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CM योगी की पहल से निराश्रित बच्चों को मिला नया सहारा, बदल रही जिंदगी की तस्वीर

सीएम योगी की पहल से बदल रही निराश्रित बच्चों की जिंदगी महिला कल्याण विभाग की बाल देखरेख संस्थाएं बन रहीं उज्ज्वल भविष्य की नई पाठशाला बोर्ड परीक्षाओं में 213 बच्चों की सफलता ने बढ़ाया प्रदेश का मान 107 बच्चों ने 60 प्रतिशत से अधिक अंक लाकर पेश की प्रेरणादायक मिसाल परामर्श सेवाएं, शिक्षा, पुनर्वास और आत्मनिर्भरता के जरिए बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ रही योगी सरकार लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में महिला कल्याण विभाग निराश्रित, देखरेख, संरक्षण एवं विधि से संघर्षरत बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है। योगी सरकार बाल देखरेख संस्थाओं के माध्यम से हजारों बच्चों को सुरक्षित आश्रय, अच्छी शिक्षा, परामर्श सेवाएं और संस्कारयुक्त वातावरण उपलब्ध करा रही है। इन संस्थाओं में रह रहे 213 बच्चों ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की विभिन्न बोर्ड परीक्षाओं में सफलता हासिल की है।  दरअसल, इन संस्थाओं में बच्चों के मानसिक, सामाजिक और नैतिक विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है, ताकि वह आत्मविश्वास के साथ समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें। योगी सरकार की इस पहल से बच्चों को नया जीवन, नई दिशा और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है।  बच्चों ने सफलता हासिल कर बढ़ाया प्रदेश का गौरव सीएम योगी की मंशा के अनुरूप बालगृहों और राजकीय सम्प्रेक्षण गृहों में रहने वाले बच्चों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनके मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास के लिए भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। यही कारण है कि वर्ष 2026 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षाओं में विभागीय संस्थाओं में निवासरत बच्चों ने सफलता हासिल कर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। बच्चों को काउंसलिंग और शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा महिला कल्याण विभाग द्वारा बच्चों को नियमित शैक्षिक मार्गदर्शन, अध्ययन सामग्री, ऑनलाइन कोचिंग, काउंसलिंग, स्मार्ट क्लास की सुविधा और अनुकूल शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ ही बच्चों में आत्मविश्वास बढाने और सकारात्मक सोच विकसित करने के लिए विभिन्न प्रेरणात्मक एवं व्यक्तित्व विकास कार्यक्रम भी संचालित किए जाते हैं। योगी सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि संस्थाओं में रहने वाला प्रत्येक बच्चा शिक्षा और अवसरों से वंचित न रहे। 213 बच्चों ने सफलता हासिल की महिला कल्याण विभाग की निदेशक सी. इंदुमति ने बताया कि इस वर्ष कुल 213 बच्चों ने विभिन्न बोर्ड परीक्षाओं में सफलता प्राप्त की है। इनमें 107 बच्चों ने 60 प्रतिशत से अधिक अंक अर्जित कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। कठिन परिस्थितियों में जीवन व्यतीत करने वाले इन बच्चों की यह उपलब्धि न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह सरकार की बाल हितैषी नीतियों और संवेदनशील कार्यप्रणाली का भी प्रमाण है। अपने पारिवारिक सहयोग के अभाव के बावजूद महिला कल्याण विभाग के संरक्षण में बच्चों ने अपनी मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के दम पर सफलता की नई कहानी लिखी है।

75 वर्ष से अधिक आयु, असाध्य रोगियों, बच्चों संग महिला बंदियों व जमानत राशि न जमा कर पाने वाले कैदियों की सूची तैयार करें: मुख्यमंत्री

जेलों को सुधार, पुनर्वास और कौशल विकास का प्रभावी केंद्र बनाया जाए: मुख्यमंत्री केवल पेशेवर अपराधी, माफिया को जेलों में रखने की जरूरत, छोटे अपराधों में ओपन जेल की परिकल्पना उपयोगी 75 वर्ष से अधिक आयु, असाध्य रोगियों, बच्चों संग महिला बंदियों व जमानत राशि न जमा कर पाने वाले कैदियों की सूची तैयार करें: मुख्यमंत्री ‘ओपन जेल’ की परिकल्पना को साकार करने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई जाए: मुख्यमंत्री प्रदेश की जेलों में ओवरक्राउडिंग दर 1.77 से घटकर 1.03 हुई सात नए कारागार शुरू, छह निर्माणाधीन; बंदी क्षमता में लगातार बढ़ोतरी 6200 सीसीटीवी, ड्रोन कैमरे और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से मजबूत हुई जेल सुरक्षा व्यवस्था ‘वन जेल वन प्रोडक्ट’ से बंदियों को मिल रहा कौशल और रोजगार का अवसर लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  कारागार विभाग की समीक्षा करते हुए कहा कि जेलों को केवल बंदी रखने का स्थान नहीं, बल्कि सुधार, पुनर्वास और कौशल विकास का प्रभावी केंद्र बनाया जाना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रदेश की सभी कारागारों में सुरक्षा व्यवस्था, बंदियों के स्वास्थ्य, स्वच्छता, प्रशिक्षण, तकनीकी सुदृढ़ीकरण और पुनर्वास संबंधी व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक तकनीक, पारदर्शी व्यवस्था और सुधारात्मक गतिविधियों के माध्यम से कारागारों को नई पहचान दी जाए। बैठक में बताया गया कि विभिन्न प्रक्रियाओं के माध्यम से बंदियों की समयपूर्व रिहाई की व्यवस्था को गति दी गई है। वर्ष 2012 से 2016 के बीच 273 बंदियों को समयपूर्व रिहाई मिली थी, जबकि वर्ष 2017 से 2021 के बीच यह संख्या बढ़कर 2882 और वर्ष 2022 से 2026 के बीच 3846 हो गई। जुर्माना जमा कर रिहा होने वाले बंदियों की संख्या भी वर्ष 2012-16 के 2823 की तुलना में वर्ष 2017-2026 के दौरान बढ़कर 6231 हो गई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि 75 वर्ष से अधिक उम्र के कैदियों, असाध्य रोगों से ग्रस्त कैदियों, बच्चों के साथ जेल में बंद महिला कैदियों और जमानत राशि जमा न कर पाने के अभाव में जेल में बंद कैदियों की सूची तैयार की जाए। मुख्यमंत्री ने 'ओपन जेल' की परिकल्पना को विशेष महत्व देते हुए इसे साकार रूप में लाने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जेल केवल पेशेवर अपराधी और माफिया के लिए होनी चाहिए। छोटे अपराधों के लिए 'ओपन जेल' उपयोगी होगी।  मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जेलों में ओवरक्राउडिंग कम करने के लिए निर्माणाधीन परियोजनाओं को समयबद्ध ढंग से पूरा किया जाए। उन्होंने नए कारागारों और बैरकों के निर्माण कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2017 में प्रदेश की 70 जेलों में क्षमता 58,400 थी जबकि बंदियों की संख्या 96,383 थी और ओवरक्राउडिंग दर 1.77 थी। वर्तमान में प्रदेश में 77 कारागार संचालित हैं, जिनकी कुल क्षमता 77,673 है तथा बंदियों की संख्या 79,782 है। ओवरक्राउडिंग दर घटकर 1.03 रह गई है।  बैठक में बताया गया कि वर्ष 2017 से अब तक चित्रकूट, अंबेडकरनगर, संतकबीरनगर, इटावा, प्रयागराज, श्रावस्ती और बरेली समेत सात नए कारागार संचालित किए गए हैं, जिससे 10,495 बंदियों की अतिरिक्त क्षमता विकसित हुई है। इसके अतिरिक्त अमेठी, महोबा, हाथरस, कुशीनगर, जौनपुर और हापुड़ में छह नए कारागारों का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिनकी कुल क्षमता 6,156 होगी। कई प्रस्तावित जेलों के लिए भूमि क्रय और पंजीकरण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। मुख्यमंत्री ने बहुमंजिला करागारों के निर्माण को प्राथमिकता देने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जेलों में सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं होगा। तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाए। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2017 से 2026 के बीच प्रदेश की जेलों में 6200 सीसीटीवी कैमरे, 24 बैगेज स्कैनर, 30 ड्रोन कैमरे, 84 डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर, 195 बॉडी वार्न कैमरे और अन्य आधुनिक सुरक्षा उपकरण स्थापित किए गए हैं। सभी जेल बैरकों में सीसीटीवी कैमरे तथा मेनवॉल पर वायर फेंसिंग कराई गई है। न्यायालयों में पेशी के लिए 83 वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग इकाइयां स्थापित हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कारागारों में बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल विकास और उत्पादन गतिविधियों को और बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि सुधारात्मक प्रयासों से बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। बैठक में बताया गया कि लखनऊ, आगरा, नैनी, बरेली, वाराणसी, फतेहगढ़, गोरखपुर, उन्नाव और अन्य कारागारों में सिलाई, दरी, कम्बल, फिनायल, काष्ठ कला, मसाला, प्रिंटिंग, हैंडीक्राफ्ट, रेडीमेड गारमेंट, एलईडी बल्ब, पॉटरी, कार्पेट और विभिन्न हस्तशिल्प उद्योग संचालित किए जा रहे हैं। प्रदेश की 37 जेलों में ‘वन जेल वन प्रोडक्ट’ आधारित इकाइयां संचालित हैं।  मुख्यमंत्री ने कहा कि जेलों में बंदियों के स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और सकारात्मक वातावरण के लिए योग, खेलकूद, कृषि और गौसंवर्धन जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाए। बैठक में बताया गया कि वर्तमान में प्रदेश की 17 जेलों में गौशालाएं संचालित हैं, जहां कुल 1265 गोवंश संरक्षित हैं। बैठक में यह भी बताया गया कि जेलों की कृषि भूमि वर्ष 2020 में 584.51 एकड़ से बढ़कर वर्तमान में 624.14 एकड़ हो गई है। कृषि फार्मों में सब्जी और आलू उत्पादन 81,270 क्विंटल से बढ़कर 86,720 क्विंटल तक पहुंच गया है।   बैठक में बताया गया कि विभाग में विभिन्न श्रेणियों के 3647 रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रचलित है। वर्ष 2017 से अब तक 4055 नियुक्तियां दी गई हैं तथा विभिन्न पदों पर कुल 2868 पदोन्नतियां प्रदान की गई हैं। मुख्यमंत्री ने रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए।

नार्थ-साउथ कॉरिडोर से बदलेगी यूपी की सड़क तस्वीर, योगी सरकार देगी कनेक्टिविटी को नई रफ्तार

स्पेशल  योगी सरकार नार्थ-साउथ कॉरिडोर से सड़क कनेक्टिविटी को देगी नई रफ्तार – नेपाल बॉर्डर से बुंदेलखंड तक मजबूत होगा सड़क नेटवर्क, नए कॉरिडोर से व्यापार, पर्यटन और कृषि क्षेत्र को मिलेगा बड़ा लाभ  – योगी सरकार की बड़ी पहल, दक्षिण भारत की ओर तक बनेगा हाई स्पीड संपर्क मार्ग – पूर्वांचल, बुंदेलखंड और तराई क्षेत्रों के बीच आसान आवागमन का बनेगा नया नेटवर्क  लखनऊ योगी सरकार प्रदेश में सड़क और कनेक्टिविटी नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इसी के तहत योगी सरकार एक्सप्रेस-वे, राष्ट्रीय राजमार्ग और क्षेत्रीय संपर्क मार्गों के विस्तार के साथ अब प्रदेश में “नार्थ-साउथ कॉरिडोर” की महत्वाकांक्षी योजना को आगे बढ़ाने जा रही है। इसका उद्देश्य नेपाल बॉर्डर से लेकर दक्षिण भारत की ओर तक बेहतर सड़क संपर्क स्थापित करना है, जिससे प्रदेश के आर्थिक, सामाजिक और औद्योगिक विकास को नई गति मिल सके। उत्तर से दक्षिण दिशा में मजबूत सड़क संपर्क किया जाएगा विकसित  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में पीडब्ल्यूडी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने “नार्थ-साउथ कॉरिडोर” योजना पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि इन कॉरिडोर के विकसित होने से प्रदेश के औद्योगिक, कृषि और पर्यटन क्षेत्रों को बड़ा लाभ मिलेगा। नेपाल सीमा से जुड़े जिलों में व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी और किसानों को अपने उत्पाद बड़े बाजारों तक पहुंचाने में आसानी होगी। साथ ही धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच भी पहले की तुलना में अधिक सुगम होगी। बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि वर्तमान में प्रदेश में अधिकांश राष्ट्रीय राजमार्ग और एक्सप्रेस-वे पूर्व से पश्चिम दिशा में विकसित हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश के संतुलित विकास को ध्यान में रखते हुए अब उत्तर से दक्षिण दिशा में मजबूत सड़क संपर्क विकसित करने की रणनीति बनाई जा रही है। इसके तहत नेपाल बॉर्डर से जुड़े जिलों को प्रयागराज, चित्रकूट और बुंदेलखंड क्षेत्र के माध्यम से देश के अन्य राज्यों जैसे मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से जोड़ने की तैयारी है। कुशीनगर-देवरिया-नोएडा-गाजीपुर-जमानिया मार्ग को किया जाएगा विकसित “नार्थ-साउथ कॉरिडोर” योजना के तहत कई महत्वपूर्ण मार्गों के चौड़ीकरण, सुदृढ़ीकरण और नव निर्माण की कार्य योजना बनाई गयी है। वहीं चार प्रमुख नार्थ-साउथ कॉरिडोर चिह्नित किए गए हैं, जिनकी कुल लंबाई लगभग 1531 किलोमीटर है। इनमें से 1232.60 किलोमीटर हिस्सा पहले से एक्सप्रेस-वे अथवा राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ा हुआ है, जबकि शेष मार्गों को विकसित करने की योजना बनाई गयी है। पहले कॉरिडोर के रूप में कुशीनगर-देवरिया-नोएडा-गाजीपुर-जमानिया मार्ग को शामिल किया गया है, जिसकी कुल लंबाई 220 किलोमीटर है। इसमें 53.25 किलोमीटर लंबाई को स्वीकृति मिल चुकी है और लगभग 464 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है। वहीं दूसरा महत्वपूर्ण कॉरिडोर पीपरी (इंडिया-नेपाल बॉर्डर) से बांसी, सिद्धार्थनगर होते हुए प्रयागराज तक प्रस्तावित है। इसकी कुल लंबाई 295 किलोमीटर है। इस परियोजना के तहत कई नए मार्ग प्रस्तावित हैं जिनसे पूर्वांचल और मध्य उत्तर प्रदेश के बीच संपर्क बेहतर होगा।  मुरादाबाद, शाहजहांपुर, उरई और हमीरपुर को जोड़ने की बनाई परियोजना  “नार्थ-साउथ कॉरिडोर” योजना के तहत तीसरे कॉरिडोर में लखीमपुर-सीतापुर-लखनऊ-नवाबगंज-बांदा मार्ग को शामिल किया गया है, जिसकी लंबाई 502 किलोमीटर है। इसके अतिरिक्त चौथे कॉरिडोर के रूप में मुरादाबाद, शाहजहांपुर, उरई और हमीरपुर को जोड़ने वाली 514 किलोमीटर लंबी परियोजना है।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि प्रदेश की मजबूत अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर कनेक्टिविटी सबसे जरूरी आधार है। यही कारण है कि योगी सरकार एक्सप्रेस-वे, रिंग रोड, फ्लाईओवर, एयरपोर्ट और नई सड़क परियोजनाओं पर बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे और गंगा एक्सप्रेस-वे जैसी परियोजनाएं पहले ही उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदल रही हैं। अब नार्थ-साउथ कॉरिडोर के माध्यम से प्रदेश के दूरस्थ जिलों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

योगी सरकार का बड़ा रिकॉर्ड, यूपी में 19 हजार से अधिक अमृत सरोवरों का निर्माण और पुनरुद्धार

योगी सरकार ने किया रिकॉर्ड 19 हजार से अधिक अमृत सरोवरों का निर्माण और पुनरुद्धार देश भर में बने अमृत सरोवरों का 30 प्रतिशत यूपी में निर्मित गोरखपुर सरोवर निर्माण में पहले स्थान पर, जिले के 735 स्थानों पर काम पूरा सरोवर अभियान से ग्रामीण रोजगार में हो रही वृद्धि लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने जल संरक्षण और ग्रामीण विकास की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी 'अमृत सरोवर योजना' के तहत उत्तर प्रदेश 19 हजार से अधिक अमृत सरोवरों का निर्माण और पुनरुद्धार पूरा हो चुका है। ग्राम्य विकास विभाग के मुताबिक देश में मौजूद सभी अमृत सरोवरों में से लगभग 30 प्रतिशत उत्तर प्रदेश में निर्मित किए गए हैं। साथ ही इस योजना के तहत स्थानीय स्तर पर रोजगार भी सृजित हो रहा है। अब तक पूरे प्रदेश में 19,978 सरोवरों का निर्माण  सरोवर निर्माण अभियान में प्रदेश में गोरखपुर सबसे आगे है। यहां 735 सरोवरों का निर्माण हो चुका है। वहीं महाराजगंज में 601 और प्रयागराज में 525 सरोवर निर्माण के साथ क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। अब तक 19,978 सरोवरों का निर्माण पूरे प्रदेश में हो चुका है।  कई स्तर पर हो रहा फायदा उत्तर प्रदेश अमृत सरोवरों के निर्माण और पुनरुद्धार करने में देश में पहले स्थान हासिल कर चुका है। यह पहल केवल जल स्रोतों के संरक्षण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि गांवों में पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करने, भूजल स्तर में सुधार लाने और कृषि आधारित आजीविका को बढ़ावा देने में भी सहायक है। अमृत सरोवरों का निर्माण वर्षा जल संचयन को बढ़ावा दे रहा है, जिससे किसानों को सिंचाई में सहायता मिल रही है और ग्रामीण क्षेत्रों में जल की उपलब्धता में सुधार हो रहा है। साथ ही यह अभियान गांवों में हरियाली, स्वच्छता और सतत विकास को एक नई दिशा दे रहा है। जल संरक्षण के ये प्रयास ग्रामीण समृद्धि, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए एक मजबूत आधार बन रहे हैं। पर्यावरण को स्वच्छ बना रहे अमृत सरोवर योगी सरकार की इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इन जल निकायों को सिर्फ पानी इकट्ठा करने का साधन नहीं बनाया गया। प्रत्येक अमृत सरोवर को न्यूनतम 1 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया गया है, जिसकी जल क्षमता लगभग 10 हजार क्यूबिक मीटर है। इसके चारों तरफ ग्रामीणों के ग्रामीणों के टहलने के लिए पक्का रास्ता बनाया गया है। बैठने के लिए बेंच और लाइट की व्यवस्था की गई है। साथ ही पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए वृक्षारोपण भी किया गया है। ग्रामीणों को मिल रहा रोजगार योगी सरकार ने इस योजना को न केवल पर्यावरण से जोड़ा, बल्कि इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी लाभकारी बनाया है। अमृत सरोवरों की खुदाई, गाद निकालने और उनके सुंदरीकरण के काम को वीबी जी राम जी (पूर्व में मनरेगा) से जोड़ा गया। इससे प्रदेश के लाखों ग्रामीण परिवारों को उनके गांव में ही रोजगार मिल रहा है।

मुख्यमंत्री ने पद्म पुरस्कार पाने वाली विभूतियों को दी बधाई एवं शुभकामनाएं

मुख्यमंत्री ने पद्म पुरस्कार पाने वाली विभूतियों को दी बधाई एवं शुभकामनाएं खेल, चिकित्सा, कला समेत अनेक क्षेत्र में उत्तर प्रदेश का गौरव बढ़ाने वालों को मिला सम्मान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली में किया सम्मानित पद्म विभूषण से अलंकृत वायलिन वादिका एन. राजम व दिवंगत फ़िल्म अभिनेता धर्मेंद्र सिंह देयोल के परिजनों को भी बधाई दी लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पद्म पुरस्कार पाने वाली विभूतियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली विभूतियों को सोमवार को नई दिल्ली में सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट 'एक्स' पर पोस्ट कर पद्म विभूषण से अलंकृत वायलिन वादिका एन. राजम एवं दिवंगत फ़िल्म अभिनेता धर्मेंद्र सिंह देयोल के परिजनों को भी बधाई दी।  डॉ. ठकराल के शोध कार्य मानवता के लिए अमूल्य निधि  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'एक्स' पर लिखा- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु जी द्वारा आयुर्वेद के अनन्य साधक एवं प्रख्यात शोधकर्ता डॉ. केवल कृष्ण ठकराल जी को चिकित्सा के क्षेत्र में 'पद्म श्री' से सम्मानित किए जाने पर हार्दिक बधाई। ​छह दशकों की दीर्घ साधना, ब्रोंकियल अस्थमा उपचार में 'कर्ण वेधन' जैसी युगांतरकारी तकनीक का विकास और प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति को वैश्विक प्रतिष्ठा दिलाने वाले आपके शोध कार्य मानवता के लिए अमूल्य निधि हैं। प्रो. श्याम सुंदर के समर्पण, शोध और सेवा भावना को राष्ट्र की आदरपूर्ण अभिव्यक्ति है यह सम्मान सीएम योगी ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु जी द्वारा चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान हेतु उत्तर प्रदेश के सुप्रसिद्ध कालाजार विशेषज्ञ प्रो. श्याम सुन्दर जी को ‘पद्म श्री’ से सम्मानित किया जाना अत्यंत गौरव का विषय है। कालाजार के उपचार हेतु प्रथम प्रभावी मौखिक दवा के विकास एवं त्वरित निदान परीक्षण विकसित कर आपने चिकित्सा अनुसंधान और मानव सेवा में ऐतिहासिक योगदान दिया है। यह सम्मान आपके समर्पण, शोध और सेवा भावना को राष्ट्र की आदरपूर्ण अभिव्यक्ति है, हार्दिक बधाई। आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं डॉ. सिंह के कार्य मुख्यमंत्री ने कृषि विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान हेतु उत्तर प्रदेश के गौरव डॉ. अशोक कुमार सिंह जी को 'पद्म श्री' सम्मान से अलंकृत किए जाने पर हार्दिक बधाई दी। उन्होंने लिखा कि धान की उन्नत प्रजातियों के विकास, कृषि अनुसंधान एवं किसान हित में आपके द्वारा किए गए अभिनव कार्य 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं। आपकी यह गौरवपूर्ण उपलब्धि समस्त देशवासियों के लिए हर्ष एवं गर्व का विषय है। प्रो. राजेंद्र प्रसाद का उत्कृष्ट योगदान संपूर्ण राष्ट्र के लिए अत्यंत गौरव का विषय मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति द्वारा वरिष्ठ चिकित्सक प्रो. (डॉ.) राजेंद्र प्रसाद जी को चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हेतु 'पद्म श्री' सम्मान से विभूषित होने पर हार्दिक बधाई दी। सीएम ने कहा कि टीबी एवं एमडीआर-टीबी उपचार के क्षेत्र में पिछले पांच दशकों की आपकी निस्वार्थ एवं समर्पित सेवा सराहनीय है। लाखों मरीजों को नवजीवन प्रदान करने और जनस्वास्थ्य के प्रति आपका उत्कृष्ट योगदान संपूर्ण राष्ट्र के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। आपका यह सम्मान चिकित्सा जगत में सेवा, समर्पण और मानवता के उच्चतम मूल्यों का अभिनंदन है। प्रो. बुद्ध रश्मि मणि का भगीरथ प्रयास हर देशवासी के लिए प्रेरणापुंज  मुख्यमंत्री ने भारतीय पुरातत्व एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान हेतु उत्तर प्रदेश के गौरव प्रो. बुद्ध रश्मि मणि जी को 'पद्म श्री' सम्मान से अलंकृत किए जाने पर हार्दिक बधाई दी। उन्होंने लिखा कि अयोध्या और सारनाथ जैसी हमारी पावन धरोहरों के पुनरुत्थान तथा भारतीय संस्कृति को वैश्विक पटल पर प्रतिष्ठित करने का आपका भगीरथ प्रयास हर देशवासी के लिए प्रेरणापुंज है। आपके इस अप्रतिम पुरुषार्थ का अभिनंदन! प्रवीण की उपलब्धि प्रेरणा का उज्ज्वल स्रोत सीएम ने खेल जगत में उत्कृष्ट योगदान हेतु उत्तर प्रदेश के पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता एवं लगातार पैरालंपिक पदक जीतने वाले सबसे युवा दिव्यांग हाई जंप खिलाड़ी प्रवीण कुमार को 'पद्म श्री' सम्मान प्राप्त करने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। सीएम ने लिखा कि आपकी यह ऐतिहासिक उपलब्धि उत्तर प्रदेश सहित सम्पूर्ण देश के युवाओं और दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का उज्ज्वल स्रोत है। आपके समर्पण, संघर्ष और अनुशासन ने भारत को वैश्विक मंच पर गौरवान्वित किया है।

योगी सरकार का ऐतिहासिक फैसला, प्रधानों को बनाया जाएगा ग्राम पंचायतों का प्रशासक

योगी सरकार का ऐतिहासिक फैसला, प्रधानों को बनाया जाएगा ग्राम पंचायतों का प्रशासक नई पंचायतों के गठन अथवा छह माह की अधिकतम अवधि तक निवर्तमान प्रधान होंगे प्रशासक सीएम योगी के निर्देशानुसार सभी जिलाधिकारियों को आदेश जारी, 26 मई को खत्म हो रहा पंचायतों का कार्यकाल लखनऊ  प्रदेश की ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। इसके दृष्टिगत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राज्य सरकार ने निवर्तमान ग्राम प्रधानों को ही ग्राम पंचायतों का प्रशासक नियुक्त करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इसके साथ ही स्पष्ट किया गया है कि नई ग्राम पंचायतों के गठन अथवा अधिकतम छह माह की अवधि तक निवर्तमान प्रधान ही पंचायतों का सामान्य प्रशासनिक कार्य संभालेंगे। सीएम योगी के निर्देश पर निवर्तमान प्रधानों को ग्राम पंचायतों में बतौर प्रशासक नामित किए जाने के लिए सभी जिलाधिकारियों को प्राधिकृत किया गया है, जिसके अनुसार 27 मई 2026 से निवर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक के रूप में कार्य करेंगे। प्रशासकों को केवल सामान्य और रूटीन कार्यों के निर्वहन की अनुमति होगी। उनके द्वारा कोई नीतिगत निर्णय पर नहीं लिया जा सकेगा। विशेष परिस्थितियों में लेंगे डीएम से स्वीकृति इसके साथ ही सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि अत्यावश्यक अथवा किसी विशेष परिस्थिति में नीतिगत निर्णय लेने की आवश्यकता पड़ती है तो उस प्रस्ताव को जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से जिलाधिकारी के समक्ष रखा जाएगा और उनकी स्वीकृति के बाद ही निर्णय लिया जा सकेगा। ज्ञात है कि ग्राम पंचायत का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है। कार्यकाल समाप्त होने के बाद नई पंचायतों के गठन तक राज्य सरकार को प्रशासक नियुक्त करने का अधिकार है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वेलनेस डेस्टिनेशन के रूप में विकसित होगा उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वेलनेस डेस्टिनेशन के रूप में विकसित होगा उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री प्रदेश में शीघ्र लागू होगी आयुष हेल्थ एंड वेलनेस नीति, मुख्यमंत्री ने दिए दिशा-निर्देश प्रमुख धार्मिक स्थलों के आसपास वेलनेस और हीलिंग आधारित पर्यटन विकास की अपार संभावनाएं: मुख्यमंत्री आयुष संस्थानों को समग्र वेलनेस, प्रशिक्षण, अनुसंधान और रोजगार सृजन के केंद्र के रूप में विकसित करने की आवश्यकता: मुख्यमंत्री पीपीपी मॉडल पर विकसित होंगे आधुनिक आयुष वेलनेस सेंटर, 100 शैय्या वाले एकीकृत आयुष चिकित्सा एवं प्रशिक्षण केंद्र मीरजापुर, गोंडा, मेरठ, आगरा एवं बस्ती मंडलों में होगी एकीकृत आयुष महाविद्यालयों की स्थापना लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को आयुष विभाग की समीक्षा बैठक में प्रदेश में ‘आयुष हेल्थ एंड वेलनेस नीति-2026’ को लागू करने की दिशा में प्रभावी कार्यवाही करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को केवल उपचार आधारित व्यवस्था तक सीमित न रखते हुए आयुष, योग, पंचकर्म, प्राकृतिक चिकित्सा और वेलनेस सेवाओं के समन्वय से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख वेलनेस डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने कहा कि आयुष सेवाओं को आधुनिक प्रबंधन, गुणवत्ता मानकों और पर्यटन से जोड़ते हुए ऐसा मॉडल तैयार किया जाना चाहिए, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं के साथ रोजगार और निवेश को भी नई गति मिले। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत, आयुर्वेद एवं योग की परंपरा तथा धार्मिक पर्यटन सर्किट को आयुष वेलनेस सेक्टर से जोड़ा जाए। वाराणसी, अयोध्या और मथुरा जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों के आसपास वेलनेस और हीलिंग आधारित पर्यटन विकसित किए जाने की व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि आयुष संस्थानों को उपचार केंद्रों के साथ-साथ वेलनेस, प्रशिक्षण, अनुसंधान और रोजगार सृजन के केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में वर्तमान में 3,953 आयुष स्वास्थ्य इकाइयां, 1,034 आयुष्मान आरोग्य मंदिर, 225 योग वेलनेस सेंटर और 19 आयुष चिकित्सा महाविद्यालय संचालित हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि आयुष सेवाओं का विस्तार गुणवत्तापूर्ण और मानकीकृत स्वरूप में किया जाए। इसके लिए पीपीपी मॉडल के माध्यम से आधुनिक आयुष वेलनेस सेंटर, 100 शैय्या वाले एकीकृत आयुष चिकित्सा एवं प्रशिक्षण केंद्र तथा आयुष कॉलेजों के उन्नयन की दिशा में चरणबद्ध कार्रवाई की जाए। बैठक में प्रस्तावित नीति के विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। नीति के अंतर्गत एकीकृत सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, आयुष वेलनेस एवं चिकित्सा केंद्र, प्रशिक्षण युक्त एकीकृत संस्थान तथा आयुष कॉलेज आधारित मॉडल विकसित किए जाने का प्रस्ताव है। इन केंद्रों में पंचकर्म, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, डिजिटल हेल्थ सेवाएं तथा अनुसंधान एवं नवाचार गतिविधियों को भी शामिल किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुष आधारित वेलनेस इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने निवेशकों को एकल खिड़की प्रणाली के माध्यम से त्वरित स्वीकृतियां उपलब्ध कराने तथा परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए स्पष्ट समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि प्रस्तावित नीति में निवेश आधारित सब्सिडी, संचालन संबंधी प्रोत्साहन, ब्याज सब्सिडी, स्टाम्प ड्यूटी में छूट तथा रोजगार सृजन आधारित प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। आयुष शोध, नवाचार तथा पर्यावरण अनुकूल परियोजनाओं के लिए भी विशेष प्रोत्साहन प्रस्तावित हैं। मुख्यमंत्री ने मीरजापुर, गोंडा, मेरठ, आगरा एवं बस्ती मंडलों में एकीकृत आयुष महाविद्यालयों की स्थापना की दिशा में तेजी से कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों को आधुनिक आयुष चिकित्सा, प्रशिक्षण और अनुसंधान के उत्कृष्ट केंद्रों के रूप में विकसित किया जाए। विभागीय कार्यों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने आयुष चिकित्सा संस्थानों में ओपीडी सेवाओं को बेहतर बनाने, दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा पंचकर्म जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आयुष सेवाओं को जनविश्वास और गुणवत्ता से जोड़ते हुए मरीजों को बेहतर उपचार एवं वेलनेस सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।  मुख्यमंत्री ने महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय, गोरखपुर में शोध एवं नवाचार गतिविधियों को गति देने पर बल दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय में स्थायी फैकल्टी की नियुक्ति प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने तथा आयुष की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के क्षेत्र में विश्वविद्यालय को उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश को बड़ी सौगात : खिलाड़ियों के लिए नई उम्मीद और नए अवसरों का बनेगा नया केंद्र

अलीगढ़ बनेगा यूपी का नया स्पोर्ट्स पावर हाउस, सीएम योगी सौंपेंगे ओलंपिक स्टैंडर्ड कॉम्प्लेक्स पश्चिमी उत्तर प्रदेश को बड़ी सौगात : खिलाड़ियों के लिए नई उम्मीद और नए अवसरों का बनेगा नया केंद्र अब छोटे शहरों से चमकेंगे बड़े सितारे, अलीगढ़ में 13,000 स्क्वायर मीटर में तैयार विश्वस्तरीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स स्विमिंग पूल से मल्टीपर्पज हॉल तक, अलीगढ़ को खेल सुविधाओं की सबसे बड़ी सौगात लखनऊ उत्तर प्रदेश में खेल क्रांति को नई गति देते हुए योगी सरकार अलीगढ़ मंडल को एक ऐसी सौगात देने जा रही है, जो आने वाले वर्षों में प्रदेश की खेल प्रतिभाओं की दिशा बदल देगी। 13,000 स्क्वायर मीटर में बना 57 करोड़ से अधिक की लागत से ओलंपिक स्टैंडर्ड इन्डोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स अब बनकर पूरी तरह  तैयार है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जल्द ही इसे जनता को समर्पित करेंगे। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस यह परिसर अलीगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के खिलाड़ियों के लिए नई उम्मीद और नए अवसरों का केंद्र बनने जा रहा है। नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने बताया कि यह मंडल का पहला ऐसा विश्वस्तरीय इन्डोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स है, जहां राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप खेल सुविधाएं विकसित की गई हैं। योगी सरकार की मंशा केवल स्टेडियम बनाना नहीं, बल्कि गांव, कस्बों और छोटे शहरों की प्रतिभाओं को ऐसा मंच देना है, जहां से वे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बना सकें। राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार विश्वस्तरीय सुविधाएं इस विशाल खेल परिसर की सबसे बड़ी खासियत इसका राष्ट्रीय स्तर का स्विमिंग पूल है। अत्याधुनिक तकनीक से तैयार यह पूल भविष्य में राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के आयोजन का केंद्र बन सकता है। अब तक बड़े शहरों पर निर्भर रहने वाले अलीगढ़ मंडल के तैराकों को अपने ही शहर में उच्च स्तरीय अभ्यास और प्रतियोगिताओं का अवसर मिलेगा। कॉम्प्लेक्स में आधुनिक मल्टीपर्पज हॉल भी बनाया गया है, जहां विभिन्न इनडोर खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जा सकेंगी। बैडमिंटन और बास्केटबॉल कोर्ट को अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है। इसके साथ ही बिलियर्ड्स रूम और हाईटेक जिम की सुविधा भी खिलाड़ियों को उपलब्ध कराई गई है। पेशेवर प्रशिक्षण और फिटनेस को ध्यान में रखते हुए तैयार यह परिसर खिलाड़ियों को बड़े शहरों जैसी सुविधाएं देगा। खिलाड़ियों से लेकर दर्शकों तक हर सुविधा का रखा गया ध्यान स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स को केवल अभ्यास केंद्र नहीं, बल्कि बड़े खेल आयोजनों के लिए एक सम्पूर्ण स्पोर्ट्स हब के रूप में विकसित किया गया है। दर्शकों की सुविधा के लिए अत्याधुनिक स्पेक्टेटर गैलरी बनाई गई है, जहां बड़ी संख्या में लोग बैठकर प्रतियोगिताओं का आनंद ले सकेंगे। इसके अलावा वीआईपी रूम, मीडिया रूम और आधुनिक लाउंज क्षेत्र भी तैयार किए गए हैं, जिससे राष्ट्रीय स्तर के आयोजन आसानी से कराए जा सकेंगे। इससे अलीगढ़ भविष्य में बड़े खेल आयोजनों की मेजबानी के लिए भी तैयार माना जा रहा है। अब छोटे शहरों से निकलेंगी बड़ी प्रतिभाएं नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने बताया कि इस कॉम्प्लेक्स के शुरू होने के बाद अलीगढ़ और आसपास के जिलों के खिलाड़ियों को प्रशिक्षण के लिए दिल्ली, नोएडा या लखनऊ जैसे शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। अब स्थानीय प्रतिभाओं को अपने क्षेत्र में ही विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी। इससे आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को सबसे बड़ा लाभ मिलेगा। आने वाले समय में यह परिसर अलीगढ़ को उत्तर प्रदेश के प्रमुख स्पोर्ट्स सेंटर के रूप में स्थापित करेगा। यहां नियमित प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के आयोजन से राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार होने की संभावना बढ़ेगी। 'खेलेगा यूपी, खिलेगा यूपी’ विजन को मिल रही नई ताकत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को लगातार मजबूत किया जा रहा है। गांवों में मिनी स्टेडियम, जिलों में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं के निर्माण के जरिए सरकार युवाओं को खेलों से जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। अलीगढ़ का यह स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स उसी विजन का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। खेल प्रेमियों में उत्साह, अलीगढ़ को नई पहचान मिलने की उम्मीद कॉम्प्लेक्स के तैयार होने से खेल प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों में उत्साह है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह परियोजना आने वाले समय में अलीगढ़ के लिए गेम चेंजर साबित होगी। जिस अलीगढ़ की पहचान अब तक ताला उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों से जुड़ी रही, वहीं अब यह शहर खेल प्रतिभाओं के नए केंद्र के रूप में भी उभर सकता है। वहीं, स्थानीय खिलाड़ियों का कहना है कि विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ अभ्यास का मौका मिलने से अब उनके सपनों को नई उड़ान मिलेगी। खेल जगत को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में अलीगढ़ से राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कई खिलाड़ी निकलेंगे और प्रदेश का नाम रोशन करेंगे।

आईजीआरएस और सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं: मुख्यमंत्री

हर विकास खंड में लगेगी साप्ताहिक चौपाल, जन समस्याओं का होगा मौके पर समाधान आईजीआरएस और सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं: मुख्यमंत्री बकरीद पर सार्वजनिक स्थलों पर कुर्बानी की अनुमति नहीं, प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी पर जीरो टॉलरेंस: मुख्यमंत्री अधिकारियों को मुख्यमंत्री की दो टूक, सड़क जाम कर नमाज की अनुमति नहीं, परंपरागत स्थलों पर ही हो आयोजन अवैध स्लॉटर हाउस और खुले में मांस विक्रय पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश अवैध खनन और भू-माफियाओं के खिलाफ चलाया जाए विशेष अभियान: मुख्यमंत्री लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता की विभिन्न शिकायतों के समाधान के लिए प्रत्येक विकास खंड स्तर पर साप्ताहिक चौपाल लगाने का निर्णय लिया है। इन चौपालों में राजस्व वाद, घरेलू हिंसा, अवैध वसूली तथा स्थानीय स्तर पर दर्ज न होने वाली पुलिस शिकायतों जैसी आमजन से जुड़ी समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाएगा। साथ ही सरकारी लाभार्थीपरक योजनाओं से वंचित पात्र लोगों को योजनाओं का लाभ भी इन चौपालों के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। रविवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित कानून-व्यवस्था एवं प्रशासनिक समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन की प्राथमिकता जनता की समस्याओं का समयबद्ध, पारदर्शी और संतुष्टिपरक समाधान सुनिश्चित करना है। उन्होंने निर्देश दिए कि इन चौपालों के संचालन के लिए शासन स्तर से विस्तृत एसओपी जारी की जाएगी तथा प्रत्येक आवेदन और शिकायत का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा। जनपद स्तरीय अधिकारियों की उपस्थिति इन चौपालों में अनिवार्य रहेगी। मुख्यमंत्री ने आईजीआरएस और सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त होने वाली शिकायतों को लेकर अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि हर शिकायत को पूरी गंभीरता से लिया जाए। केवल औपचारिक निस्तारण नहीं, बल्कि पीड़ित को वास्तविक राहत मिलनी चाहिए। बैठक में मुख्यमंत्री ने आगामी गंगा दशहरा और बकरीद पर्व को देखते हुए विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बकरीद के अवसर पर सार्वजनिक स्थलों पर पशुओं की कुर्बानी की अनुमति नहीं होगी तथा प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। कुर्बानी केवल पूर्व निर्धारित स्थलों पर ही की जाएगी और किसी भी नई परंपरा को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि नमाज केवल परंपरागत स्थलों पर ही अदा की जाए तथा सड़क मार्ग अवरुद्ध कर नमाज की अनुमति किसी भी स्थिति में न दी जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में कुर्बानी के बाद अपशिष्ट निस्तारण की सुनियोजित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। खुले में मांस विक्रय प्रतिबंधित रहे तथा अवैध स्लॉटर हाउस किसी भी दशा में संचालित न हों। वैध स्लॉटर हाउस में भी निर्धारित क्षमता से अधिक पशु न रखे जाएं। उन्होंने पर्वों के दौरान बिजली आपूर्ति, स्वच्छता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। संवेदनशील क्षेत्रों में पर्व से पूर्व फ्लैग मार्च किया जाए तथा धार्मिक स्थलों के आसपास पुलिस बल की सतत पैदल गश्त सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने अलीगढ़, बिजनौर, सहारनपुर, रामपुर और संभल सहित संवेदनशील जनपदों के जिलाधिकारियों और पुलिस कप्तानों से संवाद करते हुए कहा कि विगत वर्षों की घटनाओं का अध्ययन कर संभावित अराजक तत्वों की सूची तैयार की जाए तथा आवश्यकतानुसार निषेधात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। सभी थाना, तहसील और जनपद स्तर पर पीस कमेटियों के साथ नियमित संवाद बनाए रखने के भी निर्देश दिए गए। गंगा दशहरा की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रयागराज, वाराणसी, अयोध्या, चित्रकूट, हापुड़, मुजफ्फरनगर और अमरोहा सहित विभिन्न जनपदों में गंगा घाटों की साफ-सफाई, बैरिकेडिंग, एम्बुलेंस तैनाती, छायादार व्यवस्था तथा पार्किंग प्रबंधन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि तेज गर्मी को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। बैठक में सड़क सुरक्षा और अवैध खनन पर भी मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने बिना नम्बर प्लेट वाले वाहनों के विरुद्ध अभियान चलाने तथा अवैध खनन के खिलाफ टास्क फोर्स गठित कर कठोरतम कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से स्पष्ट कहा कि किसी भी दबाव या सिफारिश में आए बिना जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई की जाए, लेकिन जांच के नाम पर आम नागरिकों का उत्पीड़न नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने भू-माफियाओं के विरुद्ध कार्रवाई को और तेज करने के निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति का वैध अधिकार प्रभावित नहीं होना चाहिए। साथ ही जिन जिलों में मुख्य चिकित्सा अधिकारी की तैनाती नहीं है, वहां तत्काल नियुक्ति सुनिश्चित करने को कहा। बैठक में मुख्य सचिव ने ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के अंतर्गत प्रदेश में अब तक 12 लाख पांडुलिपियों के चिन्हांकन की जानकारी दी। पुलिस महानिदेशक ने आगामी पर्वों और परीक्षाओं को लेकर पुलिस की तैयारियों से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस बैठक में सभी मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त, अपर पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक सहित शासन स्तर के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

पेपर लीक गैंग की अफवाहबाजी फेल, लखनऊ में फैलाई गई पेपर लीक की झूठी सूचना जांच में निकली पूरी तरह फर्जी

पेपर लीक गैंग की अफवाहबाजी फेल, लखनऊ में फैलाई गई पेपर लीक की झूठी सूचना जांच में निकली पूरी तरह फर्जी जांच में साफ हुआ कि प्रश्नपत्र और ओएमआर शीट पूरी तरह सीलबंद और सुरक्षित योगी सरकार की सख्ती और प्रशासन व यूपीएसएसएससी की सतर्कता से शांतिपूर्वक संपन्न हुई थी लेखपाल मुख्य परीक्षा एआई, बायोमैट्रिक और हाईटेक निगरानी ने नकल माफियाओं की तोड़ी कमर, 44 जिलों में सकुशल हुई परीक्षा लखनऊ, उत्तर प्रदेश में भर्ती परीक्षाओं को लेकर वर्षों तक सक्रिय रहे पेपर लीक और नकल माफियाओं के नेटवर्क पर योगी सरकार की सख्ती लगातार भारी पड़ रही है। इसका बड़ा उदाहरण विगत दिनों आयोजित लेखपाल मुख्य परीक्षा-2025 में देखने को मिला, जहां सोशल मीडिया के जरिए पेपर लीक की अफवाह फैलाने की कोशिश हुई, लेकिन प्रशासन और आयोग की सतर्कता के आगे यह साजिश पूरी तरह नाकाम साबित हुई। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) द्वारा आयोजित यह परीक्षा प्रदेश के 44 जिलों के 861 केंद्रों पर शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराई गई। कुल 3,66,712 पंजीकृत अभ्यर्थियों में से 3,01,756 अभ्यर्थियों ने परीक्षा में हिस्सा लिया। उपस्थिति प्रतिशत 82.29 रहा, जो अभ्यर्थियों के भरोसे को भी दर्शाता है। पेपर लीक का शोर, लेकिन हकीकत में निकली अफवाह परीक्षा शुरू होते ही लखनऊ के ऐशबाग स्थित गोपीनाथ लक्ष्मणदास रस्तोगी इंटर कॉलेज को लेकर कुछ लोगों ने पेपर लीक की अफवाह फैलाने की कोशिश की। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, आयोग और निगरानी टीमों ने तत्काल जांच शुरू की। जांच में साफ हुआ कि प्रश्नपत्र और ओएमआर शीट पूरी तरह सीलबंद और सुरक्षित थीं। दरअसल, एक कक्ष के कुछ अभ्यर्थी भ्रम की स्थिति में बाहर आ गए थे, जिसे कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर पेपर लीक का रंग देने की कोशिश की। अधिकारियों ने मौके पर स्थिति स्पष्ट की, जिसके बाद अभ्यर्थी वापस परीक्षा कक्ष में पहुंचे और परीक्षा शांतिपूर्वक जारी रही। योगी सरकार का हाईटेक एग्जाम मॉडल बना ढाल इस बार परीक्षा की निगरानी पूरी तरह तकनीक आधारित रही। आयोग मुख्यालय से लेकर सभी परीक्षा केंद्रों तक कंट्रोल कमांड रूम के जरिए लाइव मॉनिटरिंग की गई। पूरे प्रदेश में 18,883 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। इसके अलावा 7,683 बायोमैट्रिक ऑपरेटर और 6,297 फ्रिस्किंग गार्ड तैनात किए गए थे। एआई आधारित पहचान प्रणाली के जरिए प्रतिरूपण और फर्जीवाड़े पर नजर रखी गई। यही कारण रहा कि बुलंदशहर में एक संदिग्ध अभ्यर्थी तुरंत पकड़ लिया गया और उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया। नकल माफिया पर लगातार कड़ा प्रहार उत्तर प्रदेश में एक समय भर्ती परीक्षाएं पेपर लीक और सॉल्वर गैंग के कारण सवालों में रहती थीं, लेकिन योगी सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह बदलने की दिशा में सख्त कदम उठाए हैं। हाईटेक निगरानी, बायोमैट्रिक सत्यापन, एआई ट्रैकिंग और प्रशासनिक जवाबदेही ने नकल माफियाओं की कमर तोड़ दी है। लेखपाल मुख्य परीक्षा-2025 का शांतिपूर्ण आयोजन इस बात का संकेत है कि अब प्रदेश में भर्ती परीक्षाएं पारदर्शिता और सख्ती के नए मॉडल पर आगे बढ़ रही हैं।