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भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया: बढ़त हासिल करने उतरेगा टीम इंडिया, उप-कप्तान शुभमन गिल पर निगाहें

नई दिल्ली  भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच पांच टी20I मैच की सीरीज का तीसरा मैच गुरुवार को खेला जाएगा। सीरीज में बराबरी करने का बाद भारतीय टीम बढ़त बनाने के इरादे से उतरेगी। ऑस्ट्रेलिया टीम फिलहाल 'कमजोर' हो गई है। टीम ने जोश हेजलवुड और ट्रेविस हेड को रिलीज कर दिया है। पांच मैचों की सीरीज में बराबरी करने के बाद भारतीय टीम की नजरें गुरुवार को होने वाले चौथे टी20 मुकाबले में पहले से 'कमजोर' ऑस्ट्रेलिया पर बढ़त बनाने पर होंगी। पिछले मैच में ऑस्ट्रेलिया को जोश हेजलवुड की कमी खली और इस मुकाबले में उसके आरंभिक बल्लेबाज ट्रेविस हेड भी नहीं खेलेंगे। हेड को एशेज की तैयारियों के लिए टीम से रिलीज किया गया है और वह शेफील्ड शील्ड में खेलेंगे। ऐसे में भारतीय टीम का पलड़ा थोड़ा भारी नजर आ रहा है। भारत ने पिछले मैच में अपने संयोजन में सुधार के संकेत दिए, खासकर नंबर आठ पर ऑलराउंडर शामिल कर संतुलन साधा।   गिल को बनाने होंगे रन हालांकि, टीम प्रबंधन को उप-कप्तान शुभमन गिल की फार्म को लेकर चिंता बनी हुई है। वह पिछले छह पारियों में अर्धशतक नहीं लगा पाए हैं और उनका स्कोर 10, 9, 24, 37*, 5 और 15 रहा है। गिल लगातार फुलर गेंदों पर संघर्ष कर रहे हैं और वह वही आत्मविश्वास नहीं दिखा पा रहे हैं, जिसने उन्हें स्टार बल्लेबाज बनाया। दूसरी ओर, अभिषेक शर्मा ने शानदार अर्धशतक और तेज शुरुआतों के साथ अपनी उपयोगिता साबित की है। कप्तान सूर्यकुमार यादव ने पहले और तीसरे मैच में अच्छी शुरुआत की, लेकिन अब वे भी बड़ी पारी खेलना चाहेंगे, क्योंकि अगली सीरीज से पहले उन्हें लंबा ब्रेक मिलेगा। गेंदबाजी विभाग में अर्शदीप सिंह की वापसी से टीम अधिक संतुलित नजर आ रही है। कुलदीप यादव को साउथ अफ्रीका टेस्ट सीरीज की तैयारी के लिए वापस भेजा गया है। टीम मैनेजमेंट की रणनीति के अनुसार, कुलदीप और अर्शदीप को एक साथ खेलाना मुश्किल होता है। तीसरे मैच में वॉशिंगटन सुंदर ने 23 गेंदों पर 49 रन की विस्फोटक पारी खेलकर भारत को जीत दिलाई थी, जिससे उनका स्थान लगभग पक्का दिखता है। ऑस्ट्रेलिया के लिए अब मिशेल मार्श और टिम डेविड पर बल्लेबाजी का भार रहेगा। हेड की अनुपस्थिति में मैथ्यू शार्ट पारी की शुरुआत कर सकते हैं। गेंदबाजी में बदलाव की संभावना है, क्योंकि सीन एबाट पिछले मैच में प्रभावी नहीं रहे। उनकी जगह बेन ड्वारशुइस या माहिल बीयर्डमैन को मौका मिल सकता है। अर्शदीप अनुभवी गेंदबाज भारत के गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्कल ने बुधवार को कहा कि अर्शदीप सिंह को चयन मामलों में भले ही परेशानी का सामना करना पड़ा हो, लेकिन यह तेज गेंदबाज इस बात को अच्छी तरह से समझता है कि टीम प्रबंधन बड़ी तस्वीर को देखते हुए अलग-अलग संयोजन आजमा रहा है। अर्शदीप पहले दो मैचों में नहीं खेले थे, लेकिन तीसरे मैच में उन्होंने शानदार वापसी करते हुए तीन विकेट लिए और प्लेयर ऑफ द मैच चुने गए थे। मोर्कल ने मैच की पूर्व संध्या में कहा, अर्शदीप अनुभवी हैं और उन्हें पता है कि हम बड़ी तस्वीर को देख रहे हैं और अलग-अलग संयोजनों को आजमा रहे हैं। उन्हें पता है कि वह विश्वस्तरीय गेंदबाज हैं और उन्होंने पावरप्ले में अधिकतर विकेट लिए हैं। हम जानते हैं कि वह टीम के लिए कितने अमूल्य खिलाड़ी है लेकिन हमें अन्य संयोजनों पर भी गौर करने की जरूरत है और वह इस बात को समझते हैं।  

पैन कार्ड बंद होने की बड़ी चेतावनी: समय पर नहीं किया यह काम, तो ठप हो जाएंगे वित्तीय लेनदेन

नई दिल्ली  PAN-Aadhaar linking: भारत सरकार ने स्थायी खाता संख्या (PAN) और आधार कार्ड (Aadhaar Card) को लिंक करना अनिवार्य कर दिया है। टैक्स सलाहकार मंच TaxBuddy ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि आपने 31 दिसंबर 2025 तक PAN को आधार से नहीं जोड़ा, तो आपका PAN कार्ड 1 जनवरी 2026 से निष्क्रिय हो जाएगा।   TaxBuddy के मुताबिक, 'आपका PAN कार्ड 1 जनवरी 2026 से डीएक्टिवेट हो जाएगा। न ITR फाइल कर पाएंगे, न रिफंड मिलेगा। यहां तक कि आपकी सैलरी क्रेडिट या SIP भी फेल हो सकती है।' इस चेतावनी के साथ ही टैक्स विशेषज्ञों ने लोगों को जल्द से जल्द PAN-आधार लिंकिंग पूरी करने की सलाह दी है, ताकि वित्तीय लेन-देन या टैक्स से जुड़े किसी भी काम में रुकावट न आए। कई बार बढ़ी समय-सीमा बता दें कि सरकार ने PAN–आधार लिंकिंग की समय-सीमा कई बार बढ़ाई है, लेकिन अब तक नई डेडलाइन 31 दिसंबर 2025 ही तय है। इसके बाद कोई और विस्तार मिलने की संभावना कम है। कौन-कौन से लोगों को PAN–आधार लिंक करना अनिवार्य है? वित्त मंत्रालय की 3 अप्रैल 2025 की अधिसूचना के अनुसार, 'हर वह व्यक्ति जिसे 1 अक्टूबर 2024 से पहले आधार आवेदन फॉर्म के एनरोलमेंट आईडी के आधार पर PAN आवंटित किया गया है, उसे अपना आधार नंबर 31 दिसंबर 2025 तक आयकर विभाग को सूचित करना होगा।' इसका मतलब यह है कि अगर आपने आधार एनरोलमेंट आईडी के जरिए PAN बनवाया था, तो आधार नंबर मिलने के बाद PAN को आधार से लिंक करना अनिवार्य है, भले ही PAN पहले से बना हो। आयकर विभाग के e-filing पोर्टल पर यह प्रक्रिया ऑनलाइन बहुत आसानी से की जा सकती है। अगर PAN–आधार लिंक नहीं किया तो क्या होगा? यदि आप 31 दिसंबर 2025 तक PAN–आधार लिंकिंग पूरी नहीं करते हैं, तो 1 जनवरी 2026 से आपका PAN निष्क्रिय हो जाएगा। इस स्थिति में आपको कई तरह की दिक्कतें होंगी: – आप आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल या सत्यापित नहीं कर पाएंगे। – टैक्स रिफंड नहीं मिलेगा। – लंबित ITR प्रोसेस नहीं होंगे। – TDS/TCS की जानकारी Form 26AS में नहीं दिखेगी। – TDS/TCS की कटौती उच्च दरों पर की जाएगी। – पैन दोबारा लिंक करने के बाद यह फिर सक्रिय हो जाएगा, आमतौर पर 30 दिनों के भीतर। निष्क्रिय PAN के वित्तीय असर बता दें कि अगर PAN निष्क्रिय हो जाता है तो आपके मौजूदा बैंक खाते और निवेश सुरक्षित रहेंगे, लेकिन आप नए निवेश, शेयर ट्रेडिंग या KYC अपडेट जैसे वित्तीय लेन-देन नहीं कर पाएंगे। इसके अलावा आपकी सैलरी ट्रांसफर या SIP ऑटो-डेबिट भी असफल हो सकती है। नए बैंक खाते खोलने, निवेश खरीदने या रिडीम करने में रुकावट आ सकती है। ITR फाइलिंग या टैक्स कंप्लायंस रुक जाएगी। यानि, भले ही आपका पैसा सुरक्षित रहे, लेकिन वित्तीय लेन-देन और टैक्स से जुड़े सभी कार्य ठप हो जाएंगे, जब तक आपका PAN पुनः सक्रिय नहीं हो जाता। PAN–आधार लिंक करने की प्रक्रिया (स्टेप बाय स्टेप) 1. आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं- https://www.incometax.gov.in 2. “Link Aadhaar” विकल्प चुनें। 3. PAN नंबर, आधार नंबर और मोबाइल नंबर दर्ज करें। 4. OTP वेरिफिकेशन करें। 5. यदि PAN पहले से निष्क्रिय है, तो पहले ₹1,000 शुल्क का भुगतान करें। 6. प्रक्रिया पूरी होने के बाद ‘Quick Links → Link Aadhaar Status’ में जाकर स्टेटस जांचें।  

टेडएक्स शाहपुरा लेक चैप्टर में 9 नवंबर को देशभर के नामचीन वक्ता साझा करेंगे अपने विचार

टेडएक्स शाहपुरा लेक चैप्टर का टेड एक्स आयोजन 9 नवंबर को, देशभर के प्रतिष्ठित वक्ता होंगे शामिल आईसेक्ट के सहयोग से मिंटो हॉल में होगा नवाचार और प्रेरणा का संगम भोपाल  राजधानी भोपाल एक बार फिर नई सोच, नवाचार और प्रेरक विचारों का केंद्र बनने जा रही है। टेडएक्स शाहपुरा लेक चैप्टर, आईसेक्ट (AISECT) के सहयोग से 9 नवंबर 2025 को कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (मिंटो हॉल) में टेड एक्स का विशेष आयोजन करने जा रहा है। यह कार्यक्रम युवाओं, उद्यमियों, नवोन्मेषकों और सृजनशील लोगों को एक साझा मंच पर लाने का प्रयास है। टेडएक्स शाहपुरा लेक चैप्टर के इस आयोजन में प्रेरक व्याख्यानों के माध्यम से युवा प्रतिभाओं को सीखने, समझने और आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। यह कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों को एक मंच पर लाने का प्रयास है। इनमें म.प्र. क्रिकेट संघ (MPCA) एवं MPL के चेयरमैन और Kuberha AI व Ethara AI के को-फाउंडर महानार्यमान सिंधिया, गूगल में स्टार्टअप्स पार्टनरशिप लीड नूपुर वर्मा, जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड की लीड – कंटेंट प्रोग्रामिंग दिव्या मूरजानी, मैनेजमेंट गुरु, लेखक एवं स्तंभकार एन. रघुरमन, स्टैंडअप कॉमेडियन और ‘ऑल वूमन इंक’ की फाउंडर आंचल अग्रवाल, तथा कवयित्री, गीतकार और अभिनेत्री गुंजन सैनी शामिल हैं। ये सभी वक्ता अपने अनुभवों और जीवन-यात्रा के माध्यम से प्रतिभागियों को नए दृष्टिकोण और प्रेरणा से परिचित कराएँगे। आईसेक्ट के एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट और स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने इस पहल पर बात करते हुए कहा,“TEDx शाहपुरा लेक चैप्टर जैसे मंच युवाओं को वैश्विक दृष्टि, नवाचार और नेतृत्व क्षमता के लिए प्रेरित करते हैं। आईसेक्ट का सदैव प्रयास रहा है कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम न रहे, बल्कि यह विचार, संवाद और प्रयोग का मंच बने। इस आयोजन से हम चाहते हैं कि युवा अपने भीतर की क्षमता को पहचानें और समाज में सकारात्मक परिवर्तन के वाहक बनें।” टेडएक्स शाहपुरा लेक के मुख्य क्यूरेटर डॉ. दीपक मोटवानी ने कहा, “मैंने हमेशा देखा है कि मेट्रो शहर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं क्योंकि उनके पास टेडएक्स जैसे वैश्विक मंचों तक पहुँच है। इसी सोच से हमने तय किया कि भोपाल और यहाँ के युवाओं के लिए भी ऐसा ही एक मंच लाया जाए, जहाँ वे अपने विचारों और क्षमताओं को दुनिया के सामने रख सकें।”

केरल में POCSO मामला: मां को अपराध के लिए उकसाने का दोषी पाया, अदालत ने कही यह बात

तिरुवनंतपुरम केरल की एक स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने महिला और उसके पुरुष साथी को 180 साल की सजा सुनाई है। दरअसल, पुरुष पर महिला की 12 साल की बेटी के साथ बार-बार बलात्कार के आरोप थे। वहीं, महिला पर आरोप थे कि उसने बेटी के खिलाफ रेप में आरोपी की मदद की और उसे अपराध के लिए उकसाया भी। कोर्ट में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने बताया था कि महिला अपनी बच्ची को शारीरिक संबंध बनाते हुए देखने के लिए मजबूर भी करती थी।  रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने दोनों को 180 साल की सजा और दोनों को ही 11.7 लाख रुपये जुर्माना देने की सजा सुनाई है। जज अशरफ एएम ने पाया है कि दोनों पॉक्सो और आईपीसी और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के कई प्रावधानों के तहत आरोपी हैं। एक ओर जहां आरोपी पलक्कड़ का रहने वाला है। वहीं, पीड़िता की मां और इस केस में दूसरी आरोपी तिरुवनंतपुरम से है। विशेष लोक अभियोजक सोमसुंदरन ए ने कहा कि महिला पति और बच्ची के साथ तिरुवनंतपुरम में रहती थी और फोन पर बातचीत के जरिए 33 साल के आरोपी के संपर्क में आई थी। इसके बाद वह आरोपी के साथ भाग गई थी और दोनों पलक्कड़ और मलप्पुरम में साथ रहे। खास बात है कि इस दौरान बच्ची भी उनके साथ ही थी। महिला की उम्र 30 साल है। अभियोजन ने बताया है कि महिला के साथी ने दिसंबर 2019 और नवंबर 2020 के बीच बच्ची के साथ कई बार यौन हिंसा की। यही सिलसिला दिसंबर 2020 से अक्तूबर 2021 तक चला। केस में मां को यौन उत्पीड़न के लिए उकसाने का दोषी पाया गया है। अभियोजन के आरोप हैं कि आरोपी मां अपराध की गवाह है और वह नाबालिग बच्ची को मजबूर करती थी कि वह दोनों को संबंध बनाते हुए देखे। इसके अलावा महिला पर बच्ची को पोर्न वीडियो दिखाने और बीयर पिलाने के आरोप भी लगाए गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, सोमसुंदरन का कहना है कि महिला ने बच्ची को धमकाया था कि उसके दिमाग में सीसीटीवी लगाया गया और अगर वह किसी को कुछ बताएगी तो उन्हें पता चला जाएगा। कैसे सामने आया मामला रिपोर्ट के अनुसार, सोमसुंदरन का कहना है कि महिला मलप्पुरम थाने पहुंची थी और उसने माता-पिता पर आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज नहीं देने के आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा, 'पुलिस ने महिला के पैरेंट्स को सर्टिफिकेट देने के लिए कहा था। जब वह महिला के घर पहुंचे और कहा कि वह पोती को देखना चाहते हैं, तो आरोपी ने इनकार कर दिया।' उन्होंने कहा, 'बाद में पड़ोसियों ने बताया कि घर में बच्ची की हालत खराब है और उसे भोजन भी नहीं दिया जा रहा है। इसके बाद उन्होंने चाइल्ड लाइन से संपर्क किया और बच्ची को स्नेहिता सेंटर पहुंचाया। यहां बच्ची ने उसके साथ हुई वारदात को बताया।' कोर्ट के आदेश हैं कि जुर्माने की रकम पीड़िता को दी जाए। खास बात है कि जुर्माना नहीं देने की स्थिति में दोनों पर 20 महीने की सजा और बढ़ जाएगी।

राष्ट्रीय अध्यक्ष कब चुना जाएगा? अमित शाह ने बता दी टाइमलाइन, अटकलों पर लगा विराम

नई दिल्ली बीजेपी का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा, इस पर लंबे समय से अटकलें लग रही हैं। जल्द ही पार्टी का नया अध्यक्ष चुना जा सकता है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसके संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव के बाद नए अध्यक्ष के नाम का ऐलान हो सकता है। बिहार चुनाव के बीच 'आजतक' को दिए गए एक इंटरव्यू में जब अमित शाह से पूछा गया कि बीजेपी का अध्यक्ष कब तक चुना जाएगा, तो उन्होंने जवाब दिया, 'अभी चुनाव (बिहार चुनाव) तक तो नहीं होगा, चुनाव के बाद करने का प्रयास करेंगे।' शाह से पूछा गया कि क्या फैसला ले लिया गया है, तो इस पर उन्होंने कहा कि मैं अकेला फैसला नहीं कर सकता, पार्टी करती है। लेकिन मुझे लगता है कि चुनाव के बाद होगा। बता दें कि इस समय जेपी नड्डा बीजेपी की कमान संभाल रहे हैं और इससे पहले उनके कार्यकाल को विस्तार मिल चुका है। कौन कौन रेस में? सूत्रों की मानें तो बीजेपी का अध्यक्ष बनने की रेस में कई नाम हैं। इसमें केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, मनोहर लाल खट्टर, भूपेंद्र यादव, धर्मेंद्र प्रधान आदि के नाम शामिल हैं। हालांकि, पार्टी हमेशा से चौंकाने वाले फैसले लेने के लिए जानी जाती रही है, ऐसे में कोई नया नाम भी इस लिस्ट में शामिल हो सकता है। फिलहाल बीजेपी ने किसी नाम की पुष्टि नहीं की है और अटकलों का दौर जारी है।  

सरकारी कर्मचारियों को बड़ी खुशखबरी? OPS पर 8th Pay Commission ने बढ़ाई उम्मीद

नई दिल्ली  केंद्रीय और राज्य सरकारों के लाखों कर्मचारी, भारतीय सशस्त्र बलों को छोड़कर, लगातार यह मांग कर रहे हैं कि पुरानी पेंशन योजना (OPS) को दोबारा लागू किया जाए। दरअसल, जनवरी 2004 में केंद्र सरकार ने नई नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) लागू की थी, जिससे दशकों पुरानी गारंटीड और गैर-योगदान आधारित OPS को समाप्त कर दिया गया। OPS बहाली की मांगों के बीच केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल 2025 को एक नई पेंशन योजना यूनिफाइड पेंशन योजना (UPS) की शुरुआत की। यह योजना NPS और OPS दोनों की विशेषताओं का मिश्रण है। UPS में कर्मचारियों और सरकार दोनों का योगदान रहेगा, ठीक वैसे ही जैसे NPS में होता है। साथ ही, UPS न्यूनतम गारंटीड पेंशन भी प्रदान करती है, बशर्ते कर्मचारी निर्धारित सेवा अवधि पूरी करे। सरकार का कहना है कि UPS से कर्मचारियों को सुरक्षा की गारंटी भी मिलेगी और सरकारी वित्तीय ढांचे पर अत्यधिक बोझ भी नहीं पड़ेगा। OPS फिर बनी प्रमुख मांग इस साल जनवरी 2025 में केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग की घोषणा की। इसके बाद सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से जुड़े मुद्दों पर कर्मचारी संगठनों से सुझाव मांगे। इन सुझावों में पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली प्रमुख मांगों में से एक रही। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि NPS के तहत पेंशन 'बाजार पर निर्भर' है और निश्चित नहीं है, जबकि OPS में जीवनभर गारंटीड पेंशन मिलती थी। क्या है सरकार का रुख हालांकि, केंद्र सरकार ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि OPS की वापसी की कोई संभावना नहीं है। हाल ही में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक (जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की) में 8वें वेतन आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस(ToR) को मंजूरी दी गई। 8वें वेतन आयोग की शर्तों में छिपा संकेत सरकार द्वारा मंजूर किए गए Terms के अनुसार, 8वां वेतन आयोग अपनी रिपोर्ट 18 महीनों के भीतर देगा। 8वें वेतन आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस में “non-contributory pension” का ज़िक्र सरकार की यही नीति दर्शाता है कि पुरानी पेंशन योजना अब अतीत का हिस्सा बन चुकी है। आयोग को देश की आर्थिक स्थिति, राजकोषीय अनुशासन, विकास व्यय और कल्याण योजनाओं के लिए उपलब्ध संसाधन जैसे कारकों को ध्यान में रखना होगा। इसका मतलब साफ है कि आयोग उन योजनाओं पर विचार नहीं करेगा जिनसे राजकोषीय संतुलन बिगड़ सकता है और OPS ठीक वैसी ही एक योजना है। OPS अब इतिहास केंद्र सरकार ने कई बार स्पष्ट किया है कि OPS की वापसी नहीं होगी। हालांकि कुछ राज्य सरकारें जैसे राजस्थान, छत्तीसगढ़, पंजाब और झारखंड (गैर-एनडीए शासित राज्य) अपने स्तर पर OPS बहाल कर चुकी हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने इसे राजकोषीय रूप से अनुचित बताया है। वित्त मंत्रालय और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने कई मौकों पर कहा है कि OPS अब केंद्रीय कर्मचारियों के लिए लागू नहीं की जाएगी और NPS तथा UPS ही भविष्य की पेंशन प्रणाली रहेंगी।

सिस्टम फेल होने से एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी, Air India में मैनुअल चेक-इन शुरू

नई दिल्ली  बुधवार को देशभर में एयर इंडिया के सर्वर में अचानक आई तकनीकी खराबी ने हवाई यात्रा को बुरी तरह प्रभावित किया। दिल्ली एयरपोर्ट के एक अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की कि देश के सभी हवाई अड्डों पर एयर इंडिया का सर्वर डाउन हो गया है, जिसे जल्द ही ठीक करने का प्रयास किया जा रहा है। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-2 पर यात्रियों ने दोपहर 3 बजे से ही सर्वर में समस्या की शिकायत की। सर्वर काम न करने के कारण यात्रियों को सबसे अधिक परेशानी सामान ड्रॉप करने में हुई। टी-2 से यात्रा करने वाले यात्री अपनी फ्लाइट्स के लिए परेशान होकर इधर-उधर भटकते नजर आए। यात्रियों को नया टिकट बुक करना पड़ा दीप्ति मिश्रा ने एयरपोर्ट पर कई यात्रियों से बातचीत की। यात्री संध्या ने बताया कि सर्वर में दिक्कत और फ्लाइट में देरी के कारण उनकी देहरादून से दिल्ली होते हुए विशाखापट्टनम की कनेक्टिंग फ्लाइट छूट गई। उन्हें मजबूरी में नया टिकट बुक करना पड़ा। कुछ यात्रियों ने यह भी दावा किया कि एयर इंडिया के सर्वर में समस्या बुधवार से पहले, यानी कल भी आ रही थी। तकनीकी समस्या के कारण, एयरलाइन को यात्रियों की परेशानी कम करने के लिए तुरंत मैनुअल चेक-इन की प्रक्रिया शुरू करनी पड़ी। तिरुवनंतपुरम और पटना के लिए बोर्डिंग मैनुअल तरीके से की गई। हालांकि, मैनुअल चेक-इन प्रक्रिया काफी धीमी होती है, जिसके कारण कतारें और प्रतीक्षा का समय काफी बढ़ गया। हैरानी की बात यह रही कि सर्वर में लगातार आ रही इस समस्या के बावजूद, एयरलाइन की ओर से यात्रियों को कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई। यात्रियों का दावा है कि उन्हें न तो कोई मैसेज मिला और न ही कोई ईमेल। अचानक कई विमानों के समय में परिवर्तन किए जाने से यात्रियों को अतिरिक्त समय तक इंतजार करना पड़ा। इंडिगो ने जारी की एडवाइजरी इस बीच, दिल्ली हवाई अड्डे पर हवाई यातायात की भीड़ के कारण अन्य एयरलाइन के संचालन पर भी असर पड़ा। इंडिगो (Indigo) एयरलाइन ने बुधवार को एक एडवाइजरी जारी करते हुए यात्रियों को सूचित किया कि दिल्ली से उड़ान संचालन प्रभावित हो सकता है, जिससे देरी हो सकती है। इंडिगो ने यात्रियों से असुविधा के लिए खेद व्यक्त किया और उन्हें वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर अपनी फ्लाइट के रियल-टाइम अपडेट की जांच करने का आग्रह किया।

चिकित्सकीय मानव संसाधन की शीघ्र उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रस्ताव तैयार करने के दिए निर्देश

भोपाल  उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने निवास कार्यालय भोपाल में स्वास्थ्य संस्थानों के उन्नयन प्रस्तावों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने जनप्रतिनिधियों द्वारा भेजे गए प्रस्ताव और विभागीय स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत मांग-आधारित प्रस्ताव की समीक्षा की और निर्देश दिए कि स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप भेजे गए प्रस्तावों का प्राथमिकता से परीक्षण किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रस्तावों की फिजिबिलिटी स्टडी कर व्यवहार्यता के अनुसार इन्हें अनुमोदन के लिए शीघ्र अग्रेषित किया जाए, जिससे नागरिकों को उत्तम स्वास्थ्य सुविधाएँ समयबद्ध रूप से उपलब्ध कराई जा सकें। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में निर्माणाधीन नए स्वास्थ्य केंद्रों, अस्पतालों और चिकित्सा महाविद्यालयों में निर्माण कार्यों की नियमित समीक्षा करते हुए निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण किया जाए। कार्यों में अनावश्यक विलंब को किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।बैठक में रीवा में ऑनकोसर्जरी विभाग के लिए जारी युक्तियुक्तिकरण प्रक्रिया की प्रगति की समीक्षा की गई। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि कैंसर जाँच और उपचार सेवाओं के विस्तार के लिये यह विभाग अत्यंत महत्वपूर्ण है। संबंधित चरणों को प्राथमिकता पर पूर्ण किया जाए जिससे क्षेत्रीय मरीजों को लाभ मिल सके। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने प्रदेश के विभिन्न चिकित्सा संस्थानों में अत्याधुनिक उपकरणों (जिसमें लिनैक मशीन, एमआरआई, सीटी स्कैन, पेट स्कैन आदि शामिल हैं) की खरीदी प्रक्रिया की समीक्षा करते हुए कहा कि उपकरणों की उपलब्धता और उनकी स्थापना में समयबद्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि उपकरण उपलब्ध होने के साथ प्रशिक्षित मानव संसाधन भी उपलब्ध कराना आवश्यक है, जिससे सेवाएँ तुरंत प्रारंभ हो सकें। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने चिकित्सकीय मानव संसाधन (डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, तकनीशियन, पैरामेडिकल स्टाफ) की उपलब्धता पर विस्तृत चर्चा की। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि योग्य और प्रशिक्षित स्टाफ की नियुक्ति गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की मूल आधारशिला है। उन्होंने निर्देश दिए कि अन्य राज्यों में उपलब्ध सफल मॉडल का अध्ययन कर भर्ती प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और त्वरित बनाने के लिए आवश्यक प्रक्रियात्मक संशोधन का मसौदा तैयार किया जाए। बैठक में प्रभारी आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा श्री विशेष गढ़पाले, संचालक चिकित्सा शिक्षा सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

सफेद चादर में लिपटा बद्रीनाथ: तापमान गिरा, भक्तों की आस्था चरम पर

बद्रीनाथ  उत्तराखंड के प्रसिद्ध चार धामों में से एक बद्रीनाथ धाम में अचानक से मौसम ने करवट बदल ली है। बुधवार सुबह से लगातार तेज बर्फबारी हो रही है और चारों तरफ बर्फ की सफेद चादर बिछ गई है। बर्फबारी होने की वजह से तापमान काफी गिर गया है, लेकिन श्रद्धालुओं की भक्ति में कमी नहीं है, बर्फबारी के बीच भी भक्त दर्शनों के लिए पहुंच रहे हैं। पर्यटक भी बर्फबारी का मजा ले रहे हैं। उत्तराखंड में बर्फबारी के साथ-साथ बारिश की संभावना भी जताई गई है। मौसम विभाग की मानें तो आने वाले कई दिनों में बर्फबारी के साथ-साथ बारिश भी हो सकती है और मौसम ज्यादा बिगड़ सकता है। वहीं प्रशासन ने ठंड से बचने के लिए जगह-जगह पर अलाव की व्यवस्था की है, जिससे पर्यटक और भक्त दोनों ही बर्फबारी का मजा ले सकें। 7 से लेकर 10 नवंबर तक मौसम शुष्क रहने का अनुमान है। उत्तराखंड के कुछ जिलों में भारी बारिश और घना कोहरा छाया रहेगा। चमोली, टिहरी, पिथौरागढ़, देहरादून, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी में बारिश होने की संभावना है, जबकि पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फबारी को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। प्रशासन पर्यटकों को पर्वतीय क्षेत्रों में नहीं जाने की सलाह दे रहा है। बर्फबारी के बीच बद्रीनाथ की यात्रा चल रही है और भक्त दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। मंदिर के कपाट 4 मई 2025 को खुले थे, जो नवंबर के महीने में बंद होंगे, जिसके बाद बाबा की पूजा-अर्चना के साथ उनकी विग्रह डोली को पांडुकेश्वर स्थित योग बदरी में विराजमान किया जाएगा। इसे बाबा का शीतकालीन दूसरा घर भी कहा जाता है, जहां बाबा मंदिर के कपाट बंद होने तक विराजेंगे। शीतकाल के कुछ महीनों तक बाबा बद्रीनाथ की पूजा यहीं होगी। बद्रीनाथ में मौसम बहुत ठंडा हो चुका है और बीते दिन का अधिकतम तापमान -1° सेल्सियस और न्यूनतम तापमान -12° सेल्सियस तक रहा था। आने वाले कुछ दिनों में रुक-रुक कर बारिश हो सकती है।

राजनीति में गरमाहट: योगी बोले- हिंदुओं को नजरअंदाज करने वालों को सत्ता से दूर रखें

गया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2005 के पहले बिहार में अपराध, जातीय संघर्ष, माओवाद, नक्सलवाद था। यूपी-बिहार के नाम पर देश-दुनिया में सम्मान नहीं मिलता था। बिहार में लालू प्रसाद यादव के शासन में 60 से अधिक जातीय नरसंहार, 30 हजार से अधिक अपहरण हुए। व्यापारी, डॉक्टर, इंजीनियर, संभ्रांत व्यक्ति सुरक्षित नहीं थे। बिहार के 30-40 फीसदी लोगों की आबादी गोरखपुर व वाराणसी में है, क्योंकि उस समय जंगलराज था, लेकिन नीतीश बाबू के नेतृत्व में 20 वर्ष में सुशासन की सुदृढ़ नींव रखी गई। उत्तर प्रदेश में तमाम व्यस्तताओं के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को भी बिहार विधानसभा चुनाव में प्रचार करने पहुंचे। उन्होंने पहली रैली वजीरगंज विधानसभा क्षेत्र से विधायक व भाजपा प्रत्याशी बीरेंद्र सिंह के पक्ष में की। सीएम ने यहां भाजपा के विकास कार्यों को गिनाया तो राजद-कांग्रेस गठबंधन पर करारा प्रहार भी किया। मुख्यमंत्री ने गया को ज्ञान, मुक्ति व अध्यात्म की धरा बताते हुए यहां की ऐतिहासिकता पर प्रकाश डाला। बोले कि गया की धरती बहुत पवित्र है, सनातन धर्म की परंपरा है कि स्वर्ग लोक के पितर भी इसी धरती पर आकर तृप्त होते हैं। सीएम योगी ने कहा कि हर सच्चा भारतीय राम को पूर्वज मानता है। कांग्रेस, सपा व राजद जब राम मंदिर का विरोध कर रही थी तब भी रामभक्त नारा लगाते थे कि रामलला हम आएंगे, लाठी-गोली खाएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे। सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस ने कहा था कि राम हुए ही नहीं, जैसे लगता है कि कांग्रेस का ही खानदान पैदा हुआ है, बाकी हुए ही नहीं। उन्होंने कहा, "यह लोग राम-कृष्ण, विष्णु को नकारने लगते हैं। यह हिंदुओं को नकार देंगे, इसलिए हमें भी इन्हें नकार देना चाहिए। राजद ने राम मंदिर के रथ रोक दिया था। सपा ने रामभक्तों पर गोली चलाकर अयोध्या को लहुलूहान कर दिया। यूपी में भाजपा सरकार बनने के बाद हमने संकल्प पूरा किया। अयोध्या में भव्य राम मंदिर और काशी में काशी विश्वनाथ धाम का निर्माण का निर्माण हो गया। मथुरा-वृंदावन में कार्य कर रहे हैं। हर तीर्थ को सजा रहे हैं, जबकि सपा के लोग हमारे पैसे को कब्रिस्तान की बाउंड्री के लिए देते थे। हमने कहा कि यह पैसा मंदिरों-तीर्थों के सुंदरीकरण, हिंदू श्रद्धालुओं की सुविधा और गरीब हित में खर्च होगा।" सीएम योगी ने कहा कि बिहार में आज एनआईटी, आईआईएम, एम्स, इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज आदि की लंबी श्रृंखला है। बिहार का नौजवान दुनिया में फिर से अपनी मेधा की छाप छोड़ रहा है और बिहार के विकास में भी योगदान दे रहा है। 11 वर्ष में मोदी जी ने विकास व विरासत का सम्मान किया है। सीएम ने केंद्र सरकार की विकास योजनाओं को भी गिनाया। बोले कि कांग्रेस व राजद झूठे वायदे कर रहे हैं। पहले यह पशुओं का चारा खाए, अब अवसर दिया तो गरीबों का राशन खा जाएंगे। उन्होंने अपील की कि कांग्रेस-राजद की घोषणा पर विश्वास न करना, क्योंकि जो राम का नहीं, वह हमारे किसी काम का नहीं। जो 'रामद्रोही' है, वह हमारा भी विरोधी है। 'रामद्रोही' रामराज्य नहीं ला सकता, वह जंगलराज ही लाएगा। सीएम योगी ने कहा कि जिस बिहार ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद, लोकनायक जयप्रकाश नारायण, जननायक कर्पूरी ठाकुर को दिया, वह बिहार पहचान के लिए क्यों मोहताज हुआ। पहले कांग्रेस, फिर राजद ने बिहार को लूटा, नौजवानों के रोजगार को छीना, किसानों को आत्महत्या के लिए मजबूर किया। गरीबों को योजनाओं का लाभ नहीं दिया। पैसा परिवार के विकास में लगा दिया, जिससे सब कुछ चौपट हो गया और नक्सलवाद, माओवाद, माफियावाद फैलता गया। बेटी-बहन पर सुरक्षा का संकट खड़ा हो गया। सत्ता के समानांतर माफिया की सरकार चलने लग गई। कांग्रेस व राजद ने बिहार के नागरिकों के सामने पहचान का संकट खड़ा किया। जब भी कानून व्यवस्था खराब होती है तो युवा रोजगार, बेटी सुरक्षा के लिए परेशान होती है। कोई निवेशक नहीं आता है, जिससे विकास बाधित हो जाता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राजद व कांग्रेस की पार्टनर यूपी में समाजवादी पार्टी है। लखनऊ में सपा सरकार के समय एक माफिया ने गरीबों और सरकारी जमीन पर चार किलेनुमे मकान बना डाले थे। हमारी सरकार बनते ही मैंने पूछा कि यह किसने बनवाए हैं। लोगों ने जब नाम बताया तो मैंने कहा कि यह तो कुख्यात माफिया है। फिर हमारी सरकार ने बुलडोजर की कार्रवाई की। हमने उस जमीन को प्लेन किया, फिर हाईराइज बिल्डिंग बनाकर गरीबों के आवास बनाए। कार्तिक पूर्णिमा पर आज सुबह मैं लखनऊ में गरीबों को आवास उपलब्ध करा रहा था। यूपी में जो काम सपा करती थी, वही काम बिहार में राजद व कांग्रेस करती थी। इनका उपचार केवल एनडीए है। यह लोग जाति सेना खड़ी करके लड़ाते थे। सीएम ने फिर चेताया- 'जब भी बंटेंगे तो कटेंगे'। सीएम ने कहा कि सपा, राजद व कांग्रेस को परेशानी होती है कि भाजपा की डबल इंजन सरकार नाम क्यों बदल देती है। हम इसलिए नाम बदलते हैं क्योंकि नाम के अनुरूप काम किया जा सके। हमने फैजाबाद का नाम अयोध्या किया, क्योंकि अयोध्या ही पौराणिक नाम था। भगवान राम का जन्म अयोध्या में हुआ था। फैजाबाद विदेशी आक्रांताओं का प्रतीक था। गंगा-यमुना का संगम जहां होता है, उसका नाम प्रयागराज था। मुगलकाल में इलाहाबाद कर दिया गया था, हमने फिर से प्रयागराज कर दिया। परेशान सपा वाले कहते हैं कि इसका नाम अयोध्या व प्रयागराज क्यों कर दिया। यहां भी कांग्रेस को परेशानी होगी कि कहीं वजीरगंज का नाम न बदल दिया जाए। हमें आगे बढ़ने के लिए विरासत का सम्मान और पूर्वजों पर गौरव की अनुभूति करनी होगी।