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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में औरैया का वृद्धाश्रम बना आत्मनिर्भरता का केंद्र

सेवा, सम्मान और स्वाभिमान का संगम: योगी सरकार की पहल से वृद्धाश्रम बना आत्मनिर्भरता का केंद्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में औरैया का वृद्धाश्रम बना आत्मनिर्भरता का केंद्र आराध्या वृद्ध महिला स्वयं सहायता समूह की माताएं पूजा सामग्री, गुलाब जल और मुंगौड़ी बनाकर बढ़ा रहीं स्वावलंबन की राह वृद्ध पुरुष स्वयं सहायता समूह के सदस्य गोसेवा और ऑर्गेनिक खेती के जरिए पेश कर रहे मिसाल लखनऊ उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में वृद्धाश्रम केवल बेघर और निराश्रित बुजुर्गों के लिए आश्रय स्थल भर नहीं रह गए हैं, बल्कि सेवा, सम्मान और स्वाभिमान के साथ आत्मनिर्भरता के केंद्र के रूप में भी नई पहचान बना रहे हैं। इसका सबसे प्रेरणादायक उदाहरण औरैया जिले का वृद्धाश्रम है, जहां बुजुर्ग अपने अनुभव, हुनर और श्रम के बल पर स्वावलंबन की नई कहानी लिख रहे हैं। बुजुर्ग अपने कार्यों के माध्यम से दे रहे आत्मविश्वास और स्वाभिमान का संदेश  औरैया वृद्धाश्रम में गठित आराध्या वृद्ध महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी माताएं पूजा सामग्री, गुलाब जल और मुंगौड़ी तैयार कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। जीवन के उस पड़ाव में, जब अक्सर लोग स्वयं को समाज से अलग-थलग महसूस करने लगते हैं, ये महिलाएं अपने कार्यों के माध्यम से आत्मविश्वास और स्वाभिमान का संदेश दे रही हैं। वहीं, वृद्धाश्रम में गठित वृद्ध पुरुष स्वयं सहायता समूह के सदस्य गोसेवा और ऑर्गेनिक खेती के जरिए समाज के सामने प्रेरणादायक मिसाल पेश कर रहे हैं। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देते हुए वे न केवल उत्पाद तैयार कर रहे हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश भी दे रहे हैं। योगी सरकार में मिल रहा 6316 बुजुर्गों को सुरक्षा और सहारा   मुख्यमंत्री योगी के मार्गदर्शन में समाज कल्याण विभाग का उद्देश्य बुजुर्गों को केवल संरक्षण देना नहीं, बल्कि उन्हें ऐसा वातावरण उपलब्ध कराना है, जहां वो अपनी क्षमताओं के अनुरूप सक्रिय भूमिका निभा सकें। प्रदेश के 75 जिलों में 6316 बुजुर्गों को सुरक्षा और सहारा मिल रहा है। इन सभी वृद्धाश्रमों में बुजुर्गों को सुरक्षित आवास, पौष्टिक भोजन, वस्त्र, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। साथ ही योग, भजन-कीर्तन, मनोरंजन और सामूहिक संवाद जैसी गतिविधियों के माध्यम से उन्हें मानसिक रूप से भी सक्रिय बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है। समाज कल्याण विभाग के प्रयासों से वृद्धाश्रमों में रहने वाले बुजुर्गों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। जो बुजुर्ग कभी उपेक्षा और असहाय का जीवन जीने को विवश थे, वे आज सम्मान और आत्मविश्वास के साथ समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन रहे हैं। बुजुर्गों के जीवन में आशा, आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का होता है संचार  योगी सरकार की पहल केवल सुविधाएं उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं होती, बल्कि बुजुर्गों  के जीवन में आशा, आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का संचार भी करती है। औरैया का यह मॉडल इस बात का प्रमाण है कि अवसर और प्रोत्साहन मिलने पर बुजुर्ग भी समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। इसके अलावा वृद्धाश्रमों की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के लिए समय-समय पर निरीक्षण, समीक्षा और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है।    संजीव सिंह, निदेशक, समाज कल्याण विभाग

CM का बड़ा ऐलान: हर शहर और गांव को ग्रीन मोबिलिटी इलेक्ट्रिक सेवा से जोड़ेंगे

हर शहर, गांव को ग्रीन मोबिलिटी इलेक्ट्रिक सेवा से जोड़ेंगेः मुख्यमंत्री सीएम योगी ने नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यीडा क्षेत्र में जेवर एयरपोर्ट तक संचालित होने वाली 45 इलेक्ट्रिक व 3 हाइड्रोजन बसों को किया फ्लैग ऑफ नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो का भी किया शुभारंभ किया सीएम योगी ने 15 जून तक 110 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन, मांग के अनुरूप 500 तक बढ़ाई जाएगी इलेक्ट्रिक बसों की संख्या लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को ग्रीन मोबिलिटी व सस्टेनेबल डेवलपमेंट का विजन दिया है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश सरकार आने वाले समय में हर शहर-गांव को पेट्रोल-डीजल मुक्त ग्रीन मोबिलिटी इलेक्ट्रिक सेवा से जोड़ेगी। हर व्यक्ति को बेहतर, आरामदायक व पर्यावरण अनुकूल परिवहन सेवा मिलने पर जोर देते हुए सीएम ने कहा कि प्रदेश में परिवहन विभाग का बेड़ा बड़ा हो रहा है, उनके कार्य भी बड़े दिखने चाहिए। सीएम योगी ने शुक्रवार को नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यीडा क्षेत्र में जेवर एयरपोर्ट तक संचालित होने वाली उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की 45 इलेक्ट्रिक बसों व 3 हाइड्रोजन बसों को लखनऊ से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये फ्लैग ऑफ किया। उन्होंने इस अवसर पर नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो का भी शुभारंभ किया। 15 जून से संचालित होने जा रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट  अपने संबोधन में सीएम ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ पश्चिम एशिया में चल रहे गतिरोध बड़ी चुनौतियां हैं। इनके कारण दुनिया वायु प्रदूषण, अतिवृष्टि, अनावृष्टि, ओलावृष्टि का सामना कर रही है। दुनिया पर थोपे गए युद्धों की कीमत पूरी मानवता चुका रही है। पीएम के विजन को धरातल पर उतारने के लिए 15 जून से भारत के सबसे बड़े हवाई अड्डे (नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट) का संचालन प्रारंभ होने जा रहा है। देश के सबसे बड़े आईटी एंड इलेक्ट्रॉनिक हब तथा सुचारु वायुसेवा की दृष्टि से यात्रियों, नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तीनों अथॉरिटी (नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यीडा) ने परिवहन निगम के माध्यम से यह सेवा प्रारंभ की है। यह नेट जीरो लक्ष्य प्राप्त करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। बड़े औद्योगिक केंद्र के रूप में उभरे नोएडा, ग्रेनो व यीडा  मुख्यमंत्री ने कहा कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना अथॉरिटी आईटी-इलेक्ट्रॉनिक्स, डेटा सेंटर, स्टार्टअप्स, सेमीकंडक्टर समेत अन्य औद्योगिक गतिविधियों के बड़े केंद्र के रूप में उभरी हैं। दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियों को वहां लाने के साथ ही पर्यावरण अनुकूल परिवहन समय की मांग है। वहां कुछ क्षेत्रों में मेट्रो का संचालन भी हो रहा है, लेकिन लास्ट माइल कनेक्टिविटी की दृष्टि से इलेक्ट्रिक बस का संचालन मील का पत्थऱ साबित होने जा रहा है। 15 जून तक तीनों अथॉरिटी द्वारा 110 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन प्रारंभ होगा। मांग के अनुरूप इसमें क्रमिक बढ़ोतरी कर 500 बसों का संचालन भी तीनों अथॉरिटी के माध्यम से किया जाएगा।  नए भारत के नए उत्तर प्रदेश में दिख रहा परिवर्तन सीएम योगी ने 2017 के पहले और इससे बाद के उत्तर प्रदेश का फर्क समझाया। कहा कि नए भारत के नए उत्तर प्रदेश में परिवर्तन दिख रहा है और 9 वर्ष में यह परिवर्तन डबल इंजन सरकार ने किया है। 2017 से पहले टूटी सड़कें, नदारद बिजली, असुरक्षा, अराजकता व अव्यवस्था के वातावरण में नागरिकों के सामने पहचान का संकट खड़ा था, तब उत्तर प्रदेश में निवेश की बात दिवास्वप्न थी। 2017 के बाद का उत्तर प्रदेश विश्वस्तरीय रोड, एयर कनेक्टिविटी के लिए जाना जाता है। यूपी के पास हाईवे, एक्सप्रेसवे समेत 4 लाख किमी का रोड नेटवर्क है। इंटर स्टेट कनेक्टिविटी सबसे बेहतरीन है। 9 वर्ष पहले जो यूपी बदहाल सड़कों के लिए जाना जाता था, आज उसने एक्सप्रेसवे प्रदेश के रूप में पहचान बनाई है।  सीएम ने कहा कि 2019 में प्रयागराज कुंभ के दौरान सरकार ने कैबिनेट में गंगा एक्सप्रेसवे की घोषणा की थी। मेरठ से प्रयागराज के बीच देश के सबसे बड़े गंगा एक्सप्रेसवे पर यात्रा करने वालों को आश्चर्य होता है कि यह वही उत्तर प्रदेश है, जहां कभी सड़क व गड्ढे में अंतर का पता नहीं लगता था। पूर्वांचल, बुंदेलखंड, गोरखपुर लिंक, दिल्ली-मेरठ 12 लेन एक्सप्रेसवे और शीघ्र ही लोकार्पित होने वाला लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे नए यूपी की नई पहचान बने हैं।  अब यूपी में 5 इंटरनेशनल एयरपोर्ट सीएम ने यूपी की बेहतर एयर कनेक्विटी का जिक्र करते हुए कहा कि प्रयागराज में 11 महीने में एयरपोर्ट बनकर तैयार हुआ। जेवर में देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बन गया है। कभी त्रेतायुग में भगवान श्रीराम पुष्पक विमान से अयोध्या आए थे, लेकिन इसके बाद अयोध्यावासियों को कभी वायुसेवा प्राप्त नहीं हुई। अयोध्या हजारों वर्ष तक उपेक्षित और आजादी के बाद भी अपमानित रही। आज वहां महर्षि वाल्मीकि को समर्पित एयरपोर्ट संचालित हो रहा है। उप्र में लखनऊ, अयोध्या, काशी, कुशीनगर व नोएडा समेत 5 इंटरनेशनल अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट हैं। नोएडा एयरपोर्ट यात्रियों के साथ ही कार्गो-एमआरओ हब के रूप में खुद को स्थापित करने जा रहा है।  17 नगर निगमों में 700 से अधिक इलेक्ट्रिक बसों का संचालन सीएम ने कहा कि देश के 20 में से यूपी के 7 शहरों में मेट्रो का संचालन हो रहा है। 17 नगर निगमों में 700 से अधिक इलेक्ट्रिक बसें संचालित कर रहे हैं। नोएडा में सरकार आज यह सुविधा प्रारंभ कर रही है। पहले इलेक्ट्रिक बसें बाहर से मंगानी पड़ती थीं, लेकिन अब टाटा मोटर्स और अशोक लीलैंड हिंदुजा ग्रुप ने लखनऊ में इलेक्ट्रिक बस के दो-दो मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित कर यह सुविधा देनी प्रारंभ की है। यीडा में 3 हाइड्रोजन बसों का भी होगा संचालन  मुख्यमंत्री ने कहा कि आज से यमुना अथॉरिटी में तीन अन्य हाइड्रोजन बसें भी संचालित करने जा रहे हैं। यीडा को ये बसें एनटीपीसी ने उपलब्ध कराई हैं। इनमें ग्राउंड या सरफेस वाटर नहीं, बल्कि सीवर वाटर का इस्तेमाल कर हाइड्रोजन का निर्माण होगा। ग्रीन हाइड्रोजन मोबिलिटी अभिनव अवधारणा बन चुकी है। इन बसों का संचालन भी जेवर एयरपोर्ट के पास करेंगे। वायु प्रदूषण को कम करने, जहरीले वातावरण से बच्चों, बुजुर्गों, बीमारों को बचाने में इनकी बड़ी भूमिका होगी।  नेट जीरो लक्ष्य के प्रति समर्पित सरकार सीएम ने कहा कि प्रदेश सरकार ने नेट जीरो लक्ष्य प्राप्त करने के लिए विश्व बैंक की मदद से 2741 करोड़ रुपये से उत्तर प्रदेश क्लीन एयर मैनेजमेंट … Read more

मुख्यमंत्री ने विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को दिया स्वीकृति पत्र, चेक व चाबी

मुख्यमंत्री ने विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को दिया स्वीकृति पत्र, चेक व चाबी प्रदर्शनी व फूड कार्ट का शुभारंभ भी किया सीएम योगी ने वाराणसी  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर गिरिजा देवी सांस्कृतिक संकुल चौकाघाट में आयोजित प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। यहां कृषि, उद्यान, समाज कल्याण, पर्यटन, पंचायती राज, मत्स्य, एपीडा, खादी व ग्रामोद्योग समेत अनेक विभागों ने उपलब्धियों पर प्रदर्शनी लगाई। इस आयोजन में 'एक जनपद-एक व्यंजन' (ओडीओसी) योजना के तहत बनारसी लस्सी, तिरंगा बर्फी, लौंगलता व पान आदि को भी प्रदर्शित किया गया। विशेष चिकित्सा शिविर भी लगाया गया। सीएम योगी ने यहां जनकल्याण शिविर, स्ट्रीट वेंडर तथा कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र प्रदान किया।  मुख्यमंत्री ने किया फूड कार्ट का शुभारंभ  मुख्यमंत्री ने ओडीओसी के अंतर्गत फूड कार्ट का शुभारंभ भी किया। मुख्यमंत्री ने बच्चों को चॉकलेट व आमजन में मिष्ठान वितरित किया। सीएम योगी ने यहां स्वास्थ्य परीक्षण करा रहे लोगों से भी संवाद किया।  मुख्यमंत्री के हाथों इन्हें मिला चेक, चाबी, प्रमाण पत्र  👉 प्रमिला देवी- स्ट्रीट वेंडर- पथ विक्रय प्रमाण पत्र  👉 राजू- स्ट्रीट वेंडर- पथ विक्रय प्रमाण पत्र 👉 दीपक बरनवाल- स्ट्रीट वेंडर- पथ विक्रय प्रमाण पत्र 👉 बेबी मौर्या- पीएम स्वनिधि योजना- 50 हजार रुपये का चेक  👉 कन्हैया- पीएम स्वनिधि योजना- क्रेडिट कार्ड  👉 रोशनी कुमारी- मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान- 5 लाख का चेक  👉 याशिका सिंह- मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान- 2.50 लाख का चेक   👉 ललिता- विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना- सिलाई मशीन व प्रमाण पत्र   👉 खुशबू जायसवाल- विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना- सिलाई मशीन व प्रमाण पत्र

CM योगी की घोषणा पर तेजी से कार्रवाई, टेक्सटाइल पार्क के लिए जमीन ट्रांसफर के आदेश, निवेशकों के लिए अवसर

 बरेली जिले में टेक्सटाइल पार्क का इंतजार जल्द पूरा होने वाला है। मुख्यमंत्री ने जहां बरेली समेत पांच शहरों में टेक्सटाइल पार्क की घोषणा की है, वही मिल की भूमि का टेक्सटाइल पार्क के लिए हस्तांतरण का आदेश भी जारी हो गया है। अभी तक यह भूमि सहकारी कताई मिल संघ के पास है। खास बात यह है कि कैबिनेट के आदेश पर भूमि हस्तांतरण निश्शुल्क रूप से किया जाएगा। इसके लिए सहकारी कताई मिल की ओर से भी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क योजना में एकीकृत टेक्सटाइल पार्क का लाभ बरेली को भी मिलेगा। जिले में लंबे समय से इसका इंतजार किया जा रहा था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को इसकी घोषणा कर अंतिम मुहर भी लगा दी। प्रस्तावित पार्क बहेड़ी से लगभग 10 किलोमीटर दूर नानकपुरी-टांडा मार्ग पर ग्राम सैदपुर खुर्द स्थित उत्तर प्रदेश सहकारी कताई मिल परिसर में विकसित किया जाएगा। करीब 79.61 एकड़ क्षेत्रफल में बनने वाला यह पार्क प्रदेश के वस्त्र एवं परिधान उद्योग को नई गति देने के साथ रोजगार सृजन का बड़ा केंद्र बनेगा। हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग की ओर से तैयार पूर्व-व्यवहार्यता रिपोर्ट के अनुसार पार्क का विकास सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) माडल या नोडल एजेंसी के माध्यम से किया जा सकेगा। इसके लिए लगभग 250 करोड़ रुपये की लागत का अनुमान लगाया गया है तथा योजना की अवधि पांच वर्ष निर्धारित की गई है। पार्क में वस्त्र उद्योगों के लिए प्रतिस्पर्धी दरों पर भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही रेडीमेड प्लग एंड प्ले शेड, आंतरिक सड़कें, विद्युत वितरण व्यवस्था, जल एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन, कामन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी), गोदाम, लाजिस्टिक सुविधाएं, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास केंद्र, श्रमिक हास्टल, स्वास्थ्य सुविधाएं और सामान्य प्रसंस्करण केंद्र विकसित किए जाएंगे। हथकरघा व वस्त्र उद्योग के सहायक आयुक्त सर्वेश शुक्ला ने बताया कि सहकारी कताई मिल संघ की ओर से पुराना भवन ध्वस्त करने की निविदा की गई है। भवन ध्वस्त होने के साथ ही मौके से पुरानी मशीनरी को भी हटाया जाएगा। इसके बाद बाउंड्रीवाल आदि बनाने का कार्य शुरू किया जाएगा। इन कार्यों में अभी एक महीने से अधिक समय लग सकता है। बिजली, पानी, सड़क का मांगा प्रस्ताव प्रस्तावित टेक्सटाइल पार्क के विकास के लिए हथकरघा व वस्त्रोद्योग विभाग की ओर से कार्य शुरू कर दिया गया है। इसके लिए बिजली, पानी आपूर्ति व सड़क निर्माण का प्रस्ताव संबंधित विभागों से मांगा गया है। इसके लिए विभाग की ओर से पत्र तैयार कर योजना की जानकारी देते हुए संबंधित विभागों को कार्ययोजना बनाने के लिए कहा गया है। पार्क में सहायक उद्योगों को मिलेगा स्थान पार्क में केवल वस्त्र निर्माण इकाइयां ही नहीं बल्कि सहायक उद्योगों को भी स्थान मिलेगा। इनमें बटन, जिपर, फास्टनर, ट्रिम्स, लेबल एवं टैग निर्माण, पैकेजिंग सामग्री, तकनीकी वस्त्र, गोदाम तथा अन्य संबंधित उद्योग शामिल होंगे। योजना के अनुसार पार्क में न्यूनतम 10 औद्योगिक इकाइयों की स्थापना अनिवार्य होगी और किसी एक इकाई को कुल औद्योगिक भूमि का 40 प्रतिशत से अधिक आवंटित नहीं किया जाएगा। कौशल विकास, प्रयोगशाला, प्रदर्शनी पार्क निर्माण से पहले पूर्व-व्यवहार्यता रिपोर्ट में प्रशासनिक भवन, अनुसंधान एवं विकास केंद्र, कौशल विकास केंद्र, गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशाला, विपणन एवं प्रदर्शनी केंद्र, खुदरा सुविधाएं, ट्रक पार्किंग, औद्योगिक श्रमिक आवास, कामन कैंटीन, फायर स्टेशन और हरित क्षेत्र जैसी व्यवस्थाओं का भी प्रस्ताव किया गया है। इससे एक ही जगह सभी सुविधाएं मिल सकेंगी। स्थापित होने वाली इकाइयों पर मिलेगा वित्तीय प्रोत्साहन उत्तर प्रदेश सरकार की टेक्सटाइल एवं गारमेंटिंग नीति-2022 के अंतर्गत पार्क में स्थापित होने वाली इकाइयों को विशेष वित्तीय प्रोत्साहन भी दिए जाएंगे। इसके तहत प्लांट एवं मशीनरी पर 25 प्रतिशत पूंजी अनुदान, ऋण पर ब्याज की 60 प्रतिशत प्रतिपूर्ति तथा अन्य अनुमन्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी। यदि पार्क का विकास पीपीपी माडल पर होता है तो राज्य सरकार मास्टर डेवलपर को परियोजना लागत का 50 प्रतिशत पूंजी अनुदान प्रदान करेगी। यह अनुदान अधिकतम 50 लाख रुपये प्रति एकड़ की सीमा तक होगा और छह किस्तों में जारी किया जाएगा। वहीं, यदि पार्क का विकास सीधे नोडल एजेंसी से किया जाता है तो सरकार परियोजना लागत के बराबर ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराएगी। योजना के कार्यान्वयन के लिए उत्तर प्रदेश टेक्सटाइल एवं अपैरल औद्योगिक विकास प्राधिकरण को नोडल एजेंसी बनाया जाएगा। यह एजेंसी भूमि चयन, व्यवहार्यता अध्ययन, मास्टर प्लान, भूमि आवंटन नीति तथा परियोजना के संचालन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी निभाएगी। उद्योग स्थापना के लिए उद्यमियों से मांगे आवेदन पार्क में उद्योग स्थापित करने के इच्छुक उद्यमियों से विभाग ने आनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस संबंध में सहायक आयुक्त, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग बरेली परिक्षेत्र सर्वेश कुमार शुक्ला को नोडल अधिकारी नामित किया गया है। विभाग को उम्मीद है कि इस परियोजना के माध्यम से बरेली क्षेत्र उत्तर प्रदेश के उभरते हुए टेक्सटाइल हब के रूप में अपनी पहचान स्थापित करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि बहेड़ी में प्रस्तावित यह पार्क बरेली मंडल के औद्योगिक विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा। इससे विशेष रूप से महिलाओं और कुशल श्रमिकों के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे तथा प्रदेश के वस्त्र उद्योग को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में सहायता मिलेगी।

महिलाओं के लिए बड़ी राहत, यूपी सरकार देगी आवास और स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ

लखनऊ  महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है. सरकार ट्रिपल तलाक और एसिड अटैक जैसी गंभीर सामाजिक कुरुतियों और आपराधिक कृत्यों से प्रभावित महिलाओं को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने के लिए उन्हें आवास और हेल्थ इंश्योरेंस कवर प्रदान करने की तैयारी कर रही है. योगी सरकार इन महिलाओं को प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना का लाभ देने की दिशा में काम कर रही है।  इसके साथ ही निराश्रित महिलाओं को भी इन योजनाओं के दायरे में शामिल करने की तैयारी शुरू कर दी गई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर महिला कल्याण विभाग ने इस संबंध में कार्रवाई तेज कर दी है. विभाग ट्रिपल तलाक और एसिड अटैक से प्रभावित महिलाओं के साथ-साथ निराश्रित महिलाओं का विस्तृत और सत्यापित डेटा एकत्र कर रहा है, ताकि पात्र लाभार्थियों को प्राथमिकता के आधार पर सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जा सके. सरकारी स्तर पर आवश्यक दिशा-निर्देशों और शासनादेश को तैयार करने की प्रक्रिया भी जारी है।  प्राप्त आंकड़ों के आधार पर पात्र महिलाओं की पहचान कर उन्हें विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा. योगी सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र महिला जानकारी के अभाव या प्रक्रियागत जटिलताओं के कारण सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे. इसके लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया जा रहा है. हाल ही में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश दिया था।  उन्होंने कहा था कि ट्रिपल तलाक या एसिड अटैक जैसी परिस्थितियों का सामना कर चुकी और जिनके पास स्थायी आवास नहीं है, ऐसी महिलाओं को प्रधानमंत्री आवास योजना अथवा मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत पक्का घर उपलब्ध कराया जाए. मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए हैं कि इन महिलाओं और उनके परिवारों को आयुष्मान भारत योजना और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना से जोड़ा जाए, ताकि उन्हें गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सके।  बता दें कि एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं को लंबे समय तक इलाज, कई सर्जरी और पुनर्वास की आवश्यकता होती है. वहीं ट्रिपल तलाक से प्रभावित अनेक महिलाएं आर्थिक और सामाजिक असुरक्षा का सामना करती हैं. ऐसे में आवास और स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराकर योगी सरकार उनके जीवन को अधिक सुरक्षित, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयासरत है। 

छात्राओं के लिए बड़ी सौगात! रानी लक्ष्मीबाई योजना के तहत मुफ्त स्कूटी देगी योगी सरकार

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में पढ़ाई कर रही छात्राओं के लिए एक बेहद शानदार खबर सामने आई है। प्रदेश सरकार स्नातक प्रथम वर्ष की मेधावी छात्राओं को अपनी तरफ से मुफ्त स्कूटी देने की एक बड़ी योजना पर काम कर रही है। इस महत्वाकांक्षी पहल का नाम 'रानी लक्ष्मी बाई योजना' रखा गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य की बेटियों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। इस योजना के आने से छात्राओं को कॉलेज आने-जाने में होने वाली दिक्कतों से हमेशा के लिए आजादी मिल जाएगी। मेरिट के आधार पर चमकेगी मेधावियों की किस्मत सरकार की इस योजना का लाभ सीधे तौर पर उन छात्राओं को मिलेगा जो पढ़ाई-लिखाई में अव्वल हैं। स्कूटी देने के लिए एक पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाई जाएगी। योजना के नियमों के मुताबिक, छात्राओं को उनके स्नातक प्रथम वर्ष में प्राप्त अंकों के आधार पर शॉर्टलिस्ट किया जाएगा। इन अंकों के आधार पर एक राज्य स्तरीय मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी, और जो छात्राएं इस मेरिट में स्थान बनाएंगी, उन्हें सरकार की तरफ से मुफ्त स्कूटी का तोहफा दिया जाएगा। पहले चरण में 50 हजार छात्राओं को मिलेगी रफ्तार उत्तर प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में इस समय कुल मिलाकर लगभग नौ लाख छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए सरकार इस योजना को चरणों में लागू करने जा रही है। उच्च शिक्षा विभाग ने जो खाका तैयार किया है, उसके तहत पहले चरण में राज्य की 50 हजार सबसे मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने की पूरी तैयारी कर ली गई है। जल्द ही मुख्यमंत्री के सामने होगा प्रजेंटेशन इस योजना को धरातल पर उतारने और इसका लाभ जल्द से जल्द छात्राओं तक पहुंचाने के लिए उच्च शिक्षा विभाग दिन-रात काम कर रहा है। विभाग की ओर से इस योजना का पूरा प्रस्ताव और गाइडलाइंस तैयार कर ली गई हैं। बहुत जल्द ही उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने इस पूरी योजना का एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण करेंगे। मुख्यमंत्री की हरी झंडी मिलते ही इस योजना के तहत आवेदन करने की प्रक्रिया और तारीखों की घोषणा कर दी जाएगी। उत्तर प्रदेश के विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों में स्नातक स्तर पर करीब 9 लाख छात्राएं नामांकित हैं। इन सभी छात्राओं में से कड़ी स्क्रीनिंग और मेरिट लिस्ट के जरिए ही भाग्यशाली मेधावियों का चुनाव किया जाएगा। इस योजना का मुख्य उद्देश्य न केवल बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना है, बल्कि कॉलेज आने-जाने में उन्हें आत्मनिर्भर और सुरक्षित बनाना भी है।

पारंपरिक कौशल और आधुनिक तकनीक के समन्वय से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था: मुख्यमंत्री

वस्त्रोद्योग के लिए नई कौशल विकास व्यवस्था तैयार हो, ग्रामोद्योग और माटीकला क्षेत्र में रोजगार की संभावनाओं को मिले नई गति : मुख्यमंत्री पारंपरिक कौशल और आधुनिक तकनीक के समन्वय से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था: मुख्यमंत्री उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप तैयार होगा कुशल मानव संसाधन, प्रशिक्षण और रोजगार को जोड़ने पर जोर ग्रामीण युवाओं, महिलाओं और पारंपरिक कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश वित्तीय सहायता, कौशल विकास, तकनीकी उन्नयन और विपणन सुविधाओं को एकीकृत रूप से विकसित किया जाए लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वस्त्र क्षेत्र की वर्तमान आवश्यकताओं और भविष्य की संभावनाओं के अनुरूप व्यापक कौशल विकास कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र में निवेश, उत्पादन और रोजगार की दृष्टि से देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। ऐसे में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि उद्योगों को समय पर प्रशिक्षित और दक्ष मानव संसाधन उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि कौशल विकास कार्यक्रमों का लक्ष्य केवल प्रशिक्षण तक सीमित न होकर युवाओं को रोजगार और आजीविका से जोड़ना होना चाहिए। बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार समर्थ योजना के अंतर्गत अब तक 2.28 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है, जबकि 1.60 लाख से अधिक प्रशिक्षार्थियों को रोजगार से जोड़ा गया है। महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही है और कुल प्रशिक्षार्थियों में उनका हिस्सा 87 प्रतिशत से अधिक है। वहीं उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के माध्यम से भी बड़ी संख्या में युवाओं को वस्त्र क्षेत्र से संबंधित विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण और प्रमाणन प्रदान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वस्त्र क्षेत्र में तकनीकी बदलाव अत्यंत तेजी से हो रहे हैं। ऑटोमेशन, आधुनिक मशीनरी तथा टेक्निकल टेक्सटाइल्स जैसे नए क्षेत्रों के विस्तार को देखते हुए प्रशिक्षण कार्यक्रमों को समयानुकूल बनाया जाना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि उद्योगों की वास्तविक आवश्यकताओं का आकलन करते हुए प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अधिक उपयोगी और रोजगारपरक बनाया जाए। बैठक में अधिकारियों ने वस्त्र क्षेत्र के लिए प्रस्तावित कौशल विकास व्यवस्था की रूपरेखा प्रस्तुत की। इसमें उद्योगों, प्रशिक्षण संस्थानों तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए प्रशिक्षण प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया। साथ ही प्रशिक्षण की गुणवत्ता, पारदर्शिता, निगरानी और रोजगार परिणामों को मजबूत करने के लिए प्रौद्योगिकी आधारित व्यवस्थाओं के विकास पर भी चर्चा हुई। माटीकला क्षेत्र की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह क्षेत्र प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण रोजगार से सीधे जुड़ा हुआ है। मिट्टी से निर्मित उत्पाद पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ बड़ी संख्या में कारीगर परिवारों की आजीविका का आधार भी हैं। उन्होंने माटीकला उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देने, कारीगरों को आधुनिक डिजाइन, सोलर चाक उपलब्ध कराने, नई तकनीक, बेहतर उपकरण, वित्तीय सहायता और विपणन सुविधाओं से जोड़ने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना के अंतर्गत वर्ष 2019-20 से वर्ष 2025-26 तक 1,331 इकाइयों की स्थापना की गई है। इन इकाइयों में 3,302.37 लाख रुपये का पूंजी निवेश हुआ है तथा 557.18 लाख रुपये की मार्जिन मनी सहायता उपलब्ध कराई गई है। माटीकला महोत्सवों, प्रदर्शनियों और मेलों के माध्यम से कारीगरों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन और विपणन के अवसर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वर्ष 2025-26 में 300 इकाइयों की स्थापना के लक्ष्य के सापेक्ष बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री ने लंबित ऋण प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण और लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ समयबद्ध रूप से पहुंचाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि पारंपरिक उद्योगों को केवल संरक्षण की नहीं, बल्कि नवाचार, ब्रांडिंग, डिजिटलीकरण और आधुनिक बाजार से जुड़ाव की आवश्यकता है। माटीकला के उत्पादों को ई-कॉमर्स, डिजाइन विकास और आधुनिक विपणन प्रणालियों से जोड़कर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नई पहचान दिलाई जा सकती है। उन्होंने विभागों को समयबद्ध कार्ययोजना तैयार कर प्रशिक्षण, बैंकों से समन्वय बनाकर वित्तीय सहायता, तकनीकी उन्नयन, विपणन और रोजगार सृजन की पूरी प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंद्रीय राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह संग लखनऊ में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र का बटन दबाकर शुभारंभ किया

यूपी के माध्यम से विकसित भारत की संकल्पना को साइंटिफिक तरीके से बढ़ाएगा क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्रः मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंद्रीय राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह संग लखनऊ में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र का बटन दबाकर शुभारंभ किया यूपी के पास देश के 35-36 फीसदी खाद्यान्न उत्पादन की क्षमता, जरूरत इसे तकनीक के साथ जोड़कर आगे बढ़ाने की: सीएम योगी सीएम योगी ने प्रधानमंत्री मोदी व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह का जताया आभार, कहा- क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र से होगा यूपी को बड़ा लाभ राज्य सरकार चाहती है कि मौसम की और सटीक जानकारी के लिए उसका अपना सेटेलाइट हो: मुख्यमंत्री लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मौसम पूर्वानुमान एवं अनुसंधान के क्षेत्र में प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में किए गए कार्यों के परिणाम स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। लखनऊ में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र की स्थापना से उत्तर प्रदेश को विशेष लाभ मिलेगा। यूपी देश की सबसे बड़ी आबादी का राज्य है। महज 11 फीसदी कृषि योग्य भूमि में यूपी देश का 21 फीसदी खाद्यान्न उत्पादन करता है। समय पर मौसम, बारिश, अतिवृष्टि, अनावृष्टि या ओलावृष्टि की जानकारी नहीं मिलेगी तो हम किसानों के साथ न्याय नहीं कर पाएंगे। क्षेत्रीय केंद्र की स्थापना मौसम की और सटीक जानकारी प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।  मुख्यमंत्री ने सोमवार को केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह संग बटन दबाकर क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र का शुभारंभ किया। इसे लखनऊ मौसम विज्ञान केंद्र को परिवर्तित कर स्थापित किया गया है। इस अवसर पर सीएम योगी ने कहा कि हम लोग सीजन में अतिवृष्टि-अनावृष्टि, आकाशीय बिजली आदि के संबंध में मेट्रोलॉजिकल व अन्य विभागों की बैठक में चर्चा करते थे कि समय पर सटीक जानकारी मिलने से सही रणनीति संभव होती है। आज केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह की उपस्थिति में लखनऊ खुद को मेट्रोलॉजिकल रीजनल सेंटर के रूप में स्थापित कर रहा है। य़ह यूपी के माध्यम से विकसित भारत की संकल्पना को वैज्ञानिक तरीके से आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सीएम ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के प्रति आभार भी जताया।  12 वर्ष में आए परिवर्तन का दिखता है लाभ सीएम ने कहा कि आजादी के बाद इस विषय पर अपेक्षित ध्यान न देने का परिणाम था कि अन्नदाता किसान अपेक्षित प्रगति नहीं कर पाए। प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली जनधन की हानि को रोकने वाले प्रयास भी अधूरे रहे। लेकिन, पिछले 12 वर्ष में पीएम मोदी के नेतृत्व में डॉ. जितेंद्र सिंह ने जो अभियान प्रारंभ किया, उसका परिणाम सभी देख रहे हैं। 12 वर्ष पहले बारिश, अतिवृष्टि, अनावृष्टि, आकाशीय बिजली के खतरों के बारे में जो जानकारी मिलती थी, होता उससे ठीक उल्टा था, लेकिन अब मौसम की सटीक जानकारी प्राप्त हो रही है। आपदा से तीन घंटे पहले मोबाइल पर अलर्ट  सीएम ने कहा कि 13 मई को आंधी-तूफान से प्रदेश के कुछ जनपदों में जनधन की काफी हानि हुई थी। बैठक में मैंने पूछा कि अर्ली वार्निंग सिस्टम क्यों काम नहीं कर रहा था। पता चला कि सिस्टम तो काम कर रहा है, लेकिन स्थानीय प्रशासन की सक्रियता का अभाव है। फिर रात में पूरे प्रदेश के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में मैंने कहा कि जब आपको अलर्ट मिल रहा है तो आपको भी स्थानीय स्तर पर लोगों व संस्थाओं को अलर्ट करना चाहिए। इस बैठक के चौथे-पांचवें दिन भी आपदा आई, लेकिन तीन घंटे पहले सबके मोबाइल पर अलर्ट आना प्रारंभ हो गया।  सीएम ने किया सहारनपुर की घटना का जिक्र सीएम ने सहारनपुर की घटना का जिक्र करते हुए बताया कि वहां शिवालिक पहाड़ी की तलहटी में मां शाकम्भरी देवी का मंदिर है। देहरादून व शिवालिक पहाड़ियों में भारी बरसात हुई। यहां बारिश होने से एकत्र होने वाला जल बाढ़ जैसा माहौल पैदा कर देता है। उस समय मंदिर में कीर्तन चल रहा था, काफी श्रद्धालु मौजूद थे, लेकिन मौसम विभाग ने समय से सही जानकारी दी तो सभी को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया गया, जिससे जनधन की व्यापक हानि रुक गई। अर्ली वार्निंग सिस्टम का लाभ  सीएम ने कहा कि मीरजापुर, सोनभद्र, चंदौली आदि कई जनपदों में आकाशीय बिजली का खतरा बहुत रहता है। हर वर्ष 100-150 लोगों की मौत होती थी। चार-पांच वर्ष पहले प्रयागराज से पटना के बीच एक ही दिन में 90 मौतें हुई थीं। इसमें यूपी के 30 व बिहार के 60 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, एमडीएमए, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की बैठक में मैंने पूछा कि आखिर इन मौतों को कौन रोकेगा। क्या इसे तकनीक से रोका नहीं जा सकता, तब विभाग ने बताया कि यह संभव है। अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने का परिणाम है कि उक्त जिलों में हर वर्ष होने वाली मौत के आंकड़े घटकर महज दर्जन भर रह गए। लोगों को भी ऐसे मौसम में लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए, सतर्क रहना चाहिए।   अपना सेटेलाइट चाहती है राज्य सरकार मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी को सदैव डॉ. जितेंद्र सिंह का सकारात्मक सहयोग मिलता है। मौसम की पूर्व जानकारी किसानों की आमदनी बढ़ाने और आकाशीय बिजली, अतिवृष्टि, अनावृष्टि व ओलावृष्टि के कारण होने वाली जनधन की हानि को रोकने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। हमने इसरो से भी अनुरोध किया था कि राज्य सरकार चाहती है कि उसके पास अपना सेटेलाइट हो, जो मौसम की और सटीक जानकारी उपलब्ध करा सके। चिड़िया व जानवरों का व्यवहार बता देता था मौसम का रुख मुख्यमंत्री ने कहा कि मनुष्य ने जबसे बुद्धिमत्ता का उपयोग प्रारंभ किया होगा, उसके लिए सबसे पहले मौसम की जानकारी, आकाश में चमकती बिजली, बादलों से होने वाली वर्षा जैसी स्थितियां कौतूहल का विषय बनीं। ऋषि-मुनियों ने स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पंचांग का निर्माण किया। आज भी ग्रह-नक्षत्रों के आधार पर की गई गणना मौसम की सटीक जानकारी का आधार बनती है। लोक कहावतों, लोक परंपराओं में भी हम देखते थे कि अमुक चिड़िया की बोली या जानवरों का व्यवहार परिवर्तन मौसम की पूर्व जानकारी देने का माध्यम बनता था। मौसम चक्र में आया एक महीने का अंतर सीएम ने कहा कि क्लाईमेट चेंज होने से मौसम चक्र में लगभग एक महीने का अंतर आया है। यही हाल रहा … Read more

पिछले एक दशक में विभागीय आय लगभग तीन गुना, डिजिटल सेवाओं के विस्तार पर मुख्यमंत्री का जोर

तकनीक की मदद से रजिस्ट्री कार्यालयों को बनाएं पारदर्शिता और जनसुविधा का आदर्श मॉडल: मुख्यमंत्री पिछले एक दशक में विभागीय आय लगभग तीन गुना, डिजिटल सेवाओं के विस्तार पर मुख्यमंत्री का जोर पेपरलेस रजिस्ट्रेशन, जियो-टैगिंग और एआई आधारित प्रणाली को तेजी से लागू करने के निर्देश पासपोर्ट सेवा केंद्रों की तर्ज पर विकसित होंगे रजिस्ट्री कार्यालय, नागरिक सुविधाएं होंगी बेहतर मानकीकृत मूल्यांकन व्यवस्था से रुकेगी स्टाम्प शुल्क चोरी, घटेंगे विवाद मुख्यमंत्री का निर्देश, सरल होंगे कानून, कहा,कॉरपोरेट पुनर्गठन, एलएलपी और रेरा से जुड़े प्रावधानों को समयानुकूल बनाने की आवश्यकता लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, निवेश गतिविधियों और शहरीकरण की आवश्यकताओं के अनुरूप विभाग को अधिक पारदर्शी, तकनीक आधारित, उत्तरदायी और जनसुविधा केंद्रित बनाया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि रजिस्ट्री कार्यालय आमजन के प्रत्यक्ष संपर्क वाले कार्यालय हैं, इसलिए वहां की व्यवस्थाएं आधुनिक, व्यवस्थित और नागरिक केंद्रित होनी चाहिए। उन्होंने उप निबंधक कार्यालयों को चरणबद्ध ढंग से पासपोर्ट सेवा केंद्रों की तर्ज पर विकसित करने की आवश्यकता बताई।  बैठक में बताया गया कि प्रदेश के रजिस्ट्री कार्यालयों में प्रतिवर्ष लगभग 2.4 करोड़ लोगों का प्रत्यक्ष संपर्क होता है। इसे देखते हुए हेल्प डेस्क, टोकन एवं क्यू मैनेजमेंट सिस्टम, आधुनिक प्रतीक्षालय, महिला एवं शिशु कक्ष, डिजिटल सुविधाएं तथा अन्य नागरिक सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए जिससे नागरिकों को अनावश्यक प्रतीक्षा और असुविधा का सामना न करना पड़े। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग राज्य की राजस्व व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2016-17 में विभाग की सकल आय 11,613.84 करोड़ रुपये थी, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 32,598.49 करोड़ रुपये हो गई है। इसी अवधि में पंजीकृत लेखपत्रों की संख्या 28.25 लाख से बढ़कर 49.34 लाख से अधिक हो गई। मुख्यमंत्री ने इस प्रगति को आगे बढ़ाते हुए राजस्व वृद्धि के साथ सेवा गुणवत्ता और नागरिक संतुष्टि को भी प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस विभागीय सुधारों का प्रमुख आधार बनना चाहिए। संपत्ति एवं विवाह पंजीकरण में आधार प्रमाणीकरण, बायोमेट्रिक और आईरिस आधारित सत्यापन, ऑनलाइन दस्तावेज सत्यापन तथा खतौनी आधारित डिजिटल जांच जैसी व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ किया जाए। पेपरलेस रजिस्ट्रेशन प्रणाली, अभिलेखों के डिजिटाइजेशन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कार्यप्रणाली तथा जियो-टैगिंग व्यवस्था को तेजी से लागू करने की दिशा में प्रभावी कार्यवाही की जाए। उन्होंने कहा कि तकनीक के माध्यम से पारदर्शिता बढ़ाने, विवाद कम करने और राजस्व अपवंचन रोकने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि संपत्तियों के मूल्यांकन में एकरूपता और पारदर्शिता लाने के लिए मानकीकृत मूल्यांकन व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए। इससे बाजार आधारित मूल्यांकन सुनिश्चित होगा तथा मूल्यांकन संबंधी विवादों में कमी आएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश तेजी से निवेश और औद्योगिक विकास का केंद्र बन रहा है। ऐसे में विधिक व्यवस्थाओं को भी वर्तमान आर्थिक और व्यावसायिक आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यवस्थाओं में स्पष्टता होने से निवेशकों का विश्वास बढ़ता है, अनावश्यक विवाद और मुकदमेबाजी कम होती है तथा कारोबार करने की सुगमता को बल मिलता है। बैठक में कॉरपोरेट पुनर्गठन, विलय, विभाजन, समामेलन, अधिग्रहण, सीमित दायित्व भागीदारी (एलएलपी), शेयरधारिता में परिवर्तन, आवासीय सहकारी समितियों तथा रेरा के अंतर्गत विक्रय करारों से जुड़े विषयों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इन क्षेत्रों में स्पष्ट और व्यावहारिक स्टाम्प शुल्क व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि विभिन्न राज्यों की सर्वोत्तम व्यवस्थाओं का अध्ययन करते हुए ऐसा विधिक ढांचा तैयार किया जाए जिससे निवेश को प्रोत्साहन मिले, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस मजबूत हो, विवादों में कमी आए और राज्य के राजस्व हित भी सुरक्षित रहें।

योगी सरकार की टेक होम राशन योजना से मातृ एवं शिशु पोषण को मिली नई मजबूती

कुपोषण के खिलाफ जंग में यूपी बना मॉडल, 1.56 करोड़ लाभार्थियों तक पहुंच रहा पौष्टिक आहार  योगी सरकार की टेक होम राशन योजना से मातृ एवं शिशु पोषण को मिली नई मजबूती 4000 से अधिक महिलाओं को मिला रोजगार, महिला स्वयं सहायता समूह संभाल रहे उत्पादन व्यवस्था   जीपीएस, क्यूआर कोड और ओटीपी आधारित सिस्टम से पारदर्शी हुई पूरी वितरण प्रक्रिया महिला एवं बाल विकास विभाग की पहल से यूपी बना देश में पोषण सुधार का अग्रणी मॉडल लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश कुपोषण के खिलाफ अपनी लड़ाई में देश के लिए एक प्रभावी मॉडल बनकर उभरा है। महिला एवं बाल विकास विभाग और बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की सक्रिय कार्यशैली के चलते प्रदेश में संचालित टेक होम राशन योजना मातृ एवं शिशु पोषण को नई मजबूती प्रदान कर रही है। पोषण, तकनीक, पारदर्शिता और महिला सशक्तीकरण को एक साथ जोड़ने वाली यह व्यवस्था अब राष्ट्रीय स्तर पर सराहना प्राप्त कर रही है। योगी सरकार ने भारत सरकार की सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 गाइडलाइन तथा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2023 के अनुरूप रेसिपी आधारित अनुपूरक पुष्टाहार व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू किया है। उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है जिसने इस नई प्रणाली को बड़े पैमाने पर धरातल पर उतारा है। वर्तमान में प्रदेश में हर महीने लगभग 1.56 करोड़ लाभार्थियों तक पौष्टिक आहार पहुंचाया जा रहा है। इनमें छह माह से छह वर्ष तक के बच्चे, गर्भवती महिलाएं, धात्री माताएं तथा अतिकुपोषित बच्चे शामिल हैं। नाटेपन की दर 39.7 से घटकर 31.5 प्रतिशत तक पहुंची  सीएम योगी के मार्गदर्शन में यह पहल केवल राशन वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सकारात्मक असर स्वास्थ्य संकेतकों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2015-16 की तुलना में वर्ष 2019-21 के दौरान प्रदेश में बच्चों में स्टंटिंग यानी नाटेपन की दर 39.7 प्रतिशत से घटकर 31.5 प्रतिशत तक पहुंच गई। इसके अलावा अल्पवजन और दुबलापन जैसी समस्याओं में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि योगी सरकार की पोषण नीति जमीनी स्तर पर प्रभावी परिणाम दे रही है। विशेष पोषण उत्पाद किए जा रहे तैयार  योगी सरकार में इस योजना के तहत विभिन्न आयु वर्गों के लिए विशेष पोषण उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। शिशु अमृत, शिशु आहार, बाल पुष्टिकर और संपूर्ण मातृ आहार जैसे उत्पाद बच्चों और महिलाओं को संतुलित एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध करा रहे हैं। वहीं बच्चों के लिए आरोग्य पोषण, बाल संजीवनी और सक्षम पोषण जैसी ऊर्जा युक्त विशेष व्यवस्थाएं भी की गई हैं। योगी सरकार ने पूरी आपूर्ति व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़कर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की है। जीपीएस ट्रैकिंग, क्यूआर कोड और ओटीपी आधारित सत्यापन प्रणाली के माध्यम से हर पैकेट की डिजिटल निगरानी की जा रही है। इससे वितरण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी हुई है और लाभार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण पोषण सामग्री समय पर पहुंच रही है। 4000 से अधिक महिलाएं उत्पादन इकाइयों से जुड़ीं महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में भी यह योजना नई मिसाल बन रही है। टेक होम राशन के उत्पादन और आपूर्ति की जिम्मेदारी मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े महिला स्वयं सहायता समूहों को सौंपी गई है। वर्तमान में प्रदेश की 4000 से अधिक महिलाएं इन उत्पादन इकाइयों से जुड़कर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर प्राप्त कर रही हैं। इससे न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिली है।   हर्षिता माथुर, निदेशक, बाल विकास एवं पुष्टाहार तथा राज्य पोषण मिशन