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CM योगी आज रामपुर और बरेली दौरे पर, करोड़ों की विकास परियोजनाओं की देंगे सौगात

सीएम योगी मंगलवार को रामपुर व बरेली के दौरे पर, विकास परियोजनाओं की देंगे सौगात रामपुर में 690 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 102 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास करेंगे सीएम योगी इंटरमीडिएट-हाई स्कूल बोर्ड परीक्षा 2026 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को करेंगे सम्मानित बरेली में मंडल के विकास कार्यों और कानून-व्यवस्था की करेंगे समीक्षा लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार 30 जून को रामपुर व बरेली के दौरे पर रहेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री मुरादाबाद से सीधे रामपुर पहुंचेंगे, जहां शाहाबाद में वह रामपुर के मिलक एवं बिलासपुर विधानसभा क्षेत्रों में 690 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 102 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास करेंगे। यहां वह जनसभा को भी संबोधित करेंगे।  कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी इंटरमीडिएट/हाई स्कूल बोर्ड परीक्षा 2026 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्राओं को पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र देंगे। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के लाभार्थियों को लैपटॉप, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के लाभार्थियों को चेक वितरित करेंगे। साथ ही मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के पात्र परिजनों को अनुदान राशि देंगे। मुख्यमंत्री सामाजिक विकास में विशेष योगदान देने वाले व्यापारियों का सम्मान भी करेंगे।  रामपुर के बाद मुख्यमंत्री बरेली पहुंचेंगे, जहां वह सर्किट हाउस में बरेली मंडल के लोक निर्माण विभाग के पुराने कार्यों की समीक्षा और नए कार्यों की कार्ययोजना के संबंध में बैठक करेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री बरेली के विकास कार्यों एवं कानून व्यवस्था की समीक्षा करेंगे।

पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा, योगी सरकार ने इको क्लब्स के लिए ₹65.64 करोड़ की राशि जारी की

पर्यावरण संरक्षण को नई गति, योगी सरकार ने इको क्लब्स के लिए जारी की ₹65.64 करोड़ की लिमिट – प्रत्येक परिषदीय विद्यालय को ₹5,000 की दर से उपलब्ध कराई गई लिमिट – इको क्लब्स के गठन, कार्य एवं दायित्व, मासिक गतिविधि कैलेंडर और सुझावात्मक गतिविधियां भी जारी – जल संरक्षण, ऊर्जा बचत, ई-वेस्ट प्रबंधन और सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त अभियान पर रहेगा विशेष फोकस लखनऊ,   योगी सरकार ने पर्यावरण संरक्षण को नई गति देने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में समग्र शिक्षा अंतर्गत 'इको क्लब्स फॉर मिशन लाइफ' की गतिविधियों के क्रियान्वयन हेतु लगभग ₹65.64 करोड़ (₹6563.95 लाख) की लिमिट जारी कर दी है। इसके अंतर्गत प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालयों को ₹5,000 प्रति विद्यालय की दर से लिमिट उपलब्ध कराई जाएगी। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों, सहायक लेखा अधिकारियों, खंड शिक्षा अधिकारियों एवं जिला समन्वयकों को निर्देश दिए हैं कि जारी की गई लिमिट का तीन दिन के भीतर विद्यालयों को हस्तांतरण सुनिश्चित कराया जाए। साथ ही इको क्लब्स के उद्देश्य, गठन, अधिसूचना, कार्य एवं दायित्व, मासिक गतिविधि कैलेंडर तथा सुझावात्मक गतिविधियों के अनुरूप समयबद्ध क्रियान्वयन भी सुनिश्चित किया जाए।  निर्धारित मदों में होगा लिमिट का उपयोग प्रत्येक विद्यालय को उपलब्ध कराई गई ₹5,000 की लिमिट का उपयोग निर्धारित मदों में किया जाएगा। इसमें इको क्लब की गतिविधियां, जागरूकता कार्यक्रम, पौधरोपण, कम्पोस्ट निर्माण, आवश्यक शिक्षण सामग्री, स्टेशनरी तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी अन्य गतिविधियां शामिल हैं। विद्यालयों को निर्धारित वित्तीय मानकों का पालन करते हुए व्यय करना होगा तथा सभी खर्च के अभिलेख सुरक्षित रखना होगा। अभिभावकों, स्थानीय निकायों तथा समुदाय की भागीदारी पर विशेष बल योगी सरकार ने विद्यालय प्रबंधन समिति, अभिभावकों, स्थानीय निकायों तथा समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया है। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यक्रमों को विद्यालय परिसर से बाहर समाज तक पहुंचाने का भी लक्ष्य रखा गया है। सभी विद्यालयों को इको क्लब गठन, गतिविधियों, फोटो, वीडियो तथा प्रगति रिपोर्ट निर्धारित पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। बेसिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी एवं जिला स्तर के अधिकारी नियमित समीक्षा करेंगे। प्रत्येक विद्यालय में गठित होगा इको क्लब निर्देशों के अनुसार सभी पात्र प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालयों में इको क्लब्स फॉर मिशन लाइफ का गठन किया जाएगा। प्रधानाध्यापक क्लब के संरक्षक होंगे, जबकि एक शिक्षक को प्रभारी बनाया जाएगा। विभिन्न कक्षाओं के छात्र-छात्राओं को क्लब से जोड़कर उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। क्लब की अधिसूचना जारी होगी, उसका पंजीकरण निर्धारित पोर्टल पर कराया जाएगा तथा विद्यालय स्तर पर नियमित बैठकें आयोजित की जाएंगी। प्रत्येक गतिविधि का अभिलेखीकरण और समय-समय पर उसकी समीक्षा भी की जाएगी। मिशन लाइफ के सात विषयों पर होगा विशेष फोकस इको क्लब्स के माध्यम से विद्यार्थियों को लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट (मिशन लाइफ) के सात प्रमुख विषयों से जोड़ा जाएगा। इनमें स्वस्थ एवं सतत जीवनशैली अपनाना, टिकाऊ खाद्य प्रणाली को बढ़ावा देना, जल संरक्षण, ऊर्जा संरक्षण, कचरा कम करना एवं पुनर्चक्रण, ई-वेस्ट प्रबंधन तथा सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग में कमी लाना शामिल है। उद्देश्य विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना और दैनिक जीवन में पर्यावरण अनुकूल व्यवहार को बढ़ावा देना है। मासिक कैलेंडर के अनुसार चलेंगी गतिविधियां आदेश के साथ जुलाई से मार्च तक का विस्तृत गतिविधि कैलेंडर भी साझा किया गया है। जुलाई में पौधरोपण एवं हरित परिसर, अगस्त में किचन गार्डन और कम्पोस्ट निर्माण, सितंबर में ई-वेस्ट प्रबंधन, अक्टूबर में कचरा पृथक्करण एवं पुनर्चक्रण, नवंबर में ऊर्जा संरक्षण, दिसंबर में जल संरक्षण, जनवरी में सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त अभियान तथा फरवरी और मार्च में स्वच्छता, जैव विविधता संरक्षण एवं विश्व जल दिवस से संबंधित गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इसके अतिरिक्त पोस्टर, निबंध, चित्रकला, प्रश्नोत्तरी, रैली, शपथ, प्रदर्शनी और जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों तथा समुदाय को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाएगा। विद्यालय स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप अतिरिक्त गतिविधियां भी आयोजित कर सकेंगे।

योगी सरकार की पहल से उत्तर प्रदेश में आर्द्रभूमियों का संरक्षण तेज, पर्यावरण संरक्षण को मिली नई दिशा

योगी सरकार के प्रयासों से उत्तर प्रदेश में तेजी से हो रहा आर्द्रभूमियों का संरक्षण 26 जिलों की 101 आर्द्रभूमियां हो चुकी हैं अधिसूचित, 36 जिलों से नए प्रस्ताव मिले जल संरक्षण, पर्यावरण और जैव विविधता को बचाने के लिए सरकार चला रही विशेष अभियान लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार राज्य की आर्द्रभूमियों (वेटलैंड) के संरक्षण और विकास पर लगातार काम कर रही है। वेटलैंड (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत प्रदेशभर में आर्द्रभूमियों की पहचान, सीमांकन और अधिसूचना की प्रक्रिया तेज गति से चल रही है।      मुख्य सचिव के समक्ष हुए प्रस्तुतीकरण के अनुसार, प्रदेश के 75 जिलों में से 26 जिलों की 101 आर्द्रभूमियों को अब तक अधिसूचित किया जा चुका है। इनमें कानपुर नगर सहित गोरखपुर, बाराबंकी, महाराजगंज, प्रयागराज, आगरा, सहारनपुर, कुशीनगर, उन्नाव और अन्य जिले शामिल हैं। इन आर्द्रभूमियों का कुल क्षेत्रफल लगभग 2750 हेक्टेयर है। वहीं 36 जिलों से 44 नई आर्द्रभूमियों को अधिसूचित करने के प्रस्ताव भी सरकार को प्राप्त हुए हैं। इसलिए जरूरी हैं आर्द्रभूमियां आर्द्रभूमियां केवल तालाब या झील नहीं होतीं, बल्कि ये प्रकृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराने, भूजल स्तर बनाए रखने, सिंचाई में मदद करने, बाढ़ और सूखे के प्रभाव को कम करने, मछली पालन और अन्य आजीविका के साधन उपलब्ध कराने के साथ-साथ पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं के सुरक्षित आवास के रूप में भी काम करती हैं। इसके अलावा ये पर्यावरण को संतुलित रखने और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में भी अहम भूमिका निभाती हैं। सीमांकन और संरक्षण पर विशेष जोर योगी सरकार आर्द्रभूमियों की सीमाओं का वैज्ञानिक तरीके से निर्धारण भी करा रही है ताकि उन पर अतिक्रमण न हो और उनका संरक्षण बेहतर ढंग से किया जा सके। प्रदेश के सभी 75 जिलों में 14,562 स्थानों पर सीमा निर्धारण का कार्य पूरा किया जा चुका है। अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की तैयारी सरकार राज्य की प्रमुख आर्द्रभूमियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए भी प्रयास कर रही है। इसके लिए रामसर साइट के मानकों के अनुरूप आवश्यक दस्तावेज, मानचित्र, फोटोग्राफ और अन्य तकनीकी जानकारी तैयार की जा रही है, ताकि उत्तर प्रदेश की अधिक से अधिक आर्द्रभूमियां वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सके।

गोमती नदी के उद्गम स्थल के विकास पर योगी सरकार का फोकस, ₹1.04 करोड़ की परियोजना को मिली मंजूरी

योगी सरकार 1.04 करोड़ से संवारेगी गोमती नदी का उद्गम स्थल पर्यटन विभाग की पहल, पीलीभीत जिले में स्थित मां गोमती उद्गम स्थल पर विकसित होंगी पर्यटन सुविधाएं गोमती नदी की प्रदेश में 960 किमी. की है यात्रा, आस्था और सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा सम्मान मां गोमती के उद्गम स्थल के विकास से खुलेगा पर्यटन का नया अध्याय: मंत्री जयवीर सिंह लखनऊ/पीलीभीत  उत्तर प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लगातार महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। अयोध्या, काशी, मथुरा, नैमिषारण्य और विंध्य धाम जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों के व्यापक विकास के बाद अब प्रदेश सरकार ने जीवनदायिनी मां गोमती नदी के उद्गम स्थल को भी विश्वस्तरीय पर्यटन एवं आस्था केंद्र के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में पीलीभीत जनपद के पूरनपुर विधानसभा क्षेत्र की कलीनगर तहसील स्थित गोमती उद्गम स्थल के विकास के लिए पर्यटन विभाग ने 1.04 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत की है। इसके तहत प्रथम चरण में 78 लाख रुपये की धनराशि जारी कर दी गई है। परियोजना के पूर्ण होने के बाद यह स्थल धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन का नया आकर्षण बनेगा। करोड़ों लोगों के जीवन और आजीविका का आधार उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि मानव सभ्यता का विकास सदैव नदियों के तटों पर हुआ है। प्रदेश की जीवनदायिनी एवं सांस्कृतिक आस्था की प्रतीक गोमती नदी का उद्गम पीलीभीत जनपद के माधोटांडा ग्राम के समीप गोमत ताल (पूर्व नाम फुलहर झील) से होता है। सनातन परंपरा में अत्यंत प्रतिष्ठित गोमती नदी प्रदेश के विशाल भूभाग को सिंचित करते हुए करोड़ों लोगों के जीवन और आजीविका का आधार है। उन्होंने बताया कि पर्यटन विभाग द्वारा गोमती उद्गम स्थल को एक प्रमुख आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित किया जा रहा है। पर्यटन आकर्षण के लिए होंगे कई काम परियोजना के अंतर्गत श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा के लिए आधुनिक आधारभूत संरचनाओं का निर्माण कराया जाएगा। इसके तहत लगभग 48.69 लाख रुपये की लागत से बहुउद्देशीय हॉल बनाया जाएगा, जबकि 13.44 लाख रुपये से आधुनिक शौचालय ब्लॉक और 9.45 लाख रुपये से शेड का निर्माण कराया जाएगा। इसके अतिरिक्त इंटरलॉकिंग मार्ग, आकर्षक उद्यान एवं सौंदर्यीकरण, सोलर आधारित सुविधाओं, अन्य यात्री सुविधाओं का भी विकास किया जाएगा। इस परियोजना को पूरा करने की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) को मिली है। धार्मिक विरासत को मिलेगा सम्मान गोमती नदी को सनातन परंपरा में विशेष सम्मान प्राप्त है। इसका उद्गम पीलीभीत जनपद के माधोटांडा क्षेत्र स्थित पौराणिक फुलहर झील (गोमत ताल) से होता है। लगभग 960 किलोमीटर की यात्रा करते हुए यह नदी पीलीभीत, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, हरदोई, सीतापुर, लखनऊ, बाराबंकी, सुल्तानपुर और जौनपुर आदि जनपदों को जीवन प्रदान करती हुई अंततः गाजीपुर जिले में गंगा नदी में समाहित हो जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार लंका विजय के बाद भगवान श्रीराम ने गोमती नदी में स्नान कर पुण्य अर्जित किया था। वहीं नैमिषारण्य में 33 कोटि देवी-देवताओं की तपस्थली भी गोमती नदी के तट पर ही मानी जाती है। यही कारण है कि गोमती नदी प्रदेश की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत की वाहक मानी जाती है। मां गोमती सनातन आस्था की प्रतीक मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश अपनी प्राकृतिक धरोहरों को विशिष्ट पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। मां गोमती का उद्गम स्थल महज एक भौगोलिक बिंदु न होकर, हमारी सनातन आस्था और लोकजीवन का महत्वपूर्ण स्थल भी है। इसके समग्र विकास से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। हमारा प्रयास है कि प्रदेश की प्रत्येक पवित्र धरोहर को विश्व पर्यटन मानचित्र पर सम्मानजनक स्थान दिलाया जाए।

हर जरूरतमंद के इलाज की जिम्मेदारी सरकार की: मुख्यमंत्री ने गिनाईं स्वास्थ्य क्षेत्र की उपलब्धियां

जनता दर्शन  हर जरूरतमंद के इलाज की व्यवस्था करा रही सरकारः मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री सोमवार को ‘जनता दर्शन’ में विभिन्न जनपदों से आए फरियादियों से मिले  राजस्व मामलों के निस्तारण में देरी पर बोले सीएम- समयसीमा के भीतर दिलाएं न्याय लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को ‘जनता दर्शन’ में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए फरियादियों की समस्याओं को ध्यान से सुना। उनका प्रार्थना पत्र लिया और संबंधित अधिकारियों को देकर निर्देशित किया कि सभी लोगों की समस्याओं का समाधान तय समयसीमा के भीतर हो। इसके उपरांत पीड़ित पक्ष से बात कर उनकी संतुष्टि के बारे में जानकारी ली जाए। मुख्यमंत्री ने पीड़ितों को आश्वस्त करते हुए कहा कि आप बेफिक्र होकर घर जाइए, हम हर मामले का उचित निस्तारण कराएंगे।  आप स्वास्थ्य पर ध्यान दें, इलाज की चिंता सरकार करेगी बरेली से एक महिला ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की। उन्होंने कैंसर के इलाज के लिए मुख्यमंत्री से गुहार लगाई और आर्थिक सहायता की मांग की। सीएम ने उनसे हॉस्पिटल का एस्टिमेट मांगा, जिसे वह तत्काल उपलब्ध न करा सकीं। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आप हॉस्पिटल से एस्टिमेट मंगवा लीजिए। आप स्वास्थ्य पर ध्यान दें, इलाज की चिंता सरकार करेगी। मुख्यमंत्री ने मरीज को एडमिट कराने और उनके समुचित इलाज के लिए भी निर्देशित किया।  राजस्व मामलों पर बोले सीएम- वादकारियों को समय से न्याय दिलाना सरकार की मंशा  ‘जनता दर्शन’ में राजस्व संबंधी मामले भी आए। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अतिक्रमण कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। इस पर निरंतर कार्रवाई जारी रहेगी। सीएम ने राजस्व मुकदमों के समयबद्ध निस्तारण पर भी जोर दिया। कहा कि इस पर जल्द निर्णय होने से वादकारियों को समय से राहत मिलती है। राजस्व से जुड़े अधिकारी समय से न्यायालय में बैठें। इस संबंध में निर्णय भी जल्द दें, क्योंकि ऐसा न होने से गरीब वादकारी अधिक प्रभावित होते हैं। वादकारियों को न्याय दिलाना सरकार की मंशा है। इसके अनुरूप राजस्व से जुड़े अधिकारी जरूरतमंदों को न्याय दिलाएं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सख्त निर्देश, विकास कार्यों में लापरवाही और गुणवत्ता से समझौता नहीं होगा

मुख्यमंत्री योगी का सख्त आदेश, विकास कार्यों में खामी बर्दाश्त नहीं, गुणवत्ता सर्वोपरि – सड़क निर्माण में लापरवाही करने पर इंजीनियर और ठेकेदार पर दर्ज होगी एफआईआर  – आगरा में मेट्रो शहर के अनुरूप मिलें सभी मूलभूत सुविधाएं – विकास कार्यों के लिए जनप्रतिनिधि तय करें प्राथमिकता, तुरंत जारी होगा फंड – छुट्टा पशुओं और ग्रामीण सड़कों पर भारी वाहनों के चलने पर लगेगी रोक – विकास कार्यों की अड़चनें दूर करने के लिए बनेगा वरिष्ठ अधिवक्ताओं का पैनल आगरा  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगरा मंडल में हो रहे विकास कार्यों, कानून-व्यवस्था और लोक निर्माण विभाग की प्रस्तावित कार्ययोजना की गहन समीक्षा की। मंडलायुक्त सभागार में आयोजित इस उच्च स्तरीय बैठक में सीएम ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों में किसी प्रकार की कोई कमी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इन कार्यों की गुणवत्ता के साथ समझौता नहीं किया जाएगा। निर्देश दिया कि ग्रामीण रास्तों पर भारी वाहनों के चलने पर तुरंत रोक लगाई जाए। इन सड़कों को क्षति पहंचाने वाले वाहनों के मालिकों से हर्जाना वसूला जाए। उन्होंने कहा कि आगरा अब एक मेट्रो शहर है, इसलिए यहां पानी, सड़क, सीवर और सौंदर्यीकरण जैसी मूलभूत सुविधाएं उसी स्तर की होनी चाहिए।  सड़क निर्माण में लापरवाही पर दर्ज होगी एफआईआर मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ ने जल जीवन मिशन, अमृत योजना, सीवर लाइन या अन्य किसी भी प्रोजेक्ट के लिए सड़कों की खुदाई के बाद उसके पुनर्निर्माण कार्य पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सड़क और अन्य निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा। यदि निर्माण कार्य की गुणवत्ता में कमी पाई जाती है, तो संबंधित कार्यदायी संस्था के इंजीनियर और ठेकेदार की सीधे जवाबदेही तय की जाएगी। ऐसे लोगों पर एफआईआर दर्ज कराकर उन्हें जेल भेजने की कार्रवाई की जाए। जनप्रतिनिधि तय करें अपनी प्राथमिकता, तुरंत जारी होगा फंड बैठक में लोक निर्माण विभाग की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई। आगरा मंडल के सभी जनप्रतिनिधियों से मिले प्रस्तावों को 'ई-विश्वकर्मा-2.0' पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है। आगरा जनपद में सड़क निर्माण, सुदृढ़ीकरण, पुल और हेलीपैड निर्माण के लगभग 2791 करोड़ रुपये कुल 495 कार्यों की योजना प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री ने सभी सांसदों, विधायकों और एमएलसी से कहा कि वे अपनी प्राथमिकताओं को जल्द तय करें। यदि प्रस्तावों में कोई संशोधन या सुझाव है, तो तुरंत बताएं ताकि तत्काल स्वीकृति प्रदान कर धनराशि जारी की जा सके और काम शुरू हो। विकास की अड़चनें दूर करने के लिए बनेगा वरिष्ठ वकीलों का पैनल आगरा एयरपोर्ट के विस्तारीकरण, नए पुलों के निर्माण और सड़क चौड़ीकरण में पेड़ों की कटाई को लेकर एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी अड़चनों को सीएम ने काफी गंभीरता से लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विकास कार्यों को किसी भी कीमत पर रुकने न दिया जाए। इन अड़चनों को दूर करने के लिए वरिष्ठ और अनुभवी अधिवक्ताओं का एक पैनल बनाकर अदालतों में प्रभावी पैरवी की जाए। साथ ही, जहां सड़क निर्माण में पुराने पेड़ आ रहे हैं, उस जमीन को छोड़कर सड़क चौड़ीकरण का नया विकल्प तैयार किया जाए। ग्रामीण सड़कों को तोड़ने वाले भारी वाहनों से वसूला जाएगा हर्जाना मुख्यमंत्री ने ग्रामीण इलाकों की सड़कों से गुजरने वाले भारी ट्रकों और डंपरों पर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण सड़कें भारी वाहनों के आवागमन के लिए नहीं बनाई जाती हैं। इन डंपरों के कारण सड़कें समय से पहले टूट जाती हैं, जिससे ग्रामीणों को भारी असुविधा होती है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि ऐसे भारी वाहनों के ग्रामीण रास्तों पर चलने पर तुरंत रोक लगाई जाए और जो वाहन सड़क को नुकसान पहुंचाएं, उन्हीं से सड़क मरम्मत की क्षतिपूर्ति भी वसूली जाए। अवैध खनन और छुट्टा पशुओं पर लगेगी सख्त लगाम पड़ोसी राज्यों (राजस्थान और मध्य प्रदेश) से होने वाले अवैध खनन और निराश्रित पशुओं की समस्या पर भी मुख्यमंत्री ने चिंता व्यक्त की। उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिए कि सीमा पर कड़ी निगरानी रखी जाए और अवैध खनन पर प्रभावी कार्रवाई की जाए। इसके अलावा, पड़ोसी राज्यों के प्रशासन के साथ बेहतर समन्वय बनाकर छुट्टा पशुओं की समस्या का समाधान निकाला जाए ताकि आगरा के किसानों की फसलों का कोई नुकसान न हो। गोवर्धन परिक्रमा मार्ग और शहर को जाम से मुक्ति दिलाने पर जोर बैठक के दौरान जनप्रतिनिधियों ने शहर में भारी ट्रैफिक को कम करने के लिए दयालबाग से खंदौली बायपास, यमुना पर नया पुल, एत्मादपुर बाईपास और ग्वालियर रोड पर जलभराव की समस्या को प्रमुखता से रखा। सीएम ने इन सभी प्रस्तावों को कार्ययोजना में शामिल करने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री ने गोवर्धन परिक्रमा मार्ग की खराब हालत पर सख्त निर्देश देते हुए कहा कि नई और बेहतर तकनीक का उपयोग कर परिक्रमा मार्ग का निर्माण प्राथमिकता पर किया जाए, ताकि पैदल चलने वाले श्रद्धालुओं के पैरों में छाले न पड़ें। बैठक में केंद्रीय राज्यमंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल, एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी, महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार मंत्री बेबीरानी मौर्य, पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह, गन्ना एवं चीनी मिल मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी, सांसद राजकुमार चाहर, सांसद नवीन जैन, विधायक डॉ. जीएस धर्मेश, भगवान सिंह कुशवाह, पुरुषोत्तम खंडेलवाल, चौधरी बाबू लाल, पक्षालिका सिंह, डॉ. धर्मपाल सिंह, महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाह, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. मंजू भदौरिया, मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप सिंह, जिलाधिकारी आगरा मनीष बंसल, आगरा विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष एम अरुणमोली, नगरायुक्त श्री संतोष कुमार वैश्य, मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह सहित आगरा मंडल के समस्त जनप्रतिनिधिगण व संबंधित समस्त आलाधिकारी मौजूद रहे।

CM योगी आज पीलीभीत और मुरादाबाद दौरे पर, करोड़ों की विकास परियोजनाओं की देंगे सौगात

सीएम योगी सोमवार को पीलीभीत- मुरादाबाद दौरे पर, विकास परियोजनाओं की देंगे सौगात पीलीभीत में 569 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं का करेंगे लोकार्पण/शिलान्यास एवं पट्टा विवरण मुरादाबाद मंडल में चल रहे विकास कार्यों और कानून-व्यवस्था की करेंगे समीक्षा लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार 29 जून को पीलीभीत और मुरादाबाद के दौरे पर रहेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मुख्यमंत्री पहले पीलीभीत पहुंचेंगे, जहां बीसलपुर में पीलीभीत के बरखेड़ा एवं बीसलपुर विधानसभा क्षेत्रों के 569 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास एवं पट्टा विवरण करेंगे। यहां वह जनसभा को भी संबोधित करेंगे। पीलीभीत के बाद मुख्यमंत्री मुरादाबाद पहुंचेंगे, जहां वह सर्किट हाउस में आयोजित मुरादाबाद मंडल में लोक निर्माण विभाग के पुराने कार्यों की समीक्षा और नए कार्यों की कार्ययोजना के संबंध में बैठक करेंगे। मुख्यमंत्री मुरादाबाद के विकास कार्यों और कानून व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा भी करेंगे। इसके बाद मुरादाबाद सदर, मुरादाबाद देहात व कुन्दरकी विधानसभा क्षेत्रों तथा नगर निगम मुरादाबाद एवं मुरादाबाद विकास प्राधिकरण के विकास कार्यों का लोकार्पण/ शिलान्यास कार्यक्रम में शामिल होंगे। यहां वह जनसभा को भी संबोधित करेंगे। यहां दानवीर भामाशाह जयंती एवं व्यापारी कल्याण दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन होगा। साथ ही मुख्यमंत्री गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय परिसर का निरीक्षण करेंगे। मुख्यमंत्री मुरादाबाद के सर्किट हाउस में ही रात्रि विश्राम करेंगे।

जेवर से CM योगी का बड़ा संदेश, 75 हजार एकड़ लैंड बैंक और आसान मंजूरी के साथ निवेशकों को बुलाया उत्तर प्रदेश

 नोएडा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को देश और दुनिया के निवेशकों को राज्य में निवेश करने के लिए  आमंत्रित किया. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश 75,000 एकड़ का लैंड बैंक, सेक्टर-स्पेसिफिक पॉलिसी, इंसेंटिव और सिंगल-विंडो क्लियरेंस सिस्टम जैसी सुविधाएं प्रदान कर रहा है. गौतम बुद्ध नगर के जेवर में एम्बर और एसेंट-के सर्किट्स के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के शिलान्यास समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश में बड़ा परिवर्तन हुआ है, जिससे यह निवेश के लिए आकर्षक गंतव्य बन गया है।  उन्होंने कहा, 'पश्चिमी उत्तर प्रदेश का जेवर क्षेत्र, जो कभी पहचान के संकट से जूझ रहा था, आज पूरी तरह बदल चुका है. कानून-व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और उत्तर प्रदेश आज 75,000 एकड़ के लैंड बैंक के साथ देश और दुनिया के निवेशकों का स्वागत कर रहा है.' मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य सरकार ने 36 विभिन्न क्षेत्रों के लिए नीतियां बनाई हैं, जिससे निवेशक अपनी सुविधा के अनुसार क्षेत्र चुन सकते हैं और सरकार उन्हें हर संभव सहयोग दे रही है।  हमारे पास हर सेक्टर के लिए नीति: CM योगी योगी आदित्यनाथ ने कहा, 'हमारे पास हर सेक्टर के लिए नीति है. निवेशक यहां आकर निवेश कर सकते हैं. सरकार समय पर इंसेंटिव देती है और सिंगल-विंडो क्लियरेंस की सुविधा उपलब्ध है. कोई भी निवेशक बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के अपने प्रोजेक्ट स्थापित कर सकता है और विकास की गति को तेज करने में योगदान दे सकता है.' सीएम योगी ने कहा कि एम्बर ग्रुप और दक्षिण कोरिया की एसेंट-के सर्किट्स (प्राइवेट इंडिया-कोरिया जॉइंट वेंचर) द्वारा किए जा रहे 6,045 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से रोजगार के अवसर पैदा होंगे और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम में और अधिक एंकर यूनिट्स की स्थापना को बढ़ावा मिलेगा।  उन्होंने भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का उल्लेख करते हुए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार जताया. साथ ही केंद्रीय पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव को भी उनके मंत्रालय से समय पर मंजूरी दिलाने के लिए धन्यवाद दिया. इस कार्यक्रम में दोनों केंद्रीय मंत्रियों के साथ उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास एवं निर्यात प्रोत्साहन मंत्री नंद गोपाल गुप्ता, जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह और अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।  उत्तर प्रदेश देश का MSME हब बना: CM योगी  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, 'हमारा उद्देश्य है कि जिन उत्पादों का आज हम आयात करते हैं, उनका निर्माण भारत में हो और उन्हें दुनिया भर में निर्यात किया जाए. भारत को इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स का वैश्विक हब बनना है.' उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश पहले ही 96 लाख से अधिक पंजीकृत सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) के साथ देश का एमएसएमई हब बन चुका है. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य अब भारत का मोबाइल फोन निर्माण केंद्र बन गया है, जहां देश के लगभग 55 प्रतिशत मोबाइल फोन और 55-60 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स का उत्पादन नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में हो रहा है।  योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री का विजन 2047 तक भारत को विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाना है और उस दिशा में यात्रा उत्तर प्रदेश, विशेष रूप से गौतम बुद्ध नगर में, शुरू हो चुकी है. उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए नागरिकों की भागीदारी और उनके नागरिक कर्तव्यों का पालन बेहद आवश्यक होगा।   

मुख्यमंत्री ने किया गोरखपुर में एस्ट्रोमेडिक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल का उद्घाटन, कहा- गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा आज की आवश्यकता

सीएम फंड से जरूरतमंदों को इलाज के लिए हर साल दिए जाते हैं 1200 से 1500 करोड़ रुपये मुख्यमंत्री ने किया गोरखपुर में एस्ट्रोमेडिक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल का उद्घाटन, कहा- गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा आज की आवश्यकता पहले की सरकार हर जिले में पालती थी माफिया, वर्तमान सरकार हर जिले को दे रही मेडिकल कॉलेज: सीएम योगी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र का उन्नयन डबल इंजन सरकार की प्राथमिकता: सीएम योगी गोरखपुर,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जरूरतमंद लोगों के इलाज के लिए प्रति वर्ष 1200 से 1500 करोड़ रुपये मुख्यमंत्री राहत कोष से दिए जाते हैं। गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा आज की आवश्यकता है। वर्ष 2017 के बाद स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवा के विस्तार से सरकार ने प्रदेश के प्रति लोगों की धारणा को बदला है। पूर्व व वर्तमान सरकार के बीच सबसे बड़ा अंतर यही है कि पहले हर जिले में माफिया पैदा किया गया और अब हर जिले में मेडिकल कॉलेज की सुविधा दी जा रही है। सीएम योगी शुक्रवार को बेतियाहाता में एस्ट्रोमेडिक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल का उद्घाटन करने के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन माफिया’ दिया था, जबकि हमारी सरकार ने प्रदेश को ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन मेडिकल कॉलेज’, ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट’ और ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन कुज़ीन’ जैसी योजनाओं का उपहार दिया है। इन योजनाओं से प्रदेश के प्रति धारणा बदलने, नई और मजबूत पहचान बनाने में मदद मिली है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र का उन्नयन सरकार की प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में संपूर्ण विश्व की सबसे बड़ी स्कीम ‘आयुष्मान भारत’ संचालित हो रही है। इस स्कीम में जो तबके छूट गए, उन्हें यूपी सरकार ने राज्य स्तर पर कवर किया। इस योजना में लाभार्थियों को पांच लाख रुपये तक के इलाज की सुविधा मुफ्त मिलती है। इसके अलावा वह जरूरतमंद लोगों के इलाज के लिए प्रति वर्ष 1200 से 1500 करोड़ रुपये मुख्यमंत्री राहत कोष से देते हैं। बीमार थी पूर्व की सरकारों की मानसिकता मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के बाद से प्रदेश में व्यापक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। बिना भेदभाव सबको सुरक्षा, सम्मान और शासन की सुविधाओं का लाभ मिल रहा है। पहले पूर्वी उत्तर प्रदेश में एकमात्र गोरखपुर का बीआरडी मेडिकल कॉलेज था, जो खुद ही बीमार था। वास्तव में मेडिकल कॉलेज बीमार नहीं था, बल्कि तत्कालीन सरकारों की मानसिकता बीमार थी, जिन्होंने यहां की जनता को मरने के लिए छोड़ दिया था। आज वही बीआरडी मेडिकल कॉलेज बेहतरीन तरीके से संचालित हो रहा है। गोरखपुर में एम्स की भी सुविधा मिल रही है। गोरखपुर के अलावा महाराजगंज, देवरिया, सिद्धार्थनगर, बस्ती, बलरामपुर, गोंडा, बहराइच, आजमगढ़, गाजीपुर, रायबरेली, अमेठी, मिर्जापुर, चंदौली में मेडिकल कॉलेज बन गए हैं। इन मेडिकल कॉलेज में क्लासेज के साथ हॉस्पिटल भी बेहतरीन तरीके से चल रहे हैं। बलिया में भी मेडिकल कॉलेज को स्वीकृति मिल चुकी है।  आज सरकारी अस्पतालों में सभी सुविधाएं उपलब्ध मुख्यमंत्री ने कहा कि आज सरकारी अस्पतालों में सभी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हैं, जबकि 2017 के पहले लखनऊ, दिल्ली, मुंबई सहित सभी बड़े शहरों में इलाज के लिए पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोगों की लंबी कतार नजर आती थी। 2005 में गोरखपुर के जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. एके गुप्ता की दुखद मृत्यु कार्डियक अरेस्ट से हो गई थी। तब एक भी आईसीयू बेड नहीं था। डायलिसिस की सुविधा नहीं थी, अच्छे ब्लड बैंक नहीं थे, प्लेटलेट्स की सुविधा नहीं थी। आज गोरखपुर में दो दर्जन से अधिक अस्पताल ऐसे हैं, जहां आईसीयू की सुविधा है। 2007 में गोरखनाथ हॉस्पिटल में 10 बेड के साथ पहली बार आईसीयू की सुविधा शुरू हुई थी। ब्लड सेपरेटर मशीन और डायलिसिस मशीन भी पहली बार गोरखनाथ हॉस्पिटल में ही लगाई गई। आज सभी सरकारी अस्पतालों में बेहतरीन सुविधाएं उपलब्ध हैं। विश्वसनीय स्वास्थ्य सेवा देना बड़ी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वसनीय स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना अस्पताल और डॉक्टर की बड़ी जिम्मेदारी है। प्रयास होना चाहिए हम स्वस्थ रहें। फिर भी कभी बीमारी आ गई तो उपचार का केंद्र अच्छा होना चाहिए। उपचार के अच्छे केंद्र के रूप में आज एस्ट्रोमेडिक्स हॉस्पिटल के जरिए एक नई कड़ी जुड़ी है। यूपी में जो स्वास्थ्य क्षेत्र पहले की सरकारों में उपेक्षित था, आज लोगों ने उसमें निवेश करना प्रारंभ किया है।  गोरक्षपीठ के अनन्य भक्त थे मार्कण्डेय चंद हॉस्पिटल संचालक परिवार के अभिभावक रहे पूर्व मंत्री मार्कण्डेय चंद की स्मृतियों को साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व मंत्री गोरक्षपीठ के अनन्य भक्त थे। वह किसी भी दल में रहे हों, पीठ के प्रति उनका गहरा लगाव व गहरी आस्था थी। करियर दांव पर लगाकर भी वह संबंधों को महत्व देते थे। सीएम ने एक संस्मरण साझा करते हुए कहा कि मार्कण्डेय चंद ने बसपा सरकार में मंत्री रहते हुए भी विधानभवन में मुझे अपनी कुर्सी पर बैठने के लिए इस आशय से आग्रह किया कि उनके लिए गोरक्षपीठ सर्वोपरि है। उनके पुत्रों सीपी चंद और अरुण चंद ने एस्ट्रोमेडिक्स हॉस्पिटल के जरिये उनकी स्मृतियों को जीवंत किया है। मार्कण्डेय चंद की प्रतिमा का अनावरण किया सीएम ने हॉस्पिटल के शिलापट्ट का अनावरण करने के उपरांत मुख्यमंत्री ने भ्रमण कर व्यवस्थाओं व चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने परिसर में पूर्व मंत्री स्वर्गीय मार्कण्डेय चंद की प्रतिमा का अनावरण भी किया और पुष्पार्चन कर उनकी स्मृतियों को नमन किया। सीएम योगी के नेतृत्व में मिसाल बना चिकित्सा क्षेत्र: सीपी चंद उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए एमएलसी एवं हॉस्पिटल के अध्यक्ष सीपी चंद ने कहा कि सीएम योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सुविधाओं की मिसाल पेश कर रहा है। सीएम की प्रेरणा से वह अपने पिता स्व. मार्कण्डेय चंद के स्वप्न को साकार करने के लिए इस हॉस्पिटल का प्रोजेक्ट लेकर आए हैं। इसके संचालन में गुरुग्राम के फोर्टिस हॉस्पिटल का भी सहयोग मिलेगा। कार्यक्रम को सांसद रविकिशन शुक्ल ने भी संबोधित किया। आभार ज्ञापन हॉस्पिटल के प्रबंध निदेशक डॉ. अरुण चंद ने किया। इस अवसर पर महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, विधायक विपिन सिंह, महेंद्रपाल सिंह, राजेश त्रिपाठी, श्रीराम चौहान, डॉ. विमलेश पासवान, प्रदीप शुक्ल, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, हॉस्पिटल की चिकित्सा निदेशक डॉ. आरती चंद, कालीबाड़ी के … Read more

योगी सरकार का बड़ा फैसला, टाटा टेक्नोलॉजीज के सहयोग से 149 ITI में शुरू होंगे आधुनिक कोर्स

योगी सरकार का बड़ा फैसला: टाटा टेक्नोलॉजीज के सहयोग से 149 आईटीआई और स्टाफ ट्रेनिंग सेंटर में चलेंगे आधुनिक कोर्सेज 1065 पदों पर आउटसोर्सिंग से होगी भर्ती, जेम पोर्टल से होगा  चयन  ईवी मैकेनिक, रोबोटिक्स, 3डी प्रिंटिंग, आई ओटी समेत 9 आधुनिक कोर्सेज में मिलेगी ट्रेनिंग लखनऊ, उत्तर प्रदेश की योगी  सरकार ने प्रदेश के युवाओं को वैश्विक स्तर पर रोजगार के नए अवसर प्रदान करने और उन्हें उन्नत तकनीकी शिक्षा से लैस करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'कौशल विकास से आत्मनिर्भरता' के विजन को धरातल पर उतारते हुए राज्य सरकार ने टाटा टेक्नोलॉजीज लिमिटेड (टीटीएल) के सहयोग से प्रदेश के 149 राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) और 01 प्रादेशिक स्टाफ प्रशिक्षण एवं शोध केन्द्र, अलीगंज-लखनऊ में अत्याधुनिक कोर्सेज के संचालन को हरी झंडी दे दी है। प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश की तकनीकी शिक्षा को अपग्रेड किया जा रहा है। इसी क्रम में राज्यपाल की ओर से टाटा द्वारा विकसित किए गए आधुनिक व्यवसायों के सुचारु संचालन के लिए कुल 1,065 पदों की मैनपावर को आउटसोर्सिंग के माध्यम से रखने की स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। इसके तहत प्रदेश भर में 171 कार्यदेशक (वर्कशॉप इंस्ट्रक्टर) और 894 प्रशिक्षकों (इंस्ट्रक्टर्स) की सेवाएं ली जाएंगी। मंत्री ने कहा  कि योगी सरकार युवाओं को रोजगार देने और व्यवस्था को पारदर्शी बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। इन सभी 1,065 सेवाओं को 'आउटसोर्सिंग ऑफ सर्विस' (जॉब आउटसोर्सिंग) के आधार पर 'जेम पोर्टल' के माध्यम से क्रय किया जाएगा। सेवा प्रदाता एजेंसी का चयन पूरी तरह से स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी रीति से कार्मिक विभाग, सूक्ष्म लघु एवं मध्यम विभाग तथा श्रम विभाग के शासनादेशों के प्रावधानों और सुसंगत नियमों के आलोक में किया जाएगा। इन पदों हेतु शैक्षिक योग्यता आदि का निर्धारण प्रशिक्षण निदेशालय द्वारा तय कर शासन से अनुमोदित कराया जाएगा। यह आदेश वित्त विभाग की सहमति के बाद जारी कर दिया गया है। टाटा टेक्नोलॉजीज के सहयोग से प्रदेश के युवाओं को अब पारंपरिक कोर्सेज से इतर चौथी औद्योगिक क्रांति (इंडस्ट्री 4.0) के मांग वाले क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया जाएगा। इन संस्थानों में इलेक्ट्रिक व्हीकल मैकेनिक, इंडस्ट्रियल रोबोटिक्स एंड डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग तकनीशियन, एडवांस्ड सीएनसी मशीनिंग तकनीशियन, मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस कंट्रोल एंड ऑटोमेशन, इंडस्ट्रियल इंटरनेट ऑफ थिंग्स तकनीशियन, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग तकनीशियन/3डी प्रिंटिंग, सीएएम प्रोग्रामर, बेसिक डिजाइनर एंड वर्चुअल वेरिफायर-मैकेनिकल तथा आर्टिसन यूजिंग एडवांस्ड टूल जैसे 9 अत्याधुनिक कोर्सेज संचालित किए जा रहे हैं। टाटा टेक्नोलॉजीज के सहयोग से संचालित होने वाले ये कोर्सेज प्रदेश के युवाओं को वैश्विक कंपनियों की जरूरत के मुताबिक तैयार करेंगे। आईटीआई से पास होने वाले छात्रों को न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी बेहतरीन पैकेज पर रोजगार मिल सकेगा। योगी सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को देश का सबसे बड़ा 'स्किल हब' बनाना है और यह कदम उसी दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।