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पुनर्वासन योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने का योगी सरकार का निर्देश

  दिव्यांगजनों को शिक्षा, कौशल और रोजगार में समान अवसर देना सरकार की प्राथमिकता लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने दिव्यांगजनों के सर्वांगीण पुनर्वासन को नई गति देने के लिए महत्वपूर्ण पहल की है। सरकार का लक्ष्य है कि दिव्यांगजन शिक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य सेवाओं और रोजगार के अवसरों में समान भागीदारी प्राप्त कर सकें और समाज की मुख्य धारा से जुड़ते हुए आत्मनिर्भर जीवन जी सकें। इसी क्रम में “दिव्यांगजन के सर्वांगीण पुनर्वासन हेतु स्वैच्छिक संस्थाओं को सहायता योजना” लागू की गई है, जिसके तहत पात्र स्वैच्छिक संस्थाओं को अनुदान प्रदान किया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत 21 प्रकार की दिव्यांगताओं के लिए सहायता प्रदान की जाएगी, जबकि मानसिक मंदित एवं मानसिक रूप से रुग्ण दिव्यांगजन इस योजना के दायरे से बाहर रखे गए हैं। सरकार का उद्देश्य विभिन्न श्रेणियों के दिव्यांग बच्चों और युवाओं को प्रारंभिक हस्तक्षेप, शिक्षा, प्रशिक्षण और कौशल विकास की सुविधाएं उपलब्ध कराकर उनके पुनर्वासन की एक सुदृढ़ व्यवस्था तैयार करना है। सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कश्यप ने बताया कि योगी सरकार की प्राथमिकता है कि दिव्यांगजन शिक्षा, कौशल, स्वास्थ्य और रोजगार के प्रत्येक क्षेत्र में समान अवसर प्राप्त कर आत्मनिर्भर बन सकें। दिव्यांगजनों के सर्वांगीण पुनर्वासन हेतु स्वैच्छिक संस्थाओं को सहायता प्रदान करने की योजना के माध्यम से प्रदेश सरकार सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा दे रही है। इस योजना के अंतर्गत दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 में उल्लिखित 21 प्रकार की दिव्यांगताओं से प्रभावित व्यक्तियों के लिए संचालित पुनर्वासन परियोजनाओं को अनुदान दिया जा रहा है, जिससे दिव्यांग बच्चों और युवाओं को प्रारंभिक हस्तक्षेप, शिक्षा, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास की समुचित सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने बताया कि मानसिक मंदित एवं मानसिक रूप से रुग्ण दिव्यांगजनों को छोड़कर अन्य दिव्यांग वर्गों के लिए यह योजना प्रभावी रूप से लागू की जा रही है। दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर करना है उद्देश्य योजना के अंतर्गत अर्ली इंटरवेंशन सेंटरों की स्थापना, डे-केयर सेंटरों एवं प्री-प्राइमरी विद्यालयों का संचालन, प्राथमिक से हाईस्कूल स्तर तक विशेष विद्यालयों का संचालन, दिव्यांगजनों के लिए कौशल विकास कार्यक्रम, पाठ्य सामग्री निर्माण, ब्रेल एवं सहायक उपकरणों की उपलब्धता तथा दिव्यांगजनों से संबंधित पुस्तकालयों के संचालन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को सहायता अनुदान के माध्यम से प्रोत्साहित किया जा रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य दिव्यांगजनों की प्रारंभिक अवस्था से ही पहचान कर उन्हें आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर करना है। पारदर्शी एवं तकनीक आधारित आवेदन प्रक्रिया मंत्री ने बताया कि योगी सरकार की  नीति है कि दिव्यांगजनों के पुनर्वासन में केवल सरकारी तंत्र ही नहीं, बल्कि अनुभवी और समर्पित स्वैच्छिक संस्थाओं की भी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए। इसी उद्देश्य से पात्र स्वैच्छिक संस्थाओं के लिए पारदर्शी एवं तकनीक आधारित आवेदन प्रक्रिया निर्धारित की गई है। केवल वही संस्थाएं योजना के अंतर्गत पात्र होंगी, जो दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अंतर्गत विधिवत पंजीकृत हों, नीति आयोग के एनजीओ दर्पण पोर्टल पर पंजीकरण के साथ विशिष्ट पहचान संख्या रखती हों तथा दिव्यांगजनों के क्षेत्र में न्यूनतम दो वर्षों का कार्यानुभव रखती हों। सहायता केवल वास्तविक, सक्रिय एवं प्रभावी संस्थाओं को उन्होंने यह भी कहा कि योजना के अंतर्गत प्रस्तुत प्रस्तावों का परीक्षण जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा किया जाएगा, जिसके पश्चात निदेशालय स्तर पर स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि सहायता केवल वास्तविक, सक्रिय एवं प्रभावी संस्थाओं को ही मिले और सरकारी धन का समुचित एवं परिणामोन्मुखी उपयोग हो सके। योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार पर जोर मंत्री ने बताया कि सभी मण्डलायुक्तों और जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने जनपदों में इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार कराएं, ताकि अधिक से अधिक स्वैच्छिक संस्थाएं आगे आकर दिव्यांगजनों के पुनर्वासन के इस अभियान में सहभागी बन सकें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार “सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास” के संकल्प के साथ दिव्यांगजनों को सशक्त, शिक्षित और स्वावलंबी बनाने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही है।

खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए पूरी हुई श्रीअन्न की खरीद

बाजरा की हुई 2.13 लाख मीट्रिक टन खरीद, ज्वार की खरीद रही 43,562 मीट्रिक टन और मक्का की खरीद रही 13,209 मीट्रिक टन ज्वार (मालदांडी) 3749, ज्वार (हाईब्रिड) 3699 रुपये, बाजरा 2775 और मक्का की 2400 रुपये प्रति कुंतल न्यूनतम समर्थन मूल्य पर हुई खरीद लखनऊ खरीफ विपणन वर्ष (2025-26) में ‘श्रीअन्न’ के किसानों ने बाजार की बजाय सरकारी खरीद को प्राथमिकता दी। पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष श्री अन्न (बाजरा, ज्वार व मक्का) की सरकारी खरीद अधिक रही। इसके एवज में किसानों को अधिक भुगतान भी किया गया। योगी सरकार की पारदर्शी नीतियों की बदौलत किसानों का झुकाव सरकारी खरीद पर अधिक रहा। इस वर्ष बाजरा की खरीद 2.13 लाख, ज्वार की 43,562 व मक्का की 12,208 मीट्रिक टन रही। पहली अक्टूबर से शुरू हुई ‘श्रीअन्न’ की खरीद पूरी हो गई। बाजरा की खरीद 33, मक्का 25 व ज्वार की खरीद 11 जनपदों में हुई। ज्वार का न्यूनतम समर्थन मूल्य (मालदांडी) 3749, ज्वार (हाईब्रिड) 3699 रुपये, बाजरा का 2775 व मक्का का 2400 रुपये प्रति कुंतल न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया था। बाजरा (2025-26)- खरीद 33 जनपद में ही हुई 90513 किसानों ने पंजीकरण कराया 54,253 किसानों से 2.13 लाख मीट्रिक टन खरीद 598.04 करोड़ रुपये का किया गया भुगतान (2024-25) 19,030 किसानों से 1.01 लाख मीट्रिक टन खरीद हुई थी किसानों को किया गया था लगभग 268 करोड़ रुपये का भुगतान ज्वार- (2025-26)- 11 जनपदों में हुई खरीद 20307 किसानों ने पंजीकरण कराया 13,454 किसानों से 43,562 मीट्रिक टन खरीद 162 करोड़ रुपये का किया गया भुगतान मक्का- (2025-26)- 25 जनपदों में हुई खरीद 7106 किसानों ने पंजीकरण कराया 3445 किसानों से 13,209 मीट्रिक टन खरीद 31.96 करोड़ रुपये का किया गया भुगतान यह भी जानें 25 जनपदों में हुई मक्का खरीद   मक्का खरीद 25 जनपदों (बदायूं,  बुलंदशहर, हरदोई, उन्नाव, मैनपुरी, आगरा, फिरोजाबाद, अलीगढ़, एटा, कासगंज, हाथरस, कानपुर नगर-देहात, कन्नौज, औरैया, इटावा, बहराइच, गोंडा, बलिया, जौनपुर, फर्रुखाबाद, मीरजापुर, सोनभद्र, देवरिया व ललितपुर) में हुई।    बाजरा खरीद वाले 33 जनपद बदायूं,  बुलंदशहर, आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, मैनपुरी, अलीगढ़, कासगंज, हाथरस, एटा, बरेली,  शाहजहांपुर, संभल, रामपुर, अमरोहा, कानपुर नगर-देहात, फर्रुखाबाद, औरैया, कन्नौज, इटावा, जालौन, हमीरपुर, चित्रकूट, गाजीपुर, जौनपुर, प्रयागराज, फतेहपुर, कौशांबी, मीरजापुर, बलिया, हरदोई व उन्नाव समेत 33 जनपदों में बाजरा खरीद हुई।   11 जनपदों में चली ज्वार खरीद बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, महोबा, कानपुर नगर-देहात, फतेहपुर, उन्नाव, हरदोई, मीरजापुर व जालौन में ज्वार की खरीद चल रही।

वर्ष 2026 में राजकीय मेडिकल कॉलेजों में सहायक आचार्य के 1112 पदों पर होगी तैनाती

कॉलेजों में आचार्य के 44 पदों और प्रवक्ता फॉर्मेसी के 11 पदों पर होगी भर्ती लखनऊ योगी सरकार स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा को सशक्त बनाने की दिशा में लगातार ठोस और दूरदर्शी कदम उठा रही है। इसी कड़ी में वर्ष 2026 में राजकीय मेडिकल कॉलेजों में शिक्षण और तकनीकी पदों पर बड़े पैमाने पर भर्ती की जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राजकीय मेडिकल कॉलेज में सहायक आचार्य, आचार्य एवं प्रवक्ता (फार्मेसी) के पदों पर भर्ती की जाएगी। इन पदों पर करीब 1,200 से अभ्यर्थियों काे सरकारी नौकरी की सौगात मिलेगी। याेगी सरकार के इस कदम से न केवल युवाओं को रोजगार मिलेगा बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य शिक्षा व्यवस्था भी और मजबूत होगी। वहीं, योगी सरकार जल्द ही लोक सेवा आयोग, प्रयागराज से चयनित 1,230 नर्सिंग अधिकारियों (महिला/पुरुष) के नियुक्ति पत्रों का वितरण करेगी। राजकीय मेडिकल कॉलेजों में सहायक आचार्य, आचार्य और प्रवक्ता फार्मेसी के पदों पर होगी भर्ती अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा अमित कुमार घोष ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विभाग में खाली पदों पर नियुक्ति करने के निर्देश दिये थे ताकि प्रदेश के ज्यादा से ज्यादा युवाओं को सरकारी नौकरी मिल सके। इसी के तहत चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से राजकीय मेडिकल कॉलेजों में सहायक आचार्य, आचार्य एवं प्रवक्ता (फार्मेसी) के पदों का अधियाचन लोक सेवा आयोग, प्रयागराज के माध्यम से चयन कराने के लिए भेजा गया है। उन्होंने बताया कि जल्द ही इन पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया जाएगा। राजकीय मेडिकल कॉलेजों के करीब 12 सौ पदों क्रमश: सहायक आचार्य के 1,112 पदों, आचार्य के 44 पदों और प्रवक्ता (फार्मेसी) के 11 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसके अलावा नर्सिंग कैडर को सशक्त करने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जल्द ही लोक सेवा आयोग, प्रयागराज से चयनित 1,230 नर्सिंग अधिकारियों (महिला एवं पुरुष) को नियुक्ति पत्र वितरित करेंगे। इससे प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूती मिलेगी। भर्ती से शोध गतिविधियों में होगा इजाफा, छात्रों को मिलेगा बेहतर मार्गदर्शन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट निर्देश दिये हैं कि प्रदेश में मेडिकल एजुकेशन को केवल डिग्री देने तक ही सीमित न रखा जाए, बल्कि उसे गुणवत्ता, शोध और व्यावहारिक प्रशिक्षण से जोड़ा जाए। इसी के तहत पिछले पौने नौ वर्षों में प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या में ऐतिहासिक वृद्धि हुई है। जहां पहले कुछ गिने-चुने जिलों तक मेडिकल शिक्षा सीमित थी, वहीं, आज लगभग हर जिले में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने का लक्ष्य पूरा हो चुका है। नए कॉलेजों के संचालन के लिए योग्य शिक्षकों और प्रशिक्षित स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। यह भर्ती उसी दिशा में बड़ा कदम है। राजकीय मेडिकल कॉलेजों में सहायक आचार्य, आचार्य और फार्मेसी प्रवक्ताओं की नियुक्ति से मेडिकल छात्रों को बेहतर मार्गदर्शन, शोध गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और चिकित्सा शिक्षा का स्तर राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो सकेगा। इससे भविष्य में प्रदेश को कुशल डॉक्टर, फार्मासिस्ट और स्वास्थ्य विशेषज्ञ मिलेंगे, जो आम जनता को बेहतर सेवाएं प्रदान करेंगे।

यूपी में सरकारी संपत्तियों के दाम घटेंगे, विकास प्राधिकरण व आवास विकास परिषद की पेशकशों पर 25% तक छूट

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में विकास प्राधिकरणों और आवास विकास परिषद की वर्षों से न बिक पाई फ्लैट व प्लॉट जैसी संपत्तियों की कीमतों में बड़ी राहत दी जाएगी। योगी सरकार के नए फैसले के तहत ऐसी अनिस्तारित संपत्तियों की कीमतों में 25 प्रतिशत तक की कटौती की जाएगी। इसके साथ ही सेल के माध्यम से बिक्री को बढ़ावा देने के लिए आवंटियों को अतिरिक्त रियायतें भी दी जा सकेंगी। नई योजनाओं की संपत्तियों के दाम भी कम होंगे राज्य सरकार द्वारा ब्याज दरों और अन्य चार्जेज को व्यावहारिक बनाए जाने से विकास प्राधिकरण और परिषद की नई योजनाओं की संपत्तियों के दाम भी 10 से 15 प्रतिशत तक कम होंगे। दरअसल, अभी तक 26 वर्ष पुराने शासनादेशों के आधार पर ही संपत्तियों का मूल्य तय किया जा रहा था, जिसमें 12 से 15 प्रतिशत तक ब्याज दर, 15 प्रतिशत कंटीजेंसी चार्ज और 10 से 15 प्रतिशत ओवरहेड चार्ज शामिल थे। इससे संपत्तियों के दाम काफी बढ़ गए थे और खरीदार नहीं मिल पा रहे थे। नई आदर्श कास्टिंग गाइडलाइंस तैयार वर्तमान स्थिति यह है कि प्रदेश में कुल 22,350 अनिस्तारित संपत्तियों में करीब 7,200 करोड़ रुपये फंसे हुए हैं। इसी समस्या को देखते हुए आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने पुराने शासनादेशों को समाप्त कर नई आदर्श कास्टिंग गाइडलाइंस तैयार की हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में आदर्श कास्टिंग गाइडलाइंस (मूलभूत सिद्धांत)-2025 को मंजूरी दे दी गई। नई गाइडलाइंस के अनुसार, वे संपत्तियां जो तीन वर्ष पुरानी हैं और पांच बार विज्ञापन निकालने के बावजूद नहीं बिक पाई हैं, उन्हें सेल के माध्यम से बेचने पर 25 प्रतिशत तक की छूट दी जा सकेगी। जानकारी एक सेंट्रलाइज्ड पोर्टल पर उपलब्ध होगी हालांकि, यह सुनिश्चित किया जाएगा कि छूट के बाद संपत्ति की कीमत पहली बार विज्ञापन में तय की गई मूल कीमत से कम न हो। सभी अनिस्तारित संपत्तियों की जानकारी एक सेंट्रलाइज्ड पोर्टल पर उपलब्ध होगी। इन संपत्तियों की बिक्री में किसी भी प्रकार का आरक्षण लागू नहीं होगा और पहले से प्राधिकरण या परिषद की संपत्ति रखने वाले लोग भी इन्हें खरीद सकेंगे। भुगतान व्यवस्था में भी राहत दी गई है     45 दिन में एकमुश्त भुगतान पर 6 प्रतिशत     60 दिन में भुगतान पर 5 प्रतिशत     90 दिन में भुगतान पर 4 प्रतिशत की छूट मिलेगी। निम्न आय वर्ग की संपत्तियों पर ब्याज दर घटाई गई कार्नर, पार्क फेसिंग या 18 मीटर अथवा उससे अधिक चौड़ी सड़क पर स्थित संपत्तियों पर लगने वाले अतिरिक्त चार्ज भी घटा दिए गए हैं। अब प्रत्येक के लिए 5 प्रतिशत और तीनों सुविधाओं के होने पर 15 प्रतिशत के बजाय 12 प्रतिशत अतिरिक्त चार्ज ही लिया जाएगा। निम्न आय वर्ग (LIG) की संपत्तियों पर ब्याज दर घटाकर 8 प्रतिशत कर दी गई है, जिससे उन्हें 2 प्रतिशत की अतिरिक्त राहत मिलेगी। इसके अलावा, नई कास्टिंग गाइडलाइंस लागू होने से विकास प्राधिकरण और परिषद की नई योजनाओं की संपत्तियों के दाम भी 10 से 15 प्रतिशत तक कम होंगे। इस तरह रखा जाएगा ब्याज दर नई व्यवस्था के तहत ब्याज दर को अधिकतम 15 प्रतिशत रखने के बजाय अब इसे स्टेट बैंक के एमसीएलआर से केवल एक प्रतिशत अधिक रखा जाएगा। सरकार का मानना है कि इन नई गाइडलाइंस से पूरे प्रदेश में संपत्तियों के मूल्यांकन की एक समान व्यवस्था बनेगी, कीमतें व्यावहारिक होंगी और अनिस्तारित संपत्तियों की समस्या काफी हद तक खत्म हो सकेगी।  

डिजिटल युग की चुनौतियों से निपटने के लिए पुलिस को तकनीकी रूप से सशक्त बना रही योगी सरकार

लखनऊ, डिजिटल लेनदेन और ऑनलाइन गतिविधियों के बढ़ते दायरे के साथ साइबर ठगी और हाईटेक अपराध के चलते आम नागरिकों की सुरक्षा और डिजिटल विश्वास को मजबूत करने के उद्देश्य से योगी सरकार साइबर अपराध के विरुद्ध सशक्त रणनीति के तहत लगातार ठोस कदम उठा रही है। इसी क्रम में साइबर क्राइम प्रशिक्षण पोर्टल के माध्यम से अब तक 84,705 पुलिस कर्मियों को प्रमाणित प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है, जिससे पुलिस बल को तकनीकी रूप से अधिक सक्षम बनाया गया है। चरणबद्ध तरीके से साइबर अपराध नियंत्रण का ढांचा किया मजबूत विधानसभा में पूछे गए एक प्रश्न के लिखित जवाब में सरकार ने साइबर ठगी और हाईटेक अपराधों पर नियंत्रण के लिए किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत जानकारी दी। जवाब में बताया गया कि वर्ष 2017 से पूर्व उत्तर प्रदेश में केवल दो साइबर क्राइम थाने (लखनऊ और गौतमबुद्धनगर) ही कार्यरत थे। साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौती को देखते हुए योगी सरकार ने चरणबद्ध तरीके से साइबर अपराध नियंत्रण का ढांचा मजबूत किया। इसके तहत 06 फरवरी 2020 को 16 परिक्षेत्रीय साइबर क्राइम थानों तथा 14 दिसंबर 2023 को 57 जनपदीय साइबर क्राइम थानों की स्थापना की गई। साथ ही प्रदेश के सभी जनपदीय थानों में साइबर सेल का गठन कर प्रशिक्षित पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई है। वर्तमान में प्रदेश के सभी जनपदों में कुल 75 साइबर क्राइम थाने संचालित हो रहे हैं, जबकि प्रत्येक जनपदीय थाने में साइबर सेल भी सक्रिय है। सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम सरकार ने यह भी अवगत कराया कि साइबर अपराध से बचाव के लिए अब तक 65,966 सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। वहीं, साइबर अपराध की त्वरित शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 की क्षमता 20 सीटों से बढ़ाकर 50 सीट कर दी गई है, जो 24×7 क्रियाशील है। सरकार के अनुसार, प्रशिक्षित पुलिस बल, मजबूत साइबर ढांचा और व्यापक जन-जागरूकता अभियान के माध्यम से प्रदेश में साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने की दिशा में लगातार प्रगति हो रही है।

योगी सरकार का एमएसएमई सेक्टर पर बड़ा भरोसा, अनुपूरक बजट में ठोस आर्थिक समर्थन

एमएसएमई कार्यालयी तंत्र को मजबूत करने के लिए सीधे बजटीय प्रावधान निवेश और रोजगार प्रोत्साहन नीतियों के अंतर्गत की गई ठोस व्यवस्था वैश्विक कंपनियों से जुड़कर एमएसएमई को बाजार और निर्यात का नया अवसर लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने एमएसएमई (माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम इंटरप्राइजेज) सेक्टर को सशक्त बनाने को लेकर अनुपूरक बजट में स्पष्ट और ठोस प्रावधान किए हैं। प्रदेश सरकार का मानना है कि एमएसएमई अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और इसके मजबूत होने से रोजगार और निवेश का विस्तार संभव है। लघु उद्योग भारती, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष, रविन्द्र सिंह ने कहा कि “उत्तर प्रदेश सरकार की निवेश अनुकूल नीतियों और नये अनुपूरक बजट प्रावधानों से एमएसएमई को बढ़ावा और प्रोत्साहन मिलेगा। उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में यह प्रभावी कदम है। सबसे बड़ी बात यह है कि योगी सरकार ने उद्यमियों और उद्योगों को सुरक्षित वातावरण देने का काम किया है“    एमएसएमई से जुड़े कार्यालयी तंत्र को मजबूत करने के लिए जिला उद्योग केंद्र के अधिष्ठान व्यय हेतु 1.5 करोड़ रुपये तथा उद्योग निदेशालय के अधिष्ठान व्यय के लिए भी 1.5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे जिलों में उद्यमियों को समय पर मार्गदर्शन, स्वीकृति और योजनाओं का लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि मजबूत ऑफिस सिस्टम से ही ईज ऑफ डूइंग बिजनेस जमीन पर दिखेगा। औद्योगिक निवेश और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति 2022 के अंतर्गत 823.43 करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि प्रस्तावित की गई है। इस राशि का बड़ा हिस्सा एमएसएमई इकाइयों को पूंजी निवेश, सब्सिडी, ब्याज अनुदान और रोजगार सृजन से जुड़े प्रोत्साहन के रूप में मिलेगा। इसके साथ ही औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति 2017 के लिए 300 करोड़ रुपये और अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास नीति 2012 के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे छोटे और मध्यम उद्योगों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। एमएसएमई सेक्टर को बड़े निवेश से जोड़ने के लिए फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट और फॉर्च्यून-500 कंपनियों की निवेश प्रोत्साहन नीति-2023 के अंतर्गत  371.69 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसका अप्रत्यक्ष लेकिन महत्वपूर्ण लाभ एमएसएमई इकाइयों को सप्लाई चेन, वेंडर डेवलपमेंट और निर्यात के रूप में मिलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में एमएसएमई सेक्टर को ठोस बजटीय समर्थन मिला है। यही कारण है कि प्रदेश तेजी से एमएसएमई हब के रूप में उभर रहा है और आने वाले समय में लाखों नए रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। इस समय  प्रदेश में लगभग 96 लाख एमएसएमई हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने, स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ाने के लिए आवंटित की बड़ी रकम

– एनआरएचएम को 2000 करोड़ और आयुष्मान भारत नेशनल हेल्थ प्रोटेक्शन मिशन के लिए 1200 करोड़ आवंटित   लखनऊ,  योगी सरकार ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को नई मजबूती देने के उद्देश्य से अनुपूरक बजट में चिकित्सा क्षेत्र के लिए बड़ा वित्तीय प्रावधान किया है। अनुपूरक बजट में लगभग 3,500 करोड़ रुपये की व्यवस्था कर योगी सरकार ने यह संकेत दिया है कि आमजन तक बेहतर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। अनुपूरक बजट में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर, अस्पतालों के विस्तार, आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधार के लिए धनराशि दी गई है। अनुपूरक बजट में चिकित्सा क्षेत्र को आवंटित धनराशि न केवल स्वास्थ्य योजनाओं को गति देगी, बल्कि यह प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को लंबे समय तक मजबूत करने की दिशा में अहम कदम भी है। ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों की सेवाएं होंगी और सशक्त मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में आयुष्मान भारत और राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन जैसी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी क्रम में आयुष्मान भारत मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों के लंबित और भविष्य में प्राप्त होने वाले चिकित्सा दावों के भुगतान के लिए 300 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आवश्यकता को अनुपूरक बजट में शामिल किया गया है। इससे निजी व सरकारी दोनों प्रकार के सूचीबद्ध अस्पतालों को समय पर भुगतान सुनिश्चित होगा और मरीजों को बिना किसी बाधा के उपचार मिल सकेगा। इसके अलावा, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के तहत संचालित विभिन्न योजनाओं के बेहतर कार्यान्वयन के लिए 2,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त व्यवस्था की गई है। इस राशि से ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों व जिला अस्पतालों की सेवाओं को और सशक्त किया जाएगा। साथ ही मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, पोषण, संक्रामक रोग नियंत्रण और स्वास्थ्य कर्मियों की सुविधाओं को भी मजबूती मिलेगी। गरीब और जरूरतमंद परिवारों को निशुल्क इलाज की सुविधा निरंतर मिलती रहेगी आयुष्मान भारत नेशनल हेल्थ प्रोटेक्शन मिशन के तहत सूचीबद्ध चिकित्सालयों के लंबित एवं प्राप्त होने वाले चिकित्सा दावों के भुगतान के लिए सबसे बड़ा प्रावधान किया गया है। इस मद में 1,200 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आवश्यकता को अनुपूरक बजट में शामिल किया गया है। यह कदम आयुष्मान भारत योजना को और प्रभावी बनाने के साथ-साथ गरीब व जरूरतमंद परिवारों को निशुल्क इलाज की सुविधा निर्बाध रूप से उपलब्ध कराने में सहायक होगा।

योगी सरकार की मंशा के अनुरूप जन-जन तक आयुष चिकित्सा पद्धति को पहुंचाने के लिए उठाया जा रहा कदम

स्वास्थ्य सेवाओं में आएगी पारदर्शिता, सीनियर सिटीजन को मिलेगी काफी राहत  लखनऊ योगी सरकार आयुष चिकित्सा पद्धतियां विश्व पटल पर पहचान दिलाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप आयुष विभाग अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने जा रहा है। दरअसल, आयुष विभाग आईआईटी कानपुर के सहयोग से एक अत्याधुनिक आयुष एप विकसित करेगा। इससे मरीजों को ऑनलाइन ओपीडी की सुविधा मिलेगी। साथ ही एप पर आयुष विभाग से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियां भी उपलब्ध कराई जाएंगी। योगी सरकार के इस कदम से न केवल आयुष चिकित्सा पद्धतियां आम जनता तक आसानी से पहुंचेंगी, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता भी आएगी। एप से सीनियर सिटीजन, महिलाओं और दूर-दराज के लोगों को मिलेगी काफी राहत आयुष प्रमुख सचिव रंजन कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जन-जन तक आयुष चिकित्सा पद्धतियों को पहुंचाना चाहते हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप आयुष एप बनाने के लिए आईआईटी कानपुर से बातचीत चल रही है। उन्होंने बताया कि एप लांच होने के बाद मरीजों को अस्पताल और आयुष केंद्रों में ओपीडी पंजीकरण के लिए लंबी लाइनों में खड़े होने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मरीज अपने मोबाइल के माध्यम से घर बैठे ही डॉक्टर से मिलने के लिए ऑनलाइन अपॉइंटमेंट ले सकेंगे। इससे समय की बचत होगी और अस्पतालों में भीड़ भी कम होगी। इस सुविधा से विशेषकर बुजुर्गों, महिलाओं और दूर-दराज के इलाकों से आने वाले मरीजों को काफी राहत मिलेगी। एप के जरिए मरीजों को आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी आयुष चिकित्सा पद्धतियों से जुड़ी विस्तृत जानकारी मिलेगी। एप पर विभिन्न बीमारियों के लिए उपलब्ध उपचार, दवाओं की जानकारी, नजदीकी आयुष अस्पताल और डिस्पेंसरी की सूची, डॉक्टरों का विवरण और स्वास्थ्य संबंधी सुझाव भी उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा योगी सरकार द्वारा चलाई जा रही आयुष से जुड़ी योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी भी एप पर मिलेगी। भविष्य में टेली परामर्श, ऑनलाइन रिपोर्ट जैसी सुविधाएं भी मिलेंगी एप को इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि आम नागरिक आसानी से इस्तेमाल कर सकेगा। एप को सुरक्षित, तेज और भरोसेमंद बनाया जाएगा, ताकि मरीजों का डाटा पूरी तरह सुरक्षित रहे। इसमें भविष्य में और भी नई सुविधाएं जोड़ने की योजना है। वहीं, आने वाले समय में एप के माध्यम से टेली-परामर्श, ऑनलाइन रिपोर्ट और डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड जैसी सुविधाएं भी शुरू की जाएंगी। इससे मरीजों को घर बैठे ही विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह मिल सकेगी। साथ ही आयुष चिकित्सा पद्धतियों पर लोगों का भरोसा और मजबूत होगा।

झांसी का कृषि विज्ञान केंद्र गोद लिए गांव के किसानों को निःशुल्क दे रहा उन्नत गेहूं, गोभी और सरसों के बीज

गोद लिए दस गांव के चयनित किसानों को निःशुल्क बोरान उर्वरक भी कराया जा रहा उपलब्ध अधिक पैदावार वाले बीज और पौधे निःशुल्क देकर किसानों को कृषि उपज बढ़ाने में की जा रही मदद झांसी योगी सरकार कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से किसानों को उन्नत खेती और अधिक पैदावार के लिए प्रेरित कर रही है। झांसी के भरारी में स्थित कृषि विज्ञान केंद्र गोद लिए गए दस गांव के चयनित किसानों को उन्नत खेती के लिए न सिर्फ प्रेरित कर रहा है बल्कि उन्हें निशुल्क बीज और उर्वरक भी प्रदान कर रहा है। इन किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र में आमंत्रित कर कृषि वैज्ञानिक उन्नत और अधिक पैदावार के तौर तरीकों से भी परिचित करा रहे हैं। झांसी के कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से गोद लिए गए गांव के किसानों को गेहूं की नई प्रजाति करनवंदना का बीज प्रदान किया गया है, जिसकी पैदावार परंपरागत गेहूं की तुलना में काफी अधिक होती है। सरसों की राधिका नस्ल के बीज प्रदान किए गए हैं, जिसमें शाखाएं अधिक होती हैं। इससे पैदावार अधिक होती हैं। फूलगोभी के भी उन्नत किस्म के तैयार पौधे प्रदान किए हैं, जिन्हें कृषि विज्ञान केंद्र में तैयार किया गया है। इन किसानों को बोरान उर्वरक भी प्रदान किया गया है, जो खेतों की उर्वर क्षमता बढ़ाने में सहायक होता है। कृषि विज्ञान केंद्र झांसी के वैज्ञानिक डॉ आदित्य कुमार सिंह ने बताया कि किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र में आमंत्रित कर उन्हें बीज, पौधे और उर्वरक प्रदान किए गए हैं। इन किसानों को पैदावार बढ़ाने के तौर-तरीके प्रदान करने के साथ ही निरंतर मार्गदर्शन भी प्रदान किया जा रहा है। आधुनिक तरीकों को अपनाकर किसान खेती में पैदावार बढ़ा सकते हैं।

नेशनल हाईवे के किनारे बनेगा महिला मार्केट प्लेस, गो-उत्पादों की होगी सीधी बिक्री

  गो सेवा, नवाचार और रोजगार का संगम जो गोशालाएं पहले की सरकारों में बोझ मानी जाती थीं, वे अब आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर इकाइयां बन रही हैं गोबर से ‘गो-कास्ट’ और वर्मी कम्पोस्ट, महिलाओं की आय बढ़ाने की पहल स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को मिलेगा रोजगार, हर माह होगी कमाई लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी गो-कल्याण योजना अब केवल संरक्षण तक सीमित नहीं रही, बल्कि नवाचार और महिला सशक्तिकरण का मजबूत मॉडल बनकर उभर रही है। एटा जनपद की मलावन गोशाला में शुरू हुई यह पहल प्रदेश में आत्मनिर्भर गोशालाओं की नई तस्वीर पेश कर रही है। जो गोशालाएं पहले की सरकारों में बोझ मानी जाती थीं, वे अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर इकाइयां बन रही हैं। यहां गो माता को ठंड से बचाने के लिए फूस और टाट की बोरी से तैयार विशेष प्रकार के ‘इको-थर्मल कंबल’ बनाए जा रहे हैं। ये कंबल न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं, बल्कि कम लागत में तैयार होकर गो संरक्षण को भी मजबूती दे रहे हैं। इसके साथ ही गोशाला में बर्मी कम्पोस्ट और गोबर से ‘गो-कास्ट’ जैसे नवाचारी उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं, जिसकी बाजार में जबरदस्त डिमांड है। गोबर से अगरबत्ती, धूपबत्ती, मोमेंटो और गमले बनाने के लिए 30 सखी दीदियां तैयार एटा के मुख्य विकास अधिकारी डॉ. नागेंद्र नारायण मिश्र ने इस मॉडल को गो-कल्याण, पुनर्चक्रण और ग्रामीण आजीविका का उत्कृष्ट संयोजन बताया। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी प्रेमरंजन सिंह के नेतृत्व में गोशाला को आय का बेहतर श्रोत बनाया जा रहा है। जो गोशालाएं पहले बोझ मानी जाती थीं, वे अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर इकाइयां बन रही हैं। सीडीओ डॉ. नागेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि कार्ययोजना के तहत प्रशिक्षण देकर 30 सखी दीदियों को तैयार किया जा रहा है, जो गोबर से अगरबत्ती, धूपबत्ती, मोमेंटो और गमले जैसे उत्पाद बनाएंगी। इसके अलावा मलावन राष्ट्रीय राजमार्ग के पास एक स्थायी मार्केट प्लेस विकसित किया जाएगा, जहां गो आधारित उत्पादों की सीधी बिक्री होगी। स्वयं सहायता समूह की महिलाएं हर माह निश्चित आय अर्जित कर सकेंगी इस पहल का सबसे प्रभावशाली पक्ष यह है कि इससे स्वयं सहायता समूह की महिलाएं हर माह निश्चित आय अर्जित कर सकेंगी। महिलाओं ने बताया कि वे आगे भी गोशाला संचालन, स्वच्छता, पोषण प्रबंधन और उत्पाद निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाते हुए इसे आत्मनिर्भर गोशाला मॉडल के रूप में विकसित करती रहेंगी। योगी सरकार की योजना से साफ है कि गोसेवा और रोजगार साथ-साथ चल सकते हैं। नवाचार, पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण के जरिए प्रदेश की गोशालाएं अब बोझ नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत कड़ी बनती जा रही हैं।