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लखनऊ संभाग के उन्नाव, रायबरेली और लखनऊ में भी शनिवार से की जाएगी खरीद

पूर्वी उत्तर प्रदेश में पहली नवंबर से होगी धान खरीद  लखनऊ संभाग के उन्नाव, रायबरेली और लखनऊ में भी शनिवार से की जाएगी खरीद  धान (कॉमन)-2369 और (ग्रेड ए) का 2389 रुपये प्रति कुंतल एमएसपी तय पूर्वी उत्तर प्रदेश में 28 फरवरी 2026 तक चलेगी खरीद   पश्चिम उत्तर प्रदेश में पहली अक्टूबर से चल रही धान खरीद 48 घंटे के भीतर किसानों को भुगतान करा रही योगी सरकार दो महीने में 2.17 लाख से अधिक किसानों ने करा लिया पंजीकरण लखनऊ  खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत पहली नवंबर से पूर्वी उत्तर प्रदेश में धान खरीद शुरू होगी, 28 फरवरी 2026 तक चलेगी। इस अवधि में लखनऊ संभाग के उन्नाव, रायबरेली और लखनऊ में भी धान खरीद होगी। वहीं पहली अक्टूबर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और लखनऊ संभाग के हरदोई, लखीमपुर खीरी, सीतापुर जनपद में धान खरीद चल रही है। डबल इंजन सरकार ने इस वर्ष धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि भी की है। धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (कॉमन)-2369 और (ग्रेड ए) का 2389 रुपये प्रति कुंतल तय किया गया है। वहीं योगी सरकार की नीतियों पर समर्थन जताते हुए दो महीने में 2.17 लाख से अधिक किसानों ने बिक्री के लिए पंजीकरण भी करा लिया है। पूर्वी उत्तर प्रदेश व लखनऊ संभाग के इन जनपदों में पहली नवंबर से शुरू होगी खरीद पूर्वी उत्तर प्रदेश के संभागों में पहली नवम्बर से धान खरीद शुरू होगी। यह खरीद पूर्वी उत्तर प्रदेश के चित्रकूट, कानपुर, अयोध्या, गोरखपुर, देवीपाटन, बस्ती, आजमगढ़, वाराणसी, मीरजापुर व प्रयागराज संभाग में होगी। इसके साथ ही लखनऊ संभाग के लखनऊ, रायबरेली व उन्नाव में भी पहली नवंबर से खरीद होगी, जो 28 फरवरी 2026 तक चलेगी। दो महीने में 2.17 लाख से अधिक किसानों ने करा लिया पंजीकरण धान बिक्री के लिए पहली सितंबर से पंजीकरण प्रारंभ हो गया था। 31 अक्टूबर (सुबह 11 बजे) तक 2,17,625 किसानों ने पंजीकरण करा लिया। वहीं पश्चिम उत्तर प्रदेश के 17 हजार से अधिक किसानों से एक महीने के भीतर 1.06 लाख मीट्रिक टन से अधिक की धान खरीद की जा चुकी है। योगी सरकार के निर्देश पर तेज गति से चल रहे कार्य की बदौलत 3920 क्रय केंद्र भी खुल गए हैं।  fcs.up.gov.in या UP KISAN MITRA  पर पंजीकरण अनिवार्य  धान बिक्री के लिए किसानों का पंजीकृत होना अनिवार्य है। किसानों को खाद्य व रसद विभाग की वेबसाइट fcs.up.gov.in या मोबाइल ऐप UP KISAN MITRA पर पंजीकरण कराना होगा। खरीद पंजीकृत किसानों से ही होगी। खाद्य व रसद विभाग के मुताबिक किसान किसी भी सहायता या जानकारी के लिए टोल फ्री नंबर 18001800150 नंबर पर कॉल या अपने जनपद के जिला खाद्य विपणन अधिकारी, तहसील के क्षेत्रीय विपणन अधिकारी व ब्लॉक के विपणन निरीक्षक से भी संपर्क साध सकते हैं। योगी सरकार ने 48 घंटे के भीतर किसानों को भुगतान का निर्देश दिया है।    

योगी सरकार के सुशासन मॉडल में डिजिटल प्रशिक्षण बना रहा परिवर्तन का आधार

सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही को मिल रहा नया आयाम मिशन कर्मयोगी से दक्ष हो रहे समाज कल्याण विभाग के अधिकारी-कर्मचारी लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सुशासन और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने के सतत प्रयासों का असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी पहल ‘मिशन कर्मयोगी’ को आगे बढ़ाते हुए योगी सरकार ने अपने अधिकारियों और कर्मचारियों को डिजिटल प्रशिक्षण से जोड़ने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। योगी सरकार के ‘डिजिटल दक्षता एवं पारदर्शी प्रशासन’ के विजन को साकार करने में समाज कल्याण विभाग अग्रणी भूमिका निभा रहा है। विभाग के अधिकारी और कर्मचारी अब डिजिटल प्लेटफॉर्म आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल के माध्यम से अपनी कार्यकुशलता बढ़ाने में जुटे हैं। इसका सीधा लाभ जनता को पारदर्शी, त्वरित और प्रभावी सेवाओं के रूप में मिल रहा है। 3,900 कर्मचारी जुड़े, पूरे किए 21,150 कोर्स समाज कल्याण विभाग के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2025 तक कुल 3,900 अधिकारी, नियमित/संविदाकर्मी एवं शिक्षक पोर्टल पर पंजीकृत हो चुके हैं। इन कर्मचारियों ने अब तक 21,150 ऑनलाइन कोर्स पूरे किए, जिनमें लगभग 15,893 घंटे का प्रशिक्षण शामिल है। इनमें से 2,759 कर्मचारियों ने कम से कम एक कोर्स, जबकि 2,289 कर्मचारियों ने तीन या उससे अधिक कोर्स पूरे किए हैं। वहीं, 1,611 कर्मचारियों ने तीन से कम और 1,141 कर्मचारियों ने अभी प्रशिक्षण पूरा नहीं किया है। योगी सरकार का यह अभियान हर सरकारी कर्मचारी को “कुशल, पारदर्शी और जवाबदेह” बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है नई तकनीक और पारदर्शी शासन पर है विशेष जोर दे रही योगी सरकार मिशन कर्मयोगी के प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में न केवल प्रशासनिक सुधार बल्कि तकनीकी उन्नयन पर भी विशेष जोर दिया गया है। इनमें ‘योगा ब्रेक एट वर्कप्लेस’ जैसे विषय तनावमुक्त कार्यसंस्कृति को बढ़ावा देते हैं, जबकि POSH Act 2013 से कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा को सशक्त किया जा रहा है। ‘Procurement Process on GeM’, ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020’, ‘Basics of Artificial Intelligence’ और ‘Right to Information Act’ जैसे कोर्स सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता, तकनीकी दक्षता और जनता के प्रति जवाबदेही की भावना को सुदृढ़ कर रहे हैं। योगी सरकार डिजिटल शासन नीति को दे रही है नई दिशा मिशन कर्मयोगी के तहत डिजिटल प्रशिक्षण, योगी सरकार के उस दृष्टिकोण का हिस्सा है जिसमें शासन को पेपरलेस, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाया जा रहा है। समाज कल्याण विभाग के इस अभियान से प्रशासनिक प्रक्रियाओं में न केवल पारदर्शिता आई है बल्कि कर्मचारियों में कार्य के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता भी बढ़ी है। समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि मिशन कर्मयोगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की साझा सोच का परिणाम है, जिसका उद्देश्य सरकारी सेवाओं को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। समाज कल्याण विभाग इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। हमारे अधिकारी और कर्मचारी डिजिटल रूप से दक्ष बन रहे हैं, जिससे जनता को योजनाओं का लाभ तेजी और पारदर्शिता के साथ मिल सके। दक्षता से ही सेवा की गुणवत्ता बढ़ेगी और यही योगी सरकार के सुशासन का आधार है।

2047 तक 7 करोड़ से अधिक ओबीसी छात्रों को छात्रवृत्ति से जोड़ने का लक्ष्य

ओबीसी छात्रों के उत्थान में योगी सरकार अव्वल 2047 तक 7 करोड़ से अधिक ओबीसी छात्रों को छात्रवृत्ति से जोड़ने का लक्ष्य  2017 से अब तक 2.07 करोड़ से अधिक ओबीसी छात्रों को छात्रों को मिल चुकी है छात्रवृत्ति  पिछले आठ वर्षों में ओबीसी छात्रों के कल्याण के लिए उठाए कई ऐतिहासिक कदम  ग्रामीण और वंचित ओबीसी युवाओं को उच्च शिक्षा से जोड़ने में सफल हुई योगी सरकार लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के छात्रों के सशक्तीकरण में अभूतपूर्व प्रगति हासिल की है। ओबीसी समुदाय के उत्थान के बिना 'विकसित यूपी' का सपना अधूरा है और योगी सरकार इसे साकार करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही। शुक्रवार को 10,28,205 से अधिक छात्र-छात्राओं को 300 करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप डीबीटी के जरिए वितरित की गई, जिसमें ओबीसी के 4,83,000 से अधिक छात्रों को 126.69 करोड़ रुपये प्रदान किए गए। सरकार ने 2047 तक 7 करोड़ से अधिक ओबीसी छात्रों को 80,000 करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप और शुल्क प्रतिपूर्ति देने का संकल्प लिया है। 2016-17 तक केवल 46 लाख बच्चे स्कॉलरशिप का लाभ ले पाते थे, लेकिन योगी सरकार ने इसे बढ़ाकर 62 लाख तक पहुंचा दिया। यह पारदर्शी और त्वरित वितरण योगी सरकार की तकनीकी दक्षता का परिणाम है कि इस बार अनुसूचित जाति-जनजाति के 3,56,000 छात्रों को 114.92 करोड़, सामान्य वर्ग के 97,000 से अधिक छात्रों को 29.18 करोड़ और अल्पसंख्यक वर्ग के 90,758 छात्रों को 27.16 करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप डीबीटी के जरिए दी गई।  ग्रामीण और वंचित ओबीसी युवाओं को उच्च शिक्षा से जोड़ने में सफल हुई योगी सरकार पिछले आठ वर्षों में योगी सरकार ने ओबीसी कल्याण में ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। वर्ष 2024-25 में 32,22,499 ओबीसी छात्रों को स्कॉलरशिप और शुल्क प्रतिपूर्ति दी गई, जबकि 2017 से अब तक 2,07,53,457 छात्रों को 13,535.33 करोड़ रुपये का लाभ मिला। यह राशि पूर्ववर्ती सरकार के 4,197 करोड़ रुपये के व्यय से चार गुना अधिक है, इसमें उन ओबीसी छात्रों की बड़ी संख्या शामिल है जो प्रदेश के ग्रामीण इलाकों और सुदूर क्षेत्रों से आते हैं। यह आंकड़ा न केवल सरकार की नीतियों की सफलता दर्शाता है, बल्कि ग्रामीण और वंचित ओबीसी युवाओं को उच्च शिक्षा तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता को और मजबूत कर रहा है।   ओबीसी समुदाय का सशक्तीकरण 'विकसित उत्तर प्रदेश' का मूलमंत्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कई मौके पर कह चुके हैं कि शिक्षा सामाजिक समानता का आधार है। ओबीसी समुदाय का सशक्तीकरण 'विकसित उत्तर प्रदेश' का मूलमंत्र है। हमारा लक्ष्य हर वंचित छात्र को शिक्षा का अवसर देना है। सरकार ने 2047 तक 7 करोड़ से अधिक ओबीसी छात्रों को 80,000 करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप और शुल्क प्रतिपूर्ति देने का संकल्प लिया है। यह दीर्घकालिक दृष्टिकोण ग्रामीण ओबीसी युवाओं को तकनीकी, चिकित्सा और अन्य उच्च शिक्षा क्षेत्रों में आगे बढ़ाने में मदद करेगा। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने डीबीटी के जरिए पारदर्शिता सुनिश्चित की है, जिससे स्कॉलरशिप सीधे छात्रों के खातों में पहुंच रही है। यह पहल न केवल छात्रों को आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है, बल्कि ओबीसी समुदाय में आत्मविश्वास और सामाजिक गौरव भी जगा रही है। योगी सरकार के इस प्रयास से उत्तर प्रदेश सामाजिक और शैक्षिक समानता का नया मॉडल बन रहा है। पिछड़ा वर्ग कल्याण व दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने कहा कि योगी सरकार ने ओबीसी और दिव्यांगजनों के लिए खजाना खोल दिया है। हमारा लक्ष्य है कि पिछड़ों को शिक्षा से सशक्त बनाकर सामाजिक समानता सुनिश्चित करें। यह प्रयास 'विकसित यूपी' का आधार बनेगा।

त्योहारी तोहफा: यूपी सरकार ने दिया खुशखबरी भरा झटका, कर्मचारियों को मिला 3% डीए बढ़ोतरी का लाभ

लखनऊ दीपावली से पहले उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के करीब 28 लाख कर्मचारियों और पेंशनरों को बड़ी खुशखबरी दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) में 3% की बढ़ोतरी का ऐलान किया है। अब यह दर 55% से बढ़कर 58% हो गई है। कब से लागू होगा नया DA-DR? – यह बढ़ोतरी 1 जुलाई 2025 से प्रभावी मानी जाएगी। – कर्मचारियों को इसका नकद भुगतान अक्टूबर 2025 से किया जाएगा। कितना खर्च आएगा सरकार पर? सरकार के इस फैसले से मार्च 2026 तक सरकार पर कुल ₹1960 करोड़ का अतिरिक्त खर्च आएगा:- – नवंबर 2025 में ही नकद भुगतान का बोझ होगा ₹795 करोड़ – इसमें से ₹185 करोड़ ओपीएस (पुरानी पेंशन योजना) वाले कर्मचारियों के GPF में जमा होंगे – जुलाई से सितंबर 2025 तक के एरियर के तौर पर ₹550 करोड़ का खर्च – दिसंबर 2025 से हर महीने ₹245 करोड़ का अतिरिक्त व्यय कर्मचारियों में खुशी की लहर मुख्यमंत्री योगी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि यह प्रक्रिया समय से और सुचारू रूप से लागू की जाए। यह फैसला राज्य कर्मचारियों और पेंशनरों को आर्थिक राहत देगा। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री पहले ही दिवाली बोनस देने का ऐलान कर चुके हैं और यह भी कहा गया है कि बोनस का भुगतान समय पर हो ताकि लोग त्योहार खुशियों के साथ मना सकें। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा? हमारी सरकार कर्मचारियों और पेंशनरों की भलाई के लिए पूरी तरह समर्पित है। यह निर्णय लाखों परिवारों को राहत देगा और त्योहार से पहले उनकी मुस्कान लौटाएगा।  

8 से 17 अक्टूबर तक जारी विशेष अभियान में अब तक 2993 क्विंटल मिलावटी खाद्य सामग्री जब्त, 1155 क्विंटल नष्ट

उन्नाव, मथुरा और लखनऊ में भारतीय न्याय संहिता 2023 के अंतर्गत दर्ज कराई गईं तीन एफआईआर  टोल प्लाजा और हाईवे पर भी चलाया गया अभियान, बड़ी मात्रा में मिलावटी सामग्री की गई जब्त  आम जनता से की गई अपील, संदिग्ध खाद्य सामग्री का इस्तेमाल न करें और सूचना तुरंत विभाग को दें लखनऊ उत्तर प्रदेश में दीपावली के त्योहार को सुरक्षित और स्वास्थ्य के अनुकूल बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेश सरकार के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने 08 अक्टूबर से 17 अक्टूबर तक दीपावली विशेष अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत अब तक प्रदेश भर में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीमों ने 4621 निरीक्षण, 2085 छापे और 2853 नमूनों की जांच की। अब तक कुल 2993 क्विंटल मिलावटी और अस्वास्थ्यकर खाद्य सामग्री जब्त की गई, जिसका अनुमानित मूल्य ₹3.88 करोड़ है। मानव उपभोग के योग्य नहीं होने पर 1155 क्विंटल सामग्री नष्ट की गई, जिसकी अनुमानित कीमत ₹1.75 करोड़ है। उन्नाव, मथुरा और लखनऊ में भारतीय न्याय संहिता 2023 के अंतर्गत तीन प्राथमिकी भी दर्ज की गई हैं।  आम नागरिकों के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं सचिव खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन डॉ. रोशन जैकब ने बताया कि त्योहारों को सुरक्षित, स्वच्छ और आनंददायक बनाने के लिए प्रदेश सरकार संकल्पित है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के निर्देश पर पूरे प्रदेश में मिलावटखोरी और स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह खाद्य सामग्री के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। त्योहारों के अवसर पर आम नागरिकों के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि शीघ्र नष्ट होने वाली सामग्री मौके पर ही जब्त और विनष्ट की जाती है, जिससे उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। विभिन्न जनपदों में हो रही कार्रवाई अभियान में प्रमुख कार्यवाहियों में उन्नाव में 215 किलो खोया जब्त कर नष्ट किया गया और नमूने संग्रहीत कर एक एफआईआर दर्ज की गई। मथुरा में 400 किलो मिलावटी पनीर नष्ट किया गया। लखनऊ में 802 किलो खोया नष्ट किया गया। झांसी में 1200 किलो खोया, हाथरस में 790 किलो मिलावटी आचार जब्त कर 3000 किलो खराब आचार नष्ट किया गया। बुलंदशहर में 3000 किलो मिलावटी रसगुल्ला व गुलाबजामुन, मीरजापुर में 1478 किलो मिलावटी खोया, सहारनपुर में 1100 किलो खोया नष्ट किया गया। इसी प्रकार, हापुड़ में 6000 लीटर रिफाइंड सोयाबीन तेल जब्त किया गया।  दूध, खोया, पनीर और मिठाई जब्त  कानपुर देहात में 500 लीटर दूध, 400 किलो खोया, 2200 किलो बर्फी, 250 किलो पेड़ा और 358 किलो स्वीट केक नष्ट किए गए। गोरखपुर में 1400 किलो पनीर और खोया जब्त और 1000 लीटर खराब सरसों तेल नष्ट किया गया। मेरठ में 71 लीटर पामोलीन तेल, 20 किलो स्किम्ड मिल्क पाउडर जब्त और 35 किलो रसगुल्ला, 180 किलो पनीर, 2500 किलो खोया नष्ट किया गया। एटा में 340 लीटर सरसों तेल और 900 किलो घी नष्ट किए गए। खीरी में 871 किलो खाद्य सामग्री जब्त और 50 किलो नष्ट की गई। आगरा, अलीगढ़, गाज़ियाबाद, मुजफ्फरनगर में भी लाखों मूल्य की मिलावटी सामग्री नष्ट की गई। टोल प्लाजा और हाईवे पर भी चला अभियान टोल प्लाजा और हाईवे पर भी अभियान की कार्रवाई में बड़ी जब्तियां शामिल हैं। साहिबाबाद टोल पर 750 किलो पनीर, हापुड़ टोल छिजारसी पर 1500 किलो पनीर, एनएच 34, जीटी रोड कानपुर से 4040 किलो खोया, बाराबंकी टोल से 910 कार्टन मिलावटी मिठाई, और कानपुर पनकी रोड से 2450 किलो खोया नष्ट किया गया। आम नागरिक भी कर सकते हैं शिकायत  प्रदेश सरकार ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं भी खाद्य पदार्थों में मिलावट, नकली उत्पादों का निर्माण या विक्रय अथवा संगठित रूप से मिलावट का कारोबार संचालित होने की जानकारी मिले, तो उसकी गोपनीय सूचना तुरंत खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग को दें। इसके लिए विभाग द्वारा विशेष हेल्पलाइन और व्हाट्सएप नंबर जारी किए गए हैं। गोपनीय शिकायत दर्ज कराने के लिए टोल फ्री नंबर 1800-180-5533 पर कॉल की जा सकती है। मिलावटी या नकली खाद्य पदार्थ से संबंधित सूचना व्हाट्सएप नंबर 9793429747 पर भेजी जा सकती है। वहीं अगर किसी को नकली या घटिया दवाइयों के निर्माण या बिक्री की जानकारी मिले, तो उसकी सूचना व्हाट्सएप नंबर 8756128434 पर भेजी जा सकती है। सरकार ने कहा है कि ऐसी शिकायतों की पहचान गोपनीय रखी जाएगी और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

विकास और संस्कृति का संगम बनेगा दीपोत्सव, झांकियों में दिखेगा नया उत्तर प्रदेश

अयोध्या भगवान राम की नगरी अयोध्या में इस बार नौवां दीपोत्सव न केवल दीपों की जगमगाहट से, बल्कि प्रदेश के विकास और भारतीय संस्कृति की जीवंत झांकियों से भी सजेगा। योगी सरकार की उपलब्धियों को प्रदर्शित करने के लिए सूचना विभाग द्वारा 15 आकर्षक झांकियां निकाली जाएंगी, जबकि पर्यटन संस्कृति विभाग रामायण के सातों कांडों पर आधारित थीम पर झांकियां प्रस्तुत करेगा। जिसमें 22 झांकियां साकेत महाविद्यालय में तैयार हो रही हैं। इसके साथ ही देश के विभिन्न राज्यों की लोक कलाएं और नृत्य दीपोत्सव की शोभा बढ़ाएंगे। जिला सूचना अधिकारी संतोष कुमार द्विवेदी ने बताया कि सूचना विभाग की झांकियां योगी सरकार के विकास कार्यों को दर्शाएंगी। इनमें उत्तर प्रदेश में हुए बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और सांस्कृतिक विकास जैसे क्षेत्रों में सरकार की उपलब्धियों को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा। ये झांकियां प्रदेश की प्रगति और समृद्धि का प्रतीक होंगी। दूसरी ओर, संस्कृति विभाग द्वारा रामायण के सात कांडों बालकांड, अयोध्याकांड, अरण्यकांड, किष्किन्धाकांड, सुंदरकांड, लंकाकांड और उत्तरकांड पर आधारित झांकियां तैयार की जा रही हैं। ये झांकियां भगवान राम के जीवन और रामायण की शिक्षाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत करेंगी।   झांकियों को आकर्षक व तकनीकी बनाने के लिए दिया जा रह विशेष ध्यान संतोष कुमार द्विवेदी ने बताया कि सूचना विभाग द्वारा नामित की गई कम्पनी ने झांकियों को आकर्षक और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने के लिए विशेष ध्यान दिया है। ये झांकियां न केवल दृश्यात्मक रूप से प्रभावशाली होंगी, बल्कि इनमें आधुनिक तकनीक का उपयोग भी किया जाएगा ताकि दर्शकों को एक अनूठा अनुभव प्राप्त हो। इसके अतिरिक्त, दीपोत्सव के अवसर पर अयोध्या को दीपों से सजाया जाएगा। रामपथ, भक्ति पथ और अन्य प्रमुख स्थानों पर लाखों दीप जलाए जाएंगे, जो विश्व रिकॉर्ड बनाने की दिशा में एक और कदम होगा। इस आयोजन में स्थानीय लोगों के साथ-साथ देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक भी शामिल होंगे। जानिए, कौन कौन से राज्य की दिखेंगी लोककलाएं इस बार दीपोत्सव में सांस्कृतिक विविधता का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। देश के विभिन्न राज्यों की लोक कलाएं और नृत्य इस आयोजन का मुख्य आकर्षण होंगे। हरियाणा का फाग, केरल का कथककली, राजस्थान का झूमर, पंजाब का भांगड़ा, ओडिशा का संबलपुरी, गाजीपुर का डिबिया और पश्चिम बंगाल व मध्य प्रदेश की लोक कलाएं अयोध्या के रामपथ पर अपनी छटा बिखेरेंगी। ये प्रस्तुतियां न केवल सांस्कृतिक धरोहर को प्रदर्शित करेंगी, बल्कि देश की एकता और विविधता को भी रेखांकित करेंगी। इस भव्य आयोजन में लगभग 500 से अधिक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लेंगे। सरकार की उपलब्धियों को ये झांकियां करेंगी प्रस्तुत इवेंट के लिए जिम्मेदार कंपनी विविद इंडिया के एक प्रतिनिधि के अनुसार दीपोत्सव में प्रयागराज महाकुंभ, काशी कॉरिडोर, कृषि पशु पालन, आयुष्मान कैशलेस, डिफेंस कॉरिडोर, उत्तर प्रदेश को बेहतर बनाना हमारी प्रतिबद्धता, स्वच्छ एवं हरित उत्तर प्रदेश, विकसितअ भारत, उत्तर प्रदेश पुलिस सुरक्षा, प्रधानमंत्री आवास योजना एवं मुख्यमंत्री आवास योजना, पीएम सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना, आत्मनिर्भर नारी, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, अयोध्या डेवलपमेंट अथॉरिटी द्वारा कराए गए कार्यों की झलक दिखाई पड़ेगी।  

डिजिटल यूपी: योगी सरकार के नेतृत्व में प्रदेश बना नया आईटी हब

आईटी एंड इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग उत्तर प्रदेश को आईटी हब बनाने की दिशा में कर रहा ठोस प्रयास माइक्रोसॉफ्ट इंडिया, पेटीएम, टीसीएस , मैक इंडिया जैसी दिग्गज कंपनियों ने प्रदेश में किया निवेश सेक्टर में ₹5,584 करोड़ का निवेश और 53,000 रोजगार के अवसर हुए सृजित लखनऊ,  कुछ साल पहले तक उत्तर प्रदेश का नाम सुनते ही लोग कृषि और पारंपरिक उद्योगों की बात करते थे। लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदृष्टि और सशक्त नीतियों ने अब यह धारणा बदल दी। आज लखनऊ, कानपुर और नोएडा जैसे शहरों में आईटी पार्क्स की जगमगाहट नई कहानी कह रही है। यूपी अब सिर्फ भारत का हृदय नहीं, बल्कि डिजिटल भारत का मस्तिष्क भी बनने की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि सूचना प्रौद्योगिकी केवल तकनीक नहीं, यह परिवर्तन की शक्ति है। सीएम योगी के इसी सूत्रवाक्य को आगे बढ़ते हुए प्रदेश के आईटी एंड इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग ने हर युवा को अवसर देने और उत्तर प्रदेश को भारत का सबसे बड़ा आईटी हब बनाने की दिशा में ठोस प्रयास प्रारंभ किए हैं। 15 हजार करोड़ से 75 हजार करोड़ तक बढ़ा यूपी का आईटी निर्यात 2015 में जहां प्रदेश का आईटी निर्यात केवल ₹15,000 करोड़ था, वहीं आज यह आंकड़ा ₹75,000 करोड़ से अधिक पहुंच चुका है। यह केवल एक आर्थिक उपलब्धि नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं की मेहनत और योगी सरकार के तकनीकी विजन की सफलता का प्रतीक है। योगी सरकार की सूचना प्रौद्योगिकी नीति 2017-2022 ने निवेशकों के लिए दरवाज़े खोले हैं। माइक्रोसॉफ्ट इंडिया, पेटीएम, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, मैक इंडिया जैसी दिग्गज कंपनियों ने प्रदेश में निवेश कर भरोसे की नई मिसाल कायम की। परिणामस्वरूप ₹5,584 करोड़ का निवेश और 53,000 रोजगार अवसर सृजित हुए। नई आईटी एवं आईटी जनित सेवा नीति-2022 के तहत दो नई परियोजनाओं को लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी किया गया है, जिनसे 900 युवाओं को रोजगार मिलेगा। वहीं ₹48 करोड़ से अधिक निवेश वाली तीन परियोजनाएं मंज़ूरी के इंतज़ार में हैं। आईटी को मिला उद्योग का दर्जा, बदला निवेश का माहौल योगी सरकार ने आईटी और आईटीईएस क्षेत्र को “उद्योग का दर्जा” देकर इतिहास रच दिया। अब आईटी कंपनियों को औद्योगिक श्रेणी की भूमि औद्योगिक दरों पर मिल रही है। इस फैसले से निवेशक आत्मविश्वास के साथ उत्तर प्रदेश को अपना ठिकाना बना रहे हैं। सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) के सहयोग से नोएडा, मेरठ, लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज और आगरा में आईटी पार्क्स और एसटीपीआई केंद्र संचालित हो रहे हैं। अब यही रौशनी वाराणसी, बरेली और गोरखपुर की ओर बढ़ रही है, जहां नए केंद्र बन रहे हैं। इससे न केवल रोजगार बढ़ेगा, बल्कि छोटे शहर भी डिजिटल अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा में शामिल होंगे। ‘युवा यूपी’ का नया चेहरा कानपुर की दीप्ति हो या गोरखपुर के आर्यन — इन युवाओं ने कभी सोचा भी नहीं था कि अपने ही शहर में बड़ी आईटी कंपनियों के साथ काम करने का मौका मिलेगा। योगी सरकार की नीति ने उनकी यह इच्छा पूरी की है। आज ये युवा अपनी प्रतिभा से न सिर्फ अपनी पहचान बना रहे हैं, बल्कि प्रदेश को नई पहचान भी दे रहे हैं। प्रदेश सरकार ने आईटी और आईटीईएस परियोजनाओं के लिए एक डेडीकेटेड ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया है, जिससे आवेदन, स्वीकृति और प्रोत्साहन की प्रक्रिया अब पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी हो गई है।

उत्तर प्रदेश कृषि विभाग किसानों के लिए चला रही अनेक प्रोत्साहन व अनुदान कार्यक्रम

रबी सीजन 2025-26: 92 हजार से अधिक मिनीकिट देकर किसानों को समृद्ध करेगी योगी सरकार उत्तर प्रदेश कृषि विभाग किसानों के लिए चला रही अनेक प्रोत्साहन व अनुदान कार्यक्रम किसानों की चलेगी पाठशाला, उत्पादन के लिए नई तकनीक जानेंगे कृषक रबी सीजन में पूरे प्रदेश में चलाई जाएगी 8385 किसान पाठशाला  किसानों को प्रति एकड़ 4000 रुपये का दिया जाएगा अनुदान दलहनी फसलों के बीजों पर भी अनुदान दे रही योगी सरकार खरीफ फसलों की अपेक्षा रबी में दलहनी फसल का क्षेत्रफल व उत्पादन होता है अधिक  लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश कृषि विभाग किसानों के लिए निरंतर अनेक प्रोत्साहन योजना व अनुदान कार्यक्रम चला रही है। इसी क्रम में रबी फसल के मद्देनजर योगी सरकार किसानों को 92 हजार से अधिक मिनीकिट देकर समृद्ध करेगी। इसके साथ ही उत्पादन की नई तकनीक से अवगत कराने के लिए कृषि विभाग 8385 किसान पाठशाला भी चलाएगा। गौरतलब है कि रबी फसल में दलहनी फसलों का क्षेत्रफल एवं उत्पादन खरीफ मौसम की अपेक्षा अधिक होता है। साथ ही रबी के मौसम में फसलों पर कीट एवं व्याधि का संक्रमण भी कम होता है, जिससे दलहनी फसलों की उत्पादकता अधिक प्राप्त होने की संभावना होती है।  दलहनी फसलों से अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए अनेक योजनाएं चला रहा कृषि विभाग  रबी में दलहनी फसलों से अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए उत्तर प्रदेश कृषि विभाग द्वारा भी किसानों के लिए कई प्रोत्साहन योजना एवं अनुदान आधारित कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। विशेष रूप से योगी सरकार द्वारा नवीन प्रजातियों के प्रोत्साहन के लिए दलहनी फसलों के निःशुल्क मिनीकिट, एकड़ प्रदर्शन एवं किसान पाठशाला चलाये जा रहे हैं। योगी सरकार किसानों को प्रति एकड़ 4000  रुपये के अनुदान के साथ ही उत्पादन की नवीन तकनीक के प्रसार के लिए किसान पाठशाला भी चला रही है।  रबी सीजन 2025-26 में 92518 मिनी किट और 8385 किसान पाठशाला का लक्ष्य वर्तमान रबी सीजन में 92518 मिनीकिट, 8385 खंड प्रदर्शन तथा 8385 किसान पाठशाला का लक्ष्य है। इसके अतिरिक्त नेशनल फूड सिक्योरिटी एंड न्यूट्रीशन मिशन के अंतर्गत 10 वर्ष से कम अवधि के दलहनी फसलों के बीजों पर 5000 रुपये प्रति कुंतल, 10 वर्ष से अधिक अवधि के दलहनी फसल के बीजों पर 2500 रुपये प्रति कुंतल, क्लस्टर प्रदर्शन पर 9000 रुपये प्रति हेक्टेयर तथा फसल पद्धति प्रदर्शन पर 15000 रुपये प्रति हेक्टेयर के अनुदान की सुविधा है। किसानों को बीजों पर अनुदान एटसोर्स अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रदर्शन का अनुदान चयनित किसानों के खाते में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से हस्तांतरित किया जायेगा। प्रदेश सरकार किसानों को अन्नदाता मानकर उनके उत्थान के लिए निरंतर प्रयत्न कर रही है। इसी क्रम में रबी सीजन में उत्पादन बढा़ने के लिए किसानों को प्रेरित किया जा रहा है। हाल ही में प्रदेश स्तर पर रबी गोष्ठी भी हुई थी, जिसके माध्यम से हजारों किसानों ने खेती में नवीनीकरण की जानकारी प्राप्त की। किसान बीज शोधन, जैव रसायन व कृषि रक्षा रसायन से बीज शोधित करके ही बोआई करें, जिससे बीज जनित एवं भूमि जनित रोगो के संक्रमण की संभावना नहीं रहती है। साथ ही राइजोबियम कल्चर से शोधित करने पर मृदा में 20-25 किग्रा. नाइट्रोजन का स्थिरीकरण हो जाता है। इससे आगामी फसलों की लागत कम हो जायेगी तथा उत्पादकता में वृद्धि हो सकेगी।    

योगी सरकार के आईजीआरएस पोर्टल से जन शिकायतों के निस्तारण में आई तेजी, पीड़ितों को मिल रहा त्वरित न्याय

जनशिकायतों के निस्तारण में देवीपाटन मंडल अव्वल, मीरजापुर मंडल ने हासिल किया दूसरा स्थान    योगी सरकार के आईजीआरएस पोर्टल से जन शिकायतों के निस्तारण में आई तेजी, पीड़ितों को मिल रहा त्वरित न्याय  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मॉनीटरिंग से शिकायतों का समयबद्ध हो रहा निस्तारण  आईजीआरएस की सितंबर माह की रिपोर्ट में जनमानस की शिकायतों के निस्तारण में देवीपाटन मंडल ने प्राप्त किया पहला स्थान  – रिपोर्ट में मीरजापुर दूसरे तो बस्ती मंडल है तीसरे स्थान पर, शिकायतों के निस्तारण के बाद मंडलायुक्त ले रहे फीडबैक  – मंडलायुक्तों की मॉनीटरिंग, विभागीय आख्या की जांच और शिकायकर्ता के फीडबैक से समस्या के समाधान में आ रही तेजी लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की निगरानी से जन शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया में अभूतपूर्व तेजी आई है। योगी सरकार के आईजीआरएस पोर्टल से शिकायतों के समाधान में न केवल पारदर्शिता आई है, बल्कि पीड़ितों को त्वरित न्याय भी मिल रहा है। योगी सरकार ने अपने कार्यकाल में प्रशासनिक सुधारों और तकनीकी उपायों को अपनाकर शिकायतों के निस्तारण को सुनिश्चित किया है। वहीं, आईजीआरएस की सितंबर माह की रिपोर्ट में देवीपाटन मंडल ने जन शिकायतों के निस्तारण में बाजी मारी है और प्रदेश में एक बार फिर पहला स्थान प्राप्त किया है। इसी तरह प्रदेशभर में मीरजापुर मंडल ने दूसरा और बस्ती मंडल ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है। बता दें कि अगस्त माह की आईजीआरएस रिपोर्ट में भी देवीपाटन जनशिकायतों के निस्तारण में पहले स्थान पर था। हर माह रेंडम पांच शिकायतकर्ता से दवीपाटन मंडलायुक्त खुद लेते हैं निस्तारण का फीडबैक देवीपाटन मंडलायुक्त शशि भूषण लाल सुशील ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप जनशिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जा रहा है। इसके लिए देवीपाटन मंडल के जिलों क्रमश: श्रावस्ती, बहराइच, गोंडा और बलरामपुर में जनशिकायतों के पारदर्शी और त्वरित समाधान के लिए कई बिंदुओं पर लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिलों में जनशिकायतों की निस्तारण की रिपोर्ट की लगातार मॉनीटरिंग की जाती है। मंडलायुक्त ने बताया कि वह खुद मंडल के सभी जिलों के जनशिकायतों के निस्तारण के पहलुओं की मॉनीटरिंग करते हैं। इसके साथ ही रेंडम पांच शिकायतकर्ता से मंडलायुक्त कार्यालय से फीडबैक लिया जाता है ताकि यह पता चल सके कि पीड़ित की शिकायत पर वास्तविकता में एक्शन लिया गया है या फिर रिपोर्ट ही लगायी गयी है। इसके साथ ही हर माह जनशिकायतों के मामलों की विभागीय आख्या की जांच की जाती है। यही वजह है कि देवीपाटन मंडल ने जन शिकायतों के निस्तारण में प्रदेश भर में एक बार फिर पहला स्थान प्राप्त किया है। मंडलायुक्त ने बताया कि सितंबर माह की आईजीआरएस रिपोर्ट में दवीपाटन मंडल को पूर्णांक 120 में से 104 अंक प्राप्त हुए हैं और सफलता दर 86.67 प्रतिशत है।    मीरजापुर मंडल ने दूसरा तो बस्ती मंडल ने तीसरा स्थान प्राप्त किया योगी सरकार द्वारा लांच आईजीआरएस (एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली) पोर्टल नागरिकों की शिकायतों के समाधान के लिए एक महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर कई सुधारों के बाद यह अत्यधिक प्रभावी साबित हुआ है। आईजीआरएस की सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार मीरजापुर मंडल ने जन शिकायतों के निस्तारण में प्रदेशभर में दूसरा प्राप्त किया है। मीरजापुर मंडलायुक्त ने बताया कि सितंबर माह की आईजीआरएस रिपोर्ट में मीरजापुर मंडल को पूर्णांक 120 में से 98 अंक प्राप्त हुए हैं और सफलता दर 81.67 प्रतिशत है। पिछले माह भी आईजीआरएस की अगस्त माह की रिपोर्ट में मीरजापुर मंडल दूसरे स्थान पर था। इसी तरह बस्ती मंडल ने जनशिकायतों के निस्तारण में पूरे प्रदेश में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। बस्ती मंडलायुक्त ने बताया कि सितंबर माह की आईजीआरएस रिपोर्ट में बस्ती मंडल को पूर्णांक 120 में से 97 अंक प्राप्त हुए हैं और सफलता दर 80.83 प्रतिशत है। इसके साथ ही टॉप फाइव मंडल में अलीगढ़ मंडल ने चौथा और वाराणसी मंडल ने पांचवां स्थान प्राप्त किया है। इन मंडलों ने शिकायतों के निस्तारण में समय की बचत और पीड़ितों से फीडबैक लेकर सुधार की प्रक्रिया को तेज किया है। इससे यह सुनिश्चित हुआ कि कोई भी शिकायत अनसुलझी न रहे और समाधान की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और समयबद्ध हो। साथ ही अधिकारियों के फील्ड विज़िट्स ने इस प्रक्रिया को और भी प्रभावी बना दिया है।

उद्योगों की स्थापना के साथ-साथ योगी सरकार का हरियाली पर भी विशेष फोकस

पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बनेगा पीएम मित्र पार्क- मुख्यमंत्री योगी उद्योगों की स्थापना के साथ-साथ योगी सरकार का हरियाली पर भी विशेष फोकस लखनऊ में बन रहे पीएम मित्र पार्क में 11% भूमि होगी हरियाली और फलदार वृक्षारोपण को समर्पित विकास और पर्यावरण में संतुलन को लेकर योगी सरकार की प्रतिबद्धता का बनेगा प्रतीक   प्रोजेक्ट के तहत ग्रीन बेल्ट, बफर जोन और वाटर रिजर्वायर से होगा प्राकृतिक संतुलन 55% भूमि पर होगी इंडस्ट्रियल यूनिट्स की स्थापना, 3 फीसदी भूमि पर बनेंगे रेसीडेंस पीएम मित्र पार्क के माध्यम से 1000 करोड़ से अधिक निवेश और एक लाख रोजगार का लक्ष्य   लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार एक नए औद्योगिक युग की दिशा में कदम बढ़ा रही है। राज्य में प्रस्तावित पीएम मित्र (पीएम मित्र) पार्क न केवल उद्योगों के लिए वरदान साबित होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी एक आदर्श उदाहरण बनेगा। सरकार की नीति “विकास के साथ पर्यावरण” को साकार करने की दिशा में यह पार्क एक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। योगी सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी औद्योगिक विकास परियोजना में हरियाली और पारिस्थितिक संतुलन से कोई समझौता नहीं होगा। यही कारण है कि लखनऊ और हरदोई जिलों में प्रस्तावित पीएम मित्र पार्क का लेआउट प्लान पर्यावरणीय दृष्टि से पूरी तरह संतुलित रखा गया है। 11 फीसदी भूमि होगी ग्रीनरी को समर्पित ड्राफ्ट लेआउट प्लान के अनुसार, 55 फीसदी भूमि पर इंडस्ट्रियल यूनिट्स स्थापित की जाएंगी। वहीं, 3 फीसदी भूमि को रेसीडेंशियल उपयोग, 4 फीसदी इंस्टीट्यूशनल, 2 फीसदी ट्रांसपोर्ट हब, और 4 फीसदी यूटिलिटीज व एमेनिटीज के लिए आरक्षित किया गया है। सबसे खास बात यह है कि पूरे पार्क की 11 फीसदी भूमि ग्रीनरी और फ्रूट प्लांटेशन के लिए सुरक्षित रखी गई है, जिसमें ग्रीन एरिया, ग्रीन बेल्ट और बफर जोन विकसित किए जाएंगे। यह कदम न केवल प्रदूषण कम करेगा बल्कि स्थानीय जैव विविधता को भी संरक्षित रखेगा। इसके अलावा, 13 फीसदी क्षेत्र में नई सड़कों का निर्माण किया जाएगा, जबकि 0.1 फीसदी हिस्से में मौजूदा सड़कों को सुदृढ़ किया जाएगा। जल संरक्षण को ध्यान में रखते हुए 2 फीसदी भूमि नाला और वाटर रिजर्वायर के लिए और 0.5 फीसदी भूमि रीक्रिएशनल उपयोग के लिए निर्धारित की गई है। प्रोजेक्ट पर खर्च होंगे 1680 करोड़ रुपए सरकार के प्रस्ताव के अनुसार, इस पूरे प्रोजेक्ट पर 1,680 करोड़ रुपए की लागत आने का अनुमान है। यह पार्क कुल 100 एकड़ क्षेत्र में बनाया जाएगा, जिसमें एक लाख से अधिक रोजगार सृजन और 10 हजार करोड़ रुपए के निवेश की संभावना है। पार्क में पर्यावरण के अनुकूल निर्माण सामग्री, ऊर्जा-संवेदनशील डिजाइन, वर्षा जल संचयन, सोलर पावर और ई-वेस्ट मैनेजमेंट जैसे प्रावधान भी शामिल किए जाएंगे। इस पहल के माध्यम से उत्तर प्रदेश न सिर्फ“भारत का ग्रोथ इंजन” बनेगा, बल्कि“ग्रीन स्टेट मॉडल” के रूप में भी विकसित होगा।