samacharsecretary.com

CM योगी के संकल्प से बदली ‘खुशी’ की जिंदगी, इलाज-शिक्षा के बाद अब आय का भी हुआ इंतजाम

सीएम योगी के संकल्प से खुशहाल हुई 'खुशी' की जिंदगी, इलाज-शिक्षा के बाद अब आय का पक्का इंतजाम कभी सुनने-बोलने में असमर्थ थी और परिवार आर्थिक संकट में था, अब इलाज-शिक्षा के अलावा पिता को मिला अपना रोजगार जिलाधिकारी ने कलेक्ट्रेट परिसर में खुशी के पिता कल्लू गुप्ता को नए ई-रिक्शा की चाबी सौंपी खुशी बोली—‘थैंक यू योगी जी’, मां ने कहा—योगी जी के आशीर्वाद से अब परिवार की रोजी-रोटी सुरक्षित कानपुर  कभी अपनी जिंदगी में उजाले की एक किरण तलाशते हुए कानपुर से पैदल लखनऊ पहुंची 19 वर्षीय दिव्यांग खुशी गुप्ता की कहानी अब उम्मीद, संवेदना और सुशासन की मिसाल बन चुकी है। जिस बेटी के सामने कभी सुनने-बोलने की दिक्कत थी और जिसका परिवार आर्थिक अभावों से जूझ रहा था, आज उसी परिवार के चेहरे पर खुशी की मुस्कान है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हुई मुलाकात के बाद शुरू हुई सहायता केवल आश्वासन तक सीमित नहीं रही, बल्कि एक-एक कर खुशी और उसके परिवार के जीवन की हर बड़ी चिंता का समाधान बनती चली गई। शुक्रवार को इस बदलाव की श्रृंखला में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया। कलेक्ट्रेट परिसर में जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने खुशी के पिता कल्लू गुप्ता को नए ई-रिक्शा की चाबी सौंपी। जिलाधिकारी की पहल पर एनआरजे इलेक्ट्रिक मोटर व्हीकल प्राइवेट लिमिटेड ने अपने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंड के तहत यह ई-रिक्शा पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराया। वाहन का पंजीकरण खुशी की मां गीता गुप्ता के नाम पर कराया गया है, जिससे परिवार को स्थायी और सम्मानजनक आजीविका का साधन मिल सके। यह सहायता ऐसे समय मिली है, जब परिवार आर्थिक संकट के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा था। कल्लू गुप्ता वर्षों से किराये का ई-रिक्शा चलाकर किसी तरह परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। प्रतिदिन की कमाई का बड़ा हिस्सा वाहन के किराये में चला जाता था और शेष बची मामूली राशि से घर का खर्च चलाना पड़ता था। हाल ही में एक सड़क दुर्घटना में पैर में चोट लगने के कारण उनकी आय का यह साधन भी प्रभावित हो गया। परिवार के सामने रोजमर्रा के खर्च और बेटी के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ने लगी थी। जैसे ही यह स्थिति जिलाधिकारी के संज्ञान में आई, उन्होंने कल्लू गुप्ता को ई-रिक्शा उपलब्ध कराने की पहल की, जो अब परिवार के लिए आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन गया है। दरअसल, खुशी की संघर्षगाथा पिछले वर्ष उस समय पूरे प्रदेश के सामने आई थी, जब वह अपनी समस्याएं लेकर कानपुर से पैदल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने लखनऊ पहुंची थी। मुख्यमंत्री ने उससे आत्मीयता से मुलाकात की, उसकी पूरी बात सुनी और अधिकारियों को निर्देश दिए कि उसके उपचार, शिक्षा और पुनर्वास के लिए हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाए। इसके बाद प्रशासन ने संवेदनशीलता के साथ लगातार उसके जीवन को सामान्य बनाने की दिशा में कार्य किया। मुख्यमंत्री योगी के निर्देशों के क्रम में फरवरी 2026 में खुशी का सफल कॉक्लियर इम्प्लांट कराया गया। लंबे समय तक सुनने और बोलने में असमर्थ रही खुशी अब पहले की तुलना में बेहतर सुन और समझ पा रही है। नियमित स्पीच थेरेपी के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं और उसने बोलना भी शुरू कर दिया है। उसकी शिक्षा बाधित न हो, इसके लिए दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा लखनऊ के मोहान रोड स्थित समेकित विशेष माध्यमिक (आवासीय) विद्यालय में कक्षा-9 में उसका प्रवेश कराया गया है। शुक्रवार को ई-रिक्शा मिलने के बाद कलेक्ट्रेट परिसर का माहौल भी भावुक हो उठा। कभी अपनी बात भी व्यक्त न कर पाने वाली खुशी ने मुस्कुराते हुए मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताते हुए कहा- "थैंक यू योगी जी।" उसकी मां गीता गुप्ता की आंखों में संतोष साफ दिखाई दे रहा था। उन्होंने कहा, "पहले बेटी के इलाज की चिंता थी, फिर उसकी पढ़ाई की। इन समस्याओं के समाधान के साथ-साथ अब रोजी-रोटी की चिंता भी खत्म हो गई है। योगी जी के आशीर्वाद और प्रशासन के सहयोग से हमारे परिवार को नया जीवन मिला है।" जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री का स्पष्ट निर्देश था कि खुशी के पुनर्वास में कोई कमी न रहे। उसी सोच के अनुरूप उपचार, शिक्षा और अब परिवार की आजीविका सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य किया गया है। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि ऐसे परिवारों को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर उपलब्ध कराना है।

आम की फसल से काफी मुनाफा कमा रहे किसान, देश में 26 फीसदी आम का उत्पादन करता है उत्तर प्रदेशः सीएम

गुणवत्ता, विश्वास व वैश्विक मानकों पर खरा उतरे यूपी का आमः मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में किया आम महोत्सव-2026 का शुभारंभ, स्टॉल्स का अवलोकन किया और आम की 800 प्रजातियों के बारे में जानकारी ली आम की फसल से काफी मुनाफा कमा रहे किसान, देश में 26 फीसदी आम का उत्पादन करता है उत्तर प्रदेशः सीएम  सीएम ने की काकोरी ब्रांड की चर्चा, कहा- इसमें देश के प्रति समर्पण का भाव और किसानों की मेहनत की मिठास  उद्यान विभाग को आम की अधिक से अधिक किस्मों को जीआई टैग दिलाने के लिए आवेदन करने का निर्देश लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में शुक्रवार को आम महोत्सव-2026 का शुभारंभ किया। उन्होंने स्टॉल्स का अवलोकन कर आम की 800 से अधिक प्रजातियों के बारे में भी जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी तैयारी इस तरह होनी चाहिए कि यूपी के किसानों का आम गुणवत्ता, विश्वास व वैश्विक मानकों पर खरा उतर सके। हमारा लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित न रहे, बल्कि ब्रांडिंग, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग के साथ ही प्रोडक्ट की ट्रेसेबिलिटी व ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन पर भी ध्यान देना होगा। तभी यह एक्सपोर्ट के लिए स्वीकार्य होगा। एक बाग आय के कई मॉडल के रूप में फल उत्पादन, प्रोसेसिंग, टूरिज्म, ऑर्गेनिक उत्पाद, मधुमक्खी पालन, खाद्य उद्योग और एक्सपोर्ट के जरिए किसानों की आमदनी बढ़ाने का माध्यम बन सकता है।  माटी की खुशबू व मिठास से आकर्षित कर रहा आम  मुख्यमंत्री ने कहा कि जब सरकार के स्तर पर प्लेटफॉर्म मिलता है, शोकेसिंग का अवसर प्राप्त होता है तो यूपी के आम की प्रजातियों का पता चलता है। यहां प्रदेश व देश के अलग-अलग राज्यों से आम की 800 वैरायटी प्रदर्शित हो रही हैं। वाराणसी-गोरखपुर का लंगड़ा, गोरखपुर का गौरजीत, बस्ती का आम्रपाली, मलिहाबाद लखनऊ का दशहरी, बागपत व सहारनपुर के रटौल समेत प्रदेश के अलग-अलग जनपदों व मंडलों में पैदा होने वाली आम की किस्में वहां की माटी की सुगंध व मिठास के जरिए इस महोत्सव में आए हर व्यक्ति को आकर्षित कर रही है और यही यूपी की ताकत है।  प्लेटफार्म पर साझा हों किसानों के अनुभव सीएम ने मंच पर सम्मानित होने वाले किसानों से उत्पादन के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने बताया कि एक दिन औद्यानिक फसल से जुड़े किसान से बातचीत हो रही थी। वह प्राकृतिक तरीके से बाग में कीड़ों को नष्ट करने के तरीके बता रहे थे। उनका कहना था कि वह खुद तो इसका उपयोग करते हैं, लेकिन उनके अनुभव को प्लेटफॉर्म न मिलने से अन्य किसानों को व्यापक लाभ नहीं मिल पाता। इसे देखते हुए किसानों को उनके अनुभव साझा करने के लिए अधिक से अधिक प्लेटफॉर्म दिलाने के प्रयास में तेजी लाई जाएगी।  आम की फसल से अच्छा मुनाफा कमा रहे किसान सीएम ने कहा कि किसान सामान्यत: एक एकड़ में आम की फसल से दो से तीन लाख रुपये मुनाफा कमा रहे हैं। इसमें वैल्यू एडिशन, प्रोसेसिंग जोड़ेंगे, एक्सपोर्ट के लिए तैयार करेंगे मुनाफा और बढ़ जाता है। आम महोत्सव उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के किसानों के लिए भी शोकेसिंग का आधार है। वे अपने उत्पाद प्रस्तुत कर बायर्स-सेलर मीट के माध्यम से इसे वैश्विक पहचान दिला सकते हैं। मलिहाबाद के आम को जीआई टैग प्राप्त होने से उसे वैश्विक पहचान मिली है।  प्रदेश के हर हिस्से में पैदा होता है आम सीएम ने कहा कि 2017 से यह आयोजन अनवरत हो रहा है। पहले वर्ष महोत्सव में कम वैरायटी आई, लेकिन साल दर साल यह बढ़ता गया। इस साल आम की 800 वैरायटी आईं हैं। इसके साथ ड्रैगन फ्रूट व कमल की ब्रांडिंग भी देखने को मिली। यूपी के सभी 18 मंडलों, 75 जनपदों, 350 तहसीलों और 825 विकास खंडों में आम पैदा होता है। यहां 100 ग्राम से लेकर डेढ़-दो किलो तक वजन वाले आम दिखे। वैरायटी व स्वाद, अन्नदाता किसान व प्रदेश की ताकत को बढ़ाता है।  देश में 26 फीसदी आम का उत्पादन करता है उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के कुल आम उत्पादन में उत्तर प्रदेश 26 फीसदी हिस्सेदारी करता है। महोत्सव में 7 श्रेणियों के 56 वर्गों में 800 से अधिक वैरायटी हैं। सीएम ने आम महोत्सव में बायर्स-सेलर्स मीट की सराहना की। कहा कि यूपी में हम लोग ओडीओपी से जुड़े आयोजन करते हैं तो बायर्स-सेलर्स मीट अवश्य रखते हैं। इससे किसानों व उद्यमियों को अपने उत्पाद आगे बढ़ाने में मदद मिलती है। औद्यानिक फसलों से जुड़े किसान, स्वयं सहायता समूह, पैक हाउस, एक्सपोर्ट, फूड प्रोसेसिंग, नर्सरी मालिक, बैंकर्स, इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने वाला मैकेनिज्म, मशीनरी व उपकरण आपूर्तिकर्ता, रिसर्च व डवलपमेंट से जुड़े वैज्ञानिक भी इस कार्यक्रम से जुड़े हैं। उद्यान विभाग ने यूपी में औद्यानिक फसलों के लिए ईकोसिस्टम बनाने का कार्य किया है। वोकल फॉर लोकल को प्रोत्साहित करते हैं ऐसे महोत्सव सीएम ने कहा कि दुनिया बदल रही है। तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में यूपी में ग्रामीण अर्थव्यवस्था, खाद्य प्रसंस्करण, महिला सशक्तीकरण, कृषि आधारित उद्योगों, पर्यटन, रोजगार व निर्यात संवर्धन की दृष्टि से यह बेहतरीन प्लेटफॉर्म है। ऐसे महोत्सव प्रधानमंत्री जी के वोकल फॉर लोकल को प्रोत्साहित करते हैं और आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्रस्तुत करते हैं। स्वस्थ प्रतिस्पर्धा आगे बढ़ने को प्रेरित करती है। कई देशों में होता है यूपी के आम का निर्यात  सीएम ने कहा कि यूपी ने खुद को भारत की बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित किया है। यूपी के आम का निर्यात यूके, यूएई, कुवैत, मलेशिया, सिंगापुर, न्यूजीलैंड, बेल्जियम, जापान, इटली, रूस, कतर आदि देशों में हो रहा है। एपीडा जैसी एजेंसियां विदेशों में खरीदार व एफपीओ के बीच सीधा संपर्क स्थापित करती हैं।  काकोरी ब्रांड में दिखता है देश के प्रति समर्पण  सीएम ने मलिहाबादी आम की चर्चा करते हुए कहा कि हमने इसे ‘काकोरी ब्रांड’ दिया है। काकोरी के अमर शहीदों ने देश की आजादी के लिए खुद का बलिदान दिया। उनकी स्मृति को जीवंत बनाए रखने के लिए हमने इसे यह नाम दिया। काकोरी ब्रांड में देश के प्रति समर्पण का भाव और किसानों की मेहनत की मिठास है।  जेवर एयरपोर्ट के पास बनेगा इंटीग्रेटेड टेस्टिंग एंड ट्रीटमेंट पार्क सीएम ने कहा कि सहारनपुर, वाराणसी, लखनऊ, अमरोहा में आम के आधुनिक पैक हाउस काम कर रहे हैं। इसके माध्यम से आम … Read more

CM योगी शुक्रवार को करेंगे उत्तर प्रदेश आम महोत्सव का शुभारंभ, किसानों और बागवानों को मिलेगा बड़ा मंच

सीएम योगी शुक्रवार को उत्तर प्रदेश आम महोत्सव का करेंगे शुभारंभ  इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में होगा आयोजन, 3 से 5 जुलाई तक चलेगा 04 जुलाई को 'जन भवन' में किया जाएगा आम क्रेता-विक्रेता सम्मेलन: उद्यान मंत्री महोत्सव में 07 श्रेणियों और 56 वर्गों में लगभग 800 से अधिक आम की प्रजातियां की जाएंगी प्रदर्शित यूपी से आम और पल्प के निर्यात में भारी उछाल, वर्ष : 2025-26 में ₹12.67 करोड़ मूल्य के 3563 मीट्रिक टन आम का हुआ रिकॉर्ड निर्यात  लखनऊ, 'उत्तर प्रदेश आम महोत्सव -2026' का आयोजन 3 से 5 जुलाई तक इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, गोमती नगर में होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को त्रिदिवसीय महोत्सव का शुभारंभ करेंगे। महोत्सव में 07 श्रेणियों और 56 वर्गों में लगभग 800 से अधिक आम की प्रजातियों का प्रदर्शन किया जाएगा। यह जानकारी उद्यान,कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने पत्रकार वार्ता में दी। उन्होंने बताया कि 4 जुलाई को 'जन भवन', लखनऊ में आम क्रेता-विक्रेता सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।  मेजबान उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के प्रतिनिधि व निर्यातक लेंगे हिस्सा उद्यान मंत्री ने बताया कि महोत्सव में मेजबान उत्तर प्रदेश के अलावा मध्य प्रदेश, उत्तराखण्ड, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के उ‌द्यान विभाग के प्रतिनिधि, प्रगतिशील बागवान एवं निर्यातक हिस्सा लेंगे। उद्यान मंत्री ने बताया कि महोत्सव में प्रदर्शन के लिए रखे गए आम के पौधे बिक्री के लिए भी उपलब्ध रहेंगे। उन्होंने अपील की कि महोत्सव में आए नागरिक अपने साथ कम से कम एक पौधा ले जाकर अवश्य रोपित करें।  बच्चों के लिए होंगी प्रतियोगिताएं उद्यान मंत्री ने बताया कि महोत्सव में बच्चों के लिए आम खाने की प्रतियोगिता और आम से बने व्यंजनों (पकवानों) की प्रतियोगिता मुख्य आकर्षण होगी। साथ ही बागवानों के लिए उन्नत तकनीक, तुड़ाई उपरान्त प्रबन्धन, कीट-व्याधि नियंत्रण और विपणन पर विशेष कार्यशालाएं आयोजित होंगी। बागवानों को सीधा बाजार देने के लिए पहली बार 04 जुलाई को 'जन भवन', लखनऊ में आम क्रेता-विक्रेता सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।  आम उत्पादन में उत्तर प्रदेश शीर्ष पर सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश आम उत्पादन के क्षेत्र में देश में प्रथम स्थान पर है। प्रदेश के 3.27 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में लगभग 61.96 लाख मीट्रिक टन आम का उत्पादन होता है, जो पूरे देश के कुल आम उत्पादन का लगभग 26.22 प्रतिशत है। उत्तर प्रदेश के दशहरी, लंगड़ा, चौसा, गौरजीत, लखनऊ सफेदा, रटौल और आम्रपाली जैसी प्रजातियां दुनिया भर में विख्यात हैं। इनका लखनऊ, सहारनपुर, मेरठ, मुरादाबाद, वाराणसी, अयोध्या और प्रयागराज मण्डलों में बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। विदेशों में भी निर्यात किया जाता है उप्र का आम एपीडा (APEDA) के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि प्रदेश से आम के निर्यात में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। वर्ष 2024-25 में जहां ₹2.63 करोड़ मूल्य का 404 मीट्रिक टन आम व पल्प निर्यात हुआ था, वहीं वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर ₹12.67 करोड़ मूल्य का 3,563 मीट्रिक टन हो गया है। उत्तर प्रदेश का आम यूनाइटेड किंगडम (लंदन), यूएई, सऊदी अरब, मलेशिया, सिंगापुर, कुवैत, न्यूजीलैंड, बेल्जियम, जापान, इटली, कतर और रूस जैसे विकासशील व विकसित देशों को निर्यात किया जा रहा है। इस वर्ष भी महोत्सव के अवसर पर प्रदेश से अन्य देशों को आम का निर्यात किया जाएगा। कई जनपदों में स्थापित किए गए मैंगो पैक हाउस लखनऊ, सहारनपुर, वाराणसी और अमरोहा में आधुनिक मैंगो पैक हाउस स्थापित किए गए हैं, जहाँ अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल के तहत आम की प्रीप्रोसेसिंग और उपचार किया जा रहा है। जेवर एयरपोर्ट के पास फलों की टेस्टिंग एवं ट्रीटमेंट सेंटर का निर्माण किया जा रहा है, जिससे भविष्य में औद्यानिक निर्यात को और अधिक रफ्तार मिलेगी। आम को कीटों/रोगों से बचाने, उनका आकार, स्वाद और चमक सुधारने के लिए इस वर्ष विभाग द्वारा किसानों को लगभग 1.50 करोड़ फल बैग वितरित किए गए हैं। अनुत्पादक और पुराने पड़ चुके बागों के कैनोपी प्रबन्धन हेतु प्रति हेक्टेयर इकाई लागत पर 40 प्रतिशत का अनुदान दिया जा रहा है।

2017 तक एक भी जिला ओडीएफ नहीं, योगी सरकार ने बनवाए 3.31 करोड़ से अधिक शौचालय

योगी सरकार आने पर पकड़ी केंद्रीय योजनाओं ने रफ्तार  2017 तक एक भी जिला ओडीएफ नहीं, योगी सरकार ने बनवाए 3.31 करोड़ से अधिक शौचालय खाली सिलेंडरों के दौर से निकलकर अब होली-दिवाली पर मुफ्त रिफिल का तोहफा लखनऊ,   प्रदेश में डबल इंजन सरकार बनने के बाद आमजन को सभी केंद्रीय योजनाओं का लाभ मिल रहा है। वर्ष 2017 से पहले ऐसा नहीं था, क्योंकि पिछली सरकारें राजनीतिक कारणों से केंद्रीय योजनाओं को लागू करने में रोड़े अटकाती थीं। इतना ही नहीं, कई योजनाओं के मिलते-जुलते नाम रखकर लोगों को बरगलाने की भी चेष्टा की जाती थी। नतीजा यह कि उत्तर प्रदेश की जनता मोदी सरकार की अनेक कल्याणकारी योजनाओं से वंचित रहती थी। लेकिन, जैसे ही 2017 में योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, केंद्र सरकार की योजनाओं पर लगे ताले खुल गए। इससे केंद्र व राज्य, दोनों सरकारों की योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचा।          प्रधानमंत्री आवास योजना से गरीबों को मिला सहारा केंद्र सरकार ने देश के हर गरीब को पक्का मकान देने के संकल्प के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना की शुरुआत की थी। हालांकि प्रदेश की पूर्ववर्ती सरकार ने इस योजना को उत्तर प्रदेश में गति देने के बजाय अपनी समाजवादी आवास योजना और लोहिया ग्रामीण आवास योजना को आगे बढ़ाने का प्रयास किया था। इसके बाद आरोप लगे कि पूर्ववर्ती सरकार ने केंद्र को लाभार्थियों की सूची भेजने और मैचिंग ग्रांट (राज्य का हिस्सा) जारी करने में ढिलाई बरती। स्थिति यह थी कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत वर्ष 2014 से 2017 तक वह सरकार 50 हजार आवास भी नहीं बना पाई। बाद में योगी सरकार आने पर इस कार्य को 'डबल इंजन' की रफ्तार दी गई। योगी सरकार ने 9 वर्षों में 62 लाख से अधिक परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराया है। पीएम फसल बीमा योजना में 6,283 करोड़ से अधिक भुगतान  किसानों को सूखे, बाढ़ या ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए केंद्र ने 2016 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) लॉन्च की थी। इस योजना में राज्य सरकार की ओर से भी प्रीमियम का एक हिस्सा दिया जाना था और राज्य की एजेंसियों को सक्रिय भूमिका निभानी थी। हालांकि 2017 से पहले की सरकार की उदासीनता के कारण करीब 3 प्रतिशत किसानों का ही बीमा हो सका था, जिससे यूपी के किसान केंद्रीय मुआवजे से वंचित रह गए। वहीं उस समय के दौरान भाजपा शासित राज्यों में जहां 60-70 प्रतिशत किसानों को इसका लाभ मिल चुका था। योगी सरकार में इस योजना के तहत पिछले 9 वर्षों में 79 लाख से अधिक कृषकों को 6,283 करोड़ रुपये से अधिक भुगतान किया जा चुका है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत 100 प्रतिशत लक्ष्य 2014 में शुरू हुआ स्वच्छ भारत मिशन पीएम मोदी के सबसे बड़े ड्रीम प्रोजेक्ट्स में एक था, जिसका उद्देश्य देश को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) बनाना था। इस योजना के तहत शौचालयों के निर्माण के लिए केंद्र से फंड जारी होना था, लेकिन इसके लिए राज्य को उपयोगिता प्रमाण पत्र देना था और अपनी हिस्सेदारी तय करनी थी। पूर्ववर्ती सरकार ने इस योजना के प्रचार-प्रसार और क्रियान्वयन में रुचि नहीं दिखाई। वह इस योजना की ब्रांडिंग के खिलाफ थी, क्योंकि वह इसे भाजपा की योजना मानती थे। नतीजा यह हुआ कि 2014-2017 के बीच यूपी में शौचालय निर्माण की गति बेहद धीमी रही और राज्य ओडीएफ रैंकिंग में काफी पीछे छूट गया। मार्च 2017 तक उत्तर प्रदेश का ग्रामीण स्वच्छता दायरा महज 35 प्रतिशत के आस-पास ही पहुंच पाया था। वहीं प्रदेश का एक भी जिला पूरी तरह से खुले में शौच से मुक्त घोषित नहीं हो सका था। दूसरी तरफ वर्ष 2017 के बाद योगी सरकार के आने पर अब तक प्रदेशभर में स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत 3.31 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण हुआ है। इसके बाद स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत उत्तर प्रदेश 100 प्रतिशत ओडीएफ राज्य घोषित किया गया। वहीं 94 हजार से अधिक गांव ठोस तरल अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों के साथ ओडीएफ प्लस घोषित किए गए। यह सब 2017 में लगभग नामुमकिन लग रहा था। उज्जवला योजना में घर-घर पहुंचे गैस सिलेंडर पूर्व सरकार के कार्यकाल के दौरान बेहद कम संख्या में महिलाओं को मुफ्त कनेक्शन (सिलेंडर व रेगुलेटर) मिले। इनमें भी लगभग 35-40 प्रतिशत परिवारों ने पहला सिलेंडर खत्म होने के बाद दूसरा सिलेंडर नहीं भरवाया, क्योंकि उस वक्त रिफिलिंग पर राज्य सरकार की तरफ से कोई अतिरिक्त वित्तीय मदद या सब्सिडी टॉप-अप नहीं मिलता था। दूसरी तरफ योगी सरकार और केंद्र सरकार ने मिलकर पिछले 9 वर्षों में प्रदेश की लगभग 1.86 करोड़ से अधिक महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन का लाभ दिया। इसके साथ ही होली और दीपावली पर दो सिलिंडर मुफ्त रिफिल किए जा रहे हैं।

आस्था के साथ खिलवाड़ स्वीकार नहीं, जनता को सपा-कांग्रेस के बहकावे में आने की आवश्यकता नहीं

दंगाइयों के मुकदमे वापस लेने का प्रयास करती थी सपा सरकार:  सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया सहारनपुर नगर एवं सहारनपुर देहात विधानसभा क्षेत्रों के लिए ₹620 करोड़ से अधिक लागत वाली विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास आस्था के साथ खिलवाड़ स्वीकार नहीं, जनता को सपा-कांग्रेस के बहकावे में आने की आवश्यकता नहीं कांग्रेस व सपा सरकारें रोकती थीं कांवड़ यात्रा,  जन्माष्टमी व दुर्गा पूजा जैसे आयोजनों पर लगता था प्रतिबंध 2017 से पहले दंगा व पलायन, लेकिन आज विकास और निवेश बना है सहारनपुर की पहचान सहारनपुर,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, अलीगढ़ व मथुरा दंगों और कर्फ्यू की आग में झुलसते थे। कैराना व कांधला से पलायन की स्थिति थी, बेटियां और व्यापारी असुरक्षित थे। तत्कालीन समाजवादी पार्टी की सरकार दंगाइयों और उपद्रवियों के मुकदमे वापस लेने का कुत्सित प्रयास करती थी। लेकिन डबल इंजन सरकार ने कानून व्यवस्था को सुदृढ़ किया और हाल में मुरादाबाद के उपद्रवियों को कड़ी सजा भी दिलवाई है। अब उत्तर प्रदेश में दंगे नहीं होते, बल्कि विकास की योजनाएं धरातल पर उतरती हैं। मुख्यमंत्री बुधवार को सहारनपुर नगर एवं सहारनपुर देहात विधानसभा क्षेत्रों के लिए ₹620 करोड़ से अधिक लागत वाली विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास करने के उपरांत जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विपरीत मौसम व बारिश की चुनौतियों के बावजूद कार्यक्रम में शामिल हुए लोगों, किसानों, मातृशक्ति व स्थानीय जनप्रतिनिधियों का हृदय से आभार व अभिनंदन किया। सीएम ने जनपदवासियों को विकास की इन सौगातों के लिए बधाई भी दी। इस दौरान उन्होंने विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाण पत्र भी वितरित किए। आस्था के साथ खिलवाड़ स्वीकार नहीं सीएम ने कहा कि जाति व क्षेत्र के नाम पर बांटने वाले लोग आपको कमजोर कर रहे हैं। इनके बहकावे में आने की आवश्यकता नहीं। वे कभी मां शाकंभरी के दर्शन करने के लिए नहीं गए। वे काशी विश्वनाथ धाम, मथुरा-वृंदावन, श्रीराम मंदिर का विरोध कर रहे थे। इन लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में कह दिया कि भगवान राम व श्रीकृष्ण हुए ही नहीं। रामभक्तों पर गोलियां चलवाने वाले  आस्था पर उपदेश दे रहे हैं! आस्था के साथ कोई खिलवाड़ स्वीकार नहीं है, जो अपराधी होगा उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी। वैश्विक पटल पर चमक रही अयोध्या सीएम ने कहा कि कभी संकरी गलियों व अव्यवस्था की पहचान बन चुकी अयोध्या में आज चारों ओर से फोर लेन कनेक्टिविटी है। ब्रॉडगेज की डबल लाइन, इंटरनेशनल एयरपोर्ट बन गया है। सपा को चार बार सरकार बनाने का मौका मिला, लेकिन उसने अयोध्या धाम के लिए कुछ नहीं किया। आज प्रधानमंत्री मोदी जी के यशस्वी नेतृत्व में अयोध्या धाम त्रेतायुग की दिव्यता व भव्यता के साथ वैश्विक पटल पर चमक रहा है। संत रविदास, महर्षि वाल्मीकि व बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर जैसे महापुरुषों की विरोधी समाजवादी पार्टी व कांग्रेस ने सिर्फ अपने परिवार का नाम आगे बढ़ाने का काम किया।  2017 से पहले दंगा-पलायन थी पहचान सीएम योगी कहा कि 2017 से पहले दंगा, कर्फ्यू हमारी नियति बन गई थी। कैराना व कांधला से पलायन होता था। ये सभी क्षेत्र हिंदू विहीन कर दिए गए थे। बेटी व व्यापारी सुरक्षित नहीं थे। कानून-व्यवस्था तहस नहस हो चुकी थी। 2011 में मुरादाबाद में डीआईजी पर हमला किया गया। उपद्रवी उन्हें मरा हुआ समझ छोड़कर चले गए। सपा सरकार ने उपद्रवियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की, बल्कि उनके केस वापस लेने का कुत्सित प्रयास कर रही थी। हमारी सरकार ने उन सभी उपद्रवियों को सजा दिलाई। मजबूत कानून-व्यवस्था अब यूपी की नई पहचान है। कब्रिस्तान की बाउंड्री बनाने में लगता था पैसा मुख्यमंत्री ने कांग्रेस व समाजवादी पार्टी के नेताओं के दोहरे चरित्र पर सवाल उठाते हुए पूछा कि उनकी आस्था तब कहां थी जब कांवड़ यात्राओं, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और दुर्गा पूजा के पंडालों पर प्रतिबंध लगाए जाते थे और विकास का पैसा या तो सपा के गुर्गों द्वारा खा लिया जाता था या कब्रिस्तान की बाउंड्री बनाने में खर्च हो जाता था। आज वही पैसा मां शाकंभरी कॉरिडोर, इकोनॉमिक कॉरिडोर, फोर व टू लेन सड़क, पुल, विश्वविद्यालय, स्पोर्ट्स कॉलेज, सरसावा में सिविल टर्मिनल निर्माण, रनवे की लंबाई बढ़ाने और वुड कार्विंग के कारीगरों का जीवन स्तर उठाने में खर्च हो रहा है। यह दृष्टिकोण का अंतर है। सपा को केवल सैफई की चिंता होती थी, जबकि डबल इंजन सरकार सभी 75 जनपदों, 1,07,000 गांवों, 57,000 ग्राम पंचायतों, 825 विकास खंडों, 12,000 वार्डों और 762 नगर निकायों की चिंता करती है। कनेक्टिविटी व इंफ्रास्ट्रक्चर से अर्थव्यवस्था को नई उड़ान सहारनपुर की बदलती तस्वीर का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने ₹12,000 करोड़ की लागत से बने दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर (ग्रीन फील्ड कॉरिडोर) का विशेष जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस कॉरिडोर के शुरू होने से दिल्ली व सहारनपुर के बीच की दूरी महज डेढ़ घंटे की रह गई है। अब सहारनपुर एयर कनेक्टिविटी के लिए भी पूरी तरह तैयार हो रहा है। सरसावा में सिविल टर्मिनल के निर्माण और रनवे के विस्तार का कार्य तेजी से चल रहा है, जिससे जल्द ही सहारनपुर का अपना चालू एयरपोर्ट होगा और यहां के नागरिकों को दिल्ली या देहरादून जाने की बाध्यता नहीं रहेगी।   मां शाकंभरी देवी का भव्य एलिवेटेड कॉरिडोर धार्मिक व सांस्कृतिक धरोहरों के पुनरुद्धार पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि मां शाकंभरी देवी के दरबार में श्रद्धालुओं की सुगमता के लिए एक भव्य एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण युद्ध स्तर पर चल रहा है। पिछले दिनों शिवालिक की पहाड़ियों में अचानक हुई भारी वर्षा के दौरान प्रशासनिक मुस्तैदी और समय पर जारी अलर्ट के कारण जन-धन की हानि रोकने में सफलता मिली थी। भविष्य में मौसम चाहे कैसा भी हो, श्रद्धालुओं का आवागमन बाधित न हो, इसके लिए एलिवेटेड कॉरिडोर और बेहतरीन फैसिलिटेशन सेंटर का निर्माण कराया जा रहा है, जो पहले की सरकारों के लिए सपना था। सहारनपुर के कारीगरों व हस्तशिल्पियों ने विपरीत परिस्थितियों में भी वुड कार्विंग की परंपरा को जीवित रखा। यहां से 600 करोड़ रुपये से अधिक के वुड कार्विंग उत्पादों का निर्यात किया गया है। सहारनपुर में सुनिश्चित किया चौतरफा विकास मुख्यमंत्री ने कहा कि सहरानपुर का अपना मेडिकल कॉलेज भी बन गया है। इसके प्रथम चरण का काम पूरा हो चुका है … Read more

कानपुर-कबरई ग्रीनफील्ड हाईवे को मिली मंजूरी, सीएम योगी ने पीएम मोदी का जताया आभार

कानपुर-कबरई ग्रीनफील्ड हाईवे को मंजूरी मिलने पर सीएम योगी ने पीएम मोदी का जताया आभार बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे और कानपुर रिंग रोड को मिलेगी निर्बाध कनेक्टिविटी 117.7 किमी लंबे हाईवे पर खर्च किए जाएंगे 7,145 से अधिक करोड़ रुपये लखनऊ,   उत्तर प्रदेश को बेहतर सड़क संपर्क और औद्योगिक विकास की दिशा में एक बड़ी सौगात मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने कानपुर-कबरई एक्सेस कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड हाईवे के निर्माण को मंजूरी दे दी है।  7,145 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनने वाली इस परियोजना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि 'विकसित उत्तर प्रदेश' के संकल्प को नई शक्ति देने वाले इस दूरदर्शी निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का हार्दिक आभार। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पोस्ट में लिखा कि भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का यह महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे और कानपुर रिंग रोड को निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। इससे आवागमन सुगम होगा, निवेश को नई गति मिलेगी और क्षेत्र के औद्योगिक विकास को सुदृढ़ आधार प्राप्त होगा। डेढ़ घंटे में पूरा होगा सफर राष्ट्रीय राजमार्ग-34 के अंतर्गत बनने वाला यह 117.7 किलोमीटर लंबा चार लेन का एक्सेस कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड हाईवे भविष्य में छह लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा। इस हाईवे के बनने के बाद कानपुर से कबरई तक का सफर, जो अभी करीब साढ़े तीन घंटे में पूरा होता है, वह घटकर करीब डेढ़ घंटे रह जाएगा। बुंदेलखंड और मध्य प्रदेश को मिलेगा फायदा यह हाईवे कानपुर, कबरई, सागर, भोपाल और मध्य प्रदेश के अन्य क्षेत्रों के बीच तेज और सुगम संपर्क उपलब्ध कराएगा। इससे उत्तर प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों का जुड़ाव मध्य प्रदेश के खनिज, कृषि और विनिर्माण क्षेत्रों से और मजबूत होगा। इससे व्यापार, उद्योग और माल परिवहन को भी गति मिलेगी। रोजगार के नए अवसर इस परियोजना के निर्माण से बड़ी संख्या में रोजगार का भी सृजन होगा। अनुमान है कि निर्माण कार्य के दौरान करीब 1.2 करोड़ मानव-दिवस प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इससे स्थानीय लोगों को भी रोजगार मिलने की संभावना बढ़ेगी।

योगी सरकार के प्रयासों से UP में आर्द्रभूमियों का संरक्षण तेज, पर्यावरण संरक्षण को मिली नई रफ्तार

योगी सरकार के प्रयासों से उत्तर प्रदेश में तेजी से हो रहा आर्द्रभूमियों का संरक्षण 26 जिलों की 101 आर्द्रभूमियां हो चुकी हैं अधिसूचित, 36 जिलों से नए प्रस्ताव मिले जल संरक्षण, पर्यावरण और जैव विविधता को बचाने के लिए सरकार चला रही विशेष अभियान लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार राज्य की आर्द्रभूमियों (वेटलैंड) के संरक्षण और विकास पर लगातार काम कर रही है। वेटलैंड (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत प्रदेशभर में आर्द्रभूमियों की पहचान, सीमांकन और अधिसूचना की प्रक्रिया तेज गति से चल रही है।      मुख्य सचिव के समक्ष हुए प्रस्तुतीकरण के अनुसार, प्रदेश के 75 जिलों में से 26 जिलों की 101 आर्द्रभूमियों को अब तक अधिसूचित किया जा चुका है। इनमें कानपुर नगर सहित गोरखपुर, बाराबंकी, महाराजगंज, प्रयागराज, आगरा, सहारनपुर, कुशीनगर, उन्नाव और अन्य जिले शामिल हैं। इन आर्द्रभूमियों का कुल क्षेत्रफल लगभग 2750 हेक्टेयर है। वहीं 36 जिलों से 44 नई आर्द्रभूमियों को अधिसूचित करने के प्रस्ताव भी सरकार को प्राप्त हुए हैं। इसलिए जरूरी हैं आर्द्रभूमियां आर्द्रभूमियां केवल तालाब या झील नहीं होतीं, बल्कि ये प्रकृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराने, भूजल स्तर बनाए रखने, सिंचाई में मदद करने, बाढ़ और सूखे के प्रभाव को कम करने, मछली पालन और अन्य आजीविका के साधन उपलब्ध कराने के साथ-साथ पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं के सुरक्षित आवास के रूप में भी काम करती हैं। इसके अलावा ये पर्यावरण को संतुलित रखने और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में भी अहम भूमिका निभाती हैं। सीमांकन और संरक्षण पर विशेष जोर योगी सरकार आर्द्रभूमियों की सीमाओं का वैज्ञानिक तरीके से निर्धारण भी करा रही है ताकि उन पर अतिक्रमण न हो और उनका संरक्षण बेहतर ढंग से किया जा सके। प्रदेश के सभी 75 जिलों में 14,562 स्थानों पर सीमा निर्धारण का कार्य पूरा किया जा चुका है। अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की तैयारी सरकार राज्य की प्रमुख आर्द्रभूमियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए भी प्रयास कर रही है। इसके लिए रामसर साइट के मानकों के अनुरूप आवश्यक दस्तावेज, मानचित्र, फोटोग्राफ और अन्य तकनीकी जानकारी तैयार की जा रही है, ताकि उत्तर प्रदेश की अधिक से अधिक आर्द्रभूमियां वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सके।

UP में इको क्लब्स को बड़ी सौगात, योगी सरकार ने ₹65.64 करोड़ की फंडिंग को दी मंजूरी

पर्यावरण संरक्षण को नई गति, योगी सरकार ने इको क्लब्स के लिए जारी की ₹65.64 करोड़ की लिमिट – प्रत्येक परिषदीय विद्यालय को ₹5,000 की दर से उपलब्ध कराई गई लिमिट – इको क्लब्स के गठन, कार्य एवं दायित्व, मासिक गतिविधि कैलेंडर और सुझावात्मक गतिविधियां भी जारी – जल संरक्षण, ऊर्जा बचत, ई-वेस्ट प्रबंधन और सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त अभियान पर रहेगा विशेष फोकस लखनऊ योगी सरकार ने पर्यावरण संरक्षण को नई गति देने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में समग्र शिक्षा अंतर्गत 'इको क्लब्स फॉर मिशन लाइफ' की गतिविधियों के क्रियान्वयन हेतु लगभग ₹65.64 करोड़ (₹6563.95 लाख) की लिमिट जारी कर दी है। इसके अंतर्गत प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालयों को ₹5,000 प्रति विद्यालय की दर से लिमिट उपलब्ध कराई जाएगी। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों, सहायक लेखा अधिकारियों, खंड शिक्षा अधिकारियों एवं जिला समन्वयकों को निर्देश दिए हैं कि जारी की गई लिमिट का तीन दिन के भीतर विद्यालयों को हस्तांतरण सुनिश्चित कराया जाए। साथ ही इको क्लब्स के उद्देश्य, गठन, अधिसूचना, कार्य एवं दायित्व, मासिक गतिविधि कैलेंडर तथा सुझावात्मक गतिविधियों के अनुरूप समयबद्ध क्रियान्वयन भी सुनिश्चित किया जाए।  निर्धारित मदों में होगा लिमिट का उपयोग प्रत्येक विद्यालय को उपलब्ध कराई गई ₹5,000 की लिमिट का उपयोग निर्धारित मदों में किया जाएगा। इसमें इको क्लब की गतिविधियां, जागरूकता कार्यक्रम, पौधरोपण, कम्पोस्ट निर्माण, आवश्यक शिक्षण सामग्री, स्टेशनरी तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी अन्य गतिविधियां शामिल हैं। विद्यालयों को निर्धारित वित्तीय मानकों का पालन करते हुए व्यय करना होगा तथा सभी खर्च के अभिलेख सुरक्षित रखना होगा। अभिभावकों, स्थानीय निकायों तथा समुदाय की भागीदारी पर विशेष बल योगी सरकार ने विद्यालय प्रबंधन समिति, अभिभावकों, स्थानीय निकायों तथा समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया है। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यक्रमों को विद्यालय परिसर से बाहर समाज तक पहुंचाने का भी लक्ष्य रखा गया है। सभी विद्यालयों को इको क्लब गठन, गतिविधियों, फोटो, वीडियो तथा प्रगति रिपोर्ट निर्धारित पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। बेसिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी एवं जिला स्तर के अधिकारी नियमित समीक्षा करेंगे। प्रत्येक विद्यालय में गठित होगा इको क्लब निर्देशों के अनुसार सभी पात्र प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालयों में इको क्लब्स फॉर मिशन लाइफ का गठन किया जाएगा। प्रधानाध्यापक क्लब के संरक्षक होंगे, जबकि एक शिक्षक को प्रभारी बनाया जाएगा। विभिन्न कक्षाओं के छात्र-छात्राओं को क्लब से जोड़कर उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। क्लब की अधिसूचना जारी होगी, उसका पंजीकरण निर्धारित पोर्टल पर कराया जाएगा तथा विद्यालय स्तर पर नियमित बैठकें आयोजित की जाएंगी। प्रत्येक गतिविधि का अभिलेखीकरण और समय-समय पर उसकी समीक्षा भी की जाएगी। मिशन लाइफ के सात विषयों पर होगा विशेष फोकस इको क्लब्स के माध्यम से विद्यार्थियों को लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट (मिशन लाइफ) के सात प्रमुख विषयों से जोड़ा जाएगा। इनमें स्वस्थ एवं सतत जीवनशैली अपनाना, टिकाऊ खाद्य प्रणाली को बढ़ावा देना, जल संरक्षण, ऊर्जा संरक्षण, कचरा कम करना एवं पुनर्चक्रण, ई-वेस्ट प्रबंधन तथा सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग में कमी लाना शामिल है। उद्देश्य विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना और दैनिक जीवन में पर्यावरण अनुकूल व्यवहार को बढ़ावा देना है। मासिक कैलेंडर के अनुसार चलेंगी गतिविधियां आदेश के साथ जुलाई से मार्च तक का विस्तृत गतिविधि कैलेंडर भी साझा किया गया है। जुलाई में पौधरोपण एवं हरित परिसर, अगस्त में किचन गार्डन और कम्पोस्ट निर्माण, सितंबर में ई-वेस्ट प्रबंधन, अक्टूबर में कचरा पृथक्करण एवं पुनर्चक्रण, नवंबर में ऊर्जा संरक्षण, दिसंबर में जल संरक्षण, जनवरी में सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त अभियान तथा फरवरी और मार्च में स्वच्छता, जैव विविधता संरक्षण एवं विश्व जल दिवस से संबंधित गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इसके अतिरिक्त पोस्टर, निबंध, चित्रकला, प्रश्नोत्तरी, रैली, शपथ, प्रदर्शनी और जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों तथा समुदाय को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाएगा। विद्यालय स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप अतिरिक्त गतिविधियां भी आयोजित कर सकेंगे।

तुष्टिकरण छोड़कर श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पक्ष में खुलकर बोलें सपा अध्यक्ष: सीएम योगी

रामभक्तों पर लाठी-गोली चलाने का देर-सबेर सार्वजनिक पश्चाताप करेंगे अखिलेश: सीएम योगी मुरादाबाद नगर, मुरादाबाद देहात एवं कुंदरकी विधानसभा क्षेत्रों, नगर निगम व मुरादाबाद विकास प्राधिकरण की 365 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 63 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास किया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुष्टिकरण छोड़कर श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पक्ष में खुलकर बोलें सपा अध्यक्ष: सीएम योगी कुंदरकी उप चुनाव में जनता ने बता दिया कि अब बाबर का नहीं, रामराज ही चलेगा: मुख्यमंत्री गुरु जम्भेश्वर मंदिर कॉरिडोर का होगा विकास, लाइनपार क्षेत्र का नाम बदलकर 'दाऊ दयाल खन्ना नगर' किया जाएगा मुरादाबाद  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि क्या उन्हें कुछ सद्बुद्धि आई है या जनता की आंख में धूल झोंक रहे हैं। वह कह रहे हैं कि उनकी सरकार बनी तो अयोध्या को चमकाएंगे, जबकि पीएम मोदी के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार पहले ही अयोध्या का अभूतपूर्व विकास कर चुकी है। वहां अब उनके सहयोग की कोई आवश्यकता नहीं। लेकिन, इस बात के लिए धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने आखिरकार अयोध्या को स्वीकार किया। यह भाजपा की वैचारिक विजय है। देर-सवेर सपा मुखिया भी भगवान श्रीराम का संकीर्तन करते दिखाई देंगे और रामभक्तों पर लाठी-गोली चलाने के पाप का सार्वजनिक पश्चाताप करेंगे। मुख्यमंत्री सोमवार को मुरादाबाद में मुरादाबाद नगर, मुरादाबाद देहात एवं कुंदरकी विधानसभा क्षेत्रों, नगर निगम व मुरादाबाद विकास प्राधिकरण की 365 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 63 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास करने के उपरांत जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दानवीर भामाशाह जी की जयंती पर उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और व्यापारी कल्याण दिवस पर व्यापारियों को सम्मान पत्र वितरित किए। सीएम ने कार्यक्रम स्थल में लगे स्टाल्स का निरीक्षण किया। उन्होंने एक नन्ही बच्ची को गोद में लेकर चम्मच से दूध पिलाकर दुलारा और उसे खिलौना भी दिया। सीएम योगी ने नगर निगम की कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया। श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पक्ष में बोलें अखिलेश यादव मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या को डबल इंजन सरकार पहले ही नई पहचान दे चुकी है। फोरलेन सड़क संपर्क, रेलवे की डबल लाइन, महर्षि वाल्मीकि के नाम पर एयरपोर्ट, निषादराज के नाम पर रैन बसेरे, माता शबरी के नाम पर भोजनालय और राम की पैड़ी जैसे कार्य सरकार ने कराए हैं। अब समय मथुरा-वृंदावन और बांके बिहारी क्षेत्र के विकास का है। अखिलेश यादव वास्तव में धार्मिक आस्था का सम्मान करना चाहते हैं तो उन्हें खुलकर मथुरा-वृंदावन और श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पक्ष में बोलना चाहिए। तुष्टिकरण से उबरना चाहिए। तभी जनता उनके बदले हुए रुख पर विश्वास करेगी। समाजवादी पार्टी की सोच बाबरी वाली मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा की बाबरी सोच है। यह समाज को जाति, क्षेत्र व भाषा के नाम पर बांटने का काम करती है। संभल का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि यदि समाज जागरूक रहता तो वहां के प्राचीन हरिहर मंदिर, 67 तीर्थों और 19 प्राचीन कुओं पर किसी प्रकार का अतिक्रमण या क्षति नहीं होती। समाज को अपनी विरासत और संस्कृति की रक्षा के लिए सदैव सजग रहना चाहिए। बाबर का नहीं, रामराज ही चलेगा मुख्यमंत्री ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश में दंगे, कर्फ्यू व उपद्रव नहीं होते। कुंदरकी विधानसभा उपचुनाव में जनता ने साबित कर दिया कि अब बाबर का नहीं, रामराज ही चलेगा। लोगों ने विकास व सुशासन के पक्ष में मतदान किया और भाजपा प्रत्याशी ठाकुर रामवीर सिंह को विजयी बनाया। पहले सरकारी धन कब्रिस्तानों की बाउंड्री बनाने और तुष्टीकरण की राजनीति पर खर्च होता था, जबकि आज वही धन मंदिरों के पुनरुद्धार, धार्मिक स्थलों के सौंदर्यीकरण, रामायण वाटिका, संविधान वाटिका और सेना के शौर्य को सम्मानित करने वाले कार्यों पर लगाया जा रहा है। श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम, नैमिषारण्य, विदुर कुटी और मथुरा-वृंदावन सहित अनेक धार्मिक स्थलों का अभूतपूर्व विकास किया गया है। प्रदेश में विरासत और विकास दोनों साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं। नो कर्फ्यू, नो दंगा यूपी में सब चंगा मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में अब "नो कर्फ्यू, नो दंगा, यूपी में सब चंगा” की स्थिति है। सरकार अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। कोई बेटी की सुरक्षा से खिलवाड़ करेगा, व्यापारी का अपहरण करेगा, नौजवान की नौकरी में सेंध लगाएगा या किसान के अधिकारों का हनन करेगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। समाजवादी पार्टी की साइकिल पंक्चर हो चुकी मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा की राजनीतिक जमीन लगातार कमजोर हुई है। जनता ने विकास व सुशासन को चुना है। अराजकता व तुष्टीकरण की राजनीति को नकार दिया। सपा की साइकिल अब पंक्चर हो चुकी है, उसकी गति समाप्त हो गई है। अब उसके आगे बढ़ने की कोई संभावना नहीं बची है। यदि विपक्ष राम का नाम लेता है तो यह भी सकारात्मक परिवर्तन है और इससे उसका भविष्य में भला ही होगा। गुरु जम्भेश्वर मंदिर कॉरिडोर का होगा विकास मुख्यमंत्री ने मुरादाबाद के लिए महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि सरकार गुरु जम्भेश्वर के प्राचीन मंदिर के कॉरिडोर विकास का कार्य करेगी। यह स्थल प्रदेश की धार्मिक व सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है और सरकार इसके संरक्षण एवं विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेगी। गुरु जम्भेश्वर के नाम पर विश्वविद्यालय की स्थापना और मंदिर परिसर के समग्र विकास से मुरादाबाद की नई पहचान बनेगी। लाइनपार क्षेत्र का नाम होगा दाऊ दयाल खन्ना नगर मुख्यमंत्री ने श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के वरिष्ठ नेता और मुरादाबाद की विभूति दाऊ दयाल खन्ना को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए घोषणा की कि लाइनपार क्षेत्र का नाम बदलकर 'दाऊ दयाल खन्ना नगर' किया जाएगा। वर्ष 1983 में गठित श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति में उनके पूज्य गुरुदेव महंत अवेद्यनाथ अध्यक्ष थे, जबकि दाऊ दयाल खन्ना महासचिव के रूप में पूरे आंदोलन से जुड़े रहे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन को समर्पित किया। सरकार उनके योगदान को सम्मान देने के लिए यह निर्णय ले रही है। दानवीर भामाशाह का जीवन त्याग व राष्ट्रभक्ति की मिसाल मुख्यमंत्री ने कहा कि दानवीर भामाशाह का जीवन त्याग, राष्ट्रभक्ति और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण है। हल्दीघाटी युद्ध के बाद जब महाराणा प्रताप के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया और उनके पास संसाधन नहीं बचे। तब भामाशाह ने अपनी … Read more

मुरादाबाद में CM योगी का अनोखा अंदाज, दो अनजान बच्चियों के हाथों कराया ‘श्री राम वाटिका’ का लोकार्पण

मुरादाबाद में दिखा सीएम योगी का वात्सल्य: दो अनजान बच्चियों के हाथों कराया 'श्री राम वाटिका' का लोकार्पण मुरादाबाद विकास और विरासत के संगम के बीच मुरादाबाद में एक भावुक नजारा देखने को मिला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जब करोड़ों रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं का लोकार्पण किया, तो सबसे खास और भावुक पल 'श्री राम वाटिका' के उद्घाटन का रहा। इस भव्य वाटिका का लोकार्पण किसी राजनेता या अधिकारी ने नहीं, बल्कि वहां मौजूद दो नन्ही बच्चियों वांची और आची ने मुख्यमंत्री के सानिध्य में किया। मुख्यमंत्री और नन्ही बच्चियों का पुराना है स्नेह का नाता मुख्यमंत्री के साथ फीता काटने वाली छह वर्षीय वांची और उसकी छोटी बहन आची का सीएम योगी से यह स्नेहिल जुड़ाव नया नहीं है। दरअसल, इसके पीछे एक बेहद भावुक कहानी है। मुरादाबाद के रहने वाले इन बच्चियों के पिता अमित कुमार अपनी बेटी वांची के स्कूल एडमिशन को लेकर तीन महीने से परेशान चल रहे थे। इसके बाद, जून 2025 में उन्होंने ‘जनता दर्शन’ में बेटी के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर अपनी गुहार लगाई थी। महज तीन घंटे में दूर की थी पिता की परेशानी बच्चों के प्रति विशेष स्नेह रखने वाले मुख्यमंत्री ने न केवल उनकी फरियाद सुनी थी, बल्कि महज तीन घंटे के भीतर उनकी समस्या का समाधान भी कर दिया था। सीएम के त्वरित निर्देश पर आरटीई के तहत उसी दिन सोमवार दोपहर को वांची का एडमिशन मुरादाबाद के प्रतिष्ठित 'सीएल गुप्ता वर्ल्ड स्कूल' में हो गया था।  सुरक्षा घेरे के बीच बेटियों को दिया सम्मान श्री राम वाटिका के लोकार्पण के दौरान जब मुख्यमंत्री का काफिला पहुंचा, तो उनसे मिलने यह दोनों बच्चियों भी पहुंची थी। एक पल की भी देरी किए बिना, मुख्यमंत्री ने पूरे वात्सल्य के साथ उन दोनों बहनों को अपने पास बुलाया और उन्हीं नन्हे हाथों से इस भव्य श्री राम वाटिका का फीता कटवाकर इसे जनता को समर्पित कर दिया। बच्चियों के चेहरों की मुस्कान और इस अनूठे पल ने वहां मौजूद हर शख्स का दिल जीत लिया।