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नाथनगरी में गूंजेगी सभ्यता की 5000 साल पुरानी गाथा, योगी सरकार का पर्यटन और रोजगार पर विशेष जोर

भित्ति कला से बरेली बनेगी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक नगरी 19 फोकस वॉल से शहर बनेगा उत्तर प्रदेश का नया सांस्कृतिक–पर्यटन केंद्र फोकस वॉल से होगा सांस्कृतिक क्रांति का आगाज़, रोशन होगी आध्यात्मिक पहचान *अजंता–एलोरा की तर्ज पर बनेंगीं कलाकृतियाँ, नाथ परंपरा की मिलेगी झलक, योगी मॉडल का नया अध्याय से बरेली बनेगा अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक मार्ग का आकर्षण बरेली,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी परियोजना से नाथ नगरी बरेली अब सांस्कृतिक–आध्यात्मिक कला के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित होने जा रही है। शहर के प्रमुख चौराहों, मार्गों, धार्मिक स्थलों और सरकारी परिसरों में 19 भव्य फोकस वॉल का निर्माण किया जाएगा। बरेली में दिखेगी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक झलक भित्ति वॉल पर भारत की प्राचीन सभ्यता, नाथ परंपरा, महाभारतकालीन इतिहास और स्थानीय सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहरों का ऐसा शानदार प्रदर्शन होगा, जैसा अब तक किसी भी शहर में नहीं देखा गया।  क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी रविंद्र कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप युवाओं को भारत के गौरवशाली अतीत, प्राचीन और समृद्धशाली संस्कृति से परिचय करायेगी। युवाओं और पर्यटकों को बरेली के 5000 वर्ष पुराने इतिहास और आध्यात्मिक विरासत से जोड़ने का माध्यम बनेगी। उन्होंने बताया कि फोकस वॉल का विचार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उस परिकल्पना से प्रेरित है जिसमें उत्तर प्रदेश की सभ्यता को ग्लोबल टूरिज्म मॉडल से जोड़कर रोजगार, पर्यटन और सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था को बढ़ाना शामिल है। अजंता-एलोरा की तर्ज पर बनेगी भित्ति कला, जीवंत होंगी देवकथाएँ और नाथ परंपरा इन फोकस वॉल पर बनने वाले भित्ति–चित्र अजंता–एलोरा की शैली पर आधारित होंगे। इन चित्रों में भगवान शिव के त्रिशूल और डमरू, नाथ योगियों के प्रतीक, देवी–देवताओं की आकृतियां, बरेली की आध्यात्मिक पहचान, महाभारतकालीन नगर की विरासत और स्थानीय लोककला को जीवंत कलात्मक स्वरूप दिया जाएगा। पर्यटन विभाग ने सर्वे करने के बाद ऐसे स्थानों को चुना है। जहां से सबसे ज्यादा पर्यटक और राहगीर गुजरते हैं। जिससे उनकी नजर अनायास ही फोकस वाल पर चली जायेगी। फोकस वाल को आधुनिक रंग रोगन और सज्जा के साथ भव्य रूप दिया जा रहा है। जिससे वहां से गुजरने वालों की आंखे बरवस ही उस ओर खिंची चली जायेंगी। शहर के सर्वाधिक आवाजाही वाली जगह पर बनेगी फोकस वॉल मनोहर भूषण इंटर कॉलेज ग्राउंड, एमजेपी रोहिलखंड विश्वविद्यालय, सुरेश शर्मा नगर चौराहा, डी.डी.पुरम पार्क, नियर स्टेडियम, कुदेशिया अंडरपास, बीसलपुर चौराहा, विकास भवन चौराहा, आयुक्त कार्यालय, उद्योग विभाग कार्यालय, त्रिवटी नाथ मंदिर मैकेनियर रोड, 100 फुटा तिराहा आदिनाथ चौक, इन्वर्टिस तिराहा बड़ा बाइपास, रेलवे स्टेशन, मिनी बाइपास इज्जतनगर रेलवे स्टेशन, झुमका तिराहा, और पर्यटन कार्यालय रोहिला होटल वॉल। पर्यटन, सांस्कृतिक गौरव और रोजगार-तीन मोर्चों पर बड़ा बदलाव नैनीताल, रामनगर, काठगोदाम, पीलीभीत टाइगर रिजर्व, दुधवा नेशनल पार्क और उत्तराखंड की ओर जाने वाले हजारों पर्यटक रोज बरेली से गुजरते हैं, लेकिन शहर के वास्तविक सांस्कृतिक वैभव से अनजान रहते हैं। अब फोकस वॉल उन्हें पहली बार बरेली की आध्यात्मिक परंपरा, महाभारतकालीन पहचान, सांस्कृतिक विरासत और लोककला से परिचित कराएगी। यह परियोजना स्थानीय कलाकारों, पेंटरों, शिल्पियों और तकनीकी कार्यकर्ताओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन भी करेगी। पर्यटन विभाग के अनुसार, फोकस वॉल बनने के बाद नाथनगरी बरेली को उत्तर प्रदेश के धार्मिक–सांस्कृतिक पर्यटन मार्ग में शामिल करने का भी प्रस्ताव है। 6 करोड़ 21 लाख रुपये की लागत से बदलेगा शहर तिराहा और चौराहा इस परियोजना पर कुल 621.33 लाख रुपये (लगभग 6 करोड़ 21 लाख 33 हजार रुपये) खर्च किए जाएंगे। क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी रविंद्र कुमार ने कहा कि बरेली केवल झुमके तक ही सीमित नहीं है। यह योगियों, सिद्ध–नाथों, ऋषि–मुनियों और प्राचीन सभ्यता का नगर है। फोकस वॉल आने वाली पीढ़ियों को बरेली की असली आत्मा से परिचित कराएगी। यह न सिर्फ शहर के सौंदर्यीकरण की योजना है, बल्कि बरेली के सांस्कृतिक पुनरुद्धार और पर्यटन अर्थव्यवस्था की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

आगरा में ‘गीता गोविंद वाटिका’ लिखेगी पर्यटन विकास का नया अध्याय

जोनल पार्क में 19 एकड़ क्षेत्र में ₹4.20 करोड़ से विकसित हो रही 'गीता गोविंद वाटिका' थीम लाइटिंग और लेजर शो बनेंगे रात्रि आकर्षण, पर्यटकों के रात्रि प्रवास की भी होगी सुविधा वाटिका में 'तुलसी की 100 से ज्यादा प्रजातियां बनेंगी औषधीय जानकारी के साथ प्राकृतिक आकर्षण का केंद्र आगरा, योगी सरकार ब्रज के पर्यटन को केवल ऐतिहासिक स्मारकों तक सीमित न रखकर, उसे ब्रज की समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत से जोड़कर एक नया आयाम दे रही है। इसी कड़ी में, ताजनगरी फेस टू स्थित जोनल पार्क के 19 एकड़ क्षेत्र में 'गीता गोविंद वाटिका' विकसित की जा रही है। इस वाटिका का प्राथमिक लक्ष्य ताजमहल और अन्य स्मारकों का दीदार करने आने वाले पर्यटकों के रात्रि प्रवास को बढ़ाना और उन्हें ब्रज की समृद्ध धार्मिक संस्कृति से परिचित कराना है।         मुख्यमंत्री पर्यटन विकास सहभागिता योजना के तहत इस वाटिका को लगभग ₹4.20 करोड़ की लागत से विकसित किया जा रहा है। योजना में 50 प्रतिशत राशि राज्य सरकार और शेष 50 प्रतिशत आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) वहन कर रहा है। इस फंड से यहाँ थीम लाइटिंग और एक भव्य लेजर शो का आयोजन किया जाएगा, जो रात्रि में पर्यटकों के लिए एक नया और आकर्षक अनुभव होगा। आगरा बनेगा सांस्कृतिक पर्यटन का भी केंद्र आगरा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एम. अरून्मोली ने कहा कि प्रदेश सरकार लक्ष्य आगरा को सिर्फ ऐतिहासिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पर्यटन का भी केंद्र बनाना है। 'गीता गोविंद वाटिका' हमारे इसी विजन का हिस्सा है। आगरा में आने वाले पर्यटक अब तक केवल दिन में स्मारक देखते थे। 'गीता गोविंद वाटिका' के माध्यम से हम उन्हें रात में रुकने के लिए एक सुंदर और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध स्थान प्रदान कर रहे हैं। रात्रि प्रवास बढ़ने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को सीधे गति मिलेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।" आस्था और प्रकृति का अनूठा संगम वाटिका के अंदर दो एकड़ भूमि पर एक विशाल मुक्ताकाशीय मंच तैयार किया जा रहा है, जहाँ भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं, रासलीला और विभिन्न धार्मिक आयोजनों का नियमित मंचन किया जाएगा। धार्मिक तत्वों को प्राथमिकता देते हुए यहाँ कृष्ण कालीन वनस्पतियों के पौधे लगाए जा रहे हैं, और सबसे महत्वपूर्ण, भगवान श्री कृष्ण के गीता उपदेश को आकर्षक तेल चित्रों एवं शिलालेखों पर अंकित कराया जा रहा है। इसके अलावा, एक एकड़ भूमि पर एक विशेष तुलसी वन बनाया जाएगा, जिसमें तुलसी की 100 प्रजातियाँ होंगी, जिनके औषधीय गुणों की जानकारी भी आगंतुकों को मिलेगी। पर्यटन उद्योग में उत्साह आगरा टूरिज्म गिल्ड के अध्यक्ष अमूल्य कक्कड़ ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि योगी सरकार का यह कदम पर्यटन उद्योग के लिए गेम चेंजर साबित होगा। आगरा को अब तक केवल वन डे डेस्टिनेशन (एक दिवसीय गंतव्य) के रूप में जाना जाता था। 'गीता गोविंद वाटिका' इसे ओवरनाइट डेस्टिनेशन (रात्रि प्रवास गंतव्य) में बदलने में मदद करेगी। सांस्कृतिक और धार्मिक प्रस्तुतियों का रात्रि में होना पर्यटकों को आकर्षित करेगा और हमारे स्थानीय व्यवसायों, जैसे होटल, रेस्तरां और गाइड सेवाओं को सीधे लाभ होगा। उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल आगरा के पर्यटन को एक नया आयाम देगी, बल्कि योगी सरकार की नीतियों के तहत ब्रज की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को भी प्रभावी ढंग से वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करेगी।

आजीविका मिशन की मदद से ग्रामीण महिलाओं का समूह तैयार कर रहा एलईडी बल्ब

झांसी में ग्रामीण महिलाओं का समूह एलईडी बल्ब बनाने और मार्केटिंग का खुद कर रहा काम झांसी उत्तर प्रदेश की योगी सरकार राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भरता के लिए प्रेरित कर रही है। महिलाओं के कई समूहों ने अभिनव पहल करते हुए प्रेरणा देने वाली मिसाल कायम की है। ऐसा ही एक उदाहरण प्रस्तुत किया है झांसी जिले के चिरगांव ब्लॉक के ग्राम जरियाई की जय मां रतनगढ़ वाली महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने। इन महिलाओं ने उद्यमिता की राह पर कदम बढ़ाते हुए एलईडी बल्ब बनाने का काम शुरू किया है। महिलाओं का समूह बल्ब बनाकर इस एलईडी बल्ब को अपने गांव और आसपास के क्षेत्रों में बिक्री करता है। जय मां रतनगढ़ वाली महिला स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष अंजना के अनुसार ने उनके समूह से 12 महिलाएं जुड़ी हैं। लगभग 8 महीने पहले एलईडी बल्ब बनाने का काम उनके समूह ने शुरू किया है। महिलाओं के समूह ने इस काम को शुरू करने के लिए दस हजार रूपये जुटाए और उससे जरूरी सामान मंगवाए। समूह की महिलाओं ने लोन भी लिया। योगी सरकार ने महिलाओं को बल्ब निर्माण का प्रशिक्षण दिलाया। समूह की महिलाओं को बल्ब बनाने के लिए रॉ मैटेरियल प्रदान किया जाता है। महिलाएं इस मैटेरियल से एलईडी बल्ब बनाकर बिक्री का काम करती हैं। समूह की महिलाएं हर रोज 150 से अधिक बल्ब तैयार करती हैं और उसकी बिक्री की रणनीति भी खुद तैयार करती हैं।  चिरगांव ब्लॉक की बीएमएम कल्पना के अनुसार स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को समूह का गठन कराने के बाद संबंधित काम का प्रशिक्षण दिलाया गया। इन उत्पादों की बिक्री के लिए प्रदर्शनियों और मेलों में सरकार की ओर से निशुल्क स्टॉल उपलब्ध कराया जाता है। महिलाओं के समूह ने इस पहल के माध्यम से आजीविका अर्जित करने की ओर कदम बढ़ाया है।

विशेष आर्टिकल- कृषि क्षेत्र में स्वर्णिम विकास: उत्तर प्रदेश के किसानों और योगी सरकार की उपलब्धियां

लखनऊ एक समय था जब उत्तर प्रदेश को 'बीमारू' राज्य कहा जाता था, जहां कृषि क्षेत्र भ्रष्टाचार, बाढ़, सूखा और निम्न उत्पादकता से जूझता था। लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार ने 2017 से अब तक कृषि को आत्मनिर्भर भारत की रीढ़ बना दिया। आज UP देश का 21% खाद्यान्न उत्पादन करता है, जबकि केवल 11% कृषि भूमि होने पर भी फल-सब्जी का 15% और 11% उत्पादन यहां से आता है। कृषि वृद्धि दर 13.7% (राष्ट्रीय औसत 9.5% से अधिक), GSDP में 28% योगदान और UP-AGREES प्रोजेक्ट जैसे प्रयासों से राज्य वैश्विक खाद्य आपूर्तिकर्ता बनने की दिशा में अग्रसर है। PM किसान सम्मान निधि, सॉइल हेल्थ कार्ड, MSP और सोलर पैनल इंस्टॉलेशन से 1 करोड़+ किसान लाभान्वित हुए हैं। बजट 2025-26 में ₹2.25 लाख करोड़ इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए आवंटित, यह उत्थान PM मोदी के विकसित भारत-2047 विजन का जीवंत प्रमाण है। योगी सरकार की प्रमुख उपलब्धियां: आंकड़ों में कृषि क्रांति योगी सरकार ने तकनीकी नवाचार, सिंचाई, बीमा और बाजार लिंकेज पर फोकस कर कृषि को मजबूत किया। यहां कुछ प्रमुख आंकड़े: पैरामीटर    2017 से पहले    2025 तक    वृद्धि खाद्यान्न उत्पादन (% राष्ट्रीय)    15%    21%    40%+ फल-सब्जी उत्पादन (करोड़ टन/वर्ष)    ~3.5    4+    14%+ कृषि वृद्धि दर (%)    8.6    13.7    59%+ सिंचाई परियोजनाएं (परियोजनाएं)    सीमित (बांसागर आदि अधर में)    11 एक्सप्रेसवे + 6 कार्यरत, बांसागर पूर्ण    3 गुना+ किसान सम्मान निधि लाभार्थी (करोड़)    न्यून    10 (वार्षिक)    नया आयाम फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स    सीमित    65,000+ (15 एग्रो पार्क)    10 गुना+ कृषि विश्वविद्यालय    4    5 (नया जोड़)    25%+ मुख्य पहलें: •    UP-AGREES प्रोजेक्ट (जनवरी 2025): किसानों को तकनीकी सहायता, ग्रामीण उद्यमिता – 23% खाद्यान्न योगदान। •    फूड प्रोसेसिंग पॉलिसी-2023: 19 नए प्रोजेक्ट, सब्सिडी, ब्याज छूट – 1,000 यूनिट्स/जिला लक्ष्य। •    DSR Conclave 2025: सीधी बुआई से जल संरक्षण, वैश्विक खाद्य हब लक्ष्य। •    सॉइल हेल्थ कार्ड और बीमा: MSP से किसानों को न्यूनतम मूल्य। •    सिंचाई: बांसागर, सरयू नहर, मध्य गंगा नहर पूर्ण – 64,000 हेक्टेयर भूमि मुक्त। ये प्रयास कृषि GSDP को 28% बढ़ा चुके हैं, जहां UP $1 ट्रिलियन इकोनॉमी की ओर अग्रसर है। लाभार्थियों की प्रेरक कहानियां: साधारण किसानों से आत्मनिर्भर उद्यमी तक योगी सरकार की योजनाओं ने लाखों किसानों को सशक्त किया। यहां कुछ वास्तविक उदाहरण: 1.    झांसी के रामू सिंह (UP-AGREES लाभार्थी):  o    पहले: सूखे से जूझते, मासिक आय ₹5,000। o    सहायता: सॉइल हेल्थ कार्ड + सोलर पैनल से ड्रिप इरिगेशन। o    अब: गेहूं उत्पादन 20% बढ़ा, ₹50,000 मासिक, परिवार की शिक्षा-स्वास्थ्य में निवेश। "योगी जी की तकनीक ने मेरी जिंदगी बदली।" 2.    वाराणसी की महिला SHG (DSR Conclave से प्रेरित):  o    पहले: बिचौलियों से शोषण। o    सहायता: PM किसान + MSP से न्यूनतम मूल्य, फूड प्रोसेसिंग यूनिट। o    अब: 41 महिलाएं, ₹1 करोड़ टर्नओवर, निर्यात शुरू। "सरकार ने हमें बाजार दिया।" 3.    बुलंदशहर के छोटे किसान (फूड प्रोसेसिंग लाभार्थी):  o    पहले: फसल बर्बाद। o    सहायता: एग्रो पार्क + सब्सिडी से प्रोसेसिंग यूनिट। o    अब: 100+ रोजगार, फल-सब्जी निर्यात, आय दोगुनी। "पॉलिसी-2023 ने हमें उद्यमी बनाया।" ये कहानियां साबित करती हैं कि नीतियां जमीनी स्तर पर काम कर रही हैं, खासकर महिलाओं और छोटे किसानों के लिए। योगी आदित्यनाथ के प्रेरक भाषण: कृषि पर दृष्टि CM योगी ने कृषि को 'आत्मनिर्भर UP की कुंजी' बताया: •    DSR Conclave 2025 (6 अक्टूबर): "UP 21% खाद्यान्न उत्पादन करता है। 11 वर्षों में कृषि में क्रांतिकारी बदलाव – सॉइल कार्ड, MSP, किसान सम्मान से किसान सशक्त। 2030 तक वैश्विक खाद्य हब!" •    UP-AGREES उद्घाटन (28 जनवरी 2025): *"UP 23% खाद्यान्न, 15% सब्जी उत्पादक। AGREES से किसान आत्मनिर्भर, तकनीक से तीन गुना उत्पादन।" •    8 वर्ष पूर्णता (24 मार्च 2025): *"कृषि वृद्धि 13.7% – BIMARU से ग्रोथ इंजन। 6 करोड़ गरीब ऊपर उठे।" •    कृषि भारत-2024 (15 नवंबर 2024): *"20% कृषि योगदान – जल जीवन मिशन से महिलाओं की कहानियां। लोकल से ग्लोबल!" निष्कर्ष: कृषि – UP का समृद्धि आधार योगी सरकार ने UP-AGREES, DSR Conclave और फूड प्रोसेसिंग से कृषि को उपेक्षा से उत्कृष्टता तक पहुंचाया। 21% राष्ट्रीय योगदान से UP वैश्विक खाद्य हब बनेगा। किसान, आत्मनिर्भर बनें – नया UP आपके हाथ में! जय किसान! जय उत्तर प्रदेश!

राज्यभर में पुलिस महकमे में फेरबदल: 23 एडिशनल एसपी बदले गए, देखें आपके जिले में कौन तैनात हुआ

लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार ने रविवार को पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल किया है। प्रदेश में 23 एडिशनल एसपी (अपर पुलिस अधीक्षक) के तबादले किए गए हैं। गृह विभाग ने इसकी सूची जारी कर दी है। नए आदेश के अनुसार, बी.एस. वी. कुमार को उपसेनानायक, 47वीं वाहिनी पीएसी गाजियाबाद बनाया गया है। सच्चिनानंद को अपर पुलिस अधीक्षक एसएसएफ मुख्यालय लखनऊ में तैनाती मिली है। डॉ. संजय कुमार को उपसेनानायक, 27वीं वाहिनी पीएसी, सीतापुर भेजा गया है। इन अफसरों का भी हुआ तबादला इसके अलावा सुबोध गौतम को अपर पुलिस अधीक्षक (पूर्वी), हरदोई बनाया गया है। नृपेंद्र को अपर पुलिस उपायुक्त, कमिश्नरेट वाराणसी नियुक्त किया गया है।निवेश कटियार को अपर पुलिस अधीक्षक, यूपी 112 लखनऊ में तैनात किया गया है और दिनेश कुमार पुरी को अपर पुलिस अधीक्षक (दक्षिणी), गोरखपुर भेजा गया है। वहीं, संतोष कुमार द्वितीय का गोरखपुर तबादला निरस्त कर दिया गया है, वे अब मुख्यालय पुलिस महानिदेशक कार्यालय में ही रहेंगे। सीताराम को अपर पुलिस अधीक्षक (विधि प्रकोष्ठ) मुख्यालय, लखनऊ बनाया गया है। इन अधिकारियों को भी मिली नई जिम्मदारी आदेश के मुताबिक, सिद्धार्थ वर्मा को कुशीनगर में एएसपी के रूप में तैनाती दी गई है। सुमित शुक्ला को शामली भेजा गया है। ज्ञानेंद्र नाथ प्रसाद को अपर पुलिस अधीक्षक (उत्तरी), गोरखपुर बनाया गया है। अशोक कुमार सिंह को अपर पुलिस अधीक्षक (नगर), बहराइच तैनात किया गया है। राजकुमार सिंह को ईओडब्ल्यू लखनऊ भेजा गया है। संतोष कुमार सिंह को अपर पुलिस अधीक्षक (सुरक्षा), गोरखपुर बनाया गया है। जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव को अपर पुलिस अधीक्षक सीआईडी, लखनऊ नियुक्त किया गया है। रामानंद कुशवाहा को अपर पुलिस अधीक्षक हाथरस बनाया गया है। जितेंद्र कुमार प्रथम को यूपी पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड में एएसपी के रूप में भेजा गया है। इन जिलों में भी हुई नई तैनातियां वहीं, चिरंजीव मुखर्जी को अपर पुलिस उपायुक्त, कमिश्नरेट प्रयागराज बनाया गया है। श्वेताभ पांडेय को अपर पुलिस अधीक्षक (नगर), एटा में तैनाती दी गई है।आलोक कुमार जायसवाल को अपर पुलिस अधीक्षक, फतेहगढ़ बनाया गया है। शैलेंद्र कुमार श्रीवास्तव को अपर पुलिस अधीक्षक (यातायात), सहारनपुर भेजा गया है। डॉ. राकेश कुमार मिश्र को अपर पुलिस अधीक्षक (नगर), गाजीपुर में तैनाती दी गई है। सरकार के इस आदेश के बाद कई जिलों में पुलिस प्रशासन में नई तैनातियां हो गई हैं।

लखनऊ, गोरखपुर, आगरा, कानपुर देहात और मुरादाबाद के मेलों में बढ़ी खरीदारों की उत्साही भागीदारी

माटीकला मेलों में बिक्री का बना रिकॉर्ड, ₹4.20 करोड़ का आंकड़ा पार लखनऊ, गोरखपुर, आगरा, कानपुर देहात और मुरादाबाद के मेलों में बढ़ी खरीदारों की उत्साही भागीदारी 70 जनपदों में आयोजित लघु माटीकला मेलों में ₹2.19 करोड़ की उल्लेखनीय बिक्री हुई दर्ज, पिछले वर्ष से ₹91 लाख अधिक विक्रय संपन्न कारीगरों को सीधे उपभोक्ता से जोड़ने का सफल रहा प्रयास योगी सरकार ने पारंपरिक माटीकला को प्रोत्साहन करने के लिए बोर्ड गठन सहित किए हैं कई अभिनव प्रयास लखनऊ  उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 में आयोजित माटीकला मेलों में प्रदेश के कारीगरों व हस्तशिल्प उत्पादों के विपणन में उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया है। इस अवधि में बोर्ड ने 10 दिवसीय माटीकला महोत्सव, 07 दिवसीय क्षेत्रीय माटीकला मेले और 03 दिवसीय लघु माटीकला मेले आयोजित किए। इन सभी मेलों में कुल 691 दुकानें लगाई गईं और ₹4,20,46,322 की बिक्री हुई। यह पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में दर्ज कुल बिक्री ₹3,29,28,410 की तुलना में ₹91,17,912 अधिक है, जो लगभग 27.7 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सबसे ज्यादा फोकस परंपरागत शिल्पों व उद्योगों में कार्यरत कारीगरों की उन्नति पर है। प्रदेश समेत देश-विदेश में उनके उत्पादों को वृहद स्तर पर खरीदार मिलें, इसके लिए विभिन्न प्रकार के प्रयास किए जा रहे हैं और माटीकला बोर्ड इसमें महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। 70 जनपदों में बड़े स्तर पर हुई खरीदारी लखनऊ के खादी भवन में 10 से 19 अक्टूबर 2025 तक आयोजित 10 दिवसीय माटीकला महोत्सव में 56 दुकानों द्वारा ₹1,22,41,700 की बिक्री हुई। गोरखपुर, आगरा, कानपुर देहात और मुरादाबाद में 13 से 19 अक्टूबर तक आयोजित 07 दिवसीय क्षेत्रीय मेलों में 126 दुकानों ने ₹78,84,410 का विक्रय किया। इसी क्रम में प्रदेश के 70 जनपदों में 17 से 19 अक्टूबर तक आयोजित 03 दिवसीय लघु माटीकला मेलों में 509 दुकानों के माध्यम से ₹2,19,20,212 की बिक्री दर्ज की गई। सहयोग व उत्पादों की गुणवत्ता बनी सकारात्मक परिणाम की कुंजी वित्तीय वर्ष 2024-25 में आयोजित मेलों में कुल 878 दुकानों द्वारा ₹3,29,28,410 की बिक्री हुई थी। यद्यपि इस वर्ष कुल दुकानों की संख्या कम रही, फिर भी विक्रय में वृद्धि यह दर्शाती है कि उत्पादों की गुणवत्ता, प्रदर्शनी की व्यवस्था और विपणन सहयोग अधिक प्रभावशाली रहा। इससे यह भी स्पष्ट हुआ है कि माटीकला उत्पादों के प्रति आमजन में जागरूकता और आकर्षण निरंतर बढ़ रहा है। माटीकला बोर्ड का लक्ष्य है कि निरंतर मेलों, उन्नत प्रदर्शनी प्रबंधन, प्रशिक्षण, डिजाइन विकास व ब्रांडिंग गतिविधियों के माध्यम से कारीगरों को दीर्घकालिक आर्थिक सशक्तिकरण प्रदान किया जाए। आने वाले सत्रों में अधिक उपभोक्ता आधारित कार्यक्रमों के आयोजन से कारीगरों की उत्पादकता, विपणन दक्षता तथा आय वृद्धि सुनिश्चित की जाएगी। योगी सरकार के प्रयासों से संरक्षित हो रही परंपरागत कला परंपरागत कारीगरों और शिल्पियों की कला को संरक्षित व संवर्धित करने, उनकी सामाजिक सुरक्षा, आर्थिक सुदृढ़ता, तकनीकी विकास और विपणन सुविधा बढ़ाने तथा नवाचार के माध्यम से रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड का गठन किया है। इस पहल के माध्यम से न केवल पारंपरिक माटीकला को नई पहचान मिली है, बल्कि हजारों परिवारों को आत्मनिर्भरता का नया आधार भी प्राप्त हुआ है। योगी सरकार ने प्रजापति समुदाय के उन सभी लोगों के लिए, जो माटीकला उद्योग से जुड़े हैं, एक महत्वपूर्ण सुविधा प्रदान की है कि गांव के तालाबों से मिट्टी निकालने की व्यवस्था निःशुल्क कर दी गई है। इससे कारीगरों को उत्पादन की मूल सामग्री सुलभ हुई है और उनकी लागत में उल्लेखनीय कमी आई है। ये कदम दर्शाते हैं कि योगी सरकार परंपरागत शिल्प को केवल संरक्षित ही नहीं कर रही, बल्कि उसे आधुनिक विपणन, प्रशिक्षण और नवाचार के माध्यम से वैश्विक मंच तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। योगी सरकार के समग्र समर्थन से लाभान्वित हो रहे कारीगर सीईओ खादी एवं ग्रामोद्योग माटीकला बोर्ड के महाप्रबंधक ने बताया कि योगी सरकार के समग्र समर्थन और बोर्ड के लक्षित प्रयासों के परिणामस्वरूप कारीगरों को सीधे उपभोक्ताओं से जुड़ने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि मेलों में आए खरीदारों ने स्थानीय शिल्प व पारंपरिक उत्पादों को उत्साहपूर्वक अपनाया, जिससे कारीगरों की आय में वृद्धि हुई है तथा माटीकला उत्पादों की ब्रांड वैल्यू मजबूत हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि आगामी वर्षों में इन मेलों के दायरे का विस्तार कर और अधिक जिलों में इस तरह के आयोजन किए जाएंगे, ताकि प्रदेश के माटीकला उत्पाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जुड़ सकें।

लखनऊ संभाग के उन्नाव, रायबरेली और लखनऊ में भी शनिवार से की जाएगी खरीद

पूर्वी उत्तर प्रदेश में पहली नवंबर से होगी धान खरीद  लखनऊ संभाग के उन्नाव, रायबरेली और लखनऊ में भी शनिवार से की जाएगी खरीद  धान (कॉमन)-2369 और (ग्रेड ए) का 2389 रुपये प्रति कुंतल एमएसपी तय पूर्वी उत्तर प्रदेश में 28 फरवरी 2026 तक चलेगी खरीद   पश्चिम उत्तर प्रदेश में पहली अक्टूबर से चल रही धान खरीद 48 घंटे के भीतर किसानों को भुगतान करा रही योगी सरकार दो महीने में 2.17 लाख से अधिक किसानों ने करा लिया पंजीकरण लखनऊ  खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत पहली नवंबर से पूर्वी उत्तर प्रदेश में धान खरीद शुरू होगी, 28 फरवरी 2026 तक चलेगी। इस अवधि में लखनऊ संभाग के उन्नाव, रायबरेली और लखनऊ में भी धान खरीद होगी। वहीं पहली अक्टूबर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और लखनऊ संभाग के हरदोई, लखीमपुर खीरी, सीतापुर जनपद में धान खरीद चल रही है। डबल इंजन सरकार ने इस वर्ष धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि भी की है। धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (कॉमन)-2369 और (ग्रेड ए) का 2389 रुपये प्रति कुंतल तय किया गया है। वहीं योगी सरकार की नीतियों पर समर्थन जताते हुए दो महीने में 2.17 लाख से अधिक किसानों ने बिक्री के लिए पंजीकरण भी करा लिया है। पूर्वी उत्तर प्रदेश व लखनऊ संभाग के इन जनपदों में पहली नवंबर से शुरू होगी खरीद पूर्वी उत्तर प्रदेश के संभागों में पहली नवम्बर से धान खरीद शुरू होगी। यह खरीद पूर्वी उत्तर प्रदेश के चित्रकूट, कानपुर, अयोध्या, गोरखपुर, देवीपाटन, बस्ती, आजमगढ़, वाराणसी, मीरजापुर व प्रयागराज संभाग में होगी। इसके साथ ही लखनऊ संभाग के लखनऊ, रायबरेली व उन्नाव में भी पहली नवंबर से खरीद होगी, जो 28 फरवरी 2026 तक चलेगी। दो महीने में 2.17 लाख से अधिक किसानों ने करा लिया पंजीकरण धान बिक्री के लिए पहली सितंबर से पंजीकरण प्रारंभ हो गया था। 31 अक्टूबर (सुबह 11 बजे) तक 2,17,625 किसानों ने पंजीकरण करा लिया। वहीं पश्चिम उत्तर प्रदेश के 17 हजार से अधिक किसानों से एक महीने के भीतर 1.06 लाख मीट्रिक टन से अधिक की धान खरीद की जा चुकी है। योगी सरकार के निर्देश पर तेज गति से चल रहे कार्य की बदौलत 3920 क्रय केंद्र भी खुल गए हैं।  fcs.up.gov.in या UP KISAN MITRA  पर पंजीकरण अनिवार्य  धान बिक्री के लिए किसानों का पंजीकृत होना अनिवार्य है। किसानों को खाद्य व रसद विभाग की वेबसाइट fcs.up.gov.in या मोबाइल ऐप UP KISAN MITRA पर पंजीकरण कराना होगा। खरीद पंजीकृत किसानों से ही होगी। खाद्य व रसद विभाग के मुताबिक किसान किसी भी सहायता या जानकारी के लिए टोल फ्री नंबर 18001800150 नंबर पर कॉल या अपने जनपद के जिला खाद्य विपणन अधिकारी, तहसील के क्षेत्रीय विपणन अधिकारी व ब्लॉक के विपणन निरीक्षक से भी संपर्क साध सकते हैं। योगी सरकार ने 48 घंटे के भीतर किसानों को भुगतान का निर्देश दिया है।    

योगी सरकार के सुशासन मॉडल में डिजिटल प्रशिक्षण बना रहा परिवर्तन का आधार

सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही को मिल रहा नया आयाम मिशन कर्मयोगी से दक्ष हो रहे समाज कल्याण विभाग के अधिकारी-कर्मचारी लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सुशासन और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने के सतत प्रयासों का असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी पहल ‘मिशन कर्मयोगी’ को आगे बढ़ाते हुए योगी सरकार ने अपने अधिकारियों और कर्मचारियों को डिजिटल प्रशिक्षण से जोड़ने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। योगी सरकार के ‘डिजिटल दक्षता एवं पारदर्शी प्रशासन’ के विजन को साकार करने में समाज कल्याण विभाग अग्रणी भूमिका निभा रहा है। विभाग के अधिकारी और कर्मचारी अब डिजिटल प्लेटफॉर्म आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल के माध्यम से अपनी कार्यकुशलता बढ़ाने में जुटे हैं। इसका सीधा लाभ जनता को पारदर्शी, त्वरित और प्रभावी सेवाओं के रूप में मिल रहा है। 3,900 कर्मचारी जुड़े, पूरे किए 21,150 कोर्स समाज कल्याण विभाग के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2025 तक कुल 3,900 अधिकारी, नियमित/संविदाकर्मी एवं शिक्षक पोर्टल पर पंजीकृत हो चुके हैं। इन कर्मचारियों ने अब तक 21,150 ऑनलाइन कोर्स पूरे किए, जिनमें लगभग 15,893 घंटे का प्रशिक्षण शामिल है। इनमें से 2,759 कर्मचारियों ने कम से कम एक कोर्स, जबकि 2,289 कर्मचारियों ने तीन या उससे अधिक कोर्स पूरे किए हैं। वहीं, 1,611 कर्मचारियों ने तीन से कम और 1,141 कर्मचारियों ने अभी प्रशिक्षण पूरा नहीं किया है। योगी सरकार का यह अभियान हर सरकारी कर्मचारी को “कुशल, पारदर्शी और जवाबदेह” बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है नई तकनीक और पारदर्शी शासन पर है विशेष जोर दे रही योगी सरकार मिशन कर्मयोगी के प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में न केवल प्रशासनिक सुधार बल्कि तकनीकी उन्नयन पर भी विशेष जोर दिया गया है। इनमें ‘योगा ब्रेक एट वर्कप्लेस’ जैसे विषय तनावमुक्त कार्यसंस्कृति को बढ़ावा देते हैं, जबकि POSH Act 2013 से कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा को सशक्त किया जा रहा है। ‘Procurement Process on GeM’, ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020’, ‘Basics of Artificial Intelligence’ और ‘Right to Information Act’ जैसे कोर्स सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता, तकनीकी दक्षता और जनता के प्रति जवाबदेही की भावना को सुदृढ़ कर रहे हैं। योगी सरकार डिजिटल शासन नीति को दे रही है नई दिशा मिशन कर्मयोगी के तहत डिजिटल प्रशिक्षण, योगी सरकार के उस दृष्टिकोण का हिस्सा है जिसमें शासन को पेपरलेस, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाया जा रहा है। समाज कल्याण विभाग के इस अभियान से प्रशासनिक प्रक्रियाओं में न केवल पारदर्शिता आई है बल्कि कर्मचारियों में कार्य के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता भी बढ़ी है। समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि मिशन कर्मयोगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की साझा सोच का परिणाम है, जिसका उद्देश्य सरकारी सेवाओं को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। समाज कल्याण विभाग इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। हमारे अधिकारी और कर्मचारी डिजिटल रूप से दक्ष बन रहे हैं, जिससे जनता को योजनाओं का लाभ तेजी और पारदर्शिता के साथ मिल सके। दक्षता से ही सेवा की गुणवत्ता बढ़ेगी और यही योगी सरकार के सुशासन का आधार है।

2047 तक 7 करोड़ से अधिक ओबीसी छात्रों को छात्रवृत्ति से जोड़ने का लक्ष्य

ओबीसी छात्रों के उत्थान में योगी सरकार अव्वल 2047 तक 7 करोड़ से अधिक ओबीसी छात्रों को छात्रवृत्ति से जोड़ने का लक्ष्य  2017 से अब तक 2.07 करोड़ से अधिक ओबीसी छात्रों को छात्रों को मिल चुकी है छात्रवृत्ति  पिछले आठ वर्षों में ओबीसी छात्रों के कल्याण के लिए उठाए कई ऐतिहासिक कदम  ग्रामीण और वंचित ओबीसी युवाओं को उच्च शिक्षा से जोड़ने में सफल हुई योगी सरकार लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के छात्रों के सशक्तीकरण में अभूतपूर्व प्रगति हासिल की है। ओबीसी समुदाय के उत्थान के बिना 'विकसित यूपी' का सपना अधूरा है और योगी सरकार इसे साकार करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही। शुक्रवार को 10,28,205 से अधिक छात्र-छात्राओं को 300 करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप डीबीटी के जरिए वितरित की गई, जिसमें ओबीसी के 4,83,000 से अधिक छात्रों को 126.69 करोड़ रुपये प्रदान किए गए। सरकार ने 2047 तक 7 करोड़ से अधिक ओबीसी छात्रों को 80,000 करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप और शुल्क प्रतिपूर्ति देने का संकल्प लिया है। 2016-17 तक केवल 46 लाख बच्चे स्कॉलरशिप का लाभ ले पाते थे, लेकिन योगी सरकार ने इसे बढ़ाकर 62 लाख तक पहुंचा दिया। यह पारदर्शी और त्वरित वितरण योगी सरकार की तकनीकी दक्षता का परिणाम है कि इस बार अनुसूचित जाति-जनजाति के 3,56,000 छात्रों को 114.92 करोड़, सामान्य वर्ग के 97,000 से अधिक छात्रों को 29.18 करोड़ और अल्पसंख्यक वर्ग के 90,758 छात्रों को 27.16 करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप डीबीटी के जरिए दी गई।  ग्रामीण और वंचित ओबीसी युवाओं को उच्च शिक्षा से जोड़ने में सफल हुई योगी सरकार पिछले आठ वर्षों में योगी सरकार ने ओबीसी कल्याण में ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। वर्ष 2024-25 में 32,22,499 ओबीसी छात्रों को स्कॉलरशिप और शुल्क प्रतिपूर्ति दी गई, जबकि 2017 से अब तक 2,07,53,457 छात्रों को 13,535.33 करोड़ रुपये का लाभ मिला। यह राशि पूर्ववर्ती सरकार के 4,197 करोड़ रुपये के व्यय से चार गुना अधिक है, इसमें उन ओबीसी छात्रों की बड़ी संख्या शामिल है जो प्रदेश के ग्रामीण इलाकों और सुदूर क्षेत्रों से आते हैं। यह आंकड़ा न केवल सरकार की नीतियों की सफलता दर्शाता है, बल्कि ग्रामीण और वंचित ओबीसी युवाओं को उच्च शिक्षा तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता को और मजबूत कर रहा है।   ओबीसी समुदाय का सशक्तीकरण 'विकसित उत्तर प्रदेश' का मूलमंत्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कई मौके पर कह चुके हैं कि शिक्षा सामाजिक समानता का आधार है। ओबीसी समुदाय का सशक्तीकरण 'विकसित उत्तर प्रदेश' का मूलमंत्र है। हमारा लक्ष्य हर वंचित छात्र को शिक्षा का अवसर देना है। सरकार ने 2047 तक 7 करोड़ से अधिक ओबीसी छात्रों को 80,000 करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप और शुल्क प्रतिपूर्ति देने का संकल्प लिया है। यह दीर्घकालिक दृष्टिकोण ग्रामीण ओबीसी युवाओं को तकनीकी, चिकित्सा और अन्य उच्च शिक्षा क्षेत्रों में आगे बढ़ाने में मदद करेगा। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने डीबीटी के जरिए पारदर्शिता सुनिश्चित की है, जिससे स्कॉलरशिप सीधे छात्रों के खातों में पहुंच रही है। यह पहल न केवल छात्रों को आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है, बल्कि ओबीसी समुदाय में आत्मविश्वास और सामाजिक गौरव भी जगा रही है। योगी सरकार के इस प्रयास से उत्तर प्रदेश सामाजिक और शैक्षिक समानता का नया मॉडल बन रहा है। पिछड़ा वर्ग कल्याण व दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने कहा कि योगी सरकार ने ओबीसी और दिव्यांगजनों के लिए खजाना खोल दिया है। हमारा लक्ष्य है कि पिछड़ों को शिक्षा से सशक्त बनाकर सामाजिक समानता सुनिश्चित करें। यह प्रयास 'विकसित यूपी' का आधार बनेगा।

त्योहारी तोहफा: यूपी सरकार ने दिया खुशखबरी भरा झटका, कर्मचारियों को मिला 3% डीए बढ़ोतरी का लाभ

लखनऊ दीपावली से पहले उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के करीब 28 लाख कर्मचारियों और पेंशनरों को बड़ी खुशखबरी दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) में 3% की बढ़ोतरी का ऐलान किया है। अब यह दर 55% से बढ़कर 58% हो गई है। कब से लागू होगा नया DA-DR? – यह बढ़ोतरी 1 जुलाई 2025 से प्रभावी मानी जाएगी। – कर्मचारियों को इसका नकद भुगतान अक्टूबर 2025 से किया जाएगा। कितना खर्च आएगा सरकार पर? सरकार के इस फैसले से मार्च 2026 तक सरकार पर कुल ₹1960 करोड़ का अतिरिक्त खर्च आएगा:- – नवंबर 2025 में ही नकद भुगतान का बोझ होगा ₹795 करोड़ – इसमें से ₹185 करोड़ ओपीएस (पुरानी पेंशन योजना) वाले कर्मचारियों के GPF में जमा होंगे – जुलाई से सितंबर 2025 तक के एरियर के तौर पर ₹550 करोड़ का खर्च – दिसंबर 2025 से हर महीने ₹245 करोड़ का अतिरिक्त व्यय कर्मचारियों में खुशी की लहर मुख्यमंत्री योगी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि यह प्रक्रिया समय से और सुचारू रूप से लागू की जाए। यह फैसला राज्य कर्मचारियों और पेंशनरों को आर्थिक राहत देगा। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री पहले ही दिवाली बोनस देने का ऐलान कर चुके हैं और यह भी कहा गया है कि बोनस का भुगतान समय पर हो ताकि लोग त्योहार खुशियों के साथ मना सकें। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा? हमारी सरकार कर्मचारियों और पेंशनरों की भलाई के लिए पूरी तरह समर्पित है। यह निर्णय लाखों परिवारों को राहत देगा और त्योहार से पहले उनकी मुस्कान लौटाएगा।