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HIL 2025-26: हीरो हॉकी इंडिया लीग का पूरा शेड्यूल घोषित, इस दिन से शुरू होगा धमाकेदार सीजन

रांची हीरो हॉकी इंडिया लीग के आगामी सीजन (2025-26) के लिए पुरुष और महिला वर्ग के शेड्यूल की घोषणा कर दी गई है। हीरो हॉकी इंडिया लीग ने शनिवार को 2025-26 सीजन की हीरो पुरुष और महिला लीग के आधिकारिक शेड्यूल की घोषणा की। महिला लीग 28 दिसंबर से 10 जनवरी तक रांची में आयोजित होगी। पुरुष लीग 3 से 26 जनवरी तक चेन्नई, रांची और भुवनेश्वर में होगी। घोषणा रांची के मारांग गोमके जयपाल सिंह एस्ट्रोटर्फ हॉकी स्टेडियम में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि झारखंड सरकार के पर्यटन, कला, संस्कृति, खेल और युवा मामले मंत्री सुदिव्य कुमार थे। इस मौके पर हॉकी इंडिया के महासचिव और एचआईएल गवर्निंग कमेटी के सदस्य भोला नाथ सिंह, रांची रॉयल्स टीम के मालिक अल्विश एम.ए., और अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी मनदीप सिंह, आशीष तानी पुर्ती, संगीता कुमारी, दीपिका सोरेंग, निक्की प्रधान एवं ब्यूटी डुंग डुंग भी उपस्थित रहीं। हीरो हॉकी इंडिया लीग गवर्निंग कमेटी के अध्यक्ष डॉ. दिलीप तिर्की ने कहा, "पिछले सीजन की सफलता के बाद हम इस बार और भी रोमांचक प्रतियोगिता देखने जा रहे हैं। हमने पुरुष लीग को तीन शहरों तक विस्तारित किया है ताकि अधिक से अधिक प्रशंसक इस विश्वस्तरीय हॉकी का आनंद ले सकें।” हॉकी इंडिया लीग गवर्निंग कमेटी के सदस्य भोला नाथ सिंह ने कहा, "हीरो हॉकी इंडिया लीग भारतीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों का संगम बन चुकी है। देशभर में फैले मैच और बढ़ते प्रशंसक जुड़ाव के साथ यह सीजन अब तक का सबसे यादगार होगा।" कार्यक्रम के दौरान रांची रॉयल्स का आधिकारिक लोगो लॉन्च किया गया। लोगो टीम की जीवंत भावना और झारखंड की समृद्ध हॉकी विरासत के साथ मजबूत संबंध का प्रतीक है। 28 दिसंबर से 10 जनवरी 2026 तक रांची में होने वाली महिला लीग में कुल 13 मैच खेले जाएंगे। भाग लेने वाली चार टीमों रांची रॉयल्स, एसजी पाइपर्स, जेएसडब्ल्यू सूरमा हॉकी क्लब, और श्राची रारह बंगाल टाइगर्स के बीच डबल राउंड-रॉबिन प्रारूप में मुकाबले होंगे। अंक तालिका की शीर्ष दो टीमें 10 जनवरी को फाइनल में भिड़ेंगी। टूर्नामेंट में नीदरलैंड, बेल्जियम, ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना और ग्रेट ब्रिटेन जैसे 10 से अधिक देशों की महिला खिलाड़ी भाग लेंगी। पुरुष लीग 3 जनवरी से 26 जनवरी 2026 तक चलेगी। पहला चरण चेन्नई में, दूसरा रांची में और तीसरा भुवनेश्वर में आयोजित होगा। पुरुष लीग में आठ टीमें तमिलनाडु ड्रैगन्स, हैदराबाद तूफान, जीएसडब्ल्यू सूरमा हॉकी क्लब, श्राची रारह बंगाल टाइगर्स (वर्तमान चैंपियन), वेदांता कलिंग लांसर्स, रांची रॉयल्स, एसजी पाइपर्स और एचआईएल गवर्निंग काउंसिल हिस्सा लेंगी। पुरुष लीग में 33 मैच खेले जाएंगे, जिनमें अर्जेंटीना, बेल्जियम, जर्मनी, इंग्लैंड, स्पेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे शीर्ष हॉकी राष्ट्रों के खिलाड़ी शामिल होंगे। सभी टीमें सिंगल राउंड-रॉबिन प्रारूप में एक-दूसरे से खेलेंगी। शीर्ष चार टीमें प्लेऑफ में पहुंचेंगी। क्वालिफायर 1 और एलिमिनेटर 23 जनवरी (भुवनेश्वर) को खेला जाएगा। दूसरा क्वालिफायर 25 जनवरी को खेला जाएगा। फाइनल और तीसरे स्थान के लिए मैच 26 जनवरी को कलिंग स्टेडियम, भुवनेश्वर में खेला जाएगा।

सांस लेना हुआ मुश्किल: प्रदूषण से मौतों का आंकड़ा चौंकाने वाला, नई रिपोर्ट में बड़े खुलासे

नई दिल्ली अगर आपको भी लग रहा है कि एयर क्वालिटी खराब हो रही है और प्रदूषण से होने वाली मौंते ज्यादा हो रही हैं, तो ऐसा महसूस करने वाले आप अकेले नहीं हैं। वायु प्रदूषण से जुड़ी मौतों की कुल संख्या, जो मुख्य रूप से जनसंख्या वृद्धि, वृद्धावस्था और लगातार प्रदूषण के कारण बहुत ज्यादा बनी हुई है। और कुछ विश्लेषणों में तो और भी बढ़ गई है। नई "स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2025" रिपोर्ट ताजा वैश्विक आंकड़ों को दिखाती है बताती है कि वायु प्रदूषण दुनिया भर में लाखों अकाल मौतों का कारण बन रहा है। जानलेवा साबित हो रहा वायु प्रदूषण स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2025 ताजा PM2.5 और ओजोन एक्सपोजर आंकड़ों और डिजीज बर्डन मॉडल का इस्तेमाल करके एयर क्वालिटी और स्वास्थ्य परिणामों की जांच करता है। इसका शीर्षक है: वायु प्रदूषण दुनिया भर में सबसे बड़े जानलेवा कारकों में से एक बना हुआ है, और इनमें से लगभग दस में से नौ मौतें गैर-संचारी रोगों जैसे हृदय रोग, स्ट्रोक, पुरानी फेफड़ों की बीमारी और फेफड़ों के कैंसर से होती हैं। संक्षेप में, वायु प्रदूषण अब केवल "फेफड़ों की समस्या" नहीं रह गया है; यह अब मुख्य रूप से दिल के दौरे, स्ट्रोक और पुरानी हृदय रोगों को बढ़ावा देता है। वायु प्रदूषण कैसे बनता है मौत का कारण? वायु प्रदूषण PM2.5, ओजोन, नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड आदि नामक सूक्ष्म कणों का एक जटिल मिश्रण है, लेकिन सबसे घातक घटक सूक्ष्म कणिकीय पदार्थ (PM2.5) है।      सूक्ष्म कण फेफड़ों में प्रवेश करते हैं- PM2.5 इतना सूक्ष्म होता है कि यह फेफड़ों की गहरी वायुकोशियों तक पहुंच जाता है। इससे फेफड़ों के ऊतकों में जलन होती है और सूजन हो जाती है।     सूजन बढ़ती जाती है- सूजे हुए फेफड़ों से संकेत रक्तप्रवाह में पहुंचते हैं, जिससे पूरे शरीर में सूजन बढ़ जाती है, जिससे धमनी पट्टिकाएं अस्थिर हो जाती हैं। इससे दिल का दौरा और स्ट्रोक की संभावना बढ़ जाती है।     रक्त और वाहिकाओं पर सीधा प्रभाव- प्रदूषक खून के थक्के जमने के तरीके को बदल सकते हैं और रक्त वाहिकाओं के कार्य को कम कर सकते हैं, जिससे घातक हृदय संबंधी घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।     दीर्घकालिक क्षति- लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD), फेफड़ों का कैंसर और हृदय रोग जैसी दीर्घकालिक बीमारियां बढ़ जाती हैं, जो समय से पहले मृत्यु का कारण बनती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन और लॉन्गटर्म स्टडी के अनुसार, प्रदूषण से संबंधित अधिकांश मौतें इस्केमिक हृदय रोग और स्ट्रोक के कारण होती हैं, इसके बाद COPD, निचले श्वसन संक्रमण और फेफड़ों का कैंसर होता है। वायु प्रदूषण से मृत्यु के जोखिम को कम करने के प्रोटोकॉल इसमें बड़ी कमी लाने के लिए स्वच्छ ऊर्जा, यातायात नियंत्रण और औद्योगिक नियमों जैसी नीतिगत कार्रवाई की आवश्यकता है। लेकिन व्यक्ति और परिवार, जोखिम को कम करने के लिए अभी से व्यावहारिक कदम उठा सकते हैं।     स्वच्छ खाना पकाने के ईंधन या कुशल चूल्हे का उपयोग करें; रसोई को हवादार रखें; घर के अंदर कचरा जलाने से बचें। घरेलू प्रदूषण अभी भी कई अकाल मौतों का कारण बनता है, खासकर बच्चों में।     दोबारा इस्तेमाल होने वाला मास्क या प्यूरीफायर का उपयोग करने वाले परिवार प्रमाणित उपकरण चुनें और उनका उचित रखरखाव करें।     जब AQI अधिक हो, तो बाहर काम कम करें, खासकर यदि आप वृद्ध हैं या आपको हृदय/फेफड़ों की बीमारी है। व्यायाम स्वास्थ्यवर्धक है, लेकिन बहुत प्रदूषित हवा में नहीं।     बहुत प्रदूषित स्थानों में N95/FFP2 जैसे उपयुक्त मास्क का उपयोग करें क्योंकि सही तरीके से लगाए जाने पर ये साँस के द्वारा अंदर जाने वाले PM2.5 को कम करते हैं।     यदि आप उच्च प्रदूषण वाले क्षेत्र में रहते हैं, तो HEPA फिल्टर वाले इनडोर एयर क्लीनर पर विचार करें क्योंकि ये इनडोर PM2.5 को कम करते हैं और संवेदनशील लोगों की सुरक्षा में मदद कर सकते हैं।     बुजुर्गों और हृदय या फेफड़ों की बीमारी वाले लोगों को स्वास्थ्य संबंधी सलाह का पालन करना चाहिए और अपनी दवाइयां नियमित रखनी चाहिए और सीने में दर्द, अचानक सांस लेने में तकलीफ होने पर तुरंत डॉक्टर की सहायता लेनी चाहिए। 2025 की ग्लोबल एयर कंडीशन और अन्य ग्लेबल एनालिसिस एक बात स्पष्ट करते हैं कि वायु प्रदूषण दुनिया भर में सबसे बड़े जानलेवा कारकों में से एक बना हुआ है, और हालांकि दुनिया के कुछ हिस्सों में प्रगति हो रही है, फिर भी कुल बोझ बहुत बड़ा है क्योंकि इसका प्रभाव अभी भी व्यापक है और आबादी बूढ़ी हो रही है। घरेलू और व्यक्तिगत उपायों के साथ नीतिगत कार्रवाई ही कम मौतों का रास्ता है।  

राजनीतिक पारा हाई: AAP नेता ने CM रेखा गुप्ता से मिलने की तैयारी की, सामने आई चुनौती

नई दिल्ली  छठ महापर्व से पहले एक बार फिर दिल्ली में यमुना के पानी को लेकर राजनीति शुरू हो गई है। आम आदमी पार्टी ने यमुना के पानी को लेकर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को बड़ी चुनौती दी है। दिल्ली आम आदमी पार्टी के मुखिया सौरभ भारद्वाज ने कहा है कि वह इस युमना के पानी को सीएम रेखा गुप्ता के पास ले जाएंगे और चुनौती देंगे कि वह इसे पीकर दिखा दें। उन्होंने कहा, हमने वजीराबाद के पास यमुना से पानी भरा हुआ है। इस पानी में नीचे जमी हुई चीज मल है जो नजफगढ़ नाले से बहकर यमुना में मिली है। ये पानी पीने योग्य छोड़िए नहाने योग्य भी नहीं है। ये बात BJP सरकार के दिल्ली पलूशन कंट्रोल बोर्ड की दो दिन पुरानी रिपुोर्ट में भी कही गई है। सौरभ भारद्वाज ने कहा, इस रिपोर्ट के मुताबिक जगह-जगह से यमुना के पानी को जो सैंपल लिए गए, उससे पता चला है कि ये प्रदूषित है। आप नेता ने दिल्ली की सीएम पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर छठ के दौरान गरीब लोग इनकी बात सच मानकर यमुना के अंदर जाकर अर्क दें और गलती से वो पानी पीलें तो वह इतने बीमार हो जाएंगे कि शायद उनकी मौत भी हो जाए। क्योंकि उनके पास इतने पैसे नहीं होंगे कि अच्छे अस्पताल में अपना इलाज करा सकें। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने दिल्ली में झूठतंत्र फैला रखा है और इसी के दम पर बातें कर रहे हैं। सौरभ भारद्वाज ने कहा, हमारी सरकार ने यमुना जी को साफ करने का प्लान बनाया लेकिन बीजेपी के उपराज्यपाल ने तमाम अड़चनें पैदा कीं और काम नहीं होने दिया। अब रेखा गुप्ता जी को चैलेंज है कि वह यमुना जी के इस पानी को पीकर दिखाएं और अगर ना पी सकें तो इसे लेकर झूठ ना फैलाएं। 'पूर्वांचलियों की सेहत से खिलवाड़' वहीं बुराड़ी से आम आदमी पार्टी के विझायक संजीव झा ने दावा किया है कि बीजेपी के नेता जिस यमुना जी को साफ करने का दावा करते हैं, हम उसी जगह से यह पानी लेकर आए हैं। बीजेपी सत्ता में रहकर राजनीतिक फायदों के लिए पूर्वांचल समाज के साथ खिलवाड़ कर रही है। बीजेपी हमेशा से ही पूर्वांचलियों से नफ़रत करती है और इस बार उनकी सेहत के साथ खिलवाड़ कर रही है।  

भीड़ से डर नहीं, सरकार से सवाल है! 12 हजार स्पेशल ट्रेनें गायब, छत और दरवाजों पर लोग

नई दिल्ली  कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने त्योहारों के मौसम में कई रेलगाड़ियों में यात्रियों की भीड़ होने को लेकर सरकार पर निशाना साधा। शनिवार को उन्होंने आरोप लगाया कि फेल डबल इंजन सरकार के दावे खोखले साबित हुए हैं। यह सवाल भी किया कि 12,000 स्पेशल ट्रेनें कहां हैं? रेल मंत्रालय ने 1 अक्टूबर से 30 नवंबर, 2025 तक निर्धारित 12,011 रेल यात्राओं की सूची पिछले दिनों जारी की थी। इसमें बताया गया कि त्योहारों के दौरान भारी भीड़ को देखते हुए देश के विभिन्न स्थानों से प्रतिदिन औसतन 196 विशेष रेलगाड़ियां चलाई जा रही हैं। अब तक एक दिन में संचालित विशेष रेलगाड़ियों की सबसे अधिक संख्या 18 अक्टूबर को लगभग 280 थी, जबकि सबसे कम 8 अक्टूबर को लगभग 166 थी। राहुल गांधी ने कुछ रेलगाड़ियों में यात्रियों की भीड़ से जुड़े वीडियो साझा करते हुए एक्स पर पोस्ट किया, 'त्योहारों का महीना है – दिवाली, भाईदूज, छठ। बिहार में इन त्यौहारों का मतलब सिर्फ आस्था नहीं, घर लौटने की लालसा है – मिट्टी की खुशबू, परिवार का स्नेह, गांव का अपनापन। लेकिन यह लालसा अब एक संघर्ष बन चुकी है।' राहुल गांधी ने कहा कि बिहार जाने वाली ट्रेनें ठसाठस भरी हैं। टिकट मिलना असंभव है और सफर अमानवीय हो गया है। कई ट्रेनों में क्षमता से 200 प्रतिशत तक यात्री सवार हैं। लोग दरवाजों और छतों तक लटके हैं। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि फेल डबल इंजन सरकार के दावे खोखले हैं। राहुल गांधी ने उठाए गंभीर सवाल कांग्रेस नेता गांधी ने सवाल किया, 'कहां हैं 12,000 स्पेशल ट्रेनें? क्यों हालात हर साल और बदतर ही होते जाते हैं। क्यों बिहार के लोग हर साल ऐसे अपमानजनक हालात में घर लौटने को मजबूर हैं?' राहुल गांधी ने कहा कि अगर राज्य में रोजगार और सम्मानजनक जीवन मिलता, तो उन्हें हजारों किलोमीटर दूर भटकना नहीं पड़ता। उन्होंने दावा किया कि ये सिर्फ मजबूर यात्री नहीं, राजग की धोखेबाज नीतियों और नियत का जीता-जागता सबूत हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि यात्रा सुरक्षित और सम्मानजनक हो यह अधिकार है, कोई एहसान नहीं।  

UN में भारत का तीखा हमला, पाकिस्तान पर लगाया लोकतंत्र का ठप्पा

न्यूयॉर्क  न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में शुक्रवार को आयोजित सुरक्षा परिषद की खुली बहस “United Nations Organization: Looking into Future” के दौरान भारत ने पाकिस्तान को कड़ी फटकार लगाई। पाकिस्तान की दलीलों का जवाब देते हुए भारत के स्थायी प्रतिनिधि और राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने कहा कि “जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा।”हरीश ने पाकिस्तान पर तीखा प्रहार करते हुए कहा-“हम जानते हैं कि लोकतंत्र जैसी अवधारणाएं पाकिस्तान के लिए विदेशी हैं।” उन्होंने आगे कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं और संवैधानिक ढांचे के तहत अपने मौलिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हैं, जबकि पाकिस्तान अवैध रूप से कब्जाए गए क्षेत्रों में मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन कर रहा है। पाक कब्जे वाले इलाकों में दमन का आरोप राजदूत हरीश ने संयुक्त राष्ट्र से आह्वान किया कि वह पाकिस्तान से अवैध रूप से कब्जाए गए क्षेत्रों (PoJK) में मानवाधिकार हनन, दमन, सैन्य उत्पीड़न और संसाधनों के दोहन को रोकने की मांग करे। उन्होंने कहा कि वहां की जनता पाकिस्तानी कब्जे और क्रूरता के खिलाफ विद्रोह कर रही है। हरीश ने कहा कि अब समय आ गया है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की संरचना में व्यापक सुधार किया जाए, क्योंकि 1945 की व्यवस्था अब 2025 की चुनौतियों के अनुरूप नहीं है।“80 साल पुरानी परिषद की संरचना आज की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को नहीं दर्शाती। ग्लोबल साउथ की आवाज़ को वैश्विक निर्णय लेने की प्रक्रिया में स्थान मिलना चाहिए।”उन्होंने कहा कि सुधारों को टालना ग्लोबल साउथ के देशों के साथ अन्याय होगा, क्योंकि वे बड़ी आबादी और विकास, जलवायु तथा वित्तपोषण जैसी विशेष चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। 

पूर्व DGP के बेटे की मौत की जांच में नया मोड़, डायरी से मिली अहम जानकारी

पंचकूला पंजाब के पंचकूला में पूर्व डीजीपी मोहम्मद मुस्तफा के 35 वर्षीय बेटे अकील अख्तर की मौत के मामले ने अब एक नया मोड़ ले लिया है. एसआईटी जांच में अकील की डायरी से ऐसे कई राज खुले हैं, जो उसके आखिरी वीडियो से मिलते-जुलते हैं. पुलिस का दावा है कि डायरी में वही बातें दर्ज हैं, जो अक़ील ने अपनी वीडियो में कही थीं, लेकिन कुछ पन्नों में लिखे नोट्स उससे उलट भी हैं. इस मामले की जांच कर रही एसआईटी के प्रमुख एसीपी विक्रम नेहरा ने बताया कि डायरी की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी. अकील की हैंडराइटिंग का मिलान भी कराया जाएगा, ताकि यह तय किया जा सके कि लिखावट उसी की है या किसी और ने उसमें कुछ जोड़ा है. पुलिस को अकील के कमरे से ऐसी वस्तुएं भी मिली हैं, जिन पर ड्रग्स कनेक्शन का शक जताया जा रहा है. एसआईटी टीम और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स अब उन वस्तुओं की वैज्ञानिक जांच करा रहे हैं. पुलिस के मुताबिक अकील का मोबाइल फोन और कुछ अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस अभी तक बरामद नहीं हुए हैं, जिनसे जांच को बड़ा सुराग मिल सकता है. अकील की डायरी उसके परिवार ने ही पुलिस को सौंपी है. डायरी की लिखावट और उसमें दर्ज बातों ने एसआईटी को उलझा दिया है. इसमें दर्ज कुछ नोट्स ऐसे हैं जिनमें अकील ने अपनी मानसिक स्थिति का जिक्र किया है, तो कुछ में उसने घर के अंदर की परेशानियों की बात कही है. पुलिस इन दोनों एंगल्स को समानांतर ट्रैक पर जांच रही है. इस केस में एफआईआर मलेरकोटला के रहने वाले शमसुद्दीन चौधरी की शिकायत पर दर्ज की गई है. वो खुद को अकील अख्तर के परिवार का पड़ोसी बताते हैं. उन्होंने अपनी शिकायत में अकील अख्तर की मौत पर संदेह जताया है. इसके साथ ही इसके पीछे साजिश की आशंका जताई है. हालांकि, उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि अब जांच का नया मुद्दा बन गई है. वह पहले आम आदमी पार्टी से जुड़े थे. साल 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में मलेरकोटला से प्रत्याशी मोहम्मद जमील-उर-रहमान के लिए प्रचार कर चुके हैं. इस चुनाव में अकील की मां रजिया सुल्ताना को जमील-उर-रहमान ने हराया था, जो तीन बार की कांग्रेस विधायक रह चुकी हैं. रहमान का कहना है कि शमसुद्दीन चौधरी थोड़े समय के लिए पार्टी से जुड़े थे. उससे पहले वे अकाली दल से भी जुड़े रह चुके हैं. उन्होंने कहा कि शमसुद्दीन कभी उनके पीए नहीं थे. उनके खिलाफ शिकायतें आने के बाद ऑफिस आने से रोक दिया था. पंजाब के पूर्व डीजीपी (मानवाधिकार) मोहम्मद मुस्तफा ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है. उन्होंने कहा, ''मैं पुलिस केस का स्वागत करता हूं. जांच होगी तो सच्चाई सामने आएगी.'' उन्होंने दावा किया कि उनका बेटा अकील अख्तर पिछले 18 सालों से साइकोटिक डिसऑर्डर से जूझ रहा था. उसे नशे की लत भी थी. शिकायतकर्ता धोखेबाज है. उन्होंने कहा, ''शमसुद्दीन चौधरी कभी मेरा पड़ोसी नहीं रहा. मेरा घर मलेरकोटला से दो किलोमीटर दूर है. वह दावा करता है कि वह मेरे ससुराल वालों को जानता है, लेकिन मैंने उसे उनके घर पर भी कभी नहीं देखा. वह किसी के इशारों पर काम कर रहा है. एसआईटी चाहे तो उसे मेरे सामने बिठा सकती है, ताकि मैं खुद उससे सवाल कर सकूं. उसका झूठ सामने आ जाएगा.'' शमसुद्दीन चौधरी ने बताया कि 27 अगस्त को अकील अख्तर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो डाला था, जिसमें उसने अपने पिता और पत्नी पर गंभीर आरोप लगाए थे. उसने कहा था कि उसे अपनी जान का खतरा है. लेकिन कुछ हफ्ते बाद उन्होंने ही एक नया वीडियो जारी कर कहा, ''पहले जो वीडियो डाला था, वो मेरी मानसिक बीमारी की वजह से था. मुझे बहुत अच्छा परिवार मिला है.'' इस मामले में 20 अक्टूबर को शिकायत मिलने के बाद पंचकूला पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) (हत्या) और 61 (आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज किया है. इस एफआईआर में अकील के माता-पिता मोहम्मद मुस्तफा और रजिया सुल्ताना के अलावा उनकी पत्नी और बहन का भी नाम शामिल है. फिलहाल पुलिस इस मामले की विस्तृत जांच कर रही है.

सैन्य अभ्यास से पहले पाकिस्तान ने बंद किए हवाई मार्ग, भारतीय ‘त्रिशूल’ से बढ़ा तनाव

नई दिल्ली  भारत की ओर से पाकिस्तान सीमा के पास सेना के तीनों अंगों (थल सेना, नौसेना और वायु सेना) का संयुक्त युद्धाभ्यास 'त्रिशूल' शुरू करने की तैयारी के बीच, पाकिस्तान ने अपने केंद्रीय और दक्षिणी हवाई क्षेत्र में कई हवाई मार्गों पर प्रतिबंध लगा दिया है. इस कदम को लेकर इस्लामाबाद ने कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि यह या तो किसी सैन्य अभ्यास से जुड़ा कदम हो सकता है या फिर किसी हथियार परीक्षण की तैयारी. 30 अक्टूबर से 10 नवंबर तक अभ्यास करेंगी भारत की सेनाएं यह कदम तब उठाया गया है जब भारत ने 30 अक्टूबर से 10 नवंबर तक पाकिस्तान सीमा के पास सर क्रीक इलाके में बड़े पैमाने पर तीनों सेनाओं के संयुक्त अभ्यास के लिए NOTAM (Notice to Airmen) जारी किया था. ऑपरेशन सिंदूर के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच इस तरह की सैन्य 'तनातनी' आम हो गई है, जिसमें दोनों देश सीमाई इलाकों में सैन्य अभ्यास के लिए NOTAM जारी करते हैं. ‘त्रिशूल’ अभ्यास का महत्व रक्षा विश्लेषक डेमियन साइमोन की ओर से शेयर की गई सैटेलाइट तस्वीरों के मुताबिक, ‘त्रिशूल’ अभ्यास के लिए आरक्षित हवाई क्षेत्र 28,000 फीट की ऊंचाई तक फैला हुआ है. उन्होंने ट्वीट में कहा कि अभ्यास का क्षेत्र और इसका पैमाना 'असामान्य' है. रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस अभ्यास में थलसेना, नौसेना और वायुसेना की संयुक्त भागीदारी होगी. इसका उद्देश्य सेनाओं की संयुक्त अभियान क्षमता, ‘आत्मनिर्भरता’ और इनोवेशन का प्रदर्शन करना है. भारत की सीमाई गतिविधियों पर पाकिस्तान की नजर मंत्रालय ने बयान में कहा, 'दक्षिणी कमान के सैनिक विभिन्न चुनौतीपूर्ण इलाकों में संयुक्त अभियानों को परखेंगे, जिनमें क्रीक और रेगिस्तानी इलाकों में आक्रामक रणनीतियां, सौराष्ट्र तट पर उभयचर (amphibious) ऑपरेशन और बहु-क्षेत्रीय संयुक्त अभ्यास शामिल हैं.' हालांकि ऐसे अभ्यास सामान्य सैन्य तैयारी का हिस्सा होते हैं, लेकिन पाकिस्तान की ओर से NOTAM जारी करना यह दर्शाता है कि वह ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की सीमाई गतिविधियों पर करीबी नजर रख रहा है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान के भीतर 9 आतंकी ठिकाने और 11 सैन्य ठिकाने व एयरबेस को निशाना बनाया था.

मुख्यमंत्री गुप्ता का ऐलान: दिल्ली में 27 अक्टूबर को सभी सरकारी संस्थान रहेंगे बंद

नई दिल्ली  दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 27 अक्टूबर को छठ पर्व के अवसर पर सरकारी छुट्टी की शुक्रवार को घोषणा की. मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने इस संबंध में एक बयान जारी किया है. मुख्यमंत्री ने बताया कि चार दिवसीय इस उत्सव का तीसरा दिन सबसे महत्वपूर्ण है और इसीलिए सोमवार को अवकाश रखा गया है. सीएमओ के बयान में बताया गया है कि छठ पूजा के दिन श्रद्धालु जलाशयों के किनारे डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं और इसकी तैयारियां सुबह से ही शुरू हो जाती हैं. परिवार मिलकर विभिन्न अनुष्ठान करते हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 27 अक्टूबर को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है. मुख्यमंत्री गुप्ता ने श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री गुप्ता ने कहा कि छठ पूजा में लोग सूर्य देव और छठी मैया की पूजा करते हैं. यह त्योहार आस्था और भक्ति के साथ-साथ स्वच्छता का प्रतीक है. जल और सूर्य की पूजा के जरिए यह पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देता है. दिल्ली सरकार ने छठ घाटों पर तैयारियां शुरू कर दी दिल्ली सरकार ने पूरे शहर में 1,300 से अधिक छठ घाटों पर तैयारियां शुरू कर दी हैं. यमुना के किनारे 17 मॉडल घाटों को बेहतर सुविधाओं जैसे टेंट, रोशनी, शौचालय, पीने का पानी और सुरक्षा के साथ अपग्रेड किया जा रहा है, ताकि श्रद्धालु आराम और सुरक्षा के साथ पूजा-अर्चना कर सकें. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने डॉवका सेक्टर 23B के पोचनपुर छठ घाट का निरीक्षण किया. आस्था का महत्वपूर्ण पर्व छठ पूजा शुरू आज 25 अक्टूबर 2025 से लोक आस्था का महत्वपूर्ण पर्व छठ पूजा शुरू हो चुका है. यह पर्व बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है. छठ पूजा की विशेषता यह है कि व्रती महिलाएं पूरे 36 घंटे निर्जला उपवास रखती हैं, यानी न जल पीती हैं और न अन्न ग्रहण करती हैं. इसके बावजूद वे पूरे समर्पण और आस्था के साथ सूर्य देव को दो बार अर्घ्य देती हैं—पहले डूबते सूर्य को और अगले दिन उगते सूर्य को. इसी के साथ पावन व्रत संपन्न होता है.

दवाई खाने वाले रहें सावधान! पंजाब में 11 Medicines को लेकर हुई चौंकाने वाली रिपोर्ट

चंडीगढ़ सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) की सितंबर 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में जांची गई दवाओं में से कुल 112 दवाओं के सैंपल फेल पाए गए हैं। इनमें से 11 दवाइयां पंजाब में बनी हुई हैं। इन दवाइयों का इस्तेमाल पेट दर्द, बुखार, दिल की बीमारियां, कैंसर, शुगर, हाई ब्लड प्रेशर, अस्थमा, इंफेक्शन, दर्द, सूजन, एनीमिया और मिर्गी जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है। इन फेल हुई दवाओं में तीन कफ सिरप भी शामिल हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले ही पंजाब सरकार ने 8 दवाइयों पर रोक लगाई थी। सबसे ज्यादा दवाइयां 49 सैंपल हिमाचल प्रदेश की फैक्ट्रियों में बनी फेल पाए गए हैं। इसके अलावा 16 गुजरात, 12 उत्तराखंड, 11 पंजाब, और 6 मध्य प्रदेश व अन्य राज्यों की दवाइयां मानकों पर खरी नहीं उतरीं। स्वास्थ्य विभाग ने सभी अस्पतालों और मेडिकल स्टोर्स को इन दवाइयों पर तत्काल प्रतिबंध लगाने के आदेश जारी किए हैं। वहीं, जिन फार्मा कंपनियों ने ये दवाइयां बनाई हैं, वे अब जांच के दायरे में आ गई हैं।

आरक्षण नीति में बदलाव की तैयारी, उमर अब्दुल्ला के कदम से छिड़ा विवाद

जम्मू-कश्मीर  जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) सरकार के कार्यकाल का एक वर्ष पूरा होने पर आरक्षण नीति की समीक्षा प्रदेश की सबसे बड़ी राजनीतिक बहस बन गई है। साल 2024 में जब जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के रूप में सीधे दिल्ली के प्रशासनिक नियंत्रण में था तब उपराज्यपाल (LG) ने पहाड़ी समुदाय को 10 प्रतिशत आरक्षण देने की मंजूरी दी थी। यह समुदाय की लंबे समय से लंबित मांग मानी जा रही थी। इस निर्णय के बाद प्रदेश में कुल आरक्षण लगभग 60 प्रतिशत तक पहुंच गया। राजनीतिक विश्लेषकों ने उस समय माना था कि यह कदम बीजेपी के लिए संसदीय और विधानसभा चुनावों में राजनीतिक समर्थन जुटाने का प्रयास था। वर्तमान में जम्मू-कश्मीर में अनुसूचित जाति (SC) को 8%, अनुसूचित जनजाति (गुज्जर-बकरवाल) को 10%, अनुसूचित जनजाति (पहाड़ी) को 10%, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 8%, नियंत्रण रेखा (LoC) और अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे क्षेत्र के निवासियों के लिए 4%, पिछड़े क्षेत्र के निवासी के लिए 10% और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 10% आरक्षण की व्यवस्था है। सामान्य वर्ग के छात्रों का विरोध नीति में बदलाव के बाद सामान्य वर्ग के छात्रों में नाराजगी फैल गई। उन्होंने आरोप लगाया कि आरक्षण बढ़ने से खुली प्रतिस्पर्धा (ओपन मेरिट) के लिए नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में सीटें बहुत कम हो गई हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार, जम्मू-कश्मीर की लगभग 69 प्रतिशत आबादी सामान्य वर्ग से है। चुनाव बाद बढ़ी सियासी गर्मी 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद 2024 में पहली बार विधानसभा चुनाव हुए। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अपने घोषणापत्र में वादा किया था कि वह आरक्षण नीति की समीक्षा करेगी और किसी भी अन्याय या असंतुलन को दूर करेगी। अक्टूबर 2024 में सत्ता में आने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को इस मुद्दे पर भारी दबाव का सामना करना पड़ा। सरकार ने एक कैबिनेट उप-समिति का गठन किया, जिसने छह महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपी। पिछले हफ्ते मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि कैबिनेट ने रिपोर्ट को मंजूरी दे दी है और अब इसे उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के पास अंतिम विचार के लिए भेजा गया है। सड़क से सदन तक विरोध दिसंबर 2024 में श्रीनगर में मुख्यमंत्री के आवास के बाहर बड़ा प्रदर्शन हुआ। इसमें विपक्षी नेताओं के साथ एनसी सांसद आगा रुहुल्लाह भी शामिल हुए, जिन्होंने खुद आंदोलन की अगुवाई की। इस घटना के बाद से रुहुल्लाह और पार्टी नेतृत्व के बीच मतभेद सामने आए हैं। अब 11 नवंबर को होने वाला बडगाम विधानसभा उपचुनाव सरकार के लिए लोकप्रियता की परीक्षा माना जा रहा है। हालांकि, आगा रुहुल्लाह ने साफ कर दिया है कि वे इस चुनाव में प्रचार नहीं करेंगे। रुहुल्लाह ने हाल ही में सामान्य वर्ग के छात्रों से मुलाकात की और कहा, “बडगाम उपचुनाव पर कोई भी निर्णय लेने से पहले आरक्षण उप-समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए।” मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हमारी सरकार दबाव में काम नहीं करती। इस मुद्दे पर प्रक्रिया के अनुसार ही कदम उठाए जा रहे हैं।” इस बीच आरक्षण नीति से जुड़ी कई याचिकाएं जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में दायर की गई हैं, जिन पर सुनवाई जारी है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले महीनों में जम्मू-कश्मीर की राजनीति का सबसे निर्णायक चुनावी विषय बन सकता है।