samacharsecretary.com

अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित: प्रदेश में 5.15 करोड़ मतदाता, 31 लाख लोगों के नाम बाहर

जयपुर राजस्थान में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर-2026) सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। राज्य की 199 विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन 21 फरवरी 2026 को कर दिया गया। अंतिम प्रकाशित मतदाता सूची के अनुसार राज्य में कुल 5 करोड़ 15 लाख 19 हजार 929 मतदाता दर्ज किए गए हैं। इससे पहले 27 अक्तूबर 2025 को जारी प्रारंभिक आंकड़ों में मतदाताओं की संख्या 5 करोड़ 46 लाख 56 हजार 215 थी। पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान कुल 31 लाख 36 हजार 286 नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। निर्वाचन विभाग के अनुसार यह कार्रवाई मृत, स्थानांतरित अथवा अपात्र पाए गए मतदाताओं के नामों के सत्यापन के बाद की गई है। विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी, अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना था, ताकि आगामी चुनावों में निष्पक्ष और सुचारु मतदान सुनिश्चित किया जा सके। क्र.स. विवरण कुल 1 27 अक्टूबर 2025 को मतदाता 5,46,56,215 2 ड्राफ्ट सूची में शामिल ना हुये मतदाता (ASD) 41,84,891 3 16 दिसम्बर 2025 को ड्राफ्ट सूची में शामिल मतदाता 5,04,71,324 4 ड्राफ्ट सूची प्रकाशन के बाद जोड़े गये कुल नये मतदाता 12,91,365 5 ड्राफ्ट सूची प्रकाशन के बाद हटाये गये कुल मतदाता 2,42,760 6 मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन में मतदाता 5,15,19,929 राज्य में युवा मतदाताओं की संख्या में 4.35 लाख से अधिक की बढ़ोतरी राज्य में प्रारूप मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी गई है। इस दौरान 18 से 19 वर्ष आयुवर्ग के युवा मतदाताओं की संख्या में 4,35,061 की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो कुल मिलाकर 0.82 प्रतिशत की वृद्धि है। जिलावार आंकड़ों के अनुसार जयपुर जिले में 1.30 प्रतिशत, बाड़मेर में 1.26 प्रतिशत, भरतपुर में 1.22 प्रतिशत, फलौदी में 1.18 प्रतिशत तथा बूंदी में 1.09 प्रतिशत युवा मतदाताओं की वृद्धि दर्ज की गई है। मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के संबंध में 21 फरवरी 2026 को जिला निर्वाचन अधिकारियों की अध्यक्षता में सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में सभी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की निर्वाचक नामावली-2026 की एक सॉफ्ट कॉपी (फोटो रहित) और एक हार्ड कॉपी संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी स्तर पर निःशुल्क उपलब्ध कराई गई। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि कोई भी मतदाता जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) और मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) की वेबसाइट https://election.rajasthan.gov.in तथा https://voters.eci.gov.in पर ऑनलाइन EPIC सर्च के माध्यम से अपनी जानकारी देख सकता है। इसकी जानकारी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भी दी गई। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने क्या बताया? मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि इस व्यापक अभियान को राज्य के सभी 41 जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ), 199 निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ईआरओ), 1651 सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (एईआरओ), 61,136 बूथ स्तर अधिकारियों (बीएलओ), लाखों स्वयंसेवकों और प्रमुख राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी से सफल बनाया गया। अभियान में जिला अध्यक्षों के साथ 1,08,252 बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) भी शामिल रहे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने पूरी प्रक्रिया के दौरान जागरूकता और सकारात्मक सहयोग के लिए प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया का भी आभार व्यक्त किया।

मतदाता सूची अपडेट: भोपाल में 3.80 लाख नाम हटाए गए, 120+ उम्र के 125 वोटर्स अब नहीं होंगे शामिल

भोपाल  स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत नाम जोड़ने, हटाने के लिए बुलाए गए दावे-आपत्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आज शनिवार को मध्य प्रदेश में मतदाताओं की स्थिति साफ हो जाएगी। जिलों में निर्वाचन अधिकारी मतदाता सूची का प्रकाशन कर बताएंगे कि किस विधानसभा सीट में कितने मतदाताओं के नाम काटे और जोड़े गए हैं। इसके बाद अब चुनाव आयोग की एसआईआर की कार्यवाही भी कम्प्लीट हो जाएगी। अब ऑनलाइन आवेदन के माध्यम से नाम जोड़ने और हटवाने की प्रक्रिया चलती रहेगी। एसआईआर की कार्यवाही पूरी होने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव समेत उनके मंत्रियों के क्षेत्र से 8 लाख 20 हजार 255 नाम काटे गए थे। इसके बाद नए नाम जोड़ने को लेकर तय समय-सीमा में सिर्फ 1 लाख 69 हजार 753 आवेदन जमा किए गए। सबसे अधिक नाम मंत्री कृष्णा गौर और विश्वास सारंग के विधानसभा क्षेत्र से कटे थे उसी तरह नए नाम जोड़ने के लिए सबसे अधिक आवेदन जमा हुए थे। पूरे प्रदेश की बात करें तो 42 लाख 74 हजार से अधिक नाम काटने की कार्यवाही एसआईआर में की गई और इसके विपरीत नए नाम जोड़ने के लिए सिर्फ 9 लाख 89 हजार 991 लोगों ने आवेदन जमा किए गए थे। नए नाम जोड़ने के लिए जिन विधानसभा क्षेत्रों में दस हजार से अधिक आवेदन जमा किए गए थे, उसमें मंत्री कृष्णा गौर की गोविंदपुरा विधानसभा सीट सबसे आगे है। यहां 17888 आवेदन नए नाम जोड़ने के लिए आए। इसके बाद मंत्री विश्वास सारंग की सीट नरेला में 15115 नए नाम जोड़ने के आवेदन आए थे। भोपाल जिले की हुजूर विधानसभा सीट जिसके विधायक रामेश्वर शर्मा हैं, वहां से 13024 नए नाम जोड़ने के आवेदन आए। इंदौर जिले में इंदौर 2 विधानसभा सीट से 10446 और इंदौर 5 विधानसभा क्षेत्र से 11040 नाम जोड़ने के लिए आवेदन जमा कराए गए। राऊ सीट के लिए 12700, नागदा खाचरौद सीट के लिए 11047 आवेदन जमा कराए गए। भोपाल में 120+ उम्र के 125 वोटर्स स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) में भोपाल की वोटर संख्या को लेकर तस्वीर साफ हो गई है। पहले सर्वे और फिर दावे-आपत्तियों की सुनवाई के बाद वोटर लिस्ट से 3.80 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह की अध्यक्षता में स्टैंडिंग कमेटी की बैठक होगी। बता दें, 23 दिसंबर को प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया। इसके बाद 22 जनवरी तक बूथ लेवल ऑफिसर यानी, बीएलओ अपने-अपने बूथ पर बैठें। इस दौरान उन्होंने नए फॉर्म 6, 7 और 8 प्राप्त किए। एसआईआर में जिन मतदाताओं को 'नो मैपिंग' में रखा गया कि उन्हें नोटिस जारी किए गए और 50 दिन के अंदर उनका रिकॉर्ड देखा। 14 फरवरी तक ये काम पूरा हो गया। अब फाइनल मतदाता सूची शनिवार को जारी होगी। पहले इतनी थी मतदाता संख्या एसआईआर से पहले 27 अक्टूबर 2025 की स्थिति में भोपाल की मतदाता संख्या 21 लाख 25 हजार 908 थी, जो अब 17 लाख 45 हजार 453 हो गई है। इस तरह वोटर लिस्ट से 3 लाख 80 हजार 455 मतदाता कम हो जाएंगे। उम्र के हिसाब से भी आंकड़े जारी होंगे जानकारी के अनुसार, शनिवार को फाइनल वोटर लिस्ट में उम्र के हिसाब से भी आंकड़े जारी होंगे। इनमें शतक यानी, 100 या इससे अधिक उम्र के मतदाताओं की संख्या भी सामने आएगी। इस उम्र की कैटेगिरी में करीब 125 मतदाता हैं। सबसे कम आवेदन वाले विधानसभा में राजनगर और बीना का नाम छतरपुर जिले के राजनगर विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने के लिए सबसे कम 1138 आवेदन आए थे। राजनगर कांग्रेस के पूर्व एमएलए विक्रम सिंह नातीराजा का क्षेत्र है। इसके साथ ही बीजेपी में शामिल होने को लेकर विवादों में चल रही कांग्रेस की एमएलए निर्मला सप्रे भी उन विधायकों में शामिल हैं जिनके यहां नए नाम जोड़ने के लिए कम आवेदन जमा हुए थे। बीना विधानसभा क्षेत्र में एसआईआर के बाद नाम जोड़ने के लिए 1288 आवेदन जमा हुए। इन विधानसभा सीट में भी दो हजार से कम आवेदन आए चुनाव आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक टिमरनी विधानसभा सीट से 1463 आवेदन मिले थे। भगवानपुरा सीट से 1556 और रतलाम ग्रामीण के लिए 1629 आवेदन जमा कराए गए तो जावद सीट के लिए 1649 आवेदन नए नाम जोड़ने के लिए आए। छतरपुर जिले की मलहरा विधानसभा सीट से 1742 आवेदन आए। पूर्व मंत्री बिसाहू लाल सिंह की सीट अनूपपुर से 1750 आवेदन नए नाम जोड़ने के लिए मिले थे। वहीं शमशाबाद विधानसभा सीट के लिए 1781 आवेदन जमा किए गए। भीकनगांव के लिए 1794, बदनावर सीट से 1799, बड़वाह सीट के लिए 1838 आवेदन नए नाम जोड़ने के लिए आए। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के विधानसभा क्षेत्र से 1934 आवेदन जमा हुए थे। मंत्री कृष्णा और सारंग के क्षेत्र में सबसे अधिक नाम कटे एसआईआर में सबसे अधिक नाम गोविन्दपुरा से विधायक और मोहन सरकार में मंत्री कृष्णा गौर के क्षेत्र से काटे गए थे। भोपाल जिले की इस विधानसभा सीट से 97052 मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। दूसरे स्थान पर इंदौर-5 से बीजेपी विधायक महेंद्र हार्डिया का विधानसभा क्षेत्र है। मोहन सरकार के मंत्री विश्वास सारंग और कैलाश विजयवर्गीय के क्षेत्र से 81235 और 75014 वोटर्स के नाम काटे गए। एसआईआर में सबसे कम 6034 नाम नर्मदापुरम जिले के सोहागपुर विधानसभा क्षेत्र से कटे। एसआईआर ड्राफ्ट प्रकाशन के बाद जो रिपोर्ट सामने आई थी उसके अनुसार मोहन सरकार के पांच मंत्रियों के क्षेत्र में 50 हजार से अधिक मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। इसमें भोपाल के दो विधानसभा क्षेत्र गोविन्दपुरा और नरेला, इंदौर के इंदौर-1, ग्वालियर जिले की ग्वालियर विधानसभा, ग्वालियर दक्षिण विधानसभा, इंदौर जिले की इंदौर -1 विधानसभा शामिल है। मुख्यमंत्री के यहां 37728, विस अध्यक्ष के यहां 13920 नाम कटे थे एसआईआर के ड्राफ्ट प्रकाशन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की विधानसभा सीट उज्जैन दक्षिण से 37728 वोटर्स के नाम काटे गए हैं। मुरैना जिले के दिमनी विधानसभा सीट से विधायक और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के क्षेत्र के 13920 मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटे हैं। कांग्रेस के विधायक और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के विधानसभा क्षेत्र गंधवानी से 14712 मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। अटेर विधानसभा कांग्रेस … Read more

मतदाता सूची विवाद ने पकड़ा तूल, पूर्व पार्षद की शिकायत पर पुलिस में मामला दर्ज

जयपुर राजस्थान में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान आदर्श नगर विधानसभा क्षेत्र के वार्ड 89 में मतदाता सूची से नाम हटाने की कथित साजिश का मामला सामने आया है। पूर्व पार्षद अकबरद्दीन ने पुलिस थाना लालकोठी (जयपुर पूर्व) में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि उनके नाम को वोटर लिस्ट से हटाने के लिए फर्जी फॉर्म-7 भरकर झूठी घोषणा की गई। अकबरद्दीन ने बताया कि उनका नाम वार्ड 89, बूथ संख्या 107 (सांगानेरी गेट) की मतदाता सूची में EPIC नंबर MCM 3202645 के साथ दर्ज है। उन्होंने SIR प्रक्रिया के तहत नियमानुसार बीएलओ द्वारा दिया गया परिगणना प्रपत्र भी जमा कराया था। पूर्व पार्षद के अनुसार, 15 जनवरी को जब वे बूथ पर पहुंचे तो बीएलओ पुष्पा ने उन्हें बताया कि अशोक नामक व्यक्ति ने उनके नाम, मकान नंबर और EPIC नंबर का उपयोग कर फर्जी फॉर्म-7 जमा कराया। फॉर्म में झूठी घोषणा की गई कि अकबरद्दीन स्थायी रूप से स्थानांतरित हैं, जबकि वे जन्म से उसी पते पर अपने परिवार के साथ निवास कर रहे हैं। अकबरद्दीन ने बताया कि उनका मकान संख्या 188 उनके पिता द्वारा 50 वर्ष पहले खरीदा गया था और वर्षों तक वही उनका पार्षद कार्यालय भी रहा। इसके बावजूद उन्हें उनके संवैधानिक मताधिकार से वंचित करने का प्रयास किया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि फॉर्म-7 भरने वाला अशोक, भाजपा BLA सुनील का भाई है और दोनों ने मिलकर आपराधिक षड्यंत्र रचा। आरोप है कि बूथ संख्या 107 पर दर्जनों फर्जी फॉर्म-7 जमा कराए गए। पूर्व पार्षद ने कहा कि आरोपियों ने जानबूझकर बीएलओ को मिथ्या सूचना और साक्ष्य दिए, जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत दंडनीय है। उन्होंने पुलिस से मांग की कि दोषियों के खिलाफ तत्काल मामला दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए।

उत्तर प्रदेश में आज जारी होगी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट, तीन करोड़ नाम हो सकते हैं बाहर, घर बैठे ऐसे करें चेक

लखनऊ यूपी में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मंगलवार को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की जाएगी. निर्वाचन आयोग दोपहर 3 बजे लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से पूरी प्रक्रिया से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक करेगा. मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा खुद मीडिया के सामने आकर मतदाता सूची में हुए बदलावों की जानकारी देंगे. ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के जारी होते ही प्रदेश के मतदाता निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर अपना नाम देख सकेंगे. यह सूची आगामी चुनावों की तैयारी के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसके जरिए साफ हो जाएगा कि किसका नाम मतदाता सूची में बना है और किसे दावे या आपत्ति दर्ज कराने की जरूरत पड़ेगी. निर्वाचन आयोग के सूत्रों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में अब तक कुल 15 करोड़ 44 लाख मतदाता दर्ज थे. लेकिन SIR प्रक्रिया के बाद जो ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की जा रही है, उसमें करीब 12 करोड़ 55 लाख मतदाता ही शामिल होंगे. यानी लगभग 2 करोड़ 89 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं. किन वजहों से कटे नाम ? निर्वाचन आयोग के अनुसार, जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, उनमें मुख्य रूप से ये श्रेणियां शामिल हैं :  – जिनका निधन हो चुका है – स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाता, जो किसी अन्य जिले या राज्य में शिफ्ट हो चुके हैं – दो स्थानों पर पंजीकृत मतदाता, जिनका नाम एक से अधिक जगह दर्ज था – गणना प्रपत्र (Enumeration Form) न भरने वाले मतदाता – लंबे समय से अनुपस्थित मतदाता, जिनका दिए गए पते पर सत्यापन नहीं हो सका निर्वाचन आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को साफ और त्रुटिरहित बनाने के लिए इन नामों को हटाना आवश्यक था. 1 करोड़ मतदाताओं की नहीं हो सकी मैपिंग, भेजा जाएगा नोटिस इस पूरी प्रक्रिया में एक बड़ा आंकड़ा सामने आया है. करीब 1 करोड़ मतदाताओं की मैपिंग पूरी नहीं हो सकी है. ऐसे मतदाताओं को संबंधित इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) की ओर से नोटिस भेजा जाएगा. नोटिस मिलने के बाद मतदाता को तय समयसीमा में अपनी पहचान और पते से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे. निर्वाचन आयोग ने इसके लिए 12 वैध दस्तावेजों की सूची पहले से तय कर रखी है, जिनमें से किसी एक की छायाप्रति हस्ताक्षर के साथ जमा करनी होगी. दस्तावेज सही पाए जाने पर नाम दोबारा मतदाता सूची में जोड़ा जा सकेगा. 6 फरवरी तक दर्ज करा सकते हैं दावे और आपत्तियां ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के साथ ही दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी. मतदाता आज से 6 फरवरी तक अपने नाम से जुड़ी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं या यदि नाम गलती से कट गया हो तो उसे जोड़ने का दावा कर सकते हैं. निर्वाचन आयोग के अनुसार यह तारीख तय की गई है :   दावे और आपत्तियां: आज से 6 फरवरी तक दावे-आपत्तियों का निस्तारण: 7 फरवरी से 27 फरवरी तक अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन: 6 मार्च को अधिकारियों का कहना है कि इस दौरान हर दावे और आपत्ति की निष्पक्ष जांच की जाएगी. लखनऊ में सबसे ज्यादा नाम कटने की आशंका प्रदेश की राजधानी लखनऊ से जुड़े आंकड़े भी चौंकाने वाले हैं. सूत्रों के अनुसार, राज्य में सबसे ज्यादा मतदाताओं के नाम लखनऊ जिले में कटे हैं. यहां करीब 12 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर होने की बात सामने आ रही है. जिला निर्वाचन अधिकारी के अनुसार 4.57 लाख मतदाता दिए गए पते पर नहीं मिले वहीं 1.27 लाख मतदाता ऐसे हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है.  5.39 लाख मतदाता दूसरी विधानसभा या जिले में शिफ्ट हो चुके हैं जबकि कई मतदाताओं ने गणना प्रपत्र भरने से मना कर दिया.  इन सभी कारणों से उनके नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए गए हैं. 2003 की सूची बनी आधार निर्वाचन से जुड़े अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिन मतदाताओं का नाम 2003 की मतदाता सूची में दर्ज पाया गया, या जिनके अभिभावकों का नाम उस सूची में शामिल था, उनके नाम सुरक्षित रखे गए हैं. ऐसे मतदाताओं की मैपिंग पहले ही पूरी कर ली गई है. इसके उलट, जिन मतदाताओं या उनके अभिभावकों का नाम 2003 की सूची में नहीं मिल पाया है, उन्हें नोटिस भेजकर दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाएगा. वेबसाइट पर ऐसे करें नाम की जांच ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद मतदाता निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना नाम, विधानसभा क्षेत्र, मतदान केंद्र, और मतदाता विवरण में से जरूरी जानकारी भरकर आसानी से देख सकेंगे. यदि किसी को नाम में त्रुटि या नाम गायब होने की शिकायत है, तो वह ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आपत्ति दर्ज करा सकता है. 3 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस, सभी की नजरें निर्वाचन आयोग पर पूरे मामले को लेकर आज दोपहर 3 बजे लखनऊ में निर्वाचन आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस होने जा रही है. मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा इस दौरान ड्राफ्ट मतदाता सूची के अंतिम आंकड़े, नाम कटने के कारण, आगे की प्रक्रिया और मतदाताओं के लिए जरूरी दिशा-निर्देश मीडिया के सामने रखेंगे. राजनीतिक दलों से लेकर आम मतदाताओं तक, सभी की नजरें इस प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी हुई हैं. माना जा रहा है कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के बाद प्रदेश की सियासत में भी हलचल तेज हो सकती है. अंतिम सूची पर टिकी नजर फिलहाल, आज जारी होने वाली ड्राफ्ट मतदाता सूची को अंतिम नहीं माना जाएगा. निर्वाचन आयोग ने साफ किया है कि दावे और आपत्तियों के निस्तारण के बाद 6 मार्च को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी. उसी सूची के आधार पर आगामी चुनावों की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.

भोपाल में मतदाता सूची शुद्धिकरण अभियान की शुरुआत, 1.16 लाख वोटरों की जांच आज से शुरू

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक लाख से ज्यादा ऐसे मतदाता हैं, जो निर्वाचन आयोग के डिजिटल नक्शे पर लापता हैं। अगर आप भी उनमें से एक हैं तो सोमवार से आपकी नागरिकता और मतदान के अधिकार की सुनवाई शुरू हो रही है। दरअसल, भोपाल की मतदाता सूची का शुद्धिकरण अभियान चल रहा है। इस प्रक्रिया में 1,16,925 मतदाता ऐसे पाए गए हैं, जिनका पता डिजिटल मैप से मेल नहीं खा रहा है। आसान भाषा में कहें तो सरकारी रिकॉर्ड में आप हैं, पर आपका घर कहां है, इसकी सटीक मैपिंग नहीं हो पा रही है। ऐसे नो मैपिंग वाले मतदाताओं की सुनवाई सोमवार से शुरू हो रही है। सोमवार सुबह से भोपाल के सभी 85 वार्ड कार्यालयों, तहसील और नजूल दफ्तरों में सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी इन नो-मैपिंग मतदाताओं की दलीलें सुनेंगे। जिला निर्वाचन कार्यालय अब तक 50 हजार से ज्यादा लोगों को उनके घर पर नोटिस थमा चुका है। वहीं आपके इलाके के बीएलओ घर-घर जाकर नोटिस बांट रहे हैं ताकि कोई भी पात्र मतदाता छूट न जाए। 4.38 लाख नाम कटे, अब आपकी बारी यह आंकड़ा चौंकाने वाला है। प्रशासन अब तक सूची से 4.38 लाख फर्जी या अपात्र नाम काट चुका है। ऐसे में अगर आपके पास नोटिस आया है और आप सुनवाई में नहीं पहुंचते, तो मुमकिन है कि अगली बार आप पोलिंग बूथ पर अपना नाम न ढूंढ़ पाएं। बीएलओ पर काम का बोझ बढ़ा है। सर्वर की अपनी सीमाएं हैं, लेकिन एक जागरूक नागरिक के नाते यह आपकी जिम्मेदारी है कि आप अपने वार्ड कार्यालय पहुंचें। याद रखिए, आपकी एक छोटी-सी लापरवाही आपको लोकतंत्र के सबसे बड़े उत्सव यानी मतदान से बाहर कर सकती है। एक तरफ नाम काटे जा रहे हैं तो दूसरी तरफ नए जोड़े जा रहे हैं। जिला निर्वाचन कार्यालय का अनुमान है कि दो लाख नए मतदाता इस बार जुड़ेंगे। फार्म-6 का वितरण जारी है। सुनवाई में जाते समय साथ रखें ये दस्तावेज अगर आपको नोटिस मिला है, तो वार्ड दफ्तर खाली हाथ न जाएं। आपको भारत की नागरिकता प्रमाणित करने के लिए ये दस्तावेज दिखाने होंगे।     आधार कार्ड या पासपोर्ट।     निवास प्रमाण पत्र (बिजली बिल/राशन कार्ड)।     आयु का प्रमाण।     जारी किया गया नोटिस। वोटर आईडी अपडेट नहीं कराने से नौ-मैपिंग की समस्या     लोकतंत्र की मजबूती के लिए मतदाता सूची का पारदर्शी होना अनिवार्य है। कई बार लोग घर बदल लेते हैं पर वोटर आईडी अपडेट नहीं कराते, जिससे नो-मैपिंग की समस्या आती है। यह सुनवाई आपकी पहचान को डिजिटल रूप से सुरक्षित करने का एक मौका है। – भुवन गुप्ता, उप निर्वाचन अधिकारी  

यूपी चुनावी तैयारी तेज: 6 मार्च को संशोधित मतदाता सूची जारी

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची को त्रुटिरहित, पारदर्शी और अद्यतन बनाने की दिशा में भारत निर्वाचन आयोग ने अहम कदम उठाते हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्यक्रम की तिथियों में संशोधन कर दिया है। आयोग के इस निर्णय से मतदाता सूची में नाम जोड़ने, सुधार कराने और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया को और सुव्यवस्थित करने में मदद मिलेगी। संशोधित कार्यक्रम के अनुसार, अब मतदाता सूची का आलेख्य प्रकाशन छह जनवरी 2026 को होगा, जबकि अंतिम प्रकाशन छह मार्च 2026 को किया जाएगा। प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा अर्हता तिथि एक जनवरी 2026 के आधार पर चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण की समय-सारिणी में यह बदलाव किया गया है। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करना और सूची को पूरी तरह त्रुटिरहित बनाना है, ताकि आगामी चुनावी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की विसंगति न रहे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, संशोधित कार्यक्रम के तहत 6 जनवरी 2026 को मतदाता सूची का आलेख्य प्रकाशन किया जाएगा। इसके बाद 6 जनवरी से 6 फरवरी 2026 तक दावे और आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी। इस अवधि में नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, मृत अथवा स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने और नाम, पता या अन्य विवरणों में सुधार के लिए आवेदन किए जा सकेंगे। इसके साथ ही 6 जनवरी से 27 फरवरी 2026 तक नोटिस चरण, गणना प्रपत्रों पर निर्णय तथा प्राप्त दावों एवं आपत्तियों का विधिवत निस्तारण किया जाएगा। इस दौरान बूथ लेवल अधिकारी, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारी सभी आवेदनों की जांच कर निष्पक्ष निर्णय सुनिश्चित करेंगे। समस्त प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद उत्तर प्रदेश की अद्यतन और शुद्ध मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 6 मार्च 2026 को किया जाएगा। निर्वाचन विभाग ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे निर्धारित समय-सीमा के भीतर मतदाता सूची में अपना नाम अवश्य जांच लें और यदि किसी प्रकार की त्रुटि हो तो समय रहते दावा या आपत्ति दर्ज कराएं। निर्वाचन आयोग के इस संशोधित कार्यक्रम से मतदाता सूची की गुणवत्ता में सुधार होगा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और अधिक मजबूत आधार मिलेगा। 

MP में मतदाता सूची की सफाई: 22 साल बाद विशेष गहन पुनरीक्षण, 42.74 लाख नाम हटाए गए

भोपाल  मध्य प्रदेश में मतदाता सूची के शुद्धीकरण के लिए 22 साल बाद हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दूसरे चरण में मंगलवार को सभी 71,930 मतदान केंद्रों पर मतदाता सूची के प्रारूप का प्रकाशन किया गया। अलग-अलग श्रेणियों में 42,74,160 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। इनमें अधिकतर शहरी क्षेत्रों के हैं। इनमें 22,78,393 वे मतदाता सर्वाधिक शामिल है, जो स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके हैं। अब प्रदेश में 23 दिसंबर 2025 की स्थिति में 5,31,31,983 मतदाता रह गए हैं। इनमें 8,65,832 वे मतदाता भी शामिल हैं, जिन्होंने गणना पत्रक अधूरे जमा किए हैं। उन्हें पत्रक में सुधार का मौका दिया गया है।  राज्य में कुल 5 करोड़ 74 लाख 6 हजार 143 निर्वाचकों में से 5 करोड़ 31 लाख 31 हजार 983 मतदाताओं ने अपने गणना प्रपत्र जमा किए हैं। इसमें 8 लाख 65 हजार ‘नो-मैपिंग’ वाले मतदाता भी शामिल हैं। निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं को पांच श्रेणियों (कैटेगरी) में विभाजित कर आंकड़े जारी किए हैं। इनमें नो-मैपिंग कैटेगरी में भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर चारों महानगर शीर्ष पर हैं। इंदौर में हटाए गए 4 लाख से ज्यादा नाम इंदौर जिले की मतदाता सूची में एसआईआर के बाद मतदाता संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज हुई है। पहले जिले में कुल 28 लाख 67 हजार 268 मतदाता थे। सत्यापन के बाद मतदाताओं की संख्या घटकर 24 लाख 16 हजार रह गई। 4 लाख 51 हजार 218 मतदाताओं का सत्यापन नहीं हो पाया। इन मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटने की स्थिति में है। तारीख दो बार बढ़ने से 75 हजार 467 मतदाताओं को राहत मिली है। दोबारा सत्यापन के बाद ये मतदाता सूची में बने रह सके। विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, 84.26 फीसद सत्यापन पूरा हो चुका है, शेष 15.74 फीसद मतदाताओं के नाम हटना तय माना जा रहा है। गोविंदपुरा में 97 हजार और नरेला में 81 हजार वोटरों के नाम सूची से हटाए भोपाल की अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में वोटर कटने के आंकड़े असमान रहे हैं. सबसे ज्यादा असर गोविंदपुरा और नरेला विधानसभा क्षेत्र में देखा गया है. गोविंदपुरा में जहां 97 हजार से ज्यादा वोटरों के नाम सूची से हटाए गए हैं, वहीं नरेला में 81 हजार से अधिक मतदाता कम हुए हैं. इसके अलावा भोपाल मध्य, उत्तर, दक्षिण-पश्चिम, हुजूर और बैरसिया विधानसभा क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में वोटरों के नाम कटे हैं. खंडवा में 86193 मतदाताओं के नाम कटे खंडवा जिले में में एसईआर के पहले चरण का काम पूरा हो गया है। 27 अक्टूबर 2025 को यहां की चारों विधानसभाओं में 10 लाख 29 हजार 806 मतदाता थे। लेकिन, अब सर्वे के बाद 9 लाख 43 हजार 613 मतदाता शेष हैं। यानी 86 हजार 193 मतदाता कम दर्ज हुए। सबसे ज्यादा परमानेंट शिफ्टेड 50 हजार 784 मतदाता है। 18 हजार 956 मतदाता मृत पाए गए। 8 हजार 782 मतदाता डबल वोटर कार्ड वाले और 7548 मतदाताओं का कोई पता नहीं चल पाया है। खंडवा कलेक्ट्रेट में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को मतदाता सूचियों के ड्रॉफ्ट पब्लिकेशन को सीडी और अंतरिम प्रकाशन की विधानसभा वार सूचियां दी गई हैं। वहीं, इंदौर ऐसा एकमात्र जिला है जो सभी पांचों कैटेगरी में शामिल है। मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव झा ने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया राज्य के सभी 55 जिला निर्वाचन अधिकारियों, 230 निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO), 532 सहायक ERO (AERO) तथा 65,014 मतदान केंद्रों पर तैनात बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) के समन्वित प्रयासों से पूरी की गई। इस अभियान में स्वयंसेवकों और छह राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों की भी सक्रिय भागीदारी रही, जिन्होंने 1.35 लाख से अधिक बूथ लेवल एजेंट (BLA) नियुक्त किए। 42.74 लाख मतदाता नहीं मिले आयोग के अनुसार अब्सेंट, शिफ्टेड, मृत और डुप्लीकेट कैटेगरी में प्रदेश में कुल 42 लाख 74 हजार 160 मतदाता नहीं मिले। अब इनके नाम मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। हालांकि, आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि इनमें कुछ मतदाता ऐसे भी हो सकते हैं जिन्होंने समय सीमा में गणना प्रपत्र जमा नहीं किया या स्वयं पंजीकरण में रुचि नहीं ली। आंकड़ों के अनुसार: 8.46 लाख मतदाता (1.47%) मृत पाए गए 31.51 लाख मतदाता (5.49%) अन्य राज्यों में पंजीकृत पाए गए या तीन बार घर जाने पर अनुपस्थित मिले 2.77 लाख मतदाता (0.48%) के नाम दो स्थानों पर दर्ज पाए गए, जिनमें से अब केवल एक स्थान पर नाम रखा जाएगा नो-मैपिंग कैटेगरी में इंदौर टॉप पर नो-मैपिंग कैटेगरी में कुल 8 लाख 65 हजार मतदाता पाए गए, जो 5.31 करोड़ गणना प्रपत्र जमा करने वाले मतदाताओं में शामिल हैं।  जिलावार स्थिति इस प्रकार है: इंदौर – 1,33,696 भोपाल – 1,16,925 जबलपुर – 69,394 ग्वालियर – 68,540 उज्जैन – लगभग 48,000 क्या है ‘नो-मैपिंग’? चुनाव आयोग द्वारा सभी मतदाताओं को गणना प्रपत्र दिए गए थे, जिसमें उन्हें 2003 की मतदाता सूची के अनुसार अपना वोटर आईडी नंबर या किसी रक्त संबंधी (ब्लड रिलेशन) रिश्तेदार का वोटर आईडी नंबर दर्ज करना था। जिन मतदाताओं की यह जानकारी मेल नहीं खा सकी, उन्हें नो-मैपिंग श्रेणी में रखा गया है। ऐसे मतदाताओं को अब आयोग की ओर से नोटिस जारी किया जाएगा, जिसमें उन्हें 7 दिनों के भीतर आयोग द्वारा मान्य 13 पहचान पत्रों में से किसी एक के माध्यम से अपनी पात्रता सिद्ध करनी होगी। ऐसा न करने पर उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा। दो जगह नाम वाले मतदाता: बुरहानपुर सबसे आगे डुप्लीकेट वोटर आईडी मामलों में: बुरहानपुर – 23,544 (पहला स्थान) इंदौर – 22,808 (दूसरा) धार – 14,198 (तीसरा) सबसे कम डुप्लीकेट मतदाता: उमरिया – 968 आगर मालवा – 985 नीमच – 1,036 भोपाल – 14,171 मृत मतदाताओं में जबलपुर टॉप पर मृत पाए गए मतदाताओं की संख्या में: जबलपुर – 51,357 (पहला स्थान) इंदौर – 43,743 (दूसरा) सागर – 36,466  (तीसरा) सबसे कम मृत मतदाता: पांढुर्ना – 4,981 हरदा – 5,303 निवाड़ी – 5,539 अब्सेंट मतदाता में इंदौर टॉप पर – बता दें अब्सेंट मतदाता यानी जिनके पते पर तीन बार जाने के बावजूद वह नहीं मिले।  अब्सेंट पाए गये मतदाताओं की संख्या में: इंदौर- 1, 75, 425 (पहला स्थान) भोपाल-1,01,503  (दूसरा) जबलपुर- 66,678 (तीसरा) सबसे कम अब्सेंट मतदाता:  अलीराजपुर- 672 पाढूंर्ना- 1372 आगर मालवा- 1734  शिफ्टेड मतदाता में भोपाल … Read more

SIR रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: मध्यप्रदेश में 8.13 लाख मृत मतदाता वोटर लिस्ट में शामिल, 99% फॉर्म डिजिटलाइज

भोपाल   मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का काम लगातार जारी है। जिसके तहत एन्युमरेशन फॉर्मों को डिजिटलाइज करने का काम जारी है। निर्वाचन सदन के मुताबिक 99 प्रतिशत से ज्यादा फॉर्म डिजिटलाइज किए जा चुके है। जिसके तहत मध्यप्रदेशमें अब तक 8.13 लाख मृत मतदाताओं की पहचान की जा चुकी है। 2,43 लाख ऐसे मतदाता मिले हैं। जिनके दो जगह नाम मिले है। 10 दिसंबर तक बैठकें आयोजित निर्वाचन सदन द्वारा फॉर्म प्रकाशन और प्राप्ति के दौरान अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और दोहरी प्रविष्टि वाले मतदाताओं की पहचान और सत्यापन के लिए बैठकें होंगी। सभी मतदान केंद्रों पर 6 दिसंबर से 10 दिसंबर तक बीएलओ बीएलए और अन्य सहयोगियों की बैठकें आयोजित की जाएगी। चुनाव आयोग के निर्देश पर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय सभी जिलों में एसआईआर प्रक्रिया तेजी से करवा रहा है और दिन में तीन बार कलेक्टरों से रिपोर्ट ले रहा है। 27 अक्टूबर को वोटर लिस्ट फ्रीज होने के बाद 4 नवंबर से एसआईआर का कार्य शुरू हुआ था, जिसका प्रारूप परिणाम 16 दिसंबर को प्रकाशित होगा। अभी शिफ्टेड मतदाताओं की सूची प्राप्त नहीं हुई है, जो प्रकाशन से पहले स्पष्ट की जाएगी। फार्म नहीं भरा तो कट सकता है वोट मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि जिन मतदाताओं को एसआईआर फार्म मिला है, उन्हें 2003 की एसआईआर के आधार पर परिजनों/खुद की जानकारी देना अनिवार्य है। यदि कोई मतदाता बीएलओ के लगातार प्रयासों के बाद भी फार्म जमा नहीं करता, तो उसका नाम भी 16 दिसंबर की सूची से हटाया जा सकता है। संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी आरपीएस जादौन ने अपील की है कि सभी मतदाता समय रहते फार्म जमा करें, ताकि नाम कटने की स्थिति से बचा जा सके। किन जिलों में सबसे अधिक मृत वोटर्स? सूत्रों के अनुसार जबलपुर और सागर में मृत मतदाताओं की संख्या सबसे ज्यादा, जबकि सीहोर और पन्ना में सबसे कम पाई गई है। हालांकि आयोग ने इन आंकड़ों को अभी आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं किया है। 10 दिसंबर तक होगा सत्यापन एसआईआर कार्यवाही के तहत अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डबल-एंट्री वाले मतदाताओं की पहचान के लिए 10 दिसंबर तक हर मतदान केंद्र पर BLO–BLA की बैठकें आयोजित की जा रही हैं। प्रदर्शित सूचियों का राजनीतिक दलों से अवलोकन कराने और 11 दिसंबर तक आपत्तियां दर्ज कराने की समय-सीमा तय की गई है, ताकि BLO ऐप के माध्यम से समय पर संशोधन किया जा सके। जबलपुर और साग्र में सबसे ज्यादा मामले एसआइआर से मिले अब तक के आंकड़ों के मुताबिक सबसे ज्यादा मृत मतदाता प्रदेश के जबलपुर और सागर जिले में चिह्नित हुए हैं। और सबसे कम सीहोर और पन्ना में मिले है। हालांकि एसआइआर प्रक्रिया अभी जारी होने से आंकड़ों में बढ़ोत्तरी संभव है। इन नामों को सूची से बाहर किया जाएगा। वहीं गणना पत्रक प्राप्त होने पर अनुपस्थित स्थानांतरित, मृत एवं वोहरी प्रविष्टि को छोड़कर अन्य के नाम प्रारूप सूची में शामिल होंगे।

वनमंत्री केदार कश्यप का ग्रामीणों से आग्रह—मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण में दें सक्रिय भागीदारी

रायपुर : वनमंत्री केदार कश्यप ने ग्रामीणों को किया जागरूक, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में सहयोग का आग्रह रायपुर वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप ने आज बस्तर तहसील के मुंडागांव, मांदलापाल और कुँगारपाल ग्रामों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों से सीधे संवाद करते हुए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य की महत्ता पर जोर दिया। वनमंत्री  कश्यप ने कहा कि प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल होना चाहिए, ताकि कोई भी जानकारी के अभाव में मतदान के अधिकार से वंचित न रहे। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे पुनरीक्षण कार्य के दौरान संबंधित अधिकारियों को सही जानकारी उपलब्ध कराएं और पूरी प्रक्रिया में सहयोग करें। बी एल ओ मतदाता को फार्म भरने में करें सहयोग      मंत्री  कश्यप ने कहा कि हमारी सरकार का लक्ष्य है कि सभी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे जनता तक पहुंचे। कोई भी ग्रामीण जानकारी के अभाव में परेशान न हो। हम ग्रामीण क्षेत्रों में ही प्रत्येक समस्या का समाधान सुनिश्चित कर रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि गरीब, बुजुर्ग तथा अशिक्षित लोगों को फॉर्म भरने में किसी प्रकार की कठिनाई न हो और उन्हें पूरा सहयोग प्रदान किया जाए। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष मती वेदवती कश्यप, जिला पंचायत सदस्य  निर्देश दिवान और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

मतदाता सूची 2003: MP ऑनलाइन, CSC और लोक सेवा केंद्र देंगे सहयोग

ग्वालियर भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के तहत निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR ) का कार्य मध्य प्रदेश में जारी है, इसमें एक बड़ी समस्या 2003 की मतदाता सूची में अपने नाम का पता लगाना है लोगों की शिकायतें हैं कि चुनाव आयोग की वेबसाईट खुलती नहीं है, कई बार फाइल डाउन लोड नहीं होती, ग्वालियर जिला प्रशासन ने इसका हल खोज निकाला है। ग्वालियर जिले में मतदाताओं के सहयोग के लिये जिला प्रशासन की पहल पर वर्ष 2003 की मतदाता सूची में अपना या अपने परिजन का नाम पता लगाने में लोक सेवा केन्द्र, सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) एवं एमपी ऑनलाइन सेंटर भी मतदाताओं की मदद करेंगे। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकार की पहल पर इन सेंटरों के संचालक एसआईआर कार्य में सहयोग देने के लिये आगे आए हैं। MP Online, CSC संचालक नाम पता करने में करेंगे मदद  अपर जिला दण्डाधिकारी सी बी प्रसाद ने बीते रोज एमपी ऑनलाइन के संभागीय प्रबंधक व सीएससी प्रबंधकों एवं एमपी ऑनलाइन सेंटर के प्रतिनिधियों की बैठक ली थी। जिसमें एमपी ऑनलाइन सेंटर व सीएससी सेंटर के संचालकों ने वर्ष 2003 की मतदाता सूची में नाम पता करवाने में मदद करने का भरोसा दिलाया है। जनमित्र केन्द्रों में मतदाता सहायता केन्द्र बता दें जिले में एसआईआर (निर्वाचक नामावली का विशेष गहन पुनरीक्षण) के संबंध में ग्वालियर शहर के सभी जनमित्र केन्द्रों में मतदाता सहायता केन्द्र बनाए गए हैं। मतदाता अपना ईएफ (एन्यूमरेशन फॉर्म) भरने में इन केन्द्रों की सहायता ले सकते हैं। साथ ही यहीं से वर्ष 2003 की मतदाता सूची में अपने नाम की स्थिति जान सकते हैं। जनमित्र केन्द्रों के अलावा अब एमपी ऑनलाइन सेंटर, लोक सेवा केन्द्र व सीएससी सेंटर पर भी मतदाताओं को यह सुविधा उपलब्ध होगी। BLO ने घर घर जाकर उपलब्ध कराये हैं फॉर्म  एसआईआर के तहत बीएलओ द्वारा अपने क्षेत्र के मतदाताओं को ईएफ (एन्यूमरेशन फॉर्म) उपलब्ध कराए गए हैं। यह फॉर्म मतदाता द्वारा भरे जाने हैं। साथ ही ईएफ में वर्ष 2003 की स्थिति की तुलनात्मक जानकारी की प्रविष्टि भी की जानी है। SIR से संबंधित शिकायतों के निराकरण के लिये नोडल अधिकारी जिले में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के तहत किए जा रहे एसआईआर (मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण) कार्य से संबंधित शिकायतों के निराकरण के लिये विशेष व्यवस्था की गई है। सहायक संचालक महिला एवं बाल विकास विभाग राहुल पाठक को शिकायतों का निराकरण कराकर निर्वाचन आयोग को प्रतिवेदन भेजने के लिये नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। साथ ही उनके अधीन चार शासकीय कर्मचारियों को नियुक्त किया गया है।