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योगी सरकार का एमएसएमई सेक्टर पर बड़ा भरोसा, अनुपूरक बजट में ठोस आर्थिक समर्थन

एमएसएमई कार्यालयी तंत्र को मजबूत करने के लिए सीधे बजटीय प्रावधान निवेश और रोजगार प्रोत्साहन नीतियों के अंतर्गत की गई ठोस व्यवस्था वैश्विक कंपनियों से जुड़कर एमएसएमई को बाजार और निर्यात का नया अवसर लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने एमएसएमई (माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम इंटरप्राइजेज) सेक्टर को सशक्त बनाने को लेकर अनुपूरक बजट में स्पष्ट और ठोस प्रावधान किए हैं। प्रदेश सरकार का मानना है कि एमएसएमई अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और इसके मजबूत होने से रोजगार और निवेश का विस्तार संभव है। लघु उद्योग भारती, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष, रविन्द्र सिंह ने कहा कि “उत्तर प्रदेश सरकार की निवेश अनुकूल नीतियों और नये अनुपूरक बजट प्रावधानों से एमएसएमई को बढ़ावा और प्रोत्साहन मिलेगा। उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में यह प्रभावी कदम है। सबसे बड़ी बात यह है कि योगी सरकार ने उद्यमियों और उद्योगों को सुरक्षित वातावरण देने का काम किया है“    एमएसएमई से जुड़े कार्यालयी तंत्र को मजबूत करने के लिए जिला उद्योग केंद्र के अधिष्ठान व्यय हेतु 1.5 करोड़ रुपये तथा उद्योग निदेशालय के अधिष्ठान व्यय के लिए भी 1.5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे जिलों में उद्यमियों को समय पर मार्गदर्शन, स्वीकृति और योजनाओं का लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि मजबूत ऑफिस सिस्टम से ही ईज ऑफ डूइंग बिजनेस जमीन पर दिखेगा। औद्योगिक निवेश और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति 2022 के अंतर्गत 823.43 करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि प्रस्तावित की गई है। इस राशि का बड़ा हिस्सा एमएसएमई इकाइयों को पूंजी निवेश, सब्सिडी, ब्याज अनुदान और रोजगार सृजन से जुड़े प्रोत्साहन के रूप में मिलेगा। इसके साथ ही औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति 2017 के लिए 300 करोड़ रुपये और अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास नीति 2012 के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे छोटे और मध्यम उद्योगों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। एमएसएमई सेक्टर को बड़े निवेश से जोड़ने के लिए फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट और फॉर्च्यून-500 कंपनियों की निवेश प्रोत्साहन नीति-2023 के अंतर्गत  371.69 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसका अप्रत्यक्ष लेकिन महत्वपूर्ण लाभ एमएसएमई इकाइयों को सप्लाई चेन, वेंडर डेवलपमेंट और निर्यात के रूप में मिलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में एमएसएमई सेक्टर को ठोस बजटीय समर्थन मिला है। यही कारण है कि प्रदेश तेजी से एमएसएमई हब के रूप में उभर रहा है और आने वाले समय में लाखों नए रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। इस समय  प्रदेश में लगभग 96 लाख एमएसएमई हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने, स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ाने के लिए आवंटित की बड़ी रकम

– एनआरएचएम को 2000 करोड़ और आयुष्मान भारत नेशनल हेल्थ प्रोटेक्शन मिशन के लिए 1200 करोड़ आवंटित   लखनऊ,  योगी सरकार ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को नई मजबूती देने के उद्देश्य से अनुपूरक बजट में चिकित्सा क्षेत्र के लिए बड़ा वित्तीय प्रावधान किया है। अनुपूरक बजट में लगभग 3,500 करोड़ रुपये की व्यवस्था कर योगी सरकार ने यह संकेत दिया है कि आमजन तक बेहतर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। अनुपूरक बजट में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर, अस्पतालों के विस्तार, आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधार के लिए धनराशि दी गई है। अनुपूरक बजट में चिकित्सा क्षेत्र को आवंटित धनराशि न केवल स्वास्थ्य योजनाओं को गति देगी, बल्कि यह प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को लंबे समय तक मजबूत करने की दिशा में अहम कदम भी है। ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों की सेवाएं होंगी और सशक्त मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में आयुष्मान भारत और राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन जैसी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी क्रम में आयुष्मान भारत मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों के लंबित और भविष्य में प्राप्त होने वाले चिकित्सा दावों के भुगतान के लिए 300 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आवश्यकता को अनुपूरक बजट में शामिल किया गया है। इससे निजी व सरकारी दोनों प्रकार के सूचीबद्ध अस्पतालों को समय पर भुगतान सुनिश्चित होगा और मरीजों को बिना किसी बाधा के उपचार मिल सकेगा। इसके अलावा, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के तहत संचालित विभिन्न योजनाओं के बेहतर कार्यान्वयन के लिए 2,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त व्यवस्था की गई है। इस राशि से ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों व जिला अस्पतालों की सेवाओं को और सशक्त किया जाएगा। साथ ही मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, पोषण, संक्रामक रोग नियंत्रण और स्वास्थ्य कर्मियों की सुविधाओं को भी मजबूती मिलेगी। गरीब और जरूरतमंद परिवारों को निशुल्क इलाज की सुविधा निरंतर मिलती रहेगी आयुष्मान भारत नेशनल हेल्थ प्रोटेक्शन मिशन के तहत सूचीबद्ध चिकित्सालयों के लंबित एवं प्राप्त होने वाले चिकित्सा दावों के भुगतान के लिए सबसे बड़ा प्रावधान किया गया है। इस मद में 1,200 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आवश्यकता को अनुपूरक बजट में शामिल किया गया है। यह कदम आयुष्मान भारत योजना को और प्रभावी बनाने के साथ-साथ गरीब व जरूरतमंद परिवारों को निशुल्क इलाज की सुविधा निर्बाध रूप से उपलब्ध कराने में सहायक होगा।

योगी सरकार की मंशा के अनुरूप जन-जन तक आयुष चिकित्सा पद्धति को पहुंचाने के लिए उठाया जा रहा कदम

स्वास्थ्य सेवाओं में आएगी पारदर्शिता, सीनियर सिटीजन को मिलेगी काफी राहत  लखनऊ योगी सरकार आयुष चिकित्सा पद्धतियां विश्व पटल पर पहचान दिलाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप आयुष विभाग अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने जा रहा है। दरअसल, आयुष विभाग आईआईटी कानपुर के सहयोग से एक अत्याधुनिक आयुष एप विकसित करेगा। इससे मरीजों को ऑनलाइन ओपीडी की सुविधा मिलेगी। साथ ही एप पर आयुष विभाग से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियां भी उपलब्ध कराई जाएंगी। योगी सरकार के इस कदम से न केवल आयुष चिकित्सा पद्धतियां आम जनता तक आसानी से पहुंचेंगी, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता भी आएगी। एप से सीनियर सिटीजन, महिलाओं और दूर-दराज के लोगों को मिलेगी काफी राहत आयुष प्रमुख सचिव रंजन कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जन-जन तक आयुष चिकित्सा पद्धतियों को पहुंचाना चाहते हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप आयुष एप बनाने के लिए आईआईटी कानपुर से बातचीत चल रही है। उन्होंने बताया कि एप लांच होने के बाद मरीजों को अस्पताल और आयुष केंद्रों में ओपीडी पंजीकरण के लिए लंबी लाइनों में खड़े होने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मरीज अपने मोबाइल के माध्यम से घर बैठे ही डॉक्टर से मिलने के लिए ऑनलाइन अपॉइंटमेंट ले सकेंगे। इससे समय की बचत होगी और अस्पतालों में भीड़ भी कम होगी। इस सुविधा से विशेषकर बुजुर्गों, महिलाओं और दूर-दराज के इलाकों से आने वाले मरीजों को काफी राहत मिलेगी। एप के जरिए मरीजों को आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी आयुष चिकित्सा पद्धतियों से जुड़ी विस्तृत जानकारी मिलेगी। एप पर विभिन्न बीमारियों के लिए उपलब्ध उपचार, दवाओं की जानकारी, नजदीकी आयुष अस्पताल और डिस्पेंसरी की सूची, डॉक्टरों का विवरण और स्वास्थ्य संबंधी सुझाव भी उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा योगी सरकार द्वारा चलाई जा रही आयुष से जुड़ी योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी भी एप पर मिलेगी। भविष्य में टेली परामर्श, ऑनलाइन रिपोर्ट जैसी सुविधाएं भी मिलेंगी एप को इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि आम नागरिक आसानी से इस्तेमाल कर सकेगा। एप को सुरक्षित, तेज और भरोसेमंद बनाया जाएगा, ताकि मरीजों का डाटा पूरी तरह सुरक्षित रहे। इसमें भविष्य में और भी नई सुविधाएं जोड़ने की योजना है। वहीं, आने वाले समय में एप के माध्यम से टेली-परामर्श, ऑनलाइन रिपोर्ट और डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड जैसी सुविधाएं भी शुरू की जाएंगी। इससे मरीजों को घर बैठे ही विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह मिल सकेगी। साथ ही आयुष चिकित्सा पद्धतियों पर लोगों का भरोसा और मजबूत होगा।

झांसी का कृषि विज्ञान केंद्र गोद लिए गांव के किसानों को निःशुल्क दे रहा उन्नत गेहूं, गोभी और सरसों के बीज

गोद लिए दस गांव के चयनित किसानों को निःशुल्क बोरान उर्वरक भी कराया जा रहा उपलब्ध अधिक पैदावार वाले बीज और पौधे निःशुल्क देकर किसानों को कृषि उपज बढ़ाने में की जा रही मदद झांसी योगी सरकार कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से किसानों को उन्नत खेती और अधिक पैदावार के लिए प्रेरित कर रही है। झांसी के भरारी में स्थित कृषि विज्ञान केंद्र गोद लिए गए दस गांव के चयनित किसानों को उन्नत खेती के लिए न सिर्फ प्रेरित कर रहा है बल्कि उन्हें निशुल्क बीज और उर्वरक भी प्रदान कर रहा है। इन किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र में आमंत्रित कर कृषि वैज्ञानिक उन्नत और अधिक पैदावार के तौर तरीकों से भी परिचित करा रहे हैं। झांसी के कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से गोद लिए गए गांव के किसानों को गेहूं की नई प्रजाति करनवंदना का बीज प्रदान किया गया है, जिसकी पैदावार परंपरागत गेहूं की तुलना में काफी अधिक होती है। सरसों की राधिका नस्ल के बीज प्रदान किए गए हैं, जिसमें शाखाएं अधिक होती हैं। इससे पैदावार अधिक होती हैं। फूलगोभी के भी उन्नत किस्म के तैयार पौधे प्रदान किए हैं, जिन्हें कृषि विज्ञान केंद्र में तैयार किया गया है। इन किसानों को बोरान उर्वरक भी प्रदान किया गया है, जो खेतों की उर्वर क्षमता बढ़ाने में सहायक होता है। कृषि विज्ञान केंद्र झांसी के वैज्ञानिक डॉ आदित्य कुमार सिंह ने बताया कि किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र में आमंत्रित कर उन्हें बीज, पौधे और उर्वरक प्रदान किए गए हैं। इन किसानों को पैदावार बढ़ाने के तौर-तरीके प्रदान करने के साथ ही निरंतर मार्गदर्शन भी प्रदान किया जा रहा है। आधुनिक तरीकों को अपनाकर किसान खेती में पैदावार बढ़ा सकते हैं।

नेशनल हाईवे के किनारे बनेगा महिला मार्केट प्लेस, गो-उत्पादों की होगी सीधी बिक्री

  गो सेवा, नवाचार और रोजगार का संगम जो गोशालाएं पहले की सरकारों में बोझ मानी जाती थीं, वे अब आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर इकाइयां बन रही हैं गोबर से ‘गो-कास्ट’ और वर्मी कम्पोस्ट, महिलाओं की आय बढ़ाने की पहल स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को मिलेगा रोजगार, हर माह होगी कमाई लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी गो-कल्याण योजना अब केवल संरक्षण तक सीमित नहीं रही, बल्कि नवाचार और महिला सशक्तिकरण का मजबूत मॉडल बनकर उभर रही है। एटा जनपद की मलावन गोशाला में शुरू हुई यह पहल प्रदेश में आत्मनिर्भर गोशालाओं की नई तस्वीर पेश कर रही है। जो गोशालाएं पहले की सरकारों में बोझ मानी जाती थीं, वे अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर इकाइयां बन रही हैं। यहां गो माता को ठंड से बचाने के लिए फूस और टाट की बोरी से तैयार विशेष प्रकार के ‘इको-थर्मल कंबल’ बनाए जा रहे हैं। ये कंबल न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं, बल्कि कम लागत में तैयार होकर गो संरक्षण को भी मजबूती दे रहे हैं। इसके साथ ही गोशाला में बर्मी कम्पोस्ट और गोबर से ‘गो-कास्ट’ जैसे नवाचारी उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं, जिसकी बाजार में जबरदस्त डिमांड है। गोबर से अगरबत्ती, धूपबत्ती, मोमेंटो और गमले बनाने के लिए 30 सखी दीदियां तैयार एटा के मुख्य विकास अधिकारी डॉ. नागेंद्र नारायण मिश्र ने इस मॉडल को गो-कल्याण, पुनर्चक्रण और ग्रामीण आजीविका का उत्कृष्ट संयोजन बताया। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी प्रेमरंजन सिंह के नेतृत्व में गोशाला को आय का बेहतर श्रोत बनाया जा रहा है। जो गोशालाएं पहले बोझ मानी जाती थीं, वे अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर इकाइयां बन रही हैं। सीडीओ डॉ. नागेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि कार्ययोजना के तहत प्रशिक्षण देकर 30 सखी दीदियों को तैयार किया जा रहा है, जो गोबर से अगरबत्ती, धूपबत्ती, मोमेंटो और गमले जैसे उत्पाद बनाएंगी। इसके अलावा मलावन राष्ट्रीय राजमार्ग के पास एक स्थायी मार्केट प्लेस विकसित किया जाएगा, जहां गो आधारित उत्पादों की सीधी बिक्री होगी। स्वयं सहायता समूह की महिलाएं हर माह निश्चित आय अर्जित कर सकेंगी इस पहल का सबसे प्रभावशाली पक्ष यह है कि इससे स्वयं सहायता समूह की महिलाएं हर माह निश्चित आय अर्जित कर सकेंगी। महिलाओं ने बताया कि वे आगे भी गोशाला संचालन, स्वच्छता, पोषण प्रबंधन और उत्पाद निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाते हुए इसे आत्मनिर्भर गोशाला मॉडल के रूप में विकसित करती रहेंगी। योगी सरकार की योजना से साफ है कि गोसेवा और रोजगार साथ-साथ चल सकते हैं। नवाचार, पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण के जरिए प्रदेश की गोशालाएं अब बोझ नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत कड़ी बनती जा रही हैं।

योगी सरकार की बड़ी पहल, सेवा निर्यातकों के लिए पहली बार लागू होगी विपणन विकास सहायता योजना

नई उत्तर प्रदेश निर्यात प्रोत्साहन नीति 2025–30 के तहत सेवा क्षेत्र को मिलेगा वैश्विक बाजार में मजबूती का अवसर सेवा निर्यात के लिए अलग और विशेष विपणन सहायता नीति लागू करने वाला उत्तर प्रदेश, देश का पहला राज्य आवेदन की पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन, निर्यातक इकाइयों को मेला समाप्त होने के 120 दिनों के भीतर करना होगा आवेदन लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने सेवा क्षेत्र के निर्यात को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। नई उत्तर प्रदेश निर्यात प्रोत्साहन नीति 2025–30 के अंतर्गत पहली बार सेवा निर्यातकों के लिए समर्पित विपणन विकास सहायता योजना लागू की जा रही है, जिससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी उपस्थिति मजबूत करने के लिए वित्तीय सहयोग मिलेगा। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है जिसने सेवा निर्यात के लिए अलग और विशेष विपणन सहायता नीति लागू की है। सेवा निर्यात को मिलेगा नया प्रोत्साहन योगी सरकार की इस पहल का उद्देश्य प्रदेश के सेवा निर्यातकों को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना, उनकी विपणन क्षमता का विकास करना और वैश्विक बाजारों की मांग के अनुरूप सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करना है। यह योजना प्रदेश की निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के साथ-साथ रोजगार और निवेश के नए अवसर भी सृजित करेगी। किन निर्यातकों को मिलेगा योजना का लाभ इस योजना का लाभ उन्हीं सेवा निर्यातकों को मिलेगा जो निर्यात प्रोत्साहन ब्यूरो, उत्तर प्रदेश (UPEPB) और उत्तर प्रदेश निर्यात संवर्धन परिषद में पंजीकृत हों। साथ ही, वे भारत सरकार द्वारा चिन्हित 12 चैंपियन सेवा क्षेत्रों के अंतर्गत सेवाओं का निर्यात कर रहे हों और उत्तर प्रदेश से उत्पन्न सेवाओं का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार-प्रसार कर रहे हों। किन गतिविधियों पर मिलेगी वित्तीय सहायता नई नीति के तहत सेवा निर्यातकों को विदेशों में आयोजित अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों, प्रदर्शनी और बायर–सेलर मीट में भागीदारी के लिए स्टॉल किराये के व्यय का 75 प्रतिशत (अधिकतम 2 लाख रुपये) तथा एक व्यक्ति की इकोनॉमी क्लास हवाई यात्रा पर हुए व्यय का 75 प्रतिशत (अधिकतम 1 लाख रुपये) तक की सहायता दी जाएगी। वहीं, देश में आयोजित अंतरराष्ट्रीय स्तर के व्यापार मेलों में भागीदारी पर स्टॉल किराये के लिए अधिकतम 50 हजार रुपये और यात्रा व्यय पर अधिकतम 25 हजार रुपये तक की सहायता मिलेगी। आयोजक संस्थाओं को भी मिलेगा बड़ा सहयोग विदेशों में अंतरराष्ट्रीय स्तर के व्यापार मेलों, प्रदर्शनी और बायर–सेलर मीट के आयोजन पर आयोजक संस्थाओं को कुल व्यय का 75 प्रतिशत, अधिकतम 1 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। वहीं, देश में अंतरराष्ट्रीय स्तर के ऐसे आयोजनों के लिए अधिकतम 75 लाख रुपये तक की सहायता अनुमन्य होगी। इस श्रेणी में न्यूनतम 20 सेवा निर्यातक इकाइयों की भागीदारी अनिवार्य होगी। सेवा क्षेत्र का बढ़ता योगदान पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश के सेवा क्षेत्र से निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्तमान में सेवा क्षेत्र राज्य के GSDP में लगभग 45 प्रतिशत का योगदान दे रहा है, जो प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में इसकी अहम भूमिका को दर्शाता है। आईटी-आईटीईएस, फिनटेक, पर्यटन, स्वास्थ्य एवं कल्याण, लॉजिस्टिक्स, परिवहन, आपूर्ति श्रृंखला सेवाएं और मीडिया-ऑडियो विजुअल जैसे क्षेत्रों में निर्यात की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। पारदर्शी और समयबद्ध प्रक्रिया योजना के अंतर्गत आवेदन की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। निर्यातक इकाइयों को मेला समाप्त होने की तिथि से 120 दिनों के भीतर आवेदन करना होगा। पात्र दावों का निस्तारण प्रथम आवत-प्रथम पावत के आधार पर किया जाएगा और स्वीकृत धनराशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सीधे लाभार्थी के खाते में

अपनों ने ठुकराया, योगी सरकार ने अपनाया तो जज बन सपने को किया साकार

अपनों से उपेक्षित बेटियां और महिलाओं का संबल बना योगी सरकार का वन स्टॉप सेंटर पिछले साढ़े आठ वर्षों में वन स्टॉप सेंटर बना 2.39 लाख महिलाओं का सहारा, एक छत के नीचे मिल रही हर मदद त्वरित न्याय से लेकर आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बन रही अपनों से तिरस्कृत बेटियां और महिलाएं पूरे देशभर में महिला सुरक्षा में योगी सरकार ने तैयार की मजबूत व्यवस्था, 75 जिलों में संचालित हो रहे 94 वन स्टॉप सेंटर लखनऊ, अपनाें की उपेक्षाओं का शिकार महिलाओं काे जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के वन स्टॉप सेंटर का साथ मिला तो उन्होंने अपने सपनों को नई ऊचाइयां दीं। कहते हैं जहां चाह है वहां राह है। और यह राह समाज से उपेक्षित महिलाओं को याेगी सरकार का वन स्टॉप सेंटर दिखा रहा है। जहां लाखों की संख्या में महिलाएं न केवल अपने सपनों काे पंख दे रही हैं बल्कि प्रदेश का नाम भी रौशन कर रही हैं। इसके साथ ही यह महिलाओं आधी आबादी के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन रही हैं। ऐसी ही एक महिला जिनसे अपनों से उपेक्षित होकर वन स्टॉप सेंटर का सहारा लिया और अपनी लगन से बिहार में पीसीएस जे की परीक्षा में सफलता हासिल कर सबको चौंका दिया। सेंटर में कराई जा रही ट्रामा काउंसिलिंग महिला कल्याण विभाग की डायरेक्टर संदीप कौर ने बताया कि डबल इंजन की सरकार की ओर से प्रदेश भर में अपनों से उपेक्षित और जरूरतमंद महिलाओं को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए वन स्टॉप सेंटर द्वारा हर संभव मदद की जा रही है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश भर में 94 वन स्टॉप सेंटर संचालित किये जा रहे हैं, जहां पिछले साढ़े आठ वर्षों में 2.39 लाख महिलाओं को त्वरित न्याय दिलाने के साथ आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाया गया। सेंटर में इन महिलाओं को न केवल न्याय दिलाया जा रहा है बल्कि उनकी ट्रामा काउंसिलिंग भी करायी जा रही है। इस दौरान उनके सामान्य होने पर उन्हें योगी सरकार की विभिन्न योजनाओं से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। इतना ही नहीं इन महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न कार्सों की ट्रेनिंग भी दी जाती है। ऐसे में इन सभी को कौशल विकास मिशन से जोड़ा जा रहा है। बहुप्रतिष्ठित कंपनियों दे रहीं ट्रेनिंग और रोजगार डायरेक्टर ने बताया कि कौशल विकास मिशन के तहत लाखों की संख्या में महिलाओं और बेटियों को होटल मैनजमेंट, मोबाइल रिपेयरिंग, ब्यूटी पार्लर, सिलाई कढ़ाई समेत विभिन्न प्रकार के कोर्सेज की ट्रेनिंग दी गयी है। वर्तमान में ट्रेनिंग पूरी कर लाखों की संख्या में महिलाएं प्रति माह 15 से 20 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। उन्होंने बताया कि कई बड़ी बहुप्रतिष्ठित कंपनियों जैसे लेक्मे सैलून, स्टारबक्स और फाइव स्टार होटल्स द्वारा भी ट्रेनिंग दी जा रही है। इसी का नतीजा है कि कई महिलाएं और बेटियां वर्तमान में कई फाइव स्टार होटल्स, स्टारबक्स काफी हाउस, लेक्मे सैलून में अपनी सेवाएं दे रही हैं। वर्तमान में लखनऊ में एक बेटी फाइव स्टार होटल में सुपरवाइजर की सेवा दे रही है। जज बन रौशन किया प्रदेश का नाम योगी सरकार के वन स्टाॅप सेंटर बेटियों और महिलाओं को अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए विभिन्न तरह की सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। इसी का नतीजा है कि लखनऊ की एक बेटी ने बिहार में पीसीएस-जे की परीक्षा में सफलता प्राप्त कर प्रदेश को नाम रौशन किया। इसके अलावा एक बेटी में हाल ही में आयुष विभाग के होम्योपैथिक विंग में मेडिकल ऑफिसर के पद पर ज्वाइन किया है। योगी सरकार द्वारा संचालित लखनऊ के वन स्टॉप सेंटर को पूरे देश में अच्छे कार्य के लिए वर्ष 2019 में राष्ट्रपति द्वारा नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वहीं पिछले वर्ष 8 मार्च को राज्यपाल द्वारा लखनऊ के वन स्टॉप सेंटर का सम्मानित किया गया।

योगी सरकार ने 138 बेटियों का किया कन्यादान, मुस्लिम जोड़ों का हुआ निकाह, मौलवियों ने पढ़ा निकाह

लखनऊ  योगी आदित्यनाथ सरकार ने गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह का आर्थिक बोझ कम करने की दिशा में एक सराहनीय पहल की है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत  आगरा जिले के चार विकास खंडों-सैंया, खेरागढ़, जगनेर और शमशाबाद में कुल 138 जोड़ों का सामूहिक विवाह संपन्न कराया गया। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित इस योजना के अंतर्गत सरकार प्रति जोड़े एक लाख रुपये की सहायता राशि एवं सामग्री उपलब्ध करा रही है। मुस्लिम जोड़ों का निकाह मौलवियों द्वारा संपन्न कराया गया सामूहिक विवाह समारोह में सभी जोड़ों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ एक-दूसरे का हाथ थामा। सैंया में 43, खेरागढ़ में 27, जगनेर में 27 और शमशाबाद में 41 शादियां कराई गईं। सभी विकास खंडों में भव्य पंडाल सजाए गए थे। वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच हिंदू जोड़ों ने सात फेरे लिए। वहीं अल्पसंख्यक समुदाय (मुस्लिम) के जोड़ों का निकाह मौलवियों द्वारा संपन्न कराया गया। समारोह में हजारों लोग हुए शामिल समारोह में हजारों लोगों ने शामिल होकर माहौल को उत्सव जैसा बना दिया। जिला समाज कल्याण अधिकारी जी.आर. प्रजापति ने बताया कि प्रति जोड़ा 60 हजार रुपये कन्या के खाते में डीबीटी के रूप में 25 हजार रुपये की गृहस्थी सामग्री और 15 हजार रुपये आयोजन पर खर्च किए जा रहे हैं। जनप्रतिनिधियों ने भी शिरकत की कार्यक्रम में विधायक भगवान सिंह कुशवाह, विधायक छोटेलाल वर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी शिरकत की और नवविवाहितों को आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा कि यह योजना गरीब और मजदूर परिवारों को अपनी बेटियों की शादी में आर्थिक तनाव से मुक्त करती है। जिले में इस वर्ष कुल 951 जोड़ों की शादी कराने का लक्ष्य निर्धारित है। 10 से 13 दिसंबर के बीच विभिन्न विकास खंडों में 800 से अधिक जोड़ों के विवाह संपन्न कराने की तैयारी की गई है।

घुसपैठ पर बड़ी कार्रवाई: योगी सरकार ने जांच तेज करने को दिए कड़े निर्देश

वाराणसी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को काशी के दौरे पर आ रहे हैं। वे मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) तथा विभिन्न विकास परियोजनाओं की समीक्षा करेंगे। इससे पूर्व बुधवार को महापौर अशोक कुमार तिवारी तथा नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल की अध्यक्षता में स्मार्ट सिटी सभागार में विभागीय समीक्षा बैठक हुई।  'सही ढंग से कराई जाए जांच' बैठक में महापौर ने सभी जोनल अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री के आदेशानुसार शहर में अवैध रूप से रह रहे घुसपैठियों की जांच शत-प्रतिशत सही ढंग से कराई जाए और इसकी विस्तृत रिपोर्ट जिला प्रशासन को उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।         होगी सख्त कार्रवाई महापौर ने कहा कि वर्तमान में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के दौरान बड़ी संख्या में लोगों द्वारा फर्जी तरीके से जन्म प्रमाण-पत्र बनवाने की शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इसकी जांच के लिए अपर नगर आयुक्त सविता यादव के नेतृत्व में एक समिति गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। समिति द्वारा दोषी पाए जाने वाले फर्जी प्रमाण-पत्रों को तत्काल निरस्त करने तथा संबंधित के विरुद्ध विधिक कार्रवाई करने के भी आदेश जारी किए गए हैं।  

योगी सरकार का आधी आबादी की सुरक्षा, सम्मान व स्वाबलंबन पर जोर

मिशन शक्ति : उत्तर प्रदेश में नारी शक्ति को मिली नई उड़ान  योगी सरकार का आधी आबादी की सुरक्षा, सम्मान व स्वाबलंबन पर जोर  आत्मनिर्भर दीदी बना रहीं समृद्ध उत्तर प्रदेश लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की कमान संभालने के बाद से ही आधी आबादी की सुरक्षा, सम्मान व स्वावलंबन पर जोर दिया है। नारी को सशक्त बनाने के लिए मिशन शक्ति पर सरकार का जोर है। माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश नारी सम्मान का ऐसा मॉडल बना है, जहां सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन से महिलाओं को नई दिशा मिल रही है। मिशन शक्ति उत्तर प्रदेश की नारी शक्ति को सशक्त बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया मॉडल है।  मिशन शक्ति 5.0- उत्तर प्रदेश में नारी शक्ति का नया दौर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संदेश है 'नारी शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है'। 24 दिसंबर तक चलने वाले अभियान के अंतर्गत हर विभाग प्रतिदिन जागरूकता अभियान चला रहा है। पुलिस चौपालों से लेकर सड़क रैलियों तक 'सुरक्षा और सम्मान, नारी का अधिकार' का उद्घोष गूंज रहा है।  प्रदेश के 1647 थानों में हेल्प डेस्क सक्रिय, अब हर महिला का सहारा ग्रामीण-शहरी हर क्षेत्र में व्यापक महिला बीट प्रणाली और एंटी रोमियो स्क्वॉड के माध्यम से हर महिला को अभूतपूर्व सुरक्षा का कवच प्रदान किया जा रहा है। पिंक पेट्रोल 24×7 उपलब्धता के साथ स्कूल, कॉलेज और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर तुरंत पहुंच रहा है। तकनीक का व्यापक उपयोग – 1090, साइबर मॉनिटरिंग सेल और डिजिटल ट्रैकिंग ने स्टॉकिंग, फर्जी अकाउंट्स पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की है। कॉलेजों में साइबर सुरक्षा वर्कशॉप से छात्राओं को सशक्त बनाया जा रहा है।  सुरक्षा-सम्मान का यूपी मॉडल, नारी उत्थान से समृद्ध प्रदेश महिला अपराधों में त्वरित जांच से हर पीड़िता को पूर्ण न्याय सुनिश्चित, अभूतपूर्व निस्तारण दर के साथ कठोर सजाएं दी जा रही हैं। मिशन शक्ति केंद्रों में प्रशिक्षित अधिकारी 3-5 वर्ष तक तैनात रहेंगे। आर्थिक सशक्तिकरण में भी क्रांति आ रही है। ग्राम पंचायतों में बीसी सखी, स्वयं सहायता समूह, लखपति दीदी जैसी योजनाओं से महिलाएं आत्मनिर्भर हो रही हैं। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला, सामूहिक विवाह योजना, निराश्रित महिला पेंशन ने बेटियों को नई उड़ान दी है। हर नारी को मिलेगा सम्मान और अपराधियों पर होगी दो-गुनी तेजी से कार्रवाई  मिशन शक्ति के साथ ही उज्ज्वला और स्वामित्व योजना ने घर-घर तक सशक्तिकरण पहुंचाया है। पोषण अभियान, रानी लक्ष्मीबाई कोष ने मातृ-शिशु स्वास्थ्य को मजबूत किया।  मिशन शक्ति 5.0 सशक्त नारी से समृद्ध प्रदेश का आधार बन गया है।