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ओबीसी छात्रवृत्ति और दिव्यांग कल्याण के लिए अतिरिक्त अनुदान, वंचितों के सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है सरकार

छात्रवृत्ति से दिव्यांग सशक्तिकरण तक, योगी सरकार के अनुपूरक अनुदान से सामाजिक योजनाओं को रफ्तार ओबीसी छात्रवृत्ति और दिव्यांग कल्याण के लिए अतिरिक्त अनुदान, वंचितों के सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है सरकार अनुसूचित जाति और जनजाति के शिक्षा, विवाह सहायता पर सरकार का फोकस, अनुपूरक बजट से मजबूती लखनऊ योगी आदित्यनाथ सरकार ने समाज कल्याण विभाग के लिए अनुपूरक बजट में विशेष प्रावधान किया है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति, कन्याओं के विवाह के लिए अनुपूरक बजट में व्यवस्था की गई है। दिव्यांग से जुड़ी कल्याणकारी योजनाओं के लिए भी अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध कराई गई है। मुख्यमंत्री प्रदेश के समेकित और समावेशी विकास को लेकर गंभीर हैं।     समाज कल्याण विभाग पर विशेष ध्यान अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए अनुपूरक बजट में व्यवस्था की गई है। अनुसूचित जाति के लिए विभिन्न मेडिकल कॉलेजों एवं संस्थानों में मानक मदों के लिए 15.46 करोड़ की अतिरिक्त व्यवस्था की गई है। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित योजनाओं में अनुसूचित जाति के लिए सबसे बड़ा प्रावधान करते हुए 1223.55 करोड़ का अनुपूरक अनुदान किया गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को और सुदृढ़ किया जा सके। उत्तर प्रदेश के समस्त राजकीय, सहायता प्राप्त एवं मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थानों की दशमोत्तर कक्षाओं में अध्ययनरत ओबीसी विद्यार्थियों के लिए वर्ष 2024–25 के अवशेष भुगतान और वर्ष 2025–26 के पात्र छात्रों हेतु लगभग 362 करोड़ रुपये की अतिरिक्त व्यवस्था की गई है। यह अनुपूरक प्रावधान छात्रवृत्ति योजनाओं को बिना अवरोध जारी रखने के लिए किया गया है। वंचित परिवारों और छात्राओं को सामाजिक संबल अनुपूरक बजट के अंतर्गत अन्य पिछड़े वर्ग के निर्धन कर्मियों की पुत्रियों की शादी के लिए आर्थिक सहायता हेतु 32 करोड़ रुपये की अतिरिक्त व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही ओबीसी वर्ग के अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के लिए शैक्षणिक संस्थानों में छात्रावास निर्माण के लिए 2 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। अनुसूचित जाति के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ बनाए रखने और सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत 11.40 करोड़ की अतिरिक्त व्यवस्था की गई है। अटल वयो अभ्युदय योजना के तहत वृद्धजनों को सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन प्रदान करने के उद्देश्य से 5.59 करोड़ की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के लिए 200 करोड़ की अतिरिक्त व्यवस्था की गई है। दिव्यांग सशक्तिकरण के लिए सरकार दृढ़संकल्पित दिव्यांग जन सशक्तिकरण विभाग के अधीनस्थ कार्यालयों में ई-ऑफिस संचालन के लिए हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और कनेक्टिविटी की व्यवस्था हेतु 1 करोड़ की अतिरिक्त धन उपलब्ध कराया गया है। डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय को विभिन्न मदों में सहायता अनुदान के रूप में 5.43 करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है। शासकीय एवं जनोपयोगी भवनों में दिव्यांग जन के लिए बाधारहित और सुगम वातावरण विकसित करने के लिए 6 करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है।

यूपी कौशल विकास मिशन के तहत युवाओं के अल्पकालीन प्रशिक्षण के लिए 150 करोड़ रुपये का प्रस्ताव

तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास को अनुपूरक बजट में दी प्राथमिकता, अतिरिक्त राशि का रखा गया प्रस्ताव यूपी कौशल विकास मिशन के तहत युवाओं के अल्पकालीन प्रशिक्षण के लिए 150 करोड़ रुपये का प्रस्ताव राज्य पॉलीटेक्निक कॉलेजों में एक्सीलेंस सेंटर स्थापित करने के लिए 613.72 करोड़ रुपये की मांग माध्यमिक शिक्षा परिषद के क्षेत्रीय कार्यालयों के संचालन के लिए 4 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट प्रस्तावित अन्य पिछड़ा वर्ग की छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति के भुगतान हेतु 3616 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि प्रस्तावित लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार ने अनुपूरक बजट में शिक्षा, प्राविधिक शिक्षा, कौशल विकास और शिक्षा क्षेत्र में सामाजिक कल्याण को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए अनुपूरक बजट में व्यापक अतिरिक्त धनराशि का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण और रोजगारोन्मुखी कौशल विकास को गति देना है, जिससे युवाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सके। प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, तकनीकी दक्षता बढ़ाने और युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल है। तकनीकी और प्राविधिक शिक्षा के क्षेत्र में होगा आधारभूत संरचना का सुधार प्रदेश के अनुपूरक बजट में तकनीकी और प्राविधिक शिक्षा के क्षेत्र में आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर दिया गया है। राज्य पॉलीटेक्निक कॉलेजों की स्थापना के लिए 1 करोड़ रुपये, तथा उनमें आधुनिक तकनीक से लैस एक्सीलेंस सेंटर स्थापित करने के लिए 613.72 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि का प्रस्ताव किया गया है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम के अंतर्गत अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में पॉलीटेक्निक भवनों के निर्माण के लिए 5 करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि की मांग की गई है। साथ ही मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर में भवन निर्माण कार्य हेतु 10 करोड़ रुपये की आवश्यकता का प्रस्तावित है। इसके अलावा इंजीनियरिंग कॉलेज, झांसी के लिए 2 करोड़ रुपये और उत्तर प्रदेश राज्य प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर को अनुदान सहायता प्रदान करने के लिए 2.5 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा गया है। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के तहत 50 हजार युवाओं को अल्पकालीन प्रशिक्षण देने के लिए 150 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा गया है। साथ ही दस्तकारी प्रशिक्षण योजना के लिए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में नई इकाइयों की स्थापना एवं उपकरणों की व्यवस्था के लिए 7 करोड़ रुपये की मांग की गई है। माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा क्षेत्र के सुदृढ़ीकरण के लिए अतिरिक्त बजट की मांग माध्यमिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज तथा उसके क्षेत्रीय कार्यालयों में ई-ऑफिस प्रणाली के क्रियान्वयन, यात्रा भत्ते और प्रशासनिक व्ययों के लिए 2.94 करोड़ रुपये, वहीं परिषद के क्षेत्रीय कार्यालयों के संचालन के लिए 4 करोड़ रुपये के अतिरिक्त बजट की मांग की गई है। इसके अलावा एनसीसी प्रशिक्षण से जुड़ी विभिन्न मदों के लिए 9 करोड़ रुपये की आवश्यकताओं को भी अनुपूरक बजट में शामिल किया गया है। जयप्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों में फर्नीचर की व्यवस्था के लिए 5 करोड़ रुपये की मांग रखी गई है। राजकीय महिला शारीरिक प्रशिक्षण महाविद्यालय, प्रयागराज में भवन परिसर के निर्माण कार्य के लिए 1 करोड़ रुपये की मांग की गई है। वहीं उच्च शिक्षा और छात्र कल्याण को लेकर सरकार ने सामाजिक समावेशन पर विशेष ध्यान दिया है। अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं के लिए वर्ष 2024-25 के अवशेष तथा 2025-26 की छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति के भुगतान हेतु 3616 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि प्रस्तावित है। साथ ही दिव्यांगजन सशक्तिकरण, अग्नि सुरक्षा एवं छात्रावास निर्माण के लिए 1 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि की मांग की गई है। इसके अलावा डॉ. शकुंतला मिश्र राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में विभिन्न मदों में सहायता अनुदान हेतु 5.43 करोड़ रुपये की राशि का प्रस्ताव रखा गया है।

विधानसभा में सीएम योगी का समाजवादी पार्टी पर सीधा हमला, कोडीन कफ सिरप पर किया बेनकाब

यूपी में कोडीन कफ सिरप से एक भी मौत नहीं: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विधानसभा में सीएम योगी का समाजवादी पार्टी पर सीधा हमला, कोडीन कफ सिरप पर किया बेनकाब बोले– यूपी में कोडीन सिरप के अवैध नेटवर्क के तार सीधे समाजवादी पार्टी से जुड़े सीएम योगी का तंज, आप चिल्लाते रहेंगे और बबुआ इंग्लैंड सैर पर निकल जाएंगे 2016 में सपा सरकार ने जारी किया सबसे बड़े होलसेलर का लाइसेंस: योगी आदित्यनाथ सीएम ने कहा, कोडीन कफ सिरप का यूपी में न उत्पादन, न निर्माण, पूरा मामला अवैध डायवर्जन का एसआईटी-एसटीएफ की कार्रवाई में 332 फर्मों पर छापे, 77+ गिरफ्तार: मुख्यमंत्री आलोक सिपाही ‘पक्का सपाई’, अमित यादव की अखिलेश यादव संग फोटो सदन में दिखाई अवैध लेन-देन लोहिया वाहिनी के पदाधिकारी के खाते से होने का खुलासा: सीएम मुख्यमंत्री ने दी समय आने पर बुलडोजर कार्रवाई की चेतावनी सीएम बोले — माफिया से किसके संबंध हैं, प्रदेश की जनता सब जानती है लखनऊ उत्तर प्रदेश विधानसभा में कोडीन कफ सिरप प्रकरण पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को विपक्ष, खासकर समाजवादी पार्टी पर करारा प्रहार करते हुए सरकार का पक्ष मजबूती से रखा। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि उत्तर प्रदेश में कोडीन कफ सिरप से एक भी मौत नहीं हुई है, लेकिन अवैध डायवर्जन, ट्रेडिंग और स्टोरेज के इस पूरे नेटवर्क के तार समाजवादी पार्टी से जुड़े लोगों तक पहुंच रहे हैं। मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष और सपा सदस्यों के हंगामे पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रश्न क्या है और मुद्दा क्या बनाया जा रहा है। इसका फर्क समझना चाहिए। सदन की गरिमा बनाए रखना विपक्ष की भी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहावत ‘चोर की दाढ़ी में तिनका’ का जिक्र करते हुए कहा कि विपक्ष की बेचैनी खुद बहुत कुछ बयां कर रही है। कोडीन से यूपी में कोई मौत नहीं, झूठ फैलाया जा रहा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया कि कोडीन युक्त कफ सिरप को लेकर प्रदेश में मौत की कोई भी घटना शासन के संज्ञान में नहीं है। यह पूरा मामला इललीगल डायवर्जन का है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में न तो कोडीन कफ सिरप का उत्पादन होता है और न ही इसका गैरकानूनी निर्माण। यूपी में केवल स्टॉकिस्ट और होलसेलर हैं। इसका उत्पादन मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और अन्य राज्यों में होता है, जबकि जिन मौतों की बात की जा रही है, वे अन्य राज्यों विशेषकर तमिलनाडु में बने सिरप से जुड़ी हैं। 2016 में सपा सरकार ने जारी किया सबसे बड़े होलसेलर का लाइसेंस मुख्यमंत्री ने सदन में बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े कोडीन कफ सिरप होलसेलर को 2016 में समाजवादी पार्टी की सरकार ने लाइसेंस जारी किया था। एसटीएफ ने उसी नेटवर्क को पकड़ा है। उन्होंने कहा कि देश में “दो नमूने” हैं, एक दिल्ली में और दूसरा लखनऊ में बैठता है और जब भी कोई गंभीर चर्चा होती है तो देश छोड़कर भाग जाते हैं। यही हाल “बबुआ” का भी है। आप लोग यहां चिल्लाते रहेंगे और बबुआ इंग्लैंड सैरसपाटे पर निकल जाएंगे। नेता प्रतिपक्ष पर तंज—इस उम्र में भी झूठ बुलवाते हैं समाजवादी मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि इस उम्र में व्यक्ति सच बोलने का आदी हो जाता है, लेकिन समाजवादी पार्टी इस उम्र में भी उनसे झूठ बुलवाती है। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने लंबे समय तक स्पीकर के रूप में सदन को आगे बढ़ाया है, इसलिए उनसे ऐसी अपेक्षा नहीं थी। सपा नेताओं की पढ़ाई-लिखाई पर सवाल मुख्यमंत्री ने कहा कि कफ सिरप का सेवन बिना चिकित्सकीय परामर्श के संभव नहीं है। खांसी होने पर हर कोई कफ सिरप लेता है, लेकिन डॉक्टर की सलाह से। इस पर चेतावनी भी अंकित होती है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के लोगों का पढ़ाई-लिखाई से कोई वास्ता नहीं है, इसलिए वे ऐसे गैर-जिम्मेदाराना बयान देते हैं। एसआईटी, एसटीएफ और एफएसडीए की ताबड़तोड़ कार्रवाई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए पुलिस महानिरीक्षक के नेतृत्व में एसआईटी गठित की गई है। अब तक 79 अभियोग दर्ज हुए है, 225 अभियुक्त नामजद हैं, 78 गिरफ्तारियां और 332 फर्मों पर छापेमारी की जा चुकी है। 136 फर्मों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है। कोर्ट ने भी एनडीपीएस के तहत कार्रवाई को उचित ठहराया है। सपा से जुड़े ‘किंग पिन’ का नाम सदन में उजागर मुख्यमंत्री ने सदन में सबूतों के साथ बताया कि आलोक सिपाही जो इस प्रकरण का किंग पिन है, पक्का सपाई है। उन्होंने फोटो दिखाते हुए कहा कि आरोपी अमित यादव, अखिलेश यादव के साथ तस्वीर में दिखाई देता है और समाजवादी पार्टी की युवजन सभा से जुड़ा रहा है। यही नहीं, विभोर राणा का लाइसेंस समाजवादी सरकार में जारी हुआ था, जबकि आलोक सिपाही को भाजपा सरकार ने बर्खास्त किया था। अवैध लेन-देन लोहिया वाहिनी के पदाधिकारी के खाते से मुख्यमंत्री ने कहा कि जांच में यह भी सामने आया है कि अवैध लेन-देन लोहिया वाहिनी के एक पदाधिकारी के खाते के माध्यम से हुआ है। शुभम जायसवाल, अमित यादव, मिलिंद यादव, मनोज यादव, राजीव यादव और मुकेश यादव जैसे नाम इस अवैध नेटवर्क में सामने आए हैं। अमित यादव की 2024 में दुबई यात्रा का भी उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हर कड़ी की जांच हो रही है। ‘जब कार्रवाई होगी तो सपा वाले ही फातिहा पढ़ने जाएंगे’ विपक्ष के हंगामे पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब समाजवादी पार्टी से जुड़े आरोपियों पर कार्रवाई होगी तो सपा के लोग ही सबसे पहले फातिहा पढ़ने जाएंगे। उन्होंने दो टूक कहा कि सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है और कोई भी अपराधी बचेगा नहीं। मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी को चेतावनी देते हुए कहा कि समय आने पर बुलडोजर कार्रवाई भी होगी, तब चिल्लाइएगा नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार कानून के तहत पूरी सख्ती से कार्रवाई करेगी।

पूर्व प्रधानमंत्री ‘भारत रत्न’ चौधरी चरण सिंह की 123वीं जयंती पर होगा आयोजन

‘किसान सम्मान दिवस’ मनाएगी योगी सरकार  पूर्व प्रधानमंत्री ‘भारत रत्न’ चौधरी चरण सिंह की 123वीं जयंती पर होगा आयोजन मुख्यमंत्री कृषक उपहार योजना के तहत किसानों को ट्रैक्टर की चाबी देंगे मुख्यमंत्री  किसानों, एफपीओ, अधिकारियों व वैज्ञानिकों का किया जाएगा सम्मान  लखनऊ योगी सरकार किसान कल्याण के लिए जीवन समर्पित करने वाले पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का जन्मदिवस ‘किसान सम्मान दिवस’ के रूप में मनाएगी। मंगलवार को पूर्व प्रधानमंत्री की 123वीं जयंती है। मुख्य आयोजन विधान भवन प्रांगण से होगा। किसानों की समृद्धि में सहायक योगी सरकार भारत रत्न चौधरी चरण सिंह की जयंती पर विविध आयोजन भी करेगी।  यह जानकारी कृषि निदेशक डॉ. पंकज त्रिपाठी ने दी। उन्होंने बताया कि मुख्य आयोजन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहेंगे। साथ ही कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख भी मौजूद रहेंगे। ‘मुख्यमंत्री कृषक उपहार योजना’ के अंतर्गत सीएम योगी के हाथों 25 किसानों को ट्रैक्टर की चाबी सौंपी जाएगी। साथ ही प्रगतिशील किसान/महिला किसान, कृषक उत्पादन संगठन/कृषि निर्यातक, औद्यानिक फसलों/संरक्षित खेती के प्रोत्साहन के लिए किसानों को पुरस्कृत भी करेंगे। इस दौरान पराली प्रबंधन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों, कृषि अवसंरचना निधि के लाभार्थियों व कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिकों का भी सम्मान किया जाएगा।

राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर विधानसभा में आयोजित विशेष चर्चा सत्र की मुख्यमंत्री योगी ने की शुरुआत

केवल गीत नहीं, राष्ट्र की चेतना व साहस का मंत्र है वंदे मातरम् : योगी आदित्यनाथ राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर विधानसभा में आयोजित विशेष चर्चा सत्र की मुख्यमंत्री योगी ने की शुरुआत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बोलेः स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा का उद्घोष है वंदे मातरम् केवल काव्य नहीं बल्कि मातृभूमि की आराधना, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रवाद की अभिव्यक्ति का माध्यम है वंदे मातरम्ः मुख्यमंत्री योगी लखनऊ राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सोमवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा में विशेष चर्चा सत्र का आयोजन किया गया। इस चर्चा सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम की चेतना, क्रांतिकारियों के साहस और राष्ट्र के आत्मसम्मान का मंत्र है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में संभवतः उत्तर प्रदेश पहली विधानसभा है, जहां इस ऐतिहासिक विषय पर विस्तार से चर्चा हो रही है। मुख्यमंत्री योगी के अनुसार, यह चर्चा किसी गीत की वर्षगांठ भर नहीं है, बल्कि भारत माता के प्रति राष्ट्रीय कर्तव्यों की पुनर्स्थापना का अवसर है। वंदे मातरम् का सम्मान केवल एक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि यह हमारे संवैधानिक मूल्यों और राष्ट्रीय दायित्वों का बोध कराता है। यह राष्ट्र की आत्मा, संघर्ष और संकल्प का प्रतीक है। उनके अनुसार, यह केवल काव्य नहीं था, बल्कि मातृभूमि की आराधना, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रवाद की अभिव्यक्ति का माध्यम है। ब्रिटिश शासन में भी बना स्वतंत्रता की चेतना का स्वर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब वंदे मातरम् अपनी रजत जयंती मना रहा था, तब देश ब्रिटिश हुकूमत के अधीन था। 1857 के प्रथम स्वातंत्र्य समर की विफलता के बाद अंग्रेजी शासन दमन और अत्याचार की पराकाष्ठा पर था। काले कानूनों के माध्यम से जनता की आवाज को दबाया जा रहा था, यातनाएं दी जा रही थीं, लेकिन वंदे मातरम् ने देश की सुप्त चेतना को जीवित रखा। जब देश इसकी रजत और स्वर्ण जयंती मना रहा था, तब भी ब्रिटिश शासन कायम था। उस समय स्वतंत्रता की चेतना को आगे बढ़ाने का मंच कांग्रेस के अधिवेशन रहे, जहां वर्ष 1896 में रवीन्द्रनाथ टैगोर ने पहली बार इसे स्वर दिया। यह पूरे देश के लिए एक मंत्र बन गया। विधानसभा में वंदे मातरम पर बोले माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी कांग्रेस ने तुष्टिकरण की राजनीति की, जिन्ना जबतक कांग्रेस में थे, वंदेमातरम कोई निर्णायक विवाद नही था। कांग्रेस छोड़ते ही जिन्ना ने इसे मुस्लिम लीग का औजार बनाया और गीत को जानबूझकर सांप्रदायिक रंग दिया। गीत वही रहा, लेकिन एजेंडा बदल गया : मुख्यमंत्री  15 अक्टूबर 1937 को इसी लखनऊ से मो अली जिन्ना ने वंदेमातरम के विरुद्ध नारा बुलंद किया और उस समय कांग्रेस अध्यक्ष पंडित नेहरू थे। 20 अक्टूबर 1937 को नेहरू जी ने सुभाष चंद्र बोस जी को पत्र लिखा और कहा इसकी पृष्टभूमि मुस्लिमों को असहज कर रही है : मुख्यमंत्री देश की आत्मा जगाने वाला गीत है वंदे मातरम् मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जब वंदे मातरम् की शताब्दी आई, तब वही कांग्रेस सत्ता में थी, जिसने कभी देश की आत्मा जगाने वाले इस गीत को अपने मंच पर स्थान दिया था, मगर उसने देश पर आपातकाल थोपकर संविधान का गला घोंटने का कार्य किया। यह इतिहास का एक ऐसा कालखंड था, जिसे भुलाया नहीं जा सकता। मुख्यमंत्री योगी के अनुसार, आज जब वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं, तब भारत प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आत्मविश्वास के साथ विकसित भारत की ओर बढ़ रहा है। राष्ट्रगीत के अमर रचयिता बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का जो सपना था, उसे नया भारत साकार करने की दिशा में आगे बढ़ चुका है। इसी कारण यह चर्चा सदन में अत्यंत सामयिक है। 1857 से राष्ट्र चेतना के प्रवाह का माध्यम बना वंदे मातरम् मुख्यमंत्री ने वर्ष 1857 के प्रथम स्वातंत्र्य समर का उल्लेख करते हुए कहा कि बैरकपुर में मंगल पांडेय, गोरखपुर में शहीद बंधु सिंह, मेरठ में धन सिंह कोतवाल और झांसी में रानी लक्ष्मीबाई के नेतृत्व में देशभर में स्वतंत्रता के लिए संघर्ष हुआ। स्वातंत्र्य समर की विफलता के बाद उपजी हताशा के दौर में वंदे मातरम् ने देश की सोई हुई आत्मा को जगाने का काम किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय डिप्टी कलेक्टर के रूप में ब्रिटिश शासन में कार्यरत बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने आम जनमानस की भावनाओं को वंदे मातरम् के माध्यम से स्वर दिया।  औपनिवेशिक मानसिकता के प्रतिकार का माध्यम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार, वंदे मातरम औपनिवेशिक मानसिकता के प्रतिकार का प्रतीक बना।  उन्होंने कहा कि भारत माता केवल भूभाग नहीं थी, बल्कि हर भारतीय की भावना थी। स्वाधीनता राजनीति नहीं, बल्कि साधना थी। 'सुजलाम, सुफलाम् मलयज-शीतलाम् शस्यश्यामलाम् मातरम्' की पंक्तियों ने भारतीय मानस में चेतना का संचार किया और भारत की प्रकृति, समृद्धि, सौंदर्य और शक्ति को एक साथ मूर्त रूप दिया।

राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर विधानसभा में आयोजित विशेष चर्चा सत्र की मुख्यमंत्री योगी ने की शुरुआत

केवल गीत नहीं, राष्ट्र की चेतना व साहस का मंत्र है वंदे मातरम् : योगी आदित्यनाथ राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर विधानसभा में आयोजित विशेष चर्चा सत्र की मुख्यमंत्री योगी ने की शुरुआत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बोलेः स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा का उद्घोष है वंदे मातरम् केवल काव्य नहीं बल्कि मातृभूमि की आराधना, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रवाद की अभिव्यक्ति का माध्यम है वंदे मातरम्ः मुख्यमंत्री योगी लखनऊ राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सोमवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा में विशेष चर्चा सत्र का आयोजन किया गया। इस चर्चा सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम की चेतना, क्रांतिकारियों के साहस और राष्ट्र के आत्मसम्मान का मंत्र है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में संभवतः उत्तर प्रदेश पहली विधानसभा है, जहां इस ऐतिहासिक विषय पर विस्तार से चर्चा हो रही है। मुख्यमंत्री योगी के अनुसार, यह चर्चा किसी गीत की वर्षगांठ भर नहीं है, बल्कि भारत माता के प्रति राष्ट्रीय कर्तव्यों की पुनर्स्थापना का अवसर है। वंदे मातरम् का सम्मान केवल एक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि यह हमारे संवैधानिक मूल्यों और राष्ट्रीय दायित्वों का बोध कराता है। यह राष्ट्र की आत्मा, संघर्ष और संकल्प का प्रतीक है। उनके अनुसार, यह केवल काव्य नहीं था, बल्कि मातृभूमि की आराधना, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रवाद की अभिव्यक्ति का माध्यम है। ब्रिटिश शासन में भी बना स्वतंत्रता की चेतना का स्वर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब वंदे मातरम् अपनी रजत जयंती मना रहा था, तब देश ब्रिटिश हुकूमत के अधीन था। 1857 के प्रथम स्वातंत्र्य समर की विफलता के बाद अंग्रेजी शासन दमन और अत्याचार की पराकाष्ठा पर था। काले कानूनों के माध्यम से जनता की आवाज को दबाया जा रहा था, यातनाएं दी जा रही थीं, लेकिन वंदे मातरम् ने देश की सुप्त चेतना को जीवित रखा। जब देश इसकी रजत और स्वर्ण जयंती मना रहा था, तब भी ब्रिटिश शासन कायम था। उस समय स्वतंत्रता की चेतना को आगे बढ़ाने का मंच कांग्रेस के अधिवेशन रहे, जहां वर्ष 1896 में रवीन्द्रनाथ टैगोर ने पहली बार इसे स्वर दिया। यह पूरे देश के लिए एक मंत्र बन गया। विधानसभा में वंदे मातरम पर बोले माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी कांग्रेस ने तुष्टिकरण की राजनीति की, जिन्ना जबतक कांग्रेस में थे, वंदेमातरम कोई निर्णायक विवाद नही था। कांग्रेस छोड़ते ही जिन्ना ने इसे मुस्लिम लीग का औजार बनाया और गीत को जानबूझकर सांप्रदायिक रंग दिया। गीत वही रहा, लेकिन एजेंडा बदल गया : मुख्यमंत्री  15 अक्टूबर 1937 को इसी लखनऊ से मो अली जिन्ना ने वंदेमातरम के विरुद्ध नारा बुलंद किया और उस समय कांग्रेस अध्यक्ष पंडित नेहरू थे। 20 अक्टूबर 1937 को नेहरू जी ने सुभाष चंद्र बोस जी को पत्र लिखा और कहा इसकी पृष्टभूमि मुस्लिमों को असहज कर रही है : मुख्यमंत्री देश की आत्मा जगाने वाला गीत है वंदे मातरम् मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जब वंदे मातरम् की शताब्दी आई, तब वही कांग्रेस सत्ता में थी, जिसने कभी देश की आत्मा जगाने वाले इस गीत को अपने मंच पर स्थान दिया था, मगर उसने देश पर आपातकाल थोपकर संविधान का गला घोंटने का कार्य किया। यह इतिहास का एक ऐसा कालखंड था, जिसे भुलाया नहीं जा सकता। मुख्यमंत्री योगी के अनुसार, आज जब वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं, तब भारत प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आत्मविश्वास के साथ विकसित भारत की ओर बढ़ रहा है। राष्ट्रगीत के अमर रचयिता बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का जो सपना था, उसे नया भारत साकार करने की दिशा में आगे बढ़ चुका है। इसी कारण यह चर्चा सदन में अत्यंत सामयिक है। 1857 से राष्ट्र चेतना के प्रवाह का माध्यम बना वंदे मातरम् मुख्यमंत्री ने वर्ष 1857 के प्रथम स्वातंत्र्य समर का उल्लेख करते हुए कहा कि बैरकपुर में मंगल पांडेय, गोरखपुर में शहीद बंधु सिंह, मेरठ में धन सिंह कोतवाल और झांसी में रानी लक्ष्मीबाई के नेतृत्व में देशभर में स्वतंत्रता के लिए संघर्ष हुआ। स्वातंत्र्य समर की विफलता के बाद उपजी हताशा के दौर में वंदे मातरम् ने देश की सोई हुई आत्मा को जगाने का काम किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय डिप्टी कलेक्टर के रूप में ब्रिटिश शासन में कार्यरत बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने आम जनमानस की भावनाओं को वंदे मातरम् के माध्यम से स्वर दिया।  औपनिवेशिक मानसिकता के प्रतिकार का माध्यम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार, वंदे मातरम औपनिवेशिक मानसिकता के प्रतिकार का प्रतीक बना।  उन्होंने कहा कि भारत माता केवल भूभाग नहीं थी, बल्कि हर भारतीय की भावना थी। स्वाधीनता राजनीति नहीं, बल्कि साधना थी। 'सुजलाम, सुफलाम् मलयज-शीतलाम् शस्यश्यामलाम् मातरम्' की पंक्तियों ने भारतीय मानस में चेतना का संचार किया और भारत की प्रकृति, समृद्धि, सौंदर्य और शक्ति को एक साथ मूर्त रूप दिया।

‘राहवीर योजना’ के तहत यूपी में सड़क दुर्घटना में घायल की मदद पर मिलेगा 25 हजार का पुरस्कार

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में लगातार बढ़ रही मौतों को रोकने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने एक अहम पहल की है। सड़क हादसों में घायल लोगों को समय पर इलाज न मिल पाने के कारण कई जानें चली जाती हैं। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार ने ‘राहवीर योजना’ को प्रभावी रूप से लागू करने का फैसला किया है। इस योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को समय रहते अस्पताल पहुंचाने वाले मददगार को 25 हजार रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। दुर्घटना के बाद का पहला एक घंटा ‘गोल्डन आवर’ आंकड़ों के मुताबिक गोंडा जिले में अब तक सड़क हादसों में 100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इनमें से अधिकतर लोगों की जान बचाई जा सकती थी, यदि उन्हें समय पर अस्पताल पहुंचाया गया होता। दुर्घटना के बाद का पहला एक घंटा ‘गोल्डन आवर’ कहलाता है, जिसमें सही इलाज मिलने पर मरीज की जान बचने की संभावना सबसे अधिक होती है। सरकार लोगों को मदद के लिए प्रेरिर करना चाह रही अक्सर देखा जाता है कि सड़क पर गंभीर रूप से घायल व्यक्ति की मदद करने से लोग पीछे हट जाते हैं। इसका मुख्य कारण पुलिस पूछताछ और कोर्ट-कचहरी में फंसने का डर होता है। राहवीर योजना के जरिए सरकार इस डर को दूर करने और लोगों को आगे आकर मदद के लिए प्रेरित करना चाहती है। 25 हजार रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी उप संभागीय परिवहन अधिकारी आर.सी. भारतीय के अनुसार, घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति यानी ‘राहवीर’ का चयन स्वास्थ्य विभाग और पुलिस विभाग संयुक्त रूप से करेंगे। इसके बाद जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति अंतिम निर्णय लेगी। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित व्यक्ति को सम्मानित करते हुए 25 हजार रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। सरकार का मानना है कि राहवीर योजना से न सिर्फ सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में कमी आएगी, बल्कि समाज में मानवता और जिम्मेदारी की भावना भी मजबूत होगी।  

विकास की रफ्तार बनाए रखने और प्राथमिक क्षेत्रों को मजबूती देने पर सरकार का फोकस: CM योगी

योगी सरकार ने विधानसभा में प्रस्तुत किया ₹24,496.98 करोड़ का अनुपूरक बजट विकास की रफ्तार बनाए रखने और प्राथमिक क्षेत्रों को मजबूती देने पर सरकार का फोकस: CM योगी  अनुपूरक बजट मूल बजट का 3.03 प्रतिशत, ₹18,369 करोड़ राजस्व व्यय और ₹6,127 करोड़ पूंजीगत व्यय का प्रावधान ऊर्जा, स्वास्थ्य और नगरीय विकास सरकार की शीर्ष प्राथमिकता औद्योगिक विकास के लिए ₹4,874 करोड़, पावर सेक्टर को ₹4,521 करोड़ स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को ₹3,500 करोड़ की बड़ी सौगात नगर विकास के लिए ₹1,758.56 करोड़, शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर तकनीकी शिक्षा के लिए ₹639.96 करोड़, स्किल और इनोवेशन को बढ़ावा महिला एवं बाल विकास के लिए ₹535 करोड़ का प्रावधान सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए यूपीनेडा को ₹500 करोड़  मेडिकल एजुकेशन को ₹423.80 करोड़, गन्ना एवं चीनी मिल को ₹400 करोड़ वित्तीय अनुशासन के साथ विकास का संतुलन, एफआरबीएम सीमा का पूर्ण पालन लखनऊ  योगी सरकार ने सोमवार को विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए ₹24,496.98 करोड़ का अनुपूरक बजट प्रस्तुत किया। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बजट पेश करते हुए कहा कि यह अनुपूरक बजट प्रदेश में विकास की निरंतरता बनाए रखने, आवश्यक क्षेत्रों में अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने और बदलती जरूरतों के अनुरूप योजनाओं को गति देने के उद्देश्य से लाया गया है। वित्त मंत्री ने बताया कि वर्ष 2025–26 के लिए प्रदेश का मूल बजट ₹808,736.06 करोड़ का था, जबकि प्रस्तुत अनुपूरक बजट मूल बजट के अनुपात में 3.03 प्रतिशत है। अनुपूरक बजट को मिलाकर वित्तीय वर्ष 2025-26 का कुल बजट अब 833,233.04 करोड़ का हो गया है। उन्होंने कहा कि यह बजट विकासात्मक प्राथमिकताओं को और अधिक सुदृढ़ करने पर केंद्रित है। राजस्व और पूंजीगत व्यय का संतुलित प्रावधान प्रस्तुत अनुपूरक बजट में राजस्व व्यय के रूप में ₹18,369.30 करोड़, पूंजीगत व्यय के रूप में ₹6,127.68 करोड़ का प्रावधान किया गया है। सरकार का उद्देश्य राजस्व आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ पूंजीगत निवेश को बढ़ाकर आधारभूत ढांचे को मजबूत करना है। उद्योग, ऊर्जा और स्वास्थ्य को मिला बजट वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि अनुपूरक बजट में प्रदेश की आर्थिक प्रगति और जनकल्याण से जुड़े प्रमुख क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। इसके अंतर्गत औद्योगिक विकास के लिए ₹4,874 करोड़, पावर सेक्टर के लिए ₹4,521 करोड़, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के लिए ₹3,500 करोड़, नगर विकास के लिए ₹1,758.56 करोड़, तकनीकी शिक्षा के लिए ₹639.96 करोड़ की धनराशि प्रस्तावित की गई है। महिला, शिक्षा, सौर ऊर्जा और कृषि से जुड़े क्षेत्रों को भी बल अनुपूरक बजट में सामाजिक और भविष्य उन्मुख क्षेत्रों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इसके तहत, महिला एवं बाल विकास के लिए ₹535 करोड़, यूपीनेडा (सौर एवं नवीकरणीय ऊर्जा) के लिए ₹500 करोड़, मेडिकल एजुकेशन के लिए ₹423.80 करोड़, गन्ना एवं चीनी मिल क्षेत्र के लिए ₹400 करोड़ की बजटीय व्यवस्था की गई है। एफआरबीएम सीमा का पूर्ण अनुपालन, जीएसडीपी में ऐतिहासिक वृद्धि वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि योगी सरकार ने एफआरबीएम (FRBM) अधिनियम की सीमा का हमेशा पालन किया है और किसी भी स्तर पर वित्तीय अनुशासन से समझौता नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के पत्रक के अनुसार उत्तर प्रदेश की जीडीपी (GSDP) ₹31.14 लाख करोड़ आंकी गई है, जो पहले के अनुमानों से अधिक है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश आज रेवेन्यू सरप्लस स्टेट के रूप में उभर रहा है, जो राज्य की मजबूत आर्थिक स्थिति को दर्शाता है। विकास की गति बनाए रखने के लिए प्रस्तुत हुआ अनुपूरक बजट जब किसी वित्तीय वर्ष में स्वीकृत धनराशि व्यय की वास्तविक आवश्यकताओं के लिए अपर्याप्त हो जाती है, तब अनुपूरक अनुदान की मांग विधानमंडल के समक्ष प्रस्तुत की जाती है। कई बार नई मदों पर व्यय की आवश्यकता होती है या योजनाओं में महत्वपूर्ण परिवर्तन के कारण विधानमंडल की स्वीकृति अनिवार्य हो जाती है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोडिन कफ सिरप मामले में रखा सरकार का पक्ष, बोले-मामले में कोई भी अपराधी बच नहीं पाएगा

विधानसभा में कोडिन पर सीएम योगी का जवाब कोडिन से यूपी में एक भी मौत नहीं हुईः मुख्यमंत्री  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोडिन कफ सिरप मामले में रखा सरकार का पक्ष, बोले-मामले में कोई भी अपराधी बच नहीं पाएगा मुख्यमंत्री ने सदन में समाजवादियों को दिखाया आईना  बोले- यूपी के जो सबसे बड़े होलसेलर हैं, उन्हें 2016 में समाजवादी पार्टी ने जारी किया था लाइसेंस  देश में दो नमूने हैं, जब कोई चर्चा होती है तो वह देश छोड़कर भाग जाते हैः मुख्यमंत्री  मुख्यमंत्री ने सपाइयों से कहा- आप चिल्लाते रहेंगे और ‘बबुआ’ सैरसपाटे के लिए इंग्लैंड चले जाएंगे  अवैध लेन-देन भी लोहिया वाहिनी के एक पदाधिकारी के खाते के माध्यम से हुआः सीएम योगी  सीएम ने सपाइयों से कहाः समय आने पर होगी बुलडोजर कार्रवाई, तब चिल्लाइएगा नहीं  लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को सदन में कोडिन कफ सिरप मामले में सरकार का पक्ष रखा और समाजवादी पार्टी के नेताओं को खूब धोया। बोले कि प्रश्न क्या है और मुद्दे क्या उठाए जा रहे हैं। माननीय सदस्यों को अध्ययन करके आना चाहिए और सदन की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए। नेता विरोधी दल ने सदन की कार्रवाई होते ही इस मुद्दे को उठाया, इसलिए मुझे खड़ा होना पड़ा। सीएम ने कहावत ‘चोर की दाढ़ी में तिनका’ का जिक्र कर समाजवादी पार्टी को आईना दिखाया। सीएम ने सदन में साफ किया कि कोडिन कफ सिरप से यूपी में एक भी मौत नहीं हुई है। इस मामले में एनडीपीएस के अंतर्गत कार्रवाई होगी, उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले को कोर्ट में लड़ा और जीता है।  नेता प्रतिपक्ष से झूठ बोलवा देते हैं समाजवादी   सीएम ने नेता प्रतिपक्ष की चुटकी ली। बोले कि इस उम्र में व्यक्ति सच बोलने का आदी होता है, लेकिन समाजवादी इस उम्र में भी उनसे झूठ बोलवा देते हैं। समाजवादियों को ऐसा नहीं करना चाहिए और उन्हें भी सच बोलने का आदी होना चाहिए। उन्होंने लंबे समय तक स्पीकर के रूप में सदन को आगे बढ़ाया है।  2016 में समाजवादी पार्टी ने यूपी के सबसे बड़े होलसेलर को जारी किया था लाइसेंस  सीएम योगी ने सदन में कहा कि उत्तर प्रदेश में यूपी के सबसे बड़े होलसेलर को एसटीएफ ने पकड़ा था। 2016 में समाजवादी पार्टी ने उसे लाइसेंस जारी किया था। सीएम ने कहा कि देश में दो नमूने हैं। एक दिल्ली व दूसरा लखनऊ में बैठता है। जब देश में कोई चर्चा होती है तो वह देश छोड़कर भाग जाते हैं। यही आपके बबुआ के साथ भी हो रहा है। आप चिल्लाते रहेंगे और बबुआ सैरसपाटे के लिए इंग्लैंड चले जाएंगे।  यूपी में नहीं होता कोडिन कफ सिरप का प्रोडक्शन  सीएम ने फिर स्पष्ट किया कि कोडिन कफ सिरप (नकली दवा) के कारण मौत की कोई भी बात शासन के संज्ञान में नहीं आयी है। समय-समय पर एफएसडीए विभाग लगातार छापेमारी व कार्रवाई करती है। कंपनियों में भी इस प्रकार की कार्रवाई होती है। यूपी में कोडिन कफ सिरप के केवल स्टाकिस्ट व होलसेलर हैं। इसका यहां प्रोडक्शन नहीं होता। इसका प्रोडक्शन मध्य प्रदेश, हिमाचल व अन्य राज्यों में होता है। मौत के जो प्रकरण आए हैं, वह भी अन्य राज्यों के हैं। ऐसे प्रकरण तमिलनाडु में बने सिरप के कारण आए हैं। यह पूरा प्रकरण इललीगल डायवर्जन का है। इसके माध्यम से होलसेलर (सहारनपुर, गाजियाबाद, लखनऊ, कानपुर, वाराणसी) ने इसे उन देशों व राज्यों में पहुंचाया है, जहां मद्य निषेध है। वहां नशे के आदी लोगों को इसे लेने की आदत है। वहां इसका दुरुपयोग किया गया है।  समाजवादी पार्टी के लोगों का पढ़ाई-लिखाई से कोई वास्ता नहीं  मुख्यमंत्री ने सीएम ने कहा कि बच्चे हों या एडल्ट, बिना चिकित्सीय परामर्श के कोई भी इसका सेवन नहीं कर सकता। खांसी होने पर हर कोई कफ सिरप लेता है, लेकिन चिकित्सीय परामर्श से। उस पर यह अंकित भी होता है, लेकिन समाजवादी पार्टी के लोगों का पढ़ाई-लिखाई से कोई वास्ता है नहीं, इसलिए आप लोग ऐसी बाते करते हैं।  समय आने पर होगी बुलडोजर कार्रवाई, तब चिल्लाइएगा नहीं  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकार की कार्रवाई की जानकारी भी सदन में रखी। मुख्यमंत्री ने कहा अब तक 79 अभियोग दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें 225 अभियुक्त नामज़द हैं। 78 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है और 134 फर्मों पर छापेमारी की कार्रवाई हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मामले की गहराई में जाएंगे तो बार-बार यही तथ्य सामने आता है कि कहीं न कहीं समाजवादी पार्टी से जुड़ा कोई नेता या व्यक्ति इसमें संलिप्त पाया जाता है। अवैध लेन-देन भी लोहिया वाहिनी के एक पदाधिकारी के खाते के माध्यम से हुआ है। एसटीएफ पूरे प्रकरण की जांच कर रही है। उन्होंने बताया कि कोर्ट ने इस मामले में एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत मुकदमा चलाने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने इस लड़ाई को पूरी मजबूती से लड़ा है और इसमें सफलता भी प्राप्त की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले में कोई भी अपराधी बच नहीं पाएगा। सीएम ने बुलडोजर एक्शन को लेकर समाजवादी पार्टी पर तंज कसा। कहा कि चिंता मत कीजिए, समय आने पर बुलडोजर एक्शन की पूरी तैयारी रहेगी, उस समय चिल्लाइएगा नहीं।

सीएम योगी का अलर्ट: यूपी की विधानसभा सीट पर वोटिंग में बढ़ा मत विभाजन, SIR आंकड़ों से हुई पुष्टि

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में लोकभवन में हुई एनडीए विधानमंडल दल की बैठक में भी एसआईआर का मुद्दा ही छाया रहा। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की 25-25 उन विधानसभा सीटों का ब्योरा सबके सामने सिलसिलेवार रखा, जहां या तो सर्वाधिक वोट कटे हैं या फिर बहुत कम वोट कटे हैं। दोनों ही स्थितियों को चिंताजनक बताया गया। सर्वाधिक वोट कटने के मामले में गाजियाबाद की साहिबाबाद सीट प्रदेश में पहले नंबर पर है। इस फेहरिस्त में दूसरे नंबर पर प्रयागराज की उत्तरी सीट है। वर्ष 2025 की वोटर लिस्ट के लिहाज से देखें तो साहिबाबाद में अभी तक केवल 58 फीसदी ही वोट बन पाए हैं। यानि 42 फीसदी नाम नहीं हैं। जबकि प्रयागराज उत्तर में तुलनात्मक रूप से 40 फीसदी से अधिक नाम अभी सूची में नहीं हैं। इस सूची में लखनऊ की उत्तरी, पूर्वी सहित चार सीटें शामिल हैं। इसी तरह कानपुर, आगरा, बरेली, मेरठ, मथुरा आदि महानगरों की सीटें भी वोट कटने के मामले में टॉप-25 की लिस्ट में शामिल हैं। यह वे सीटें हैं जहां 30-32 से लेकर 42 फीसदी तक वोट 2025 की वोटर लिस्ट की तुलना में अभी शामिल नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि भाजपा कार्यकर्ता एसआईआर का काम कर रहे हैं मगर अभी इसमें और तत्परता दिखानी होगी। अभी एसआईआर पर जितना काम कर लोगे तो समझो दो तिहाई चुनाव निपट जाएगा। उन्होंने ऐसी 25 सीटों की लिस्ट भी पढ़कर सुनाई जहां 13-14 फीसदी तक वोट ही कटे हैं। इनमें अमरोहा, शिकारपुर, देवबंद, जलेसर, सिरसागंज, मथुरा-वृंदावन, सीतापुर, एटा की मारहरा, कानपुर की सिकंदरा, आंवला, जसराना, फूलपुर आदि विधानसभा सीटें इसमें शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी विधायक अनुशासन के साथ सोमवार को सदन में मौजूद रहें। वंदेमातरम पर सदन में चर्चा होगी। बैठक में भाजपा के नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी का स्वागत किया गया। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह, सुभासपा प्रमुख ओपी राजभर, निषाद पार्टी प्रमुख डा. संजय निषाद, अपना दल (एस) की ओर से आशीष पटेल, संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना मौजूद रहे। 32 फीसदी से अधिक वोट कटने वाली सीटें गाजियाबाद की साहिबाबाद-42 प्रतिशत, प्रयागराज उत्तर-40.9 प्रतिशत, लखनऊ उत्तर-39, लखनऊ ईस्ट-35, कैंट-37 प्रतिशत, सरोजनी नगर-32 प्रतिशत, कानपुर कैंट-34 फीसदी, कल्याणपुर-34 प्रतिशत, कानपुर दक्षिण-34 प्रतिशत, आर्य नगर-33 प्रतिशत, आगरा छावनी-35 प्रतिशत, आगरा दक्षिण-33 प्रतिशत, आगरा उत्तर में 33 प्रतिशत, बरेली-34, बरेली कैंट-35, मेरठ-34 प्रतिशत, गाजियाबाद-34, मथुरा-वृंदावन-34 प्रतिशत। ढाई से तीन करोड़ वोटर अभी कम, यह आपका वोट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कम वोटों से विधानसभा चुनाव जीतने या हारने वालों को चेताया। कहा कि यदि तीन प्रतिशत भी वोट कट गया तो ऐसे लोगों के लिए खतरे की घंटी है। ऐसे सभी लोग सतर्क हो जाएं। दावतें, कहीं आना-जाना, अनुष्ठान सब काम छोड़ कर एसआईआर में जुट जाएं। उन्होंने कहा कि ढाई से तीन करोड़ वोटर कम है। यह वोट किसका है। यह वोट आपका है। नये वोटर बनाने पर फोकस कीजिए। सभी घुसपैठियों और फर्जी वोटरों को मतदाता सूची से बाहर कराइए। उन्होंने कहा कि भाजपा के हर नेता, कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि के लिए इस समय एसआईआर से महत्वपूर्ण और कोई काम नहीं है। उन्होंने कहा कि जो भी संदिग्ध वोटर हैं, किसी एक ही पते पर यदि बड़ी संख्या में वोटर हैं तो ऐसे सभी लोगों की पड़ताल कर उन्हें सूची से बाहर कराइए। इसके लिए व्यापक पैमाने पर आपत्तियां दाखिल करने को फार्म-7 का प्रयोग कीजिए। उन्होंने दोहराया कि कोई भी सही नाम वोटर बनने से वंचित न हो और कोई फर्जी व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी विधानसभा व लोकसभा के चुनाव इसी मतदाता सूची से होंगे जबकि प्रधानी व निकाय चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग की मतदाता सूची के आधार पर होंगे। कम एसआईआर वाली सीटों पर विधायकों का कटेगा टिकट प्रदेश की जिन विधानसभा सीटों पर एसआईआर कम है, वहां के विधायकों की टिकट पर संकट है। उन्हें दो टूक शब्दों में समझा दिया गया कि जिन्हें चुनाव नहीं लड़ना वो स्पष्ट बता दें लेकिन एसआईआर में पार्टी के साथ धोखा ना करें। अगले पांच दिन सब काम छोड़कर केवल वोट बढ़ाने में जुटें। ऐसी तमाम बातें रविवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में एसआईआर पर आयोजित पार्टी की प्रदेश स्तरीय महत्वपूर्ण बैठक में राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुघ ने कहीं। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कम वोटों के अंतर से विधानसभा चुनाव जीतने-हारने वालों को चेताया। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी की अध्यक्षता में हुई बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री चुघ ने कहा कि एसआईआर पर अभी की गई मेहनत अगले 20 साल काम आने वाली है। आने वाले आठ विधानसभा व लोकसभा चुनाव इसी मतदाता सूची से होंगे।