samacharsecretary.com

इन्वेस्टर्स समिट, ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और चार ग्राउंडब्रेकिंग समारोहों से यूपी बना देश का सबसे भरोसेमंद निवेश गंतव्य

यूपी दिवस विशेष प्रदेश में निवेश के नए युग का आगाज, एमओयू से ग्राउंड ब्रेकिंग तक ऐतिहासिक प्रगति इन्वेस्टर्स समिट, ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और चार ग्राउंडब्रेकिंग समारोहों से यूपी बना देश का सबसे भरोसेमंद निवेश गंतव्य रिकॉर्ड निवेश से औद्योगिक आधार का विस्तार, कारखानों, रोजगार और उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि सेमीकंडक्टर, टेक्सटाइल, लेदर, फूड प्रोसेसिंग और लॉजिस्टिक्स हब के जरिए संतुलित क्षेत्रीय विकास राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत समग्र योजना, तेज क्रियान्वयन और जनपद स्तर तक इंटीग्रेशन आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के साथ रक्षा कॉरिडोर, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स का विस्तार लखनऊ योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने बीते पौने नौ वर्षों में विकास की वह यात्रा तय की है, जो वर्ष 2017 से पहले कल्पना से परे थी। एक समय निवेशकों के लिए अविश्वसनीय माना जाने वाला प्रदेश आज देश का सबसे बड़ा निवेश गंतव्य बन चुका है। वर्ष 2018 की पहली इन्वेस्टर्स समिट से लेकर 2023 की ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट तक योगी सरकार ने निवेश को सिर्फ घोषणाओं तक सीमित नहीं रखा, बल्कि ग्राउंड ब्रेकिंग और क्रियान्वयन के मजबूत मॉडल के जरिए उसे धरातल पर उतारा। प्रदेश में अब तक 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली 16 हजार से ज्यादा परियोजनाओं का शिलान्यास हो चुका है, जिनमें से हजारों परियोजनाएं व्यावसायिक रूप से संचालित होकर लाखों युवाओं को रोजगार दे रही हैं।  प्रधानमंत्री गति शक्ति मास्टर प्लान, डिफेंस कॉरिडोर, सेमीकंडक्टर नीति, आईटी–आईटीईएस, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में किए गए सुनियोजित प्रयासों ने उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य की छवि से निकालकर भारत के औद्योगिक विकास का अगुआ बना दिया है। कानून-व्यवस्था, पारदर्शिता और समयबद्ध निर्णयों के साथ योगी सरकार ने यह साबित किया है कि उत्तर प्रदेश केवल संभावनाओं का नहीं, बल्कि संभावनाओं को परिणाम में परिवर्तित करने वाला राज्य है। भरोसे की बहाली से निवेश की बहार तक उत्तर प्रदेश का कायाकल्प वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की पहचान कमजोर कानून-व्यवस्था, निवेशकों की उदासीनता और अधूरी परियोजनाओं से जुड़ी थी। उद्योग लगाने में वर्षों लग जाते थे, फाइलें दफ्तरों में अटकी रहती थीं और रोजगार की तलाश में युवा प्रदेश से बाहर पलायन करने को मजबूर थे। इंफ्रास्ट्रक्चर, एक्सप्रेसवे, औद्योगिक पार्क और आधुनिक लॉजिस्टिक्स की कमी ने राज्य की अर्थव्यवस्था को जकड़ रखा था। वर्ष 2017 में सत्ता संभालते ही योगी आदित्यनाथ ने सबसे पहले कानून-व्यवस्था, पारदर्शिता और गुड गवर्नेंस को प्राथमिकता दी। ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’, ‘इन्वेस्ट यूपी’ और ‘निवेश सारथी’ जैसे प्लेटफॉर्म्स ने निवेशकों का भरोसा लौटाया। वर्ष 2018 की इन्वेस्टर्स समिट से शुरू हुई यह यात्रा 2023 की ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट तक ₹45 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्तावों तक पहुंची है और अब भी निरंतर जारी है।  घोषणाओं से आगे ग्राउंड ब्रेकिंग का मॉडल योगी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि निवेश सिर्फ एमओयू तक सीमित नहीं रहे। अब तक चार ग्राउंडब्रेकिंग समारोहों के जरिए 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाली 16,000 से ज्यादा परियोजनाओं का शिलान्यास हो चुका है। इनमें 8,300 से अधिक परियोजनाओं का व्यावसायिक संचालन प्रारंभ हो चुका है, जिससे लाखों युवाओं को रोजगार मिला है। योगी सरकार की औद्योगिक नीति ने कुछ चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित रहने के बजाय सेमीकंडक्टर, टेक्सटाइल, लेदर, फूड प्रोसेसिंग, प्लास्टिक, परफ्यूम, फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विविध क्षेत्रों को समान रूप से बढ़ावा दिया। पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क, मेगा लेदर क्लस्टर, फूड पार्क और फ्लैटेड फैक्ट्री मॉडल ने छोटे-मध्यम निवेशकों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ा। आज देश के 65% से अधिक मोबाइल फोन उत्तर प्रदेश में बन रहे हैं और लखनऊ-नोएडा जैसे शहर उभरते टेक हब बन चुके हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर और गति शक्ति से मिली विकास को रफ्तार प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के साथ उत्तर प्रदेश ने योजना, भूमि उपयोग और परियोजना क्रियान्वयन को एकीकृत किया। एक्सप्रेसवे-आधारित औद्योगिक क्लस्टर, मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स हब, ट्रांस-गंगा सिटी और ग्रेटर नोएडा निवेश क्षेत्र ने राज्य को इंफ्रास्ट्रक्चर-ड्रिवन इकोनॉमी की दिशा में अग्रसर किया। जिला स्तर तक डेटा-आधारित योजना आज उत्तर प्रदेश की पहचान बन चुकी है। उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर, ब्रह्मोस इंटीग्रेशन सुविधा, अदानी डिफेंस जैसी मेगा यूनिट्स ने राज्य को राष्ट्रीय सुरक्षा उत्पादन का केंद्र बनाया। वहीं डेटा सेंटर नीति, आईटी-आईटीईएस विस्तार और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) के जरिए उत्तर प्रदेश डिजिटल और नॉलेज इकॉनमी का नया हब बन रहा है। यह बदलाव केवल निवेश नहीं, बल्कि भविष्य की नौकरियों और तकनीकी नेतृत्व का आधार है। बुंदेलखंड से पूर्वांचल तक विकास का समावेशी मॉडल बुंदेलखंड, पूर्वांचल व तराई क्षेत्रों में औद्योगिक पार्कों की स्थापना साबित करती है कि योगी सरकार का विकास मॉडल केवल पश्चिमी यूपी तक सीमित नहीं। वर्ष 2017 के बाद पहली बार उत्तर प्रदेश में क्षेत्रीय संतुलन के साथ औद्योगिकीकरण साकार हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने यह साबित कर दिया है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति, सख्त प्रशासन और स्पष्ट विजन से किसी भी राज्य की तस्वीर बदली जा सकती है। यूपी अब बीते कल की चुनौतियों में नहीं, बल्कि भविष्य की संभावनाओं में जी रहा है। एक ऐसा प्रदेश, जो भारत की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाने को तैयार है।

सीएम योगी का बड़ा बयान: ‘धर्म की आड़ में कालनेमि सनातन धर्म को कमजोर कर रहे

 लखनऊ प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य से जुड़े हालिया विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने धर्म, राष्ट्र और सनातन पर तीखा और स्पष्ट संदेश दिया है. बिना किसी का नाम लिए उन्होंने कहा कि आज के समय में धर्म की आड़ लेकर सनातन धर्म को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं और ऐसे लोगों से समाज को सतर्क रहने की जरूरत है. सीएम योगी ने ऐसे तत्वों को 'कालनेमि' करार देते हुए कहा कि ये लोग बाहर से धार्मिक दिखते हैं, लेकिन भीतर से धर्मविरोधी एजेंडे पर काम कर रहे हैं. सीएम योगी ने कहा कि एक योगी, संत या संन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं होता. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि संन्यासी की कोई व्यक्तिगत संपत्ति नहीं होती, उसकी असली संपत्ति धर्म होता है और राष्ट्र ही उसका स्वाभिमान होता है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि जो व्यक्ति धर्म के खिलाफ आचरण करता है, चाहे वह किसी भी रूप में क्यों न हो, उसे सनातन परंपरा का प्रतिनिधि नहीं माना जा सकता. कौन है कालनेमि  सीएम योगी के बयान में इस्तेमाल किया गया कालनेमि शब्द अपने आप में गहरा अर्थ रखता है. कालनेमि का उल्लेख रामायण में मिलता है. वह एक मायावी असुर था, जिसने साधु का वेश धारण कर हनुमान को भ्रमित करने की कोशिश की थी. बाहर से वह धर्मात्मा और तपस्वी दिखाई देता था, लेकिन भीतर से उसका उद्देश्य भगवान राम के कार्य में बाधा डालना था. अंततः हनुमान ने उसके छल को पहचान लिया और उसका वध कर दिया. शंकराचार्य विवाद के बीच आया बयान सीएम योगी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब शंकराचार्य को अपने अनुयायियों के साथ रथ से मौनी अमावस्या पर स्थान करने जाने से रोकने के बाद बहस तेज है. हालांकि मुख्यमंत्री ने किसी व्यक्ति या संस्था का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके शब्दों को मौजूदा विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है. उनका संदेश यह था कि सनातन धर्म की रक्षा केवल परंपराओं से नहीं, बल्कि आचरण की शुद्धता से होती है. धर्म आचरण में दिखना चाहिए सीएम योगी ने यह भी कहा कि धर्म केवल वेश या शब्दों में नहीं, बल्कि आचरण में दिखाई देना चाहिए. उन्होंने समाज से अपील की कि धर्म के नाम पर फैलाए जा रहे भ्रम और दिखावे से सावधान रहें. उन्होंने कहा कि सनातन धर्म ने हमेशा सत्य, संयम और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा है और इसी मार्ग पर चलना ही उसकी सच्ची सेवा है.  

डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण, स्वरोजगार और महिला सशक्तिकरण को मिलेगा बढ़ावा

योगी सरकार ने दी कौशल क्रांति को नई दिशा :  ‘कौशल दिशा’ पोर्टल से ग्रामीण युवाओं को मिलेगा रोजगार का मार्ग डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण, स्वरोजगार और महिला सशक्तिकरण को मिलेगा बढ़ावा ग्रामीण क्षेत्रों में कौशल अंतर को समाप्त कर युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाना है पोर्टल का उद्देश्य तकनीक और नवाचार से मजबूत होगा कौशल इकोसिस्टम लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल के रूप में “कौशल दिशा” पोर्टल विकसित किया गया है। यह पोर्टल राज्य में कौशल विकास की व्यापक और समावेशी नीति का सशक्त डिजिटल माध्यम है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में कौशल अंतर को समाप्त कर युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाना है। “कौशल दिशा” पोर्टल योगी सरकार की उस सतत प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके तहत युवाओं को कौशल, आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक आजीविका से जोड़ते हुए उत्तर प्रदेश को विकसित भारत के लक्ष्य की ओर अग्रसर किया जा रहा है। डिजिटल माध्यम से ग्रामीण युवाओं को सशक्त बनाने की पहल प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने बताया कि “कौशल दिशा” एक ऑनलाइन कौशल शिक्षा मंच है, जो सरल पंजीकरण प्रक्रिया, सेल्फ लर्निंग, ऑनलाइन मूल्यांकन एवं प्रमाणन जैसी सुविधाओं के माध्यम से कौशल प्रशिक्षण को युवाओं की सीधी पहुंच में लाता है। यह प्लेटफॉर्म दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) 1.0 के अंतर्गत चयनित शीर्ष 10 प्रमुख सेक्टरों में ऑनलाइन प्रशिक्षण उपलब्ध कराता है। इनमें आईटी-आईटीईएस, पर्यटन एवं आतिथ्य, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्वास्थ्य सेवाएं, परिधान एवं रेडीमेड गारमेंट, होम फर्निशिंग, रिटेल और लॉजिस्टिक्स जैसे रोजगारोन्मुखी क्षेत्र शामिल हैं। पोर्टल के माध्यम से ग्रामीण निर्धन युवाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा, जिससे उनकी रोजगार क्षमता में वृद्धि होगी। महिला सशक्तिकरण को मिलेगा विशेष लाभ “कौशल दिशा” पोर्टल विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए लाभकारी है, जो सामाजिक या पारिवारिक कारणों से प्रशिक्षण केंद्रों तक भौतिक रूप से नहीं पहुंच पातीं। स्मार्टफोन और इंटरनेट के माध्यम से घर बैठे प्रशिक्षण प्राप्त कर प्रमाणन हासिल करने की सुविधा योगी सरकार की महिला सशक्तिकरण नीति को नई मजबूती प्रदान करती है। यह पोर्टल उत्तर प्रदेश सरकार के व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत कौशल विकास को प्रौद्योगिकी और नवाचार से जोड़कर राज्य में एक मजबूत, समावेशी और भविष्य-उन्मुख कौशल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जा रहा है।

वित्तीय वर्ष 2025–26 में उत्तर प्रदेश ने ग्रामीण आजीविका के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की

ग्रामीण आजीविका में योगी सरकार ने बनाया रिकॉर्ड, 23 लाख से अधिक महिलाओं को मिला रोजगार वित्तीय वर्ष 2025–26 में उत्तर प्रदेश ने ग्रामीण आजीविका के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की रोजगार से नेतृत्व तक उत्तर प्रदेश के गांवों में महिलाओं के हाथ आई कमान लखनऊ,  उत्तर प्रदेश में गांवों की तस्वीर अब बदल रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार अब सिर्फ रोजगार नहीं दे रही, बल्कि गांव-गांव महिला नेतृत्व तैयार कर रही है। रोजगार गारंटी व्यवस्था के जरिए उत्तर प्रदेश ने वह कर दिखाया है, जो अब तक सिर्फ कल्पना थी। महिलाएं अब मेट बनकर काम की निगरानी, प्रबंधन और नेतृत्व कर रही हैं। मानव दिवस सृजन में महिलाओं की सहभागिता 43 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। आंकड़ों से साफ है कि उत्तर प्रदेश में ग्रामीण अर्थव्यवस्था अब महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व से तेजी से मजबूत हो रही है। वित्तीय वर्ष 2025–26 में उत्तर प्रदेश ने ग्रामीण आजीविका के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। 23 लाख से अधिक महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराकर प्रदेश ने न सिर्फ लाखों परिवारों को स्थायी सहारा दिया है, बल्कि गांवों में आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव भी रखी है। ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं की आय बढ़ी है और उनका सामाजिक-आर्थिक आत्मविश्वास भी मजबूत हुआ है। महिला नेतृत्व को मिला नया मंच योगी सरकार की सोच का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि वित्तीय वर्ष 2025–26 में अब तक करीब 32 हजार से अधिक महिला मेट्स को कार्य सौंपा गया है। ये महिलाएं गांवों में कार्यों की निगरानी, श्रमिकों की हाजिरी और प्रबंधन की जिम्मेदारी निभा रही हैं। सरकार ने इन महिला मेट्स को 111 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की है। पारदर्शी और समयबद्ध भुगतान प्रणाली ने महिलाओं का भरोसा सरकारी योजनाओं पर और गहरा किया है। स्वयं सहायता समूह बने नेतृत्व की रीढ़ महिला सशक्तिकरण को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए सरकार ने स्पष्ट रणनीति अपनाई है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों को प्राथमिकता के आधार पर महिला मेट के रूप में चुना जा रहा है। इससे रोजगार के साथ-साथ गांवों में लीडरशिप और मैनेजमेंट स्किल्स का भी तेजी से विकास हो रहा है। गांवों में अब महिलाएं निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बन रही हैं। समय पर भुगतान, भरोसे की गारंटी रोजगार गारंटी व्यवस्था में पारदर्शिता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वित्तीय वर्ष 2025–26 में 97 प्रतिशत से अधिक श्रमिकों को समय से भुगतान किया गया है। यह आंकड़ा बताता है कि सिस्टम अब भरोसेमंद हो चुका है और श्रमिकों को उनकी मेहनत का पूरा मूल्य मिल रहा है। गांवों में बने आय के नए स्रोत प्रदेश में ग्रामीण रोजगार गारंटी के तहत अब तक 6703 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इससे गांवों में विकास कार्यों को नई रफ्तार मिली है, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़े हैं और पलायन पर प्रभावी रोक लगी है। अनुसूचित जाति और जनजाति के परिवारों को विशेष प्राथमिकता देकर सरकार ने समावेशी विकास को भी मजबूत किया है। मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था की ओर योगी सरकार की यह पहल सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत में सामाजिक परिवर्तन की कहानी बन चुकी है। रोजगार से लेकर नेतृत्व तक, महिलाओं को केंद्र में रखकर बनाई गई यह नीति उत्तर प्रदेश को देश के सामने वूमेन-लीड ग्रोथ मॉडल के रूप में स्थापित कर रही है। गांवों में आत्मनिर्भर परिवार, सशक्त महिलाएं और मजबूत अर्थव्यवस्था यही योगी सरकार का नया इतिहास है।

गोवंश संरक्षण को मिली तकनीकी मजबूती, अयोध्या के सभी गो-आश्रय हाईटेक निगरानी से जुड़े

अयोध्या के 87 गो-आश्रय स्थलों में सीसीटीवी से 24 घंटे निगरानी, योगी आदित्यनाथ सरकार की पहल गोवंश संरक्षण को मिली तकनीकी मजबूती, अयोध्या के सभी गो-आश्रय हाईटेक निगरानी से जुड़े सोलर व सिम बेस्ड सीसीटीवी से सुरक्षित हुए अयोध्या के गो-आश्रय स्थल -विकास भवन कंट्रोल रूम से 87 गो-आश्रयों की पल-पल निगरानी -अब ऐप से दिखेगी गोशालाओं की लाइव स्थिति, व्यवस्था में आई पारदर्शिता -सीसीटीवी निगरानी से गोवंशों की देख-रेख में उल्लेखनीय सुधार -14,800 निराश्रित गोवंशों का संरक्षण, सीडीओ बोले व्यवस्था हुई अधिक प्रभावी अयोध्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप निराश्रित गोवंशों के संरक्षण एवं गो-आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में अयोध्या जनपद में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जिले के सभी 87 गो-आश्रय स्थलों में अब वाई-फाई, सोलर एवं सिम बेस्ड सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से 24 घंटे निगरानी सुनिश्चित की गई है। प्रत्येक गो-आश्रय स्थल पर दो-दो कैमरे लगाए गए हैं। एक कैमरा प्रवेश द्वार पर स्थापित किया गया है, जिससे आने-जाने वाली गतिविधियों पर नजर रखी जा सके, जबकि दूसरा कैमरा गोशाला के अंदर लगाया गया है, जिसके माध्यम से गोवंशों की स्थिति, भूसा, हरा चारा, पानी, साफ-सफाई एवं अन्य व्यवस्थाओं की निगरानी की जा रही है। सोलर व सिम बेस्ड कैमरों से निर्बाध निगरानी कैमरे सोलर बेस्ड होने के कारण सूर्य की रोशनी से चार्ज होकर बिना बिजली बाधा के लगातार कार्य कर रहे हैं। वाई-फाई एवं सिम आधारित प्रणाली के चलते मोबाइल फोन व ऐप के माध्यम से लाइव स्ट्रीमिंग को कहीं से भी आसानी से देखा जा सकता है। सभी कैमरों की स्थापना ग्राम पंचायत निधि से की गई है। विकास भवन में कंट्रोल रूम से निगरानी सभी 87 गो-आश्रय स्थलों की निगरानी के लिए अयोध्या विकास भवन में एक केंद्रीय कंट्रोल रूम संचालित किया गया है। यहां 11 विकास खंडों के अलग-अलग ग्रुप बनाकर टेलीविजन स्क्रीन पर एक बार में चार-चार कैमरों की लाइव स्थिति देखी जाती है। कंट्रोल रूम में तैनात कर्मचारी बारी-बारी से सभी गो-आश्रय स्थलों की सतत निगरानी करते हैं और किसी भी कमी के पाए जाने पर तत्काल निवारण की कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। कैमरा प्रणाली की प्रमुख विशेषताएं सीसीटीवी कैमरे 360 डिग्री रोटेशन की क्षमता से युक्त हैं, जिससे गोशाला के अंदर और आसपास के क्षेत्रों की निगरानी संभव है। स्मार्ट डिटेक्शन सेंसिटिविटी के माध्यम से गतिविधियों का स्वतः पता चलता है। ह्यूमन डिटेक्शन एवं स्मार्ट ट्रैकिंग से केयरटेकर व अन्य मानव गतिविधियों की पहचान कर नोटिफिकेशन और क्लिप क्लाउड स्टोरेज में सुरक्षित होती है।डिटेक्शन एरिया सेटिंग से नाद, बैठने के स्थान, साफ-सफाई व भूसा भंडारण की निगरानी की जा सकती है। सायरन सेटिंग अवांछनीय गतिविधियों को रोकने में सहायक है। नाइट विजन मोड से रात्रि में भी स्पष्ट दृश्य उपलब्ध होते हैं, जिससे चोरी और गोवंशों के बाहर निकलने की घटनाओं पर रोक लगी है। डिवाइस कॉल सुविधा के माध्यम से ऐप से गोशाला में मौजूद लोगों से सीधे संवाद भी किया जा सकता है। देख-रेख में आया उल्लेखनीय सुधार इस प्रणाली से गोशालाओं में पाई जाने वाली कमियों का तुरंत पता चल रहा है। समय पर भूसा, हरा चारा, पानी एवं अन्य सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित होने से सुरक्षा, स्वच्छता और गोवंशों की देख-रेख में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।  सीसीटीवी निगरानी से गो-आश्रयों में बढ़ी पारदर्शिता, 14,800 निराश्रित गोवंश सुरक्षित: सीडीओ मुख्य विकास अधिकारी कृष्ण कुमार सिंह ने बताया कि जिले के 87 गो-आश्रय स्थलों में अब तक 14 हजार 800 निराश्रित गोवंशों को संरक्षित किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि सीसीटीवी आधारित निगरानी व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ी है और गो-आश्रयों की व्यवस्थाएं पहले से अधिक प्रभावी और विश्वसनीय हुई हैं। सोलर बेस्ड सिम सीसीटीवी प्रणाली के केंद्रीकृत संचालन से अयोध्या के सभी गो-आश्रय स्थलों की निगरानी अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और दक्ष हो गई है। इससे निराश्रित गोवंशों के संरक्षण की व्यवस्था मजबूत हुई है और पूरी प्रणाली अब अधिक सुदृढ़ एवं भरोसेमंद बन गई है।

यूपी दिवस पर योगी सरकार की पहल, अभिभावकों और समुदाय की भागीदारी से समयबद्ध लक्ष्य प्राप्ति पर जोर

निपुण भारत मिशन को जन-आंदोलन बनाने की तैयारी, 24 जनवरी को हर न्याय पंचायत में होगी ‘शिक्षा चौपाल’ यूपी दिवस पर योगी सरकार की पहल, अभिभावकों और समुदाय की भागीदारी से समयबद्ध लक्ष्य प्राप्ति पर जोर बालवाटिका के प्रभावी संचालन, बच्चों के नामांकन और नियमित उपस्थिति तथा शिक्षा के दीर्घकालिक महत्व पर विशेष बल लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को समयबद्ध ढंग से प्राप्त करने और शिक्षा को जन-आंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में लगातार ठोस कदम उठा रही है। इसी क्रम में प्रदेश की सभी न्याय पंचायतों में 24 जनवरी, 2026 को यूपी दिवस के अवसर पर ‘शिक्षा चौपाल’ का आयोजन किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य अभिभावकों, विद्यालय प्रबंधन समितियों (SMC), शिक्षकों और स्थानीय जनसमुदाय को निपुण भारत मिशन के उद्देश्यों से जोड़ते हुए बच्चों की बुनियादी भाषायी और गणितीय दक्षताओं को सुदृढ़ करना है। बालवाटिका से बुनियादी शिक्षा तक जागरूकता महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी द्वारा समस्त बेसिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेजकर आयोजन के निर्देश दिए गए हैं। इसमें कहा गया है कि शिक्षा चौपाल के माध्यम से बालवाटिका के प्रभावी संचालन, बच्चों के नामांकन और नियमित उपस्थिति तथा शिक्षा के दीर्घकालिक महत्व पर विशेष जोर दिया जाएगा। चौपाल में विद्यालयों को उपलब्ध कराई गई शिक्षण सामग्री, प्रिंट-रिच सामग्री, गणित किट, क्रियाशील पुस्तकालय, खेल सामग्री सहित डिजिटल संसाधनों जैसे स्मार्ट क्लास, ICT लैब, दीक्षा, खान अकादमी और टीचर्स ऐप की जानकारी भी साझा की जाएगी। सम्मान और सहभागिता से बढ़ेगा उत्साह शिक्षा चौपाल के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों, नामांकन व उपस्थिति में उल्लेखनीय सुधार करने वाले विद्यालयों, तथा मेधावी बच्चों को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही, अभिभावकों और SMC सदस्यों के योगदान के लिए उनका आभार भी व्यक्त किया जाएगा। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, प्रबुद्धजन और मीडिया प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाएगा। ₹10 हजार प्रति न्याय पंचायत, सख्त वित्तीय दिशा-निर्देश शिक्षा चौपाल के आयोजन के लिए ₹10,000 प्रति न्याय पंचायत की दर से धनराशि स्वीकृत की गई है। यह राशि टेंट, कुर्सी, साउंड सिस्टम, बैनर, जलपान, स्टेशनरी, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी आदि व्यवस्थाओं पर व्यय की जाएगी। व्यय का विवरण निर्धारित समयसीमा में प्रबंध पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।जिला और मंडलीय स्तर के अधिकारी कार्यक्रम का सतत अनुश्रवण करेंगे।

राजधानी लखनऊ की दो ग्राम पंचायतों से आधार सेवाओं का शुभारंभ

खुशखबरी : अब अपने गांव में ही मिलेंगी आधार से जुड़ी सेवाएं राजधानी लखनऊ की दो ग्राम पंचायतों से आधार सेवाओं का शुभारंभ पहले चरण में 1000 ग्राम पंचायतों में सेवा विस्तार की योजना अब तक 800 से अधिक पंचायत सहायकों को दिया जा चुका प्रशिक्षण सीएम योगी का विजन : पंचायतों को डिजिटल रूप से सशक्त कर रहा पंचायतीराज विभाग लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं की पहुंच को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। पंचायती राज विभाग ने लखनऊ में ग्राम पंचायत स्तर पर आधार केंद्रों की शुरुआत कर दी है, जिससे ग्रामीणों को आधार से जुड़ी सेवाएं अब अपने गांव में ही उपलब्ध हो सकेंगी। प्रदेश की राजधानी लखनऊ के ब्लॉक सरोजनीनगर की ग्राम पंचायत भटगवां पांडेय तथा चिनहट ब्लॉक की सैरपुर ग्राम पंचायत में आधार सेवाएं सफलतापूर्वक प्रारंभ कर दी गई हैं। इन दोनों ग्राम पंचायतों में अब तक 40 से अधिक ग्रामीणों को आधार से संबंधित सेवाएं प्रदान की गई हैं, जिससे उन्हें अब शहरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं। चरणबद्ध तरीके से 57,694 ग्राम पंचायतों तक मिलेगी सुविधा यह पहल पंचायत स्तर पर नागरिक सेवाओं की सहज, पारदर्शी और सुलभ उपलब्धता की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। विभाग की योजना के अनुसार, पहले चरण में प्रदेश की 1000 ग्राम पंचायतों में आधार सेवाएं प्रारंभ की जाएंगी, जिसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से प्रदेश की सभी 57,694 ग्राम पंचायतों तक विस्तारित किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पंचायती राज विभाग द्वारा पंचायत सहायकों का व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। अब तक 800 से अधिक पंचायत सहायकों को प्रारंभिक प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जबकि शेष पंचायत सहायकों का प्रशिक्षण कार्य प्रगति पर है। ग्रामीणों के जीवन को आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि ग्राम स्तर पर आधार सेवाओं की शुरुआत ग्रामीणों के जीवन को आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। यह पहल न केवल समय और संसाधनों की बचत करेगी, बल्कि पंचायतों को आत्मनिर्भर और सक्षम भी बनाएगी। डिजिटल इंडिया और सशक्त पंचायतों के संकल्प को साकार करने की दिशा में बड़ी शुरुआत पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित कुमार सिंह ने कहा कि विभाग ग्राम पंचायतों को डिजिटल रूप से सशक्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। आधार सेवाओं की यह शुरुआत पंचायतों को नागरिक सेवा केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। आने वाले समय में इसका लाभ प्रदेश के हर गांव तक पहुंचेगा। ग्राम पंचायत स्तर पर आधार सेवाओं की यह पहल डिजिटल इंडिया और सशक्त पंचायतों के संकल्प को साकार करने की दिशा में बड़ी शुरुआत मानी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन समारोह को किया संबोधित

लोकतंत्र की आत्मा हैं न्याय, समता व बंधुता: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री ने 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन समारोह को किया संबोधित “सीखो और सिखाओ” के मंच हैं ऐसे सम्मेलनः सीएम योगी ज्वलंत मुद्दों पर लगातार चर्चा-परिचर्चा चलाती है यूपी विधानसभा-परिषदः मुख्यमंत्री लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजधानी लखनऊ में बुधवार को तीन दिवसीय 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन समारोह को संबोधित किया। मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश आए सभी अतिथियों का स्वागत किया और कहा कि विधायिका लोकतंत्र की आधारभूत इकाई है। संविधान संरक्षक के रूप में यह अपनी भूमिका का निर्वहन करते हुए देश में न केवल विधायी कार्यों के लिए रूपरेखा तैयार करती है, बल्कि यह समग्र विकास की कार्ययोजना का मंच भी होती है। संविधान के तीन शब्द (न्याय, समता और बंधुता) भारत के लोकतंत्र की आत्मा के रूप में काम करते हैं। न्याय कैसे प्राप्त होना है, इसका कानून विधायिका के मंच पर तैयार होता है। समतामूलक समाज की स्थापना में सरकार की योजनाएं योगदान दे सकें, उसकी कार्ययोजना का स्थल भी विधायिका का मंच बनता है। विधायिका बंधुता का उदाहरण प्रस्तुत करती है, जहां सहमति व असहमति के बीच भी संवाद के माध्यम से समन्वय होता है।  लोकतंत्र की सर्वोच्च संस्था देश में अत्यंत मजबूत  सीएम योगी ने कहा कि देश में लोकतंत्र की सर्वोच्च संस्था अत्यंत मजबूत है और यह दुनिया के लिए प्रेरणा है। सदन में जनप्रतिनिधि के माध्यम से अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति की आवाज मजबूती से सुनी जा सकती है और संसद इसकी प्रेरणा का केंद्रबिंदु है। उसके माध्यम से देश में योजनाएं बनती हैं। पांच बार लोकसभा सदस्य रहे योगी आदित्यनाथ ने कहा कि संसद में रहकर सीखा कि सामान्य जीवन में सरकार की गतिविधियों, आपसी व्यवहार और नियम के अंतर्गत इन कार्यक्रमों को कैसे आगे बढ़ाया जा सकता है। विधान सभा-विधान परिषद केवल संसद के नियमों-परिनियमों का अवलोकन-प्रशिक्षण ले ले तो उसे अपने सदन संचालन में काफी आसानी होगी।  संसद के प्रति श्रद्धा का भाव हर भारतवासी का दायित्व  सीएम ने कहा कि सतीश महाना ने 2022 में विधानसभा अध्यक्ष का दायित्व संभाला तो मैंने उनसे कहा कि प्रश्नकाल में 20 तारांकित प्रश्न सूचीबद्ध होते हैं, लेकिन सवा घंटे के प्रश्नकाल में केवल दो-तीन सदस्य ही बोल पाते हैं। क्या हम भी इसे संसद की तर्ज पर आगे बढ़ा सकते हैं। इस पर उन्होंने तत्काल नियमावली में परिवर्तन किया। अब सवा घंटे में 20 तारांकित प्रश्न और हर प्रश्न के साथ दो-तीन अनुपूरक प्रश्न भी पूछ लिए जाते हैं। प्रश्न करने वाले और उत्तर देने वाले मंत्रीगण, दोनों पूरी तैयारी के साथ आते हैं। सदन में अधिक से अधिक जनप्रतिनिधियों की सहभागिता दिखती है। संसद हमारे लिए प्रेरणा बनी। हमारे पास सबसे बड़ी लोकतांत्रिक संस्था के रूप में संसद है। यदि हम कुछ कर रहे हैं तो संसद ही उसका आधार बनती है, उसके प्रति श्रद्धा हर भारतवासी का दायित्व है।  एक भाव-एक भंगिमा के साथ बोलता और सोचता है भारत सीएम योगी ने प्रधानमंत्री के वक्तव्य ‘भारत लोकतंत्र की जननी है’ का जिक्र किया, फिर कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कहते थे कि ग्राम स्वराज की परिकल्पना को गांवों ने साकार किया। देश में रूपरंग, खानपान, वेशभूषा अलग हो सकते हैं, लेकिन पूरा भारत एक भाव-एक भंगिमा के साथ बोलता और सोचता है। उसकी आस्था एक होती है। संसद उस आस्था को जोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम है। संसद को आदर्श के रूप में बढ़ाएंगे तो विधायिका और मजबूत-सशक्त होगी।  ‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश’ पर 24 घंटे चली चर्चा के सहभागी बने 300 सदस्य सीएम योगी ने सम्मेलन में पारित हुए छह महत्वपूर्ण प्रस्तावों को अभिनंदनीय बताया और कहा कि प्रधानमंत्री ने आजादी के अमृत महोत्सव में आगामी 25 वर्ष की कार्ययोजना बनाने को कहा। ‘विजन 2047- विकसित भारत’ की परिकल्पना को साकार करने के संकल्प के साथ हम आगे बढ़े हैं। सीएम ने कहा कि ‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश, आत्मनिर्भर भारत-आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ पर सत्तापक्ष व विपक्ष के 300 से अधिक सदस्य 24 घंटे तक चलने वाली चर्चा के सहभागी बने। चर्चा का शुभारंभ करने के बाद मैं कुछ देर बैठा रहा, फिर अन्य प्रशासकीय कार्यों व बैठकों के लिए जाना पड़ा। रात 11 बजे मैं फिर सदन में आया तो भी यहां बोलने की होड़ दिखी। बहुत अच्छे सुझाव आए। हर व्यक्ति के अनुभव का लाभ अत्यंत प्रभावी होता है। विधानसभा-परिषद में लोगों ने विकास के बारे में मुद्दों को रखा और विकसित भारत के लिए अपनी जिम्मेदारी का भी जिक्र किया। विकसित भारत केवल भारत सरकार, प्रधानमंत्री का ही कार्य नहीं है,  हम भी कैसे इस अभियान के सारथी-सिपाही बन सकते हैं, इस पर भी चर्चा हुई। पीठासीन अधिकारियों के इस सम्मेलन में भी इस प्रस्ताव को पारित करते हुए, प्रभावी ढंग से इसको आगे बढ़ाने के लक्ष्य के साथ विकसित भारत की परिकल्पना को साकार बनाने की दिशा में किए गए प्रयासों को सार्थक गति प्रदान की है।  सीएम ने 30 बैठकों के प्रस्ताव का किया स्वागत सीएम ने कहा कि यूपी में सदन की कार्यवाही की प्रशंसा की। कहा, यहां कार्यवाही अत्यंत सुगमता से चलती है। सीएम ने वर्ष में कम से कम 30 बैठकों का प्रस्ताव पारित किए जाने को भी सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि यह संसद और विधानसभा के लिए ही नहीं, बल्कि नगर निकायों, ग्राम पंचायतों, जिला पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों के लिए भी प्रेरणा है। जनता के द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि विकास की धुरी बनते हैं। तकनीक के इस युग में हम खुद को पीछे नहीं छोड़ सकते। जब सरकार के सामने यह बात आई कि ई-विधान होना है तो हमने कहा कि तत्काल इसे लागू कीजिए। आज यूपी की विधानसभा-परिषद, कैबिनेट और बजट भी पेपरलेस है। सीएम ने कहा कि जनप्रतिनिधि भी तकनीक से अपडेट हों, उनके उचित प्रशिक्षण समेत सभी प्रस्ताव अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।  ज्वलंत मुद्दों पर लगातार चर्चा-परिचर्चा चलाती है यूपी विधानसभा-परिषद सीएम ने कहा कि यूपी विधानसभा ज्वलंत मुद्दों पर लगातार चर्चा-परिचर्चा चलाती है। स्थायी विकास लक्ष्यों (सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स) पर भी यहां लगातार 37-38 घंटे चर्चा हुई। उसके लक्ष्य निर्धारित हुए। मंत्रिमंडल, एडिशनल चीफ सेक्रेटरी के स्तर पर कमेटी गठित हुई, जो इन लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में कार्य कर रही है। 26 नवंबर, … Read more

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह होंगे यूपी दिवस-2026 के मुख्य अतिथि

जनभागीदारी से और भव्य होगा उत्तर प्रदेश दिवस- 2026: मुख्यमंत्री केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह होंगे यूपी दिवस-2026 के मुख्य अतिथि ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ होगा इस वर्ष का प्रमुख आकर्षण, हर जिले के स्वाद से परिचय कराएगा यूपी दिवस लखनऊ के राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर मुख्य समारोह, सभी जनपदों में होंगे आयोजन संस्कृति उत्सव, लोककलाओं और शिल्प मेले से सजेगा उत्तर प्रदेश दिवस लखनऊ प्रदेश के प्रत्येक जनपद की सक्रिय सहभागिता, सांस्कृतिक विविधता और विकास की साझा चेतना के साथ उत्तर प्रदेश दिवस-2026 इस वर्ष एक भव्य जनोत्सव के रूप में मनाया जाएगा। 24 से 26 जनवरी 2026 तक आयोजित होने वाले इस आयोजन में उत्तर प्रदेश की संस्कृति, शिल्प, व्यंजन और विकास यात्रा को जनभागीदारी के माध्यम से एक ही मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को उत्तर प्रदेश दिवस की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा कि यह आयोजन केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रदेश की पहचान, उपलब्धियों और संभावनाओं को जनसहयोग के साथ प्रदर्शित करने का अवसर है। उन्होंने निर्देश दिए कि उत्तर प्रदेश दिवस को जनोत्सव के रूप में आयोजित किया जाए, जिसमें प्रदेश की आत्मा हर स्तर पर दिखाई दे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष उत्तर प्रदेश दिवस के मुख्य अतिथि के रूप में भारत सरकार के माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह जी की गरिमामयी उपस्थिति आयोजन को राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान प्रदान करेगी। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी व्यवस्थाएं गरिमा, अनुशासन एवं समयबद्धता के साथ सुनिश्चित की जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजधानी लखनऊ स्थित राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर मुख्य समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसका सीधा प्रसारण प्रदेश के सभी जनपदों में किया जाएगा, ताकि उत्तर प्रदेश दिवस का उत्सव एक साथ पूरे प्रदेश में मनाया जा सके। बैठक में अवगत कराया गया कि उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर ‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश’ की थीम पर आधारित विशेष प्रदर्शनी और शिल्प मेला आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रदेश की विकास यात्रा, नवाचार, बुनियादी ढांचे, उद्योग, कृषि, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जाएगा। इस वर्ष ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ को आयोजन का प्रमुख आकर्षण होगा। इसके अंतर्गत प्रदेश के प्रत्येक जनपद के पारंपरिक और विशिष्ट व्यंजन एक ही परिसर में उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि आगंतुक उत्तर प्रदेश के विविध स्वाद, खान-पान परंपराओं और स्थानीय पहचान से परिचित हो सकें। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि संस्कृति उत्सव 2025-26 के अंतर्गत प्रस्तावित सांस्कृतिक कार्यक्रमों को उत्तर प्रदेश दिवस से प्रभावी रूप से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि ‘हमारी संस्कृति-हमारी पहचान’ की भावना के अनुरूप लोक, शास्त्रीय एवं समकालीन कला रूपों को मंच प्रदान किया जाए तथा कलाकारों एवं आगंतुकों के लिए समुचित सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि 24 जनवरी को आयोजित मुख्य समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले सभी जनपदों के गणमान्य नागरिकों को आमंत्रित किया जाए, ताकि प्रदेश की सामूहिक उपलब्धियों का सम्मान किया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश दिवस-2026 को ऐसा आयोजन बनाया जाए, जो प्रदेश की संस्कृति, स्वाद, शिल्प और विकास दृष्टि को एक साथ प्रस्तुत करे तथा प्रत्येक आगंतुक के लिए यह अनुभव प्रेरणादायी, स्मरणीय और गर्व का विषय बने।

‘साइबरटेक ग्लोबल तेल अवीव-2026’ में साइबर टेक्नोलॉजी समझाएंगे यूपी के सुपर कॉप

इज़राइल में दिखेगी यूपी की साइबर शक्ति, दुनिया सीखेगी यूपी से साइबर सुरक्षा का भारतीय मॉडल 'साइबरटेक ग्लोबल तेल अवीव-2026' में साइबर टेक्नोलॉजी समझाएंगे यूपी के सुपर कॉप  इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ साइबर सिक्योरिटी सपोर्ट पर होगा फोकस साइबर सिक्योरिटी बिजनेस के लिए भारत में संभावनाएं तलाशेंगे दुनिया के दिग्गज वैज्ञानिक अमेरिका, यूरोप, एशिया से 20 देशों के साइबर एक्सपर्ट्स जुटेंगे सम्मेलन में लखनऊ  दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित साइबर सुरक्षा मंचों में शुमार 'साइबरटेक ग्लोबल तेल अवीव-2026' में इस बार भारत और विशेष तौर पर उत्तर प्रदेश की साइबर ताकत पूरी दुनिया के सामने होगी। 26 से 28 जनवरी 2026 तक तेल अवीव, इज़राइल में आयोजित होने जा रहे इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में यूपी के साइबर सिंघम वैश्विक मंच पर भारत की साइबर सुरक्षा क्षमता, तकनीक व अनुभव साझा करेंगे। सम्मेलन में भारत से दो दिग्गज चीफ मेंटर के रूप में शामिल हो रहे हैं। इनमें भारत सरकार के पूर्व राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा समन्वयक माधवन उन्नीकृष्णन नायर और उत्तर प्रदेश से एशिया के साइबर कॉप कहे जाने वाले प्रो. त्रिवेणी सिंह शामिल हैं। दोनों विशेषज्ञ दुनिया के शीर्ष साइबर वैज्ञानिकों व नीति निर्माताओं के समक्ष साइबर सुरक्षा की बारीकियां और अपनाई जा रही तकनीक को प्रस्तुत करेंगे। इन देशों से आएंगे विशेषज्ञ तेल अवीव में होने जा रहे इस वैश्विक जमावड़े में अमेरिका, जापान, स्पेन, इटली, इंग्लैंड, जर्मनी, साइप्रस, स्कॉटलैंड, वेल्स व उत्तरी आयरलैंड, रोमानिया, फिलीपींस, संयुक्त अरब अमीरात, बेल्जियम, लातविया, नीदरलैंड, अल्बानिया, उरुग्वे, हंगरी समेत अन्य देशों के दिग्गज जुटेंगे। सीएम योगी के विजन के अनुरूप चल रहा साइबर सेफ यूपी अभियान उत्तर प्रदेश में साइबर सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार एआई व साइबर सिक्योरिटी को प्रशासनिक तथा शैक्षणिक ढांचे का अहम हिस्सा बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के दुरुपयोग, दुष्प्रचार, डीपफेक, डार्क वेब, साइबर अपराध और आतंकी नेटवर्क जैसी चुनौतियों से सख्ती से निपटने के निर्देश दिए हैं। इस क्रम में प्रो. त्रिवेणी सिंह जागरूकता के लिए 'साइबर सेफ उत्तर प्रदेश' अभियान चला रहे हैं। अब इज़राइल में 20 से अधिक देशों के बीच वह यूपी में साइबर सिक्योरिटी को लेकर किए जा रहे इनोवेटिव उपायों की जानकारी देंगे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साइबर सिक्योरिटी सपोर्ट पर चर्चा करेंगे। यूपी में टेक्नोलॉजी संबंधित अपराधों से निपटने का मजबूत सिस्टम समझेंगे अन्य देश प्रो. त्रिवेणी सिंह अपने 25 वर्षों से अधिक के अनुभव के आधार पर बताएंगे कि किस तरह उत्तर प्रदेश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में साइबर अपराध, वित्तीय धोखाधड़ी और टेक्नोलॉजी आधारित अपराधों से निपटने के लिए मजबूत सिस्टम खड़ा किया है। वहीं, माधवन उन्नीकृष्णन नायर भारत के राष्ट्रीय साइबर फ्रेमवर्क और नीति अनुभव को वैश्विक मंच पर साझा करेंगे। साइबर सहयोग, टेक्नोलॉजी साझेदारी और बिजनेस पर होगा मंथन सम्मेलन में इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी प्रमुख वक्ता के रूप में शामिल होंगे। इस दौरान भारत और दुनिया के अन्य 20 देशों के बीच साइबर सिक्योरिटी सहयोग, टेक्नोलॉजी साझेदारी और साइबर बिजनेस की संभावनाओं पर भी व्यापक मंथन होगा। देश को भविष्य का ग्लोबल साइबर सिक्योरिटी हब बनाने की दिशा में अहम कदम सम्मेलन में अमेरिका से यूरोप और एशिया तक के साइबर एक्सपर्ट्स का जमावड़ा रहेगा। यह सम्मेलन भारत की साइबर शक्ति को वैश्विक पहचान दिलाने के साथ-साथ देश को भविष्य का ग्लोबल साइबर सिक्योरिटी हब बनाने की दिशा में एक अहम कदम साबित होगा। इसमें भारत के लिए नए अवसर, साइबर सिक्योरिटी टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप और बिजनेस संभावनाओं पर विशेष तौर पर चर्चा की जाएगी।