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मंत्री का निर्देश- वाराणसी, आगरा, मथुरा, लखनऊ, प्रयागराज, मिर्जापुर और अयोध्या जैसे स्थलों के लिए बनाएं आकर्षक टूर पैकेज 

आपदा में अवसर: यूपी सरकार ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बनाई नई कार्ययोजना पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों के साथ की विशेष बैठक  'विजिट माय स्टेट' अभियान से यूपी पर्यटन को मिलेगी नई उड़ान, हेरिटेज स्थलों पर डेस्टिनेशन वेडिंग बढ़ाने पर जोर 'राष्ट्र प्रथम' के मंत्र के साथ यूपी पर्यटन की नई रणनीति, संग्रहालयों में दो माह तक फ्री एंट्री मंत्री का निर्देश- वाराणसी, आगरा, मथुरा, लखनऊ, प्रयागराज, मिर्जापुर और अयोध्या जैसे स्थलों के लिए बनाएं आकर्षक टूर पैकेज  'आपदा में अवसर' हमारा मूल मंत्र, राष्ट्र प्रथम की भावना से पर्यटन को देंगे नया आयाम- जयवीर सिंह लखनऊ वैश्विक अनिश्चितताओं के मौजूदा दौर और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के क्रम में  पर्यटन निदेशालय में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक हुई। मीटिंग में प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को 'आपदा में अवसर' बताते हुए पर्यटन क्षेत्र को नई संभावनाओं से जोड़ने पर बल दिया। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में आयोजित बैठक में राज्य के हेरिटेज स्थलों, ईको साइट्स, किलों समेत अन्य स्थलों को डेस्टिनेशन वेडिंग के रूप में बढ़ावा देने तथा 'विजिट माई स्टेट' अभियान शुरू करने के निर्देश दिए। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि 'पर्यटन विभाग 'राष्ट्र प्रथम' की भावना से काम करेगा। उन्होंने 'विजिट माय स्टेट' अभियान के तहत संग्रहालयों में आगामी दो माह तक निःशुल्क प्रवेश सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। साथ ही, वाराणसी, आगरा, मथुरा, लखनऊ, प्रयागराज, मिर्जापुर और अयोध्या जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों के लिए आकर्षक और अनुभवपरक टूर पैकेज तैयार करने हेतु टूर ऑपरेटर्स के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश भी दिए।' सरकारी वाहनों का न्यूनतम उपयोग पर्यटन मंत्री ने कहा, 'प्रदेश सरकार प्रशासनिक कार्यों में मितव्ययिता, संसाधनों के समुचित उपयोग और बेहतर समन्वय को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। इसी क्रम में अधिकारियों को सरकारी वाहनों के उपयोग को न्यूनतम रखने, आपसी समन्वय स्थापित कर एक ही वाहन से कार्यालय आने तथा विभागीय फ्लीट में शामिल गाड़ियों की संख्या कम करने के निर्देश दिए गए हैं।'  राही पर्यटक आवास में ठहरने पर दें छूट  मंत्री जयवीर सिंह ने पर्यटन विभाग द्वारा संचालित राही पर्यटक आवासों में पर्यटकों को 25 प्रतिशत तक की रियायत प्रदान कर घरेलू पर्यटन को प्रोत्साहित करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेशवासी विदेश यात्राओं के बजाय उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक, धार्मिक और प्राकृतिक धरोहरों का भ्रमण करें। साथ ही, पर्यटकों को गोशालाओं, प्राचीन मंदिरों एवं प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन कराने हेतु विशेष पर्यटन व्यवस्थाएं विकसित किए जाने पर भी जोर दिया गया, जिससे आध्यात्मिक पर्यटन के साथ ग्रामीण और सांस्कृतिक पर्यटन को भी नई गति मिल सके। साथ ही, पर्यटन महानिदेशक को निर्देश दिए कि वे रेस्टोरेंट एसोसिएशन से समन्वय स्थापित कर पर्यटकों को भोजन एवं अन्य सेवाओं पर विशेष छूट उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर कार्य करें। डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए स्थानीय स्थलों का हो चयन  पर्यटन मंत्री ने स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, कि नागरिक, वेडिंग प्लानर एवं आयोजनकर्ता डेस्टिनेशन वेडिंग सहित अन्य पारिवारिक और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए प्रदेश के भीतर उपलब्ध विरासत स्थलों को प्राथमिकता दें। उन्होंने पर्यटन विभाग को इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के हेरिटेज स्थल, प्राचीन किले, ईको टूरिज्म साइट्स और सांस्कृतिक परिसर डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए अत्यंत उपयुक्त हैं। मंत्री ने मिर्जापुर स्थित ऐतिहासिक चुनार किला एवं राजधानी लखनऊ की छतर मंजिल को शीघ्र तैयार करने के भी निर्देश दिए। बिना अनुमति निदेशालय आने से बचें- अपर मुख्य सचिव   बैठक में अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात ने विभागीय कार्यप्रणाली को अधिक सुव्यवस्थित, अनुशासित और प्रभावी बनाने पर बल दिया। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि 'विभिन्न जनपदों के क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी, वरिष्ठ अधिकारियों की पूर्व अनुमति के बिना निदेशालय आने से बचें। आवश्यक बैठकों एवं समन्वय कार्यों के लिए वर्चुअल माध्यमों का अधिकतम उपयोग करें। उन्होंने ये भी कहा कि इस व्यवस्था से समय और संसाधनों की बचत के साथ प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।' बैठक में महानिदेशक पर्यटन वेदपति मिश्रा, निदेशक पर्यटन (इको टूरिज्म) पुष्प कुमार के०, यूपीएसटीडीसी एमडी आशीष कुमार सहित विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

सीएम योगी ने मृतकों के परिजनों के प्रति व्यक्त की संवेदना, तत्काल मुआवजा जारी करने के निर्देश

आंधी-बारिश से प्रदेश में हुए नुकसान का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिया संज्ञान सीएम योगी ने मृतकों के परिजनों के प्रति व्यक्त की संवेदना, तत्काल मुआवजा जारी करने के निर्देश सभी जिलों के डीएम को राहत कार्य प्राथमिकता पर रखने के लिए कहा मुआवजा राशि जारी करने और बचाव अभियान से जुड़े कार्य सोशल मीडिया पर करने होंगे अपडेट लखनऊ उत्तर प्रदेश में आंधी-बारिश और आकाशीय बिजली गिरने से हुए नुकसान पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है। बीते लगभग 24 घंटे में यूपी के कई जिलों में जनहानि, पशुहानि समेत कई मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। सीएम योगी ने अधिकारियों को तत्काल मौके पर जाकर पीड़ितों की मदद और मुआवजा जारी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जिलों को हर 3 घंटे में स्थिति का अपडेट देने के लिए कहा गया है। यूपी के बाराबंकी, बहराइच, कानपुर देहात, बस्ती, संभल, हरदोई, उन्नाव समेत 19 जिलों में जनहानि, पशुहानि और फसल हानि की जानकारी सामने आई है। वहीं खराब मौसम की वजह से काफी संख्या में मकान भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। सीएम योगी ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। वहीं जिलाधिकारियों समेत संबंधित अधिकारियों को मौके पर जाकर तत्काल सर्वे पूरा कराने का निर्देश दिया है, ताकि संबंधित विभागों के साथ मिलकर मुआवजा जारी किया जा सके। सीएम योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलों के डीएम को राहत कार्यों को प्राथमिकता देने के लिए कहा है। साथ ही निर्देश दिया है कि मुआवजा राशि, बचाव अभियान समेत अन्य कार्यों को सोशल मीडिया पर अपडेट किया जाए। सभी जिलों को हर 3 घंटे में स्थिति का अपडेट भेजने के लिए भी कहा गया है।

जर्जर पंचायत भवनों पर चलेगा बुलडोजर: मानसून से पहले UP सरकार की तैयारी तेज

लखीमपुर जिले के 49 पंचायत भवन जर्जर चिन्हित किए गए हैं। मानसून के दौरान इनके गिरने और हादसे की आशंका को देखते हुए अब इन्हें ढहाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। एडीओ पंचायत व कंसल्टिंग इंजीनियरों ने सत्यापन रिपोर्ट निदेशालय को भेजी जा रही है। अनुमति मिलने के बाद इन भवनों को ढहाया जाएगा। फिर इनकी जगह नए भवन बनाए जाएंगे। जिला पंचायत राज अधिकारी विशाल सिंह ने बताया कि दशकों पहले बने पंचायत भवनों के बारे में एडीओ पंचायत व कंसल्टिंग इंजीनियर से रिपोर्ट मांगी गई। ब्लाकों से जो रिपोर्ट आई, उसके मुताबिक कुल 49 पंचायत भवन जर्जर चिन्हित किए गए हैं। इसमें सबसे ज्यादा नकहा ब्लाक में सात व रमियाबेहड़ में पांच पंचायत भवन जर्जर मिले हैं। डीपीआरओ ने बताया कि इन पंचायत भवनों की सूची निदेशालय भेजी गई है। साथ ही इनको ढहाने के लिए पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता, एई आरईएस व ब्लाकों के अधिकारी शामिल हैं, जो इनको ढहाने के लिए अपनी रिपोर्ट देंगे। इन ग्राम पंचायतों में अस्थाई रूप से सचिवालय चलाया जा रहा है।

UP में चुनावी रणनीति तेज: योगी कैबिनेट विस्तार के बाद BJP ने साधीं 60 महत्वपूर्ण सीटें

लखनऊ उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अगले साल मार्च-अप्रैल में होने हैं। इस तरह एक साल से भी कम का वक्त बचा है और भाजपा ने योगी कैबिनेट का विस्तार करने के बाद अब चुनाव पर फोकस कर दिया है। मंगलवार को हिमंत बिस्वा सरमा सरकार का शपथ समारोह है और उसके बाद भाजपा लीडरशिप तैयारी में जुट सकती है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि मंगलवार के बाद किसी भी दिन यूपी चुनाव को लेकर भाजपा की अहम बैठक हो सकती है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने उन 50 से 60 सीटों पर फोकस करने के लिए कहा है, जहां पहले भाजपा नहीं जीत पाई थी। ये वह सीटें हैं, जहां भाजपा को 2012 से 2022 तक के तीन चुनावों में जीत नहीं मिल सकी है। पार्टी लीडरशिप का कहना है कि यदि इन सीटों में से करीब आधी भी जीत ली गईं तो नतीजे बदल सकते हैं। भाजपा जिन 60 सीटों पर जोर देने की बात कर रही है, उनमें से 22 तो पूर्वांचल के आजमगढ़, मऊ, जौनपुर, गाजीपुर और मिर्जापुर में हैं। इसके अलावा 13 सीटें पश्चिम उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, बिजनौर और मुरादाबाद जैसे जिलों में हैं। पश्चिम यूपी के इन जिलों में मुस्लिम बहुल आबादी वाली सीटों पर ऐसी स्थिति है। इसके अलावा पूर्वांचल के जिलों की बात करें तो सपा यहां मजबूत रही है। अब यदि भाजपा ने यहां फोकस किया तो वह अपने गढ़ों के अलावा कमजोर इलाकों में भी ताकत बढ़ा पाएगी। समाजवादी पार्टी ने 2022 के विधानसभा चुनाव में इन 35 सीटों में से 22 पर जीत हासिल की थी। पूर्वी यूपी के मऊ, गाजीपुर जैसे जिलों में सपा की झोली भर गई थी और इसी के चलते 2017 के मुकाबले वह अच्छी स्थिति में आ गई थी। इस बार भाजपा की प्लानिंग यह है कि सपा को उसके ही मजबूत इलाकों में घेरा जाए। मैनपुरी, फर्रूखाबाद, इटावा जैसे जिलों में भाजपा तैयारियों में जुट गई है। बता दें कि चुनाव की महीनों पहले से ही तैयारी करने में भाजपा आगे रही है। पश्चिम बंगाल के चुनाव में भी वह महीनों पहले से ऐक्टिव थी और जब उसे सत्ता मिली है तो उसकी सक्रियता को भी इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है। क्यों बूथ लेवल रणनीति पर इतना फोकस करती है भाजपा यूपी में भाजपा एक बार फिर से बूथ लेवल पर रणनीति तैयार कर रही है। पार्टी का कहना है कि बूथ लेवल पर फोकस करने से जमीनी स्तर तक कार्यकर्ता ऐक्टिव हो जाते हैं और वे वोटरों को घरों से निकालने में भी जुटते हैं। पहले के चुनावों में भी भाजपा को इस रणनीति का फायदा मिला है। अब नए तेवर और कलेवर के साथ एक बार फिर पार्टी इस रणनीति पर जुटने की तैयारी में है।

जिसके पास शक्ति होगी, वही करुणा और मैत्री का मार्ग भी प्रशस्त कर पाएगा: सीएम योगी

हमने पिछली सरकारों के गड्ढों को भरा, अब यूपी को बुलेट ट्रेन की स्पीड से आगे बढ़ाने की बारी: सीएम योगी दिल्ली में आयोजित सीआईआई की वार्षिक बिजनेस समिट में सम्मिलित हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिसके पास शक्ति होगी, वही करुणा और मैत्री का मार्ग भी प्रशस्त कर पाएगा: सीएम योगी 9 वर्ष पहले प्रदेश के नाम के आगे “उत्तर” तो था, लेकिन स्वयं उसके ऊपर अनेक प्रश्नचिह्न लगे हुए थे: योगी आदित्यनाथ 2017 के पहले अंधेरा होते ही सड़कों पर गड्ढे देखकर लोग समझ जाते थे कि यूपी का बॉर्डर आ गया: सीएम योगी मठ के प्रबंधन का अनुभव प्रदेश के संचालन में मददगार: मुख्यमंत्री नई दिल्ली  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  नई दिल्ली में आयोजित सीआईआई की वार्षिक बिजनेस समिट-2026 में उत्तर प्रदेश के आर्थिक और औद्योगिक परिवर्तन की विस्तृत तस्वीर पेश करते हुए कहा कि हमने अभी तक नींव को पुख्ता किया है, पिछली सरकारों के पाप के गड्ढों को भरा है। अब डबल इंजन की सरकार को बुलेट ट्रेन की स्पीड से आगे बढ़ाने की बारी है। किसी भी राष्ट्र की आर्थिक प्रगति उसकी मैन्युफैक्चरिंग शक्ति पर निर्भर करती है। उद्योग और उद्यमिता मजबूत होंगे तो रोजगार, निवेश और समृद्धि स्वतः बढ़ेगी। दुनिया के अधिसंख्य संघर्षों और युद्धों के पीछे भी आर्थिक हित ही प्रमुख कारण रहे हैं। ऐसे में कोई भी देश अपने उद्यमियों की उपेक्षा नहीं कर सकता। भारत की आर्थिक और सामरिक शक्ति ही मानवता व कल्याण का मार्ग प्रशस्त करेगी सीएम योगी ने कहा कि आज का दिन बहुत महत्वपूर्ण है। 75 वर्ष पहले आज के दिन ही प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ महादेव की प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी द्वारा पुनर्प्रतिष्ठा संपन्न हुई थी। आज ही के दिन अटल जी ने पोखरण में परमाणु परीक्षण के माध्यम से ‘ऑपरेशन शक्ति’ का प्रदर्शन किया था। भारत की यह ताकत न केवल उसके सामर्थ्य का प्रतीक है, बल्कि वैश्विक मानवता एवं कल्याण का मार्ग भी प्रशस्त करती है। जिसके पास शक्ति होगी, जो सामर्थ्यवान होगा, वही करुणा व मैत्री का मार्ग भी प्रशस्त कर पाएगा। केवल हाथ फैलाने, गिड़गिड़ाने से दुनिया हमें गंभीरता से नहीं लेगी। कोई हमारी बात नहीं मानेगा और न ही हम पर विश्वास करेगा। अनेक प्रश्नचिह्न लगे थे उत्तर प्रदेश पर मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय ऐसा था, जब उत्तर प्रदेश अपनी पहचान के संकट से जूझ रहा था। प्रदेश का नाम सुनते ही लोग दूरी बना लेते थे। कानून व्यवस्था की स्थिति इतनी खराब थी कि हर वर्ष 300 से अधिक दंगे होते थे, गुंडा टैक्स वसूला जाता था और उद्यमी पलायन करने को मजबूर थे। उत्तर प्रदेश के नाम के आगे ‘उत्तर’ था, लेकिन स्वयं उसके ऊपर अनेक प्रश्नचिह्न लगे हुए थे। प्रदेश दंगों, माफिया राज, गुंडा टैक्स और पलायन की पहचान बन चुका था। यात्रा कर रहे लोग अंधेरा होते ही सड़कों पर गड्ढे दिखने पर समझ जाते थे कि यूपी का बॉर्डर आ गया है। 2017 से पहले यही उत्तर प्रदेश की पहचान बनी थी। मठ का अनुभव प्रदेश के संचालन में सहायता कर रहा मुख्यमंत्री ने बताया कि जब वह पहली बार सांसद बने थे और गोरखपुर के बंद पड़े फर्टिलाइजर कारखाने को शुरू कराने के लिए तत्कालीन केंद्रीय मंत्री से मिले, तो उनसे पूछा गया कि “यूपी में चुनाव जीतकर आए हैं, कितने लोगों का मर्डर हुआ था?”  यह उस दौर के उत्तर प्रदेश की छवि थी। 2017 में प्रधानमंत्री ने जब उन्हें उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपी, तब उनके पास प्रशासनिक अनुभव नहीं था। सीएम योगी ने कहा कि मैं तो मठ चलाता था, लेकिन मठ प्रबंधन का अनुभव मुझे प्रदेश चलाने में बड़ी सहायता कर रहा है। क्योंकि किसी भी मठ का अपना एक अनुशासन होता है। समयबद्ध तरीके से कार्यक्रम संचालित होते हैं। वित्त का भी अनुशासन होता है और हर प्रकार की सुरक्षा के लिए भी उस अनुशासन को लागू करना पड़ता है। मैंने उसी अनुभव को प्रदेश प्रशासन में लागू किया। सबसे पहली प्राथमिकता सुरक्षा का वातावरण स्थापित करना था। रूल ऑफ लॉ को लागू करने, पॉलिसी पैरालिसिस समाप्त करने और सेक्टोरल पॉलिसी बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया। कभी माफिया के लिए रोका गया था चीफ जस्टिस का काफिला मुख्यमंत्री ने प्रयागराज का उदाहरण देते हुए कहा कि एक समय ऐसी स्थिति थी कि एक माफिया ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के काफिले तक को रुकवा दिया था। लेकिन आज उत्तर प्रदेश में कोई भी माफिया ऐसा दुस्साहस नहीं कर सकता। अब बेटियां सुरक्षित माहौल में स्कूल जा रही हैं और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से पलायन करने वाले परिवार लौट रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कैराना का उल्लेख करते हुए कहा कि 2015 में एक व्यापारी की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद पूरा परिवार प्रदेश छोड़कर चला गया। लेकिन अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के बाद वही परिवार वापस लौटा। किसी भी राज्य के विकास की पहली शर्त सुरक्षा का वातावरण है और सरकार का दायित्व है कि वह हर नागरिक को सुरक्षा प्रदान करे। उद्योगों को ठोस सुरक्षा, कनेक्टिविटी और मजबूत सप्लाई चेन मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा के साथ-साथ सरकार ने कृषि और उद्योग दोनों क्षेत्रों में व्यापक सुधार किए। किसानों की आत्महत्या रोकने, खेती को तकनीक से जोड़ने और एमएसएमई सेक्टर को मजबूत करने पर विशेष काम हुआ। सरकार ने बड़े निवेशों को आकर्षित करने के लिए लैंड बैंक तैयार किया और उद्योगों के लिए स्पष्ट नीतियां बनाई। 2018 में शुरू की गई वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट योजना आज प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिला रही है। ओडीओपी के माध्यम से डिजाइन, पैकेजिंग, तकनीक और ब्रांडिंग को बढ़ावा दिया गया। 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां प्रदेश में रोजगार और उत्पादन का आधार बन चुकी हैं। एमएसएमई सेक्टर लगभग 3 करोड़ युवाओं को रोजगार दे रहा है। इसलिए यह सरकार की जिम्मेदारी है कि उद्योगों को सुरक्षा, कनेक्टिविटी और मजबूत सप्लाई चेन उपलब्ध कराई जाए। सांस्कृतिक-धार्मिक विरासत को मिली वैश्विक पहचान मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश में 156 करोड़ पर्यटक आए, जिनमें महाकुंभ में आए 66-67 करोड़ श्रद्धालु भी शामिल थे। काशी, अयोध्या, मथुरा-वृंदावन, विंध्याचल, नैमिषारण्य, बौद्ध और जैन सर्किट सहित प्रदेश की सांस्कृतिक-धार्मिक विरासत को विश्वस्तरीय पहचान दिलाने का कार्य किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश … Read more

योगी कैबिनेट फुल होने के बाद, BJP की 2024 की तैयारी और चुनावी स्थिति पर सवाल

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल में दूसरा कैबिनेट विस्तार रविवार किया गया है. 6 नए मंत्रियों को शपथ दिलाई गई तो दो राज्य मंत्रियों को प्रमोशन दिया गया. मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक संदेश देने कवायद की गई है, क्योंकि 2024 में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 'पीडीए' फॉर्मूले से बीजेपी को पीछे धकेल दिया था।  राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कुल आठ नेताओं को मंत्री पद की शपथ दिलाई, जिनमें छह नए चेहरे शामिल हैं. बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी और सपा के बागी विधायक मनोज कुमार पांडे को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है तो कृष्णा पासवान, कैलाश सिंह राजपूत, सुरेंद्र दिलेर और हंसराज विश्वकर्मा ने राज्यमंत्री के तौर पर शपथ ली।  योगी मंत्रिमंडल विस्तार में अजीत सिंह पाल और सोमेंद्र तोमर ने राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में शपथ ली. ये दोनों ही नेता पहले से योगी सरकार में राज्यमंत्री थे, जिन्हें अब प्रमोशन देकर अब स्वतंत्र प्रभार मंत्री बनाया गया है. इस तरह से योगी मंत्रिमंडल अब पूरी तरह फुल हो चुका है, लेकिन सवाल यह है कि कैबिनेट विस्तार से बीजेपी के बिगड़े सियासी समीकरण को कितनी मजबूती मिल पाएगी?  कैबिनेट के जरिए बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग योगी मंत्रिमंडल का विस्तार कर बीजेपी ने दलित, पिछड़े और ब्राह्मण समाज केतबकों को बड़ा संदेश दे दिया है. योगी सरकार से नाराज माने जा रहे ब्राह्मण समाज से मनोज पांडेय को मंत्री बना कर बीजेपी ने उन्हें लुभाने का प्रयास किया है. इसी तरह भूपेंद्र चौधरी को पश्चिमी यूपी के जाट समाज को जोड़े रखने का दांव है तो सोमेंद्र तोमर को राज्यमंत्री पद से प्रमोशन स्वतंत्र प्रभार देकर गुर्जर समाज को सियासी संदेश दिया है।  कैबिनेट विस्तार में दलित चेहरे को तौर पर कृष्णा पासवान और सुरेंद्र दिलेर को राज्यमंत्री बनाया गया, जिनके जरिए गैर जाटव दलित वोटों को साधने की कवायद की है. कृष्णा पासवान पासी समुदाय से हैं तो सुरेंद्र दिलेर वाल्मीकि समुदाय से आते हैं. इन दोनों ही नेताओं दलित प्रतिनिधित्व के रूप में कैबिनेट में जगह दी है ताकि दलित समाज के विश्वास को बनाए रखा जा सके।  वहीं, लोधी, पाल और विश्वकर्मा जैसी पिछड़ी जातियों पर भी फोकस किया गया. पाल समुदाय से आने वाले अजीत सिंह पाल को राज्यमंत्री से प्रमोशन कर स्वतंत्र प्रभार मंत्री बना दिया गया है. इसी तरह लोधी जाति से आने वाले कैलाश सिंह राजपूत बनाए गए हैं. हंसराज विश्वकर्मा को राज्यमंत्री के तौर पर शामिल कर ओबीसी की लोहार जाति को सियासी संदेश दिया है।  बीजेपी ने दिया सियासी संदेश,  राह में कांटे ही कांटे?  योगी कैबिनेट विस्तार के जरिए बीजेपी ने राजनीतिक रूप से इसका सबसे बड़ा संदेश दिया है. बीजेपी ने जिस तरह से मंत्रिमंडल में ब्राह्मण, जाट, गुर्जर, लोध, पासवान और पाल समाज की नुमाइंदगी दी है, उसके जरिए ओबीसी की उन्हीं जातियों पर फोकस किया है, जो पहले से ही बीजेपी के साथ जुड़ी हुई हैं. सपा के पीडीए फॉर्मूले के साथ 2024 में नहीं गई थी।  बीजेपी गैर-यादव OBC की राजनीति से आगे बढ़कर अन्य पिछड़ी जाति पर काम कर रही है. 2024 लोकसभा चुनाव में यूपी में बीजेपी को जिन इलाकों और जातियों में नुकसान हुआ था, पार्टी अब उसी गैप को भरने की कोशिश कर रही है. पश्चिम यूपी में जाट समीकरण लोकसभा में पूरी तरह स्थिर नहीं दिखे थे. इसी तरह मायावती के कमजोर से होने से दलित वोट का एक हिस्सा समाजवादी पार्टी की ओर गया था।  अखिलेश यादव ने पीडीए के जरिए पिछड़ी जातियों को भी साथ जोड़ने में कामयाब रहे. इसलिए इस विस्तार के जरिए इन सभी तबकों को संदेश दिया जा रहा है कि सत्ता में उनकी हिस्सेदारी है, लेकिन सवाल यही है कि अखिलेश यादव के 'पीडीए फॉर्मूले' को बीजेपी क्या काउंटर कर पाएगी।  2024 के बिगड़े समीकरण कितना दुरुस्त होगा?  बीजेपी ने योगी मंत्रिमंडल विस्तार में जिस तरह ब्राह्मण, जाट, गुर्जर, लोध, पासवान और पाल समाज की नुमाइंदगी दी है, उससे 2024 में बीजेपी के अलग होने वाली जातियों को क्या फिर से बीजेपी जोड़ पाएगी? ये इसीलिए भी कहा जा रहा है कि 2019 की तुलना में बीजेपी 2024 में 62 सीटों से घटकर 33 सीट पर सिमट गई थी।  सपा 37 लोकसभा सीटें जीतने में कामयाब रही तो उसकी सहयोगी कांग्रेस को 6 सीटें मिली थी. 2024 के चुनाव नतीजे को विधानसभा क्षेत्र के लिहाज से देखें तो सपा और कांग्रेस को करीब 128  विधानसभा सीटों पर बढ़त मिली थी. बीजेपी के साथ जुड़ा रहा कुर्मी, मौर्य जैसे ओबीसी वोटर के साथ-साथ राजपूत और दलित वोटर भी छिटक गए थे. इसके चलते ही बीजेपी लोकसभा चुनाव में सपा से पीछे रह गई थी।  बीजेपी ने कुर्मी समाज के विश्वास को जीतने के लिए पकंज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है, लेकिन मौर्य और राजपूत समाज को साधने की कवायद कैबिनेट के जरिए नहीं हो सकी. इसीलिए बृजभूषण शरण सिंह और विधायक आशा मौर्य का दर्द छलक उठा. आशा मौर्य ने कहा कि लगता है पार्टी को अब मौर्य समाज की आवश्यकता नहीं रह गई और बाहर से आए दलबदलुओं को प्राथमिकता दी गई है।  वहीं, बृजभूषण सिंह कैबिनेट विस्तार से नाखुश दिखे. माना जा रहा था कि वे अपने बेटे प्रतीक भूषण के लिए मंत्री पद चाहते थे. किसी ठाकुर चेहरे को जगह न मिलने पर उन्होंने 'X' पर शायराना अंदाज में निशाना साधा कि शोहरत की बुलंदी भी पल भर का तमाशा है, जिस शाख पर बैठे हो वह टूट भी सकती है. उनके इस पोस्ट को लेकर साफ समझा जा सकता है कि किस तरह से नाराज हैं. मौर्य और ठाकुर वोटों को साधे रखने के लिए बीजेपी ने कोई सियासी दांव नहीं चल रही है।  पांडेय और चौधरी बीजेपी के कितन काम आएंगे?  ब्राह्मण बीजेपी के साथ पहले ही मजबूती से खड़ा है और मनोज पांडेय मंत्री बनकर क्या खिसकते हुए ब्राह्मण समाज को जोड़े रख पाएंगे, ये सवाल इसीलिए है कि सपा में रहते हुए ब्राह्मणों को अखिलेश के करीब नहीं ला सके थे. अखिलेश से बगावत करने का भले ही उन्हें इनाम मिल गया है, लेकिन ब्राह्मण चेहरे के तौर पर उनकी स्वीकार्यता अपने क्षेत्र से बाहर नहीं है।  पश्चिम … Read more

योगी सरकार का जोर: जल जीवन मिशन को मिला बढ़ा हुआ बजट, लक्ष्य जल्द पूरा होगा

योगी सरकार में जल जीवन मिशन को मिल रहा भरपूर बजट, जल्द पूरा होगा लक्ष्य केंद्र और प्रदेश सरकार के लगभग 28 हजार करोड़ रुपये से पूरे होंगे अधूरे काम जल जीवन मिशन 2.0 के विस्तार से ग्रामीण जनता को राहत देगी योगी सरकार लखनऊ उत्तर प्रदेश में जल जीवन मिशन (हर घर नल योजना) न केवल एक सरकारी योजना है, बल्कि यह ग्रामीण जीवनशैली में एक बड़े बदलाव का प्रतीक बन गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इस मिशन को युद्धस्तर पर लागू किया जा रहा है। इसी क्रम में केंद्र से उत्तर प्रदेश के लिए 13,425 करोड़ रुपये से अधिक का बजट आवंटित हो चुका है। वहीं उत्तर प्रदेश सरकार भी ग्रामीण जलापूर्ति विभाग को करीब 15 हजार करोड़ रुपये वर्ष 2026-27 में योजनाओं को पूरा करने के लिए देगी। इस 28 हजार करोड़ रुपये से अधिक के बजट से स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति को सुनिश्चित करने में कोई बाधा नहीं आएगी।  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश में 2.62 करोड़ ग्रामीण परिवारों तक नल से स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जाए। इस लक्ष्य को अब जल जीवन मिशन 2.0 के जरिए हासिल किया जाएगा। दरअसल उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के बीच जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर हो चुका है। इसमें जल जीवन मिशन की डेड लाइन जल जीवन मिशन 2.0 के रूप में दिसंबर 2028 तक बढ़ा दी गई है। साथ ही जारी वित्तीय वर्ष के लिए उत्तर प्रदेश को 13,425 करोड़ रुपये भी आवंटित किए गए हैं। एसडब्ल्यूएसएम, नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के विशेष सचिव व एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर प्रभास कुमार ने बताया कि मिशन के नए स्वरूप और बजट के साथ नई जिम्मेदारियों को भी जोड़ा गया है। जल जीवन मिशन 2.0 के तहत प्रदेश में जल गुणवत्ता परीक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। विंध्य और बुंदेलखंड समेत प्रदेश के कई इलाकों में पानी में रासायनिक तत्वों की जांच कर उन्हें पीने योग्य बनाना सबसे जरूरी है। इसके लिए पानी की गुणवत्ता की जांच कराई जा रही है। जनभागीदारी भी इसका दूसरा सबसे अहम बिंदु है। प्रदेश में जलापूर्ति के लिए जितने भी पंप हाउस, पानी की टंकी समेत अन्य निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद ग्राम एवं पेयजल स्वच्छता समिति (वीडब्ल्यूएससी) को सौंपा जाएगा। 10 वर्षों तक जल निगम, (वीडब्ल्यूएससी), निर्माण एजेंसियां व ठेकेदार मिलकर इनके सुचारु संचालन को सुनिश्चित करेंगे। पानी के स्रोत के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि एक बार निर्माण हो जाने के बाद कोई भी बोरवेल, पंप या पानी का स्रोत सूखे नहीं। इससे सभी ग्रामीण इलाकों में पानी की आपूर्ति सुनिश्चित हो पाएगी। प्रभास कुमार ने बताया कि वर्ष 2027 में सभी कार्यों की प्रगति की समीक्षा केंद्र सरकार द्वारा की जाएगी, ताकि लक्ष्य पूरा किया जा सके। जल जीवन मिशन 2.0 के तहत सभी नई प्राथमिकताओं को प्रदेश में लागू कराया जाएगा। तेजी से पूरा किया जा रहा लक्ष्य विभाग के मुताबिक जल जीवन मिशन के तहत अभी तक 2.43 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन पहुंचाया जा चुका है। वहीं वर्ष 2026-27 में 2.62 करोड़ कनेक्शन का लक्ष्य पूरा करने की योजना पर काम किया जा रहा है।

सीएम योगी के नेतृत्व में प्रदेश भर में बुनियाद सुविधाओं का हो रहा विस्तार, हर वर्ग का हो रहा उत्थान

आईजीआरएस की अप्रैल की रिपोर्ट में रामपुर ने फिर मारी बाजी, योगी सरकार के विकास कार्यों को तेजी से धरातल पर उतार रहे  सीएम योगी के नेतृत्व में प्रदेश भर में बुनियाद सुविधाओं का हो रहा विस्तार, हर वर्ग का हो रहा उत्थान  आईजीआरएस की निगरानी से विकास कार्यों में आयी तेजी, गुणवत्तापूर्ण हो रहे विकास कार्य आईजीआरएस की अप्रैल माह की रिपोर्ट में डीएम रामपुर ने 98.57 प्रतिशत अंक प्राप्त कर हासिल किया पहला स्थान रिपोर्ट में पीलीभीत ने दूसरा, श्रावस्ती और अमेठी ने बराबर अंक प्राप्त कर तीसरा स्थान प्राप्त किया लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पिछले नौ वर्षों से समग्र विकास की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। इस दौरान प्रदेश में न केवल बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हो रहा है, बल्कि समाज के हर वर्ग का उत्थान भी सुनिश्चित किया जा रहा है। सीएम योगी के सपनों काे साकार करने में एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली (आईजीआरएस) अपनी अहम भूमिका निभा रहा है। आईजीआरएस से जनसुनवाई, जन कल्याणकारी योजनाओं और राजस्व कार्यों की लगातार निगरानी की जा रही है, जिससे जिलों को बेहतर प्रशासनिक मानक स्थापित करने में मदद मिल रही है। इसी कड़ी में आईजीआरएस की अप्रैल माह की रिपोर्ट में प्रदेशभर में रामपुर ने 138 अंक प्राप्त कर पहला स्थान प्राप्त किया है जबकि पीलीभीत ने दूसरा और श्रावस्ती के साथ अमेठी ने बराबर-बराबर अंक प्राप्त कर तीसरा स्थान प्राप्त किया है।  जनशिकायतों के निस्तारण के साथ 49 विभागों के 109 कार्यक्रमों की हर माह आईजीआरएस से की जाती है समीक्षा आईजीआरएस द्वारा हर माह जिलों के राजस्व कार्यों, विकास कार्यों और जन शिकायत की सुनवाई की रिपोर्ट जारी की जाती है। आईजीआरएस द्वारा प्रदेशभर के जिलों में 49 विभागों के 109 कार्यक्रमों की विभिन्न मानकों के आधार पर समीक्षा की जाती है। इसके बाद जिलों की रैंकिंग जारी की जाती है। आईजीआरएस की अप्रैल माह की रिपोर्ट के अनुसार रामपुर ने मानक पूर्णांक 140 नंबर के सापेक्ष 138 अंक प्राप्त कर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। इसका रेश्यो 98.57 प्रतिशत है। जिलाधिकारी रामपुर अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि आईजीआरएस की रिपोर्ट उन जिलों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करती है, जिन्होंने प्रशासनिक दक्षता, विकास कार्यों और राजस्व प्रबंधन में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप रामपुर में विकास कार्यों को गुणवत्तापूर्ण समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है। इसके साथ ही आईजीआरएस के जरिये मिलने वाली शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण तरीके से त्वरित निस्तारण किया जा रहा है। बता दें कि रामपुर पिछले चार माह से पहले स्थान पर है। प्राथमिकता के आधार पर जनसुनवाई और आईजीआरएस की शिकायतों का किया जा रहा निस्तारण पीलीभीत जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर जिले में प्राथमिकता के आधार पर जनसुनवाई में िशिकायतों का निस्तारण किया जा रहा है। यही वजह है कि जिले में जनशिकायतों के निस्तारण दर में लगातार सुधार हो रहा है। पीलीभीत लगातार चार माह से प्रदेश में दूसरा स्थान बनाए हुए है। आईजीआरएस की अप्रैल माह की रिपोर्ट में भी पीलीभीत पूरे प्रदेश में दूसरे स्थान पर है। पीलीभीत ने पूर्णांक 140 नंबर के सापेक्ष 137 अंक प्राप्त किये। इसका रेश्यो 97.86 प्रतिशत है। इसी तरह श्रावस्ती ने पूर्णांक 140 नंबर के सापेक्ष 136 अंक प्राप्त कर तीसरा स्थान प्राप्त  है। इसका रेश्यो 97.14 प्रतिशत है। जिलाधिकारी अन्नपूर्णां गर्ग ने बताया कि विकास परियोजनाओं के गुणवत्तापूर्ण और तय समय सीमा में पूरा करने के लिए हर हफ्ते अधिकारियों के साथ बैठक कर समीक्षा की जाती है। साथ ही आम जनमानस की शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जा रहा है। उनकी समस्या के निस्तारण के संतुष्टीपूर्ण फीडबैक पर ही आईजीआरएस की रिपोर्ट जारी की जाती है। इसी तरह अमेठी ने भी 136 अंक प्राप्त कर तीसरा स्थान प्राप्त किया है। वहीं हाथरस, बरेली, हमीरपुर, बदायूं, बाराबंकी और बलिया ने टॉप टेन जिलों में जगह बनायी है।

संवेदनशील कदम: चाइल्ड हेल्पलाइन के जरिए 5 महीने के मासूम को लौटा परिवार

योगी सरकार की संवेदनशील पहल: चाइल्ड हेल्पलाइन ने 5 महीने के मासूम को मां की गोद वापस दिलाई तत्काल कार्रवाई होने से फईमा खातून ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का धन्यवाद व्यक्त किया पारिवारिक विवाद में पिता ने दुधमुंहे बच्चे को मां से किया था अलग चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 ने एएचटीयू और बाल कल्याण अधिकारी के साथ त्वरित हस्तक्षेप किया काउंसलिंग के बाद शहाबुद्दीन ने बच्चे को पत्नी को सौंपा मिशन वात्सल्य योजना के तहत बच्चों की सुरक्षा पर सरकार का विशेष फोकस लखनऊ   उत्तर प्रदेश की योगी सरकार महिला एवं बाल कल्याण के क्षेत्र में लगातार संवेदनशील और प्रभावी कदम उठा रही है। खासतौर पर बच्चों की सुरक्षा, गुमशुदा बच्चों की तलाश और पारिवारिक विवाद के चलते मां से अलग हुए मासूमों की मदद को लेकर राज्य सरकार की पहल लगातार असर दिखा रही है। इसका ताजा उदाहरण बिजनौर जिले में सामने आया, जहां चाइल्ड हेल्पलाइन की सक्रियता से 5 माह के दुधमुंहे बच्चे को उसकी मां से मिलाया गया है।  बच्चे को अपने पास रख पत्नी को घर से दिया था निकाल दरअसल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित महिला कल्याण विभाग की मिशन वात्सल्य योजना के अंतर्गत चल रही चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 अब जरूरतमंद बच्चों और परिवारों के लिए बड़ी राहत बनकर उभर रही है। बीती 3 मई चाइल्ड हेल्पलाइन टीम को सूचना मिली थी कि बिजनौर जिले में पारिवारिक विवाद के चलते शहाबुद्दीन नाम के शख्स ने अपने पांच महीने के बच्चे को अपने पास रख उसकी मां को घर से निकाल दिया है। मामला बेहद संवेदनशील था, क्योंकि बच्चा बहुत कम उम्र का था और पूरी तरह अपनी मां की देखभाल और मातृ दुग्ध पर निर्भर था। सूचना मिलते ही चाइल्ड हेल्पलाइन टीम ने इसे गंभीरता से लिया और आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी। बताते चलें कि योगी सरकार के निर्देश पर प्रदेश में महिला एवं बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।  अधिकारियों ने माता-पिता से अलग-अलग बातचीत कर समझाया इसी क्रम में चाइल्डलाइन टीम ने बिना देरी किए संबंधित एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट और स्थानीय थाना के बाल कल्याण अधिकारी से संपर्क किया। संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का आकलन किया और दोनों पक्षों से अलग-अलग एवं संयुक्त रूप से बातचीत की। पारिवारिक विवाद का सीधा असर पांच माह के मासूम पर पड़ रहा था। शिशु की उम्र बेहद कम होने के कारण उसे मां की गोद, मातृ दुग्ध और निरंतर देखभाल की जरूरत थी। अधिकारियों ने बच्चे के पिता शहाबुद्दीन को समझाया कि इतनी कम उम्र में बच्चे को मां से अलग रखना उसके शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास के लिए नुकसानदायक हो सकता है। काउंसलिंग के बाद पिता ने बच्चे को मां के सुपुर्द किया चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम और बाल कल्याण अधिकारियों ने कानूनी एवं सामाजिक पहलुओं से भी पिता को अवगत कराया। टीम ने काउंसलिंग करते हुए मां फईमा और पिता शहाबुद्दीन के बीच संवाद स्थापित कराया और विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने का प्रयास किया। इसका नतीजा यह रहा है कि शहाबुद्दीन बच्चे को अपनी पत्नी फईमा को सुपुर्द करने के लिए सहमत हो गया था। संयुक्त टीम की मौजूदगी में 5 महीने के मासूम को सुरक्षित रूप से उसकी मां की देखरेख में सौंप दिया गया। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया कि बच्चे को आवश्यक मातृ पोषण और उचित देखभाल मिलती रहे। फिलहाल मिशन वात्सल्य योजना के अंतर्गत संचालित चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 लगातार ऐसे मामलों में अहम भूमिका निभा रही है।  फईमा ने बच्चे के पालन पोषण के लिए मुख्यमंत्री से लगाई गुहार गाजियाबाद के लोनी की रहने वाली फईमा खातून ने बताया कि परिवारिक विवाद के चलते पति शहाबुद्दीन ने उन्हें घर से बाहर निकाल दिया था और बच्चा भी छीन लिया था। जिसकी शिकायत उन्होंने चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर की थी। चाइल्ड हेल्पलाइन ने तत्काल मामले को संज्ञान लेते हुए आवश्यक कार्रवाई की थी। उन्होंने बताया कि अधिकारियों ने मुझे मेरा बच्चा दिला दिया है। जिसके लिए मैं माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी और उनकी टीम का धन्यवाद व्यक्त करती हूं। हम सदैव उनके आभारी रहेंगे। फिलहाल पीड़ित फईमा बच्चे को लेकर अपने मायके चली गई है। उन्होंने बच्चे के पालन-पोषण के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मदद की गुहार लगाई है।  भविष्य में भी ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई जारी रहेगीः उप निदेशक महिला कल्याण निदेशालय के उप निदेशक पुष्पेंद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। बिजनौर में 5 माह के शिशु को उसकी मां से मिलाने का मामला इसी संवेदनशील और प्रभावी कार्यप्रणाली का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि शिशु की कम आयु को देखते हुए उसकी सुरक्षा, पोषण और मातृ देखभाल सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक था। चाइल्ड हेल्पलाइन टीम, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट और बाल कल्याण अधिकारियों के समन्वित प्रयास से मामले का शांतिपूर्ण समाधान निकाला गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार बच्चों के सर्वोत्तम हितों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है और भविष्य में भी ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई जारी रहेगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने घोषणा: यूपी में फिल्म ‘कृष्णावतारम्’ अब टैक्स फ्री

यूपी में फिल्म कृष्णावतारम् टैक्स फ्री लोकभवन सभागार में फिल्म देखने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने की घोषणा फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग में राज्यपाल आनंदीबेन, दोनों डिप्टी सीएम, अन्य मंत्रीगण और जनप्रतिनिधि भी रहे शामिल नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ने का संदेश, सीएम योगी ने मंच पर कलाकारों का किया सम्मान   कृष्णा-कृष्णा, राधे-राधे से गूंजा लोकभवन सभागार, भक्तिमय रहा माहौल भगवान कृष्ण के जीवन को मानवीय दृष्टिकोण से दिखाती है फिल्म लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फिल्म कृष्णावतारम् को उत्तर प्रदेश में टैक्स फ्री कर दिया है।  मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद राज्यपाल आनंदीबेन व सीएम योगी ने दोनों उप मुख्यमंत्री, मंत्रीगण और जनप्रतिनिधियों ने एक साथ यह फिल्म देखी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने इसे टैक्स फ्री करने को घोषणा की। राजधानी स्थित लोकभवन सभागार उस समय पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में डूब गया, जब फिल्म ‘कृष्णावतारम्’ की विशेष स्क्रीनिंग के दौरान “कृष्णा कृष्णा, राधे राधे” के जयघोष से पूरा सभागार गूंज उठा। इस दौरान सभागार खचाखच भरा रहा और फिल्म को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। इस दौरान सीएम योगी ने मंच पर कलाकारों का सम्मान भी किया।   फिल्म में द्वापर युग और सनातन संस्कृति की झलक फिल्म ‘कृष्णावतारम्’ में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन को मानवीय दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है। फिल्म में द्वापर युग, भारतीय पुरातन संस्कृति और सनातन परंपरा के विभिन्न आयामों को भव्यता के साथ दर्शाया गया है। फिल्म की सबसे खास बात यह रही कि इसमें भगवान कृष्ण के साथ राधा, रुक्मिणी और सत्यभामा की प्रेम कथाओं को अलग-अलग स्वरूपों में प्रस्तुत किया गया है।  इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वृंदावन बिहारी लाल की जय और भारत माता के जयकारे लगाए। उन्होंने कहा कि यह अद्भुत संयोग है कि आज मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद शपथ ग्रहण करने वाले सभी मंत्री पूरे मंत्रिमंडल के साथ इस अद्भुत कार्यक्रम में सहभागी बने। करीब ढाई घंटे तक सभी एक साथ यहां बैठे रहे और हर एक चेहरे पर नई रौनक दिखाई दे रही थी। उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा और संस्कृति से जुड़ी भगवान कृष्ण पर आधारित इस फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग के साथ हम सभी यहां जुड़े हैं। फिल्म के कलाकार भी यहां उपस्थित हैं। उन्होंने कहा कि फिल्म में मुख्य अभिनेत्री के रूप में सत्यभामा का किरदार निभाने वाली कलाकार का नाम भी संस्कृति है, जिन्होंने इस भूमिका को बेहद प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है। मुख्य अभिनेत्री संस्कृति ने लिया सीएम योगी से आशीर्वाद सीएम योगी ने कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार के बाद हम सभी ने एक साथ इस फिल्म को देखा। यह भारत की संस्कृति और परंपराओं से जुड़े इतिहास को समेटते हुए तथा पुरातन विरासत को मुख्य धारा में प्रस्तुत करने वाली फिल्म है। इस दौरान फिल्म की मुख्य अभिनेत्री संस्कृति ने सीएम योगी से आशीर्वाद लिया। सीएम योगी ने निर्माता-निर्देशक और फिल्म से जुड़े सभी कलाकारों को धन्यवाद भी दिया।  जो नए मंत्री बने हैं, उनके स्वागत के लिए यादगार क्षण मुख्यमंत्री ने फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग के लिए पूरी टीम को हृदय से धन्यवाद दिया। इसी के साथ उन्होंने उत्तर प्रदेश में इस फिल्म को टैक्स फ्री करने की घोषणा भी की। उन्होंने सूचना विभाग को प्रत्येक जनपद में इस फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग आयोजित कराने में सहयोग करने का निर्देश दिया, जिससे बच्चे और युवा इसे देखकर अपनी संस्कृति, परंपरा और सनातन विरासत के बारे में समझ सकें। उन्होंने कहा कि जब हम बरसाना, मथुरा और वृंदावन में जाते हैं तो वहां संबोधन राधे-राधे का ही होता है। उन्होंने राज्यपाल आनंदी बेन पटेल का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया।  मुख्यमंत्री ने कहा कि कृष्णावतारम् की मुख्य पात्र संस्कृति राज्यपाल की नातिन हैं और किसी भी नानी के लिए इससे अद्भुत क्षण और कोई नहीं होगा कि पालन-पोषण कर जिस बच्ची को आगे बढ़ाया है, आज उसे इतना बेहतर काम करते हुए वे देख रहीं हैं। उन्होंने कहा कि कलाकार को सम्मान मिलना चाहिए।  हमें अपनी संस्कृति और परंपरा को लेकर ऐसी फिल्में बनानी चाहिए : राज्यपाल राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हमें अपनी संस्कृति और परंपरा को लेकर ऐसी फिल्में बनानी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने नए मंत्रियों को शुभकामनाएं भी दीं।  इस अवसर पर विधान परिषद सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह, केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक सहित कई मंत्री और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। हिंदी, तमिल और तेलुगु में की गई रिलीज यह फिल्म हिंदी, तमिल और तेलुगु भाषाओं में रिलीज की गई है। फिल्म के निर्देशक हार्दिक गज्जर हैं। फिल्म में सिद्धार्थ गुप्ता, संस्कृति, सुष्मिता भट्ट और निवासिनी कृष्णन मुख्य भूमिकाओं में हैं। वहीं, जैकी श्रॉफ और आशुतोष राणा समेत कई बड़े कलाकार अपने किरदारों के जरिये छाप छोड़ने में सफल रहे।