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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज नगर निगम के नवनिर्मित सदन हॉल और विभिन्न विकास परियोजनाओं का किया लोकार्पण-शिलान्यास

मां गंगा की धारा की तरह बढ़ रही विकास यात्रा: सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज नगर निगम के नवनिर्मित सदन हॉल और विभिन्न विकास परियोजनाओं का किया लोकार्पण-शिलान्यास मुख्यमंत्री बोले- प्रयागराज अब भय, अराजकता और माफियागिरी से मुक्त, विकास और सांस्कृतिक गौरव की नई पहचान बना कुंभ-2019 और महाकुंभ-2025 ने प्रयागराज को वैश्विक पहचान दिलाई, यूनेस्को ने कुंभ को दी अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की मान्यता: सीएम “चरैवेति-चरैवेति” मंत्र के साथ डबल इंजन सरकार निरंतर आगे बढ़ा रही विकास यात्रा: मुख्यमंत्री प्रयागराज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को प्रयागराज नगर निगम के नवनिर्मित सदन हॉल और विभिन्न विकास परियोजनाओं के लोकार्पण-शिलान्यास कार्यक्रम में कहा कि प्रदेश की विकास यात्रा में सरकार कहीं रुकी नहीं, कहीं थमी नहीं। यह यात्रा मां गंगा की धारा की तरह अविरल आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री ने “चरैवेति-चरैवेति” के मंत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रयागराज आज सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक गौरव और आधुनिक विकास का अद्भुत संगम बन चुका है। अगले कुंभ तक यही सुविधाएं प्रयागराज की स्थायी धरोहर बन जाएंगी मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले माघ मेला और कुंभ जैसे आयोजन गंदगी, भगदड़, अव्यवस्था और अराजकता के प्रतीक बन गए थे। लोग प्रयागराज आने से भी कतराते थे। लेकिन वर्ष 2019 में जब उनकी सरकार को कुंभ आयोजन का अवसर मिला, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और प्रेरणा से प्रयागराज कुंभ को यूनेस्को द्वारा मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता प्राप्त हुई। इससे भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा को वैश्विक पहचान मिली। कुंभ-2019 और महाकुंभ-2025, दोनों आयोजनों के दौरान डबल इंजन सरकार ने प्रयागराज में व्यापक अवस्थापना सुविधाओं का विकास किया। यदि इनका बेहतर रखरखाव किया जाए तो अगले कुंभ तक यही सुविधाएं प्रयागराज की स्थायी धरोहर बन जाएंगी। प्रयागराज को मिल रही नई पहचान मुख्यमंत्री ने नगर निगम और महापौर के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि विरासत को विकास से जोड़ने का कार्य किया गया है। वर्ष 2024 की शुरुआत में जब महाकुंभ-2025 की तैयारियों के लिए प्रयागराज का निरीक्षण किया गया, तब यह तय किया गया था कि शहर को नई पहचान दी जाएगी। आज 161 वर्ष पुरानी नगर निगम इमारत भव्य स्वरूप में सामने है। पार्षदों के लिए आधुनिक सदन हॉल तैयार हुआ है और नगर निगम 400 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास कर रहा है। कहीं जोनल पार्क विकसित हो रहे हैं तो कहीं शिवालिक पार्क की नई श्रृंखला तैयार की जा रही है। उन्होंने शिवालिक पार्क को “वेस्ट टू वेल्थ” की सफल मिसाल बताते हुए कहा कि 400 टन वेस्ट मटेरियल से द्वादश ज्योतिर्लिंगों की प्रतिकृतियां तैयार की गईं, जो लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हैं। ऐसे प्रयास प्रयागराज को नई पहचान देते हैं। हर वार्ड और मोहल्ले तक पहुंच रहा विकास मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले अक्षय वट के दर्शन आम श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध नहीं थे, लेकिन वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री की प्रेरणा से अक्षय वट को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। अब श्रद्धालु वहां दर्शन कर सकते हैं और सरस्वती कूप का जल ग्रहण कर सकते हैं। महर्षि भारद्वाज का आश्रम वर्षों तक अतिक्रमण का शिकार रहा, लेकिन अब उसे मुक्त कराकर भव्य स्वरूप दिया गया है। उन्होंने महर्षि भारद्वाज को दुनिया का पहला कुलपति बताते हुए कहा कि प्रयागराज अब अपनी सांस्कृतिक गरिमा पुनः प्राप्त कर रहा है। आज प्रयागराज की सड़कें चौड़ी और स्मार्ट हो चुकी हैं तथा शहर ने स्मार्ट सिटी के रूप में विकास की नई यात्रा शुरू की है। नगर निगम और जनप्रतिनिधि हर वार्ड और मोहल्ले तक विकास पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। सुरक्षा, सुशासन और समृद्धि के लक्ष्य के साथ कार्य मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा दशहरा, ज्येष्ठ मास और मंगलवार का यह संयोग विशेष पुण्य का अवसर है। नौ वर्ष पहले प्रयागराज में भय, आतंक, अराजकता, माफियागिरी और गुंडागर्दी का माहौल था। सार्वजनिक भूमि पर कब्जे होते थे और विकास पूरी तरह ठप था। लेकिन आज प्रयागराज पूरी तरह माफिया और गुंडागर्दी से मुक्त हो चुका है। अब बेटियां, व्यापारी और आम नागरिक किसी भी समय निडर होकर निकल सकते हैं। यदि कोई बेटियों से छेड़छाड़ या अपराध का दुस्साहस करेगा तो उसे इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। डबल इंजन सरकार सुरक्षा, सुशासन और समृद्धि के लक्ष्य के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने प्रयागराज वासियों का विशेष आभार जताते हुए कहा कि महाकुंभ के 45 दिनों तक यातायात और आवागमन में भारी असुविधा के बावजूद किसी ने विरोध या असंतोष नहीं जताया। पूरा शहर ऐसा लग रहा था मानो अपने घर का आयोजन मना रहा हो। किसी भी बड़े आयोजन की सफलता तब संभव होती है, जब जनता उसे अपना कार्यक्रम मानकर सहयोग करे। कई बड़े प्रोजेक्ट्स का होगा शुभारंभ मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता के आशीर्वाद और समर्थन के कारण ही सरकार रोजगार, किसान कल्याण, गरीब कल्याण और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को धरातल पर उतार पा रही है। आज गंगा एक्सप्रेसवे के माध्यम से प्रयागराज से दिल्ली मात्र सात घंटे में पहुंचा जा सकता है। विश्वस्तरीय तकनीक से बने इस एक्सप्रेसवे पर 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर भी ऐसा महसूस होता है मानो वाहन स्थिर खड़ा हो। हर्षवर्धन जी के विधानसभा क्षेत्र में गंगा नदी पर लगभग 1000 करोड़ रुपये की लागत से फोर-लेन पुल का निर्माण कराया जा रहा है और फाफामऊ पुल का कार्य भी जल्द पूरा होगा। इन सभी बड़े प्रोजेक्ट्स का लोकार्पण एवं शिलान्यास प्रधानमंत्री मोदी जी के कर-कमलों से कराने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रयागराज में अभी कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर कार्य होना बाकी है और सरकार उन्हें आगे बढ़ाएगी। उन्होंने भगवान प्रयागराज, अक्षय वट, मां गंगा और भगवान वेणी माधव का स्मरण करते हुए कहा कि प्रयागराज की विकास यात्रा बिना रुके, बिना डिगे और बिना झुके निरंतर आगे बढ़ती रहेगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि विकास के लिए आने वाले हर प्रस्ताव पर प्रदेश सरकार पूरा सहयोग करेगी। इस अवसर पर जल शक्ति मंत्री एवं प्रयागराज के प्रभारी मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, महापौर उमेश चंद्र गणेश केसरवानी,  विधायक हर्षवर्धन वाजपेयी, दीपक पटेल, पीयूष रंजन निषाद, गुरु प्रसाद मौर्य, वाचस्पति, राजमणि कोल, विधान परिषद सदस्य सुरेंद्र चौधरी, विधान परिषद … Read more

यूपी में गर्मी की छुट्टियां शुरू होते ही सीएम योगी ने बच्चों-अभिभावकों के लिए लिखी पाती

सीएम योगी ने दिया इको फ्रेंडली पर्यटन का मंत्र यूपी में गर्मी की छुट्टियां शुरू होते ही सीएम योगी ने बच्चों-अभिभावकों के लिए लिखी पाती बच्चों को दुधवा, चूका बीच, कतर्नियाघाट वन्यजीव विहार के जरिए प्रकृति से जोड़ने की अपील संस्कारों और परंपराओं को जानने के लिए बच्चों को दादा-दादी व नाना-नानी के पास ले जाएं: सीएम योगी किशोर और युवा इन छुट्टियों में नया कौशल और भाषा सीखें, यह समय रुचियों को पूरा करने का भी लखनऊ, उत्तर प्रदेश के स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां शुरू हो चुकी हैं। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के बच्चों और अभिभावकों के नाम पाती (पत्र) लिखी है। इसमें उन्होंने बच्चों को न सिर्फ छुट्टियों का सदुपयोग करने की राह दिखाई है, बल्कि 'इको-फ्रेंडली पर्यटन' और जिम्मेदार जीवनशैली को अपनाने की सीख भी दी है। सीएम योगी ने लिखा है कि गर्मी की छुट्टियां आप सभी के लिए आनंद, उत्साह और नए शोध का समय लेकर आती हैं। स्कूल की व्यस्त दिनचर्या से थोड़ी राहत मिलते ही मन कुछ नया सीखने, नए स्थान देखने और अपनों के साथ समय बिताने को उत्सुक हो उठता है। यही अवसर है, जब आप अपनी रुचियों को पहचानें, नई आदतें विकसित करें एवं जीवन के ऐसे अनुभव प्राप्त करें, जो आगे चलकर आपके सम्पूर्ण व्यक्तित्व निर्माण में सहायक हो। किशोर एवं युवा इन छुट्टियों में नई भाषा या नया कौशल सीख सकते हैं। यह समय अच्छी पुस्तकों से मित्रता, फोटोग्राफी, चित्रकारी, पाक कला, संगीत एवं बागवानी जैसी रुचियों को पूरा करने का हो सकता है। अभिभावक बच्चों को ननिहाल-ददिहाल में समय बिताने दें सीएम योगी ने अभिभावकों के लिए भी कई जरूरी बातें लिखीं। उन्होंने लिखा कि हममें से अधिकतर लोगों ने बचपन में दादा-दादी, नाना-नानी से नैतिक शिक्षा की कहानियां सुनीं। आज बच्चे इन अनुभवों से दूर होते जा रहे हैं। आपसे आग्रह है कि इन छुट्टियों में बच्चों को ननिहाल-ददिहाल अवश्य ले जाएं। उन्हें परिवार के साथ समय बिताने दें, ताकि वे अपने संस्कारों और परंपराओं को निकट से जान सकें। बच्चों को प्रकृति से जोड़ने की सलाह दी सीएम योगी ने बच्चों को प्रकृति और इको-फ्रेंडली पर्यटन से भी परिचित कराने की अभिभावकों को सलाह दी। उन्होंने लिखा कि बच्चों को ऐसे स्थानों पर लेकर जाएं, जहां वे प्रकृति के निकट आ सकें और जैव विविधता को अनुभव कर सकें। इसके लिए उन्होंने दुधवा राष्ट्रीय उद्यान, चूका बीच और कतर्नियाघाट वन्यजीव विहार जैसे स्थलों का सुझाव दिया। इन छुट्टियों में बच्चों को प्रकृति, संस्कृति और स्वास्थ्य से जोड़ने पर भी जोर दिया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी अपील करते हुए इन छुट्टियों को प्लास्टिक मुक्त बनाने का भी संकल्प लेने के लिए कहा। उन्होंने लिखा कि यात्रा हो या पिकनिक, कपड़े या जूट के थैलों का प्रयोग करें, प्लास्टिक कचरा इधर-उधर न फैलाएं और बच्चों को भी स्वच्छ एवं जिम्मेदार जीवनशैली का संदेश दें। छोटे-छोटे प्रयास ही भविष्य के बड़े परिवर्तन का आधार बनते हैं। बच्चों को समझाएं मिट्टी, वृक्ष और जल का महत्व सीएम योगी ने पाती में बच्चों को मिट्टी, जल और वृक्ष से जोड़ने के लिखा है। अभिभावकों से कहा कि बच्चों के साथ पौधे लगाएं, उनकी देखभाल का दायित्व उन्हें दें तथा आस-पास स्वच्छता बनाए रखने की आदत विकसित करें। जब बच्चे मिट्टी, वृक्ष और जल के महत्व को समझते हैं, तभी उनके अंदर पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित होती है।

जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए नहीं लगाने होंगे चक्कर, यूपी सरकार ने शुरू की नई व्यवस्था

 लखनऊ उत्तर प्रदेश में जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने या घर-जमीन का दाखिल खारिज कराने के लिए भाग-दौड़ नहीं करना होगा। योगी आदित्यनाथ सरकार ने सर्टिफिकेट बनवाने में संकट खत्म करने के लिए प्रदेश के सभी नगर निगम में वन डे गवर्नेंस सेंटर चालू करने का फैसला किया है। प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने मंगलवार को इस पहल का ऐलान किया। सरकार इन वन डे गवर्नेंस सेंटर पर आम लोगों के कई जरूरी काम एक ही दिन में निबटाने की योजना बना रही है, जिसमें प्रमाण पत्र जैसी सेवाओं को रखा जाएगा। कैबिनेट मंत्री एके शर्मा ने लखनऊ में एक कार्यक्रम में कहा कि सरकार नगर निकायों की सेवाओं को तेज, पारदर्शी और नागरिकों के अनुकूल बनाने पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि प्रयागराज, वाराणसी और गोरखपुर में भी इस व्यवस्था को शुरू करने की तैयारी की जा रही है। लखनऊ में सेंटर बन गया है। यह कार्यक्रम लखनऊ महापौर के तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के अवसर पर आयोजित किया गया था। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सीएम योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में नगर विकास से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं, जन सुविधाओं और शहरी विकास योजनाओं पर चर्चा की गई। यूपी में लागू होगा गुजरात मॉडल एके शर्मा ने कहा कि सरकार का उद्देश्य लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर से राहत देना है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद नगर निगमों में नागरिक सेवाओं का निस्तारण पहले से अधिक तेजी से हो सकेगा। मंत्री ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने गुजरात में वन डे गर्वनेंस सिस्टम शुरू किया था। हम लोगों ने उस पर काम किया था। वही मॉडल यहां लाना चाहते हैं। अभी लखनऊ के साथ प्रयागराज, वाराणसी में इस पर काम हो रहा है। हम चाहते हैं कि वही मॉडल पूरे यूपी में लागू हो जाए। किसी भी नागरिक को दो दिन, चार दिन, एक हफ्ते या महीने तक दौड़ना न पड़े। कोई आएगा तो उसे बैठाएंगे और आधे घंटे में प्रमाण पत्र दे देंगे। किसी का मामला बहुत पेचीदा होगा तो उसको कह देंगे कि वह लंच करके दो घंटे बाद आए। उसके आने पर हम उसी दिन उसका प्रमाण पत्र दे देंगे। सीनियर सिटीजन के लिए खास सुविधा शर्मा ने कहा कि जो लोग ऑनलाइन सेवा का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं, उन्हें इससे काफी सुविधा हो जाएगी। यह व्यवस्था लखनऊ नगर निगम ने खड़ी की है। आधुनिक सोच के साथ व्यवस्था शुरू हुई है। लखनऊ के सेंटर में सीनियर सिटिजन के बैठने की शानदार व्यवस्था है। चाय समेत हर तरह की सुविधा उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि आज स्मार्ट सिटी बना रहे हैं तो वन डे गवर्ननेंस सिस्टम भी जरूरी है। मंत्री ने कहा कि सरकार की मंशा स्मार्ट सिटी के साथ ही वैश्विक सिटी बनाना है।

योगी सरकार की होमस्टे नीति से यूपी पर्यटन को नई उड़ान, गांव-शहर में बढ़ रहा आकर्षण

योगी सरकार की बेड एंड ब्रेकफास्ट, होमस्टे नीति से यूपी में बदल रहा पर्यटन का स्वरूप किफायती होमस्टे और फार्मस्टे के लिए आए 3 हजार से ज्यादा आवेदन, 900 रजिस्टर्ड बड़े शहरों के साथ बुंदेलखंड, झांसी, बांदा जैसे जिले भी बन रहे पर्यटन का हब पर्यटकों को सस्ते में रुकने की व्यवस्था के साथ, स्थानीय लोगों को मिल रहा रोजगार लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को तेजी से बढ़ावा मिल रहा है। अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम के कायाकल्प, मथुरा-वृंदावन समेत अन्य जिलों में पर्यटकों और श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड आमद से राज्य में सस्ते दरों पर ठहरने की अच्छी व्यवस्था की मांग बढ़ी है। इसे योगी सरकार की बेड एंड ब्रेकफास्ट एवं होमस्टे नीति से साकार किया जा रहा है। इसके जरिए पर्यटकों को महंगे होटलों की जगह कम दाम पर ठहरने की जगह का विकल्प मिल रहा है, साथ ही शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी खुल रहे हैं। पर्यटन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025 में बेड एंड ब्रेकफास्ट एवं होमस्टे नीति लागू होने के बाद से यूपी में होमस्टे और फार्मस्टे तेजी से बढ़ रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि अब तक प्रदेशभर से 3000 से ज्यादा आवेदन मिल चुके हैं, जबकि करीब 900 होमस्टे और फार्मस्टे रजिस्टर्ड हो चुके हैं। वर्ष 2026 की शुरुआत से आवेदनों की संख्या में भी तेजी आई है, जो यह दिखाता है कि लोग अब पर्यटन से जुड़े कारोबार को लेकर ज्यादा भरोसा और रुचि दिखा रहे हैं। बुंदेलखंड समेत तमाम जिलों में होमस्टे मॉडल का विस्तार पर्यटन विभाग के मुताबिक वाराणसी, मथुरा, आगरा, अयोध्या, प्रयागराज और लखनऊ में होमस्टे और फार्मस्टे शहरी श्रेणी में आगे चल रहे हैं। वहीं अधिकारियों के मुताबिक ग्रामीण होमस्टे मॉडल में सबसे ज्यादा तेजी अब बुंदेलखंड क्षेत्र में देखने को मिल रही है। बांदा, हमीरपुर, महोबा और झांसी जैसे जिले नए पर्यटन केंद्र बनकर उभर रहे हैं।  इसके अलावा बाराबंकी, बहराइच, पीलीभीत और लखीमपुर भी तेजी से ग्रामीण पर्यटन स्थलों के रूप में पहचान बना रहे हैं। मथुरा-वृंदावन और आगरा के ग्रामीण इलाकों में भी होमस्टे और फार्मस्टे को लेकर यात्रियों और स्थानीय लोगों की रुचि लगातार बढ़ रही है। पर्यटक और श्रद्धालु ठहरने की किफायती व्यवस्था मिलने के बाद ग्रामीण परिवेश की तरफ भी रुख कर रहे हैं। रोजगार मिला और पलायन रोकने का प्रयास अधिकारियों का कहना है कि यह नीति छोटे जिलों में स्थानीय स्तर पर रोजगार और छोटे कारोबार को भी बढ़ावा दे रही है। कई परिवार अब अपने खाली कमरों को आय के साधन में बदल रहे हैं, जिससे उन्हें काम के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ रहा। यह मॉडल रिटायर्ड लोगों, बुजुर्ग दंपतियों, महिलाओं द्वारा संचालित परिवारों और खाली घरों वाले परिवारों के लिए अतिरिक्त कमाई का अच्छा जरिया बनता जा रहा है। पर्यटन का लाभ स्थानीय परिवारों तक पहुंचे पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि पर्यटन की असली ताकत तब दिखती है, जब उसका लाभ सीधे गांवों और स्थानीय परिवारों तक पहुंचे। होमस्टे और फार्मस्टे मॉडल न केवल पर्यटकों को उत्तर प्रदेश की वास्तविक संस्कृति, स्थानीय खान-पान, परंपराओं और ग्रामीण जीवन से जोड़ रहे हैं, बल्कि खाली घरों को आय के साधन में बदलकर गांवों में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी तैयार कर रहे हैं। इससे युवाओं में अपने ही जिले में पर्यटन आधारित कारोबार को लेकर रुचि बढ़ रही है। हमारी कोशिश है कि पर्यटन का लाभ केवल बड़े शहरों और होटलों तक सीमित न रहे, बल्कि गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचे। कैसे कराएं पंजीकरण बीएंडबी एवं होम स्टे नीति के अंतर्गत इकाइयों का पंजीकरण एक सरल और पारदर्शी ऑनलाइन प्रक्रिया है। नई और पहले से संचालित दोनों प्रकार की इकाइयां निर्धारित पोर्टल पर जाकर आसानी से पंजीकरण करा सकती हैं। इससे पर्यटन विभाग के रिकॉर्ड में आपकी इकाई शामिल हो जाती है और नीति के सभी लाभ प्राप्त होते हैं। पंजीकरण के लिए आधिकारिक पोर्टल https://up-tourismportal.in/application/bnb/login है। नीति के अंतर्गत पात्र इकाइयां: शहरी होमस्टे ऐसे आवासीय भवन, जिनमें भूस्वामी स्वयं निवास करता हो एवं उसके पास अपने प्रयोग के बाद अतिरिक्त कमरे उपलब्ध हो, जिन्हें यह पर्यटकों को आवास के लिए उपलब्ध कराना चाहे। ऐसे कमरों की संख्या अधिकतम 6 हो सकती है और कुल 12 बेड की व्यवस्था किसी एक आवासीय इकाई में हो सकती है। बेड एंड ब्रेकफास्ट (बीएंडबी) के लिए नियम पर्यटन विभाग द्वारा बेड एंड ब्रेकफास्ट (बीएंडबी) इकाइयों से जुड़ी व्यवस्था को भी स्पष्ट किया गया है। ऐसे आवासीय भवन जिनमें भूस्वामी स्वयं निवास न करता हो एवं उसके पास 01 से 06 तक कमरे उपलब्ध हो, जिन्हें वह पर्यटकों को आवास के लिए उपलब्ध कराना चाहे। ऐसे कमरों की संख्या अधिकतम 06 (कुल 12 बेड) हो सकती है। बीएंडबी इकाई में एक केयरटेकर रखना अनिवार्य होगा, जो इकाई के रखरखाव एवं संचालन का कार्य करेगा। ग्रामीण होमस्टे के लिए नियम ग्रामीण क्षेत्र में ऐसे आवासीय भवन, जिनमें भूस्वामी स्वयं निवास करता हो एवं उसके पास अपने प्रयोग के बाद कुछ कक्ष उपलब्ध हों, जिन्हें वह पर्यटकों को आवास के लिए उपलब्ध कराना चाहे, ऐसे कक्षों की संख्या 06 (कुल 12 बेड) तक हो सकती है। पर्यटन विभाग के जरिए प्रशिक्षण और प्रचार-प्रसार भी बेड एंड ब्रेकफास्ट एवं होमस्टे के जरिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कई तरह के फायदे भी मिल रहे है। इससे घर बैठे लोगों को आय का एक अतिरिक्त जरिया मिल रहा है। इस नीति के तहत बिजली बिल, जल कर, गृह कर और सीवर कर का भुगतान आवासीय दरों पर करना होता है। प्रधानमंत्री मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत छत पर सौर पैनल लगाने के लिए सौर ऊर्जा सब्सिडी प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। साथ ही पर्यटन विभाग के मान्यवर कांशीराम पर्यटन प्रबंधन संस्थान द्वारा आठ सहायक कर्मचारियों को निःशुल्क कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इसके अतिरिक्त पर्यटन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से इकाई का प्रचार-प्रसार किया जाएगा।

कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़कर यूपी को 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य

योगी सरकार के विजन को गति देंगे टाटा टेक्नोलॉजीज और डेलॉयट, यूपी के युवाओं को मिलेंगे वैश्विक अवसर कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़कर यूपी को 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य आईटीआई संस्थानों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में बदलेगा टाटा टेक्नोलॉजीज, डेलॉयट तैयार करेगा भविष्य की स्किल रणनीति पीपीपी मॉडल के माध्यम से कौशल विकास कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को गति देने के लिए योगी सरकार लगातार कौशल विकास और तकनीकी शिक्षा को नए आयाम दे रही है। इसी क्रम में सोमवार को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग कपिल देव अग्रवाल की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में वैश्विक परामर्शदाता कंपनी डेलॉयट और तकनीकी क्षेत्र की अग्रणी कंपनी टाटा टेक्नोलॉजी ने प्रदेश के युवाओं के लिए तैयार किए जा रहे भावी रोडमैप और योजनाओं का विस्तृत प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया। आधुनिक तकनीक से लैस होंगे यूपी के आईटीआई बैठक में टाटा टेक्नोलॉजीज के प्रतिनिधियों ने प्रदेश के राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के आधुनिकीकरण और उन्हें ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ (सीओई) के रूप में विकसित किए जाने की प्रगति साझा की। प्रेजेंटेशन में बताया गया कि आधुनिक मशीनों, ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म, ऑटोमेशन और इंडस्ट्री 4.0 आधारित तकनीकों के जरिए युवाओं को उद्योगों की वर्तमान और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि वे राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी रोजगार प्राप्त कर सकें। डेलॉयट तैयार करेगा भविष्य की स्किल रणनीति वहीं डेलॉयट के विशेषज्ञों ने उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा की रणनीतिक भूमिका पर प्रस्तुतीकरण दिया। डेलॉयट ने भविष्य के रोजगार रुझानों (फ्यूचर जॉब ट्रेंड्स), उद्योगों की मांग और निवेश आधारित रोजगार सृजन मॉडल का विश्लेषण करते हुए सुझाव दिया कि स्किल डेवलपमेंट योजनाओं को सीधे औद्योगिक निवेश और नई तकनीकों से जोड़ा जाए, जिससे युवाओं को अधिक रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिल सकें। योगी सरकार का फोकस- हुनरमंद और आत्मनिर्भर युवा बैठक के दौरान मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप उत्तर प्रदेश को आर्थिक महाशक्ति बनाने के लिए वैश्विक संस्थाओं की विशेषज्ञता का पूरा लाभ उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि टाटा टेक्नोलॉजीज और डेलॉयट जैसी संस्थाओं का सहयोग प्रदेश के युवाओं को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि दोनों संस्थाओं द्वारा प्रस्तुत कार्ययोजनाओं और सुझावों को तेजी से धरातल पर लागू किया जाए, ताकि उत्तर प्रदेश का हर युवा आधुनिक कौशल से लैस होकर आत्मनिर्भर बन सके और राज्य की आर्थिक प्रगति में सक्रिय भागीदारी निभा सके। पीपीपी मॉडल से कौशल विकास को मिलेगी नई दिशा बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के माध्यम से कौशल विकास कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। योगी सरकार का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को केवल डिग्रीधारी नहीं बल्कि इंडस्ट्री-रेडी प्रोफेशनल बनाना है, जिससे उत्तर प्रदेश देश की सबसे बड़ी स्किल कैपिटल के रूप में उभर सके।

स्कूलों में पढ़ने की आदत मजबूत करने में जुटी योगी सरकार, पठन संस्कृति पर विशेष फोकस

विद्यालयों में पठन संस्कृति मजबूत करने में जुटी योगी सरकार – परिषदीय और माध्यमिक विद्यालयों में 'समाचार-पत्र पठन' और पठन संस्कृति अभियान को नई गति देने पर फोकस – रीडिंग ऑवर, डीईएआर कैंपेन और रीडिंग चैलेंज जैसी गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश – बच्चों में पढ़ने की आदत, भाषा दक्षता, तार्किक सोच और रचनात्मक अभिव्यक्ति विकसित करने पर जोर – अपर मुख्य सचिव स्तर से सभी अधिकारियों को व्यक्तिगत और समर्पित प्रयास सुनिश्चित करने के निर्देश लखनऊ  योगी सरकार अब परिषदीय और माध्यमिक विद्यालयों में पठन संस्कृति को मजबूत कर बच्चों में पढ़ने की आदत, भाषा दक्षता और रचनात्मक सोच विकसित करने पर विशेष जोर दे रही है। शैक्षिक सत्र 2026-27 के शुभारंभ के अवसर पर 'पठन संस्कृति' और 'समाचार-पत्र पठन' से संबंधित पूर्व में जारी निर्देशों के प्रभावी अनुपालन को लेकर फिर से व्यापक स्तर पर दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि विद्यालयों में पढ़ने का सकारात्मक वातावरण विकसित किया जा सके। अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से पहले ही विद्यालयों में पठन संस्कृति, समाचार-पत्र पठन और रीडिंग गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए व्यापक निर्देश जारी किए जा चुके हैं। अब उन्हीं निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए समस्त प्राचार्य डायट, एडी बेसिक, बीएसए, बीईओ आदि को विशेष रूप से निर्देशित किया गया है कि विद्यालयों में पठन गतिविधियों को बढ़ावा देने हेतु व्यक्तिगत एवं समर्पित प्रयास सुनिश्चित किए जाएं। भाषा दक्षता, संवाद क्षमता और तार्किक सोच को मजबूत करने पर जोर योगी सरकार का फोकस अब परिषदीय एवं माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाई को केवल पाठ्यक्रम आधारित न रखते हुए विद्यार्थियों में पढ़ने की आदत विकसित कर भाषा दक्षता, संवाद क्षमता, तार्किक सोच और रचनात्मक अभिव्यक्ति को मजबूत करने पर भी है। इनमें विद्यालयों में नियमित रीडिंग ऑवर, समाचार-पत्र उपलब्ध कराना, सुबह की सभा में समाचार वाचन और बच्चों को पुस्तक पठन के लिए प्रेरित करना शामिल है। यही कारण है कि 'समाचार-पत्र पठन', 'रीडिंग ऑवर' और 'स्क्रीन टाइम कम करने' जैसी गतिविधियों को अब और अधिक गंभीरता के साथ लागू कराने पर जोर दिया जा रहा है। इन गतिविधियों को नियमित और प्रभावी तरीके से संचालित कर प्रत्येक विद्यालय में पढ़ने का सकारात्मक वातावरण तैयार किया जाएगा। डीईएआर कैंपेन और रीडिंग चैलेंज को मिलेगी गति विद्यालयों में 'डियर' (ड्रॉप एवरीथिंग एंड रीड) कैंपेन को भी प्रभावी ढंग से संचालित करने पर जोर दिया गया है। इसके अन्तर्गत सप्ताह में एक निर्धारित समय पर छात्र-छात्राएं, शिक्षक और प्रधानाध्यापक अपनी पसंद की पुस्तकें पढ़ेंगे। इसके अलावा प्राथमिक स्तर पर 'सुपर-20' और उच्च प्राथमिक स्तर पर 'सुपर-30' रीडिंग चैलेंज जैसी गतिविधियों को भी नियमित रूप से संचालित किया जाएगा। निर्धारित संख्या में पुस्तकें पढ़ने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित और प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए गए हैं। विद्यालय स्तर पर सर्वाधिक पुस्तकें पढ़ने वाले छात्र-छात्रा को 'चैंपियन रीडर ऑफ द इयर' घोषित कर पुरस्कृत भी किया जाएगा। स्वतंत्र लेखन व रचनात्मकता पर भी जोर शासन की मंशा है कि विद्यार्थी पुस्तक पठन तक सीमित न रहें, बल्कि उनकी स्वतंत्र लेखन क्षमता और रचनात्मक सोच भी मजबूत हो। इसके अंतर्गत पढ़ी गई पुस्तकों, कहानियों और समाचार-पत्रों के आधार पर विद्यार्थियों से लेखन कार्य एवं रचनात्मक गतिविधियां कराई जाएंगी। साथ ही विद्यालय स्तर पर लेखन प्रतियोगिताओं के आयोजन पर भी विशेष जोर दिया गया है।

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का असर सीधे आम आदमी को दिखना चाहिए: मुख्यमंत्री

स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को गुणवत्ता और आधुनिक तकनीक से जोड़ें: मुख्यमंत्री स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का असर सीधे आम आदमी को दिखना चाहिए: मुख्यमंत्री आयुष्मान योजना गरीबों का सबसे बड़ा सहारा, क्लेम भुगतान समय से हो: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री का निर्णय, दीनदयाल राज्य कर्मचारी कैशलेस योजना में अब आयुष पद्धतियों से इलाज भी होगा शामिल एनएचएम के अंतर्गत कोविड कालखंड में सेवाएं देने वाले स्वास्थ्य कर्मियों का प्राथमिकता के आधार पर यथोचित समायोजन किया जाए: मुख्यमंत्री एम्बुलेंस रिस्पॉन्स टाइम और कम करने के निर्देश, मुख्यमंत्री ने कहा- आपात स्थिति में हर मिनट महत्वपूर्ण सरकारी अस्पतालों में तीन माह से कम एक्सपायरी वाली दवाएं न रहें: मुख्यमंत्री मातृ-शिशु मृत्यु दर में और कमी लाने के लिए सुरक्षित प्रसव व्यवस्था मजबूत करने पर जोर प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 44 से बढ़कर 83 हुई, नर्सिंग शिक्षा और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण पर विशेष जोर रिसर्च, मेडटेक और डिजिटल हेल्थ पहल को मिलेगा बढ़ावा,कैंसर, ट्रॉमा, आईसीयू और इमरजेंसी सेवाओं को प्राथमिकता से करें विकसित: मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को स्वास्थ्य तथा चिकित्सा शिक्षा विभागों की समीक्षा करते हुए साफ तौर पर कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का लाभ सीधे आम आदमी को मिलना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि सरकारी अस्पतालों में इलाज, जांच, दवाओं और आपात सेवाओं की गुणवत्ता लगातार बेहतर होनी चाहिए। साथ ही, मेडिकल कॉलेजों, नर्सिंग संस्थानों और सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं को आधुनिक तकनीक, बेहतर मानव संसाधन और प्रभावी प्रबंधन से सशक्त बनाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा का उद्देश्य केवल संस्थान बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रदेश को प्रशिक्षित चिकित्सक, विशेषज्ञ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध कराना है। उन्होंने मेडिकल संस्थानों में आधुनिक उपकरणों, विशेषज्ञ फैकल्टी और रिसर्च गतिविधियों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए।  बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 108 जनपदीय चिकित्सालय, 106 विशिष्ट चिकित्सालय, 976 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 3757 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तथा 27,668 स्वास्थ्य उपकेंद्र संचालित हैं। वर्ष 2025-26 में सरकारी अस्पतालों में 26.41 करोड़ ओपीडी सेवाएं और 1.23 करोड़ आईपीडी सेवाएं दी गईं, जबकि 24.33 करोड़ पैथोलॉजी जांचें की गईं। वर्ष 2016-17 की तुलना में सत्र 2025-26 तक प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 44 से बढ़कर 83 हो गई है, जो 88.6 प्रतिशत की वृद्धि है। विगत 10 वर्षों में पीजी सीटों की संख्या 1344 से बढ़कर 5067 हो गई है, जबकि एमबीबीएस सीटें 5390 से बढ़कर 12800 तक पहुंच गई हैं। सुपर स्पेशियलिटी सीटों में भी लगभग 165 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है।  नर्सिंग शिक्षा के विस्तार की जानकारी देते हुए बताया गया कि प्रदेश में वर्तमान में 652 नर्सिंग संस्थान संचालित हैं। एएनएम, जीएनएम, बीएससी नर्सिंग और अन्य पाठ्यक्रमों की सीटों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है तथा राज्य में लगभग 3.95 लाख पंजीकृत नर्सिंग स्टाफ उपलब्ध हैं। ‘मिशन निरामया 1.0’ के तहत नर्सिंग शिक्षा में हुए सुधारों की जानकारी भी दी गई। बताया गया कि 17 हजार स्कूलों में परामर्श सत्र आयोजित किए गए तथा 3.5 लाख से अधिक विद्यार्थियों तक पहुंच बनाई गई। 10,570 नर्सिंग संकाय सदस्यों को प्रशिक्षित किया गया है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुष्मान योजना गरीब और जरूरतमंद परिवारों का सबसे बड़ा सहारा बन रही है। उन्होंने क्लेम दावों का तय समय सीमा में निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि अस्पतालों को समय पर भुगतान होता रहेगा तो मरीजों को बेहतर सुविधा मिलती रहेगी। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 6480 अस्पताल योजना से जुड़े हैं और अब तक 96.75 लाख से अधिक नि:शुल्क उपचार किए जा चुके हैं।  मुख्यमंत्री ने दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना में आयुष पद्धतियों को भी शामिल करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी जैसी पद्धतियों की आईपीडी सेवाओं को भी योजना का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि नेशनल हेल्थ मिशन के अंतर्गत कोविड कालखंड में सेवाएं देने वाले स्वास्थ्य कर्मियों का प्राथमिकता के आधार पर यथोचित समायोजन किया जाए। उन्होंने कहा कि आशा वर्करों का भुगतान किसी भी स्थिति में लंबित न रहे। साथ ही, हेल्थ एटीएम सेवाओं का विस्तार करते हुए उन्हें अधिक से अधिक क्षेत्रों तक पहुंचाया जाए। मुख्यमंत्री ने संचारी रोग नियंत्रण अभियान को और प्रभावी बनाने के निर्देश देते हुए कहा कि जनजागरूकता, स्वच्छता और समयबद्ध उपचार व्यवस्था के माध्यम से बेहतर परिणाम सुनिश्चित किए जाएं। मुख्यमंत्री ने मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में और कमी लाने के लिए संस्थागत एवं सुरक्षित प्रसव व्यवस्था को मजबूत बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हर गर्भवती महिला तक समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा पहुंचनी चाहिए। बैठक में बताया गया कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत 15.28 करोड़ से अधिक आभा आईडी बनाई जा चुकी हैं। प्रदेश में 15.14 करोड़ से अधिक इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड लिंक किए गए हैं। हॉस्पिटल इंफॉर्मेशन सिस्टम और लैब इंफॉर्मेशन सिस्टम का दायरा भी तेजी से बढ़ाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने चिकित्सा अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि मेडिकल संस्थानों को रिसर्च आधारित स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जाए। बैठक में बताया गया कि ‘UP-IMRAS’ डिजिटल पहल, मल्टी डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट, क्लिनिकल ट्रायल यूनिट तथा मेडटेक कार्यक्रमों पर कार्य किया जा रहा है। चिकित्सा अनुसंधान और मेडटेक क्षेत्र में लगभग 1500 करोड़ रुपये निवेश के लिए इंटेंट फाइल किए गए हैं।  मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य संस्थानों के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश देते हुए कहा कि सभी परियोजनाएं तय समयसीमा में पूर्ण हों, ताकि आमजन को जल्द बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल सके। बैठक में आगामी महीनों में प्रस्तावित महत्वपूर्ण लोकार्पण एवं शिलान्यास कार्यों की भी समीक्षा की गई। इनमें गोरखपुर मेडिकल कॉलेज का बहुमंजिला गर्ल्स हॉस्टल, अयोध्या मेडिकल कॉलेज का 110 बेड ट्रॉमा सेंटर, सहारनपुर मेडिकल कॉलेज का बीएससी नर्सिंग कॉलेज तथा कानपुर मेडिकल कॉलेज में मानसिक रोग विभाग विस्तार एवं डी-एडिक्शन वार्ड ब्लॉक शामिल हैं। बैठक में बताया गया कि सार्वजनिक-निजी सहभागिता मॉडल पर मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ रही है। महाराजगंज, शामली और संभल में मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं, जबकि कई अन्य जनपदों में प्रक्रिया जारी है।  बैठक में बताया गया कि 108 एम्बुलेंस सेवा और एडवांस लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस की प्रतिक्रिया अवधि में लगातार सुधार हुआ है। वर्तमान में … Read more

मुख्यमंत्री ने जनता का जताया आभार, बोले- सभी 17 नगर निगमों में मेयर की सीटें भाजपा की झोली में डालीं

जनता का पैसा जनहित में ही खर्च होगाः सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नगर निगम लखनऊ की 413 करोड़ की 342 परियोजनाओं का किया शिलान्यास/लोकार्पण, स्वच्छ-सुंदर-समर्थ लखनऊ से संबंधित पुस्तिका का किया विमोचन  जनता का जताया आभार, बोले- सभी 17 नगर निगमों में मेयर की सीटें भाजपा की झोली में डालीं पिछली सरकारों के पापों के गड्ढों को भरने और भ्रष्टाचार के कूड़े को साफ करने में लगा समयः मुख्यमंत्री लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों का आभार जताते हुए कहा कि जनता ने पहली बार सभी 17 नगर निगमों में मेयर की सीट भाजपा की झोली में डालीं। सभी नगर निगमों में भाजपा का बोर्ड बना। इसका परिणाम रहा कि नगर निगम ने 3 वर्ष में कुछ प्रतिमान भी स्थापित किए, विकास व स्वच्छता का मॉडल दिया। हमें पिछली सरकारों के पापों के गड्ढों को भरने, भ्रष्टाचार के कूड़े को साफ करने में समय भी लगा। विकास पर खर्च होने वाला पैसा जनता का है। इसे मुख्यमंत्री या मंत्री नहीं दे रहे, बल्कि केवल उसका उचित नियोजन कर रहे हैं। जनता का पैसा जनहित में ही खर्च होगा। यही पीएम मोदी जी का विजन है, प्रेरणा है। मुख्यमंत्री ने नगर निगम में महापौर के कार्यकाल के तीन वर्ष पूर्ण होने पर मंगलवार को लखनऊवासियों को विकास की सौगात दी। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में सीएम ने 413 करोड़ की 342 परियोजनाओं का शिलान्यास/लोकार्पण किया और स्वच्छ-सुंदर-समर्थ लखनऊ से संबंधित पुस्तिका का विमोचन किया। इस दौरान लघु फिल्म भी दिखाई गई। सीएम ने सभी 17 नगर निगमों के महापौर, 200 नगर पालिका परिषद, 545 नगर पंचायतों के चेयरमैन तथा लगभग 14000 पार्षदों को तीन वर्ष का कार्यकाल संपन्न होने पर शुभकामनाएं दीं। स्वच्छता हर नागरिक की जिम्मेदारी  सीएम योगी ने कहा कि स्वच्छता रैंकिंग में लखनऊ नगर निगम को देश में तीसरा स्थान मिला, इसे पहले स्थान पर लाना है। यह केवल महापौर, पार्षद या सफाई कर्मचारी की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह हर नागरिक की जिम्मेदारी है। घर का कूड़ा कूड़ेदान में ही फेंकें, गीला-सूखा कूड़ा अलग करें। सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग न करें। नालियों में कूड़ा न फेंकें और सरकारी संपत्तियों का नुकसान भी न करें। लोग कहते हैं कि लखनऊ बहुत साफ-सुथरा है, जब सरकार की कार्यपद्धति साफ-सुथरी होती है तो ऐसा ही होता है। मंत्री, महापौर, पार्षद, पूरी कार्यकारिणी, अधिकारी, सुपरवाइजर तथा सफाई कर्मचारी, सब जुटते हैं तो स्वच्छता दिखाई देती है। सीएम ने ढाई करोड़ की कार से आकर गमला चोरी करने वालों पर कटाक्ष किया और कहा कि सभी जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। 45 रुपये का गमला खरीद लेते तो सम्मान भी बना रहता और शहर भी सुंदर दिखता। सीएम ने राष्ट्र प्रेरणा स्थल का दिया उदाहरण सीएम योगी ने राष्ट्र प्रेरणा स्थल का उदाहरण दिया और कहा कि जहां 30 वर्षों से कूड़ा डंप होता था, वह अब बेहतरीन स्थल है। वहां डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पं. दीनदयाल उपाध्याय व भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमाएं स्थापित की गईं। सीएम ने तीनों महापुरुषों के व्यक्तित्व व राष्ट्र के लिए योगदान का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज लखनऊ में राष्ट्र प्रेरणा स्थल ही नहीं, ग्रीन कॉरिडोर व  मेट्रो समेत हर प्रकार की जन-सुविधाएं हैं।  गरीब, युवा, महिला व किसान को केंद्र में रखा सीएम ने कहा कि 2017 से पहले सपा सरकार में गरीब के लिए मकान स्वीकृत नहीं हुए। उनकी योजनाएं गरीबों, नौजवानों के लिए नहीं थीं। हमने चेहरा, जाति, क्षेत्र, मत-मजहब देखे बिना देश की चार जातियों (गरीब, युवा, महिला व किसान) को केंद्र में रखकर काम किया। शहरी-ग्रामीण क्षेत्र में 65 लाख से अधिक गरीबों को आवास उपलब्ध कराए। पहले की सरकारें परिवार के लिए सोचती थीं, इसलिए फेल थीं। सपा के गुंडे महिला सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा थे। सपा सरकार में शासन की योजनाओं का लाभ चुनिंदा परिवारों को मिलता था, जबकि मोदी जी ने देशवासियों, डबल इंजन सरकार ने 25 करोड़ प्रदेशवासियों और नगर निगम ने पूरे क्षेत्र को अपना परिवार माना। नकारात्मक राजनीति करने वालों को दिया जवाब सीएम ने लखनऊ को प्रदेश का सबसे बड़ा महानगर व नगर निगम बताते हुए कहा कि जितना बड़ा दायित्व होगा, उतनी बड़ी चुनौतियां भी होंगी, लेकिन लखनऊ व प्रदेश चुनौतियों का बखूबी सामना कर रहा है। सीएम ने नकारात्मक राजनीति करने और सकारात्मक पहल पर अंगुली उठाने वालों को जवाब देते हुए कहा कि तीन वर्ष में नगर निगम, 9 वर्ष में प्रदेश और 12 वर्ष में पीएम मोदी के नेतृत्व में विकास के कार्यक्रम नए प्रतिमान से बढ़ाए गए। नगर निकाय, प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा सरकार ने कुछ नया करके दिखाया है। हमारे शहर ‘ईज ऑफ लिविंग’ की दृष्टि से स्वच्छ, सुंदर और सुरक्षित हैं। लखनऊ नगर निगम ने गत वर्ष 200 करोड़ से अधिक का बांड जारी किया था, जबकि 2017 के पहले यहां के बांड की कीमत 25 करोड़ भी नहीं थी।  देश को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास अस्वस्थ मानसिकता  सीएम योगी ने कहा कि ऊर्जा संकट वैश्विक बन चुका है। अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण सप्लाई लाइन बाधित हुई है। दुनिया के तमाम क्षेत्रों में तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। जिस अमेरिका के पास अपने ऊर्जा के क्षेत्र हैं, वहां पेट्रोलियम पदार्थ के दाम दोगुने से अधिक हुए हैं। महंगाई चरम पर है, लेकिन पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत में लगातार इसे नियंत्रित किया गया है। पेट्रोलियम उत्पादों के दाम दुनिया में बढ़ेंगे, सप्लाई चेन बाधित होगी तो उसका असर यहां भी पड़ेगा, लेकिन संकट के समय देश के साथ खड़े होने के बजाय देश को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास अस्वस्थ मानसिकता का पर्याय है। जरूरत के अनुसार ही करें बिजली की खपत सीएम योगी ने कहा कि गर्मी एकाएक बढ़ने से तमाम थर्मल पावर प्लांट ने अचानक शटडाउन ले लिया। उत्पादन पर असर पड़ा। 2017 तक यूपी में पीक पावर की सप्लाई 15-16 हजार मेगावाट रहती थी, आज यह 32-33 हजार मेगावाट पहुंच गई है। उस समय 6 हजार मेगावाट उत्पादन था, जबकि आज 13 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। रिन्युवल एनर्जी का उत्पादन लगभग 10 हजार मेगावाट तक बढ़ा है, लेकिन हमारी आवश्यकता 33-35 हजार मेगावाट है। एलपीजी संकट को देखते हुए लोग … Read more

विकास खंडों में लगने वाली साप्ताहिक चौपालों के साथ किसान मेला का भी हो आयोजन: मुख्यमंत्री

खरीफ-2026 की तैयारी समय से पूरी करें, किसानों को हर जरूरी संसाधन उपलब्ध हो: मुख्यमंत्री विकास खंडों में लगने वाली साप्ताहिक चौपालों के साथ किसान मेला का भी हो आयोजन: मुख्यमंत्री दलहन, तिलहन और श्रीअन्न की खेती को बढ़ावा देने के निर्देश यूपी आईटीएस की तर्ज पर कृषि विभाग भी आयोजित करे अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी खरीफ-2026 में 302.62 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य 2.29 करोड़ से अधिक किसानों की फार्मर रजिस्ट्री पूरी पीएम किसान और फसल बीमा योजनाओं का लाभ समय से दिलाने के निर्देश लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कृषि विभाग की विभिन्न प्रस्तावित कार्ययोजनाओं की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि खरीफ-2026 की सभी तैयारियां समय से पूरी कर ली जाएं तथा किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, उर्वरक और तकनीकी सहायता समय पर उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक, पारदर्शी व्यवस्था और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देते हुए किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलते मौसम और जलवायु परिस्थितियों को देखते हुए दलहन, तिलहन और श्रीअन्न की खेती को प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सूखा संभावित क्षेत्रों के लिए अग्रिम कार्ययोजना तैयार रखी जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर किसानों को वैकल्पिक फसलों के बीज उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने निर्देश दिए कि यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो की तर्ज पर कृषि विभाग को भी अपनी विशेषताओं की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी लगानी चाहिए। बैठक में बताया गया कि खरीफ-2026 में 110.65 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल और 302.62 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। धान उत्पादन का लक्ष्य 224.25 लाख मीट्रिक टन रखा गया है, जबकि बाजरा, मक्का, अरहर और मूंगफली के उत्पादन में वृद्धि का लक्ष्य तय किया गया है। बैठक में बताया गया कि खरीफ-2026 के लिए 2.29 लाख क्विंटल बीज वितरण का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें 24 मई 2026 तक 1.26 लाख क्विंटल बीज उपलब्ध कराया जा चुका है। धान के लिए 80 हजार क्विंटल बीज वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को समय-समय पर कृषि संबंधी तकनीकी सलाह उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि टेक्स्ट मैसेज, सोशल मीडिया, दूरदर्शन, आकाशवाणी और अन्य माध्यमों से किसानों तक जानकारी पहुंचाई जाए। साथ ही कम अवधि और सूखा सहनशील प्रजातियों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा आगामी जून माह से सभी विकास खंडों में चौपाल लगाई जाएगी। इन चौपालों के साथ ही किसान मेला भी लगाई जाए। किसानों को हर योजना का लाभ मिले और उन्हें प्रगतिशील खेती से जोड़े जाने का प्रयास हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि विभाग के अंतर्गत सभी विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों, मंडियों, वेयरहाउस आदि के आस-पास साफ-सफाई होनी चाहिए आवश्यकतानुसार इनकी रंगाई कराई जाए। इन केंद्रों तक पहुंचने के लिए अच्छी कनेक्टिविटी होनी चाहिए। बैठक में बताया गया कि प्रदेश के लगभग 18 से 20 जनपद सूखे की दृष्टि से संवेदनशील हैं। धान एवं मूंगफली के लगभग 10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र के प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए दलहन, तिलहन और श्रीअन्न फसलों के अतिरिक्त बीजों की व्यवस्था की जा रही है। मुख्यमंत्री ने लखनऊ में प्रस्तावित सीड पार्क को प्रारम्भ करने की दिशा में तेजी के निर्दश दिए। उर्वरकों की उपलब्धता एवं वितरण की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि जमाखोरी, कालाबाजारी और उर्वरकों के डायवर्जन पर प्रभावी नियंत्रण रखा जाए। उन्होंने संतुलित उर्वरक उपयोग और जैविक विकल्पों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। बैठक में बताया गया कि 24 मई 2026 तक प्रदेश में 36.44 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध रहे तथा 28.26 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध स्थिति में हैं। उर्वरक प्रवर्तन अभियान के तहत 4025 छापे डाले गए, 81 लाइसेंस निलंबित किए गए तथा 9 एफआईआर दर्ज कराई गईं।  मुख्यमंत्री ने कृषि योजनाओं में डिजिटल तकनीक के उपयोग को और बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को योजनाओं का लाभ पारदर्शी और सरल तरीके से उपलब्ध कराया जाए। बैठक में बताया गया कि एग्रीस्टैक योजनांतर्गत 24 मई 2026 तक 2.29 करोड़ से अधिक किसानों की फार्मर रजिस्ट्री पूरी की जा चुकी है। किसान पोर्टल और मोबाइल ऐप के माध्यम से भी पंजीकरण कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक खेती और श्रीअन्न उत्पादन को बढ़ावा देने के निर्देश देते हुए कहा कि बुंदेलखंड सहित जल संकट वाले क्षेत्रों में ऐसी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। बैठक में बताया गया कि बुंदेलखंड के सभी विकासखंडों में गौ-आधारित प्राकृतिक खेती कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। वर्ष 2025-26 में 23,500 हेक्टेयर क्षेत्र में रसायन मुक्त खेती की गई तथा 21,934 किसानों को प्रशिक्षण दिया गया।  मुख्यमंत्री ने मक्का उत्पादन को बढ़ावा देने तथा उससे जुड़े उद्योगों के साथ समन्वय मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने किसानों को तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण और विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2026-27 में मक्का क्षेत्रफल 11.39 लाख हेक्टेयर रहने का अनुमान है तथा वर्ष 2027-28 तक 32.84 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।   मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि एवं प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की समीक्षा करते हुए कहा कि पात्र किसानों को योजनाओं का लाभ समय से उपलब्ध कराया जाए तथा बीमा दावों के निस्तारण में तेजी लाई जाए। बैठक में बताया गया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत अब तक प्रदेश के किसानों को 99,032 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि वितरित की जा चुकी है। वहीं प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत वर्ष 2016-17 से वर्ष 2025-26 तक 80.61 लाख किसानों को 6454.57 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति प्रदान की गई है। कृषि उत्पादों के निर्यात पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्लोबल मानकों का ध्यान रखते हुए उत्पाद को तैयार कराया जाए। वहीं मंडी समिति की योजनाओं की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मंडी समितियों को किसानों के हित में आधुनिक, पारदर्शी और सुविधायुक्त बनाया जाए, कृषि विपणन व्यवस्था को और मजबूत करें।

यूपी में बिजली सप्लाई का नया रिकॉर्ड, पीक डिमांड पूरी करने में योगी सरकार देश में नंबर-1

प्रदेश के इतिहास में इस समय सबसे ज्यादा बिजली सप्लाई, पीक डिमांड आपूर्ति में योगी सरकार देश में अव्वल प्रचंड गर्मी के बावजूद योगी सरकार ने बड़ी उपलब्धि हासिल की यूपी में पीक डिमांड 31,824 मेगावाट पहुंची, महाराष्ट्र में 29,463 मेगावाट की आपूर्ति बढ़ती पीक डिमांड के बीच यूपी ने बनाया नया विद्युत आपूर्ति रिकॉर्ड शहर, तहसील नगर पंचायत में 24 घंटे बिजली आपूर्ति, ग्रामीण क्षेत्रों में भी 22 से 22.5 घंटे दी गई बिजली लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने प्रदेशवासियों को बिजली देने के मामले में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। योगी सरकार में पीक डिमांड आपूर्ति के मामले में उत्तर प्रदेश ने महाराष्ट्र को पीछे छोड़ दिया है। 24 मई को उत्तर प्रदेश ने 31,824 मेगावाट पीक डिमांड पूरी की। जबकि इस अवधि में महाराष्ट्र ने 29,463 मेगावाट डिमांड की आपूर्ति की थी। यह न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि देश के किसी भी राज्य द्वारा अब तक की गई सर्वाधिक विद्युत आपूर्ति है। अभी तक साल 2025 में 11 जून को रात 12:45 बजे 31486 मेगावाट पीक डिमांड सबसे ज्यादा थी। 24 मई की रात को रिकॉर्ड पीक डिमांड की आपूर्ति की गई प्रदेश में प्रचंड गर्मी के बावजूद योगी सरकार में उत्तर प्रदेश के इतिहास में सबसे ज्यादा विद्युत आपूर्ति की जा रही है। प्रदेश ने बिजली आपूर्ति के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए 24 मई की रात्रि 10:29 बजे 31,824 मेगावाट की रिकॉर्ड पीक डिमांड को सफलतापूर्वक पूरा किया है। योगी सरकार का उद्देश्य हर घर, हर गांव और हर शहर तक निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली पहुंचाना है, जिस दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। निर्धारित रोस्टर से आगे बढ़कर प्रदेश में व्यापक स्तर पर निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित कराने का प्रयास किया गया है।  25 मई दोपहर 2 बजे 29,616 मेगावाट विद्युत आपूर्ति की गई 24/25 मई की रात 1 बजे 29,933 मेगावाट और रात 3 बजे 30569 मेगावाट की विद्युत आपूर्ति की गई। जबकि 25 मई की सुबह 5 बजे 29,573 मेगावाट और सुबह 10 बजे 27,392 मेगावाट की आपूर्ति की गई है। इसी तरह दोपहर 2 बजे 29,616 मेगावाट डिमांड की विद्युत आपूर्ति की गई है। ऊर्जा विभाग लगातार आपूर्ति कर रहा है। यूपीपीसीएल के निदेशक वितरण ज्ञानेंद्र धर द्विवेदी ने बताया कि स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक रविवार को शहरी क्षेत्रों, तहसील, नगर पंचायत, महानगर, मंडल मुख्यालय और उद्योगों को 24 घंटे बिजली आपूर्ति की गई है। बुंदेलखंड में सिर्फ 22 मिनट के लिए बिजली काटी गई थी।  ग्रामीण क्षेत्रों में रोस्टर से ज्यादा बिजली आपूर्ति की गई निदेशक वितरण ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी औसत 22 से 22.5 घंटे तक बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की गई है, जबकि ग्रामीण क्षेत्र में 18 घंटे का रोस्टर है। इससे आमजन, किसान, व्यापारी और उद्योगों को बड़ी राहत मिली है। अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा) एवं उप्र. पावर कारपोरेशन अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुपालन के क्रम में प्रदेश में सभी को निर्बाध विद्युत देने का प्रयास किया जा रहा है। सभी अधिकारियों एवं कर्मियों को युद्धस्तर पर विद्युत आपूर्ति के कार्यों में लगाया गया है।  देश में सर्वाधिक बिजली उपलब्ध कराने वाला राज्य बना यूपीः ऊर्जा मंत्री ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने बताया कि उत्तर प्रदेश आज देश में सर्वाधिक बिजली उपलब्ध कराने वाला राज्य बन चुका है। तकनीकी, प्राकृतिक अथवा मानवजनित कारणों से कहीं-कहीं स्थानिक व्यवधान उत्पन्न हो सकते हैं, लेकिन उन्हें दूर करने के लिए विद्युत विभाग के अधिकारी और कर्मचारी दिन-रात पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ कार्य कर रहे हैं। ऊर्जा मंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा कि विद्युतकर्मियों का मनोबल बढ़ाएं, क्योंकि भीषण गर्मी और कठिन परिस्थितियों में भी वह लगातार जनता को बेहतर बिजली सुविधा उपलब्ध कराने में जुटे हुए हैं।