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सौर ऊर्जा पॉलिसी का असर: यूपी में बिजली उत्पादन और रोजगार दोनों में वृद्धि

पीएम सूर्य घर योजना से आगरा मंडल में रिकॉर्ड 82 हजार से अधिक लोगों ने किया आवेदन ब्रज क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा ग्रीन एनर्जी की ओर, लोगों के घर और प्रतिष्ठान हो रहे सौर ऊर्जा से रोशन सूर्य मित्र मुफ्त प्रशिक्षण पाकर सोलर सेक्टर में युवाओं को मिल रहे करियर बनाने के अवसर वेंडरों और कंपनियों के विस्तार से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़े पैमाने पर मिल रहा रोजगार आगरा  योगी सरकार की हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की नीति उत्तर प्रदेश को विद्युत उत्पादन में आत्मनिर्भर बना रही है, साथ ही बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी सृजित कर रही है। केंद्र की 'पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' को आगरा मंडल में जबरदस्त सफलता मिली है। यहां 82 हजार से अधिक लोगों ने सौर ऊर्जा से अपने घर और प्रतिष्ठान रोशन करने के लिए आवेदन किया है, जिससे ब्रज क्षेत्र ग्रीन एनर्जी की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। यूपी नेडा परियोजना अधिकारी (अतिरिक्त प्रभार) खगेंद्र सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार की प्रोत्साहन नीतियों और पीएम सूर्य घर योजना के कारण सौर ऊर्जा का उपयोग बढ़ रहा है। आगरा मंडल में अब तक 82759 लोगों ने पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत आवेदन किया है। जिसमें आगरा जनपद से 30502 आवेदन प्राप्त हुए है। उन्होंने कहा कि यह योजना न केवल उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली प्रदान कर रही है, बल्कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति देते हुए पर्यावरण और रोजगार दोनों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रही है। इस योजना से आगरा मंडल में अब तक 3200 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है। 'सूर्य मित्र' से युवाओं को मिल रहा स्थायी करियर इस योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा 'सूर्य मित्र' प्रशिक्षण कार्यक्रम है। यूपी नेडा द्वारा युवाओं को सोलर पैनल लगाने और रखरखाव का मुफ्त प्रशिक्षण दिया जाता है। इस प्रशिक्षण के माध्यम से युवाओं को सोलर सेक्टर में करियर बनाने और रोजगार पाने का अवसर मिल रहा है। हजारों वेंडरों, कंपनियों और प्रशिक्षित तकनीशियनों के माध्यम से नए रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं। सोलर इंस्टॉलेशन और मेंटेनेंस के तकनीकी सहायक पंकज यादव ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यूपी नेडा से प्रशिक्षण लेने के बाद मुझे सोलर कंपनी में तुरंत काम मिल गया। पहले मैं बेरोजगार था, लेकिन अब मैं एक स्थायी करियर बना रहा हूँ। योगी सरकार का यह कदम युवाओं को आत्मनिर्भर बनने का मौका दे रहा है। उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली और बचत पीएम सूर्य घर योजना का लाभ लेने वाले उपभोक्ता भी बेहद उत्साहित हैं। आगरा की विजय नगर निवासी और उपभोक्ता रोमा ने बताया कि बिजली बिलों से बहुत परेशानी होती थी, लेकिन पीएम सूर्य घर योजना के तहत रूफटॉप सोलर लगवाने के बाद अब हमारा घर सौर ऊर्जा से रोशन हो रहा हैं। इससे बिजली के बिल में बड़ी बचत हो रही है। यह सरकार की बहुत बड़ी राहत है।

योगी सरकार का अवैध नशे पर बड़ा प्रहार, कोडीन के दुरुपयोग पर 128 फर्मों पर एफआईआर

– मुख्यमंत्री के निर्देश पर औषधि प्रशासन की ताबड़तोड़ छापेमारी में लाखों की अवैध दवाएं जब्त, आधा दर्जन से अधिक गिरफ्तार   – सबसे अधिक वाराणसी में 38, जौनपुर में 16, कानपुर नगर में 8, गाजीपुर में 6 और लखीमपुर खीरी-लखनऊ में 4-4 एफआईआर दर्ज की गई – प्रदेश के 28 जिलों में कोडीन के संगठित दुरुपयोग पर विभिन्न फर्मों पर दर्ज की गई एफआईआर लखनऊ, योगी सरकार प्रदेश के युवाओं को नशे की आगोश में धकेलने वाले अवैध नशे के सौदागरों के खिलाफ लगातार कड़ी कार्रवाई कर रही है। सीएम योगी के निर्देश पर पूरे प्रदेश में एएनटीएफ (एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स) और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन द्वारा बड़ा एक्शन लिया गया है। इसी क्रम में एफएसडीए द्वारा प्रदेश भर में कोडीनयुक्त कफ सिरप और नॉरकोटिक्स श्रेणी की औषधियों के अवैध भंडारण, क्रय-विक्रय और वितरण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ताबड़तोड़ कार्रवाई की जा रही है। इस विशेष अभियान में अब तक प्रदेशभर में लाखों की अवैध नॉरकोटिक और कोडीनयुक्त औषधियां जब्त की गई हैं जबकि अब तक 128 एफआईआर दर्ज की गई हैं। वहीं आधा दर्जन से अधिक अवैध नशे के सौदागरों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे धकेला गया है। दो दर्जन से अधिक मेडिकल स्टोर्स पर कोडीनयुक्त सिरप एवं नॉरकोटिक औषधियों की बिक्री पर लगाई रोक आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, डॉ. रोशन जैकब ने बताया की मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार पूरे प्रदेश में अब तक  प्रतिष्ठानों पर निरीक्षण/छापेमारी की गई, लाखों की औषधियां सीज की गईं। जांच में संदिग्ध पाए गए अभिलेखों की अग्रिम विवेचना तक दो दर्जन से अधिक मेडिकल स्टोर्स पर कोडीनयुक्त सिरप एवं नॉरकोटिक औषधियों की बिक्री पर रोक लगाई गई है। प्रदेश भर में कोडीन युक्त / नॉरकोटिक्स/साईकोट्रॉपिक श्रेणी औषधियों की अवैध आवाजाही की जांच हेतु संदिग्ध मेडिकल स्टोर की सघन जांच, विशेष अभियान के रूप में जारी है। उन्होंने बताया कि अवैध रूप से नकली एवं नशे के रूप में दुरूपयोग होने वाली औषधि के भंडारण, क्रय-विक्रय अथवा आवाजाही से संबंधित सूचना विभाग द्वारा जारी व्हाट्सप्प नंबर 8756128434 पर दी जा सकती है। अवैध नॉरकोटिक औषधियों की बिक्री और भंडारण के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करते हुए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने कई जिलों में छापेमारी की है और एनडीपीएस एक्ट में सख्त कार्रवाई की गई। इन जिलों में दर्ज की गई एफआईआर आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने बताया कि अभियान के दौरान 28 जिलों में कुल 128 एफआईआर दर्ज की गई। इनमें वाराणसी में 38, जौनपुर में 16, कानपुर नगर में 8, गाजीपुर में 6, लखीमपुर खीरी 4, लखनऊ 4 और बहराइच, बिजनौर, प्रयागराज, प्रतापगढ़, सीतापुर, सोनभद्र, बलरामपुर, रायबरेली, संतकबीर नगर, हरदोई, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर, उन्नाव, बस्ती, अंबेडकरनगर, आजमगढ़, सहारनपुर, बरेली, सुल्तानपुर, चंदौली, मीरजापुर आदि जिलों में 52 एफआईआर दर्ज की गई।

यूपी में खेलों का नया दौर शुरू, सीएम योगी के आदेश पर सभी जिलों में अमल

 गोरखपुर  उत्तर प्रदेश में कभी सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित रहने वाली खेल सुविधाएं अब गांवों और ब्लॉकों तक पहुंचाने की योजना पर सरकार ने तेजी से काम शुरू कर दिया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कर दिया है कि खेलों को लेकर उनकी सरकार किसी भी स्तर पर समझौता करने को तैयार नहीं है. उन्होंने घोषणा की प्रदेश के सभी 75 जिलों में एक साथ स्टेडियम और हर ब्लॉक में मिनी स्टेडियम का निर्माण तेजी से शुरू किया जा चुका है. यह घोषणा मुख्यमंत्री ने वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज में 69वीं राष्ट्रीय स्कूली खेल प्रतियोगिता 2025 (ग्रीको-रोमन) कुश्ती के प्रतिभागियों और विजेताओं को सम्मानित करते हुए की. कार्यक्रम में अंडर-17 और अंडर-19 श्रेणी के पदक विजेताओं को मंच पर सम्मानित किया गया, लेकिन असली चर्चा मुख्यमंत्री की उस दूरदर्शी खेल नीति की रही, जिसकी वजह से यूपी देश के खेल नक्शे पर एक तेज़ी से उभरता हुआ राज्य बनता दिख रहा है. हमारी तैयारी उससे दो कदम आगे होगी अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि भारत आज दुनिया में खेलों की शक्ति बनकर उभर रहा है. उन्होंने कहा, यह गर्व की बात है कि भारतीय खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की प्रतिष्ठा लगातार बढ़ा रहे हैं. खेल व्यक्ति का सर्वांगीण विकास करते हैं और इसी सोच के साथ हम उत्तर प्रदेश में खेलों का मजबूत ढांचा तैयार कर रहे हैं. 75 जिलों में एक-एक स्टेडियम, हर ब्लॉक में मिनी स्टेडियम मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में सबसे बड़ा ऐलान करते हुए कहा राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि उत्तर प्रदेश के हर जिले में एक अत्याधुनिक स्टेडियम बनेगा और हर ब्लॉक में एक मिनी स्टेडियम का निर्माण किया जाएगा. यह निर्णय सिर्फ घोषणा नहीं है, बल्कि कई जिलों में काम तेजी से शुरू भी हो चुका है. 18 जिलों के सरकारी कॉलेजों में मिनी स्टेडियम के निर्माण के लिए लगभग 5-5 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी जा चुकी है. गोरखपुर और महाराजगंज के सरकारी कॉलेजों में भी खेल सुविधाएं विकसित की जा रही हैं. अधिकारियों का कहना है कि योगी सरकार की मंशा साफ है अब खेल अब शहरों की सीमा में नहीं रहेंगे, खेल की संस्कृति गांव-गांव पहुंचेगी. शिक्षण संस्थानों को पहली बार मिला इतना बड़ा खेल बजट मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों को खेलों से जोड़ने के लिए आवश्यक है कि खेलों को शिक्षा जितना महत्व दिया जाए. इसी उद्देश्य से सरकार ने एक नई पहल शुरू की है कि प्रत्येक कॉलेज को 25,000 रुपये, बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के स्कूलों को 5,000 रुपये, जूनियर हाई स्कूलों को 10,000 रुपये खेल सामग्री खरीदने, कोचिंग गतिविधियां बढ़ाने और स्थानीय खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए दी जा रही है. यह पहली बार है जब राज्य में इतने व्यापक स्तर पर संस्थागत खेल बजट दिया जा रहा है. मेरठ में बनेगी अंतरराष्ट्रीय स्तर की स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी मुख्यमंत्री ने मेरठ में निर्माणाधीन स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी का ज़िक्र करते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय उत्तर भारत में खिलाड़ियों के लिए एक बड़ा केंद्र बनेगा. उन्होंने बताया कि इसका नाम हॉकी के महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के नाम पर रखा जा रहा है. यह विश्वविद्यालय खेल प्रशिक्षण, खेल विज्ञान, फिटनेस और कोचिंग के क्षेत्र में नई दिशा देगा. 2030 राष्ट्रमंडल खेलों पर फोकस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों को 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों का लक्ष्य लेकर तैयारी करने की प्रेरणा दी. उन्होंने कहा, कि अंडर-17 और अंडर-19 के यह युवा खिलाड़ी 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की रीढ़ बन सकते हैं. अहमदाबाद में होने वाले इस आयोजन में आपको तिरंगा लहराना है. यह लक्ष्य अभी से तय कर लें. मुख्यमंत्री ने उपविजेताओं और पदक से चूकने वाले खिलाड़ियों को भी संबोधित करते हुए कहा कि हार किसी भी खिलाड़ी की यात्रा का अंत नहीं है. उन्होंने कहा कि पहली प्रतिस्पर्धा हमेशा खुद से होती है. अपनी कमजोरियों को पहचानें, उनसे सीखें और आगे बढ़ते रहें. मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर और विकसित भारत’ के विज़न का जिक्र करते हुए कहा कि इसका मूल तत्व युवा शक्ति है. उन्होंने कहा कि स्वस्थ युवा ही सशक्त भारत की नींव बनेंगे. इसकी शुरुआत खेलों से होती है. इसलिए संस्थानों में खेलों को शिक्षा के बराबर स्थान दिया जाना चाहिए. देश की शीर्ष 3 राज्यों में शामिल होने का लक्ष्य अधिकारियों का मानना है कि जिस फोकस के साथ यूपी में खेलों की बुनियाद मजबूत की जा रही है, आने वाले वर्षों में राज्य खेलों के क्षेत्र में पंजाब, हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे पारंपरिक मजबूत राज्यों को कड़ी टक्कर दे सकता है. सरकारी स्तर पर जो संरचना तैयार हो रही है, वह यही संकेत देती है कि यूपी अब सिर्फ आबादी का सबसे बड़ा राज्य नहीं रहेगा, बल्कि खेलों में भी अपनी पहचान मजबूत करेगा.

माता पिता नहीं, बीमारी या गरीबी का बोझ, अब अकेले नहीं लड़ेंगे बच्चे, योगी सरकार देगी 1200 रुपये तक हर माह

बरेली, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर मुख्यमंत्री बाल श्रमिक विद्या योजना के तहत कामकाजी बच्चों को आर्थिक सहयोग और शिक्षा से जोड़ने के लिए श्रम विभाग ने स्पष्ट श्रेणीवार प्राथमिकता तय कर दी है। ऐसे बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है, जो परिवार की मजबूरी में ढाबों, होटलों, फैक्टरियों या अन्य प्रतिष्ठानों पर काम करते हैं। योजना के पहले चरण में प्रदेश के 20 जिलों जिसमें बरेली भी शामिल है-को चुना गया है। प्रत्येक जिले में 100 बच्चों को लाभ देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सहायक श्रमायुक्त बाल गोविंद ने बताया कि बरेली में अब तक इस योजना से 500 बच्चों को लाभान्वित किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि योजना का मुख्य उद्देश्य है कि किसी भी बच्चे को मजबूरी में मजदूरी न करनी पड़े और उसे शिक्षा व सुरक्षा दोनों मिल सके। सबसे पहले मदद उन बच्चों को-जिनके माता-पिता नहीं, आय का एकमात्र सहारा वही योजना में बच्चों के चयन के लिए शासन ने नौ प्राथमिकता श्रेणियां तय की हैं। सबसे पहले प्राथमिकता उन बच्चों को दी जाएगी। जिनके माता-पिता दोनों नहीं रहे। परिवार की पूरी आय उन्हीं के काम पर निर्भर है। श्रम विभाग के सर्वे में उन्हें कामकाजी बच्चा चिन्हित किया गया है। ऐसे बच्चे जिनके पिता की मृत्यु, माता-पिता स्थायी दिव्यांग, माता-पिता गंभीर रोग से ग्रसित, परिवार की मुखिया विधवा/तलाकशुदा महिला, माता की मृत्यु या गंभीर बीमारी और भूमिहीन परिवारों के बच्चे शामिल किए गए हैं। सभी श्रेणियों में ऐसे बच्चे को चिन्हित किया गया है तो सर्वेक्षण में कामकाजी निकला हो। 20 जिलों में पहले चरण का संचालन, कुल 2000 बच्चों को लाभ का लक्ष्य उत्तर प्रदेश में पहले चरण में आगरा, प्रयागराज, कानपुर नगर, बलिया, लखनऊ, बाराबंकी, बरेली, बदायूं, गाजियाबाद, गोरखपुर, गोंडा, श्रावस्ती, बलरामपुर, बहराइच, मुरादाबाद, सोनभद्र, मिर्जापुर, जौनपुर, वाराणसी और गाजीपुर। इन 20 जिलों में प्रति जिले 100 लाभार्थी, यानी कुल 2000 बच्चों को सहायता दी जानी है। इसमें बच्चों को हर महीने आर्थिक सहायता-बालक 1000 रुपये, बालिका 1200 रुपये दिये जा रहे हैं। लाभार्थी बच्चा लगातार पढ़ता रहता है तो कक्षा 8, 9 और 10 उत्तीर्ण करने पर हर कक्षा पास होने पर 6000 रुपये प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है।

योगी सरकार के कृषि मॉडल से अन्नदाता खुशहाल, बिचौलिए खत्म होने से किसानों को प्रत्यक्ष लाभ

लखनऊ, उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने किसानों की आय में वृद्धि के लिए बीज से बाजार तक एक मजबूत और एकीकृत मूल्य श्रृंखला का निर्माण किया है। अन्नदाता को फसल उगाने से लेकर बाजार तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने पिछले साढ़े 8 वर्ष में बड़े फैसले लिए हैं। उत्तर प्रदेश में आधुनिक और किसान-केंद्रित मॉडल बनाया गया है। किसानों की आय में वृद्धि के लिए मूल्य श्रृंखला का निर्माण डिजिटल युग में किसान पीछे न छूट जाएं इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विशेष ध्यान दिया है। सरकार के प्रयासों से कृषि विकास दर वर्ष 2016-17 में 8.6% से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 17.7% हो गयी है। राज्य प्रति वर्ष 400 लाख टन फल एवं सब्जियों का उत्पादन करते हुए देश में प्रथम स्थान पर है। वर्तमान सरकार केवल अनाज उगाने तक नहीं, बल्कि किसानों को लगातार आय के नए साधन विकसित करने की पूरी व्यवस्था बना रही है।  मोबाइल ऐप के द्वारा किसानों को निशुल्क मृदा स्वास्थ्य कार्ड मिल रहा है। किसानों के खेत की मिट्टी का जो स्वास्थ्य कार्ड बनता है उसमें उनके मिट्टी के बारे में पूरी जानकारी रहती है। एमएसपी बढ़ने से किसानों की आय सुनिश्चित किसानों के लिए सबसे बड़ा बदलाव योगी सरकार द्वार एमएसपी की समय समय पर समीक्षा करना है। इस बार साधारण धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,369 रुपये प्रति क्विंटल तथा ग्रेड ए धान का मूल्य 2,389 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 69 रुपये अधिक है। अगेती प्रजाति के गन्ने का मूल्य  400 रुपये प्रति कुंतल तथा सामान्य प्रजाति के गन्ने का मूल्य 390 रुपये प्रति कुंतल किया गया है। इससे किसानों की आय में वृद्धि हो रही है। कृषि योजनाओं से किसानों को लाभ उत्तर प्रदेश में किसानों के लिए यूपी एग्रीस प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इसका लक्ष्य खेत की पैदावार बढ़ाना, किसानों को आधुनिक तरीकों से जोड़ना और गांवों में कृषि-आधारित रोजगार के नए रास्ते खोलना है। मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के तहत किसानों को सस्ती ब्याज दर पर कर्ज उपलब्ध कराया जा रहा है। किसानों के हित में किसान क्रेडिट कार्ड का दायरा और बड़ा कर दिया गया है। इस साल 25 लाख नए किसानों को KCC देने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके साथ ही 50% सब्सिडी योजना चलाई जा रही है। इससे ट्रैक्टर, कटाई मशीन, ड्रोन और फसल अवशेष प्रबंधन उपकरण आधी कीमत में उपलब्ध कराए जा रहे हैं। किसानों को बाजार एवं मौसम की प्रतिदिन जानकारी उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किसानों को बाजार भाव एवं मौसम की जानकारी प्रतिदिन निशुल्क उपलब्ध करायी जा रही है। किसानों का रजिस्ट्रेशन करते हुए 1.45 करोड़ से ज्यादा फार्मर कार्ड आईडी निर्गत की गयी है। महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से सीडलिंग का उत्पादन किया जा रहा है, जिससे लगभग 60 हजार महिलाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं। लखनऊ में 251 करोड़ की लागत से भारतरत्न पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह जी के नाम पर एक सीड पार्क की स्थापना की जा रही है। उत्तर प्रदेश में खरीद केंद्रों की संख्या में वृद्धि   योगी सरकार के प्रयासों से प्रदेश में 4000 से अधिक सक्रिय खरीद केंद्रों की स्थापना अपने आप में एक  क्रांतिकारी कदम है। इनमें से 35 से 40 फीसद केंद्र उन ब्लॉकों में खोले गए, जहां दशकों से किसानों को कोई स्थाई खरीद सुविधा नहीं थी। अब गांव के पास ही खरीद व्यवस्था होने से परिवहन खर्च कम हुआ, फसल की त्वरित बिक्री हुई और किसानों को बाजार भाव में उतार-चढ़ाव का डर नहीं रहा।

योगी सरकार ने प्रदेश में बिछाया सड़कों का बड़ा नेटवर्क

सड़कों के गोल्डन नेटवर्क से उत्तर प्रदेश बनेगा देश की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था  योगी सरकार ने प्रदेश में बिछाया सड़कों का बड़ा नेटवर्क   उत्तर प्रदेश : गांव से शहरों तक लॉजिस्टिक व्यवस्था सुधरने से आर्थिक विकास को गति लखनऊ उत्तर प्रदेश में आज एक्सप्रेस वे, राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्यमार्ग और ग्रामीण मार्ग का एक विशाल नेटवर्क स्थापित हो चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की आधारभूत संरचना और सड़क मार्ग के विकास पर विशेष ध्यान दिया है। मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश को 2029 तक वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता जता चुके हैं। वो इस बात को भलीभांति जानते हैं कि उद्योगों के विकास और निवेश के लिए प्रदेश में सड़कों का गोल्डन नेटवर्क तैयार करना अत्यंत आवश्यक है।  उत्तर प्रदेश में देश का सबसे बड़ा एक्सप्रेस वे नेटवर्क  डबल इंजन सरकार सरकार की दूरगामी सोच का ही परिणाम है कि उत्तर प्रदेश आज देश में सबसे बड़ा एक्सप्रेस वे नेटवर्क वाला राज्य बन गया है। राज्य में 2017 से पहले मात्र 3 एक्सप्रेस वे थे आज 22 एक्सप्रेस वाले राज्य के रूप में गणना हो रही है। इससे यातायात परिवहन में लगभग 3 गुना वृद्धि हुई है और तेजी से आर्थिक विकास हो रहा है। एक्सप्रेस वे की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे की संख्या 1949-50 में 0 से बढ़कर 2016-17 में 3 और 2025-26 में 22 हो गई है। इसमें वर्तमान में निर्माणाधीन और प्रस्तावित एक्सप्रेसवे शामिल हैं। सड़क अवसंरचना पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। गंगा एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, गोरखपुर लिंक आदि तक आसान पहुंच के लिए एक उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर का विकास भी हो रहा है। सभी जिला मुख्यालयों को जोड़ने वाले एक सड़क नेटवर्क ग्रिड का निर्माण किया जा रहा है।    उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग से आर्थिक प्रगति एक्सप्रेस वे के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग प्रदेश की प्रगति में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार उपलब्धियों और विकास की राह पर तेजी के साथ अग्रसर है।  2004-05 और 2023-24 (अंतिम उपलब्ध आंकड़े) के बीच, उत्तर प्रदेश का राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क दोगुने से भी ज़्यादा बढ़कर 5,599 किलोमीटर से 12,292 किलोमीटर हो गया। भारत के कुल राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 2016-17 में 7.48% से बढ़कर 2023-24 में 41% हो गया।   प्रदेश में यातायात व्यवस्था में अभूतपूर्व सुधार सड़कों का विस्तार राज्य के भीतर कनेक्टिविटी में सुधार और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए किए गए ठोस प्रयासों को दर्शाता है। इसकी वजह से राज्यों और ग्रामीण क्षेत्रों में यातायात सुगम हुआ है। इसने व्यापार, शिक्षा व चिकित्सा सेवाओं की पहुंच को आसान बनाया है और प्रदेश के विभिन्न इलाकों में आर्थिक विकास को भी गति मिली है। राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई में इस उल्लेखनीय वृद्धि ने न केवल अंतर-राज्यीय कनेक्टिविटी में सुधार किया है, बल्कि माल ढुलाई को भी सुगम बनाया है।  PMGSY सड़क नेटवर्क का तीन गुना विस्तार उत्तर प्रदेश ने पिछले आठ सालों में ग्रामीण विकास को उल्लेखनीय रूप से आगे बढ़ाया और राज्य भर में अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी को बेहतर किया। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत कुल सडक लम्बाई वर्ष 2013-14 में 51549.23 कि. मी. से बढ़कर वर्ष 2016-17 में मात्र 56846.93 कि.मी. हो गई थी। वहीं वर्ष 2017 के बाद तेजी से सड़कों का विस्तार हुआ है। सीएम योगी की नीतियों से बेहतर क्रियान्वयन और एकीकरण के साथ, कुल सडक लम्बाई बढ़कर वर्ष 2024-25 तक 77425.14 कि.मी. हो गयी है, जिससे अंतिम छोर तक ग्रामीण कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

विकसित उत्तर प्रदेश-2047: पर्यावरण समावेशी नीतियों को धरातल पर उतारने के लिए ध्यान केंद्रित कर रही योगी सरकार

सोमवार को सृजन शक्ति के अंतर्गत 'बैलेंस्ड डेवलपमेंट एंड एनवायरमेंटल स्टीवर्डशिप' थीम पर हुआ सेक्टोरल वर्कशॉप भविष्य की जरूरतों के अनुरूप सतत पर्यावरण प्रबंधन का रोडमैप हो रहा क्रियान्वित लखनऊ, उत्तर प्रदेश को भविष्योन्मुख विकास के नए प्रतिमानों के अनुरूप परिवर्तित कर रही योगी सरकार पर्यावरण समावेशी नीतियों को धरातल पर उतारने के लिए ध्यान केंद्रित कर रही है। इसी क्रम में, विकसित उत्तर प्रदेश-2047 के अंतर्गत सोमवार को योजना भवन सभागार में सृजन शक्तिः बैलेंस्ड डेवलपमेंट एंड एनवायरमेंटल स्टीवर्डशिप थीम पर सेक्टोरल वर्कशॉप का आयोजन हुआ। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तथा उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (यूपीनेडा) के तत्वावधान में एक दिवसीय वर्कशॉप का शुभारंभ वन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण कुमार सक्सेना द्वारा किया गया। यह वर्कशॉप हरित ऊर्जा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की भविष्योन्मुख कार्यप्रणाली का चित्रण प्रस्तुत करने का माध्यम बना। वर्कशॉप में जोर दिया गया कि विकास एवं पर्यावरणीय संरक्षण को सम्मिलित करते हुए संतुलित एवं समग्र विकास सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। साथ ही, हरित विकास को नीति-निर्माण एवं कार्यान्वयन के प्रत्येक स्तर पर पर्याप्त महत्व प्रदान किया जाने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। इस कार्यशाला में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, तकनीकी विशेषज्ञों, शैक्षणिक संस्थानों तथा प्रमुख स्टेकहोल्डर्स ने सतत एवं जलवायु समग्र विकास हेतु दीर्घकालिक रणनीतियों पर व्यापक विचार-विमर्श किया और रोडमैप को लेकर सुझाव प्रस्तुत किए। यूपी में तेजी से हो रहा स्किल डेवलपमेंट वन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने कहा कि यूपी हर लिहाज से अग्रणी राज्य है, चाहे बात जनसंख्या की हो या फिर विकास की, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश वर्ष 2047 तक विकास के नए प्रतिमान स्थापित करेगा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में स्किल डेवलपमेंट तेजी से बढ़ रहा है। राज्य में सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में आईटीआई, पॉलिटेक्निक, कौशल विकास केंद्र तथा प्राइवेट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट खुल रहे हैं। यह रोजगार और विकास को नई दिशा दे रहे हैं। उन्होंने जोर दिया कि आम नागरिकों को प्रदूषण नियंत्रण एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक बनाने के लिए जन-जागरूकता कार्यक्रम कराया जाए। उन्होंने समुदाय की भागीदारी तथा विभागों के मध्य सुदृढ़ समन्वय को सुनिश्चित करने पर बल दिया, ताकि सभी विकास परियोजनाएं पर्यावरणीय दृष्टि से उत्तरदायी एवं सामाजिक रूप से समावेशी बन सकें। सुदृढ़ संस्थागत तंत्र विकसित करने की आवश्यकता अनिल कुमार, प्रमुख सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन ने नीति सुधारों में तीव्रता लाने एवं सुदृढ़ संस्थागत तंत्र विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि उत्तर प्रदेश जलवायु समावेशी अग्रणी राज्य के रूप में उभर सके। आलोक कुमार, प्रमुख सचिव योजना ने दीर्घकालिक विकास योजनाओं में जलवायु सम्बंधित विचारों को शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया, जिससे विकास सुनिश्चित किया जा सके। बी. प्रभाकर, पीसीसीएफ (मानिटरिंग) ने वनों के संरक्षण, पारिस्थितिकी तंत्र पुनःस्थापन तथा जिलास्तरीय जलवायु अनुकूलन उपायों के महत्व को रेखांकित किया। इंदरजीत सिंह, निदेशक, यूपीनेडा ने राज्य में नवाचार आधारित मॉडलों एवं सार्वजनिक-निजी सहभागिता के माध्यम से नवीकरणीय ऊर्जा को व्यापक रूप से बढ़ाने की क्षमता पर प्रकाश डाला। कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने पर जोर बी. चन्द्रकला, सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन ने नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने एवं कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने, परिपत्र अर्थव्यवस्था एवं संसाधन-कुशलता को बढ़ावा, पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्स्थापन एवं जैव विविधता संरक्षण सुदृढ़ करने, अवसंरचना को जलवायु समग्र बनाने एवं आपदा-जोखिम न्यूनीकरण मजबूत करने, हरित बांड, मिश्रित वित्त एवं अंतरराष्ट्रीय जलवायु निधियों के माध्यम से जलवायु वित्त जुटाने की आवश्यकता पर जोर दिया। मनीष मित्तल, सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विकास के प्रत्येक क्षेत्र में पर्यावरणीय स्थिरता के एकीकरण की बढ़ती आवश्यकता पर बल दिया। कार्यशाला में नीति आयोग की परामर्शदाता डॉ. स्वाति सैनी, नाबार्ड के उप महाप्रबंधक सिद्धार्थ शंकर, आईआईटी कानपुर के कोटक स्कूल ऑफ सस्टेनिबिलिटी के डीन सच्चिदानंद त्रिपाठी, जीआईजेड के निदेशक हैंस जर्गेन समेत विभिन्न पैनलिस्ट्स ने जैव विविधता संरक्षण, ऊर्जा नियोजन तथा जलवायु समावेशी अवसंरचना विकास के लिए साक्ष्य-आधारित, स्थानीय रूप से उपलब्ध प्रौद्योगिकियों और कार्य करने को लेकर विचार प्रस्तुत किए।

योगी सरकार की सौर क्रांति, गांव-गांव पहुंची रोशनी, बदल गई ऊर्जा की तस्वीर

ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता उत्तर प्रदेश, योगी सरकार का रिकॉर्ड प्रदर्शन सौर क्रांति ऊर्जा के साथ-साथ रोजगार का उजाला लेकर भी आयी लखनऊ,  कभी उत्तर प्रदेश के गांवों में शाम ढलते ही अंधेरा तेजी से फैल जाता था। घरों में टिमटिमाती रोशनी, बढ़ते बिजली बिल और अनिश्चित सप्लाई लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा थे। लेकिन योगी सरकार ने राज्य की ऊर्जा कहानी को बदलने का दृढ़ निश्चय किया। लक्ष्य सिर्फ बिजली देना नहीं था बल्कि प्रदेश के हर घर तक एक नई रोशनी, नई उम्मीद और नई समृद्धि पहुंचाना था। यही सोच आगे चलकर एक ऐसी क्रांति बनी, जिसने उत्तर प्रदेश को सौर ऊर्जा उत्पादन में राष्ट्रीय पटल पर तीसरे स्थान पर ला खड़ा किया। आज गांवों की छतों पर चमकते सोलर पैनल न सिर्फ बिजली पैदा कर रहे हैं, बल्कि नए भारत की परिकल्पना को साकार भी कर रहे हैं। जब योजना शुरू हुई तो अंदाजा नहीं था कि जनता का इतना जबरदस्त समर्थन मिलेगा। लेकिन रिकॉर्ड बताते हैं कि उत्तर प्रदेश में कुल 13,46,040 आवेदन प्राप्त हुए। यह स्वयं दिखाता है कि लोग बदलाव के लिए कितने तत्पर थे। मात्र 18 महीनों में 2,81,769 सोलर रूफटॉप संयंत्रों का इंस्टॉलेशन और पिछले 4.5 महीनों में रिकॉर्ड 1,30,000 संयंत्रों की स्थापना ने उत्तर प्रदेश को महाराष्ट्र और गुजरात के बाद देश का तीसरा सबसे बड़ा सौर ऊर्जा उत्पादक राज्य बना दिया। प्रदेश में 976.21 मेगावॉट रूफटॉप सोलर कैपेसिटी स्थापित हो चुकी है। यह उपलब्धि न सिर्फ तकनीकी है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक रूप से भी परिवर्तनकारी है। सौर ऊर्जा योजना अब तक 2,85,025 उपभोक्ताओं के लिए वरदान साबित हुई है। जहां पहले प्रति घर 1500 रुपये तक का बिजली बिल आता था, वहीं अब सोलर रूफटॉप की वजह से हर महीने काफी बचत हो रही है। ऐसे में इससे एक साधारण परिवार के लिए आर्थिक स्थिरता और भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में यह बचत खेती-किसानी में सहारा बन रही है, जबकि शहरी इलाकों में बिजली पर निर्भर छोटे उद्यमों को नया जीवन मिल गया है। सौर ऊर्जा क्रांति ने सिर्फ रोशनी नहीं फैलाई बल्कि इसने रोजगार के विशाल द्वार भी खोले। अकेले उत्तर प्रदेश में 54,000 से अधिक युवाओं को सीधा रोजगार मिला है। देशभर में सोलर मॉड्यूल निर्माण, इन्वर्टर, वायरिंग, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में लाखों नौकरियां सृजित हुईं। साफ है कि यह योजना ऊर्जा के साथ-साथ रोजगार का भी उजाला लेकर आई है। मुफ्त बिजली, घरेलू बचत और रोजगार, इन तीन स्तंभों पर आधारित यह योजना अगले 25 वर्षों में प्रदेश की GDP में हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त योगदान देगी। ऊर्जा लागत में कमी ने छोटे व्यापारों और स्टार्टअप्स को प्रतिस्पर्धा में और मजबूत बना दिया है। रोजाना 40 लाख यूनिट से अधिक बिजली का उत्पादन हो रहा है। यह सालाना करोड़ों यूनिट ऊर्जा उत्पादन के बराबर है और कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी लाता है। जितनी कमी कई करोड़ पेड़ों के बराबर पर्यावरणीय लाभ देती है। वाराणासी के रहने वाले श्वसन रोग विशेषज्ञ और पीएम सूर्य घर के तहत सोलर संयंत्र का उपयोग कर रहें डॉ एस के श्रीवास्तव का कहना है कि बिजली और पैसों की बचत के साथ सोलर लगाने पर सरकार द्वारा मिल रही सब्सिडी सोने पर सुहागा है। राज्य सरकार की ये योजना ऐसे ही चलती रही तो आने वाले समय में पर्यावरण सुरक्षा के साथ ही श्वास के रोगियों की संख्या में भी कमी आएगी। वहीं दनियालपुर के रहने वाले इम्तियाज़ अहमद ने बताया कि योगी सरकार इस पर सब्सिडी नहीं देती तो सोलर संयंत्र लगवा पाना मुश्किल था।   सौर पार्क बनाने के लिए जहां 4000 एकड़ भूमि की आवश्यकता थी, उसे संरक्षित रख कर बड़ा कदम उठाया गया। यह भूमि कृषि, जल संरक्षण, उद्योग और अन्य सार्वजनिक हितों के लिए सुरक्षित रहेगी। जाहिर है कि ये  विकास और पर्यावरण का संतुलित मॉडल है।

योगी सरकार में ओडीओपी और नीतिगत सुधार बन रहे आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम

ओडीओपी से बदला महिलाओं का आर्थिक परिदृश्य, लाखों हस्तशिल्पियों को मिला वैश्विक मंच स्वयं सहायता समूह व मुद्रा ऋण से मजबूत हुई ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति परंपरागत कलाओं को पुनर्जीवित कर महिलाओं ने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर बढ़ाया उत्तर प्रदेश का मान मिशन शक्ति से लेकर ई–कॉमर्स लिंकेज तक, नीतिगत सुधारों से महिलाओं की सशक्त भागीदारी हुई सुनिश्चित लखनऊ, उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के लिए प्रतिबद्ध योगी सरकार की सर्व समावेशी नीतियां अब राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी अपना व्यापक प्रभाव दिखा रही हैं। इसी का सकारात्मक परिणाम अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला (आईआईटीएफ) में भी देखने को मिल रहा है। इस वृहद आयोजन में इस वर्ष उत्तर प्रदेश की महिलाओं की असाधारण भागीदारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि योगी सरकार की योजनाएँ महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण में निर्णायक भूमिका निभा रही हैं। मिशन शक्ति, मुद्रा ऋण, कन्या सुमंगला, महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के विस्तार और ओडीओपी जैसी पहल ने महिलाओं को न केवल स्वरोजगार से जोड़ा है बल्कि उन्हें वैश्विक मंच तक पहुँचाने का मार्ग भी प्रशस्त किया है। यही कारण है कि आईआईटीएफ के ओडीओपी पवेलियन में 60% भागीदारी महिलाओं की रही है, जहां उनकी पारंपरिक कलाओं, हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों ने देश–विदेश के खरीदारों का ध्यान आकर्षित किया है। ओडीओपी और सरकारी नीतियों ने लुप्त होती कलाओं को पुनर्जीवित कर महिलाओं की आय, सम्मान और पहचान तीनों में वृद्धि की है। योगी सरकार की नीतियां बदल रहीं महिलाओं की तकदीर महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता दिलाने के लिए योगी सरकार ने मिशन शक्ति को बड़े स्तर पर लागू किया है। इसके तहत 15.35 लाख महिलाओं को विभिन्न योजनाओं से जोड़कर स्वरोजगार उपलब्ध कराया गया है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2022-23 में 1.14 करोड़ से अधिक खाते स्वीकृत हुए, जिनमें 80% से अधिक लाभार्थी महिलाएँ थीं। वहीं, कन्या सुमंगला योजना के माध्यम से 15 लाख से अधिक बालिकाओं को शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए आर्थिक सहायता प्रदान कर उन्हें विकास की मुख्यधारा में जोड़ा गया। इन नीतियों से महिलाओं की श्रम भागीदारी दर में भी तेजी से सुधार हुआ  है, जो 2017 के 10.6% से बढ़कर 2023 में 17.5% से अधिक हो चुकी है। सरकार की योजनाओं ने महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता व उद्यमिता को सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक आधार दोनों प्रदान किए हैं। ओडीओपी से महिलाएं बनीं बड़े स्तर की उद्यमी, आईआईटीएफ में दिखा प्रभाव उत्तर प्रदेश की ओडीओपी योजना महिलाओं के लिए आर्थिक परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यम बनकर उभरी है। ओडीओपी के जरिए लाखों महिला कारीगरों, बुनकरों और उद्यमियों को लाभ मिला है। इनमें चिकनकारी, जरी-जरदोजी, पीतल उद्योग, बनारसी सिल्क, टेराकोटा, लकड़ी के खिलौने और अनेक पारंपरिक शिल्प शामिल हैं। 60,000 से अधिक महिला कारीगरों को फ्री प्रशिक्षण और आधुनिक टूलकिट प्रदान किए जाने से उनकी उत्पादकता और गुणवत्ता में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। ई-कॉमर्स के माध्यम से हजारों महिला एमएसएमई उद्यमियों को अमेजॉन, फ्लिपकार्ट और अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्मों से जोड़कर वैश्विक बाजारों तक पहुँचाया गया, जिससे निर्यात में वृद्धि हुई और आय में स्थायी सुधार दर्ज हुआ। आईआईटीएफ के ओडीओपी पवेलियन में 60% महिलाएं शामिल हुईं, जिन्होंने अपनी कला से उत्तर प्रदेश को देश–विदेश में पहचान दिलाई। यह न सिर्फ राज्य की परंपरागत कला के पुनरुत्थान का सबूत है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक उत्थान का भी। महिला सशक्तिकरण के लिए सरकार के सतत प्रयास बने बदलाव की आधारशिला महिलाओं की आर्थिक मजबूती सुनिश्चित करने के लिए योगी सरकार ने स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लाखों महिलाओं को स्वावलंबन की दिशा में अग्रसर किया है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 4.5 लाख से अधिक महिला स्वयं सहायता समूहों को वित्तीय वर्ष 2022-23 में ₹1,000 करोड़ से अधिक का ऋण उपलब्ध कराया गया। योगी सरकार के सकारात्मक प्रयासों का संपूर्ण प्रभाव आईआईटीएफ में साफ नजर आया, जहां महिला उद्यमियों ने न केवल बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था, संस्कृति और हस्तशिल्प को वैश्विक पहचान दिलाई। झांसी की वंदना व शिवानी शर्मा का उदाहरण अनुकरणीय है। इन्होंने ओडीओपी केटेगरी के अंतर्गत न केवल प्रशिक्षण व वित्तीय सहायता प्राप्त की, बल्कि घर आधारित काम को संगठित उद्यम में बदला। इसका परिणाम है कि आईआईटीएफ में उनके पारंपरिक खिलौना उत्पादों को न केवल बड़े ऑर्डर मिल रहे हैं बल्कि आर्थिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। यह इस बात का भी उदाहरण है कि कैसे परंपरागत कलाओं को नया जीवन और महिलाओं को नई उड़ान देने में योगी सरकार की नीतियां निर्णायक साबित हुई हैं।

सीएम योगी की नीतियों से अनुसूचित जनजातीय गांवों में संतृप्ति आधारित विकास को मिला बल

आवास, भूमि अधिकार, रोजगार और शिक्षा बनीं व्यापक कल्याण का माध्यम ऊदा देवी सहित महिला वीरांगनाओं के नाम पर तीन पीएसी बटालियन का गठन बिरसा मुंडा, सुहेलदेव जैसे उपेक्षित नायकों को पहचान दिलाकर सांस्कृतिक पुनर्जागरण को दिशा दे रहीं योगी सरकार की नीतियां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीतियाँ समाज के अंतिम पायदान पर स्थित वंचितों को मुख्यधारा में लाने का बन रहीं मजबूत आधार लखनऊ, उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार सामाजिक न्याय, सांस्कृतिक सम्मान और अवसरों की समानता को शासन का आधार बनाते हुए अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग को मुख्यधारा में प्रतिष्ठित करने की दिशा में निर्णायक कदम उठा रही है। इसी का परिणाम है कि जनजातीय गांवों में संतृप्ति आधारित विकास, महिलाओं की सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण, युवाओं की शिक्षा और रोजगार के अवसर सृजित करने के साथ ही योगी सरकार उपेक्षित नायकों, धरती आबा बिरसा मुंडा, महाराजा सुहेलदेव और वीरांगना ऊदा देवी को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की पहल पर कार्य कर रही है। इससे कमजोर वर्गों में आत्मविश्वास और सम्मान की नई भावना पैदा हुई है। मुख्यमंत्री योगी की नीतियाँ विकास और सम्मान दोनों के संतुलित सूत्र पर आधारित हैं, जिनका लक्ष्य प्रदेश के हर वंचित परिवार को सशक्त बनाना है। जनजातीय गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर योगी सरकार की जनजातीय विकास नीति धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के रूप में मूर्त रूप ले चुकी है। इसके जरिए 26 जिलों के 517 जनजातीय बहुल गांवों में संतृप्ति आधारित विकास लागू किया गया है, जिससे सरकारी योजनाओं की सार्वभौमिक पहुँच सुनिश्चित हो सके। थारू और बुक्सा समेत विभिन्न जनजातियों से जुड़े 11 लाख से अधिक लोगों को सड़क, बिजली, आवास और स्वच्छ जल जैसी बुनियादी सुविधाएँ प्रदान की गई हैं। विशेष रूप से 815 बुक्सा परिवारों को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत सुरक्षित आवास उपलब्ध कराए गए हैं। उल्लेखनीय है कि वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत 13 जिलों के 23,000 से अधिक वनवासी परिवारों के भूमि दावों को रिकॉर्ड में दर्ज कर उनकी पीढ़ियों से लंबित मांगों को पूरा किया गया। शिक्षा के क्षेत्र में 1.5 लाख से अधिक जनजातीय विद्यार्थियों को छात्रवृत्तियाँ और शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ मिला, जबकि लखीमपुर खीरी और बलरामपुर के नौ आश्रम पद्धति विद्यालय 2,000 से अधिक बच्चों को गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। युवाओं के लिए अवसर, महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ावा योगी सरकार ने युवाओं को प्रशासनिक सेवाओं और सरकारी नौकरियों में व्यापक अवसर देते हुए प्री एग्जामिनेशन ट्रेनिंग सेंटर योजना के तहत 6,500 युवाओं को प्रशिक्षण उपलब्ध कराया, जिनमें से 700 से अधिक उम्मीदवार प्रशासनिक पदों के लिए चयनित हुए हैं। वित्तीय वर्ष 2023-24 में पुलिस विभाग में 60,244 पदों की भर्ती प्रक्रिया में अनुसूचित जनजाति वर्ग के सभी आरक्षित पद भरे जाना इस परिवर्तन का बड़ा प्रमाण है। वहीं महिला सुरक्षा और सम्मान को नई पहचान देने के लिए योगी सरकार ने तीन पीएसी बटालियनों का गठन वीरांगनाओं के नाम पर किया है, जिनमें 1857 की बहादुर दलित नायिका ऊदा देवी का नाम शामिल है। ऊदा देवी के ही नाम पर प्रदेश की राजधानी में प्रतिमा की स्थापना भी की गई है, जो पासी समाज के गौरवशाली अतीत का प्रतिनिधित्व कर रही है। यह कदम न केवल सुरक्षा बलों में महिला प्रतिनिधित्व को बढ़ाता है, बल्कि इतिहास की उन स्त्रियों को सम्मान देता है जिन्हें लंबे समय तक उपेक्षित रखा गया। इसी के साथ थारू हस्तशिल्प कंपनी ने 371 महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को राष्ट्रीय बाजार से जोड़कर आर्थिक आत्मनिर्भरता की राह को मजबूत किया है। नट और बंजारा जैसे विमुक्त घुमंतू समुदायों के लिए 101 आश्रम विद्यालय और 9 सर्वोदय स्कूल सामाजिक सुरक्षा और स्थिरता के केंद्र के रूप में विकसित किए गए हैं। सामाजिक एकता और आत्मगौरव का संदेश योगी सरकार ने ऐतिहासिक उपेक्षा का शिकार रहे जननायकों और नायिकाओं को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का मिशन चलाया है। मिर्जापुर और सोनभद्र में धरती आबा बिरसा मुंडा के नाम पर निर्मित संग्रहालय और बलरामपुर में थारू संग्रहालय जनजातीय विरासत को सहेजने के महत्वपूर्ण केंद्र बने हैं। महाराजा सुहेलदेव के सम्मान में किए गए सरकारी उपक्रमों ने ओबीसी समाज में गौरव और आत्मसम्मान को मजबूत आधार दिया है। यह सांस्कृतिक पुनर्जागरण केवल इतिहास को पुनर्स्थापित नहीं कर रहा, बल्कि सामाजिक एकता और आत्मगौरव का नया संदेश दे रहा है। स्कूल पाठ्यक्रम में सुधार, छात्रवृत्तियों का विस्तार, महिला सुरक्षा ढांचे का सुदृढ़ीकरण और कमजोर वर्गों की सांस्कृतिक पहचान को प्रतिष्ठा देना, ये सभी कदम मिलकर स्पष्ट करते हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित वर्गों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहे हैं।