samacharsecretary.com

विकसित उत्तर प्रदेश-2047: पर्यावरण समावेशी नीतियों को धरातल पर उतारने के लिए ध्यान केंद्रित कर रही योगी सरकार

सोमवार को सृजन शक्ति के अंतर्गत 'बैलेंस्ड डेवलपमेंट एंड एनवायरमेंटल स्टीवर्डशिप' थीम पर हुआ सेक्टोरल वर्कशॉप भविष्य की जरूरतों के अनुरूप सतत पर्यावरण प्रबंधन का रोडमैप हो रहा क्रियान्वित लखनऊ, उत्तर प्रदेश को भविष्योन्मुख विकास के नए प्रतिमानों के अनुरूप परिवर्तित कर रही योगी सरकार पर्यावरण समावेशी नीतियों को धरातल पर उतारने के लिए ध्यान केंद्रित कर रही है। इसी क्रम में, विकसित उत्तर प्रदेश-2047 के अंतर्गत सोमवार को योजना भवन सभागार में सृजन शक्तिः बैलेंस्ड डेवलपमेंट एंड एनवायरमेंटल स्टीवर्डशिप थीम पर सेक्टोरल वर्कशॉप का आयोजन हुआ। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तथा उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (यूपीनेडा) के तत्वावधान में एक दिवसीय वर्कशॉप का शुभारंभ वन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण कुमार सक्सेना द्वारा किया गया। यह वर्कशॉप हरित ऊर्जा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की भविष्योन्मुख कार्यप्रणाली का चित्रण प्रस्तुत करने का माध्यम बना। वर्कशॉप में जोर दिया गया कि विकास एवं पर्यावरणीय संरक्षण को सम्मिलित करते हुए संतुलित एवं समग्र विकास सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। साथ ही, हरित विकास को नीति-निर्माण एवं कार्यान्वयन के प्रत्येक स्तर पर पर्याप्त महत्व प्रदान किया जाने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। इस कार्यशाला में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, तकनीकी विशेषज्ञों, शैक्षणिक संस्थानों तथा प्रमुख स्टेकहोल्डर्स ने सतत एवं जलवायु समग्र विकास हेतु दीर्घकालिक रणनीतियों पर व्यापक विचार-विमर्श किया और रोडमैप को लेकर सुझाव प्रस्तुत किए। यूपी में तेजी से हो रहा स्किल डेवलपमेंट वन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने कहा कि यूपी हर लिहाज से अग्रणी राज्य है, चाहे बात जनसंख्या की हो या फिर विकास की, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश वर्ष 2047 तक विकास के नए प्रतिमान स्थापित करेगा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में स्किल डेवलपमेंट तेजी से बढ़ रहा है। राज्य में सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में आईटीआई, पॉलिटेक्निक, कौशल विकास केंद्र तथा प्राइवेट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट खुल रहे हैं। यह रोजगार और विकास को नई दिशा दे रहे हैं। उन्होंने जोर दिया कि आम नागरिकों को प्रदूषण नियंत्रण एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक बनाने के लिए जन-जागरूकता कार्यक्रम कराया जाए। उन्होंने समुदाय की भागीदारी तथा विभागों के मध्य सुदृढ़ समन्वय को सुनिश्चित करने पर बल दिया, ताकि सभी विकास परियोजनाएं पर्यावरणीय दृष्टि से उत्तरदायी एवं सामाजिक रूप से समावेशी बन सकें। सुदृढ़ संस्थागत तंत्र विकसित करने की आवश्यकता अनिल कुमार, प्रमुख सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन ने नीति सुधारों में तीव्रता लाने एवं सुदृढ़ संस्थागत तंत्र विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि उत्तर प्रदेश जलवायु समावेशी अग्रणी राज्य के रूप में उभर सके। आलोक कुमार, प्रमुख सचिव योजना ने दीर्घकालिक विकास योजनाओं में जलवायु सम्बंधित विचारों को शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया, जिससे विकास सुनिश्चित किया जा सके। बी. प्रभाकर, पीसीसीएफ (मानिटरिंग) ने वनों के संरक्षण, पारिस्थितिकी तंत्र पुनःस्थापन तथा जिलास्तरीय जलवायु अनुकूलन उपायों के महत्व को रेखांकित किया। इंदरजीत सिंह, निदेशक, यूपीनेडा ने राज्य में नवाचार आधारित मॉडलों एवं सार्वजनिक-निजी सहभागिता के माध्यम से नवीकरणीय ऊर्जा को व्यापक रूप से बढ़ाने की क्षमता पर प्रकाश डाला। कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने पर जोर बी. चन्द्रकला, सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन ने नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने एवं कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने, परिपत्र अर्थव्यवस्था एवं संसाधन-कुशलता को बढ़ावा, पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्स्थापन एवं जैव विविधता संरक्षण सुदृढ़ करने, अवसंरचना को जलवायु समग्र बनाने एवं आपदा-जोखिम न्यूनीकरण मजबूत करने, हरित बांड, मिश्रित वित्त एवं अंतरराष्ट्रीय जलवायु निधियों के माध्यम से जलवायु वित्त जुटाने की आवश्यकता पर जोर दिया। मनीष मित्तल, सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विकास के प्रत्येक क्षेत्र में पर्यावरणीय स्थिरता के एकीकरण की बढ़ती आवश्यकता पर बल दिया। कार्यशाला में नीति आयोग की परामर्शदाता डॉ. स्वाति सैनी, नाबार्ड के उप महाप्रबंधक सिद्धार्थ शंकर, आईआईटी कानपुर के कोटक स्कूल ऑफ सस्टेनिबिलिटी के डीन सच्चिदानंद त्रिपाठी, जीआईजेड के निदेशक हैंस जर्गेन समेत विभिन्न पैनलिस्ट्स ने जैव विविधता संरक्षण, ऊर्जा नियोजन तथा जलवायु समावेशी अवसंरचना विकास के लिए साक्ष्य-आधारित, स्थानीय रूप से उपलब्ध प्रौद्योगिकियों और कार्य करने को लेकर विचार प्रस्तुत किए।

योगी सरकार की सौर क्रांति, गांव-गांव पहुंची रोशनी, बदल गई ऊर्जा की तस्वीर

ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता उत्तर प्रदेश, योगी सरकार का रिकॉर्ड प्रदर्शन सौर क्रांति ऊर्जा के साथ-साथ रोजगार का उजाला लेकर भी आयी लखनऊ,  कभी उत्तर प्रदेश के गांवों में शाम ढलते ही अंधेरा तेजी से फैल जाता था। घरों में टिमटिमाती रोशनी, बढ़ते बिजली बिल और अनिश्चित सप्लाई लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा थे। लेकिन योगी सरकार ने राज्य की ऊर्जा कहानी को बदलने का दृढ़ निश्चय किया। लक्ष्य सिर्फ बिजली देना नहीं था बल्कि प्रदेश के हर घर तक एक नई रोशनी, नई उम्मीद और नई समृद्धि पहुंचाना था। यही सोच आगे चलकर एक ऐसी क्रांति बनी, जिसने उत्तर प्रदेश को सौर ऊर्जा उत्पादन में राष्ट्रीय पटल पर तीसरे स्थान पर ला खड़ा किया। आज गांवों की छतों पर चमकते सोलर पैनल न सिर्फ बिजली पैदा कर रहे हैं, बल्कि नए भारत की परिकल्पना को साकार भी कर रहे हैं। जब योजना शुरू हुई तो अंदाजा नहीं था कि जनता का इतना जबरदस्त समर्थन मिलेगा। लेकिन रिकॉर्ड बताते हैं कि उत्तर प्रदेश में कुल 13,46,040 आवेदन प्राप्त हुए। यह स्वयं दिखाता है कि लोग बदलाव के लिए कितने तत्पर थे। मात्र 18 महीनों में 2,81,769 सोलर रूफटॉप संयंत्रों का इंस्टॉलेशन और पिछले 4.5 महीनों में रिकॉर्ड 1,30,000 संयंत्रों की स्थापना ने उत्तर प्रदेश को महाराष्ट्र और गुजरात के बाद देश का तीसरा सबसे बड़ा सौर ऊर्जा उत्पादक राज्य बना दिया। प्रदेश में 976.21 मेगावॉट रूफटॉप सोलर कैपेसिटी स्थापित हो चुकी है। यह उपलब्धि न सिर्फ तकनीकी है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक रूप से भी परिवर्तनकारी है। सौर ऊर्जा योजना अब तक 2,85,025 उपभोक्ताओं के लिए वरदान साबित हुई है। जहां पहले प्रति घर 1500 रुपये तक का बिजली बिल आता था, वहीं अब सोलर रूफटॉप की वजह से हर महीने काफी बचत हो रही है। ऐसे में इससे एक साधारण परिवार के लिए आर्थिक स्थिरता और भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में यह बचत खेती-किसानी में सहारा बन रही है, जबकि शहरी इलाकों में बिजली पर निर्भर छोटे उद्यमों को नया जीवन मिल गया है। सौर ऊर्जा क्रांति ने सिर्फ रोशनी नहीं फैलाई बल्कि इसने रोजगार के विशाल द्वार भी खोले। अकेले उत्तर प्रदेश में 54,000 से अधिक युवाओं को सीधा रोजगार मिला है। देशभर में सोलर मॉड्यूल निर्माण, इन्वर्टर, वायरिंग, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में लाखों नौकरियां सृजित हुईं। साफ है कि यह योजना ऊर्जा के साथ-साथ रोजगार का भी उजाला लेकर आई है। मुफ्त बिजली, घरेलू बचत और रोजगार, इन तीन स्तंभों पर आधारित यह योजना अगले 25 वर्षों में प्रदेश की GDP में हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त योगदान देगी। ऊर्जा लागत में कमी ने छोटे व्यापारों और स्टार्टअप्स को प्रतिस्पर्धा में और मजबूत बना दिया है। रोजाना 40 लाख यूनिट से अधिक बिजली का उत्पादन हो रहा है। यह सालाना करोड़ों यूनिट ऊर्जा उत्पादन के बराबर है और कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी लाता है। जितनी कमी कई करोड़ पेड़ों के बराबर पर्यावरणीय लाभ देती है। वाराणासी के रहने वाले श्वसन रोग विशेषज्ञ और पीएम सूर्य घर के तहत सोलर संयंत्र का उपयोग कर रहें डॉ एस के श्रीवास्तव का कहना है कि बिजली और पैसों की बचत के साथ सोलर लगाने पर सरकार द्वारा मिल रही सब्सिडी सोने पर सुहागा है। राज्य सरकार की ये योजना ऐसे ही चलती रही तो आने वाले समय में पर्यावरण सुरक्षा के साथ ही श्वास के रोगियों की संख्या में भी कमी आएगी। वहीं दनियालपुर के रहने वाले इम्तियाज़ अहमद ने बताया कि योगी सरकार इस पर सब्सिडी नहीं देती तो सोलर संयंत्र लगवा पाना मुश्किल था।   सौर पार्क बनाने के लिए जहां 4000 एकड़ भूमि की आवश्यकता थी, उसे संरक्षित रख कर बड़ा कदम उठाया गया। यह भूमि कृषि, जल संरक्षण, उद्योग और अन्य सार्वजनिक हितों के लिए सुरक्षित रहेगी। जाहिर है कि ये  विकास और पर्यावरण का संतुलित मॉडल है।

योगी सरकार में ओडीओपी और नीतिगत सुधार बन रहे आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम

ओडीओपी से बदला महिलाओं का आर्थिक परिदृश्य, लाखों हस्तशिल्पियों को मिला वैश्विक मंच स्वयं सहायता समूह व मुद्रा ऋण से मजबूत हुई ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति परंपरागत कलाओं को पुनर्जीवित कर महिलाओं ने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर बढ़ाया उत्तर प्रदेश का मान मिशन शक्ति से लेकर ई–कॉमर्स लिंकेज तक, नीतिगत सुधारों से महिलाओं की सशक्त भागीदारी हुई सुनिश्चित लखनऊ, उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के लिए प्रतिबद्ध योगी सरकार की सर्व समावेशी नीतियां अब राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी अपना व्यापक प्रभाव दिखा रही हैं। इसी का सकारात्मक परिणाम अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला (आईआईटीएफ) में भी देखने को मिल रहा है। इस वृहद आयोजन में इस वर्ष उत्तर प्रदेश की महिलाओं की असाधारण भागीदारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि योगी सरकार की योजनाएँ महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण में निर्णायक भूमिका निभा रही हैं। मिशन शक्ति, मुद्रा ऋण, कन्या सुमंगला, महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के विस्तार और ओडीओपी जैसी पहल ने महिलाओं को न केवल स्वरोजगार से जोड़ा है बल्कि उन्हें वैश्विक मंच तक पहुँचाने का मार्ग भी प्रशस्त किया है। यही कारण है कि आईआईटीएफ के ओडीओपी पवेलियन में 60% भागीदारी महिलाओं की रही है, जहां उनकी पारंपरिक कलाओं, हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों ने देश–विदेश के खरीदारों का ध्यान आकर्षित किया है। ओडीओपी और सरकारी नीतियों ने लुप्त होती कलाओं को पुनर्जीवित कर महिलाओं की आय, सम्मान और पहचान तीनों में वृद्धि की है। योगी सरकार की नीतियां बदल रहीं महिलाओं की तकदीर महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता दिलाने के लिए योगी सरकार ने मिशन शक्ति को बड़े स्तर पर लागू किया है। इसके तहत 15.35 लाख महिलाओं को विभिन्न योजनाओं से जोड़कर स्वरोजगार उपलब्ध कराया गया है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2022-23 में 1.14 करोड़ से अधिक खाते स्वीकृत हुए, जिनमें 80% से अधिक लाभार्थी महिलाएँ थीं। वहीं, कन्या सुमंगला योजना के माध्यम से 15 लाख से अधिक बालिकाओं को शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए आर्थिक सहायता प्रदान कर उन्हें विकास की मुख्यधारा में जोड़ा गया। इन नीतियों से महिलाओं की श्रम भागीदारी दर में भी तेजी से सुधार हुआ  है, जो 2017 के 10.6% से बढ़कर 2023 में 17.5% से अधिक हो चुकी है। सरकार की योजनाओं ने महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता व उद्यमिता को सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक आधार दोनों प्रदान किए हैं। ओडीओपी से महिलाएं बनीं बड़े स्तर की उद्यमी, आईआईटीएफ में दिखा प्रभाव उत्तर प्रदेश की ओडीओपी योजना महिलाओं के लिए आर्थिक परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यम बनकर उभरी है। ओडीओपी के जरिए लाखों महिला कारीगरों, बुनकरों और उद्यमियों को लाभ मिला है। इनमें चिकनकारी, जरी-जरदोजी, पीतल उद्योग, बनारसी सिल्क, टेराकोटा, लकड़ी के खिलौने और अनेक पारंपरिक शिल्प शामिल हैं। 60,000 से अधिक महिला कारीगरों को फ्री प्रशिक्षण और आधुनिक टूलकिट प्रदान किए जाने से उनकी उत्पादकता और गुणवत्ता में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। ई-कॉमर्स के माध्यम से हजारों महिला एमएसएमई उद्यमियों को अमेजॉन, फ्लिपकार्ट और अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्मों से जोड़कर वैश्विक बाजारों तक पहुँचाया गया, जिससे निर्यात में वृद्धि हुई और आय में स्थायी सुधार दर्ज हुआ। आईआईटीएफ के ओडीओपी पवेलियन में 60% महिलाएं शामिल हुईं, जिन्होंने अपनी कला से उत्तर प्रदेश को देश–विदेश में पहचान दिलाई। यह न सिर्फ राज्य की परंपरागत कला के पुनरुत्थान का सबूत है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक उत्थान का भी। महिला सशक्तिकरण के लिए सरकार के सतत प्रयास बने बदलाव की आधारशिला महिलाओं की आर्थिक मजबूती सुनिश्चित करने के लिए योगी सरकार ने स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लाखों महिलाओं को स्वावलंबन की दिशा में अग्रसर किया है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 4.5 लाख से अधिक महिला स्वयं सहायता समूहों को वित्तीय वर्ष 2022-23 में ₹1,000 करोड़ से अधिक का ऋण उपलब्ध कराया गया। योगी सरकार के सकारात्मक प्रयासों का संपूर्ण प्रभाव आईआईटीएफ में साफ नजर आया, जहां महिला उद्यमियों ने न केवल बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था, संस्कृति और हस्तशिल्प को वैश्विक पहचान दिलाई। झांसी की वंदना व शिवानी शर्मा का उदाहरण अनुकरणीय है। इन्होंने ओडीओपी केटेगरी के अंतर्गत न केवल प्रशिक्षण व वित्तीय सहायता प्राप्त की, बल्कि घर आधारित काम को संगठित उद्यम में बदला। इसका परिणाम है कि आईआईटीएफ में उनके पारंपरिक खिलौना उत्पादों को न केवल बड़े ऑर्डर मिल रहे हैं बल्कि आर्थिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। यह इस बात का भी उदाहरण है कि कैसे परंपरागत कलाओं को नया जीवन और महिलाओं को नई उड़ान देने में योगी सरकार की नीतियां निर्णायक साबित हुई हैं।

सीएम योगी की नीतियों से अनुसूचित जनजातीय गांवों में संतृप्ति आधारित विकास को मिला बल

आवास, भूमि अधिकार, रोजगार और शिक्षा बनीं व्यापक कल्याण का माध्यम ऊदा देवी सहित महिला वीरांगनाओं के नाम पर तीन पीएसी बटालियन का गठन बिरसा मुंडा, सुहेलदेव जैसे उपेक्षित नायकों को पहचान दिलाकर सांस्कृतिक पुनर्जागरण को दिशा दे रहीं योगी सरकार की नीतियां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीतियाँ समाज के अंतिम पायदान पर स्थित वंचितों को मुख्यधारा में लाने का बन रहीं मजबूत आधार लखनऊ, उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार सामाजिक न्याय, सांस्कृतिक सम्मान और अवसरों की समानता को शासन का आधार बनाते हुए अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग को मुख्यधारा में प्रतिष्ठित करने की दिशा में निर्णायक कदम उठा रही है। इसी का परिणाम है कि जनजातीय गांवों में संतृप्ति आधारित विकास, महिलाओं की सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण, युवाओं की शिक्षा और रोजगार के अवसर सृजित करने के साथ ही योगी सरकार उपेक्षित नायकों, धरती आबा बिरसा मुंडा, महाराजा सुहेलदेव और वीरांगना ऊदा देवी को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की पहल पर कार्य कर रही है। इससे कमजोर वर्गों में आत्मविश्वास और सम्मान की नई भावना पैदा हुई है। मुख्यमंत्री योगी की नीतियाँ विकास और सम्मान दोनों के संतुलित सूत्र पर आधारित हैं, जिनका लक्ष्य प्रदेश के हर वंचित परिवार को सशक्त बनाना है। जनजातीय गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर योगी सरकार की जनजातीय विकास नीति धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के रूप में मूर्त रूप ले चुकी है। इसके जरिए 26 जिलों के 517 जनजातीय बहुल गांवों में संतृप्ति आधारित विकास लागू किया गया है, जिससे सरकारी योजनाओं की सार्वभौमिक पहुँच सुनिश्चित हो सके। थारू और बुक्सा समेत विभिन्न जनजातियों से जुड़े 11 लाख से अधिक लोगों को सड़क, बिजली, आवास और स्वच्छ जल जैसी बुनियादी सुविधाएँ प्रदान की गई हैं। विशेष रूप से 815 बुक्सा परिवारों को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत सुरक्षित आवास उपलब्ध कराए गए हैं। उल्लेखनीय है कि वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत 13 जिलों के 23,000 से अधिक वनवासी परिवारों के भूमि दावों को रिकॉर्ड में दर्ज कर उनकी पीढ़ियों से लंबित मांगों को पूरा किया गया। शिक्षा के क्षेत्र में 1.5 लाख से अधिक जनजातीय विद्यार्थियों को छात्रवृत्तियाँ और शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ मिला, जबकि लखीमपुर खीरी और बलरामपुर के नौ आश्रम पद्धति विद्यालय 2,000 से अधिक बच्चों को गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। युवाओं के लिए अवसर, महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ावा योगी सरकार ने युवाओं को प्रशासनिक सेवाओं और सरकारी नौकरियों में व्यापक अवसर देते हुए प्री एग्जामिनेशन ट्रेनिंग सेंटर योजना के तहत 6,500 युवाओं को प्रशिक्षण उपलब्ध कराया, जिनमें से 700 से अधिक उम्मीदवार प्रशासनिक पदों के लिए चयनित हुए हैं। वित्तीय वर्ष 2023-24 में पुलिस विभाग में 60,244 पदों की भर्ती प्रक्रिया में अनुसूचित जनजाति वर्ग के सभी आरक्षित पद भरे जाना इस परिवर्तन का बड़ा प्रमाण है। वहीं महिला सुरक्षा और सम्मान को नई पहचान देने के लिए योगी सरकार ने तीन पीएसी बटालियनों का गठन वीरांगनाओं के नाम पर किया है, जिनमें 1857 की बहादुर दलित नायिका ऊदा देवी का नाम शामिल है। ऊदा देवी के ही नाम पर प्रदेश की राजधानी में प्रतिमा की स्थापना भी की गई है, जो पासी समाज के गौरवशाली अतीत का प्रतिनिधित्व कर रही है। यह कदम न केवल सुरक्षा बलों में महिला प्रतिनिधित्व को बढ़ाता है, बल्कि इतिहास की उन स्त्रियों को सम्मान देता है जिन्हें लंबे समय तक उपेक्षित रखा गया। इसी के साथ थारू हस्तशिल्प कंपनी ने 371 महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को राष्ट्रीय बाजार से जोड़कर आर्थिक आत्मनिर्भरता की राह को मजबूत किया है। नट और बंजारा जैसे विमुक्त घुमंतू समुदायों के लिए 101 आश्रम विद्यालय और 9 सर्वोदय स्कूल सामाजिक सुरक्षा और स्थिरता के केंद्र के रूप में विकसित किए गए हैं। सामाजिक एकता और आत्मगौरव का संदेश योगी सरकार ने ऐतिहासिक उपेक्षा का शिकार रहे जननायकों और नायिकाओं को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का मिशन चलाया है। मिर्जापुर और सोनभद्र में धरती आबा बिरसा मुंडा के नाम पर निर्मित संग्रहालय और बलरामपुर में थारू संग्रहालय जनजातीय विरासत को सहेजने के महत्वपूर्ण केंद्र बने हैं। महाराजा सुहेलदेव के सम्मान में किए गए सरकारी उपक्रमों ने ओबीसी समाज में गौरव और आत्मसम्मान को मजबूत आधार दिया है। यह सांस्कृतिक पुनर्जागरण केवल इतिहास को पुनर्स्थापित नहीं कर रहा, बल्कि सामाजिक एकता और आत्मगौरव का नया संदेश दे रहा है। स्कूल पाठ्यक्रम में सुधार, छात्रवृत्तियों का विस्तार, महिला सुरक्षा ढांचे का सुदृढ़ीकरण और कमजोर वर्गों की सांस्कृतिक पहचान को प्रतिष्ठा देना, ये सभी कदम मिलकर स्पष्ट करते हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित वर्गों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहे हैं।

नाथनगरी में गूंजेगी सभ्यता की 5000 साल पुरानी गाथा, योगी सरकार का पर्यटन और रोजगार पर विशेष जोर

भित्ति कला से बरेली बनेगी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक नगरी 19 फोकस वॉल से शहर बनेगा उत्तर प्रदेश का नया सांस्कृतिक–पर्यटन केंद्र फोकस वॉल से होगा सांस्कृतिक क्रांति का आगाज़, रोशन होगी आध्यात्मिक पहचान *अजंता–एलोरा की तर्ज पर बनेंगीं कलाकृतियाँ, नाथ परंपरा की मिलेगी झलक, योगी मॉडल का नया अध्याय से बरेली बनेगा अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक मार्ग का आकर्षण बरेली,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी परियोजना से नाथ नगरी बरेली अब सांस्कृतिक–आध्यात्मिक कला के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित होने जा रही है। शहर के प्रमुख चौराहों, मार्गों, धार्मिक स्थलों और सरकारी परिसरों में 19 भव्य फोकस वॉल का निर्माण किया जाएगा। बरेली में दिखेगी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक झलक भित्ति वॉल पर भारत की प्राचीन सभ्यता, नाथ परंपरा, महाभारतकालीन इतिहास और स्थानीय सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहरों का ऐसा शानदार प्रदर्शन होगा, जैसा अब तक किसी भी शहर में नहीं देखा गया।  क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी रविंद्र कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप युवाओं को भारत के गौरवशाली अतीत, प्राचीन और समृद्धशाली संस्कृति से परिचय करायेगी। युवाओं और पर्यटकों को बरेली के 5000 वर्ष पुराने इतिहास और आध्यात्मिक विरासत से जोड़ने का माध्यम बनेगी। उन्होंने बताया कि फोकस वॉल का विचार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उस परिकल्पना से प्रेरित है जिसमें उत्तर प्रदेश की सभ्यता को ग्लोबल टूरिज्म मॉडल से जोड़कर रोजगार, पर्यटन और सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था को बढ़ाना शामिल है। अजंता-एलोरा की तर्ज पर बनेगी भित्ति कला, जीवंत होंगी देवकथाएँ और नाथ परंपरा इन फोकस वॉल पर बनने वाले भित्ति–चित्र अजंता–एलोरा की शैली पर आधारित होंगे। इन चित्रों में भगवान शिव के त्रिशूल और डमरू, नाथ योगियों के प्रतीक, देवी–देवताओं की आकृतियां, बरेली की आध्यात्मिक पहचान, महाभारतकालीन नगर की विरासत और स्थानीय लोककला को जीवंत कलात्मक स्वरूप दिया जाएगा। पर्यटन विभाग ने सर्वे करने के बाद ऐसे स्थानों को चुना है। जहां से सबसे ज्यादा पर्यटक और राहगीर गुजरते हैं। जिससे उनकी नजर अनायास ही फोकस वाल पर चली जायेगी। फोकस वाल को आधुनिक रंग रोगन और सज्जा के साथ भव्य रूप दिया जा रहा है। जिससे वहां से गुजरने वालों की आंखे बरवस ही उस ओर खिंची चली जायेंगी। शहर के सर्वाधिक आवाजाही वाली जगह पर बनेगी फोकस वॉल मनोहर भूषण इंटर कॉलेज ग्राउंड, एमजेपी रोहिलखंड विश्वविद्यालय, सुरेश शर्मा नगर चौराहा, डी.डी.पुरम पार्क, नियर स्टेडियम, कुदेशिया अंडरपास, बीसलपुर चौराहा, विकास भवन चौराहा, आयुक्त कार्यालय, उद्योग विभाग कार्यालय, त्रिवटी नाथ मंदिर मैकेनियर रोड, 100 फुटा तिराहा आदिनाथ चौक, इन्वर्टिस तिराहा बड़ा बाइपास, रेलवे स्टेशन, मिनी बाइपास इज्जतनगर रेलवे स्टेशन, झुमका तिराहा, और पर्यटन कार्यालय रोहिला होटल वॉल। पर्यटन, सांस्कृतिक गौरव और रोजगार-तीन मोर्चों पर बड़ा बदलाव नैनीताल, रामनगर, काठगोदाम, पीलीभीत टाइगर रिजर्व, दुधवा नेशनल पार्क और उत्तराखंड की ओर जाने वाले हजारों पर्यटक रोज बरेली से गुजरते हैं, लेकिन शहर के वास्तविक सांस्कृतिक वैभव से अनजान रहते हैं। अब फोकस वॉल उन्हें पहली बार बरेली की आध्यात्मिक परंपरा, महाभारतकालीन पहचान, सांस्कृतिक विरासत और लोककला से परिचित कराएगी। यह परियोजना स्थानीय कलाकारों, पेंटरों, शिल्पियों और तकनीकी कार्यकर्ताओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन भी करेगी। पर्यटन विभाग के अनुसार, फोकस वॉल बनने के बाद नाथनगरी बरेली को उत्तर प्रदेश के धार्मिक–सांस्कृतिक पर्यटन मार्ग में शामिल करने का भी प्रस्ताव है। 6 करोड़ 21 लाख रुपये की लागत से बदलेगा शहर तिराहा और चौराहा इस परियोजना पर कुल 621.33 लाख रुपये (लगभग 6 करोड़ 21 लाख 33 हजार रुपये) खर्च किए जाएंगे। क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी रविंद्र कुमार ने कहा कि बरेली केवल झुमके तक ही सीमित नहीं है। यह योगियों, सिद्ध–नाथों, ऋषि–मुनियों और प्राचीन सभ्यता का नगर है। फोकस वॉल आने वाली पीढ़ियों को बरेली की असली आत्मा से परिचित कराएगी। यह न सिर्फ शहर के सौंदर्यीकरण की योजना है, बल्कि बरेली के सांस्कृतिक पुनरुद्धार और पर्यटन अर्थव्यवस्था की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

आगरा में ‘गीता गोविंद वाटिका’ लिखेगी पर्यटन विकास का नया अध्याय

जोनल पार्क में 19 एकड़ क्षेत्र में ₹4.20 करोड़ से विकसित हो रही 'गीता गोविंद वाटिका' थीम लाइटिंग और लेजर शो बनेंगे रात्रि आकर्षण, पर्यटकों के रात्रि प्रवास की भी होगी सुविधा वाटिका में 'तुलसी की 100 से ज्यादा प्रजातियां बनेंगी औषधीय जानकारी के साथ प्राकृतिक आकर्षण का केंद्र आगरा, योगी सरकार ब्रज के पर्यटन को केवल ऐतिहासिक स्मारकों तक सीमित न रखकर, उसे ब्रज की समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत से जोड़कर एक नया आयाम दे रही है। इसी कड़ी में, ताजनगरी फेस टू स्थित जोनल पार्क के 19 एकड़ क्षेत्र में 'गीता गोविंद वाटिका' विकसित की जा रही है। इस वाटिका का प्राथमिक लक्ष्य ताजमहल और अन्य स्मारकों का दीदार करने आने वाले पर्यटकों के रात्रि प्रवास को बढ़ाना और उन्हें ब्रज की समृद्ध धार्मिक संस्कृति से परिचित कराना है।         मुख्यमंत्री पर्यटन विकास सहभागिता योजना के तहत इस वाटिका को लगभग ₹4.20 करोड़ की लागत से विकसित किया जा रहा है। योजना में 50 प्रतिशत राशि राज्य सरकार और शेष 50 प्रतिशत आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) वहन कर रहा है। इस फंड से यहाँ थीम लाइटिंग और एक भव्य लेजर शो का आयोजन किया जाएगा, जो रात्रि में पर्यटकों के लिए एक नया और आकर्षक अनुभव होगा। आगरा बनेगा सांस्कृतिक पर्यटन का भी केंद्र आगरा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एम. अरून्मोली ने कहा कि प्रदेश सरकार लक्ष्य आगरा को सिर्फ ऐतिहासिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पर्यटन का भी केंद्र बनाना है। 'गीता गोविंद वाटिका' हमारे इसी विजन का हिस्सा है। आगरा में आने वाले पर्यटक अब तक केवल दिन में स्मारक देखते थे। 'गीता गोविंद वाटिका' के माध्यम से हम उन्हें रात में रुकने के लिए एक सुंदर और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध स्थान प्रदान कर रहे हैं। रात्रि प्रवास बढ़ने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को सीधे गति मिलेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।" आस्था और प्रकृति का अनूठा संगम वाटिका के अंदर दो एकड़ भूमि पर एक विशाल मुक्ताकाशीय मंच तैयार किया जा रहा है, जहाँ भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं, रासलीला और विभिन्न धार्मिक आयोजनों का नियमित मंचन किया जाएगा। धार्मिक तत्वों को प्राथमिकता देते हुए यहाँ कृष्ण कालीन वनस्पतियों के पौधे लगाए जा रहे हैं, और सबसे महत्वपूर्ण, भगवान श्री कृष्ण के गीता उपदेश को आकर्षक तेल चित्रों एवं शिलालेखों पर अंकित कराया जा रहा है। इसके अलावा, एक एकड़ भूमि पर एक विशेष तुलसी वन बनाया जाएगा, जिसमें तुलसी की 100 प्रजातियाँ होंगी, जिनके औषधीय गुणों की जानकारी भी आगंतुकों को मिलेगी। पर्यटन उद्योग में उत्साह आगरा टूरिज्म गिल्ड के अध्यक्ष अमूल्य कक्कड़ ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि योगी सरकार का यह कदम पर्यटन उद्योग के लिए गेम चेंजर साबित होगा। आगरा को अब तक केवल वन डे डेस्टिनेशन (एक दिवसीय गंतव्य) के रूप में जाना जाता था। 'गीता गोविंद वाटिका' इसे ओवरनाइट डेस्टिनेशन (रात्रि प्रवास गंतव्य) में बदलने में मदद करेगी। सांस्कृतिक और धार्मिक प्रस्तुतियों का रात्रि में होना पर्यटकों को आकर्षित करेगा और हमारे स्थानीय व्यवसायों, जैसे होटल, रेस्तरां और गाइड सेवाओं को सीधे लाभ होगा। उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल आगरा के पर्यटन को एक नया आयाम देगी, बल्कि योगी सरकार की नीतियों के तहत ब्रज की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को भी प्रभावी ढंग से वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करेगी।

आजीविका मिशन की मदद से ग्रामीण महिलाओं का समूह तैयार कर रहा एलईडी बल्ब

झांसी में ग्रामीण महिलाओं का समूह एलईडी बल्ब बनाने और मार्केटिंग का खुद कर रहा काम झांसी उत्तर प्रदेश की योगी सरकार राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भरता के लिए प्रेरित कर रही है। महिलाओं के कई समूहों ने अभिनव पहल करते हुए प्रेरणा देने वाली मिसाल कायम की है। ऐसा ही एक उदाहरण प्रस्तुत किया है झांसी जिले के चिरगांव ब्लॉक के ग्राम जरियाई की जय मां रतनगढ़ वाली महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने। इन महिलाओं ने उद्यमिता की राह पर कदम बढ़ाते हुए एलईडी बल्ब बनाने का काम शुरू किया है। महिलाओं का समूह बल्ब बनाकर इस एलईडी बल्ब को अपने गांव और आसपास के क्षेत्रों में बिक्री करता है। जय मां रतनगढ़ वाली महिला स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष अंजना के अनुसार ने उनके समूह से 12 महिलाएं जुड़ी हैं। लगभग 8 महीने पहले एलईडी बल्ब बनाने का काम उनके समूह ने शुरू किया है। महिलाओं के समूह ने इस काम को शुरू करने के लिए दस हजार रूपये जुटाए और उससे जरूरी सामान मंगवाए। समूह की महिलाओं ने लोन भी लिया। योगी सरकार ने महिलाओं को बल्ब निर्माण का प्रशिक्षण दिलाया। समूह की महिलाओं को बल्ब बनाने के लिए रॉ मैटेरियल प्रदान किया जाता है। महिलाएं इस मैटेरियल से एलईडी बल्ब बनाकर बिक्री का काम करती हैं। समूह की महिलाएं हर रोज 150 से अधिक बल्ब तैयार करती हैं और उसकी बिक्री की रणनीति भी खुद तैयार करती हैं।  चिरगांव ब्लॉक की बीएमएम कल्पना के अनुसार स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को समूह का गठन कराने के बाद संबंधित काम का प्रशिक्षण दिलाया गया। इन उत्पादों की बिक्री के लिए प्रदर्शनियों और मेलों में सरकार की ओर से निशुल्क स्टॉल उपलब्ध कराया जाता है। महिलाओं के समूह ने इस पहल के माध्यम से आजीविका अर्जित करने की ओर कदम बढ़ाया है।

विशेष आर्टिकल- कृषि क्षेत्र में स्वर्णिम विकास: उत्तर प्रदेश के किसानों और योगी सरकार की उपलब्धियां

लखनऊ एक समय था जब उत्तर प्रदेश को 'बीमारू' राज्य कहा जाता था, जहां कृषि क्षेत्र भ्रष्टाचार, बाढ़, सूखा और निम्न उत्पादकता से जूझता था। लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार ने 2017 से अब तक कृषि को आत्मनिर्भर भारत की रीढ़ बना दिया। आज UP देश का 21% खाद्यान्न उत्पादन करता है, जबकि केवल 11% कृषि भूमि होने पर भी फल-सब्जी का 15% और 11% उत्पादन यहां से आता है। कृषि वृद्धि दर 13.7% (राष्ट्रीय औसत 9.5% से अधिक), GSDP में 28% योगदान और UP-AGREES प्रोजेक्ट जैसे प्रयासों से राज्य वैश्विक खाद्य आपूर्तिकर्ता बनने की दिशा में अग्रसर है। PM किसान सम्मान निधि, सॉइल हेल्थ कार्ड, MSP और सोलर पैनल इंस्टॉलेशन से 1 करोड़+ किसान लाभान्वित हुए हैं। बजट 2025-26 में ₹2.25 लाख करोड़ इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए आवंटित, यह उत्थान PM मोदी के विकसित भारत-2047 विजन का जीवंत प्रमाण है। योगी सरकार की प्रमुख उपलब्धियां: आंकड़ों में कृषि क्रांति योगी सरकार ने तकनीकी नवाचार, सिंचाई, बीमा और बाजार लिंकेज पर फोकस कर कृषि को मजबूत किया। यहां कुछ प्रमुख आंकड़े: पैरामीटर    2017 से पहले    2025 तक    वृद्धि खाद्यान्न उत्पादन (% राष्ट्रीय)    15%    21%    40%+ फल-सब्जी उत्पादन (करोड़ टन/वर्ष)    ~3.5    4+    14%+ कृषि वृद्धि दर (%)    8.6    13.7    59%+ सिंचाई परियोजनाएं (परियोजनाएं)    सीमित (बांसागर आदि अधर में)    11 एक्सप्रेसवे + 6 कार्यरत, बांसागर पूर्ण    3 गुना+ किसान सम्मान निधि लाभार्थी (करोड़)    न्यून    10 (वार्षिक)    नया आयाम फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स    सीमित    65,000+ (15 एग्रो पार्क)    10 गुना+ कृषि विश्वविद्यालय    4    5 (नया जोड़)    25%+ मुख्य पहलें: •    UP-AGREES प्रोजेक्ट (जनवरी 2025): किसानों को तकनीकी सहायता, ग्रामीण उद्यमिता – 23% खाद्यान्न योगदान। •    फूड प्रोसेसिंग पॉलिसी-2023: 19 नए प्रोजेक्ट, सब्सिडी, ब्याज छूट – 1,000 यूनिट्स/जिला लक्ष्य। •    DSR Conclave 2025: सीधी बुआई से जल संरक्षण, वैश्विक खाद्य हब लक्ष्य। •    सॉइल हेल्थ कार्ड और बीमा: MSP से किसानों को न्यूनतम मूल्य। •    सिंचाई: बांसागर, सरयू नहर, मध्य गंगा नहर पूर्ण – 64,000 हेक्टेयर भूमि मुक्त। ये प्रयास कृषि GSDP को 28% बढ़ा चुके हैं, जहां UP $1 ट्रिलियन इकोनॉमी की ओर अग्रसर है। लाभार्थियों की प्रेरक कहानियां: साधारण किसानों से आत्मनिर्भर उद्यमी तक योगी सरकार की योजनाओं ने लाखों किसानों को सशक्त किया। यहां कुछ वास्तविक उदाहरण: 1.    झांसी के रामू सिंह (UP-AGREES लाभार्थी):  o    पहले: सूखे से जूझते, मासिक आय ₹5,000। o    सहायता: सॉइल हेल्थ कार्ड + सोलर पैनल से ड्रिप इरिगेशन। o    अब: गेहूं उत्पादन 20% बढ़ा, ₹50,000 मासिक, परिवार की शिक्षा-स्वास्थ्य में निवेश। "योगी जी की तकनीक ने मेरी जिंदगी बदली।" 2.    वाराणसी की महिला SHG (DSR Conclave से प्रेरित):  o    पहले: बिचौलियों से शोषण। o    सहायता: PM किसान + MSP से न्यूनतम मूल्य, फूड प्रोसेसिंग यूनिट। o    अब: 41 महिलाएं, ₹1 करोड़ टर्नओवर, निर्यात शुरू। "सरकार ने हमें बाजार दिया।" 3.    बुलंदशहर के छोटे किसान (फूड प्रोसेसिंग लाभार्थी):  o    पहले: फसल बर्बाद। o    सहायता: एग्रो पार्क + सब्सिडी से प्रोसेसिंग यूनिट। o    अब: 100+ रोजगार, फल-सब्जी निर्यात, आय दोगुनी। "पॉलिसी-2023 ने हमें उद्यमी बनाया।" ये कहानियां साबित करती हैं कि नीतियां जमीनी स्तर पर काम कर रही हैं, खासकर महिलाओं और छोटे किसानों के लिए। योगी आदित्यनाथ के प्रेरक भाषण: कृषि पर दृष्टि CM योगी ने कृषि को 'आत्मनिर्भर UP की कुंजी' बताया: •    DSR Conclave 2025 (6 अक्टूबर): "UP 21% खाद्यान्न उत्पादन करता है। 11 वर्षों में कृषि में क्रांतिकारी बदलाव – सॉइल कार्ड, MSP, किसान सम्मान से किसान सशक्त। 2030 तक वैश्विक खाद्य हब!" •    UP-AGREES उद्घाटन (28 जनवरी 2025): *"UP 23% खाद्यान्न, 15% सब्जी उत्पादक। AGREES से किसान आत्मनिर्भर, तकनीक से तीन गुना उत्पादन।" •    8 वर्ष पूर्णता (24 मार्च 2025): *"कृषि वृद्धि 13.7% – BIMARU से ग्रोथ इंजन। 6 करोड़ गरीब ऊपर उठे।" •    कृषि भारत-2024 (15 नवंबर 2024): *"20% कृषि योगदान – जल जीवन मिशन से महिलाओं की कहानियां। लोकल से ग्लोबल!" निष्कर्ष: कृषि – UP का समृद्धि आधार योगी सरकार ने UP-AGREES, DSR Conclave और फूड प्रोसेसिंग से कृषि को उपेक्षा से उत्कृष्टता तक पहुंचाया। 21% राष्ट्रीय योगदान से UP वैश्विक खाद्य हब बनेगा। किसान, आत्मनिर्भर बनें – नया UP आपके हाथ में! जय किसान! जय उत्तर प्रदेश!

राज्यभर में पुलिस महकमे में फेरबदल: 23 एडिशनल एसपी बदले गए, देखें आपके जिले में कौन तैनात हुआ

लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार ने रविवार को पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल किया है। प्रदेश में 23 एडिशनल एसपी (अपर पुलिस अधीक्षक) के तबादले किए गए हैं। गृह विभाग ने इसकी सूची जारी कर दी है। नए आदेश के अनुसार, बी.एस. वी. कुमार को उपसेनानायक, 47वीं वाहिनी पीएसी गाजियाबाद बनाया गया है। सच्चिनानंद को अपर पुलिस अधीक्षक एसएसएफ मुख्यालय लखनऊ में तैनाती मिली है। डॉ. संजय कुमार को उपसेनानायक, 27वीं वाहिनी पीएसी, सीतापुर भेजा गया है। इन अफसरों का भी हुआ तबादला इसके अलावा सुबोध गौतम को अपर पुलिस अधीक्षक (पूर्वी), हरदोई बनाया गया है। नृपेंद्र को अपर पुलिस उपायुक्त, कमिश्नरेट वाराणसी नियुक्त किया गया है।निवेश कटियार को अपर पुलिस अधीक्षक, यूपी 112 लखनऊ में तैनात किया गया है और दिनेश कुमार पुरी को अपर पुलिस अधीक्षक (दक्षिणी), गोरखपुर भेजा गया है। वहीं, संतोष कुमार द्वितीय का गोरखपुर तबादला निरस्त कर दिया गया है, वे अब मुख्यालय पुलिस महानिदेशक कार्यालय में ही रहेंगे। सीताराम को अपर पुलिस अधीक्षक (विधि प्रकोष्ठ) मुख्यालय, लखनऊ बनाया गया है। इन अधिकारियों को भी मिली नई जिम्मदारी आदेश के मुताबिक, सिद्धार्थ वर्मा को कुशीनगर में एएसपी के रूप में तैनाती दी गई है। सुमित शुक्ला को शामली भेजा गया है। ज्ञानेंद्र नाथ प्रसाद को अपर पुलिस अधीक्षक (उत्तरी), गोरखपुर बनाया गया है। अशोक कुमार सिंह को अपर पुलिस अधीक्षक (नगर), बहराइच तैनात किया गया है। राजकुमार सिंह को ईओडब्ल्यू लखनऊ भेजा गया है। संतोष कुमार सिंह को अपर पुलिस अधीक्षक (सुरक्षा), गोरखपुर बनाया गया है। जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव को अपर पुलिस अधीक्षक सीआईडी, लखनऊ नियुक्त किया गया है। रामानंद कुशवाहा को अपर पुलिस अधीक्षक हाथरस बनाया गया है। जितेंद्र कुमार प्रथम को यूपी पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड में एएसपी के रूप में भेजा गया है। इन जिलों में भी हुई नई तैनातियां वहीं, चिरंजीव मुखर्जी को अपर पुलिस उपायुक्त, कमिश्नरेट प्रयागराज बनाया गया है। श्वेताभ पांडेय को अपर पुलिस अधीक्षक (नगर), एटा में तैनाती दी गई है।आलोक कुमार जायसवाल को अपर पुलिस अधीक्षक, फतेहगढ़ बनाया गया है। शैलेंद्र कुमार श्रीवास्तव को अपर पुलिस अधीक्षक (यातायात), सहारनपुर भेजा गया है। डॉ. राकेश कुमार मिश्र को अपर पुलिस अधीक्षक (नगर), गाजीपुर में तैनाती दी गई है। सरकार के इस आदेश के बाद कई जिलों में पुलिस प्रशासन में नई तैनातियां हो गई हैं।

लखनऊ, गोरखपुर, आगरा, कानपुर देहात और मुरादाबाद के मेलों में बढ़ी खरीदारों की उत्साही भागीदारी

माटीकला मेलों में बिक्री का बना रिकॉर्ड, ₹4.20 करोड़ का आंकड़ा पार लखनऊ, गोरखपुर, आगरा, कानपुर देहात और मुरादाबाद के मेलों में बढ़ी खरीदारों की उत्साही भागीदारी 70 जनपदों में आयोजित लघु माटीकला मेलों में ₹2.19 करोड़ की उल्लेखनीय बिक्री हुई दर्ज, पिछले वर्ष से ₹91 लाख अधिक विक्रय संपन्न कारीगरों को सीधे उपभोक्ता से जोड़ने का सफल रहा प्रयास योगी सरकार ने पारंपरिक माटीकला को प्रोत्साहन करने के लिए बोर्ड गठन सहित किए हैं कई अभिनव प्रयास लखनऊ  उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 में आयोजित माटीकला मेलों में प्रदेश के कारीगरों व हस्तशिल्प उत्पादों के विपणन में उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया है। इस अवधि में बोर्ड ने 10 दिवसीय माटीकला महोत्सव, 07 दिवसीय क्षेत्रीय माटीकला मेले और 03 दिवसीय लघु माटीकला मेले आयोजित किए। इन सभी मेलों में कुल 691 दुकानें लगाई गईं और ₹4,20,46,322 की बिक्री हुई। यह पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में दर्ज कुल बिक्री ₹3,29,28,410 की तुलना में ₹91,17,912 अधिक है, जो लगभग 27.7 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सबसे ज्यादा फोकस परंपरागत शिल्पों व उद्योगों में कार्यरत कारीगरों की उन्नति पर है। प्रदेश समेत देश-विदेश में उनके उत्पादों को वृहद स्तर पर खरीदार मिलें, इसके लिए विभिन्न प्रकार के प्रयास किए जा रहे हैं और माटीकला बोर्ड इसमें महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। 70 जनपदों में बड़े स्तर पर हुई खरीदारी लखनऊ के खादी भवन में 10 से 19 अक्टूबर 2025 तक आयोजित 10 दिवसीय माटीकला महोत्सव में 56 दुकानों द्वारा ₹1,22,41,700 की बिक्री हुई। गोरखपुर, आगरा, कानपुर देहात और मुरादाबाद में 13 से 19 अक्टूबर तक आयोजित 07 दिवसीय क्षेत्रीय मेलों में 126 दुकानों ने ₹78,84,410 का विक्रय किया। इसी क्रम में प्रदेश के 70 जनपदों में 17 से 19 अक्टूबर तक आयोजित 03 दिवसीय लघु माटीकला मेलों में 509 दुकानों के माध्यम से ₹2,19,20,212 की बिक्री दर्ज की गई। सहयोग व उत्पादों की गुणवत्ता बनी सकारात्मक परिणाम की कुंजी वित्तीय वर्ष 2024-25 में आयोजित मेलों में कुल 878 दुकानों द्वारा ₹3,29,28,410 की बिक्री हुई थी। यद्यपि इस वर्ष कुल दुकानों की संख्या कम रही, फिर भी विक्रय में वृद्धि यह दर्शाती है कि उत्पादों की गुणवत्ता, प्रदर्शनी की व्यवस्था और विपणन सहयोग अधिक प्रभावशाली रहा। इससे यह भी स्पष्ट हुआ है कि माटीकला उत्पादों के प्रति आमजन में जागरूकता और आकर्षण निरंतर बढ़ रहा है। माटीकला बोर्ड का लक्ष्य है कि निरंतर मेलों, उन्नत प्रदर्शनी प्रबंधन, प्रशिक्षण, डिजाइन विकास व ब्रांडिंग गतिविधियों के माध्यम से कारीगरों को दीर्घकालिक आर्थिक सशक्तिकरण प्रदान किया जाए। आने वाले सत्रों में अधिक उपभोक्ता आधारित कार्यक्रमों के आयोजन से कारीगरों की उत्पादकता, विपणन दक्षता तथा आय वृद्धि सुनिश्चित की जाएगी। योगी सरकार के प्रयासों से संरक्षित हो रही परंपरागत कला परंपरागत कारीगरों और शिल्पियों की कला को संरक्षित व संवर्धित करने, उनकी सामाजिक सुरक्षा, आर्थिक सुदृढ़ता, तकनीकी विकास और विपणन सुविधा बढ़ाने तथा नवाचार के माध्यम से रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड का गठन किया है। इस पहल के माध्यम से न केवल पारंपरिक माटीकला को नई पहचान मिली है, बल्कि हजारों परिवारों को आत्मनिर्भरता का नया आधार भी प्राप्त हुआ है। योगी सरकार ने प्रजापति समुदाय के उन सभी लोगों के लिए, जो माटीकला उद्योग से जुड़े हैं, एक महत्वपूर्ण सुविधा प्रदान की है कि गांव के तालाबों से मिट्टी निकालने की व्यवस्था निःशुल्क कर दी गई है। इससे कारीगरों को उत्पादन की मूल सामग्री सुलभ हुई है और उनकी लागत में उल्लेखनीय कमी आई है। ये कदम दर्शाते हैं कि योगी सरकार परंपरागत शिल्प को केवल संरक्षित ही नहीं कर रही, बल्कि उसे आधुनिक विपणन, प्रशिक्षण और नवाचार के माध्यम से वैश्विक मंच तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। योगी सरकार के समग्र समर्थन से लाभान्वित हो रहे कारीगर सीईओ खादी एवं ग्रामोद्योग माटीकला बोर्ड के महाप्रबंधक ने बताया कि योगी सरकार के समग्र समर्थन और बोर्ड के लक्षित प्रयासों के परिणामस्वरूप कारीगरों को सीधे उपभोक्ताओं से जुड़ने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि मेलों में आए खरीदारों ने स्थानीय शिल्प व पारंपरिक उत्पादों को उत्साहपूर्वक अपनाया, जिससे कारीगरों की आय में वृद्धि हुई है तथा माटीकला उत्पादों की ब्रांड वैल्यू मजबूत हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि आगामी वर्षों में इन मेलों के दायरे का विस्तार कर और अधिक जिलों में इस तरह के आयोजन किए जाएंगे, ताकि प्रदेश के माटीकला उत्पाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जुड़ सकें।