊर्जा से उड़ान भर रहा ‘तेजस्वान’ सीईओ सुमित महाजन ने बताया कि ट्रेड शो में रक्षा तकनीक और डीपटेक से जुड़े नवाचार भी आकर्षण का केंद्र बने हैं। इनमें आईआईटी कानपुर की डीपटेक स्टार्टअप मराल एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड का सौर ऊर्जा से संचालित अल्ट्रा लॉन्ग एंड्योरेंस यूएवी ‘तेजस्वान’ खास है। यह फिक्स्ड विंग विमान सौर ऊर्जा और बैटरी के संयोजन से संचालित होता है और लगातार 12 घंटे तक उड़ान भरने में सक्षम बताया गया है। तेजस्वान में जीपीएस स्पूफिंग-रोधी नेविगेशन, मल्टी-बैंड रेडियो आधारित इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर हार्डनिंग जैसी तकनीकें शामिल हैं। इसकी रेंज करीब 150 किलोमीटर है, जिसे जरूरत के अनुसार 250 किलोमीटर तक बढ़ाया जा सकता है। इसका टेक-ऑफ वजन 60 किलोग्राम से कम है और यह 5 किलोग्राम तक का पेलोड ले जा सकता है। इसकी अधिकतम गति 25 मीटर प्रति सेकंड बताई गई है और उड़ान भरने के लिए करीब 200 मीटर रनवे की आवश्यकता होती है। इस ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी, संचार, लक्ष्य निर्धारण, समुद्री निगरानी और खोज एवं बचाव अभियानों में किया जा सकता है। लंबी दूरी तक जाने वाला ‘काल’ ड्रोन बना जिज्ञासा का केंद्र रक्षा तकनीक के क्षेत्र में ‘काल’ ड्रोन भी विजिटर्स की जिज्ञासा का केंद्र बना है। यह वन-वे अटैक ड्रोन प्रणाली है, जो करीब 1000 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकती है और 7 से 8 घंटे तक उड़ान में रह सकती है। इसका अधिकतम टेक-ऑफ वजन 200 किलोग्राम और यह 50 किलोग्राम तक का हाई-एक्सप्लोसिव वारहेड ले जाने में सक्षम बताया गया है। इसकी क्रूज गति 160 किलोमीटर प्रति घंटा और अधिकतम गति 200 किलोमीटर प्रति घंटा है। बेंगलुरु स्थित न्यूमेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज ने अपने टेथर्ड इलेक्ट्रिक यूएवी ‘निंबसस्कोप’ का प्रदर्शन किया। यह जमीन से जुड़े तार के माध्यम से बिजली प्राप्त करता है, जिससे लगातार आठ घंटे तक हवा में स्थिर रहकर निगरानी कर सकता है। ड्रोन मोड में इसकी अधिकतम ऊंचाई 110 मीटर एजीएल और फील्ड एलीवेशन 5500 मीटर एएमएसएल तक बताई गई है। बिना टेदर के यह 45 मिनट तक 10 किलोमीटर की रेंज में उड़ान भर सकता है। इसमें 256-बिट एईएस एन्क्रिप्शन, हाई-बैंडविड्थ वीडियो डाउनलिंक और सुरक्षित आरएफ लिंक की सुविधा है। इसे सर्विलांस, टोह लेने और आपदा प्रबंधन जैसे कार्यों के लिए उपयोगी बताया गया है। स्वदेशी नैनो और माइक्रो ड्रोन भी प्रदर्शित किया गया आईडीआर के स्वदेशी नैनो और माइक्रो ड्रोन भी ट्रेड शो में प्रदर्शित किए गए। इनमें अभ्यास एमके-1 एक लंबी अवधि का माइक्रो एफपीवी ड्रोन है, जिसकी करीब 40 मिनट तक उड़ान क्षमता है और इसे ऑपरेटरों के प्रशिक्षण के लिए तैयार किया गया है। वहीं आईडीआर का टैक्टिकल नैनो ड्रोन सैनिकों से आगे बढ़कर वास्तविक समय की खुफिया जानकारी उपलब्ध कराने में सक्षम बताया गया है।

चीनी के भाव में ₹22 की बड़ी गिरावट, त्योहारों से पहले आम लोगों को राहत

सवाईमाधोपुर  त्योहारों का दौर शुरू होने से पहले ही बाजार ने आमजन को राहत की खबर दी है। कभी 72 रुपए प्रति किलो तक पहुंची चीनी अब करीब 50 रुपए किलो में बिक रही है। करीब एक पखवाड़े में ही चीनी के भाव में लगभग 22 रुपए प्रति किलो तक की गिरावट दर्ज की है। ऐसे में त्योहारों पर घरों में बनने वाली मिठाइयों से लेकर बाजार में बिकने वाली मिठाई और अन्य खाद्य सामग्री की लागत पर भी इसका असर पड़ने की उम्मीद है। पिछले कुछ समय में चीनी के दाम लगातार बढ़ते हुए 48 रुपए से 50, 55, 60, 65, 68, 70 और 72 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए थे। बढ़ते भाव के कारण घरेलू रसोई का बजट प्रभावित होने के साथ ही मिठाई कारोबारियों की लागत भी बढ़ गई थी। अब अचानक भाव में आई कमी से बाजार में खरीदारों को राहत मिली है। मिठाई कारोबारियों को भी राहत की उम्मीद त्योहारों के दौरान चीनी की खपत बढ़ जाती है। मिठाई, पेठा, बर्फी, रसगुल्ला सहित कई उत्पादों में चीनी प्रमुख कच्चा माल है। ऐसे में कीमतों में आई कमी से मिठाई कारोबारियों की उत्पादन लागत घट सकती है। वहीं इसका लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचने पर त्योहारों के दौरान मिठाई और अन्य चीनी आधारित उत्पादों के दामों में भी राहत की संभावना रहेगी। आपूर्ति बढ़ी तो भाव पर पड़ा असर कारोबारियों के अनुसार चीनी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से स्टॉक सीमा और बिक्री व्यवस्था को लेकर किए गए नियंत्रण का असर बाजार में दिखाई देने लगा है। इसके साथ ही सरकार की ओर से चीनी के आयात को लेकर दिए गए संकेतों से भी बाजार में आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद बनी, जिसका दबाव भाव पर पड़ा। पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध होने से तेजी पर अंकुश लगा और कीमतें नीचे आने लगीं। मासिक बिक्री कोटा भी बढ़ाया चीनी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए मासिक बिक्री कोटा 22 लाख टन से बढ़ाकर 26.50 लाख टन किया गया है। इसके तहत महीने की 15 तारीख तक 13 लाख टन तथा 16 से 30 तारीख तक 13.50 लाख टन चीनी की बिक्री का प्रावधान किया गया है। स्टॉक का समय पर निस्तारण और बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने की व्यवस्था का सीधा असर अब खुदरा बाजार के भाव पर दिखाई दे रहा है। 72 से 50 रुपए किलो तक पहुंचा भाव समय                            चीनी का भाव करीब पखवाड़े पहले    72 रुपए प्रति किलो वर्तमान भाव करीब            50 रुपए प्रति किलो गिरावट करीब                     22 रुपए प्रति किलो इनका कहना है चीनी के भाव में पिछले दिनों तेजी से बढ़ोतरी हुई थी और भाव 72 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए थे। अब सरकार की ओर से स्टॉक सीमा तय करने और बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के बाद भाव में लगातार गिरावट आई है। वर्तमान में चीनी करीब 50 रुपए किलो बिक रही है। त्योहारों के सीजन में चीनी की मांग बढ़ने के बावजूद भाव कम होने से आम उपभोक्ताओं के साथ मिठाई कारोबारियों को भी राहत मिलेगी। — मोहन मंगल, संरक्षक, खाद्य व्यापार मंडल, बजरिया  

CBT में बदली पहचान, फिजिकल टेस्ट में खुला राज; AI कैमरों ने पकड़े 4 मुन्नाभाई

अंबाला  रेलवे भर्ती में चयन हासिल करने के लिए चार परीक्षार्थियों ने ऐसा फर्जीवाड़ा किया कि एक-दूसरे की जगह कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) तक दे डाली। सीबीटी में तो उनकी यह चालाकी पकड़ में नहीं आई, लेकिन जब भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण में शारीरिक दक्षता परीक्षा देने अंबाला कैंट रेलवे स्टेडियम पहुंचे तो एआइ कैमरों ने उनकी पोल खोल दी। चेहरे और अभ्यर्थी के उपलब्ध डाटा का मिलान नहीं होने पर चारों संदिग्ध पकड़ में आ गए। प्रारंभिक जांच के बाद उन्हें परीक्षा से अलग कर दिया गया। रेलवे की शिकायत पर पड़ाव थाना पुलिस ने चारों के खिलाफ केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार आरोपितों की पहचान प्रह्लाद कुमार निवासी ग्राम संधा, पोस्ट नोमाजिला, जिला लखीसराय, बिहार, अनंत कुमार निवासी ग्राम यशवंतपुर, पोस्ट रूखई, थाना चंडी, जिला नालंदा, बिहार, उज्जवल कुमार निवासी ग्राम मंडिल, पोस्ट मंडिल, थाना पारसबिघा, जिला जहानाबाद, बिहार और गोलू निवासी ग्राम उसरी, थाना कोको, जिला जहानाबाद, बिहार के रूप में हुई है। भर्ती प्रक्रिया में लगाए गए थे एआइ कैमरे रेलवे स्टेडियम अंबाला कैंट में रेलवे भर्ती प्रक्रिया के तहत अभ्यर्थियों की शारीरिक दक्षता परीक्षा आयोजित की जा रही थी। भर्ती प्रक्रिया में निजी एजेंसियों टीसीएस और टीटीआइपीएल का सहयोग लिया जा रहा था। फर्जीवाड़ा रोकने और अभ्यर्थियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए परीक्षा स्थल पर एआइ आधारित कैमरे लगाए गए थे। जैसे ही अभ्यर्थी फिजिकल फिटनेस टेस्ट के लिए पहुंचे, कैमरों ने उनकी पहचान से संबंधित डाटा का मिलान शुरू किया। इसी दौरान चार अभ्यर्थियों के मामले में पहचान का मिलान नहीं हुआ। तकनीकी प्रणाली से मिले संकेत के बाद संबंधित अभ्यर्थियों की जांच की गई। प्रारंभिक स्तर पर ही मामला संदिग्ध पाए जाने पर चारों को अलग कर दिया गया। सीबीटी में एक-दूसरे की जगह बैठे थे जांच के दौरान जब चारों से पूछताछ की गई तो कथित तौर पर सीबीटी में किए गए फर्जीवाड़े का भी खुलासा हुआ। पूछताछ में प्रह्लाद कुमार ने बताया कि अनंत कुमार की सीबीटी परीक्षा उसने दी थी, जबकि उसकी जगह अनंत कुमार ने परीक्षा दी थी। इसी तरह उज्जवल कुमार की सीबीटी परीक्षा गोलू ने दी और गोलू की जगह उज्जवल कुमार परीक्षा में बैठा था। इस तरह चारों ने आपस में एक-दूसरे की जगह सीबीटी देकर भर्ती प्रक्रिया के पहले चरण को पार करने का प्रयास किया। सीबीटी के दौरान उनकी यह अदला-बदली पकड़ में नहीं आ सकी। इसके बाद जब भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण में उन्हें वास्तविक अभ्यर्थी के तौर पर शारीरिक दक्षता परीक्षा के लिए बुलाया गया तो एआइ आधारित पहचान प्रणाली ने उनके फर्जीवाड़े को पकड़ लिया। तकनीक के सामने नहीं चली चालाकी चारों अभ्यर्थियों ने सीबीटी में पहचान छिपाकर भर्ती प्रक्रिया में आगे बढ़ने की कोशिश की, लेकिन फिजिकल फिटनेस टेस्ट के दौरान लगाए गए एआइ कैमरों ने उनकी चालाकी पर पानी फेर दिया। परीक्षा स्थल पर अभ्यर्थी की पहचान और उपलब्ध डाटा के मिलान की व्यवस्था होने के कारण एक-दूसरे की जगह परीक्षा देने वाले अभ्यर्थी तकनीक की नजर से बच नहीं सके। रेलवे की ओर से मामले की शिकायत पुलिस को दी गई। शिकायत के आधार पर पड़ाव थाना पुलिस ने चारों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि सीबीटी परीक्षा में पहचान बदलकर परीक्षा देने की पूरी योजना कैसे तैयार की गई और इसमें अन्य किसी व्यक्ति की भूमिका तो नहीं थी। भर्ती प्रक्रिया में इस तरह के फर्जीवाड़े से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

माओवादी डंप से बरामद ₹20 लाख लापता, दो DSP पर गंभीर आरोप; विभाग में हड़कंप

कांकेर  जिले में माओवादी डंप से बरामद 20 लाख रुपये गायब होने का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार मार्च-अप्रैल 2026 में मुरगांव क्षेत्र के जंगलों में माओवादी डंप की तलाश के दौरान करीब 20 लाख रुपये की नकदी बरामद हुई थी। आरोप है कि बरामद रकम को सरकारी खाते में जमा कराने के बजाय तत्कालीन दो डीएसपी ने आपस में बांट लिया। मामले की जानकारी एसपी तक पहुंचने के बाद जांच कराई गई, लेकिन जांच रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है। टोडेमरका और मरकाकोनारी के जंगलों में हुई थी बरामदगी बताया गया कि तत्कालीन डीएसपी अपनी टीम के साथ मुरगांव के आश्रित ग्राम टोडेमरका और मरकाकोनारी के जंगलों में डंप की तलाश के लिए निकले थे। सर्च ऑपरेशन के दौरान टोडेमरका जंगल से करीब 15 लाख और मरकाकोनारी से करीब पांच लाख रुपये बरामद हुए थे। कुल मिलाकर करीब 20 लाख रुपये की नकदी मिलने की बात सामने आई है। जांच के बाद भी रिपोर्ट नहीं आई सामने बरामद रकम के बंटवारे को लेकर अब तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि नियमानुसार रकम को सरकारी खाते में जमा किया जाना था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इधर मामले में एसपी के संज्ञान में आने के बाद आंतरिक जांच कराई गई, मगर उसकी रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है। इससे मामले को लेकर संदेह और गहरा गया है। 22 करोड़ की अफवाह से हड़कंप इधर डंप से 20 लाख की जगह 22 करोड़ रुपये मिलने की अफवाह भी फैली हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह चर्चा जोरों पर है कि बरामद रकम 20 लाख से कहीं ज्यादा थी। वहीं स्थानांतरण के बाद विभाग में मामले की फिर से चर्चा शुरू हो गई है। फिलहाल आधिकारिक तौर पर विभाग ने इस पूरे मामले पर चुप्पी साध रखी है।

महिला पहलवानों की अपील पर बृजभूषण सिंह को नोटिस, 9 अक्टूबर तक मांगा जवाब

नई दिल्ली  दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट के सेशंस कोर्ट ने यौन शोषण के मामले में भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह और भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व सचिव विनोद तोमर को बरी करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली चार महिला पहलवानों की याचिका पर सुनवाई की. कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह को नोटिस जारी किया है. स्पेशल जज दिग्विजय सिंह ने मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को करने का आदेश दिया है।  चार महिला पहलवानों ने राऊज एवेन्यू कोर्ट के मजिस्ट्रेट कोर्ट के 3 अगस्त के आदेश को सेशंस कोर्ट में चुनौती दी है. महिला पहलवानों ने कहा कि मजिस्ट्रेट कोर्ट का आदेश गलत है और यह फैसला चुनिंदा साक्ष्यों के आधार पर दिया गया है. याचिका में कहा गया कि मजिस्ट्रेट कोर्ट ने स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं की अनदेखी की है. बता दें कि मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 3 अगस्त को अपने आदेश में पीड़ित महिला पहलवानों की ओर से लंबे समय तक चुप करने और आरोपियों से सामान्य संबंध जारी रहने के आधार पर बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को बरी करने का आदेश दिया था. इस मामले में दिल्ली पुलिस की ओर से दाखिल चार्जशीट में भारतीय दंड संहिता की धारा 354, 354डी, 354ए और 506 (1) के तहत आरोप लगाए गए थे।  सुनवाई के दौरान बृजभूषण शरण सिंह की ओर से कहा गया था कि 7 सितंबर 2022 को घटना वाले दिन वह भारत में नहीं था. बृजभूषण के वकील राजीव मोहन ने कहा था कि ओवरसाइट कमेटी की रिपोर्ट दिल्ली पुलिस कमिश्नर को केंद्र सरकार ने भेजी थी. राजीव मोहन ने कहा था कि महिला पहलवानों का पहला विरोध प्रदर्शन 18 जनवरी 2023 को जंतर-मंतर पर था. 19 जनवरी 2023 को एक पहलवान ने सरकार से मुलाकात की और कहा कि मैं अपना मामला सरकार के सामने रखना चाहता हूं. सुनवाई के दौरान महिला पहलवानों की ओर से वकील रेबेका जॉन ने कहा था कि ओवर साइट कमेटी नियमों के हिसाब से नहीं बनाई गई थी. उन्होंने कहा था कि जिन आरोपों के तहत चार्जशीट दाखिल हुई उसी के तहत आरोपी के खिलाफ आरोप तय होने चाहिए।