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शिवावतार महायोगी से मुख्यमंत्री ने की नागरिकों के सुखमय जीवन की मंगलकामना

सीएम योगी आदित्यनाथ ने अर्पित की गुरु गोरखनाथ को आस्था की खिचड़ी शिवावतार महायोगी से मुख्यमंत्री ने की नागरिकों के सुखमय जीवन की मंगलकामना मकर संक्रांति-खिचड़ी पर्व पर सीएम योगी ने दीं सभी नागरिकों को शुभकामनाएं गोरखनाथ मंदिर में खिचड़ी चढ़ाने लाखों की संख्या में आए श्रद्धालु गोरखपुर  मकर संक्रांति के पावन पर्व पर गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को ब्रह्म मुहूर्त में चार बजे गोरखनाथ मंदिर में नाथपंथ की विशिष्ट परंपरा के अनुसार महायोगी गुरु गोरखनाथ को विधि विधान से आस्था की पवित्र खिचड़ी चढ़ाई। इस अवसर पर उन्होंने शिवावतार महायोगी से लोकमंगल तथा सभी नागरिकों के सुखमय-समृद्धमय जीवन की प्रार्थना की। महायोगी गुरु गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी नागरिकों, संतों और श्रद्धालुओं को मकर संक्रांति की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर मीडियाकर्मियों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि बुधवार से ही पूरे प्रदेश में लाखों की संख्या में श्रद्धालु पवित्र धर्मस्थलों पर जाकर आस्था को नमन कर रहे हैं। गोरखपुर में बुधवार को लाखों श्रद्धालुओं ने महायोगी भगवान गोरखनाथ जी को आस्था की पवित्र खिचड़ी चढ़ाई। लाखों श्रद्धालुओं ने प्रयागराज के संगम में आस्था की पवित्र डुबकी भी लगाई। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सिलसिला लगातार आज गुरुवार को भी जारी है। बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाना मेरा सौभाग्य सीएम योगी ने कहा कि आज गुरुवार को गोरखपुर में भगवान गोरखनाथ जी के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करने के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालुजन पंक्ति में लगकर श्रद्धापूर्वक खिचड़ी चढ़ा रहे हैं। यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे भी प्रातः 4 बजे गोरखनाथ मंदिर की विशिष्ट पूजा संपन्न होने के उपरांत भगवान गोरखनाथ जी को आस्था की पवित्र खिचड़ी चढ़ाने का अवसर प्राप्त हुआ है। गोरखनाथ मंदिर में लाखों की संख्या में श्रद्धालुजन आए हुए हैं। जगत की आत्मा हैं सूर्यदेव मुख्यमंत्री ने कहा कि मकर संक्रांति भारत के पर्व और त्योहारों की परंपरा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। वास्तव में सूर्यदेव इस जगत की आत्मा हैं। जगतपिता सूर्य की उपासना का यह पर्व, हर प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए प्रशस्ति तिथि माना जाता है। आज के बाद सनातन धर्म की परंपरा में सभी मांगलिक कार्यक्रम प्रारंभ हो जाएंगे। सीएम योगी ने कहा कि सूर्य का जो अयन वृत्त है, ज्योतिषीय परंपरा के अनुसार वह 12 विभिन्न भागों में विभाजित है। एक राशि से दूसरी राशि में सूर्यदेव के संक्रमण को संक्रांति कहा जाता है और जब धनु राशि से मकर राशि में भगवान सूर्य का संक्रमण होता है तो यह मकर संक्रांति कहलाता है। मकर राशि से अगले छह माह तक यानी मिथुन राशि तक सूर्य भगवान उत्तरायण रहेंगे। उत्तरायण का जो समय होता है, उसमें दिन बड़े और रात्रि छोटी होती है। जीवंतता के लिए सूर्य का प्रकाश कितना महत्वपूर्ण है और भारत की ऋषि परंपरा ने इसे कितना महत्व दिया है, इसका अनुमान इस पर्व के माध्यम से लगाया जा सकता है।  अलग-अलग नाम व रूपों में मकर संक्रांति के आयोजन देश के सभी हिस्सों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मकर संक्रांति एक ऐसा पर्व है, जो देश के अंदर पूरब, पश्चिम, उत्तर व दक्षिण, सभी हिस्सों में अलग-अलग नाम व रूप में आयोजित होता है। पूरब में बिहू या तिलवा संक्रांति, पश्चिम में लोहड़ी, दक्षिण भारत में पोंगल और उत्तर भारत में खिचड़ी संक्रांति के रूप में मकर संक्रांति का आयोजन बड़ी श्रद्धाभाव के साथ किया जाता है। सीएम योगी ने किया देश और दुनिया से आए श्रद्धालुओं का अभिनंदन मकर संक्रांति के अवसर पर प्रदेश के अलग-अलग धर्मस्थलों पर देश और दुनिया से आए श्रद्धालुओं का अभिनंदन करते हुए मुख्यमंत्री ने सभी के प्रति मंगलमय शुभकामनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि एक तरफ गोरखपुर में लाखों की संख्या में श्रद्धालु बाबा गोरखनाथ को आस्था की खिचड़ी अर्पित कर रहे हैं। वहीं, प्रयागराज में लाखों की संख्या में श्रद्धालु, कल्पवासी, पूज्य संतजन न केवल अपनी साधना में रत हैं, अपितु भगवान वेणीमाधव, भगवान प्रयागराज और मां गंगा, मां यमुना, मां सरस्वती के सानिध्य में संगम में आस्था की पवित्र डुबकी लगा रहे हैं।

देश में अग्रणी राज्यों में, उत्तर प्रदेश में 2316 ईवी चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना

इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग में यूपी की मजबूत छलांग, हरित परिवहन में निर्णायक कदम देश में अग्रणी राज्यों में, उत्तर प्रदेश में 2316 ईवी चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना योगी सरकार की नीति से पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक अवसर लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश स्वच्छ ऊर्जा और हरित परिवहन की दिशा में लगातार ठोस कदम उठा रहा है। देश में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग अवसंरचना के विकास और विस्तार के बीच उत्तर प्रदेश अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रहा है। प्रदेश में पिछले पांच सालों में 2,316  इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं। यह उपलब्धि प्रदेश के बढ़ते शहरीकरण और औद्योगिक विकास को दर्शानें के साथ-साथ योगी सरकार की दूरदर्शी नीतियों का भी स्पष्ट प्रमाण हैं। याहवी ग्रुप के सीईओ संदीप यादव का कहना है कि उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन को स्थापित करने की दिशा में तेजी आगे बढ़ रहा है। याहवी ग्रुप की ओर से उत्तर प्रदेश के मथुरा और वृंदावन में ईवी चार्जिंग स्टेशन (ट्रकों के लिए)  स्थापित किये गए हैं।   चार्जिंग नेटवर्क में उत्तर प्रदेश की मजबूत हिस्सेदारी देश भर में स्थापित कुल 29,151 इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशनों में उत्तर प्रदेश का उल्लेखनीय योगदान है। प्रदेश में स्थापित 2,316 चार्जिंग स्टेशनों में 540 फास्ट चार्जर और 1,776 स्लो चार्जर शामिल हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि प्रदेश सरकार ने शहरी और अर्ध शहरी दोनों क्षेत्रों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए संतुलित चार्जिंग नेटवर्क विकसित किया है। लखनऊ,  नोएडा,  ग्रेटर नोएडा,  गाजियाबाद,  कानपुर, वाराणसी,  प्रयागराज और आगरा जैसे प्रमुख शहरों में ईवी चार्जिंग सुविधाओं का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। योगी सरकार की स्पष्ट नीति और विजन उत्तर प्रदेश को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश को अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करना सरकार की प्राथमिकता में सम्मिलित है। इसी उद्देश्य से प्रदेश में निवेश अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है। इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए निजी कंपनियों और निवेशकों को लगातार प्रोत्साहन मिल रहा है।  पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास का संतुलन योगी सरकार का फोकस विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी है। इलेक्ट्रिक वाहनों और चार्जिंग अवसंरचना के विस्तार से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और प्रदूषण नियंत्रण को मजबूती मिलेगी। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और घनी आबादी वाले प्रदेश में यह पहल वायु गुणवत्ता सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही है। इसके साथ ही पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम होने से अर्थव्यवस्था को भी दीर्घकालिक लाभ मिलेगा। केंद्र सरकार के साथ प्रभावी समन्वय केंद्र सरकार की फेम-1 और फेम-2 योजनाओं के अंतर्गत देश भर में 9,576 ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं, जिनका लाभ उत्तर प्रदेश को भी मिला है। इसके अतिरिक्त पीएम ई-ड्राइव योजना के अंतर्गत ईवी चार्जिंग विस्तार के लिए 2,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।  भविष्य की दिशा और तैयारी विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले कुछ साल में उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या में तेज वृद्धि होगी। इसे ध्यान में रखते हुए योगी सरकार एक्सप्रेस-वे,  औद्योगिक क्षेत्रों,  बस अड्डों,  रेलवे स्टेशनों और पर्यटन स्थलों पर चार्जिंग स्टेशन विकसित करने की रणनीति पर काम कर रही है।

यूपी में बड़े सियासी फेरबदल के संकेत, 70% मंत्रियों की खिसक सकती है कुर्सी, चर्चाओं में ये नाम

लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट में बड़े स्तर पर फेरबदल के आसार हैं. माना जा रहा है कि पिछले साल गुजरात में जिस तरह से कैबिनेट में बदलाव हुए और लगभग सारे चेहरे बदल दिए गए. कुछ ऐसा ही यूपी में भी हो सकता है. सूत्रों का दावा है कि 70 फीसदी से अधिक मंत्री बदले जा सकते हैं.  इन बदलावों का असर उन पर हो सकता है जो वर्ष 2017 और फिर साल 2022 की सरकार में भी मंत्री रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक बीते 8-9 सालों से जो मंत्री हैं उनमें से कुछ ही चेहरों को छोड़कर बाकियों पर फेरबदल की गाज गिर सकती है. सूत्रों के मुताबिक भले ही भारतीय जनता पार्टी की यूपी इकाई के अध्यक्ष का जिम्मा कुर्मी समाज से आने वाले पंकज चौधरी को दी है, उसके बाद भी नए विस्तार में कुर्मियों का बोलबाला रह सकता है. कुर्मी समाज से 2-3 नेताओं की एंट्री कैबिनेट में हो सकती है. यूपी कैबिनेट में इन नेताओं की हो सकती है एंट्री सूत्रों के अनुसार रामपुर में भारतीय जनता पार्टी के नेता और विधायक आकाश सक्सेना, अलीगढ़ से कुंवर जयवीर सिंह को नए मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है. इसके साथ ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह, साध्वी निरंजन ज्योति, भूपेंद्र सिंह चौधरी, पूजा पाल, मनोज पांडेय, कृष्णा पासवान, राम रतन कुशवाहा, पद्मसेन चौधरी , अशोक कटारिया के नाम की भी चर्चा है. इसके अलावा दावा किया जा रहा है कि योगी सरकार में पहले मंत्री रह चुके महेंद्र सिंह की दोबारा काबीना में एंट्री हो सकती है. बीते वर्ष बीजेपी संगठन में बदलाव के बाद कैबिनेट में फेरबदल के आसार जताए जा रहे हैं. पंकज चौधरी के अध्यक्ष बनने के बाद कोरग्रुप की बैठक हुई थी. जिसमें संगठन से सरकार तक की किन को क्या जिम्मेदारी देनी है उनकी चर्चा हो चुकी है. इसी चर्चा के बाद पहले पंकज चौधरी दिल्ली आए और हाईकमान से मुलाकात की. इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इन्हीं मुद्दों पर बीजेपी नेतृत्व से चर्चा की. माना जा रहा है कि हाईकमान से चर्चा के बाद यूपी में किसको संगठन से सरकार में लाया जाए और किन्हें सरकार से वापस संगठन में अहम जिम्मेदारी दी जाए, इसका फैसला हो जाएगा. मकर संक्रांति के बाद किसी भी दिन कैबिनेट फेरबदल की संभावना है. योगी सरकार में कुल 54 मंत्री, अभी कौन कौन कैबिनेट में शामिल? कैबिनेट में सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, सुरेश कुमार खन्ना, सूर्य प्रताप शाही, स्वतंत्र देव सिंह, बेबी रानी मौर्य, लक्ष्मी नारायण चौधरी, जयवीर सिंह, धर्मपाल सिंह, नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’, अनिल राजभर, राकेश सचान, अरविंद कुमार शर्मा, योगेंद्र उपाध्याय, आशीष पटेल, संजय निषाद, ओम प्रकाश राजभर, दारा सिंह चौहान, सुनील कुमार शर्मा, अनिल कुमार बतौर कैबिनेट मंत्री हैं. वहीं राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) की सूची में नितिन अग्रवाल, कपिल देव अग्रवाल, रवीन्द्र जायसवाल, संदीप सिंह, गुलाब देवी, गिरीश चन्द्र यादव, धर्मवीर प्रजापति, आसिम अरुण, जयेंद्र प्रताप सिंह राठौर, दयाशंकर सिंह, नरेन्द्र कुमार कश्यप, दिनेश प्रताप सिंह, अरुण कुमार सक्सेना, डॉ. दयाशंकर मिश्रा “दयालु” शामिल हैं. इसके अलावा राज्य मंत्रियों की लिस्ट में  मयंकेश्वर शरण सिंह,  दिनेश खटीक,  संजीव गोंड,  बालदेव सिंह ओलख,  अजीत पॉल,  जसवंत सिंह सैनी,  रामकेश निषाद,  मनोहर लाल मनु कोरी,  संजय सिंह गंगवार,  ब्रजेश सिंह,  के. पी. मलिक,  सुरेश रही,  सोमेंद्र तोमर,  प्रतिभा शुक्ला,  राकेश राठौर गुरु, राजनी तिवारी,  सतीश चन्द्र शर्मा,  दानिश आज़ाद अंसारी, विजय लक्ष्मी गौतम शामिल हैं.  

सौर ऊर्जा से हाई क्वॉलिटी चारा बनाकर आत्मनिर्भर बन रहीं महिलाएं

गो सेवा से लखपति बन गईं झांसी की प्रवेश कुमारी  सौर ऊर्जा से हाई क्वॉलिटी चारा बनाकर आत्मनिर्भर बन रहीं महिलाएं नए स्टार्टअप से गांवों में शुरू हुई सामूहिक भागीदारी की प्रथा सीएम योगी के आत्मनिर्भर विजन को मिल रही रफ्तार लखनऊ  बुंदेलखंड की धरती अब न केवल शौर्य के लिए, बल्कि महिला उद्यमिता के रूप में भी पहचानी जा रही है। झांसी की प्रवेश कुमारी ने चारा बनाने की यूनिट के जरिये वह मुकाम हासिल किया है, जो आज प्रदेश की लाखों महिलाओं के लिए उदाहरण है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश' के सपने को धरातल पर उतारते हुए प्रवेश ने सौर ऊर्जा की मदद से उच्च गुणवत्ता वाले पशु चारे की यूनिट स्थापित कर न केवल खुद को आर्थिक रूप से सशक्त किया, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ा है। बिजली खर्चा शून्य, मिल रहा सस्ता और पोषक चारा इस उद्यम की सबसे बड़ी विशेषता इसका ईको-फ्रेंडली होना है। योगी सरकार और डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स (DA) के सहयोग से स्थापित यह यूनिट पूरी तरह 18 kW सौर ऊर्जा प्रणाली पर संचालित होती है। इससे बिजली का खर्च शून्य के बराबर है, जिससे चारे की उत्पादन लागत कम आती है। सस्ता और पोषक चारा मिलने से स्थानीय डेयरी किसानों के पशुओं का स्वास्थ्य सुधरा है और दूध उत्पादन क्षमता में भी इजाफा हुआ है। रोजगार और सामूहिक भागीदारी की नई प्रथा प्रवेश कुमारी आज करीब 25,000 रुपये प्रति माह कमा रही हैं। उनके इस स्टार्टअप ने गांव की सामाजिक संरचना को भी बदला है। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार भी बढ़ा है। गांव की अन्य महिलाओं को स्थायी आय और आर्थिक स्वतंत्रता मिली रही है। जिससे वे भी अपने परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। खरीद से लेकर गुणवत्ता नियंत्रण तक की जिम्मेदारी खुद संभालती हैं यहां आधुनिक मशीनरी और मानकीकृत तकनीकों से पौष्टिक चारा तैयार किया जाता है। साथ ही स्थानीय बाजार की मांग के अनुरूप आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है। प्रवेश केवल उद्यमी नहीं, बल्कि एक कुशल मैनेजर भी हैं। वे कच्चे माल की खरीद से लेकर वित्तीय खातों, उत्पादन योजना और गुणवत्ता नियंत्रण तक की जिम्मेदारी खुद संभालती हैं। उनकी इस सक्रिय शैली और वित्तीय अनुशासन के कारण उनके 'गोमाता कैटल फीड' को पुरस्कृत और सम्मानित किया जा चुका है। छोटे प्रयास से बड़ी शुरुआत शुरुआत एक छोटे प्रयास से हुई थी, लेकिन उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स के मार्गदर्शन ने इसे व्यवसाय बना दिया। आज गांव की महिलाएं साथ मिलकर काम कर रही हैं। – प्रवेश कुमारी, महिला उद्यमी

ज़्यूरिख एयरपोर्ट ग्रुप के सहयोग से नेट-ज़ीरो कॉन्सेप्ट पर विकसित हो रहा जेवर एयरपोर्ट

योगी सरकार की पहल से जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा बनेगा देश का सबसे ‘ग्रीन’ एयरपोर्ट ज़्यूरिख एयरपोर्ट ग्रुप के सहयोग से नेट-ज़ीरो कॉन्सेप्ट पर विकसित हो रहा जेवर एयरपोर्ट टर्मिनल भवन को खास तरह से किया गया है डिजाइन, ऊर्जा, पानी और कचरे की खपत रहेगी न्यूनतम 20% पार्किंग क्षेत्र में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए फास्ट और स्टैंडर्ड चार्जिंग की सुविधा 82.94 एकड़ में सोलर फार्म, 51,966 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा से होगा संचालन आरएनजी प्लांट, रेनवाटर हार्वेस्टिंग और वेस्ट मैनेजमेंट से पर्यावरण संरक्षण को मिलेगी नई दिशा लखनऊ/ग्रेटर नोएडा  उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) न सिर्फ हवाई कनेक्टिविटी का बड़ा केंद्र बनने जा रहा है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी नए मानक स्थापित करेगा। सीएम योगी की मंशा के अनुरूप जेवर एयरपोर्ट को भारत का पहला IGBC ग्रीन कैंपस प्रमाणित एयरपोर्ट बनने का गौरव प्राप्त हुआ है, जो बड़ी उपलब्धि है। यह एयरपोर्ट ज़्यूरिख एयरपोर्ट ग्रुप के सहयोग से विकसित किए गए नेट-ज़ीरो कॉन्सेप्ट पर आधारित है। स्टैंडर्ड और फास्ट चार्जिंग की सुविधा यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के एसीईओ शैलेन्द्र कुमार भाटिया ने बताया कि राज्य सरकार के निर्देशों के तहत एयरपोर्ट का टर्मिनल भवन इस तरह डिजाइन किया गया है कि ऊर्जा, पानी और कचरे की खपत न्यूनतम हो। एयरपोर्ट पार्किंग के 20 प्रतिशत हिस्से में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए स्टैंडर्ड और फास्ट चार्जिंग सुविधा उपलब्ध कराई गई है।एयरसाइड संचालन के लिए उपयोग होने वाले सभी वाहन 100 प्रतिशत इलेक्ट्रिक होंगे और इनके चार्जिंग प्वाइंट्स कई स्थानों पर लगाए जाएंगे। 82.94 एकड़ में फैला सोलर फार्म योगी सरकार के ग्रीन एनर्जी विजन के अनुरूप  परिसर में 82.94 एकड़ में फैला सोलर फार्म विकसित किया जा रहा है, जिसकी क्षमता 51,966 मेगावाट-घंटा होगी। इससे एयरपोर्ट को बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा प्राप्त होगी। साथ ही दो स्थानों पर बनाए जा रहे रेन वाटर हार्वेस्टिंग पौंड टिकाऊ जल स्रोत उपलब्ध कराएंगे। एयरपोर्ट में आरएनजी प्लांट लगाने की भी योजना है, जिससे एयरपोर्ट वाहन, डीजी सेट और अन्य प्रणालियां ग्रीन फ्यूल पर संचालित हो सकेंगी। वहीं एक व्यापक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली कचरे के पृथक्करण, रीसाइक्लिंग और वैज्ञानिक उपचार को बढ़ावा देगी। एनवायरनमेंट मॉनिटरिंग प्लान भी तैयार पर्यावरण सुरक्षा के लिए एक एनवायरनमेंट मॉनिटरिंग प्लान भी तैयार किया गया है, जिसके माध्यम से हर महीने वायु, पानी, मिट्टी, कचरा और सीवेज के मानकों की निगरानी की जाएगी। जेवर एयरपोर्ट शुरू होने के साथ ही न सिर्फ निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा, बल्कि योगी सरकार के ग्रीन इन्फ्रास्ट्रक्चर और सतत विकास के संकल्प को भी नई उड़ान देगा।

प्रगति मॉडल से उत्तर प्रदेश बना देश का इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ इंजन: मुख्यमंत्री

‘प्रगति’ नए भारत की कार्यसंस्कृति का प्रतीक : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इंटेंट, टेक्नोलॉजी और अकाउंटेबिलिटी के समन्वय से सुनिश्चित हो रहे हैं ठोस परिणाम प्रगति मॉडल से उत्तर प्रदेश बना देश का इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ इंजन: मुख्यमंत्री इंटर-एजेंसी बाधाएँ समाप्त, अनुमतियों और मंजूरियों में आई तेजी बॉटलनेक स्टेट से ब्रेकथ्रू स्टेट बना उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री ₹10.48 लाख करोड़ की 330 परियोजनाओं के साथ यूपी के पास देश का सबसे बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर पोर्टफोलियो यूपी में 39% परियोजनाएँ पूरी, 202 परियोजनाएँ समयबद्ध प्रगति पर ₹2.37 लाख करोड़ की 128 परियोजनाएँ पूर्ण, ₹8.11 लाख करोड़ की 202 परियोजनाएँ प्रगति पर लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन (प्रगति) केवल बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा का मंच नहीं, बल्कि नए भारत की नई कार्यसंस्कृति का सशक्त उदाहरण है। मंगलवार को आयोजित विशेष प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘प्रगति’ उस प्रशासनिक मॉडल को दर्शाता है, जिसकी नींव आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए रखी और 2014 के बाद इसे राष्ट्रीय स्तर पर सुदृढ़ किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति ने यह सिद्ध किया है कि जब इंटेंट, टेक्नोलॉजी और अकाउंटेबिलिटी एक साथ आती हैं, तो आउटकम अपने आप सुनिश्चित हो जाते हैं। डिजिटल गवर्नेंस और कोऑपरेटिव फेडरलिज्म को मजबूती देते हुए प्रगति एक ऐसा प्लेटफॉर्म बना है, जहां अंतर-मंत्रालयीय और अंतर-विभागीय समन्वय के माध्यम से जटिल समस्याओं का समयबद्ध समाधान संभव हुआ है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रगति मॉडल की अवधारणा वर्ष 2003 में गुजरात में 'स्वागत' (स्टेट वाइड अटेंशन ऑन ग्रीवांसेज बाई एप्लिकेशन ऑफ टेक्नोलॉजी) के रूप में प्रारंभ हुई थी, जिसका उद्देश्य नागरिक शिकायतों के निवारण में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना था। यही मॉडल आगे चलकर ‘प्रगति’ के राष्ट्रीय स्वरूप के रूप में विकसित हुआ, जिसने मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं, सामाजिक योजनाओं और सिस्टम रिफॉर्म के क्षेत्र में टीम इंडिया अप्रोच को मजबूती प्रदान की। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति केवल एक रिव्यू मैकेनिज्म नहीं, बल्कि गवर्नेंस रिफॉर्म है। इसने शासन को फाइल-केंद्रित संस्कृति से फील्ड-आधारित परिणामों की दिशा में अग्रसर किया है। इसके माध्यम से निर्णय प्रक्रिया तेज हुई है, समय और लागत की बर्बादी रुकी है तथा केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय के साथ-साथ स्पष्ट जवाबदेही सुनिश्चित हुई है। राष्ट्रीय स्तर पर प्रगति के प्रभाव का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि इसके माध्यम से ₹86 लाख करोड़ से अधिक की परियोजनाओं को गति मिली है। इनमें से 377 प्रमुख परियोजनाओं की प्रत्यक्ष समीक्षा प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है, जबकि 3162 में से 2958 मुद्दों का समाधान किया जा चुका है, जो शासन की विश्वसनीयता को दर्शाता है। उत्तर प्रदेश के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति मॉडल राज्य के लिए एक गेम-चेंजर सिद्ध हुआ है। उत्तर प्रदेश आज देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ इंजन के रूप में उभरा है। एक्सप्रेस-वे नेटवर्क, देश का सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क, सर्वाधिक शहरों में मेट्रो और एयर कनेक्टिविटी, देश की पहली रैपिड रेल, अंतर्देशीय जलमार्ग और रोपवे जैसे प्रोजेक्ट समयबद्ध ढंग से आगे बढ़े हैं, जिनके पीछे निरंतर समीक्षा और समस्या-समाधान का प्रभावी मंच प्रगति रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश के पास ₹10.48 लाख करोड़ की 330 परियोजनाओं के साथ देश का सबसे बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर पोर्टफोलियो है। इनमें परिवहन, ऊर्जा, शहरी विकास, स्वास्थ्य और औद्योगिक विकास से जुड़े प्रमुख प्रोजेक्ट शामिल हैं। इनमें से ₹2.37 लाख करोड़ की लागत की 128 परियोजनाएं (39%) पहले ही पूर्ण होकर कमीशन हो चुकी हैं, जबकि ₹8.11 लाख करोड़ की 202 परियोजनाएं निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्रगति पर हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की मंशा के अनुरूप गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करते हुए सभी अड़चनों का समाधान कर परियोजनाओं को तेज़ी से आगे बढ़ाया जा रहा है, और इसमें ‘प्रगति’ एक सशक्त आधार बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति मॉडल ने उत्तर प्रदेश को रेलवे, हाईवे और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रतिस्पर्धा के इस दौर में यदि परियोजनाओं, एमओयू और अनुमतियों में देरी होती है तो निवेशक दूसरे राज्यों की ओर रुख करता है। प्रगति ने वर्षों में होने वाली प्रक्रियाओं को महीनों और महीनों की प्रक्रियाओं को दिनों में समेटते हुए परियोजनाओं को तय समय-सीमा में धरातल पर उतारने का सशक्त माध्यम प्रदान किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में ₹4.19 लाख करोड़ की लागत के 65 बड़े प्रोजेक्ट प्रगति के अंतर्गत शामिल हैं। इनमें से 26 परियोजनाएँ पूरी होकर कमीशन हो चुकी हैं, जबकि 39 परियोजनाएँ निर्माण के विभिन्न चरणों में प्रगति पर हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति पोर्टल के माध्यम से प्रदेश में इंटर-एजेंसी बाधाओं का प्रभावी समाधान हुआ है। राजस्व, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, वन, नगर विकास, पंचायती राज सहित सभी संबंधित विभाग एक ही मंच पर बैठकर समयबद्ध समाधान सुनिश्चित कर रहे हैं। इससे हाईवे, रेलवे, पावर और टेलीकॉम जैसी परियोजनाओं में तेज़ प्रगति संभव हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रक्रिया सुशासन का एक प्रभावी मॉडल बनकर उभरी है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 515 मुद्दों में से 494 का समाधान (96%) किया गया है। वहीं, प्रगति के अंतर्गत 287 मुद्दों में से 278 मुद्दों का समाधान (97%) सुनिश्चित किया गया है। यह उच्च समाधान दर प्रशासनिक तत्परता, स्पष्ट जवाबदेही और निर्णायक नेतृत्व की क्षमता को दर्शाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति जैसे तकनीक-आधारित प्लेटफॉर्म के कारण उत्तर प्रदेश आज बॉटलनेक स्टेट से ब्रेकथ्रू स्टेट में परिवर्तित हो चुका है। राज्य सरकार अब केवल फैसिलिटेटर नहीं, बल्कि एक्सेलेरेटर की भूमिका में परियोजनाओं को गति दे रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति ने टीम इंडिया स्पिरिट को और सशक्त किया है। केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वय से अब समस्या पर नहीं, बल्कि समाधान पर चर्चा होती है। वर्ष 2014 से पहले जहां परियोजनाएं स्वीकृत तो होती थीं लेकिन पूरी नहीं हो पाती थीं, आज हर परियोजना के शिलान्यास के साथ उसकी पूर्णता की समय-सीमा तय होती है और उसकी नियमित समीक्षा सुनिश्चित की जाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि समयबद्ध परियोजनाएं रोजगार सृजन के साथ-साथ विकास की गति को भी तेज़ करती हैं और इसके लिए उन्होंने प्रदेशवासियों की ओर से आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी विजन के प्रति आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री का निर्देश, अपरिहार्य होने पर ही वृक्षों की कटान हो, जितने वृक्ष कटें उससे अधिक पौधरोपण सुनिश्चित किया जाए

विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री का निर्देश, अपरिहार्य होने पर ही वृक्षों की कटान हो, जितने वृक्ष कटें उससे अधिक पौधरोपण सुनिश्चित किया जाए एनएचएआई सड़क परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा, समन्वय और समयबद्ध निस्तारण के निर्देश जिलाधिकारी साप्ताहिक एवं मुख्य सचिव पाक्षिक समीक्षा कर परियोजनाओं को समय से पूर्ण कराएं: मुख्यमंत्री भूमि अधिग्रहण के लिए किसानों से सीधा संवाद करें, बिचौलियों का हस्तक्षेप न हो: मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर विकास प्रदेश की अनिवार्य आवश्यकता है, किंतु यह पर्यावरण की कीमत पर नहीं हो सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस वर्ष प्रदेश में 35 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है तथा सरकार की नीति है कि किसी भी परियोजना में अपरिहार्य स्थिति में ही वृक्षों की कटान की जाए और जितने वृक्ष कटें, उससे अधिक संख्या में पौधरोपण अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए, ताकि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बना रहे। मुख्यमंत्री सोमवार को प्रदेश में संचालित एवं प्रस्तावित भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की विभिन्न सड़क परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा कर रहे थे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिलावार समीक्षा करते हुए उन्होंने एनएचएआई के स्थानीय अधिकारियों एवं जिला प्रशासन के बीच बेहतर, सतत और प्रभावी समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने निर्देशित किया कि प्रत्येक जनपद के जिलाधिकारी एनएचएआई परियोजनाओं की साप्ताहिक समीक्षा सुनिश्चित करें। जहां भी किसी स्तर पर कोई विषय लंबित हो, उसे मुख्य सचिव की सोमवारीय समीक्षा बैठक में अनिवार्य रूप से प्रस्तुत कर समयबद्ध निस्तारण किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि मुख्य सचिव स्वयं इन परियोजनाओं की पाक्षिक समीक्षा करें, जिससे कार्यों में अनावश्यक विलंब न हो और निर्णय शीघ्रता से लिए जा सकें। भूमि अधिग्रहण से संबंधित विषयों पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सीधे किसानों से संवाद स्थापित किया जाए। किसी भी स्थिति में बिचौलियों को हस्तक्षेप का अवसर न मिले, ताकि किसानों के हित सुरक्षित रहें और परियोजनाएं पूरी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ें। मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क परियोजनाएं प्रदेश के आर्थिक विकास, औद्योगिक विस्तार और आमजन की सुविधा से सीधे जुड़ी हैं। अतः सभी कार्य गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ पूर्ण किए जाएं, जिससे उत्तर प्रदेश में सुदृढ़ कनेक्टिविटी के माध्यम से विकास को नई गति मिल सके।

मंगलवार को गोरखपुर महोत्सव के समापन समारोह में शामिल होंगे मुख्यमंत्री

सीएम योगी के मार्गदर्शन में और मजबूत होगा विरासत व विकास का भरोसा मंगलवार को गोरखपुर महोत्सव के समापन समारोह में शामिल होंगे मुख्यमंत्री अलग-अलग क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए छह लोगों को देंगे गोरखपुर रत्न सम्मान गोरखपुर कला, संस्कृति, मेधा और रोजगार के मंच गोरखपुर महोत्सव के समापन समारोह में मंगलवार (13 जनवरी) को शामिल होकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विरासत व विकास के भरोसे को और मजबूत करेंगे। समापन समारोह में अलग-अलग क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए मुख्यमंत्री छह लोगों को गोरखपुर रत्न से सम्मानित भी करेंगे।  वर्ष 2017 से गोरखपुर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रगति की नई उड़ान भरी है। कभी पिछड़ेपन का दंश झेलने वाले इस जिले ने हर क्षेत्र में विकास के नए प्रतिमान स्थापित किए हैं। बहुमुखी विकास के साथ यहां की कला, संस्कृति भी लगातार संरक्षित और समृद्ध हुई है। इन सबको समेटते हुए गोरखपुर महोत्सव कला, संस्कृति, पर्यटन व रोजगार का सशक्त मंच बना है।  इस बार गोरखपुर महोत्सव का शुभारंभ रविवार (11 जनवरी) को प्रदेश के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने किया। रामगढ़ताल के सामने चंपा देवी पार्क में चल रहे महोत्सव के औपचारिक समापन समारोह को मंगलवार अपराह्न मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सान्निध्य प्राप्त होगा। मुख्यमंत्री इस समारोह में छह विशिष्ट लोगों को गोरखपुर रत्न सम्मान प्रदान करेंगे। यह सम्मान खेल, विज्ञान, सामाजिक कार्य उद्योग व कृषि के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले लोगों को मिलेगा।  सीएम योगी के हाथों इन्हें मिलेगा गोरखपुर रत्न सम्मान 1. शिवम यादव (खेल) : पैरा बैडमिंटन के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी। थाइलैंड में आयोजित पैरा बैडमिंटन इंटरनेशनल 2025 में पदक विजेता। 2. अनन्या यादव (खेल) : अंतरराष्ट्रीय हैंडबाल खिलाड़ी। थाइलैंड में नवंबर 2025 में आयोजित आईएचएफ ट्रॉफी में रजत पदक। 3. नीतिश सिंह (खेल) :  अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोही। अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी किलिमंजारो, यूरोप महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एलब्रुस, टर्की की सबसे ऊंची चोटी अरारत को फतह करने वाले। 2023 में विवेकानंद यूथ अवार्ड से सम्मानित। 4. प्रो. शरद मिश्रा (विज्ञान) : दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग में प्रोफेसर। 25 वर्षों का शोध अनुभव। गोरखपुर क्षेत्र में भूजल में उपस्थित आर्सेनिक प्रदूषण पर गहन शोध और बचाव का फार्मूलेशन। गाल ब्लैडर कैंसर पर भी सराहनीय शोध।  5. अविनाश कुमार मौर्य (कृषि) : प्रगतिशील कृषक। औद्यानिक फसलों विशेषकर टमाटर की खेती कर एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में 10 लाख रुपये से अधिक का लाभ अर्जित किए। 6. आशीष श्रीवास्तव (सामाजिक कार्य) : सक्रिय समाजसेवी।

पूछ एआई के को-फाउंडर व सीईओ ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की मुलाकात

एआई ही है ‘नेक्स्ट बिग थिंग’ – सिद्धार्थ भाटिया पूछ एआई  के को-फाउंडर व सीईओ ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की मुलाकात सिद्धार्थ भाटिया ने की मुख्यमंत्री की तारीफ, बोले: प्रदेश में एआई को लेकर मुख्यमंत्री का विजन साफ और स्पष्ट सभी तक एआई की पहुंच ही देश व प्रदेश के कायाकल्प का माध्यम बनेगी: सिद्धार्थ भाटिया भारत का डेटा भारत में ही रहे और एआई का लाभ सभी को मिले, इस दिशा में हो रहा प्रयास लखनऊ  विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश के लक्ष्य को लेकर प्रतिबद्ध डबल इंजन सरकार के प्रयास अब धरातल पर प्रभावी रूप से दिखाई देने लगे हैं। उत्तर प्रदेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी भविष्य आधारित तकनीक का प्रयोग विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से हो रहा है। एआई को ही ‘नेक्स्ट बिग थिंग’ यानी अगला बड़ा परिवर्तन माना जा रहा है। पूछ एआई के को-फाउंडर और सीईओ सिद्धार्थ भाटिया ने यह बात कही। सोमवार को उनकी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात हुई, जिसमें प्रदेश में एआई से जुड़े प्रयासों और इसे जनता तक अधिक सुलभ बनाने को लेकर चर्चा हुई। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सराहना करते हुए कहा कि जब शीर्ष नेतृत्व का विजन, उद्देश्य और महत्वाकांक्षा स्पष्ट होती है, तो उसके सकारात्मक परिणाम स्वतः ही धरातल पर दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में एआई को लेकर जिस प्रकार नीति निर्माण और उसके क्रियान्वयन पर कार्य हुआ है, उससे आने वाले वर्षों में रोजगार सृजन सहित कई बड़ी उपलब्धियां प्रदेश के खाते में जुड़ेंगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि एआई की नागरिकों तक व्यापक और सुलभ पहुंच ही देश व प्रदेश के कायाकल्प का मार्ग प्रशस्त करेगी। भारत में ही रहे भारत का डेटा, सभी को मिले एआई का लाभ पूछ एआई के सीईओ व को-फाउंडर सिद्धार्थ भाटिया के अनुसार, बीते कुछ वर्षों में भारत में एआई का उपयोग तेजी से बढ़ा है। हालांकि, यह आवश्यक है कि भारत का डेटा भारत में ही सुरक्षित रहे। इससे एआई के माध्यम से विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सहायता मिलेगी। उन्होंने बताया कि उनकी टीम भारत में एआई को इस तरह सुलभ बनाने की दिशा में कार्य कर रही है, जिससे कोई भी व्यक्ति, चाहे वह किसान हो, गृहिणी, पेशेवर या छात्र, बिना किसी ऐप के कॉल या व्हाट्सऐप संदेश के माध्यम से समाधान प्राप्त कर सके। उन्होंने कहा कि यह सेवा सभी के लिए निःशुल्क होनी चाहिए और इसका उपयोग इतना सरल हो कि किसी को प्रॉम्प्ट सीखने की आवश्यकता न पड़े। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यूपीआई इसका सटीक उदाहरण है। प्रारंभ में इसे लेकर आशंकाएं थीं, लेकिन आज यह घर-घर तक और देश के सबसे दूरस्थ क्षेत्रों तक डिजिटल भुगतान का सशक्त माध्यम बन चुका है। इसी प्रकार एआई का उपयोग भी उत्तर प्रदेश और भारत के प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे, इसी दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। रोजगार छिनने का नहीं, सृजन का माध्यम है एआई सिद्धार्थ भाटिया ने कहा कि एआई रोजगार छीनने का नहीं, बल्कि रोजगार सृजन का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि एआई का उपयोग समय की आवश्यकता है और जो इससे स्वयं को अनभिज्ञ रखेगा, वह पीछे रह जाएगा। भविष्य की जरूरत यह है कि सभी पेशेवरों सहित आम नागरिक भी एआई के प्रति न केवल जागरूक हों, बल्कि उसका प्रभावी उपयोग करें। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में इस दिशा में बड़े स्तर पर सराहनीय प्रयास हुए हैं, लेकिन इन्हें और आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हुई मुलाकात के दौरान प्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। सिद्धार्थ भाटिया आगामी दिनों में स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में एआई सेक्टर का प्रतिनिधित्व भी करेंगे।

गाय के गोबर से बड़े पैमाने पर बायोगैस बनाकर घटाई जाएगी तेल-एलपीजी पर निर्भरता

सीएम योगी का विजन : गाय बनेगी मजबूत अर्थव्यवस्था का आधार, बड़ी संख्या में गो पालकों को होगी आमदनी गाय के गोबर से बड़े पैमाने पर बायोगैस बनाकर घटाई जाएगी तेल-एलपीजी पर निर्भरता यूपी में एक लाख गायों के गोबर से मीथेन का दोहन कर हो सकती है 500 करोड़ के पेट्रोलियम उत्पादों की बचत यूपी में 2022 से अब तक यूपी नेडा के अंतर्गत 26 से अधिक सीबीजी प्लांट लगाए गए, 21 से अधिक प्रोजेक्ट निर्माणाधीन लखनऊ  देश में रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश तेजी से लीडिंग स्टेट के रूप में उभरा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के तहत अब बड़ी मात्रा में कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) बनाकर क्रूड ऑयल और एलपीजी पर निर्भरता घटाने की ठोस रणनीति पर काम हो रहा है। बायोगैस बनाने में अधिक पैमाने पर गाय के गोबर का सदुपयोग किया जाएगा, जिसका सबसे ज्यादा लाभ गोपालकों को मिलेगा। इस योजना में 26 से अधिक सीबीजी प्लांट लगाए जा चुके हैं। एक वैज्ञानिक आंकलन के अनुसार यूपी में एक लाख गायों के गोबर से मीथेन का दोहन कर पेट्रोलियम उत्पादों में लगभग 500 करोड़ रुपये तक की बचत की संभावना बन सकती है। 2022 से अब तक यूपी नेडा के अंतर्गत प्रदेश में 26 से अधिक सीबीजी प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं। इनमें लखनऊ, गोरखपुर, मथुरा, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बुलंदशहर, बाराबंकी, बदायूं, बरेली और मिर्जापुर जिलों में उत्पादन प्रारंभ हो चुका है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में 21 से अधिक नए सीबीजी प्लांट निर्माणाधीन हैं। सीबीजी को वैकल्पिक ईंधन के रूप में स्थापित करने के लिए कार्ययोजना गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि सीबीजी को वैकल्पिक ईंधन के रूप में स्थापित करने के लिए चरणबद्ध कार्ययोजना लागू की जा रही है। प्राथमिक तकनीकी आकलनों के अनुसार एक देशी गाय से प्रतिदिन औसतन लगभग 10 किलोग्राम गोबर प्राप्त होता है, जिससे मीथेन युक्त बायोगैस का उत्पादन संभव है। गो सेवा आयोग के ओएसडी डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि परिशोधन के बाद यही गैस सीबीजी के रूप में रसोई और वाहनों में उपयोग की जा सकती है। यदि प्रदेश में गायों के गोबर से मीथेन का दोहन किया जाए, तो पेट्रोलियम उत्पादों पर होने वाले व्यय में उल्लेखनीय कमी की संभावना बन सकती है। गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी एक वैज्ञानिक आंकलन के अनुसार यूपी में एक लाख गायों के गोबर से मीथेन का दोहन कर पेट्रोलियम उत्पादों में लगभग 500 करोड़ रुपये तक की बचत की संभावना बन सकती है। इससे अन्य देशों से आयात होने वाले कच्चे तेल और एलपीजी पर निर्भरता भी घटेगी। बाराबंकी का निजी सहभागिता वाला सीबीजी प्लांट और मथुरा की श्री माताजी गौशाला जैसे प्रयोग इस मॉडल की व्यवहारिक सफलता के उदाहरण हैं।  गोबर से ऊर्जा, ऊर्जा से जैव-उर्वरक और जैव-उर्वरक से कृषि उत्पादकता का यह चक्र गांवों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ राज्य को ऊर्जा सुरक्षा की ओर ले जाएगा।