samacharsecretary.com

छोटे गांव से राष्ट्रीय गौरव तक: छत्तीसगढ़ के गांव से उठकर देश का सबसे तेज धावक बना अनिमेष कुजूर

रायपुर  छत्तीसगढ़ के एक छोटे से गांव घुइटानगर से निकले 22 वर्षीय अनिमेष कुजूर आज भारत के सबसे तेज धावक बन चुके हैं. मात्र 10.18 सेकंड में 100 मीटर की दौड़ पूरी कर उन्होंने गुरिंदरवीर सिंह का रिकॉर्ड तोड़ा और भारतीय एथलेटिक्स में एक नई क्रांति की शुरुआत की. अब वे सिर्फ देश नहीं, बल्कि विश्व पटल पर भारत की पहचान बनाने की राह पर हैं. मोनाको डायमंड लीग में हिस्सा लेने वाले पहले भारतीय स्प्रिंटर बनकर अनिमेष ने इतिहास रच दिया है. यहां उन्होंने 200 मीटर U-23 स्पर्धा में भाग लिया और दुनिया के दिग्गज एथलीट्स के सामने भी आत्मविश्वास से दौड़े. हालांकि वे केवल 0.10 सेकंड से पोडियम से चूक गए, लेकिन उनका प्रदर्शन भारत के लिए गर्व का विषय बना. गांव से लेकर ग्लोबल मंच तक कोविड लॉकडाउन के दौरान जब दुनिया ठहर सी गई थी, तब अनिमेष का करियर दौड़ने लगा. शुरुआत फुटबॉल से हुई, लेकिन गांव के पास आर्मी के जवानों के साथ ट्रैक पर दौड़ते हुए उनकी स्पीड ने लोगों को चौंका दिया. किसी ने उन्हें लोकल रेस में भाग लेने की सलाह दी और वहीं से एथलेटिक्स की दुनिया में उनका प्रवेश हुआ. जब कोच और खिलाड़ी की जिद ने इतिहास रचा अनिमेष के कोच मार्टिन ओवेन्स बताते हैं, "वह बहुत बड़ा लड़का था, और खुद को ट्रेनिंग में लेने की जिद कर रहा था. हम दोनों में आज तक बहस होती है कि किसने किससे गुजारिश की थी!" HPC (हाई परफॉर्मेंस सेंटर) में आने के बाद अनिमेष ने पहले ही टूर्नामेंट में U-23 200 मीटर दौड़ जीत ली. छत्तीसगढ़ के एक छोटे से गांव घुइटानगर से निकले अनिमेष अब भारतीय एथलेटिक्स में नया अध्याय लिख रहे हैं. वह पहले ही भारत के सबसे तेज धावक बन चुके हैं. उन्होंने 100 मीटर दौड़ 10.18 सेकेंड में पूरी कर ली और गुरिंदरवीर सिंह का 10.20 सेकेंड वाला रिकॉर्ड तोड़ दिया. अनिमेष कुजूर ने एथलेटिक्स में क्या नया किया है? सिर्फ 22 साल की उम्र में और 6 फीट 2 इंच लंबाई के साथ कुजूर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. जुलाई में उन्होंने पहली बार डायमंड लीग में हिस्सा लिया, जहां उनका मुकाबला ऑस्ट्रेलिया के उभरते सितारे गॉट गॉट (Gout Gout,) से हुआ, जो पहले से ही एथलेटिक्स की दुनिया में सबका ध्यान खींच रहे हैं. मोनाको डायमंड लीग में कुजूर ने U-23 200 मीटर दौड़ में हिस्सा लिया और स्प्रिंट प्रतियोगिता में भारत के पहले प्रतिभागी बने. महान मंच से दबाव महसूस करने की बजाय, उन्होंने खुद को प्रेरित किया और दुनिया के कुछ सबसे बड़े उभरते सितारों के साथ पदक जीतने की लड़ाई लड़ी. मुकाबले से डरने की बजाय अनिमेष  कुजूर ने कड़ी मेहनत की (20.55), लेकिन वह पोडियम से महज दसवें सेकेंड से चूक गए. निमेष दक्षिण अफ्रीका के जैक नईम (20.42 सेकेंड) से पीछे रहे.यह समय बहुत मायने रखता है. भारत को आमतौर पर 100 मीटर या 200 मीटर जैसी विश्व स्तरीय स्प्रिंट रेस में कम ही देखा गया है, लेकिन कुजूर  इस सोच को बदल रहे हैं. छत्तीसगढ़ की पूर्वी सीमा से आने वाले कुजूर लगातार रिकॉर्ड बना रहे हैं और भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा में ला रहे हैं. कुजूर वर्ल्ड एथलेटिक्स चैम्पियनशिप के लिए क्वालीफाई कर पाएंगे? हालांकि वर्ल्ड चैम्पियनशिप के लिए सीधे क्वालीफाई करना (100 मीटर में 10.00 सेकें ड और 200 मीटर में 20.16 सेकेंड) मुश्किल लगता है,लेकिन कुजूर रैंकिंग सिस्टम के जरिए क्वालिफाई करने की काबिलियत रखते हैं. फिर भी वह सीधे क्वालिफाई करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, जो उनकी अंदर की जज्बे का प्रमाण है. अनिमेष के कोच ओवेन्स ने, जो इंटरव्यू में उनके साथ थे, मुस्कराते हुए कहा, 'अनिमेष को मेडल या रिकॉर्ड की चाह नहीं है, वो तो मेहनत के साथ अपने आप मिल जाते हैं. वह सिर्फ खुद को बेहतर बनाना चाहता है. इसीलिए ग्रां प्री में आना उसके लिए खास था- ये जानने के लिए कि बड़े खिलाड़ी क्या अलग करते हैं, वो कैसे रहते हैं, और वो क्या-क्या त्याग करते हैं. यह सिर्फ दौड़ने या वजन उठाने की बात नहीं है, इसमें आइसक्रीम खाना छोड़ना पड़ता है, शादियों में नहीं जाना पड़ता है और भी बहुत कुछ छोड़ना होता है.' ओवेन्स का मानना है कि डायमंड लीग में आना और नोआ लाइल्स (100 मीटर) तथा लेट्सिले तेबोगो (200 मीटर) जैसे ओलंपिक चैम्पियनों के साथ रहना, इस युवा एथलीट के लिए सही दिशा में उठाया गया एक अहम कदम था. डायमंड लीग में कुजूर का अनुभव कैसा रहा? रिलायंस फाउंडेशन की ओर से रखे गए इस इंटरव्यू में कुजूर ने कहा, 'मैंने लाइल्स और टेबोगो को देखा, उनके साथ तस्वीरें लीं और उनके वॉर्म-अप रूटीन देखे. मैंने अपने प्रशिक्षण में लागू करने के लिए बहुत कुछ सीखा. भीड़ खचाखच भरी थी, जोश चरम पर था…मैं बस दौड़ना चाहता था.' हालांकि कुजूर ने माना कि वह मोनाको में अपने प्रदर्शन से संतुष्ट नहीं थे. उनका समय 20.55 सेकेंड रहा, जो उनके पर्सनल बेस्ट 20.32 सेकेंड से धीमा था. कोच ओवेन्स ने कहा, 'यह दौड़ तेज हवा (-1.9 मीटर/सेकेंड) के बीच हुई, जिससे सभी प्रतियोगियों की गति धीमी हो गई. इसके अलावा, मोनाको इस सीजन में कुजूर की यूरोप में तीसरी दौड़ थी, और थकान ने उन पर भारी असर डाला.' ओलंपिक चैम्पियनों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर दौड़ने से पहले कुजूर पेशेवर एथलेटिक्स की दुनिया से दूर थे. दरअसल, कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान वह गंभीरता से दौड़ भी नहीं रहे थे. शुरुआत में वह एक फुटबॉल खिलाड़ी थे और कभी-कभी अपने गांव के पास सेना के जवानों के साथ दौड़ लिया करते थे.एक ऐसा इलाका जहां न तो कोई ट्रैक था, न कोच, और न ही किसी अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी को तैयार करने की कोई योजना… यह वो जगह थी, जहां से एक पीढ़ी का सबसे तेज धावक निकल आएगा, ऐसा किसी ने सोचा भी नहीं था. … तो क्या इस सुझाव ने अनिमेष को बड़ा धावक बना डाला? लेकिन जैसा कहा जाता है, हर बड़ी यात्रा एक छोटे से कदम से शुरू होती है. कुजूर के लिए भी वो शुरुआत एक साधारण सुझाव से हुई-'क्यों न तुम एक स्थानीय दौड़ में हिस्सा लो?' जब उन्होंने अपनी पहली दौड़ पूरी की, तो उनके अंदर … Read more

IAS मीणा की सुरक्षा याचिका ठुकराई हाईकोर्ट ने, मणिपुर जाने से इनकार नहीं

जबलपुर  मणिपुर-त्रिपुरा कैडर के आईएएस एमएल मीणा को हाईकोर्ट की जबलपुर बैंच से करारा झटका लगा है. IAS मीणा की वह याचिका निरस्त कर दी गई है, जिसके जरिए उन्होंने अपने मूल कैडर मणिपुर से दूसरे राज्य में ट्रांसफर की मांग की थी. उन्होंने याचिका दायर करते हुए कहा था कि दो विधायकों से मारपीट के कारण उनकी जान को खतरा है. हाईकोर्ट जस्टिस अतुल श्रीधरन व जस्टिस डीके पालीवाल की युगलपीठ ने इस मामले में सुनवाई की. क्या है IAS मीणा का ट्रांसफर मामला? दरअसल, आईएएस अधिकारी एम एल मीणा की ओर से दायर याचिका में अपने मूल कैडर मणिपुर से दूसरे राज्य में ट्रांसफर किए जाने की राहत चाही गई थी. याचिका में कहा गया था कि उनका वर्ष 2006 में मणिपुर में दो विधायकों द्वारा उनके साथ कथित मारपीट की गई थी. मणिपुर में उनकी जान को खतरा है और सुरक्षा कारणों से उन्हें मणिपुर में वापस भेजा जाना अनुचित है. सुनवाई में कोर्ट ने क्या पाया? हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि 2001 बैच के आईएएस अधिकारी मीणा का मूल कैडर मणिपुर-त्रिपुरा है. उनका स्थानांतरण पूर्व में मध्य प्रदेश कर दिया गया था. इसके बाद उन्हें उनके मूल कैडर में वापस भेजने के आदेश जारी किए गए थे. वह विगत चार सालों से ड्यूटी से अनुपस्थित हैं, साल 2020 की आईबी रिपोर्ट में याचिकाकर्ता को मणिपुर में खतरा होने का कोई उल्लेख नहीं किया गया, जिसके बाद कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया. सरकार जिम्मेदारी तय करने के लिए स्वतंत्र युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि सरकार यह तय करने के लिए स्वतंत्र है कि अधिकारी को किस स्थान पर कार्य करना है. युगलपीठ ने याचिकाकर्ता पर कथित हमले के संबंध में प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों पर भी संदेह व्यक्त करते हुए कहा कि याचिका में किसी विधायक के विरुद्ध की गई एफआईआर नंबर, थाना या अन्य विवरण का उल्लेख नहीं किया गया है, जिससे पता चले कि आपराधिक मामला दर्ज भी हुआ था.

कामिका एकादशी: वंश वृद्धि और पितृ तृप्ति का ये है शुभ अवसर

स्कंद पुराण में वर्णन है कि कामिका एकादशी का व्रत करने से मनुष्य अपने सभी पापों से मुक्त हो सकता है, विशेष रूप से क्रोध, ईर्ष्या और छल से जुड़े पापों का नाश होता है। कामिका एकादशी पर किया गया व्रत और दान-पुण्य करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और वंश में शुभता आती है। कामिका एकादशी व्रत करने वालों को विशेष सुझाव इस एकादशी पर तुलसी दल से भगवान विष्णु का पूजन अवश्य करें। शिव-पार्वती की एक साथ पूजा करने से पारिवारिक सुख में वृद्धि होती है। विष्णु सहस्रनाम और शिव चालीसा का पाठ करें। कामिका एकादशी व्रत विधि एक दिन पूर्व (दशमी) को सात्विक भोजन कर लें और काम-क्रोध से बचें। प्रातःकाल स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें। भगवान विष्णु की पूजा करें, विशेष रूप से शंख, चक्र, गदा, पद्मधारी रूप में। तुलसी पत्र, पंचामृत, धूप, दीप से पूजा करें। दिन भर व्रत रखें, निर्जल या फलाहार। रात्रि जागरण करें, भजन-कीर्तन आदि करें। द्वादशी के दिन व्रत का पारण करें, ब्राह्मण को दान-दक्षिणा देकर। कामिका एकादशी दान काले या सफेद तिल का दान करने से पितृ तृप्त होते हैं। इसके अतिरिक्त दूध, दही, घी, फल, चीनी का दान भी किया जा सकता है। कामिका एकादशी व्रत कथा मान्यतानुसार इस एकादशी की कथा श्रीकृष्ण ने धर्मराज को सुनाई थी। इससे पूर्व राजा दिलीप को वशिष्ठ मुनि ने सुनायी थी। जिसे सुनकर उन्हें पापों से मुक्ति प्राप्त हुई। पुराणों के अनुसार, एक बार राजा युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से इस व्रत के महत्व के बारे में पूछा। भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि यह व्रत काम, क्रोध, लोभ और मोह को नष्ट करने वाला है। एक गांव में एक क्रोधित ब्राह्मण ने क्रोधवश एक निर्दोष व्यक्ति की हत्या कर दी। वह ब्रह्महत्या के पाप से बहुत दुखी हुआ। तब उसे एक ऋषि ने कामिका एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। व्रत के प्रभाव से वह ब्राह्मण पापमुक्त हुआ और परम गति को प्राप्त हुआ।

पहचान बदलकर 19 साल तक रही फरार, बैंक घोटाले की आरोपी महिला गिरफ्तार

इंदौर   कहते भी हैं कि आरोपी कितना भी शातिर क्यों न हो, एक न एक दिन वह पुलिस की गिरफ्त में आ ही जाता है. ये बात एक बार फिर साबित हो गई. बेंगलुरु के एक सरकारी बैंक को एक महिला ने अपने पति के साथ मिलकर गच्चा दिया. बैंक को 8 करोड़ की चपत लगाकर दंपती लगातार फरार चल रहे थे. इस दौरान महिला के पति की मौत हो गई. 19 साल से फरार महिला गिरफ्तार महिला ने इसके बाद अपनी फेस सर्जरी करवाई और कई शहरों में छिपी रही. आखिरकार 19 साल से फरार चल रही महिला को सीबीआई नई तकनीक के आधार पर इंदौर से दबोच लिया. उसे बेंगलुरु ले जाया गया है. महिला ने अपनी पहचान छुपाई लेकिन सीबीआई ने इमेज सर्च एनालिटिक्स सॉफ्टवेयर की मदद से सफलता पाई. कंपनी बनाकर लगाया बैंक को चूना मामले के अनुसार धोखाधड़ी का ये मामला 2002 से 2005 के बीच का है. महिला ने अपने पति के साथ मिलकर बेंगलुरु के एक सरकारी बैंक से 8 करोड रुपए की धोखाधड़ी की. 1 अगस्त 2006 को सीबीआई की बेंगलुरु शाखा ने दोनों के खिलाफ शिकायत दर्ज की. मामला दर्ज होते ही दंपती अपनी पहचान छुपाकर रहने लगे. इस दौरान दंपती ने इंदौर को मुख्य अड्डा बनाया. ये महिला उस समय खुद के द्वारा बनाई गई एक कंपनी की डायरेक्टर थी. इसी कंपनी के सीईओ उसके पति रामानुजन मुथुरामलिंगम शेखर थे. नाम बदलकर रहने लगे आरोपी पति-पत्नी इसी कंपनी के नाम पर दंपती ने बैंक को चूना लगाया. धोखाधड़ी के बाद ये दंपती कई शहरों में छुपते रहे. साथ ही इन लोगों ने इंदौर में डेरा डाल लिया. पति ने अपना नाम कृष्ण कुमार गुप्ता और पत्नी ने अपना नाम गीता कृष्ण कुमार गुप्ता रख लिया. वहीं, सीबीआई लगातार दोनों आरोपियों की तलाश कर रही थी. इसी दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपी दंपती इंदौर में रह रहे हैं. इसके बाद जांच पड़ताल की तो जानकारी सही पाई गई. आरोपी महिला को बेंगलुरु की जेल भेजा सीबीआई को ये भी पता चला कि आरोपी महिला के पति रामानुजम की 2008 में मौत हो गई थी. इसके बाद आरोपी महिला ने अपने फेस सर्जरी करवाई और बेफिक्र होकर रहने लगी. लेकिन सीबीआई ने इमेज सर्च एनालिसिस सॉफ्टवेयर और अन्य तकनीक का प्रयोग करते हुए महिला की फोटो का मिलान किया और उसके बाद गिरफ्तार कर लिया. महिला को बेंगलुरु ले जाया गया, वहां पर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. 

KBC 17: अमिताभ बच्चन बने टीवी के सबसे महंगे होस्ट, एक एपिसोड की फीस सुनकर रह जाएंगे दंग

मुंबई बॉलीवुड के कई ऐसे एक्टर्स हैं जो टीवी में कोई शो होस्ट कर रहे हैं. वहीं, अब तक एक्टर सलमान खान को टीवी का सबसे महंगा होस्ट कहा जाता था. लेकिन अब एक सुपरस्टार ने उन्हें इस मामले में मात दे दी है. ये कोई और नहीं सदी के महानायक अमिताभ बच्चन अब क्विज बेस्ड शो केबीसी 17 के लिए करोड़ों चार्ज करने वाले टीवी के हाईएस्ट पेड होस्ट बन गए हैं. केबीसी 17 से कितनी फीस लेंगे अमिताभ बच्चन? मिली जानकारी के मुताबीक, अमिताभ बच्चन क्विज बेस्ड शो केबीसी 17 के लिए प्रति एपिसोड 5 करोड़ रुपये चार्ज कर रहे हैं. केबीसी 17 एक हफ्ते में पांच बार टेलीकास्ट होता है. इसका मतलब है कि अमिताभ बच्चन की हफ्ते भर की फीस 25 करोड़ रुपए है. सलमान खान को मात देकर हाईएस्ट पेड होस्ट बने अमिताभ बच्चन वहीं, अब अमिताभ बच्चन एक्टर सलमान खान को मात देकर भारत में सबसे ज्यादा कमाई करने वाले टीवी होस्ट बन गए हैं. इससे पहले बिग बॉस ओटीटी 2 के दौरान सलमान खान को कथित तौर पर हर वीकेंड का वार एपिसोड के लिए 12 करोड़ रुपए दिए गए थे, यानी उनकी हफ्ते भर की फीस लगभग 24 करोड़ रुपए थी. बिग बॉस 17 कब से होगा टेलीकास्ट बता दें कि सोनी टीवी ने हाल ही में अमिताभ बच्चन का सुंबुल तौकीर के साथ एक प्रोमो वीडियो भी शेयर किया है, जो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है. इसके साथ ही मेकर्स ने शो की रिलीज डेट भी अनाउंस कर दी है. कौन बनेगा करोड़पति का सीजन 17 11 अगस्त से शुरु होने वाला है. ये शो सोमवार से शुक्रवार को रात 9 बजे से सोनी टीवी पर टेलीकास्ट होगा.

प्रशासनिक सेवा से धरातल तक: मंडला में कलेक्टर-मंत्री की अनोखी पहल, लोगों ने की सराहना

मंडला  मध्य प्रदेश की लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपतिया उइके और कलेक्टर सोमेश मिश्रा का अलग अंदाज को देखने मिला. मंत्री और कलेक्टर नैनपुर प्रवास के बाद चिराईडोंगरी पहुंचे. यहां पर शासकीय कृषि प्रक्षेत्र चिरईडोंगरी में खेतिहर मजदूरों द्वारा धान के रोपे लगाए जा रहे थे. कृषकों को देखकर मंत्री संपतिया उइके और कलेक्टर सोमेश मिश्रा उनके बीच जाकर धान की रोपाई करने लगे. वहीं, किसान महिलाओं ने मंत्री और कलेक्टर को अपने बीच पाकर उत्साह से पाटा गीत गाया. इस अवसर पर मंत्री उइके ने कहा कि, ''इस प्रदेश का हर एक किसान अपनी मिट्टी, खेत और फसल से अत्यधिक लगाव रखता है.'' उन्होंने प्रार्थना की कि, ''हम सभी किसानों की फसलें खूब लहलहाएं धन धान्य से परिपूर्ण रहें. कृषि हमारी संस्कृति और परंपरा का अभिन्न हिस्सा है.'' खेती की तकनीकी में आया बदलाव कैबिनेट मंत्री ने कहा, ''हम चाहे किसी भी पद पर क्यों ना पहुंच जायें, अपने इस मूल काम को कभी नहीं छोड़ना चाहिए. यह सीख हमें आने वाली पीढ़ियों को देने की जरूरत है. समय के साथ खेती की तकनीकी में भी बदलाव आया है. पहले हम पारंपरिक तरीके से धान की रोपाई करते थे. अब इसका स्थान पैडी ट्रांसप्लांटर ने ले लिया है. यह खेती का आसान और किफायती तरीका है. किसान भाइयों को अपनी खेती में इनका इस्तेमाल करना चाहिए.'' इसी दौरान कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने पैडी ट्रान्सप्लांटर मशीन चलाकर धान की रोपाई की. मंत्री और कलेक्टर की इस अभिनव पहल की चारों तरफ तारीफ हो रही है. कुम्भार सशक्तिकरण जागरूकता शिविर का आयोजन मंत्री संपतिया उइके ने गुरुवार को नैनपुर के शासकीय स्नातक महाविद्यालय में ग्रामोद्योग विकास योजना के अंतर्गत आयोजित कुम्भार सशक्तिकरण जागरूकता शिविर में सहभागिता की. यह योजना पारंपरिक कुम्भार शिल्प को संरक्षित करने तथा इससे जुड़े कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास है. मंत्री ने कुम्हारों की मिट्टी की कला के महत्व पर प्रकाश डाला और प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले 270 व्यक्तियों को दिए प्रमाण पत्र दिए. शिविर के माध्यम से प्रतिभागियों को आधुनिक उपकरणों, तकनीकों एवं डिज़ाइन नवाचारों की जानकारी दी गई, इससे वे अपनी उत्पादन क्षमता और बाज़ार में प्रतिस्पर्धा बढ़ा सकेंगे. आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बनेगा प्रशिक्षण मंत्री ने कहा, ''यह प्रशिक्षण न केवल उनके आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बनेगा, बल्कि स्वरोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध कराएगा. साथ ही युवाओं को ग्रामोद्योग के माध्यम से स्वावलंबन की प्रेरणा भी मिलेगी.'' कार्यक्रम में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, महाविद्यालय स्टाफ तथा प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे कुम्भार भाई-बहन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे. स्कूल में किया पौधरोपण वहीं कैबिनेट मंत्री संपतिया उइके ने नैनपुर के रेलवे स्कूल प्रांगण में एक साथ 2 हजार पौधे रोपे. शिविर के दौरान माध्यमिक शिक्षा मंडल की बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह देकर मंत्री संपतिया उइके तथा कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने सम्मानित किया. कृषि विभाग की ओर से प्रकाशित की गई लघु धान्य पौष्टिक व्यंजन पत्रिका का विमोचन भी किया गया. मंत्री संपतिया उइके नैनपुर में आयोजित जन शिकायत निवारण शिविर में भी शामिल हुईं. इस दौरान उनके साथ नगर पालिका परिषद अध्यक्ष नैनपुर कृष्णा पंजवानी, कलेक्टर सोमेश मिश्रा, श्रेयांश कूमट मौजूद रहे. सभी ने लोगों की समस्या सुनीं. 

निमिषा प्रिया मामला: बचाव के प्रयासों पर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार का जवाब

नई दिल्ली यमन में मौत की सजा सुनाए जाने के बाद से भारतीय नर्स निमिषा प्रिया के परिजन उनके बचाव में जुटे हैं। अब तक इसे लेकर कोई गुड न्यूज नहीं मिल सकी है, जबकि कई सामाजिक संस्थाएं भी इसमें ऐक्टिव हैं। इस बीच शुक्रवार को एक बार फिर से इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हुई। अदालत में केंद्र सरकार ने कहा है कि फिलहाल निमिषा की सजा को स्थगित कर दिया गया है। उन्हें बचाने के लिए प्रयास जारी हैं। केंद्र सरकार ने कहा कि हम चाहते हैं कि निमिषा प्रिया सकुशल भारत लौट आएं। इस बीच याचिकाकर्ता ने ब्लडमनी के सवाल पर कहा कि पहले तो उन्हें माफी मिल जाए। उसके बाद ही ब्लडमनी की बात होगी। केंद्र सरकार के प्रयासों और उसके जवाब से अदालत भी संतुष्ट दिखी। बेंच ने अब इस केस की अगली सुनवाई 14 अगस्त को करने का फैसला लिया है। कोर्ट ने कहा कि यमन में मौत की सजा का सामना कर रही भारतीय नर्स की सरकार हर संभव मदद कर रही है। बता दें कि निमिषा प्रिया को 16 जुलाई को यमन में सजा-ए-मौत दी जानी थी। केरल के एक ग्रैंड मुफ्ती अबू बकर मुसलियार के माध्यम से सरकार ने मध्यस्थता का एक प्रयास किया था। इसके चलते फिलहाल सजा को टाला गया है। पीड़ित परिवार और निमिषा के परिजनों के बीच डील का मौका इससे मिला है। लेकिन अब तक राहत की खबर का इंतजार ही है। निमिषा प्रिया को उनके बिजनेस पार्टनर रहे तलाल आबदो मेहदी की हत्या का दोषी ठहराया गया है। वहीं निमिषा का पक्ष है कि तलाल आबदो मेहदी उनका उत्पीड़न कर रहा था और उनसे शादी के फर्जी दस्तावेज तक बनवा लिए थे। उनसे बिजनेस में बेजा हक मांग रहा था और उत्पीड़न करते हुए पासपोर्ट तक जब्त कर लिया था। वह पासपोर्ट लेने के लिए ही उससे मिली थीं और उसे ड्रग्स दिया था ताकि मौका पाकर पासपोर्ट ले लें। हालांकि ड्रग्स की ओवरडोज से तलाल की मौत ही हो गई। इसी मामले में निमिषा प्रिया को सजा-ए-मौत दी गई है। हालांकि यमन में ब्लड मनी का एक नियम है, जिसके भरोसे उम्मीद की जा रही है कि उन्हें बचा लिया जाएगा।  

निमिषा प्रिया मामला: बचाव के प्रयासों पर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार का जवाब

नई दिल्ली यमन में मौत की सजा सुनाए जाने के बाद से भारतीय नर्स निमिषा प्रिया के परिजन उनके बचाव में जुटे हैं। अब तक इसे लेकर कोई गुड न्यूज नहीं मिल सकी है, जबकि कई सामाजिक संस्थाएं भी इसमें ऐक्टिव हैं। इस बीच शुक्रवार को एक बार फिर से इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हुई। अदालत में केंद्र सरकार ने कहा है कि फिलहाल निमिषा की सजा को स्थगित कर दिया गया है। उन्हें बचाने के लिए प्रयास जारी हैं। केंद्र सरकार ने कहा कि हम चाहते हैं कि निमिषा प्रिया सकुशल भारत लौट आएं। इस बीच याचिकाकर्ता ने ब्लडमनी के सवाल पर कहा कि पहले तो उन्हें माफी मिल जाए। उसके बाद ही ब्लडमनी की बात होगी। केंद्र सरकार के प्रयासों और उसके जवाब से अदालत भी संतुष्ट दिखी। बेंच ने अब इस केस की अगली सुनवाई 14 अगस्त को करने का फैसला लिया है। कोर्ट ने कहा कि यमन में मौत की सजा का सामना कर रही भारतीय नर्स की सरकार हर संभव मदद कर रही है। बता दें कि निमिषा प्रिया को 16 जुलाई को यमन में सजा-ए-मौत दी जानी थी। केरल के एक ग्रैंड मुफ्ती अबू बकर मुसलियार के माध्यम से सरकार ने मध्यस्थता का एक प्रयास किया था। इसके चलते फिलहाल सजा को टाला गया है। पीड़ित परिवार और निमिषा के परिजनों के बीच डील का मौका इससे मिला है। लेकिन अब तक राहत की खबर का इंतजार ही है। निमिषा प्रिया को उनके बिजनेस पार्टनर रहे तलाल आबदो मेहदी की हत्या का दोषी ठहराया गया है। वहीं निमिषा का पक्ष है कि तलाल आबदो मेहदी उनका उत्पीड़न कर रहा था और उनसे शादी के फर्जी दस्तावेज तक बनवा लिए थे। उनसे बिजनेस में बेजा हक मांग रहा था और उत्पीड़न करते हुए पासपोर्ट तक जब्त कर लिया था। वह पासपोर्ट लेने के लिए ही उससे मिली थीं और उसे ड्रग्स दिया था ताकि मौका पाकर पासपोर्ट ले लें। हालांकि ड्रग्स की ओवरडोज से तलाल की मौत ही हो गई। इसी मामले में निमिषा प्रिया को सजा-ए-मौत दी गई है। हालांकि यमन में ब्लड मनी का एक नियम है, जिसके भरोसे उम्मीद की जा रही है कि उन्हें बचा लिया जाएगा।  

मारपीट केस में सख्ती: हाई कोर्ट ने पुलिस को दिया घायल के फोटो का अनिवार्य आदेश

इंदौर   पुलिस की कार्यप्रणाली अक्सर चर्चा में रहती है. एक बार फिर मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस के काम करने के तरीके पर हैरानी जताई. इंदौर खंडपीठ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि जिस व्यक्ति द्वारा अग्रिम जमानत याचिका पेश की गई है, उसने गंभीर अपराध किया है. इसके बाद भी पुलिस द्वारा सामान्य धाराओं में केस दर्ज किया गया. घायल व्यक्ति की तस्वीरें लेगी पुलिस जिस व्यक्ति के साथ आरोपी पक्ष द्वारा मारपीट की गई, उस फरियादी के गंभीर चोटों से संबंधित फोटो भी पुलिस ने नहीं लिए. हाई कोर्ट जस्टिस सुबोध अभ्यंकर ने डीजीपी को आदेश दिए "मारपीट के मामले में किसी व्यक्ति को चोट लगती है तो पुलिस थाने में उसकी फोटो भी ली जाए. इससे कोर्ट भी देख सके कि जिसने जमानत के लिए अर्जी लगाई है, उस पर किन धाराओं में केस दर्ज हुआ है." गंभीर केस में हल्की धाराएं क्यों लगाईं कोर्ट ने यह भी कहा "मध्य प्रदेश में पुलिस अधिकारियों द्वारा इस तरह के मामलों में रैंकिंग पैटर्न अपना रखा है. गंभीर चोट के मामले में भी हल्की धाराओं में केस दर्ज हो रहे हैं. ऐसे सभी मामलों में पुलिस अधिकारी और डॉक्टर घायल की तस्वीर लेंगे." कोर्ट ने कहा "एक तरफ तो पुलिस पूरे मामले को गंभीर मान रही थी लेकिन इसी मामले में मामूली धाराओं में प्रकरण दर्ज किया." एमएलसी से पूरी तस्वीर साफ नहीं होती अधिवक्ता वरुण रावल के मुताबिक "गंभीर चोट लगने के बाद एमएलसी की जाती है. इस रिपोर्ट में चोट की गंभीरता का जिक्र नहीं किया जाता है. शरीर के जिस हिस्से में चोट लगती है, उसके बारे में लिख दिया जाता है. फोटो अनिवार्य किए जाने से पुलिस और मेडिकल अफसर बंध जाएंगे. वहीं पीड़ित पक्ष के परिजन भी खुद भी फोटो लेकर विकल्प के रूप में साक्ष्य रख सकेंगे, जो उनको सुनवाई के दौरान काफी राहत पहुंचाएंगे." 

iOS 26 अपडेट कब आएगा? iPhone में होंगे ये धमाकेदार बदलाव

नई दिल्ली Apple ने अपनी सालाना डेवलपर्स कॉन्फ्रेंस WWDC 2025 में iOS 26 को पेश किया था. ये अपडेट पुराने iOS वर्जन से बिल्कुल अलग है. डिजाइन से लेकर फीचर्स तक, इसमें कई बड़े बदलाव किए गए हैं. खास बात ये है कि इसमें Apple ने कई AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से जुड़े फीचर्स को भी शामिल किया है, जिससे यूजर एक्सपीरियंस पहले से कहीं ज्यादा स्मार्ट और पर्सनल हो गया है. Apple फिलहाल आईओएस 26 का बीटा वर्जन टेस्ट कर रहा है. खबरों की मानें तो कंपनी इसका पब्लिक बीटा 23 जुलाई 2025 को लॉन्च कर सकती है. इसी दिन Apple iPadOS 26, macOS 26 और watchOS 26 का पब्लिक बीटा वर्जन भी जारी करने वाली है. अगर बात करें फाइनल और स्टेबल वर्जन की, तो उम्मीद है कि Apple इसे सितंबर में iPhone 17 सीरीज की लॉन्चिंग के साथ रिलीज करेगा. हालांकि, कंपनी ने इसकी ऑफिशियल तारीख अभी नहीं बताई है. iOS 26 में क्या-क्या नया मिलेगा? Apple ने आईओएस 26 को एक नए Liquid Glass डिजाइन के साथ पेश किया है, जो देखने में ज्यादा मॉडर्न और ट्रांसपेरेंट है. इसके अलावा यहां जानिए वो टॉप फीचर्स जो इस बार यूजर्स को मिलने वाले हैं:     Apple Intelligence को और भी ज्यादा पावरफुल बनाया गया है, जिससे Siri और दूसरी AI सर्विसेस पहले से बेहतर काम करेंगी.     Messages ऐप में अब यूजर्स को कस्टम बैकग्राउंड, पोल्स बनाने का ऑप्शन, थीम बेस्ड चैट और ग्रुप टाइपिंग इंडिकेटर जैसे नए फीचर्स मिलेंगे.     Phone ऐप में अब कॉल स्क्रीनिंग और होल्ड असिस्ट जैसे स्मार्ट फीचर जुड़ गए हैं.     Apple Music और Maps ऐप्स को भी ज्यादा स्मार्ट बनाया गया है, जिससे डेली टास्क करना आसान हो जाएगा.     फोन की बैटरी बचाने के लिए Adaptive Power Mode जोड़ा गया है, जो चार्जिंग टाइम भी सही-सही बता सकता है. किन iPhone मॉडल्स को मिलेगा iOS 26 अपडेट? अगर आप सोच रहे हैं कि आपका iPhone इस अपडेट के लायक है या नहीं, तो यहां देखें किन डिवाइसेज़ को मिलेगा आईओएस 26:     iPhone SE (2nd जेनरेशन और इसके बाद के मॉडल)     iPhone 12 सीरीज     iPhone 13 सीरीज     iPhone 14 सीरीज     iPhone 15 सीरीज     iPhone 16 सीरीज आईओएस 26 सिर्फ एक छोटा सा सॉफ्टवेयर अपडेट नहीं, बल्कि Apple की तरफ से एक बड़ा टेक्नोलॉजिकल जंप है. नए डिजाइन, स्मार्ट AI फीचर्स और बेहतर बैटरी के साथ ये अपडेट iPhone यूजर्स के लिए काफी कुछ बदलने वाला है. अब देखना ये है कि इसका फाइनल वर्जन कब आता है, और यूजर्स को कैसा अनुभव देता है.