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प्रदेशवासियों की सुरक्षा और जनसमस्याओं के समाधान के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री

जनता दर्शन  प्रदेशवासियों की सुरक्षा और जनसमस्याओं के लिए सरकार प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री ‘जनता दर्शन’ में आए हर फरियादी से मिल मुख्यमंत्री ने सुनीं समस्याएं   पुलिस, शिक्षा, चिकित्सा आदि से जुड़े प्रकरणों का लिया संज्ञान, बोले-हम कराएंगे समस्याओं का समाधान  लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को ‘जनता दर्शन’ में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए फरियादियों से मिलकर सभी की समस्याएं सुनीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेशवासियों की सुरक्षा, सम्मान पर सरकार का पूरा जोर है। सरकार जनसमस्याओं के उचित समाधान के लिए प्रतिबद्ध भी है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को तय समयसीमा के भीतर समस्याओं के निस्तारण का भी निर्देश दिया।  शिक्षा और स्वास्थ्य पर सरकार का विशेष जोर 'जनता दर्शन' में शिक्षा व स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कुछ मामले आए। मुख्यमंत्री ने सभी को आश्वस्त किया कि शिक्षा व स्वास्थ्य पर सरकार का विशेष जोर है। प्रदेश का हर व्यक्ति शिक्षित हो और हर जरूरतमंद को स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें, इसके लिए सरकार कृतसंकल्पित है। इन विभागों से जुड़े सभी मामले  संवेदनशीलता से हल किए जाएंगे।  बिना भेदभाव सभी को मिले न्याय मुख्यमंत्री ने कहा कि हर जरूरतमंद की समस्या का समाधान हमारी सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने अफसरों को निर्देशित किया कि पूरी संवेदनशीलता से सुनिश्चित करें कि बिना भेदभाव सभी को न्याय मिले। हर पात्र को योजनाओं का लाभ मिले, जरूरतमंदों के समुचित इलाज की व्यवस्था हो। मुख्यमंत्री ने राजस्व और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों के भी शीघ्रता से निस्तारण के निर्देश दिए। महिलाओं से बोले मुख्यमंत्री- गर्मी में अपना और परिवार का विशेष ध्यान रखिए मुख्यमंत्री ने 'जनता दर्शन' में आईं महिलाओं की समस्याएं सुनीं, उनका हालचाल जाना, फिर उनसे संवाद भी किया। उन्होंने महिलाओं से कहा कि गर्मी बहुत पड़ रही है। ऐसे में अपना और परिवार के बुजुर्गों, बच्चों, पुरुषों का ध्यान रखें। इस समय अकारण बाहर निकलने से बचें और खानपान पर विशेष ध्यान दें।

पीएम मोदी के मार्गदर्शन में योगी सरकार के विजन को मिलेगी नई उड़ान, नई दिशा देगा प्रस्तावित यूपी डिफेंस एंड एयरोस्पेस कॉन्क्लेव-2026

डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भर भारत का नया इंजन बनेगा यूपी, प्रस्तावित कॉन्क्लेव से निवेश और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा पीएम मोदी के मार्गदर्शन में योगी सरकार के विजन को मिलेगी नई उड़ान, नई दिशा देगा प्रस्तावित यूपी डिफेंस एंड एयरोस्पेस कॉन्क्लेव-2026 लखनऊ में प्रस्तावित कॉन्क्लेव के जरिए यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को मिलेगा नया विस्तार, निवेश और रोजगार पर रहेगा फोकस डिफेंस निर्माण, एयरोस्पेस निवेश, डीपीएसयू सहयोग और युवाओं के रोजगार को लेकर बनेगी महत्वपूर्ण रणनीति लखनऊ उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और एयरोस्पेस सेक्टर को नई गति देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश रक्षा और एफडीआई कॉन्क्लेव-2026 आयोजित करने की तैयारी है। प्रस्तावित कॉन्क्लेव का आयोजन लखनऊ में किया जाएगा, जिसमें उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (यूपीडीआईसी) में डिफेंस इंडस्ट्री की स्थापना, निवेश आकर्षण और औद्योगिक विस्तार पर विशेष फोकस रहेगा। कॉन्क्लेव का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को देश के सबसे बड़े डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करना है। इसके माध्यम से उद्योग जगत, रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों (डीपीएसयू), एयरोस्पेस कंपनियों, अनुसंधान संस्थानों और सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा। यूपी डिफेंस कॉरिडोर की ताकत का होगा प्रदर्शन प्रस्तावित एजेंडे के अनुसार कॉन्क्लेव में उत्तर प्रदेश की रक्षा निर्माण क्षमताओं का प्रदर्शन किया जाएगा। इसमें राज्य की रणनीतिक लोकेशन, मजबूत एक्सप्रेसवे नेटवर्क, औद्योगिक भूमि उपलब्धता, सिंगल विंडो सुविधा और बेहतर कानून व्यवस्था को निवेश के प्रमुख आधार के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। कॉन्क्लेव में रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी के साथ उद्घाटन सत्र आयोजित होगा। इसके अलावा कई महत्वपूर्ण पैनल चर्चाएं भी प्रस्तावित हैं। इनमें प्रमुख रूप से “डिफेंस और एयरोस्पेस इन्वेस्टमेंट के लिए उत्तर प्रदेश क्यों?”, “यूपी एयरोस्पेस और रक्षा इकाई एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2024”, “रक्षा क्षेत्र में व्यापार करने में आसानी” और “यूपी डिफेंस कॉरिडोर को बढ़ावा देने में डीपीएसयू और सरकारी संस्थानों की भूमिका” जैसे विषय शामिल हैं। रक्षा उत्पादन सचिव और मुख्यमंत्री का विजन रहेगा केंद्र में कॉन्क्लेव में भारत सरकार के रक्षा उत्पादन सचिव द्वारा रक्षा क्षेत्र के भविष्य को लेकर विजन और मार्गदर्शन दिए जाने का प्रस्ताव है। वहीं प्रस्ताव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा उत्तर प्रदेश को रक्षा उत्पादन और एयरोस्पेस सेक्टर में अग्रणी राज्य बनाने की रणनीति प्रस्तुत किया जाना भी शामिल है। कार्यक्रम में स्टेकहोल्डर्स के बीच बी2जी और बी2बी इंटरैक्शन भी आयोजित किए जाएंगे, जिससे उद्योग और सरकार के बीच सीधा संवाद स्थापित हो सके। डिफेंस सेक्टर के लिए यूपी की बड़ी ताकतें होंगी हाईलाइट कॉन्क्लेव के दौरान जिन प्रमुख बिंदुओं को प्रस्तुत किया जाएगा, उनमें रणनीतिक स्थान, कनेक्टिविटी और औद्योगिक भूमि की उपलब्धता, कुशल कार्यबल और परीक्षण सुविधाएं, राजकोषीय प्रोत्साहन एवं अनुसंधान एवं विकास सहयोग, सिंगल विंडो सिस्टम और सुव्यवस्थित अनुदान व्यवस्था, डीपीएसयू एवं अनुसंधान संस्थानों के साथ सहभागिता तथा रक्षा निर्माण क्षमताएं शामिल हैं। देश की बड़ी कंपनियां और संस्थान होंगे आमंत्रित प्रस्तावित सूची के अनुसार कार्यक्रम में रक्षा मंत्रालय एवं भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, एचएएल, बीईएल, बीईएमएल जैसी रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयां तथा टाटा, अडानी, बोइंग, एयरबस और लॉकहीड मार्टिन जैसी बड़ी इंडस्ट्री कंपनियों को आमंत्रित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त डीआरडीओ, एनएएल और बीआईएस जैसी इंडस्ट्री एसोसिएशंस एवं एजेंसियां भी सहभागिता करेंगी। एमएसएमई सेक्टर से एमकेयू लि., पीटीसी इंडस्ट्रीज, आइडियाफोर्ज और स्काईरूट जैसी कंपनियों की भागीदारी भी प्रस्तावित है। निवेश, रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर रहेगा फोकस कॉन्क्लेव से कई महत्वपूर्ण परिणामों की अपेक्षा की जा रही है। इनमें संभावित निवेशों के लिए समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर, कॉरिडोर विस्तार के लिए रणनीतिक रोडमैप, परीक्षण एवं सर्टिफिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास, उद्योग और सरकार के बीच मजबूत साझेदारी, लॉजिस्टिक्स एवं इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा, फिस्कल इंसेंटिव और पॉलिसी सपोर्ट की जानकारी तथा तकनीकी आधारित रोजगार अवसरों का सृजन प्रमुख हैं। योगी सरकार पहले ही उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को राज्य की ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी रणनीति का महत्वपूर्ण आधार बना चुकी है। ऐसे में प्रस्तावित डिफेंस एवं एफडीआई कॉन्क्लेव-2026 को प्रदेश में रक्षा उत्पादन, विदेशी निवेश और उच्च तकनीकी रोजगार के नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

योगी सरकार में सशक्त हुईं आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां, सम्मान और सुरक्षा से बदली तस्वीर

योगी सरकार में सशक्त हुईं आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां, सम्मान और सुरक्षा से बदली तस्वीर  3.44 लाख महिलाओं को मिला आत्मनिर्भरता का आधार, गांव-गांव तक मजबूत हुआ महिला नेतृत्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग लगातार ऊंचाई पर पोषण, स्वास्थ्य और तकनीक के संगम से आंगनबाड़ी व्यवस्था को मिला नया स्वरूप लखनऊ   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश में आंगनबाड़ी व्यवस्था लगातार मजबूत और आधुनिक होती जा रही है। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की योजनाओं ने प्रदेश की लाखों आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को नई पहचान, सम्मान और आर्थिक मजबूती दी है। कभी सीमित संसाधनों और कम सुविधाओं में काम करने वाली महिलाएं योगी सरकार में गांव-गांव में महिला सशक्तीकरण और सामाजिक जागरूकता की मजबूत मिसाल बनकर उभरी हैं। प्रदेश में वर्तमान समय में 1,83,049 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां और 1,61,491 सहायिकाएं कार्यरत हैं। यानी करीब 3.44 लाख महिलाएं बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के पोषण, स्वास्थ्य और देखभाल की जिम्मेदारी निभा रही हैं। योगी सरकार ने इन महिलाओं को केवल मानदेय आधारित कर्मचारी मानने के बजाय समाज परिवर्तन की अहम कड़ी के रूप में स्थापित करने का कार्य किया है। योगी सरकार में मिल रही प्रोत्साहन राशि    योगी सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए मानदेय और प्रोत्साहन राशि में सुधार किया है। वर्तमान में कार्यकत्रियों को 8 हजार रुपये और सहायिकाओं को 4 हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जा रहा है। जिसमें कार्य आधारित प्रोत्साहन राशि की व्यवस्था भी लागू है। पूरक पोषण का शत-प्रतिशत वितरण सुनिश्चित करने पर कार्यकत्रियों को 500 रुपये और सहायिकाओं को 400 रुपये अतिरिक्त दिए जाते हैं। इसके अलावा पोषण ट्रैकर पर लाभार्थियों की पूरी फीडिंग करने पर कार्यकत्रियों को 1,000 रुपये और सहायिकाओं को 350 रुपये अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।  3,16,724 आयुष्मान कार्ड बनाए गए  बाल विकास एवं पुष्टाहार तथा राज्य पोषण मिशन की निदेशक हर्षिता माथुर ने बताया कि योगी सरकार ने आंगनबाड़ी व्यवस्था को तकनीक से जोड़कर आधुनिक स्वरूप दिया है। पोषण ट्रैकर प्रणाली लागू होने से लाभार्थियों का रिकॉर्ड ऑनलाइन हो रहा है और योजनाओं की निगरानी अधिक प्रभावी बनी है। निदेशक हर्षिता माथुर ने बताया कि फेस रिकग्निशन सिस्टम के जरिए 98.76 प्रतिशत लाभार्थियों का पंजीकरण पूरा किया जा चुका है। इससे फर्जीवाड़े पर रोक लगी है और योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्रों तक पहुंच रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं की स्वास्थ्य सुरक्षा पर भी सरकार ने विशेष ध्यान दिया है। प्रदेश में 3,16,724 आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं, जिससे उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मिल रहा है। इससे लाखों महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा का मजबूत आधार मिला है।

बेसिक शिक्षा में यूपी ने बनाई नई पहचान, परिषदीय विद्यालयों का बदलता स्वरूप बना ‘योगी मॉडल’

बेसिक शिक्षा में यूपी ने बनाई नई पहचान, परिषदीय विद्यालयों का बदलता स्वरूप बना ‘योगी मॉडल’ – ऑपरेशन कायाकल्प से 1.32 लाख विद्यालयों की बदली तस्वीर, संतृप्तिकरण 36% से बढ़कर 96.30% हुआ – स्मार्ट स्कूल, मॉडल कम्पोजिट विद्यालय और आधुनिक सुविधाओं से बदल रही सरकारी स्कूलों की पहचान – 75 जिलों में 150 मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालयों की स्थापना, 141 के लिए भूमि चयन का कार्य पूर्ण – बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए नए आवासीय विद्यालयों की स्थापना का निर्णय लखनऊ  उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बेसिक शिक्षा अब भवनों और नामांकन पर जोर देने के साथ-साथ परिषदीय विद्यालयों को आधुनिक, स्मार्ट और तकनीक आधारित शिक्षा केंद्रों में बदलने का व्यापक अभियान चल रहा है। कभी जर्जर भवनों और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के लिए चर्चा में रहने वाले सरकारी स्कूल अब 'योगी मॉडल' के अंतर्गत नई पहचान बना रहे हैं। योगी सरकार की बड़ी उपलब्धियों में शामिल 'ऑपरेशन कायाकल्प' ने प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों की तस्वीर बदल दी है। अभियान के अंतर्गत अब तक 1.32 लाख विद्यालय आच्छादित किए जा चुके हैं। वर्ष 2017-18 में जहां विद्यालयों का संतृप्तिकरण केवल 36 प्रतिशत था, वहीं अब यह बढ़कर 96.30 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यह बदलाव अब गांवों के सरकारी स्कूलों में साफ दिखाई दे रहा है। 3.42 लाख डेस्क-बेंच उपलब्ध कराने की कार्यवाही तेज विद्यालयों में बच्चों के लिए बेहतर बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु 3.42 लाख डेस्क-बेंच उपलब्ध कराने की कार्यवाही तेजी से की जा रही है। इसके साथ ही सभी प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करने की विशेष योजना पर काम चल रहा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे भी तकनीक आधारित शिक्षा से जुड़ सकें। मॉडल विद्यालयों से शिक्षा व्यवस्था को मिल रही नई दिशा योगी सरकार अब परिषदीय शिक्षा को आधुनिक और समग्र शिक्षा मॉडल से जोड़ने पर विशेष जोर दे रही है। इसी क्रम में प्रदेश के सभी 75 जिलों में दो-दो मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालय स्थापित किए जाने का निर्णय लिया गया है। प्री-प्राइमरी से कक्षा-12 तक संचालित होने वाले 150 मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालयों में से 141 के लिए भूमि चयन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इन विद्यालयों को आधुनिक कक्षाओं, डिजिटल शिक्षण संसाधनों, स्मार्ट क्लास, प्रयोगशालाओं और खेल सुविधाओं से लैस किया जाएगा, ताकि सरकारी स्कूलों के बच्चे भी निजी विद्यालयों जैसी सुविधाएं प्राप्त कर सकें। इसके साथ ही 75 मुख्यमंत्री अभ्युदय कम्पोजिट विद्यालय भी विकसित किए जा रहे हैं, जहां प्री-प्राइमरी से कक्षा-8 तक के बच्चों को आधुनिक सुविधाओं के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। बालिका शिक्षा पर विशेष फोकस योगी सरकार ने बालिका शिक्षा को मजबूत करने के लिए भी बड़ा कदम उठाया है। जिन विकास खंडों में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय नहीं हैं, वहां नए आवासीय बालिका विद्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इससे दूरदराज और वंचित क्षेत्रों की बेटियों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षिक वातावरण मिल सकेगा। राष्ट्रीय स्तर पर उभर रहा ‘योगी मॉडल’ उत्तर प्रदेश में जिस तेजी से परिषदीय विद्यालयों का कायाकल्प हुआ है, वह देश के लिए एक बड़े मॉडल के रूप में उभर रहा है। योगी सरकार की रणनीति अब केवल स्कूल खोलने तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी विद्यालयों को आधुनिक, तकनीक आधारित और परिणामोन्मुखी शिक्षा केंद्रों में बदलने की दिशा में काम किया जा रहा है। डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट स्कूल, मॉडल कम्पोजिट विद्यालय और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के माध्यम से उत्तर प्रदेश अब बेसिक शिक्षा में नई राष्ट्रीय पहचान बनाने की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

फार्मर रजिस्ट्री में 2.28 करोड़ से अधिक किसानों का पंजीकरण, लक्ष्य का 79.10 प्रतिशत कार्य पूरा

फार्मर रजिस्ट्री में 2.28 करोड़ से अधिक किसानों का पंजीकरण, लक्ष्य का 79.10 प्रतिशत कार्य पूरा योगी सरकार के तेज प्रयासों से किसानों की डिजिटल पहचान की ओर तेजी से बढ़ रहा उत्तर प्रदेश यूपी में अंश निर्धारण का कार्य 87.19 प्रतिशत तक पूरा तय समयसीमा में लक्ष्य पूरा करने के लिए बढ़ाई गई रफ्तार लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश तेजी से डिजिटल कृषि व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ रहा है। किसानों को सरकारी योजनाओं का पारदर्शी और त्वरित लाभ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश में चल रहे फार्मर रजिस्ट्री अभियान ने अब बड़े स्तर पर परिणाम देना शुरू कर दिया है। राज्य सरकार की सक्रिय पहल के चलते अब तक 2.28 करोड़ से अधिक किसानों का पंजीकरण किया जा चुका है, जो केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य का 79.10 प्रतिशत कार्य पूरा है। प्रदेश में फार्मर रजिस्ट्री अभियान की शुरुआत 5 नवंबर 2024 से की गई थी। केंद्र सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश के लिए 2,88,70,495 किसानों के पंजीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वर्तमान प्रगति के अनुसार अब तक 2,28,36,658 किसानों का नामांकन किया जा चुका है, जबकि लगभग 60,33,837 किसानों का पंजीकरण अभी शेष है। वर्तमान प्रगति के आधार पर किसानों की आईडी निर्माण प्रक्रिया 20 अगस्त 2026 तक पूर्ण होने का अनुमान है।    योगी सरकार ने इस अभियान को मिशन मोड में संचालित करते हुए जिला प्रशासन, राजस्व विभाग, कृषि विभाग और स्थानीय स्तर के कर्मचारियों को तेजी से कार्य पूरा करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का उद्देश्य किसानों का एकीकृत डिजिटल डाटाबेस तैयार करना है, जिससे उन्हें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा, कृषि अनुदान, ऋण सुविधा और अन्य योजनाओं का लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से मिल सके।  प्रदेश सरकार की प्राथमिकता केवल पंजीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि भूमि और किसानों के रिकॉर्ड को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाना भी है। इसी क्रम में “अंश निर्धारण” का कार्य भी तेजी से चल रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में अंश निर्धारण का कार्य 87.19 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है। इससे भूमि रिकॉर्ड की शुद्धता बढ़ेगी और भविष्य में विवादों को कम करने में मदद मिलेगी। विभागीय अधिकारियों के अनुसार फार्मर रजिस्ट्री उत्तर प्रदेश की कृषि व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकती है। इससे सरकार को वास्तविक किसानों की पहचान करने, योजनाओं की मॉनिटरिंग करने और कृषि आधारित नीतियों को अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी। साथ ही किसानों को सरकारी सहायता प्राप्त करने में भी आसानी होगी। योगी सरकार लगातार तकनीक आधारित प्रशासन को बढ़ावा दे रही है। डिजिटल गवर्नेंस, ऑनलाइन सेवाओं और डेटा आधारित योजना क्रियान्वयन के जरिए उत्तर प्रदेश को आधुनिक और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है। फार्मर रजिस्ट्री अभियान को भी इसी व्यापक परिवर्तन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है, जो आने वाले समय में प्रदेश के करोड़ों किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।

कर संग्रह बढ़ाने के साथ ईमानदार व्यापारियों को मिले सुविधा, सम्मान और त्वरित समाधान: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने राज्य कर विभाग की समीक्षा की, कहा, राजस्व वृद्धि के साथ विश्वास आधारित प्रशासन पर हो विशेष फोकस कर संग्रह बढ़ाने के साथ ईमानदार व्यापारियों को मिले सुविधा, सम्मान और त्वरित समाधान: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने जोनवार अधिकारियों से किया सीधा संवाद, प्रत्येक अधिकारी के कार्य प्रदर्शन की समीक्षा 21.82 लाख सक्रिय करदाताओं के साथ यूपी देश में सर्वाधिक जीएसटी करदाताओं वाला राज्य बना जीएसटी अपील से जुड़े प्रकरणों का तय समय सीमा में हो निस्तारण, लंबित न रहें आवेदन: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री का निर्देश, जीएसटी पंजीयन, रिटर्न दाखिले, अपील निस्तारण और रिफंड प्रक्रियाओं में अनावश्यक विलंब समाप्त हो वित्तीय वर्ष 2025-26 में जीएसटी एवं वैट मद में प्रदेश को ₹1,15,977 करोड़ का राजस्व प्राप्त, जीएसटी बकाया के रूप में ₹2658 करोड़ की वसूली प्रवर्तन इकाइयों के माध्यम से ₹2071 करोड़ की वसूली, कर चोरी और बोगस फर्मों पर विशेष निगरानी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹1,98,071 करोड़ राजस्व लक्ष्य निर्धारित, अप्रैल 2026 में ₹10,896 करोड़ का संग्रह लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य कर विभाग को निर्देश दिए हैं कि कर संग्रह बढ़ाने के साथ-साथ ईमानदार व्यापारियों को सुविधा, सम्मान और त्वरित समाधान की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य तक पहुंचाने में राज्य कर विभाग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और विभाग को राजस्व वृद्धि के साथ विश्वास आधारित प्रशासन का मॉडल प्रस्तुत करना होगा। मुख्यमंत्री जी, सोमवार को राज्य कर विभाग के शासन, मुख्यालय और फील्ड स्तरीय अधिकारियों के साथ विशेष बैठक कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि कर प्रणाली को अधिक सरल, डिजिटल और जवाबदेह बनाया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि जीएसटी पंजीयन, रिटर्न दाखिले, अपील निस्तारण और रिफंड जैसी प्रक्रियाओं में अनावश्यक देरी समाप्त होनी चाहिए। उन्होंने व्यापारियों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखने, छोटे कारोबारियों को जागरूक करने तथा जिला एवं खंड स्तर तक करदाता सहायता कार्यक्रम चलाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग कर कर चोरी रोकने के साथ-साथ वैध व्यापार को प्रोत्साहन देना आवश्यक है। बैठक में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य ने जीएसटी और वैट मद में कुल 1,15,977 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त किया, जो पुनरीक्षित अनुमान का लगभग 98.8 प्रतिशत रहा। जीएसटी में उत्तर प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर रहा, जबकि महाराष्ट्र प्रथम और कर्नाटक तीसरे स्थान पर रहे। बैठक में यह भी बताया गया कि जीएसटी बकाया के रूप में 2658 करोड़ रुपये जमा हुए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 228 प्रतिशत अधिक हैं। वहीं वैट बकाया के रूप में 800 करोड़ रुपये की वसूली हुई, जो गत वर्ष से 29 प्रतिशत अधिक है। प्रवर्तन इकाइयों के माध्यम से 2071 करोड़ रुपये की वसूली की गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 13 प्रतिशत अधिक रही। अधिकारियों ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विभाग को कुल 1,98,071 करोड़ रुपये का लक्ष्य दिया गया है, जिसमें जीएसटी का लक्ष्य 1,49,956 करोड़ रुपये तथा वैट का लक्ष्य 48,115 करोड़ रुपये है। अप्रैल 2026 में राज्य ने 10,896 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह किया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 9.6 प्रतिशत अधिक है।  जोनवार समीक्षा में बताया गया कि अप्रैल 2026 में राज्य के अधिकांश जोनों में राजस्व वृद्धि दर्ज की गई। गौतमबुद्ध नगर जोन ने 1506 करोड़ रुपये के संग्रह के साथ 18 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की, जबकि गत वर्ष इसी अवधि के सापेक्ष इस वर्ष सहारनपुर जोन में 35.1 प्रतिशत और वाराणसी प्रथम जोन में 33.2 प्रतिशत वृद्धि रही। मुरादाबाद जोन ने भी अप्रैल 2025 के सापेक्ष अप्रैल 2026 में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की। मुख्यमंत्री ने अपेक्षाकृत कम प्रदर्शन वाले जोनों को विशेष कार्ययोजना बनाकर लक्ष्य प्राप्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्देश दिए कि वरिष्ठ अधिकारी स्वयं फील्ड में उतरें, व्यपारियों से संवाद करें।  मुख्यमंत्री ने फर्जी फर्मों और कर चोरी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि बोगस फर्मों के खिलाफ 477 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई तथा 168 गिरफ्तारियां की गईं। 7 नवंबर 2025 को एसआईटी का गठन किया गया। 180 करोड़ रुपये की इनपुट टैक्स क्रेडिट ब्लॉक की गई तथा न्यायनिर्णयन कार्रवाई से 2250 करोड़ रुपये की मांग सृजित हुई। अपील निस्तारण की समीक्षा के दौरान बताया गया कि वर्ष 2025-26 में जीएसटी की 52,432 और वैट की 11,365, कुल 63,797 अपीलों का निस्तारण किया गया। वर्तमान में जीएसटी की 18,504 तथा वैट की 2,193, कुल 20,697 अपीलें विचाराधीन हैं। मुख्यमंत्री ने लंबित अपीलों के समयबद्ध निस्तारण के निर्देश दिए। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश 21.82 लाख सक्रिय करदाताओं के साथ देश में सबसे अधिक जीएसटी करदाताओं वाला राज्य बन गया है। जीएसटी पंजीयन आवेदनों के निस्तारण की औसत अवधि प्रदेश में 8 दिन है, जबकि राष्ट्रीय औसत 14 दिन है। प्रदेश में 100 प्रतिशत भौतिक सत्यापन की व्यवस्था लागू है। रिटर्न दाखिले की स्थिति में भी प्रदेश राष्ट्रीय औसत से आगे है। देय तिथि तक 90 प्रतिशत से अधिक करदाता रिटर्न दाखिल कर रहे हैं, जबकि औसत मासिक रिटर्न दाखिला प्रतिशत प्रदेश में 93 प्रतिशत और केंद्र स्तर पर 91 प्रतिशत है। बीते महीनों के 99 प्रतिशत से अधिक रिटर्न दाखिल कराए जा चुके हैं। बैठक में बताया गया कि जीएसटी रिफंड मामलों के निस्तारण की औसत अवधि उत्तर प्रदेश में 27 दिन है, जबकि राष्ट्रीय औसत 48 दिन है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि रिफंड व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और त्वरित बनाया जाए ताकि व्यापारियों की कार्यशील पूंजी प्रभावित न हो। तकनीक आधारित कर प्रशासन के संबंध में अधिकारियों ने बताया कि 16 पैरामीटर निर्धारित कर 1.59 लाख वार्षिक रिटर्नों में मिसमैच डेटा पर विधिक कार्रवाई की जा रही है। एकीकृत नोटिस जारी करने के लिए मॉड्यूल विकसित किया गया है। वर्ष 2025-26 में 1.33 लाख डीलरों की स्क्रूटनी के दौरान 2369 करोड़ रुपये की मांग सृजित की गई तथा 345 करोड़ रुपये जमा कराए गए। 22 कॉर्पोरेट सर्किलों में वर्चुअल सुनवाई की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि डेटा आधारित निगरानी और एआई आधारित विश्लेषण से कर प्रशासन की दक्षता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा। मुख्यमंत्री ने व्यापारियों … Read more

स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को समय पर और सही बिल उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए : मुख्यमंत्री

गांव हो या नगर, भीषण गर्मी में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करें: मुख्यमंत्री बढ़ती बिजली मांग के बीच उत्पादन क्षमता बढ़ाने और सभी इकाइयों को पूरी दक्षता से संचालित करने के निर्देश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की ऊर्जा विभाग समीक्षा, कहा बिलिंग और कलेक्शन क्षमता बढ़ाने की जरूरत ट्रांसमिशन नेटवर्क को और मजबूत व भरोसेमंद बनाने पर मुख्यमंत्री का जोर फीडर वाइज मॉनीटरिंग करके जवाबदेही तय हो, शिकायतों का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करें : मुख्यमंत्री इस वर्ष 30,339 मेगावाट तक पहुंची प्रदेश की पीक बिजली मांग, निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश वर्ष 2026 में बढ़ी बिजली मांग के बावजूद आपूर्ति व्यवस्था मजबूत रखने पर मुख्यमंत्री का जोर आंधी-तूफान के बावजूद विद्युत व्यवस्था बहाल रखने के लिए त्वरित रिस्पॉन्स सिस्टम सक्रिय रखने के निर्देश हेल्पलाइन कॉल सेंटर का भौतिक निरीक्षण कर व्यवस्था की पड़ताल करें : मुख्यमंत्री ने ऊर्जा मंत्री व राज्य मंत्री को दिए निर्देश आम जन को बिजली आपूर्ति के बारे में सही जानकारी दें, समाधान कब तक, यह भी बताएं: मुख्यमंत्री स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को समय पर और सही बिल उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए : मुख्यमंत्री प्रदेशवासियों को बेहतर, भरोसेमंद और गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भीषण गर्मी और बढ़ती बिजली मांग के बीच प्रदेश में निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आमजन, किसानों, व्यापारियों और उद्योगों को बिजली संकट का सामना न करना पड़े, इसके लिए सभी स्तरों पर सतत मॉनिटरिंग की जाए। उन्होंने कहा कि गर्मी के इस चुनौतीपूर्ण दौर में ऊर्जा विभाग पूरी संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्य करे। मुख्यमंत्री रविवार को ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा एवं राज्य मंत्री कैलाश सिंह राजपूत की उपस्थिति में ऊर्जा विभाग, पावर कॉरपोरेशन एवं सभी डिस्कॉम के अधिकारियों के साथ विद्युत आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने राज्य की विद्युत उत्पादन क्षमता को और सुदृढ़ बनाने तथा गर्मी के मौसम में निर्बाध बिजली उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बढ़ती विद्युत मांग को देखते हुए उत्पादन इकाइयों की अधिकतम क्षमता का उपयोग किया जाए और सभी संयंत्रों में तकनीकी दक्षता तथा रखरखाव व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता बढ़कर 13,388 मेगावाट हो गई है। इसमें अनपरा, ओबरा, हरदुआगंज, परीछा, जवाहरपुर और पनकी जैसे तापीय विद्युत गृहों की 9,120 मेगावाट क्षमता शामिल है, जबकि जल विद्युत परियोजनाओं से 526.4 मेगावाट क्षमता उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त मेजा, घाटमपुर और खुर्जा परियोजनाओं से संयुक्त उपक्रमों के माध्यम से 3,742 मेगावाट क्षमता राज्य को प्राप्त हो रही है। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2022 की तुलना में वर्ष 2026 तक उत्पादन निगम की स्थापित क्षमता में 86 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अतिरिक्त, गैर पारंपरिक ऊर्जा विकल्पों से लगभग 10 हजार मेगावॉट बिजली उत्पादन हो रहा है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की बढ़ती विद्युत मांग को देखते हुए ट्रांसमिशन नेटवर्क को और अधिक मजबूत, आधुनिक एवं भरोसेमंद बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बिजली आपूर्ति व्यवस्था की मजबूती के लिए ट्रांसमिशन प्रणाली की दक्षता अत्यंत महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गर्मी के मौसम में किसी भी प्रकार की तकनीकी बाधा को न्यूनतम रखा जाए तथा ट्रांसमिशन नेटवर्क की सतत मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड के पास वर्तमान में 60,858 सर्किट किलोमीटर लंबी ट्रांसमिशन लाइनें संचालित हैं। प्रदेश में 715 उपकेंद्रों के माध्यम से 2,05,632 एमवीए क्षमता उपलब्ध है। ट्रांसमिशन नेटवर्क की उपलब्धता 99.30 प्रतिशत दर्ज की गई है, जबकि पारेषण हानियां घटकर 3.2 प्रतिशत रह गई हैं।  मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बिजली वितरण व्यवस्था को और अधिक जवाबदेह तथा उपभोक्ता केंद्रित बनाया जाए। उन्होंने फीडर वाइज जवाबदेही तय करने के निर्देश देते हुए कहा कि ट्रांसफॉर्मर खराब होने, फीडर बाधित होने अथवा शिकायत निस्तारण में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि आंधी-तूफान और अत्यधिक तापमान जैसी परिस्थितियों के बावजूद फील्ड स्तर पर त्वरित रिस्पॉन्स सिस्टम सक्रिय रखा जाए। बैठक में बताया गया कि 4, 7 और 15 मई को आए आंधी-तूफान के कारण प्रदेश में 38 सब-स्टेशन और 326 फीडर प्रभावित हुए, लेकिन मरम्मत एवं बहाली कार्य तेजी से कराया गया। मुख्यमंत्री ने भूमिगत केबल वाले स्थलों पर खुदाई से पूर्व सक्षम प्राधिकारी से विधिवत स्वीकृति सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए ताकि विद्युत व्यवस्था बाधित न हो। मुख्यमंत्री ने ट्रांसफॉर्मर क्षति की घटनाओं में कमी को सकारात्मक बताते हुए इसे और बेहतर करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2022-23 की तुलना में पावर ट्रांसफॉर्मर क्षति में लगभग 80 प्रतिशत की कमी आई है। वर्ष 2022-23 में 429 पावर ट्रांसफॉर्मर क्षतिग्रस्त हुए थे, जबकि वर्ष 2025-26 में यह संख्या घटकर 87 रह गई। बैठक में यह भी बताया गया कि 100 केवीए से अधिक क्षमता वाले वितरण ट्रांसफॉर्मरों की क्षति दर में भी उल्लेखनीय कमी आई है। वर्ष 2022-23 में जहां 39,177 बड़े ट्रांसफॉर्मर क्षतिग्रस्त हुए थे, वहीं वर्ष 2025-26 में यह संख्या घटकर 20,292 रह गई। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा तंत्र की व्यापक स्थापना, समयबद्ध मरम्मत और जवाबदेही तय किए जाने से यह सुधार संभव हुआ है। बैठक में बताया गया कि इस वर्ष अप्रैल और मई माह में पिछले वर्ष की तुलना में तापमान में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिसके कारण प्रदेश में बिजली मांग में लगातार बढ़ोतरी हुई है। 15 अप्रैल से 22 मई के बीच औसत डिमांड मेट 501 मिलियन यूनिट प्रतिदिन से बढ़कर 561 मिलियन यूनिट प्रतिदिन हो गया, जबकि पीक डिमांड मेट 29,831 मेगावाट से बढ़कर 30,339 मेगावाट तक पहुंच गया। बैठक में बताया गया कि 20, 21 और 22 मई को उत्तर प्रदेश देश में सर्वाधिक बिजली मांग पूरी करने वाले राज्यों में दूसरे स्थान पर रहा। मुख्यमंत्री ने बढ़ती मांग के अनुरूप विद्युत उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी संभावित स्रोतों से बिजली खरीद और आपूर्ति प्रबंधन के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि 15 मई से विभिन्न पावर प्लांटों में अलग-अलग कारणों से बिजली उपलब्धता प्रभावित हुई। इसके बावजूद उत्तर प्रदेश पावर … Read more

सभी थानों की सीसीटीवी मॉनिटरिंग के लिए बने सेंट्रल डैशबोर्ड: मुख्यमंत्री

सभी थानों की सीसीटीवी मॉनिटरिंग के लिए बने सेंट्रल डैशबोर्ड: मुख्यमंत्री पुलिस की गोपनीय सूचनाओं और संचार सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा, हर जरूरी तकनीकी सुधार करें: मुख्यमंत्री 12 जनपदों में शुरू होगी डिजिटल वायरलेस सेवा, 47 करोड़ की कार्ययोजना रिवर्स ऑक्शन से पुलिस रेडियो उपकरण खरीद में 1.23 करोड़ रुपये की बचत डीआईजी रेडियो पूर्वी का मुख्यालय आजमगढ़ तथा डीआईजी रेडियो पश्चिमी का मुख्यालय अलीगढ़ में बनाने पर विचार रेडियो कार्मिकों की चरित्र पंजिका संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों के माध्यम से सत्यापित कराने पर भी हुई चर्चा लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की पुलिस व्यवस्था को और अधिक आधुनिक, सुरक्षित तथा तकनीक आधारित बनाने के लिए पुलिस रेडियो विभाग को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए हैं। रविवार को आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस की लोकेशन, मूवमेंट और संचार गतिविधियों की गोपनीयता सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा इसमें किसी भी प्रकार की तकनीकी सेंधमारी की संभावना नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि पुलिस रेडियो नेटवर्क को अत्याधुनिक तकनीकों से सशक्त किया जाए तथा दूरस्थ क्षेत्रों तक निर्बाध संचार व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।  मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी पुलिस थानों की सीसीटीवी फुटेज की लाइव मॉनिटरिंग के लिए एक सेंट्रल डैशबोर्ड विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे कानून व्यवस्था की निगरानी अधिक प्रभावी और पारदर्शी होगी।  मुख्यमंत्री ने बेहतर पर्यवेक्षण और निगरानी के लिए विभागीय ढांचे को और मजबूत बनाने के निर्देश दिए। इस क्रम में डीआईजी रेडियो पूर्वी का मुख्यालय आजमगढ़ तथा डीआईजी रेडियो पश्चिमी का मुख्यालय अलीगढ़ में स्थापित किए जाने पर विचार किया गया। साथ ही रेडियो कार्मिकों की चरित्र पंजिका संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों के माध्यम से सत्यापित कराने तथा वायरलेस सेटों को निष्प्रयोजन घोषित करने से पहले तकनीकी परीक्षण सुनिश्चित करने पर भी चर्चा की गई। बैठक में जानकारी दी गई कि गत वित्तीय वर्ष में संचार उपकरणों की खरीद के अंतर्गत थानों के लिए 275 फ्लैट बेस मास्ट, 5322 बैटरियां, 120 बैकपैक सेट तथा केबल, चार्जर और एंटीना सहित अन्य सहायक उपकरण खरीदे गए। आधुनिकीकरण योजना के अंतर्गत 50 पीए सिस्टम भी स्थापित किए गए। रिवर्स ऑक्शन प्रक्रिया अपनाने से उपकरणों की खरीद में लगभग 1.23 करोड़ रुपये की बचत हुई। वित्तीय वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना की समीक्षा के दौरान बताया गया कि 47 करोड़ रुपये की लागत से 12 जनपदों में डिजिटल वायरलेस सेवाएं शुरू करने की योजना है। इसके अतिरिक्त मापक उपकरण, पोर्टेबल संचार के लिए 5जी फिल्टर, दूरस्थ थानों के लिए सेल्फ सपोर्टेड मास्ट तथा पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ के लिए हैंड हेल्ड वायरलेस संचार व्यवस्था विकसित किए जाने का प्रस्ताव है। मुख्यमंत्री ने विभागीय मानव संसाधन प्रबंधन को भी तकनीक आधारित बनाने पर जोर देते हुए निर्देश दिए कि सभी कार्मिकों का डेटा मानव सम्पदा पोर्टल पर अद्यतन किया जाए तथा चरित्र पंजिका, अवकाश और अन्य सेवा संबंधी कार्य पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संचालित हों। उन्होंने कर्मचारियों को नवीनतम तकनीकों, कंप्यूटर प्रशिक्षण और संचार संदेशों की गुणवत्ता सुधार से संबंधित प्रशिक्षण दिए जाने पर भी विशेष बल दिया।

उत्तर प्रदेश में नई व्यवस्था लागू, योगी सरकार ने जिलों के लिए जारी किए सख्त निर्देश

 लखनऊ यूपी में लोगों की समस्याओं को लेकर सीएम योगी ने बड़ा फैसला लिया है. अब प्रदेश के सभी 75 जिलों में हर सप्ताह विकास खंड स्तर पर विशेष चौपाल लगाई जाएगी, जहां जमीन विवाद, घरेलू हिंसा, पुलिस शिकायत, अवैध वसूली और सरकारी योजनाओं से जुड़ी समस्याओं का तुरंत निस्तारण करने की कोशिश होगी।  सीएम योगी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक समीक्षा बैठक में अधिकारियों से दो टूक कहा कि जनता की समस्या का औपचारिक निस्तारण नहीं, बल्कि वास्तविक समाधान होना चाहिए. यानी अब सिर्फ फाइल बंद कर देना काफी नहीं होगा. अधिकारी को यह सुनिश्चित करना होगा कि शिकायतकर्ता को वास्तव में राहत मिली या नहीं. सरकार की योजना के मुताबिक हर विकास खंड में सप्ताह में एक दिन चौपाल लगेगी. इसमें जिले के बड़े अधिकारी भी मौजूद रहेंगे. लोगों की शिकायतें सीधे सुनी जाएंगी और मौके पर कार्रवाई की जाएगी।  किन समस्याओं पर होगा फोकस सरकार ने साफ किया है कि इन चौपालों में सिर्फ सामान्य शिकायतें नहीं, बल्कि रोजमर्रा की बड़ी परेशानियों पर खास फोकस रहेगा. इनमें प्रमुख रूप से राजस्व और जमीन विवाद, घरेलू हिंसा के मामले,  पुलिस द्वारा शिकायत दर्ज न करना,  अवैध वसूली की शिकायतें, सरकारी योजनाओं का लाभ न मिलना पेंशन, राशन, आवास और आयुष्मान जैसी योजनाओं से जुड़ी दिक्कतों पर सुनवाई होगी.  सरकार चाहती है कि पात्र लोगों तक योजनाओं का लाभ सीधे पहुंचे और उन्हें महीनों तक अधिकारियों के चक्कर न काटने पड़ें।  अफसरों को मिला सख्त संदेश बैठक में मुख्यमंत्री योगी ने अधिकारियों को साफ चेतावनी दी कि शिकायतों को हल्के में लेने की आदत अब नहीं चलेगी. उन्होंने कहा कि आईजीआरएस और सीएम हेल्पलाइन पर आने वाली हर शिकायत को गंभीरता से लिया जाए. कई बार देखा गया है कि अधिकारी सिर्फ जवाब अपलोड कर मामले को बंद कर देते हैं, जबकि जमीन पर समस्या जस की तस बनी रहती है. मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसा रवैया बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।  त्योहारों को लेकर भी सख्त निर्देश बैठक में सिर्फ चौपाल योजना ही नहीं, बल्कि आने वाले गंगा दशहरा और बकरीद को लेकर भी बड़े निर्देश दिए गए. मुख्यमंत्री ने कहा कि बकरीद पर सार्वजनिक स्थलों पर कुर्बानी की अनुमति नहीं होगी. प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी पर पूरी तरह रोक रहेगी और कुर्बानी सिर्फ तय स्थानों पर ही की जाएगी. उन्होंने साफ कहा कि किसी भी नई परंपरा को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा. इसके साथ ही नमाज को लेकर भी निर्देश दिए गए कि सड़क जाम करके नमाज पढ़ने की अनुमति किसी भी हालत में नहीं दी जाए. नमाज सिर्फ पारंपरिक स्थानों पर ही अदा होगी।  खुले में मांस बिक्री और अवैध स्लॉटर हाउस पर सख्ती सरकार ने त्योहारों के दौरान साफ-सफाई और कानून व्यवस्था को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है. मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि खुले में मांस की बिक्री नहीं होनी चाहिए. अवैध स्लॉटर हाउस किसी भी हालत में संचालित न हों. साथ ही वैध बूचड़खानों में भी तय क्षमता से अधिक पशु रखने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है. बैठक में अलीगढ़, बिजनौर, सहारनपुर, रामपुर और संभल जैसे संवेदनशील जिलों के अधिकारियों से अलग से बात की गई. मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्षों की घटनाओं का अध्ययन किया जाए और संभावित उपद्रवियों की सूची पहले से तैयार रखी जाए. जरूरत पड़ने पर निषेधात्मक कार्रवाई भी की जाए. साथ ही सभी जिलों में पीस कमेटी की बैठकों और फ्लैग मार्च बढ़ाने के निर्देश दिए गए. साथ ही तेज गर्मी को देखते हुए श्रद्धालुओं के लिए छायादार स्थान और मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए।  बिना नंबर प्लेट वाहनों पर चलेगा अभियान बैठक में सड़क सुरक्षा और अपराध नियंत्रण पर भी चर्चा हुई. मुख्यमंत्री ने बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों के खिलाफ अभियान चलाने के आदेश दिए. इसके अलावा अवैध खनन पर भी सरकार ने सख्त रुख दिखाया. टास्क फोर्स बनाकर कार्रवाई करने और किसी भी दबाव में न आने के निर्देश दिए गए. मुख्यमंत्री ने कहा कि जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई हो, लेकिन आम नागरिकों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए।  भू-माफियाओं पर और सख्त होगी कार्रवाई सरकार ने भू-माफियाओं के खिलाफ अभियान तेज करने के भी निर्देश दिए हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि अवैध कब्जा करने वालों पर कार्रवाई हो, लेकिन किसी भी आम नागरिक के वैध अधिकार प्रभावित नहीं होने चाहिए. इसी दौरान जिन जिलों में मुख्य चिकित्सा अधिकारी की नियुक्ति नहीं है, वहां जल्द तैनाती करने के भी निर्देश दिए गए. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई इस बैठक में प्रदेश के सभी मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, पुलिस कमिश्नर, आईजी, एसएसपी और एसपी मौजूद रहे। 

योगी सरकार का बड़ा कदम, डिजिटल ट्रेनिंग से हाईटेक बन रहे शिक्षक

डिजिटल प्रशिक्षण से शिक्षकों को हाईटेक बना रही योगी सरकार – निष्ठा प्रशिक्षण 2026-27 का पहला चरण शुरू, दीक्षा पोर्टल के माध्यम से होगा ऑनलाइन प्रशिक्षण – प्री-प्राइमरी से कक्षा 12 तक के शिक्षकों को नई शिक्षा पद्धति, एफएलएन और डिजिटल सुरक्षा का मिलेगा प्रशिक्षण – तकनीक आधारित शिक्षक प्रशिक्षण मॉडल को जमीनी स्तर तक मजबूत कर रही योगी सरकार लखनऊ योगी सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए लगातार प्रयासरत है। शिक्षकों को नई तकनीक, आधुनिक शिक्षण पद्धति और डिजिटल दक्षता से लैस करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। प्रदेश सरकार ने सत्र 2026-27 के लिए निष्ठा प्रशिक्षण कार्यक्रम का पहला चरण दीक्षा पोर्टल के माध्यम से शुरू किया गया है, जिसके माध्यम से प्री-प्राइमरी से लेकर कक्षा 12 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों को ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जाएगा। योगी सरकार की यह पहल दर्शाती है कि अब प्रदेश में शिक्षा सुधार केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षकों की क्षमता वृद्धि और डिजिटल दक्षता को भी उतनी ही प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार का फोकस अब तकनीक आधारित शिक्षक प्रशिक्षण मॉडल को जमीनी स्तर तक मजबूत करने पर है, ताकि कक्षा शिक्षण को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। निष्ठा कार्यक्रम के अंतर्गत शिक्षकों का नामांकन 21 मई 2026 से शुरू हो गया है, जबकि नामांकन की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। प्रशिक्षण पाठ्यक्रम 15 सितंबर 2026 तक संचालित होंगे। शासन स्तर से सभी बीएसए, डायट प्राचार्य, बीईओ, एसआरजी, एआरपी और डायट मेंटर्स को शिक्षकों का शत-प्रतिशत नामांकन और प्रशिक्षण सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं। तीन श्रेणियों में होगा प्रशिक्षण निष्ठा प्रशिक्षण कार्यक्रम को तीन प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है। पहली श्रेणी ईसीसीई की है, जिसमें प्री-प्राइमरी से कक्षा 2 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों को प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा और बुनियादी सीखने की तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। दूसरी श्रेणी एफएलएन की है, जिसके अंतर्गत कक्षा 3 से 5 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों को भाषा और गणितीय दक्षता आधारित शिक्षण पद्धति से जोड़ा जाएगा तथा तीसरी श्रेणी में कक्षा 6 से 12 तक के शिक्षकों के लिए एडवांस कोर्स शामिल किए गए हैं। इनमें साइबर हाइजीन, ई-वेस्ट के खतरे, एक्शन रिसर्च और 'कैच द रेन' जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। डिजिटल प्लेटफॉर्म से मजबूत हो रहा शिक्षक प्रशिक्षण योगी सरकार पहले ही स्मार्ट क्लास, मिशन प्रेरणा, निपुण भारत मिशन और तकनीक आधारित मॉनिटरिंग व्यवस्था को तेजी से आगे बढ़ा रही है। अब दीक्षा पोर्टल के माध्यम से शिक्षक प्रशिक्षण को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़कर उसे और अधिक प्रभावी तथा पारदर्शी बनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य शिक्षकों को नई शिक्षा नीति, गतिविधि आधारित शिक्षण, डिजिटल सुरक्षा और व्यावहारिक शिक्षा मॉडल से जोड़ना है, ताकि बच्चों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके। शिक्षा सुधार के साथ शिक्षक दक्षता पर फोकस योगी सरकार की रणनीति साफ है कि जब शिक्षक तकनीक और आधुनिक शिक्षण पद्धति में दक्ष होंगे, तभी परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की सीखने की क्षमता और शैक्षिक गुणवत्ता में व्यापक सुधार दिखाई देगा। यही कारण है कि अब प्रदेश में शिक्षक प्रशिक्षण को केवल औपचारिक प्रक्रिया न रखकर डिजिटल और परिणाम आधारित मॉडल में बदला जा रहा है, जिससे शिक्षा व्यवस्था को जमीनी स्तर पर नई मजबूती मिल सके।