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रायपुर : उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने पुनर्वास केंद्र की व्यवस्थाओं और सुविधाओं की समीक्षा की

रायपुर : उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने पुनर्वास केंद्र में सुविधाओं की ली समीक्षा बैठक आत्मसमर्पित नक्सलियों के कल्याण एवं पुनर्वास हेतु दिए आवश्यक दिशा निर्देश रायपुर छत्तीसगढ़ शासन के उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री  विजय शर्मा ने आज अपने बीजापुर प्रवास के दौरान सर्किट हाउस में जिला स्तरीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली। बैठक में उन्होंने पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पित नक्सलियों को पुनर्वास केंद्र में उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की विस्तारपूर्वक समीक्षा की।  शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पुनर्वास केंद्र में रह रहे आत्मसमर्पित नक्सलियों की बुनियादी आवश्यकताओं का संवेदनशीलता के साथ ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि उनके दैनिक जरूरतों जैसे नाश्ता, भोजन, वस्त्र, खेलकूद की सामग्री, योगाभ्यास और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए साथ ही उनके लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शासन-प्रशासन के वरिष्ठ जनों से नियमित संवाद की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पुनर्वास केंद्र में रह रहे लोगों के कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया जाए। उनकी रुचि एवं योग्यता के अनुसार उन्हें प्रशिक्षण प्रदान किया जाए, जिससे वे मुख्यधारा में सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर सकें। उन्होंने आत्मसमर्पित नक्सलियों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए परिजनों से मिलने की तिथि तय करने एवं यदि उनके परिवारजन किसी जेल में बंद हैं, तो उनसे मिलने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।  शर्मा ने कहा कि सभी पुनर्वासित व्यक्तियों को कम से कम एक बार रायपुर भ्रमण (एक्सपोज़र विज़िट) पर ले जाया जाए, ताकि वे समाज और विकास की मुख्यधारा से जुड़ सकें। इसके साथ ही उन्होंने पुनर्वास केंद्र के प्रत्येक सदस्य को निःशुल्क मोबाइल फोन उपलब्ध कराकर परिवार नियमित संपर्क बनाए रखने में सहयोग करने को कहा। बैठक में दंतेवाड़ा विधायक  चैतराम अटामी, एडीजी नक्सल ऑपरेशन  विवेकानंद सिन्हा, बस्तर संभाग आयुक्त  डोमन सिंह, आईजी बस्तर  सुंदरराज पी., डीआईजी  कमलोचन कश्यप, कलेक्टर  संबित मिश्रा, पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र यादव, डीएफओ  रंगानाथन रामाकृष्णन वाय सहित अन्य जिला स्तरीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने की जिला अस्पताल और जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि सतना जिला अस्पताल में बनने वाले 150 बिस्तर वाले नवीन हास्पिटल के भवन का निर्माण अक्टूबर 2026 में पूरा करने के निर्देश दिए हैं। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि जिला अस्पताल से लेकर उप स्वास्थ्य केन्द्र तक स्वास्थ्य सेवाओं में गुणात्मक सुधार कर मातृ-मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर कम करने के लगातार प्रयास करें।  शुक्ल शुक्रवार को सतना में जिला अस्पताल सहित मैहर और सतना जिले की स्वास्थ्य संस्थाओं की उपचार और स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा कर रहे थे। इस अवसर पर नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री मती प्रतिमा बागरी, सांसद सतना गणेश सिंह, महापौर योगेश ताम्रकार, कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एलके तिवारी, डीन मेडीकल कॉलेज डॉ. एसपी गर्ग, सिविल सर्जन डॉ. मनोज शुक्ला और पीआईयू के अधिकारी उपस्थित थे। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने जिला चिकित्सालय सतना के परिसर में 32 करोड 54 लाख 97 हजार रूपये की लागत से बनने वाले 150 बिस्तर वाले अस्पताल के एकीकृत भवन के निर्माण कार्य की समीक्षा की। पीआईयू के अधिकारियों ने बताया कि जिला अस्पताल परिसर में 32 करोड 54 लाख 97 हजार रूपये की लागत से 100 बिस्तरीय वार्ड, 50 बिस्तरीय क्रिटिकल केयर हास्पीटल ब्लाक (सीसीएचबी) एवं एन्टीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब (आईपीएचएल) के एकीकृत भवन का निर्माण किया जायेगा। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी अस्पताल में डॉक्टर और पैरामेडीकल स्टाफ प्राइवेट अस्पतालों की तुलना में बहुत बेहतर है। कलेक्टर और सीएमएचओ एयर एम्बुलेंस की सुविधा की मानीटरिंग करें। उप मुख्यमंत्री ने सेवा पखवाडा के दौरान आयोजित स्वास्थ्य शिविरों और जिले की सामुदायिक स्वास्थ्य संस्थाओं, प्राथमिक स्वास्थ्य संस्थाओं, उप स्वास्थ्य केन्द्र में स्वास्थ्य सेवाओं तथा गतिविधियों की विकासखण्डवार समीक्षा की।  

ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज रिकी पोंटिंग की पत्नी करती हैं शराब का बिज़नेस, जानिए ब्रांड का नाम

सिडनी  आपको यह जानकर हैरानी होगी कि एक दिग्गज क्रिकेटर की पत्नी का शराब का कारोबार है. लेकिन यह बिल्कुल सच है. दरअसल पूर्व ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट कप्तान रिकी पोंटिंग और उनकी पत्नी रियान कैंटर ने अपने प्रीमियम ब्रांड पोंटिंग वाइन्स के साथ वाइन उद्योग में एक शानदार शुरुआत की है. आइए जानते हैं कैसे हुई इस ब्रांड की शुरुआत.  पोंटिंग वाइन्स की शुरुआत  अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद रिकी पोंटिंग ने कई क्षेत्रों में अपनी किस्मत आजमाई. पहले कमेंट्री, फिर कोचिंग और फिर वाइन मेकिंग. अपनी पत्नी रियाना के साथ मिलकर उन्होंने बेहतरीन वाइन बनाने का फैसला किया. दोनों ने साथ मिलकर पोंटिंग वाइन्स लॉन्च किया. वाइन निर्माता बेन रिग्स का सहयोग  अपने ब्रांड के लिए पोंटिंग ने बेन रिग्स के साथ कोलैबोरेशन किया. बेन रिग्स एक पुरस्कार विजेता ऑस्ट्रेलिया वाइन निर्माता हैं. इन्होंने साथ मिलकर कुछ ऐसी वाइन बनाई जो गुणवत्ता, स्वाद और विरासत का एक अनोखा मेल है. रिकी पोंटिंग ने 2023 में इस ब्रांड को भारत में लॉन्च किया था. हालांकि भारत में से पूरी तरह से पेश करने में टैक्स संबंधित बाधाओं का सामना करना पड़ा. इसी के साथ भारत में लॉन्च होने के बाद से पोंटिंग वाइन्स ने ऑस्ट्रेलिया में और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार जीते हैं. आपको बता दें कि इस वाइन को ऑस्ट्रेलिया के प्रीमियम वाइन क्षेत्र जैसे की साउथ ऑस्ट्रेलिया में एडिलेड हिल्स, मैक्लारेन वेल और तस्मानिया में कोल रिवर वैली से अंगूरों का इस्तेमाल करके बनाया जाता है. पोंटिंग वाइंस प्रीमियम रेड, व्हाइट और रोसे वाइन की रेंज में आती है. क्रिकेट के मैदान से वाइनयार्ड तक की सफलता  इस ब्रांड को वाइन प्रेमियों से अच्छी खासी समीक्षाएं मिली हैं. इसी के साथ रिकी पोंटिंग को इस व्यवसाय से अच्छा खासा मुनाफा हुआ है. यह सिर्फ एक छोटा-मोटा प्रोजेक्ट नहीं बल्कि एक फलता फूलता व्यवसाय है.  रिकी पोंटिंग का क्रिकेट करियर  रिकी पोंटिंग 1999, 2003 और 2007 में ऑस्ट्रेलिया की विश्व कप विजेता टीम का हिस्सा रहे और बाद के दो में उन्होंने कप्तानी भी की. उन्होंने 77 टेस्ट मैचों में से 48 में जीत हासिल की है और ऑस्ट्रेलिया के सबसे सफल टेस्ट कप्तान बने हुए हैं. रिकी पोंटिंग टेस्ट और वनडे दोनों में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ियों में से एक है. इसी के साथ उनका नाम सचिन तेंदुलकर के बाद दूसरे सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय शतक बनाने वाले क्रिकेटर में आता है.

सर्विस क्वालिटी सर्वे में पुणे ने मारी बाज़ी, इंदौर एयरपोर्ट चौथे स्थान पर, चूहे ने गिराई रैंकिंग

इंदौर  इंदौर के देवी अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट की रैंकिंग में इस तिमाही में गिरावट दर्ज की गई है। एयरपोर्ट सर्विस क्वालिटी (एएसक्यू) सर्वे की तीसरी तिमाही (जुलाई से सितंबर) की रिपोर्ट के अनुसार इंदौर एयरपोर्ट देश में एक पायदान नीचे खिसककर चौथे स्थान पर पहुंच गया है। पिछली तिमाही में यह तीसरे स्थान पर था, जबकि पहली तिमाही में भी चौथे स्थान पर रहा था। यात्री को चूहे द्वारा काटने की घटना का भी एयरपोर्ट की छवि पर असर पड़ा है। इसके पहले दूसरे तिमाही के बराबर 4.93 अंक रहने के बावजूद इंदौर को चौथी रैंकिंग से संतोष करना पड़ा। वाराणसी एयरपोर्ट ने अपनी रैंकिंग में 0.02 अंकों का सुधार कर 4.94 अंक प्राप्त कर तीसरा स्थान हासिल किया। एशिया पैसेफिक की इंटरनेशनल रैंकिंग में भी इंदौर एयरपोर्ट को पांच पायदान का नुकसान हुआ है। अब यह 98 एयरपोर्ट में 58वें से 63वें स्थान पर पहुंच गया है। पुणे एयरपोर्ट नंबर वन देश में इस समय पुणे एयरपोर्ट 4.96 अंकों के साथ पहले स्थान पर है, जबकि गोवा दूसरे और वाराणसी को 4.94 अंक के साथ तीसरा स्थान पर रहा। इंदौर एयरपोर्ट को 4.93 अंक प्राप्त हुए हैं। अच्छी बात यह है कि गोवा और वाराणसी से इंदौर के अंक में केवल 0.1 का ही अंतर है। एएसक्यू सर्वे एयरपोर्ट काउंसिल इंटरनेशनल (एसीआई) द्वारा किया जाता है, जिसमें सालाना 18 लाख से अधिक यात्रियों की आवाजाही वाले एयरपोर्ट शामिल किए जाते हैं। एयरपोर्ट प्रबंधन का कहना है कि यात्रियों की शिकायतों और सर्वे के निष्कर्षों के आधार पर सुविधाओं में सुधार किया जाएगा। लक्ष्य है कि आने वाली तिमाही में इंदौर एयरपोर्ट फिर से शीर्ष में अपनी जगह बनाए। सफाई और शॉपिंग सुविधाओं पर कम अंक इस तिमाही में यात्रियों से 31 बिंदुओं पर प्रतिक्रिया ली गई, जिनमें से 24 बिंदुओं पर इंदौर एयरपोर्ट के अंक घटे हैं। सबसे कम स्कोर शॉपिंग व वैल्यू फॉर मनी, वाशरूम की स्वच्छता और टॉयलेट्स की मेंटेनेंस पर मिला। हालांकि, सुरक्षा जांच और कर्मचारियों की मददगार प्रवृत्ति के बिंदुओं पर एयरपोर्ट को बेहतर अंक मिले हैं। चूहे के काटने की घटना का असर सितंबर 2025 में एयरपोर्ट पर एक यात्री को चूहे के काटने की घटना ने भी इंदौर एयरपोर्ट की छवि को नुकसान पहुंचाया। घटना के बाद प्रबंधन ने ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर को हटाया और सफाई व पेस्ट कंट्रोल कंपनियों पर जुर्माना लगाया था। देश के शीर्ष 10 एयरपोर्ट पुणे, गोवा, वाराणसी, इंदौर, चेन्नई, गुरुग्राम, कोलकाता, रायपुर, बस्तर और पटना एयरपोर्ट इस तिमाही के टॉप-10 में शामिल हैं। इन पाइंट पर होता है सर्वे     एयरपोर्ट पहुंचने में आसानी।     टर्मिनल पर प्रवेश के लिए साइन बोर्ड।     हवाई अड्डे पर पहुंचने के लिए परिवहन साधन की कीमत।     अपने चेक इन क्षेत्र को आसानी से खोजें।     चेक इन पर प्रतीक्षा समय।     सुरक्षा प्रस्ताव में प्रतीक्षा समय।     सुरक्षा जांच कर्मचारियों की निष्ठा और मदद करना।     कस्टम और पासपोर्ट काउंटर पर प्रतीक्षा।     काउंटर स्टाफ की निष्ठा और मदद करने का उद्देश्य।     रेस्तरां, बार, कैफे की कीमत के अनुरूप होना।     दुकान व रेस्तरां के कर्मचारियों का मदद करना।     टर्मिनल में अपना रास्ता तलाशने में आसानी।     उड़ान की जानकारी के डिस्पले।     टर्मिनल में चलने की दूरी और कनेक्ट करने में आसानी।     चार्जिंग स्टेशनों की उपलब्धता।     मनोरंजन और विश्राम के विकल्प।     टॉयलेट की उपलब्धता।     टॉयलेट की स्वच्छता।     स्वास्थ्य संबंधी सुरक्षा स्वच्छता।     माहौल और वातावरण।     स्टाफ की शिष्टता और मदद करने का रवैया।  

त्रिनिदाद में राम मंदिर निर्माण की तैयारी, सरकार का भरोसा- पूरा साथ देंगे

त्रिनिदाद  कैरेबियन का एक छोटा-सा देश, समुद्र के बीच बसा हुआ. लेकिन वहां गूंजती है “सिय राममय सब जग जानी…”. बात हो रही है त्रिनिदाद और टोबैगो की. यहां हिंदू आबादी अच्छी-खासी है और भगवान राम के प्रति आस्था पीढ़ियों से चली आ रही है. इसी आस्था को और मजबूत करने के लिए देश की राजधानी में राम मंदिर बनाने की तैयारी हो रही है. त्रिनिदाद के जन सुविधा मंत्री बैरी पदारथ ने धार्मिक नेताओं के साथ बैठक में यह घोषणा की है कि सरकार इस मंदिर की योजना को पूरा समर्थन देगी. उन्होंने कहा कि  राम लला की पहल का हम स्वागत करते हैं और हम इसका समर्थन करते हैं. उन्होंने ये भी बताया कि दुनिया में जहां-जहां हिंदू संस्कृति बची है, उनमें त्रिनिदाद और टोबैगो की पहचान एक ‘रामायण देश’ के रूप में होती है. पर्यटन और संस्कृति- दोनों को मिलेगा फायदा सरकार इस राम मंदिर को सिर्फ पूजा की जगह नहीं, बल्कि एक पर्यटन और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में भी देख रही है. यहां होगा पूजा-पाठ, शिक्षा और सांस्कृतिक कार्यक्रम, हिंदू परंपराओं का संरक्षण और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना. सरकार का मानना है कि इससे देश की पहचान और मजबूत होगी और दुनिया भर के श्रद्धालु यहां आएंगे. ‘अयोध्या नगरी’ का भी खास प्रस्ताव न्यूयॉर्क की संस्था ओवरसीज फ्रेंड्स ऑफ राम मंदिर के संस्थापक प्रेम भंडारी ने एक और दिलचस्प प्रस्ताव दिया है कि यहां एक छोटी ‘अयोध्या नगरी’ बनाई जाए. खास तौर पर उन लोगों के लिए जो भारत की अयोध्या नहीं जा पाते. यह प्रस्ताव उन्होंने त्रिनिदाद की प्रधानमंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर के सामने रखा है.अभी हाल के महीनें मई 2025 में  त्रिनिदाद-टोबैगो में अयोध्या के राम मंदिर की रामलला प्रतिमा की प्रतिकृति का अनावरण हुआ था. जब वह प्रतिमा पोर्ट ऑफ स्पेन पहुंची तो 10,000 से ज्यादा भक्तों ने उसका स्वागत किया था. यह बताता है कि यहां भगवान राम लोगों के दिलों में कितने गहरे बसे हुए हैं. भारत से रिश्ते और मोदी का सम्मान इसी साल जुलाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी त्रिनिदाद-टोबैगो की यात्रा पर गए थे. यह उनकी इस देश की पहली आधिकारिक यात्रा थी और 1999 के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की वहां पहली द्विपक्षीय यात्रा भी. इसी दौरान प्रधानमंत्री मोदी को देश का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान भी मिला था, ऑर्डर ऑफ द रिपब्लिक ऑफ त्रिनिदाद एंड टोबैगो. प्रधानमंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर ने यह सम्मान देते हुए मोदी को वैश्विक नेतृत्व, भारतीय प्रवासियों से जुड़े रिश्ते और कोविड-19 के समय मदद के लिए धन्यवाद दिया. सम्मान मिलने पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मैं इसे 140 करोड़ भारतीयों की ओर से स्वीकार करता हूं. मंत्री बैरी पदारथ ने कहा कि अगले कुछ महीनों में राम मंदिर और हिंदू धार्मिक जीवन से जुड़े और बड़े ऐलान होंगे. सरकार का लक्ष्य साफ है कि त्रिनिदाद-टोबैगो को हिंदू धर्म का मजबूत केंद्र बनाना, धार्मिक पर्यटन बढ़ाना  और भगवान राम की शिक्षा को दुनिया तक फैलाना.

नाबालिग की संपत्ति के सौदे अब व्यस्क होने पर खुद कैंसिल कर सकेंगे, बिना केस दर्ज कराए

नई दिल्ली  देश की सर्वोच्च अदालत ने नाबालिगों से संबंधित संपत्ति के लेन-देन पर एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है. कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि अगर माता-पिता या अभिभावक कोर्ट की परमीशन के बिना किसी नाबालिग की संपत्ति बेच देते हैं तो बालिग होने के बाद वह उस सौदे को कैंसिल कर सकता है. वहीं, कोर्ट ने आगे कहा कि इसके लिए किसी भी तरह का मुकदमा दर्ज करने की जरुरत नहीं होगी. अदालत ने कहा कि व्यवहार से अस्वीकृति भी कानूनी रूप से वैध मानी जाएगी. बता दें, कोर्ट ने 7 अक्टूबर को एक केस का फैसला देते हुए यह कहा कि कोई नाबालिग व्यस्क हो जाता है, तो वह अपने माता-पिता या अभिभावक के संपत्ति के स्वयं बेचना या किसी अन्य को देने वाले फैसले को अस्वीकार कर सकता है. यह फैसला जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने केएस शिवप्पा बनाम श्रीमती के नीलाम्मा मामले में सुनाया. न्यायमूर्ति मिथल ने फैसला सुनाते हुए कहा कि यह सुरक्षित रूप से निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि नाबालिग के अभिभावक द्वारा निष्पादित शून्यकरणीय लेनदेन को नाबालिग द्वारा वयस्क होने पर समय के भीतर अस्वीकार और नजरअंदाज किया जा सकता है, या तो शून्यकरणीय लेनदेन को रद्द करने के लिए मुकदमा दायर करके या अपने स्पष्ट आचरण से उसे अस्वीकार करके. फैसले में कहा गया कि विवादास्पद प्रश्न यह है कि क्या नाबालिगों के लिए यह आवश्यक है कि वे निर्धारित समयावधि के भीतर वयस्क होने पर अपने प्राकृतिक अभिभावक द्वारा निष्पादित पूर्व विक्रय विलेख को रद्द करने के लिए वाद दायर करें. इसमें कहा गया कि प्रश्न यह है कि क्या वयस्क होने के तीन वर्ष के भीतर उनके आचरण के माध्यम से इस तरह के विक्रय विलेख को अस्वीकृत किया जा सकता है. प्रश्नों का उत्तर देने के लिए, पीठ ने हिंदू अल्पसंख्यक और संरक्षकता अधिनियम, 1956 की धारा 7 और 8 का हवाला दिया और कहा कि प्रावधानों को सरलता से पढ़ने से यह स्पष्ट हो जाता है कि नाबालिग के प्राकृतिक अभिभावक को बिना अदालत की पूर्व अनुमति के नाबालिग की अचल संपत्ति के किसी भी हिस्से को बंधक रखने, बेचने, उपहार देने या अन्यथा हस्तांतरित करने या यहां तक ​​कि ऐसी संपत्ति के किसी भी हिस्से को पांच साल से अधिक अवधि के लिए या नाबालिग के वयस्क होने की तारीख से एक वर्ष से अधिक की अवधि के लिए पट्टे पर देने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है. इसलिए, अधिनियम की धारा 8 की उपधारा (2) के तहत दिए गए किसी भी तरीके से नाबालिग की संपत्ति हस्तांतरित करने के लिए नाबालिग के अभिभावक के लिए अदालत की पूर्व अनुमति अनिवार्य है. यह विवाद कर्नाटक के दावणगेरे के शामनूर गांव में दो समीपवर्ती भूखंडों – संख्या 56 और 57 – से संबंधित था, जिसे मूल रूप से 1971 में रुद्रप्पा नामक व्यक्ति ने अपने तीन नाबालिग बेटों – महारुद्रप्पा, बसवराज और मुंगेशप्पा के नाम पर खरीदा था. जिला न्यायालय से पूर्व अनुमति लिए बिना, रुद्रप्पा ने ये प्लॉट किसी तीसरे पक्ष को बेच दिए. प्लॉट संख्या 56 एस आई बिदारी को बेचा गया और बाद में 1983 में बी टी जयदेवम्मा ने इसे खरीद लिया. नाबालिगों के वयस्क होने के बाद, उन्होंने और उनकी मां ने 1989 में वही प्लॉट के.एस. शिवप्पा को बेच दिया. जयदेवम्मा की ओर से स्वामित्व का दावा करते हुए केस किया गया सिविल मुकदमा अंततः कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा खारिज कर दिया गया, जिसने नाबालिगों को अपने स्वयं के बिक्री विलेख के माध्यम से अपने पिता की बिक्री को अस्वीकार करने के अधिकार को बरकरार रखा. ठीक इसी तरह का लेनदेन प्लॉट संख्या 57 के साथ भी हुआ, जिसे रुद्रप्पा ने अदालत की अनुमति के बिना कृष्णोजी राव को बेच दिया, जिन्होंने इसे 1993 में के. नीलाम्मा को बेच दिया. जीवित बचे नाबालिगों ने वयस्क होने पर उसी प्लॉट को केएस शिवप्पा को बेच दिया, जिन्होंने बाद में दोनों प्लॉटों को मिलाकर एक घर बना लिया. इसके बाद नीलाम्मा ने दावणगेरे में अतिरिक्त सिविल जज के समक्ष मामला दायर किया और स्वामित्व का दावा किया. ट्रायल कोर्ट ने उसके मुकदमे को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि रुद्रप्पा द्वारा की गई बिक्री अमान्य थी और नाबालिगों द्वारा बाद में की गई बिक्री से वैध रूप से अस्वीकृत हो गई. हालांकि, 2005 में प्रथम अपीलीय न्यायालय और 2013 में उच्च न्यायालय ने इस निष्कर्ष को पलट दिया, और कहा कि चूंकि नाबालिगों ने अपने पिता के विक्रय विलेख को रद्द करने के लिए कोई औपचारिक मुकदमा दायर नहीं किया था, इसलिए लेनदेन की पुष्टि हो गई. इसके बाद शिवप्पा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. प्रावधानों का उल्लेख करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने दोहराया कि कोई भी प्राकृतिक अभिभावक न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना नाबालिग की अचल संपत्ति को हस्तांतरित नहीं कर सकता है और ऐसा कोई भी लेनदेन नाबालिग के कहने पर शून्यकरणीय है. हालांकि, पीठ ने स्पष्ट किया कि कानून में यह निर्दिष्ट नहीं किया गया है कि ऐसे शून्यकरणीय लेनदेन को किस प्रकार अस्वीकृत किया जाना चाहिए. न्यायमूर्ति मिथल ने कहा कि एक नाबालिग, वयस्क होने पर, इस तरह के लेन-देन से बच सकता है या उसे अस्वीकार कर सकता है, या तो बिक्री विलेख को रद्द करने के लिए मुकदमा दायर करके या फिर स्पष्ट और असंदिग्ध आचरण द्वारा, जैसे कि उसी संपत्ति की नई बिक्री को अंजाम देना. 

आदिवासी बेटी का कमाल: 12वीं साइंस टॉपर वैष्णवी को मिलेगा बालिका विज्ञान पुरस्कार

छिंदवाड़ा  पांढुर्णा जिले के सिवनी गांव की वैष्णवी ने कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा में विज्ञान संकाय के विषयों में पूरे मध्य प्रदेश में प्रथम स्थान हासिल किया था. जिसके चलते उन्हें बालिका विज्ञान पुरुस्कार मिलने जा रहा है. वैष्णवी का सपना है कि वह आईआईटी में जाकर पढ़ाई करें और एक सफल इंजीनियर बन सके. लेकिन गांव में ना तो पढ़ाई का स्तर इतना बेहतर था और ना ही आर्थिक स्थिति मजबूत. लेकिन अपने सपनों को पूरा करने के लिए वैष्णवी ने जी जान लगा दी थी. जिसके चलते अब प्रदेश स्तर पर वैष्णवी को सम्मानित किया जाएगा. प्रदेश में किया टॉप, मिलेगा बालिका विज्ञान पुरस्कार जनजातीय कार्य विभाग के सहायक आयुक्त सतेंद्र सिंह मरकाम ने बताया कि, ''वैष्णवी सरियाम ने कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा में विज्ञान संकाय के विषयों में पूरे मध्य प्रदेश में प्रथम स्थान हासिल कर जिले का नाम गौरवान्वित किया है. इस उपलब्धि के लिए उन्हें जनजातीय कार्य विभाग द्वारा 'मेधावी छात्रा पुरस्कार योजना' के अंतर्गत 'बालिका विज्ञान पुरस्कार' से सम्मानित करते हुए, 50000 रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी.'' 10 जनजातीय बालिकाओं को दिया जाता है सम्मान मध्य प्रदेश शासन के जनजातीय कार्य विभाग के द्वारा यह पुरस्कार उन 10 जनजातीय वर्ग की बालिकाओं को दिया जाता है. जिन्होंने विज्ञान संकाय के विषयों (भौतिक, रसायन, जीवविज्ञान एवं गणित) में 90% से अधिक अंक प्राप्त किए हों और प्रदेश में सबसे ज्यादा अंक अर्जित किए हों. राज्य स्तरीय चयन समिति द्वारा मूल अंक सूची और जाति प्रमाण-पत्र जांच करने के बाद वैष्णवी को प्रथम स्थान के साथ पुरस्कार के लिए चुना गया है. 300 में से लिए 284 नंबर, अब जेईई मेन्स की तैयारी वैष्णवी सरियाम के पिता विनोद सरियाम किसान हैं और माता गृहिणी होने के साथ सिलाई का काम करती हैं. सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद वैष्णवी ने अपनी लगन, मेहनत और आत्मविश्वास से यह मुकाम हासिल किया है. वैष्णवी ने 300 में से 284 अंक लेकर विज्ञान संकाय के विषयों में प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है. फिलहाल वह घर पर रहकर जेईई मेन्स की तैयारी कर रही हैं. इस उपलब्धि पर कलेक्टर हरेंद्र नारायन और सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग सतेन्द्र सिंह मरकाम ने उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है.

हॉस्पिटल में दर्दनाक घटना: डॉक्टर ने अपने हाथ पर नोट लिखा और आत्महत्या की, पुलिस पर गंभीर आरोप

मुंबई  महाराष्ट्र के सतारा में एक महिला डॉक्टर ने आत्महत्या कर ली। यही नहीं डॉक्टर ने एक अपनी हथेली पर ही एक सुसाइड नोट भी लिखा था, जिसमें बताया कि उसका दो पुलिस वालों ने रेप किया है और उत्पीड़न कर रहे थे। इससे परेशान होकर ही वजह जान दे रही है। सतारा के फालटन में स्थित एक होटल के कमरे में डॉक्टर की लाश फंदे से झूलती पाई गई। इस पर पुलिस को अलर्ट किया गया। महिला डॉक्टर बीड़ जिले की रहने वाली थी और सतारा के फालटन स्थित सरकारी अस्पताल में नौकरी कर रही थी। महिला डॉक्टर ने अपने एक हाथ पर सुसाइड नोट लिखा था। इसमें बताया कि था कि उनका दो पुलिस वाले रेप कर रहे थे और उत्पीड़न जारी था। महिला डॉक्टर ने सुसाइड नोट में 4 बार रेप किए जाने की बात लिखी है। इससे वह मानसिक रूप से बहुत परेशान थी और इसी के चलते उसने यह अतिवादी कदम उठाया है। हथेली पर लिखे सुसाइड नोट में महिला डॉक्टर ने कहा कि दोनों पुलिस वाले बीते 5 महीनों से रेप कर रहे थे। महिला डॉक्टर ने लिखा कि सब-इंस्पेक्टर गोपाल बाडाने ने उसका रेप किया था। इसके अलावा भी कई बार यौन उत्पीड़न किया। वहीं दूसरा पुलिसकर्मी प्रशांत बांकर उसका मानसिक उत्पीड़न कर रहा था। सतारा पुलिस के एक अधिकारी का कहना है कि इस मामले की जांच जारी है। उन्होंने कहा कि हमने केस दर्ज कर लिया है और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा रहा है। हम आरोपों की जांच कर रहे हैं, जो महिला डॉक्टर ने सुसाइड नोट में लगाए हैं। आरोपी पुलिस सब-इंस्पेक्टर गोपाल बाडाने सस्पेंड पुलिस का कहना है कि हमारी ओर से जांच शुरू हो गई है, जिन दो पुलिस वालों पर आरोप लगाए गए हैं, उनकी भूमिका की जांच की जा रही है। महाराष्ट्र के महिला आयोग की चीफ रूपाली चाकनकर का कहना है कि हमने इस मामले का संज्ञान लिया है। हमने सतारा पुलिस को आदेश दिया है कि वह सख्ती से इस केस की जांच करे। आरोपियों की तलाश के लिए टीमें गठित कर दी गई हैं। इस मामले में शामिल लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। इस घटना को लेकर कांग्रेस नेता विजय वडेत्तिवार ने सरकार पर निशाना साधा है। फिलहाल इस मामले के आरोपी गोपाल बाडाने को सस्पेंड कर दिया गया है। कांग्रेस नेता ने लिखा- रक्षक के ही भक्षक बन जाने का केस है उन्होंने लिखा, 'यह वह केस है, जब रक्षक ही भक्षक बन जाए! पुलिस का कर्तव्य रक्षा करना है, लेकिन अगर वे खुद एक महिला डॉक्टर का शोषण कर रहे हों तो न्याय कैसे मिलेगा? जब इस लड़की ने पहले शिकायत दर्ज कराई थी, तब कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? महायुति सरकार बार-बार पुलिस को बचाती है, जिससे पुलिसिया अत्याचार बढ़ रहे हैं।'  

रोजगार मेले में बंटी खुशियां, युवाओं ने कहा– पीएम मोदी ने दी नई उड़ान, अब देश सेवा का वक्त

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुक्रवार को रोजगार मेले में 51,000 से ज्यादा युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे गए। नियुक्ति पत्र मिलने पर युवाओं ने खुशी जताई। खान मंत्रालय में जियोसाइंटिस्ट के रूप में शामिल हुए भीम चंद गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नियुक्ति पत्र मिलना गर्व का विषय है। किसी भी देश को अपना डेमोग्राफिक डिविडेंड का फायदा उठाना बहुत जरूरी है। भारत की वर्किंग आबादी दुनिया में सबसे ज्यादा है। ऐसे रोजगार मेले इसका फायदा उठाने में मदद करते हैं। इससे विकसित भारत विजन को साकार करने में मदद मिलेगी। दिल्ली पुलिस में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (स्टेनोग्राफर) का नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले विनय फलवारिया ने कहा कि आज मेरे लिए बहुत खुशी का दिन है। प्रधानमंत्री ने हमें यह मौका दिया है। इससे आने वाली युवा पीढ़ी भी प्रोत्साहित होगी। सभी परिवार, गुरुजन और अन्य सभी काफी खुश हैं। वहीं, एनटीआरटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में नियुक्ति पत्र करने वाले मनीष शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री की ओर से रोजगार मेलों का आयोजन करना एक बहुत अच्छा निर्णय है। इससे युवाओं को विकसित भारत विजन में योगदान देने का मौका मिल रहा है। खान मंत्रालय के तहत केमिस्ट पोस्ट पर नियुक्त होने वाले हितेश मौर्या ने कहा कि मेरे लिए यह काफी खुशी का मौका है। रोजगार मेले एक बहुत अच्छा कार्यक्रम है। इतने बड़े मंच पर आना मेरे लिए बहुत बड़ी बात है। इससे आने वाली पीढ़ी को प्रोत्साहन मिलेगा। नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले एक अन्य प्रतिभागी आदित्य सिंह ने बताया कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी थी और इस तरह के कार्यक्रम काफी अच्छे हैं। 17 वां रोजगार मेल देशभर में 40 लोकेशन पर आयोजति किया गया था। इसमें करीब 51,000 चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र दिए गए। पीएम मोदी इसमें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अथक प्रयासों से प्रदेश में निवेश का नया कीर्तिमान

हर जिले में औद्योगिक निवेश की अपार संभावनाएं भोपाल  मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य के हर जिले में निवेश को सक्रिय रूप से लाने का काम किया है। उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, नर्मदापुरम, शहडोल, सागर और रीवा में आयोजित क्षेत्रीय रीजनरल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव (RIC) उद्योग सम्मेलन ने स्थानीय उद्यमियों और उद्योगपतियों को सीधे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों के साथ जोड़ा। मुख्यमंत्री ने जर्मनी, स्पेन और जापान सहित प्रमुख देशों के दौरे किए, जहाँ उन्होंने मध्यप्रदेश के औद्योगिक अवसरों और निवेश की संभावनाओं को वैश्विक मंच पर पेश किया। देश के प्रमुख औद्योगिक शहरों में रोड शो के माध्यम से निवेशकों को प्रदेश की सरल सुगम औद्योगिक नीतियों, योजनाओं और अवसरों से सीधे परिचित किया। इन पहलों से न केवल निवेश बढ़ा बल्कि उद्यमियों के लिए औद्योगिक अवसर और युवाओं के लिए रोजगार भी सृजित हुए। औद्योगिक अधोसंरचना और प्रमुख परियोजनाएँ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में औद्योगिक अधोसंरचना का विस्तार तेजी से हुआ है। राज्य के लगभग 85 प्रतिशत जिलों में औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए गए हैं, जो प्रत्येक जिले की विशेषताओं और क्षमताओं के अनुरूप हैं। सितंबर 2025 तक 33 हजार 450 हेक्टेयर में 139 औद्योगिक पार्क तैयार हो चुके हैं जो 2023 की तुलना में दोगुने से अधिक हैं। नए औद्योगिक क्षेत्रों के लिए 4 हजार 861 हेक्टेयर में 5,700 करोड़ रुपए, मौजूदा क्षेत्रों के उन्नयन के लिए 761.77 करोड़ रुपए, और विशेष सहायता योजना के तहत 5 हजार 165.36 करोड़ रुपए मूल्य की 43 परियोजनाएँ स्वीकृत हुई हैं। उज्जैन में विक्रम उद्योगपुरी एक स्मार्ट औद्योगिक टाउनशिप के रूप में विकसित किया गया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा हाल में शिलान्यास किए गए धार में पीएम मित्रा टेक्सटाइल पार्क टेक्सटाइल मूल्य श्रृंखला का आधार बन रहा है। सितापुर-मुरैना में मेगा लेदर और फुटवियर पार्क 162.70 हेक्टेयर में फैला निर्यातोन्मुख केंद्र बन गया है। नर्मदापुरम के मोहासा-बाबई में नवकरणीय ऊर्जा उपकरण निर्माण क्षेत्र में 17 हजार 750 करोड़ रु. का निवेश हुआ है, 21,777 रोजगार सृजित हुए और 514.50 एकड़ भूमि 22 इकाइयों को आवंटित की गई। Phase-II में नौ अतिरिक्त इकाइयों के लिए 551 एकड़ भूमि आवंटित की गई है, जिससे 39,210 करोड़ रुपए का प्रस्तावित निवेश और 14 हजार 700 से अधिक रोजगार सृजित होंगे। रतलाम में मेगा इंडस्ट्रियल पार्क, सीहोर में आष्टा क्लस्टर, जमोदी में मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क और ग्वालियर में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन राज्य में औद्योगिक विविधता और आधुनिक उत्पादन को मजबूत कर रहे हैं। इंदौर आर्थिक कॉरिडोर के माध्यम से भूमि पूलिंग और औद्योगिक विस्तार सुगम हुआ है। तकनीक, नवाचार और क्षेत्रीय कौशल भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर में स्थापित आईटी और डिजिटल उद्योग केंद्र राज्य को बहु-क्षेत्रीय औद्योगिक शक्ति केंद्र बना रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मानना है कि तकनीक और नवाचार को स्थानीय प्रतिभा के साथ जोड़कर ही औद्योगिक विकास की सार्थकता है। क्षेत्रीय उद्योग सम्मेलन और प्रशिक्षण पहलों के माध्यम से स्थानीय युवाओं और उद्यमियों को उद्योग की मांग के अनुसार कौशल प्रदान किया जा रहा है। क्षेत्रीय औद्योगिक विकास के स्पष्ट परिणाम मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से जिलों में औद्योगिक विकास स्पष्ट रूप से दिख रहा है। रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव ने निवेशकों को हर जिले की विशेष क्षमताओं और निवेश अवसरों जिससे निवेश सीधे धरातल पर आया। रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के माध्यम से यह सुनिश्चित हुआ कि विकास सिर्फ शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि जिले और स्थानीय स्तर पर हर कोने में निवेश और उद्योगों का विस्तार हो। निवेश से साकार हुई प्रगति प्रदेश में निवेश परियोजनाएँ तेजी से धरातल पर उतर रही हैं। विक्रम उद्योगपुरी, पीएम मित्रा टेक्सटाइल पार्क और नर्मदापुरम के नवकरणीय ऊर्जा उपकरण निर्माण क्षेत्र जैसी परियोजनाओं ने औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को मजबूती दी है। निवेश बढ़ने के साथ ही रोजगार, स्थानीय व्यवसाय और नए उद्योग स्थापित हुए हैं। यह साबित करता है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निवेश प्रयास वास्तविक परिणाम में बदल रहे हैं और प्रदेश की औद्योगिक प्रगति को मजबूती दे रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का दृष्टिकोण स्पष्ट है कि औद्योगिकीकरण केवल निवेश तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि स्थानीय रोजगार, क्षेत्रीय संतुलन और सामाजिक सशक्तिकरण को सुनिश्चित करना चाहिए। प्रदेश में निवेश आने से जिले और क्षेत्रों में उद्योग स्थापित हो रहे हैं, स्थानीय युवाओं और उद्यमियों के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं और मध्यप्रदेश अब निवेशकों के लिए भरोसेमंद और सक्रिय औद्योगिक केंद्र बन गया है।