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नव भारत साक्षरता अभियान में बड़ी सफलता, योगी सरकार ने 11.68 लाख से अधिक लोगों को बनाया साक्षर

नव भारत साक्षरता अभियान: योगी सरकार ने 11.68 लाख से अधिक लोगों को बनाया साक्षर – 15 वर्ष से अधिक आयु के असाक्षरों को साक्षर बनाने के लिए प्रदेशभर में चलाया जा रहा नव भारत साक्षरता कार्यक्रम – वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक 13.81 लाख प्रतिभागियों ने दी साक्षरता परीक्षा – 11.68 लाख से अधिक नव साक्षरों ने सफलतापूर्वक हासिल की साक्षरता – वर्ष 2026-27 में भी व्यापक अभियान चलाकर निरक्षरता उन्मूलन को दी जाएगी नई गति लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और निरक्षरता मुक्त प्रदेश के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। इसी क्रम में संचालित नव भारत साक्षरता कार्यक्रम लाखों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन रहा है।  15 वर्ष से अधिक आयु के असाक्षर व्यक्तियों को साक्षर बनाने के उद्देश्य से संचालित इस अभियान के तहत वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक प्रदेश में 11.68 लाख से अधिक लोगों को साक्षर बनाया जा चुका है। यह अभियान शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भरता, जागरूकता और सामाजिक सशक्तीकरण को नई मजबूती दे रहा है। केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत 15 वर्ष से अधिक आयु के असाक्षर नागरिकों को चिह्नित कर वालंटियर्स और प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स के सहयोग से साक्षर बनाया जा रहा है। कार्यक्रम के अन्तर्गत लाभार्थियों को पढ़ना, लिखना और गणना करना सिखाने के साथ-साथ दैनिक जीवन में उपयोगी बुनियादी ज्ञान से भी जोड़ा जा रहा है, जिससे वे सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों में अधिक प्रभावी भागीदारी कर सकें। लाखों लोगों को साक्षर बनाकर सरकार न केवल निरक्षरता के खिलाफ लड़ाई को मजबूती दे रही है, बल्कि आत्मनिर्भर, जागरूक और सशक्त उत्तर प्रदेश के निर्माण की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। घर-घर पहुंच रही शिक्षा की रोशनी अभियान के अंतर्गत चिह्नित वालंटियर्स को प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। इसके बाद वालंटियर्स ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से साक्षरता कक्षाओं का संचालन करते हैं। प्रदेशभर में संचालित ये कक्षाएं हजारों लोगों के जीवन में नया आत्मविश्वास पैदा कर रही हैं। सरकार का उद्देश्य केवल अक्षर ज्ञान उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि नागरिकों को जागरूक, सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना भी है। 13.81 लाख प्रतिभागियों ने दी परीक्षा, 11.68 लाख हुए सफल नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश में अब तक सात साक्षरता मूल्यांकन परीक्षाएं आयोजित की जा चुकी हैं। इन परीक्षाओं में कुल 13,81,530 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें से 11,68,292 प्रतिभागी सफल घोषित हुए। वर्ष 2022-23 में आयोजित परीक्षा में 1.46 लाख से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जबकि वर्ष 2025-26 में आयोजित नवीनतम परीक्षा में 4.01 लाख से अधिक प्रतिभागियों की सहभागिता दर्ज की गई। यह आंकड़े अभियान की बढ़ती पहुंच और प्रभावशीलता के गवाह हैं। वर्ष 2026-27 के लिए तैयार नई कार्ययोजना योगी सरकार नव भारत साक्षरता कार्यक्रम को वर्ष 2026-27 में और अधिक व्यापक एवं परिणामोन्मुख बनाने की तैयारी कर चुकी है। भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्रदेश के सभी जनपदों को 15 वर्ष से अधिक आयु के असाक्षर व्यक्तियों को चिह्नित कर उन्हें साक्षर बनाने का लक्ष्य सौंपा गया है। इसके अंतर्गत चिह्नित असाक्षरों को वालंटियर्स से जोड़ा जाएगा, जिन्हें प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स द्वारा विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इसके बाद वालंटियर्स ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से साक्षरता कक्षाओं का संचालन करेंगे। अभियान की प्रगति का नियमित अनुश्रवण होगा तथा भारत सरकार के निर्देशानुसार वर्ष में दो बार साक्षरता मूल्यांकन परीक्षाएं आयोजित कर नव साक्षरों की उपलब्धियों का आकलन किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक लोगों को शिक्षा से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर, जागरूक और समाज की मुख्यधारा का सक्रिय भागीदार बनाना है।

योगी सरकार की औद्योगिक नीति का असर, पांच जिलों में विकसित हो रहे आधुनिक टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क

उत्तर प्रदेश में टेक्सटाइल हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम, संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क योजना को मिली रफ्तार योगी सरकार की औद्योगिक नीति का असर, पांच जिलों में विकसित हो रहे आधुनिक टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क वाराणसी, अमरोहा, बरेली, संत कबीर नगर और बिजनौर में 326 एकड़ से अधिक भूमि पर पीपीपी मॉडल से होंगे पार्क विकसित-योगी भूमि हस्तांतरण से लेकर प्री-फिजिबिलिटी और आधारभूत सुविधाओं के कार्यों में तेजी लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख टेक्सटाइल एवं परिधान विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क योजना तेजी से आगे बढ़ रही है। योगी सरकार ने वाराणसी, अमरोहा, बरेली, संत कबीर नगर और बिजनौर में पांच बड़े टेक्सटाइल पार्क विकसित करने की योजना बनाई है। इन पार्कों के लिए कुल 326 एकड़ से अधिक भूमि चिह्नित की गई है और सभी भूमि पार्सलों के हस्तांतरण को मंत्रिमंडल की मंजूरी भी मिल चुकी है।    इस योजना के तहत वाराणसी के रामना में 75 एकड़, अमरोहा में 79.825 एकड़, बरेली के बहेड़ी में 79.580 एकड़, संत कबीर नगर के मगहर में 39.490 एकड़ तथा बिजनौर के नगीना में 52.910 एकड़ भूमि पर पार्क विकसित किए जाएंगे। सभी परियोजनाएं सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर स्थापित होंगी। सरकार का लक्ष्य निवेश आकर्षित करने के साथ-साथ प्रदेश में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन करना है।    परियोजना के क्रियान्वयन के लिए प्राधिकरण गठन की अधिसूचना जारी की जा चुकी है तथा भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। राष्ट्रीय वस्त्र अनुसंधान संस्था (NITRA) द्वारा वाराणसी पार्क की प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट प्रस्तुत की जा चुकी है, जबकि शेष चार पार्कों की संशोधित प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार की जा रही है। उद्योग जगत के सुझावों को शामिल करते हुए इन रिपोर्टों को अंतिम रूप दिया जाएगा।    वाराणसी के रामना टेक्सटाइल पार्क को शीघ्र विकसित करने के लिए संपर्क मार्ग निर्माण का कार्य भी आगे बढ़ रहा है। सड़क निर्माण के लिए निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद अनुबंध की कार्यवाही प्रगति पर है। वहीं बिजली आपूर्ति के लिए 132 केवी उपकेंद्र, ट्रांसमिशन लाइन और 33 केवी विद्युत अवसंरचना की रूपरेखा तैयार की गई है, जिससे पार्क को निर्बाध विद्युत उपलब्ध कराई जा सके।     योगी सरकार पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप परियोजनाओं को विकसित करने पर भी विशेष जोर दे रही है। पर्यावरण स्वीकृति, भूजल उपयोग और वन विभाग की अनापत्ति से संबंधित प्रक्रियाएं जारी हैं। इसके साथ ही चार अन्य पार्कों के लिए मास्टर डेवलपर चयन हेतु पीपीपी आधारित निविदा दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं। उद्योगों से मिले सकारात्मक प्रतिसाद के बाद सरकार को इन परियोजनाओं में बड़े निवेश की उम्मीद है।    राज्य सरकार का मानना है कि संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क योजना उत्तर प्रदेश को टेक्सटाइल निर्माण, रेडीमेड गारमेंट्स, तकनीकी वस्त्र और निर्यात के क्षेत्र में नई पहचान दिलाएगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के हजारों अवसर सृजित होंगे और प्रदेश की एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी।

योगी सरकार देने जा रही पांच नये एकीकृत आयुष चिकित्सालय एवं महाविद्यालय की सौगात

योगी सरकार देने जा रही पांच नये एकीकृत आयुष चिकित्सालय एवं महाविद्यालय की सौगात  आयुष शिक्षा को नई उड़ानः देवीपाटन, मीरजापुर, मेरठ, आगरा और बस्ती मंडल में स्थापित होंगे संस्थान चार मंडलों में जमीन पहले ही आयुष विभाग के नाम दर्ज है, बस्ती में भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया अंतिम चरण में  आयुष शिक्षा का दायरा बढ़ेगा और स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी -योगी   भारत की पारंपरिक चिकित्सा विरासत को मजबूत करने की दिशा में लगातार कार्य कर रहे हैं सीएम योगी लखनऊ,  योगी सरकार आयुष चिकित्सा प्रणाली को मजबूत बनाने और प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के विस्तार की दिशा में लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इसी क्रम में योगी सरकार ने पांच नए एकीकृत आयुष चिकित्सालय और महाविद्यालयों की स्थापना का निर्णय लिया है। ये आयुष चिकित्सालय और महाविद्यालय गोंडा, मीरजापुर, मेरठ, आगरा और बस्ती मंडल में स्थापित किए जाएंगे, जहां विद्यार्थियों को आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के साथ-साथ आधुनिक स्वास्थ्य विज्ञान की शिक्षा भी उपलब्ध कराई जाएगी। योगी सरकार के निर्णय से न केवल प्रदेश में आयुष शिक्षा का दायरा बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी। नए महाविद्यालयों के माध्यम से युवाओं को चिकित्सा शिक्षा के अधिक अवसर मिलेंगे और आयुष चिकित्सा के क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार होगा। चार मंडलों में जमीन पहले से उपलब्ध प्रमुख सचिव, आयुष रंजन कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ-साथ भारत की पारंपरिक चिकित्सा विरासत को भी मजबूत करने की दिशा में लगातार कार्य कर रहे हैं ताकि प्रदेशवासियों को सुरक्षित, सस्ती तथा प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकें। ऐसे में सीएम योगी के निर्देश पर पांच नये एकीकृत आयुष चिकित्सालय और महाविद्यालय के लिए पांच मंडलों में जमीन को चिन्हित कर लिया गया है। देवीपाटन मंडल में गोंडा के विकास खंड वजीरगंज के ग्राम कोडर में लगभग 14.82 एकड़ भूमि, मीरजापुर मंडल में सदर तहसील के ग्राम अकोढ़ी में 13.83 एकड़ भूमि, मेरठ मंडल के लिए गाजियाबाद के मोदीनगर तहसील के ग्राम सैदपुर हुसैनपुर डलना में 11 एकड़ भूमि, आगरा मंडल में किरावली तहसील के ग्राम अकबरा में 13.5 एकड़ भूमि और बस्ती मंडल में हर्रैया तहसील के ग्राम जोगापुर में 15 एकड़ भूमि महाविद्यालय की  स्थापना के लिए चिन्हित की गयी है। इनमें से चार मंडलों में जमीन पहले ही आयुष विभाग के नाम दर्ज है, जबकि बस्ती में भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। शिक्षा संस्थान शोध और नवाचार के केंद्र के रूप में भी किए जाएंगे विकसित आयुष महानिदेशक एवं मिशन निदेशक चैत्रा वी. ने बताया कि सभी पांच मंडलों में आयुष महाविद्यालय के लिए जमीन उपलब्ध हो गयी है। वहीं वर्तमान में राजकीय एकीकृत आयुष महाविद्यालय एवं चिकित्सालय का नक्शा तैयार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नए आयुष महाविद्यालय केवल शिक्षा संस्थान नहीं होंगे, बल्कि शोध और नवाचार के केंद्र के रूप में भी विकसित किए जाएंगे। यहां आयुर्वेदिक औषधियों, योग चिकित्सा, जीवनशैली आधारित उपचार और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों पर अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे भारतीय चिकित्सा परंपरा को वैज्ञानिक आधार पर और अधिक सशक्त बनाने में मदद मिलेगी। नए आयुष महाविद्यालयों की स्थापना से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के विद्यार्थियों को अपने ही मंडल में उच्च स्तरीय चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। इससे दूर-दराज के क्षेत्रों के छात्रों को बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। महाविद्यालयों में आधुनिक प्रयोगशालाएं, चिकित्सालय, अनुसंधान सुविधाएं और प्रशिक्षण केंद्र विकसित किए जाएंगे, जिससे आयुष शिक्षा को नई गुणवत्ता और पहचान मिलेगी।

बूढ़ी मां संग आई बेटी ने बीटेक की पढ़ाई करने के लिए लगाई गुहार, मुख्यमंत्री ने किया आश्वस्त

किसी भी निर्धन या जरूरतमंद की शिक्षा को बाधित नहीं होने देगी सरकारः मुख्यमंत्री बूढ़ी मां संग आई बेटी ने बीटेक की पढ़ाई करने के लिए लगाई गुहार, मुख्यमंत्री ने किया आश्वस्त  पुलिस की अनसुनी व कब्जे से जुड़ी शिकायतों में हीलाहवाली पर सीएम योगी सख्त, अफसरों को कड़ी मॉनीटरिंग करने का निर्देश    लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार सुबह ‘जनता दर्शन’ किया। इस दौरान प्रदेश भर से आए लोगों से उन्होंने व्यक्तिगत मुलाकात की, उनकी समस्याएं सुनीं और समस्याओं के निराकरण का निर्देश दिया। एक बच्ची ने मुख्यमंत्री से उच्च शिक्षा के लिए मदद की गुहार लगाई, जिस पर उन्होंने लखनऊ के किसी संस्थान में प्रवेश दिलाने का आदेश दिया। पुलिस की अनसुनी व अवैध कब्जे से जुड़ी शिकायतों पर सख्त सीएम योगी ने अफसरों को मॉनीटरिंग कर पीड़ितों को न्याय दिलाने का आदेश दिया।  बूढ़ी मां संग आई बेटी, खुश होकर लौटी  लखनऊ की एक बच्ची अपनी बूढ़ी मां के साथ पहुंची। उसने बताया कि इंटरमीडिएट अच्छे अंक से उत्तीर्ण किया है। वह आगे बीटेक करना चाहती है, लेकिन धन के अभाव में दिक्कत हो रही है। सीएम योगी ने उसकी मार्कशीट देखी, फिर कहा कि पढ़ाई पर ध्यान दो। आपका प्रवेश किसी अच्छे संस्थान में कराया जाएगा। सरकार किसी भी निर्धन या जरूरतमंद की शिक्षा को बाधित नहीं होने देगी। सकारात्मक संदेश पाकर प्रफुल्लित बेटी व मां ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया।  अवैध कब्जे की शिकायत पर अफसरों से बोले- ‘मॉनीटरिंग कर पीड़ितों को न्याय दिलाइए’  विभिन्न जनपदों से आए फरियादियों ने मुख्यमंत्री से पुलिस की हीलाहवाली व अवैध कब्जे को लेकर उचित कार्रवाई न होने की शिकायत करते हुए प्रार्थना पत्र सौंपा। मुख्यमंत्री ने हर प्रकरण को सुना, फिर शासन के अफसरों को प्रार्थना पत्र देते हुए कहा कि इन मामलों की मॉनीटरिंग करिए। पीड़ित को न्याय और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कराइए। सीएम ने पीड़ितों को जल्द ही समाधान के लिए आश्वस्त किया।  पहले जनपद, मंडल के अधिकारियों से अवश्य मिलिए  कुछ फरियादी ऐसे भी आए, जो सीधे ‘जनता दर्शन’ में पहुंचे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूछा कि आपने जनपद के किस अधिकारी के समक्ष अपनी बात रखी। इस पर कुछ फरियादियों ने कहा कि हम सीधे यहीं आ रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गर्मी बेतहाशा पड़ रही है। आप सभी अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें और सबसे पहले अपनी शिकायतें जनपद, मंडल स्तर के अधिकारियों से करें। कई समस्याओं का समाधान वहीं से हो जाएगा।

अच्छे जनप्रतिनिधियों से बहती है विकास की धारा: मुख्यमंत्री

माफिया को चुनकर भेजोगे तो गरीबों का खून चूसेगा: मुख्यमंत्री सीएम योगी ने बलरामपुर में 300 करोड़ से अधिक की योजनाओं का किया लोकार्पण/शिलान्यास अच्छे जनप्रतिनिधियों से बहती है विकास की धारा: मुख्यमंत्री अब किसी गरीब का राशन नहीं खा सकता है माफिया: सीएम योगी सीएम बोले- बेटी या व्यापारी की सुरक्षा में सेंध लगाने वालों को छोड़ेंगे नहीं बलरामपुर,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विकास की प्रक्रिया तब आगे बढ़ती है, जब जनता अच्छे लोगों को चुनती है। माफिया को चुनकर भेजोगे तो गरीबों का खून चूसेगा। हमने माफिया को तबाह किया, उसकी जमीनों पर गरीबों के लिए मकान बना रहे हैं। डबल इंजन की सरकार डबल स्पीड के साथ काम कर रही है। किसान, व्यापारी, महिला को सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। आज हर जनपद विकास की मुख्यधारा से जुड़ा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बलरामपुर के मध्यनगर बिलोहा में शुक्रवार को 300 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास किया। इस दौरान मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रामीण व अन्य शासकीय योजनाओं के लाभार्थियों को सम्मानित भी किया गया। सीएम ने कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की छात्राओं को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया। उन्होंने प्रगति के पथ पर अग्रसर बलरामपुर के विकास मॉडल पर जनता से सीधा संवाद भी किया। गोरखपुर से आकर करता था मदद मुख्यमंत्री ने कहा कि आज से नौ वर्ष पूर्व बलरामपुर में जब भी दुर्गा पूजा होती थी, पचपेड़वा, गैसड़ी, बलरामपुर, उतरौला आदि जगहों पर दंगे होते थे। मुझे गोरखपुर से आकर लोगों की मदद करनी पड़ती थी। आज उत्तर प्रदेश के 75 जनपद, 350 तहसीलें और 57 हजार से अधिक ग्राम पंचायतें दंगामुक्त हैं। विकास की प्रक्रिया के साथ प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। बलरामपुर के लोग 2017 से पहले कहीं जाते थे तो पहचान का संकट था। लोग माफिया से जोड़कर देखते थे। लेकिन, माफिया आज मिट्टी में मिल गए, कोई पहचान का संकट नहीं। आज बाहर जाएं और कहें कि आप यूपी से हैं तो आपको पूरा सम्मान मिलेगा। अब किसी गरीब का राशन नहीं खाता माफिया मुख्यमंत्री ने कहा कि याद करिए 2017 के पहले गरीब को राशन नहीं मिलता था। सपा के गुंडे राशन खा जाते थे। अब हर गरीब को फ्री में राशन उपलब्ध कराया जा रहा है। गांवों में आय, निवास प्रमाण पत्र की भी सुविधा दी जा रही है। गरीब के उपचार के लिए आयुष्मान कार्ड उपलब्ध कराया जा रहा है। एक ओर गरीब कल्याणकारी योजनाएं और दूसरी ओर विकास कार्य बढ़ाए गए। सभी सरकारी योजनाओं का लाभ बिना भेदभाव दिया जा रहा है। पीएम मोदी के ‘सबका साथ-सबका विकास’ विजन के तहत काम हो रहा है। सुरक्षित माहौल में हो रहा निवेश मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर किसी ने बेटी या व्यापारी की सुरक्षा में सेंध लगाई तो फिर उसको छोड़ेंगे भी नहीं। यही सरकार की घोषित नीति है। प्रदेश के सुरक्षित माहौल में आज निवेश हो रहा है। बलरामपुर सौभाग्यशाली है कि चीनी मिल द्वारा प्लास्टिक जैसे एक मैटीरियल का निर्माण हो रहा है, जो उपयोग के बाद मिट्टी में मिल जाएगा। देश का सबसे युवा राज्य है यूपी मुख्यमंत्री ने कहा कि आज यूपी की पहचान सबसे ज्यादा निवेश, रोजगार, देश के सबसे युवा राज्य के रूप में हो रही है। यूपी को अयोध्या, काशी, मां पाटेश्वरी, मां शाकम्भरी, नैमिषारण्य, श्रावस्ती, जैन तीर्थंकरों की भूमि के रूप में नई पहचान मिल रही है। यह सम्मान आपको इसलिए मिल रहा है, क्योंकि आपने अच्छे जनप्रतिनिधियों को चुनकर भेजा है। आपने कैलाशनाथ शुक्ला, राम प्रताप वर्मा, पलटूराम को जिताया।  तुलसीपुर गैसड़ी बॉर्डर पर जनसभा की बड़ी वजह मुख्यमंत्री ने कहा कि आज मैं गैसड़ी और तुलसीपुर विधानसभा के बॉर्डर पर आया हूं। मैं 2007 में तुलसीपुर आया था, तब मांग हो रही थी कि मथुरा घाट में राप्ती नदी पर पुल बने। जैसे ही आपने कैलाश नाथ शुक्ला को तुलसीपुर से विधायक बनाया, मथुरा घाट पर भी पुल की स्वीकृति मिल चुकी है। तुलसीपुर और बलरामपुर में विकास हो रहा है। गैसड़ी में शैलेंद्र सिंह शैलू विधायक होते तो तेजी से विकास लाते। अच्छे लोग चुनेंगे तो अच्छे परिणाम आएंगे। जब आप परिवारवाद से ऊपर उठे और सत्ता परिवर्तन किया तो सरकार ने गरीब को कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा। विकास, सुरक्षा व सुशासन दिया। विश्वविद्यालय दिया, गरीब बच्चों को स्कॉलरशिप दी। बलरामपुर की उपलब्धियां और पर्यावरण संरक्षण का संदेश मुख्यमंत्री ने बलरामपुर की उपलब्धियों के साथ पर्यावरण संरक्षण पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस हमें प्रेरित करता है कि जल है तो कल है। अगर हम जलस्रोत गंदा करते हैं या वन की कटान करते हैं तो पर्यावरण की क्षति होती है। पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने की कीमत मानव को चुकानी होगी। आज तुलसीपुर को 300 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। नौ वर्ष पूर्व यह आकांक्षात्मक जनपद था। नीति आयोग के मानकों में देश के सबसे पिछड़े जनपदों में यह जिला था। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार ने डबल स्पीड से काम किया तो यह जनपद विकसित होने की ओर तेजी से बढ़ा है। सीएम योगी ने कहा कि एक समय बलरामपुर में बिजली, सड़क, सरयू राष्ट्रीय परियोजना, मेडिकल कालेज या हर घर नल योजना साकार होने के बारे में कोई सोच नहीं सकता था। किसी ने थारू संग्रहालय या मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय बनाने की बात नहीं सोची होगी। हमने मां पाटेश्वरी के नाम पर विश्वविद्यालय बनाया। अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर मेडिकल कालेज का निर्माण और नानाजी देशमुख की स्मृतियों को जीवंत बनाए रखते हुए थारू संग्रहालय बनाया। वनटांगिया गांवों के लोगों को आवासीय या जमीन के पट्टे देकर नागरिकता दी। आज थारू जनजाति के लोगों के पास अपना मकान और बच्चों के लिए स्कूल है।  सर्वाधिक नामांकन बलरामपुर में हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बेसिक शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष सर्वाधिक नामांकन बलरामपुर में हुए हैं। यह शुभ लक्षण है। सीमावर्ती जनपद होने के नाते, विकास की प्रक्रिया के साथ तेजी से बढ़ रहा बलरामपुर विकास का मॉडल बन रहा है। बलरामपुर में विकास परियोजनाओं का शिलान्यास/लोकार्पण कुल परियोजनाएं: 126 लोकार्पण: 89 शिलान्यास: 37 कुल लागत: 392.25 करोड़ लोकार्पण की योजनाओं की लागत: 301.50 करोड़ शिलान्यास वाली योजनाओं की … Read more

बदायूं, गोरखपुर और लखनऊ महिला पीएसी परिसर में क्रमशः वीरांगना अवंतीबाई, झलकारीबाई तथा उदा देवी की अश्वारोही प्रतिमा स्थापित होगी: मुख्यमंत्री

आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित बल और मजबूत अवसंरचना से सशक्त होगी प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था: मुख्यमंत्री पीएसी में तैयार होगा आईसीसीसी, एक ही डिजिटल नेटवर्क में जुड़ेंगी सभी वाहिनियां पीएसी, एसडीआरएफ और यूपीएसएसएफ को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने के निर्देश बदायूं, गोरखपुर और लखनऊ महिला पीएसी परिसर में क्रमशः वीरांगना अवंतीबाई, झलकारीबाई तथा उदा देवी की अश्वारोही प्रतिमा स्थापित होगी: मुख्यमंत्री पीएसी बैंड कार्मिकों के समयबद्ध पदोन्नति के लिए नियमावली तैयार करें: मुख्यमंत्री कानून-व्यवस्था से आपदा प्रबंधन तक, सुरक्षा तंत्र के व्यापक आधुनिकीकरण पर मुख्यमंत्री का जोर, कहा सिविल पुलिस से मिलता-जुलता नहीं, विशिष्ट हो पीएसी का गणवेश संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा और आपदा प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाने की कार्ययोजना की मुख्यमंत्री ने की समीक्षा बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों के बीच पीएसी, एसडीआरएफ और यूपीएसएसएफ के सुदृढ़ीकरण पर मुख्यमंत्री का फोकस लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसी भी सुरक्षा बल की वास्तविक शक्ति उसके प्रशिक्षित, अनुशासित और तकनीकी रूप से दक्ष कार्मिक होते हैं। ऐसे में यह आवश्यक है कि सुरक्षा बलों के प्रशिक्षण व्यवस्था को अधिक व्यवहारिक और तकनीक आधारित बनाया जाए, ताकि सुरक्षा बलों के जवान हर परिस्थिति में प्रभावी और त्वरित प्रतिक्रिया देने में सक्षम हों। गुरुवार को उत्तर प्रदेश प्रांतीय आर्म्ड कांस्टेबुलरी (पीएसी), एसडीआरएफ तथा उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल (यूपीएसएसएफ) के आधुनिकीकरण, क्षमता विस्तार, प्रशिक्षण, अवसंरचना विकास एवं भावी कार्ययोजनाओं की विस्तृत समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने कहा कि पीएसी, एसडीआरएफ और यूपीएसएसएफ प्रदेश की सुरक्षा प्रणाली के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं और इन्हें भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार किया जाना चाहिए। उन्होंने पीएसी बल का गणवेश सिविल पुलिस से अलग करने की आवश्यकता भी जताई। मुख्यमंत्री ने पीएसी के डिजिटलीकरण एवं तकनीकी उन्नयन की समीक्षा करते हुए कहा कि आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था में सूचना प्रौद्योगिकी का अधिकतम उपयोग किया जाना चाहिए। बैठक में बताया गया कि सभी पीएसी वाहनों में जीपीएस एवं डैशकैम स्थापित करने तथा त्वरित प्रतिक्रिया वाहनों की व्यवस्था विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के समक्ष उत्तर प्रदेश पीएसी एकीकृत कमांड एवं नियंत्रण केंद्र (आईसीसीसी) परियोजना की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की गई। इसके माध्यम से प्रदेश की सभी पीएसी वाहिनियों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। जीपीएस आधारित वाहन ट्रैकिंग, ड्रोन एवं एआई आधारित निगरानी, लाइव कमांड एवं कंट्रोल सेंटर तथा सुरक्षित संचार प्रणाली विकसित किए जाएंगे। इससे कानून-व्यवस्था, चुनावी तैनाती, महिला सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन में बेहतर समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित होगी। मुख्यमंत्री ने महिला सुरक्षा के दृष्टिकोण से महिला बटालियनों के निर्माण कार्यों को प्राथमिकता से पूरा करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि बदायूं, लखनऊ और गोरखपुर में महिला बटालियनों का निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर हैं। मुख्यमंत्री ने तीनों बटालियन परिसर में क्रमशः वीरांगना अवंतीबाई, वीरांगना उदा देवी और वीरांगना झलकारी बाई की अश्वारोही प्रतिमा स्थापित करने के निर्देश दिए। यह भी बताया गया कि बलरामपुर, मीरजापुर और जालौन में नई महिला वाहिनियों से संबंधित कार्यवाही भी आगे बढ़ाई जा रही है।  मुख्यमंत्री ने आगामी मानसून को देखते हुए बाढ़ एवं आपदा प्रबंधन की तैयारियों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि 16 मई से 30 जून तक विभिन्न नदी तटों पर 17 पीएसी कंपनियों का विशेष बाढ़ राहत प्रशिक्षण संचालित किया जा रहा है। बाढ़ राहत एवं बचाव कार्यों के लिए मुख्यमंत्री ने सभी उपकरणों की नियमित जांच और उनकी कार्यशीलता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में एसडीआरएफ की उपलब्धियों की समीक्षा करते हुए बताया गया कि इसकी टीमें वर्तमान में 12 जनपदों में तैनात हैं तथा संभावित बाढ़ परिस्थितियों को देखते हुए 15 जनपदों में अतिरिक्त तैनाती का प्रस्ताव तैयार किया गया है। एसडीआरएफ कर्मियों को एनडीआरएफ अकादमी नागपुर, नादिया, पश्चिम बंगाल तथा नंदा देवी इंस्टीट्यूट ऑफ एयरो रेस्क्यू सहित विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों में विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।  बैठक में मुख्यमंत्री ने पीएसी बैंड के कार्मिकों के समयबद्ध पदोन्नति की नियमावली तैयार करने के निर्देश दिए, साथ ही एसडीआरएफ को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से खोज एवं बचाव कार्यों के लिए ह्यूमन लिफ्टिंग ड्रोन की उपयोगिता पर विचार को भी कहा। उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एयरपोर्ट, मेट्रो नेटवर्क, आरआरटीएस, न्यायालय परिसरों, महत्वपूर्ण सरकारी संस्थानों तथा प्रमुख धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के क्षेत्र में इसकी जिम्मेदारी निरंतर बढ़ रही है। बैठक में बताया गया कि वर्तमान में यूपीएसएसएफ 11 एयरपोर्ट, 4 मेट्रो नेटवर्क, मेरठ आरआरटीएस, लोकभवन, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर तथा 5 जनपदीय न्यायालयों की सुरक्षा का दायित्व निभा रहा है।  मुख्यमंत्री ने एसएसएफ में तैनाती के लिए मानकीकरण के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि एयरपोर्ट सिक्योरिटी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के माध्यम से एयरपोर्ट सुरक्षा संबंधी विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि राष्ट्रीय स्तर की सर्वोत्तम प्रणालियों को अपनाते हुए प्रशिक्षण संस्थानों की क्षमता को और मजबूत किया जाए। मुख्यमंत्री ने यूपीएसएसएफ की विभिन्न वाहिनियों के निर्माण कार्यों की समीक्षा की। बैठक में बताया गया कि मुख्यालय एवं प्रथम वाहिनी, लखनऊ के निर्माण कार्य में लगभग 77 प्रतिशत प्रगति हो चुकी है। गोरखपुर स्थित द्वितीय वाहिनी का निर्माण कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रयागराज, मथुरा, सहारनपुर एवं अयोध्या में प्रस्तावित वाहिनियों से संबंधित कार्यवाहियां भी प्रगति पर हैं।  मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पीएसी, एसडीआरएफ और यूपीएसएसएफ के आधुनिकीकरण, क्षमता विस्तार, तकनीकी उन्नयन, प्रशिक्षण, अवसंरचना विकास तथा मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण से जुड़े सभी प्रस्तावों एवं परियोजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।

हरियाली की ओर ऐतिहासिक कदम, पर्यावरण दिवस पर उत्तर प्रदेश ने लगाए 5 करोड़ पौधे

पर्यावरण दिवस पर यूपी ने पूरा किया 5 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य पीएम मोदी की प्रेरणा से जारी है यूपी में पौधरोपण अभियान, जुलाई में एक दिन में जन-सहभागिता से लगाएंगे 35 करोड़ पौधेः सीएम योगी लखनऊ,  विश्व पर्यावरण दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में 5 करोड़ पौधे लगाए गए। इस अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने तीन वर्ष पहले ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का आह्वान किया था। उन्हीं की प्रेरणा से 9 वर्ष में प्रदेश में पौधरोपण के वृहद कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया। पीएम ने वसुधैव कुटुम्बकम के अनुरूप ‘एक पृथ्वी, एक परिवार और एक भविष्य’ का संदेश दुनिया को दिया है। उनके आहवान पर हम सब भारतवासी पर्यावरण की चुनौतियों का सामना करते हुए प्रकृति के साथ खड़े हैं। जुलाई में एक दिन में लगाएंगे 35 करोड़ पौधे सीएम ने कहा कि मार्च 2017 में पौधरोपण के लिए वन विभाग की नर्सरी में बमुश्किल 5 लाख पौधे मिल पाए थे, लेकिन आज सरकारी व निजी नर्सरी में 55 करोड़ पौधे तैयार हैं। आज प्रदेश भर में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पांच करोड़ पौधे लग रहे हैं। अब जुलाई में महाभियान चलाएंगे और एक दिन में नागरिकों के साथ मिलकर 35 करोड़ पौधे लगाएंगे।  प्रकृति को नुकसान पहुंचाने वालों से सजग रहें सीएम योगी ने नागरिकों से प्रकृति व जलस्रोतों को नुकसान पहुंचाने वाले भूमाफिया, वन माफिया, खनन माफिया व स्मगलरों के प्रति सजग रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि सजग नागरिकों का दायित्व है कि मातृभूमि के प्रति दायित्वों का निर्वहन करें। सीएम ने विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रदेशवासियों को पांच संकल्प भी दिलाए। इसमें एक पेड़ मां के नाम लगाना, शरारती तत्वों व जीव-जंतुओं से पेड़ों की सुरक्षा, जल संरक्षण, सिंगल यूज प्लास्टिक का प्रयोग न करना और प्रकृति के अनुरूप जीवन शैली अपनाना शामिल है। सीएम ने कटाक्ष किया कोई टोंटी चोरी कर रहा है, कोई पानी बर्बाद कर रहा है, ऐसे लोगों को टोकें। जल संरक्षण को जीवन का हिस्सा बनाएं, कोशिश हो कि पानी व्यर्थ न हो। सीएम योगी ने शुक्रवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में ‘उत्तर प्रदेश में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का समाधान’ संगोष्ठी का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने यहां प्रदर्शनी का अवलोकन किया, बच्चों को चॉकलेट दीं और आमजन को कपड़े के झोले देकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। सीएम ने बच्चों के साथ सेल्फी ली और वृक्ष कलश में जल भी अर्पित किया।   जल है तो कल है, वन है तो जीवन है अपने संबोधन में सीएम ने कहा कि जल है तो कल है, वन है तो जीवन है यानी जीवन चक्र एक-दूसरे के साथ जुड़ा है। फिर भी हमने इसकी सर्वाधिक उपेक्षा की। 40 से ऊपर हर व्यक्ति महसूस करता है कि पर्यावरण के साथ हुए खिलवाड़ की कीमत को दुनिया किस रूप में चुका रही है। 25 वर्ष पहले और वर्तमान मौसम चक्र में एक से डेढ़ महीने का अंतर आ गया। भारत व उत्तर प्रदेश में कृषि आधारित अर्थव्यवस्था है। मौसम चक्र में अंतर से सर्वाधिक प्रभावित किसान होगा। उसकी आमदनी प्रभावित होगी, अतिवृष्टि-अनावृष्टि का सामना करना पड़ेगा। खाद्यान्न संकट खड़ा हो सकता है। असमय घटित होने वाली आपदाएं चेतावनी भी हैं। मां व मातृभूमि के प्रति कर्तव्यों का निर्वहन करें  सीएम योगी ने कहा कि हमारे पूर्वजों व ऋषि परंपरा ने पर्यावरण के प्रति आगाह किया था। हम खुद को धरती मां का पुत्र कहते हैं। लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद भगवान राम ने लक्ष्मण जी से कहा “अपि स्वर्णमयी लंका न मे लक्ष्मण रोचते, जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी”। अर्थात लंका भले ही सोने की क्यों न हो, लेकिन मुझे यह अच्छी नहीं लगती। जिस मां ने जन्म दिया है, जहां हमने जन्म लिया है, उसके प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन और कृतज्ञता ज्ञापित करना हमारा दायित्व होना चाहिए। मां व मातृभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है। भगवान राम की कही गई बातें आज भी हर भारतीय के लिए प्रासंगिक हैं। पर्यावरण के प्रति सरकार ने अपने उत्तरदायित्वों का किया निर्वहन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से प्रदेश सरकार ने पर्यावरण व प्रकृति के प्रति अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन करते हुए 9 वर्ष में अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। 2017 में शासन संभालते ही डबल इंजन सरकार ने वन महोत्सव के अवसर पर 5 करोड़ पौधरोपण कार्यक्रम को अपने हाथों में लिया था। उस समय हमारे सामने तमाम चुनौतियां थीं। न नर्सरी थी और न ही इतने बड़े कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए अनुभव था, लेकिन वन एवं अन्य विभागों ने इस लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया।  9 वर्ष में प्रदेश में लगे 242 करोड़ से अधिक पौधे सीएम योगी ने कहा कि 9 वर्ष के अंदर प्रदेश में 242 करोड़ से अधिक पौधरोपण किया गया, जिससे प्रदेश का फॉरेस्ट कवर भी बढ़ा। पीएम मोदी ने प्रकृति व मातृभूमि के प्रति दायित्वों का निर्वहन करते हुए कृतज्ञता स्वरूप तीन वर्ष पहले ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का शुभारंभ किया था। इस अभियान के क्रम में आज पौधरोपण महाभियान प्रारंभ होने जा रहा है और एक दिन में 5 करोड़ पैधे लगाने का लक्ष्य पूरा किया जा रहा है।  सीएम की अपील- सभी लोग पौधे लगाएं और उनका संरक्षण करें  मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण के लिए भी प्रदेश में अनेक कदम उठाए गए और अनेक मॉडल प्रस्तुत किए गए। विकास प्राधिकरण ने निश्चित क्षेत्रफल से बड़े एरिया में बनने वाले आवासीय भवनों तथा कमर्शियल परिसरों के लिए रेन वॉटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य किया है। मुख्यमंत्री ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत सभी लोगों से पौधे लगाने और उनका संरक्षण किए जाने की अपील की।

सीएम ने कहा- कोई टोंटी चोरी कर रहा, कोई पानी बहा रहा, ऐसे लोगों को टोकें

प्रकृति को नुकसान पहुंचाने वाले माफिया से सजग रहें- मुख्यमंत्री सीएम ने कहा- कोई टोंटी चोरी कर रहा, कोई पानी बहा रहा, ऐसे लोगों को टोकें मुख्यमंत्री ने किया जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों पर संगोष्ठी का शुभारंभ विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रदेशवासियों को 5 संकल्प दिलाए सीएम योगी ने जुलाई में एक दिन में लगाएंगे 35 करोड़ पौधेः सीएम योगी लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नागरिकों से प्रकृति व जलस्रोतों को नुकसान पहुंचाने वाले भूमाफिया, वन माफिया, खनन माफिया व स्मगलरों के प्रति सजग रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सजग नागरिकों का दायित्व है कि मातृभूमि के प्रति दायित्वों का निर्वहन करें। सीएम ने विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रदेशवासियों को पांच संकल्प भी दिलाए। इसमें एक पेड़ मां के नाम लगाना, शरारती तत्वों व जीव-जंतुओं से पेड़ों की सुरक्षा, जल संरक्षण, सिंगल यूज प्लास्टिक का प्रयोग न करना और प्रकृति के अनुरूप जीवन शैली अपनाना शामिल है। सीएम ने कटाक्ष किया कोई टोंटी चोरी कर रहा है, कोई पानी बर्बाद कर रहा है, ऐसे लोगों को टोकें। जल संरक्षण को जीवन का हिस्सा बनाएं, कोशिश हो कि पानी व्यर्थ न हो। सीएम योगी ने शुक्रवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में ‘उत्तर प्रदेश में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का समाधान’ संगोष्ठी का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने यहां प्रदर्शनी का अवलोकन किया, बच्चों को चॉकलेट दीं और आमजन को कपड़े के झोले देकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। सीएम ने बच्चों के साथ सेल्फी ली और वृक्ष कलश में जल भी अर्पित किया।   जल है तो कल है, वन है तो जीवन है अपने संबोधन में सीएम ने कहा कि जल है तो कल है, वन है तो जीवन है यानी जीवन चक्र एक-दूसरे के साथ जुड़ा है। फिर भी हमने इसकी सर्वाधिक उपेक्षा की। 40 से ऊपर हर व्यक्ति महसूस करता है कि पर्यावरण के साथ हुए खिलवाड़ की कीमत को दुनिया किस रूप में चुका रही है। 25 वर्ष पहले और वर्तमान मौसम चक्र में एक से डेढ़ महीने का अंतर आ गया। भारत व उत्तर प्रदेश में कृषि आधारित अर्थव्यवस्था है। मौसम चक्र में अंतर से सर्वाधिक प्रभावित किसान होगा। उसकी आमदनी प्रभावित होगी, अतिवृष्टि-अनावृष्टि का सामना करना पड़ेगा। खाद्यान्न संकट खड़ा हो सकता है। असमय घटित होने वाली आपदाएं चेतावनी भी हैं। मां व मातृभूमि के प्रति कर्तव्यों का निर्वहन करें  सीएम योगी ने कहा कि हमारे पूर्वजों व ऋषि परंपरा ने पर्यावरण के प्रति आगाह किया था। हम खुद को धरती मां का पुत्र कहते हैं। लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद भगवान राम ने लक्ष्मण जी से कहा “अपि स्वर्णमयी लंका न मे लक्ष्मण रोचते, जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी”। अर्थात लंका भले ही सोने की क्यों न हो, लेकिन मुझे यह अच्छी नहीं लगती। जिस मां ने जन्म दिया है, जहां हमने जन्म लिया है, उसके प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन और कृतज्ञता ज्ञापित करना हमारा दायित्व होना चाहिए। मां व मातृभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है। भगवान राम की कही गई बातें आज भी हर भारतीय के लिए प्रासंगिक हैं। निरोग रहने तक ही भौतिक उपलब्धियां सीएम योगी ने कहा कि भौतिक उपलब्धियां क्षणिक हैं। इनकी उपलब्धि तभी तक हैं, जब तक आप निरोग होकर आरोग्यता के लक्ष्य को प्राप्त कर रहे हैं। पर्यावरण के समक्ष चुनौतियों का सामना करने के लिए भारत के ग्रंथों का अवलोकन करें। भारत की परंपरा में हर जीव-जंतु के प्रति हमारे संबंध जोड़े गए हैं। भगवान शंकर के गले में सर्प और सवारी नंदी है। कार्तिकेय की सवारी मोर, गणपति की मूषक और मां भगवती की सवारी शेर है। हर कालखंड में बैल की पूजा और गोमाता को मान्यता दी गई है। वे कृषि प्रधान व्यवस्था का आधार हैं। सर्प को किसान मित्र के रूप में मान्यता दी गई है। यह जीवन चक्र आपस में जुड़ा है। कुकरैल और लखनऊ के तापमान में मिलेगा अंतर सीएम ने कुकरैल वन क्षेत्र के शानदार प्राकृतिक वातावरण का जिक्र करते हुए कहा कि वहां और लखनऊ के तापमान में अंतर होता है। लखनऊ में 45 तो कुकरैल में तापमान 40 या उससे कम होगा। प्रकृति की गोद में जो भी आगे बढ़ेगा, वह आरोग्यता के लिए महत्वपूर्ण होगा। हमने कुकरैल से अवैध कब्जे हटाए। आज कुकरैल के किनारे लखनऊ का सबसे शानदार प्राकृतिक दृश्य ‘सौमित्र वन’ भी दिख रहा है। प्रकृति सुरक्षित रहेगी, तभी मानवता सुरक्षित रहेगी सीएम ने विश्व पर्यावरण दिवस 2026 की थीम ‘इंस्पायर्ड बाई नेचर फॉर क्लाईमेट फॉर अवर फ्यूचर’ का जिक्र किया और कहा कि स्वच्छ वायु, निर्मल जल, उपजाऊ भूमि व हरित वन मानव सभ्यता की जीवन रेखा हैं। जब प्रकृति सुरक्षित रहेगी, तभी मानवता सुरक्षित रह पाएगी। जल जीवन मिशन के तहत हर घर में जल व सबमर्सिबल की व्यवस्था हो गई है, लेकिन पहले कुआं खोदना पवित्र कार्य माना जाता था। दस कुओं के बराबर एक बावड़ी, दस बावड़ी के बराबर एक तालाब, दस तालाब के बराबर एक पुत्र और दस पुत्रों के बराबर एक वृक्ष होता है यानी वृक्ष का महत्व सर्वाधिक है।  पीएम ने दिया एक पृथ्वी, एक परिवार और एक भविष्य का संदेश सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने तीन वर्ष पहले ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का आह्वान किया था। उन्हीं की प्रेरणा से 9 वर्ष में प्रदेश में पौधरोपण के वृहद कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया। संकटों का सामना करने के लिए पीएम ने वसुधैव कुटुम्बकम के अनुरूप ‘एक पृथ्वी, एक परिवार और एक भविष्य’ का संदेश भी दुनिया को दिया है। उनके आहवान पर हम सब भारतवासी पौधरोपण महाभियान के तहत जननी व जन्मभूमि के प्रति पर्यावरण की चुनौतियों का सामना करते हुए प्रकृति के साथ खड़े हैं। जुलाई में एक दिन में लगाएंगे 35 करोड़ पौधे सीएम ने कहा कि मार्च 2017 में पौधरोपण के लिए वन विभाग की नर्सरी में बमुश्किल 5 लाख पौधे मिल पाए थे, लेकिन आज सरकारी व निजी नर्सरी में 55 करोड़ पौधे तैयार हैं। आज प्रदेश भर में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पांच करोड़ पौधे लग रहे हैं। अब जुलाई में महाभियान चलाएंगे और एक दिन में नागरिकों के साथ मिलकर 35 करोड़ पौधे लगाएंगे।  ग्लोबल वार्मिंग पर्यावरण के लिए चैलेंज सीएम ने ग्लोबल वार्मिंग, वायु प्रदूषण, बायो डायवर्सिटी … Read more

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुकरैल में ‘एक पेड़ मां के नाम’ महाभियान का किया शुभारंभ, महर्षि चरक औषधि वन की भी स्थापना की

सबके लिए सबसे प्यारी होती है मां, हर नागरिक अवश्य लगाए ‘एक पेड़ मां के नाम’- मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुकरैल में ‘एक पेड़ मां के नाम’ महाभियान का किया शुभारंभ, महर्षि चरक औषधि वन की भी स्थापना की मुख्यमंत्री ने कपूर, वन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण सक्सेना ने आंवला, वन राज्यमंत्री केपी मलिक ने नीम व विधायक ओपी श्रीवास्तव ने लगाया आंवला का पौधा सीएम योगी की उपस्थिति में एक साथ लगाए गए 200 से अधिक पौधे, मुख्यमंत्री ने स्कूली बच्चों के साथ ली सेल्फी आमजन व स्कूली बच्चों ने मुख्यमंत्री को दी जन्मदिन की बधाई   लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्व पर्यावरण दिवस पर  कुकरैल रेंज अवध वन प्रभाग में ‘एक पेड़ मां के नाम’ महाभियान का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने यहां कपूर का पौधा लगाया, जबकि वन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण सक्सेना ने आंवला, वन राज्यमंत्री केपी मलिक ने नीम तथा विधायक ओपी श्रीवास्तव ने आंवला का पौधा रोपित किया। मुख्यमंत्री ने यहां महर्षि चरक औषधि वन की भी स्थापना की। सीएम  की उपस्थिति में एक साथ 200 से अधिक पौधे लगाए गए। मुख्यमंत्री ने स्कूली बच्चों के साथ सेल्फी भी ली और मिष्ठान वितरित किया। सभी ने मुख्यमंत्री को जन्मदिन की बधाई भी दी।  हर व्यक्ति मां के नाम पर अवश्य लगाए एक पौधा  मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि पीएम मोदी ने देशवासियों के सामने लक्ष्य रखा कि नागरिक के रूप में मां व मातृभूमि के प्रति हमारा दायित्व बनता है। इसीलिए उन्होंने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की थीम मां को समर्पित की। हर व्यक्ति के लिए मां सबसे प्यारी होती है, इसलिए दायित्वों का निर्वहन करते हुए हर व्यक्ति मां के नाम एक पेड़ अवश्य लगाकर इस अभियान को आगे बढ़ाए। शहर-गांव के फॉरेस्ट को विकसित करे। वन विभाग ने 50 करोड़ से अधिक पौधे तैयार किए हैं। आज 5 करोड़ पौधरोपण लक्ष्य के साथ यह कार्यक्रम बढ़ रहा है। पर्यावरण की गंभीर चिंता से ग्रसित है विश्व  सीएम ने कहा कि विश्व आज पर्यावरण की गंभीर चिंता से ग्रसित है। हर व्यक्ति जानता है कि पर्यावरण की चुनौती केवल प्रकृति की ही नहीं, बल्कि जीव सृष्टि की भी है। मौसम चक्र में आए परिवर्तन से अतिवृष्टि, अनावृष्टि आदि के कारण हम सभी इसके दुष्प्रभाव को देख रहे हैं। यह आपदा मानव निर्मित है और इस समस्या का समाधान भी मनुष्य को ही निकालना है।  पर्यावरण को क्षति पहुंचाने वाले कारकों से दूरी बनाएं  मुख्यमंत्री ने कहा कि हर नागरिक धरती मां के प्रति अपने दायित्वों व कर्तव्यों का ईमानदारीपूर्वक निर्वहन करे तो हम पर्यावरण संरक्षण कर धरती माता को सुरक्षित रख सकते हैं। इसके लिए सबसे महत्वपूर्ण प्रयास यह है कि हर व्यक्ति पर्यावरण को क्षति पहुंचाने वाले कारकों से दूरी बनाए और पर्यावरण की रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास का हिस्सा बने।  अपील-सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग कतई न करें मुख्यमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण के सरल उपायों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक मुक्त वातावरण बनाएं यानी सिंगल यूज प्लास्टिक को पूरी तरह रोकें। इससे होने वाले नुकसान से बचाने की कार्रवाई हर कोई आसानी से कर सकता है। सीएम ने अपील की कि कोई भी प्लास्टिक वेस्ट किसी सार्वजनिक स्थान, जलस्रोत, वाटिका, जंगल, उपवन आदि में न फेंकें।  बरसात की एक-एक बूंद को सुरक्षित करें सीएम ने जल संरक्षण पर भी जोर देते हुए कहा कि बरसात के पानी की एक-एक बूंद को सुरक्षित करने का प्रयास करें। पेड़ को क्षति न पहुंचाएं और हर महत्वपूर्ण आयोजन पर एक पेड़ अवश्य लगाएं। 9 वर्ष में प्रदेश में 242 करोड़ से अधिक पौधरोपण किया गया। इस श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए विश्व पर्यावरण दिवस पर आज ‘एक पेड़ मां के नाम’ कार्यक्रम का शुभारंभ हो रहा है। सीएम ने स्कूली छात्रों से इस अभियान को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाने, प्लास्टिक मुक्त वातावरण के लिए सजग रहने, अभिभावकों को भी सचेत करने, जल संरक्षण के लिए व्यापक अभियान का हिस्सा बनने और पौधरोपण महाभियान से जुड़ने का आह्वान किया।

सीएम योगी ने निभाया प्रकृति और मातृ सम्मान का संदेश, आवास पर लगाया ‘एक पेड़ मां के नाम’

सीएम योगी ने अपने आवास पर लगाया एक पेड़ मां के नाम आम का पौधा रोपकर मुख्यमंत्री ने सभी को दी विश्व पर्यावरण दिवस की शुभकामना पर्यावरण बचेगा तो प्रकृति बचेगी और तभी जीव सृष्टि भी बचेगीः मुख्यमंत्री लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्व पर्यावरण दिवस पर शुक्रवार को अपने सरकारी आवास पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत आम का पौधा लगाकर सभी को विश्व पर्यावरण दिवस की शुभकामना दी। उन्होंने कहा कि पर्यावरण बचेगा तो प्रकृति बचेगी, प्रकृति बचेगी तो जीव सृष्टि भी बचेगी, इसलिए हर नागरिक मातृभूमि के प्रति ईमानदारी से अपने दायित्वों का निर्वहन करे। पर्यावरण के प्रति सरकार ने अपने उत्तरदायित्वों का किया निर्वहन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से प्रदेश सरकार ने पर्यावरण व प्रकृति के प्रति अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन करते हुए 9 वर्ष में अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। 2017 में शासन संभालते ही डबल इंजन सरकार ने वन महोत्सव के अवसर पर 5 करोड़ पौधरोपण कार्यक्रम को अपने हाथों में लिया था। उस समय हमारे सामने तमाम चुनौतियां थीं। न नर्सरी थी और न ही इतने बड़े कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए अनुभव था, लेकिन वन एवं अन्य विभागों ने इस लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया।  9 वर्ष में प्रदेश में लगे 242 करोड़ से अधिक पौधे सीएम योगी ने कहा कि 9 वर्ष के अंदर प्रदेश में 242 करोड़ से अधिक पौधरोपण किया गया, जिससे प्रदेश का फॉरेस्ट कवर भी बढ़ा। पीएम मोदी ने प्रकृति व मातृभूमि के प्रति दायित्वों का निर्वहन करते हुए कृतज्ञता स्वरूप तीन वर्ष पहले ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का शुभारंभ किया था। इस अभियान के क्रम में आज पौधरोपण महाभियान प्रारंभ होने जा रहा है।  मातृभूमि के प्रति सर्वोच्च दायित्वों में एक है पर्यावरण रक्षा  सीएम योगी ने प्रभु श्रीराम के उद्घोष ‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’ का भी जिक्र करते हुए कहा कि जननी व जन्मभूमि के प्रति कृतज्ञता हर नागरिक का दायित्व है। पर्यावरण की रक्षा मातृभूमि के प्रति सर्वोच्च दायित्वों में एक है। प्रदेश सरकार पर्यावरण की रक्षा के लिए एक ओर वृहद पौधरोपण कार्यक्रम चला रही है, तो दूसरी ओर ग्लोबल वार्मिंग, क्लाइमेट चेंज, मौसम चक्र में परिवर्तन जैसी पर्यावरण की चुनौतियों से निपटने के लिए भी अनेक कदम उठाए गए हैं। सरकार का प्रयास है कि गांव, शहर, जनपद व प्रदेश प्लास्टिक मुक्त हो। सिंगल यूज प्लास्टिक को हतोत्साहित कर उसके स्थान पर वैकल्पिक रूप से मिट्टी के बर्तनों को प्रोत्साहित किया गया। राज्य सरकार ने इसके लिए माटी कला बोर्ड की स्थापना पर जोर दिया। अप्रैल से जून तक हर गांव व शहर के तालाबों से प्रजापति व कुम्हार समाज के लोगों को निशुल्क मिट्टी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई। उन्हें मैन्युअल के साथ ही सोलर व इलेक्ट्रिक चाक उपलब्ध कराया गया।  सीएम की अपील- सभी लोग पौधे लगाएं और उनका संरक्षण करें  मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण के लिए भी प्रदेश में अनेक कदम उठाए गए और अनेक मॉडल प्रस्तुत किए गए। विकास प्राधिकरण ने निश्चित क्षेत्रफल से बड़े एरिया में बनने वाले आवासीय भवनों तथा कमर्शियल परिसरों के लिए रेन वॉटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य किया है। मुख्यमंत्री ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत सभी लोगों से पौधे लगाने और उनका संरक्षण किए जाने की अपील की।  इस अवसर पर प्रदेश सरकार के मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना, केपी मलिक, बलदेव सिंह औलख, दानिश आजाद अंसारी, अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद, प्रमुख सचिव (वन) वी हेकाली झिमोमी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक व विभागाध्यक्ष सुनील चौधरी आदि मौजूद रहे।