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छत्तीसगढ़ का ऐतिहासिक दिन: बस्तर में 280 जोड़े बने हमसफ़र, सिटी ग्राउंड में बना विश्व कीर्तिमान

जगदलपुर बस्तर जिला मुख्यालय जगदलपुर का प्रतिष्ठित सिटी ग्राउंड मंगलवार 10 फरवरी को एक ऐतिहासिक और भव्य नजारे का गवाह बना, जहां मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत 280 जोड़ों ने एक ही मंडप के नीचे अपने नव-दाम्पत्य जीवन की सामूहिक शुरुआत की। जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित इस गरिमामय समारोह ने उस वक्त और भी गौरव हासिल कर लिया, जब पूरे प्रदेश में एक साथ 6,412 जोड़ों का विवाह संपन्न कराकर छत्तीसगढ़ का नाम गोल्डन बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। इसी कड़ी में जगदलपुर का यह आयोजन अपनी पारंपरिक भव्यता और सांस्कृतिक छटा के कारण आकर्षण का केंद्र रहा। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना समारोह का आगाज एक भव्य बारात के साथ हुआ, जिसमें 280 वरों के साथ उनकी माताएं हाथों में कलश और दीप लेकर परंपरा अनुसार चल रही थीं। बस्तर की पारंपरिक बाजा मोहरी की सुमधुर स्वर लहरियों के बीच निकली इस बारात ने पूरे शहर को उल्लास से भर दिया। विवाह मंडप में हरिद्रालेपन, सप्तपदी और जयमाला जैसी रस्में पूरी श्रद्धा के साथ संपन्न हुईं और हवन से उठने वाले सुगंधित द्रव्यों ने समूचे वातावरण को महका दिया। नव-वधुओं ने वरों के साथ एकसूत्र में बंधकर नए जीवन का संकल्प लिया, जिससे सिटी ग्राउंड का माहौल अत्यंत भावुक और उत्साहजनक हो गया। इस पावन अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़कर नव विवाहित जोड़ों को अपना आशीर्वाद प्रदान किया। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में योजना की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह योजना गरीब माता-पिता के लिए एक बहुत बड़ा सहारा है। उन्होंने पुरानी यादों को साझा करते हुए बताया कि पूर्व में निर्धन परिवारों को बेटियों के सम्मानजनक विवाह के लिए अपनी संपत्ति तक गिरवी रखनी पड़ती थी, लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन ने 2005 में इस जिम्मेदारी को उठाया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वर्ष 2005 में मात्र 5 हजार रुपये की सहायता राशि से शुरू हुई यह योजना आज 50 हजार रुपये तक पहुँच चुकी है, जो गरीब परिवारों के सशक्तिकरण का प्रतीक है। कार्यक्रम में क्षेत्र के अनेक जनप्रतिनिधि और विशिष्ट अतिथि इस पुनीत कार्य के साक्षी बने, जिनमें महापौर श्री संजय पांडे, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती वेदवती कश्यप, नगर निगम सभापति श्री खेमसिंह देवांगन, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री बलदेव मंडावी और जनपद पंचायत अध्यक्ष श्री पदलाम नाग शामिल थे। इन सभी ने नव-दंपत्तियों को सुखमय दाम्पत्य जीवन की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान डिप्टी कलेक्टर सुश्री नंदिनी साहू, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग श्री मनोज सिन्हा सहित अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों की सक्रिय मौजूदगी में यह विशाल आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

शादी में मामा का तोहफा: 81 लाख नकद, 25 तोला सोना और 1 करोड़ 61 लाख का मायरा

नागौर राजस्थान के नागौर जिले के जायल में एक बार फिर मायरा की चर्चा छा गई है, लेकिन इस बार जाट समाज के बाद ब्राह्मण भाइयों ने इतिहास रच दिया. यहां दो ब्राह्मण भाइयों ललित कुमार व्यास और ओमप्रकाश व्यास ने अपनी बहन गायत्री देवी के बेटे नीलेश की शादी में 1 करोड़ 61 लाख रुपये का भव्य मायरा भरा. यह ब्राह्मण समाज में अब तक का सबसे बड़ा मायरा माना जा रहा है, जिसने जायल की परंपरा को नई ऊंचाई दी है. यह रस्म जायल के माहेश्वरी भवन में पारंपरिक विधि-विधान से पूरी हुई. पिता श्यामसुंदर व्यास की मौजूदगी में भाइयों ने बहन गायत्री को चुनरी ओढ़ाकर मायरा भरा. यह न सिर्फ भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक है, बल्कि ब्राह्मण समाज की एकता, संस्कार और परंपरा को भी दर्शाता है. ब्रॉम्हण भाइयों के मायरे की खास बातें – 81 लाख रुपये नकद – 25 तोला सोना – चांदी के जेवरात – अन्य कपड़े, उपहार और सामान जायल का मायरा है एक ऐतिहासिक परंपरा  राजस्थान के नागौर जिले में जायल-खिंयाला का मायरा सदियों पुरानी संस्कृति का हिस्सा है. यहां मामा (भाई) अपनी बहन के बच्चों की शादी में दिल खोलकर उपहार देते हैं, जिसे महिलाएं विशेष गीतों (जायल खिंयाला रो मायरो) में गाती हैं. पहले मुख्य रूप से जाट समुदाय में बड़े मायरे चर्चित थे, लेकिन अब अन्य समाज भी इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं. आपको बता दें कि पिछले कुछ वर्षों में नागौर में कई बड़े मायरे भरे गए हैं. जिसके तहत कुछ परिवारों ने करोड़ों की जमीन, नकद, सोना-चांदी दिए. जबकि हाल ही में 21 करोड़ से ज्यादा के मायरे भी सुर्खियां बने. लेकिन इस बार ब्राह्मण समाज का यह योगदान खास है. क्योंकि यह समाज में एक नई मिसाल कायम कर रहा है. आज भी जीवंत हैं राजस्थान की परंपरा जायल क्षेत्र में इस ऐतिहासिक मायरे की हर ओर चर्चा है. भाई-बहन का प्यार, परंपरा का सम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा का जीता-जागता उदाहरण भी है. साथ ही यह मायरा बताती है कि राजस्थान की रस्में आज भी जीवंत हैं, जहां रिश्ते पैसे से नहीं, बल्कि भावनाओं और संस्कारों से मजबूत होते हैं.   

नई दुल्हन को बाइक न मिलने पर पति ने तलाक का दिल दहला देने वाला फैसला लिया

 बांदा उत्तर प्रदेश के बांदा में एक अजीबोगरीब और हैरान कर देने वाला सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक महिला को शादी के बाद इतना मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया कि वो टूट गयी. ससुराल वालों ने उसे लौटने के लिए हलाला करने की शर्त रख दी, जिससे परेशान होकर उसने थाना पहुंच पुलिस से शिकायत की है. पुलिस ने शौहर सहित चार लोगों पर दहेज उत्पीड़न, मारपीट और अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है.  दहेज के लिए प्रताड़ना मामला मटौंध थाना क्षेत्र का है, जहां की रहने वाली एक युवती ने पुलिस शिकायत के दौरान बताया कि उसके पिता ने उसका निकाह जून 2025 में अपने सामर्थ्य के अनुसार किया था, निकाह के बाद विदा होकर ससुराल पहुचीं तो मालूम हुआ कि पति सहित अन्य ससुरालीजन दहेज से खुश नही थे. महिला ने आरोप लगाया कि इस कारण लोग उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने लगे. उसे कई दिनों तक भूखा रखा गया, लेकिन परिवार चलता रहे इसलिए युवती सब सहती रही. कई बार मामला बढ़ने पर पुलिस ने समझौता कराया, लेकिन ससुराल पक्ष के लोगों मे कोई बदलाव नहीं आया. दिसम्बर 2025 में मारपीट करते हुए उसे ससुराल से निकाल दिया गया.  'हलाला कराकर आओगी तो रखूंगा' युवती ने आगे बताया कि इन लोगों ने कहा कि अपने परिवार वालों को बुलाओ, हमे दो लाख रुपये, एक हीरो होंडा बाइक दिलवाओ. हमने तुम्हे तलाक दे दिया है तो अब हम तुम्हें अपने साथ तब रखेंगे जब तुम हलाला कराकर आओगी. साथ ही उसे जमकर गालियां दी गईं. जिसके बाद पीड़ित युवती ने परेशान होकर पुलिस से शिकायत की है, पुलिस ने शौहर सहित चार ससुरालियों पर केस दर्ज किया है.  मटौंध थाना के पुलिस अधिकारी SO संदीप कुमार ने बताया कि महिला ने शिकायत की है, जिस पर सुसंगत धाराओ में अभियोग दर्ज किया गया है. मामले में जांच करके सही तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी. 

2026 में शादियों का रुका सिलसिला, 25 जुलाई से 20 नवंबर तक नहीं होंगे विवाह, फरवरी में सबसे ज्यादा मुहूर्त

भगवान भास्कर के उत्तरायण होने के साथ ही खरमास उतर गया है। लेकिन इस साल शादी की शहनाइयां तो पांच फरवरी से बजनी शुरू होगी। फरवरी से शुरू हो रहे विवाह का पूरे वर्ष में लगभग 59 शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। इनमें सबसे अधिक 12 मुहूर्त फरवरी महीने में ही पड़ रहा है। इसके बाद मार्च, अप्रैल, मई और जून माह में शादियों का आठ-आठ मुहूर्त बन रहे हैं। जुलाई में चार, नवंबर में चार और दिसंबर 2026 में सात मुहूर्त बन रहे हैं। फरवरी में उदित हो रहा शुक्र ग्रह : खरमास समाप्त होने के बावजूद शुक्र ग्रह अस्त होने के कारण अभी शादियां नहीं हो रही हैं। बताया जा रहा है कि एक फरवरी को शुक्र ग्रह का उदय हो रहा है। इस बाबत जानकारी देते हुए ज्योतिषाचार्य पीके युग ने बताया कि कि शादी- विवाह के लिए गुरु और शुक्र ग्रह का उदित होना और अच्छे योग में होना बेहद जरूरी होता है। इन दोनों में से एक भी ग्रह के नहीं रहने पर शादी-विवाह का शुभ मुहूर्त नहीं बनता है। वसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि हालांकि शादी का मुहूर्त 5 फरवरी से बन रहा है। लेकिन वसंत पंचमी के दिन 23 जनवरी को अबूझ मुहूर्त होने से इस दिन शादी-विवाह सहित अन्य शुभ कार्य किया जा सकता है। ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि अबूझ मुहूर्त में किसी भी शुभ काम के लिए शुभ योग और ग्रह विचार आदि शिथिल हो जाते हैं। इस वर्ष पांच महीने शहनाइयां नहीं बजेंगी वर्ष का दूसरा खरमास महीना 14 मार्च से 13 अप्रैल के बीच होगा। इस दौरान सूर्य के मीन राशि में प्रवेश के साथ लगेगा। खरमास के दौरान शादी-विवाह का आयोजन नहीं होता है। ज्योतिषाचार्य पीके युग बताते हैं कि जिस वर्ष दो ज्येष्ठ माह हो उस वर्ष पहले ज्येष्ठ माह में शादियां नहीं होती है। 2026 में ज्येष्ठ अधिकमास पड़ रहा है। इस वर्ष 17 मई से 15 जून और 16 जून से 14 जुलाई के बीच ज्येष्ठ माह रहेगा। इसलिए 17 मई से 15 जून के बीच ज्येष्ठ माह में शादियां नहीं होंगी। इसके बाद 25 जुलाई से 20 नवंबर के बीच चातुर्मास में भगवान श्री हरि चार माह के योग निद्रा में चले जाएंगे। भगवान विष्णु के जाग्रत नहीं होने की स्थिति में भी लग्न आदि कार्य नहीं होते है।

अशोकनगर में शादी में प्री-वेडिंग शूट और गोल्ड गिफ्ट पर बैन, 1 लाख रुपये का जुर्माना होगा

अशोकनगर  आधुनिकता की दौड़ में शादियों और सामाजिक कार्यक्रमों में बढ़ती फिजूलखर्ची व दिखावा कल्चर को रोकने सिख समाज ने क्रांतिकारी पहल की है। प्री-वेडिंग शूट व शादी में लडक़ी पक्ष की तरफ से सोने के उपहार दिए जाने पर रोक लगा दी है। यदि किसी ने निर्णय नहीं माना तो एक लाख रु. तक जुर्माना लगाने का निर्णय लिया है। शहर के गुरुसिंह सभा गुरुद्वारे में सिख समाज की अहम मुद्दों पर बैठक हुई। सामाजिक व पारिवारिक कार्यक्रमों में बढ़ती फिजूलखर्ची पर गहन चर्चा हुई। विवाह समारोह में बढ़ते दिखावे और अनावश्यक खर्च पर चिंता जताई। साथ ही निर्णय लिया कि विवाह के दौरान लड़की पक्ष की ओर से लड़के पक्ष को सोने की अंगूठी या किसी प्रभार के सोने के आभूषण उपहार स्वरूप नहीं दिए जाएंगे, क्योंकि इससे परिवार पर आर्थिक दबाव बढ़ता है और असमानता भी बढ़ती है। चेतावनीः निर्णय का पालन नहीं तो भारी भरकम जुर्माना गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी के प्रधान सतपालसिंह ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि समाज में इस तरह के कठोर व आवश्यक निर्णय लेना जरूरी है। जो भी व्यक्ति या परिवार इन निर्णयों का पालन नहीं करेगा, उस पर जुर्माने का प्रावधान रखा जाएगा। जिसकी राशि नियमों के उल्लंघन अनुसार 5100 रुपए से लेकर एक लाख रु. तक होगी। समाज ने यह भी लिए निर्णय     शादी में हल्दी-मेंहदी रस्म अत्यधिक खर्चीली हो रही है, जिन्हें सादगी, पवित्र संबंध और मर्यादा के साथ मनाने का निर्णय लिया।     शादी में प्री-वेडिंग शूट व फोटो शूट को भी समाज के मूल्यों के विरुद्ध माना जाता है, जिस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाएगा।     शोक पर फिजूलखर्ची रोकने का निर्णय, लंगर गुरुमत मर्यादा अनुसार सादा रखा जाए, अनावश्यक खर्च व दिखावे से बचें।

मंडप में हुआ बड़ा कांड! सिंदूर भूल आया दूल्हा, ब्लिंकिट की फटाफट डिलीवरी बनी लाइफसेवर, VIDEO वायरल

नई दिल्ली  दिल्ली में एक शादी के दौरान उस समय मजेदार स्थिति बन गई जब फेरों के बाद दूल्हा-दुल्हन को पता चला कि सिंदूर साथ लाना भूल गए हैं। रस्म रुक गई और परिवार वाले परेशान हो गए। लेकिन फिर दूल्हे ने ब्लिंकिट ऐप से सिंदूर ऑर्डर कर दिया। सिर्फ 16 मिनट में डिलीवरी पहुंच गई। दूल्हे ने सिंदूर दुल्हन की मांग में भरा और रस्म पूरी हो गई। यह पूरा वाकया वीडियो में रिकॉर्ड हुआ, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। तैयारियों में हुई छोटी-सी भूल शादी की भागदौड़ में दूल्हा हृषि और दुल्हन पूजा सिंदूर लाना भूल गए। फेरों के बाद जब सिंदूर की रस्म का समय आया तो सबको यह बात याद आई। दूल्हा ने कैमरे पर मुस्कुराते हुए कहा, "हम सिंदूर लाए ही नहीं।" परिवार वाले पहले तो हैरान हुए, लेकिन जल्द ही सबने हंसकर स्थिति संभाल ली। किसी ने दुकान जाने की बजाय ब्लिंकिट से ऑर्डर करने का फैसला किया। ब्लिंकिट की तेज डिलीवरी ने बचाई लाज ऑर्डर करते ही ऐप ने 16 मिनट का समय दिखाया। सभी मंडप में इंतजार करते रहे। दूल्हा-दुल्हन शांत बैठे मुस्कुराते रहे। ठीक समय पर डिलीवरी बॉय पहुंचा और सिंदूर का पैकेट सौंपा। इसके बाद दूल्हे ने दुल्हन की मांग भरी। मेहमानों ने तालियां बजाईं और माहौल खुशी से भर गया। यह घटना दिखाती है कि आजकल क्विक डिलीवरी ऐप्स शादियों में भी काम आ रहे हैं। वीडियो वायरल, लोग कर रहे मजेदार कमेंट्स इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया गया यह वीडियो लाखों लोगों ने देख लिया है। लोग कमेंट कर रहे हैं कि ब्लिंकिट ने असली में जोड़ी बचा ली। कुछ मजाक कर रहे हैं कि अब शादियों में ब्लिंकिट जरूरी हो गया। यह अनोखी घटना सबको याद रहेगी और दिखाती है कि छोटी भूलें कभी-कभी सबसे मजेदार यादें बन जाती हैं।

सुनील लहरी के बेटे की शादी चर्चा में, मुस्लिम एक्ट्रेस बनीं जीवनसंगिनी — जानिए कौन हैं वो

मुंबई बिग बॉस 10 फेम सारा खान ने 5 दिसंबर को हिंदू रीति-रिवाजों से कृष पाठक  से शादी कर लिया है और साथ ही एक छोटा सा रिसेप्शन भी होस्ट किया था. कुछ समय पहले इस कपल ने कोर्ट मैरिज किया था. शादी की फोटो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. बता दें कि कृष पाठक रामायण के लक्ष्मण सुनील लहरी के बेटे हैं. सारा खान और कृष पाठक  ने इसी साल अक्टूबर में कोर्ट मैरिज किया था. जिसके बाद अब 5 दिसंबर को इस कपल ने हिंदू रीति-रिवाजों से शादी किया है. दुल्हन के जोड़े में एक्ट्रेस काफी प्यारी लग रही हैं. शादी के बाद रखा रिसेप्शन इस कपल ने शादी के बाद एक छोटा सा रिसेप्शन होस्ट किया था. जहां पर उन्होंने पैपराजी से मुलाकात की थी और उनके लिए जमकर पोज दिया है. सारा खान और कृष पाठक ने पैपराजी को अपनी मेंहदी भी दिखाई थी. रेज कलर के लहंगे के साथ में एक्ट्रेस ने गोल्ड की ज्वैलरी पहनी थी. बता दें कि सारा खान और कृष पाठक के रिसेप्शन में कई टीवी सेलेब्स शामिल हुए थे. इस कपल ने एक साल डेट करने के बाद शादी करने का फैसला लिया है. इससे पहले एक्ट्रेस ने एक्टर अली मर्चेंट से शादी किया था. दोनों ने बिग बॉस 10 में शादी रचाई थी. हालांकि शादी के दो महीने बाद ही दोनों अलग हो गए थे.

शादी में रसगुल्ले के विवाद ने बिगाड़ा माहौल, दूल्हा-दुल्हन पक्ष में भिड़ंत

गयाजी  बिहार के बोधगया जिले के एक निजी होटल में शादी समारोह का आयोजन किया गया था. यहां उस समय निजी होटल अखाड़ा बन गया, जब रसगुल्ला की कमी को लेकर दूल्हा-दुल्हन पक्ष में विवाद हो गया. यह घटना पिछले 29 नवंबर की बताई जा रही है, जिसकी CCTV फुटेज अब सामने आई है. हालांकि दोनों पक्षों की शिकायत के बाद पुलिस मुकदमा दर्ज कर जांच में जुटी है. मिठाई के लिए बाराती और घराती में मारपीट इस शादी समारोह में बारातियों को खाना परोसा जा रहा था. इसी दौरान खाना खाने के दौरान मिठाई कम पड़ने को लेकर दोनों पक्षों के बीच तकरार शुरू हो गई, जो कुछ ही मिनटों में मारपीट में बदल गई. आरोप है कि लात-घूंसे, कुर्सियों से मारपीट हुई. इस मारपीट में जिसके हाथ में जो आया, वही फेंककर एक दूसरे को लोग मार रहे थे. देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच भंयकर मारपीट होने लगी. इस मारपीट में कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. बता दें कि इस शादी समारोह में जयमाला से लेकर अधिकतर रस्में पूरी हो चुकी थीं और मंडप में बैठकर विवाह होना ही बाकी था, लेकिन रसगुल्ले पर शुरू हुआ हंगामा इतना बढ़ गया कि शादी ही रद्द करनी पड़ी. इस पूरे मामले में पुलिस दोनों पक्षों की ओर से मुकदमा दर्ज कर जांच कर रही है. दूल्हा और दुल्हन पक्ष का आरोप वहीं, दूल्हा के पिता महेंद्र प्रसाद का कहना है कि विवाद सिर्फ रसगुल्ले को लेकर हुआ था, लेकिन दुल्हन पक्ष ने उन लोगों पर दहेज मांगने का झूठा आरोप लगाकर बोधगया थाने में मुकदमा दर्ज करवाया है. उनका कहना है कि मुकदमे के बाद भी वे शादी कराने के लिए तैयार थे, लेकिन दुल्हन पक्ष किसी भी हालत में तैयार नहीं हुआ. वहीं, दूल्हा की मां मुन्नी देवी का आरोप है कि जब दोनों पक्ष समझौते के करीब थे, तभी दुल्हन पक्ष के लोग शादी में लाए गए जेवर-गहने को उठा ले गए और दुल्हन को साथ लेकर होटल से निकल गए. हालांकि बीते 1 दिसंबर को लड़की पक्ष के द्वारा भी बोधगया थाना मे दूल्हे के पिता पर दहेज का आरोप लगाया गया था. लड़की पक्ष के पिता ने आरोप लगाया है कि शादी में 10 लाख रुपए पहले ही दिए गए थे, लेकिन जयमाला के दौरान 2 लाख और अतिरिक्त की मांग की गई थी, जिसके बाद यह मामला बढ़ गया था. इस मामले में बोधगया थाने में लड़की पक्ष के द्वारा मामला दर्ज कराया गया है.

बैतूल में बदले विवाह नियम, डीजे बैन और ट्रैफिक बाधा पर मैरिज हॉल की होगी सीलिंग

बैतूल   शादियों के सीजन में मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में विवाह और अन्य आयोजनों में ध्वनि विस्तारक यंत्रों के अनियंत्रित उपयोग पर प्रशासन ने कड़ाई शुरू कर दी है। प्रभारी कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अक्षत जैन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत नए प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं। इसके तहत शादियों में डीजे बजाना प्रतिबंधित रहेगा, जबकि रात 10 बजे के बाद किसी भी प्रकार के लाउडस्पीकर के उपयोग पर पाबंदी होगी। चल समारोह के दौरान यातायात बाधित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। वहीं मेरिज लॉन और हॉल संचालकों को पार्किंग और ट्रैफिक मैनेजमेंट की उचित व्यवस्था करना अनिवार्य होगा। कार्यक्रम के दौरान ट्रैफिक जाम मिलने पर संबंधित हॉल या लॉन को तुरंत सील किया जाएगा। आदेश उल्लंघन पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत कारर्वाई होगी। प्रशासन ने नागरिकों से नियमों के पालन की अपील की है  

शादी का नया ट्रेंड: बारात और शराब के बिना, सिर्फ सादगी और संस्कार के साथ विवाह

भोपाल  शादी-ब्याह में दिखावे, फिजूलखर्ची और शोर-शराबे से परेशान समाज को एक नया विकल्प मिल गया है. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के गायत्री शक्तिपीठ ने सादगी और संस्कार का संदेश देने के लिए संस्कारित विवाह अभियान शुरू किया है. इसमें न डीजे होगा, न बैंड-बाजा, न भव्य सजावट होगी. विवाह सिर्फ मंत्रोच्चार, अग्नि और सात फेरों यानी पूरी तरह वैदिक रीति से सम्पन्न होगा.  भोपाल के महाराणा प्रताप नगर (MP नगर) स्थित शक्तिपीठ के एक पैम्फलेट यानी पत्रक में विवाह को एक पवित्र संस्कार बताते हुए खर्चीली रीतियों और सामाजिक बुराइयों को सख्ती से वर्जित किया गया है. पैम्फलेट में साफ लिखा है, ''दहेज लेना व देना एक सामाजिक अपराध है.'' साथ ही मांस-मदिरा के सेवन को इस पवित्र संस्कार को अपवित्र न बनाने की अपील की गई है. कैसा होगा यह संस्कारित विवाह:-      विवाह पूरी तरह वैदिक विधि से संपन्न होगा      अधिकतम 15 से 20 मेहमानों की इजाजत होगी      प्रतीक स्वरूप 2 वरमाला और एक डिब्बा मिठाई का आदान-प्रदान किया जाएगा      डीजे, बैंड-बाजा या किसी भी तरह की भव्य सजावट की अनुमति नहीं होगी      बारात और भोजन की व्यवस्था यहां इजाजत नहीं है.  संस्कारों पर जोर और फिजूलखर्ची का विरोध गायत्री परिवार के प्रांतीय शक्तिपीठ समन्वयक राकेश कुमार गुप्ता ने बताया, ''यह पहल गायत्री परिवार की सात क्रांतियों (साधना, स्वास्थ्य, शिक्षा, नारी जागरण, नशा निवारण आदि) का हिस्सा है.'' गुप्ता ने बताया कि गायत्री परिवार हमेशा फिजूलखर्ची को कम करने के लिए लोगों को प्रेरित करता रहता है. इसमें मृत्युभोज का हम लोग विरोध करते हैं, शादी में दान दहेज का विरोध करते हैं और खर्चीली शादियों को कम करने के लिए लोगों को प्रेरित करते हैं.  उन्होंने तर्क दिया कि विकृतियों और वृद्धाश्रमों के बढ़ने के पीछे मुख्य कारण संस्कारों की कमी है, जिसे इस वैदिक विधि से दूर किया जा रहा है. गृहस्थ जीवन एक तपोवन शक्तिपीठ ने अपने पैम्फलेट में गृहस्थ जीवन को एक आध्यात्मिक साधना के रूप में परिभाषित किया है: "गृहस्थ एक तपोवन है, इसमें संयम, सेवा और सहिष्णुता की साधना करनी पड़ती है." राकेश कुमार गुप्ता ने बताया कि वे शादी का वास्तविक संदर्भ समझाते हैं कि आगे परिवार कैसे चलेगा और वैदिक विधि से विवाह का बंधन कैसा होना चाहिए.  गायत्री परिवार के प्रांतीय शक्तिपीठ समन्वयक राकेश कुमार गुप्ता. देवउठनी एकादशी पर गायत्री मंदिर से विवाह करने वाले दंपति वैभव वर्मा और प्रिया शर्मा ने बताया, ''हमने 18 मेहमानों के सामने शादी की. मंदिर की रसीद कटवाने के बाद कुल खर्च करीब 1000 रुपए ही आया. न दहेज, न दिखावा. अब पैसों से बची रकम हम अपने गृहस्थी में लगाएंगे.  इसके अलावा, एक अन्य नवविवाहित जोड़े जय अरोड़ा और मधु पांडेय ने कहा,  हम दोनों एक साथ आईटी कंपनी में काम करते हैं. लंबे समय से एक दूसरे से प्रेम करते हैं.हमें अपने आर्थिक हालात देखे और मेट्रो सिटी में आगे के भविष्य को देखते हुए कम खर्च में विवाह बंधन में बंधने का फैसला लिया.   रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया गायत्री शक्तिपीठ में विवाह संस्कार कराने की प्रक्रिया भी सरल और पारदर्शी रखी गई है.  – विवाह के लिए आवश्यक सामग्री (जैसे अग्निकुंड, पंचमेवा, हल्दी, नारियल, पुष्पादि आदि) परिवारों को खुद लानी होगी. – कम से कम 15 दिन या एक महीने पहले रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है. – सबसे अहम शर्त यह है कि वर और वधू दोनों के माता-पिता की लिखित सहमति जरूरी है.  – गायत्री परिवार में सभी संस्कार निशुल्क कराए जाते हैं. विवाह कराने का यहां कोई शुल्क या फीस नहीं है. – सिर्फ पूजा के लिए उपयोग होने वाले सामान की व्यवस्था के लिए 2 हजार या 4 हजार रुपए का एक नॉमिनल अमाउंट लिया जाता है. – विवाह के लिए यह राशि 7000 हजार रुपए तय की गई है.  दीवारों से लेकर पोस्टरों पर संदेश ही संदेश  शक्तिपीठ के परिसर में दीवारों से लेकर बैनर पोस्टरों में समाज को सही दिशा देने वाले संदेश ही संदेश लिखे गए हैं. संदेश में समाज से खर्चीली शादियों को बंद कर सादगी भरी रीतियों को अपनाने का आह्वान किया है. मसलन,  'हम बदलेंगे, युग बदलेगा.' अमर रीतियों से बंधो, बंद करो खर्चीली शादी. सादगी भरी शादियां हमें सद्भाव और वैदिकता बताती हैं.' इसके साथ ही मोटे अक्षरों में समाज को कचोट देने वाला लिखा है- 'खर्चीली शादियां हमें दरिद्र और बेईमान बनाती हैं.'