samacharsecretary.com

छत्तीसगढ़ में 6 दिवसीय फेम ट्रिप संपन्न, रायपुर में पर्यटन को नई दिशा मिली

रायपुर छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल एवं राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से राज्य के पर्यटन स्थलों के व्यापक प्रचार-प्रसार तथा प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहर को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से 13 से 18 मार्च तक आयोजित 6 दिवसीय विशेष फेम (FAM) ट्रिप सफलतापूर्वक संपन्न हो गई। यह आयोजन राज्य सरकार की दूरदर्शी सोच और पर्यटन को आर्थिक विकास के प्रमुख साधन के रूप में विकसित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस ट्रिप में देश के विभिन्न राज्यों—दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, ओडिशा, चेन्नई, बेंगलुरु एवं अंडमान-निकोबार से आए लगभग 30 टूर ऑपरेटर एवं ट्रैवल एजेंट्स ने भाग लिया। इन प्रतिभागियों को दो समूहों में विभाजित कर उत्तर एवं दक्षिण छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराया गया, जिससे उन्हें राज्य की विविध पर्यटन संभावनाओं का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हुआ। उत्तर छत्तीसगढ़ में अंबिकापुर, मैनपाट, रामगढ़ और जशपुर जैसे स्थलों की प्राकृतिक सुंदरता एवं इको-टूरिज्म संभावनाओं से प्रतिभागियों को अवगत कराया गया। वहीं दक्षिण छत्तीसगढ़ में कांगेर घाटी, कोंडागांव, जगदलपुर, चित्रकोट, दंतेवाड़ा, बारसूर एवं धुडमारास जैसे स्थलों के माध्यम से बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहर और प्राकृतिक वैभव का अनुभव कराया गया। फेम ट्रिप के दौरान बस्तर स्थित विश्व प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात ने प्रतिभागियों को विशेष रूप से आकर्षित किया, जहां उन्होंने बोटिंग के साथ प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लिया। चित्रकोट के प्राचीन शिव मंदिर में दर्शन कर उन्होंने आध्यात्मिक अनुभव भी प्राप्त किया। इसके अलावा स्थानीय हाट-बाजारों का भ्रमण कर प्रतिभागियों ने जनजातीय जीवनशैली, पारंपरिक आयोजनों और सांस्कृतिक विविधता को करीब से समझा, जो छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान है। ऐतिहासिक नगरी बारसूर के बत्तीसा मंदिर एवं प्राचीन गणेश प्रतिमाओं का अवलोकन कर राज्य की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली। साथ ही प्रतिनिधिमंडल ने बस्तर संभाग के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात कर पर्यटन विकास, सुरक्षा व्यवस्था एवं बुनियादी सुविधाओं की जानकारी प्राप्त की, जिससे राज्य में पर्यटन के लिए सुरक्षित और अनुकूल वातावरण का विश्वास मजबूत हुआ। मैनपाट एवं जशपुर क्षेत्र में इको-टूरिज्म, ग्रामीण पर्यटन और होमस्टे मॉडल की संभावनाओं को प्रस्तुत करते हुए राज्य सरकार की योजनाओं और पहल की सराहना की गई। कुनकुरी का गिरजाघर, राजपुरी जलप्रपात तथा केरे विलेज के महुआ होमस्टे जैसे स्थलों ने यह सिद्ध किया कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन के विविध आयाम विकसित किए जा सकते हैं। फेम ट्रिप का सबसे बड़ा सकारात्मक प्रभाव यह है कि इसमें शामिल टूर ऑपरेटर एवं ट्रैवल एजेंट्स अपने-अपने राज्यों में छत्तीसगढ़ को एक उभरते हुए और आकर्षक पर्यटन गंतव्य के रूप में प्रचारित करेंगे। इससे राज्य में पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होने की प्रबल संभावना है। पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, खासकर होटल, ट्रांसपोर्ट, गाइड सेवा, हस्तशिल्प एवं स्थानीय बाजारों को सीधा लाभ मिलेगा। जनजातीय क्षेत्रों में पर्यटन के बढ़ने से स्थानीय संस्कृति को संरक्षण एवं पहचान मिलेगी, साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इसके अतिरिक्त, इस प्रकार के आयोजनों से राज्य की सकारात्मक छवि राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत होती है, जिससे निजी निवेश को भी प्रोत्साहन मिलता है और पर्यटन अधोसंरचना के विकास को गति मिलती है। समापन समारोह में पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा ने ट्रैवल पार्टनर्स से छत्तीसगढ़ को देशभर में बढ़ावा देने का आह्वान करते हुए राज्य सरकार द्वारा प्रदान की जा रही बेहतर सुविधाओं, सुरक्षित वातावरण और आतिथ्य की परंपरा पर विश्वास जताया। प्रबंध संचालक विवेक आचार्य ने भी प्रतिभागियों से अपने अनुभवों को व्यापक स्तर पर साझा करने और अधिक पर्यटकों को छत्तीसगढ़ लाने में सहयोग करने की अपील की। प्रतिभागियों ने छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता और आत्मीय आतिथ्य की सराहना करते हुए इसे “हिडन जेम” बताया और भविष्य में यहां अधिक पर्यटकों को लाने का भरोसा जताया। यह 6 दिवसीय फेम ट्रिप छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड एवं राज्य सरकार की प्रभावी रणनीति का प्रमाण है, जो राज्य को देश के प्रमुख पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।

मध्य प्रदेश की नई पहचान: धर्म, पर्यटन और अध्यात्म के क्षेत्र में 12 लोक और श्री राम वनगमन पथ का निर्माण

भोपाल  धर्म- अध्यात्म, संस्कृति और पर्यटन के संगम से मध्य प्रदेश में विकास की त्रिवेणी बह रही है। प्रदेश इन क्षेत्रों में नई पहचान बना रहा है। प्रत्यक्ष और परोक्ष तौर पर रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उज्जैन में वर्ष 2024 में सात करोड़ पर्यटक आए, जबकि 2023 में यह संख्या पांच लाख थी। श्रीमहाकाल महालोक बनने के पहले उज्जैन में प्रतिवर्ष आने वाले पर्यटकों की संख्या 30 से 40 लाख के भीतर रहती थी। यानी महालोक बनने के बाद पर्यटकों की संख्या 20 गुना तक बढ़ गई है। इसमें विदेश पर्यटक भी शामिल हैं। इसी तरह से प्रदेश में 12 लोक और बन रहे हैं, जिससे देश-दुनिया में मप्र की नई पहचान बनेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा धार्मिक पर्यटन बढ़ाने के लिए प्रमुख स्थलों के विकास की है। धर्म, संस्कृति और पर्यटन का सबसे अच्छा गठजोड़ प्रदेश में बन रहे 1,450 किलोमीटर के राम वनगमन पथ में दिखेगा। अभी प्रदेश के 10 ऐसे जिलों के 40 स्थलों को चिह्नित किया गया है, जहां से भगवान श्रीराम वनवास के दौरान गुजरे थे। कुछ ऐसे जिलों को भी शामिल करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है, जो भगवान श्रीराम से जुड़े हैं। इन जिलों को सड़क मार्ग से एक सर्किट की तरह जोड़ा जाएगा। वहां सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम होंगे। इस तरह से कृष्ण पाथेय का निर्माण किया जा रहा है। इसका केंद्र उज्जैन का सांदीपनि आश्रम होगा। श्रीकृष्ण पाथेय से जुड़े स्थलों की पहचान का काम चल रहा है। इससे राजस्थान के सीकर में स्थित खाटू श्माम को भी जोड़ा जाएगा। इस तरह कृष्ण पाथेय के रूप में एक बड़ा धार्मिक और पर्यटन सर्किट बनने जा रहा है। राजस्थान सरकार भी इसमें सहयोग कर रही हैं। दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच इस विषय पर एक-दूसरे का सहयोग करने की सहमति बन चुकी है। कहां कौन सा लोक बन रहा ओरछा में रामराजा लोक, पांढुर्णा के जामसावली में हनुमान लोक, सीहोर में सलकनपुर में देवी लोक, सागर में संत रविदास लोक, जबलपुर में रानी दुर्गावती स्मारक और रानी अवंतीबाई स्मारक, अमरकंटक में मां नर्मदा महालोक, खरगोन में देवी अहिल्याबाई लोक, बड़वानी में नागलवाड़ी लोक और ओंकारेश्वर में एकात्म धाम बनाया जा रहा है। पीएमश्री पर्यटन वायु सेवा एवं पीएमश्री धार्मिक पर्यटन हेली सेवा मध्य प्रदेश में पर्यटन को बढ़ाने के लिए पीएमश्री धार्मिक पर्यटन हेली सेवा नवंबर 2025 से प्रारंभ की गई है। प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों के लिए हेलीकाप्टर की सुविधा निजी एजेंसी के माध्यम से उपलब्ध कराई गई है। चीता प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2022 मे अपने जन्म दिवस पर श्योपुर में नामीबिया से लाए गए आठ चीते छोड़े थे। इसके बाद मंदसौर के गांधीसागर अभयारण्य को भी चीतों का बसेरा बनाया गया है। अब नौरादेही में भी चीते बसाने की तैयारी है। पर्यटकों की सुविधा के लिए बफर में सफर का कांसेप्ट शुरू किया है। रातापानी और माधव नए टाइगर रिजर्व बनाए गए हैं।

पर्यटन प्रेमियों के लिए खुशखबरी: झारखंड में टाइगर सफारी की तैयारी शुरू

रांची झारखंड अपनी पहली ‘टाइगर सफारी' परियोजना शुरू करने की तैयारी कर रहा है और यह राज्य के वन्यजीव पर्यटन तथा वन्यजीव संरक्षण प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रस्तावित ‘टाइगर सफारी' परियोजना की विस्तृत प्रस्तुति की शुक्रवार शाम रांची स्थित अपने सरकारी आवास में समीक्षा की। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पलामू बाघ अभयारण्य के बाहर स्थित लातेहार जिले के पुटुवागढ़ क्षेत्र में विकसित करने का प्रस्ताव है।  

सहरसा में पर्यटन का नया अध्याय: मत्स्यगंधा झील को मिलेगी विश्वस्तरीय पहचान

सहरसा सहरसा में मत्स्यगंधा झील के कायाकल्प के लिए 98 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दो दिन पूर्व पटना से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस परियोजना का शिलान्यास किया था। बुधवार को पूर्व मंत्री एवं स्थानीय विधायक डॉ. आलोक रंजन ने जिले के डीएम दीपेश कुमार के साथ स्थल पर कार्य योजना का औपचारिक शुभारंभ किया। पर्यटन और आस्था का नया केंद्र बनेगा मत्स्यगंधा झील विधायक डॉ. आलोक रंजन ने बताया कि इस परियोजना के तहत झील के किनारे 400 मीटर का घाट, वृत्ताकार ग्लास ब्रिज और पार्किंग स्थल का निर्माण होगा। यह झील धार्मिक आस्था का केंद्र तो बनेगी ही, साथ ही इसे राष्ट्रीय स्तर का पर्यटन स्थल भी विकसित किया जाएगा। बिहार का दूसरा ग्लास ब्रिज यहां पर्यटकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र होगा। रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा विधायक ने कहा कि इस परियोजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। हस्तशिल्प, होटल और परिवहन क्षेत्र में हजारों लोगों को काम मिलेगा। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और सहरसा जिले को पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी। आधुनिक सुविधाओं से होगा कायाकल्प परियोजना के अंतर्गत अनुभव केंद्र, शौचालय परिसर (शिशु देखभाल कक्ष सहित), स्मृति चिन्ह दुकान, परावर्तन कुंड, विशाल वृक्ष प्रतिरूप, संगीतमय फव्वारा, सेल्फी प्वाइंट, भोजनालय, प्रशासनिक भवन, शहरी हाट, वृत्ताकार लॉन, विशाल वाहन पार्किंग और भव्य मुख्य द्वार जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। यह परियोजना केवल सौंदर्यीकरण का काम नहीं है, बल्कि सहरसा के सर्वांगीण विकास, रोजगार और समृद्धि के अवसर सृजित करने का संकल्प है। विधायक डॉ. आलोक रंजन ने इस ऐतिहासिक पहल के लिए एनडीए सरकार का आभार व्यक्त किया।

सीएम योगी के निर्देश पर विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर शुरू की गई गाइडेड टूर सेवा

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री बोले, पर्यटकों और श्रद्धालुओं को सुरक्षित और किफायती यात्रा का लाभ देने के लिए उठाया गया कदम लखनऊ, योगी सरकार विश्व पर्यटन दिवस (27 सितंबर) के अवसर पर श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए नई सौगात लेकर आयी है। सीएम योगी के निर्देश पर उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (UPSTDC)द्वारा लखनऊ से नैमिषारण्य और अयोध्या के लिए एक दिवसीय गाइडेड टूर शुरू किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य श्रद्धालुओं को भक्ति और सुविधा दोनों एक साथ उपलब्ध कराना है। खासतौर पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए रियायती पैकेज और सरल ऑनलाइन बुकिंग (www.upstdc.co.in) की सुविधा दी गई है। गाइडेड टूर से श्रद्धालुओं को मिलेगा सुरक्षित, किफायती और सार्थक यात्रा का लाभ पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप श्रद्धालुओं और पर्यटकों की पौराणिक स्थलों पर यात्रा सुगम करने के लिए विभिन्न कदम उठाये जा रहे हैं। इसी के तहत सीएम योगी के नेतृत्व में नैमिषारण्य और अयोध्या के लिए गाइडेड टूर प्रदेश में आस्था पर्यटन को और मजबूती प्रदान करने के लिए कदम उठाया गया है। इसमें हमारी प्राथमिकता है सुरक्षित, किफायती और सार्थक यात्रा, जो सभी के लिए सुलभ हो। नैमिषारण्य टूर – संचालन दिवस: शुक्रवार, रविवार, सोमवार – समय: सुबह 8:00 बजे से शाम 7:30 बजे तक – किराया: 1,700 रुपये, वरिष्ठ नागरिकों के लिए 1,000 रुपये – दर्शनीय स्थल: चक्रतीर्थ, व्यास गद्दी, ललिता देवी मंदिर अयोध्या टूर – संचालन दिवस: शनिवार, रविवार – समय: सुबह 8:00 बजे से रात 8:30 बजे तक – किराया: 2,000 रुपये, वरिष्ठ नागरिकों के लिए 1,000 रुपये। – दर्शनीय स्थल: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर, हनुमानगढ़ी, राम की पैड़ी गाइड द्वारा हर श्रद्धालु को पौराणिक कथाओं से कराया जाएगा रूबरू निगम की प्रबंध निदेशक ईशा प्रिया ने बताया कि प्रत्येक पैकेज में गाइड द्वारा पौराणिक कथाओं और किंवदंतियों का रोचक वर्णन, भोजन-जलपान तथा एक स्मृति चिह्न शामिल है। इन टूर पैकेजों में वरिष्ठ नागरिकों की गरिमा और सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया है। साथ ही यह पहल सांस्कृतिक आदान-प्रदान और प्रदेश के पर्यटन को बढ़ावा देने का माध्यम भी बनेगी। इस नये प्रयास से UPSTDC श्रद्धालुओं और पर्यटकों को उत्तर प्रदेश की आध्यात्मिक धरोहर से जोड़ते हुए उन्हें भक्ति, ज्ञान और अविस्मरणीय यादों का अनुभव कराने के लिए नए द्वार खोल रहा है। मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि ये यात्राएं केवल आस्था का अनुभव नहीं देंगी, बल्कि संस्कृति और सामूहिकता का भी संदेश फैलाएंगी। यह यात्रियों के बीच सामुदायिक बंधन को और मजबूत करेंगी।

सतपुड़ा की वादियों में बसे छिंदवाड़ा जिले के पर्यटन-ग्राम अब पर्यटकों के लिये विशेष आकर्षण बन गये

पर्यटन स्टोरी भोपाल  सतपुड़ा की वादियों में बसे छिंदवाड़ा जिले के पर्यटन-ग्राम अब पर्यटकों के लिये विशेष आकर्षण बन गये हैं। ग्रामीण जीवन, जनजातीय संस्कृति, पहाड़ी ट्रैकिंग और लोक नृत्य सब कुछ एक ही जगह पर्यटकों को मिल रहा है। पिछले 2 वर्षों में यहां बनाये गये होम-स्टे को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की पहचान मिली है। मध्यप्रदेश में होम-स्टे के माध्यम से पर्यटकों को ग्रामीण संस्कृति तथा ग्रामीण जीवन के अनुभव कराने के उद्देश्य से ग्रामीण पर्यटन परियोजना का संचालन किया जा रहा है। इसके तहत प्रदेश के 100 गांवों को पर्यटन ग्राम के रूप में विकसित किया जा रहा है। होम-स्टे से रूका पलायन मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा विकसित किये गये छिंदवाड़ा जिले के पर्यटन ग्रामों के होम-स्टे देश-प्रदेश के पर्यटकों को खूब भा रहे हैं। हर सप्ताह यहां हजारों की संख्या में सैलानी पहुंच रहे हैं। जिले के 12 गांवों को पर्यटन ग्राम के रूप में चयनित किया गया है। इनमें से 7 गांव सावरवानी, देवगढ़, काजरा, गुमतरा, चोपना, चिमटीपुर और धूसावानी में 36 होम-स्टे पर्यटकों के लिये खोले जा चुके हैं। होम-स्टे खुलने से ग्रामीण रोजगार और उच्च शिक्षा का रूझान बढ़ा है। साथ ही जनजातीय परिवारों का पलायन भी रूक गया है। गांव के युवा गाइड के रूप, लोक नृत्य और भजन मंडली की प्रस्तुति और बैलगाड़ी संचालन से सैलानियों को ग्रामीण जन-जीवन से अवगत कराते हुए अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रहे हैं। हर पर्यटन ग्राम की अपनी पहचान छिंदवाड़ा जिले के हर पर्यटन ग्राम की अपनी विशेषता है। भोपाल मार्ग पर साल के जंगल के बीच बसे चोपना में देवना नदी का अद्भुत नजारा, पातालकोट के चिमटीपुर गांव की रहस्यमयी वादियां, पेंच नेशनल पार्क के करीब ऑफबीट डेस्टीनेशन गुमतारा, देवगढ़ में गोंड शासन का ऐतिहासिक किला, काजरा में बंधान डेम के बेकवॉटर्स का सौंदर्य और धूसावानी गांव के चौरागढ़ महादेव मंदिर का दृश्य और आम के बागान पर्यटकों को यहां बार-बार आने के लिये प्रेरित करते हैं। होम-स्टे में पर्यटक गाय का दूध दोहने, खेत के कामों में हाथ बटाने और पहाड़ियों पर ट्रैकिंग करने जैसे अनुभव जीते हैं। ढोलक-मंजीरे के साथ भजन और कर्मा नृत्य मंडलियों की प्रस्तुति भी पर्यटकों को आकर्षित कर रही है। अब छिंदवाड़ा सिर्फ पर्यटन नहीं बल्कि सतत ग्रामीण विकास का राष्ट्रीय मॉडल बन रहा है।